samacharsecretary.com

सीएम योगी ने मथुरा में बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए किया कार्यवाही आदेश

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मथुरा में आई बाढ़ को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाकों के अधिकारियों को राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बाढ़ के समय राहत और बचाव के लिए बेहतर कोऑर्डिनेशन और क्विक एक्शन जरूरी है। कंट्रोल रूम 24×7 काम करें, यह सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री योगी का स्पष्ट संदेश है। लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर नागरिक को संभव मदद मिले। बाढ़ के बीच बीमारी बढ़ती है। राहत शिविरों के लिए स्वास्थ्य टीम गठित करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पशुओं का भी इस दौरान ध्यान रखा जाए।  

मातृत्व अवकाश वेतन विवाद सुलझा: हाईकोर्ट फटकार के बाद संविदा कर्मियों को मिला हक

बिलासपुर उच्च न्यायालय में सोमवार को सुनवाई के दौरान शासन ने कोर्ट को अवगत कराया कि जिला अस्पताल कबीरधाम में कार्यरत संविदा स्टाफ नर्स को मातृत्व अवकाश अवधि का पूरा वेतन भुगतान कर दिया गया है. यह फैसला प्रदेश की हजारों महिला संविदा कर्मचारियों के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है, क्योंकि मामला सीधे तौर पर महिला सम्मान और उनके संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा हुआ था. जानकारी के अनुसार, याचिकाकर्ता स्टाफ नर्स ने 16 जनवरी 2024 से 16 जुलाई 2024 तक मातृत्व अवकाश लिया था, जो विधिवत स्वीकृत हुआ. 21 जनवरी को उन्होंने कन्या संतान को जन्म दिया और 14 जुलाई को पुनः कार्यभार ग्रहण किया. मातृत्व अवकाश की अवधि का वेतन शासन द्वारा नहीं दिया गया, जबकि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (अवकाश) नियम, 2010 में इसका स्पष्ट प्रावधान है. इसी के चलते उन्होंने रिट याचिका और उसके पालन न होने पर अवमानना याचिका दायर की. मामले में न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने पूर्व सुनवाई में ही शासन से कड़े शब्दों में पूछा था कि आदेश के बावजूद वेतन भुगतान क्यों नहीं किया गया. कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि यह मामला केवल आर्थिक अधिकार का नहीं बल्कि महिलाओं के सम्मान और गरिमा से संबंधित है. आज की सुनवाई में शासन की ओर से यह जानकारी दी गई कि याचिकाकर्ता को अब मातृत्व अवकाश की अवधि का वेतन दे दिया गया है. इसके साथ ही अवमानना याचिका का निष्कर्ष निकल आया. याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता श्रीकांत कौशिक ने कहा- “यह केवल एक महिला स्टाफ नर्स की जीत नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की उन महिला संविदा कर्मियों की जीत है, जिन्हें वर्षों से मातृत्व अवकाश वेतन को लेकर संघर्ष करना पड़ रहा था. न्यायालय ने यह साफ कर दिया है कि मातृत्व अवकाश महिला कर्मचारियों का वैधानिक अधिकार है, चाहे उनकी नियुक्ति नियमित हो या संविदा.”

राजद में इस्तीफों का दौर शुरू, चुनाव से पहले जिलाध्यक्ष और प्रधान महासचिव ने छोड़ा पद

मुंगेर बिहार में विधानसभा चुनाव की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे पार्टियों में उलटफेर भी शुरू हो गया है। इस क्रम में राजद को मुंगेर में बड़ा झटका लगा है। राजद के जिलाध्यक्ष त्रिलोकी नारायण शर्मा तथा प्रधान महासचिव संतोष कुमार यादव ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। पत्र जारी कर इस्तीफा प्रदेश अध्यक्ष को भेजा है। इसे लेकर यह कयास लगाया जा रहा है कि वे इन दिनों राजद में अपनी पूछ को घटता देख खुद को अपमानित महसूस कर रहे थे तथा इसके कारण पार्टी नेतृत्व से खफा चल रहे थे। बताते चलें कि पिछले दो बार से राजद ने मुंगेर जिले में केवल एक समुदाय की पार्टी होने का दाग मिटाने के खयाल से पिछड़ा व अति पिछड़ा वर्ग से आने वाले कार्यकर्ता को जिलाध्यक्ष बनाया था। इसके तहत पहले बरियारपुर प्रखंड निवासी देवकीनंदन सिंह को तथा इस बार सदर प्रखंड निवासी त्रिलोकी नारायण शर्मा को जिलाध्यक्ष बनाया था, पर त्रिलोकी नारायण शर्मा के साथ ही पार्टी के प्रधान महासचिव संतोष कुमार यादव ने भी एक साथ इस्तीफा दिया है। इससे कहीं न कहीं यह जरूर लग रहा है कि शायद पार्टी में उन्हें वह सम्मान नहीं मिल रहा था, जो एक जिलाध्यक्ष तथा प्रधान महासचिव को मिलना चाहिए। हालांकि, अंदरखाने से यह बात सामने आ रही है कि 21 अगस्त को कांग्रेस नेता राहुल गांधी तथा नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव वोट अधिकार यात्रा के तहत मुंगेर आने वाले हैं, तथा इस कार्यक्रम को लेकर दोनों ही नेताओं को इसमें उचित स्थान नहीं दिया गया अथवा उन्हें इस कार्यक्रम से दूर रखा गया है।  

राष्ट्रीय शिक्षा नीति चरित्र निर्माण व व्यक्तित्व विकास में सहायक : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के तत्वाधान में तीन दिवसीय कार्यशाला भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि चरित्र निर्माण व व्यक्तित्व विकास में राष्ट्रीय शिक्षा नीति सहायक है। संस्कारित शिक्षा परोपकर का मार्ग प्रशस्ति करती है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली के संयोजकत्व में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि हमारी सबसे बड़ी ताकत भारतीय ज्ञान परंपरा है, जिसके पुनरूत्थान का कार्य करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में समावेश किया गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास कार्यों के साथ सांस्कृतिक व देशहित के महत्वपूर्ण कार्य किये जा रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में समग्र विकास के आयाम निर्धारित किये गये हैं, जो चरित्र निर्माण में अपनी भूमिका निभायेंगे। उन्होंने कहा कि भारत विश्वगुरू बनने के मार्ग पर अग्रसर हैं। तीन दिवसीय कार्यशाला में नैतिक आधार के समावेश के साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा के गहन चिंतन का लाभ रीवा के विद्यार्थी व प्रबुद्धजन ले पायेंगे। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयोजक अतुल कोठारी ने कहा कि नई शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान परंपरा एवं पंचकोष के सिद्धांत का समावेश किया गया है, जिससे समग्र विकास संभव हो सके। जरूरत है कि विद्यार्थी इसका अध्ययन करें और अपनी भूमिका तय करें। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूल आधार एकाग्रता है। नवीन शिक्षा नीति में समग्र विकास के आयाम, निर्धारित किये गये हैं। कुलगुरू प्रो. राजेन्द्र कुमार कुड़रिया ने कहा कि राष्ट्रीय संस्कृति उत्थान न्यास शिक्षा बचाओ अभियान का नेतृत्व करता है। कार्यशाला में स्मारिका एवं संकल्प पत्र का विमोचन किया गया। विधायक मनगवां इंजी. श्री नरेन्द्र प्रजापति, श्री ओम शर्मा, प्रो. सुनील तिवारी, कुल सचिव श्री सुरेन्द्र सिंह परिहार, श्री अजय तिवारी विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, विद्यार्थी तथा प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।  

टोल वसूली पर सुप्रीम कोर्ट का फटकारा, खराब रोड पर पैसे लेने पर आपत्ति

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को NHAI यानी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से पूछा कि अगर केरल के त्रिशूर में 65 किलोमीटर लंबे राजमार्ग को तय करने में 12 घंटे लगते हैं, तो किसी यात्री को 150 रुपये के टोल (शुल्क) का भुगतान करने के लिए क्यों कहा जाए। प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने यह टिप्पणी एनएचएआई और टोल वसूलने का अधिकार रखने वाली कंपनी ‘गुरुवायूर इंफ्रास्ट्रक्चर’ द्वारा दायर याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए की। याचिका में त्रिशूर के पलियेक्कारा टोल प्लाजा पर टोल संग्रह पर रोक लगाने के केरल उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई है। सीजेआई ने कहा, 'अगर किसी व्यक्ति को सड़क के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने में 12 घंटे लगते हैं, तो उसे 150 रुपये क्यों देने चाहिए? जिस सड़क पर एक घंटे का समय लगने की उम्मीद है, उसमें 11 घंटे और लगते हैं और उन्हें टोल भी देना पड़ता है।' सुनवाई के दौरान पीठ को सप्ताहांत में इस मार्ग पर लगभग 12 घंटे तक यातायात जाम रहने की जानकारी दी गई। उच्च न्यायालय ने छह अगस्त को राष्ट्रीय राजमार्ग 544 के एडापल्ली-मन्नुथी खंड की खराब स्थिति और निर्माण कार्यों के कारण उत्पन्न गंभीर यातायात जाम के आधार पर टोल निलंबन का आदेश दिया था। एनएचएआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और टोल वसूल करने का अधिकार रखने वाली कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने कहा, 'हम हर पहलू पर विचार करेंगे, आदेश सुरक्षित रखेंगे।' न्यायमूर्ति चंद्रन ने कहा कि जिस दुर्घटना के कारण यह सड़क अवरुद्ध हुई, वह महज 'दैवीय कृत्य' नहीं था, जैसा कि मेहता ने तर्क दिया, बल्कि एक ट्रक के गड्ढे में गिर जाने के कारण हुई थी। मेहता ने कहा कि जहां अंडरपास का निर्माण कार्य चल रहा था, वहां एनएचएआई ने सर्विस रोड उपलब्ध कराई थी, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि मॉनसून की बारिश ने निर्माण कार्य की गति धीमी कर दी है। उन्होंने एक उदाहरण भी दिया जिसमें टोल को निलंबित करने के बजाय आनुपातिक रूप से कम करने का सुझाव दिया गया था। वहीं, गुरुवायूर इंफ्रास्ट्रक्चर ने कहा कि उसने 60 किलोमीटर का क्षेत्र अपने नियंत्रण में रखा है और उसने सर्विस रोड की रुकावटों के लिए ‘पीएसजी इंजीनियरिंग’ सहित तीसरे पक्ष के ठेकेदारों को दोषी ठहराया। दीवान ने उच्च न्यायालय के फैसले को 'बेहद अनुचित' बताते हुए कहा, 'जब मैं दूसरों को सौंपे गए काम के लिए जिम्मेदार नहीं हूं, तो मेरी आय का स्रोत नहीं रोका जा सकता। मुझे सिर्फ 10 दिनों में ही 5-6 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।' पीठ ने कहा कि टोल वसूली का अधिकार रखने वाली कंपनी को उच्च न्यायालय ने एनएचएआई के खिलाफ नुकसान का दावा करने की अनुमति दे दी है। दीवान ने कहा कि यह अपर्याप्त है, क्योंकि दैनिक रखरखाव लागत जारी है और राजस्व वसूली रुक गई है। शीर्ष अदालत ने 14 अगस्त को टोल वसूली पर रोक लगाने संबंधी उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने के प्रति अनिच्छा जताई थी। उच्च न्यायालय ने छह अगस्त को टोल वसूली को चार सप्ताह के लिए स्थगित करने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि जब राजमार्ग का रखरखाव ठीक से नहीं हो रहा है और यातायात जाम बहुत अधिक है, तो वाहन चालकों से टोल नहीं वसूला जा सकता। उच्च न्यायालय ने फैसले में कहा था कि जनता और एनएचएआई के बीच संबंध 'जन विश्वास' का है और सुचारू यातायात प्रवाह बनाए रखने में विफलता ने उस विश्वास को भंग किया है।  

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन पर तीन दिवसीय लेखनशाला 19 अगस्त से

भोपाल राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत जेण्डर रिसोर्स सेण्टर की एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) तैयार करने के लिए तीन दिवसीय राष्ट्रीय लेखन शाला 19 से 21 अगस्त तक भोपाल में आयोजित की जा रही है। लेखन शाला का शुभारंभ पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल करेंगे। इस अवसर पर राज्यमंत्री श्रीमती राधा सिंह भी उपस्थित रहेंगी। लेखन शाला में संयुक्त सचिव भारत सरकार, ग्रामीण विकास विभाग श्रीमती स्मृति शरण सहित 20 राज्यों के आजीविका मिशन प्रबंधन इकाई के सदस्य भाग लेंगे। मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती हर्षिका सिंह सहित आजीविका मिशन की टीम भी उपस्थित रहेगी।  

PWD इंजीनियर के बेटे का डेम में हुआ लापता, दोस्तों से पूछताछ शुरू

रायगढ़ छत्तीसगढ़ रायगढ़ जिला मुख्यालय में बीती रात डेम में नहाने उतरा पीडब्ल्यूडी के सब इंजीनियर का बेटा अचानक लापता हो गया। घटना की सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस और नगर सेना की टीम मौके पर पहुंची और लापता युवक के पतासाजी में जुट गई है। साथ ही सुशांत के दोस्तों से पूछताछ की जा रही है। जानकारी के अनुसार, बीती रात दो बजे के आसपास अपने दोस्तों पुरेन्द्र सिंह और अविनाश सारथी के साथ कार में सवार होकर लाखा डेम के पीछे तरफ गए पीडब्ल्यूडी के सब इंजीनियर डीके प्रधान का बेटा सुशांत प्रधान 24 साल, छोटे अतरमुड़ा निवासी, केलो डेम से अचानक लापता हो गया। इस घटना की जानकारी मिलते ही सिटी कोतवाली थाना प्रभारी सुखनंदन पटेल अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचकर युवक की पतासाजी में जुट गए हैं। बताया जा रहा है कि बीती रात सुशांत प्रधान अपने दो दोस्तों के साथ केलो डेम के पास किसी काम के सिलसिले में गया हुआ था, जहां सुशांत नहाने के लिए पानी में उतरा था और अचानक वह गायब हो गया। काफी खोजबीन के बाद सुशांत के नहीं मिलने पर उसके दोस्तों ने सिटी कोतवाली थाना पहुंचकर उक्त मामले की जानकारी दी है। आशंका जताई जा रही है कि युवक डेम के गहरे पानी में डूब गया होगा। बहरहाल, सुशांत के दोनों दोस्तों से पुलिस पूछताछ कर रही है।

प्रदेश का गौरव बढ़ाया छिंदवाड़ा की सरपंच श्रीमती कविता धुर्वे ने

स्वच्छ भारत मिशन में उत्कृष्ट कार्यों के लिये मिला राष्ट्रीय सम्मान भोपाल  "सफलता की कहानी" स्वतंत्रता दिवस पर दिल्ली के लाल किले में आयोजित समारोह में छिन्दवाड़ा जिले की जनपद पंचायत जुन्नारदेव की जनजातीय बहुल ग्राम पंचायत खुमकाल की सरपंच श्रीमती कविता शनिराम धुर्वे ने विशिष्ट अतिथि का गौरव पाकर पूरे मध्यप्रदेश को गौरवान्वित किया है। श्रीमती धुर्वे पर आज छिंदवाड़ा के साथ संपूर्ण प्रदेश गर्व कर रहा है। श्रीमती कविता धुर्वे का यह सम्मान न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि जनजातीय बहुल क्षेत्र से महिलाओं की सशक्त पहचान का भी प्रतीक है। राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान से जनजातीय समाज में गर्व और खुशी की लहर है। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री श्री के.आर. पाटिल तथा मंत्रालय की प्रमुख सचिव सुश्री देवोलीना मुखर्जी की उपस्थिति में उन्हें स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत किए गए प्रेरणादायक नवाचारों और उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मान पत्र प्रदान किया गया। खुमकाल सरपंच श्रीमती धुर्वे ने अपनी ग्राम पंचायत में स्वच्छता को जनआंदोलन बनाने में पूरी ताकत झोंक दी। उनके द्वारा ग्राम पंचायत खुमकाल में विभिन्न नवाचार किये गये। उनके द्वारा ‘कबाड़ से जुगाड़’ की थीम पर जनसहयोग से स्वच्छता पार्क तैयार किया गया, जिसमें स्वच्छ भारत मिशन की टीम का विशेष योगदान रहा। ग्राम आराडोंगरी को ओडीएफ प्लस मॉडल गांव के रूप में विकसित करने के लिए चौपाल, ग्राम सभा एवं गृह भेंटों के माध्यम से जनजागरूकता अभियान चलाया गया। ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए कम्पोज्ड पिट, प्लास्टिक संग्रहण यूनिट, सॉकपिट और मैजिक पिट का निर्माण कराया गया। सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त ग्राम की दिशा में कार्य करते हुए ग्रामीणों को कपड़े के थैले वितरित किए गए। सरपंच श्रीमती कविता धुर्वे के नवाचारों को ग्रामीणों के साथ ही छिंदवाड़ा जिला प्रशासन का भी पूरा-पूरा सहयोग मिला। नवाचारों को मिले प्रोत्साहन से महिला सरपंचों को नवाचार के लिए प्रेरणा मिली।  

AMU कुलपति नियुक्ति मामले में जज ने लिया अलग रुख, सुनवाई से हटे

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने सोमवार को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) की कुलपति के रूप में प्रोफेसर नईमा खातून की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। चीफ जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ मुजफ्फर उरुज रब्बानी द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें नईमा की नियुक्ति को बरकरार रखा गया था। वह संस्थान के इतिहास में इस पद पर आसीन होने वाली पहली महिला हैं। कोर्ट को बताया गया कि नईमा अपने पति का महत्वपूर्ण वोट पाकर कुलपति (वीसी) बनीं। उस समय उनके पति एएमयू के कुलपति थे। याचिकाकर्ता ने पति द्वारा अपनी पत्नी के पक्ष में दिए गए वोट को ''हितों का टकराव'' बताया। चीफ जस्टिस ने कहा कि आदर्श रूप से कुलपति को नियुक्ति प्रक्रिया में भाग नहीं लेना चाहिए था, बल्कि संस्थान के सबसे वरिष्ठ सदस्य को इसमें भाग लेने देना चाहिए था। जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने सुनवाई से खुद को किया अलग बहरहाल, जस्टिस चंद्रन ने इसी तरह की चयन प्रक्रिया में एक विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में अपनी पिछली भूमिका का हवाला देते हुए मामले से खुद को अलग करने की पेशकश की। उन्होंने कहा, ''जब मैंने फैजान मुस्तफा का चयन किया था, तब मैं सीएनएलयू (कंसोर्टियम आफ नेशनल ला यूनिवर्सिटी) का कुलाधिपति था..इसलिए मैं खुद को सुनवाई से अलग कर सकता हूं।'' जस्टिस चंद्रन को फैसला करने दें- चीफ जस्टिस इस पर सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ''हमें (जस्टिस चंद्रन पर) पूरा भरोसा है। सुनवाई से अलग होने की कोई जरूरत नहीं है। आप पूरी तरह से फैसला कर सकते हैं।'' बहरहाल, चीफ जस्टिस ने कहा, ''मेरे भाई (जस्टिस चंद्रन) को फैसला करने दें। इस मामले को उस पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करें जिसका हिस्सा जस्टिस चंद्रन नहीं हैं।'' यह याचिका अब एक अलग पीठ के समक्ष जाएगी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने चयन प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाया।  

ED की कार्रवाई तेज: शराब घोटाले में चैतन्य बघेल की फिर से न्यायिक रिमांड, कल होगी कस्टडी पर बहस

रायपुर  छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में गिरफ्तार पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की 14 दिन की न्यायिक रिमांड अवधि समाप्त होने पर आज उन्हें विशेष कोर्ट में पेश किया। जहां से उन्हें तीसरी बार 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। मामले में अब 1 सितंबर को सुनवाई होगी। मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चैतन्य बघेल को 5 दिन की कस्टोडियल रिमांड पर लेने के लिए अदालत में आवेदन लगाया है। ईडी का कहना है कि जांच में नए तथ्य सामने आए हैं और इन पर पूछताछ करना जरूरी है। हालांकि अदालत में कंडोलेंस (श्रद्धांजलि कार्यक्रम) होने की वजह से आज सुनवाई नहीं हो सकी। अब ईडी के आवेदन पर कल यानी 19 अगस्त को सुनवाई होगी। 21 जुलाई को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) रायपुर जोनल कार्यालय की ओर से प्रेस नोट में दी गई जानकारी के अनुसार, ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को उनके जन्मदिन 18 जुलाई को भिलाई निवास से धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया है। शराब घोटाले की जांच ईडी ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस घोटाले के कारण प्रदेश के खजाने को भारी नुकसान हुआ और करीब 2,500 करोड़ रुपये की अवैध कमाई (पीओसी) घोटाले से जुड़े लाभार्थियों की जेब में पहुंचाई गई। चैतन्य को शराब घोटाले से 16.70 करोड़ रुपये नगद मिले ईडी की जांच से पता चला है कि चैतन्य बघेल को 16.70 करोड़ रुपये की पीओसी प्राप्त हुई थी। उन्होंने उक्त पीओसी को मिलाने के लिए अपनी रियल एस्टेट फर्मों का इस्तेमाल किया था। यह पता चला है कि उन्होंने पीओसी की उक्त नकद राशि का उपयोग अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के विकास में किया था। पीओसी का उपयोग उनके प्रोजेक्ट के ठेकेदार को नकद भुगतान, नकदी के खिलाफ बैंक प्रविष्टियों आदि के माध्यम से किया गया था। उन्होंने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के साथ भी मिलीभगत की और अपनी कंपनियों का उपयोग एक योजना तैयार करने के लिए किया जिसके अनुसार उन्होंने त्रिलोक सिंह ढिल्लों के कर्मचारियों के नाम पर अपने “विठ्ठलपुरम प्रोजेक्ट” में फ्लैटों की खरीद की आड़ में अप्रत्यक्ष रूप से 5 करोड़ रुपये प्राप्त किए। बैंकिंग ट्रेल है जो इंगित करता है कि लेन-देन की प्रासंगिक अवधि के दौरान, त्रिलोक सिंह ढिल्लों ने अपने बैंक खातों में शराब सिंडिकेट से भुगतान प्राप्त किया। 1000 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति का संचालन इसके अलावा, उन पर शराब घोटाले से उत्पन्न 1000 करोड़ रुपये से अधिक के पीओसी (POC) को संभालने का भी आरोप है। वह छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन कोषाध्यक्ष को पीओसी हस्तांतरित करने के लिए अनवर ढेबर और अन्य के साथ समन्वय करते थे। ईडी द्वारा की गई जांच से पता चला है कि इस शराब घोटाले से प्राप्त धनराशि को आगे निवेश के लिए बघेल परिवार के प्रमुख सहयोगियों को भी सौंप दिया गया था। इस धनराशि के अंतिम उपयोग की आगे जांच की जा रही है। पहले से गिरफ्त में हैं कई बड़े चेहरे ईडी ने इससे पहले पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लों, अनवर ढेबर, ITS अरुण पति त्रिपाठी और पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक कवासी लखमा को इस मामले में गिरफ्तार किया था। फिलहाल, मामले में आगे की जांच जारी है। ED की कार्रवाई के खिलाफ चैतन्य ने HC में लगाई याचिका गौरतलब है कि पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल ने सुप्रीम कोर्ट में ED द्वारा उनकी गिरफ्तारी और हिरासत की कार्रवाई को चुनौती देते हुए याचिका लगाई थी। याचिका में चैतन्य ने कहा था कि उनकी हिरासत गैरकानूनी है और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए उन्हें पहले हाई कोर्ट जाने की सलाह दी थी। इसके बाद उन्होंने बिलासपुर हाई कोर्ट में ED की कार्रवाई के खिलाफ याचिका लगाई, जिस पर 12 अगस्त को हाई कोर्ट ने सुनवाई की और ईडी को नोटिस जारी कर 26 अगस्त तक जवाब मांगा है। जेल अधीक्षक को भी दिए निर्देश चैतन्य बघेल के वकील ने कोर्ट में बताया कि चैतन्य को जेल में पीने के लिए साफ पानी तक नहीं मिल रहा। जिस पर कोर्ट ने जेल अधीक्षक को निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 26 अगस्त को होगी।