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CSE की रिपोर्ट में शहरी भारत में ओजोन प्रदूषण में खतरनाक वृद्धि, स्वास्थ्य और खेती पर बुरा असर

नई दिल्ली भारत के बड़े शहरों जैसे कोलकाता, बेंगलुरु, मुंबई, हैदराबाद और चेन्नई में इस गर्मी (2025) में जमीन के स्तर पर ओजोन प्रदूषण ने खूब सिर उठाया है. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, इन शहरों में ओजोन का स्तर कई दिनों तक 8 घंटे के मानक से ज्यादा रहा. यह प्रदूषण इतना खतरनाक है कि यह लोगों के स्वास्थ्य और खेती पर बुरा असर डाल रहा है. इस समस्या को समझते हैं और जानते हैं कि क्या करना जरूरी है.  क्या है ओजोन प्रदूषण? ओजोन एक गैस है जो तीन ऑक्सीजन अणुओं से बनती है. ऊंचे आसमान में यह हमें सूरज की हानिकारक किरणों से बचाती है, लेकिन जमीन के पास यह प्रदूषण बन जाता है. यह सीधे किसी स्रोत से नहीं निकलता, बल्कि वाहनों, उद्योगों और बिजलीघरों से निकलने वाली नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) के सूरज की रोशनी में रासायनिक प्रतिक्रिया से बनता है. यह गैस बहुत प्रतिक्रियाशील होती है. हवा में लंबी दूरी तक फैल सकती है, जिससे यह शहरों से लेकर गांवों तक को प्रभावित करती है. शहरों में ओजोन का हाल CSE की रिपोर्ट के मुताबिक, इस गर्मी (मार्च-मई 2025) में कई शहरों में ओजोन का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया. दिल्ली की रिपोर्ट पहले ही जारी हो चुकी है, इसलिए इस अध्ययन में उसे शामिल नहीं किया गया. आइए, बाकी शहरों की स्थिति देखें…     बेंगलुरु: इस गर्मी में 92 दिनों में से 45 दिन ओजोन का स्तर मानक से ज्यादा रहा, जो पिछले साल की तुलना में 29% की बड़ी बढ़ोतरी है. होमबेगोड़ा नगर सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र रहा.     मुंबई: 92 दिनों में 32 दिन ओजोन स्तर बढ़ा, जो पिछले साल की तुलना में 42% कम है. चकाला सबसे प्रभावित इलाका रहा.     कोलकाता: 22 दिन ओजोन स्तर बढ़ा, जो पिछले साल की तुलना में 45% कम है. रवींद्र सरोवर और जादवपुर हॉटस्पॉट बने.     हैदराबाद: 20 दिन ओजोन स्तर बढ़ा, जो पिछले साल की तुलना में 55% कम है. बोल्लारम सबसे ज्यादा प्रभावित रहा.     चेन्नई: 15 दिन ओजोन स्तर बढ़ा, जो पिछले साल शून्य था. आलंदुर सबसे प्रभावित क्षेत्र रहा. इन शहरों में ओजोन का स्तर सिर्फ गर्मियों में नहीं,बल्कि सर्दियों और अन्य मौसमों में भी बढ़ रहा है, खासकर गर्म जलवायु वाले इलाकों में. ओजोन के हॉटस्पॉट और असर हर शहर में कुछ खास इलाके हैं जहां ओजोन का स्तर सबसे ज्यादा बढ़ता है. इन हॉटस्पॉट्स में प्रदूषण का असर और गंभीर होता है. ओजोन सांस की नली को नुकसान पहुंचाता है. अस्थमा और दमा जैसी बीमारियों को बढ़ाता है. बच्चों, बुजुर्गों व सांस की बीमारी वालों के लिए खतरनाक है. यह फसलों को भी नुकसान पहुंचाता है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ता है. क्यों बढ़ रहा ओजोन प्रदूषण? ओजोन का बढ़ना मौसम और प्रदूषण स्रोतों पर निर्भर करता है. गर्मी और सूरज की रोशनी इसकी रासायनिक प्रतिक्रिया को तेज करती है. वाहन, उद्योग, कचरा जलाना और ठोस ईंधन का इस्तेमाल इसके मुख्य कारण हैं. दिलचस्प बात यह है कि जहां नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) ज्यादा होता है, वहां ओजोन कम बनता है, लेकिन साफ इलाकों में यह जमा हो जाता है . समाधान क्या हो? CSE की अनुमिता रॉयचौधरी कहती हैं कि अगर इसे नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह गंभीर स्वास्थ्य संकट बन सकता है.इसके लिए जरूरी कदम हैं…     सख्त कदम: वाहनों, उद्योगों और कचरा जलाने से निकलने वाली गैसों को कम करना होगा. शून्य उत्सर्जन वाहन और साफ ईंधन को बढ़ावा देना जरूरी है.     निगरानी बढ़ाएं: ओजोन के स्तर को मापने के लिए और स्टेशन लगाने चाहिए, ताकि हॉटस्पॉट्स की पहचान हो सके.     क्षेत्रीय योजना: ओजोन एक क्षेत्रीय प्रदूषण है, इसलिए स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर मिलकर काम करना होगा.     जागरूकता: लोगों को इस प्रदूषण के बारे में बताना और साफ हवा के लिए कदम उठाने के लिए प्रेरित करना जरूरी है. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि वर्तमान में, अपर्याप्त निगरानी, सीमित आँकड़े और अप्रभावी प्रवृत्ति विश्लेषण विधियों ने इस बढ़ते जन स्वास्थ्य जोखिम को समझने में बाधा डाली है। जमीनी स्तर पर ओज़ोन की जटिल रासायनिक संरचना इसे एक ऐसा प्रदूषक बनाती है जिसका पता लगाना और उसे कम करना मुश्किल है। ओज़ोन की अत्यधिक विषाक्त प्रकृति के कारण, राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक केवल अल्पकालिक जोखिम (एक घंटे और आठ घंटे के औसत) के लिए निर्धारित किया गया है, और अनुपालन इन मानकों से अधिक दिनों की संख्या के आधार पर मापा जाता है। शोधकर्ताओं ने रेखांकित किया कि इसके लिए शीघ्र कार्रवाई आवश्यक है। इस पत्र में कहा गया है कि वाहनों, उद्योगों और अन्य स्रोतों से निकलने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन को रोकने के लिए कड़े नियमों की आवश्यकता है। इसमें भारत में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया है। इसमें कहा गया है, "कार्ययोजना के सह-लाभों को अधिकतम करने के लिए कण प्रदूषण, ओज़ोन और NOx जैसी इसकी पूर्ववर्ती गैसों के संयुक्त नियंत्रण हेतु कार्यनीति को तत्काल परिष्कृत किया जाना चाहिए।"  

इंदौर-खंडवा रेल परियोजना को लेकर एक बड़ी खुशखबरी, वन विभाग की NOC, दक्षिण भारत से सीधी कनेक्टिविटी

इंदौर इंदौर-खंडवा रेल परियोजना को लेकर एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। इस महत्वपूर्ण रेल लाइन के लिए वन विभाग ने अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी कर दिया है, जिससे परियोजना की सबसे बड़ी बाधा दूर हो गई है। अब इस रेल मार्ग के निर्माण को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा। यह रेल लाइन उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोड़ने वाला सबसे छोटा और सीधा मार्ग होगी, जो न केवल इंदौर के व्यापारिक और औद्योगिक विकास को नई गति देगी, बल्कि यात्रियों के लिए समय और दूरी की बचत भी करेगी। यह परियोजना मालवांचल के लिए एक नया युग शुरू करने वाली है, जो क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को गति देगी।  यह रेल लाइन उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोड़ने वाला सबसे छोटा और सीधा रेल मार्ग साबित होगी, जो न केवल इंदौर के व्यापारिक और औद्योगिक भविष्य को नई रफ्तार देगा, बल्कि यात्रियों को भी समय और दूरी दोनों में राहत देगी। इंदौर के सांसद शंकर लालवानी ने इस प्रोजेक्ट में आने वाली अड़चनों को दूर करने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। उन्होंने रेलवे अधिकारियों और वन विभाग के बीच संयुक्त बैठक करवाई थी, जिससे आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं सरल हुईं। इसके बाद हाल ही में सांसद लालवानी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर इस परियोजना की प्राथमिकता को रेखांकित किया और वन विभाग से अनुमति दिलवाने का अनुरोध किया था। इंदौर-खंडवा रेल लाइन के पूरा होने के बाद इंदौर का संपर्क सीधे खंडवा-भुसावल-नासिक-मुंबई की ओर तथा तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों से तेज़, किफायती और सुविधाजनक सफर हो जाएगा। इस रेल कॉरिडोर से मालवांचल के व्यापारियों, किसानों और यात्रियों सभी को लाभ मिलेगा। सांसद ने बताया कि यह रेल मार्ग मालवांचल और दक्षिण भारत के बीच सीधी व बेहतर कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहद अहम है। बढ़कर 80 किमी हो जाएगी इंदौर-खंडवा की दूरी इंदौर से खंडवा की दूरी मीटरगेज में पहले 48 किमी थी, लेकिन अब बढ़कर 80 किमी हो जाएगी। ब्रॉडगेज का ट्रैक बनाने के लिए पातालपानी के पहले घूमकर ट्रेन बलवाड़ा पहुंचेगी, जिससे 32 किमी की दूरी बढ़ गई है। हालांकि इस ट्रैक के बनने से इंदौर की दक्षिण भारत के शहरों बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई व उत्तर भारत के जयपुर, अजमेर शहरों तक सीधी पहुंच होगी। अभी इन शहरों तक जाने के लिए घूमकर जाना पड़ता है। इंदौर खंडवा अकोला ब्रॉडगेज हो जाने से उत्तर और दक्षिण को जोड़ने वाला सबसे छोटा रूट होगा। इससे आम लोगों के समय की बचत होगी। रेलवे का मुनाफा बढ़ेगा। एक दशक से इंदौर से खंडवा रेल कनेक्टिविटी खत्म हो चुकी एक दशक से इंदौर से खंडवा के बीच रेल कनेक्टिविटी खत्म हो गई है। पूर्व में यहां पर मीटरगेज लाइन थी, जो महू से पातालपानी, कालाकुंड, बलवाड़ा, चौरल होकर खंडवा तक जाती थी। अब ब्रॉडगेज लाइन महू से पातालपानी के पहले घूमकर बलवाड़ा तक जा रही है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण 32 किमी का घुमाव है, जिसमें 454 हेक्टेयर जमीन वन विभाग की आ रही है। ट्रैक में महू और बड़वाह तहसील की अधिकांश भूमि जमीन आ रही है। उस पर ट्रैक डालने के लिए रेलवे लंबे समय से अनुमति मांग रहा था। दक्षिण भारत से सीधी कनेक्टिविटी का सपना होगा साकार इंदौर-खंडवा रेल लाइन के पूरा होने के बाद इंदौर का सीधा संपर्क खंडवा, भुसावल, नासिक और मुंबई के साथ-साथ तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों से हो जाएगा। यह रेल कॉरिडोर मालवांचल के व्यापारियों, किसानों और यात्रियों के लिए तेज, किफायती और सुविधाजनक यात्रा का विकल्प प्रदान करेगा। सांसद लालवानी ने बताया कि यह रेल मार्ग मालवांचल और दक्षिण भारत के बीच बेहतर कनेक्टिविटी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। एक दशक से बंद थी रेल कनेक्टिविटी   पिछले एक दशक से इंदौर और खंडवा के बीच रेल कनेक्टिविटी बंद थी। पहले यहां मीटरगेज लाइन थी, जो महू से पातालपानी, कालाकुंड, बलवाड़ा और चौरल होते हुए खंडवा तक जाती थी। अब ब्रॉडगेज लाइन के लिए महू से पातालपानी के पहले घूमकर बलवाड़ा तक ट्रैक बनाया जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण 32 किमी का घुमाव है, जिसमें 454 हेक्टेयर वन विभाग की जमीन शामिल है। रेलवे लंबे समय से इस जमीन पर ट्रैक बिछाने की अनुमति मांग रहा था, जो अब मिल गई है।        

एचडीएफसी बैंक पहली बार देने जा रहा बोनस शेयर, मिलेगा डबल गिफ्ट

नई दिल्ली  भारत के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC बैंक के निवेशकों के लिए बड़ी खबर है। बैंक ने कहा है कि उनका बोर्ड 19 जुलाई को एक मीटिंग करने वाला है। इस मीटिंग में पहली बार बोनस शेयर जारी करने और फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए स्पेशल डिविडेंड देने पर विचार किया जाएगा। बैंक ने कहा है कि बोनस शेयर जारी करने का फैसला नियमों के अनुसार होगा। इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी भी जरूरी होगी। अभी तक बैंक ने बोनस शेयर के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी है। Trendlyne के डेटा के अनुसार अगर HDFC बैंक बोनस शेयर जारी करता है, तो यह पहली बार होगा। बोनस शेयर का मतलब है कि कंपनी अपने शेयरधारकों को मुफ्त में अतिरिक्त शेयर देगी। यह एक तरह से कंपनी की तरफ से शेयरधारकों को तोहफा होगा। बोनस शेयर के साथ-साथ बोर्ड 2025-26 के वित्तीय वर्ष के लिए स्पेशल डिविडेंड पर भी विचार करेगा। डिविडेंड का मतलब है कि कंपनी अपने मुनाफे का कुछ हिस्सा शेयरधारकों को देगी। पहली बार बोनस शेयर देने की तैयारी! बैंक के इतिहास में यह पहली बार होगा जब वह अपने निवेशकों को बोनस शेयर देने की योजना बना रहा है. इस संभावित घोषणा की खबर आते ही शेयर बाजार में तेजी देखी गई. बुधवार के कारोबारी सत्र में एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) का शेयर करीब 1% बढ़कर ₹2,022 के स्तर पर पहुँच गया. बोनस के साथ विशेष लाभांश? एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) की 19 जुलाई को होने वाली बोर्ड मीटिंग सिर्फ बोनस शेयरों तक ही सीमित नहीं है. बैंक विशेष अंतरिम लाभांश पर भी विचार करेगा. अगर दोनों प्रस्तावों को मंजूरी मिल जाती है, तो निवेशकों को एक साथ दोहरा तोहफा मिलने की संभावना है. शेयर में सकारात्मक तेजी, वॉल्यूम में उछाल बुधवार को शेयर का ट्रेडिंग वॉल्यूम 23,92,100 तक पहुंच गया, जिससे साफ जाहिर है कि बाजार में एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है. बोनस शेयर और लाभांश की संभावना अल्पावधि में इस शेयर को और मजबूत बना सकती है. 2025 में अब तक 22% रिटर्न, भरोसा कायम एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के शेयर ने साल 2025 में अब तक 22% से ज़्यादा रिटर्न दिया है. पिछले तीन महीनों में इस शेयर में लगभग 6% की वृद्धि और एक महीने में 3% का सकारात्मक रिटर्न देखने को मिला है. इससे पता चलता है कि मजबूत बुनियादी बातों के साथ यह शेयर लगातार निवेशकों को आकर्षित कर रहा है. मार्केट कैप में शीर्ष पर: बैंकिंग क्षेत्र की रानी ₹15.30 लाख करोड़ से ज्यादा के मार्केट कैप के साथ, एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) न केवल भारत में बल्कि एशिया में भी सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक है. यह निवेशकों के लिए एक विश्वसनीय और स्थिर विकल्प बना हुआ है. शेयर की कीमत एचएफडीसी बैंक ने पहले ही बता दिया था कि उसके कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए शेयर बाजार में ट्रेडिंग 21 जुलाई, 2025 तक बंद रहेगी। यह नियम इसलिए है ताकि कोई भी अंदरूनी जानकारी का गलत इस्तेमाल न कर सके। बैंक के इस नियम को शेयर डीलिंग कोड कहा जाता है। बैंक की वेबसाइट के मुताबिक उसके निवेशकों की संख्या 41,21,815 है। बैंक में विदेशी निवेशकों की करीब 41 फीसदी हिस्सेदारी है। HDFC बैंक के शेयर की बात करें तो पिछले एक साल में इसके शेयर में 23.01% की बढ़ोतरी हुई है। इस साल की शुरुआत से अब तक इसमें 11.94% की तेजी आई है। पिछले छह महीनों में शेयर 21.46% बढ़ा है। पिछले तीन महीनों में 6.99% और पिछले एक महीने में 4.07% की बढ़ोतरी हुई है। HDFC बैंक ने पिछले 12 महीनों में 22 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड दिया है। बीएसई पर आज बैंक का शेयर कारोबार के दौरान करीब 1 फीसदी तेजी के साथ 2021.90 रुपये तक गया। इसका 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 2,027.40 रुपये है।  

गुरुवार 17 जुलाई 2025 बदल जाएगी इन राशियों की किस्मत

मेष राशि- आज आपकी एनर्जी में कमी रहेगी। आपको बेवजह ज्यादा खर्च करने से खुद को रोकना चाहिए, नहीं तो पैसों की तंगी हो सकती है। जीवनसाथी का भरपूर सहयोग मिलेगा। सिंगल जातकों की लाइफ में किसी खास शख्स की एंट्री हो सकती है। व्यापारिक रूप से स्थिति अच्छी रहने वाली है। वृषभ राशि- आज आपको बेकार के तनाव से बचना चाहिए। मानसिक रूप से आप पहले से बेहतर महसूस करेंगे। आर्थिक परेशानयां दूर होंगी। परिवार के साथ अच्छा समय बिताएंगे। व्यापार में उन्नति मिल सकती है। यात्रा के योग हैं। कार्यस्थल पर उच्चाधिकारियों के सहयोग से तरक्की मिल सकती है। मिथुन राशि- आज आपके आत्मविश्वास और ऊर्जा में वृद्धि रहेगी। किसी को पैसा उधार नहीं दें, वापसी में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं। लव लाइफ पहले से बेहतर होगी। अपनों का साथ मिलेगी। रोमांटिक यात्रा पर जाने का योग है। व्यापारियों को लाभ होगा। कर्क राशि- आज आपको किसी सुखद समाचार की प्राप्ति हो सकती है। दिन लाभकारी रहने वाला है। आपकी पैसों की स्थिति में सुधार होगा। अपने खर्चों को सीमित करें। नौकरी में बदलाव की प्लानिंग बना रहे लोगों के लिए आज का दिन बायोडाटा अपडेट करने के लिए अच्छा है। आप अपने महत्वपूर्ण कार्यों को पूरा करके व्यस्तता के बीच अपने लिए समय जरूर निकालेंगे। सिंह राशि- आज घर में मेहमान का आगमन हो सकता है। व्यापारिक व आर्थिक रूप से दिन बहुत फायदेमंद नहीं है- इसलिए अपनी पैसों की स्थिति को चेक करें और अपने खर्चों को सीमित करें। जरूरी टास्कों को पूरा करने के लिए कार्यस्थल पर वर्क लिस्ट बनाएं। परिवार के साथ अच्छा समय बिताएंगे। कन्या राशि- आज आपको भ्रम और निराशा से बचना चाहिए। आर्थिक रूप से आप मजबूत रहेंगे। आपको पैसा माता-पिता का स्वास्थ्य चिंता का कारण बन सकता है। शादीशुदा लाइफ में कई खूबसूरत मोड़ आएंगे। व्यापारियों को विस्तार के अवसर मिलेंगे। विदेश यात्रा का प्लान बन सकता है। तुला राशि- स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत अच्छा दिन है। मन प्रसन्न रहेगा। माता-पिता के सहयोग से किसी महत्वपूर्ण कार्य में सफलता पा सकते हैं। कार्यस्थल पर डेडलाइन का ध्यान रखें। ऑफिस में लोग आपके प्रयासों के लिए आपको पहचानेंगे। परिवार की कुछ समस्याएं आपको मानसिक तनाव दे सकती हैं। आर्थिक रूप से दिन सामान्य रहने वाला है। वृश्चिक राशि- आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए अपने खर्चों को रिव्यू करें। कार्यस्थल पर किसी प्रोजेक्ट में कंफ्यूजन होने पर सीनियर्स की सलाह पर ध्यान दें। आज आपको अपने ईगो को पीछे रखना चाहिए। जीवनसाथी के साथ एक रोमांटिक शाम बिता सकते हैं। व्यापार में उतार-चढ़ाव बने रहेंगे। धनु राशि- मानसिक शांति के लिए योग या ध्यान करें। अपने लिए पैसे बचाने का आपका विचार आज पूरा हो सकता है। आज आप उचित बचत करने में सफल रहेंगे। कार्यस्थल पर आज सब कुछ आपके पक्ष में नजर आ रहा है। आपके परिवार का कोई सदस्य आज आपके साथ कुछ समय बिताने की जिद कर सकता है। मकर राशि- आपके व्यक्तित्व में निखार आएगा। जो लोग अपने करीबी या रिश्तेदारों के साथ मिलकर अपना कारोबार संभाल रहे हैं उन्हें आज बहुत सतर्क रहने की जरूरत है। आपको जीवनसाथी का साथ मिलेगा। आर्थिक रूप से आप अच्छी स्थिति में रहेंगे। मित्रों के सहयोग से किसी काम में सफलता मिल सकती है। कुंभ राशि- आज आपको कई तनावों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे आप बेचैनी महसूस कर सकते हैं। आज उन लोगों को अपना पैसा उधार देने से बचें जिन्होंने अभी तक पिछली रकम नहीं लौटाई है। जीवनसाथी के साथ पर नजर रखें। आज आपके पास अपनी कमाई की शक्ति बढ़ाने के लिए सहनशक्ति और जानकारी होगी। व्यापारिक रूप से आप अच्छी स्थिति में रहेंगे। मीन राशि- आज आपकी मेहनत मनवांछित परिणाम पा सकती है। अपने मौजूदा उत्साह को बरकरार रखने के लिए कड़ी मेहनत करते रहें। आपका पैसा आपके काम तभी आता है जब आप खुद को फिजूलखर्ची करने से रोकते हैं। दोस्तों का सहयोग आपके लिए व्यापारिक रूप से फायदेमंद हो सकता है।

दो नए एक्सप्रेसवे और ई-चार्जिंग स्टेशन से सजेगा यूपी, जानिए किन जिलों को होगा फायदा

आगरा  उत्तर प्रदेश के आगरा शहर को दो नए-नए एक्सप्रेस का तोहफा मिला है। इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राष्ट्रीय भारतीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बड़ा फैसला लेते हुए ग्वालियर और अलीगढ़ एक्सप्रेसवे को मंजूरी दी है। इन दोनों एक्सप्रेस का निर्माण दो महीने में शुरू हो जाएगा, जो अगले लगभग दो साल तक चलेगा। आगरा के लिए अच्छी बात यह है कि दोनों एक्सप्रेसवे यहीं से शुरू होंगे। इन दोनों एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले लोगों के लिए दोनों तरफ फूड प्लाजा, एक से दो प्रेट्रोल पंप और सीएनजी पंप होंगे।   एक्सप्रेसवे पर मिलेगी चार्जिंग की सुविधा एनएचएआई ने मौजूदा समय में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में हो रही बढ़ोतरी को भी ध्यान रखा है और एक्सप्रेसवे पर चार्जिंग स्टेशन बनाने का फैसला किया है। एनएचएआई के अधिकारी ने खुद इसका कारण भी बताया है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन का प्रयोग करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और हर सप्ताह नए-नए मॉडल पेश हो रहे हैं। यही वजह है कि हमने एक्सप्रेसवे चार्जिंग स्टेशन लगाने का फैसला किया गया है। बताया गया है कि एक चार्जिंग प्वॉइंट में एक समय में दो वाहन चार्ज हो सकेंगे, जिसमें 15 से 20 मिनट का समय लगेगा। छह लेन के होंगे दोनों एक्सप्रेसवे दोनों एक्सप्रेसवे छह लेन के होंगे, जिनका निर्माण एनएचएआई ग्वालियर और आगरा खंड द्वारा कराया जाएगा। ग्वालियर से रोहता, आगरा तक एक्सप्रेसवे के निर्माण पर 4200 करोड़ रुपये का खर्चा आएगा। इस दौरान चंबल नदी पर हैंगिंग ब्रिज भी बनेगा। जब एक्सप्रेसवे बनकर तैयार हो जाएगा तो आगरा से ग्वालियर की दूरी सिर्फ 88 किलोमीटर रह जाएगी, साथ ही सफर का समय भी घटकर सिर्फ डेढ़ घंटे का रह जाएगा। इस समय इस सफर को तय करने में ढाई घंटे लगते हैं। अलीगढ़ एक्सप्रेसवे की लागत 3400 करोड़ बात करें खंदौली से अलीगढ़ तक बनने वाले एक्सप्रेसवे की तो यह 64 किलोमीटर लंबा होने वाला है, जिसे यमुना एक्सप्रेस से भी जोड़ा जाएगा। जब यह बनकर तैयार हो जाएगा तो इससे लोगों को हाथरस और अलीगढ़ पहुंचना आसान हो जाएगा। इस एक्सप्रेसवे की लागत 3400 करोड़ बताई जा रही है, जिसका निर्माण अक्टूबर से शुरू होना है।

AEPC का अनुमान: जापान से भारत के वस्त्र क्षेत्र में बड़े निवेश की उम्मीद

नई दिल्ली  एईपीसी ने कहा कि कपड़ा उद्योग में भारत और जापान की कंपनियों के बीच सहयोग बढ़ाने के व्यापक अवसर मौजूद हैं। परिधान क्षेत्र में व्यापार के अवसरों का पता लगाने के लिए दोनों देशों की कंपनियों के बीच कई बैठकें हुईं। भारतीय उद्योग जापानी गुणवत्ता मानदंडों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। कपड़ा उद्योग में भारत और जापान की कंपनियों के बीच सहयोग बढ़ाने का सुनहरा अवसर मौजूद हैं। टोक्यो की कंपनियां भारत में निवेश करने की इच्छुक हैं। परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) ने बुधवार को यह बात कही।    दोनों देशों के बीच हुई बैठक एईपीसी के अध्यक्ष सुधीर सेखरी ने कहा कि परिधान क्षेत्र में व्यापार के अवसरों का पता लगाने के लिए दोनों देशों की कंपनियों के बीच कई बैठकें हुईं। टोक्यो में इंडिया टेक्स ट्रेंड फेयर (आईटीटीएफ) में कई घरेलू कंपनियां भाग ले रही हैं। जापानी गुणवक्ता मानदंडों को पूरा करने के लिए भारत प्रतिबद्ध उन्होंने कहा कि हमने जापान से सोर्सिंग बढ़ाने और भारत में अधिक निवेश करने को कहा है। यूनिक्लो, एडास्ट्रिया, टोरे, इटोकिन कंपनी, ब्रोक जापान, डाइसो, वाईकेके और पेगासस जैसे प्रमुख ब्रांडों के साथ हमारी सफल बैठकें हुई हैं। भारतीय उद्योग जापानी गुणवत्ता मानदंडों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। सेखरी ने कहा कि हम अपने सभी जापानी साझेदारों को भारतीय प्रदर्शकों के साथ जुड़ने, सहयोगात्मक संभावनाओं का पता लगाने, पसंदीदा सोर्सिंग गंतव्य के रूप में भारत की ताकत और विश्वसनीयता का प्रत्यक्ष अनुभव करने के लिए आमंत्रित करते हैं। वस्त्र मंत्री ने किया मेले का उद्धघाटन इस मेले का उद्घाटन वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने टोक्यो में किया। यह एक प्रमुख वस्त्र कार्यक्रम है। इसका आयोजन भारतीय दूतावास, वस्त्र मंत्रालय, एईपीसी और जापान-भारत उद्योग संवर्धन संघ (जेआईआईपीए) के सहयोग से किया जाता है। भारत के पास मजबूत आधार मौजूद सरकार घरेलू वस्त्र विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है, जैसे सात पीएम मित्र पार्क। परिषद ने कहा शुल्क मुक्त व्यापार, मजबूत स्थायित्व संबंधी साख और लचीला विनिर्माण क्षेत्र इसके लिए मजबूत आधार हैं। जापानी परिधान बाजार में अमेरिका का बड़ा हिस्सा  हालांकि, गुणवत्ता मानकों (विशेष रूप से एमएमएफ में) को प्राप्त करना, व्यापार प्रक्रियाओं को सरल बनाना, और जापानी अनुपालन मानदंडों का पालन करना। साथ ही अमेरिका के 35 अरब डॉलर के जापानी परिधान बाजार में अधिक हिस्सेदारी हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण है। 2024 में जापान को भारत का परिधान निर्यात 234.5 मिलियन डॉलर का था। पिछले साल टोक्यो ने लगभग 23 अरब डॉलर मूल्य के इन सामानों का आयात किया था। इसमें भारत की हिस्सेदारी केवल एक प्रतिशत है। 

‘जेल भेजने आए थे, खुद हैं जमानत पर’ — राहुल पर सीएम सरमा की सीधी चोट

गुवाहाटी  राहुल गांधी ने असम दौरे पर कांग्रेस नेताओं से कहा कि हिमंत बिस्वा सरमा को जेल भेजा जाएगा। इस पर असम के सीएम सरमा ने पलटवार करते हुए कहा कि खुद राहुल गांधी देशभर में कई मामलों में जमानत पर हैं। उन्होंने राहुल को तंज कसते हुए असम की मेहमाननवाजी का आनंद लेने की सलाह दी। असम की राजनीति में गर्मी बढ़ गई है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी के असम दौरे पर दिए गए कथित बयान को लेकर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने तीखा पलटवार किया है। सरमा ने एक्स पर राहुल गांधी के बंद कमरे में बोले गए कथित बयान का जिक्र करते हुए कहा कि जो खुद देशभर में कई मामलों में जमानत पर हैं, वो दूसरों को जेल भेजने की बात कर रहे हैं। यह टिप्पणी कांग्रेस की असम में रणनीतिक बैठक के बाद सामने आई है। राहुल गांधी असम दौरे पर थे, जहां उन्होंने कांग्रेस की राज्य स्तरीय राजनीतिक मामलों की समिति के साथ एक बंद बैठक की। इस बैठक में उन्होंने कथित रूप से कहा कि लिख कर ले लीजिए, हिमंत बिस्वा सरमा को जेल जरूर भेजा जाएगा। सरमा खुद को ‘राजा’ समझते हैं, लेकिन असम की जनता उन्हें भ्रष्टाचार के लिए जेल भेजेगी। राहुल ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार को घोटालों का जवाब देना होगा। वहीं, मुख्यमंत्री सरमा ने इस बयान को राहुल की दुर्भावना और राजनीतिक प्रतिशोध की भावना बताया। सात ही उन्होंने इसे राजनीतिक मंच का दुरुपयोग कहा। सीएम हिमंत का पलटवार हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी के बयान का जवाब एक्स पर एक पोस्ट के जरिए दिया। उन्होंने लिखा कि राहुल गांधी बड़े आराम से भूल गए कि वे स्वयं देशभर में दर्ज कई आपराधिक मामलों में जमानत पर हैं। सरमा ने राहुल को तंज कसते हुए असम की मेहमाननवाजी का आनंद लीजिए। इसके साथ ही आगे उन्होंने कहा कि केवल मुझे जेल भेजने की बात कहने के लिए राहुल गांधी असम आए हैं। कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग इस बयानबाजी के बाद असम की राजनीति में गर्मी बढ़ गई है। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी और भाजपा के मुख्यमंत्री सरमा के बीच यह तकरार सीधे तौर पर दोनों दलों की रणनीति और विचारधारा को सामने रखती है। कांग्रेस राज्य में भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार और तानाशाही के आरोप लगाती रही है, जबकि भाजपा कांग्रेस को परिवारवाद और कानूनी मामलों में घिरा हुआ बताती है। क्या हैं राहुल गांधी के खिलाफ केस? मुख्यमंत्री सरमा के बयान के मुताबिक, राहुल गांधी देश के कई हिस्सों में आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं और इन मामलों में उन्हें जमानत मिली हुई है। इसमें सबसे चर्चित मामला 'मोदी सरनेम' टिप्पणी वाला है, जिसमें मानहानि का आरोप लगा और उन्हें दो साल की सजा भी सुनाई गई थी, हालांकि बाद में सजा पर रोक लगी और उन्हें जमानत मिली।  इतना ही नहीं राहुल गांधी पर और भी मामले दर्ज हैं।  

सड़क पर उतरीं ममता बनर्जी, कहा- अगर हिम्मत है तो भेजो मुझे डिटेनशन सेंटर

कोलकाता  पश्चिम बंगल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को भाजपा शासित राज्यों में बंगाली बोलने वाले लोगों के साथ हो रहे कथित उत्पीड़न के खिलाफ विरोध मार्च निकाला। इस दौरान ममता ने कहा कि वो आगे से अब बंगाली ही बोलेंगी। यह रैली कोलकाता के कॉलेज स्क्वायर से शुरू होकर धर्मतला के दोरीना क्रॉसिंग तक गई, जिसमें टीएमसी महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता इस रैली में शामिल हुए। लगभग तीन किलोमीटर लंबे इस मार्च के लिए पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। करीब 1,500 पुलिसकर्मी तैनात किए गए और कई सड़कों पर ट्रैफिक डायवर्ट किया गया। विरोध मार्च के दौरान सीएम ममता बनर्जी ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बंगालियों के प्रति भाजपा के रवैये से मैं शर्मिंदा और निराश हूं। सीएम ने कहा कि मैंने अब से ज्यादा बांग्ला में बोलने का फैसला किया है, अब इसके लिए अगर हो सके तो मुझे हिरासत शिविरों में बंद कर दो।  

कांग्रेस का हमला तेज: बालासोर केस को लेकर ओडिशा सरकार पर इस्तीफा देने का दबाव

भुवनेश्वर  कांग्रेस ने बालासोर की घटना पर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी का इस्तीफा मांगा है। इसके साथ राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की गई है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस महिला विंग की अध्यक्ष अलका लांबा बुधवार को भुवनेश्वर पहुंचीं, जहां उन्होंने मीडिया से बात करते हुए सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। अलका लांबा ने आरोप लगाया कि भाजपा नेतृत्व वाली सरकार के तहत ओडिशा महिलाओं के लिए असुरक्षित होता जा रहा है। उन्होंने छात्रा की मौत के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया। साथ ही घटना को प्रशासनिक असफलता व जवाबदेही की कमी का नतीजा बताया। अलका लांबा ने कहा कि राज्य मशीनरी पूरी तरह असफल हो गई है। एक लड़की को न्याय मांगने के लिए खुद को आग लगानी पड़ी। मीडिया से बातचीत में अलका लांबा ने कहा, "आज हकीकत यह कहती है कि पूरा ओडिशा बर्बादी की ओर बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री (मोहन चरण माझी) अनुभवहीन हैं। यह एक साल में फेल साबित हुए हैं। इन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।" उन्होंने कहा, "जब कानून-व्यवस्था चरमरा जाए, अपराधी खुलेआम घूमें और पीड़ित न्याय के इंतजार में दम तोड़ दें, तब मुख्यमंत्री का इस्तीफा देना जरूरी होता है। हम उनका तुरंत इस्तीफा मांगते हैं और ओडिशा में राष्ट्रपति शासन लागू करने का आग्रह करते हैं।" अलका लांबा ने कथित तौर पर छात्रा के इलाज में देरी और प्रशासन की ओर से तुरंत कार्रवाई न करने की भी निंदा की। उन्होंने कहा, "उसे (छात्रा) समय पर इलाज से बचाया जा सकता था। जब एक बच्ची जल रही थी, तब व्यवस्था मूकदर्शक बनी रही।" कांग्रेस की महिला नेता ने जानकारी दी कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी बालासोर का दौरा कर सकते हैं। उन्होंने कहा, "राहुल गांधी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए छात्रा के पिता से बात की। पिता भावुक थे, राहुल गांधी ने उन्हें विश्वास दिलाया कि तब तक न्याय नहीं मिल जाता है कांग्रेस उनके साथ खड़ी है। राहुल गांधी दोबारा लौटेंगे और प्रियंका गांधी भी आएंगी।" उन्होंने कहा कि ओडिशा के सभी अभिभावकों को हम विश्वास दिलाने आए हैं कि आप अकेले नहीं हैं। कांग्रेस न्याय का हक मिलने तक साथ खड़ी है। इस दौरान अलका लांबा ने राज्य की जनता से 17 जुलाई को 'ओडिशा बंद' में हिस्सा लेने की अपील की।

पहली सवारी में संकरे पड़े गए मार्ग, प्रशासन के लिए यह है बड़ा अलर्ट, सवारी मार्ग का चौड़ीकरण जरूरी

उज्जैन  श्रावण के पहले सोमवार को राजाधिराज महाकाल की निकली भव्य सवारी के दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने यह साफ कर दिया है कि मौजूदा सवारी मार्ग इस विशाल जनसमूह के दबाव को सहने में सक्षम नहीं है। समय आ गया है कि अब बिना कोई देरी किए महाकाल सवारी मार्ग को मास्टर प्लान अनुसार 15 से 24 मीटर चौड़ा किया जाए। भीड़, अव्यवस्था और सीमित मार्ग की वजह से श्रद्धालुओं को जो कठिनाई हुई, वह प्रशासन के लिए चेतावनी से कम नहीं है। स्थितियों को देख शासन-प्रशासन ने इस मार्ग को चौड़ा करने का काम प्राथमिक सूची में शामिल कर लिया है। मालूम हो कि महाकाल सवारी मार्ग केवल एक रास्ता नहीं, यह आस्था की वह धारा है जिससे उज्जैन की सांस्कृतिक, धार्मिक और विकास की दिशा जुड़ी है। अब जबकि सिंहस्थ की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, तो इस मार्ग को उसकी गरिमा के अनुरूप बनाना समय की मांग है। प्रदेश सरकार, इसी वर्ष अप्रैल में इस कार्य के लिए 64 करोड़ रुपये स्वीकृत कर चुकी है, लेकिन अब तक ठेकेदार तय करने को निविदा प्रक्रिया तक शुरू नहीं हो सकी है। इस विषय पर पिछले सप्ताह महापौर मुकेश टटवाल ने योजना को तेजी से लागू करने के निर्देश नगर निगम के अधिकारियों को दिए थे। उनका ‘नईदुनिया’ से कहना है कि महाकाल सवारी मार्ग को अब उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड नहीं, बल्कि नगर निगम खुद अपने स्तर पर विस्तृत कार्य योजना बनाकर क्रियान्वित करेगा। यह काम उनकी प्राथमिकता में पहले भी था, आज भी है और भविष्य में भी रहेगा। 4.3 किलोमीटर लंबे महाकाल सवारी मार्ग को मास्टर प्लान-2035 में 15 से 24 मीटर चौड़ा करने का लेख है। चौड़ीकरण के लिए सरकार 64 करोड़ रुपये अप्रैल में मंजूर कर चुकी है। स्पष्ट किया है कि मार्ग में डिवाइडर नहीं बनाएंगे। मार्ग में आने वाली ऐतिहासिक धरोहरों को फसाड़ लाइट से आकर्षक स्वरुप दिया जाएगा। बिजली, पानी और सीवरेज की सभी लाइनें भूमिगत की जाएंगीं। चौराहों को त्रिशूल, डमरू, नंदी जैसी कलाकृतियों से सजाया जाएगा। 2023 में बनी थी 110 करोड़ की योजना, विरोध के कारण काम नहीं हुआ महाकाल सवारी मार्ग काे चौड़ा करने को 110 करोड़ रुपये की योजना वर्ष 2023 में उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने बनाई थी। सर्वे में 2500 भवन प्रभाव में आना चिह्नित किए थे। एक हिस्से का काम शुरू भी हुआ था, लेकिन विरोध और न्यायालय में याचिका के चलते काम आगे न बढ़ा और बंद हो गया। अब जब महाकुंभ सिंहस्थ-2028 निकट है, तो शासन इस कार्य को पुनः पूर्ण करने को तत्पर है। जन सुरक्षा और सुविधा की दृष्टि से बेहतर जरूरी श्रावण और भादौ मास में हर सोमवार को भगवान महाकाल की सवारी को देखने लाखों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। भविष्य में सिंहस्थ जैसे आयोजनों में करोड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं की आमद तय मानी जा रही है। ऐसे में सवारी मार्ग का चौड़ीकरण यातायात, सुरक्षा और सुविधा तीनों ही दृष्टि से बेहद आवश्यक हो गया है।