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JSSC ने जारी किया एग्जाम शेड्यूल, 510 भर्तियों के साथ JPSC और JET पर भी अहम खबर

रांची. झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने झारखंड क्षेत्रीय कार्यकर्ता प्रतियोगिता परीक्षा-2024 की तिथि घोषित कर दी है। यह लिखित परीक्षा पांच जुलाई केा राज्य के विभिन्न केंद्रों पर आयोजित होगी। आयोग के अनुसार, परीक्षा से संबंधित प्रवेश पत्र डाउनलोड करने के लिए लिंक आयोग के वेबसाइट पर जून माह के अंतिम सप्ताह में उपलब्ध कराया जाएगा। अभ्यर्थी उक्त लिंक के माध्यम से अपना प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकेंगे। अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र डाक अथवा किसी भी अन्य माध्यम से उपलब्ध नही कराया जाएगा। आयोग ने परीक्षा में सम्मिलित होनेवाले अभ्यर्थियों को सुझाव दिया है कि परीक्षा से संबंधित सुचिता को बरकरार रखेंगे तथा किसी प्रकार के कदाचार संबंधी प्रयास में शामिल नहीं होंगे। अन्यथा दोषी पाए जाने पर झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय) अधिनियम, 2023 की सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। बताते चलें कि इस परीक्षा के माध्यम से क्षेत्रीय कार्यकर्ता के कुल 510 पदों पर नियुक्ति होनी है। 14 जून को होगी जेट व उड़िया की परीक्षा झारखंड पात्रता परीक्षा (जेट) के तहत शिक्षा तथा उड़िया विषय की परीक्षा 14 जून होगी। झारखंड लोक सेवा आयाेग ने साेमवार को परीक्षा की तिथि की घोषणा कर दी। यह परीक्षा उक्त तिथि को सुबह 10 बजे से अपराह्न एक बजे तक रांची में आयोजित की जाएगी। आयोग के अनुसार, उक्त दोनों विषयों के लिए अभ्यर्थी प्रवेश पत्र एवं उपस्थिति पत्रक 10 जून से आयोग की वेबसाइट से डाउनलोड कर सकेंगे। बता दें कि पूर्व में इन दोनों की परीक्षा निर्धारित तिथि 26 अप्रैल को नहीं हो सकी थी।

मरीजों के लिए राहतभरी खबर, बठिंडा अस्पताल में लगी आधुनिक एक्स-रे और OPG मशीनें

बठिंडा. शहीद भाई मनी सिंह सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाने बड़ा कदम उठाया गया है। अस्पताल प्रशासन ने करीब 50 लाख की लागत से अत्याधुनिक डिजिटल रेडियोग्राफी (डीआर) एक्स-रे मशीन और आर्थोपेंटोमोग्राम (ओपीजी) मशीन खरीदी है। दोनों मशीनें अस्पताल पहुंच चुकी हैं और इन्हें स्थापित कर शुरू कर दिया गया है। अस्पताल में प्रतिदिन करीब 1800 से 2000 मरीज ओपीडी में उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें से लगभग 400 से 500 मरीजों को एक्स-रे जांच की आवश्यकता होती है। मौजूदा समय में अस्पताल में उपलब्ध एकमात्र डिजिटल एक्स-रे मशीन पर अत्यधिक दबाव होने के कारण प्रतिदिन केवल 350 मरीजों की ही जांच हो पाती है। इसके चलते कई मरीजों को घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता है, जबकि कई बार उन्हें अगले दिन आने की सलाह भी दी जाती है। सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. अरूण बांसल का कहना है कि नई डीआर मशीन लगने के बाद अस्पताल में दो डिजिटल एक्स-रे मशीनें उपलब्ध होगी है। इससे जांच क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और मरीजों को समय पर जांच सुविधा मिल सकेगी। नई मशीन अत्याधुनिक तकनीक से लैस है, जिससे शरीर के अंदरूनी हिस्सों की उच्च गुणवत्ता वाली और स्पष्ट तस्वीरें प्राप्त होंगी। इससे हड्डियों के सूक्ष्म फ्रैक्चर समेत कई अन्य बीमारियों की पहचान पहले से अधिक सटीकता के साथ की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि नई डीआर मशीन की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि इसमें रेडिएशन का स्तर अपेक्षाकृत कम होता है। इससे मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी और जांच प्रक्रिया अधिक भरोसेमंद बनेगी। साथ ही डिजिटल तकनीक के कारण रिपोर्ट तैयार होने में भी कम समय लगेगा। पहली बार मिलेगी ओपीजी जांच की सुविधा अस्पताल में पहली बार ओपीजी मशीन की स्थापना की गई है। दंत चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह सुविधा दांतों और जबड़ों से संबंधित बीमारियों के निदान में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। अब तक सरकारी अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों का सहारा लेना पड़ता था। निजी संस्थानों में ओपीजी जांच के लिए मरीजों को 800 से 1000 रुपये तक खर्च करने पड़ते थे। नई मशीन शुरू होने के बाद यह सुविधा सरकारी अस्पताल में ही उपलब्ध होगी, जिससे मरीजों का आर्थिक बोझ कम होगा। साथ ही जांच रिपोर्ट भी महज पांच से दस मिनट में प्राप्त हो सकेगी। ओपीजी मशीन के माध्यम से दांतों की सड़न, संक्रमण, जबड़े की हड्डियों की स्थिति, ट्यूमर, अक्ल दाढ़ की समस्या, टेढ़े-मेढ़े दांतों तथा रूट कैनाल ट्रीटमेंट (आरसीटी) से जुड़ी जटिलताओं का सटीक आकलन किया जा सकेगा। इससे दंत रोगों के उपचार में तेजी आएगी और चिकित्सकों को बेहतर उपचार योजना बनाने में मदद मिलेगी। रोजाना 120 तक मरीजों को होगा लाभ अस्पताल के डेंटल विभाग में प्रतिदिन 100 से 120 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ओपीजी मशीन शुरू होने के बाद इन मरीजों को जांच के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। समय और धन दोनों की बचत होगी तथा एक ही परिसर में जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। अस्पताल प्रशासन के अनुसार नई मशीनों के संचालन से रेडियोलॉजी और डेंटल विभाग की सेवाओं में गुणात्मक सुधार आएगा। मरीजों की लंबी कतारें कम होंगी, जांच रिपोर्ट जल्दी उपलब्ध होगी और गंभीर रोगों की पहचान समय रहते संभव हो सकेगी। इससे सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों का भरोसा दोनों मजबूत होंगे।

बहसबाजी पड़ी भारी, पीएम आवास योजना राशि मामले में जनपद CEO निलंबित

दुर्ग. सरल लेकिन सख्त मुख्यमंत्री विष्णु देव के सुशासन में एक बार फिर से कड़ा एक्शन देखने को मिला है. दुर्ग जिले के सुशासन तिहार में भाजपा नेता के साथ ‘तेरे को जो करना है कर ले’ कहते हुए बहसबाजी करने वाले जनपद सीईओ पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. मामला संज्ञान में आने के बाद मुख्यमंत्री साय ने कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे. जनपद सीईओ रूपेश पांडे को जारी नोटिस का जवाब असंतोष पाए जाने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. महेंद्र कुमार जांगड़े को उनके वर्तमान दायित्वों के साथ जनपद पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. जानकारी के मुताबिक, थनौद गांव में सुशासन तिहार 2026 के जनसमस्या समाधान शिविर में सामुदायिक भवन की राशि जारी जारी करने को लेकर भाजपा नेता पहुंचे थे. उनका कहना था कि पूर्व सरपंच के कार्यक्रम में सामुदायिक भवन का निर्माण किया जा रहा था, जिसपर भाजपा नेता ने स्टे लगाया था. ऐसे में वर्तमान सरपंच की कार्यकाल में राशि क्यों जारी की गई. हालांकि इस मामले में सीईओ का कहना था कि स्टे हटने चुका था, जिस कारण राशि जारी की. सुशासन तिहार में भाजपा के दुर्ग ग्रामीण मंडल महामंत्री पुराण देशमुख और जनपद सीईओ रूपेश पांडे के बीच बहस शुरू हुई. देखते ही देखते तीखी बहस होने लगी. इस दौरान जनपद सीईओ ने भाजपा कार्यकर्ता को उंगली दिखाते हुए कहा कि, “तेरे को जो करना है कर ले”. हैरानी की बात रही कि पूरा घटनाक्रम विवाद दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर के सामने हुआ. मामले में जनपद सीईओ को नोटिस जारी किया गया था. हालांकि जवाब समाधानकारक नहीं पाए जाने पर दुर्ग संभाग आयुक्त ने एक्शन लेते हुए निलंबन की कार्रवाई की है.  जनता जनार्दन सर्वोपरि : मुख्यमंत्री साय इस कार्रवाई से मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जनता जनार्दन सर्वोपरि है. जनता के सम्मान और अधिकारों से खिलवाड़ करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा.

प्रदेश में UCC लागू करने की प्रक्रिया तेज, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिए बड़े संकेत

प्रदेश में चल रही है समान नागरिक संहिता (यू.सी.सी.) लागू करने की प्रक्रिया : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में गठित की गई है उच्च स्तरीय समिति आम नागरिकों से किये गये है सुझाव आमंत्रित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यू.सी.सी) लागू करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। वर्तमान समय में विभिन्न धर्मों में विवाहित बहनों के लिए प्रचलित अलग-अलग रीति-रिवाज और नियमों की आवश्यकता नहीं है। मध्यप्रदेश को आज समान नागरिक संहिता की ओर बढ़ने की आवश्यकता है। वर्तमान में देश के तीन राज्यों उत्तराखंड, गुजरात और असम ने समान नागरिक संहिता को लागू किया है। मध्यप्रदेश सरकार ने भी यूसीसी (यूनिफॉर्म सिविल कोड) को लागू करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह जानकारी आज सोमवार को मंत्रालय में मीडिया को जारी वक्तव्य में दी। जिलों में विभिन्न धर्म समुदाय के लोगों से लिए जायेंगे सुझाव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में यूसीसी के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। अलग-अलग क्षेत्र के विद्वानों को इस समिति में स्थान दिया गया है। यह समिति प्रदेश के विभिन्न जिलों में अलग-अलग धर्म-समुदाय के लोगों से सुझाव प्राप्त करेगी। सभी वर्गों के साथ संवाद और समन्वय से लागू की जायेगी समान नागरिक संहिता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार सभी वर्गों के साथ संतुलन बनाते हुए समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। राज्य की जन हितैषी सरकार सभी वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। मध्यप्रदेश समान नागरिक आचार संहिता लागू करने के लिए सबसे अनुकूल प्रदेश है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता के लिए एक वेबसाइट भी लॉन्च की है, जिस पर आम नागरिक अपने सुझाव दे सकते हैं।  

डिजिटल सरकार अब गाँव के द्वार, बड़ेकनेरा का ‘सेवा सेतु’ मॉडल बना सुशासन की नई मिसाल : सीएम विष्णुदेव साय

गाँव के द्वार पहुँची डिजिटल सरकार : बड़ेकनेरा का ‘सेवा सेतु’ मॉडल बना ग्रामीण सुशासन की नई मिसाल – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री ने अटल डिजिटल सुविधा केंद्र का किया निरीक्षण, ग्रामीणों से लिया योजनाओं के प्रभाव का फीडबैक अब प्रमाण पत्र से लेकर बैंकिंग, बीमा, पेंशन और ऑनलाइन सेवाएं गांव में ही उपलब्ध रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज कोंडागांव जिले के ग्राम पंचायत बड़ेकनेरा में स्थापित अटल डिजिटल सुविधा केंद्र का निरीक्षण कर ग्रामीण डिजिटल सुशासन के अभिनव मॉडल ‘सेवा सेतु’ की कार्यप्रणाली का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया तथा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से सीधे संवाद कर योजनाओं की पहुंच, पारदर्शिता और प्रभाव के संबंध में जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की योजनाओं और सेवाओं का लाभ ग्रामीणों को उनके गांव में ही सहज, सरल और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि ‘सेवा सेतु’ अभियान और अटल डिजिटल सुविधा केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सुशासन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं, जिनसे आमजन को सरकारी दफ्तरों के अनावश्यक चक्कर लगाने से मुक्ति मिल रही है। मुख्यमंत्री से चर्चा के दौरान ग्राम की हितग्राही श्रीमती कौशल्या मानिकपुरी ने बताया कि उन्हें नियमित रूप से महतारी वंदन योजना की राशि प्राप्त हो रही है, जिससे घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिलती है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से खेती-किसानी संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सहूलियत मिली है। इसी प्रकार श्रीमती सुमति मानिकपुरी, श्रीमती अमिल मानिकपुरी तथा श्रीमती पचमती बघेल ने मुख्यमंत्री को बताया कि महतारी वंदन योजना ने उन्हें आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनाया है और परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहारा दिया है। वृद्धावस्था पेंशन और महतारी वंदन योजना का लाभ प्राप्त कर रही श्रीमती वेंकटरमणा जंगम ने भी योजनाओं की नियमित उपलब्धता पर संतोष व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने उनसे चर्चा करते हुए कहा कि सरकार प्रत्येक गरीब, किसान और महिला तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। ‘गाँव के द्वार, डिजिटल सरकार’ का साकार हो रहा संकल्प ग्राम पंचायत बड़ेकनेरा में संचालित ‘सेवा सेतु’ अभियान शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं को ग्रामीणों तक त्वरित, सरल और सुलभ तरीके से पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। इस पहल के माध्यम से ग्रामीणों को एक ही स्थान पर अनेक शासकीय, वित्तीय और डिजिटल सेवाओं का लाभ मिल रहा है, जिससे सुशासन की अवधारणा जमीनी स्तर पर साकार होती दिखाई दे रही है। एक ही छत के नीचे मिल रही दर्जनों डिजिटल और शासकीय सेवाएं अटल डिजिटल सुविधा केंद्र में आवेदन प्रेषण के लिए मात्र 30 रुपये तथा प्रिंट आउट के लिए 5 रुपये प्रति पृष्ठ की दर से सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। केंद्र के माध्यम से आय, जाति, मूल निवासी प्रमाण पत्र, जन्म एवं मृत्यु पंजीयन, विवाह पंजीयन तथा भवन निर्माण अनुज्ञा जैसी सेवाएं ग्रामीणों को गांव में ही मिल रही हैं। इसके अतिरिक्त नगद आहरण, फंड ट्रांसफर, पेंशन सेवाएं, जीवन, सामान्य एवं कृषि बीमा, पैन कार्ड एवं पासपोर्ट आवेदन, बिजली बिल भुगतान, यात्रा टिकट बुकिंग तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं का ऑनलाइन पंजीयन भी इसी केंद्र के माध्यम से किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों का समय, श्रम और आर्थिक व्यय उल्लेखनीय रूप से कम हुआ है। हर माह 15 से 20 लाख रुपये का डिजिटल लेन-देन, स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा अटल डिजिटल सुविधा केंद्र में ‘सेवा सेतु मैनेजर’ के रूप में कार्यरत संजय मिश्रा ने मुख्यमंत्री को जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र के माध्यम से प्रतिमाह लगभग 15 से 20 लाख रुपये का डिजिटल ट्रांजेक्शन किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस पहल ने न केवल ग्रामीणों को सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित किए हैं, जिससे युवाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। ग्रामीणों के समय, श्रम और धन की बचत का माध्यम बना सेवा सेतु बड़ेकनेरा के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को बताया कि अब विभिन्न शासकीय सेवाओं और योजनाओं का लाभ गांव में ही उपलब्ध हो जाने से उन्हें दूरस्थ कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। इससे समय, श्रम और धन की बचत हो रही है तथा शासन के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है। बड़ेकनेरा का ‘सेवा सेतु’ मॉडल अब ग्रामीण डिजिटल सशक्तिकरण, पारदर्शी सेवा वितरण और सुशासन की नई मिसाल के रूप में उभर रहा है।

बुजुर्गों के अधिकारों को सशक्त बना रही MP सरकार, सम्मान और सुरक्षा के लिए मजबूत व्यवस्था

मध्यप्रदेश में वरिष्ठजनों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की सुदृढ़ व्यवस्था कानूनी संरक्षण: अधिकारों की मजबूत नींव भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों को नई दिशा और गति प्रदान की गई है। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित योजनाएं इसका प्रमाण हैं कि सरकार उनके सम्मानजनक जीवन, सुरक्षा एवं अधिकारों के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध है। बदलते सामाजिक परिवेश में जहां पारिवारिक संरचना में निरंतर परिवर्तन हो रहा है, वहीं वरिष्ठजनों की देखभाल और उनके अधिकारों की रक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है। इस दिशा में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा बहुआयामी प्रयास किए जा रहे हैं। वरिष्ठ नागरिकों को उनके अधिकार दिलाने के लिए माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है। यह अधिनियम वरिष्ठजनों को यह अधिकार देता है कि यदि वे स्वयं अपना भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं हैं, तो वे अपने बच्चों या संबंधितों से भरण-पोषण प्राप्त कर सकते हैं। प्रदेश में इस अधिनियम के तहत प्रत्येक अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय को भरण-पोषण अधिकरण तथा जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय को अपील अधिकरण घोषित किया गया है। इससे वरिष्ठ नागरिकों को त्वरित एवं सुलभ न्याय प्राप्त हो रहा है। इसके अतिरिक्त, सामाजिक न्याय विभाग के जिला अधिकारियों को भरण-पोषण अधिकारी के रूप में नामित किया गया है, जो इस व्यवस्था को प्रभावी रूप से संचालित करते हैं। अधिनियम के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा या परित्याग को दंडनीय अपराध माना गया है, जिससे समाज में उनके प्रति उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ किया गया है। साथ ही, भरण-पोषण हेतु मासिक राशि निर्धारित करने का प्रावधान भी वरिष्ठजनों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है। संस्थागत व्यवस्था: आश्रय और देखभाल प्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आश्रय और देखभाल की सुदृढ़ व्यवस्था की गई है। विभिन्न संस्थाओं एवं स्थानीय निकायों के माध्यम से संचालित वरिष्ठ आश्रमों में जरूरतमंद वरिष्ठजनों को आश्रय, भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं एवं मनोरंजन की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इसी कड़ी में भोपाल में विकसित “संध्या छाया” वरिष्ठजन निवास एक महत्वपूर्ण पहल है। यह आधुनिक एवं सर्वसुविधायुक्त आवासीय परिसर वरिष्ठजनों को सुरक्षित, आरामदायक एवं गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करता है। यहां वातानुकूलित कक्ष, लाइब्रेरी, फिजियोथेरेपी, चिकित्सा सुविधाएं एवं मनोरंजन के साधन उपलब्ध कराए गए हैं। यह पहल दर्शाती है कि राज्य शासन वरिष्ठजनों को केवल आश्रय ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण जीवन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। योजनाएं और कार्यक्रम: समग्र विकास की दिशा भारत सरकार की अटल वयो अभ्युदय योजना के माध्यम से भी राज्य में वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण हेतु विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इस योजना के तहत स्वास्थ्य देखभाल, पोषण, आजीविका, सामाजिक सहभागिता एवं जागरूकता जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वरिष्ठजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अंतर-पीढ़ी संवाद, सामूहिक गतिविधियां और कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इससे न केवल उनकी सक्रियता बनी रहती है, बल्कि समाज में उनके अनुभवों का लाभ भी नई पीढ़ी को मिलता है।   हेल्पलाइन और सहायता तंत्र: हर समय साथ वरिष्ठ नागरिकों की सहायता के लिए Elder Line 14567 जैसी पहल अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो रही है। यह टोल-फ्री हेल्पलाइन वरिष्ठजनों को जानकारी, परामर्श, भावनात्मक सहयोग एवं आपात स्थिति में सहायता प्रदान करती है। इस हेल्पलाइन के माध्यम से वरिष्ठजन अपनी समस्याएं साझा कर सकते हैं और उन्हें त्वरित समाधान प्राप्त होता है। यह सेवा न केवल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि उन्हें यह विश्वास भी दिलाती है कि शासन हर समय उनके साथ खड़ा है।   सम्मान और सामाजिक स्वीकृति वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान को बढ़ावा देने के लिए राज्य में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर “शतायु सम्मान” जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से 100 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठजनों को सम्मानित किया जाता है। यह पहल समाज में वरिष्ठजनों के प्रति सम्मान और प्रेरणा का वातावरण तैयार करती है। नवाचार और सुधार राज्य शासन द्वारा समय-समय पर नियमों में संशोधन कर व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। उदाहरण के लिए, शासकीय कर्मचारियों द्वारा माता-पिता की उपेक्षा करने पर उनके वेतन से भरण-पोषण भत्ता काटकर सीधे माता-पिता के खाते में जमा करने का प्रावधान एक महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम है। यह व्यवस्था न केवल वरिष्ठजनों के अधिकारों की रक्षा करती है, बल्कि परिवारों में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को भी बढ़ावा देती है। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम एक समग्र, संवेदनशील और प्रभावी तंत्र के रूप में उभरकर सामने आए हैं। कानूनी संरक्षण, संस्थागत व्यवस्थाएं, योजनाएं, हेल्पलाइन सेवाएं और सम्मान कार्यक्रम इन सभी प्रयासों ने मिलकर वरिष्ठजनों के जीवन को अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर बनाया है। मध्यप्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों के संरक्षण और उनके कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयास न केवल राज्य के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। आने वाले समय में इन पहलों के माध्यम से वरिष्ठजनों के जीवन में और अधिक सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे, जो एक संवेदनशील और समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।  

शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब का बड़ा कमाल, स्कूल रैंकिंग में केरल को पछाड़कर बना देश का नंबर-1 राज्य

 नई दिल्ली एक समय था जब पंजाब के सरकारी स्कूलों का नाम आते ही अभिभावकों के मन में अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता घर कर जाती है. जर्जर इमारतें, संसाधनों की कमी और गिरती शैक्षणिक गुणवत्ता के बीच लाखों परिवार अपने बच्चों के बेहतर भविष्य का सपना देखते थे. हालात ऐसे थे कि शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब की रैंकिंग लगातार नीचे खिसकती जा रही थी और राज्य देश के पिछड़े राज्यों में गिना जाने लगा था. लेकिन कुछ ही सालों में पंजाब के स्कूलों की तस्वीर पूरी तरह बदल गई।  आज वही पंजाब सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता, आधुनिक सुविधाओं और बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन के दम पर देश में नंबर-1 बनकर उभरा है. यह सिर्फ रैंकिंग में सुधार की कहानी नहीं, बल्कि उन लाखों छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों की मेहनत और उम्मीदों की जीत की कहानी है, जिन्होंने बदलाव पर भरोसा किया।    2016-17 में पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में 22वें स्थान पर रहा, वहीं, 2018-19 में 26वें और 2020 में 27वें स्थान तक फिसल गया था. लेकिन साल 2022 में पंजाब की जनता ने बदलाव का फैसला किया और आम आदमी पार्टी की सरकार को जिम्मेदारी सौंपी. आज सिर्फ चार सालों के अंदर पंजाब ने वह कर दिखाया जिसकी कल्पना भी मुश्किल मानी जाती थी. नीति आयोग की शिक्षा गुणवत्ता रिपोर्ट 2026 के ताजा आंकड़ों के अनुसार पंजाब ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों को पीछे छोड़ते हुए देश में पहला स्थान हासिल कर लिया है।  ऐसे बना नंबर वन यह सिर्फ एक रैंकिंग नहीं है. यह लाखों पंजाबी परिवारों के सपनों की जीत है. यह उन माता-पिता की जीत है जो चाहते थे कि उनका बच्चा गरीब हो या अमीर, उसे भी विश्वस्तरीय शिक्षा मिले. यह उन शिक्षकों की मेहनत की जीत है जिन्हें नई सोच और नए संसाधनों के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिला. नीति आयोग की रिपोर्ट बताती है कि तीसरी कक्षा के भाषा स्तर में पंजाब के बच्चों ने 82 प्रतिशत दक्षता हासिल की है, जबकि केरल 75 प्रतिशत पर रहा. गणित में पंजाब ने 78 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, जबकि केरल 70 प्रतिशत पर रहा. नौवीं कक्षा के गणित में पंजाब का प्रदर्शन 52 प्रतिशत रहा, जबकि केरल केवल 45 प्रतिशत तक पहुंच पाया. ये आंकड़े साफ बताते हैं कि पंजाब के सरकारी स्कूलों में बच्चों की बुनियादी शिक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है।  99.9 प्रतिशत रहा परिणाम  आज पंजाब के 99.9 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में बिजली उपलब्ध है. 99 प्रतिशत स्कूलों में चालू कंप्यूटर मौजूद हैं. 80 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम बनाए जा चुके हैं. स्मार्ट क्लासरूम की उपलब्धता में पंजाब 80.1 प्रतिशत पर है जबकि हरियाणा 50.3 प्रतिशत पर है. इंटरनेट सुविधा के मामले में पंजाब 88.9 प्रतिशत पर है जबकि हरियाणा 78.9 प्रतिशत पर है. यह अंतर सिर्फ आंकड़ों का नहीं बल्कि सोच और प्राथमिकताओं का अंतर है।  गुरुग्राम का स्तर रहा सबसे खराब  सबसे दिलचस्प तथ्य यह है कि हरियाणा के सबसे समृद्ध और साइबर सिटी शहर गुरुग्राम के सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन भी पंजाब के सबसे निचले पायदान वाले जिलों से बहुत पीछे है. यह उस मॉडल की ताकत दिखाता है जिसने सरकारी स्कूलों को राजनीति का विषय नहीं बल्कि भविष्य निर्माण का मिशन बनाया. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में पंजाब ने शिक्षा को सरकारी फाइलों से निकालकर जन आंदोलन बनाया है. शिक्षकों को फिनलैंड और सिंगापुर जैसे देशों में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया ताकि पंजाब के बच्चे भी दुनिया के बेस्ट एजुकेशन मॉडल का लाभ उठा सकें. यही कारण है कि सरकारी स्कूलों के 786 छात्रों ने जेईई मेन और 1284 छात्रों ने नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं पास की है. यह उपलब्धि बताती है कि प्रतिभा सिर्फ निजी स्कूलों की संपत्ति नहीं होती, अवसर मिलने पर सरकारी स्कूलों के बच्चे भी देश का भविष्य बन सकते हैं।  भर्त‍ियों का ग्राफ भी बढ़ा  राज्य सरकार 13 हजार से अधिक नए शिक्षकों और स्टाफ की भर्ती कर चुकी है. 3 लाख छात्रों के लिए इंग्लिश एज कार्यक्रम चलाया जा रहा है ताकि पंजाब का बच्चा दुनिया के किसी भी मंच पर आत्मविश्वास के साथ खड़ा हो सके. राज्य में 118 अत्याधुनिक स्कूल ऑफ एमिनेंस स्थापित किए गए हैं जो आने वाले वर्षों में पंजाब की नई पहचान बनने जा रहे हैं. आज पंजाब के सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले बच्चे सिर्फ किताबें नहीं पढ़ रहे, बल्कि आधुनिक लैब, डिजिटल तकनीक, स्मार्ट क्लासरूम और वैश्विक स्तर की शिक्षा का अनुभव प्राप्त कर रहे हैं. यह वही सपना है जो विकसित देशों जैसे अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और जापान में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाता है. पंजाब उसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।  इन जगहों पर अब भी हो रहा है बदलाव का इंतजार दूसरी तरफ कई ऐसे राज्य हैं जहां वर्षों से एक ही सरकारें चल रही हैं, लेकिन सरकारी शिक्षा व्यवस्था अब भी अपेक्षित बदलाव का इंतजार कर रही है. हरियाणा में पिछले 12 वर्षों से बीजेपी सरकार है, लेकिन शिक्षा के कई मानकों पर पंजाब उससे काफी आगे निकल चुका है. पंजाब के गांवों में अब माता-पिता गर्व से कहते हैं कि उनका बच्चा सरकारी स्कूल में पढ़ता है. यह बदलाव किसी विज्ञापन या नारे से नहीं आया. यह बदलाव स्कूलों की नई इमारतों, स्मार्ट क्लासरूम, प्रशिक्षित शिक्षकों, बेहतर परिणामों और बच्चों के उज्जवल भविष्य के रूप में दिखाई दे रहा है. पंजाब ने साबित कर दिया है कि जब सरकार की प्राथमिकता शिक्षा होती है तो कुछ ही वर्षों में इतिहास बदला जा सकता है. जो राज्य कभी देश में 27वें स्थान पर था, वही आज देश में नंबर-1 बनकर खड़ा है. यह सिर्फ शिक्षा की कहानी नहीं, बल्कि नए पंजाब की कहानी है। 

विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चों को मिल रहा राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों से तैराकी का गुर

पहाड़ों और जंगलों से तरणताल तक- बैगा बच्चों के सपनों को नई उड़ान दे रहा ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चों को मिल रहा राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों से तैराकी का गुर छत्तीसगढ़ सरकार की जनजातीय हितैषी नीतियों से निखर रही वनांचल की खेल प्रतिभाएं रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार की जनजातीय हितैषी नीतियों और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश के दूरस्थ अंचलों के बच्चों की प्रतिभा निखारने के लिए निरंतर सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में आयोजित जिला स्तरीय ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के बच्चों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है। जंगलों और पहाड़ों के बीच जीवन व्यतीत करने वाले बैगा बालक-बालिकाएं आज तरणताल (स्वीमिंग पूल) में तैराकी के आधुनिक खेल कौशल सीखकर अपने सपनों को नई दिशा दे रहे हैं।             नगर पालिका परिषद पेण्ड्रा के तरणताल में खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा इस विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया है। इसमें आकांक्षी विकासखंड गौरेला के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले बैगा समुदाय के बच्चों को प्राथमिकता से शामिल किया गया है। जिला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों ने स्वयं गांवों तक पहुंचकर बैगा परिवारों को प्रेरित किया और बच्चों को इस शिविर से जोड़ा। अवसर मिलने से बढ़ा आत्मविश्वास           प्राकृतिक जलस्रोतों, नदी-नालों और जंगलों के बीच जीवन बिताने वाले इन बच्चों के लिए तरणताल का यह अनुभव बिल्कुल नया है। यहाँ वे केवल तैरना ही नहीं सीख रहे, बल्कि खेल अनुशासन, आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धी खेल संस्कृति को भी आत्मसात कर रहे हैं। प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे बच्चों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी इतने बड़े स्वीमिंग पूल में अभ्यास नहीं किया था। वे तैराकी के तकनीकी पहलुओं को सीखकर बेहद उत्साहित हैं और भविष्य में बड़े खिलाड़ी बनने का सपना देख रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों से मिल रहा मार्गदर्शन          इस ग्रीष्मकालीन शिविर में राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों द्वारा बच्चों को तैराकी की बारीकियाँ सिखाई जा रही हैं। प्रशिक्षण के दौरान खिलाड़ियों को फ्री-स्टाइल, बैक-स्ट्रोक, बटरफ्लाई-स्ट्रोक, ब्रेस्ट-स्ट्रोक तथा मेडले जैसी प्रतिस्पर्धी विधाओं का कड़ा अभ्यास कराया जा रहा है। सुबह और शाम, दो पालियों में संचालित इन सत्रों के माध्यम से बच्चों की शारीरिक क्षमता, तकनीकी दक्षता और खेल कौशल को लगातार विकसित किया जा रहा है। प्रशिक्षकों का मानना है कि बैगा बच्चों में स्वाभाविक शारीरिक क्षमता, साहस और सीखने की तीव्र इच्छा है, जो उन्हें भविष्य का उत्कृष्ट खिलाड़ी बना सकती है। जनजातीय सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम          विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के बच्चे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में पलने के कारण अद्भुत सहनशक्ति और बेजोड़ शारीरिक क्षमता के धनी होते हैं। यदि उन्हें उचित मार्गदर्शन, संसाधन और अवसर उपलब्ध कराए जाएं, तो वे राज्य, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। जिला प्रशासन द्वारा इन बच्चों को खेल की मुख्यधारा से जोड़ने का यह प्रयास न केवल खेल विकास की दिशा में एक मील का पत्थर है, बल्कि सामाजिक समावेशन और जनजातीय सशक्तिकरण का भी एक जीवंत उदाहरण है। मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल जनजातीय युवा          मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, खेल, स्वास्थ्य और कौशल विकास के अवसरों का विस्तार कर रही है। सरकार का संकल्प है कि दूरस्थ अंचलों का कोई भी प्रतिभाशाली बच्चा संसाधनों के अभाव में पीछे न छूटे। बैगा समुदाय के बच्चों को खेल गतिविधियों से जोड़ना सरकार की समावेशी विकास नीति का प्रत्यक्ष प्रमाण है, जिससे न केवल बच्चों के व्यक्तित्व का विकास हो रहा है, बल्कि उनमें बड़े लक्ष्य हासिल करने का आत्मविश्वास भी जागृत हो रहा है। सपनों की नई लहर           कभी जंगलों और पहाड़ियों तक सीमित रहने वाले बैगा बच्चे आज तरणताल में पूरे आत्मविश्वास के साथ लहरों से मुकाबला कर रहे हैं। यह सकारात्मक परिवर्तन केवल एक खेल प्रशिक्षण का परिणाम नहीं है, बल्कि सरकार की संवेदनशील सोच, जिला प्रशासन की प्रतिबद्धता और बच्चों की कड़ी मेहनत का प्रतिफल है।           यह ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर बैगा बच्चों के लिए एक ऐसे सुनहरे अवसर के रूप में उभरा है, जो उनके जीवन की दिशा बदल सकता है। आने वाले वर्षों में यही बच्चे राज्य और देश का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर छत्तीसगढ़ और पूरे भारत का गौरव बढ़ाएंगे, यही इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य है।

‘ऊंचा लंबा कद’ गाने पर भड़के फैंस, बोले- अक्षय-दिशा ने ओरिजिनल का मजा बिगाड़ दिया

मुंबई  बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार आने वाली फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' में 2007 की हिट फिल्म 'वेलकम' के क्लासिक गाने 'ऊंचा लंबा कद' का जादू फिर से बिखेरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। दिशा पाटनी के साथ अक्षय कुमार ने 'ऊंचा लंबा कद' गाना फिर से रिलीज कर दिया है और नए गाने में चार्म तो बहुत है, लेकिन रिलीज होते ही फैंस मायूस हो गए। इससे पहले, अक्षरा सिंह के साथ ठुमके लगाकर छाने वाले अक्षय को अब नफरत मिल रही है कि उन्होंने दिशा पाटनी को लेकर कटरीना की फिर से याद दिला दी और दिशा उस औरा को छू भी नहीं पाईं जो कटरीना का है। अक्षय कुमार और दिशा पाटनी की शानदार केमिस्ट्री, रंगीन विज़ुअल्स और जोशीली धुन ‘ऊंचा लंबा कद फॉरएवर’ को फिल्म के साउंडट्रैक का एक खास आकर्षण बनाती है। डांस फ्लोर पर थिरकाने वाली इसकी एनर्जी और नॉस्टैल्जिया का तड़का इसे हर पीढ़ी के लोगों के बीच फेमस बनाने की क्षमता रखता है। 'ऊंचा लंबा कद' गाना रिलीज गाने के इस नए वर्जन को आनंद राज आनंद और रुबाई ने अपनी आवाज दी है। इसमें मेघा बाली के लिखे गए नए लिरिक्स के साथ समीर का गाना भी शामिल हैं। अपनी दमदार धुन, हाई-एनर्जी विज़ुअल्स और सेलिब्रेशन वाले माहौल के साथ यह गीत नॉस्टैल्जिया और समकालीन पॉप कल्चर के बीच एक बेहतरीन पुल बनकर उभरा है। लोगों को जरा पसंद नहीं आया गाना इस पर लोगों के रिएक्शन चौंकाने वाले हैं। एक यूजर ने लिखा- आप पुराने गाने को खा गए, ये नहीं करना था। एक ने कहा- कटरीना की याद आ रही है। एक यूजर ने लिखा- अक्षय पाजी, ये बहुत गलत किया, खुद देखो यार दोनों गाने, समझ आ जाएगा। ‘वेलकम टू द जंगल’ की कास्ट फिल्म में अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, दिशा पाटनी, जैकलीन फर्नांडिस, अरशद वारसी, जैकी श्रॉफ, परेश रावल, रवीना टंडन, लारा दत्ता, फरीदा जलाल, जॉनी लीवर, श्रेयस तलपड़े, तुषार कपूर, राजपाल यादव, कृष्णा अभिषेक, कीकू शारदा, दलेर मेहंदी, आफताब शिवदासानी, मुकेश तिवारी, यशपाल शर्मा, किरण कुमार, ज़ाकिर हुसैन, विंदू दारा सिंह, उर्वशी रौतेला, हेमंत पांडेय, बृजेंद्र काला, फिरोज खान (अर्जुन), स्वर्गीय पंकज धीर, पुनीत इस्सर, सुदेश बेरी, जीतू वर्मा, वृहि कोडवारा, आदित्या सिंह और भाग्य भानुशाली जैसे कलाकार हैं। ‘वेलकम टू द जंगल’ की रिलीज डेट अहमद खान की निर्देशित ‘वेलकम टू द जंगल’ को ए.ए. नाडियाडवाला, केप ऑफ गुड फिल्म्स और स्टार स्टूडियो18 ने सीता फिल्म्स और राकेश डांग के सहयोग से बनाया है। यह बेस इंडस्ट्रीज ग्रुप का प्रोडक्शन है, जिसे राकेश डांग और वेदांत विकास बाली ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म के निर्माता फिरोज ए. नाडियाडवाला हैं और यह 26 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। मेकर्स का कहा है कि धुन वही है, लेकिन अंदाज नया है।

बिहार के गया का बढ़ा मान, शुभम बने JEE Advanced के ऑल इंडिया टॉपर

पटना. देश की सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में शामिल जेईई एडवांस्ड 2026 में बिहार के लाल शुभम कुमार ने इतिहास रच दिया है। गया जिले के रहने वाले शुभम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया रैंक-1 (AIR-1) हासिल की है। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। शुभम को परीक्षा में 360 में से 330 अंक प्राप्त हुए हैं। उनकी सफलता कोई संयोग नहीं, बल्कि लगातार मेहनत और उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिणाम है। इससे पहले भी उन्होंने जेईई मेन 2026 के दोनों सत्रों में 100 परसेंटाइल हासिल कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था। शुभम ने कहा कि दो साल से जेईई एडवांस्‍ड की तैयारी कर रहे थे। बहुत मेहनत करने पर बेहतर की उम्‍मीद तो रहती ही है। परिणाम से बहुत अच्‍छा लग रहा है। गया शहर के नादरागंज निवासी शुभम साधारण परिवार से हैं। उनके पिता शिव कुमार हार्डवेयर व्यवसायी हैं, जबकि मां कंचन देवी गृहिणी हैं। बेटे की इस ऐतिहासिक सफलता से परिवार में खुशी का माहौल है। शुभम की उपलब्धि ने पूरे बिहार को गौरवान्वित किया है और राज्य के लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। मुख्‍यमंत्री ने कहा-ब‍िहार का नाम क‍िया रोशन शुभम की सफलता पर राजनीतिक और सामाजिक जगत से भी उन्हें बधाइयां मिल रही हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर शुभम की तस्वीर साझा करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लिखा कि जेईई एडवांस्ड 2026 में ऑल इंडिया रैंक-1 प्राप्त कर शुभम ने पूरे देश में बिहार का नाम रोशन किया है। सम्राट चौधरी ने अपने संदेश में कहा कि शुभम की अथक मेहनत, अनुशासन, समर्पण और असाधारण प्रतिभा लाखों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने शुभम के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि उनके जीवन में नई ऊंचाइयों का आधार बनेगी। जेईई एडवांस्ड जैसी कठिन परीक्षा में शीर्ष स्थान हासिल कर शुभम कुमार ने यह साबित कर दिया है कि लगन, मेहनत और सही दिशा में किए गए प्रयास किसी भी लक्ष्य को हासिल करने की ताकत रखते हैं। उनकी सफलता बिहार के शैक्षणिक परिदृश्य के लिए भी गर्व का विषय है।