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कागज नहीं, अब प्लास्टिक के होंगे भारतीय नोट! जानिए RBI का पूरा प्लान

नई दिल्ली  भारतीय करेंसी नोट पर बड़ा अपडेट आया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में करेंसी नोटों की लगातार बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए प्लास्टिक या पॉलीमर नोट छापने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पटना और मुंबई में हुई केंद्रीय बैंक की पिछली दो बोर्ड बैठकों में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई है। पॉलिमर नोटों की टिकाऊपन और कम उत्पादन लागत के कारण यह निर्णय लिया जा रहा है। ऐसी संभावना है कि आम जनता के लिए प्लास्टिक नोटों के इस्तेमाल का पायलट प्रोजेक्ट जल्द ही शुरू किया जा सकता है। प्लास्टिक के नोट कागज के नोटों की जगह क्यों लाए जा रहे? इस निर्णय के पीछे मुख्य कारण लागत और नोटों का टिकाऊपन है। RBI सूत्रों के अनुसार, पॉलिमर नोटों की उत्पादन लागत वर्तमान में चल रहे कागज के नोटों की तुलना में काफी कम है। इसके अलावा, भारत तकनीकी रूप से आधुनिक हो चुका है और देश के एटीएम को इन प्लास्टिक नोटों को आसानी से निकालने के लिए अपग्रेड किया जाएगा। पुराने और गंदे नोटों को नष्ट करने में क्या दिक्कतें आ रही हैं? कागजी नोट ज्यादा साल तक नहीं चल पाते हैं, जिससे वे मूल कागज और गंदे नोटों की तुलना में निम्न गुणवत्ता के होते हैं। आरबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 (FY25) में ही लगभग ₹23.8 अरब मूल्य के नोट नष्ट किए गए, जो पिछले वर्ष ₹21.24 अरब की तुलना में 12.3 प्रतिशत अधिक है। इनमें सबसे अधिक संख्या ₹500 और ₹100 के नोटो की थी। इतनी बड़ी मात्रा में करेंसी नोटों को नष्ट करना और नए नोट छापना सरकारी खर्च पर भारी बोझ डालता है। वित्त वर्ष 2024-25 में नोट छापने की लागत ₹6,372.8 करोड़ थी, जो पिछले वर्ष (₹5,101.4 करोड़) की तुलना में काफी अधिक है। प्लास्टिक नोटों की शुरुआत से इस खर्च में काफी कमी आएगी। डिजिटल पेमेंट के युग में भी कैश की मांग क्यों बढ़ी? देश में यूपीआई और डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन नकदी (कैश) की मांग में कोई बदलाव नहीं आया है। 15 मई तक, बाजार में कुल नकदी (सीआईसी) 11.5 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड ₹42.86 लाख करोड़ के उच्च स्तर पर पहुंच गई। छोटे नोटों (10 और 20 रुपये) की मांग अधिक होने के बावजूद, कुल सीआईसी में उनकी हिस्सेदारी क्रमशः 0.7% और 0.8% है। सरकार ने सिक्कों को बढ़ावा देने का प्रयास किया, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है। 2012 का ट्रायल फेल, अब क्या नया बदलाव? भारत में प्लास्टिक नोटों पर चर्चा पहली बार नहीं हो रही है। 2012 में, तत्कालीन यूपीए सरकार ने पांच शहरों में परीक्षण के तौर पर 1 अरब प्लास्टिक के 10 रुपये के नोट जारी करने का फैसला किया था। हालांकि, एटीएम और बैंकों में तकनीकी समस्याओं के कारण परियोजना को रोक दिया गया था। हालांकि, पिछले एक दशक में तकनीक में काफी बदलाव आया है। रिपोर्ट्स का कहना है कि अब एटीएम इन टूल्स से आसानी से पुराने और पुराने तकनीकी छात्रों को आसानी से पहचाना जा सकता है। दुनिया में किन देशों में चलते हैं प्लास्टिक नोट? पॉलिमर या प्लास्टिक के नोट वर्तमान में लगभग 60 देशों में चल रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया 1988 में प्लास्टिक का 10 डॉलर का नोट जारी करने वाला पहला देश था। सिंगापुर, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया, रोमानिया और कनाडा जैसे देशों ने भी बाद में इन्हें अपना लिया। वहीं, अमेरिकी डॉलर अभी भी कपास और लिनन के विशेष मिश्रण से बनाया जाता है।  

CBI की बड़ी कार्रवाई, गिरिबाला सिंह और समर्थ को 5 दिन की रिमांड पर लेने की मांग

भोपाल. ट्विशा शर्मा मौत मामले में गिरफ्तार रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके वकील बेटे समर्थ सिंह को सीबीआई ने शुक्रवार को विशेष अदालत में पेश किया है। जहां एजेंसी ने दोनों आरोपियों से पूछताछ के लिए कोर्ट से 5 दिन की रिमांड मांगी है। शुक्रवार को सुबह सीबीआई की टीम दोनों आरोपियों को कोर्ट लेकर पहुंची है। जहां अभी ट्विशा शर्मा की मौत के मामले सुनवाई जारी है। सीबीआई ने 8 घंटे की पूछताछ गुरुवार को सीबीआई ने करीब आठ घंटे तक पूछताछ के बाद गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया था। इससे पहले एजेंसी ने घटनास्थल की दोबारा जांच, मैपिंग और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की पड़ताल की थी। मामले में समर्थ सिंह की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। पुलिस ने उसे 22 मई को जबलपुर से गिरफ्तार किया था। 23 मई को कोर्ट में पेश करने के बाद उसे सात दिन की रिमांड पर लिया गया था। बुधवार को अदालत ने उसे सीबीआई कस्टडी में भेज दिया। सीबीआई को मामले के कई अहम बिंदुओं पर अभी पूछताछ और साक्ष्य जुटाने हैं।

स्वच्छता अभियान में जीविका दीदियों का कमाल, बिहार ने हासिल किया बड़ा मुकाम

पटना. भारत सरकार की ओर से जारी “स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण-2025” की रिपोर्ट में बिहार को पूर्वी भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य घोषित किया गया है। यह उपलब्धि ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत संचालित लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत जनजागरूकता अभियान, अपशिष्ट प्रबंधन के लिए संचालित विविध योजनाओं के संचालन में जीविका दीदियों तथा ग्रामीण समुदाय की सक्रिय सहभागिता का परिणाम मानी जा रही है। सर्वेक्षण में यह पाया गया कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय निर्माण एवं उसके नियमित उपयोग को सुनिश्चित करने, घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था विकसित करने तथा कचरे के समुचित निपटान की दिशा में जीविका दीदियों ने प्रभावी कार्य किए हैं। जीविका दीदियों एवं समुदाय की सक्रिय भागीदारी ने स्वच्छता अभियान को व्यापक जन समर्थन प्रदान किया है। विदित हो कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग एवं जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से जारी रिपोर्ट में बिहार को पूर्वी भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य घोषित किया गया है। पूर्वी क्षेत्र के राज्यों में बिहार प्रथम, ओडिशा द्वितीय, झारखंड तृतीय तथा पश्चिम बंगाल चौथे स्थान पर रहा। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर से कचरा उठाव, इसके निष्पादन एवं साफ-सफाई के लिए राज्य भर में वार्ड स्तर पर रखे गए एक लाख 30 हजार अधिक स्वच्छता कर्मियों, ग्राम पंचायत स्तर पर योगदान दे रहे आठ हजार से अधिक स्वच्छता पर्यवेक्षकों का योगदान भी महत्वपूर्ण रहा है। स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण-2025 के अंतर्गत देशभर के 33 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 744 जिलों तथा 20,659 गांवों का विस्तृत सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान 3.22 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों तथा 1.03 लाख से अधिक सार्वजनिक संस्थानों एवं सामुदायिक परिसरों का आकलन किया गया। ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत संचालित लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत प्रथम चरण शुभारंभ वर्ष 2014 से अब तक 1 करोड़ 50 लाख 54 हजार व्यक्तिगत शौचालायों एवं भूमिहीन परिवारों के लिए 9,431 सामुदायिक स्वच्छता परिसर का निर्माण हुआ है। लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान – द्वितीय चरण (2020- 21 से 2026-27) अंतर्गत राज्य के सभी वार्डों से घर-घर से ठोस अपशिष्ट का संग्रह किया जा रहा है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्र के सभी वार्डों में प्रति वार्ड एक पैडल रिक्शा एवं ग्राम पंचायत स्तर पर एक ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई है। ठोस अपशिष्ट के समुचित निष्पादन के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर 7221 अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाई (डब्लूपीआई) का निर्माण किया गया है। प्लास्टिक अपशिष्टों के उचित निष्पादन के लिए प्रखंड / अनुमंडल स्तर पर 171 प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई स्थापित किए गए हैं। तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए 2,13,452 सामुदायिक सोक पिट, 83 344 जंक्शन चैंबर एवं 24,664 नाली निकासी बिंदु इत्यादि का निर्माण किया गया है। राज्य के सभी जिलों में 38 गोबरधन बायोगैस इकाई का निर्माण किया गया है।

हरियाणा में कृषि शिक्षा को बढ़ावा, महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय में खुलेंगे 14 विज्ञान केंद्र

करनाल. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश आज बागवानी क्षेत्र में देश के लिए एक माडल के रूप में उभर रहा है। महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय में अब पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन, पौध कीट नियंत्रण और रोगों के नए विषयों पर भी मास्टर डिग्री और पीएचडी की शुरुआत की जाएगी। वर्तमान में विश्वविद्यालय की ओर से केवल फलों, सब्जियों और पुष्प उत्पादन में ही उच्च शिक्षा प्रदान की जा रही है। सरकार की ओर से 14 बागवानी विज्ञान केंद्र महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय को समर्पित किए जा रहे हैं, जो किसानों तक नवीनतम तकनीक, वैज्ञानिक परामर्श और गुणवत्तायुक्त पौध पहुंचाने में एक मजबूत सेतु का काम करेंगे। वह वीरवार को सीएसएसआरआइ में महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय व लेफ्टिनेंट अमित मेमोरियल फाउंडेशन के सौजन्य से चार दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। सम्मेलन 'अमृतकाल में बागवानी फसलों के लिए गुणवत्ता युक्त बीज एवं रोपण सामग्री का रणनीतिक प्रतिमान' विषय पर आधारित रहा। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम शुरू किया। शहीद लेफ्टिनेंट अमित के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए और देश भर से आए बागवानी विज्ञानियों और प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने चालू वित्त वर्ष के बजट प्रविधानों और आगामी योजनाओं का खाका खींचा। स्मार्ट बागवानी से एरोपोनिक्स, हाइड्रोपोनिक्स, ग्रीन हाउस और वर्टिकल फार्मिंग के तहत 1,000 एकड़ क्षेत्र को लाया जाएगा। प्रदेश में ग्रामीण हाट मंडियां बनेंगी, जिन्हें एफपीओ के पैक हाउस से जोड़ा जाएगा। पहली मंडी का उद्घाटन 23 दिसम्बर किसान दिवस को होगा। वर्ष 2026-27 से बागवानी फसलों के पंजीकरण के लिए यह पोर्टल पूरे वर्ष खुला रहेगा। इसके साथ ही एक कोल्ड चेन नीति लागू की जाएगी। हरियाणा आलू बीज अधिनियम मुख्यमंत्री ने कहा कि टिश्यू कल्चर से आलू बीज शृंखला के प्रमाणीकरण के लिए यह कानून लाया जाएगा, इससे प्रतिवर्ष 7.5 लाख क्विंटल उच्च गुणवत्ता युक्त बीज आलू उत्पादन होगा। अंबाला के चाणसौली में एमएचयू से संबंद्ध रीजनल रिसर्च सेंटर स्थापित होगा। मशरूम उत्पादन में अग्रणी जिलों (सोनीपत, पानीपत, अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र) के लिए विशेष कार्यक्रम चलेंगे। नकली बीज-खाद पर पांच साल की सजा मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए सरकार ने नया कानून बनाया है। नकली खाद, बीज या कीटनाशक बेचने वालों को पांच साल की सजा का प्रविधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने बदलते दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फार्मेसी सेंसर टेक्नोलाजी, बायो-टेक्नोलाजी और क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर को अपनाने तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने पर बल दिया। कृषि विज्ञानियों व प्रगतिशील किसानों का सम्मान 1. लाइफ टाइम रिकग्निशन अवार्ड-2026- प्रो. इंद्र मणि मिश्रा कुलपति, वीएनएमकेवी परभणी, महाराष्ट्र 2. अमित कृषि ऋषि पुरस्कार-2026: प्रो. वी प्रवीन राव कुलपति, कावेरी विश्वविद्यालय, तेलंगाना 3. अमित प्रबुद्ध मनीषी पुरस्कार-2026: डा. संजय कुमार चेयरमैन, एएसआरबी उद्यान रत्न पुरस्कार-2026 1. नितिन ललित : इनोवेटिव सजावटी बागवानी उद्यमी, करनाल 2. नवीन कुमार, प्रगतिशील सब्जी उत्पादक, दलवा, झज्जर 3. वीरेंद्र बाजवान, इनोवेटिव मशरूम उत्पादक, बाजवान, बडियाल, पंचकूला 4. कुलदीप आर्य प्रगतिशील फल एवं सब्जी उत्पादक, नारनौद, हांसी

विरोधियों की साजिश नाकाम! हमले के बावजूद चुनाव जीते जगदेव जग्गा

लुधियाना. निकाय चुनाव के नतीजों में रायकोट का वार्ड नंबर चार पूरे पंजाब में चर्चा का विषय बना रहा। चुनाव प्रचार के दौरान उम्मीदवार जगदेव सिंह जग्गा पर हुए कातिलाना हमले के कारण यह वार्ड लगातार सुर्खियों में था। अब मतगणना पूरी होने के बाद जनता ने अपने मतदान के जरिए स्पष्ट संदेश दिया है। वार्ड नंबर चार से जगदेव सिंह जग्गा ने भारी मतों के अंतर से जीत दर्ज कर ली है। मतगणना के अनुसार जगदेव सिंह जग्गा को कुल 825 मत प्राप्त हुए। वहीं आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार को 374 मत मिले। शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार को केवल 19 मतों से संतोष करना पड़ा। इसके अलावा 14 मत अमान्य घोषित किए गए। चुनाव परिणाम सामने आते ही समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। जीत की घोषणा होते ही क्षेत्र में समर्थकों ने एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर खुशी का इजहार किया। कई स्थानों पर लोगों ने ढोल की थाप पर जश्न भी मनाया। चुनाव के दिन हुआ था हमला गौरतलब है कि चुनाव के दिन जगदेव सिंह जग्गा पर कातिलाना हमला हुआ था, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हमले के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका उपचार जारी है। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में राजनीतिक माहौल गर्म हो गया था और वार्ड नंबर चार राज्यभर में चर्चा का केंद्र बन गया था। जगदेव को मिला लोगों का समर्थन स्थानीय लोगों का कहना है कि हमले की घटना के बाद क्षेत्र में जगदेव सिंह जग्गा के प्रति सहानुभूति की लहर देखने को मिली। बड़ी संख्या में लोगों ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला माना और मतदान के दिन बड़ी संख्या में घरों से निकलकर वोट डाले। राजनीतिक जानकारों का भी मानना है कि इस घटना का असर चुनावी नतीजों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। वार्ड नंबर चार में मिली इस बड़ी जीत को केवल चुनावी सफलता नहीं बल्कि जनता के विश्वास और समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। परिणामों ने यह भी दिखाया कि क्षेत्र के मतदाताओं ने वोट के माध्यम से मजबूत संदेश देने का प्रयास किया है।

नौकरी का मौका! स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में होगी भर्ती, आवेदन प्रक्रिया शुरू

दुर्ग. जिले में संचालित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में शिक्षकीय एवं गैर शिक्षकीय विभिन्न रिक्त पदों पर संविदा हेतु विज्ञापन जारी किया गया है। कलेक्टर दुर्ग की अनुमोदन से जिला शिक्षा अधिकारी/सचिव स्वा.आ.उ. अं.मा. विद्यालय संचालन एवं प्रबंधन समिति जिला-दुर्ग द्वारा 28 मई को यह विज्ञापन प्रसारित किया गया है। विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम के रिक्त पदों की पूर्ति हेतु इच्छुक आवेदकों से आवेदन ऑनलाइन लिंक पर जिसका अवलोकन जिले की वेबसाईट दुर्ग डाट जीओवी डाट इन पर भी किया जा सकता है। आवेदन 28 मई से 8 जून तक प्रेषित करना अनिवार्य होगा। संविदा हेतु आवेदन सीधे कार्यालय में (स्पीड पोस्ट / डाक/ अन्य किसी माध्यम) स्वीकार नहीं किए जाएंगे। निर्धारित तिथि के पश्चात् कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जावेगा। आवेदन ऑनलाईन माध्यम से वेबसाईट दुर्ग डाट जीओवी डाट इन में जाकर उक्त लिंक के माध्यम से भरा जा सकता है। रिक्त पदों में व्याख्याता, शिक्षक, सहायक शिक्षक, सहायक शिक्षक विज्ञान, कम्प्यूटर शिक्षक सहित अन्य पद शामिल है। जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा से मिली जानकारी के अनुसार. सेजस उतई 5 पद, जामगांव आर 4, निकुम 6, बेल्हारी 5, पाटन 3, छावनी 2, सेक्टर 6 में 4, जंजगिरी 3, जामगांव एम 7, सेलूद 2, सेक्टर 9 में 7, अंडा 13, पुरैना 18, तिरगा 14, पाउवारा 18, कातरो 18, बालाजी नगर 1, अहिवारा 5, फरीद नगर 1, तमेर पारा धमधा 6, रानीतराई 6, मर्रा 5, अमलेश्वर 5, दीपक नगर 4, जामुल 7, खम्हरिया 1, कुम्हारी 7, भिलाई 3 में 1, नगपुरा 3, बोरसी 9, तितुरडीह 1, चरोदा 1, रिसाली 1, कुगदा 18, जेपी नगर 7, घुघवा क 4, अंजोरा ख में 3 रिक्त पद बताए गए हैं।

अब नहीं होगी पानी की फिजूलखर्ची, सार्वजनिक नलों की जांच के लिए चलेगा सर्वे अभियान

दुर्ग. महापौर अलका बाघमार एवं आयुक्त सुमित अग्रवाल द्वारा निगम क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 21 से 30 तक के पार्षदों के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में वार्ड 21 से 30 वार्डवार विकास कार्यों, मूलभूत सुविधाओं तथा जनसमस्याओं को लेकर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। महापौर अलका बाघमार ने कहा कि बेवजह बह रहे सार्वजनिक एवं अवैध रूप से नल कनेक्शनों का सर्वे कराया जाए तथा अनुपयोगी सार्वजनिक नलों को बंद कराने की कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लगभग सभी घरों में व्यक्तिगत नल कनेक्शन उपलब्ध हैं, ऐसे में सार्वजनिक नलों से पानी की अनावश्यक बर्बादी रोकना आवश्यक है। बैठक में सड़क निर्माण, पाइप लाइन विस्तार, पाइप लाइन लीकेज, नाली एवं पुलिया निर्माण / मरम्मत, पोल, विद्युत व्यवस्था, सुलभ शौचालयों की मरम्मत सहित विभिन्न जनसमस्याओं पर एक- एक कर समीक्षा की गई। पार्षदों ने अपने- अपने वार्डों की समस्याओं एवं आवश्यकताओं को महापौर और आयुक्त के समक्ष रखते हुए त्वरित निराकरण की मांग की। महापौर ने कहा कि निगम द्वारा पाइप लाइन सुधार एवं जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने लगातार कार्य किया जा रहा है, जिसका सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगा है। उन्होंने स्टेशन रोड दीपक नगर सड़क सीमा क्षेत्र अंतर्गत नाली के ऊपर बने अवैध रूप से अतिक्रमण को कार्रवाही कर हटवाने की बात कही।

गेहूं खरीदी में MP नंबर-1, देशभर में किसानों से रिकॉर्ड खरीद का बनाया नया कीर्तिमान

भोपाल  किसानों से गेहूं खरीदी में मध्य प्रदेश ने नया रिकॉर्ड बनाया है। इसके लिए सीएम मोहन यादव ने मध्य प्रदेश के किसानों को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि उनकी सरकार किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी सरकार लगातार किसानों के लिए काम करती रहेगी। मोहन यादव ने कहा है कि किसी राज्य ने अगर पूरे देश में सर्वाधिक किसानों से गेहूं खरीदा है, तो वो मध्यप्रदेश है। मध्यप्रदेश ने अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए 1 करोड़ 4 लाख 31 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की है। मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि गेहूं खरीदी के दौरान किसानों की संख्या सबसे ज्यादा होने में मध्यप्रदेश प्रथम स्थान पर है। और, सर्वाधिक लंबे समय तक किसी राज्य ने गेहूं खरीदी की व्यवस्था जारी रखी, तो वो भी मध्यप्रदेश है।  लक्ष्य से अधिक उपार्जन, 104 लाख मीट्रिक टन पार मध्यप्रदेश ने गेहूं खरीदी में एक बार फिर अपना वर्चस्व साबित किया है. इस वर्ष राज्य ने निर्धारित लक्ष्य 100 लाख मीट्रिक टन के विरुद्ध 104 लाख 22 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उपार्जन किया. प्रारंभिक लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन था, जिसे बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किया गया. बेहतर रणनीति, समयबद्ध खरीदी और व्यवस्थागत सुधारों ने इस उपलब्धि को संभव बनाया. किसानों की भागीदारी से बना रिकॉर्ड खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के अनुसार प्रदेश में 13 लाख 41 हजार 266 किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदा गया. यह संख्या देश में सर्वाधिक है. हालांकि कुल उपार्जन के मामले में मध्यप्रदेश पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर है, लेकिन किसानों की व्यापक भागीदारी ने प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दिलाई है।  लघु किसानों से खरीदी पहले सीएम डॉ. यादव ने कहा कि जब मैं अपने सर्वाधिक गेहूं उपार्जन वाले राज्य की तरफ देखता हूं तो गेहूं की मात्रा में भी पंजाब के बाद मध्यप्रदेश का दूसरा स्थान है, जिसके पास गेहूं का इतना विपुल उत्पादन होने के बाद उसने खरीदी की है। मध्यप्रदेश में पहली बार हमने लघु किसान, मध्यम श्रेणी के किसान का गेहूं खरीदने का निर्णय किया। हमने छोटे किसानों से लगभग 32. 72 मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की। मुझे बताया गया है कि लगभग पौने चौदह लाख किसानों का समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदा गया है। जिन किसानों ने पंजीयन कराया था, उनका गेहूं गोडाउन तक पहुंच चुका है।  किसान कल्याण वर्ष में यह परिणाम खास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य एशिया और पश्चिम एशिया में उत्पन्न विषम परिस्थितियों के बावजूद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए हमने यह गेहूं खरीदी की है। किसान कल्याण वर्ष में यह परिणाम खास है। हमने 24 हजार करोड़ से ज्यादा की धनराशि प्रेषित की है। हमने किसानों से समर्थन मूल्य 2585 रुपये और 40 रुपये बोनस अर्थात 2625 रुपये क्विंटल गेहूं खरीदा है। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण हमारी प्रतिबद्धता है। आने वाले समय में एमएसपी बढ़ती जाएगी और किसान कल्याण के काम तेज होंगे। गेहूं का इतना उत्पादन होना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। हमारी सरकार किसान कल्याण के काम लगातार करती रहेगी। 10 वर्षों में सर्वाधिक खरीदी प्रदेश में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन का आंकड़ा पिछले 10 वर्षों में सर्वाधिक रहा है, यदि कोविड-19 अवधि को अपवाद मानें. इससे साफ है कि राज्य सरकार की नीतियां और खरीदी व्यवस्था लगातार बेहतर हो रही है।  राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. गेहूं उपार्जन में मिली यह सफलता सरकार की नीतियों, प्रशासनिक दक्षता और किसानों के सहयोग का परिणाम है. आने वाले समय में भी ऐसे प्रयास जारी रहेंगे। 

टूरिज्म हब बनने की राह पर छत्तीसगढ़, बड़े निवेश से होटल और पर्यटन उद्योग को मिलेगा बूस्ट

रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ अब देश के पर्यटन मानचित्र पर अपनी नई पहचान गढ़ने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने, निवेश अनुकूल नीतियों और राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण प्रदेश में पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश की संभावनाएं लगातार मजबूत हो रही हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज अपने निवास कार्यालय में पर्यटन को बढ़ावा देने, पर्यटक सुविधाओं के विकास एवं विस्तार तथा हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश को लेकर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में शामिल हुए। बैठक में देश की प्रतिष्ठित इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड के प्रतिनिधियों सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने बैठक में कहा कि छत्तीसगढ़ उत्तर से दक्षिण तक नैसर्गिक विरासत की अमूल्य धरा है, जहां नदियां, पहाड़, घने जंगल, जलप्रपात, समृद्ध आदिवासी संस्कृति और जनजातीय परंपराएं छत्तीसगढ़ को विशिष्ट पहचान प्रदान करती हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य दुनिया को छत्तीसगढ़ की वास्तविक सुंदरता, सांस्कृतिक समृद्धि और प्राकृतिक विविधता से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिए जाने से हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश की संभावनाएं तेजी से बढ़ी हैं और पर्यटकों के लिए बेहतर ठहराव, परिवहन तथा आधुनिक सुविधाओं के विकास के माध्यम से छत्तीसगढ़ को आकर्षक पर्यटन गंतव्य बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य में लगातार निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो रहे हैं और इसी क्रम में इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड द्वारा छत्तीसगढ़ में निवेश की इच्छा जताई गई है, जो प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के निवेश से पर्यटन अधोसंरचना मजबूत होगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर निर्मित होंगे। बैठक के दौरान इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष अपने निवेश प्रस्ताव के महत्वपूर्ण बिंदु साझा किए और बताया कि कंपनी छत्तीसगढ़ में हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में लगभग 500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश की योजना पर कार्य कर रही है, जिसे शीघ्र आगे बढ़ाया जाएगा। कंपनी के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस निवेश से प्रदेश में पर्यटन अधोसंरचना मजबूत होगी और रोजगार के नए अवसरों का सृजन होगा। वित्त मंत्री ओ पी चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार ने निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है तथा सभी आवश्यक अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है। बैठक में यह भी बताया गया कि  पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने के बाद हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश के रास्ते व्यापक रूप से खुले हैं। राज्य सरकार पर्यटन क्षेत्र को आधुनिक अधोसंरचना, उच्चस्तरीय सुविधाओं और निवेश प्रोत्साहन नीतियों के माध्यम से विकसित करने की दिशा में विशेष पहल कर रही है। प्रदेश की बेहतर मानसूनी परिस्थितियां, समृद्ध प्राकृतिक संपदा और निवेश अनुकूल नीति पर्यटन विकास के लिए मजबूत आधार तैयार कर रही हैं। बैठक में उद्योग विभाग के अधिकारियों ने निवेश प्रोत्साहन नीति तथा उपलब्ध इंसेंटिव्स की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यदि कोई निवेशक 500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश करता है अथवा 1000 से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है, तो उसे ‘बी-स्पोक पॉलिसी’ के तहत अतिरिक्त प्रोत्साहन एवं विशेष लाभ प्रदान किए जाएंगे। साथ ही पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आधारभूत संरचना, सड़क संपर्क, आवासीय सुविधाओं तथा पर्यटक सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।  बैठक में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, वित्त सचिव डॉ. रोहित यादव, निवेश आयुक्त ऋतु सेन, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, उद्योग सचिव रजत कुमार, पर्यटन विभाग सचिव डॉ. एस. भारतीदासन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

56वें रैंक के खिलाड़ी ने किया बड़ा धमाका, जैनिक सिनर को French Open से बाहर किया

पेरिस  गुरुवार 28 मई को फ्रेंच ओपन 2026 में सबसे बड़ा उलटफेर देखने को मिला. जब अर्जेंटीना के जुआन मैनुअल सेरुंडोलो ने दूसरे राउंड में ही दुनिया के नंबर वन खिलाड़ी जैनिक सिनर को हराकर टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया. इस शानदार मुकाबले में सिनर ने पहले दो गेम में 3-6, 2-6 से जबरदस्त जती दर्ज की. लेकिन उसके बाद वो लगातार तीन गेम 7-5, 6-1, 6-1 से हार गए. जिसके साथ ही इस इतालवी स्टार का 'करियर ग्रैंड स्लैम' पूरा करने का सपना भी टूट गया. क्योकं सिनर ग्रैंड स्लैम खिताबों में से सिर्फ फ्रेंच ओपन ही नहीं जीत सके हैं।  हार की वजह इस हार की वजह सिनर का तीसरे सेट में चोटिल होना रहा. जब सिनर तीसरे सेट में 5-1 से आगे चल रहे थे, तब ऐसा लग रहा था कि जीत उनकी ही होगी. लेकिन, अचानक मैच में एक नाटकीय मोड़ आया और सिनर को मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या होने लगी. 24 साल के इस इटालियन खिलाड़ी ने दो बार मैच को अपने नाम करने के लिए सर्विस की, लेकिन दोनों बार वह नाकाम रहे. इसके अलावा, 5-4 के स्कोर पर उन्हें कोर्ट से बाहर जाकर मेडिकल टाइम आउट भी लिया. उस पल के बाद, सिनर अपनी शारीरिक स्थिति को दोबारा ठीक नहीं कर पाए. सेरुंडोलो ने इसका पूरा फायदा उठाया और आखिरी 20 गेम में से 18 गेम जीतकर 2026 सीजन का अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर कर दिखाया।  जीत के बाद सेरुंडोलो ने क्या कहा? मैच के बाद दूनिया के 56वें रैंक के खिलाड़ी सेरुंडोलो ने सिनर के बारे में बात करते हुए कहा, 'यह बहुत मुश्किल काम था. मैं एक सेट में तीन से ज्यादा गेम नहीं जीत पा रहा था, इसलिए मैं थोड़ा किस्मतवाला रहा. इस मैच को जीतने के हकदार तो वही थे, लेकिन फिर न जाने क्या हो गया. मुझे उनके लिए बुरा लग रहा है और उम्मीद है कि वह जल्द ही ठीक हो जाएंगे।  सन 2000 के बाद पहली बार इसके साथ ये अर्जेंटीनाई खिलाड़ी सन 2000 में कैरोल कुसेरा के बाद पहला ऐसा पुरुष खिलाड़ी बन गया है, जिसने फ्रेंच ओपन में तीसरे राउंड से पहले ही टॉप सीड खिलाड़ी को टूर्नमेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया।  नया चैंपियन उभरने का मौका यह हार सिनर के करियर में एक दर्दनाक अध्याय जोड़ती है. पिछले साल फाइनल में उन्हें कार्लोस अल्काराज के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था. ये भी उल्लेखनीय है कि सिनर और अल्काराज ने मिलकर पिछले नौ बड़े खिताब अपने नाम किए हैं. सिनर के अब फ्रेंच ओपन से बाहर होने और अल्काराज के कलाई की चोट के कारण पहले से ही बाहर होने से, 2024 के ऑस्ट्रेलियन ओपन के बाद पहली बार इस टूर्नामेंट में एक नया चैंपियन उभरने का मौका खुला है।  सिनर शानदार फॉर्म में थे ये हार इसलिए भी चूभने वाली है, क्योंकि जैनिक सिनर अपने करियर की सबसे बेहतरीन फॉर्म में थे. वो लगातार 30 मैच जीत चुके थे. उन्होंने 2026 में अब तक हुए सभी पांच ATP मास्टर्स 1000 खिताब भी अपने नाम किए थे. लेकिन मैच के दौरान मांसपेशियों में खिचाव के कारण उन्हें हार का सामना करना पड़ा।  सेरुंडोलो की बड़ी उपलब्धि सिनर को हराने वाला सेरुंडोलो, जो अपने करियर में पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट के तीसरे दौर में पहुंचा है, का अगला मुकाबला स्पेनिश खिलाड़ी मार्टिन लैंडालूस या चेक खिलाड़ी विट कोप्रिवा से होगा।