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मीरजापुर में शिक्षक-स्नातक सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी ने भरी हुंकार, भाजपा प्रत्याशियों के लिए मांगा समर्थन

जनसमस्याओं के समाधान के रास्ते का बैरियर है सपा : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ   मीरजापुर में शिक्षक-स्नातक सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी ने भरी हुंकार, भाजपा प्रत्याशियों के लिए मांगा समर्थन   शिक्षकों को पांच लाख का स्वास्थ्य कवर, दुर्घटना पर डेढ़ करोड़ तक की सामाजिक सुरक्षा की गारंटी   सपा शासन में नौकरियों पर सैफई सिंडिकेट का कब्जा, अब साढ़े नौ लाख युवाओं को मिली सरकारी नौकरी   जो कभी माफिया के सामने नाक रगड़ते थे, वे आज कानून-व्यवस्था पर दे रहे उपदेश : मुख्यमंत्री योगी   पीडीए का ढोल पीटने वालों ने राज्यसभा में चाचा और धन्ना सेठ को चुना, दलित-पिछड़ों को नहीं दिया मौका   चुनाव के बाद फिर बंटेंगे टैबलेट, अब तक 62 लाख युवाओं को मिले, दो करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य   मीरजापुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को समाजवादी पार्टी को विकास और जनसमस्याओं के समाधान के रास्ते का बैरियर करार दिया। उन्होंने कहा कि अच्छा जनप्रतिनिधि चुनने से आधी से अधिक समस्याओं के समाधान का रास्ता खुल जाता है, जबकि गलत प्रतिनिधि चुनने से समाधान के मार्ग में बाधा खड़ी हो जाती है। समाजवादी पार्टी ऐसा ही बैरियर है। सपा ने मां विंध्यवासिनी कॉरिडोर, विश्वविद्यालयों, मेडिकल कॉलेजों, पुलों और घाटों के निर्माण में रोड़े अटकाए। इनका काम ही विकास में बाधा डालना है। ऐसे लोगों को बैरियर ही बने रहने दीजिए, चुनकर मत भेजिए। इनके बैरियर को एक झटके में उखाड़कर बाहर कर देंगे।   मुख्यमंत्री योगी मीरजापुर में वाराणसी खंड शिक्षक एवं स्नातक विधान परिषद चुनाव के लिए आयोजित सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शिक्षक सीट से भाजपा प्रत्याशी डॉ. प्रमोद मिश्रा और स्नातक सीट से केदारनाथ सिंह के समर्थन में आयोजित सम्मेलन में कहा कि दोनों प्रत्याशी पिछला चुनाव नहीं जीतने के बावजूद शिक्षकों और स्नातकों की समस्याओं को लेकर लगातार उनके पास आते रहे। उन्होंने 23 अक्टूबर को सुबह आठ से शाम चार बजे तक होने वाले मतदान में भागीदारी का आह्वान किया। कहा कि इनके माध्यम से आने वाली शिक्षकों और स्नातकों की समस्याओं के समाधान का रास्ता सरकार निकालेगी।   पीडीए का नारा, टिकट परिवार और धन्ना सेठ को मुख्यमंत्री योगी ने सपा के पीडीए के नारे पर हमला बोलते हुए कहा कि राज्यसभा चुनाव में इसका वास्तविक चेहरा सामने आ गया। दो प्रत्याशी बनाने थे तो एक टिकट अपने चाचा को और दूसरा मुंबई के धन्ना सेठ को दे दिया। न दलित को टिकट दिया, न पिछड़े को और न ही मुसलमान को। दूसरी ओर भाजपा ने आठ टिकटों में तीन सामान्य वर्ग, तीन पिछड़े वर्ग और दो अनुसूचित जाति को दिए। सभी आठ प्रत्याशी जीते। सपा ने परिवार और धन्ना सेठ को प्राथमिकता दी तो पीडीए की हवा निकल गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने खुद को नेहरू परिवार और सपा ने सैफई परिवार तक सीमित रखा। दोनों ने प्रदेश को बेगाना बनाया तो जनता ने भी इन्हें बेगाना बना दिया।   माफिया के सामने नाक रगड़ने वाले दे रहे उपदेश मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जिन लोगों ने प्रदेश के सामने पहचान का संकट खड़ा किया, जो माफिया के सामने गिड़गिड़ाते, घुटने टेकते और नाक रगड़ते थे, वे आज कानून-व्यवस्था पर उपदेश दे रहे हैं। सपा शासन में न सड़क थी, न बिजली, न पानी और न शिक्षा की समुचित व्यवस्था। नवरात्र में दुर्गा प्रतिमा स्थापित करने के लिए भी श्रद्धालुओं को मशक्कत करनी पड़ती थी। मंदिरों में गंदगी और अव्यवस्था रहती थी। आज सरकार जनता के साथ खड़ी है। सेवा संकल्प अभियान के तहत प्रत्येक ब्लॉक में शिविर लगाकर पात्र लोगों को योजनाओं से जोड़ा गया।   सैफई सिंडिकेट के कब्जे से मुक्त हुई नौकरियां मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि सपा शासन में नौकरियों पर सैफई सिंडिकेट का कब्जा था। जिसे सिंडिकेट चाहता था, उसी को नौकरी मिलती थी। तत्कालीन आयोग अध्यक्ष अनिल यादव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अयोग्य व्यक्ति को अध्यक्ष बनाया गया, जिसे हाई कोर्ट ने पद से हटाया। नौजवान सड़कों पर आंदोलन करते थे और अखिलेश सरकार उनकी आवाज अनसुनी करती थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने साढ़े नौ वर्षों में साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। 65 लाख लोगों को रोजगार मिला और एक जिला एक उत्पाद योजना से तीन करोड़ से अधिक रोजगार के अवसर विकसित हुए। अब युवा स्टार्टअप के माध्यम से नौकरी देने वाला भी बन रहा है।   चुनाव के बाद फिर शुरू होगा टैबलेट वितरण मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि विधान परिषद चुनाव संपन्न होने के बाद बड़े कार्यक्रम आयोजित कर स्नातक युवाओं को फिर टैबलेट वितरित किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य दो करोड़ युवाओं को टैबलेट उपलब्ध कराना है। अब तक 62 लाख युवाओं को टैबलेट दिए जा चुके हैं। डिजिटल अभियान को और तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत नीट, आईआईटी-जेईई, यूपीएससी सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की निशुल्क तैयारी कराई जा रही है। युवा ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से इसका लाभ उठा सकते हैं।   15 लाख शिक्षकों को स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले शिक्षकों को न सम्मान मिलता था, न स्वास्थ्य सुविधाएं। अब बेसिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा और स्ववित्तपोषित संस्थानों के 15 लाख शिक्षकों को परिवार सहित प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर दिया गया है। दुर्घटना की स्थिति में 40 लाख से डेढ़ करोड़ रुपये तक सामाजिक सुरक्षा की गारंटी है। प्रोजेक्ट अलंकार से माध्यमिक विद्यालयों में नए भवन, पुस्तकालय, स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी और कंप्यूटर लैब विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस और सपा को शिक्षा विरोधी बताते हुए कहा कि इनके शासन में शिक्षण संस्थानों की उपेक्षा हुई और युवाओं को पलायन करना पड़ा।   तीन जिलों में न मेडिकल कॉलेज था, न विश्वविद्यालय मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सपा को चार बार प्रदेश में सरकार चलाने का अवसर मिला, लेकिन विकास उसके एजेंडे में नहीं था। वर्ष 2017 से पहले मीरजापुर मंडल के तीनों जिलों में न मेडिकल कॉलेज था, न विश्वविद्यालय। अब मीरजापुर और सोनभद्र में मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। मीरजापुर में मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय और भदोही में काशी नरेश विश्वविद्यालय प्रारंभ हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि आस्था के केंद्र आर्थिक समृद्धि का माध्यम बन रहे हैं। प्रयागराज महाकुंभ, काशी … Read more

UP Startup Policy 2026: स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार का नया रोडमैप तैयार

योगी सरकार की यूपी स्टार्टअप नीति-2026 को छह प्रमुख स्तंभ देंगे रफ्तार  – एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग और डीप-टेक पर जोर, फंडिंग, स्किल डेवलपमेंट, उद्योगों से जुड़ाव और वैश्विक पहचान पर फोकस – StartinUP ऑनलाइन पोर्टल बनेगा सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म, रजिस्ट्रेशन से प्रोत्साहन तक की प्रक्रिया होगी ऑनलाइन – समस्याओं के समाधान के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर और सोशल मीडिया की मिलेगी सुविधा  –  युवाओं के आइडिया को कारोबार में बदलेगी नई स्टार्टअप पॉलिसी, एक मंच पर आएंगे स्टार्टअप, निवेशक और इन्क्यूबेटर लखनऊ  योगी सरकार ने प्रदेश को स्टार्टअप का हब बनाने के लिए स्टार्टअप नीति-2026 लागू की है। इसमें नवाचार, तकनीक और उद्यमिता को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। नई नीति का उद्देश्य प्रदेश में ऐसा मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार करना है, जहां युवाओं को नए विचारों को कारोबार में बदलने, वित्तीय सहायता प्राप्त करने, विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेने और अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के अवसर मिल सकें। इसके लिए बुनियादी ढांचे के विकास, वित्तीय सहायता, प्रतिभा विकास, उद्योगों से जुड़ाव, इकोसिस्टम के प्रचार और संस्थागत सहयोग को नीति के छह प्रमुख स्तंभों में शामिल किया गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम कंप्यूटिंग और डीप-टेक जैसी उभरती तकनीकों पर ध्यान देकर प्रदेश में नवाचार आधारित उद्यमों के विकास का रास्ता तैयार किया जा रहा है। छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित है नई स्टार्टअप पॉलिसी यूपी स्टार्टअप मिशन के सीईओ सुमित महाजन ने बताया कि योगी सरकार प्रदेश में युवाओं को नौकरी तलाशने वालों के साथ-साथ रोजगार देने वाले उद्यमियों के रूप में आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। स्टार्टअप नीति-26 के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रयास है कि प्रदेश के युवाओं, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और नए उद्यमियों को अपने विचारों को विकसित करने के लिए जरूरी संसाधन, मार्गदर्शन, तकनीकी सुविधाएं और बाजार से जुड़ने के अवसर एक ही व्यवस्था के तहत मिलें। इससे प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय जरूरतों के अनुरूप नए उद्यमों को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-26 को छह प्रमुख स्तंभों के आधार पर तैयार किया गया है। इनमें बुनियादी ढांचे का विकास, वित्तीय सहायता, प्रतिभा विकास एवं क्षमता निर्माण, उद्योगों से जुड़ाव, इकोसिस्टम का प्रचार-प्रसार और इकोसिस्टम को मजबूत बनाना एवं सक्षम करना शामिल हैं।  इन छह प्रमुख स्तंभ पर काम करेगी नई स्टार्टअप पॉलिसी सीईओ ने बताया कि पहले स्तंभ में बुनियादी ढांचे के तहत स्टार्टअप के लिए भौतिक और डिजिटल सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर है। दूसरे स्तंभ में वित्तीय सहायता के माध्यम से सरकारी योजनाओं और निजी निवेशकों से पूंजी प्राप्त करने के अवसर बढ़ाए जाएंगे। तीसरे स्तंभ में प्रतिभा विकास एवं क्षमता निर्माण के तहत शिक्षा, कौशल विकास और प्रशिक्षण के माध्यम से नवाचार आधारित कार्यबल तैयार करने का लक्ष्य है। चौथे स्तंभ में उद्योगों से जुड़ाव के जरिए स्टार्टअप, उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों और सरकार के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि नए उद्यमों को बाजार तक पहुंचने में मदद मिले। वहीं, पांचवे स्तंभ में इकोसिस्टम के प्रचार-प्रसार के लिए प्रदेश की स्टार्टअप क्षमता को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने, साझेदारियां विकसित करने और लक्षित प्रचार गतिविधियों पर ध्यान दिया जाएगा। छठे स्तंभ में संस्थागत क्षमता, हितधारकों की भागीदारी और सहयोग तंत्र को मजबूत करना भी नीति का अहम हिस्सा है। StartinUP ऑनलाइन पोर्टल बनेगा सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म नई स्टार्टअप नीति के तहत StartinUP ऑनलाइन पोर्टल को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जाएगा। यह स्टार्टअप, निवेशकों, इन्क्यूबेटरों, मेंटर्स, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) और अन्य संबंधित पक्षों को एक मंच पर जोड़ने का काम करेगा। इसे योगी सरकार के स्टार्टअप कार्यक्रम की डिजिटल पहचान के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे नीति के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और कार्यों के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा मिल सके। पोर्टल पर स्टार्टअप से जुड़ी नीतियों, प्रोत्साहनों, संसाधनों, इन्क्यूबेशन सेंटरों, आगामी कार्यक्रमों और सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें उद्यमियों को क्षमता निर्माण से जुड़े कार्यक्रमों और पाठ्यक्रमों का लाभ भी मिल सकेगा। इनमें उद्यमिता विकास, स्टार्टअप प्रबंधन, वित्तीय साक्षरता, नियामकीय अनुपालन, बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर), तकनीक के व्यावसायीकरण और बाजार तक पहुंच जैसे विषय शामिल होंगे। इसके लिए विषय विशेषज्ञों और सहयोगी संस्थानों को पोर्टल से जोड़ा जाएगा। इस प्लेटफॉर्म पर स्टार्टअप, इन्क्यूबेटर और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑनलाइन पंजीकरण कर सकेंगे। वे प्रोत्साहन राशि के लिए आवेदन और अपने दावों को संबंधित नोडल एजेंसी के समक्ष जमा कर सकेंगे।  स्टार्टअप से जुड़ी समस्याओं के लिए जारी किया जाएगा टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर नोडल एजेंसी की ओर से इनके मूल्यांकन और मंजूरी की प्रक्रिया संचालित की जाएगी। पोर्टल पर प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) भी उपलब्ध होगी, जिससे दैनिक गतिविधियों और नीति के क्रियान्वयन की निगरानी की जा सकेगी। इसके अलावा पोर्टल का एकीकरण केंद्र सरकार के डीपीआईआईटी, भास्कर और मार्ग जैसे स्टार्टअप इंडिया प्लेटफॉर्म से करने की व्यवस्था है। इसमें भविष्य में नई सुविधाओं और अन्य पोर्टलों के साथ एकीकरण की संभावनाओं को भी ध्यान में रखा गया है। स्टार्टअप से जुड़ी शिकायतों और सवालों के समाधान के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन तथा सोशल मीडिया आधारित सहायता की भी सुविधा मिलेगी। यह मंच स्टार्टअप, इन्क्यूबेटर, एक्सेलेरेटर, मेंटर्स, निवेशकों और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बीच नेटवर्किंग, साझेदारी और सहयोग को प्रोत्साहित करेगा।

दुर्गा पूजा पर रांची में बदलेगा ट्रैफिक रूट, 17 जगह बैरियर; जानें कहां मिलेगी पार्किंग

 रांची  दुर्गा पूजा को शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और सुरक्षित वातावरण में संपन्न कराने के लिए रांची पुलिस ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। पूजा पंडालों में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए शहर के प्रमुख मार्गों, पंडालों और संवेदनशील स्थानों का निरीक्षण किया जा रहा है।  इसी क्रम में बुधवार को पुलिस अधीक्षक नगर और पुलिस अधीक्षक यातायात ने विभिन्न पूजा पंडालों एवं महत्वपूर्ण मार्गों का रूट वेरिफिकेशन कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, पार्किंग और श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही से जुड़े बिंदुओं की समीक्षा की गई। संबंधित पुलिस पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए। मेन रोड में शाम से छोटे वाहनों का प्रवेश बंद दुर्गा पूजा के दौरान 14 से 21 अक्टूबर तक शहर की यातायात व्यवस्था में बदलाव लागू रहेगा। प्रतिदिन शाम 3:30 बजे से अगले दिन सुबह 3 बजे तक मेन रोड में छोटे वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी।  कचहरी चौक से शहीद चौक, फिरायालाल चौक होते हुए सुजाता चौक की ओर निजी कार, आटो, ई रिक्शा और छोटे मालवाहक वाहन नहीं जा सकेंगे। न्यू मार्केट चौक से किशोरगंज चौक तक भी छोटे वाहनों का प्रवेश बंद रहेगा। भारी वाहनों के लिए अलग समय निर्धारि शहरी क्षेत्र में प्रतिदिन सुबह 8 बजे से अगले दिन सुबह 4 बजे तक भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी। आवश्यक सामग्री लेकर आने वाले वाहनों को सुबह 3 बजे से 8 बजे के बीच शहर में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। यातायात व्यवस्था को नियंत्रित रखने के लिए शहर के प्रमुख प्रवेश मार्गों सहित 17 स्थानों पर ड्रॉप गेट और बैरियर लगाए जाएंगे। वैकल्पिक मार्गों से गुजरेंगे वाहन यातायात प्रतिबंध के दौरान कई मार्गों पर वाहनों का परिचालन बदला रहेगा। कांके रोड से कचहरी चौक जाने वाले वाहन जाकिर हुसैन पार्क और रेडियम रोड होकर गुजरेंगे। लालपुर से कोकर जाने वाला मार्ग वन-वे रहेगा।  हरमू रोड से छोटे वाहन अरगोड़ा चौक, कडरू, सुजाता चौक और मुंडा चौक होते हुए कांटाटोली जा सकेंगे। बरियातू रोड और डंगराटोली की ओर से आने वाले वाहनों को भी निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करना होगा। पूजा पंडालों के लिए तय किए गए पार्किंग स्थल श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अलग-अलग मार्गों से आने वाले वाहनों के पार्किंग स्थल निर्धारित किए गए हैं। फिरायालाल से बकरी बाजार जाने वाले श्रद्धालु जिला स्कूल और बालकृष्ण स्कूल परिसर में वाहन खड़े कर सकेंगे। डंगराटोली से आने वालों के लिए मिशन चौक और संत जॉन स्कूल के सामने पार्किंग की व्यवस्था रहेगी।  स्टेशन रोड के पंडालों में जाने वाले श्रद्धालु रेलवे भर्ती बोर्ड से चुटिया थाना मोड़ तक रेलवे पार्किंग का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके अलावा रामलखन यादव कॉलेज, न्यू मार्केट ऑटो स्टैंड, बड़ा तालाब नदी ग्राउंड, साधु मैदान, नागाबाबा खटाल, जाकिर हुसैन पार्क, रांची विश्वविद्यालय और संत जेवियर कॉलेज परिसर में भी पार्किंग की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा और सुगम आवागमन पर पुलिस का जो रांची पुलिस का उद्देश्य पूजा के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने के साथ श्रद्धालुओं की आवाजाही सुगम रखना है। पुलिस ने लोगों से निर्धारित रूट का पालन करने, तय पार्किंग स्थलों पर ही वाहन खड़े करने और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।  पुलिस के अनुसार, सामूहिक सहयोग से ही दुर्गा पूजा के दौरान शहर में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाए रखा जा सकता है।

दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री, नई पार्टी ‘जननीति भारत’ लॉन्च; जनता के लिए बताए तीन वचन

लखनऊ  आईएएस की नौकरी छोड़कर राजनीति में कदम रखने वालीं दिव्या मित्तल ने आज सोशल मीडिया पर लाइव आकर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। साथ ही अपनी नई पार्टी ‘जननीति भारत’ की घोषणा की। उन्होने कहा कि राजनीति आप पर राज करती है, लेकिन ये दल आपके राज के लिए बना है। पार्टी के तीन वचन बताते हुए कहा कि नई राजनीतिक पहल के तहत देश की नीतियों के केंद्र में आम लोगों को रखने पर जोर दिया गया है। नीतियां जनता की वास्तविक जरूरतों के आधार पर तय करने की बात कही गई है। किसानों और छोटे व्यापारियों की समस्याओं का समाधान उनके अनुभवों और सुझावों के आधार पर तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही विकास कार्यों और प्रशासनिक फैसलों में जाति, धर्म या पहचान के बजाय लोगों की वास्तविक आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। महिलाओं की सुरक्षा को भी प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। स्थानीय स्तर पर होने वाले विकास कार्यों में जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है, ताकि लोगों की जरूरतों के अनुरूप योजनाएं बनाई जा सकें और उनके क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनी रहे। दिव्या मित्तल ने बनाई जननीति भारत पार्टी दिव्या मित्तल ने वीडियो संदेश में बताया कि राजनीति में आने की बात कहने के बाद उन्होंने लोगों को एक नंबर दिया था, जिस पर इतने संदेश आए कि व्हाट्सएप ने उसे रोक दिया। उन्होंने इसके लिए माफी मांगते हुए लोगों के समर्थन पर आभार जताया। दिव्या ने कहा कि वह उम्मीद का दीया लेकर निकली थीं, लेकिन लोगों के संदेशों ने उन्हें सूरज के सामने खड़े होने जैसा एहसास कराया। उन्होंने अपनी नई पार्टी बनाने का ऐलान करते हुए कहा कि देश में पार्टियों की कमी नहीं, बल्कि सबकी सुनवाई नहीं होने की समस्या है। गंगा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां हर बूंद बराबर है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी पार्टी का नाम ‘जननीति भारत’ रखा है इससे पहले रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की जनसत्ता दल की ओर से दिव्या मित्तल को पार्टी से जुड़ने का प्रस्ताव दिए जाने की भी चर्चा उठी थी। वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी एक सवाल के जवाब में दिव्या मित्तल को सपा में शामिल होने का ऑफर दिया था। और कहा थी कि वो भी अब उन्हें तय करना पड़ेगा कि हरा गमछा और लाल गमछा डाल लें। आपको बता दें आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने करीब 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद नौकरी छोड़ने के बाद राजनीति में आने का फैसला किया। वे मिर्जापुर और देवरिया जैसे जिलों में जिलाधिकारी के पद पर तैनात रह चुकी हैं। अपने कार्यकाल के दौरान दिव्या मित्तल की पहचान सख्त प्रशासनिक कार्यशैली और फैसलों को लेकर चर्चा में रहने वाली अधिकारी के रूप में बनी। हालांकि, उनकी तैनाती के दौरान जनप्रतिनिधियों के साथ मतभेदों की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। मिर्जापुर में विकास कार्यों को लेकर स्थानीय नेताओं के साथ उनके टकराव की बात कही जाती रही है। 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर नौकरी से त्यागपत्र देने की जानकारी दी थी। उन्होंने लिखा कि 13 वर्षों की अविस्मरणीय सेवा यात्रा को अपनी इच्छा से विराम दिया है। साधारण परिवेश में पली-बढ़ीं दिव्या ने आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु से पढ़ाई के बाद लंदन में नौकरी की, लेकिन अपने देश के लिए कुछ करने की इच्छा उन्हें भारत वापस ले आई। उन्होंने आईएएस अधिकारी बनने को सौभाग्य बताया। दिव्या ने लिखा कि वह देश को कुछ देने आई थीं, लेकिन उन्हें लोगों से इतना प्यार, सम्मान और अपनापन मिला कि उनकी झोली भर गई। उन्होंने अपने कार्यकाल में साथ देने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और सहयोगियों के प्रति भी आभार जताया था।  

महतारी वंदन योजना बनी अनीता की आर्थिक मजबूती का सहारा, घरेलू खर्चों के साथ भविष्य के लिए भी कर रहीं बचत

सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी महतारी वंदन योजना बनी अनीता की आर्थिक मजबूती का सहारा, घरेलू खर्चों के साथ भविष्य के लिए भी कर रहीं बचत हर महीने मिलने वाले एक हजार रुपये से छोटी-छोटी जरूरतें हो रहीं पूरी, आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे कदम मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की महतारी वंदन योजना से बढ़ा महिलाओं का आत्मविश्वास, अनीता ने जताया आभार रायपुर,  घर की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य के लिए कुछ बचत कर पाना हर महिला की इच्छा होती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित महतारी वंदन योजना प्रदेश की महिलाओं की इसी आकांक्षा को पूरा करने में मददगार बन रही है। योजना के तहत प्रतिमाह मिलने वाली एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता महिलाओं को अपनी जरूरतों के लिए आर्थिक संबल प्रदान कर रही है। जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम अमोरा निवासी श्रीमती अनीता कश्यप भी इस योजना से लाभान्वित होकर घरेलू खर्चों का बेहतर प्रबंधन करने के साथ भविष्य के लिए छोटी-छोटी बचत कर रही हैं। घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ बचत की भी बनी आदत श्रीमती अनीता कश्यप को महतारी वंदन योजना के अंतर्गत हर महीने एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त होती है। वे इस राशि का उपयोग अपनी दैनिक आवश्यकताओं और परिवार के छोटे-मोटे घरेलू खर्चों को पूरा करने में करती हैं। इसके साथ ही खर्चों के बाद बची राशि को भविष्य की जरूरतों के लिए सुरक्षित रखने का प्रयास भी करती हैं। नियमित आर्थिक सहायता मिलने से उन्हें अपनी आवश्यकताओं के अनुसार खर्चों की योजना बनाने में सुविधा हो रही है। अनीता के लिए महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि केवल घरेलू खर्चों में सहयोग का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ने का अवसर भी है। छोटी-छोटी बचत के माध्यम से वे भविष्य में आने वाली आवश्यकताओं के लिए आर्थिक तैयारी कर पा रही हैं। इससे उन्हें अपनी जरूरतों के संबंध में निर्णय लेने और परिवार के खर्चों में योगदान देने का आत्मविश्वास मिल रहा है। हर महीने की सहायता से बढ़ रहा आर्थिक आत्मविश्वास श्रीमती अनीता कश्यप बताती हैं कि महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित राशि उनके लिए उपयोगी साबित हो रही है। इससे वे अपनी जरूरतों को पूरा करने के साथ कुछ पैसे बचाने का भी प्रयास करती हैं। हर महीने सहायता राशि प्राप्त होने से घरेलू खर्चों का प्रबंधन करना आसान हुआ है और भविष्य की जरूरतों के लिए बचत करने की प्रेरणा भी मिली है। उन्होंने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने वाली इस जनकल्याणकारी योजना के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता प्रदान कर उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है। श्रीमती अनीता कश्यप की यह कहानी दर्शाती है कि प्रतिमाह मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता राशि भी महिलाओं के दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। घरेलू जरूरतों की पूर्ति के साथ भविष्य के लिए बचत करने की उनकी पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में सकारात्मक बदलाव का उदाहरण है।

सेवा सेतु से आसान हुई सरकारी सेवाओं की राह, अजय कुमार के पुत्र को कुछ ही दिनों में मिला स्थायी जाति प्रमाण पत्र

सेवा संकल्प अभियान : सेवा की कहानी सेवा सेतु से आसान हुई सरकारी सेवाओं की राह, अजय कुमार के पुत्र को कुछ ही दिनों में मिला स्थायी जाति प्रमाण पत्र मोबाइल पर व्हाट्सऐप से मिली प्रमाण पत्र की डिजिटल प्रति, हार्ड कॉपी भी हुई उपलब्ध एक सदस्य का जाति प्रमाण पत्र बनने से परिवार के अन्य सदस्यों के लिए भी प्रक्रिया हुई आसान रायपुर,  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में शासकीय सेवाओं को सरल, सुगम और समयबद्ध बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का लाभ आम नागरिकों को मिल रहा है। सेवा सेतु केन्द्रों के माध्यम से अब आवश्यक प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हो रही है। जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा तहसील अंतर्गत ग्राम सांकर निवासी अजय कुमार का अनुभव इसका उदाहरण है। उन्होंने अपने पुत्र के आय, निवास एवं जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सेवा सेतु केन्द्र अकलतरा में आवेदन किया था। आवेदन के कुछ ही दिनों के भीतर उनके पुत्र का स्थायी जाति प्रमाण पत्र बनकर तैयार हो गया। प्रमाण पत्र की डिजिटल प्रति व्हाट्सऐप के माध्यम से उनके मोबाइल पर उपलब्ध कराई गई और हार्ड कॉपी भी शीघ्र प्रदान कर दी गई। कुछ ही दिनों में मिला प्रमाण पत्र, अनावश्यक इंतजार से मिली राहत अजय कुमार अपने पुत्र के आवश्यक दस्तावेज बनवाने के लिए तहसील कार्यालय अकलतरा स्थित सेवा सेतु केन्द्र पहुंचे थे। उन्होंने आय, निवास और जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुछ ही दिनों में उनके पुत्र का स्थायी जाति प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से प्रमाण पत्र की पीडीएफ प्रति सीधे उनके मोबाइल पर व्हाट्सऐप के जरिए प्राप्त हुई। इसके बाद प्रमाण पत्र की हार्ड कॉपी भी उपलब्ध करा दी गई। समय पर प्रमाण पत्र मिलने से अजय कुमार को अनावश्यक इंतजार नहीं करना पड़ा। डिजिटल माध्यम से दस्तावेज उपलब्ध होने के कारण प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया भी उनके लिए अधिक सुविधाजनक रही। परिवार के अन्य सदस्यों के लिए भी प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया हुई आसान अजय कुमार ने बताया कि उनके पुत्र का स्थायी जाति प्रमाण पत्र बनने से परिवार के अन्य सदस्यों के लिए भी जाति प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया आसान हुई है। परिवार में एक सदस्य का आवश्यक प्रमाण पत्र उपलब्ध होने से संबंधित दस्तावेजी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सुविधा मिल रही है। उन्होंने कहा कि सेवा सेतु केन्द्र के माध्यम से आवश्यक प्रमाण पत्र सरल तरीके से और समय पर उपलब्ध हो रहे हैं। इससे नागरिकों को सरकारी सेवाओं का लाभ प्राप्त करने में सहूलियत हो रही है। अजय कुमार ने इस सुविधा पर संतुष्टि व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया। डिजिटल तकनीक से नागरिकों के करीब पहुंच रही शासकीय सेवाएं सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सेवा सेतु केन्द्रों के माध्यम से नागरिकों को आवश्यक शासकीय सेवाएं समयबद्ध और सुविधाजनक तरीके से उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रमाण पत्रों की डिजिटल प्रतियां मोबाइल पर उपलब्ध होने से नागरिकों को दस्तावेज प्राप्त करने में सुविधा मिल रही है। अजय कुमार की यह कहानी दर्शाती है कि तकनीक आधारित नागरिक सेवाओं से सरकारी प्रक्रियाएं अधिक सरल और सुलभ बन रही हैं। सेवा सेतु केन्द्रों के माध्यम से आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध होने से नागरिकों के समय की बचत हो रही है और शासकीय सेवाओं तक उनकी पहुंच आसान बन रही है।

राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी पर संकट, बालोतरा में तेजी से सूख रहे पेड़; जांच की मांग तेज

बाड़मेर  थार की जीवनरेखा और राज्य वृक्ष खेजड़ी पर संकट मंडराने लगा है। बालोतरा जिले के गिड़ा क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुम्पलिया के राजस्व गांव चौधरी भूनारामजी गोदारा नगर में हरे-भरे खेजड़ी के पेड़ तेजी से सूख रहे हैं। पेड़ों के तनों और जड़ों के आसपास जमीन पर चूने या पत्थर जैसी कठोर सफेद परत जम रही है। ग्रामीणों के अनुसार, खेतों में लगी करीब 50 से अधिक खेजड़ी इससे प्रभावित हुई है, वहीं अन्य पेड़ों में भी ऐसे लक्षण दिख रहे है। कुम्पलिया के पूर्व पंच रणधीर सिंह गोदारा पेड़ों को बचाने के प्रयास कर रहे हैं। किसानों और पर्यावरण प्रेमियों ने समस्या की जांच और स्थायी समाधान के लिए प्रशासन से मांग की है। पर्यावरण को नुकसान की आशंका खेजड़ी अकाल में पशुओं को लूंग के रूप में चारा देती है। इसकी सांगरी पौष्टिक सब्जी है और पेड़ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद करता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, प्रभावित और स्वस्थ पेड़ों की मिट्टी, सिंचाई के पानी और जड़ों की जांच जरूरी है। कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विभाग की संयुक्त टीम सर्वे कर वास्तविक कारणों का पता लगा सकती है। खाद-कीटनाशकों से किए उपचार सफल नहीं रणधीर सिंह गोदारा के अनुसार, जड़ों के आसपास फफूंद जैसी सफेद परत बन रही है। इससे जड़ों की नमी और पोषक तत्व प्रभावित होने तथा जड़ सड़न की आशंका है। पानी, खाद और कीटनाशकों से किए गए शुरुआती उपचार सफल नहीं हुए। हालांकि, समस्या का वास्तविक कारण अभी वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है। मिट्टी में लवणों का जमाव, अधिक क्षारीयता, सोडियम की अधिकता, खराब जल निकास या जड़ों से जुड़े रोग संभावित कारण हो सकते हैं। जिला परिषद सदस्य दौलताराम गोदारा ने कलक्टर को पत्र लिखकर विशेषज्ञों की टीम भेजने और वैज्ञानिक उपचार कराने की मांग की है। खेजड़ी को बचाने के लिए पेड़ के साथ जड़ों के आसपास की मिट्टी को भी स्वस्थ बनाना होगा। मिट्टी, पानी और जड़ों की वैज्ञानिक जांच से सही कारण पता लगाकर समय पर उपचार किया जा सकता है। – डॉ. कृष्णा सहारण, कृषि विशेषज्ञ एवं सहायक आचार्य, कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर खेजड़ी का एक पौधा तैयार करने में वर्षों की मेहनत लगती है। प्रशासन को तत्काल अनुसंधान और आवश्यक उपचार के कदम उठाने चाहिए, ताकि जीवनदायिनी वृक्षों को बचाया जा सके। -दौलताराम गोदारा, जिला परिषद सदस्य

पंजाब में वाहन चालकों को राहत! आज फ्री रहेंगे टोल प्लाजा, जानें क्या है वजह

लुधियाना. देश के सबसे महंगे लाडोवाल टोल प्लाजा पर वीरवार को टोल प्लाजा वर्कर यूनियन ने पंजाब बंद के समर्थन में अपना काम बंद रखने का ऐलान किया। यूनियन के इस फैसले के चलते टोल प्लाजा को दिनभर टोल फ्री रखने की घोषणा की गई। इस मौके पर टोल प्लाजा वर्कर यूनियन पंजाब के प्रधान दर्शन सिंह लाडी ने कहा कि मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने इस घटना के विरोध में पंजाब सरकार पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री और डीजीपी से तुरंत इस्तीफा देने की मांग की। दर्शन सिंह लाडी ने कहा कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में यूनियन ने पंजाब बंद को समर्थन देने का फैसला किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टोल प्लाजा पर कोई भी कर्मचारी काम नहीं करेगा और टोल को फ्री रखा जाएगा। उधर, लाडोवाल टोल प्लाजा पर बंद के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन की ओर से पुख्ता प्रबंध किए गए है। मौके पर कई पुलिस अधिकारी मौजूद रहे ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके और स्थिति शांतिपूर्ण बनी रहे। टोल प्लाजा वर्कर यूनियन के इस ऐलान के चलते लाडोवाल टोल प्लाजा पंजाब बंद के समर्थन में केंद्र बिंदु बना रहा।

कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की तैयारी, हर घर तक मुनगा पहुंचाने का अभियान होगा शुरू

कुपोषण और एनीमिया से मुक्ति के लिए छत्तीसगढ़ में शुरू होगा  हर-घर मुनगा, घर-घर मुनगा अभियान रायपुर,   छत्तीसगढ़ शासन के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा राज्य में कुपोषण और एनीमिया जैसी गंभीर समस्याओं को जड़ से समाप्त करने के लिए एक महत्वाकांक्षी हर-घर मुनगा, घर-घर मुनगा अभियान चलाया जाएगा। इस संबंध में आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। मुनगा के औषधीय और पोषण संबंधी गुण     बैठक में बताया गया कि मुनगा (सहजन) की फलियों और पत्तियों में पोषक तत्वों का अपार भंडार होता है। इसमें आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन-ए और विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसे नियमित भोजन में शामिल करने से कुपोषण और एनीमिया की रोकथाम में काफी मदद मिलती है, विशेषकर कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह बेहद फायदेमंद है। अभियान की मुख्य रूपरेखा और निर्देश       अभियान के तहत राज्य के प्रत्येक घर में मुनगा के पौधे निःशुल्क वितरित किए जाएंगे और हर घर में इनका रोपण व देखभाल सुनिश्चित की जाएगी। नर्सरी में पौधों का तैयार होना उद्यानिकी, कृषि एवं किसान कल्याण तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की नर्सरियों में मुनगा के पौधे तैयार किए जाएंगे। फरवरी से मार्च माह के दौरान इन्हें घर-घर वितरित कर रोपित किया जाएगा। सभी जिलों के कलेक्टर इसकी निगरानी करेंगे। आंगनबाड़ी, स्कूल और छात्रावासों में लगाए जाएंगे मुनगा के पौधे       राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों, आश्रमों और छात्रावासों में भी मुनगा के पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराकर लगाए जाएंगे। पौधों के रोपण, उनकी सुरक्षा और सिंचाई सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल जियो-टैगिंग और लाइव डैशबोर्ड मॉनिटरिंग पर विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि हर पौधे के जीवित रहने की दर और पोषण स्तर पर सीधी नजर रखी जा सके।      इस अभियान को सफल बनाने के लिए कई प्रमुख विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग इस अभियान का नोडल विभाग होगा, जो आंगनबाड़ी स्तर पर समन्वय, हितग्राही चयन, पोषण शिक्षा और दैनिक निगरानी करेगा। राज्य के करीब 23 हजार 500 स्कूलों में मुनगा पौधे का रोपण कर शाला पोषण वाटिका का निर्माण किया जाएगा और मध्याह्न भोजन में मुनगा भाजी शामिल की जाएगी।  पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग       ग्राम पंचायत स्तर पर बाड़ियों की पहचान, नर्सरी तैयार करने और स्व-सहायता समूहों के सहयोग से जन-जन तक अभियान की जानकारी पहुंचाई जाएगी। उद्यानिकी एवं कृषि विभाग  गुणवत्तापूर्ण मुनगा कलम व उन्नत पौधे तैयार करने, रोपण तकनीक, जैविक खाद और पौध सुरक्षा में तकनीकी सहयोग प्रदान करेंगे। इसके लिए वन विभाग का सहयोग भी लिया जाएगा।           बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, आदिम जाति विकास विभाग के सचिव भूवनेश यादव, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह सहित वन, उद्यानिकी और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

Bilaspur JD Office में स्वीकृत पदों से ज्यादा तैनाती, 3 के बजाय 7 सहायक संचालक संभाल रहे जिम्मेदारी

बिलासपुर. संभाग के शिक्षा विभाग में प्रशासनिक व्यवस्थाओं की अजीब तस्वीर सामने आ रही है। एक ओर जहां जिले समेत पूरे संभाग के सरकारी हायर सेकेंडरी और हाई स्कूलों में प्राचार्यों के पद खाली पड़े हैं, वहीं दूसरी ओर संयुक्त संचालक (जेडी) कार्यालय में नियमों को ताक पर रखकर जरूरत से ज्यादा सहायक संचालकों का जमावड़ा लगा हुआ है। वहां 3 के स्थान पर 7 प्राचार्यों को सहायक संचालक बनाकर बैठा दिया गया है। एक तरफ जिला मुख्यालय पर अफसरों की फौज बैठी है, तो दूसरी तरफ जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के कई शासकीय हायर सेकेंडरी और हाई स्कूलों में प्राचार्यों के पद खाली पड़े हैं। इन स्कूलों में प्रशासनिक नियंत्रण और शैक्षणिक मॉनिटरिंग के अभाव में विद्यार्थियों की पढ़ाई और स्कूलों का संचालन प्रभावित हो रहा है। हालात यह हैं कि स्वीकृत पदों से दोगुने से अधिक सहायक संचालक केवल जेडी ऑफिस में जमे हुए हैं, जबकि मैदानी स्तर पर स्कूलों की कमान संभालने वाला कोई जिम्मेदार नहीं है। नियमानुसार जेडी कार्यालय में प्रशासनिक कार्यों के संचालन के लिए सहायक संचालकों के मात्र 3 पद स्वीकृत हैं। इसके बावजूद वर्तमान में इस कार्यालय में पूरे 7 सहायक संचालक पदस्थ हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से अधिकांश अधिकारी प्राचार्य वर्ग के हैं, जिन्हें स्कूलों में शैक्षणिक और प्रशासनिक नेतृत्व संभालना चाहिए था, लेकिन वे कार्यालयीन व्यवस्थाओं में जमे हुए हैं। जब उच्च पदस्थ योग्य प्राचार्य और सहायक संचालक स्तर के अधिकारी कार्यालयों में ही बैठे रहेंगे, तो स्कूलों की व्यवस्था कौन संभालेगा। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि मैदानी अमले और शिक्षण संस्थानों में अमले की कमी न हो, इसके बावजूद प्रशासनिक कुप्रबंधन के चलते योग्य अधिकारियों को स्कूलों में भेजने के बजाय दफ्तरों में बैठाकर रखा गया है। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस विसंगति को दूर कर कब तक प्राचार्यों को उनकी मूलस्थापना यानी स्कूलों में भेजता है ताकि शिक्षण व्यवस्था पटरी पर लौट सके। संयुक्त संचालक अश्विनी भारद्वाज ने बताया कि जेडी ऑफिस में तीन सहायक संचालकों के पद स्वीकृत है। उसके स्थान पर शासन ने सात सहायक संचालकों की पोस्टिंग की है। उक्त निर्णय शासन का है। इसलिए सभी सहायक संचालकों को आवश्यकतानुसार काम सौप दिए गए है। उक्त संबंध में उचित निर्णय शासन को लेना होगा।