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आम की फसल से काफी मुनाफा कमा रहे किसान, देश में 26 फीसदी आम का उत्पादन करता है उत्तर प्रदेशः सीएम

गुणवत्ता, विश्वास व वैश्विक मानकों पर खरा उतरे यूपी का आमः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में किया आम महोत्सव-2026 का शुभारंभ, स्टॉल्स का अवलोकन किया और आम की 800 प्रजातियों के बारे में जानकारी ली आम की फसल से काफी मुनाफा कमा रहे किसान, देश में 26 फीसदी आम का उत्पादन करता है उत्तर प्रदेशः सीएम  सीएम ने की काकोरी ब्रांड की चर्चा, कहा- इसमें देश के प्रति समर्पण का भाव और किसानों की मेहनत की मिठास  उद्यान विभाग को आम की अधिक से अधिक किस्मों को जीआई टैग दिलाने के लिए आवेदन करने का निर्देश लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में शुक्रवार को आम महोत्सव-2026 का शुभारंभ किया। उन्होंने स्टॉल्स का अवलोकन कर आम की 800 से अधिक प्रजातियों के बारे में भी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी तैयारी इस तरह होनी चाहिए कि यूपी के किसानों का आम गुणवत्ता, विश्वास व वैश्विक मानकों पर खरा उतर सके। हमारा लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित न रहे, बल्कि ब्रांडिंग, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग के साथ ही प्रोडक्ट की ट्रेसेबिलिटी व ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन पर भी ध्यान देना होगा। तभी यह एक्सपोर्ट के लिए स्वीकार्य होगा। एक बाग आय के कई मॉडल के रूप में फल उत्पादन, प्रोसेसिंग, टूरिज्म, ऑर्गेनिक उत्पाद, मधुमक्खी पालन, खाद्य उद्योग और एक्सपोर्ट के जरिए किसानों की आमदनी बढ़ाने का माध्यम बन सकता है।  माटी की खुशबू व मिठास से आकर्षित कर रहा आम  मुख्यमंत्री ने कहा कि जब सरकार के स्तर पर प्लेटफॉर्म मिलता है, शोकेसिंग का अवसर प्राप्त होता है तो यूपी के आम की प्रजातियों का पता चलता है। यहां प्रदेश व देश के अलग-अलग राज्यों से आम की 800 वैरायटी प्रदर्शित हो रही हैं। वाराणसी-गोरखपुर का लंगड़ा, गोरखपुर का गौरजीत, बस्ती का आम्रपाली, मलिहाबाद लखनऊ का दशहरी, बागपत व सहारनपुर के रटौल समेत प्रदेश के अलग-अलग जनपदों व मंडलों में पैदा होने वाली आम की किस्में वहां की माटी की सुगंध व मिठास के जरिए इस महोत्सव में आए हर व्यक्ति को आकर्षित कर रही है और यही यूपी की ताकत है।  प्लेटफार्म पर साझा हों किसानों के अनुभव सीएम ने मंच पर सम्मानित होने वाले किसानों से उत्पादन के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने बताया कि एक दिन औद्यानिक फसल से जुड़े किसान से बातचीत हो रही थी। वह प्राकृतिक तरीके से बाग में कीड़ों को नष्ट करने के तरीके बता रहे थे। उनका कहना था कि वह खुद तो इसका उपयोग करते हैं, लेकिन उनके अनुभव को प्लेटफॉर्म न मिलने से अन्य किसानों को व्यापक लाभ नहीं मिल पाता। इसे देखते हुए किसानों को उनके अनुभव साझा करने के लिए अधिक से अधिक प्लेटफॉर्म दिलाने के प्रयास में तेजी लाई जाएगी।  आम की फसल से अच्छा मुनाफा कमा रहे किसान सीएम ने कहा कि किसान सामान्यत: एक एकड़ में आम की फसल से दो से तीन लाख रुपये मुनाफा कमा रहे हैं। इसमें वैल्यू एडिशन, प्रोसेसिंग जोड़ेंगे, एक्सपोर्ट के लिए तैयार करेंगे मुनाफा और बढ़ जाता है। आम महोत्सव उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के किसानों के लिए भी शोकेसिंग का आधार है। वे अपने उत्पाद प्रस्तुत कर बायर्स-सेलर मीट के माध्यम से इसे वैश्विक पहचान दिला सकते हैं। मलिहाबाद के आम को जीआई टैग प्राप्त होने से उसे वैश्विक पहचान मिली है।  प्रदेश के हर हिस्से में पैदा होता है आम सीएम ने कहा कि 2017 से यह आयोजन अनवरत हो रहा है। पहले वर्ष महोत्सव में कम वैरायटी आई, लेकिन साल दर साल यह बढ़ता गया। इस साल आम की 800 वैरायटी आईं हैं। इसके साथ ड्रैगन फ्रूट व कमल की ब्रांडिंग भी देखने को मिली। यूपी के सभी 18 मंडलों, 75 जनपदों, 350 तहसीलों और 825 विकास खंडों में आम पैदा होता है। यहां 100 ग्राम से लेकर डेढ़-दो किलो तक वजन वाले आम दिखे। वैरायटी व स्वाद, अन्नदाता किसान व प्रदेश की ताकत को बढ़ाता है।  देश में 26 फीसदी आम का उत्पादन करता है उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के कुल आम उत्पादन में उत्तर प्रदेश 26 फीसदी हिस्सेदारी करता है। महोत्सव में 7 श्रेणियों के 56 वर्गों में 800 से अधिक वैरायटी हैं। सीएम ने आम महोत्सव में बायर्स-सेलर्स मीट की सराहना की। कहा कि यूपी में हम लोग ओडीओपी से जुड़े आयोजन करते हैं तो बायर्स-सेलर्स मीट अवश्य रखते हैं। इससे किसानों व उद्यमियों को अपने उत्पाद आगे बढ़ाने में मदद मिलती है। औद्यानिक फसलों से जुड़े किसान, स्वयं सहायता समूह, पैक हाउस, एक्सपोर्ट, फूड प्रोसेसिंग, नर्सरी मालिक, बैंकर्स, इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने वाला मैकेनिज्म, मशीनरी व उपकरण आपूर्तिकर्ता, रिसर्च व डवलपमेंट से जुड़े वैज्ञानिक भी इस कार्यक्रम से जुड़े हैं। उद्यान विभाग ने यूपी में औद्यानिक फसलों के लिए ईकोसिस्टम बनाने का कार्य किया है। वोकल फॉर लोकल को प्रोत्साहित करते हैं ऐसे महोत्सव सीएम ने कहा कि दुनिया बदल रही है। तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में यूपी में ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खाद्य प्रसंस्करण, महिला सशक्तीकरण, कृषि आधारित उद्योगों, पर्यटन, रोजगार व निर्यात संवर्धन की दृष्टि से यह बेहतरीन प्लेटफॉर्म है। ऐसे महोत्सव प्रधानमंत्री जी के वोकल फॉर लोकल को प्रोत्साहित करते हैं और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्रस्तुत करते हैं। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा आगे बढ़ने को प्रेरित करती है। कई देशों में होता है यूपी के आम का निर्यात  सीएम ने कहा कि यूपी ने खुद को भारत की बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है। यूपी के आम का निर्यात यूके, यूएई, कुवैत, मलेशिया, सिंगापुर, न्यूजीलैंड, बेल्जियम, जापान, इटली, रूस, कतर आदि देशों में हो रहा है। एपीडा जैसी एजेंसियां विदेशों में खरीदार व एफपीओ के बीच सीधा संपर्क स्थापित करती हैं।  काकोरी ब्रांड में दिखता है देश के प्रति समर्पण  सीएम ने मलिहाबादी आम की चर्चा करते हुए कहा कि हमने इसे ‘काकोरी ब्रांड’ दिया है। काकोरी के अमर शहीदों ने देश की आजादी के लिए खुद का बलिदान दिया। उनकी स्मृति को जीवंत बनाए रखने के लिए हमने इसे यह नाम दिया। काकोरी ब्रांड में देश के प्रति समर्पण का भाव और किसानों की मेहनत की मिठास है।  जेवर एयरपोर्ट के पास बनेगा इंटीग्रेटेड टेस्टिंग एंड ट्रीटमेंट पार्क सीएम ने कहा कि सहारनपुर, वाराणसी, लखनऊ, अमरोहा में आम के आधुनिक पैक हाउस काम कर रहे हैं। इसके माध्यम से आम … Read more

CM मोहन यादव ने की बारिश की समीक्षा, अधिकारियों को किसानों को समय पर मार्गदर्शन देने के निर्देश

भोपाल   संभावित अल्पवर्षा की आशंका को देखते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2 जुलाई को मंत्रालय में किसान कल्याण एवं कृषि विकास, जल संसाधन, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी समेत विभिन्न विभागों की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने कहा कि कम बारिश की संभावना को संकट के बजाय बेहतर योजना, वैज्ञानिक खेती और समय रहते तैयारी करने का अवसर माना जाना चाहिए। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करते हुए किसानों तक समय पर जरूरी जानकारी और मार्गदर्शन पहुंचाने के निर्देश दिए, ताकि कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर किसी प्रकार का नकारात्मक असर न पड़े।  मुख्यमंत्री  यादव ने  कहा कि कम वर्षा की संभावना को चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि बेहतर योजना, वैज्ञानिक खेती और समय पर तैयारी के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।उन्होंने बारिश की स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करना चाहिए और किसानों को समय पर मार्गदर्शन प्रदान करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो कि कृषि उत्पादन और किसानों की आय प्रभावित न हो।अधिकारियों ने बताया कि यादव ने सचिवालय में किसान कल्याण एवं कृषि विकास, जल संसाधन, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं अन्य विभागों द्वारा अब तक की गई तैयारियों की समीक्षा की। किसानों को वैज्ञानिक खेती और कम पानी वाली फसलों के लिए किया जाएगा प्रेरित मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि प्रदेश का हर किसान मौसम की चुनौतियों का सामना वैज्ञानिक तरीके और उचित तैयारी के साथ कर सके। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसानों को ऐसी फसलों के बारे में जागरूक किया जाए, जिन्हें कम पानी की जरूरत होती है और जो कम समय में तैयार हो जाती हैं। उन्होंने ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, तुअर, कोदो और कुटकी जैसी मोटे अनाज एवं दलहनी फसलों को अपनाने पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि ये फसलें कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं और किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो सकती हैं। बुआई में जल्दबाजी न करें, पर्याप्त नमी के बाद ही करें खेती मुख्यमंत्री ने किसानों को सलाह देने के निर्देश दिए कि पर्याप्त नमी बनने से पहले बुआई न करें। खेतों में नमी संरक्षण के उपाय अपनाने के साथ-साथ कम अवधि में अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों और आधुनिक कृषि तकनीकों का अधिक से अधिक उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की सलाह किसानों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाई जाए, ताकि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सही फसल का चयन किया जा सके। इसके लिए कृषि विस्तार तंत्र को और अधिक सक्रिय बनाने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार लगातार मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसानों को हर संभव तकनीकी एवं प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। दो वर्षों में जल संरक्षण और जलापूर्ति को मजबूत करने की तैयारी बैठक में बताया गया कि प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में वैकल्पिक जल स्रोतों की पहचान कर टैंकर आपूर्ति की आकस्मिक योजना तैयार की जाएगी। अमृत 2.0 के अंतर्गत जलप्रदाय योजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के तहत प्रत्येक गांव की समीक्षा होगी और बंद या अधूरी नल-जल योजनाओं की मरम्मत के लिए 90 दिन का विशेष अभियान चलाया जाएगा। 'जलाभिषेक 2.0' अभियान के तहत पुराने तालाबों, कुओं, बावड़ियों और अन्य जल संरचनाओं का सर्वे कर उनका जीर्णोद्धार किया जाएगा। मनरेगा के सहयोग से प्रत्येक विकासखंड में कम से कम 100 जल संरचनाओं को अगले दो वर्षों में पुनर्जीवित करने का लक्ष्य रखा गया है। भूजल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था पर रहेगा विशेष फोकस सरकार सभी विकासखंडों में रिचार्ज शाफ्ट, चेक डैम, स्टॉप डैम और खेत-तालाब निर्माण को मिशन मोड में आगे बढ़ाएगी। "खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में" की अवधारणा पर विशेष रूप से काम किया जाएगा। इसके साथ ही रबी सीजन से पहले नहरों की सफाई और मरम्मत पूरी करने तथा अंतिम छोर तक सिंचाई का पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए हैं। कम पानी वाली खेती और जिला स्तर पर आकस्मिक फसल योजना तैयार बैठक में जानकारी दी गई कि दलहन, तिलहन और श्रीअन्न जैसी कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। इनके समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था भी मजबूत की जाएगी। धान उत्पादक क्षेत्रों में डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) और वैकल्पिक गीला-सूखा सिंचाई पद्धति को बढ़ावा देने के साथ प्रत्येक जिले के लिए अलग-अलग कंटिन्जेंसी क्रॉप प्लान तैयार किया जा रहा है। जलाशयों के संचालन के लिए तय होगा स्पष्ट प्रोटोकॉल सरकार इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, बाणसागर और गांधीसागर सहित सभी प्रमुख जलाशयों के संचालन में तय नियमों का पालन सुनिश्चित करेगी। जल उपयोग की प्राथमिकता में सबसे पहले पेयजल, उसके बाद सिंचाई और अंत में विद्युत उत्पादन रखा जाएगा। इसके अलावा राज्य स्तर पर रियल-टाइम जल डैशबोर्ड तैयार किए जाएंगे, जिससे जलाशयों और जल संसाधनों की लगातार निगरानी की जा सके। "जल गंगा संवर्धन" अभियान की तर्ज पर जनभागीदारी वाले कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में जल संकट से निपटने के लिए अलग आकस्मिक योजना तैयार होगी। फसल बीमा, डिजिटल सर्वे और सोशल मीडिया से किसानों तक पहुंचेगी जानकारी बैठक में बताया गया कि आरबीसी 6(4) के तहत फसल क्षति सर्वे के लिए राजस्व, कृषि और पंचायत विभाग के अधिकारियों का संयुक्त प्रशिक्षण पहले ही पूरा कराया जाएगा। डिजिटल क्रॉप सर्वे और सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से नुकसान का आकलन कर 15 दिनों के भीतर सर्वे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। फसल बीमा का दायरा बढ़ाने और दावों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करने के लिए भी कार्यवाही की जा रही है। राज्य स्तरीय आकस्मिक कार्ययोजना विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी है। उन्नत बीज वितरण, फसल प्रदर्शन और बलराम तालाब योजना के तहत वर्षा जल संरक्षण के लक्ष्य जिलों को दिए जा चुके हैं। सरकार सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से किसानों को मौसम पूर्वानुमान, खेती से जुड़ी सलाह और आवश्यक जानकारी लगातार उपलब्ध कराएगी। सभी जिलों के कलेक्टरों को सिंचाई, जलभराव, जीवन रक्षक … Read more

एक पेड़ मां के नाम 3.0′ अभियान से हरित चेतना को मिलेगी नई उड़ान, जुलाई में स्कूलों में होगा महाअभियान

एक पेड़ मां के नाम 3.0' से हरित चेतना को मिलेगा नया विस्तार, जुलाई में विद्यालयों में पर्यावरण संरक्षण का महाअभियान  'इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ' के जुलाई कैलेंडर के तहत पूरे माह चलेंगी पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़ी गतिविधियां – पौधरोपण, प्रकृति भ्रमण, पोस्टर, स्लोगन, वाद-विवाद, लेखन और जागरूकता कार्यक्रमों से विद्यार्थियों में विकसित होंगे पर्यावरणीय संस्कार प्रत्येक विद्यार्थी बनेगा एक पौधे का संरक्षक, विद्यालयों से समाज तक पहुंचेगा हरित संदेश लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार विद्यालयों को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की प्रयोगशाला बनाने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रही है। इसी क्रम में 'इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ' के अन्तर्गत जुलाई माह का गतिविधि कैलेंडर जारी किया गया है। जुलाई माह का यह कैलेंडर विद्यालयों में हरित संस्कृति को मजबूत करने और मिशन लाइफ के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। कैलेंडर के अनुसार जुलाई मे पूरे महीने 'स्वस्थ जीवनशैली अपनाना' विषय पर आधारित गतिविधियां आयोजित होंगी, जिनका उद्देश्य विद्यार्थियों में प्रकृति संरक्षण, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और सतत जीवनशैली के प्रति व्यावहारिक दृष्टिकोण विकसित करना है। कैलेंडर में अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की सहभागिता पर भी विशेष बल दिया गया है, ताकि पर्यावरण संरक्षण केवल विद्यालय तक सीमित न रहकर जनभागीदारी का अभियान बन सके। योगी सरकार का उद्देश्य बच्चों में ऐसे व्यावहारिक संस्कार विकसित करना है, जो उन्हें प्रकृति के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनाए। 'एक पेड़ मां के नाम 3.0' बनेगा प्रमुख अभियान जुलाई माह की सबसे प्रमुख गतिविधि 'एक पेड़ मां के नाम 3.0' अभियान होगी। इसके अंतर्गत विद्यालय परिसर, सार्वजनिक स्थलों तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपयुक्त स्थानों पर पौधरोपण कराया जाएगा। विद्यार्थियों को पौधों के वैज्ञानिक, सामाजिक और पर्यावरणीय महत्व से अवगत कराया जाएगा, ताकि वे केवल पौधे लगाएं ही नहीं, बल्कि उनके संरक्षण का संकल्प भी लें। हर छात्र निभाएगा पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक लगाए गए पौधे की देखभाल, सिंचाई, संरक्षण और नियमित निगरानी की जिम्मेदारी विद्यार्थियों को सौंपी जाएगी। इसके साथ ही विद्यालयों में इको क्लब्स के माध्यम से पौधों की प्रगति की समीक्षा तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सामुदायिक प्रयासों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। रचनात्मक गतिविधियों से बढ़ेगी जागरूकता जुलाई के दौरान पोस्टर, स्लोगन, कोलाज, स्वतंत्र लेखन, वाद-विवाद और अन्य रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। विद्यार्थियों को प्रकृति भ्रमण के माध्यम से स्थानीय जैव विविधता, पौधों और प्राकृतिक संसाधनों का प्रत्यक्ष अध्ययन कराया जाएगा। दूसरे शनिवार को विशेष पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होंगे तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया जाएगा।

सरकारी नौकरी का मौका! MPESB में कृषि विस्तार अधिकारी के 2784 पदों पर आज से आवेदन, जानें योग्यता

भोपाल   मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड (MPESB), भोपाल ने किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग के अंतर्गत ग्रुप-2, सब-ग्रुप-1 कृषि विस्तार अधिकारी पदों पर आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती अभियान के माध्यम से कुल 2,784 रिक्तियां भरी जाएंगी। इच्छुक उम्मीदवार 17 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग में कृषि विस्तार अधिकारी (AEO) के 2784 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए आज से ऑनलाइन आवेदन शुरू हो गए हैं। अभ्यर्थी 17 जुलाई तक आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद 2 अगस्त से भर्ती परीक्षा आयोजित की जाएगी। यह भर्ती परीक्षा समूह-2, उप समूह-1 के तहत आयोजित की जा रही है। उम्मीदवार कर्मचारी चयन मंडल की आधिकारिक वेबसाइट www.esb.mp.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। 73% आरक्षण के साथ जारी होगा रिजल्ट कर्मचारी चयन मंडल ने भर्ती में राज्य की आरक्षण व्यवस्था लागू की है। अनुसूचित जाति (SC) को 20 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति (ST) को 16 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 प्रतिशत (न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। 73 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान पर परिणाम घोषित किए जाएंगे। आरक्षण के साथ जारी होगा रिजल्ट इस भर्ती में कुल 73 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत अनुसूचित जाति को 20 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति को 16 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। 2 अगस्त को दो पालियों में होगी परीक्षा कृषि विस्तार अधिकारी भर्ती परीक्षा 2 अगस्त को आयोजित होगी। परीक्षा दो पालियों में कराई जाएगी। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को निर्धारित समय पर पहुंचना होगा। रिपोर्टिंग समय समाप्त होने के बाद किसी भी उम्मीदवार को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिलेगा। परीक्षा में आधार सत्यापन अनिवार्य परीक्षा में शामिल होने के लिए आधार आधारित सत्यापन अनिवार्य रहेगा। अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र के साथ वैध फोटोयुक्त पहचान पत्र भी साथ लाना होगा। पहचान पत्र के बिना परीक्षा में प्रवेश नहीं मिलेगा। मोबाइल, स्मार्ट वॉच और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह प्रतिबंधित परीक्षा केंद्र में मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, कैलकुलेटर सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। परीक्षा शुरू होने के बाद से लेकर परीक्षा समाप्त होने तक किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा कक्ष छोड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इन उम्मीदवारों को आवेदन की पात्रता नहीं कर्मचारी चयन मंडल ने भर्ती के लिए कुछ पात्रता शर्तें भी तय की हैं। जिन अभ्यर्थियों की 26 जनवरी 2001 या उसके बाद दो से अधिक संतान हैं, वे आवेदन के पात्र नहीं होंगे। जिन पुरुष अभ्यर्थियों का विवाह 21 वर्ष की आयु से पहले और महिला अभ्यर्थियों का विवाह 18 वर्ष की आयु से पहले हुआ है, वे भी आवेदन नहीं कर सकेंगे। महिलाओं के विरुद्ध अपराध में दोषी ठहराए गए पुरुष भी इस भर्ती के लिए पात्र नहीं होंगे। ऐसे करें आवेदन योग्य और पात्र अभ्यर्थी कर्मचारी चयन मंडल की आधिकारिक वेबसाइट www.esb.mp.gov.in पर जाकर 17 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 2 अगस्त से परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा केंद्र के लिए जरूरी नियम – परीक्षा में शामिल होने के लिए बायोमेट्रिक (आधार आधारित) सत्यापन अनिवार्य होगा। – प्रवेश पत्र के साथ एक वैध फोटोयुक्त पहचान पत्र लाना जरूरी है। – परीक्षा केंद्र पर तय रिपोर्टिंग समय के बाद एंट्री नहीं मिलेगी। – मोबाइल, स्मार्ट वॉच और कैलकुलेटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह बैन रहेंगे। – परीक्षा शुरू होने के बाद पेपर खत्म होने से पहले उम्मीदवार कक्ष नहीं छोड़ सकेंगे। ये लोग नहीं कर पाएंगे आवेदन – जिन उम्मीदवारों के 26 जनवरी 2001 को या उसके बाद दो से अधिक बच्चे हैं, वे आवेदन नहीं कर सकते। – यदि पुरुष का विवाह 21 वर्ष और महिला का विवाह 18 वर्ष की कानूनी उम्र से पहले हुआ हैए तो वे पात्र नहीं होंगे। – महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में दोषी सिद्ध पाए गए पुरुष आवेदक भी इस भर्ती के लिए अयोग्य होंगे। – योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट www.esb.mp.gov.in पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। कौन कर सकता है आवेदन?     आवेदन की अंतिम तिथि तक अभ्यर्थी के पास निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होना आवश्यक होगा।      आवेदन की अंतिम तिथि तक उम्मीदवार के पास निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होना अनिवार्य है।     अनारक्षित (UR) वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है।     SC/ST/OBC/EWS/PwD, महिला उम्मीदवार, पूर्व सैनिक एवं संविदा कर्मचारी न्यूनतम 18 वर्ष और अधिकतम 45 वर्ष की आयु तक आवेदन कर सकते हैं।     पूर्व सैनिकों को सेवा अवधि के अनुसार अतिरिक्त आयु छूट का लाभ भी मिलेगा।     आयु में छूट मध्य प्रदेश शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार पात्र अभ्यर्थियों को प्रदान की जाएगी।  

ऐतिहासिक गुरुद्वारे को नुकसान पहुंचाने के आरोप पर SGPC सख्त, केंद्र से उठाई कार्रवाई की मांग

अमृतसर  पाकिस्तान के फरुखाबाद स्थित करीब 125 वर्ष पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के एक हिस्से को बुलडोजर से गिराए जाने के मामले में नया खुलासा हुआ है। जानकारी के अनुसार, जिस स्थानीय कारोबारी ने गुरुद्वारे के ढांचे को ध्वस्त कराया, उसने संबंधित सरकारी विभागों से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) अथवा अन्य वैधानिक अनुमति प्राप्त नहीं की थी। इस जानकारी के सामने आने के बाद सिख संगठनों में घटना को लेकर नाराजगी और बढ़ गई है। घटना के बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने भारत सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। कमेटी ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर पाकिस्तान सरकार के समक्ष इस मुद्दे को प्रभावी ढंग से उठाने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित कराने की मांग की है। साथ ही दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई किए जाने की भी अपील की गई है। सिख समुदाय की भावनाओं को पहुंची ठेस एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखने वाले गुरुद्वारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं विश्वभर के सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाती हैं। उनका कहना है कि यदि किसी भी ऐतिहासिक धार्मिक स्थल से जुड़ा कोई निर्माण कार्य या बदलाव किया जाना हो, तो उसे निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही किया जाना चाहिए। प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्थानीय कारोबारी ने बिना आवश्यक सरकारी स्वीकृति के बुलडोजर चलवाकर गुरुद्वारे के ऐतिहासिक ढांचे के एक हिस्से को गिरा दिया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय सिख समुदाय और विभिन्न धार्मिक संगठनों ने इसका विरोध जताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। पाकिस्तान सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग इस मामले पर भारत के विदेश मंत्रालय ने भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। मंत्रालय ने पाकिस्तान सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने और क्षतिग्रस्त ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा को उसके मूल स्वरूप में पुनर्स्थापित करने की मांग की है। इसके साथ ही पाकिस्तान में स्थित सभी धार्मिक स्थलों, विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों के पूजा स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। गौरतलब है कि पाकिस्तान में स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों और अन्य धार्मिक स्थलों के संरक्षण का मुद्दा समय-समय पर उठता रहा है। ऐसे में इस घटना ने एक बार फिर धार्मिक विरासत की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि पाकिस्तान सरकार इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और जांच के बाद कौन से तथ्य सामने आते हैं।

धार्मिक परंपराओं में हिस्सा नहीं लेने पर ग्रामसभा का फैसला, धर्मांतरण कर चुके आदिवासी परिवार को गांव छोड़ने का निर्देश

नारायणपुर  छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के एक गांव में धर्म परिवर्तन के विरोध में ग्रामीणों ने एक आदिवासी परिवार को गांव से बाहर कर दिया। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस ने दखल दिया। जिसके बाद ग्रामीणों और धर्म बदलने वाले आदिवासी परिवार के बीच समझौता हुआ। समझौते के अनुसार, आदिवासी परिवार को अपने मूल धर्म में लौटना होगा। पुलिस के अनुसार, परिवार के सदस्यों द्वारा अपनी मूल आदिवासी आस्था में लौटने पर सहमति जताने के बाद उन्हें दोबारा गांव में रहने की अनुमति दे दी गई। पुलिस के मुताबिक यह घटना जिले के खड़कागांव गांव की है। ईसाई धर्म अपना लिया था ग्रामीणों के अनुसार, आदिवासी समुदाय के सदस्य मंटू दुग्गा ने ईसाई धर्म अपना लिया था, जबकि उनके पुत्र मोहन दुग्गा कबीर पंथ का पालन कर रहे थे। ग्रामीणों ने दावा किया कि परिवार के प्रति कोई व्यक्तिगत दुर्भावना नहीं थी, लेकिन उन्होंने गांव की पारंपरिक आदिवासी धार्मिक परंपराओं में भाग लेना बंद कर दिया था। गांव में 12 लोग बदल चुके हैं धर्म ग्रामीण ने कहा, ‘‘हमने उनसे कई बार अपनी परंपराओं में लौटने का अनुरोध किया, लेकिन वे तैयार नहीं हुए। वर्षों तक समझाने के बाद ग्रामसभा में इस विषय पर चर्चा हुई और परिवार को गांव से बाहर करने का निर्णय लिया गया।’’ दावा किया कि गांव के करीब 12 परिवार अन्य धर्मों को अपना चुके हैं, लेकिन केवल दुग्गा परिवार को ही गांव से निकाला गया। विवाद का समाधान हो गया है और गांव में स्थिति शांतिपूर्ण है। परिवार ने अपनी मूल आदिवासी आस्था में लौटने पर सहमति जताई, जिसके बाद ग्रामीणों ने उन्हें गांव में रहने की अनुमति दे दी। सुशील नायक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीणों ने उपलब्ध कराया था मकान एक अन्य ग्रामीण राजमन कुमेटी ने आरोप लगाया कि परिवार को गांव में रहने के लिए जमीन और मकान उपलब्ध कराया गया था, लेकिन मूल आस्था में लौटने के लिए किए गए बार-बार के अनुरोध को उन्होंने स्वीकार नहीं किया। उन्होंने बताया कि परिवार का सामान घर से बाहर निकाल दिया गया था, हालांकि मकान को क्षति नहीं पहुंचाई गई।     ईसाई धर्म अपनाने पर ग्रामीणों ने परिवार को किया गांव से बाहर     पुलिस के दखल के बाद दोनों पक्षों के बीच हुआ समझौता     आदिवासी परिवार ने मूल धर्म में वापसी की कही है बात     धार्मिक परंपराओं में परिवार ने भाग लेना कर दिया था बंद कबीर पंथ का पालन करते हैं ग्रामीण उन्हें गांव में रहने से इसलिए रोका जा रहा है क्योंकि वह कबीर पंथ का पालन करते हैं, जो 15वीं शताब्दी के संत-कवि कबीर की शिक्षाओं पर आधारित धार्मिक परंपरा है। इस घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी गांव पहुंचे और ग्रामीणों तथा परिवार के सदस्यों से बातचीत की। ग्रामीणों ने बताया कि परिवार ने पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए और समुदाय को आश्वासन दिया कि वह आगे भी आदिवासी रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन करेगा।  

BAT-BMS App पर गिरी गाज, ई-रिक्शा बंद करने वाला ऐप Play Store से हटाया गया

नई दिल्ली सरकार के निर्देश पर ई-रिक्शा को बंद करने वाले ऐप BAT BMS App को Google Play Store और Apple App Store से हटा दिया गया है. इस कार्रवाई के तहत दो ऐप्स डिलीट किए गए हैं. आरोप है कि इन ऐप्स का इस्तेमाल ई-रिक्शा को दूर से (रिमोट के जरिए) बंद करने के लिए किया जा रहा था.  सुरक्षा और संभावित गलत इस्तेमाल की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया है. मामले की जांच और निगरानी आगे भी जारी रहेगी।  हाल ही में सोशल मीडिया पर BAT BMS App से जुड़े कई वीडियो और पोस्ट वायरल हुए हैं. इनमें दावा किया गया कि इस ऐप के जरिए कुछ लोग ई-रिक्शा को दूर से ही बंद कर रहे थे, जिससे कई चालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. ई-रिक्शा अचानक बंद होने की घटनाओं और चालकों की बढ़ती शिकायतों के बाद इस मामले ने गंभीर रूप ले लिया, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों ने इसकी जांच शुरू कर दी।  क्या है BAT BMS App? कई सस्ते ई-रिक्शा में लिथियम-आयन बैटरी लगी होती है. इन बैटरियों के अंदर बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) होता है, जो बैटरी की स्थिति पर नजर रखता है. यह बताता है कि बैटरी में कितना चार्ज बचा है, वह ज्यादा गर्म तो नहीं हो रही और कहीं कोई तकनीकी खराबी तो नहीं है.  कुछ सस्ती, खासकर चीन में बनी बैटरियों में इस BMS के साथ ब्लूटूथ की सुविधा भी दी जाती है।  अगर इस ब्लूटूथ पर पासवर्ड या सुरक्षा लॉक नहीं लगाया गया हो, तो आसपास मौजूद कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल से उससे कनेक्ट हो सकता है. ठीक वैसे ही जैसे बिना पासवर्ड वाले वाई-फाई या खुले ब्लूटूथ से कोई भी जुड़ सकता है. BAT-BMS ऐप इसी ब्लूटूथ कनेक्शन का इस्तेमाल करके बैटरी के सिस्टम तक पहुंच सकता है, जिसे सुरक्षा के लिहाज से बड़ा रिस्क माना जा रहा है।  क्या है ब्लूटूथ कनेक्शन की रेंज? इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) में सुरक्षा लॉक नहीं होता, उनमें ब्लूटूथ की रेंज आमतौर पर 10 से 15 मीटर तक होती है. इसका मतलब है कि कोई व्यक्ति सड़क किनारे, पास खड़े वाहन या बाइक से भी ब्लूटूथ के जरिए बैटरी सिस्टम से जोड़ने की कोशिश कर सकता है. ऐसे में ई-रिक्शा अचानक बंद हो सकता है और चालक को ये भी समझ ही नहीं आता कि रिक्शा में क्या दिक्कत आई है।  हालांकि, अच्छी और ब्रांडेड कंपनियों की बैटरियों में मजबूत सुरक्षा और एन्क्रिप्शन सिस्टम होता है, इसलिए उन पर इस तरह का रिस्क नहीं माना जाता है. यह रिस्क ज्यादातर से कम कीमत वाली और बाद में लगाई गई (आफ्टरमार्केट) बैटरियों में देखी जा रही है, जिनका इस्तेमाल बड़ी संख्या में ई-रिक्शा में किया जाता है। 

दैनिक वेतनभोगियों को राहत, हाईकोर्ट ने ग्रेच्युटी का अधिकार माना; राज्य सरकार को झटका

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के पक्ष में एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला आया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दैनिक वेतन भोगी के रूप में दी गई सेवाओं के लिए भी कर्मचारी ग्रेच्युटी पाने के हकदार हैं। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकल पीठ ने इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा दायर की गई याचिकाओं के पूरे बैच को खारिज कर दिया है। विवाद जल संसाधन विभाग छत्तीसगढ़ के विभिन्न संभागों में कार्यरत रहे कर्मचारियों सदानंद मानिकपुरी, बाबूलाल साहू, नैन सिंह क्षत्रिय, शैलेंद्र तिवारी व अन्य से जुड़ा है। इन कर्मचारियों ने दैनिक वेतन भोगी के रूप में लंबी सेवाएं दी थीं, जिसके बाद उन्हें नियमित किया गया था। ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के तहत सक्षम प्राधिकारी और अपीलीय प्राधिकारी ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें दैनिक वेतन भोगी अवधि की भी ग्रेच्युटी देने का आदेश दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। राज्य सरकार का पक्ष: शासकीय अधिवक्ता विनय पांडे ने तर्क दिया कि इसी तरह के एक मामले धनसाई साहू बनाम छत्तीसगढ़ राज्य में सुप्रीम कोर्ट ने इस कानूनी बिंदु को तीन जजों की बड़ी बेंच को रेफर किया है। चूंकि मामला देश की सर्वोच्च अदालत के समक्ष लंबित है, इसलिए हाई कोर्ट को इस मामले की सुनवाई तब तक टाल देनी चाहिए। कर्मचारियों की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता विनोद देशमुख ने सुप्रीम कोर्ट के ही ''''नेत्राम साहू बनाम छत्तीसगढ़ राज्य 2018 फैसले का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह तय कर चुका है कि कल्याणकारी राज्य में वर्षों तक कम वेतन पर काम लेने के बाद कर्मचारियों को ग्रेच्युटी से वंचित करना न्याय का मज़ाक होगा। हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निष्कर्ष हाई कोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष को सही ठहराते हुए राज्य सरकार की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में मुख्य रूप से दो बातें साफ कीं। सुप्रीम कोर्ट के अशोक सदारंगानी 2012 मामले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इस आधार पर मामले को अनिश्चितकाल के लिए नहीं टाला जा सकता कि कोई संदर्भ बड़ी बेंच के पास लंबित है। जब तक कोई बड़ी बेंच पुराना फैसला बदल नहीं देती, तब तक पुराना कानून ही लागू रहेगा। कोर्ट ने पूर्व के फैसलों को दोहराते हुए कहा कि यदि किसी कर्मचारी ने 22-25 साल तक दैनिक वेतन भोगी के रूप में निरंतर सेवा दी है और बाद में उसे नियमित किया गया है, तो विभाग को स्वेच्छा से उसे ग्रेच्युटी का भुगतान करना चाहिए, न कि उसे अदालतों के चक्कर काटने पर मजबूर करना चाहिए। भविष्य का रास्ता हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की सभी 9 रिट याचिकाएं खारिज कर दी हैं। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि भविष्य में सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच द्वारा जो भी अंतिम फैसला आएगा, वह दोनों पक्षों पर बाध्यकारी होगा। यदि भविष्य में स्थिति बदलती है, तो राज्य सरकार के पास नए सिरे से कानूनी विकल्प चुनने की स्वतंत्रता होगी। इस फैसले से प्रदेश के हजारों ऐसे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है जो अपने सेवाकाल का एक लंबा हिस्सा दैनिक वेतन भोगी के रूप में बिता चुके हैं।

इंटीमेट सीन्स और Kiss पर खुलकर बोलीं सिंपल कौल, कहा- रिश्ते में भरोसा सबसे ज़रूरी

मुंबई  फिल्मों-शोज में किसिंग सीन शूट करना आम माना जाता है, लेकिन कई बार इन पर विवाद भी हो जाता है और रिश्ते टूटने की कगार पर भी जाते हैं. टीवी इंडस्ट्री की मशहूर एक्ट्रेस सिंपल कौल ने इंटीमेट और किसिंग सीन्स को लेकर अपनी राय रखी है. एक्ट्रेस का कहना है कि एक्टर के लिए ऐसे सीन्स सिर्फ उसके काम का हिस्सा होते हैं, इसलिए इन्हें पर्सनल लाइफ से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।  'किसिंग सीन करना पड़े तो कोई दिक्कत नहीं' न्यूज एजेंसी से खास बातचीत में सिंपल कौल ने कहा कि एक्टिंग एक प्रोफेशन है और कलाकार को वही करना पड़ता है, जिसकी कहानी में जरूरत होती है। उन्होंने कहा- अगर कोई एक्टर किसिंग सीन या कोई भी इंटीमेट सीन करता है, तो वह सिर्फ अपने काम का हिस्सा निभा रहा होता है. अगर मेरे पति या पार्टनर को भी प्रोफेशनल तौर पर ऐसा सीन करना पड़े, तो मुझे उससे कोई परेशानी नहीं होगी, क्योंकि वह सिर्फ उनका काम है।  'लेकिन अफेयर हुआ तो बिल्कुल बर्दाश्त नहीं' हालांकि सिंपल ने साफ कर दिया कि ऑनस्क्रीन इंटीमेसी और असल जिंदगी के रिश्ते में बड़ा फर्क होता है. उन्होंने कहा- अगर कोई अपने रिश्ते से बाहर जाकर किसी के साथ सचमुच रिलेशनशिप रखता है, तो वह बिल्कुल अलग बात है. उसे मैं कभी सही नहीं मानूंगी।  रिश्तों में भरोसे और वफादारी पर बात करते हुए सिंपल कौल ने दो टूक कहा- चीटिंग तो चीटिंग ही होती है. इसकी कोई दूसरी परिभाषा नहीं हो सकती. अगर दो लोग एक-दूसरे से प्यार करते हैं, तो उन्हें ईमानदार और वफादार रहना चाहिए।  'कमिटमेंट नहीं चाहिए तो पहले ही साफ कह दें' एक्ट्रेस का मानना है कि अगर किसी को कमिटमेंट नहीं चाहिए, तो उसे शुरुआत से ही अपने इरादे साफ कर देने चाहिए. उन्होंने कहा- अगर रिश्ते में कोई बदलाव या आकर्षण महसूस हो रहा है, तो उसे छिपाने के बजाय ईमानदारी से अपने पार्टनर से बात करनी चाहिए. लेकिन धोखा देना किसी भी हाल में सही नहीं है।  वर्कफ्रंट की बात करें तो सिंपल कौल 'कुटुंब', 'शरारत', 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा', 'ओए जैस्सी', 'यम हैं हम', 'दिल्ली वाली ठाकुर गर्ल्स' और 'जिद्दी दिल माने ना' जैसे कई फेमस टीवी शोज का हिस्सा रह चुकी हैं।   

श्रीरामानुज संस्कृत परिसर बनेगा वैदिक अध्ययन और भारतीय दर्शन का प्रमुख केंद्र: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

श्रीरामानुज संस्कृत परिसर वैदिक अध्ययन, भारतीय दर्शन, ज्ञान परम्परा के अध्ययन-अध्यापन और शोध का बनेगा महत्वपूर्ण केंद्र : उप मुख्यमंत्री शुक्ल श्रीरामानुज संस्कृत परिसर में 243 पदों के सृजन का प्रस्ताव शीघ्र करें तैयार भोपाल  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के श्रीरामानुज संस्कृत परिसर, लक्ष्मण बाग, रीवा के सशक्तीकरण एवं संस्थागत विकास संबंधी प्रस्तावों की समीक्षा की। बैठक में अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा अनुपम राजन उपस्थित थे। बैठक में श्रीरामानुज संस्कृत परिसर, रीवा में अध्ययन-अध्यापन, शोध, प्रकाशन, परीक्षा, प्रशासनिक एवं विस्तार गतिविधियों के सुचारु संचालन के लिए शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों के सृजन के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। परिसर के लिए कुल 243 पदों के सृजन तथा उनकी पूर्ति तीन वर्षों में चरणबद्ध रूप से किए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसमें 117 शैक्षणिक, 4 प्रशासनिक तथा 122 गैर-शैक्षणिक पद सम्मिलित हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि श्रीरामानुज संस्कृत परिसर संस्कृत, वैदिक अध्ययन, भारतीय दर्शन, प्राचीन शास्त्रों तथा भारतीय ज्ञान परम्परा के अध्ययन-अध्यापन और शोध का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। परिसर में आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध होने से विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध मार्गदर्शन और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं प्राप्त होंगी। उन्होंने परिसर के संधारण एवं शैक्षणिक गतिविधियों के विस्तार के लिए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पदों की स्वीकृति से श्रीरामानुज संस्कृत परिसर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानकों के अनुरूप शैक्षणिक वातावरण विकसित होगा। साथ ही संस्कृत भाषा, वैदिक ज्ञान, भारतीय दर्शन और पारम्परिक विद्या प्रणालियों के संरक्षण, संवर्धन एवं व्यापक प्रसार को नई गति मिलेगी। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि श्रीरामानुज संस्कृत परिसर, लक्ष्मण बाग, रीवा की स्थापना मध्यप्रदेश शासन द्वारा 5 अक्टूबर 2023 को की गई थी। परिसर में संस्कृत, वैदिक अध्ययन तथा भारतीय शास्त्रों एवं भारतीय ज्ञान परम्परा से संबंधित विषयों में अध्ययन-अध्यापन एवं शोध कार्य संचालित किए जा रहे हैं। वर्तमान में परिसर में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों का संचालन सीमित मानव संसाधनों से किया जा रहा है। परिसर में वेद, वेदान्त दर्शन, व्याकरण, साहित्य, ज्योतिष, संस्कृत, योग, पुराणेतिहास, धर्मशास्त्र, वास्तुशास्त्र, संगीत, मानविकी, पौरोहित्य, हिन्दू अध्ययन, भारतीय ज्ञान परम्परा और शिक्षाशास्त्र सहित विभिन्न विभागों की स्थापना एवं सुदृढ़ीकरण का प्रस्ताव है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने इन विभागों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग मानकों के अनुरूप प्रोफेसर, सह प्राध्यापक एवं सहायक प्राध्यापक के पद सृजित किए जाने के लिए प्रस्ताव शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए।