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ईद-उल-अजहा को लेकर राजधानी दिल्ली में पैरामिलिट्री फोर्स तैनात, अलर्ट पर पुलिस

नई दिल्ली  बकरीद यानी ईद-उल-अजहा पर राजधानी में सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने के लिए सभी संवेदनशील इलाकों में पुलिस ने पैरामिलिट्री फोर्सेस के साथ फ्लैग मार्च शुरू कर दिया है। खुफिया यूनिट स्पेशल ब्रांच एक्टिव हो चुकी है। नाइट पेट्रोलिंग में इजाफा कर दिया गया है। पुलिस अफसरों के मुताबिक, थाने से लेकर जिला लेवल पर सभी समुदायों के मौज़ूज़ शख्सियतों की मौजूदगी में अमन कमिटियों, रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशंस (RWA) और मार्केट वेलफेयर एसोसिएशंस (MWA) की मीटिंग हो चुकी हैं। सांप्रदायिक सद्भावना बनी रहे और त्योहार के दौरान माहौल ना बिगड़े, इसके लिए जरूरी हिदायतें दी गई हैं। संदिग्ध गतिविधि का पता चलने पर तुरंत पुलिस को सूचना देने को कहा गया है। अफवाहों से बचने और उन्हें फैलाने वालों से अलर्ट रहने को कहा गया है। जनता से अपील है कि सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखें। संवेदनशील इलाकों में कड़ी निगरानी है। माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। अफ्रीका समिट रद्द होने के बाद दिल्ली में बढ़ाई गई सुरक्षा भारत-अफ्रीका फोरम समिट कैंसिल हो चुकी है। इसके लिए राजधानी में पैरामिलिट्री फोर्सेस की 60 कंपनियां बुलाई गई थीं। लिहाजा इन कंपनियों को अब दिल्ली के सभी जिलों में भेज दिया गया है। धार्मिक रूप से संवेदनशील रहे इलाकों में ज्यादा फोर्स दी गई है। इस बीच, धार्मिक स्थलों की भी सुरक्षा बढ़ाई गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी के लिए भी स्पेशल टीमें बनाई गई हैं। शांति बनाए रखने की अपील आउटर-नॉर्थ जिले में डीसीपी हरेश्वर स्वामी, नॉर्थ ईस्ट जिले के डीसीपी राहुल अलवर, द्वारका जिले के डीसीपी कुशल पाल सिंह, साउथ वेस्ट जिले के डीसीपी अमित गोयल और नॉर्थ-वेस्ट जिले के एडिशनल डीसीपी सिकंदर सिंह ने अपने-अपने जिलों की अमन कमिटी और धार्मिक प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कीं। जामा मस्जिद एरिया में डीसीपी (सेंट्रल) रोहित राजबीर सिंह और रोहिणी जिले के प्रेम नगर में एसएचओ विक्रम सिंह ने पैरामिलिट्री फोर्सेस के साथ मार्च निकाला।

घर से निकलते समय दिखें ये संकेत हो सकते हैं शुभ या अशुभ

 हमारे आसपास होने वाली कुछ घटनाओं और संकेतों को शुभ (अच्छा) व अशुभ (हानिकारक) माना जाता है. प्राचीन भारतीय मान्यताओं में यह विश्वास किया जाता है कि प्रकृति और जीव-जंतु मनुष्य को आने वाले समय के बारे में संकेत देते हैं. हालांकि, आधुनिक विज्ञान भले ही इन मान्यताओं को प्रमाणित नहीं करता, फिर भी भारतीय समाज में इनका सांस्कृतिक और मानसिक महत्व आज भी बना हुआ है. चलिए ज्योतिष से जानते हैं कि घर से निकलते वक्त समय कौन से संकेत शुभ होते हैं और कौन से अशुभ. कबाड़ दिखना यदि घर के बाहर निकलते समय सामने दरवाजे पर आपको फल या सब्जी वाला, कबाड़ी अपनी भरी ढेल के साथ और जमादार कचरे की भरी टोकरी के साथ नजर आए तो यह काम में सफलता प्राप्ति का संदेश है. गाय दिखना घर के बाहर निकलते ही गाय, जल भरकर ले जाते किसी व्यक्ति का दिखना भी शुभ संकेत होता है. बर्तन दिखना इसके विपरीत किसी भी प्रकार से बर्तन लेकर जाते व्यक्ति का दिखना काम में अड़चन या पूर्ण न हो पाने का संकेत है.   झाड़ू का उल्टा रखा दिखना घर के मुख्य द्वार पर झाड़ू का उल्टा रखा होना भी अशुभ माना जाता है. झाड़ू को धन और लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है. इसलिए उसका अपमान आर्थिक परेशानी का कारण माना जाता है. टूटा शीशा इसी प्रकार घर में टूटे हुए शीशे या बंद घड़ी रखना नकारात्मक ऊर्जा का संकेत माना जाता है, क्योंकि यह रुकावट और अव्यवस्था को दर्शाते हैं. तुलसी का पौधा सूखना यदि घर में अचानक तुलसी का पौधा सूख जाए तो इसे अशुभ माना जाता है. तुलसी को पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है. पक्षी का आना इसके विपरीत, घर में पक्षियों का घोंसला बनाना शुभ संकेत है, क्योंकि यह शांति और समृद्धि का प्रतीक समझे जाते हैं. छींक आना छींक से जुड़ी मान्यताएं भी काफी प्रसिद्ध हैं. यदि किसी काम के लिए निकलते समय एक बार छींक आ जाए तो लोग कुछ क्षण रुक जाते हैं. इसका कारण यह माना जाता था कि शरीर की अचानक प्रतिक्रिया स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी हो सकती है. लेकिन लगातार दो छींकें सामान्य मानी जाती हैं. सुबह के संकेत सुबह-सुबह मंदिर की घंटी सुनना, शंख की ध्वनि या गाय का दर्शन शुभ माना जाता है. शंख की ध्वनि को वातावरण शुद्ध करने वाला माना गया है. रात के संकेत वहीं, रात में रोते हुए कुत्ते की आवाज को कई लोग अशुभ संकेत मानते हैं, क्योंकि पुराने समय में इसे संकट या बीमारी से जोड़कर देखा जाता था. क्या बिल्ली का रास्ता काटना अशुभ होता है? बिल्ली का रास्ता काटना आम तौर पर अशुभ संकेतों में से एक माना जाता है. किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए जाते समय बिल्ली सामने से रास्ता काट दे तो काम में बाधा आ सकती है. कुछ स्थानों पर इसे देवी शक्ति और रहस्य का प्रतीक माना जाता है, जबकि कुछ मान्यताओं में इसे अशुभ संकेतों से भी जोड़कर देखा गया है. दरअसल, बिल्ली को राहु और केतु जैसे ग्रहों की छाया से जोड़कर देखा जाता है. पुराने समय में जब सड़कें सुनसान और अंधेरी होती थीं, तब बिल्ली का अचानक रास्ता काटना यात्रा में खतरे का संकेत माना जाता था. इसलिए लोग कुछ देर रुककर आगे बढ़ते थे ताकि संभावित दुर्घटना या परेशानी से बचा जा सके. धीरे-धीरे यह मान्यता बिल्ली का रास्ता काटना अशुभ होने के नजरिए से देखा जाने लगा. धार्मिक कथाओं में यह भी माना जाता है कि बिल्ली अत्यधिक सतर्क और रहस्यमयी स्वभाव की होती है. इसका अचानक आना व्यक्ति को सावधान रहने का संकेत माना जाता था. यानी यह सीधे अशुभ नहीं बल्कि चेतावनी का प्रतीक भी समझा जाता था. हिंदू धर्म में बिल्ली को पूरी तरह नकारात्मक नहीं माना गया है. कई जगह इसे मातृत्व और संरक्षण का प्रतीक भी समझा जाता है. देवी शक्ति का वाहन बिल्ली को माना जाता है. इस कारण कई परिवारों में बिल्ली को भोजन देना शुभ कार्य माना जाता है.

जून 2026 में व्रत और त्योहारों की धूम: संकष्टी चतुर्थी से निर्जला एकादशी तक खास तिथियां

 हिंदू धर्म और पूजा-पाठ के लिहाज से जून 2026 का महीना बेहद खास रहने वाला है. इस महीने ज्येष्ठ और आषाढ़ का महीना एक साथ पड़ने जा रहा है, जिसकी वजह से पूरे महीने त्योहारों की धूम रहेगी. जून की शुरुआत ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा से होगी और महीना खत्म होते-होते आषाढ़ शुरू हो जाएगा. अगर आप भी जून के महीने में आने वाले व्रत और त्योहारों की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आइए देखते हैं कि इस बार कौन सा त्योहार किस तारीख को पड़ रहा है. जून के पहले आधे हिस्से के व्रत (1 से 15 जून) जून की शुरुआत में संकष्टी चतुर्थी और परम एकादशी जैसे कई बड़े व्रत रखे जाएंगे. इसी दौरान अधिकमास भी खत्म होने जा रहा है. 3 जून (बुधवार): संकष्टी चतुर्थी व्रत 7 जून (रविवार): अधिक भानु सप्तमी 8 जून (सोमवार): मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 11 जून (गुरुवार): परम एकादशी व्रत 12 जून (शुक्रवार): प्रदोष व्रत 13 जून (शनिवार): मासिक शिवरात्रि 14 जून (रविवार): अमावस्या 15 जून (सोमवार): मिथुन संक्रांति (इसी दिन अधिकमास खत्म हो जाएगा) जून के आखिरी आधे हिस्से के त्योहार (16 से 30 जून) महीने के आखिरी 15 दिनों में निर्जला एकादशी और वट सावित्री पूर्णिमा जैसे बहुत बड़े और कठिन व्रत रखे जाएंगे, जिसमें महिलाएं अपनी फैमिली की खुशहाली के लिए उपवास रखती हैं. 17 जून (बुधवार): महाराणा प्रताप जयंती 21 जून (रविवार): भानु सप्तमी (यह साल का सबसे बड़ा दिन भी होगा) 22 जून (सोमवार): दुर्गाष्टमी व्रत 25 जून (गुरुवार): निर्जला एकादशी व्रत और गायत्री जयंती 27 जून (शनिवार): शनि प्रदोष व्रत 29 जून (सोमवार): वट पूर्णिमा व्रत और ज्येष्ठ पूर्णिमा 30 जून (मंगलवार): आषाढ़ महीने की शुरुआत

करी पत्ता स्टोर करने के आसान तरीके: महीनों तक रहेगा फ्रेश और हरा-भरा

 चाहे सुबह का गरमा-गरम पोहा हो, सांभर, नारियल की चटनी हो या फिर दाल का कड़कड़ाता हुआ तड़का, करी पत्ते के बिना हर पकवान अधूरा सा लगता है. इसकी खुशबू भूख तो बढ़ाती ही है, साथ ही यह हमारी सेहत के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है. हर भारतीय घर की गर्मियों में एक आम समस्या है, हम बाजार से बड़े चाव से हरा-भरा करी पत्ता खरीद कर लाते हैं या पड़ोस के गमले से तोड़कर लाते हैं, लेकिन दो से तीन दिनों में ही वह काला, सूखा और बेजान होने लगता है. अच्छी बात यह है कि कुछ घरेलू तरीकों की मदद से आप महीनों तक करी पत्ते की ताजगी बनाएं रख सकते हैं. आइए आपको कुछ ऐसे ही बेहद आसान और असरदार देसी नुस्खों के बारे में बताते हैं, जिन्हें अपनाकर आप करी पत्ते को महीनों तक एकदम फ्रेश रख सकते हैं. एयरटाइट डिब्बा और टिशू पेपर यह सबसे आसान और असरदार तरीका है, करी पत्ते को किसी एयरटाइट डिब्बे में रख दें. इसके लिए सबसे पहले करी पत्तों को डंडियों से अलग कर लें और साफ पानी से अच्छी तरह धो लें. अब इन्हें एक सूती कपड़े या टिशू पेपर पर फैलाकर पंखे के नीचे पूरी तरह सुखा लें. सूखने के बाद एक प्लास्टिक या कांच के एयरटाइट डिब्बे के नीचे टिशू पेपर बिछाएं, उसमें पत्ते डालें और ऊपर से एक और टिशू पेपर रखकर डिब्बा बंद कर दें. इसे फ्रिज में रखें, पत्ते महीनों तक हरे बने रहेंगे. मलमल का कपड़ा है मददगार पत्तों को धोकर अच्छे से सुखाने के बाद, उन्हें एक हल्के और साफ सूती या मलमल के कपड़े में ढीला-ढीला बांध लें. इस पोटली को फ्रिज के वेजिटेबल बॉक्स में रख दें. कपड़ा पत्तों से एक्स्ट्रा नमी को सोख लेता है और पत्ते सड़ते नहीं हैं. पत्तियों को फ्रीज करें स्टोर अगर आप करी पत्तों को 6 महीने से भी अधिक चलाना चाहते हैं तो सूखी हुई पत्तियों को जिप-लॉक बैग में भरकर उसकी पूरी हवा निकाल दें. फिर इसे सीधे फ्रीजर में रख दें. जब भी इस्तेमाल करना हो, मुट्ठी भर पत्ते निकालें और सीधे तड़के में डाल दें. इससे इनका स्वाद और खुशबू दोनों लंबे समय तक वैसी ही बनी रहती है. तेल में भूनकर रखना करी पत्ते को आप लंबे समय तक इस्तेमाल करना चाहते हैं तो आप उनको तेल में फ्राई करके भी स्टोर कर सकते हैं. इसके लिए एक कड़ाही में आधा चम्मच तेल गरम करें और करी पत्तों को धीमी आंच पर हल्का सा भून लें. ठंडा होने पर इन्हें किसी कांच की बरनी में भरकर फ्रिज में रख दें. इस टिप का रखें खास ध्यान करी पत्ते को कभी भी धूप में न सुखाएं, इससे उसकी असली खुशबू और स्वाद उड़ जाता है. हमेशा इन्हें छांव या पंखे की हवा में ही सुखाएं. इन छोटे-छोटे देसी जुगाड़ को अपनाकर आप जब चाहे, अपनी रसोई को करी पत्ते की बेहतरीन खुशबू से महका सकते हैं.

रोज सुबह एक कीवी खाने से मिलते हैं कई जबरदस्त हेल्थ फायदे

आजकल लोग अपनी हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए डाइट में कई तरह के फलों को शामिल करते हैं. इन्हीं में से एक है कीवी जो दिखने में छोटा जरूर होता है लेकिन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. अगर आप रोज सुबह खाली पेट या नाश्ते में सिर्फ एक कीवी खाते हैं तो इससे शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व मिल सकते हैं. विटामिन C, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर कीवी इम्यूनिटी बढ़ाने से लेकर ओवरऑल हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है. आइए जानते हैं रोज सुबह एक कीवी खाने से शरीर को क्या-क्या फायदे मिल सकते हैं. इम्यूनिटी को मजबूत बनाता है कीवी में भरपूर मात्रा में विटामिन C पाया जाता है जो शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है. रोजाना सुबह कीवी खाने से मौसमी बीमारियों और संक्रमण का खतरा कम हो सकता है. डाइजेशन को बेहतर बनाता है कीवी में एक्टिनिडिन नाम का एंजाइम होता है जो प्रोटीन को पचाने में मदद करता है. इससे पेट फूलने, गैस और अपच जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है. स्किन हेल्दी होती है विटामिन C और E से भरपूर कीवी चेहरे को हेल्दी और ग्लोइंग बनाए रखने में मदद करता है. यह कोलेजन प्रोडक्शन बढ़ाकर बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करने में भी मदद करता है. ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखने में मदद करता है कीवी में मौजूद पोटैशियम शरीर में सोडियम के असर को बैलेंस करने में मदद करता है, जिससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है और दिल की सेहत भी बेहतर बनी रहती है. वेट लॉस में मददगार कम कैलोरी और ज्यादा फाइबर होने की वजह से कीवी खाने के बाद पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करता है. इससे बार-बार भूख नहीं लगती और वजन कंट्रोल करने में मदद मिलती है. आंखों के लिए फायदेमंद कीवी आंखों के लिए भी काफी फायदेमंद है. इसमें ल्यूटिन और जेक्सैंथिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो आंखों को नुकसान से बचाने और उसे हेल्दी रखने में मदद करते हैं. बॉडी को डिटॉक्स करने में मदद करता है कीवी बॉडी को डिटॉक्स करने में भी मदद करता है. इसमें पानी और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है जो शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने और गट हेल्थ को बेहतर बनाने में मदद करता है.

IPS अफसर के घर मातम, बेटी की मौत के बाद मोबाइल खंगाल रही पुलिस

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक आईपीएस अधिकारी की 16 वर्षीय बेटी ने खुदकुशी कर ली. यह दिल दहला देने वाला हबीबगंज थाने क्षेत्र में चार इमली स्थित सरकारी बंगले का है, जहां नाबालिग ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी. सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस की टीम को वहां से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है. ऐसे में बच्ची ने यह कदम क्यों उठाया, इसकी वजह सामने नहीं आ सकी है।  बताया जा रहा है कि घर के हेल्पर ने लड़की को दुपट्टे से बने फंदे पर झूलते देखा और चीख-पुकार मच गई. फिलहाल, पुलिस ने मृतक लड़की का मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने आखिरी बात किससे की थी या फिर मैसेज आदि में ऐसी कोई वजह मिले जिसकी वजह से लड़की यह कदम उठा सकती है।  AIG हैं मृतक लड़की के IPS पिता बता दें, मृतक नाबालिग लड़की के IPS अधिकारी पिता पुलिस हेडक्वॉर्टर्स (PHQ) में असिस्टेंट इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (AIG) पद पर पोस्टेड हैं. लड़की की मां रजिस्ट्रार गैस राहत के पद पर हैं।  घर में अकेली थी लड़की   जब लड़की ने यह खौफनाक कदम उठाया, उस समय घर में उसके अलावा और कोी मौजूद नहीं था. बुधवार (27 मई) की सुबह माता-पिता दोनों ऑफिस गए हुए थे. उनका एक बड़ा बेटा भी है जो उस समय घर के बाहर था. अब पुलिस मृतक लड़की के परिजनों, दोस्तों, स्कूल में टीचर्स आदि से बात कर यह समझने की कोशिश करेगी कि सुसाइड के पीछे की वजह क्या है. वहीं, नाबालिग के कमरे में उसके फोन, अन्य इलेक्ट्रॉनिक चीजों की भी जांच की जाएगी।  अंबुज पांडेय, 2012 से सक्रिय  पत्रकारिता में हैं. वर्तमान में ABP न्यूज़ में बतौर प्रिंसिपल कॉरस्पॉडेंट, भोपाल मध्य प्रदेश में कार्यरत हैं. न्यूज़ पॉइंट, NNIS न्यूज़ एजेंसी, APN न्यूज़, ANI, और PTI में बतौर राजनैतिक संवाददाता काम किया . पॉलिटिकल रिपोर्टिंग के साथ-साथ, जन सरोकारों से जुड़ी खबरें, सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरें और विषम परिस्थिति में प्राकृतिक आपदाएं कवर करने का अनुभव है। 

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार, पुराने गेस्ट टीचर्स को पक्का करने के निर्देश

चंडीगढ़. हरियाणा के सरकारी स्कूलों में करीब दो दशक से गेस्ट फैकल्टी शिक्षक और व्याख्याता के तौर पर सेवाएं दे रहे शिक्षकों को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस संदीप मोदगिल की पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीति के तहत याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को नियमित किया जाए और उन्हें सभी परिणामी सेवा एवं सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाएं। मामला सुखविंदर सिंह एवं अन्य द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने हरियाणा सरकार की 18 जून 2014 की नियमितीकरण नीति के आधार पर अपनी सेवाएं नियमित करने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं ने क्या कहा? याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें वर्ष 2005-06 में सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों के विरुद्ध गेस्ट फैकल्टी शिक्षक और व्याख्याता के रूप में नियुक्त किया गया था। नियुक्ति प्रक्रिया विज्ञापन जारी करने, चयन समितियों के गठन, आवेदनों की जांच और मेरिट सूची तैयार करने के बाद पूरी की गई थी। राज्य सरकार ने अदालत में दलील दी कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति केवल अस्थायी व्यवस्था के तौर पर की गई थी और वे नियमित भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त नहीं हुए थे, इसलिए वे नियमितीकरण के पात्र नहीं हैं। हालांकि हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यदि सरकार की दलील स्वीकार कर ली जाए तो नियमितीकरण नीति का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा, क्योंकि संविदा कर्मचारी स्वाभाविक रूप से नियमित भर्ती प्रक्रिया से बाहर ही नियुक्त होते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्तियां “बैकडोर एंट्री” या गुप्त तरीके से नहीं हुई थीं, बल्कि सार्वजनिक प्रक्रिया के तहत योग्य उम्मीदवारों का चयन किया गया था। हाई कोर्ट ने क्या कहा? हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार स्वयं मान चुकी है कि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी के कारण इन शिक्षकों को नियुक्त किया गया था और लगभग 20 वर्षों तक उनकी सेवाएं लगातार ली जाती रहीं। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि इतने लंबे समय तक शिक्षकों की सेवाएं ली गईं तो उन्हें केवल “स्टॉप गैप अरेंजमेंट” बताना पूरी तरह आत्मविरोधी और अनुचित है। कोर्ट ने अपने फैसले में शिक्षकों की भूमिका पर भी विस्तृत टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला होते हैं तथा उन्हें मनमाने ढंग से “स्पेयर” की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि लगातार 20 वर्षों तक संविदा पर कार्य लेने के बाद राज्य अब यह नहीं कह सकता कि ये केवल अस्थायी कर्मचारी थे। फैसले में सुप्रीम कोर्ट के “मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य” मामले का भी उल्लेख किया गया, जिसमें सर्वोच्च अदालत ने 2014 की नियमितीकरण नीतियों की वैधता को बरकरार रखा था। हाई कोर्ट ने कहा कि अब नीति की वैधता पर विवाद समाप्त हो चुका है और याचिकाकर्ता नीति की शर्तों को पर्याप्त रूप से पूरा करते हैं। अंततः हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि दो महीने के भीतर याचिकाकर्ताओं की सेवाओं को नियमित किया जाए और उन्हें सभी सेवा एवं रिटायरल लाभ प्रदान किए जाएं। गेस्ट टीचर एसोसिएशन के नेता रघु वत्स ने बताया कि राज्य में इस समय 12,700 के करीब गेस्ट टीचर लगभग 20 साल से सेवा दे रहे है। कोर्ट के इस फैसले से उनकी वर्षों की लड़ाई सफल रही है और उनको एक टीचर के तौर पर सम्मान मिला है।  

डीलर्स की हड़ताल से राजस्थान में ईंधन संकट की आशंका

 जयपुर राजस्थान में 1 जून से आम लोगों को पेट्रोल-डीजल के संकट का सामना करना पड़ सकता है. ऐसा नहीं है कि प्रेट्रोल-डीजल की आवक रुकने वाली है, बल्कि प्रदेशभर के पेट्रोल-पंप संचालकों ने 1 जून से अनिश्चितकालीन पंप को ठप करने की चेतावनी दी है. पंप संचालकों ने सरकार और तेल कंपनियों की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का अल्टीमेटम दे दिया है. इसे लेकर पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन ने सीएम भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर समस्याओं से अवगत कराया है. इसके साथ ही चेतावनी दी है कि अगर समस्या का समाधान नहीं किया गया तो प्रदेश के सभी पेट्रोल पंप पर ताले लटक जाएंगे और पूरे प्रदेश में पहिया थम सकता है. WhatsApp और मौखिक आदेश से तेल देने की सीमा निर्धारित बताया जा रहा है कि इस हड़ताल का कारण पेट्रोल-डीजल को लेकर तेल कंपनियों द्वारा लगाई गई पाबंदियां है. एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह भाटी का आरोप है कि प्रदेश के कई इलाकों में पेट्रोल पंप तेल खत्म होने की कगार पर पहुंच रहे हैं. जबकि इंडियन ऑयल जैसी बड़ी कंपनियों ने WhatsApp मैसेज और मौखिक आदेशों के जरिए ग्राहकों तेल देने की सीमा निर्धारित कर दी है. भाटी ने बताया कि अगर तेल कंपनी के नियमों के खिलाफ अगर कोई पंप ग्राहक को एक बार में 50 हजार रुपये से अधिक का डीजल और 5000 रुपये से अधिक का पेट्रोल नहीं दिया जा सकता है. दूसरी ओर भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने भी अपनी सप्लाई बेहद सीमित कर दी है. अगर जरूरतमंद को सीमा से ज्यादा तेल दिया जाता है तो कंपनियां एकतरफा कार्रवाई करते हुए सप्लाई रोक देती है. जो नियमों का सरासर उल्लंघन है. वहीं तेल नहीं देने पर अनावश्यक लोगों में भ्रम फैलता है और लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है. VAT कम करने की मांग एसोसिएशन की ओर से राजस्थान में ईंधन पर लगाए जा रहे भारी VAT का भी विरोध किया है. इस वजह से पूरे देश में सबसे महंगा पेट्रोल-डीजल राजस्थान में बिक रहा है. डीलरों की मांग है कि राजस्थान में भी अन्य राज्यों की तरह 5 प्रतिशत VAT कटौती की जाए. इसके अलावा अलग-अलग जिलों में कीमतों के भारी अंतर और हरियाणा-पंजाब की तुलना में राज्य में CNG की अत्यधिक कीमतों को लेकर भी उपभोक्ताओं और डीलर्स में भारी असंतोष है. किसानों के लिए स्थिति होने वाली है गंभीर डीलरों का कहना है कि संकट अभी और बढ़ने वाली है जिससे किसान परेशान होने वाले हैं. क्योंकि आगामी बुवाई के सीजन को देखते हुए खेतों में डीजल की मांग बढ़ने वाली है. जबकि तेल कंपनियां नियमों का हवाला देकर ड्रमों में डीजल देने पर सख्त पाबंदी लगा रखी है. ऐसे में किसान अपने बड़े कृषि उपकरणों को बार-बार शहरों के पंप तक नहीं ला सकते और अब हालात गंभीर हो सकते हैं. पीएम दौरे और सरकारी रैलियों के उधार लिया गया लाखों का ईंधन डीलर्स ने तेल वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए तेल डिपो और पेट्रोल पंपों पर आधुनिक 'फ्लोमीटर' लगाने की मांग भी दोहराई है, ताकि हर बूंद का सही हिसाब मिल सके और कमी के लिए केवल डीलर्स को जिम्मेदार न ठहराया जाए. एसोसिएशन ने तेल कंपनियों द्वारा महंगे 'ब्रांडेड फ्यूल' को जबरन बेचने के दबाव और राज्य में चल रहे अवैध बायोडीजल के काले कारोबार पर सरकार की चुप्पी को लेकर भी तीखी नाराजगी जताई है. आर्थिक मोर्चे पर घिरे डीलर्स ने यह मुद्दा भी उठाया है कि प्रधानमंत्री के दौरों और सरकारी रैलियों के दौरान गाड़ियों में जो लाखों रुपये का ईंधन उधार दिया गया था, उसका भुगतान सरकार ने लंबे समय से अटका रखा है, जिससे उन पर वित्तीय दबाव बढ़ गया है. मामले की गंभीरता के बावजूद, एसोसिएशन का आरोप है कि शीर्ष नौकरशाही का रवैया बेहद उदासीन बना हुआ है. लगातार ईमेल और पत्र भेजने के बाद भी प्रमुख शासन सचिव स्तर पर कोई बैठक नहीं बुलाई जा रही है और न ही अधिकारी उनके फोन कॉल्स का जवाब दे रहे हैं. अब देखना यह होगा कि क्या मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस मामले में खुद हस्तक्षेप कर 1 जून से पहले कोई बीच का रास्ता निकालते हैं, या फिर राजस्थान एक बड़े चक्काजाम और ईंधन संकट की तरफ बढ़ने को मजबूर होगा.

बॉर्डर पार से ड्रोन में आ रहे थे हथियार, अमृतसर में बड़ा तस्करी नेटवर्क बेनकाब

अमृतसर. सीमा पार पाकिस्तान से भारत में ड्रोन के जरिए पंजाब में हथियार और नशा पहुंचाने वाले एक बड़े गिरोह को अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने पकड़ने में सफलता हासिल की है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों के कब्जे से आठ आधुनिक पिस्तौल और कई जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गिरोह विदेश में बैठे एक तस्कर के संपर्क में था और वर्चुअल नंबरों के जरिए आपस में बातचीत करता था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह गिरोह सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से भेजे गए हथियारों और नशीले पदार्थों की खेप प्राप्त करता था। इसके बाद पंजाब के अलग-अलग इलाकों में सक्रिय अपराधियों और असामाजिक तत्वों तक इनकी सप्लाई की जाती थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं तथा पहले कितनी खेप पंजाब में पहुंचाई जा चुकी है।कमिश्नरेट पुलिस ने इस मामले में छेहरटा थाना में मामला दर्ज कर लिया है। मोबाइल फोन खोलेगा राज डीजीपी पंजाब गौरव यादव की तरफ से साझा की गई जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ जारी है और कई अहम खुलासे होने की संभावना है। जांच टीम आरोपितों के मोबाइल फोन, वर्चुअल नंबर और इंटरनेट आधारित संपर्क माध्यमों की भी गहराई से जांच कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा सकें। पुलिस सूत्रों के मुताबिक सीमा पार बैठे तस्कर लगातार ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल कर पंजाब में हथियार और नशा भेजने की कोशिश कर रहे हैं। ड्रोन मूवमेंट बनी बड़ी चुनौती सुरक्षा एजेंसियों के लिए ड्रोन तकनीक  एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। हालांकि पंजाब पुलिस लगातार ऐसे नेटवर्क पर कार्रवाई कर रही है और कई मॉड्यूल पहले भी ध्वस्त किए जा चुके हैं। पंजाब पुलिस ने साफ कहा है कि राज्य में नशे, अवैध हथियारों और संगठित अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई जारी रहेगी। पुलिस अधिकारियों ने दावा किया कि इस कार्रवाई से सीमा पार से संचालित हथियार तस्करी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

सफाई कर्मचारियों से गैर-कार्य न कराएं: राजस्थान हाईकोर्ट ने दिए सख्त निर्देश

जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था पर नगर निगम को कड़ी फटकार लगाते हुए बड़ा आदेश जारी किया है. एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने साफ कहा कि सफाई कर्मचारियों से दफ्तर के अन्य काम कराने के बजाय सिर्फ सफाई का मूल काम ही लिया जाए. कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि किसी क्षेत्र में गंदगी मिली, तो सीधे संबंधित जमादार और स्वास्थ्य निरीक्षक की जिम्मेदारी तय होगी. इसके साथ ही, जयपुर को अंतरराष्ट्रीय स्तर का हेरिटेज शहर बनाए रखने के लिए कोर्ट ने खुले में कचरा फेंकने वालों पर तुरंत जुर्माना लगाने और पर्याप्त डस्टबिन रखने के निर्देश दिए हैं. उचित स्थानों पर डस्टबिन लगाने के निर्देश अदालत ने सफाई की एक निश्चित प्रक्रिया तय करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आवासीय कॉलोनियों के निकट उचित स्थानों पर पर्याप्त डस्टबिन लगाए जाएं और उनकी नियमित सफाई की जाए. कोर्ट ने कड़ी चेतावनी दी है कि यदि किसी क्षेत्र में नियमित सफाई नहीं पाई जाती है, तो इसके लिए सीधे तौर पर संबंधित जमादार और स्वास्थ्य निरीक्षक की जिम्मेदारी तय की जाएगी. खंडपीठ ने याद दिलाया कि जयपुर एक ऐतिहासिक हेरिटेज शहर है और इसे इस तरह साफ रखा जाना चाहिए कि यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छता का एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर सके. चूंकि पर्यटन उद्योग राजस्थान का सबसे बड़ा उद्योग है, इसलिए अदालत ने इस तरह के स्वच्छता प्रयासों को प्रदेश के अन्य शहरों में भी लागू करने की आवश्यकता जताई है. अतिरिक्त महाधिवक्ता जीएस गिल को मिली दिशा-निर्देश की जिम्मेदारी इस संबंध में प्रदेश के सभी नगर निगमों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने की जिम्मेदारी अतिरिक्त महाधिवक्ता जीएस गिल को सौंपी गई है. साथ ही, अदालत ने आम शहरवासियों और स्वयंसेवी संगठनों (NGOs) से भी अपनी-अपनी कॉलोनियों को साफ रखने और नगर निगम की मदद करने की अपील की है. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता विमल चौधरी ने कोर्ट को बताया था कि सालों पहले हाईकोर्ट द्वारा जारी किए गए 16 बिंदुओं के निर्देशों की नगर निगम ने आज तक पालना नहीं की है, जिस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए अदालत ने यह नया आदेश पारित किया.