samacharsecretary.com

सहकारी बैंक में लाखों की वित्तीय गड़बड़ी उजागर, जांच के बाद कैशियर पर गिरी गाज

खरगोन जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित खरगोन की शाखा ठिबगांव में लगभग 41.58 रुपए लाख की नगद राशि के गबन का गंभीर मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में शाखा में पदस्थ कैशियर ऋतु गोयल द्वारा बैंक की नगद शेष राशि में भारी कमी पाए जाने के बाद बैंक मुख्य कार्यपालकन अधिकारी संध्या रोकड़े ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित कर्मचारी को निलंबित कर दिया है और पुलिस को सूचना दे दी गई है। जानकारी के अनुसार सोमवार को शाखा में नियमित नकद मिलान व भौतिक सत्यापन के दौरान कैश शॉर्टेज सामने आया। जांच में बैंक की वास्तविक नगद शेष राशि और अभिलेखों में दर्ज राशि में 41.58 लाख रुपए का अंतर पाया गया।

जांच में तेजी: CBI कोर्ट से मांगेगी समर्थ की रिमांड, पहले दिन कई अहम सवाल-जवाब

 भोपाल नोएडा की त्विषा शर्मा की भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने शुरू कर दी है। मंगलवार को जांच के पहले ही दिन एजेंसी ने मामले से जुड़े प्रमुख लोगों से पूछताछ कर घटनास्थल का निरीक्षण किया। पहले ही दिन रिटायर्ड जज सास से करीब आधे घंटे पूछताछ सीबीआइ की टीम सबसे पहले उस घर में पहुंची, जहां त्विषा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। यहां अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और त्विषा की सास रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह से करीब आधे घंटे पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, सीबीआइ के अधिकारियों ने गिरिबाला सिंह से त्विषा और उनके पति समर्थ सिंह के वैवाहिक संबंधों, परिवार के माहौल और घटना से पहले की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल किए।  

छत्तीसगढ़ में जैव विविधता संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि

रायपुर  विश्व ऊदबिलाव दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। गरियाबंद जिले के उदंती- सीतानदी टाइगर रिजर्व के जल स्रोतों में ऊदबिलाव (ओटर) की प्रमाणिक उपस्थिति दर्ज की गई है। यह सफलता प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी)  अरुण कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन तथा वन विभाग एवं छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के संयुक्त शोध प्रयासों से संभव हुई है।         गरियाबंद वनमंडल के डीएफओ  वरुण जैन के सहयोग से लगाए गए कैमरा ट्रैप में ऊदबिलाव के स्पष्ट चित्र प्राप्त हुए हैं। इससे यह प्रमाणित हुआ है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का जलीय पारिस्थितिकी तंत्र स्वस्थ है और यह दुर्लभ वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास बना हुआ है। स्वस्थ जल स्रोतों के जैव संकेतक हैं ऊदबिलाव ऊदबिलाव स्वच्छ और सुरक्षित जल स्रोतों में निवास करने वाला संवेदनशील वन्यजीव है। यह नदियों, तालाबों और अन्य मीठे जल स्रोतों की गुणवत्ता का महत्वपूर्ण जैव संकेतक माना जाता है। इसकी उपस्थिति किसी क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता की समृद्धि को दर्शाती है।           विश्वभर में ऊदबिलाव की 13 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से भारत में तीन यूरेशियन ऊदबिलाव, स्मूद-कोटेड ऊदबिलाव और एशियाई स्मॉल-क्लॉड ऊदबिलाव प्रजातियां पाई जाती हैं। विशेष बात यह है कि छत्तीसगढ़ में इन तीनों प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की जा चुकी है, जो राज्य की समृद्ध जैव विविधता का प्रमाण है। विश्व ऊदबिलाव दिवस का उद्देश्य            हर वर्ष 27 मई को विश्व ऊदबिलाव दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य ऊदबिलाव प्रजातियों के संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना और उनके सामने मौजूद खतरों की ओर ध्यान आकर्षित करना है। प्राकृतिक आवास का नुकसान, जल स्रोतों का प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, अवैध शिकार एवं तस्करी और मानव-वन्यजीव संघर्ष आदि ऊदबिलाव के लिए प्रमुख खतरे हैं। छत्तीसगढ़ में संरक्षण के लिए लगातार हो रहा शोध           छत्तीसगढ़ में ऊदबिलाव संरक्षण की दिशा में वर्ष 2021 से निरंतर कार्य किया जा रहा है। इसके बाद राज्य शासन के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा को ऊदबिलाव पर शोध और संरक्षण अध्ययन का दायित्व सौंपा गया। छत्तीसगढ़ जैव विविधता बोर्ड के नेतृत्व में कोरबा, कांकेर, गरियाबंद और बस्तर संभाग में कैमरा ट्रैप एवं मैदानी अध्ययन के माध्यम से ऊदबिलाव की उपस्थिति, व्यवहार, आवास और प्रजनन संबंधी जानकारी संकलित की जा रही है। छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा की शोधकर्ता मती निधि सिंह के नेतृत्व में तैयार अध्ययन रिपोर्ट वन विभाग को सौंपी गई है। अध्ययन से राज्य के विभिन्न जिलों में ऊदबिलाव की उपस्थिति के प्रमाण प्राप्त हुए हैं। जनजागरूकता से बढ़ी संरक्षण की उम्मीद            वन विभाग और विज्ञान सभा द्वारा स्कूलों, कॉलेजों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसका सकारात्मक प्रभाव यह है कि अब स्थानीय मछुआरे और ग्रामीण ऊदबिलाव के संरक्षण के प्रति अधिक संवेदनशील हुए हैं तथा कई क्षेत्रों से इनके रेस्क्यू की सूचना स्वयं लोगों द्वारा दी जा रही है। वन विभाग की अपील: जल स्रोतों को रखें स्वच्छ           वन विभाग और छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा ने आमजन से अपील की है कि जल स्रोतों को स्वच्छ रखें और प्राकृतिक स्थलों पर प्लास्टिक, कांच तथा अन्य अपशिष्ट न फैलाएं। जंगलों में आग लगने की स्थिति में तत्काल वन विभाग को सूचना दें। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊदबिलाव का संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामुदायिक सहभागिता से ही यह संभव है। स्वच्छ पर्यावरण और सुरक्षित जल स्रोतों के संरक्षण से ही इस दुर्लभ वन्यजीव का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है।

सियासी बदलाव लगभग तय! सिद्दरमैया को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी, डीके शिवकुमार की ताजपोशी संभव

 नई दिल्ली कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्दरमैया और उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच शुरुआत में ढाई- ढाई साल की सत्ता की शर्त के साथ शुरू हुई कांग्रेस सरकार में आखिरकार तीन साल बाद बदलाव का रास्ता लगभग साफ हो गया है। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी से चर्चा के बाद आखिरकार सिद्दरमैया राज्य की सत्ता छोड़ राज्यसभा जाने के लिए तैयार हो गए हैं। हालांकि राज्य के मंत्रिमंडल और राज्यसभा में दूसरे सदस्यों के नामांकन में भी सिद्दरमैया की पसंद को माना जाएगा। कांग्रेस हाई कमान की बैठक में फैसला कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने दोनों नेताओं के साथ पहले अलग-अलग और फिर एक साथ बैठक की। शुरुआत में सिद्दरमैया इसके लिए तैयार नहीं थे। लेकिन राहुल गांधी ने उन्हें मना लिया। ध्यान रहे कि नेतृत्व बदलाव को लेकर पार्टी में पहले भी बैठकें होती रही थीं, लेकिन सिद्दरमैया तब राजी नहीं हुए थे और उन्हें बिना सहमत किए कांग्रेस बदलाव का कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी। वैसे भी कर्नाटक विधानसभा में सिद्दरमैया के समर्थकों की संख्या ज्यादा है। सोमवार को कर्नाटक के दोनों ही नेता अपने समर्थक विधायकों को लेकर दिल्ली पहुंचे थे। केसी वेणुगोपाल ने बताया- राज्यसभा सीटों पर हुई चर्चा बैठक के बाद केसी वेणुगोपाल ने हालांकि मीडिया से कहा कि आप लोग जो भी अंदाजा लगा रहे हैं, वह सिर्फ अंदाजा है, कोई सच्चाई नहीं है। आज हमने कर्नाटक की राज्यसभा सीटों और काउंसिल सीटों पर चर्चा की। उनके साथ सिद्दरमैया और शिवकुमार भी थे। वेणुगोपाल ने कहा कि कर्नाटक की राज्यसभा और काउंसिल सीटों के उम्मीदवारों की घोषणा छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसी दूसरी सीटों के साथ की जाएगी। आज हमने यही तय किया है। किसी और बात पर चर्चा नहीं हुई। लेकिन, विश्वस्त सूत्रों के अनुसार सिद्दरमैया अगले कुछ दिनों में इस्तीफा देंगे। गौरतलब है कि एक जून को राज्यसभा चुनाव के लिए अधिसूचना जारी होगी और इसके साथ ही नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। शिवकुमार का शपथग्रहण तब होगा जब सिद्दरमैया राज्यसभा के लिए नामांकन करेंगे।

सरकारी डिजिटल सेवाओं को अधिक सरल, सुलभ और नागरिक-केंद्रित बनाने पर हुआ मंथन

भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम द्वारा नागरिक-केंद्रित डिजिटल सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं उपयोगकर्ता अनुकूल बनाने के उद्देश्य से सोमवार को एक दिवसीय “यूएक्स4जी एडवांस्ड लेवल वर्कशॉप” का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य राज्य सरकार के प्रमुख डिजिटल पोर्टलों जैसे आरसीएमएस, संपदा और एमपी ई-सेवा पर नागरिकों को बेहतर डिजिटल अनुभव उपलब्ध कराना था। कार्यशाला में सरकारी डिजिटल सेवाओं को अधिक सरल, आधुनिक और सहज बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेष रूप से पोर्टलों की उपयोगकर्ता पहुंच बढ़ाने और नागरिकों के अनुभव को बेहतर बनाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।कार्यशाला का संचालन नेशनल ई-गवर्नेंस डिविजन के सहयोग से किया गया। इस दौरान  अजीत विसेन, सु सबा और  आकर्षण चौहान ने यूआई/यूएक्स ट्रांसफॉर्मेशन और सरकारी डिजिटल सेवाओं में नवाचार से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा की। कार्यशाला में व्यावहारिक सत्रों और सामूहिक चर्चाओं के माध्यम से सरकारी पोर्टलों को अधिक नागरिक हितैषी बनाने के लिए सुझावों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें विभिन्न विभागों के 25 अधिकारियों एवं डिजाइनरों ने सहभागिता की। 

कोयला उत्पादन, ऊर्जा सुरक्षा, निवेश और आधारभूत संरचना विस्तार पर हुई सकारात्मक चर्चा

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन स्थित उनके कार्यालय में केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री  सतीश चंद्र दुबे ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा, खनिज क्षेत्र के विस्तार तथा आधारभूत संरचना विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत और सकारात्मक चर्चा हुई। बैठक में छत्तीसगढ़ में कोयला उत्पादन बढ़ाने, खनन क्षेत्रों में बुनियादी अधोसंरचना को सुदृढ़ करने, रेल एवं लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी के विस्तार तथा औद्योगिक गतिविधियों को और गति देने के विषय पर विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहन, कोयला गैसीकरण, सौर ऊर्जा विकास तथा खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग के माध्यम से निवेश और रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर भी विशेष चर्चा हुई। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है और केंद्र सरकार के सहयोग से ऊर्जा, खनन एवं औद्योगिक विकास के क्षेत्र में राज्य नई संभावनाओं की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निवेश अनुकूल वातावरण तैयार करते हुए युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और क्षेत्रीय विकास को गति देने के लिए प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध कुमार सिंह,  छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के प्रबंध संचालक  रजत बंसल, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक  हरीश दुहन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

पानी की समस्या से नाराज ग्रामीणों का बड़ा फैसला, बोले- पहले पानी, फिर वोट

नरसिंहपुर इन दिनों चांवरपाठा विकासखंड में पेयजल समस्या अत्यंत गंभीर रूप धारण कर चुकी है। बेतहाशा गिरते जमीनी जल स्तर के कारण क्षेत्र के हैंडपंपों ने पानी की जगह हवा उगलना शुरू कर दिया है। जहां कहीं थोड़ा-बहुत पानी मिल भी रहा है, वह लाल-पीला और दूषित है, जिससे ग्रामीण गंभीर बीमारियों के साये में जीने को मजबूर हैं। इस भीषण जल संकट से विकासखंड का ग्राम मानकपुर बिजोरा बुरी तरह प्रभावित है। अनेक बार लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों को लिखित व मौखिक रूप से सूचित करने के बावजूद जब समस्या का कोई स्थाई समाधान नहीं निकला, तो ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। ग्राम सभा में लिया गया ऐतिहासिक निर्णय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उदासीनता से त्रस्त होकर ग्रामीणों ने गांव में एक विशाल ग्राम सभा का आयोजन किया। इस बैठक में समाज के सभी वर्गों के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। वर्षों से चली आ रही इस भीषण पेयजल किल्लत पर गंभीर चर्चा के बाद, ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। ग्रामीणों ने साफ कह दिया है कि जब तक ग्राम बिजोरा में मां नर्मदा का जल पहुंचाकर समस्या का स्थाई समाधान नहीं किया जाता, तब तक ग्रामवासी ग्राम पंचायत, विधानसभा और लोकसभा सहित आगामी सभी चुनावों का पुरजोर बहिष्कार करेंगे और किसी भी मतदान में हिस्सा नहीं लेंगे। नेताओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध चुनाव बहिष्कार के साथ ही ग्रामीणों ने यह भी फैसला लिया है कि जब तक पानी की समस्या दूर नहीं होती, तब तक गांव का कोई भी व्यक्ति किसी भी राजनीतिक दल के नेता को अपने निजी या सार्वजनिक कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं करेगा। नेताओं के गांव में प्रवेश पर पूरी तरह रोक रहेगी। ग्रामीणों का कहना है कि अब वे आश्वासनों के झांसे में नहीं आने वाले और अपने हक के लिए यह निर्णायक लड़ाई मिलकर लड़ेंगे। गर्मी में भूमि पड़ी रहती है खाली, खेतों और घरों में मचा हाहाकार पानी की कमी के कारण किसान ठंड के सीजन में खेतों में आधा-आधा नोजल चलाकर किसी तरह एक-दो एकड़ में हल्की सिंचाई करते हैं और अपना गुजारा चलाते हैं। गर्मी आते ही हजारों एकड़ भूमि पानी के अभाव में खाली पड़ी रहती है। मार्च के बाद से ही हैंडपंप जवाब देने लगते हैं। गांव में स्थिति इतनी बदतर है कि लोगों को अपने स्वयं के ट्रैक्टरों से सुदूर खेतों में बने कुओं/स्रोतों से टैंकर भरकर पानी लाना पड़ रहा है। मर्रावन से लेकर अमथनु तक लगभग 45 ग्राम हर साल गर्मी में पानी की इस विकट समस्या से जूझते आ रहे हैं। फिर पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है।   ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की जुबानी  हमें वर्षों से केवल झूठे आश्वासन मिले हैं, लेकिन गांव की मूल समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है। अब ग्रामवासी चुप नहीं बैठेंगे। हम अपने मौलिक अधिकार (पानी) के लिए एकजुट होकर यह निर्णायक लड़ाई लड़ रहे हैं और जब तक पानी नहीं आता, तब तक कोई चुनाव नहीं होगा। – वृन्दावन पटेल, सेवानिवृत्त शिक्षक      पिछले 25 वर्षों से हर एक जनप्रतिनिधि के सामने पानी का मुद्दा उठाया गया, लेकिन नतीजा सिफर रहा। वन विभाग ने जो तालाब बनवाया था, वह 15 साल पहले टूट गया। पंचायत ने जल भराव के लिए गहरीकरण कराया, तो बाद में तार फेंसिंग (बाउंड्री) करके वहां प्रवेश वर्जित कर दिया गया। – सतीश पटेल, मीडिया प्रभारी, किसान संघ      पानी की कमी के कारण किसान ठंड के सीजन में खेतों में आधा-आधा नोजल चलाकर किसी तरह एक-दो एकड़ में हल्की सिंचाई करते हैं और अपना गुजारा चलाते हैं। गर्मी आते ही हजारों एकड़ भूमि पानी के अभाव में खाली पड़ी रहती है। मार्च के बाद से ही हैंडपंप जवाब देने लगते हैं। – यशवंत पटेल, वरिष्ठ पदाधिकारी, राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ गांव में स्थिति इतनी बदतर है कि लोगों को अपने स्वयं के ट्रैक्टरों से सुदूर खेतों में बने कुओं/स्रोतों से टैंकर भरकर पानी लाना पड़ रहा है। मर्रावन से लेकर अमथनु तक लगभग 45 ग्राम हर साल गर्मी में पानी की इस विकट समस्या से जूझते आ रहे हैं। फिर पानी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। – द्वारका प्रसाद झारिया, सरपंच ग्राम पंचायत मानकपुर बिजोरा  

बॉर्डर चेकपोस्टों पर सख्ती बढ़ी, अवैध प्रवासियों में खौफ का माहौल

कोलकाता पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार का घुसपैठियों पर एक्शन शुरू हो गया है. पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट नीति का जमीनी असर दिखने लगा है. राज्य सरकार की सख्त प्रशासनिक कार्रवाई और विदेशी नागरिकों के लिए होल्डिंग सेंटर बनाए जाने की घोषणा के बाद, बंगाल के विभिन्न हिस्सों में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी प्रवासियों में भारी हड़कंप मच गया है. मंगलवार सुबह उत्तर 24 परगना के हाकिमपुर चेकपोस्ट और मालदा के सीमावर्ती इलाकों में सैकड़ों बांग्लादेशी पुरुष और महिलाएं वापस अपने देश लौटने के लिए सीमा पर जुटने लगे. दूसरी ओर, मालदा के इंग्लिश बाजार टाउन में राज्य का पहला होल्डिंग सेंटर पूरी तरह सक्रिय हो गया है, जहां कड़ी सुरक्षा और सीसीटीवी निगरानी के बीच संदिग्ध प्रवासियों को रखा जा रहा है।  बांग्लादेशी घुसपैठिया बॉर्डर पर जुटने लगे. नए इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025 के तहत पुलिस को बिना वारंट संदिग्धों को गिरफ्तार करने की खुली छूट दी गई है. हालांकि, सीएए के दायरे में आने वाले हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई अल्पसंख्यकों को इस कार्रवाई से पूरी तरह बाहर रखा गया है, लेकिन अवैध रूप से रह रहे अन्य प्रवासियों के खिलाफ यह अभियान अब राजनीतिक बयानों से निकलकर कड़े प्रशासनिक एक्शन में बदल चुका है।  दरअसल, यह नजारा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का हालिया आदेश के बाद सामने आया है। 21 मई 2026 को सीएम शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को आदेश दिया कि कहीं भी कोई बांग्लादेशी घुसपैठी पकड़ा जाए, तो सीधा सीमा सुरक्षा दल (BSF) को सौंप दो। उन्होंने कहा कि अब इन्हें अदालत नहीं ले जाया जाएगा बल्कि सीधे वापस बांग्लादेश भेजा जाएगा। सीएम शुभेंदु अधिकारी ने यह आदेश पिछले साल अप्रैल में संसद में पारित आव्रजन और विदेशी अधिनियम 2025 के तहत दिया। इस कानून के तहत विदेशियों के भारत में प्रवेश, प्रवास और निकास को नियंत्रित किया जा सकता है। इस आदेश के बाद बंगाल सरकार ने बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए ‘होल्डिंग सेंटर‘ बना रही है, जिसमें ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ के तहत देश से निकाला जाएगा।  इस फ्रेमवर्क के तहत, जिन लोगों पर अवैध रूप से देश में घुसने का शक है, उन्हें 30 दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है. इस दौरान, जिला मजिस्ट्रेट और तय अधिकारी उनकी पहचान की जांच करते हैं, बायोमेट्रिक जानकारी इकट्ठा करते हैं, और उन्हें वापस भेजने से पहले उनका रिकॉर्ड सेंट्रल डेटाबेस में अपलोड करते हैं।  मालदा के एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने न्यूज एजेंसी PTI को बताया, “हिरासत केंद्र ने काम करना शुरू कर दिया है. अभी वहां नौ बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है. जरूरी जांच और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं. हिरासत में लिए गए लोगों के साथ तय कानूनी नियमों के मुताबिक ही बर्ताव किया जा रहा है।  इस नए कदम को 'इमिग्रेशन और फॉरेनर्स एक्ट, 2025' से भी जोड़ा जा रहा है. इस एक्ट ने इमिग्रेशन और विदेशी नागरिकों से जुड़े कई पुराने कानूनों की जगह ले ली है।  इस कानून ने निगरानी, ​​​​हिरासत और देश-निकले के लिए एक टेक्नोलॉजी-बेस्ड ढांचा पेश किया. इसके साथ ही, हेड कांस्टेबल या उससे ऊपर के रैंक वाले पुलिस अधिकारियों को संदिग्ध उल्लंघन पट्टियों को बिना वारंट के गिरफ्तार करने का अधिकार भी दिया।  डिपोर्टेशन पर पॉलिटिक्स सियासी स्तर पर इन डेवलपमेंट्स ने बंगाल में घुसपैठ और सिटिजनशिप पर लंबे वक्त से चल रही बहस को और तेज कर दिया है. बीजेपी नेताओं ने इस ड्राइव का स्वागत किया है और दावा किया है कि राज्य गैर-कानूनी माइग्रेशन और एक्सट्रीमिस्ट नेटवर्क के लिए कमजोर हो गया है।  नॉर्थ मालदा से बीजेपी सांसद खगेन मुर्मू ने कहा, "हमारे देश और हमारे राज्य को सुरक्षा की जरूरत है. बंगाल रोहिंग्या, आतंकवादियों और 'जिहादी' एलिमेंट्स के लिए एक कॉरिडोर बन गया था। हालांकि, राज्य सरकार का कहना है कि सिटिजनशिप (अमेंडमेंट) एक्ट के तहत सुरक्षित कम्युनिटीज इस कार्रवाई के दायरे से बाहर रहेंगी।  केंद्र सरकार के बाद के एक छूट आदेश के तहत, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई अल्पसंख्यकों को सुरक्षा दी गई है, जो 31 दिसंबर, 2024 से पहले भारत में दाखिल हुए थे।  जैसे-जैसे सीमा चौकियों के पास भीड़ जमा होती जा रही है और होल्डिंग सेंटर कड़ी सुरक्षा के बीच काम करना शुरू कर रहे हैं, पश्चिम बंगाल का घुसपैठ-रोधी अभियान अब सख़्त कार्रवाई वाले चरण में पहुंचता दिख रहा है. आने वाले हफ्तों में और भी लोगों को हिरासत में लिए जाने, उनकी पहचान की जांच और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रियाएं शुरू होने की संभावना है।  सीएए के दायरे से बाहर के लोग सीधे होंगे गिरफ्तार बंगाल में अवैध प्रवासियों को पकड़ने के लिए जिला स्तर पर होल्डिंग सेंटर स्थापित करने की घोषणा के बाद शुरू हुई है. सीमा पर मौजूद अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े जाने और जेल जाने के डर से ये प्रवासी अब खुद ही अपनी पहचान उजागर कर वापस लौटने की गुहार लगा रहे हैं. इस पूरी कार्रवाई की नींव मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और सीमा सुरक्षा बल के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में रखी गई थी. मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में चेतावनी दी थी कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम यानी सीएए (CAA) के दायरे से बाहर के सभी लोगों को अवैध घुसपैठिया माना जाएगा।  24 घंटे सीसीटीवी से निगरानी केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए राज्य के गृह और पर्वतीय मामलों के विभाग की फॉरेनर्स ब्रांच ने जिलों में होल्डिंग सेंटर बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है. इस कड़ी में मालदा जिला पूरे राज्य में पहला ऐसा क्षेत्र बन गया है, जहां होल्डिंग सेंटर ने बकायदा काम करना शुरू कर दिया है. मालदा के इंग्लिश बाजार टाउन के चंदन पार्क में बनाए गए इस सेंटर में 24 घंटे की सीसीटीवी निगरानी रखी जा रही है. इसकी सुरक्षा में 12 सशस्त्र पुलिसकर्मियों सहित नागरिक सुरक्षा स्टाफ और सिविक वॉलंटियर्स को तैनात किया गया है।  क्या है इमिग्रेशन एक्ट 2025 इस पूरे अभियान को कानूनी तौर पर बेहद मजबूत और प्रभावी बनाने का काम नए ‘इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025’ ने किया है. इस नए कानून ने पुराने और जटिल … Read more

’प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े अनुभवों और सार्वजनिक जीवन की आत्मीय यात्रा पर आधारित है केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक’

रायपुर  ’‘अपनापन’ के विमोचन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय’ मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय आज नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में आयोजित केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक ‘अपनापन’ के विमोचन समारोह में शामिल हुए। यह पुस्तक प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के साथ  चौहान के सार्वजनिक जीवन, आत्मीय संबंधों और कार्य अनुभवों पर आधारित है, जिसमें नेतृत्व, जनसेवा और व्यक्तिगत संवेदनाओं को प्रेरक एवं भावनात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है।  कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने  शिवराज सिंह चौहान को पुस्तक के प्रकाशन पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन के अनुभवों को पुस्तक के माध्यम से समाज तक पहुँचाना एक प्रेरणादायी पहल है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास जनप्रतिनिधियों के अनुभवों, कार्यशैली और जनसेवा के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में जनसेवा, सुशासन और संवेदनशील नेतृत्व की नई कार्यसंस्कृति विकसित हुई है। इस पृष्ठभूमि में सार्वजनिक जीवन के अनुभवों पर आधारित यह पुस्तक निश्चित रूप से पाठकों को प्रेरित करेगी तथा नेतृत्व और समाजसेवा के विभिन्न आयामों को समझने का अवसर प्रदान करेगी। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्रीगण, देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, जनप्रतिनिधि और अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

काम में बेवजह देरी करने वाली एजेंसियों पर होगी सख्त कार्रवाई

रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) में ई-प्रगति पोर्टल में दर्ज राज्य की अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि सभी परियोजनाओं के कार्यों में तेजी लाई जाए और आ रही बाधाओं को तत्काल दूर कर नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में बेवजह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और लापरवाही बरतने वाली निर्माण एजेंसियों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। ई-प्रगति पोर्टल की 5 प्रमुख परियोजनाएं          समीक्षा बैठक में विशेष रूप से पोर्टल पर दर्ज राज्य की 5 अति-महत्वपूर्ण परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की गई। वर्किंग वुमेन हॉस्टल, उसलापुर (बिलासपुर), वर्किंग वुमेन हॉस्टल, कोनी (बिलासपुर), 4G स्टेशन DVN मोबाइल टॉवर स्थापना (बिलासपुर), मोबाइल टॉवर हेतु विद्युत अधोसंरचना परियोजना (बिलासपुर) और सिकारसर कोडार रिसीवर लिंक कैनाल (गरियाबंद जिला) साप्ताहिक मॉनिटरिंग और कड़े प्रशासनिक निर्देश           मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया है कि वे प्रत्येक परियोजना की साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट ई-पोर्टल पर फोटो जियोटैग (Photo Geo-tag) के साथ अनिवार्य रूप से अपलोड करें, ताकि कार्यों की वास्तविक स्थिति की पारदर्शी मॉनिटरिंग हो सके। उन्होंने जिलों में मोबाइल टॉवर स्थापना के मार्ग में आ रही भूमि आवंटन या अन्य तकनीकी दिक्कतों को संबंधित कलेक्टरों से समन्वय कर शीघ्र दूर करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने संबंधित जिलों के कलेक्टरों को व्यक्तिगत रूप से रुचि लेकर ई-प्रगति पोर्टल की परियोजनाओं की दैनिक समीक्षा करने और उनमें तेजी लाने को कहा है।          इस समीक्षा बैठक में मंत्रालय से सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, जल संसाधन विभाग तथा उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से राज्य के 21 जिलों के कलेक्टर शामिल हुए, जिनमें बीजापुर, कांकेर, कोरबा, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, नारायणपुर, रायगढ़, सुकमा, बलौदाबाजार-भाटापारा, बलरामपुर, धमतरी, गरियाबंद, जशपुर, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, मुंगेली, सरगुजा, सूरजपुर, दंतेवाड़ा एवं कोण्डागांव शामिल हैं।