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पंजाब में अवैध खनन पर CBI का एक्शन, होशियारपुर के गांव अमरो में छापेमारी

होशियारपुर  पंजाब के होशियारपुर जिले में अवैध माइनिंग के ठिकानों पर केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने अचानक रेड मारी है. जिले के तलवाड़ा इलाके में पड़ने वाले अमरो गांव में जांच एजेंसी की करीब 10 गाड़ियां एक साथ मौके पर पहुंची हैं. जिस इलाके में लंबे समय से अवैध खनन किए जाने के आरोप लग रहे थे, वहां सीबीआई की इस कार्रवाई से खनन करने वालों के बीच हलचल मच गई है. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद इस कार्रवाई को काफी अहम माना जा रहा है. इस क्षेत्र में 100 से 110 फीट तक गहरी माइनिंग करने और पहाड़ गायब करने के मामलों में जांच की संभावना जताई जा रही है।  जानकारी के अनुसार दसूहा, मुकेरियां और तलवाड़ा इलाके में अवैध माइनिंग से जुड़ा यह विवाद पहले ही अदालत की दहलीज तक पहुंच चुका है. स्थानीय स्तर पर ऐसे गंभीर आरोप लगे हैं कि कुछ जगहों पर 100 से 110 फीट तक गहरी माइनिंग की गई थी. कई स्थानों पर तो अवैध खनन के जरिए पूरे पहाड़ को ही गायब कर दिया गया था।  इसी मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की तरफ से सीबीआई को निर्देश दिए गए थे. हालांकि हाईकोर्ट के उन निर्देशों और आज की इस कार्रवाई के बीच के ऑफिशियल संबंध की पुष्टि अभी नहीं हुई है।  फिलहाल अमरो गांव में चल रही इस रेड से जुड़े कई विजुअल्स सामने आए हैं, जिनमें जांच एजेंसी की गाड़ियां मौके पर नजर आ रही हैं. इसके बावजूद अधिकारियों की तरफ से इस कार्रवाई, जांच के दायरे या किसी संभावित बरामदगी को लेकर कोई ऑफिशियल जानकारी सामने नहीं आई है. स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों ने भी इस मामले पर अभी तक कोई बयान नहीं दिया है। 

पटना में नवरात्र के दौरान केले की मांग बढ़ी, जानें कैसे करें अच्छे और सुरक्षित केले की पहचान

पटना  नवरात्र में व्रत रखने वालों के बीच केले की मांग बढ़ गई है। बाजार में बड़ी मात्रा में केले बिक रहे हैं, लेकिन इन्हें पकाने के तरीके को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जल्दी पकाकर बाजार में उतारने की होड़ में कुछ कारोबारी अनुचित रसायनों का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में केवल केले का रंग और चमक देखकर उसकी गुणवत्ता तय करना सही नहीं है। जल्दी पकाने के चक्कर में सेहत से खिलवाड़ का खतरा त्योहारों के दौरान फलों की बढ़ती मांग के कारण उनकी आपूर्ति भी तेज हो जाती है। ऐसे में फलों को कृत्रिम तरीके से पकाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, केवल पीले रंग या चमक के आधार पर किसी केले को रसायन से पकाया हुआ नहीं कहा जा सकता। इसके लिए उचित जांच जरूरी है। हर पीला केला केमिकल वाला नहीं होता प्राकृतिक रूप से पके केले का रंग हल्के हरे से पीले तक हो सकता है और उस पर भूरे धब्बे भी दिख सकते हैं। दूसरी ओर, एकसमान पीला रंग या हरा डंठल होना अपने आप में रासायनिक पकाने का प्रमाण नहीं है। उपभोक्ताओं को फल की गुणवत्ता के साथ उसकी गंध, बनावट और ताजगी पर भी ध्यान देना चाहिए। गलत तरीके से पकाने पर हो सकती है परेशान फलों को पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले पदार्थों की गुणवत्ता और मात्रा निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। खाद्य सुरक्षा मानकों के विपरीत रसायनों का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है। प्रशासन की नजर, खाद्य सुरक्षा जांच पर जो त्योहारों के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। बाजार में बिकने वाले फलों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जांच और निगरानी महत्वपूर्ण है। रसायनों के अनुचित इस्तेमाल की आशंका वाले मामलों में नमूने लेकर जांच करने से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। केले खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान केले खरीदते समय सड़े, कटे, चिपचिपे या असामान्य गंध वाले फल न लें। विश्वसनीय विक्रेता से फल खरीदें और खाने से पहले केले को साफ पानी से धोकर छीलें। छीलने के बाद हाथ भी साफ कर लें। याद रखें कि घरेलू स्तर पर देखकर यह निश्चित करना संभव नहीं है कि केला किस तरीके से पकाया गया है। सेहत के लिए जरूरी बात नवरात्र में फलाहार करते समय साफ-सुथरे और अच्छी गुणवत्ता वाले फल चुनें। किसी फल का रंग देखकर ही उसे नकली या जहरीला न मानें। संदेह होने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचना दें।     केमिकल से पकाए गए केले का सेवन सेहत पर बुरा असर डाल सकता है। इससे पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए केला खरीदते समय सावधानी बरतें और उसकी गुणवत्ता पर ध्यान दें।     सुधाकर मिश्रा, डायटीशियन , पटना  

शिक्षकों की मनमानी पर सख्ती, छिंदवाड़ा में कार्यस्थल पर रहना अनिवार्य; BEO-BRC को नोटिस

छिंदवाड़ा  विकासखंड शिक्षा अधिकारी हो या फिर विकासखंड शिक्षा कोऑर्डिनेटर या फिर कोई भी शिक्षक जिसकी जहां पर ड्यूटी है उसे वहीं पर रहना होगा. ऐसा नहीं हुआ तो उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी. कलेक्टर ने आदेश जारी करते हुए चेतावनी दी है कि, शिक्षा में अगर सुधार नहीं हुआ तो लापरवाह की खैर नहीं।  जहां पर ड्यूटी वहीं पर रहना होगा वरना होगी कार्रवाई कलेक्टर हरेन्द्र नारायन ने बुधवार को शिक्षा विभाग की बैठक लेकर कहा कि, ''सरकारी स्कूलों की पढ़ाई का स्तर सुधारने के उद्देश्य से ही बीईओ, बीआरसी, बीएसी, जनशिक्षक जैसे पद बनाए गए हैं. स्कूलों का नियमित निरीक्षण और शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित कराना इनकी जिम्मेदारी है, इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. शैक्षणिक संस्थाओं से जुड़े सभी फील्ड अधिकारी अनिवार्य रूप से अपने मुख्यालय पर निवास करें और अधिकारी की अनुमति उपरांत ही मुख्यालय से बाहर जाएं।  उन्होंने लगातार लापरवाही बरतने पर कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद भी सुधार न दिखने पर कड़ी नाराजगी जताई एवं बीईओ और बीआरसी परासिया के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने के निर्देश जिला शिक्षा अधिकारी और जिला परियोजना समन्वयक को दिये. कलेक्टर ने बैठक में बीईओ, बीआरसी सहित संबंधित सभी फील्ड अधिकारियों के मुख्यालय में निवास की स्थिति की फिर समीक्षा की और इस आशय का प्रमाण पत्र प्राप्त किया. प्रमाण पत्र संतोषप्रद नहीं पाए जाने पर उन्होंने स्पष्ट प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।  गंभीरता से कराएं अपार आईडी एन्ट्री का काम बैठक में कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों की अपार आईडी निर्माण में डाटा में गलती मिलने पर कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर की और पोर्टल से ऑरिजनल डेटा देने के निर्देश दिए. कलेक्टर ने कहा कि, ''विद्यार्थियों की अपार आईडी क्रिएशन का काम बहुत जरूरी है, सभी बीईओ, बीआरसी इस काम की गंभीरता को समझें.'' उन्होंने सभी विकासखण्डों को सौ फीसदी अपार आई डी क्रिएशन का काम जल्द से जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए।  स्कॉलरशिप एवं आवास सहायता राशि टाइम पर करें कलेक्टर ने जनजातीय कार्य विभाग को निर्देश दिए हैं कि, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातीय वर्ग के सभी पात्र विद्यार्थियों का एमपी टास पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराएं। इन सभी पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और आवास सहायता योजना का समय पर फायदा दिलाएं। 

राखीगढ़ी में 80 मानव कंकालों से खुलेगा इतिहास का राज, 19 से 25 अक्टूबर तक होगा महोत्सव

हिसार इतिहास की किताबों में दर्ज सभ्यता को समझने के लिए अब केवल लिखित विवरण पर निर्भर नहीं रहना होगा। राखीगढ़ी महोत्सव में पर्यटक उस अतीत से भी रूबरू होंगे, जिसे जमीन के नीचे दबी कब्रों, मानव कंकालों और उनके वैज्ञानिक अध्ययन ने सामने लाने में मदद की है। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने टीला नंबर सात पर मिले हड़प्पाकालीन कब्रिस्तान की कहानी पर एक लघु फिल्म तैयार की है। संग्रहालय की डिजिटल गैलरी में दिखाई जाने वाली इस फिल्म में खोदाई से लेकर डीएनए अध्ययन तक की प्रक्रिया को सरल ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। पहल का उद्देश्य पुरातात्विक शोध को विशेषज्ञों और शोधपत्रों तक सीमित रखने के बजाय आम दर्शकों के लिए समझने योग्य बनाना है। कब्रों में मिल चुके आभूषण संग्रहालय के पीछे स्थित टीला नंबर सात को हड़प्पाकालीन कब्रिस्तान माना जाता है। यहां खोदाई के दौरान करीब 80 मानव कंकाल मिलने की जानकारी है। इनके साथ मिट्टी के बर्तन और आभूषण भी मिले थे। पुरातत्वविदों के लिए ये वस्तुएं केवल प्राचीन सामग्री नहीं, बल्कि उस समय मृतकों को दफनाने की परंपराओं को समझने के साक्ष्य हैं। माना जाता है कि मृतकों के साथ खाने-पीने की वस्तुएं रखने के लिए बर्तन कब्रों में रखे जाते थे। फिल्म में इन्हीं साक्ष्यों और उनके अध्ययन से जुड़ी जानकारी को दर्शकों के सामने रखा जाएगा। एक कंकाल के डीएनए पर हुआ शोध राखीगढ़ी के एक मानव कंकाल से प्राप्त डीएनए पर हुए शोध ने हड़प्पाकालीन आबादी के आनुवंशिक इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध कराई। एक व्यक्ति के डीएनए के आधार पर पूरी हड़प्पाकालीन आबादी के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। टीला नंबर एक पर प्रदर्शनी के लिए एक कंकाल भी रखा गया है, जिसे पर्यटक देख सकेंगे। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के उपनिदेशक नरेंद्र परमार के अनुसार, महोत्सव में फिल्मों के माध्यम से पर्यटकों को राखीगढ़ी के इतिहास से परिचित कराया जाएगा इतिहास, संस्कृति और खेल का आयोजन राखीगढ़ी महोत्सव 19 से 25 अक्टूबर तक चलेगा। प्रदर्शनी, कार्यशाला, लघु फिल्म, सांस्कृतिक कार्यक्रम, हेरिटेज वाक और प्रश्नोत्तरी इसके प्रमुख आकर्षण होंगे। 22 से 24 अक्टूबर तक होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञ लोगों के सवालों के जवाब देंगे। इसी दौरान दंगल होगा, 24 की रात रागिनी प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। कब्रों में मिल चुके आभूषण संग्रहालय के पीछे स्थित टीला नंबर सात को हड़प्पाकालीन कब्रिस्तान माना जाता है। यहां खोदाई के दौरान करीब 80 मानव कंकाल मिलने की जानकारी है। इनके साथ मिट्टी के बर्तन और आभूषण भी मिले थे। पुरातत्वविदों के लिए ये वस्तुएं केवल प्राचीन सामग्री नहीं, बल्कि उस समय मृतकों को दफनाने की परंपराओं को समझने के साक्ष्य हैं। माना जाता है कि मृतकों के साथ खाने-पीने की वस्तुएं रखने के लिए बर्तन कब्रों में रखे जाते थे। फिल्म में इन्हीं साक्ष्यों और उनके अध्ययन से जुड़ी जानकारी को दर्शकों के सामने रखा जाएगा। एक कंकाल के डीएनए पर हुआ शोध राखीगढ़ी के एक मानव कंकाल से प्राप्त डीएनए पर हुए शोध ने हड़प्पाकालीन आबादी के आनुवंशिक इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध कराई। एक व्यक्ति के डीएनए के आधार पर पूरी हड़प्पाकालीन आबादी के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। टीला नंबर एक पर प्रदर्शनी के लिए एक कंकाल भी रखा गया है, जिसे पर्यटक देख सकेंगे। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के उपनिदेशक नरेंद्र परमार के अनुसार, महोत्सव में फिल्मों के माध्यम से पर्यटकों को राखीगढ़ी के इतिहास से परिचित कराया जाएगा। इतिहास, संस्कृति और खेल का आयोजन राखीगढ़ी महोत्सव 19 से 25 अक्टूबर तक चलेगा। प्रदर्शनी, कार्यशाला, लघु फिल्म, सांस्कृतिक कार्यक्रम, हेरिटेज वाक और प्रश्नोत्तरी इसके प्रमुख आकर्षण होंगे। 22 से 24 अक्टूबर तक होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञ लोगों के सवालों के जवाब देंगे। इसी दौरान दंगल होगा, 24 की रात रागिनी प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।  

प्रॉपर्टी आईडी में मनमानी पर सख्ती, रेवाड़ी में एक्सईएन ने भेजा नोटिस

रेवाड़ी. शहर में प्रॉपर्टी आइडी की छोटी-छोटी समस्या को लेकर आम लोगों को नगर परिषद के अधिकारियों के पास चक्कर काटने पड़ते हैं। चेकर-मेकर पर मनमानी के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। ताता मामला शहर के नई आबादी स्थित एक प्रापर्टी आइडी का है। पहले चेकर-मेकर ने उसे ओके कर दिया। बाद में उसी आइडी पर स्वामित्व से संबंधित दस्तावेज क्लियर नहीं होने का हवाला देते हुए आपत्ति लगा दी। डीएमसी प्रदीप अहलावत के संज्ञान में जब यह मामला पहुंचा तो उन्होंने एक्सइएन अंकित वशिष्ठ को कार्रवाई करने के निर्देश दिए। एक्सईएन ने भी बिना देरी किए चेकर-मेकर को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए तीन दिन में जवाब दाखिल करने के लिए पत्र लिखा है। खामियों के 500 आवेदन आए – खामियों के 500 आवेदन आए हैं। इसमें सबसे ज्यादा नाम व पता गलत होने की शिकायतें आईं थीं। इस मौके पर किसी का निस्तारण नहीं किया गया। इनमें नाम और पता गलत के 300, मोबाइल नंबर गलत के 115 और अन्य के 85 शिकायतें शामिल हैं। मालिकों को अपनी प्रॉपर्टी आईडी ठीक करने के लिए नगर परिषद कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इससे नप के अधिकारी गृहकर वसूली करने की बजाय गलती ठीक करने में उलझे हुए हैं। नगर परिषद क्षेत्र में प्रॉपर्टी सर्वे मुख्यालय स्तर पर याशी कंसल्टेंसी एजेंसी से कराया था। पिछले दो तीन साल पहले शुरू हुए सर्वे के बाद एजेंसी की ओर से सर्वे के नोटिस प्राॅपर्टी मालिकों को दिए गए तो अधिकतर ने खामियां बताकर शिकायत की। इसको लेकर नगर परिषद ने वार्डों में शिविर भी लगाए गए, लेकिन शिकायतों का निवारण नहीं हुआ। रेवाड़ी नगर परिषद क्षेत्र में काफी ऐसी प्रॉपर्टी अटकी हुई हैं, जिनका समाधान होना बाकी है। प्राॅपर्टी टैक्स मैनेजमेंट सिस्टम और नो ड्यूज सर्टिफिकेट (एनडीसी) पोर्टल पर अपलोड हुए आवेदनों पर आपत्तियां जताई जा रही हैं। इससे लोगों को परेशानी हो रही। इसलिए सरकार ने इस पर गंभीरता दिखाते हुए निदेशालय को निर्देश दिए कि सभी आपत्तियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए।

बिहार के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी! 2.48 लाख किसानों को मिला कृषि इनपुट अनुदान, जानें बाकी को कब मिलेगी राशि

पटना  बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी नेभारी बारिश और बाढ़ के कारण फसल का नुकसान झेलने वाले किसानों के खाते में कृषि इनपुट अनुदान की राशि भेजी। सीएम ने कुल 2 लाख 48 हजार 407 किसानों के बैंक खाते में लगभग 112.52 करोड़ रुपये डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए भेजे। सीएम ने कहा कि राज्य भर के 4.57 लाख किसानों ने कृषि इनपुट के लिए आवेदन किया था। पहले चरण में 2.48 लाख पात्र किसानों को आर्थिक मदद ट्रांसफर कर दी गई है। बाकी किसानों को पैसा कब मिलेगा, यह भी सीएम ने बता दिया है। सम्राट चौधरी ने पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय के संवाद हॉल में कृषि विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बुधवार को कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत लाभार्थियों को राशि ट्रांसफर की। मुख्यमंत्री ने कहा कि संकट के समय किसानों को मदद पहुंचाना राज्य सरकार की प्राथमिकता रही है। सरकार प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को समय पर आर्थिक राहत देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि वे फिर से खेती का काम शुरू कर सकें। बचे हुए किसानों को कब मिलेगा कृषि इनपुट का पैसा? बाढ़ प्रभावित इलाकों में फसल का नुकसान झेलने वाले जिन किसानों को कृषि इनपुट अनुदान पहले चरण में नहीं भेजा गया है, उन्हें दूसरे फेज में यह राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि दूर्गा पूजा के बाद यह पैसा भेज दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश भी दिया कि वे 22 अक्टूबर से एक विशेष अभियान चलाएं, ताकि बाढ़ से फसल नुकसान झेलने वाले जिन किसानों को आर्थिक सहायता नहीं मिल पाई है, उन्हें भी अनुदान मिल सके। सीएम ने स्पष्ट कहा कि आपदा से प्रभावित कोई भी किसान अनुदान से वंचित नहीं रहना चाहिए। फसल नुकसान पर कितना अनुदान देती है बिहार सरकार? दरअसल, बिहार सरकार बारिश और बाढ़ जैसे प्राकृतिक कारणों से फसल खराब होने पर किसानों को कृषि इनपुट अनुदान देती है। इस योजना के तहत किसानों को बिना सिंचाई वाले क्षेत्र में 8500 रुपये प्रति हेक्टेयर, सिंचित क्षेत्रों में 17000 रुपये प्रति हेक्टेयर और बारहमासी फसलों के लिए 22500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से आर्थिक सहायता दी जाती है। सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि इनपुट अनुदान के जरिए सरकार आपदा के समय किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करती है। फसल का नुकसान होने के बाद किसानों को अपनी खेती का कार्य जारी रखने के लिए जरूरी संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी। उन्होंने बाढ़ के दौरान राहत कार्यों में समन्वय के लिए कृषि विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और अन्य संबंधित विभागों द्वारा किए गए कार्यों की भी सराहना की। सीएम ने कहा कि बिहार सरकार किसानों के हितों की रक्षा करने, उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और कृषि क्षेत्र को बेहतर बनाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने किसानों की चिंताओं को दूर करने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रयासों का भी जिक्र किया। इस कार्यक्रम में डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी एवं बिजेंद्र प्रसाद यादव, कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव, आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा और प्रदेश के वरीय अधिकारी शामिल हुए। किस जिले में कितने किसानों को मिला अनुदान-     बेगूसराय 50,579     भागलपुर 74,455     समस्तीपुर 29,995     भोजपुर 36,097     वैशाली 12,146     पूर्णिया 5,963     मधेपुरा 8,832     पटना 5,845     मुंगेर 2,575     औरंगाबाद 3,776     अरवल 2,773     लखीसराय 4,846     कटिहार 2,892     सारण 3,330     शेखपुरा 1,449     खगड़िया 2,388     पश्चिम चंपारण 414     कैमूर 319

छक्कों के किंग बने अभिषेक शर्मा, एक साल में सूर्यकुमार का रिकॉर्ड तोड़ा

 हैदराबाद    भारतीय टीम को वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज के चौथे मुकाबले में 24 रनों से हार झेलनी पड़ी. 14 अक्टूबर (बुधवार) को हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में आयोजित इस मुकाबले में वेस्टइंडीज ने भारतीय टीम के सामने 248 रनों का टारगेट सेट किया था, लेकिन उसकी पूरी टीम 223 रनों पर सिमट गई. इस जीत के साथ ही वेस्टइंडीज ने सीरीज में 2-2 की बराबरी कर ली।  हैदराबाद टी20 में अभिषेक शर्मा से तूफानी प्रदर्शन की उम्मीद थी. हालांकि उन्होंने निराश किया.अभिषेक ने 3 चौके और एक छक्के की मदद से 24 बॉल पर 29 रन बनाए. इस छोटी से पारी के दौरान अभिषेक ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली. अभिषेक टी20 इंटरनेशनल में किसी फुल मेम्बर टीम की ओर से एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं. अभिषेक ने इस साल टी20 इंटरनेशनल में 69 छक्के लगाए हैं और वो अब सूर्यकुमार यादव से आगे निकल चुके हैं।  सूर्यकुमार ने 2022 में 68 छक्के लगाए थे. खास बात यह है कि इस साल खराब फॉर्म के दौर से गुजरने के बावजूद बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने छक्कों के मामले में नया मुकाम हासिल किया है. वेस्टइंडीज के खिलाफ मुकाबले में अभिषेक ने अपनी पहली बाउंड्री 7वीं गेंद पर लगाया. शुरुआती ओवरों में संजू सैमसन ने ज्यादा स्ट्राइक अपने पास रखा, जबकि कैरेबियाई गेंदबाजों ने अभिषेक को खुलकर खेलने से रोके रखा. पावरप्ले के बाद उनका स्ट्राइक रेट भी 100 से नीचे था. नौवें ओवर में शमर स्प्रिंगर की गेंद पर अभिषेक ने आगे बढ़कर जोरदार छक्का लगाया. इसी शॉट के साथ उन्होंने सूर्यकुमार यादव को पीछे छोड़ दिया।  अभिषेक शर्मा ने 2026 की शुरुआत धमाकेदार अंदाज में की थी. न्यूजीलैंड के खिलाफ नागपुर में उन्होंने 35 गेंदों पर 84 रन बनाए, जिसमें आठ छक्के शामिल थे. इसके बाद गुवाहाटी में 20 गेंदों पर नाबाद 68 रनों की पारी खेली और पांच छक्के जड़े. हालांकि, इसके बाद उनका बल्ला कुछ समय तक खामोश रहा. वो कई मौकों पर अपना खाता नहीं खोल पाए. इसके बावजूद अभिषेक ने दमदार वापसी करते हुए छक्कों का नया रिकॉर्ड बना दिया।  शाई होप का तूफानी शतक मुकाबले में वेस्टइंडीज ने शाई होप की नाबाद 102 रनों की पारी के दम पर तीन विकेट पर 247 रन बनाए. होप ने 50 गेंदों का सामना किया और पारी की आखिरी गेंद पर छक्का लगाकर अपना शतक पूरा किया. यह मौजूदा दौरे पर उनका चौथा और टी20 इंटरनेशनल करियर का तीसरा शतक था. शेरफेन रदरफोर्ड ने 26 गेंदों पर नाबाद 49 रन बनाए. दोनों ने चौथे विकेट के लिए सिर्फ 43 गेंदों में 91 रनax की साझेदारी कर वेस्टइंडीज को बड़े स्कोर तक पहुंचाया।  भारतीय गेंदबाजों के लिए दिन मुश्किल रहा. मयंक यादव और अर्शदीप सिंह ने चार-चार ओवरों में 52 रन दिए, जबकि फील्डिंग में कुछ मौके गंवाने से भी टीम को नुकसान हुआ. वेस्टइंडीज ने अपनी पारी में 16 छक्के लगाए. साथ ही भारतीय टीम ने 18 अतिरिक्त रन दिए, जिसका फायदा मेहमान टीम को मिला। 

परविंदर झोटा मर्डर केस में बड़ा अपडेट, आरोपी अश्विनी की पत्नी और दो साथी भी नामजद

मानसा. मानसा से चर्चा में आए परविंदर झोटा हत्याकांड में पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। इस मामले में मुख्य आरोपी और मेडिकल स्टोर मालिक अश्विनी कुमार के बाद अब उसकी पत्नी नीलम रानी का नाम भी नामजद कर दिया गया है। नीलम के अलावा अश्विनी के दो अन्य एसोसिएट लाडी बरनाला और विपिन गर्ग का नाम भी FIR में जोड़ दिया गया है। पुलिस अब इन सभी की भूमिका की भी गहराई से छानबीन कर रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जब आरोपी अश्विनी कुमार ने केमस्टि शॉप के अंदर परविंदर झोटा पर गोली चलाई थी, उस दौरान वह अपने मोबाइल फोन पर किसी व्यक्ति से लगातार बातचीत कर रहा था। पुलिस इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के वक्त आरोपी की बात किससे हो रही थी। डीआईजी ने वारदात के बारे में जानकारी दी – झोटा की हत्या के बारे में बात करते हुए बठिंडा रेंज के डीआईजी हरजीत सिंह ने कहा, "शुरुआती जांच में पता चला है कि अश्वनी नामक एक दवा दुकान के मालिक ने नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा पर अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से गोली चलाई. परविंदर सिंह मानसा में नशा-विरोधी गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग ले रहे थे." अभियुक्त को पकड़ने के लिए पुलिस ने अलग-अलग टीमें गठित की थीं. बीबीसी संवाददाता चरणजीव कौशल ने बताया कि फोरेंसिक टीमें भी घटनास्थल की जांच कर रही हैं. इस बीच, मानसा में डीसी दफ़्तर के बाहर हत्या के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. प्रदर्शनकारी हत्या के सभी अभियुक्तों की गिरफ़्तारी, मामले में कड़ी कार्रवाई और मृतक के परिवार को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं.

दुर्ग में सरकारी स्कूलों के खराब प्रदर्शन पर शिक्षा विभाग सख्त, प्राचार्यों से मांगा जवाब

दुर्ग. सरकारी स्कूलों के तिमाही परीक्षा का रिजल्ट अपेक्षाकृत कमजोर है। बच्चों के निराशाजनक प्रदर्शन से शिक्षा विभाग की चिंताएं बढ़ गई है। दुर्ग ब्लॉक के स्कूलों की तिमाही परीक्षा परिणाम की समीक्षा बुधवार को जेआरडी स्कूल में जिला शिक्षा अधिकारी जगजीत सिंह द्वारा की गई। कमजोर रिजल्ट का जवाब संबंधित स्कूलों के प्राचार्यों से लिया गया। कई प्राचार्यों ने कहा कि बच्चों की नियमित उपस्थिति नहीं होने से परीक्षा परिणाम संतोषजनक नहीं आया। वहीं, कुछ प्राचार्य ने उत्तर पुस्तिकाओं की कड़ाई से जांच जाने का हवाला दिया। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी ने दो टूक कहा कि उत्तर पुस्तिकाएं सामान्य रूप से जांची जाए, न कि किसी पूर्वाग्रह से। समीक्षा के दौरान पता चला कि दुर्ग ब्लॉक की स्कूलों में तिमाही परीक्षा बारहवीं का औसत रिजल्ट 63% तथा दसवीं का 58% रहा है। दुर्ग ब्लॉक के 20 स्कूलों में दसवीं कक्षा का रिजल्ट 60% से कम आया है। वहीं 12वीं में 28 स्कूलों का रिजल्ट 60% से कम है। इस बार 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षाएं फरवरी माह में होगी। इस वजह से तिमाही परीक्षा के बाद पूरे सिलेबस से अर्धवार्षिक परीक्षा ली जाएगी। कमजोर परीक्षा परिणाम के बारे में दबे स्वर में ये बातें भी सामने उभर कर आई कि स्कूलों में शैक्षणिक कार्यों के अलावा अनावश्यक रूप से कई गतिविधियां की संचालित की जाती है, जिसका पढ़ाई से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं होता। इससे बच्चों का ज्यादा समय भी बर्बाद होता है। बहरहाल डीईओ ने कमजोर बच्चों का चिन्हांकन कर उन्हें सीमित पाठ्यक्रम में ज्यादा से ज्यादा लिखने की प्रैक्टिस करने कहा। माध्यमिक शिक्षा मंडल की वेबसाइट पर अपलोड स्टडी मैटेरियल की तैयारी करने जोर दिए गए। समीक्षा के दौरान सहायक संचालक अमित घोष एवं दुर्ग ब्लॉक के प्राचार्य मौजूद थे।

कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव से पूछा- 2024 का लोकसभा चुनाव ईमानदारी से हुआ था या नहीं?

अखिलेश बताएं, सपा जीते तो चुनाव निष्पक्ष और हारे तो बेईमानी कैसे : राजभर   कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव से पूछा- 2024 का लोकसभा चुनाव ईमानदारी से हुआ था या नहीं?  राजभर का तंज- 2024 में एक ही परिवार के पांच सांसद जीते, तब चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल क्यों नहीं उठाए?   2017, 2019 और 2022 में सपा हारी तो चुनाव गलत, 2024 में 37 सांसद जीत गए तो सब 'ऑल इज वेल' हो गया  2027 में साइकिल का टायर पंचर नहीं, फटेगा, अभी से हार के बहाने तलाश रहे अखिलेश : राजभर   लखनऊ उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठाने को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर राजभर ने अखिलेश से पूछा कि 2024 का लोकसभा चुनाव ईमानदारी से हुआ था या नहीं? उन्होंने कहा कि 2017 के विधानसभा चुनाव, 2019 के लोकसभा चुनाव और 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा को हार मिली, लेकिन 2024 में उसके 37 सांसद जीतकर दिल्ली पहुंच गए। ऐसे में चार में से तीन चुनाव गलत और एक चुनाव सही कैसे हो सकता है?   राजभर ने अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए लिखा कि केंद्र में 2014 से अब तक भाजपा की ही सरकार है। फिर ऐसा कैसे हो सकता है कि जिन चुनावों में सपा हारी, वे गलत हो गए और जिस चुनाव में जीत मिली, वह सही हो गया? उन्होंने सवाल किया कि 2024 में समाजवादी पार्टी के 37 सांसद जीतकर दिल्ली कैसे पहुंच गए? इनमें पांच सांसद तो अखिलेश के अपने परिवार से थे। राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि जब सपा को उसकी हैसियत से ज्यादा सीटें मिल गईं, तब सब 'ऑल इज वेल' हो गया।   कैबिनेट मंत्री ने अखिलेश यादव पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि या तो 2024 के चुनाव में उनके वोटर फर्जी थे या फिर वह आज सरेआम अफवाहबाजी कर रहे हैं। उन्होंने तंज कसा कि एसी, पीसी और ट्विटर ने अखिलेश को बहका दिया है।   2027 में साइकिल का रिम-फ्रेम भी टेढ़ा होगा   राजभर ने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि अब नवाबी के दिन हवा हो गए हैं। 2027 में सपा की साइकिल का टायर पंचर नहीं, बल्कि फटने जा रहा है। इस बार साइकिल का रिम और फ्रेम भी टेढ़ा होने वाला है।   उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव आगामी विधानसभा चुनाव में हार की आशंका से अभी से भूमिका बनाने और बहाने तलाशने में जुट गए हैं। राजभर ने कहा कि अखिलेश यह बात अच्छी तरह समझ चुके हैं, इसलिए पहले से बहाना खोजकर रख रहे हैं ताकि बाद में अपने समर्थकों के सामने जवाब देने से बच सकें। उन्होंने पोस्ट के अंत में तंज कसते हुए लिखा, 'कुछ आंसू बचाके रखिए। सत्ताइस में सपा साफ है अखिलेश जी।'