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विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) का गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में शुभारंभ

रायपुर विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) के जिला स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम का आयोजन गुरुवार को गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के पेंड्रा स्थित  अरपा सभा कक्ष कलेक्ट्रेट में किया गया। कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित शुभारंभ समारोह का सीधा प्रसारण देखा गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एवं मरवाही विधायक  प्रणव कुमार मरपच्ची थे, जबकि अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष सु समीरा पैकरा ने की। राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने मिशन का शुभारंभ करते हुए ग्रामीण रोजगार, स्वरोजगार, कौशल विकास और आजीविका संवर्धन पर जोर दिया।              मुख्य अतिथि  प्रणव कुमार मरपच्ची ने कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत को प्रतिवर्ष दो करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे सभी पंचायतों में समान रूप से विकास कार्य किए जा सकेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री  शिवराज सिंह चौहान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए जनप्रतिनिधियों से योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की अपील की। जिला पंचायत अध्यक्ष सु समीरा पैकरा ने कहा कि यह योजना गांव, गरीब और किसानों के विकास से सीधे जुड़ी है। इसके माध्यम से आजीविका, निर्माण कार्य एवं अन्य विकास योजनाओं को गति मिलेगी, जिससे पंचायतों के साथ-साथ जिले और प्रदेश के विकास को नई दिशा मिलेगी। कार्यक्रम में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  मुकेश रावटे, जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह, जनपद पंचायत अध्यक्ष मरवाही जानकी कुशरो, जिला पंचायत सदस्य भवर सिंह गोवास, पवन पैकरा, पूर्णिमा पैकरा, जिला अध्यक्ष लालजी यादव, डिप्टी कलेक्टर सु आकांक्षा पांडे सहित जनप्रतिनिधि एवं जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

मानसिक मंदित संवासियों के भरण-पोषण के लिए अनुदान राशि 2,000 से बढ़ाकर 3,000 रुपये करने के निर्देश

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मानसिक मंदित एवं निराश्रित दिव्यांगजनों के लिए संचालित आश्रय गृह सह प्रशिक्षण केंद्रों एवं हाफ वे होम में रहने वाले संवासियों के भरण-पोषण हेतु प्रति संवासी अनुदान राशि 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रतिमाह किए जाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आश्रय गृहों में रहने वाले मानसिक मंदित एवं निराश्रित दिव्यांगजन पूरी तरह संस्थागत देखभाल पर निर्भर होते हैं। उन्हें पौष्टिक भोजन, समुचित स्वास्थ्य देखभाल और गरिमापूर्ण जीवन उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। समय के साथ आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती लागत को देखते हुए संवासियों के भरण-पोषण की व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाया जाना आवश्यक है। गुरुवार को दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों के सम्मान, सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन से जुड़े प्रत्येक प्रयास को सरकार सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक जनपद में नियमित रूप से दिव्यांगजन सहायक उपकरण वितरण शिविर आयोजित किए जाएं तथा पात्र दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। श्रवण बाधित बच्चों का शीघ्र चिन्हांकन कर समयबद्ध कॉक्लियर इम्प्लांट तथा उपचार के बाद पुनर्वास की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की योजनाओं का उद्देश्य दिव्यांगजनों को सम्मानजनक, सुरक्षित और आत्मनिर्भर जीवन उपलब्ध कराना है। सामाजिक, आर्थिक, चिकित्सकीय, भौतिक एवं शैक्षिक पुनर्वास से जुड़ी सभी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। विशेष विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रशिक्षित मानव संसाधन, आधुनिक सुविधाओं तथा शासकीय भवनों में बाधारहित वातावरण विकसित करने के कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि विशेष विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकतानुसार शिक्षकों की समयबद्ध तैनाती की जाए। नियमित भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाई जाए तथा तब तक ऐसी प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए कि दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई किसी भी स्तर पर प्रभावित न हो। बैठक में बताया गया कि विभाग द्वारा दिव्यांग पेंशन योजना, कुष्ठावस्था पेंशन योजना, कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना, शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना, दुकान निर्माण एवं संचालन योजना, निःशुल्क मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल योजना, कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यक्रम, बचपन डे-केयर सेंटर, विशेष विद्यालय, जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र तथा उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा सुविधा सहित अनेक योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 12,23,295 दिव्यांगजन पेंशन योजना से लाभान्वित हुए, जबकि 34,420 पात्र दिव्यांगजनों को 43,689 विभिन्न प्रकार के सहायक उपकरण वितरित किए गए। इसी अवधि में 226 श्रवण बाधित बच्चों का कॉक्लियर इम्प्लांट कराया गया तथा चालू वित्तीय वर्ष में 68 जनपदों से 335 बच्चों का चिन्हांकन किया जा चुका है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 तक जहां 10 जनपदों में बचपन डे-केयर सेंटर संचालित थे, वहीं वर्तमान में 25 जनपदों में इनका संचालन किया जा रहा है तथा 28 अन्य जनपदों में स्थापना एवं संचालन की प्रक्रिया प्रगति पर है। इसी प्रकार वर्ष 2017 तक 16 विशेष विद्यालय संचालित थे, जिनकी संख्या बढ़कर अब 28 हो गई है। इन विद्यालयों में दिव्यांग बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, छात्रावास, भोजन, स्वास्थ्य परीक्षण, सहायक उपकरण एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

बस्तर प्रवास के अनुभवों के आधार पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने ली उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

रायपुर महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं का गोंडी एवं हल्बी भाषा में होगा व्यापक प्रचार-प्रसार महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने मंत्रालय महानदी भवन में महिला एवं बाल विकास एवं समाज कल्याण विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक लेकर विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने तथा जमीनी स्तर पर कार्यों में गति लाने के निर्देश अधिकारियों को दिए। बैठक में महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव  शहला निगार,दोनों विभागों के संचालक सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं का गोंडी एवं हल्बी भाषा में होगा व्यापक प्रचार-प्रसार मंत्री  राजवाड़े ने हाल ही में बस्तर संभाग के प्रवास तथा केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री  अन्नपूर्णा देवी से हुई चर्चा के दौरान प्राप्त अनुभवों और सुझावों के आधार पर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्थानीय भाषाओं में संवाद अत्यंत आवश्यक है। इस उद्देश्य से बस्तर संभाग में विभागीय योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार गोंडी एवं हल्बी भाषा में किए जाने के निर्देश दिए गए, ताकि प्रत्येक पात्र हितग्राही तक योजनाओं की सटीक जानकारी पहुंच सके। मंत्री  राजवाड़े ने बस्तर संभाग में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका एवं पर्यवेक्षक के रिक्त पदों को आवश्यक स्वीकृति प्राप्त कर शीघ्र भरने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने दूरस्थ क्षेत्रों के आंगनबाड़ी केंद्रों में भवन, पोषण, पेयजल, स्वच्छता एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर विशेष बल दिया। बैठक में उन्होंने कहा कि विभागीय योजनाओं का लाभ समयबद्ध रूप से समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, इसके लिए सभी जिलों में नियमित मॉनिटरिंग, सतत निरीक्षण और प्रभावी फॉलोअप सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करने की अपेक्षा व्यक्त की। मंत्री  राजवाड़े ने पोषण पुनर्वास केंद्रों (एनआरसी) में भर्ती बच्चों एवं उनकी माताओं को गुणवत्तापूर्ण उपचार, पौष्टिक आहार तथा बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश देते हुए कहा कि कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। समीक्षा बैठक के दौरान समाज कल्याण विभाग की योजनाओं की भी विस्तृत समीक्षा की गई। मंत्री ने दिव्यांगजन एवं वृद्धजन कल्याण से संबंधित योजनाओं की प्रगति का आकलन करते हुए बस्तर संभाग में दिव्यांगजनों को सहायक उपकरणों के समयबद्ध वितरण, पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने तथा नियमित शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए।उन्होंने सियान गुड़ी (डे-केयर सेंटर) एवं वृद्धाश्रमों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए बेहतर आवास, पौष्टिक भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं तथा सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। बैठक के अंत में मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि बस्तर संभाग के प्रवास के दौरान यह स्पष्ट रूप से अनुभव हुआ है कि क्षेत्र में विकास और विश्वास का नया वातावरण निर्मित हुआ है। ऐसे में विभाग की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है कि शासन की प्रत्येक जनकल्याणकारी योजना तीव्र गति से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और उसका प्रभाव धरातल पर दिखाई दे। 

बेंगलुरु खदान हादसा: ग्रेनाइट चट्टान गिरने से 6 मजदूरों की मौत, मृतकों में MP के 5 और छत्तीसगढ़ का 1 श्रमिक

बेंगलुरु कर्नाटक के बेंगलुरु शहरी जिले में गुरुवार को एक ग्रेनाइट खदान में हुए भीषण हादसे में सात प्रवासी मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि पांच अन्य घायल हो गए। मृतकों में पांच मजदूर मध्य प्रदेश, एक छत्तीसगढ़ और एक कर्नाटक के यादगीर जिले का निवासी था। पुलिस ने शुरुआती जांच में हादसे के पीछे गंभीर लापरवाही की आशंका जताई है। यह हादसा बेंगलुरु शहरी जिले के मडापट्टना क्षेत्र में हुआ, जहां खदान में ऊपर से ग्रेनाइट का विशाल पत्थर खिसककर नीचे काम कर रहे मजदूरों पर आ गिरा। पत्थर की चपेट में आने से सात मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के समय खदान में कुल 16 मजदूर काम कर रहे थे, जिनमें चार मजदूर सुरक्षित बच गए। खदान में ऊपर और नीचे दो क्रशर संचालित हो रहे थे सेंट्रल रेंज के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल एस. गिरीश ने बताया कि खदान में ऊपर और नीचे दो क्रशर संचालित हो रहे थे। ऊपरी हिस्से में ड्रिलिंग का काम चल रहा था, तभी अचानक एक बड़ा ग्रेनाइट पत्थर नीचे खिसक गया और वहां काम कर रहे मजदूरों पर गिर पड़ा। उन्होंने कहा कि इस हादसे में घायल सभी पांच मजदूरों की हालत फिलहाल खतरे से बाहर है। शुरुआती जानकारी में हुई थी मृतकों की पहचान में गलती हादसे के तुरंत बाद पुलिस सूत्रों ने बताया था कि अधिकांश मृतक बिहार के रहने वाले हैं, लेकिन बाद में जांच के दौरान स्पष्ट हुआ कि पांच मृतक मध्य प्रदेश के निवासी थे। वहीं, कुछ समय के लिए मृतकों की संख्या आठ होने की भी चर्चा रही, लेकिन पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की। अधिकारियों के अनुसार हादसे में कुल सात लोगों की ही जान गई है। मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये मुआवजा खान एवं भू-विज्ञान विभाग के अधिकारी रंगप्पा ने बताया कि खदान संचालक ने मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये तथा घायलों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने पर सहमति जताई है। नई खनन गाइडलाइन बनाएगी सरकार हादसे पर शोक जताते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार पूरे प्रदेश में खनन गतिविधियों के लिए नई सुरक्षा गाइडलाइन लागू करेगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार हादसा ब्लास्टिंग से नहीं, बल्कि मिट्टी और चट्टान के खिसकने के कारण हुआ है। विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। मुआवजे की घोषणा भी की जाएगी मुख्यमंत्री ने कहा कि फिलहाल सरकार की पहली प्राथमिकता हादसे के कारणों का पता लगाना और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकना है। मुआवजे की घोषणा भी की जाएगी, लेकिन उससे पहले सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। जांच के आदेश, जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि हादसे की विस्तृत जांच कराई जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि खदान संचालन की अनुमति किस स्तर पर दी गई थी। यदि किसी अधिकारी या संबंधित विभाग की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने राज्य में अवैध खनन गतिविधियों पर भी चिंता जताते हुए कहा कि सरकार इन्हें रोकने के लिए कड़े कदम उठाएगी। विपक्ष और केंद्रीय मंत्री ने सरकार को घेरा केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि राज्य में खनन माफिया और प्रभावशाली लॉबी मजदूरों की सुरक्षा की अनदेखी कर केवल मुनाफे पर ध्यान दे रही है। उन्होंने सरकार से सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराने की मांग की। वहीं, कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने भी राज्य सरकार को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना और कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में मजदूरों की जान से खिलवाड़ न हो। घटनास्थल का मंजर था बेहद भयावह हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। विशाल ग्रेनाइट पत्थर के नीचे आने से माल ढोने वाले वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि एक ट्रैक्टर भी बुरी तरह चकनाचूर हो गया। मृतकों और घायलों के परिजनों के विलाप से पूरे इलाके में मातम पसरा रहा। यादगीर निवासी एक मृतक के परिजन ने बताया कि वह परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था और बेटियों की शादी के बाद कर्ज चुकाने के लिए बेंगलुरु में मजदूरी कर रहा था। उसकी मौत से परिवार के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।  

प्राकृतिक सौंदर्य, कॉफी बागानों और जनजातीय संस्कृति की अनूठी पहचान है बैतूल का कुकरू खामला

भोपाल  प्राकृतिक सौंदर्य, हरियाली और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध, बैतूल जिले की भैंसदेही तहसील में स्थित कुकरू एक अनछुआ रमणीय पर्यटन स्थल है। समुद्र तल से लगभग 3,668 फीट की ऊँचाई पर स्थित यह पर्वतीय क्षेत्र वर्षा ऋतु में बादलों, कोहरे, घने वनों और हरियाली से आच्छादित रहता है। अदना नदी का प्रवाह, मिश्रित वन और तेलिया सागौन के विशाल वृक्ष इस क्षेत्र की प्राकृतिक विशेषताओं में शामिल हैं। वर्षभर सुहावने मौसम वाला कुकरू प्रकृति प्रेमियों, ट्रैकिंग और बाइकिंग के शौकीनों के लिए उपयुक्त पर्यटन स्थल है। यहाँ स्थित सनराइज प्वाइंट और सनसेट प्वाइंट प्रमुख आकर्षण हैं। कुकरू अपनी कॉफी के साथ कोदो-कुटकी, आँवला, शहद, हर्रा, बहेड़ा, सफेद मूसली और भिलवा जैसे वन उत्पादों के लिए भी प्रसिद्ध है। स्थानीय मोटे अनाज से बने पारंपरिक व्यंजन और वन उपज एवं लकड़ी से निर्मित हस्तशिल्प यहाँ की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का हिस्सा हैं। कॉफी बागानों से मिली विशिष्ट पहचान कुकरू-खामला क्षेत्र ऐतिहासिक कॉफी बागानों के लिए भी जाना जाता है। यहाँ वर्ष 1944 में कॉफी की खेती प्रारंभ हुई थी, जिसने इस क्षेत्र को विशेष पहचान दिलाई। देश में गिने चुने प्रांतों में ही उच्च किस्म की कॉफी की खेती होती है। कुकरू में लगभग 110 एकड़ क्षेत्र में उच्चतम किस्म की अरेबिका कॉफी का उद्यान है, जिसमें से 10 एकड़ में कॉफी की खेती की जाती है। मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड तथा वन विभाग द्वारा इन बागानों के संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य किया जा रहा है। ईको टूरिज्म और पर्यटन अधोसंरचना का होगा विस्तार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में कुकरू के भ्रमण के दौरान इसे प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की हैं। लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से कुकरू, चिखलदरा, मुक्तागिरी और मेलघाट को जोड़ते हुए एकीकृत पर्यटन सर्किट विकसित किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत ईको टूरिज्म का विस्तार, सनराइज एवं सनसेट प्वाइंट का उन्नयन, आधुनिक सुविधाओं से युक्त ईको रिसॉर्ट का विकास, पर्यटन अधोसंरचना का विस्तार तथा ट्रैकिंग, नेचर ट्रेल्स और अन्य साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। जनजातीय समुदायों को मिलेगा रोजगार और स्वरोजगार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थानीय जनजातीय समुदायों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने के उद्देश्य से होमस्टे योजना प्रारंभ करने की घोषणा की है। इन होमस्टे का संचालन मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम की कार्यप्रणाली के अनुरूप किया जाएगा तथा ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा मध्यप्रदेश टूरिज्म द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही पर्यटकों को जनजातीय संस्कृति और स्थानीय जीवनशैली को निकट से जानने का अवसर मिलेगा। कुकरू तक पहुँचना आसान भोपाल से कुकरू की दूरी लगभग 270 किलोमीटर और बैतूल से लगभग 90 किलोमीटर है। रेल मार्ग से भोपाल और बैतूल के बीच नियमित ट्रेन सेवाएँ उपलब्ध हैं, जिनमें भोपाल–नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस और छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस सहित अन्य प्रमुख ट्रेन शामिल हैं। बैतूल से कुकरू तक टैक्सी और अन्य स्थानीय वाहनों से आसानी से पहुँचा जा सकता है। सड़क मार्ग से भोपाल से बैतूल और वहाँ से शाहपुर होते हुए कुकरू पहुँचा जा सकता है। अंतिम चरण का पर्वतीय मार्ग प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर है। प्रकृति, संस्कृति और ईको टूरिज्म का संगम कुकरू प्राकृतिक सौंदर्य, कॉफी बागानों, जनजातीय संस्कृति और ईको टूरिज्म का समन्वित अनुभव प्रदान करता है। यहाँ ईको टूरिज्म सेंटर के अंतर्गत पर्यटकों के लिए रेस्ट हाउस की सुविधा उपलब्ध है तथा मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड (MPEDB) द्वारा प्रशिक्षित स्टाफ आवश्यक सेवाएँ उपलब्ध कराता है। मानसून के दौरान कुकरू की हरियाली और प्राकृतिक वातावरण इसे मध्यप्रदेश के प्रमुख प्रकृति पर्यटन स्थलों में विशेष स्थान प्रदान करते हैं।  

उत्तर प्रदेश में बिजली दरें स्थिर और आपूर्ति रिकॉर्ड स्तर पर

लखनऊ  योगी सरकार ने प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए लगातार सातवें वर्ष भी बिजली दरों में कोई वृद्धि नहीं करने का फैसला लिया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी बिजली की दरें वही रहेंगी, जो पिछले सात वर्षों से लागू हैं। खास बात यह है कि इस अवधि में बिजली की दरों में एक पैसे की भी बढ़ोतरी नहीं की गई है, जिससे आम जनता, किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को सीधा लाभ मिल रहा है। योगी सरकार के इस फैसले को बिजली उपभोक्ताओं के हित में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इससे आम नागरिकों को आर्थिक राहत मिली है। वहीं बिजली दरों को स्थिर रखने के साथ-साथ योगी सरकार ने विद्युत आपूर्ति व्यवस्था में भी उल्लेखनीय सुधार किया है। प्रदेश में बिजली आपूर्ति लगातार बेहतर हुई है और शहरों से लेकर गांवों तक निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के लिए व्यापक स्तर पर काम किया गया है। सरकार का लक्ष्य हर शहर, हर गांव, हर सड़क और हर गली तक 24×7 गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचाना है। इस वर्ष गर्मी के मौसम में उत्तर प्रदेश ने बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड भी बनाया। राज्य में अधिकतम विद्युत आपूर्ति 32,673 मेगावाट तक पहुंच गई, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है। इस संबंध में ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने सोशल मीडिया (एक्स) पर पोस्ट करते हुए जानकारी दी है। ऊर्जा मंत्री ने लिखा कि उत्तर प्रदेश में लगातार सातवें वर्ष भी बिजली की दरें नहीं बढ़ाई गईं। सभी उपभोक्ताओं के लिए 2026-27 में भी वही दरें रहेंगी जो सात वर्ष पहले थीं और यह तब जब विद्युत आपूर्ति भी अधिकतम है।

कार्यस्थलों का नियमित निरीक्षण कर हर महीने प्रगति की समीक्षा के दिए निर्देश

रायपुर लोक निर्माण विभाग के सचिव  मुकेश कुमार बंसल ने आज वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों, मैदानी अधिकारियों और ठेकेदारों की बैठक लेकर प्रदेश में निर्माणाधीन पुलों, फ्लाई-ओवर्स और रेलवे ओवर-ब्रिजेस के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने रायपुर के सिरपुर भवन स्थित सेतु परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता कार्यालय में आयोजित बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों को कार्यस्थलों का नियमित निरीक्षण कर हर महीने प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्धारित माइलस्टोन्स के अनुसार हर कार्य की समयबद्ध प्रगति सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने निर्माण कार्यों पर कड़ी निगरानी रखते हुए कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं लाने वाले  ठेकेदारों पर त्वरित कार्रवाई करने को कहा।  लोक निर्माण विभाग के सचिव ने राज्य में निर्माणाधीन सभी पुलों की प्रगति की संभागवार और वर्षवार समीक्षा की। उन्होंने बस्तर में आरसीपीएलडब्लूए (RCPLWA) के अंतर्गत प्रगतिरत पुलों के कार्य हर हाल में दिसम्बर तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने पुलों, फ्लाई-ओवर्स और रेलवे ओवर-ब्रिजेस के निर्माण के लिए प्रत्येक चरण और प्रक्रिया को निश्चित समयावधि में पूर्ण करने के लिए मुख्य अभियंता को एसओपी बनाने को कहा। उन्होंने इनका कड़ाई से पालन भी सुनिश्चित करने को कहा। विभागीय सचिव ने पुलों के निर्माण के दौरान कार्यस्थलों पर सुरक्षा के सभी मानकों का पूरा ध्यान रखने को कहा, जिससे की जान-माल की कोई हानि न हो। उन्होंने पुलों, फ्लाई-ओवर्स और रेलवे ओवर-ब्रिजेस के निर्माण में सड़क सुरक्षा के सभी मापदंडों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने मैदानी अधिकारियों को फील्ड में कार्यों का बारीकी से निरीक्षण कर ठेकेदारों द्वारा किए गए कार्यों के नियमित भुगतान करने को कहा। उन्होंने ठेकेदारों को हर महीने भुगतान करने को कहा।  बंसल ने चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 और पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 के नए कार्यों की प्राथमिकता तय कर उनके प्राक्कलन 31 जुलाई तक भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने पहुंचविहीन गांवों तक बारहमासी कनेक्टीविटी के लिए पुलों के प्रस्ताव के साथ ही द्रुतगामी सड़कों में भी जहां पुलों की जरूरत है, उनके भी प्रस्ताव प्राथमिकता सूची में शामिल कर भेजने को कहा। उन्होंने कलेक्टरों के साथ समन्वय कर ब्लॉस्टिंग की अनुमति, भू-अर्जन, वन व्यपवर्तन, पेड़ कटाई तथा स्थल विवाद के लंबित मामलों का तेजी से निराकरण कर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। इनका निराकरण नहीं होने की स्थिति में उच्च कार्यालयों को अवगत कराने को कहा, ताकि उच्च स्तर पर इनका समाधान निकाला जा सके।  उन्होंने विभागीय अधिकारियों को जवाबदेही से काम करते हुए निर्माण सामग्री और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए समय-सीमा में पुलों के निर्माण पर जोर दिया। उन्होंने भारत सरकार के गतिशक्ति पोर्टल पर सभी पुलों की जानकारी 10 जुलाई तक अपलोड करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता  वी.के. भतपहरी, सेतु परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता  एस.के. कोरी और अधीक्षण अभियंता  डी.के. माहेश्वरी सहित सभी मंडलों के अधीक्षण अभियंता, सभी संभागों के कार्यपालन अभियंता तथा सभी उप संभागों के अनुविभागीय अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे। स्काई-वॉक के संचालन-संधारण की कार्ययोजना बनाने के दिए निर्देश  बंसल ने रायपुर में निर्माणाधीन स्काई-वॉक के कार्यों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को इसके संचालन और संधारण की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके चालू होने के बाद साफ-सफाई, रखरखाव और बिजली आपूर्ति की स्थायी और पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने इसके हैंड-ओवर के लिए नगर निगम से चर्चा करने के भी निर्देश दिए। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि स्काई-वॉक का काम इस साल दिसम्बर तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। लोगों के चढ़ने-उतरने के लिए 1.2 किमी लंबाई के इस स्काई-वॉक में 9 एस्केलेटर्स और 4 लिफ्ट भी लगाए जाएंगे। ठेकेदारों की बैठक लेकर समस्याओं की ली जानकारी, कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश लोक निर्माण विभाग के सचिव  बंसल ने पुलों का निर्माण कर रहे ठेकेदारों की बैठक लेकर कार्य एवं कार्यस्थलों पर आ रही समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने अनुबंध के अनुसार निर्माण कार्यों में अपेक्षित प्रगति सुनिश्चित करने के साथ ही गुणवत्ता और समय पर कार्य पूर्णता में कोई समझौता नहीं करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्य मार्गों से जोड़ने, लोगों के बारहमासी आवागमन और माल परिवहन की दृष्टि से पुलों के निर्माण बहुत महत्वपूर्ण हैं। इनके निर्माण में किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। निर्धारित समयावधि में अच्छा काम होना चाहिए।

उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए खुशखबरी, लगातार 7वें साल नहीं बढ़ेंगी बिजली दरें

लखनऊ   उत्तर प्रदेश के करीब 3.70 करोड़ बिजली ग्राहकों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है. उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने बिजली दरों को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि राज्य में फिलहाल बिजली की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी. इसके साथ ही नोएडा के ग्राहकों को मिलने वाली 10 फीसदी बिजली दर छूट भी पहले की तरह जारी रहेगी. आयोग के इस फैसले से घरेलू, कमर्शियल और औद्योगिक ग्राहकों को महंगाई के दौर में बड़ी राहत मिलेगी।  लगातार 7वें साल नहीं बढ़ीं बिजली दरें आयोग के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश लगातार सातवें वर्ष भी बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है. बीते 7 वर्षों से प्रदेश में बिजली की टैरिफ दरें स्थिर रखी गई हैं, जिससे करोड़ों ग्राहकों पर एक्‍स्‍ट्रा आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा. यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब कई राज्यों में बिजली दरों में संशोधन किए जा चुके हैं।  नियामक आयोग ने नोएडा क्षेत्र के उपभोक्ताओं को मिलने वाली 10 प्रतिशत बिजली दर छूट को भी जारी रखने का फैसला किया है. इससे नोएडा के लाखों घरेलू और व्यावसायिक ग्राहकों को पहले की तरह रियायती दरों पर बिजली मिलती रहेगी।  EV चार्जिंग स्टेशनों को मिलेगा विशेष लाभ उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के मकसद से आयोग ने ईवी चार्जिंग स्टेशनों के लिए भी अहम फैसला लिया है. अब सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक बिजली की खपत पर 20 प्रतिशत की छूट दी जाएगी. माना जा रहा है कि इससे इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और ग्रीन एनर्जी को प्रोत्साहन मिलेगा।  उत्तर प्रदेश विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आयोग के इस फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग का आभार व्यक्त किया है. परिषद का कहना है कि बिजली दरों को स्थिर रखने का निर्णय प्रदेश के करोड़ों उपभोक्ताओं के हित में है और इससे आम लोगों के साथ-साथ उद्योगों को भी राहत मिलेगी। 

Trump New Plan: क्या अमेरिका में गर्भवती विदेशी महिलाओं की एंट्री होगी बैन? Birthright विवाद के बाद नई तैयारी

वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले कई सालों से जन्म के आधार पर नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) खत्म करने की कोशिश में लगे हैं, लेकिन अदालत से उनके इस कदम को बड़ा झटका लगा है. हालांकि फिर भी उन्होंने अपनी कोशिशों को जारी रखा हुआ है. ट्रंप प्रशासन ने इसे लेकर एक नई योजना पर काम करना शुरू किया है. अब इसे उन महिलाओं की तरफ मोड़ा जा रहा है जो बच्चे को जन्म देने के लिए अमेरिका आती हैं, ताकि उनका बच्चा बर्थराइट सिटिजनशिप के तहत अमेरिका का नागरिक बन सके।  बाहरी प्रेग्नेंट महिलाओं की एंट्री बैन की तैयारी अमेरिकी वेबसाइट एक्सिओस की खबर के मुताबिक, अगर ट्रंप प्रशासन इसके खिलाफ नियम बनाने में कामयाब हुआ तो प्रेग्नेंसी, यात्रा और नागरिकता को लेकर एक नया इमिग्रेशन बैटल शुरू हो जाएगा. इससे बहस अमेरिका में चाइल्ड बर्थ के अधिकारों को चुनौती देने से हटकर दूसरे देशों से अमेरिका आने वाली प्रेग्नेंट महिलाओं पर बैन लगाने की ओर मुड़ जाएगी. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को डोनाल्ड ट्रंप के जन्मजात नागरिकता खत्म करने के उनके आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की थी. ट्रंप ने अदालत से अमेरिका में जन्मे उन बच्चों को नागरिकता देने से इनकार करने की मांग की थी जिनके माता-पिता अमेरिकी नागरिक नहीं हैं।  बर्थ राइट सिटीजनशिप पर ट्रंप का नया प्लान कोर्ट से झटका लगने के बाद फेडरलिस्ट पार्टी के संस्थापक शॉन डेविस जैसे MAGA समर्थकों ने सुझाव दिया कि प्रेग्नेंट विदेशी महिलाओं के अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगनी चाहिए. ट्रंप के सलाहकार स्टीफन मिलर ने कोर्ट के  फैसले के बाद कहा कि देश को इस बारे में सावधानी से सोचने की जरूरत है, भले ही यह अस्थायी रूप से ही क्यों न हो. उन्होंने कहा कि बर्थ राइट सिटीजनशिप से दूसरे देशों के नागरिकों के बच्चे अमेरिकी नागरिक बनकर सामाजिक सुरक्षा का लाभ उठा सकते हैं।  उन्होंने कहा कि व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने एक्सियोस को ईमेल से भेजे एक बयान के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप बर्थराइट सिटीजनशिप के मूल्य की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, यही वजह है कि अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस को इस मामले पर तुरंत एक्शन लेने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन के पास अमेरिकी नागरिकता की सुरक्षा के लिए कई उपाय हैं।  महिलाओं का अमेरिकी नागरिकता वाला प्लान  उन्होंने इसे बर्थ टूरिज्म बताते हुए कहा कि ये तब होता है जब बाहरी महिलाएं अमेरिका में खात तौर पर बच्चे को जन्म देने के लिए आती हैं, ताकि उनके बच्चे को अमेरिकी नागरिकता मिल सके. न्याय विभाग ने  मंगलवार को एक ज्ञापन जारी किया है, जिसमें इस बात की जांच करने की अपील की गई है।  सहायक अटॉर्नी जनरल कॉलिन मैकडॉनल्ड ने एक्स को भेजे गए मैमो में कहा कि अमेरिका के आपराधिक कानून पहले से ही इन तथाकथित बर्थ टूरिज्म स्कीम्स को प्रतिबंधित करते हैं. इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी कई स्कीम्स झूठे वीजा आवेदन से शुरू होती हैं, लोग झूठ बोलकर अमेरिका में रहने का समय और मकसद को छिपाते हैं।  हर साल बाहरी महिलाएं 20,000 से 26,000 बच्चों को देती हैं जन्म उन्होंने कहा कि इनमें से कई मामलों में वीजा धोखाधड़ी के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है, लेकिन  वायर धोखाधड़ी, स्वास्थ्य सेवा धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और गंभीर पहचान चोरी के आरोपों पर भी विचार किया जाना चाहिए. आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिकी सरकार विदेशी महिलाओं से पैदा हुए बच्चों की संख्या का रिकॉर्ड नहीं रखती है, लेकिन अनुमान के मताबिक, हर साल 20,000 से 26,000 के करीब बच्चे अमेरिका में जन्म लेते हैं। 

समर्पण, अनुशासन और निरंतर परिश्रम से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर   मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज सक्ती जिला कार्यालय में आयोजित मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह में राज्य एवं जिला स्तर पर बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं का सम्मान किया। मुख्यमंत्री  साय ने विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं तथा उन्हें जीवन में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री  साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए उनके भविष्य के लक्ष्य, करियर की योजनाओं और रुचियों की जानकारी ली। विद्यार्थियों ने कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, चार्टर्ड अकाउंटेंट, डॉक्टर सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने की इच्छा व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने उनके आत्मविश्वास और ऊँचे सपनों की सराहना करते हुए कहा कि समर्पण, अनुशासन, निरंतर अध्ययन और कठिन परिश्रम ही सफलता की वास्तविक कुंजी हैं। उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी बड़े लक्ष्य निर्धारित करते हैं और पूरी निष्ठा से उन्हें प्राप्त करने का प्रयास करते हैं, सफलता स्वयं उनके कदम चूमती है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक संसाधनों और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ का प्रत्येक विद्यार्थी अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़े और राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाए। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों, सामाजिक संवेदनशीलता और राष्ट्रसेवा की भावना को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज सम्मानित हुए विद्यार्थी केवल अपने परिवार का ही नहीं, बल्कि पूरे जिले और प्रदेश का गौरव हैं। उनकी सफलता अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनेगी और उत्कृष्टता की नई संस्कृति को आगे बढ़ाएगी। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री  गुरु खुशवंत साहब, सांसद मती कमलेश जांगड़े सहित अन्य जनप्रतिनिधि, कलेक्टर  अमृत विकास तोपनो, पुलिस अधीक्षक  प्रफुल्ल ठाकुर सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।