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योगी सरकार का गो संरक्षण मॉडल: ‘हेता’ ब्रांड से A2 दूध और 150+ प्रोडक्ट्स की ग्लोबल पहचान

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ‘गो संरक्षण से समृद्धि’ मॉडल अब उत्तर प्रदेश की जमीन से उठकर वैश्विक मंच पर अपनी सफलता का परचम लहरा रहा है। राज्य में देशी गायों के संरक्षण को सिर्फ आस्था तक सीमित न रखकर एक मजबूत आर्थिक मॉडल में बदल दिया गया है। इसका नतीजा यह है कि आज उत्तर प्रदेश में देशी गायों के सहारे न सिर्फ 10 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार खड़ा हुआ है, बल्कि अमेरिका, यूके और ऑस्ट्रेलिया समेत दुनिया के 10 से अधिक देशों में ‘मेड इन यूपी’ गो उत्पादों की भारी मांग पैदा हो गई है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने बदली गो-संरक्षण की परिभाषा इस क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत गाजियाबाद के सिकंदरपुर से हुई, जहां अमेरिका की दिग्गज सॉफ्टवेयर कंपनियों में 14 साल तक इंजीनियर रहे असीम रावत ने सीएम योगी की प्रेरणा से गो-संरक्षण की राह चुनी। उन्होंने 'हेता' (HETHA) ब्रांड के तहत 1000 से ज्यादा देशी गायों पर आधारित एक एथिकल डेयरी सिस्टम स्थापित किया है। आज 100 लोगों की उनकी विशेष टीम इस मिशन को एक ग्लोबल ब्रांड बना चुकी है, जिसके अंतर्गत संरक्षित साहीवाल गाय की महत्ता को खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गोपूजन कर सराह चुके हैं। दूध से लेकर कॉस्मेटिक्स तक, 150 से अधिक प्रोडक्ट्स 'हेता' का यह मॉडल स्वदेशी नस्लों के समग्र और वैज्ञानिक उपयोग पर आधारित है। यहाँ केवल दूध ही नहीं, बल्कि पंचगव्य, आयुर्वेदिक औषधियां, ऑर्गेनिक फूड और स्किन व हेयर केयर जैसे लगभग 150 प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में यहाँ के A2 दूध, बिलौना घी, ब्राह्मी घृत और गोमूत्र अर्क की शुद्धता धूम मचा रही है। सबसे खास बात यह है कि इस मॉडल में वृद्ध या दूध न देने वाले गोवंश को बोझ नहीं, बल्कि जिम्मेदारी मानकर सिस्टम का अभिन्न हिस्सा बनाया जाता है। दुनिया के कोने-कोने में पहुंचा 'मेड इन यूपी' उत्तर प्रदेश की इस अनूठी 'गो-इकोनॉमी' का विस्तार अब भारत से बाहर निकलकर अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूरोप, सिंगापुर और दुबई जैसे मध्य-पूर्व व एशियाई देशों तक हो चुका है। इन वैश्विक बाजारों में यूपी के गो-उत्पादों की बढ़ती पहुंच ने राज्य की एक नई और प्रगतिशील पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत किया है। डेयरी मास्टर प्लान के तहत मिल रही 50 प्रतिशत सब्सिडी पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार, इस मॉडल को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए योगी सरकार नीतिगत स्तर पर भारी वित्तीय सहायता दे रही है। सरकार की ‘ऑपरेशन-4’ योजना के तहत स्वदेशी गायों के पालन पर 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी का प्रावधान है। डेयरी मास्टर प्लान के तहत 2 से 25 गायों तक के स्टार्टअप के लिए 15% स्वयं का निवेश, 35% बैंक लोन और 50% सरकारी अनुदान (सब्सिडी) का एक पारदर्शी फॉर्मूला लागू किया गया है। साहीवाल, गिर, गंगातीरी और सिंधी जैसी उच्च गुणवत्ता वाली स्वदेशी नस्लों पर केंद्रित योगी सरकार की यह नीतियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नया उछाल ला रही हैं। यह 'गो-इकोनॉमी' मॉडल अब उत्तर प्रदेश को वैश्विक डेयरी शक्ति बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो रहा है।

परंपरागत धान के बदले उद्यानिकी को अपनाया, प्रति एकड़ उत्पादन 21 क्विंटल से बढ़कर हुआ 155 क्विंटल

रायपुर ग्राफ्टेड बैंगन की खेती पारंपरिक विधि की तुलना में कहीं अधिक लाभकारी है। इसमें दो अलग-अलग पौधों को जोड़कर एक नया पौधा तैयार किया जाता है, जिससे पौधे की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कई गुना बढ़ जाती है और उपज 20-30 प्रतिशत तक अधिक मिलती है। कठिन परिश्रम, नवाचार और आधुनिक कृषि तकनीक के बेहतर समन्वय से किसान किस तरह अपनी तकदीर बदल सकते हैं, इसका जीवंत उदाहरण महासमुंद जिले के बसना विकासखंड अंतर्गत ग्राम बोहारपार के प्रगतिशील किसान  नवीन साव ने पेश किया है। पारंपरिक खेती के ढर्रे से आगे बढ़ते हुए उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में ग्राफ्टेड बैगन की उन्नत खेती को अपनाया है। आज वे अपनी इस अनूठी पहल से अंचल के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं। धान की तुलना में पांच गुना से अधिक का शुद्ध लाभ            कृषक  नवीन साव ने बताया कि वे पूर्व में अपने खेतों में केवल पारंपरिक धान की खेती करते थे, जिससे उन्हें काफी सीमित आय प्राप्त होती थी। धान की फसल से उन्हें प्रति एकड़ लगभग 21 क्विंटल का उत्पादन और करीब 45 हजार 600 रुपए का लाभ मिल पाता था। अपनी आय बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत ग्राफ्टेड बैगन की खेती प्रारंभ की। उन्होंने अपनी 1.31 हेक्टेयर भूमि पर वैज्ञानिक पद्धति का अनुसरण करते हुए ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) और मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया। इस आधुनिक प्रबंधन के फलस्वरूप उन्हें बम्पर पैदावार मिली और प्रति एकड़ लगभग 155 क्विंटल बैगन का उत्पादन प्राप्त हुआ। सरायपाली और ओडिशा की मंडियों में भारी मांग           ग्राफ्टेड बैंगन की फसल रोपाई के लगभग 45-50 दिनों बाद तुड़ाई  के लिए तैयार हो जाती है। इसके एक पौधे से 50 किलो तक पैदावार प्राप्त की जा सकती है। पारंपरिक खेती की तुलना में इसका मुनाफा लगभग दोगुना तक हो सकता है। नवीन साव ने अपने इस उन्नत उत्पाद को स्थानीय सरायपाली और पड़ोसी राज्य ओडिशा की प्रमुख मंडियों में लगभग 30 रुपए प्रति किलोग्राम की थोक दर पर विक्रय किया। सभी खर्चों को काटकर उन्होंने इस फसल से 2 लाख 45 हजार रुपए का शुद्ध लाभ अर्जित किया है, जो धान की तुलना में पांच गुना से भी अधिक है। विभागीय मार्गदर्शन और तकनीकी जिज्ञासा से मिली सफलता            साव अपनी इस सफलता का श्रेय उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के सतत तकनीकी मार्गदर्शन, शासकीय योजनाओं के समय पर मिले लाभ और आधुनिक कृषि पद्धतियों को सीखने की अपनी जिज्ञासा को देते हैं। वे नियमित रूप से कृषि क्षेत्र में हो रहे नए अनुसंधानों की जानकारी रखते हैं और खेतों में नए प्रयोगों को प्राथमिकता देते हैं। कच्चापाल और बोहारपार के आसपास के क्षेत्र के किसान अब लगातार उनके प्रक्षेत्र (फार्म) का भ्रमण कर इन आधुनिक तकनीकों को बारीकी से समझ रहे हैं। नवीन साव की इस आर्थिक प्रगति को देखकर अंचल के कई अन्य किसान भी पारंपरिक फसलों को छोड़कर मुनाफे वाली उद्यानिकी फसलों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।

पेपर लीक अफवाह फेल, हाईटेक निगरानी में हुई UPSSSC लेखपाल परीक्षा

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं को लेकर वर्षों तक सक्रिय रहे पेपर लीक और नकल माफियाओं के नेटवर्क पर योगी सरकार की सख्ती लगातार भारी पड़ रही है। इसका बड़ा उदाहरण विगत दिनों आयोजित लेखपाल मुख्य परीक्षा-2025 में देखने को मिला, जहां सोशल मीडिया के जरिए पेपर लीक की अफवाह फैलाने की कोशिश हुई, लेकिन प्रशासन और आयोग की सतर्कता के आगे यह साजिश पूरी तरह नाकाम साबित हुई। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपीएसएसएससी) द्वारा आयोजित यह परीक्षा प्रदेश के 44 जिलों के 861 केंद्रों पर शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई गई। कुल 3,66,712 पंजीकृत अभ्यर्थियों में से 3,01,756 अभ्यर्थियों ने परीक्षा में हिस्सा लिया। उपस्थिति प्रतिशत 82.29 रहा, जो अभ्यर्थियों के भरोसे को भी दर्शाता है। पेपर लीक का शोर, लेकिन हकीकत में निकली अफवाह परीक्षा शुरू होते ही लखनऊ के ऐशबाग स्थित गोपीनाथ लक्ष्मणदास रस्तोगी इंटर कॉलेज को लेकर कुछ लोगों ने पेपर लीक की अफवाह फैलाने की कोशिश की। सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, आयोग और निगरानी टीमों ने तत्काल जांच शुरू की। जांच में साफ हुआ कि प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट पूरी तरह सीलबंद और सुरक्षित थीं। दरअसल, एक कक्ष के कुछ अभ्यर्थी भ्रम की स्थिति में बाहर आ गए थे, जिसे कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर पेपर लीक का रंग देने की कोशिश की। अधिकारियों ने मौके पर स्थिति स्पष्ट की, जिसके बाद अभ्यर्थी वापस परीक्षा कक्ष में पहुंचे और परीक्षा शांतिपूर्वक जारी रही योगी सरकार का हाईटेक एग्जाम मॉडल बना ढाल इस बार परीक्षा की निगरानी पूरी तरह तकनीक आधारित रही। आयोग मुख्यालय से लेकर सभी परीक्षा केंद्रों तक कंट्रोल कमांड रूम के जरिए लाइव मॉनिटरिंग की गई। पूरे प्रदेश में 18,883 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इसके अलावा 7,683 बायोमैट्रिक ऑपरेटर और 6,297 फ्रिस्किंग गार्ड तैनात किए गए थे। एआई आधारित पहचान प्रणाली के जरिए प्रतिरूपण और फर्जीवाड़े पर नजर रखी गई। यही कारण रहा कि बुलंदशहर में एक संदिग्ध अभ्यर्थी तुरंत पकड़ लिया गया और उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। नकल माफिया पर लगातार कड़ा प्रहार उत्तर प्रदेश में एक समय भर्ती परीक्षाएं पेपर लीक और सॉल्वर गैंग के कारण सवालों में रहती थीं, लेकिन योगी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह बदलने की दिशा में सख्त कदम उठाए हैं। हाईटेक निगरानी, बायोमैट्रिक सत्यापन, एआई ट्रैकिंग और प्रशासनिक जवाबदेही ने नकल माफियाओं की कमर तोड़ दी है। लेखपाल मुख्य परीक्षा-2025 का शांतिपूर्ण आयोजन इस बात का संकेत है कि अब प्रदेश में भर्ती परीक्षाएं पारदर्शिता और सख्ती के नए मॉडल पर आगे बढ़ रही हैं।  

निर्बाध बिजली व्यवस्था पर पंजाब सरकार सख्त, फील्ड में उतरेंगे टेक्निकल कर्मचारी

जालंधर. टैक्निकल स्टॉफ की शार्टेज पावरकॉम के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है, जिसके चलते आमतौर पर फाल्ट समय पर ठीक नहीं हो पाता और पब्लिक को भारी परेशानियां उठानी पड़ती है। इसके लिए पावरकॉम द्वारा टैक्निकल कर्मचारियों को दफ्तरों से निकाल कर फील्ड में तैनात करने के आदेश जारी किए गए हैं। पावरकॉम दफ्तरी आदेश नंबर 1296/22-5 के तहत जारी किए गए निर्देशों के मुताबिक कहा गया है कि दफ्तरों में काम करने वाले स्टॉफ को फील्ड में तैनात किया जाए। बताया जा रहा है कि इन आदेशों के बाद विभाग संबंधित विभिन्न एसोसिएशनों द्वारा दफ्तरों में तैनात कर्मचारियों की लिस्टें तैयार की जा रही है जोकि पटियाला हैड ऑफिस भेजी जाएगी ताकि दफ्तरों में काम करने वाले टैक्निकल कर्मचारियों की फील्ड तैनाती को यकीनी बनाया जा सके। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पावरकॉम में पोस्ट के हिसाब से बड़े स्तर पर टैक्निकल स्टॉफ की शार्टेज चल रही है। इनमें जे.ई., लाइनमैन, सहायक लाइनमैन इत्यादि शामिल हैं। पावरकॉम द्वारा कम स्टॉफ के साथ काम किया जा रहा है जिसके चलते फील्ड में काम करने वाले स्टॉफ पर ओवरलोड बना हुआ है। विभागीय जानकारों का कहना है कि महानगर जालंधर ही नहीं बल्कि पंजाब के सभी जोन में टैक्निकल स्टॉफ की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसी तरह से दूर-दराज की कई डिवीजनों में हालात बेहद नाजूक है, जिसके चलते लोगों के दिलों में विभाग का अकस खराब हो रहा है। टैक्निकल स्टॉफ की शार्टेज को देखते हुए पावरकॉम द्वारा ठेके पर कंपलेंट हैंडलिंग बाइक (सी.एच.बी.) कर्मचारियों से सेवाएं ली जा रही है। लेकिन इसके बावजूद स्टॉफ शार्टेज की समस्या का पक्का समाधान नहीं निकल पा रहा है। छोटे-मोटे फाल्ट के लिए सी.एच.बी. से काम लिया जा सकता है, लेकिन शट्डाऊन लेने, बड़ी लाइनों पर काम करने जैसी स्थिति में पक्के स्टॉफ की उपलब्धता जरूरी हो जाती है। इसी क्रम में रोजाना पड़ रहे फाल्ट को निपटाने में सी.एच.बी. व पक्के स्टॉफ को काफी मश्कत करनी पड़ रही है। वहीं अधिकारियों का कहना है कि समय-समय पर भर्ती प्रक्रिया चलाई जा रही है, लेकिन रिटायर्ड हुए कर्मचारियों के मुकाबले भर्ती प्रक्रिया का अनुपात बेहद कम साबित हो रहा है। इसी के चलते टैक्निकल स्टॉफ की शॉर्टेज बनी हुई है। फाल्ट बढ़ने से खराब हो रहे हालात स्टॉफ शार्टेज का सबसे विपरीत प्रभाव गर्मी के दिनों में देखने को मिलता है। गर्मी में बिजली का इस्तेमाल बढ़ने के कारण फाल्ट बढ़ जाते है जिसके चलते टैक्निकल स्टॉफ की डिमांड में भारी बढ़ौतरी होती है। कई इलाकों में लोगों को घंटों तक स्टॉफ का इंतजार करना पड़ता है। वहीं, बारिश व तूफान के मौसम में हजारों के हिसाब से शिकायतें सामने आती हैं और ऐसे समय में हालात बेहद खराब हो जाता है।

मिथाइल मेथाक्रायलेट लीक से दहशत, विस्फोट का खतरा बढ़ा

नई दिल्ली  कैलिफोर्निया में एक केमिकल फैक्ट्री के खराब वाल्व ने लाखों जिंदगियों और छह शहरों की सुरक्षा को दांव पर लगा दिया है। ऑरेंज काउंटी की इस फैक्ट्री से मिथाइल मेथाक्रायलेट नाम के बेहद खतरनाक और आग पकड़ने वाले केमिकल का रिसाव हो रहा है। खराबी इतनी बड़ी है कि रिसाव को पूरी तरह बंद करना नामुमकिन हो चुका है। अब डर इस बात का है कि अत्यधिक दबाव या गर्मी के कारण यह स्टोरेज टैंक कभी भी फट सकता है। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने बिना वक्त गंवाए लगभग 40,000 लोगों को फौरन अपने घर खाली करने का सख्त आदेश जारी किया है। प्रशासन के सामने दो बड़ी चुनौतियां फायर अथॉरिटी के अधिकारियों ने साफ किया है कि इस वक्त वे दो सबसे बुरे हालातों से निपटने की तैयारी कर रहे हैं। पहला खतरा यह है कि टैंक का ढांचा पूरी तरह ढह जाए, जिससे आसपास के पार्किंग एरिया में 6,000 से 7,000 गैलन जहरीला केमिकल फैल जाएगा। दूसरा और सबसे भयानक खतरा यह है कि कड़कती गर्मी के चलते टैंक के अंदर का तापमान और दबाव बढ़ जाए, जिससे उसमें जोरदार धमाका हो जाए। अगर ऐसा ब्लास्ट होता है, तो पास में ही मौजूद ईंधन और अन्य रसायनों के टैंक भी आग की चपेट में आ जाएंगे, जिससे यह हादसा एक बड़ी तबाही में बदल सकता है। पर्यावरण और इंसानी सेहत पर मंडराता खतरा इस जहरीले लिक्विड को पर्यावरण में तबाही मचाने से रोकने के लिए बचाव दल युद्ध स्तर पर काम कर रहा है। केमिकल को स्थानीय नालियों, नदियों या समंदर में बहने से रोकने के लिए रेत की बोरियों की मजबूत दीवारें बनाई गई हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि तापमान बढ़ने पर इस केमिकल से निकलने वाली भाप हवा को पूरी तरह जहरीला बना देगी। इसके संपर्क में आने से लोगों को सांस लेने में भारी तकलीफ, आंखों में चुभन और तेज जलन, उल्टी आने जैसा महसूस होना और असहनीय सिरदर्द जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। 15% आबादी ने घर छोड़ने से किया इनकार यह पूरी घटना लॉस एंजिल्स से करीब 38 मील दूर गॉर्डन ग्रोव शहर में हुई है। यह इलाका मशहूर डिज़नीलैंड थीम पार्क के काफी करीब है। राहत की बात यह है कि अधिकारियों ने फिलहाल डिज़नीलैंड को इस खतरे के दायरे से बाहर बताया है। इस बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच पुलिस के लिए एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। आदेश के बावजूद इलाके के करीब 15 फीसदी लोगों ने अपने आशियाने को छोड़ने से साफ मना कर दिया है। प्रशासन ने सुरक्षित निकाले गए लोगों के ठहरने के लिए दो बड़े शेल्टर होम तैयार किए हैं और लोगों से अपील की है कि वे अपनी जान जोखिम में न डालें और इस सरकारी आदेश का पूरी गंभीरता से पालन करें।

पटना चिड़ियाघर में बड़ा बदलाव: गैंडों की अदला-बदली से बढ़ेगी प्रजातियों की विविधता

पटना बिहार की राजधानी पटना में स्थित पटना जू में नए जानवरों का आगमना होने जा रहा है। दिल्ली और रोहतक चिड़ियाघर के बाद अब पटना में सिंगापुर से एक जानवर आने वाला है। उसका बेसब्री से इंताजर हो रहा है। पटना जू में दो सिंग वाला सफेद गैंडों का एक जोड़ा देखने को मिलेगा। जानकारी के मुताबिक इसके बदले में पटना जू से एक सिंग वाला एक जोड़ा गैंडा सिंगापुर जाएगा। पटना आएगा गैंडा इसके लिए दोनों देशों के अधिकारी के अलावा पटना जू और वन पर्यावरण के अधिकारियों में वार्तालाप जारी है। पटना जू प्रबंधन के मुताबिक ये एक्सजेंज प्रोग्रामा के तहत जानवरों की अदला- बदली की जा रही है। ये दो सिंग वाला गैंडा पानी के जहाज से आएगा। उसके बाद समुद्र मार्ग से कोलकाता बंदरगाह पहुंचेगा। जहां से गैंडा को ट्रक पर लेकर टीम पटना पहुंचेगी। ऐसी योजना तैयार की जा रही है। सिंगापुर से आएगा गैंडा हवाई मार्ग की जगह समुद्री मार्ग और सड़क मार्ग को तरजीह दी जा रही है। ध्यान रहे कि पटना जू में गैंडों की संख्या एशिया में पहले स्थान प र है। वहीं दुनिया में दूसरे स्थान पर बना हुआ है। पटना जू में दस गैंडें हैं। इनमें छह मादा और चार नर गैंडा शामिल है। सभी गैंडें व्यस्क हैं और सबसे छोटे की उम्र पांच वर्ष की है। पटना जू ने दी जानकारी जानकारी के मुताबिक इस मामले में पहले स्थान पर अमेरिका के कैलिफोर्निया का सेंट डिएगो जू सफारी है। इन गैंडों के पटना जू आ जाने से गैंडों की प्रजाति की विविधता बढ़ जाएगा। जानकारी के मुताबिक अब दर्शन एक सिंग वाला गैंडा देखने के साथ दो सिंग वाला गैंडा भी देख पाएंगे।  

यूक्रेन-रूस युद्ध तेज: कीव में तबाही, हाइपरसोनिक ‘ओरेशनिक’ मिसाइल के इस्तेमाल का दावा

 नई दिल्ली  यूक्रेन की राजधानी कीव में रविवार रात विनाशकारी हमले देखने को मिले, जब रूस ने ड्रोन और मिसाइलों की भारी बौछार कर दी। यह हमला हाल के हफ्तों में कीव पर हुए सबसे बड़े हमलों में से एक माना जा रहा है। हमले के बाद शहर के कई हिस्सों में आग, धमाकों और धुएं का भयावह मंजर देखने को मिला। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक क्रूज मिसाइल को कीव के मध्य हिस्से में गिरते देखा जा सकता है। मिसाइल के टकराते ही जोरदार विस्फोट होता है। धमाकों की आवाज रातभर कीव में गूंजती रही। 600 ड्रोन और 90 मिसाइलों से कीव पर हमला यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, रूस ने इस हमले में करीब 600 ड्रोन और 90 मिसाइलों का इस्तेमाल किया। यूक्रेन की एयर डिफेंस प्रणाली ने बड़ी संख्या में ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराया, लेकिन कई हथियार अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे। समाचार एजेंसी AFP के अनुसार, हमले में राजधानी कीव समेत कई अन्य क्षेत्रों को भी निशाना बनाया गया। कीव के लुकियानिव्स्का मेट्रो स्टेशन के पास स्थित एक बिजनेस सेंटर और बाजार पूरी तरह तबाह हो गए। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि एक छोटा कैफे, जिसे रूसी हमलों के बाद छह बार दोबारा बनाया और खोला गया था, इस हमले में फिर से नष्ट हो गया। चार लोगों की मौत, दर्जनों घायल यूक्रेन के अधिकारियों ने बताया कि हमले में कम से कम चार लोगों की मौत हुई है, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। कई रिहायशी इमारतें, स्कूल, बाजार और व्यावसायिक भवन क्षतिग्रस्त हो गए। हमले के दौरान दहशत में लोग मेट्रो स्टेशनों और भूमिगत बंकरों की ओर भागते नजर आए। रातभर सायरन बजते रहे और कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रूस की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह हमला किसी सैन्य लक्ष्य पर नहीं बल्कि आम नागरिकों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया गया। एंड्री सिबिहा ने बताया कि कीव के अलावा चेर्कासी, खार्किव, क्रोपिवनित्स्की, ओडेसा, पोल्टावा, सूमी और झितोमिर क्षेत्रों पर भी हमले किए गए। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि रूस ने इस बार 'ओरेशनिक' नामक शक्तिशाली हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल का भी इस्तेमाल किया। क्या है Oreshnik हाइपरसोनिक मिसाइल? 'ओरेशनिक' रूस की नई हाइपरसोनिक मिसाइल मानी जा रही है। यह ध्वनि की गति से लगभग 10 गुना तेज रफ्तार से उड़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मिसाइल जमीन के कई मंजिल नीचे बने बंकरों को भी नष्ट करने में सक्षम है। रूस ने पहली बार नवंबर 2024 में यूक्रेन के ड्नीप्रो शहर पर इस मिसाइल का इस्तेमाल किया था। इसके बाद जनवरी में पश्चिमी यूक्रेन के लवीव क्षेत्र में भी इसके उपयोग की खबरें सामने आई थीं।      'यूक्रेन के हमलों के जवाब में किया अटैक' रूस के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को पुष्टि की कि उसने ओरेशनिक समेत कई मिसाइल प्रणालियों का उपयोग कर यूक्रेन के सैन्य कमांड सेंटर, एयरबेस और सैन्य उद्योग से जुड़े ठिकानों पर हमला किया। हालांकि रूस ने इन ठिकानों के नाम सार्वजनिक नहीं किए। मॉस्को ने कहा कि यह हमला रूस-नियंत्रित इलाकों पर यूक्रेन की ओर से किए गए हमलों के जवाब में किया गया है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब और अधिक खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है। हाइपरसोनिक मिसाइलों के इस्तेमाल ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हथियार युद्ध को और विनाशकारी बना सकते हैं, क्योंकि इन्हें रोकना पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में बेहद मुश्किल होता है।

NEET-UG में बड़े बदलाव की तैयारी, CBT मोड पर जल्द फैसला संभव

 नई दिल्ली पेपर लीक के बाद नीट-यूजी की परीक्षा से जुड़े उन सभी सुधारों को अब रफ्तार मिल सकती है, जिन पर स्वास्थ्य मंत्रालय अब तक चुप्पी साधे हुआ था। इनमें इस परीक्षा को अगले साल से कंप्यूटर के जरिए कराने का ऐलान सरकार ने कर दिया है, हालांकि इसके बाद भी परीक्षा को कई सत्रों और चरणों कराने के साथ ही परीक्षा के प्रयासों व उम्र की अधिकतम सीमा निर्धारित करने जैसे सुझाव अभी भी लंबित है। माना जा रहा है कि स्वास्थ्य मंत्रालय जल्द ही उच्चस्तरीय समिति की इन सिफारिशों पर अंतिम निर्णय ले सकता है। इससे जहां अगले साल से नीट-यूजी की परीक्षा कंप्यूटर के जरिए होगी, वहीं कई अन्य बड़े बदलाव भी दिखेंगे। नीट-यूजी पेपर लीक मामले पर पिछले दिनों संसदीय समिति के सामने पेश हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ( एनटीए) के अधिकारियों ने 2024 में नीट-यूजी पेपर लीक के बाद डा राधाकृष्णन की अगुवाई में गठित उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों को साझा किया। साथ ही बताया कि समिति ने नीट-यूजी परीक्षा में सुधार से जुड़े तीन अहम सुझाव स्वास्थ्य मंत्रालय को भी दिए थे। इनमें परीक्षा को पेन-पेपर की जगह कंप्यूटर के जरिए कराने का, परीक्षा को कई सत्रों व चरणों में कराने का और अंतिम सुझाव परीक्षा के प्रयासों और अधिकतम उम्र सीमा को निर्धारित करने को लेकर था। जो स्वास्थ्य मंत्रालय के पास लंबित है। सूत्रों के मुताबिक, एनटीए ने संसदीय समिति को बताया कि इन सिफारिशों को मंजूरी के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय को नए सिरे से प्रस्ताव दिया गया है। गौरतलब है कि मेडिकल के स्नातक कोर्सों में दाखिले से जुड़ी नीट-यूजी की परीक्षा स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन है। इसके लिए मानक आदि का निर्धारण स्वास्थ्य मंत्रालय ही करता है। एनटीए सिर्फ उसके मानक के अनुरूप नीट-यूजी की परीक्षा कराता है। नीट-यूजी को अगले साल से कंप्यूटर के जरिए कराने के ऐलान से पहले शिक्षा मंत्रालय इस मुद्दे पर स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ कई बार बैठक भी कर चुका है। लेकिन कुछ निर्णय नहीं हो पाया था। प्रयासों व उम्र की अधिकतम सीमा तय हुई तो कम होंगे आवेदक भी एनटीए से जुड़े सूत्रों की मानें तो स्वास्थ्य मंत्रालय ने यदि नीट-यूजी के प्रयासों व उम्र की अधिकतम सीमा तय कर दी तो परीक्षा के लिए आवेदन करने वालों की संख्या काफी कम हो जाएगी। अभी इस परीक्षा में हर साल 22 से 23 लाख छात्र शामिल होते है। अभी इस परीक्षा के प्रयासों की कोई संख्या तय नहीं है, ऐसे में बड़ी संख्या में आवेदक इसमें पांच से अधिक बार शामिल होते है। वही परीक्षा में शामिल होने की न्यूनतम उम्र तो 17 वर्ष निर्धारित की गई है लेकिन अधिकतम उम्र की कोई सीमा तय नहीं है। ऐसे में 50-60 साल के लोग भी आवेदन करते रहते है। जेईई मेन व नीट-यूजी को एक साथ कराने का भी सुझाव नीट-यूजी में सुधार को लेकर गठित उच्च स्तरीय समिति ने कई दीर्घकालिक सुझाव भी दिए थे। इनमें जेईई मेन और नीट-यूजी को एक साथ कराने का भी सुझाव दिया है। एनटीए ने संसदीय समिति को इसकी भी जानकारी दी है। साथ ही बताया कि उसने इस दिशा में मंथन शुरू किया है। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में इसे कराना थोड़ा कठिन है, क्योंकि मौजूदा समय में नीट-यूजी या जेईई मेन में शामिल होने वाले बड़ी संख्या में छात्र ऐसे होते है जो 12 वीं की पढ़ाई मैथ और बायोलाजी में दोनों की करते है। साथ ही दोनों ही परीक्षाओं में शामिल होते है। दोनों ही में जिन परीक्षा में उन्हें अच्छी रैंकिंग मिलती है, वह उस क्षेत्र में दाखिला लेते है।  

कॉकरोच जनता पार्टी मामला गरमाया: याचिका में FIR और स्वतंत्र जांच की अपील

नई दिल्ली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को लेकर जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें CJP से जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से स्वतंत्र जांच कराने और उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। याचिका में फर्जी कानून डिग्रियों के इस्तेमाल, प्रतिरूपण और सर्वोच्च न्यायालय की संस्थागत पहचान के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि संबंधित लोगों ने खुद को वकील या कानूनी विशेषज्ञ बताकर जनता को गुमराह किया और न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता को ठेस पहुंचाई। याचिका में CBI को निर्देश देने की अपील की गई है कि जाली डिग्रियों के कथित उपयोग और आपराधिक साजिश की गहन जांच की जाए। सोशल मीडिया पर गरमाया विवाद यह याचिका ऐसे समय में आई है जब सोशल मीडिया पर CJP का विवाद चरम पर है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की 'व्यवस्था पर हमला करने वालों' वाली टिप्पणी के बाद मुद्दा सुर्खियों में आ गया। खुफिया ब्यूरो (IB) की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार के निर्देश पर गुरुवार को CJP के आधिकारिक एक्स हैंडल को भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत यह कार्रवाई की। खुफिया एजेंसियों ने CJP पर 'भड़काऊ' सामग्री फैलाने और देश की संप्रभुता को चुनौती देने का आरोप लगाया था। क्या है कॉकरोच जनता पार्टी? ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ एक व्यंग्यात्मक और मीम-आधारित डिजिटल आंदोलन है, जिसकी शुरुआत बोस्टन विश्वविद्यालय के छात्र अभिजीत दीपके ने की थी। यह खुद को ‘बेरोजगार युवाओं की आवाज’ बताता है। पिछले सप्ताह यह आंदोलन खासकर जेन-जी युवाओं के बीच तेजी से वायरल हुआ। व्यंग्य, सत्ता-विरोधी टिप्पणियों और मीम्स के जरिए यह एक बड़े डिजिटल विरोध में बदल गया और विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर लाखों फॉलोअर्स हासिल किए। प्रतिबंध लगने के तुरंत बाद अभिजीत दीपके ने नया हैंडल ‘Cockroach is Back’ शुरू किया और समर्थकों से इसमें शामिल होने की अपील की। क्या है संस्थापक का आरोप? शनिवार को अभिजीत दीपके ने कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कहा कि कई अकाउंट्स हटाए जाने और हैकिंग की घटनाओं के बाद अब संगठन की किसी भी सोशल मीडिया अकाउंट तक पहुंच नहीं रही है। उन्होंने दावा किया कि उनका व्यक्तिगत इंस्टाग्राम अकाउंट भी हैक कर लिया गया है। दीपके ने ‘एक्स’ पर लिखा कि कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ कार्रवाई। इंस्टाग्राम पेज हैक किया गया। मेरा व्यक्तिगत इंस्टाग्राम अकाउंट भी हैक किया गया। ट्विटर अकाउंट पर रोक लगाई गई। बैकअप अकाउंट पर भी रोक लगा दी गई। उन्होंने आगे कहा कि फिलहाल हम अपने सोशल मीडिया अकाउंट का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। इस पोस्ट के बाद किसी भी पोस्ट को CJP का आधिकारिक बयान न माना जाए। संगठन की वेबसाइट (cockroachjanataparty.org) भी बंद कर दी गई है।

यूपी में बिजली कटौती पर हंगामा: कई जिलों में लो-वोल्टेज और सप्लाई फेल, सरकार एक्शन मोड में

लखनऊ  भीषण गर्मी के बीच उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बिजली संकट गहराता जा रहा है। राजधानी लखनऊ के फैजुल्लागंज में बीती रात बिजली कटौती और लो-वोल्टेज से नाराज लोगों ने हंगामा कर दिया। आक्रोशित भीड़ ने सड़क जाम कर दिया। करीब एक घंटे तक बवाल के बाद लोग शांत हुए। एफसीआई उपकेंद्र के मुनेश्वर पुरम, प्रभात पुरम सहित कई इलाकों में बिजली न आने से लोग परेशान दिखे। इस बीच बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने फील्ड कर्मचारियों को 30 जून तक अस्थायी रूप से बायोमीट्रिक अटेंडेंस के नियमों में ढील देने का निर्णय लिया है। निगम के निदेशक (का. प्र. एवं प्रशासन) राजेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, लखनऊ के अंतर्गत कार्यरत सभी फील्ड कर्मी अब अपने आवंटित कार्य क्षेत्र के बजाय, अपने जोन के किसी भी उपकेंद्र या कार्यालय में हाजिरी दर्ज कर सकेंगे। इसके साथ ही बिजली चोरी से निपटने के लिए रात में चेकिंग अभियान चलाने की भी तैयारी है। यह चेकिंग खासतौर से ऐसे इलाकों में की जाएगी जहां रात में अचानक लोड बढ़ जा रहा है। बता दें कि यूपी में बिजली कटौती को लेकर योगी सरकार ऐक्शन मोड में आ गई है। शनिवार को सरकार ने ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के चार इंजीनियरों पर कार्रवाई की है। दो अधिशासी अभियंताओं को सस्पेंड किया गया है, एक अधीक्षण अभियंता को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि और एक मुख्य अभियंता को चेतावनी दी गई। सीएम योगी ने भीषण गर्मी में बढ़ती मांग के बीच शहर से गांव तक निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए है। वहीं लखनऊ में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने भी बीती रात शहीद पथ किनारे चकगंजरिया (सीजी सिटी) उपकेंद्र का निरीक्षण कर बिजली आपूर्ति की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों से फीडरवार सप्लाई की जानकारी ली और लॉग शीट का मिलान किया। उन्होंने अधिकारियों को भीषण गर्मी में निर्बाध बिजली सुनिश्चित करने और शिकायतों के त्वरित निस्तारण के कड़े निर्देश दिए। वहीं मध्यांचल निगम की एमडी रिया केजरीवाल ने बीती रात फैजुल्लागंज उपकेंद्र का निरीक्षण किया। अचानक लोड बढ़ा तो क्षेत्र में होगी चोरी की जांच वहीं, निर्णय लिया गया है कि जिन इलाकों में रात में अचानक लोड बढ़ जा रहा है, वहां रात में बिजली चोरी की जांच की जाएगी। ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव और पावर कॉरपोरेशन अध्यक्ष डा. आशीष गोयल ने शनिवार को समीक्षा बैठक के दौरान अभियंताओं को इसके निर्देश दिए। डा. गोयल ने कहा कि संवेदनशील स्टेशनों पर अधिकारियों की तैनाती बढ़ाए। रिले की सेटिंग ठीक कराएं। इसमें टेस्ट डिवीजन के कार्मिक अभियान के रूप में लगें। ट्रांसमिशन के साथ बेहतर ताल मेल रखें। निदेशक वितरण इसकी समीक्षा करें। हर दिन दो घंटे ज्यादा काम करेंगे बिजली कर्मी उत्तर प्रदेश में बिजली संकट देखते हुए पावर ऑफिसर्स ऐसो, ने शनिवार को आपात बैठक में हर दिन दो घंटे अतिरिक्त काम करने का फैसला लिया है। संगठन के अध्यक्ष आरपी केन और कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बैठक में फैसला लिया गया कि सभी दलित व पिछड़ा वर्ग के अभियंता अपने नियमित काम के अतिरिक्त पहले चरण में हर दिन दो घंटे अतिरिक्त काम करेंगे।