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गांव-गांव बदल रही तस्वीर! गौ संरक्षण के जरिए योगी सरकार बढ़ा रही किसानों की आमदनी

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में गो संरक्षण को केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तीकरण और प्राकृतिक खेती से जोड़कर विकास का मजबूत मॉडल बनाया गया है। उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 7700 से अधिक गोशालाएं संचालित हैं, जहां 12 लाख से ज्यादा निराश्रित गोवंश संरक्षित किए जा रहे हैं। योगी सरकार की यह पहल गांवों में रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता का नया आधार बनकर उभर रही है। योगी सरकार अब तक 1.62 लाख से अधिक गाय किसानों और पशुपालकों को सौंप चुकी है। इन पशुओं के पालन-पोषण के लिए लाभार्थियों को 1500 रुपये प्रतिमाह की सहायता राशि भी प्रदान की जा रही है। इससे किसानों को दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ जैविक खेती में भी लाभ मिल रहा है।  महिला स्वयं सहायता समूहों को मिला आत्मनिर्भरता का नया रास्ता उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि प्रदेश के 38 जिलों में महिला स्वयं सहायता समूह गो आधारित उत्पादों के निर्माण और विपणन से जुड़ चुके हैं। इससे 50 हजार से अधिक महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। गोबर और पंचगव्य आधारित उत्पादों के कारोबार में करीब 30 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। इसके अलावा उन्नाव में महिलाएं गाय के गोबर से प्राकृतिक डिस्टेंपर पेंट तैयार कर रहीं हैं। यह पेंट कम लागत वाला होने के साथ एंटीबैक्टीरियल, एंटी फंगल और पूरी तरह गंध रहित है। पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। इससे स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योगों को भी बढ़ावा मिल रहा है। जैविक खाद और पंचगव्य उत्पाद बने ग्रामीण रोजगार का नया आधार उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि योगी सरकार की नीतियों में गोबर को अपशिष्ट नहीं बल्कि आय और रोजगार के संसाधन के रूप में विकसित किया गया है। प्रदेश में गोबर से जैविक खाद, धूपबत्ती, साबुन, पंचगव्य उत्पाद और बायोगैस तैयार की जा रही है। जैविक खाद का बाजार मूल्य 4 हजार से 6 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच चुका है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। वहीं प्राकृतिक खेती से 8 लाख से ज्यादा किसान जुड़ चुके हैं। जिससे रासायनिक खाद की लागत में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी आई है।

आदिवासी अधिकारों को लेकर दिल्ली में जुटे हजारों लोग, लालकिला मैदान में अमित शाह ने किया संबोधित

नई दिल्ली   देश की राजधानी दिल्ली का लालकिला मैदान आज एक बड़े जनजातीय सांस्कृतिक समागम और प्रदर्शन का गवाह बन रहा है। इस विशाल रैली और सभा में शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग, मध्य प्रदेश के रतलाम सहित देशभर से लाखों की संख्या में जनजातीय समाज के लोग परंपरागत वेशभूषा और वाद्ययंत्रों के साथ दिल्ली पहुंच रहे हैं। इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए अंबिकापुर से जनजातीय समाज के लोगों को लेकर दो विशेष ट्रेनें दिल्ली के लिए रवाना हुई थीं, जबकि हजारों लोग अपने निजी साधनों से भी यहां पहुंचे हैं। अन्य राज्यों से भी लोग पहुंच रहे है। जनजातीय समाज द्वारा दिल्ली के पांच प्रमुख ऐतिहासिक स्थानों से एक साथ विशाल रैलियां निकाली जा रही हैं, जो सीधे लालकिला मैदान पहुंचकर एक महा-सभा में तब्दील होगी। इन रैलियों के रूट इस प्रकार हैं…     राजघाट से लाल किला: 2.5 किलोमीटर     रामलीला मैदान से लाल किला: 2.8 किलोमीटर     अजमेरी गेट से लाल किला: 2.5 किलोमीटर     कुदसिया बाग से लाल किला: 2 किलोमीटर     श्यामगिरी मन्दिर से लाल किला: 3.5 किलोमीटर गृहमंत्री अमित शाह होंगे शामिल, राष्ट्रपति और पीएम को सौंपा जाएगा ज्ञापन लालकिला मैदान में आयोजित होने वाले इस मुख्य कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो रहे हैं। इस प्रदर्शन के माध्यम से देश का मूल जनजातीय समाज राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम एक संयुक्त ज्ञापन सौंपेगा। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य मतांतरित (धर्म परिवर्तन कर चुके) लोगों को अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची से बाहर करने के लिए 'डिलिस्टिंग' कानून बनाने की मांग करना है।  

Vishnu Deo Sai से आदिवासी समाज की अहम मुलाकात, जनहित के मुद्दों पर हुई बातचीत

रायपुर. छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधि मंडल ने नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल और मुख्यमंत्री के बीच सामाजिक समरसता, जनकल्याण तथा छत्तीसगढ़ के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई। प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित विकास कार्यों और जनहितकारी योजनाओं की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं भी दीं। मुख्यमंत्री ने भी समाज के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार आदिवासी समाज के विकास, संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। मुलाकात के प्रमुख बिंदु – आदिवासी उत्थान और विकास: मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासी समाज के समग्र विकास और उत्थान के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है. जनकल्याणकारी योजनाएं: प्रतिनिधिमंडल के साथ शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा की गई, ताकि उनका अधिकतम लाभ समाज के अंतिम छोर तक पहुंचाया जा सके. सांस्कृतिक संरक्षण: चर्चा में आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और विरासत को बढ़ावा देने और सहेजने पर सहमति बनी.

12 दिन बाद हुआ त्विषा का अंतिम संस्कार, भोपाल में भाई मेजर हर्षित ने निभाई अंतिम रस्म

भोपाल.  नोएडा से भोपाल में विवाह के बाद आई 31 वर्षीय मॉडल और एक्ट्रेस त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार नए मोड़ ले रहा है। अब इस हाई-प्रोफाइल प्रकरण में सच्चाई की तह तक पहुंचने के लिए रविवार को भोपाल एम्स में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद यह प्रक्रिया की गई, जिससे मौत के कारणों को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब तलाशे जा सकें। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया करीब तीन घंटे तक चली। इसके बाद  दिल्ली एम्स से आई विशेषज्ञों की टीम वापस रवाना हो गई। पोस्टमार्टम के बाद स्वजनों को ट्विशा की बॉडी सौंप दी गई। त्विषा को लाल जोड़े में अर्थी पर लिटाया गया। इस दौरान माहौल काफी भावुक हो गया। शाम करीब सवा पांच बचे भदभदा विश्राम घाट पर त्विषा का अंतिम संस्कार किया गया। त्विषा के भाई ने चिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान भदभदा घाट पर मीडियाकर्मियों के जमावड़े के साथ पुलिस बल भी मौजूद रहा। अनेक पूर्व सैनिक भी त्विषा के अंतिम संस्कार में शामिल हुए।     सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर बढ़ाई मामले की गंभीरता उधर, इस मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींच लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकरण पर स्वतः संज्ञान लेते हुए विशेष सुनवाई तय की है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की विशेष पीठ सोमवार 25 मई को इस मामले पर सुनवाई करेगी। शीर्ष अदालत ने मामले को "एक युवती की उसके ससुराल में अप्राकृतिक मृत्यु से जुड़े कथित संस्थागत पूर्वाग्रह और प्रक्रियात्मक अनियमितताओं" के रूप में दर्ज किया है। इस टिप्पणी ने शुरुआती पुलिस और प्रशासनिक कार्रवाई पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ससुराल में मिला था शव, पति पुलिस रिमांड पर गौरतलब है कि दिसंबर में विवाह बंधन में बंधीं त्विषा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में फंदे पर लटकी मिली थीं। घटना के बाद परिजनों ने दहेज प्रताड़ना के आरोप लगाए, जिसके आधार पर पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। करीब 10 दिन तक फरार रहने के बाद समर्थ सिंह शुक्रवार को जबलपुर कोर्ट में आत्मसमर्पण करने पहुंचा था, जहां से पुलिस उसे हिरासत में लेकर भोपाल लाई। स्थानीय अदालत ने उसे सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। वहीं, सास गिरिबाला सिंह बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद पुलिस के समक्ष पूछताछ के लिए पेश नहीं हुई हें। इस बीच मृतका के भाई मेजर हर्षित शर्मा ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए जल्द से जल्द सीबीआई जांच शुरु करने की मांग दोहराई है। राज्य सरकार पहले ही सीबीआई जांच की सिफारिश कर चुकी है। फिलहाल सभी की निगाहें दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हुई हैं।

भीषण गर्मी और ‘लेंदी’ पेपर ने बढ़ाई मुश्किलें, UPSC परीक्षा में परीक्षार्थियों के छूटे पसीने

ग्वालियर. संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) नई दिल्ली की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 रविवार को ग्वालियर शहर के 21 परीक्षा केंद्रों में आयोजित हुई। अभ्यर्थियों की थ्री लेयर चेकिंग के बाद प्रवेश दिया गया। जूते पहनकर परीक्षा देने पहुंचे कई छात्रों को रोका गया और बाहर ही उतरवाए गए। ऐसे में वे 45 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी से तपती जमीन में नंगे पैर कक्ष तक पहुंचे। समय से 30 मिनट पहले परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश बंद कर दिया गया था। छात्र एवं छात्राओं के अनुसार पेपर में लेंदी प्रश्न पूछे गए थे, जिस कारण से टाइम मैनेजमेंट में कमी आई। ओवरऑल छात्रों का पहला पेपर माडरेट रहा। परीक्षा कक्ष में विद्यार्थी गर्मी से रहे बेहाल प्रारंभिक परीक्षा परीक्षा दो सत्रों में आयोजित होगी, जिसका पहला सत्र सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक कम्प्लीट हो चुका है। इस दौरान छात्राें को गर्मी ने भी बहुत परेशान किया। परीक्षा कक्ष में लगे पंखे भी जवाब दे गए। कुछ संस्थानों में पसीने से तर बरत होकर विद्यार्थियों ने परीक्षा दी। अब दूसरा पेपर दोपहर 2:30 बजे से 4:30 बजे तक होगा। सुरक्षा की दृष्टि से परीक्षा केंद्रों पर जैमर लगाए गए हैं। पहले पेपर से दुखी छात्र दूसरे पेपर की तैयारी के लिए सड़क किनारे पेड़ की छांव में करते नजर आए। इन केंद्रों पर हुई परीक्षा वीआरजी कालेज, एमएलबी कालेज, साइंस कालेज, बीएड कालेज, केआरजी कालेज, पद्मा स्कूल, गजराराजा स्कूल, गवर्नमेंट एसएस स्कूल टकसाल, पावनबीसी स्कूल, कालपी ब्रिज स्कूल, पालीटेक्निक कालेज, गोरखी स्कूल, गवर्नमेंट कन्या विद्यालय शिंदे की छावनी, गवर्नमेंट हायर सेकंडरी स्कूल मामा का बाजार, गवर्नमेंट हिंदी विद्यापीठ, एमएलबी स्कूल मुरार, उत्कृष्ट विद्यालय क्रमांक एक, जीवाजी राव स्कूल, महाराजा मानसिंह कालेज। छात्रों ने कहा… बदले पैटर्न से हुई परेशानी: पेपर का इस बार पैटर्न बदला हुआ था, जो कि टफ था। सवाल लेंदी थे, जिन्हें समझने में दिक्कत आई। समय प्रबंधन की कमी रही, जिस कारण से कुछ प्रश्न छूट गए। -दुष्यंत कुमार, महोबा चौथी बार कर रही प्रयास: मैंने चौथा अटेम्प्ट दिया है। इस बार का पेपर मुझे टफ लगा। मैं पहले तीन बार मेंस तक पहुंच चुकी हूं, लेकिन साक्षात्कार में नहीं हो सका। इस बार सिलेक्शन के लिए प्रयासरत हूं। – निधि बरैया, सिथौली यह मेरा पहला अटेम्प्ट है: मुझे पेपर माडरेट लगा। सवालों को घुमाकर पूछा गया था, जिससे कई सवाल छूट गए। यह मेरा पहला अटेम्प्ट है, इसलिए मुझे ज्यादा चिंता नहीं है। अागे और अच्छा करूंगा। – सचिन द्विवेदी, मुरार पुलिस में हूं, सपना आइएएस बनना: मैं पुलिस में हूं, शिवपुरी में सेवाए दे रहा हूं। मैं अपने सीनियर्स से बहुत प्रभावित हूं। उनकी तरह ही मैं आइएएस, आइपीएस बनना चाहता हूं, इसलिए नौकरी के साथ तैयारी कर रहा हूं। – आदित्य तिवारी, दतिया गर्मी से परेशान हुए: परीक्षा के खौफ के साथ ही गर्मी ने बहुत परेशान किया। कक्ष में पंखों की स्थिति सही नहीं थी। इसलिए एक तरफ पसीना पोछते रहे और दूसरी तरफ प्रश्न पत्र हल करते रहे। – ललित सूर्यवंशी, ग्वालियर

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल की सौजन्य मुलाकात

रायपुर  छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ मंत्री  केदार कश्यप के नेतृत्व में सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन में मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल और मुख्यमंत्री के बीच सामाजिक समरसता, जनकल्याण तथा छत्तीसगढ़ के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में संचालित विकास कार्यों और जनहितकारी योजनाओं की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं भी दीं।       मुख्यमंत्री ने भी समाज के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार आदिवासी समाज के विकास, संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

ईरान डील के संकेत मिलते ही ट्रंप का नरम रुख, शहबाज शरीफ ने शुरू की तारीफों की बरसात

नई दिल्ली ईरान और अमेरिका के बीच समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि 60 दिनों के लिए युद्धविराम को बढ़ाया जा सकता है और इस दौरान होर्मुज स्ट्रेट बिना किसी शुल्क के खुला रहेगा। इससे पहले, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान के साथ समझौता लगभग अंतिम रूप ले चुका है और इसके अंतिम पहलुओं तथा विवरणों पर चर्चा चल रही है, जिसकी जल्द घोषणा की जाएगी। ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने डोनाल्ड ट्रंप को बधाई देते हुए कहा कि उनके साथ फोन पर अच्छी चर्चा हुई है। क्या बोले शहबाज शरीफ शहबाज शरीफ ने कहा, डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब, कतर, तुर्किए,एजिप्ट, यूएई, जॉर्डन और पाकिस्तान के साथ फोन पर बात की है। पाकिस्तान की ओर से फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने फोन पर बात की और इस पूरी प्रक्रिया में डोनाल्ड ट्रंप के अथक प्रयास को सराहा है। इस चर्चा में मध्य एशिया में शांति के प्रसायसों को लेकर सकारात्मक बातचीत की गई है। उन्होंने कहा, पाकिस्तान अगले चरण की वार्ता के लिए प्रयास करता रहेगा। होर्मुज से हटाई जाएँगी रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारी ने दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौता ज्ञापन का मसौदा साझा किया है। इसके तहत दोनों पक्ष 60 दिनों के लिए वैध समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसे आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकेगा। इस अवधि में होर्मुज जलडमरूमध्य बिना किसी शुल्क के खुला रहेगा तथा ईरान वहां बिछाई गयी बारूदी सुरंगों को हटाने पर सहमत होगा, ताकि जहाजों की आवाजाही निर्बाध रूप से जारी रह सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाएगा और ईरान को तेल की स्वतंत्र बिक्री की अनुमति देने के लिए कुछ रियायतें देगा।रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया कि ईरान जितनी जल्दी होर्मुज जलडमरूमध्य से बारूदी सुरंगें हटाकर जहाजरानी बहाल करेगा, उतनी ही जल्दी नाकेबंदी समाप्त कर दी जाएगी। एक्सियोस ने बताया कि प्रस्तावित समझौता ज्ञापन में ईरान की ओर से कभी परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की प्रतिबद्धता, यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को निलंबित करने तथा उच्च संवर्धित यूरेनियम के भंडार को हटाने पर बातचीत करने का प्रावधान मिल है। स्थिति के जानकार दो सूत्रों के हवाले से कहा गया कि ईरान ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका को संवर्धन कार्यक्रम निलंबित करने और परमाणु सामग्री छोड़ने को लेकर रियायतों के दायरे पर 'मौखिक आश्वासन' दिये हैं। रिपोर्ट के अनुसार ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया में तैनात अमेरिकी सैन्य बल अगले 60 दिनों तक वहीं बने रहेंगे और यदि तेहरान अंतिम रूप से समझौता स्वीकार कर लेता है तो क्षेत्र से हट जाएंगे। एक्सियोस ने यह भी कहा कि अंतिम समझौता होने की स्थिति में अमेरिका 60 दिनों के भीतर ईरान की जमी हुई संपत्तियों को मुक्त करने पर चर्चा के लिए तैयार है। प्रस्तावित समझौता ज्ञापन में हिज्बुल्ला और इजरायल के बीच सशस्त्र संघर्ष समाप्त करने का प्रावधान भी शामिल है।

तपती गर्मी में भी UP में नहीं थमी बिजली सप्लाई, योगी सरकार की सख्त निगरानी से व्यवस्था दुरुस्त

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश में पड़ रही प्रचंड गर्मी के बीच योगी सरकार प्रदेशवासियों को निर्धारित शेड्यूल के अनुसार निर्बाध बिजली आपूर्ति देने के लिए पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर ऊर्जा विभाग लगातार बिजली व्यवस्था की निगरानी कर रहा है, जिससे आम लोगों को गर्मी के इस कठिन दौर में बड़ी राहत मिल रही है। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) एवं उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उन्होंने प्रदेश के सभी डिस्कॉम के प्रबन्ध निदेशक से लेकर अधिशासी अभियन्ताओं से विद्युत आपूर्ति को लेकर विस्तृत जानकारी ली तथा उन्हें आवश्यक निर्देश दिये। यूपीपीसीएल अध्यक्ष ने नोएडा, लखनऊ, गाजियाबाद, बुलन्दशहर, बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर, मथुरा, फिरोजाबाद, झांसी, बरेली, उन्नाव, बनारस, अयोध्या, गोरखपुर, देवरिया और कानपुर (केस्को) के मुख्य अभियन्ताओं से विद्युत आपूर्ति के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। डॉ. आशीष कुमार गोयल ने बैठक में कहा कि इस समय भीषण गर्मी से लोग बेहाल हैं। ऐसे मौसम में सुचारु विद्युत आपूर्ति का अत्यधिक महत्व है। इसलिए सभी क्षेत्रों को निर्धारित शेड्यूल के अनुरूप विद्युत आपूर्ति प्राप्त हो। सभी अधिकारी एवं कार्मिक अपने-अपने क्षेत्रों में विशेष रूप से सजगता बरतें। उपकेन्द्रों एवं संवेदनशील क्षेत्रों में पेट्रोलिंग की जाए। जिन क्षेत्रों में रात्रि में अचानक लोड में अत्यधिक बढ़ोत्तरी होने के कारण ट्रांसफार्मर या लाइनों पर लोड बढ़ता है, उनको चिन्हित कर विजिलेन्स की टीम के साथ जांच अभियान चलाने के निर्देश दिये। बैठक के दौरान यूपीपीसीएल अध्यक्ष ने ट्रांसफार्मर की क्षतिग्रस्तता, ट्रिपिंग एवं सामग्री उपलब्धता के बारे में भी पूछा। सभी मुख्य अभियन्ताओं का कहना था कि निर्धारित शेड्यूल के अनुरूप ग्रामीण एवं शहरों को क्रमशः 18 एवं 24 घंटे विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। सभी सब स्टेशनों पर रात्रिकालीन ड्यूटी लगाई गयी है। वरिष्ठ अधिकारी भी देर रात्रि तक व्यवस्था की मॉनीटरिंग में लगाए गये हैं। पर्याप्त संख्या में सामग्री एवं अनुरक्षण कार्यों के लिए मैन पावर उपलब्ध है। अध्यक्ष डॉ. गोयल ने कहा कि लाइनों, सब स्टेशनों एवं ट्रांसफार्मर की नियमित जांच होती रहे। हेल्प लाइन नंबर 1912 पर आने वाली शिकायतों का त्वरित निस्तारण हो। नए कनेक्शन के लिए झटपट पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों का भी शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करें। मुख्य अभियंताओं ने बताया कि पिछले वर्षों की तुलना में ट्रिपिंग एवं आपूर्ति बहाल करने के समय में सुधार हुआ है। ऐसे स्थान जहां पर रात्रि में अचानक लोड बढ़ता है उनको चिन्हित करके विजिलेन्स के साथ चोरी रोकने के प्रयास किये जा रहे हैं। इसके कारण कई स्थानों पर लोड कम हुआ है और विद्युत फाल्ट में भी कमी आई है . डॉ. गोयल ने निर्देशित किया कि संवेदनशील स्टेशनों पर अधिकारियों की तैनाती बढ़ाएं। रिले की सेटिंग ठीक कराएं। इसमें टेस्ट डिवीजन के कार्मिक अभियान के रूप में लगें। ट्रांसमिशन के साथ बेहतर ताल मेल रखें। निदेशक वितरण इसका रिव्यू करें। अध्यक्ष ने कहा कि गर्मी और लू के मौसम में सामान्य शटडाउन न लिया जाये। कहीं भी ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने, तार गिरने तथा ट्रिपिंग जैसी समस्याओं का बिना विलम्ब निस्तारण सुनिश्चित किया जाये। ट्रांसमिशन एवं वितरण के अधिकारी परस्पर सामंजस्य स्थापित करके कार्य करें जिससे ट्रांसमिशन के कारण विद्युत आपूर्ति बाधित न हो। डॉ. गोयल ने कहा कि अधिकारी अपने-अपने कार्य क्षेत्र में मौजूद रहें। अपना जनसम्पर्क अच्छा रखें। जन प्रतिनिधियों, मीडिया कर्मियों, उपभोक्ताओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं का वाट्सएप ग्रुप बनाएं, जिसमें बिजली आपूर्ति सम्बन्धी आवश्यक सूचनाएं सबको मिलती रहें। अधिक विद्युत व्यवधान वाले क्षेत्रों में विशेष सजगता बरती जाए। ऐसे संवेदनशील स्थानों पर वरिष्ठ अधिकारी स्वंय जाकर समस्याओं को समझें और उनका निराकरण करायें साथ ही संचार माध्यमों से उपभोक्ता को बतायें। यूपीपीसीएल अध्यक्ष ने कहा कि विद्युत वितरण कार्यों से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी उपभोक्ताओं को विद्युत व्यवधान और आपूर्ति के बारे में सही जानकारी दें। उन्होंने कहा कि किसी की भी लापरवाही से विद्युत आपूर्ति प्रभावित होगी तो उस पर कार्रवाई होगी। बैठक को पावर कारपोरेशन के प्रबन्ध निदेशक नितीष कुमार ने भी सम्बोधित किया। उन्होंने राजस्व वसूली बढ़ाने तथा बिजनेस प्लान की प्रगति तथा आगामी कार्य योजना के बारे में विस्तृत जानकारी ली तथा इसमें तेजी लाने के निर्देश दिये।

पटना: चीनी मिलों ने गन्ना मूल्य भुगतान में दिखाई तेजी, लगभग पूरा हुआ भुगतान

पटना  गन्ना उद्योग विभाग की पहल पर चीनी मिलों ने किसानों से क्रय किए गए गन्ना मूल्य का 99.14 प्रतिशत राशि भुगतान कर दिया है। शेष बकाया राशि भुगतान करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। राज्य में संचालित दस चीनी मिलों द्वारा पेराई सत्र 2025-26 में किसानों से नौ अप्रैल 26 तक कुल 572.66 लाख क्विंटल गन्ना का क्रय किया गया था। इसके एवज में गन्ना किसानों को 213783.58 करोड़ रुपये का भुगतान करना था। बताया जा रहा है कि गन्ना उद्योग विभाग ने गन्ना क्रय शुरू होने के साथ ही सभी चीनी मिल संचालकों को गन्ना मूल्य का भुगतान करने का निर्देश दिया था। ताकि किसानों को समय से गन्ना का पैसा मिल सके। इसके साथ ही विभाग द्वारा लगातार गन्ना किसानों को होने वाले भुगतान की निगरानी की जा रही थी। विभाग के अनुसार किसानों के कुल देय राशि 213783.58 करोड़ रुपये के विरुद्ध अब तक 211481.43 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया है, जो देय राशि का 99.14 प्रतिशत है। विभाग के अनुसार गन्ना किसानों को देय राशि का भुगतान करने की लगातार मानीटरिंग की जा रही थी। चीनी मिल संचालकों ने भी तत्परता के साथ किसानों को देय राशि का भुगतान करने में रुचि ली, सुफल से अब तक 99.14 प्रतिशत राशि का भुगतान कर दिया गया है। शेष बकाया राशि का भुगातन करने की कार्रवाई जारी है।

उत्तराखंड में बदलता मौसम पैटर्न, ग्लेशियर पिघलने से बढ़ी चिंता

उत्तराखंड उत्तराखंड में बदरीनाथ धाम से 4 किलोमीटर दूर कंचनगंगा के ऊपर ग्लेशियर टूटने की खबर है। हालांकि, इस घटना में किसी प्रकार के नुकसान की खबर नहीं है। हर वर्ष नीचे की तरफ खिसक रहा ग्लेशियर गर्मी में तापमान बढ़ते ही तेजी के साथ पिघलने लगता है। इस मामले में चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने कहा कि प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मार्च-अप्रैल में गिर रही ज्यादा बर्फ पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार, हिमालय में बर्फबारी का पैटर्न बदल रहा है। बर्फबारी के महीने माने जाने वाले जनवरी-फरवरी से ज्यादा बर्फ अब मार्च-अप्रैल में गिर रही है। इसका सीधा असर वाटर बैंक माने जाने वाले ग्लेशियरों पर पड़ेगा। इस पैटर्न के कारण ट्री लाइन भी लगातार ऊपर को खिसक रही है। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों के शोध में यह चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। ताजा शोध जर्मनी की एप्लाइड जियोमेटिक्स शोध पत्रिका में भी प्रकाशित हुआ है। सर्दियों में कम बर्फबारी हिमालय में सर्दियों की तुलना में गर्मियों में ज्यादा हो रही बर्फबारी का कारण पश्चिमी विक्षोभ में आई असमानता है। सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर होने से बारिश और बर्फबारी में कमी आ रही है। गर्मियों में इसके बढ़ने से बर्फबारी के साथ बारिश, ओलावृष्टि और आपदाओं के खतरे बढ़े हैं। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. पंकज चौहान कहते हैं कि बागेश्वर के पिंडारी और कफनी ग्लेशियर की तरह पूरा मध्य हिमालय इस बदलाव से जूझ रहा है। आर्थिक और सामाजिक नुकसान पर्यावरणविद् पद्मविभूषण डॉ. अनिल जोशी के मुताबिक, हिमालय में मौसम के बदले पैटर्न से आर्थिक और सामाजिक नुकसान का खतरा भी बढ़ा है। इससे खाद्य सुरक्षा प्रभावित होगी और अनाज की कीमतें बढ़ सकती हैं। पर्यटन और हॉर्टिकल्चर भी प्रभावित होगा। सामान्य से अधिक तापमान पिंडारी और कफनी ग्लेशियर क्षेत्र में इस साल सबसे अधिक 158 सेंटीमीटर बर्फ अप्रैल में गिरी है। मार्च में ये आकड़ा 84 सेंटीमीटर रहा, जबकि जनवरी में महज 96 सेंटीमीटर ही बर्फ पड़ी। दिसंबर में महज चार बार बर्फबारी हुई, वह भी बेहद ऊपरी क्षेत्र में। वैज्ञानिकों के मुताबिक अध्ययन क्षेत्र में बर्फबारी रिकॉर्ड करने लायक भी नहीं हुई। इससे ग्लेशियर और आसपास के क्षेत्र का तापमान भी सामान्य से अधिक दर्ज किया गया। कुछ जगहों पर तापमान में 0.1 से बढ़कर 5 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हुई है। कमजोर पड़ रहे ग्लेशियर डॉक्टर पंकज चौहान ने बताया कि मार्च-अप्रैल में हो रही बर्फबारी से ग्लेशियर खतरे में पड़ सकते हैं। चूंकि इन महीनों में तापमान अधिक रहता है इसलिए जिस गति से बर्फ पड़ती है, उसी गति से पिघल भी रही है और ग्लेशियर कमजोर पड़ रहे हैं। ये भविष्य में जलधाराओं को प्रभावित करेंगे, साथ ही आपदा के खतरों को भी बढ़ाएंगे।