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पटना: चीनी मिलों ने गन्ना मूल्य भुगतान में दिखाई तेजी, लगभग पूरा हुआ भुगतान

पटना  गन्ना उद्योग विभाग की पहल पर चीनी मिलों ने किसानों से क्रय किए गए गन्ना मूल्य का 99.14 प्रतिशत राशि भुगतान कर दिया है। शेष बकाया राशि भुगतान करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। राज्य में संचालित दस चीनी मिलों द्वारा पेराई सत्र 2025-26 में किसानों से नौ अप्रैल 26 तक कुल 572.66 लाख क्विंटल गन्ना का क्रय किया गया था। इसके एवज में गन्ना किसानों को 213783.58 करोड़ रुपये का भुगतान करना था। बताया जा रहा है कि गन्ना उद्योग विभाग ने गन्ना क्रय शुरू होने के साथ ही सभी चीनी मिल संचालकों को गन्ना मूल्य का भुगतान करने का निर्देश दिया था। ताकि किसानों को समय से गन्ना का पैसा मिल सके। इसके साथ ही विभाग द्वारा लगातार गन्ना किसानों को होने वाले भुगतान की निगरानी की जा रही थी। विभाग के अनुसार किसानों के कुल देय राशि 213783.58 करोड़ रुपये के विरुद्ध अब तक 211481.43 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया है, जो देय राशि का 99.14 प्रतिशत है। विभाग के अनुसार गन्ना किसानों को देय राशि का भुगतान करने की लगातार मानीटरिंग की जा रही थी। चीनी मिल संचालकों ने भी तत्परता के साथ किसानों को देय राशि का भुगतान करने में रुचि ली, सुफल से अब तक 99.14 प्रतिशत राशि का भुगतान कर दिया गया है। शेष बकाया राशि का भुगातन करने की कार्रवाई जारी है।

उत्तराखंड में बदलता मौसम पैटर्न, ग्लेशियर पिघलने से बढ़ी चिंता

उत्तराखंड उत्तराखंड में बदरीनाथ धाम से 4 किलोमीटर दूर कंचनगंगा के ऊपर ग्लेशियर टूटने की खबर है। हालांकि, इस घटना में किसी प्रकार के नुकसान की खबर नहीं है। हर वर्ष नीचे की तरफ खिसक रहा ग्लेशियर गर्मी में तापमान बढ़ते ही तेजी के साथ पिघलने लगता है। इस मामले में चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने कहा कि प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मार्च-अप्रैल में गिर रही ज्यादा बर्फ पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार, हिमालय में बर्फबारी का पैटर्न बदल रहा है। बर्फबारी के महीने माने जाने वाले जनवरी-फरवरी से ज्यादा बर्फ अब मार्च-अप्रैल में गिर रही है। इसका सीधा असर वाटर बैंक माने जाने वाले ग्लेशियरों पर पड़ेगा। इस पैटर्न के कारण ट्री लाइन भी लगातार ऊपर को खिसक रही है। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों के शोध में यह चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। ताजा शोध जर्मनी की एप्लाइड जियोमेटिक्स शोध पत्रिका में भी प्रकाशित हुआ है। सर्दियों में कम बर्फबारी हिमालय में सर्दियों की तुलना में गर्मियों में ज्यादा हो रही बर्फबारी का कारण पश्चिमी विक्षोभ में आई असमानता है। सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर होने से बारिश और बर्फबारी में कमी आ रही है। गर्मियों में इसके बढ़ने से बर्फबारी के साथ बारिश, ओलावृष्टि और आपदाओं के खतरे बढ़े हैं। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. पंकज चौहान कहते हैं कि बागेश्वर के पिंडारी और कफनी ग्लेशियर की तरह पूरा मध्य हिमालय इस बदलाव से जूझ रहा है। आर्थिक और सामाजिक नुकसान पर्यावरणविद् पद्मविभूषण डॉ. अनिल जोशी के मुताबिक, हिमालय में मौसम के बदले पैटर्न से आर्थिक और सामाजिक नुकसान का खतरा भी बढ़ा है। इससे खाद्य सुरक्षा प्रभावित होगी और अनाज की कीमतें बढ़ सकती हैं। पर्यटन और हॉर्टिकल्चर भी प्रभावित होगा। सामान्य से अधिक तापमान पिंडारी और कफनी ग्लेशियर क्षेत्र में इस साल सबसे अधिक 158 सेंटीमीटर बर्फ अप्रैल में गिरी है। मार्च में ये आकड़ा 84 सेंटीमीटर रहा, जबकि जनवरी में महज 96 सेंटीमीटर ही बर्फ पड़ी। दिसंबर में महज चार बार बर्फबारी हुई, वह भी बेहद ऊपरी क्षेत्र में। वैज्ञानिकों के मुताबिक अध्ययन क्षेत्र में बर्फबारी रिकॉर्ड करने लायक भी नहीं हुई। इससे ग्लेशियर और आसपास के क्षेत्र का तापमान भी सामान्य से अधिक दर्ज किया गया। कुछ जगहों पर तापमान में 0.1 से बढ़कर 5 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हुई है। कमजोर पड़ रहे ग्लेशियर डॉक्टर पंकज चौहान ने बताया कि मार्च-अप्रैल में हो रही बर्फबारी से ग्लेशियर खतरे में पड़ सकते हैं। चूंकि इन महीनों में तापमान अधिक रहता है इसलिए जिस गति से बर्फ पड़ती है, उसी गति से पिघल भी रही है और ग्लेशियर कमजोर पड़ रहे हैं। ये भविष्य में जलधाराओं को प्रभावित करेंगे, साथ ही आपदा के खतरों को भी बढ़ाएंगे।

मुख्यमंत्री योगी ने दिए त्वरित और जनकेंद्रित मौसम अलर्ट के निर्देश

लखनऊ.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में मौसम संबंधी पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक सटीक, त्वरित तथा जनकेंद्रित बनाने के निर्देश दिए हैं। शनिवार को राहत एवं आपदा प्रबंधन विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान समय पर दी गई सही सूचना अनेक लोगों का जीवन बचा सकती है। इसलिए मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी तंत्र को केवल तकनीकी व्यवस्था तक सीमित न रखते हुए अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने गांवों और संवेदनशील क्षेत्रों में “लास्ट माइल कनेक्टिविटी” मजबूत करने, आईवीआरएस, पंचायत स्तर के लाउडस्पीकर, स्थानीय एफएम रेडियो, मोबाइल अलर्ट तथा सोशल मीडिया का व्यापक उपयोग करने के निर्देश दिए। बैठक में 13 मई 2026 को आए भीषण आंधी-तूफान की समीक्षा प्रस्तुत की गई। बताया गया कि आईएमडी के मल्टी-हैजार्ड अर्ली वार्निंग सिस्टम (एमएचईडब्ल्यूएस) द्वारा इस घटना की सात दिन पहले से निगरानी की जा रही थी। प्रारंभ में येलो वार्निंग जारी की गई, जिसे बाद में ऑरेंज वार्निंग तथा कई जिलों में रेड अलर्ट में अपग्रेड किया गया। चेतावनियों में तेज आंधी, बिजली गिरने, ओलावृष्टि और 60 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक रफ्तार वाली हवाओं की आशंका जताई गई थी। कई स्थानों पर हवा की गति 80 से 130 किलोमीटर प्रति घंटा तक दर्ज की गई। बैठक में बताया गया कि भदोही, प्रयागराज, फतेहपुर, लखनऊ, मिर्जापुर, रायबरेली, कानपुर नगर और उन्नाव सहित अनेक जिलों के लिए 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटा तक की हवा चलने संबंधी नाउकास्ट अलर्ट जारी किए गए थे। “सचेत” प्लेटफॉर्म के माध्यम से कलर-कोडेड अलर्ट जिला प्रशासन, डीडीएमए, आपदा मित्रों और संबंधित विभागों तक पहुंचाए गए। प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय मोबाइल फोनों पर एसएमएस आधारित चेतावनियां भी भेजी गईं। पूरी घटना के दौरान लगातार एसएमएस अलर्ट जारी किए गए। स्थानीय टीवी चैनलों, एफएम रेडियो, व्हाट्सएप समूहों, ग्राम प्रधानों, लेखपालों तथा आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से भी व्यापक स्तर पर सूचना प्रसारित की गई। मुख्यमंत्री ने मौसम संबंधी पूर्व सूचना मिलने के बाद संबंधित जिलाधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि चेतावनी जारी करने के साथ-साथ लोगों में सुरक्षित व्यवहार को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। उन्होंने स्कूलों, पंचायतों और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। साथ ही पेड़ों, बिजली के खंभों, होर्डिंग्स और कमजोर अस्थायी संरचनाओं की संवेदनशीलता का स्थानीय स्तर पर आकलन कर एसओपी तैयार करने को कहा। बैठक में बताया गया कि आईएमडी द्वारा डॉप्लर वेदर रडार, ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (एडब्ल्यूएस), ऑटोमैटिक रेन गेज स्टेशन (एआरजी), लाइटनिंग सेंसर, सैटेलाइट इमेज तथा न्यूमेरिकल वेदर प्रिडिक्शन मॉडल्स के माध्यम से प्रदेश में मौसम की लगातार निगरानी की जा रही है। मीडियम रेंज फोरकास्ट (4-5 दिन), शॉर्ट रेंज फोरकास्ट (2-3 दिन) तथा नाउकास्ट (3 घंटे तक) स्तर पर थंडरस्टॉर्म और लाइटनिंग गतिविधियों का पूर्वानुमान जारी किया जाता है। प्रदेश में 450 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन तथा 2000 ऑटोमैटिक रेन गेज स्थापित किए जा चुके हैं। अलीगढ़, झांसी, लखनऊ, वाराणसी और आजमगढ़ में डॉप्लर वेदर रडार स्थापित किए जा रहे हैं, जबकि बरेली, देवरिया और प्रयागराज में अतिरिक्त रडार लगाने की प्रक्रिया जारी है। लखनऊ और प्रयागराज में विंड प्रोफाइलर रडार स्थापित किए जाने की कार्यवाही भी प्रगति पर है। बैठक में बताया गया कि यूएनडीपी के सहयोग से प्रदेश के 15 विभागों, सभी 75 जिलों तथा 20 प्रमुख नगरों के लिए डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान तैयार किए जा रहे हैं। वर्ष 2025 में 44 जिलों की 118 तहसीलों में लगभग 1800 स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिनके माध्यम से 2361 गांवों और 4824 मजरों में जनजागरूकता अभियान चलाया गया। “आपदा मित्र” स्वयंसेवकों को बीमा प्रमाण-पत्र वितरित किए गए हैं तथा नाव दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए 38 जिलों में 66,077 लाइफ जैकेट वितरित किए गए हैं।

गुरुद्वारा शहीदां साहिब में दर्दनाक हादसा, छत गिरने से 2 की मौत और 5 घायल

अमृतसर. अमृतसर में रविवार को गुरुद्वारा शहीद गंज बाबा दीप सिंह जी (शहीदां साहिब) में बड़ा हादसा हो गया। यहां निर्माणाधीन लंगर हॉल की छत की लोहे की प्लेटें अचानक टूटकर नीचे गिर गईं। हादसे के समय कई महिलाएं लंगर हॉल में सेवा कर रही थीं। जिसमें दो महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं। मौके पर पहुंचे लोगों के अनुसार हादसा उस समय हुआ जब निर्माणाधीन लंगर हाल में सेवा का काम चल रहा था। अचानक छत की भारी लोहे की प्लेटें नीचे गिर पड़ीं। हादसे के बाद गुरुद्वारा परिसर में चीख-पुकार मच गई और लोगों में दहशत फैल गई। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। अमृतसर की पुलिस अधिकारी Amandeep Kaur ने बताया कि घायल महिलाओं का इलाज किया जा रहा है और अस्पताल में सभी डॉक्टर मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआत में बड़ी संख्या में लोग घायल महिलाओं के साथ अस्पताल के अंदर पहुंच गए थे, जिससे इलाज में परेशानी हो रही थी। बाद में सभी को बाहर कर दिया गया ताकि डॉक्टर आसानी से उपचार कर सकें। घायलों को पहुंचाया गया अस्पताल हादसे के बाद गुरुद्वारा परिसर में शोक का माहौल है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग अस्पताल तथा घटनास्थल पर पहुंचे। प्रशासन की ओर से मामले की जांच शुरू कर दी गई है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि निर्माणाधीन छत की लोहे की प्लेटें किस कारण गिरीं और कहीं निर्माण कार्य में लापरवाही तो नहीं हुई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता घायलों का बेहतर इलाज सुनिश्चित करना है। इस हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।

अमेरिका के विदेश मंत्री जयपुर में, रामबाग पैलेस से लेकर आमेर तक हाई-प्रोफाइल विजिट का शेड्यूल तैयार

जयपुर अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के जयपुर दौरे की तैयारियां जोरों पर हैं. रुबियो सोमवार (25 मई) को परिवार के साथ जयपुर आ रहे हैं. इस हाई-प्रोफाइल दौरे को लेकर गुलाबी नगरी में प्रशासनिक और कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है. यह दौरा सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं है, बल्कि भारत और अमेरिका के मजबूत होते रिश्तों के लिहाज से भी बेहद अहम है. यही वजह है कि राजस्थान की राजधानी में व्यवस्था चाक-चौबंद है. रूबियो के दौरे का शेड्यूल और उससे जुड़ी हर जरूरी बात इस खास रिपोर्ट में पढ़िए. हाथी गांव में चल रही विशेष तैयारियां मार्को रूबियो के हाथी गांव में दौरे को लेकर भी तैयारियां चल रही हैं. हालांकि, इससे जुड़ा कोई आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है. हाथी गांव विकास समिति के अध्यक्ष के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्री के आगमन को लेकर यहां विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं. उनका बेहद खास अंदाज में पारंपरिक स्वागत किया जाएगा. इसके साथ ही मरुधरा की इस धरती पर हाथियों को किस तरह रखा जाता है और उनका रखरखाव कैसे होता है, इसकी भी जानकारी दी जाएगी. इससे पहले जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों जयपुर आए थे, तब भी हाथियों के विशेष स्वागत ने दुनियाभर में सुर्खियां बटोरी थीं. राजस्थानी इतिहास को करीब से जानेंगे रुबियो सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से अलर्ट मोड पर हैं. एयरपोर्ट से लेकर आमेर तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्री का विशेष विमान दोपहर करीब 2 बजे जयपुर एयरपोर्ट पर लैंड होगा. एयरपोर्ट पर राजस्थानी परंपरा के अनुसार उनका भव्य स्वागत किया जाएगा. इसके बाद उनका काफिला सीधे जयपुर के प्रतिष्ठित हेरिटेज होटल 'रामबाग पैलेस' के लिए रवाना होगा. रामबाग पैलेस में रुकने के बाद मार्को रूबियो राजस्थान के इतिहास के को करीब से देखने के लिए आमेर फोर्ट पहुंचेंगे. कल्चरल डिप्लोमेसी के लिहाज से भी अहम है दौरा जयपुर की विरासत, यहां की समृद्ध संस्कृति और राजस्थानी मेहमाननवाजी को इस पूरे दौरे का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है. यही वजह है कि जानकार इस यात्रा को केवल राजनीतिक चश्मे से नहीं, बल्कि 'सांस्कृतिक कूटनीति' यानी कल्चरल डिप्लोमेसी के एक नए अध्याय के तौर पर देख रहे हैं.

बिजली संकट से परेशान ग्रामीण सड़क पर उतरे, सीहोर में विरोध प्रदर्शन से यातायात प्रभावित

अमलाहा. बीते 15 दिनों से लगातार रात्रि में की जा रही बिजली कटौती से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर फूट पड़ा। बड़ी संख्या में ग्रामीणजन अमलाहा डीसी पहुंचे, जहां उन्होंने चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि रात में बार-बार बिजली काटे जाने से आमजन, किसान और व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा और तत्काल रात्रिकालीन बिजली कटौती बंद करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि आगामी 72 घंटे के भीतर व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो समस्त ग्रामवासी उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। समाजसेवी एम.एस. मेवाड़ा के नेतृत्व में नई और पुरानी चंदेरी के ग्रामीणों ने यह अनोखा प्रदर्शन किया। हाथों में मशालें थामे लोगों ने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और पटाखे फोड़कर अपना विरोध जताया। ग्रामीणों का कहना है कि भीषण गर्मी के बीच रात में 2 से 3 घंटे तक लगातार दो से तीन बार बिजली काटी जा रही है। पेयजल संकट और मच्छरों का बढ़ा प्रकोप रात के समय बिजली गुल रहने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा, बिजली के अभाव में पानी की मोटरें नहीं चल पा रही हैं। इस कारण गांवों में पेयजल का गहरा संकट उत्पन्न हो गया है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शहरों को 24 घंटे बिजली, गांवों में अंधेरा प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन शहरों को 24 घंटे बिजली देकर 'वीआईपी ट्रीटमेंट' दे रहा है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों को अंधेरे में रखा जा रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि यदि प्रदेश में बिजली का कोई बड़ा संकट है, तो सरकार को औद्योगिक क्षेत्रों और फैक्ट्रियों की बिजली काटनी चाहिए। बिजली संकट का खामियाजा गरीब किसानों और ग्रामीणों को नहीं भुगतना चाहिए। सीएम से हस्तक्षेप की मांग, आंदोलन की चेतावनी ग्रामीणों ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि रात्रिकालीन बिजली कटौती तुरंत बंद करने के सख्त निर्देश जारी किए जाएं। यदि बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन और चक्काजाम किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव कार्यशाला में वर्चुअली हुए शामिल, फॉरेंसिक वैन को दिखाई हरी झंडी

रायपुर. केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अनुशंसा पर छत्तीसगढ़ के सभी जिलों को अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध कराई गई है। इसी क्रम में मुंगेली जिले को करीब 65 लाख रुपये लागत की आधुनिक सुविधाओं से लैस मोबाइल फॉरेंसिक वैन प्राप्त हुई है। इस वैन के तकनीकी उपयोग और अपराध अनुसंधान में इसकी भूमिका से पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अवगत कराने मुंगेली कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ‘कलेक्टर जनदर्शन सभाकक्ष’ में विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव नवा रायपुर स्थित मंत्रालय से इसमें वर्चुअली शामिल हुए। उन्होने हरी झंडी दिखाकर मोबाइल फॉरेंसिक वैन को जिले में सेवा हेतु रवाना किया। अपराध अनुसंधान को मिलेगी नई दिशा मुख्य अतिथि के रूप में कार्यशाला में ऑनलाइन जुड़े उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि मुंगेली जिले को मिली यह अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन कानून व्यवस्था और अपराध जांच प्रणाली को नई मजबूती प्रदान करेगी। आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित यह वैन पुलिस को घटनास्थल पर ही प्रारंभिक वैज्ञानिक जांच की सुविधा देगी, जिससे अपराध अनुसंधान में तेजी आएगी और साक्ष्य संकलन अधिक प्रभावी होगा। तकनीकी क्षमता का उठाएं पूरा लाभ बिलासपुर रेंज के आईजी श्री रामगोपाल गर्ग ने कहा कि मोबाइल फॉरेंसिक वैन की तकनीकी क्षमताएं आपराधिक मामलों के त्वरित एवं वैज्ञानिक निराकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुंगेली पुलिस इस सुविधा का बेहतर उपयोग कर अपराधियों के खिलाफ सशक्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। निष्पक्ष न्याय में बड़ी भूमिका निभाएगी वैन मुंगेली एसएसपी श्री भोजराम पटेल ने कहा कि देश की न्याय व्यवस्था में सभी नागरिकों के लिए न्याय समान है। उन्होंने कहा कि न्याय भेद नहीं करता और प्रत्येक नागरिक को निष्पक्ष न्याय मिलना उसका अधिकार है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह मोबाइल फॉरेंसिक वैन वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष और सटीक जांच में बड़ी मददगार साबित होगी। आधुनिक उपकरणों एवं तकनीकों की दी गई विस्तृत जानकारी कार्यशाला में तकनीकी सत्र में फॉरेंसिक एक्सपर्ट सुश्री ज्योत्सना लकड़ा ने एलईडी स्क्रीन के माध्यम से पुलिस अधिकारियों और जवानों को वैन में उपलब्ध आधुनिक उपकरणों एवं तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया, साक्ष्य सुरक्षित रखने में बरती जाने वाली सावधानियों तथा मौके पर ही प्राथमिक फॉरेंसिक जांच करने के तरीकों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। साथ ही बताया कि अदालत में साक्ष्यों की वैधता बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक पद्धति से जांच और दस्तावेजीकरण अत्यंत आवश्यक है। प्रधानमंत्री की बचत अपील का दिखा असर कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘बचत’ संबंधी अपील को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव तथा बिलासपुर रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग ने अनावश्यक खर्च से बचते हुए ऑनलाइन माध्यम से कार्यशाला में सहभागिता की। कार्यशाला में मुंगेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल, अपर कलेक्टर निष्ठा पाण्डेय तिवारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नवनीत कौर छाबड़ा, उप पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह, बार काउंसिल के अध्यक्ष राजमन सिंह और वरिष्ठ अधिवक्ता रविंदर सिंह छाबड़ा सहित जिले के विभिन्न थाना प्रभारी, पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए।

शिक्षा में टेक्नोलॉजी क्रांति! 600 विद्यालयों में ड्रीम लैब्स स्थापित करेगा यूपी सरकार-नेल्को समझौता

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के  नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूली शिक्षा को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल की है। इसी क्रम में समग्र शिक्षा (माध्यमिक), माध्यमिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा शनिवार को माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, लखनऊ में नेल्को लिमिटेड (टाटा एंटरप्राइज) एवं अग्रणी औद्योगिक समूह के साथ 600 राजकीय माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अत्याधुनिक ड्रीम लैब्स (डिज़ाइन, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग) की स्थापना हेतु एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा, महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी की उपस्थिति में किए गए। अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि यह समझौता केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के युवाओं के भविष्य में निवेश है। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती औद्योगिक आवश्यकताओं को देखते हुए राज्य के विद्यार्थियों को इंडस्ट्री 4.0 आधारित कौशलों से लैस करना समय की मांग है। ड्रीम लैब्स इस दिशा में एक सशक्त माध्यम बनेंगे, जहाँ विद्यार्थी पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक एवं रोजगारपरक कौशल भी अर्जित करेंगे। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने अपने संबोधन में कहा कि यह पहल व्यावसायिक शिक्षा को नई दिशा देने वाली है। उन्होंने हब एवं स्पोक मॉडल के प्रभावी संचालन, मशीनरी स्थापना, प्रशिक्षकों की गुणवत्ता, विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति तथा परिणाम आधारित निगरानी पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि शुरुआत जितनी मजबूत होती है, उतना ही आवश्यक है कि हम उसे सफल परिणति तक पहुंचाएं, विशेषकर आकांक्षी जनपदों में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया। इस परियोजना के अंतर्गत प्रदेश के सभी 75 जनपदों में कुल 600 विद्यालयों (150 हब एवं 450 स्पोक विद्यालय) को शामिल किया गया है। प्रथम चरण में 18 हब एवं 54 स्पोक विद्यालय (कुल 72), द्वितीय चरण में 36 हब एवं 108 स्पोक विद्यालय (कुल 144) तथा तृतीय चरण में 96 हब एवं 288 स्पोक विद्यालय (कुल 384) में ड्रीम लैब्स स्थापित किए जाएंगे। इन ड्रीम लैब्स को आधुनिक नवाचार एवं कौशल विकास केन्द्रों के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता), रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), 3डी प्रिंटिंग, उन्नत विनिर्माण, बैटरी चालित विद्युत वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि विज्ञान, नवीकरणीय ऊर्जा, ड्रोन प्रौद्योगिकी तथा डिज़ाइन थिंकिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। यह परियोजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (एनएसक्यूएफ) तथा स्किल इंडिया मिशन के अनुरूप है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में नवाचार, समस्या समाधान क्षमता, तकनीकी दक्षता एवं उद्यमिता कौशल विकसित करना है, ताकि वे भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धी बन सकें। पांच वर्षीय साझेदारी मॉडल के अंतर्गत संचालित इस परियोजना में नेल्को लिमिटेड के नेतृत्व में औद्योगिक समूह द्वारा अत्याधुनिक मशीनरी, डिजिटल प्लेटफॉर्म, सॉफ्टवेयर एवं रखरखाव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही उद्योग विशेषज्ञों द्वारा विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ शिक्षकों का क्षमता निर्माण भी सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे यह मॉडल दीर्घकालिक रूप से आत्मनिर्भर बन सके। कार्यक्रम में यास्कावा, मास्टरकैम, 3डी सिस्टम्स, अज्नालेंस, एसीई माइक्रोमैटिक सहित विभिन्न वैश्विक कंपनियों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता करते हुए इस पहल को शिक्षा और उद्योग के बीच मजबूत सेतु बताया। उन्होंने कहा कि ड्रीम लैब्स विद्यार्थियों को वास्तविक औद्योगिक अनुभव प्रदान कर उन्हें रोजगार एवं उद्यमिता के बेहतर अवसरों से जोड़ेगा। यह परियोजना उत्तर प्रदेश को “कुशल, आत्मनिर्भर एवं नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था” के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा आने वाले समय में प्रदेश के विद्यालयों से नई पीढ़ी के तकनीकी विशेषज्ञ, नवप्रवर्तक एवं उद्यमी तैयार होंगे। अपर निदेशक (व्यावसायिक शिक्षा) सुरेन्द्र कुमार तिवारी तथा अपर राज्य परियोजना निदेशक विष्णु कान्त पाण्डेय सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

यूपी में बिजली आपूर्ति सुधार पर जोर, फीडर-वाइज मॉनिटरिंग के आदेश

लखनऊ यूपी में भीषण गर्मी में बिजली संकट और राजधानी लखनऊ से लेकर छोटे जिलों तक मचे हाहाकार को देखते हुए सीएम योगी ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। सीएम योगी ने रविवार को बिजली अधिकारियों को तलब कर आपूर्ति से लेकर वितरण तक की स्थिति जानी। अलग-अलग इलाकों के बारे में विश्लेषण किया और व्यवस्था सुधारने के लिए कई निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन, किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को बिजली संकट का सामना न करना पड़े। इसके लिए सभी स्तरों पर सतत मॉनिटरिंग की जाए। फीडर वाइज मॉनिटरिंग करें और जवाबदेही भी तय करें। बैठक में ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत के साथ ही ऊर्जा विभाग, पावर कॉरपोरेशन व सभी डिस्कॉम भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने राज्य की विद्युत उत्पादन क्षमता को और सुदृढ़ बनाने और गर्मी के मौसम में निर्बाध बिजली उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बढ़ती बिजली की मांग को देखते हुए उत्पादन इकाइयों की अधिकतम क्षमता का उपयोग किया जाए और सभी संयंत्रों में तकनीकी दक्षता और रखरखाव व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। ट्रांसमिशन नेटवर्क को करें मजबूत मुख्यमंत्री ने प्रदेश की बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए ट्रांसमिशन नेटवर्क को और अधिक मजबूत, आधुनिक एवं भरोसेमंद बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति व्यवस्था की मजबूती के लिए ट्रांसमिशन प्रणाली की दक्षता अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गर्मी के मौसम में किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा को न्यूनतम रखने के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क की सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें। बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़कर 13,388 मेगावाट हो गई है। इसमें अनपरा, ओबरा, हरदुआगंज, परीछा, जवाहरपुर और पनकी जैसे तापीय विद्युत गृहों की 9,120 मेगावाट क्षमता शामिल है, जबकि जल विद्युत परियोजनाओं से 526.4 मेगावाट क्षमता उपलब्ध है। इसके अलावा मेजा, घाटमपुर और खुर्जा परियोजनाओं से संयुक्त उपक्रमों के माध्यम से 3,742 मेगावाट क्षमता राज्य को प्राप्त हो रही है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2022 की तुलना में वर्ष 2026 तक उत्पादन निगम की स्थापित क्षमता में 86 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा गैर पारंपरिक ऊर्जा विकल्पों से लगभग 10 हजार मेगावॉट बिजली उत्पादन हो रहा है। वितरण व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाएं मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली वितरण व्यवस्था को और अधिक जवाबदेह के साथ ही उपभोक्ता केंद्रित बनाया जाए। उन्होंने फीडर वाइज जवाबदेही तय करने के निर्देश देते हुए कहा कि ट्रांसफॉर्मर खराब होने, फीडर बाधित होने या शिकायत निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि आंधी-तूफान और अत्यधिक तापमान जैसी परिस्थितियों के बावजूद त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम सक्रिय रखा जाए। बिजली खरीद और आपूर्ति प्रबंधन दुरुस्त करें मुख्यमंत्री ने बढ़ती मांग के अनुसार बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी संभावित स्रोतों से खरीद और आपूर्ति प्रबंधन के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने भविष्य की मांग को देखते हुए दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति पर बनाने पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने उपभोक्ता सेवाओं को और अधिक तकनीक आधारित तथा पारदर्शी बनाने पर जोर दिया। सही जानकारी उपभोक्ताओं को दें मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग के मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत को हेल्पलाइन कॉल सेंटर का भौतिक निरीक्षण कर व्यवस्था की पड़ताल करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को निर्देश दिए कि विद्युत आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में आमजन को समयबद्ध और सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर केवल समस्या दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं को यह भी स्पष्ट रूप से बताया जाए कि समाधान कब तक होगा।

बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के लिए बनेगा डिटेंशन सेंटर, बंगाल सरकार का बड़ा कदम

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को लेकर एक बहुत बड़ा कदम उठाया है. राज्य सरकार ने अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को उनके देश वापस भेजने के लिए विशेष 'होल्डिंग सेंटर' बनाने के  निर्देश जारी किए हैं. शुभेंदु सरकार की ओर से इस संबंध में पश्चिम बंगाल के सभी जिलाधिकारियों को लिखित निर्देश और गाइडलाइंस जारी कर दी गई हैं. सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में इन होल्डिंग सेंटरों को बनाने के लिए सही जगह की पहचान करने और आगे की कार्रवाई जल्द से जल्द शुरू करने को कहा है. प्रशासन का फोकस सीमावर्ती जिलों और उन इलाकों पर है, जहां अवैध प्रवासियों के छिपे होने की ज्यादा उम्मीद रहती है. डिपोर्ट होने तक सेंटरों में रखे जाएंगे घुसपैठिए सरकार के बनाए जा रहे इन होल्डिंग सेंटरों का मकसद अवैध रूप से रह रहे लोगों पर कड़ी नजर रखना है. राज्य के अलग-अलग हिस्सों से पकड़े गए अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को सीधे जेल में रखने के बजाय इन सेंटरों में ट्रांसफर किया जाएगा. जब तक इन पकड़े गए विदेशी नागरिकों की पहचान की पुष्टि करने और उन्हें कानूनी रूप से उनके मूल देश वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक उन्हें इन्हीं होल्डिंग सेंटरों में रखा जाएगा. चुनाव प्रचार के दौरान किया था ये वादा बता दें कि बीजेपी ने इसी साल हुए बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राज्य से अवैध प्रवासियों को निकालने का वादा किया था. अमित शाह ने अपने एक संबोधन में साफ तौर पर कहा था कि जिस तरह बीजेपी ने असम में घुसपैठ को पूरी तरह से खत्म किया, उसी तरह पार्टी बंगाल में भी अवैध घुसपैठ पूरी तरह से खत्म कर देगी. अब राज्य में बीजेपी की सरकार कायम होने के बाद, पार्टी अपने उस वादे को पूरा करने में जुट गई है.