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संकट की घड़ी में बना सहारा: प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना से मिला दो लाख रुपये का आर्थिक संबल

रायपुर  मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय के नेतृत्व में केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुदूर वनांचल तक पहुंच रहा है। सुकमा जिले में प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना ने एक जरूरतमंद परिवार को कठिन समय में आर्थिक सहारा देकर संवेदनशील शासन व्यवस्था का उदाहरण प्रस्तुत किया है।   दुख की घड़ी में मिला आर्थिक संबल सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड के ग्राम आरलमपल्ली की दुर्गा स्व-सहायता समूह से जुड़ी बिहान की दीदी दुधी सन्नी का 8 अप्रैल 2026 को आकस्मिक निधन हो गया था। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत उन्हें समय पर आर्थिक सहायता मिल गई। दो महीने में मिला दो लाख रुपये का बीमा दावा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारीमुकुंद ठाकुर के मार्गदर्शन में बिहान योजना की टीम ने तुरंत बीमा दावा तैयार कर भारतीय स्टेट बैंक की दोरनापाल शाखा को भेजा। बैंक ने भी सभी आवश्यक प्रक्रियाएं प्राथमिकता से पूरी कीं। संयुक्त प्रयासों का परिणाम यह रहा कि मृतिका के पति एवं नामिनी दुधी सोमा के बैंक खाते में 27 मई 2026 को मात्र दो महीने के भीतर 2 लाख रुपये की बीमा दावा राशि जमा हो गई। यह सहायता राशि नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती राधा नायक द्वारा हितग्राही को प्रदान की गई। टीमवर्क से मिली समय पर राहत इस कार्य में भारतीय स्टेट बैंक दोरनापाल के शाखा प्रबंधकआनंद सिंह, बिहान की पीआरपी श्रीमती रूकमणी कर्मा तथा एफएलसीआरपी कुमारी शालिनी ओडला की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी के समन्वित प्रयासों से दूरस्थ क्षेत्र में रहने वाले परिवार को बिना अनावश्यक विलंब के आर्थिक सहायता मिल सकी। गरीब परिवारों के लिए सुरक्षा कवच बन रही योजना प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा का मजबूत माध्यम बन रही है। परिवार के कमाने वाले सदस्य के असामयिक निधन की स्थिति में मिलने वाली बीमा राशि संकट की घड़ी में बड़ा सहारा साबित होती है। दुधी सन्नी के परिवार की यह कहानी बताती है कि जब शासकीय योजनाओं का लाभ समय पर और पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंचता है, तो वह न केवल आर्थिक सहायता देता है, बल्कि कठिन परिस्थितियों में परिवार को नया संबल और विश्वास भी प्रदान करता है।

वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, जनभागीदारी और सर्कुलर इकोनॉमी पर विशेषज्ञों ने किया मंथन

रायपुर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय, रायपुर द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइंस, रायपुर में एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन, स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण, संग्रहण, प्रसंस्करण एवं पर्यावरण अनुकूल निस्तारण सहित नियमों के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा ने कहा कि स्वच्छ एवं स्वस्थ शहरों के निर्माण के लिए ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कचरे के पृथक्करण, पुनर्चक्रण तथा वैज्ञानिक प्रबंधन में नागरिकों, स्थानीय निकायों और संस्थानों की सक्रिय भागीदारी पर बल देते हुए इसे जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। क्षेत्रीय अधिकारी श्री पी.के. रबड़े ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रावधानों, विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा अधिसूचित नियम केवल कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, जिनका उद्देश्य कचरे को संसाधन के रूप में उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि नए नियमों के तहत बल्क वेस्ट जेनरेटरों को अपने द्वारा उत्पन्न कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन की जिम्मेदारी स्वयं निभानी होगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने स्वच्छता दीदियों के माध्यम से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण का सफल मॉडल विकसित किया है। साथ ही बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सीमेंट संयंत्रों में नगरीय ठोस अपशिष्ट से तैयार आर.डी.एफ. (Refuse Derived Fuel) का ईंधन के रूप में उपयोग कर कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और वैकल्पिक ऊर्जा के उपयोग का सफल उदाहरण प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी हितधारकों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है तथा सामूहिक प्रयासों से रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ को जीरो वेस्ट स्टेट बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। कार्यशाला में राज्य सलाहकार श्रीमती मोनिका सिंह एवं श्री पुरुषोत्तम पंडा (स्वच्छ भारत मिशन), कार्यपालन अभियंता श्री योगेश कुमार कडू, मुख्य रसायनज्ञ श्रीमती नीलिमा सोनकर तथा सहायक अभियंता श्री प्रवीण कुमार नाग ने पॉवरपॉइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, स्रोत स्तर पर पृथक्करण, प्रसंस्करण तथा व्यावहारिक क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम में शहरी एवं ग्रामीण निकायों के प्रतिनिधि, उद्योग प्रतिनिधि, बल्क वेस्ट जेनरेटर, ईको क्लब समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन के अधिकारी तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारी-कर्मचारी सहित लगभग 250 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।  कार्यशाला का उद्देश्य ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रति व्यापक जागरूकता बढ़ाना, विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करना तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए वैज्ञानिक एवं प्रभावी कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देना था।

प्रदेश के 10 विद्यालय राष्ट्रीय रेटिंग में, रतलाम का जावरा और भोपाल का कमला नेहरू सांदीपनि स्कूल शीर्ष पर

भोपाल स्‍कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग भारत सरकार द्वारा घोषित स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग (SHVR) 2025-26 में मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय चयन सूची में मध्यप्रदेश के 10 विद्यालय विभिन्न श्रेणियों में चयनित हुए हैं, जिसमें शहरी वर्ग के अंतर्गत रतलाम जिले के सांदीपनि विद्यालय जावरा ने प्रथम और राजधानी भोपाल के कमला नेहरू सांदीपनि विद्यालय ने द्वितीय स्‍थान प्राप्‍त किया है। वहीं, देवास जिले की शासकीय माध्‍यमिक शाला झिकड़ाखेड़ा ग्रामीण श्रेणी में दूसरे स्‍थान पर है। उल्लेखनीय है कि “स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग’’ भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल है, जिसके अंतर्गत सुरक्षित पेयजल, बाल-अनुकूल शौचालय, हाथ धुलाई सुविधाएं, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, ऊर्जा दक्षता, वर्षा जल संचयन, हरित परिसर विकास, पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली गतिविधियों तथा व्यवहार परिवर्तन आधारित गतिविधियों सहित विभिन्न मानकों पर विद्यालयों का मूल्यांकन किया जाता है। इस प्रतिष्ठित सूची में स्‍थान पाने के लिए विद्यालय स्‍व-मूल्‍यांकन कर आवेदन करते हैं। प्रदेश के 78 हजार से अधिक स्‍कूलों की सहभागिता इस वर्ष राज्य स्तर पर व्यापक जन-भागीदारी एवं जागरूकता के परिचायक के रूप में प्रदेश की कुल 78,149 शालाओं द्वारा ‘स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग’ अंतर्गत स्व-मूल्यांकन प्रक्रिया में सहभागिता की गई थी। विभिन्न तकनीकी एवं मूल्यांकन प्रक्रियाओं के आधार पर राज्य स्तर से कुल 20 विद्यालयों का चयन कर उन्हें राष्ट्रीय स्तर के लिए नामांकित किया गया था, जिसमें से मध्यप्रदेश के 10 विद्यालयों का चयन राष्ट्रीय स्तर पर किया गया है। चयनित विद्यालयों को मिलेगी 1 लाख की प्रोत्‍साहन राशि इन सभी 10 चयनित विद्यालयों को भारत सरकार द्वारा मेरिट प्रमाण-पत्र के साथ स्वच्छता एवं हरित गतिविधियों के सतत सुदृढ़ीकरण के लिए 1 लाख रुपये की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही, इन विद्यालयों के संस्था प्रमुखों के लिए विशेष शैक्षणिक अध्ययन भ्रमण भी आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। चयनित 10 में से 8 शासकीय विद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर चयनित प्रदेश के 10 विद्यालयों में से 3 सांदिपनी विद्यालयों सहित कुल 8 शासकीय विद्यालय शामिल हैं। जिनमें रतलाम जिले का उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक सांदीपनि विद्यालय जावरा, भोपाल का शासकीय कमला नेहरू कन्या उच्चतर माध्यमिक सांदीपनि विद्यालय, देवास जिले का शासकीय माध्‍यमिक शाला झिकड़ाखेड़ा, सीहोर जिले का शासकीय माध्‍यमिक शाला महुआखेड़ी टाकीपुर, शाजापुर जिले का शासकीय माध्‍यमिक शाला भराड़, जबलपुर जिले का सांदीपनि विद्यालय कुंडम, शिवपुरी जिले का पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय आईटीबीपी करेरा, डिंडोरी जिले की आश्रम शाला इंग्लिश मीडियम शाहपुरा सहित 2 निजी विद्यालय इंदौर जिले का दिल्ली पब्लिक स्कूल निपानिया तथा कटनी जिले का दिल्ली पब्लिक स्कूल शामिल हैं। सांदीपनि विद्यालयों का उत्‍कृष्‍ट प्रदर्शन मध्यप्रदेश शासन की विशेष शैक्षणिक पहल सांदीपनि विद्यालय अंतर्गत संचालित विद्यालयों ने भी ‘स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग’ में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। विशेष रूप से रतलाम जिले के उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक सांदीपनि विद्यालय, जावरा ने शहरी श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर प्रदेश को गौरवान्वित किया है, जबकि भोपाल जिले के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कमला नेहरू ने इसी श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। इसके साथ ही जबलपुर जिले का सांदीपनि विद्यालय कुंडम ने ग्रामीण श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर 10वां स्थान प्राप्त कर राज्य की उपलब्धियों को और अधिक गौरवपूर्ण बनाया है। इन विद्यालयों द्वारा स्वच्छता, हरित परिसर विकास, जल संरक्षण, व्यवहार परिवर्तन आधारित गतिविधियों एवं छात्र सहभागिता के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य किए गए हैं। संचालक राज्‍य शिक्षा केन्‍द्र ने दी बधाई भारत सरकार के स्‍कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा घोषित राष्‍ट्रीय रेटिंग में प्रदेश के 10 स्‍कूलों के चयन पर संचालक राज्‍य शिक्षा केन्‍द्र श्री हरजिंदर सिंह ने सभी चयनित विद्यालयों को बधाई दी है। इस अवसर पर उन्‍होंने कहा कि, यह उपलब्धि प्रदेश के विद्यालयों में स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण एवं हरित परिसर विकास के क्षेत्र में राज्य द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों का परिणाम है। यह सफलता राज्य शासन, लोक शिक्षण संचालनालय, राज्य शिक्षा केंद्र, जिला प्रशासन, विद्यालयों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, समुदाय एवं यूनिसेफ मध्यप्रदेश टीम के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में स्वच्छ, सुरक्षित एवं हरित वातावरण सुनिश्चित करना केवल अधोसंरचना विकास का विषय नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, गरिमा, सीखने के वातावरण एवं सतत विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण दायित्व है। चयनित विद्यालयों की श्रेष्ठ प्रथाओं एवं नवाचारों का व्यापक दस्तावेजीकरण एवं प्रसार किया जाएगा, जिससे प्रदेश के अन्य विद्यालय भी इन मॉडलों से प्रेरणा लेकर स्वच्छ एवं हरित विद्यालय पहल को और अधिक प्रभावी बना सकें।  

विकास के लिए प्रदेश का कोना-कोना मथ रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अनवरत पांचवें महीने सहारनपुर पहुंचे

सहारनपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पश्चिम उत्तर प्रदेश समेत समूचे प्रदेश के विकास को लेकर निरंतर प्रयासरत हैं। शासकीय दायित्वों की व्यस्तताओं के बीच वे निरंतर जनसंवाद करते हैं। मुख्यमंत्री जुलाई के पहले दिन सहारनपुर पहुंचे और यहां स्कूल चलो अभियान के द्वितीय चरण का शुभारंभ किया। यही नहीं, सीएम ने यहां 613 करोड़ से अधिक की विकास योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास भी किया। मुख्यमंत्री पांच महीने में सहारनपुर पांचवीं बार पहुंचे और हर बार उन्होंने जनता से जुड़े संवेदनशील मुद्दों की समीक्षा की। समस्याओं का निराकरण किया और विकास की गंगा बहाने में योगदान दिया।  पांच महीने में पांच दौरे कर सीएम ने बताई सहारनपुर की अहमियत  पिछली सरकारों की उपेक्षा झेल रहे सहारनपुर को योगी आदित्यनाथ ने प्रगति पथ पर दौड़ाया। पिछली सरकार के मुखिया ने पांच वर्ष में सहारनपुर का एकाध बार ही दौरा किया, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पांच महीने में पांच बार सहारनपुर पहुंचकर यहां की अहमियत बताई। सीएम योगी ने मार्च, अप्रैल, मई, जून व जुलाई में सहारनपुर पहुंचकर यहां अनेक विकास कार्यों को गति दी। गति को प्रगति का आधार मानने वाले सीएम योगी ने सहारनपुर समेत सभी 75 जनपदों में समान रूप से विकास की गंगा बहाई और निरंतर दौरे भी किए। सहारनपुर को मिली स्पोर्ट्स कॉलेज की सौगात, पहली बार किसी कॉलेज में शुरू हुआ भारोत्तोलन  सहारनपुर में खिलाड़ियों को भी बड़ी सौगात मिली। योगी सरकार ने दो नए स्पोर्ट्स कॉलेजों को शुरू करने का फैसला लिया है। इनमें से एक सहारनपुर स्पोर्ट्स कॉलेज भी है। इसका शैक्षणिक सत्र 2026-27 से संचालन शुरू हो गया। 2011 से लंबित सहारनपुर स्पोट्र्स कॉलेज के निर्माण को योगी सरकार ने पूरा कराया। यहां खिलाड़ियों के लिए 80 सीट आरक्षित है। इस कॉलेज में एथलेटिक्स रनर (बालक) के लिए 8, एथलेटिक्स जंपर (बालक) के लिए 6, एथलेटिक्स थ्रोवर (बालक) 6, हॉकी खिलाड़ी (बालक) 21, हॉकी गोलकीपर (बालक) के लिए 4, जूडो (बालक) 10, बॉक्सिंग (बालक) 15 और भारोत्तोलन (बालक वर्ग) के लिए 10 सीटें तय की गई हैं। भारोत्तोलन अभी तक किसी भी स्पोर्ट्स कॉलेज में नहीं था। यह सहारनपुर स्पोर्ट्स कॉलेज से पहली बार शुरू हो रहा है।  बॉक्स मार्च से जुलाई तक मुख्यमंत्री का सहारनपुर दौरा 14 मार्चः शाकुम्भरी माता मंदिर व बाबा भूरादेव मंदिर पहुंचे मुख्यमंत्री, परिक्षेत्र में चल रही पर्यटन परियोजनाओं का भी किया निरीक्षण 14 अप्रैलः दिल्ली-बागपत-सहारनपुर-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के शुभारंभ अवसर पर सहारनपुर पहुंचे सीएम  7 मईः मुख्यमंत्री ने सहारनपुर के देवबंद में 2131 करोड़ रुपये की 325 परियोजना का लोकार्पण/ शिलान्यास किया। साथ ही 1600 से अधिक लाभार्थियों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी दिया। 1 जूनः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां शाकुम्भरी देवी सिद्धपीठ में दर्शन-पूजन किया और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक भी की। 1 जुलाईः स्कूल चलो अभियान का शुभारंभ व 613 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण/ शिलान्यास तथा विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र का वितरण किया।

शिक्षा गुणवत्ता सुधारने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के दिए निर्देश

रायपुर  शिक्षा मंत्री   गजेंद्र यादव ने आज  बुधवार को बस्तर कलेक्टोरेट के प्रेरणा सभाकक्ष में शिक्षा विभाग की संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक लेकर विभागीय योजनाओं एवं शैक्षणिक गतिविधियों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं के बेहतर एवं प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश देते हुए कहा कि बस्तर के समग्र विकास में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने अंदरूनी क्षेत्रों के स्कूलों को पुनर्जीवित करने, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने तथा विद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण विकसित करने पर विशेष जोर दिया।  उन्होंने प्राथमिक स्तर पर गणित, हिंदी और अंग्रेजी की मजबूत आधारशिला तैयार करने के लिए कैलेंडरवार, शालावार एवं विषयवार समय-सारणी के अनुसार पढ़ाई कराने तथा नियमित रिवीजन टेस्ट आयोजित करने के निर्देश दिए। बैठक में शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, संचालक  ऋतुराज रघुवंशी, कलेक्टर  आकाश छिकारा, जिला पंचायत सीईओ  प्रतीक जैन, संभागीय संयुक्त संचालक  एच.आर. सोम सहित सभी जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी, डीएमसी, बीईओ एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे। समीक्षा के दौरान आधार बेस ऐप के माध्यम से कार्यालयीन अधिकारियों-कर्मचारियों की उपस्थिति तथा वीएसके ऐप में शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति की जानकारी ली गई। ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर नियमानुसार कार्रवाई करने तथा नेटवर्क विहीन स्कूलों की सूची कलेक्टर के माध्यम से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। शिक्षा मंत्री ने अन्य विभागों में पदस्थ शिक्षा विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को मूल पदस्थापना पर वापस भेजने संबंधी निर्देशों के पालन की भी समीक्षा की।  यादव ने बसाहटवार प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति, नए विद्यालयों की आवश्यकता, बंद स्कूलों को पुनः प्रारंभ करने की कार्ययोजना, बोर्ड एवं वार्षिक परीक्षा परिणामों की समीक्षा करते हुए पोटा केबिनों में अंतरजिला विद्यार्थियों को प्रवेश देने के निर्देश दिए। उन्होंने वार्षिक परीक्षा में बेहतर परिणाम के लिए पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों के आधार पर विषयवार यूनिट टेस्ट एवं तिमाही परीक्षाएं आयोजित करने तथा कमजोर विद्यालयों के प्राचार्यों की बैठक लेकर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश जिला एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को दिए। बैठक में विद्यार्थियों के नामांकन, उपस्थिति, ड्रॉपआउट की स्थिति, शिक्षकों की उपलब्धता, रिक्त एवं युक्तियुक्तकरण किए गए पदों, स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों की कार्ययोजना एवं गैप एनालिसिस की प्रगति की भी समीक्षा की गई। छात्रवृत्ति, गणवेश, पाठ्यपुस्तक वितरण, सरस्वती सायकल योजना, मध्यान्ह एवं न्यौता भोजन, निर्माण कार्यों तथा शासन की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।  शिक्षा मंत्री  यादव  ने स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालयों को पीएम  स्कूलों की तर्ज पर विकसित करने, जर्जर विद्यालय भवनों को नियमानुसार ध्वस्त कराने, विद्यालयों की आवश्यक मरम्मत एवं छोटे कार्यों में उपलब्ध बजट का उपयोग करने तथा पाठ्यपुस्तकों का शत-प्रतिशत वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अवितरित पुस्तकों का संकुल एवं विद्यालय स्तर पर व्यवस्थित रिकॉर्ड संधारित करने पर भी जोर दिया। अधिकारियों ने बैठक में संभाग में संचालित शैक्षणिक गतिविधियों एवं योजनाओं की प्रगति से मंत्री को विस्तारपूर्वक अवगत कराया। बैठक से पूर्व शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कलेक्टोरेट परिसर में सरस्वती सायकल योजना के अंतर्गत पात्र छात्राओं को निःशुल्क सायकल एवं उपहार वितरित किए तथा उन्हें मेहनत, लगन और नियमित अध्ययन के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

महिला सुरक्षा, सामुदायिक पुलिसिंग, साइबर जागरूकता, नशा मुक्ति तथा बालिका सुरक्षा के नवाचारों पर हुई विस्तृत चर्चा

भोपाल  महिला सुरक्षा एवं सशक्तिकरण को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा किए जा रहे नवाचारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिल रही है। इसी क्रम में आज पुलिस मुख्यालय, भोपाल में पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा से यूएन विमेन इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटिव सु शोको इशिकावा ने सौजन्‍य भेंट की। इस अवसर पर महिला सुरक्षा, जेंडर समानता, सामुदायिक पुलिसिंग, साइबर अपराधों की रोकथाम, नशा मुक्ति, बालिकाओं की सुरक्षा तथा पुलिस-समुदाय सहभागिता को सुदृढ़ बनाने जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर यूएन विमन इंडिया की डिप्टी कंट्री रिप्रेजेंटेटिव सु कांता सिंह और स्टेट रिप्रेजेंटेटिव सु जोयात्री रे, पीएसओ टू डीजीपी डॉ विनीत कपूर तथा एसओ टू डीजीपी  मलय जैन उपस्थित थे। पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा महिला एवं बालिका सुरक्षा के क्षेत्र में संचालित विभिन्न अभियानों, नवाचारों एवं जन-जागरूकता कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस अपराध नियंत्रण के साथ-साथ समाज में विश्वास, सहभागिता एवं सुरक्षा का वातावरण विकसित करने के उद्देश्य से नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग को निरंतर सशक्त बना रही है। उन्‍होंने कहा कि महिला, बालिकाओं एवं कमजोर वर्गों की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा बहुआयामी अभियान संचालित किए जा रहे हैं। ऑपरेशन मुस्कान एवं विशेष ऑपरेशन मुस्‍कान के माध्यम से गुमशुदा बच्चों एवं बालिकाओं का पता लगाकर उन्हें सुरक्षित उनके परिजनों से मिलाने का कार्य निरंतर किया जा रहा है। वहीं 'सृजन' अभियान के अंतर्गत बालक-बालिकाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण, जागरूकता एवं सशक्तिकरण से जोड़कर उन्हें आत्मविश्वासी बनाने के साथ-साथ बाल विवाह, बाल हिंसा, मानव तस्करी तथा महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों की रोकथाम की दिशा में प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। इन पहलों के माध्यम से मध्यप्रदेश पुलिस सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक संरक्षण एवं सशक्तिकरण का भी प्रभावी मॉडल विकसित कर रही है। बैठक में महिलाओं के लिए सामुदायिक पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी विशेष चर्चा हुई। इस दौरान महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, शिकायतों के त्वरित एवं संवेदनशील निराकरण, सुरक्षित सार्वजनिक वातावरण के निर्माण, पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ाने तथा महिला सहभागिता आधारित सामुदायिक पहलों को और सुदृढ़ करने के विभिन्न आयामों पर विचार साझा किए गए। पुलिस महानिदेशक ने बताया कि मध्यप्रदेश पुलिस महिला एवं बालिका सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संवेदनशील, उत्तरदायी एवं तकनीक आधारित पुलिसिंग को लगातार मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं एवं नागरिक संगठनों के सहयोग से महिला सुरक्षा एवं लैंगिक समानता के क्षेत्र में और अधिक प्रभावी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। बैठक के दौरान पुलिस महानिदेशक ने प्रदेशव्यापी "सेफ क्लिक 2.0" साइबर जागरूकता अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि डिजिटल युग में महिलाओं, बालिकाओं, विद्यार्थियों तथा आम नागरिकों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने के लिए व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। विद्यालयों, महाविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वयं सहायता समूहों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के माध्यम से साइबर सुरक्षा संबंधी व्यवहारिक जानकारी प्रदान की जा रही है, जिससे नागरिक डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित उपयोग कर सकें। उन्होंने मध्यप्रदेश पुलिस के "नशे से दूरी है जरूरी" अभियान की भी जानकारी साझा की। इस अभियान के माध्यम से युवाओं, विद्यार्थियों एवं समुदाय को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करते हुए समाज को नशामुक्त बनाने की दिशा में जनभागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। अभियान में पुलिस के साथ शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों एवं स्थानीय समुदाय की सक्रिय सहभागिता को प्रोत्साहित किया जा रहा है। यूएन विमेन इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटिव सु शोको इशिकावा ने मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा महिला सुरक्षा, साइबर जागरूकता, सामुदायिक सहभागिता तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़े अभियानों की सराहना की। उन्होंने शक्ति कैफे जैसी पुनर्वास एवं आत्मनिर्भरता आधारित पहल, थानों में महिलाओं के लिए विकसित संवेदनशील एवं सहयोगात्मक वातावरण तथा जेंडर-संवेदनशील पुलिसिंग के लिए अपनाए गए मध्यप्रदेश पुलिस मॉडल की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों में जेंडर-संवेदनशील पुलिसिंग को प्रशिक्षण का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना आवश्यक है, जिससे नागरिक-केंद्रित और अधिक संवेदनशील पुलिस व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा सके।  

अतिक्रमण हटाने से प्रभावित 65 परिवारों का नया रायपुर में होगा सम्मानजनक पुनर्वास

रायपुर  नया रायपुर के ग्राम नकटी की शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बीच शासन -प्रशासन ने अतिक्रमण प्रभावित 65 परिवारों को बेघर छोड़ने के बजाय उन्हें नया रायपुर अटल नगर के सेक्टर-30 स्थित सर्वसुविधायुक्त ईडब्ल्यूएस आवासों में बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रभावित परिवारों को केवल पक्का मकान ही नहीं, बल्कि बिजली, पेयजल, सड़क, सीवर, सामुदायिक भवन, उद्यान और अन्य शहरी सुविधाओं से युक्त आवासीय परिसर उपलब्ध कराया जा रहा है। पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित ढंग से पूरी हो, इसके लिए आठ सदस्यीय समिति भी गठित कर दी गई है। ग्राम नकटी की शासकीय भूमि पर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा  लगभग 38 एकड़ भूमि में से करीब 12 एकड़ भूमि विशेष योजना के लिए उपयोग होगी, जबकि शेष 26 एकड़ भूमि पर मंडल की स्ववित्तीय सामान्य आवास योजना विकसित की जाएगी। भूमि पर अवैध रूप से निवासरत परिवारों के पुनर्वास के लिए जिला प्रशासन ने 65 पात्र परिवारों की सूची गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को सौंपी है। इस सूची में शामिल परिवारों को 29 जून 2026 को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सेक्टर-30 में निर्मित रिक्त ईडब्ल्यूएस आवासों का अस्थायी आवंटन कर दिया गया। पुनर्वास को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रखते हुए सरकार ने आवासों को रहने योग्य बनाने का काम भी तेज़ी से शुरू किया। आवासों में ट्यूबलाइट, पंखे और विद्युत व्यवस्था पूरी कर दी गई है । सरकार ने पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए मुख्यालय के अपर आयुक्त की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय समिति गठित की है। समिति में उपयुक्त, कार्यपालन अभियंता, संपदा अधिकारी और सहायक अभियंताओं सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि प्रत्येक पात्र परिवार को निर्धारित आवास मिले और पुनर्वास पूरी तरह पारदर्शी एवं बिना किसी अव्यवस्था के संपन्न हो। सेक्टर-30 में कुल 1376 ईडब्ल्यूएस (जी+3) आवास निर्मित हैं। इनमें चतुर्थ तल पर उपलब्ध 109 रिक्त आवास पुनर्वास के लिए चिन्हित किए गए हैं। 31.45 वर्गमीटर (338.40 वर्गफीट) क्षेत्रफल वाले इन आवासों के परिसर में पक्की कंक्रीट सड़कें, वॉकिंग ट्रैक, सार्वजनिक उद्यान, सामुदायिक भवन, यूटिलिटी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, सीवर नेटवर्क और नियमित जलापूर्ति जैसी सभी आवश्यक शहरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता केवल शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों का सम्मानजनक और स्थायी पुनर्वास सुनिश्चित करना है। इसी सोच के साथ आवासों के आवंटन से लेकर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने तक हर चरण की निगरानी की जा रही है।

कभी बंद पड़े स्कूलों में फिर लौटी रौनक, बदलते बस्तर की नई तस्वीर

रायपुर  मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर में विकास और सुशासन का नया दौर शुरू हुआ है। इसका प्रेरक उदाहरण बीजापुर जिले का पीडिया क्षेत्र है, जहां 21 वर्षों बाद बंद पड़े 11 स्कूलों का दोबारा संचालन शुरू हुआ है। अब 11 गांवों के 539 बच्चों को अपने ही गांव में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है। यह बदलाव केवल स्कूल खुलने तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र में विश्वास, विकास और नई उम्मीद की वापसी का प्रतीक है। प्रवेशोत्सव में बच्चों का हुआ आत्मीय स्वागत पीडिया में आयोजित प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जानकी कोरसा ने मां सरस्वती की पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर शिक्षादूतों को रजिस्टर और शिक्षण सामग्री प्रदान की गई। वहीं बच्चों को स्कूल बैग, कॉपी, पेन और स्लेट वितरित कर उनका विद्यालय में प्रवेश कराया गया। बच्चों का तिलक लगाकर, मिठाई खिलाकर और शुभकामनाओं के साथ स्वागत किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। 11 गांवों में फिर शुरू हुई पढ़ाई माओवादी हिंसा के कारण वर्षों पहले बंद हुए पीडिया, पेदापाल, छोटेगोटोडी, कुएम, मदपाल, अंडरी, इडेनार, डोंडीतुमनार, मिरगानघोटूल, गमपुर और तमोड़ी गांवों के स्कूल अब फिर से संचालित होने लगे हैं। इससे बच्चों को अब पढ़ाई के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में नहीं जाना पड़ेगा। इस वर्ष 37 स्कूलों का हुआ पुनः संचालन जिला शिक्षा अधिकारीराजेश पांडे ने बताया कि जिला प्रशासन के विशेष अभियान के तहत इस वर्ष अब तक 20 प्राथमिक और 17 उच्च प्राथमिक विद्यालय, कुल 37 बंद स्कूलों को फिर से शुरू किया जा चुका है। इन स्कूलों में भवन, पेयजल, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं। हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना है लक्ष्य कलेक्टरविश्वदीप ने कहा कि जिले के प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में अब शांति और सामान्य स्थिति स्थापित हुई है, वहां बंद स्कूलों को चरणबद्ध तरीके से दोबारा शुरू किया जा रहा है, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। बदलते बस्तर की नई पहचान पीडिया में 21 वर्षों बाद स्कूलों का फिर से खुलना बदलते बस्तर की नई तस्वीर प्रस्तुत करता है। जिन गांवों में कभी भय का माहौल था, वहां आज बच्चों की मुस्कान, पाठशालाओं की चहल-पहल और शिक्षा का उजाला दिखाई दे रहा है। यह सफलता बताती है कि सरकार के सतत प्रयासों से अब बस्तर शिक्षा, विकास और उज्ज्वल भविष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना: एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग से भारत की ई-गवर्नेंस बनेगी अधिक सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित

 जयपुर  29वीं राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस कॉन्फ्रेंस के अंतर्गत बुधवार को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी) में 'डीप टेक एंड क्वांटम ड्रिवन डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन' विषय पर प्लेनरी सत्र आयोजित किया गया। सत्र में विशेषज्ञों ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्वांटम कंप्यूटिंग और अन्य उभरती तकनीकें भारत की डिजिटल गवर्नेंस व्यवस्था को अधिक सक्षम, सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। साथ ही उन्होंने तकनीक को अपनाने में आवश्यकता-आधारित दृष्टिकोण, कुशल मानव संसाधन, डेटा संप्रभुता और सतत विकास को समान महत्व देने पर बल दिया। सत्र का संचालन नैसकॉम की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट सुश्री संगीता गुप्ता ने किया। उन्होंने कहा कि डीप टेक भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था और सुशासन की आधारशिला बनने जा रही है तथा सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच समन्वित प्रयासों से इसका अधिकतम लाभ नागरिकों तक पहुंचाया जा सकता है। काइंड्रिल इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट श्री परमिंदर काकरिया ने कहा कि किसी भी नई तकनीक को अपनाने से पहले उसकी वास्तविक उपयोगिता और समस्या समाधान की क्षमता का आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल तकनीक तैयार होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कार्यबल (वर्कफोर्स) की तैयारी, निरंतर कौशल विकास और विभागों के बीच समन्वित कार्य संस्कृति भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंने एआई आधारित क्षमता निर्माण तथा सरकारी अधिकारियों के प्रशिक्षण पर विशेष बल दिया। शून्य लैब्स की संस्थापक सुश्री ऋतु मेहरोत्रा ने भारतीय भाषाओं और स्थानीय बोलियों के अनुरूप वॉयस आधारित एआई समाधानों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डिजिटल सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए बहुभाषी, सुरक्षित और डेटा संप्रभुता आधारित एआई प्लेटफॉर्म विकसित करना समय की आवश्यकता है, जिससे सीमित इंटरनेट वाले क्षेत्रों में भी डिजिटल सेवाएं सुचारु रूप से उपलब्ध कराई जा सकें। पीडब्ल्यूसी के पार्टनर श्री संतोष मिश्रा ने कहा कि राज्यों को केवल नई तकनीकों की प्रतिस्पर्धा में शामिल होने के बजाय अपनी वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकों का चयन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी डिजिटल परियोजना को शुरू करने के बाद उसे संस्थागत समर्थन के साथ उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि सार्वजनिक निवेश का अधिकतम लाभ नागरिकों को मिल सके। लॉयड्स टेक्नोलॉजी सेंटर इंडिया के डेटा एवं एआई आर्किटेक्चर लीड श्री रवि कप्पागंटु ने कहा कि वित्तीय सेवाओं में एआई केवल प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण नहीं कर रहा, बल्कि विश्वास आधारित डिजिटल इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक सक्षम, सेवाएं अधिक पारदर्शी तथा नागरिक अनुभव अधिक सहज बन रहा है। आईबीएम क्वांटम इंडिया के कंट्री मैनेजर एवं आईआईटी मद्रास के एडजंक्ट प्रोफेसर डॉ. धिनाकरन विनायगमूर्ति ने कहा कि क्वांटम कंप्यूटिंग और एआई आने वाले वर्षों में शासन, उद्योग और अनुसंधान के स्वरूप में व्यापक परिवर्तन लाएंगे। उन्होंने भविष्य की तकनीकों के अनुरूप अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता बताई। सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने एआई अवसंरचना, डेटा सेंटर, ऊर्जा एवं जल संसाधनों के संतुलित उपयोग, ग्रीन टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा और जिम्मेदार एआई के विभिन्न आयामों पर भी विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति और पर्यावरणीय स्थिरता को साथ लेकर चलना ही विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने का प्रभावी मार्ग होगा। यह भी रेखांकित किया गया कि डीप टेक का उपयोग केवल डिजिटल सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, शिक्षा और सार्वजनिक सेवा वितरण जैसे क्षेत्रों में भी इसके व्यापक अवसर मौजूद हैं।  

केंद्र और प्रदेश सरकार के बीच एमओयू, ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचेगी अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधा

लखनऊ  योगी सरकार ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, सुलभ और तकनीक आधारित बनाने क दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेशवासियों को अत्याधुनिक एवं निःशुल्क डायग्नोस्टिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा उत्तर प्रदेश सरकार के बीच प्रधानमंत्री निधि के तहत एआई-सक्षम पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन, 1.5 टेस्ला एमआरआई एवं डिजिटल मैमोग्राफी टोमोसिंथेसिस (डीबीटी) मशीनों की आपूर्ति, स्थापना एवं संचालन के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता जून-26 से मार्च-36 तक प्रभावी रहेगा। इससे प्रदेश के नागरिकों, विशेषकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके निकट ही आधुनिक रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग सेवाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान संभव होगी, उपचार में होने वाली देरी कम होगी तथा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा। एआई आधारित आधुनिक इमेजिंग तकनीक से कैंसर और हृदय रोग की सटीक हो सकेगी पहचान  अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने बताया कि यह पहल उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित आधुनिक इमेजिंग तकनीक के उपयोग से कैंसर, क्षय रोग (टीबी), हृदय रोग सहित अन्य गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) का प्रारंभिक चरण में सटीक निदान संभव हो सकेगा। समय पर बीमारी की पहचान होने से मरीजों का उपचार अधिक प्रभावी होगा और मृत्यु दर में कमी लाने में भी सहायता मिलेगी। एमओयू का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएं पहुंचाना है। विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहां अब तक उन्नत जांच सुविधाएं सीमित रही हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में क्षेत्रीय असमानता भी कम होगी और लोगों को बड़े शहरों के अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। एमओयू के अनुसार भारत सरकार मशीनों की केंद्रीकृत खरीद, आपूर्ति, स्थापना, कमीशनिंग तथा प्रारंभिक अनुरक्षण की जिम्मेदारी निभाएगी। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक आधारभूत संरचना विकसित करेगी, साइट की तैयारी सुनिश्चित करेगी, सभी आवश्यक नियामकीय अनुमतियां प्राप्त करेगी तथा प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता के साथ उपकरणों के प्रभावी संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगी। इस समन्वित व्यवस्था से परियोजना का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। मशीनों की कार्यप्रणाली की निगरानी के लिए विकसित किया जाएगा रीयल टाइम आईटी पोर्टल  एमओयू के अनुसार, सभी मशीनों की कार्यप्रणाली की निगरानी के लिए एक अत्याधुनिक रीयल टाइम आईटी पोर्टल विकसित किया जाएगा। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रत्येक मशीन की कार्यशीलता, उपयोग की स्थिति, उपलब्ध कराई गई सेवाओं, जांच कराने वाले लाभार्थियों की संख्या तथा उपकरणों के प्रदर्शन की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, उपकरणों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा और आवश्यकतानुसार त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई भी संभव हो सकेगी। उपकरणों के दीर्घकालिक संचालन को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री निधि के तहत उपलब्ध कराई जाने वाली सभी मशीनों पर एक वर्ष की वारंटी के बाद अगले नौ वर्षों तक व्यापक वार्षिक अनुरक्षण की व्यवस्था भी की गई है। इससे मशीनों के रखरखाव में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी तथा मरीजों को लगातार गुणवत्तापूर्ण जांच सेवाएं उपलब्ध होती रहेंगी।