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यात्रियों के लिए खुशखबरी, खंडवा होकर चलेगी एक और जयपुर-हैदराबाद वीकली ट्रेन

खंडवा/भोपाल. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जयपुर-हैदराबाद के बीच रेल यात्रियों की मांग को देखते हुए स्थाई साप्ताहिक ट्रेन की सुविधा दी है। इस ट्रेन के स्थाई शुरू होने से जयपुर हैदराबाद के बीच यात्रा करने की आम जनों को सुविधा मिलेगी। सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल के प्रयासों से खंडवा को अनेक ट्रेनों के स्टापेज मिल रहे हैं। मध्य रेल समिति सदस्य मनोज सोनी ने बताया कि खंडवा स्टेशन से देशभर के शहरों से सीधी रेल कनेक्टिविटी सुलभ मिल सके इसको लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। रेलवे द्वारा समय समय पर त्योहारों और पिक सीजन। में स्पेशल ट्रेनें चलाई जाती है। जिसे सीजन, त्यौहार खत्म होने पर बंद कर दिया जाता है। इसके अंतर्गत स्पेशल किराया ट्रेन 07019/20 जयपुर हैदराबाद साप्ताहिक चलाई जा रही थी। इसमें लगातार यात्रियों का रिस्पॉन्स मिल रहा था। अब रेलवे बोर्ड में इसे स्थाई साप्ताहिक चलाने का परिपत्र जारी किया है। 24 जुलाई 2026 से ट्रेन संख्या 17089 प्रति शुक्रवार हैदराबाद से रवाना होकर अगले दिन खंडवा प्रति शनिवार सुबह 9.25 बजे आगमन कर जयपुर के लिए रवाना होगी। वापसी में 26 जुलाई 2026 से ट्रेन संख्या 17090 प्रति रविवार जयपुर से निकलकर खंडवा प्रति सोमवार सुबह 11.30 बजे आकर हैदराबाद जाएगी ।इसके स्थाई परिचालन से रेल यात्रियों को स्पेशल का अतिरिक्त किराया नहीं चुकाना पड़ेगा। यात्रियों को नार्मल किराया देना होगा साथ ही स्पेशल ट्रेने अनेकों बार विलंब से चलती है। अब यह स्थाई होने से समय पर भी चलेगी। सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया है। ट्रेन के स्टापेज हैदराबाद, सिकंदराबाद,कामारेड्डी,निजामाबाद, मूदखेड़, नांदेड़, पूर्णा जंक्शन, बसमत, हिंगोली, वाशिम, अकोला जंक्शन, मलकापुर, खंडवा जंक्शन, इटारसी, भोपाल, उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, नीमच, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, बिजयनगर, अजमेर जंक्शन, मादार जंक्शन, किशनगढ़, फुलेरा और जयपुर। सप्ताह में चार दिन ट्रेन की सुविधा: 12719/20 जयपुर हैदराबाद द्वि साप्ताहिक 17019/20 हिसार जयपुर हैदराबाद साप्ताहिक 17089/90 जयपुर हैदराबाद साप्ताहिक (24 जुलाई से शुरू)

यूरेनियम और न्यूक्लियर प्रोग्राम बना बड़ा मुद्दा, ईरान-यूएस पीस डील पर बातचीत जारी

नई दिल्ली   ईरान और अमेरिका के बीच महीनों से जारी तनाव के बीच अब संभावित पीस डील की रूपरेखा सामने आने लगी है. ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स न्यूज ने दावा किया है कि वॉशिंगटन ने तेहरान के सामने पांच बड़ी शर्तें रखी हैं, जिन पर समझौते की कोशिश चल रही है. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका-ईरान में शांति समझौते पर बातचीत लगभग तय हो गई है और इसका जल्द ही ऐलान किया जाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते के ड्राफ्ट में सबसे बड़ा मुद्दा ईरान के संवर्धित यूरेनियम का है. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने 400 किलोग्राम हाईली एनरिच्ड यूरेनियम को अमेरिका के हवाले करे. यही यूरेनियम लंबे समय से पश्चिमी देशों की चिंता का कारण बना हुआ है, क्योंकि इसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने की दिशा में अहम माना जाता है. दूसरी बड़ी शर्त ईरान के न्यूक्लियर ढांचे को लेकर है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि ईरान सिर्फ एक न्यूक्लियर फैसिलिटी को चालू रखे, जबकि बाकी गतिविधियों पर रोक लगे. इसके अलावा अमेरिका ने यह भी साफ कर दिया है कि वह युद्ध में हुए नुकसान की कोई भरपाई या मुआवजा नहीं देगा. क्या ईरान को मिलेगा फ्रीज फंड? फार्स न्यूज की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका ने फिलहाल ईरान की विदेशों में जमा फ्रीज संपत्तियों को रिलीज करने से इनकार कर दिया है. वहीं अलग-अलग मोर्चों पर सीजफायर को भी बातचीत की प्रगति से जोड़ा गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते में एक अहम सुरक्षा क्लॉज भी शामिल है. इसमें कहा गया है कि अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान या उसके सहयोगी गुटों पर हमला नहीं करेंगे. इसके बदले ईरान भी अमेरिका और उसके सहयोगियों पर कोई प्रीएम्प्टिव यानी पहले हमला नहीं करेगा. हालांकि इन दावों पर अभी तक न तो अमेरिका की तरफ से कोई आधिकारिक बयान आया है और न ही ईरान ने खुलकर पुष्टि की है. जंग खत्म करने के लिए ईरान की भी रखी पांच शर्तें ईरान ने भी इससे पहले दूसरे दौर की बातचीत के लिए अपनी पांच शर्तें रखी थीं. इनमें सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करना, खासकर लेबनान में संघर्ष रोकना, आर्थिक प्रतिबंध हटाना, फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियां वापस करना, युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा और होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की संप्रभुता को मान्यता देना शामिल था. अमेरिका-ईरान जंग की टाइमलाइन ईरान और अमेरिका के बीच 8 अप्रैल को सीजफायर हुआ था. इससे पहले 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई शहरों और सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे, जिसके बाद करीब 40 दिन तक संघर्ष चला. बाद में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच इस्लामाबाद में बातचीत हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका. इसके बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों पक्षों के बीच कई ड्राफ्ट प्रस्ताव एक्सचेंज हुए.

नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, योगी सरकार के प्रयास ला रहे रंग

लखनऊ.  सड़क सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेहद संजीदा हैं। हादसों को न्यूनतम करने की दिशा में वे समय-समय पर संबंधित विभागों की समीक्षा, सकारात्मक प्रयास, जागरूकता आदि पर जोर देते हैं। लिहाजा, सड़क सुरक्षा को लेकर योगी सरकार के प्रयास रंग ला रहे हैं। ई-डीएआर पोर्टल के मुताबिक, वर्ष 2025 की जनवरी से अप्रैल की समयावधि की अपेक्षा जनवरी 2026 से अप्रैल 2026 के बीच दुर्घटनाओं और इससे होने वाली मृत्यु में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। इस अवधि में पिछले वर्ष की तुलना में 3669 (21 प्रतिशत) दुर्घटनाएं कम हुई हैं, जबकि मृतकों की संख्या में भी 2212 (22 प्रतिशत) की कमी दर्शाई गई है। सीएम के निर्देश के उपरांत सड़क सुरक्षा जागरूकता के लिए लगभग 2000 स्थानों पर होर्डिंग लगाई गई और प्रचार-प्रसार के जरिए परिवहन विभाग आमजन को निरंतर जागरूक भी कर रहा है।   परिवहन निगम के 18 हजार से अधिक चालकों का हुआ चेकअप  सीएम योगी के निर्देश पर परिवहन निगम के चालकों की निरंतर स्वास्थ्य/नेत्र जांच की जा रही है। हर छमाही चेकअप किया जा रहा है। अप्रैल 2026 तक 18,975 वाहन चालकों का स्वास्थ्य परीक्षा किया जा चुका है। शेष 2560 चालकों की जांच भी चल रही है। सड़क सुरक्षा के दृष्टिगत यूपीएसआरटीसी की बसों पर रेट्रो रिफ्लेक्टर टेप लगाया जा चुका है। ब्रेथ एनालाइजर परीक्षण अनिवार्य किया गया है। वहीं 300 किमी. से अधिक यात्रा वाली बसों में दो चालक की ड्यूटी भी अनिवार्य की गई है। सड़क सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग/निगम काफी संजीदगी से प्रयासों को धरातल पर उतार रहा है।  जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट (जेडएफडी) योजना भी हो रही कारगर  सड़क दुर्घटनाओं में जनहानि को न्यूतनम करने के उद्देश्य से केंद्रीय सड़क, परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के 20 जनपदों के 242 क्रिटिकल थानों को जीरो फैटेलिटी योजना के लिए चिह्नित किया गया था। यातायात निदेशालय के मुताबिक इस योजना के क्रियान्वयन के उपरांत 4 महीने में 566 व्यक्तियों की जान बचाई जा चुकी है। उत्तर प्रदेश के सभी 75 जनपदों के 487 क्रिटिकल पुलिस थानों पर यह योजना लागू की गई है। इन 487 क्रिटिकल थानों में 573 क्रिटिकल कॉरिडोर टीम गठित की गई है। हर टीम में एक उपनिरीक्षक व 4 मुख्य आरक्षी/ आरक्षी (2865 पुलिसकर्मी) नियुक्त हैं, जो जीरो फैटेलिटी को सुनिश्चित करने के लिए कार्य कर रहे हैं।  होल्डिंग एरिया को भी किया गया चिह्नित  पहली जनवरी 2026 से 15 मई 2026 के बीच सभी 18 मंडलों मे होल्डिंग एरिया भी चिह्नित व नोटिफाइड किए गए। मंडलों में 656 होल्डिंग एरिया चिह्नित किए गए, इसमें से 630 को नोटिफाइड भी किया गया। आगरा मंडल में सर्वाधिक 121, बरेली में 103, मुरादाबाद में 75, आजमगढ़ में 62 होल्डिंग एरिया चिह्नित/नोटिफाइड किए गए हैं।  मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर परिवहन विभाग सड़क सुरक्षा को लेकर आम नागरिकों को निरंतर जागरूक कर रहा है। सड़क दुर्घटनाओं को न्यूनतम करने की दिशा में संबंधित विभागों के साथ ठोस कदम भी उठाए जा रहे हैं। आम नागरिकों से भी निवेदन है कि हेलमेट, सीट बेल्ट व यातायात के नियमों का पालन करें। सड़क सुरक्षा, स्कूली वाहनों के फिटनेस आदि को लेकर जल्द ही फिर से अभियान प्रारंभ किया जाएगा।  आशुतोष निरंजन, परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश

हथौड़े-छेनी से तराशी गई ‘मशरूम रॉक’ बनी गया जिले की नई पहचान

गयाजी  बिहार के गया जिले में दो मजदूरों द्वारा तराशी गई मशरूम के आकार की एक शिलाशि मूर्ति इस क्षेत्र से गुजरने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है। यह संरचना जेठियां-राजगीर मार्ग पर अराई गांव के पास स्थित है, जो गया जिला मुख्यालय से लगभग 60-65 किलोमीटर दूर है। चट्टान के विशिष्ट आकार के कारण स्थानीय लोग इसे मशरूम पहाड़ कहते हैं। मशरूम रॉक का जलवा इस मूर्ति का निर्माण कछारा गांव के निवासी शौकी राजवंशी और विनोद मांझी ने किया था, जो पहले स्थानीय ठेकेदारों के अधीन पहाड़ी क्षेत्र में पत्थर तराशने का काम करते थे। स्थानीय निवासियों के अनुसार, दोनों व्यक्तियों ने हथौड़ा, छेनी और लोहे की छड़ों जैसे पारंपरिक औजारों का उपयोग करके एक विशाल चट्टान को आकार देने में कई वर्ष बिताए। यह कार्य आधुनिक मशीनों के उपयोग के बिना किया गया था। जिस चट्टान को मूल रूप से उन्हें पत्थर तोड़ने के काम के लिए सौंपा गया था, उसे उसके आकार और मजबूती के कारण काटना मुश्किल माना जाता था। गांव को मिली पहचान स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस मूर्ति ने कछारा गांव को पहचान दिलाई है, जो पहले इस क्षेत्र के बाहर काफी हद तक अज्ञात था। इस मार्ग से गुजरने वाले यात्री अक्सर इस संरचना को देखने के लिए रुकते हैं, और स्थानीय लोगों का मानना है कि यह स्थल धीरे-धीरे एक छोटे पर्यटक आकर्षण के रूप में उभरा है। पत्थर तराशने की विरासत इस कहानी की तुलना दशरथ मांझी की विरासत से भी की गई है, जिन्हें लोकप्रिय रूप से "पहाड़ का आदमी" के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने दो दशकों से अधिक समय तक हाथ के औजारों का उपयोग करके गया जिले की एक पहाड़ी को काटकर रास्ता बनाया था। हालांकि मशरूम के आकार की यह मूर्ति अलग-अलग परिस्थितियों में बनाई गई थी, लेकिन स्थानीय निवासी इसे इस क्षेत्र की दृढ़ता और हस्तशिल्प का एक और उदाहरण मानते हैं।

ट्रंप सरकार का बड़ा फैसला: अब अमेरिका में रहकर नहीं मिलेगा ग्रीन कार्ड

नई दिल्ली आज के समय में ज्यादातर लोग भारत छोड़ विदेश का रुख कर रहे हैं। इनमें से ज्यादातर लोग अमेरिका जा रहे हैं या जाना चाहते हैं। लेकिन अब अमेरिका की ट्रंप सरकार (Trump Government) ने ग्रीन कार्ड को लेकर नई नीति की घोषणा की है। पहले लोग अमेरिका में अस्थाई वीजा पर रहते हुए ही ग्रीन कार्ड मिलने तक वहीं रुक सकते थे, लेकिन अब ऐसा करना नहीं होगा। ग्रीन कार्ड के लिए छोड़ना होगा अमेरिका अब तक लोग अमेरिका में रहते हुए ही “एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस” प्रक्रिया के तहत ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते थे लेकिन अब से ये मुमकिन नहीं होगा। यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS ) ने जानकारी दी कि जो लोग अपने स्टेटस में बदलाव चाहते हैं, उन्हें पहले अपने गृह देश वापिस लौटना होगा फिर अमेरिकी दूतावास या कॉन्सुलर प्रोसेसिंग के जरिए ही आवेदन करना होगा। ये प्रक्रिया पहले से अधिक जटिल हो गई है। 12 लाख भारतीयों की बढ़ी मुश्किलें मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका में इमिग्रेशन एडवोकेट अजय भुटोरिया ने PTI को बताया कि नई ग्रीन कार्ड नीति भारतीयों के लिए झटका है। उन्होंने कहा, कि "कानून का पालन करने वाले 12 लाख से अधिक भारतीय-अमेरिकी अब मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। अमेरिका के नए नियम के तहत ग्रीन कार्ड आवेदकों को अमेरिका छोड़कर इमिग्रेंट वीजा पर दोबारा एंट्री करना जरूरी हो गया है।" उन्होंने कहा, "पिछले दो सालों में पढ़ाई के लिए अमेरिका आने वाले छात्रों की संख्या में 35 से 40 फीसदी की कमी देखी गई है। पिछले दिसंबर से जो लोग वीजा स्टैंपिंग के लिए भारत गए वे अभी भी अटके हुए हैं। उन्हें जो डेट मिली है वो अगस्त, अक्टूबर तक की मिली है।" क्या होता है ग्रीन कार्ड? ग्रीन कार्ड को आधिकारिक तौर पर स्थायी निवासी कार्ड (Permanent Resident Card) कहा जाता है। जो किसी विदेशी नागरिक को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने का अधिकार देता है। ग्रीन कार्ड धारक अमेरिका में कहीं भी रह सकता है। ये कार्ड लोगों को ज्यादातर कंपनियों में नौकरी करने, पढ़ाई करने और नियमों के तहत अमेरिका से बाहर आने-जाने का अधिकार देता है। इस कार्ड के मिलने के बाद वह व्यक्ति अमेरिकी नागरिकता के लिए भी अप्लाई कर सकता है।  

हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला! 40% दिव्यांगजन अब रोडवेज में कर सकेंगे फ्री सफर

नूंह. प्रदेश परिवहन विभाग की तरफ हरियाणा रोडवेज की बसों में 40 प्रतिशत से ऊपर दिव्यांग अब निशुल्क सफर कर सकेंगे। परिवहन विभाग की तरफ से जारी किए गए आदेश जारी कर दिए गए हैं। पहले केवल 100 प्रतिशत दिव्यांग के लिए यह सुविधा थी, लेकिन अब में 40 से लेकर 99 प्रतशित के दिव्यांगों को भी योजना का लाभ दिया गया। शुरू की गई निशुल्क बस सफर की इस योजनाओं से हजारों की की संख्या में दिवयांगों को लाभ होगा। सरकार की तरफ से जारी की गई योजना का दिव्यांगों ने खुशी जाहिर की है। सरकार की तरफ से आए आदेशों की जिले के परिवहन विभाग के महाप्रबंधक प्रदीप अहलावत ने भी पृष्टि की है। सुविधा केवल हरियाणा के निवासियों के लिए ही मान्य बता दें कि प्रदेश सरकार की तरफ से 25 अगस्त 2008 को 100 प्रतिशत दिव्यांग के लिए परिवहन विभाग की बसों में निशुल्क यात्रा का प्रविधान किया था। यह योजना तभी से चली आ रही है। योजना के तहत 100 प्रतिशत दिव्यांग के साथ एक व्यक्ति भी उसके साथ निशुल्क सफर कर सकता है, लेकिन अब सरकार ने पूर्व की इस योजना में छूट दी है। हरियाणा सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव की तरफ से जारी किए गए आदेशों में हरियाणा रोडवेज की साधारण बसों में 40 से प्रतिशत से ज्यादा दिवयांग को निशुल्क परिवहन सुविधा की बात कही गई है। जारी आदेशों में कहा गया है कि यह सुविधा केवल हरियाणा राज्य सीमा के भीतर ही हरियाणा के निवासियों के लिए ही मान्य होगी। निशुल्क योजना का लाभ लेने के लिए दिव्यांग व्यक्ति को यूडीआई ( यूनिक डिसबिलिटी आइडेंटिफिकेशन) कार्ड प्राप्त करना होगा। जो जरूरत पड़ने पर परिचालक व चेंकिग टीम को दिखाना होगा। विभाग द्वारा शुरू की गई इस योजना को दिव्यांगों ने खुशी जाहिर की है। दिव्यांग शोकिन, यूनूस, जमशेद ने कहा कि दिव्यांग कई बार निशुल्क बस सफर की मांग कर चुकें हैं। लेकिन अब जाकर यह फैसला हुआ है। यह स्वागत योग्य है।

चुनावी माहौल के बीच अमृतसर में बड़ी वारदात, ASI को गोलियों से भूना

अमृतसर. अमृतसर ग्रामीण के मजीठा विधानसभा क्षेत्र में नगर परिषद चुनाव से ठीक पहले एक बड़ी और दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। यहां पंजाब पुलिस में तैनात ASI जोगा सिंह की अज्ञात हमलावरों ने गोलियां मारकर हत्या कर दी। इस घटना ने न सिर्फ पुलिस विभाग को हिलाकर रख दिया है बल्कि चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक ASI जोगा सिंह गांव घनीये के रहने वाले थे और अमृतसर पुलिस में सेवाएं निभा रहे थे। जानकारी के मुताबिक वह रोज की तरह सुबह करीब 5 बजे ड्यूटी के लिए अपने घर से निकले थे। जैसे ही वे मजीठा के पास फतेहगढ़ चूड़ियां रोड पर हमजा मोड़ पर पहुंचे पीछे से आए अज्ञात हमलावरों ने उन पर गोलियां चला दीं। बताया जा रहा है कि हमलावरों ने चार गोलियां चलाईं जो सीधे जोगा सिंह को लगीं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही मजीठा पुलिस और सीनियर अधिकारी मौके पर पहुंचे और इलाके की घेराबंदी करके जांच शुरू कर दी। फोरेंसिक और टेक्निकल टीमें मौके से सबूत इकट्ठा कर रही हैं। पुलिस ने आस-पास लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी अपने कब्जे में ले ली है, ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके। मृतक के परिवार वालों और गांव वालों ने बताया कि जोगा सिंह बहुत ही नेक और ईमानदार इंसान थे। उनकी किसी से कोई पुरानी दुश्मनी नहीं थी। परिवार का कहना है कि न तो कोई लूटपाट हुई और न ही हमलावर कोई सामान ले गए। उनका पर्स, मोबाइल और दूसरा सामान मौके पर पड़ा मिला। परिवार ने इसे सोची-समझी साजिश बताया है और दोषियों को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की है। जोगा सिंह की उम्र करीब 58 साल बताई जा रही है। उनकी पत्नी के अलावा उनके परिवार में एक बेटा और एक बेटी हैं, जो दोनों कनाडा में रहते हैं और शादीशुदा हैं। इस घटना के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। इस घटना को लेकर लोगों में डर और गुस्से का माहौल है। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस वाले ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम लोगों की सुरक्षा कैसे पक्की होगी। गौरतलब है कि मजीठा में 26 मई को नगर परिषद के चुनाव होने हैं और चुनाव से पहले हुई इस बड़ी घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस का दावा है कि मामले की हर एंगल से अच्छी तरह जांच की जा रही है और दोषियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

Youth Congress चुनाव का बिगुल बजा, 29 मई से नामांकन; डिजिटल होगी सदस्यता प्रक्रिया

रायपुर. छत्तीसगढ़ में युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव का ऐलान हो गया है. प्रदेश मुख्यालय राजीव भवन में रविवार को भारतीय युवा कांग्रेस के मुख्य चुनाव आयुक्त जसप्रीत सिंह और प्रदेश चुनाव अधिकारी रोशन नेगी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव कार्यक्रम जारी किया. 29 मई से 13 जून तक नामांकन प्रक्रिया चलेगी. चुनाव पारदर्शी और समय पर पूरा कराने के लिए 5 जोन बनाकर ZRO नियुक्त किए जाएंगे. ब्लॉक और जिला कमेटियों के लिए नामांकन 29 मई से 13 जून तक भरे जाएंगे. वहीं प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश कार्यकारिणी के लिए 11 जून से 13 जून तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे. नामांकन के बाद 15 जून से 18 जून तक स्क्रूटनी की प्रक्रिया चलेगी. इसके बाद सदस्यता अभियान और चुनाव प्रक्रिया एक साथ ऑनलाइन माध्यम से होगी. सदस्यता के लिए नियम तय युवा कांग्रेस में सदस्यता और चुनाव लड़ने के लिए 18 से 35 वर्ष की आयु सीमा तय की गई है. सदस्यता और शिकायत की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी. फर्जी सदस्यता रोकने के लिए वोटर आईडी अनिवार्य की गई है. आवेदन के साथ 8 सेकेंड का वीडियो भी अपलोड करना अनिवार्य किया गया है, जिसमें आवेदक को खुद आवेदन से जुड़ी जानकारी देनी होगी. आयु प्रमाण के लिए ड्राइविंग लाइसेंस, 10वीं की मार्कशीट, पासपोर्ट या अन्य आईडी प्रूफ जरूरी होंगे. एक व्यक्ति, एक पद का नियम चुनाव प्रक्रिया में एक व्यक्ति-एक पद का नियम भी लागू रहेगा. सिर्फ एक पद के लिए ही नामांकन दाखिल करने की अनुमति रहेगी. वहीं नामांकन दाखित करने पर उस उम्मीदवार को पुराने पद से मुक्त माना जाएगा. दिल्ली में इंटरव्यू के बाद होगी नियुक्ति युवा कांग्रेस में जिला अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश महामंत्री जैसे अहम पदों की नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व जरूरी होगी. दिल्ली में युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने इंटरव्यू भी लिया जाएगा.

ट्विशा का दूसरा पोस्टमार्टम खत्म, अब भदभदा घाट के लिए रवाना होगा शव

नई दिल्ली. नोएडा की 33 वर्षीय मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में आज का दिन अहम है। भोपाल एम्स में पुलिस की भारी मुस्तैदी के बीच ट्विशा का दूसरा पोस्टमार्टम किया जा रहा है। इस संवेदनशील मामले में मौत का सच जानने के लिए दोबारा यह प्रक्रिया अपनाई गई। ट्विशा के भाई मेजर हर्षित ने बताया कि पोस्टमॉर्टम के बाद भदभदा श्मशान घाट में शाम 5 बजे अंतिम संस्कार किया जाएगा। बता दें कि दिल्ली एम्स (AIIMS) के विशेषज्ञ डॉक्टरों की चार सदस्यीय टीम रविवार को ही भोपाल पहुंची। राज्य सरकार की औपचारिक अपील और भोपाल कोर्ट के निर्देश पर दिल्ली एम्स के निदेशक खुद इसकी निगरानी कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः लिया है संज्ञान इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की विशेष पीठ सोमवार, 25 मई को इस मामले की सुनवाई करेगी। शीर्ष अदालत ने इस स्वतः संज्ञान मामले को "एक युवती की उसके ससुराल में अप्राकृतिक मृत्यु में कथित संस्थागत पूर्वाग्रह और प्रक्रियात्मक अनियमितताएं" शीर्षक दिया है, जो पुलिस व स्थानीय प्रशासन की शुरुआती भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ससुराल में मिला था शव, पति 7 दिन की रिमांड पर गौरतलब है कि कुछ महीने पहले ही शादी के बंधन में बंधीं त्विषा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में फंदे पर लटकी पाई गई थीं। मृतका के परिजनों ने दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया, जिसके बाद त्विषा के पति वकील समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

मदरसा बोर्ड परीक्षा में 55,788 छात्र-छात्राएं सफल, छात्राओं का प्रदर्शन सबसे बेहतर

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा को आधुनिक, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में योगी सरकार लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। इसी क्रम में शनिवार को उ०प्र० मदरसा शिक्षा परिषद, लखनऊ द्वारा संचालित मुंशी/मौलवी (सेकेंडरी) तथा आलिम (सीनियर सेकेंडरी) बोर्ड परीक्षा वर्ष-2026 का परिणाम घोषित किया गया। इस वर्ष मदरसा बोर्ड परीक्षा का कुल परिणाम 88.26 प्रतिशत रहा। कुल 55,788 छात्र-छात्राएं सफल घोषित किए गए। खास बात यह रही कि छात्राओं का प्रदर्शन छात्रों से बेहतर रहा। कुल 29,229 छात्राएं 94.30 प्रतिशत सफलता दर के साथ पास हुईं, जबकि 26,559 छात्र 85.13 प्रतिशत दर के साथ सफल हुए। सेकेंडरी में 41 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राएं पास सेकेंडरी यानी मुंशी-मौलवी परीक्षा में कुल 62,232 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। इनमें से 47,036 छात्र-छात्राओं ने परीक्षा दी, जिनमें 41,426 परीक्षार्थी सफल रहे। इस परीक्षा का कुल परिणाम 88.07 प्रतिशत रहा। सेकेंडरी में भी छात्राओं का प्रदर्शन शानदार रहा है। 21,407 छात्राएं 91.46 प्रतिशत सफलता दर के साथ पास हुईं, जबकि 20,019 छात्र 84.72 प्रतिशत अंक के साथ सफल घोषित किए गए। सीनियर सेकेंडरी में छात्राओं ने मारी बाजी वहीं सीनियर सेकेंडरी यानी आलिम परीक्षा में कुल 18,701 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। इनमें से 16,175 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। इनमें 14,362 छात्र-छात्राएं सफल हुए। इस स्तर पर कुल सफलता प्रतिशत 88.79 रहा। सीनियर सेकेंडरी में 7822 छात्राओं ने परीक्षा पास की, उनका रिजल्ट 90.88 प्रतिशत रहा। जबकि 6540 छात्रों ने परीक्षा उत्तीर्ण की। इस तरह 86.42 प्रतिशत छात्र पास हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में आयोजित इस परीक्षा को नकलविहीन और तकनीकी निगरानी के बीच सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया है।  मुख्यमंत्री योगी के मार्गदर्शन में सरकार अल्पसंख्यकों के हित में कर रही काम अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने परिणाम घोषित करते हुए कहा कि हमारी सरकार की मूल नीति सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास के साथ सबका प्रयास है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ में कंप्यूटर से अल्पसंख्यकों में एक नए मनोबल को जीतना और विश्वास का संचार हुआ है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र-छात्राओं के सशक्तीकरण की आधार नीति को यथार्थ धरातल पर लाने का काम योगी सरकार लगातार कर रही है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में हम लगातार अल्पसंख्यको के हित में काम कर रहे हैं।  आधिकारिक वेबसाइट पर देखें रिजल्ट छात्र-छात्राएं अपना रिजल्ट मदरसा परिषद की आधिकारिक वेबसाइट https://madarsaboard.upsdc.gov.in पर देख सकते हैं। मदरसा बोर्ड परीक्षा वर्ष 2026 में कुल 80,933 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे। इनमें से 63,211 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, जिनकी निगरानी सीधे मदरसा बोर्ड मुख्यालय से की गई। योगी सरकार के सख्त इंतजामों के चलते परीक्षा शांतिपूर्ण और नकलविहीन वातावरण में संपन्न हुई।