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राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी पर संकट, बालोतरा में तेजी से सूख रहे पेड़; जांच की मांग तेज

बाड़मेर  थार की जीवनरेखा और राज्य वृक्ष खेजड़ी पर संकट मंडराने लगा है। बालोतरा जिले के गिड़ा क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुम्पलिया के राजस्व गांव चौधरी भूनारामजी गोदारा नगर में हरे-भरे खेजड़ी के पेड़ तेजी से सूख रहे हैं। पेड़ों के तनों और जड़ों के आसपास जमीन पर चूने या पत्थर जैसी कठोर सफेद परत जम रही है। ग्रामीणों के अनुसार, खेतों में लगी करीब 50 से अधिक खेजड़ी इससे प्रभावित हुई है, वहीं अन्य पेड़ों में भी ऐसे लक्षण दिख रहे है। कुम्पलिया के पूर्व पंच रणधीर सिंह गोदारा पेड़ों को बचाने के प्रयास कर रहे हैं। किसानों और पर्यावरण प्रेमियों ने समस्या की जांच और स्थायी समाधान के लिए प्रशासन से मांग की है। पर्यावरण को नुकसान की आशंका खेजड़ी अकाल में पशुओं को लूंग के रूप में चारा देती है। इसकी सांगरी पौष्टिक सब्जी है और पेड़ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद करता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, प्रभावित और स्वस्थ पेड़ों की मिट्टी, सिंचाई के पानी और जड़ों की जांच जरूरी है। कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विभाग की संयुक्त टीम सर्वे कर वास्तविक कारणों का पता लगा सकती है। खाद-कीटनाशकों से किए उपचार सफल नहीं रणधीर सिंह गोदारा के अनुसार, जड़ों के आसपास फफूंद जैसी सफेद परत बन रही है। इससे जड़ों की नमी और पोषक तत्व प्रभावित होने तथा जड़ सड़न की आशंका है। पानी, खाद और कीटनाशकों से किए गए शुरुआती उपचार सफल नहीं हुए। हालांकि, समस्या का वास्तविक कारण अभी वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है। मिट्टी में लवणों का जमाव, अधिक क्षारीयता, सोडियम की अधिकता, खराब जल निकास या जड़ों से जुड़े रोग संभावित कारण हो सकते हैं। जिला परिषद सदस्य दौलताराम गोदारा ने कलक्टर को पत्र लिखकर विशेषज्ञों की टीम भेजने और वैज्ञानिक उपचार कराने की मांग की है। खेजड़ी को बचाने के लिए पेड़ के साथ जड़ों के आसपास की मिट्टी को भी स्वस्थ बनाना होगा। मिट्टी, पानी और जड़ों की वैज्ञानिक जांच से सही कारण पता लगाकर समय पर उपचार किया जा सकता है। – डॉ. कृष्णा सहारण, कृषि विशेषज्ञ एवं सहायक आचार्य, कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर खेजड़ी का एक पौधा तैयार करने में वर्षों की मेहनत लगती है। प्रशासन को तत्काल अनुसंधान और आवश्यक उपचार के कदम उठाने चाहिए, ताकि जीवनदायिनी वृक्षों को बचाया जा सके। -दौलताराम गोदारा, जिला परिषद सदस्य

पंजाब में वाहन चालकों को राहत! आज फ्री रहेंगे टोल प्लाजा, जानें क्या है वजह

लुधियाना. देश के सबसे महंगे लाडोवाल टोल प्लाजा पर वीरवार को टोल प्लाजा वर्कर यूनियन ने पंजाब बंद के समर्थन में अपना काम बंद रखने का ऐलान किया। यूनियन के इस फैसले के चलते टोल प्लाजा को दिनभर टोल फ्री रखने की घोषणा की गई। इस मौके पर टोल प्लाजा वर्कर यूनियन पंजाब के प्रधान दर्शन सिंह लाडी ने कहा कि मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने इस घटना के विरोध में पंजाब सरकार पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री और डीजीपी से तुरंत इस्तीफा देने की मांग की। दर्शन सिंह लाडी ने कहा कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में यूनियन ने पंजाब बंद को समर्थन देने का फैसला किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टोल प्लाजा पर कोई भी कर्मचारी काम नहीं करेगा और टोल को फ्री रखा जाएगा। उधर, लाडोवाल टोल प्लाजा पर बंद के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन की ओर से पुख्ता प्रबंध किए गए है। मौके पर कई पुलिस अधिकारी मौजूद रहे ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके और स्थिति शांतिपूर्ण बनी रहे। टोल प्लाजा वर्कर यूनियन के इस ऐलान के चलते लाडोवाल टोल प्लाजा पंजाब बंद के समर्थन में केंद्र बिंदु बना रहा।

कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ की तैयारी, हर घर तक मुनगा पहुंचाने का अभियान होगा शुरू

कुपोषण और एनीमिया से मुक्ति के लिए छत्तीसगढ़ में शुरू होगा  हर-घर मुनगा, घर-घर मुनगा अभियान रायपुर,   छत्तीसगढ़ शासन के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा राज्य में कुपोषण और एनीमिया जैसी गंभीर समस्याओं को जड़ से समाप्त करने के लिए एक महत्वाकांक्षी हर-घर मुनगा, घर-घर मुनगा अभियान चलाया जाएगा। इस संबंध में आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। मुनगा के औषधीय और पोषण संबंधी गुण     बैठक में बताया गया कि मुनगा (सहजन) की फलियों और पत्तियों में पोषक तत्वों का अपार भंडार होता है। इसमें आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन-ए और विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसे नियमित भोजन में शामिल करने से कुपोषण और एनीमिया की रोकथाम में काफी मदद मिलती है, विशेषकर कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह बेहद फायदेमंद है। अभियान की मुख्य रूपरेखा और निर्देश       अभियान के तहत राज्य के प्रत्येक घर में मुनगा के पौधे निःशुल्क वितरित किए जाएंगे और हर घर में इनका रोपण व देखभाल सुनिश्चित की जाएगी। नर्सरी में पौधों का तैयार होना उद्यानिकी, कृषि एवं किसान कल्याण तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की नर्सरियों में मुनगा के पौधे तैयार किए जाएंगे। फरवरी से मार्च माह के दौरान इन्हें घर-घर वितरित कर रोपित किया जाएगा। सभी जिलों के कलेक्टर इसकी निगरानी करेंगे। आंगनबाड़ी, स्कूल और छात्रावासों में लगाए जाएंगे मुनगा के पौधे       राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों, आश्रमों और छात्रावासों में भी मुनगा के पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराकर लगाए जाएंगे। पौधों के रोपण, उनकी सुरक्षा और सिंचाई सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल जियो-टैगिंग और लाइव डैशबोर्ड मॉनिटरिंग पर विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि हर पौधे के जीवित रहने की दर और पोषण स्तर पर सीधी नजर रखी जा सके।      इस अभियान को सफल बनाने के लिए कई प्रमुख विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग इस अभियान का नोडल विभाग होगा, जो आंगनबाड़ी स्तर पर समन्वय, हितग्राही चयन, पोषण शिक्षा और दैनिक निगरानी करेगा। राज्य के करीब 23 हजार 500 स्कूलों में मुनगा पौधे का रोपण कर शाला पोषण वाटिका का निर्माण किया जाएगा और मध्याह्न भोजन में मुनगा भाजी शामिल की जाएगी।  पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग       ग्राम पंचायत स्तर पर बाड़ियों की पहचान, नर्सरी तैयार करने और स्व-सहायता समूहों के सहयोग से जन-जन तक अभियान की जानकारी पहुंचाई जाएगी। उद्यानिकी एवं कृषि विभाग  गुणवत्तापूर्ण मुनगा कलम व उन्नत पौधे तैयार करने, रोपण तकनीक, जैविक खाद और पौध सुरक्षा में तकनीकी सहयोग प्रदान करेंगे। इसके लिए वन विभाग का सहयोग भी लिया जाएगा।           बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, आदिम जाति विकास विभाग के सचिव भूवनेश यादव, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह सहित वन, उद्यानिकी और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

Bilaspur JD Office में स्वीकृत पदों से ज्यादा तैनाती, 3 के बजाय 7 सहायक संचालक संभाल रहे जिम्मेदारी

बिलासपुर. संभाग के शिक्षा विभाग में प्रशासनिक व्यवस्थाओं की अजीब तस्वीर सामने आ रही है। एक ओर जहां जिले समेत पूरे संभाग के सरकारी हायर सेकेंडरी और हाई स्कूलों में प्राचार्यों के पद खाली पड़े हैं, वहीं दूसरी ओर संयुक्त संचालक (जेडी) कार्यालय में नियमों को ताक पर रखकर जरूरत से ज्यादा सहायक संचालकों का जमावड़ा लगा हुआ है। वहां 3 के स्थान पर 7 प्राचार्यों को सहायक संचालक बनाकर बैठा दिया गया है। एक तरफ जिला मुख्यालय पर अफसरों की फौज बैठी है, तो दूसरी तरफ जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के कई शासकीय हायर सेकेंडरी और हाई स्कूलों में प्राचार्यों के पद खाली पड़े हैं। इन स्कूलों में प्रशासनिक नियंत्रण और शैक्षणिक मॉनिटरिंग के अभाव में विद्यार्थियों की पढ़ाई और स्कूलों का संचालन प्रभावित हो रहा है। हालात यह हैं कि स्वीकृत पदों से दोगुने से अधिक सहायक संचालक केवल जेडी ऑफिस में जमे हुए हैं, जबकि मैदानी स्तर पर स्कूलों की कमान संभालने वाला कोई जिम्मेदार नहीं है। नियमानुसार जेडी कार्यालय में प्रशासनिक कार्यों के संचालन के लिए सहायक संचालकों के मात्र 3 पद स्वीकृत हैं। इसके बावजूद वर्तमान में इस कार्यालय में पूरे 7 सहायक संचालक पदस्थ हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से अधिकांश अधिकारी प्राचार्य वर्ग के हैं, जिन्हें स्कूलों में शैक्षणिक और प्रशासनिक नेतृत्व संभालना चाहिए था, लेकिन वे कार्यालयीन व्यवस्थाओं में जमे हुए हैं। जब उच्च पदस्थ योग्य प्राचार्य और सहायक संचालक स्तर के अधिकारी कार्यालयों में ही बैठे रहेंगे, तो स्कूलों की व्यवस्था कौन संभालेगा। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि मैदानी अमले और शिक्षण संस्थानों में अमले की कमी न हो, इसके बावजूद प्रशासनिक कुप्रबंधन के चलते योग्य अधिकारियों को स्कूलों में भेजने के बजाय दफ्तरों में बैठाकर रखा गया है। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस विसंगति को दूर कर कब तक प्राचार्यों को उनकी मूलस्थापना यानी स्कूलों में भेजता है ताकि शिक्षण व्यवस्था पटरी पर लौट सके। संयुक्त संचालक अश्विनी भारद्वाज ने बताया कि जेडी ऑफिस में तीन सहायक संचालकों के पद स्वीकृत है। उसके स्थान पर शासन ने सात सहायक संचालकों की पोस्टिंग की है। उक्त निर्णय शासन का है। इसलिए सभी सहायक संचालकों को आवश्यकतानुसार काम सौप दिए गए है। उक्त संबंध में उचित निर्णय शासन को लेना होगा।

सांसद सुधाकर सिंह की बढ़ीं मुश्किलें? IPS कुंदन कृष्णन की चेतावनी, माफी नहीं तो 5 करोड़ का हर्जाना

  पटना बिहार के सीनियर आईपीएस अधिकारी कुंदन कृष्णन ने राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह को मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा है. नोटिस में 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगने को कहा गया है. ऐसा नहीं करने पर 5 करोड़ रुपये के हर्जाने का मुकदमा और आपराधिक मानहानि की कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी दी गई है. यह मामला भारत भूषण तिवारी की मौत और जमुई की एक घटना को लेकर सांसद की ओर से दिए गए बयानों से जुड़ा है।  बक्सर से आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने सोशल मीडिया पर नोटिस मिलने की जानकारी शेयर की. उन्होंने कहा कि वह माफी नहीं मांगेंगे और अपने बयान पर कायम हैं. उन्होंने कहा कि भारत भूषण तिवारी की मौत और जमुई की घटना पर उन्होंने जनहित में सवाल उठाए हैं।  भारत तिवारी की मौत पर दिए बयान से विवाद कुंदन कृष्णन की ओर से उनके अधिवक्ता अपूर्व हर्ष ने यह नोटिस जारी किया है. नोटिस के मुताबिक, 17 जून 2026 को भोजपुर जिले के बिलौती गांव में पुलिस ऑपरेशन के दौरान भारत भूषण तिवारी की मौत हुई थी. इसके बाद 24 जून को सुधाकर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मामले में पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए थे।  नोटिस में आरोप लगाया गया है कि सांसद ने इस दौरान कुंदन कृष्णन की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए. नोटिस भेजने वाले पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि इससे अधिकारी की छवि और पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।  नोटिस में यह भी कहा गया है कि बिहार सरकार ने 20 जून 2026 को मामले की जांच के लिए रिटायर्ड जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था।  जमुई की घटना को लेकर आरोपों का जिक्र कानूनी नोटिस में 22 सितंबर 2026 को एक निजी न्यूज पोर्टल को दिए गए सुधाकर सिंह के इंटरव्यू का भी उल्लेख है. नोटिस के मुताबिक, जमुई में एक किशोरी और उसके दोस्त के साथ कथित छेड़छाड़ और दुर्व्यवहार की घटना को लेकर बिहार पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कुंदन कृष्णन के खिलाफ आरोप लगाए गए थे।  नोटिस भेजने वाले पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताया है. इसमें दावा किया गया है कि इस मामले में मुख्य आरोपी समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।  'माफी नहीं मांगूंगा, कानूनी जवाब दूंगा' नोटिस मिलने के बाद सांसद सुधाकर सिंह ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वह कानूनी नोटिस की धमकी से पीछे नहीं हटेंगे और नोटिस का जवाब कानूनी तरीके से देंगे. उन्होंने भारत भूषण तिवारी की मौत के मामले में तत्कालीन पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की. उन्होंने कहा कि घटना के समय कुंदन कृष्णन बिहार एसटीएफ के डीजी थे. इसलिए पुलिस कमान, पुलिस मुख्यालय और निर्णय लेने वाले वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।  '15 दिन में माफी नहीं तो…' नोटिस में सुधाकर सिंह से जमीन माफिया, शराब माफिया और कथित फर्जी एनकाउंटर के मामलों में संरक्षण देने जैसे आरोप लगाने से बचने को कहा गया है. साथ ही, कुंदन कृष्णन पर पद के दुरुपयोग से जुड़े आरोप दोहराने पर भी आपत्ति जताई गई है।  नोटिस के जरिए 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की गई है. ऐसा नहीं करने पर 5 करोड़ रुपये के हर्जाने का सिविल मुकदमा और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356 के तहत आपराधिक मानहानि की कार्रवाई शुरू करने की चेतावनी दी गई है। 

सीएम योगी का राहुल गांधी पर निशाना, बोले- मसुरियादीन पासी भी गए थे जेल योगी आदित्यनाथ ने किया स्वतंत्रता सेनानी मसुरियादीन पासी की प्रतिमा का अनावरण ‘सिर्फ नेहरू ही नहीं, मसुरियादीन पासी ने भी जेल में बिताए दिन’, सीएम योगी का बयान

राहुल गांधी नोट कर लें, सिर्फ नेहरू ही नहीं, मसुरियादीन पासी भी गए थे जेलः मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, संविधान सभा के सदस्य व पूर्व सांसद मसुरियादीन पासी की प्रतिमा का किया अनावरण  सीएम ने कहा, अब मसुरियादीन जी के नाम पर होगा चौराहा, सम्मान किसी परिवार की बपौती नहीं प्रयागराज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को तेलियरगंज चौराहे पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, ब्रिटिश जरायम पेशा कानून को समाप्त कराने वाले संविधान सभा के सदस्य एवं पूर्व सांसद महाशय मसुरियादीन पासी की प्रतिमा का अनावरण किया। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी नोट कर लें कि देश की आजादी के लिए केवल नेहरू जी ही नहीं, बल्कि मसुरियादीन जी भी जेल गए थे। इनकी आयु 66-67 वर्ष रही, जिसमें 9 वर्ष (1932-1944) वह आजादी की अलख जगाने के लिए जेल में रहे। रिहा होने पर भी वह जन-जागरण करते रहे थे।  अब मसुरियादीन जी के नाम पर होगा चौराहा सीएम ने महापौर से प्रस्ताव मांगा और कहा कि जहां मसुरियादीन जी की प्रतिमा लगी है, वह चौराहा उनके नाम पर बनेगा। प्रयागराज की किसी एक अच्छी संस्था का नाम भी महाशय मसुरियादीन के नाम पर किया जाएगा। वहां भी उनकी भव्य प्रतिमा लगेगी, क्योंकि महापुरुषों को सम्मान देकर ही समाज आगे बढ़ सकता है। भूत को सम्मान देकर वर्तमान संवर सकता है और वर्तमान के संवरने से ही भविष्य उज्ज्वल होगा। महाशय का सम्मान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सम्मान है, इसमें कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।  महापुरुषों को विस्मृत नहीं करती भाजपा सरकार सीएम योगी ने कहा कि 2 अक्टूबर 1911 को महाशय मसुरियादीन पासी का भी जन्म हुआ था। इतिहास के कालचक्र ने इन्हें विस्मृत कर दिया था, लेकिन विकास व विरासत पर विश्वास करने वाली भाजपा सरकार महापुरुषों को विस्मृत नहीं करती। हमने उनकी स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने के लिए प्रतिमा का अनावरण किया है।  पं. नेहरू व मसुरियादीन जी साथ चुनकर गए थे संसद  सीएम ने बताया कि मसुरियादीन जी 1946 में यूपी विधानसभा के सदस्य बने, फिर स्वतंत्र भारत में 1952 से 1972 तक चार बार चुनकर संसद गए। 1952 में जब एक सीट पर दो सांसद चुने जाते थे तो पं. नेहरू व मसुरियादीन जी एक साथ चुनकर गए थे। उन्होंने काले कानून के खिलाफ 1952 में ही आवाज उठाई थी। 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर में मुंह की खाने के बाद अंग्रेजों ने 1871 में जरायम पेशा कानून बनाकर पासी समेत तमाम जातियों को अपमानित किया था। बाबा साहेब व मसुरियादीन जी ने उस कानून के खिलाफ लड़ाई लड़ी और अंततः उसे समाप्त कर पासी, सोनकर, वंचित, दलित समाज को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़कर सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रेरित किया।  पासी समाज के शौर्य व पराक्रम की गाथा  मुख्यमंत्री ने कहा कि पासी समाज के शौर्य व पराक्रम की गाथा को हर कोई जानता है। महाराजा बिजली पासी ने 12वीं सदी में लखनऊ व आसपास के क्षेत्र में 12 किले बनाए थे। विदेशी आक्रांताओं से लड़ने के लिए इसे रणनीति का हिस्सा बनाया था। वीर मक्का पासी आजादी की लड़ाई लड़ते वीरगति को प्राप्त हुए तो उनकी पत्नी वीरांगना ऊदा देवी ने मोर्चा संभालते हुए अंग्रेजों के छुक्के छुड़ाए। अंततः उनका भी बलिदान हो गया।  सम्मान किसी परिवार की बपौती नहीं  सीएम ने कहा कि हमारी सरकार ने लखनऊ स्थित महाराजा बिजली पासी के किले का पुनरुद्धार किया। डबल इंजन सरकार लखनऊ में वीरांगना ऊदा देवी के नाम पर पीएसी बटालियन गठित कर रही है। वहां भी उनकी अश्वारोही भव्य प्रतिमा लगाई जा रही है। सम्मान किसी परिवार की बपौती नहीं है। जिन्होंने दलितों, वंचितों की आवाज को आगे बढ़ाया और देश-समाज के लिए जीवन समर्पित किया, उन्हें सम्मान मिलना चाहिए।  इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, नंदगोपाल गुप्ता ‘नंदी’, महापौर उमेश चंद्र ‘गणेश केसरवानी’, फूलपुर सांसद प्रवीण पटेल, विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी, पीयूष रंजन निषाद, वाचस्पति पासी, दीपक पटेल, गुरु प्रसाद मौर्या, विधान परिषद सदस्य लालजी प्रसाद निर्मल, सुरेंद्र चौधरी, मसुरियादीन जी की पुत्री कमला कुमारी, पौत्र सचिन कुमार आदि मौजूद रहे।

सोयाबीन किसानों को राहत, खरीफ 2026 में भावांतर योजना लागू करने की स्वीकृति

जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए विशेष कंपनी के गठन की मंजूरी खरीफ वर्ष 2026 में सोयाबीन का उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर योजना लागू किए जाने की स्वीकृति : अन्नदाताओं के हक में बड़ा फैसला प्रदेश के सर्वांगीण विकास को गति देने के लिए 27,050 करोड़ रूपये की स्वीकृति जनजातीय कार्य विभाग अंतर्गत संचालित 94 सांदीपनि वि‌द्यालयों के वि‌द्यार्थियों के परिवहन के लिए 241 करोड़ 88 लाख रूपये की स्वीकृति निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा एवं मैहर में महिला एवं बाल विकास के जिला कार्यालय स्थापना के लिए 24 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति बुरहानपुर, रायसेन, मंदसौर और सिंगरौली की सिंचाई परियोजनाओं की निरंतरता के लिए 3,076 करोड़ 37 लाख रूपये की स्वीकृति विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं के लिए 15,557.35 करोड़ रूपये की स्वीकृति शासकीय स्कूल, छात्रावास, पुस्तकालय, आवासीय खेलकूद भवनों के निर्माण और विस्तार के लिए 2,875.20 करोड़ रूपये की स्वीकृति आयुष विभाग की आयुष महाविद्यालय और चिकित्सालय से संबंधित अम्ब्रेला योजना के लिए 3,535 करोड़ रूपये की स्वीकृति राष्ट्रीय आयुष मिशन के निरंतर संचालन के लिए 1,697.62 करोड़ रूपये की स्वीकृति राज्य सूचना आयोग की स्थापना संबंधी योजनाओं के लिए 71 करोड़ 81 लाख रूपये की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ.यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिये गए निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गुरूवार को मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में हुई। कैबिनेट ने राज्य में औद्योगिक निवेश और आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा देने के लिए शत-प्रतिशत शासकीय स्वामित्व वाली 'जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी' के गठन के प्रस्ताव को स्वीकृत किया। अन्नदाताओं के हित में बड़ा फैसला लेते हुए खरीफ वर्ष 2026 में सोयाबीन उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिलाने के लिए 'पीएम-आशा' योजना अन्तर्गत भावांतर भुगतान योजना लागू करने की स्वीकृति दी गई।मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के सर्वांगीण विकास को गति देने के लिए लगभग 27,050 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। मंत्रि-परिषद ने बुरहानपुर, रायसेन, मंदसौर और सिंगरौली की सिंचाई परियोजनाओं की निरंतरता के लिए 3,076.37 करोड़ रुपये तथा 16वें वित्त आयोग की अवधि के लिए विधि एवं विधायी कार्य विभाग की 15,557 करोड़ रुपये से अधिक की राशि की योजनाओं की निरंतरता को मंजूर की गई। प्रदेश में आयुष चिकित्सा विस्तार व राष्ट्रीय आयुष मिशन के लिए 5,232 करोड़ रुपये एवं शासकीय विद्यालयों के अधोसंरचना निर्माण के लिए 2,875.20 करोड़ रुपये की निरंतरता की स्वीकृति दी गई। इसके अतिरिक्त नवगठित जिलों-निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा व मैहर में महिला एवं बाल विकास कार्यालयों के लिए 24 नवीन पदों तथा जनजातीय सांदीपनि विद्यालयों के छात्र परिवहन के लिए 241 करोड़ 88 लाख रुपये का प्रावधान किया गया। जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए विशेष कंपनी के गठन की मंजूरी प्रदेश के औद्योगिक विकास एवं निवेश को नई गति देने के लिए मंत्रि-परिषद ने जबलपुर-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के साथ चयनित औद्योगिक एवं आर्थिक हबों के समेकित विकास के लिए पूर्णतः शासकीय स्वामित्व वाली विशेष कंपनी (एसपीवी) 'जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड' गठित करने की स्वीकृति प्रदान की है। स्वीकृति अनुसार कंपनी पर मध्यप्रदेश शासन का पूर्ण स्वामित्व एवं नियंत्रण रहेगा। कंपनी के सुदृढ़ वित्तीय आधार के लिए राज्य शासन द्वारा 100 करोड़ रूपये की प्रारंभिक चुकता पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी। कंपनी के प्रभावी संचालन और नीतिगत निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय सामान्य निकाय गवर्निंग काउंसिल गठित की जाएगी। मुख्यमंत्री द्वारा नामित एवं नियुक्त उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में एक सशक्त कार्यकारी निकाय के माध्यम से कंपनी के कार्यों का संचालन किया जाएगा। इकॉनॉमिक हब के तीव्र और सुव्यवस्थित विकास के उद्देश्य से विशेष कंपनी को भूमि की पहचान, भूमि प्रबंधन, भू-अर्जन, भूमि विकास, जोनिंग, मास्टर प्लानिंग, ले-आउट, भू-आवंटन, लीज/सब-लीज, मोनेटाइजेशन तथा बुनियादी व सामाजिक अधोसंरचना के विकास की शक्तियां प्रदान की जाएंगी। आवश्यकतानुसार राज्य शासन की भूमि सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से रियायती दर या निर्धारित शर्तों पर कंपनी को उपलब्ध कराई जाएगी। परियोजना में वन भूमि की आवश्यकता होने पर संबंधित केंद्रीय एवं राज्य कानूनों, पूर्वानुमोदन, क्षतिपूर्ति वनीकरण तथा एनपीवी सहित सभी वैधानिक शर्तों की पूर्ति के बाद ही भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। कंपनी को 'मध्यप्रदेश निवेश क्षेत्र विकास एवं प्रबंध अधिनियम, 2013' के अंतर्गत उपयुक्त इन्वेस्टमेंट रीजन एजेंसी के रूप में अधिकृत किया जाएगा। इसके साथ ही मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम के अंतर्गत विधि विभाग की सहमति से अधिसूचित इकॉनाँमिक हबो के लिए इसे नोडल एजेंसी के रूप में आवश्यक शक्तियां और दायित्व सौंपे जाएंगे। कंपनी के कार्य क्षेत्र के संबंध में यह स्पष्ट किया गया है कि मुख्य सड़क या कॉरिडोर का निर्माण इसके दायरे में नहीं होगा। कंपनी का संपूर्ण ध्यान आर्थिक हबों के भीतर आंतरिक एवं साझा अधोसंरचना और आर्थिक गतिविधियों के संवर्धन पर ही केंद्रित रहेगा। विशेष कंपनी के माध्यम से औद्योगिक पार्क, सेक्टोरल पार्क जैसे फूड पार्क, एग्री-प्रोसेसिंग पार्क, लॉजिस्टिक्स पार्क, टेक्नोलॉजी/आईटी पार्क, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर आदि साझा सुविधाएं आवासीय और सामाजिक बुनियादी ढांचे से संबंधित परियोजनाएं विकसित की जाएंगी। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए पीपीपी, ईपीसी, कन्सेशन, लीज, संयुक्त उपक्रम तथा डेवलपमेंट एग्रीमेंट जैसे विभिन्न वैधानिक मॉडलों का उपयोग किया जा सकेगा। इस निर्णय के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग को परियोजना से जुड़े विभागों जैसे वित्त, राजस्व, नगरीय विकास एवं आवास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन, ऊर्जा, लोक निर्माण, वन तथा विधि विभाग से आवश्यक समन्वय कर अधिसूचनाएं, शासनादेश एवं अन्य वैधानिक दस्तावेज जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है। सोयाबीन उपार्जन पर उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर योजना लागू किए जाने की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने किसानों को खरीफ वर्ष 2026 में सोयाबीन का उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर योजना लागू किए जाने की स्वीकृति दी है। यह योजना भारत सरकार के 'प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान' ( पीएम-आशा) के तहत संचालित 'प्राइस डिफिसिट पेमेंट स्कीम' (पीडीपीएस) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लागू की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के किसानों को उनकी औसत गुणवत्ता वाली सोयाबीन उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित कराना है। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए सोयाबीन उत्पादक किसानों को खाद्य विभाग के ई-उपार्जन पोर्टल पर 17 अक्टूबर 2026 तक पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। योजना के अंतर्गत अधिसूचित मंडियों में उपज की विक्रय अवधि 22 अक्टूबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक … Read more

राहुल गांधी पर मंत्री विश्वास सारंग का तीखा बयान, देश को कमजोर करने का लगाया आरोप

भोपाल  मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे देश की अर्थव्यवस्था और व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास और कल्याण के कार्य हो रहे हैं तथा अर्थव्यवस्था लगातार आगे बढ़ रही है। इसके बावजूद विपक्ष देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहा है। मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि उन्हें लगता है कि राहुल गांधी और विपक्ष के नेता देश की अर्थव्यवस्था तथा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाकर भारत को कमजोर करना चाहते हैं। मैं यह बात पार्टी कार्यकर्ता के तौर पर नहीं बल्कि भारत के नागरिक के रूप में कह रहा हूं। राहुल गांधी कठपुतली बन गए हैं सारंग ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश में अराजकता फैलाने के लिए देश-विरोधी ताकतों के हाथों की कठपुतली बन गए हैं। देश के देशभक्त नागरिक भारत को विकास के रास्ते से भटकने नहीं देंगे और न ही किसी को देश में अव्यवस्था फैलाने की अनुमति देंगे। विपक्ष नाकामिया छिपाने एसआईआर को मुद्दा बना रहा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडी गठबंधन के विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए सारंग ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा और मजबूत लोकतंत्र है। देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष को विरोध करने और अपनी बात रखने की पूरी आजादी है। विपक्ष अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए एसआईआर को मुद्दा बना रहा है। राहुल गांधी को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी संस्थागत संरचना की पर्याप्त जानकारी नहीं है। संविधान और संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज की समझ नहीं है चुनाव आयोग पर राहुल गांधी के आरोपों को लेकर सारंग ने कहा कि कांग्रेस नेता को संविधान और संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज की समझ नहीं है। चुनाव आयोग का अपना अलग कर्मचारी कैडर नहीं होता। आयोग के फैसलों को लागू करने में राज्य सरकार के अधिकारी और कर्मचारी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया भी राज्य सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों के माध्यम से लागू की जाती है। इनमें लेखपाल, शिक्षक और उपखंड मजिस्ट्रेट (एसडीएम) जैसे अधिकारी शामिल हैं। …तो कांग्रेस कई राज्यों में कैसे जीतती? सारंग ने सवाल उठाया कि, यदि चुनाव आयोग चुनावों में हेरफेर करता, तो कांग्रेस विभिन्न राज्यों में चुनाव कैसे जीतती? उन्होंने प्रियंका गांधी के लोकसभा पहुंचने और हिमाचल प्रदेश, केरल तथा कर्नाटक में कांग्रेस की सरकारें बनने का हवाला देते हुए विपक्ष के आरोपों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर आरोप लगाने से पहले विपक्ष को तथ्यों और ठोस आधार के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। चुनाव आयोग की आलोचना करने के बजाय कांग्रेस को अपनी चुनावी विफलताओं और राजनीतिक रणनीति पर आत्ममंथन करना चाहिए।

मध्य प्रदेश में आशा कार्यकर्ताओं के 4,878 पदों पर होगी भर्ती, आदिवासी जिलों पर विशेष फोकस

भोपाल मध्य प्रदेश के ग्रामीण, आदिवासी और शहरी इलाकों में जमीनी स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 4,878 आशा कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों के चयन को मंजूरी दे दी है। अगस्त 2022 के बाद यह पहला मौका है जब इतने बड़े पैमाने पर यह भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, जिससे राज्य के दूर-दराज इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा काफी हद तक बढ़ेगा। 614 सुपरवाइजरों की भी भर्ती इस नए भर्ती अभियान के तहत कुल 4,264 पद आशा कार्यकर्ताओं के और 614 पद उनके पर्यवेक्षकों (सुपरवाइजर) के लिए तय किए गए हैं। भौगोलिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इनका विभाजन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में किया गया है, ताकि हर जरूरतमंद तक स्वास्थ्य सुविधाएं आसानी से पहुंच सकें। ग्रामीण और शहरी इलाकों में क्या होगा बंटवारा? आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, चुनी जाने वाली कुल आशा कार्यकर्ताओं में से 3,062 कार्यकर्ताओं की तैनाती ग्रामीण इलाकों में की जाएगी, जहां आज भी स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कई तरह की चुनौतियां बनी रहती हैं। वहीं, शहरी क्षेत्रों की बस्तियों और वार्डों के लिए 1,202 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी, ताकि शहरी गरीबों को भी बेहतर स्वास्थ्य लाभ मिल सके। आदिवासी जिलों पर रहेगा विशेष जोर दुरुस्त स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे ज्यादा जरूरत वाले प्रदेश के 20 आदिवासी-प्रधान जिलों के लिए कुल 1,251 पद आरक्षित किए गए हैं। इनमें 1,051 पद आशा कार्यकर्ताओं के और 200 पद पर्यवेक्षकों के शामिल हैं। इन आदिवासी जिलों के ग्रामीण अंचलों में 956 आशा कार्यकर्ता और शहरी हिस्सों में 95 कार्यकर्ता मोर्चा संभालेंगी, जिससे वहां मातृ मृत्यु दर और शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी दिक्कतों को कम करने में मदद मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग और जनता के बीच की मजबूत कड़ी विशेषज्ञ मानते हैं कि आशा कार्यकर्ता स्थानीय समुदाय और स्वास्थ्य विभाग के बीच एक मजबूत पुल की तरह काम करती हैं। वे गर्भवती महिलाओं को गर्भधारण के दौरान मिलने वाली जरूरी जांच (एंटीनेटल केयर), संस्थागत प्रसव, बच्चों के टीकाकरण और पोषण तथा हेल्थकेयर के प्रति जागरूक करने में अहम भूमिका निभाती हैं। इस नई भर्तियों से न केवल रिमोट इलाकों में हेल्थ सर्विस डिलीवरी मजबूत होगी, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार की तमाम स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी भी समय पर आम जनता तक पहुंच सकेगी।

वाराणसी में 76 दिवसीय वार्ड प्रवास अभियान के समापन एवं स्वच्छता मित्र सम्मान समारोह को मुख्यमंत्री योगी ने किया संबोधित

माफिया की जगह सिर्फ मिट्टी, कब्जाई जमीन पर गरीबों की बनेंगी हवेलियां: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ   वाराणसी में विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी के 76 दिवसीय वार्ड प्रवास अभियान के समापन एवं स्वच्छता मित्र सम्मान समारोह को मुख्यमंत्री योगी ने किया संबोधित स्वच्छता कर्मियों का पैसा काटने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई, न्यूनतम 16 हजार रुपये मानदेय की व्यवस्था   परिवार को ही प्रदेश मानने वालों की दुर्गति तय, मुख्यमंत्री योगी का सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तंज   403 विधानसभा क्षेत्रों में जनप्रतिनिधि चलाएं ऐसा अभियान, जनता से संवाद कर समस्याओं का कराएं समाधान   2014 से पहले गंदगी, जाम और भू-माफिया से परेशान थी काशी, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हुआ कायाकल्प   वाराणसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि माफिया की जगह सिर्फ मिट्टी में है। जिन जमीनों पर कभी माफिया का कब्जा था, वहां अब गरीबों की हवेलियां बनेंगी। प्रयागराज में माफिया के कब्जे से मुक्त कराई गई जमीन पर गरीबों, वंचितों और दलितों के लिए बहुमंजिला आवासीय इमारतों के निर्माण का शुभारंभ किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'अब माफिया नहीं, माफिया की जगह मिट्टी में है, अब गरीबों के लिए बड़ी-बड़ी हवेलियां बनेंगी।' मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन सरकार गरीबों के हितों के संरक्षण के लिए पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। उन्होंने स्वच्छता कर्मियों के मानदेय में कटौती करने वालों को भी चेताया। कहा कि उत्तर प्रदेश में तय कर दिया गया है कि कोई भी व्यक्ति स्वच्छता कर्मियों का पैसा काटेगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।   मुख्यमंत्री योगी गुरुवार को वाराणसी दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी के 76 दिवसीय वार्ड प्रवास अभियान के समापन एवं स्वच्छता मित्र सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अभियान के चौथे संस्करण की सराहना करते हुए इसे अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणादायक बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधि जनता के बीच रहकर उसकी समस्याओं का समाधान करें, सरकारी निर्माण कार्यों का संरक्षण सुनिश्चित करें और पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाएं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने दस स्वच्छता कर्मियों को अंगवस्त्र पहनाकर और बैग भेंटकर सम्मानित किया।   परिवार को ही प्रदेश मानने वालों की दुर्गति तय मुख्यमंत्री योगी ने जनप्रतिनिधियों की सक्रियता का उल्लेख करते हुए परिवारवाद पर तंज कसा। उनका इशारा सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की तरफ था। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब जनप्रतिनिधि ही दोपहर 12 बजे सोकर उठेगा, नेतृत्व देने वाला भी 12 बजे सोकर उठेगा, अपने परिवार के बीच मस्त रहेगा और परिवार को ही समाज व प्रदेश मानने की भूल करेगा तो दुर्गति होनी ही है। उन्होंने कहा कि जो समाज, प्रदेश और देश को अपना परिवार मानते हैं, वही परिवर्तन ला सकते हैं। मुख्यमंत्री ने उन जनप्रतिनिधियों पर भी निशाना साधा, जो एक बार चुने जाने के बाद लखनऊ में पड़े रहते हैं और दोबारा अपने क्षेत्र में झांकने नहीं पहुंचते।   स्वच्छता कर्मियों का मानदेय काटा तो होगी कड़ी कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पहले स्वच्छता कर्मियों से काम लेने के बाद उनकी मजदूरी और मानदेय में कटौती कर दी जाती थी। कई बार पूरा पैसा भी नहीं दिया जाता था। अब ऐसी मनमानी नहीं चलेगी। सरकार ने मानदेय में कटौती पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। उत्तर प्रदेश आउटसोर्स कॉरपोरेशन के माध्यम से कर्मियों को न्यूनतम 16 हजार रुपये मानदेय देने की व्यवस्था की गई है। उन्हें ईएसआई के तहत अस्पतालों में उपचार, सुरक्षा बीमा और पीएफ का लाभ भी मिलेगा। दुर्घटना में मृत्यु होने पर परिवार को आर्थिक सहायता मिल सकेगी। पीएफ की व्यवस्था से सेवानिवृत्ति के बाद कर्मियों के पास अपनी पूंजी होगी और उन्हें दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।   स्वच्छता मित्र नींव के पत्थर, उन्हीं पर टिकी भव्य व्यवस्था मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि स्वच्छता कर्मी तब सड़कों और मोहल्लों की सफाई करते हैं, जब अधिकांश लोग सो रहे होते हैं। सर्दी, गर्मी, बरसात, आंधी और त्योहारों में भी वे पहले दूसरों के लिए स्वच्छ वातावरण तैयार करते हैं। प्रयागराज महाकुंभ में 66 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन के बावजूद स्वच्छता की प्रशंसा हुई। इसके पीछे स्वच्छता कर्मियों का परिश्रम था। उन्होंने कहा कि नींव का पत्थर दिखाई नहीं देता, लेकिन पूरी भव्य इमारत उसी पर खड़ी होती है। स्वच्छता कर्मियों का योगदान भी ऐसा ही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह नगर निगमों के कार्यक्रमों में स्वच्छता मित्रों का सम्मान कराने पर विशेष जोर देते हैं।   403 विधानसभा क्षेत्रों में चले ऐसा अभियान मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि डॉ. नीलकंठ तिवारी का 76 दिवसीय वार्ड प्रवास अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणा है। प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर जनप्रतिनिधि इसी जागरूकता के साथ कार्य करें तो जनता के मन में नकारात्मकता पैदा नहीं होगी। लोकप्रिय जनप्रतिनिधि वही है, जिसकी पहुंच हर घर तक हो। शासन की योजनाएं उपलब्ध हैं, लेकिन कई पात्र लोगों को उनकी जानकारी तक नहीं होती। ऐसे में जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि शिविर लगवाकर वृद्धों, निराश्रित महिलाओं और जरूरतमंद परिवारों को पेंशन, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड और अन्य योजनाओं का लाभ दिलाएं। उन्होंने कहा कि समस्याओं का समाधान गाली-गलौज या मारपीट से नहीं, संवाद से निकलता है। प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर जनहित के काम कराए जा सकते हैं।   प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बदली काशी की तस्वीर मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले काशी की गलियों में गंदगी, सड़कों पर जाम और बिजली का संकट आम बात थी। निराश्रित गोवंश सड़कों पर घूमते थे। भू-माफिया गरीबों और व्यापारियों की जमीन-मकान पर कब्जा कर भय का वातावरण बनाते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी का कायाकल्प हुआ है। अब यह अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए नई आभा के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि विकास कार्य सरकार करा सकती है, लेकिन उनके संरक्षण की जिम्मेदारी जागरूक समाज की है। समय पर सफाई और मरम्मत से सार्वजनिक सुविधाओं की उपयोगिता बढ़ती है।   76 दिनों में 24 वार्डों तक पहुंचा अभियान विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने बताया कि लगातार चौथे वर्ष आयोजित वार्ड प्रवास अभियान में दक्षिणी विधानसभा के सभी 24 वार्ड शामिल किए गए। 19 जुलाई से दो अक्टूबर तक चले अभियान में प्रत्येक वार्ड में तीन से चार दिन प्रवास किया गया। … Read more