samacharsecretary.com

सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों की छात्राओं के साथ स्कूल छोड़ चुकी और स्कूल नहीं जाने वाली किशोरियों को भी मिलेगा लाभ

लखनऊ। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में कक्षा छह से 12 तक पढ़ने वाली सभी छात्राओं को अब निःशुल्क सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाएंगे। योगी सरकार इसका दायरा केवल सरकारी विद्यालयों तक सीमित नहीं रखेगी। सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं के साथ स्कूल छोड़ चुकी और स्कूल नहीं जाने वाली किशोरियों तक निःशुल्क सैनिटरी नैपकिन पहुंचाने की व्यवस्था तैयार की जाएगी।  इसके साथ ही प्रदेश में पहली बार माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं को एकीकृत करते हुए राज्य स्तरीय नीति विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा।

किशोरियों के माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी सेवाओं को और प्रभावी बनाने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल के लिए गठित राज्य स्तरीय माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति की एनेक्सी भवन में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अमित कुमार घोष की अध्यक्षता में हुई बैठक में किशोरियों तक स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने पर मंथन किया गया।

छठी से 12वीं तक की सभी छात्राओं को मुफ्त नैपकिन
सरकारी विद्यालयों में कक्षा छह से 12 तक पढ़ने वाली सभी छात्राओं को निःशुल्क सैनिटरी नैपकिन दिए जाएंगे। सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों की छात्राओं को भी इसका लाभ देने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके साथ स्कूल नहीं जाने वाली या पढ़ाई बीच में छोड़ चुकी किशोरियों तक भी निःशुल्क सैनिटरी नैपकिन पहुंचाने की व्यवस्था होगी।
माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता सेवाओं का दायरा बढ़ाकर प्रत्येक किशोरी तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। इसमें विशेष रूप से स्कूल से बाहर की किशोरियों और वंचित समूहों को भी प्राथमिकता दी जाएगी।

पढ़ाई का हिस्सा बनाएंगे, डिजिटल माध्यमों का होगा इस्तेमाल
विद्यालयों में माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता प्रबंधन के साथ किशोरावस्था से जुड़ी शिक्षा और जागरूकता सत्रों को नियमित शैक्षिक गतिविधियों का हिस्सा बनाया जाएगा। किशोरियों को माहवारी शुरू होने से पहले ही इसके बारे में जरूरी जानकारी देने और मानसिक रूप से तैयार करने के लिए व्यापक जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे। सुरक्षित और स्वच्छ माहवारी व्यवहार को बढ़ावा देने के साथ इससे जुड़े मिथकों, भ्रांतियों और सामाजिक झिझक को दूर करने पर भी जोर रहेगा। इसके लिए डिजिटल और सामाजिक माध्यमों सहित संचार के दूसरे साधनों का भी इस्तेमाल किया जाएगा।

प्रदेश की अपनी माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता नीति
प्रदेश में माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी अलग-अलग योजनाओं और पहलों को एक छतरी के नीचे लाने की तैयारी भी है। इसके लिए राज्य माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता नीति विकसित करने पर काम किया जाएगा। इसके जरिये सेवाओं को समग्र और संस्थागत स्वरूप देने के साथ विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा। अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ अपनी जिम्मेदारियों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध और प्रभावी ढंग से निर्वहन करने के निर्देश दिए।

उन्होंने विद्यालयों में स्वच्छता व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने को कहा। साथ ही किशोरियों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करने के निर्देश दिए, जहां उन्हें स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं सुरक्षित एवं सहज तरीके से उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा, ताकि किशोरियों तक जरूरी सुविधाएं समय पर पहुंच सकें।

Leave a Comment

हम भारत के लोग
"हम भारत के लोग" यह वाक्यांश भारत के संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य है, जो यह दर्शाता है कि संविधान भारत के लोगों द्वारा बनाया गया है और उनकी शक्ति का स्रोत है. यह वाक्यांश भारत की संप्रभुता, लोकतंत्र और लोगों की भूमिका को उजागर करता है.
Click Here
जिम्मेदार कौन
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here
Slide 3 Heading
Lorem ipsum dolor sit amet consectetur adipiscing elit dolor
Click Here