samacharsecretary.com

ईरान में फिर शुरू हुआ परमाणु सेंटर का निर्माण, इजरायली हमले के बाद तीसरी बार हो रही मरम्मत

तेहरान  ईरान के पारचिन सैन्य परिसर में स्थित तालेगान-2 लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय केंद्र रहा है. पश्चिमी खुफिया एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, यह जगह ईरान के पुराने अमाड परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी हुई थी. वहां उच्च विस्फोटक परीक्षण किए जाने के आरोप लगे थे, जो परमाणु हथियार के डिजाइन से संबंधित हो सकते थे।  ईरान हमेशा से इन आरोपों से इनकार करता आया है. कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है. इस स्थल की भूमिगत कक्ष और संरचनाएं विशेषज्ञों के लिए संदेह का विषय बनी रहीं. पारचिन परिसर स्वयं सैन्य गतिविधियों का बड़ा केंद्र माना जाता है, इसलिए यहां कोई भी गतिविधि तुरंत नजर में आ जाती है।  अक्टूबर 2024 और मार्च 2026 में इजरायली हमलों ने तालेगान-2 स्थल को भारी नुकसान पहुंचाया. इन हमलों में ऊपर की संरचनाएं नष्ट हो गईं और भूमिगत कक्ष में छेद हो गए. यह पहली बार नहीं था जब यह जगह निशाने पर आई. विशेषज्ञों के अनुसार यह विनाश और फिर से निर्माण का तीसरा चक्र है।  हर बार हमले के बाद ईरान ने स्थल को फिर से खड़ा करने की कोशिश की है. मार्च 2026 के हमले के बाद जून में मरम्मत का काम शुरू हुआ. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ईरान अब सिर्फ मरम्मत नहीं कर रहा, बल्कि अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी जोड़ रहा है।   इनमें विस्फोट से बचाव के लिए विशेष सुरक्षा परतें, कंक्रीट के एप्रन और छेदों पर ढक्कन जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं. ये कदम दर्शाते हैं कि ईरान इस स्थल को लंबे समय तक चालू रखना चाहता है और भविष्य के संभावित हमलों से बचाने की तैयारी कर रहा है।  फिर से निर्माण की तेजी और सुरक्षा उपायों का महत्व जून से शुरू हुए मरम्मत कार्य में तेजी देखी जा रही है. भूमिगत कक्ष के क्षतिग्रस्त हिस्सों को ढकने और मजबूत करने का काम चल रहा है. कंक्रीट की परतें और सुरक्षात्मक ढांचे जोड़ने से यह साफ है कि ईरान सिर्फ पुरानी स्थिति बहाल नहीं कर रहा, बल्कि स्थल को और मजबूत बना रहा है।  इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी जैसे संगठनों ने इस पैटर्न को गहरी चिंता का विषय बताया है. उनका कहना है कि बार-बार विनाश के बावजूद स्थल को फिर से खड़ा करना सामान्य सैन्य गतिविधि से ज्यादा गंभीर संकेत दे सकता है. हालांकि, सैटेलाइट तस्वीरों से यह तय नहीं किया जा सकता कि वर्तमान काम किसी परमाणु संबंधित गतिविधि से जुड़ा है या नहीं. केवल संरचनात्मक बदलाव ही नजर आ रहे हैं. ईरान का पक्ष है कि ये सब सामान्य रक्षात्मक मरम्मत हैं और उसके परमाणु प्रयास शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए हैं।  यह घटना ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से चली आ रही बहसों को फिर से ताजा कर देती है. आईएईए लगातार ईरान से ज्यादा पारदर्शिता की मांग करता रहा है. पश्चिमी देश और इजरायल मानते हैं कि अतीत में उच्च विस्फोटक परीक्षणों का मकसद परमाणु हथियार की क्षमता विकसित करना था।  ईरान इन आरोपों को राजनीतिक दबाव बताता है. बार-बार हमले और पुनर्निर्माण का सिलसिला क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है. अगर यह स्थल वाकई किसी संवेदनशील गतिविधि के लिए इस्तेमाल होता रहा हो, तो उसकी बहाली से परमाणु अप्रसार के प्रयासों पर असर पड़ सकता है. दूसरी तरफ, अगर यह सिर्फ सैन्य विस्फोटक परीक्षण स्थल है, तो भी इसकी सुरक्षा बढ़ाया जाना ईरान की रक्षात्मक रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।   वैश्विक स्तर पर यह घटना तेल बाजार, क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक वार्ताओं को प्रभावित कर सकती है. संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य देश आईएईए की रिपोर्टों पर नजर रखे हुए हैं. ईरान अगर अंतरराष्ट्रीय निगरानी बढ़ाने को तैयार नहीं होता, तो प्रतिबंधों या अन्य दबाव बढ़ने की आशंका बनी रहती है. साथ ही, बार-बार होने वाले हमले मध्य पूर्व में संघर्ष को नया रूप भी दे सकते हैं।  आगे की निगरानी तालेगान-2 स्थल का तेजी से पुनर्निर्माण ईरान की दृढ़ता को दिखाता है कि वह बाहरी हमलों के बावजूद अपनी सैन्य सुविधाओं को बनाए रखना चाहता है. सुरक्षा उपायों का विस्तार इस बात का संकेत है कि भविष्य के खतरों को लेकर तैयारी की जा रही है. विशेषज्ञों की चिंता जायज है क्योंकि इतिहास में यह जगह संदेह के घेरे में रही है. फिर भी, वर्तमान तस्वीरों से परमाणु गतिविधि की पुष्टि नहीं होती।  आने वाले महीनों में सैटेलाइट निगरानी, आईएईए की जांच और कूटनीतिक विकास तय करेंगे कि यह पुनर्निर्माण कितना सामान्य है या कितना चिंताजनक. फिलहाल यह घटना ईरान-इजरायल तनाव और परमाणु मुद्दे की जटिलता को एक बार फिर रेखांकित करती है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सतर्क रहकर तथ्यों पर आधारित प्रतिक्रिया देनी होगी ताकि तनाव और न बढ़े। 

हाइड्रोजन ट्रेन में नहीं मिल रहे यात्री, रेलवे ने लिया बड़ा फैसला; दिल्ली तक बढ़ाया जा सकता है रूट

जींद/सोनीपत जिस ट्रेन में एक साथ 2,600 यात्री सफर कर सकते हैं, उसमें पूरे रास्ते कभी 40 तो कभी 60 यात्री ही बैठे हों. देश की इकलौती हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन फिलहाल कुछ ऐसी ही तस्वीर दिखा रही है. हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच चल रही इस ट्रेन में यात्रियों की संख्या इतनी कम रह रही है कि रेलवे को इसके रूट को एक्सटेंड करना पड़ रहा है. अब भारतीय रेल हाइड्रोजन ट्रेन में यात्री की संख्या बढ़ाने के लिए इसे दिल्ली तक ले आने की तैयारी कर रहा है. हालांकि, इसके रास्ते में कुछ तकनीकी और संचालन से जुड़ी चुनौतियां भी हैं।  यह हाइड्रोजन ट्रेन फिलहाल 89 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत सेक्शन पर चल रही है. अधिकारियों के मुताबिक, 2,600 यात्रियों की क्षमता वाली इस ट्रेन में जींद से सोनीपत तक के पूरे सफर में आमतौर पर सिर्फ 40 से 60 यात्री ही मिलते हैं. कम यात्रियों की वजह से ट्रेन रोज सिर्फ एक आने-जाने का फेरा लगा रही है. शुरुआती योजना के मुताबिक इसे जींद और सोनीपत के बीच रोज दो फेरे लगाने थे. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, नॉर्दर्न रेलवे पिछले करीब दो महीनों से इस ट्रेन का संचालन कर रहा है. ट्रेन के संचालन और नई तकनीक पर नजर रखने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम भी लगातार काम कर रही है।  दिल्ली तक क्यों बढ़ाना चाहता है रेलवे? कम फुटफॉल को देखते हुए रेलवे अब इस ट्रेन को दिल्ली के आजादपुर स्टेशन तक ले जाने के विकल्प पर काम कर रहा है. आजादपुर दिल्ली का प्रमुख थोक फल और सब्जी बाजार है. रेलवे का मानना है कि अगर ट्रेन दिल्ली तक पहुंचती है तो यात्रियों के लिए इसका इस्तेमाल ज्यादा सुविधाजनक हो सकता है. स्थानीय लोग भी लंबे समय से ट्रेन को दिल्ली तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. फिलहाल रेलवे इस विस्तार से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर काम कर रहा है. अंतिम फैसला सुरक्षा, तकनीकी जरूरतों और संचालन की व्यवहारिकता को देखने के बाद लिया जाएगा।  17 जुलाई को शुरू हुई थी हाइड्रोजन ट्रेन भारत की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन की शुरुआत 17 जुलाई को हुई थी. यह ट्रेन पूरी तरह स्वदेशी है. इसे रेलवे की क्लीन और सस्टेनेबल ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी की दिशा में एक अहम कदम बताया गया था. हाइड्रोजन ट्रेन में डीजल इंजन की तरह सीधे डीजल का इस्तेमाल नहीं होता. इसमें हाइड्रोजन से बिजली बनाई जाती है, जो ट्रेन को चलाने के लिए इस्तेमाल होती है. इसी वजह से इसे कम प्रदूषण वाली रेल तकनीक के तौर पर देखा जाता है. रेलवे के मुताबिक, भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो हाइड्रोजन बेस्ड रेल ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं।  इस रूट पर कम यात्रियों की समस्या नई नहीं है. रेलवे कर्मचारियों के मुताबिक, हाइड्रोजन ट्रेन से पहले इसी रूट पर चलने वाली डेमू ट्रेन में भी यात्रियों की संख्या काफी कम रहती थी. फिलहाल हाइड्रोजन ट्रेन के अलावा इस रूट पर 3 दूसरी डेमू ट्रेनें भी चल रही हैं. लेकिन इनमें भी बहुत ज्यादा भीड़ नहीं होती. रेलवे से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि जींद और सोनीपत के बीच रोजाना दफ्तर जाने वाले यात्रियों और विभिन्न उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या कम है. यही वजह है कि ट्रेनों को पर्याप्त यात्री नहीं मिल पा रहे हैं।  ट्रेन को दिल्ली तक ले जाने में क्या है परेशानी हाइड्रोजन ट्रेन का रूट दिल्ली तक बढ़ाने का विचार आसान जरूर लगता है, लेकिन रेलवे के सामने कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं. यह हाइड्रोजन ट्रेन 10 कोच की है और इसमें करीब 2,600 यात्रियों के बैठने की क्षमता है. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली से चलने वाली ट्रेनों में ज्यादा यात्रियों को ले जाने के लिए आमतौर पर 18-20 या उससे ज्यादा कोच की जरूरत पड़ सकती है. इसके अलावा दिल्ली के व्यस्त रेल नेटवर्क में पहले से ही ट्रेनों की आवाजाही काफी ज्यादा है. ऐसे में नई ट्रेन के लिए ट्रैक की उपलब्धता और समय तय करना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।  एक टैंक में 250-300 किमी तक चलती है ट्रेन ईंधन के मामले में फिलहाल बड़ी समस्या नहीं बताई जा रही है. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, हाइड्रोजन ट्रेन एक बार टैंक पूरी तरह भरने के बाद करीब 250 से 300 किलोमीटर तक चल सकती है. दिल्ली और जींद के बीच दूरी करीब 130 किलोमीटर है. यानी दूरी के हिसाब से ट्रेन एक टैंक में यह सफर कर सकती है. हालांकि, अभी ट्रेन में हाइड्रोजन भरने की सुविधा सिर्फ जींद में है. ऐसे में दिल्ली तक सेवा बढ़ाने पर ईंधन भरने की व्यवस्था और ट्रेन के संचालन की योजना को भी ध्यान में रखना होगा।  पानीपत-सफीदों रूट का विकल्प भी सुझाया स्थानीय लोगों के बीच ट्रेन को दिल्ली तक बढ़ाने की मांग है, लेकिन अगर दिल्ली रूट में संचालन संबंधी दिक्कतें आती हैं तो एक दूसरा विकल्प भी सुझाया गया है. स्थानीय यात्रियों का कहना है कि ट्रेन को सोनीपत से पानीपत और फिर सफीदों होते हुए जींद तक चलाया जा सकता है. इससे एक सर्किट तैयार हो जाएगा. पानीपत एक बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है. स्थानीय लोगों का मानना है कि इस रूट से रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ सकती है और ट्रेन का इस्तेमाल भी बेहतर हो सकता है. इस प्रस्ताव के मुताबिक ट्रेन जींद से चलकर सोनीपत, पानीपत और सफीदों होते हुए वापस जींद पहुंच सकती है. इस तरह करीब 180 किलोमीटर का एक सर्किट बन सकता है।  सुरक्षा के लिहाज से अभी कोई जल्दबाजी नहीं रेलवे अधिकारियों का कहना है कि हाइड्रोजन ट्रेन नई तकनीक पर आधारित है, इसलिए इसके विस्तार को लेकर जल्दबाजी नहीं की जाएगी. विशेषज्ञों की टीम ट्रेन के मौजूदा संचालन के साथ-साथ दिल्ली तक विस्तार के लिए किए जा रहे ट्रायल और तकनीकी पहलुओं पर नजर रख रही है. रेलवे के मुताबिक, यात्रियों की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है. यानी फिलहाल रेलवे के सामने सवाल सिर्फ यह नहीं है कि 2,600 सीटों वाली ट्रेन में 40-60 यात्री क्यों मिल रहे हैं, बल्कि यह भी है कि ज्यादा यात्रियों तक पहुंचने के लिए इसका रूट कैसे बदला जाए. दिल्ली तक विस्तार एक विकल्प है, जबकि पानीपत-सफीदों वाला सर्किट दूसरा रास्ता हो सकता है. अंतिम … Read more

द्वारका एक्सप्रेसवे से सोहना हाईवे तक बनेगा एलिवेटेड रोड, SPR पर ट्रैफिक होगा आसान

गुरुग्राम गुरुग्राम में सदर्न पेरिफेरल रोड (एसपीआर) पर एलिवेटेड रोड बनाया जाएगा। इस एलिवेटेड रोड के निर्माण से द्वारका एक्सप्रेसवे और गुरुग्राम-सोहना हाईवे आपस में जुड़ जाएंगे। इससे दिल्ली से मुंबई आवागमन आसान हो जाएगा। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) की ओर से इसके लिए अगले सप्ताह तक टेंडर जारी कर दिए जाने की उम्मीद है। जीएमडीए ने पिछले महीने करीब 775 करोड़ रुपये के टेंडर दस्तावेज बनाकर हरियाणा सरकार को भेजे थे। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की तरफ से गठित इंफ्रास्ट्रक्चर एवं इंजीनियरिंग कमेटी इन टेंडर दस्तावेजों की जांच कर रही है। उम्मीद है कि तीन से चार दिन के अंदर इन दस्तावेज को मंजूरी मिल जाएगी। इसके तुरंत बाद जीएमडीए की तरफ से इस एलिवेटेड रोड के निर्माण के टेंडर जारी कर दिए जाएंगे। मार्च में जारी हुए टेंडर को डीपीआर में कमी की वजह से इस टेंडर को रद्द कर दिया था। टेंडर आवंटन के 30 महीने के अंदर यह परियोजना पूरी होगी। चार लेन ­का बनेगा एलिवेटेड रोड द्वारका एक्सप्रेसवे और दिल्ली-जयपुर हाईवे से गुरुग्राम-सोहना हाईवे की तरफ चार-चार लेन का एलिवेटेड रोड बनाया जाएगा। एलिवेटेड रोड के नीचे एसपीआर पर तीन-तीन लेन की मुख्य सड़क और दो-दो लेन की सर्विस रोड तैयार होगी। क्लोवरलीफ भी बनेगा एलिवेटेड रोड को गुरुग्राम-सोहना हाईवे के एलिवेटेड रोड से जोड़ने के लिए वाटिका चौक पर क्लोवरलीफ तैयार किया जाएगा। अगले दो सप्ताह के अंदर एस्टीमेट बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बाद टेंडर दस्तावेज को मंजूरी के लिए हरियाणा सरकार के पास भेजा जाएगा। गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड की डीपीआर बन रही गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड को गुरुग्राम-सोहना हाईवे से जोड़ने के लिए गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड पर भी एलिवेटेड रोड के निर्माण की योजना है। जीएमडीए ने डीपीआर तैयार करने के लिए एक कंपनी को टेंडर आवंटित किया है। अगले दो माह में डीपीआर तैयार हो जाएगी, जिसे मंजूरी के लिए सरकार को भेजा जाएगा। प्रवीण चौधरी, मुख्य अभियंता, जीएमडीए, ''एसपीआर पर एलिवेटेड रोड के निर्माण के लिए टेंडर दस्तावेज तैयार हैं। सरकार से मंजूरी मिलने के बाद टेंडर जारी कर दिए जाएंगे। अगले सप्ताह में मंजूरी मिलने की उम्मीद है। ‘’ गुरुग्राम में हरित क्षेत्र का होगा रखरखाव इसके साथ ही जीएमडीए ने गुरुग्राम में बख्तावर चौक से लेकर सुभाष चौक तक मुख्य सड़क के दोनों तरफ हरित क्षेत्र के रखरखाव की योजना बनाई है। इसके तहत करीब तीन करोड़ रुपये की लागत आएगी। अगले महीने में इस योजना के तहत टेंडर जारी हो जाएगा। ठेकेदार को चार महीने के अंदर काम पूरा करना होगा। 12 महीने तक देखरेख की जिम्मेदारी ठेकेदार की रहेगी।

श्रमिक की बहाली का आदेश नहीं माना, ग्वालियर हाई कोर्ट ने मंडी समिति की अपील खारिज की

ग्वालियर  बहाली का आदेश होने के बावजूद श्रमिक को सेवा में वापस नहीं लेने के मामले में कृषि उपज मंडी समिति को अब 6 लाख 44 हजार 137 रुपये का भुगतान करना होगा।मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने मंडी समिति की रिट अपील खारिज करते हुए एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने 17 सितंबर को कृषि उपज मंडी समिति की अपील पर सुनवाई की। श्रम न्यायालय ने दिया था बहाली का आदेश मामला राकेश सक्सेना से जुड़ा है। श्रम न्यायालय क्रमांक-1, ग्वालियर ने एक फरवरी 2003 को आदेश जारी कर राकेश सक्सेना को बिना पिछले वेतन के सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया था। यह आदेश हाई कोर्ट तक पहुंचा, लेकिन बरकरार रहा। इसके बावजूद उनकी बहाली नहीं की गई और वे 31 अगस्त 2007 को सेवानिवृत्त हो गए। वेतन के लिए श्रम न्यायालय में दिया आवेदन इसके बाद राकेश सक्सेना ने औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 33-सी(2) के तहत श्रम न्यायालय में आवेदन देकर बहाली के आदेश से सेवानिवृत्ति तक के वेतन की मांग की। उन्होंने इसकी गणना भी प्रस्तुत की। मंडी समिति ने श्रम न्यायालय में लिखित जवाब दिया, लेकिन गणना पर कोई आपत्ति नहीं की। हाई कोर्ट में दी थी चुनौती श्रम न्यायालय ने 6 लाख 44 हजार 137 रुपये भुगतान का आदेश दिया। मंडी समिति ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान उसके अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि गणना पर श्रम न्यायालय में कोई विवाद नहीं किया गया था। अब अलग गणना पत्र के जरिए आपत्ति की जा रही है।  

2027 चुनाव से पहले AAP का बड़ा संगठनात्मक अभियान, पंजाब में घर-घर पहुंचेगी पार्टी

चंडीगढ़  पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी अब सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में किए गए कामों और योजनाओं को लेकर सीधे लोगों के बीच जाने की तैयारी में है। इसके तहत 20 सितंबर से प्रदेशभर में बड़े स्तर पर डोर-टू-डोर अभियान शुरू किया जाएगा। अभियान में पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ बड़े नेता भी घर-घर जाकर लोगों से संवाद करेंगे और मान सरकार के कामकाज की जानकारी देंगे। आप नेता मनीष सिसोदिया ने कहा कि पार्टी पंजाब के लोगों के बीच जाकर सरकार के कामों को रखेगी। उन्होंने दावा किया कि भगवंत मान सरकार ने अपने साढ़े चार साल के कार्यकाल में लोगों से किए गए वादों और गारंटियों को पूरा किया है। नशे के खिलाफ कई काम किए: सिसोदिया उन्होंने कहा कि पंजाब के लोगों ने मान सरकार पर भरोसा जताया है और सरकार के कामों से लोग खुश हैं। सिसोदिया ने कहा कि पंजाब की जवानी को बचाने के लिए सरकार ने नशे के खिलाफ कई स्तर पर काम किया है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। सिसोदिया ने पिछली सरकारों पर पंजाब में नशा फैलाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि आप सरकार का फोकस युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने पर है। शिक्षा को भी बनाया जाएगा मुद्दा उन्होंने कहा कि सरकार के कामों को लेकर केवल राजनीतिक मंचों पर चर्चा करने के बजाय अब पार्टी कार्यकर्ता सीधे लोगों के घरों तक पहुंचेंगे। इस दौरान नौजवानों, व्यापारियों, महिलाओं और अन्य वर्गों से बातचीत की जाएगी। पार्टी की ओर से दावा किया गया कि इन वर्गों में सरकार के कामकाज को लेकर संतुष्टि है। सिसोदिया ने पंजाब की शिक्षा व्यवस्था में हुए बदलावों को भी अभियान का प्रमुख मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार हुआ है। उनके अनुसार सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा मिलने से माता-पिता में भी संतुष्टि बढ़ी है। 20 सितंबर से होगा अभियान शुरू 20 सितंबर से शुरू होने वाला यह अभियान आप के लिए सरकार के कामों को बूथ और घर-घर स्तर तक पहुंचाने का माध्यम होगा। पार्टी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं को इसमें सक्रिय भूमिका निभाने के लिए मैदान में उतारा जाएगा। इसके जरिये पार्टी 2027 के चुनाव से पहले संगठन और सरकार के कामों को लेकर जनता के बीच अपनी पहुंच मजबूत करने की कवायद करेगी।

PM Kisan 24th Installment: ₹2,000 पाने के लिए अभी निपटा लें ये 3 जरूरी काम

 नई दिल्ली आप भी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं? अगर चाहते हैं कि ₹2,000 की ये किस्त बिना किसी रुकावट के आपके खाते में पहुंचे, तो सिर्फ तारीख का इंतजार न करें. इसके लिए अभी कुछ जरूरी चीजें चेक कर लें. ई-केवाईसी (e-KYC), जमीन का सत्यापन और आधार से बैंक अकाउंट की लिंकिंग में कोई कमी रह गई तो किस्त अटक सकती है।  प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की किस्तें आम तौर पर करीब चार महीने के अंतराल पर जारी की जाती हैं. 23वीं किस्त 20 जून 2026 को जारी की गई थी. ऐसे में अगली यानी 24वीं किस्त अक्टूबर में जारी होने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि, अभी सरकार की ओर से 24वीं किस्त जारी करने की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है।  इसलिए किसानों को आधिकारिक तारीख का इंतजार करने के साथ-साथ अपने रिकॉर्ड भी चेक कर लेने चाहिए. अगर योजना से जुड़ी जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं है, तो किस्त के भुगतान में परेशानी हो सकती है।  पहला काम: ई-केवाईसी जरूर करा लें अगर आपने अभी तक ई-केवाईसी नहीं कराई है, तो इसे जल्द पूरा कर लें. पीएम किसान योजना के लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी जरूरी है. ई-केवाईसी पूरी नहीं होने पर किस्त का भुगतान अटक सकता है. पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप के जरिए ई-केवाईसी की स्थिति चेक कर सकते हैं. अगर आपको ऑनलाइन प्रक्रिया में परेशानी हो रही है, वे नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) की मदद भी ले सकते हैं।  दूसरा काम: लैंड वेरिफिकेशन चेक करें किस्त के लिए जमीन से जुड़े रिकॉर्ड का सही होना भी जरूरी है. पीएम किसान के तहत लाभ उन्हीं किसान परिवारों को मिलता है जिनके नाम खेती योग्य जमीन का रिकॉर्ड दर्ज है. इसलिए किसान यह जांच लें कि योजना में दर्ज जमीन की जानकारी सही है या नहीं और जमीन का सत्यापन पूरा हुआ है या नहीं।  अगर जमीन के रिकॉर्ड में नाम, खाता या दूसरी जानकारी को लेकर कोई गड़बड़ी है, तो उसे संबंधित राज्य के राजस्व विभाग या संबंधित अधिकारी के जरिए ठीक कराया जा सकता है. जमीन से जुड़ी जानकारी का सत्यापन पूरा नहीं होने पर भी किस्त प्रभावित हो सकती है।  तीसरा काम: आधार-बैंक खाता लिंकिंग पीएम किसान की रकम सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है. इसके लिए बैंक खाते का आधार से लिंक यानी आधार सीडेड होना जरूरी है. अगर आपका बैंक खाता आधार से लिंक नहीं है, तो किस्त के भुगतान में दिक्कत आ सकती है. किसान अपने बैंक में जाकर आधार लिंकिंग की स्थिति चेक करा सकते हैं. साथ ही यह भी देख लें कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना में दर्ज बैंक खाते की जानकारी सही है या नहीं. खाते में नाम या दूसरे विवरण में गलती होने पर भी भुगतान अटक सकता है।  पैसा नहीं आया तो ऐसे चेक करें स्टेटस अगर 24वीं किस्त जारी होने के बाद आपके खाते में पैसा नहीं आता है, तो सबसे पहले पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर अपना लाभार्थी स्टेटस चेक करें. वहां भुगतान की स्थिति और बैंक से जुड़ी जानकारी देखी जा सकती है. किसान यह भी जांच सकते हैं कि उनका नाम बेनिफिशियरी लिस्ट (लाभार्थी सूची) में है या नहीं. अगर कोई जानकारी गलत है या जरूरी प्रक्रिया अधूरी है, तो उसे संबंधित विभाग के जरिए ठीक कराया जा सकता है।  क्या है प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि? प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना यानी PM-KISAN फरवरी 2019 में शुरू की गई थी. इस योजना का उद्देश्य पात्र किसान परिवारों को खेती से जुड़ी जरूरतों के लिए आर्थिक मदद देना है. शुरुआत में यह योजना छोटे और सीमांत किसानों के लिए थी, लेकिन बाद में इसका दायरा बढ़ाकर खेती योग्य जमीन रखने वाले सभी पात्र किसान परिवारों तक किया गया. इसके तहत पात्र किसान परिवार को सालाना ₹6,000 दिए जाते हैं. यह रकम ₹2,000 की तीन बराबर किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है. इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान परिवार के नाम खेती योग्य जमीन का रिकॉर्ड होना चाहिए और लाभार्थी का सत्यापन राज्य या केंद्रशासित प्रदेश की ओर से किया जाता है।  कुछ श्रेणियों के लोगों को योजना से बाहर रखा गया है, जैसे कुछ संवैधानिक पदों पर रहने वाले व्यक्ति, सरकारी कर्मचारी और आयकर देने वाले लोग. लाभ लेने के लिए आधार से जुड़ी जानकारी, बैंक खाता, जमीन का रिकॉर्ड और ई-केवाईसी जैसी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं. 20 जून 2026 को जारी 23वीं किस्त में 9.44 करोड़ से ज्यादा किसानों को करीब ₹18,880 करोड़ की राशि दी गई थी. योजना की शुरुआत से 23 किस्तों में अब तक ₹4.46 लाख करोड़ से ज्यादा की रकम किसानों को दी जा चुकी है।   

ऑस्कर 2027 में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी ये मराठी थ्रिलर फिल्म, 8.9 रेटिंग ने जीता दिल

मुंबई  फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) ने उस फिल्म के नाम का ऐलान कर दिया है, जिसे ऑस्कर 2027 के लिए भारत की ओर से भेजा जाएगा। इस बार भारत की आधिकारिक प्रविष्टि बनने की रेस में देशभर की कुल 33 फिल्में शामिल थीं। इन फिल्मों में से FFI ने IMDb पर 8.9 रेटिंग वाली मराठी थ्रिलर फिल्म को चुना है। क्या है इस फिल्म का नाम? शुक्रवार को फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने घोषणा की कि मराठी थ्रिलर फिल्म ‘गोंधळ’ ऑस्कर 2027 के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि होगी। संतोष डावखर के निर्देशन में बनी यह फिल्म 99वें अकादमी पुरस्कार (Oscars) में ‘बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म’ कैटेगरी में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी। क्या है इस फिल्म की कहानी? फिल्म की कहानी एक नवविवाहित जोड़े के इर्द-गिर्द घूमती है और पूरी कहानी एक ही रात में होने वाले पारंपरिक महाराष्ट्रीयन ‘गोंधळ’ अनुष्ठान के दौरान सामने आती है। शुरुआत में यह रात एक सामान्य धार्मिक आयोजन जैसी लगती है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, रिश्तों से जुड़े पुराने राज, प्यार, जुनून और सत्ता की लड़ाई सामने आने लगती है। गोंधल क्या होता है? महाराष्ट्र में गोंधळ एक पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान है, जो आमतौर पर देवी-देवताओं की आराधना और उनका आशीर्वाद लेने के लिए किया जाता है। इसमें विशेष तरह के गीत, वाद्ययंत्र, कथाएं और पूजा की रस्में शामिल होती हैं। कई परिवारों में शादी या किसी अन्य शुभ अवसर पर भी गोंधळ कराया जाता है। फिल्म इसी धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल को अपनी कहानी का अहम हिस्सा बनाती है। फिल्म की स्टार कास्ट फिल्म के लेखक और निर्देशक संतोष डावखर हैं। इसमें इशिता देशमुख ने सुमन, योगेश सोहनी ने आनंद, किशोर कदम ने भिवाबा, निषाद भोईर ने सर्जेराव और सुरेश विश्वकर्मा ने पाटिल का किरदार निभाया है। फिल्म का संगीत दिग्गज संगीतकार इलैयाराजा ने दिया है। मिल चुके हैं कई सारे अवॉर्ड्स ‘गोंधळ’ इससे पहले कई प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में अपनी छाप छोड़ चुकी है। 56वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) 2025 में संतोष डावखर को फिल्म के लिए बेस्ट डायरेक्टर का ‘रजत मयूर’ पुरस्कार मिला था। इसके अलावा फिल्म ने बेंगलुरु अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में FIPRESCI पुरस्कार भी जीता है। पुणे अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (PIFF) में भी फिल्म को कई प्रमुख सम्मान मिल चुके हैं। ओटीटी पर देख सकते हैं यह फिल्म? ‘गोंधळ’ साल 2025 में रिलीज हुई थी, लेकिन अभी तक इसे किसी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज नहीं किया गया है। 33 फिल्मों के बीच से हुआ चयन दिलचस्प बात यह है कि ऑस्कर 2027 में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि बनने की रेस में कुल 33 फिल्में शामिल थीं। इनमें 14 हिंदी फिल्में थीं। इसके अलावा मराठी, तेलुगू और गुजराती की 4-4 फिल्में, तमिल की 3 फिल्में, मलयालम और नागामीज की 1-1 फिल्म और एक साइलेंट (मूक) फिल्म भी इस रेस में शामिल थी। इन सभी को पीछे छोड़ते हुए ‘गोंधळ’ को भारत की आधिकारिक एंट्री के तौर पर चुना गया है।

प्राथमिक शिक्षा से विदेश पढ़ाई तक आर्थिक मदद, 2.24 करोड़ SC छात्रों को मिला छात्रवृत्ति का लाभ

पिछले 12 वर्षों में 2.24 करोड़ से अधिक अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को 7 हजार 788 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित प्राथमिक शिक्षा से विदेश अध्ययन तक विद्यार्थियों को मिल रहा आर्थिक सहायता का संबल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च, तकनीकी, व्यावसायिक एवं विदेश अध्ययन तक विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। प्रदेश में वर्ष 2014-15 से वर्ष 2025-26 तक अनुसूचित जाति के कुल 2 करोड़ 24 लाख 59 हजार 478 विद्यार्थियों को विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से 7 हजार 788 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है। छात्रवृत्ति की राशि डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) के माध्यम से पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। राज्य छात्रवृत्ति से 1 करोड़ 40 लाख से अधिक विद्यार्थियों को मिला लाभ अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही शिक्षा से जोड़ने और उनकी शैक्षणिक निरंतरता बनाए रखने के लिए राज्य छात्रवृत्ति योजना संचालित की जा रही है। वर्ष 2014-15 से अब तक कक्षा पहली से आठवीं तक के 1 करोड़ 40 लाख 41 हजार 131 विद्यार्थियों को 466 करोड़ 93 लाख रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति प्रदान की गई है। योजना के अंतर्गत कक्षा पहली से पांचवीं तक की बालिकाओं को 10 माह की अवधि के लिए 250 रुपये प्रतिमाह, कक्षा छठवीं से आठवीं तक के बालकों को 200 रुपये प्रतिमाह और बालिकाओं को 600 रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। यह राशि शत-प्रतिशत राज्य शासन द्वारा वहन की जाती है। प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति से 35 लाख से अधिक विद्यार्थियों को मिला शैक्षणिक संबल कक्षा 9वीं एवं 10वीं के विद्यार्थियों की शिक्षा में निरंतरता बनाए रखने के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना संचालित की जा रही है। वर्ष 2014-15 से अब तक योजना के अंतर्गत 35 लाख 73 हजार 613 विद्यार्थियों को 993 करोड़ 71 लाख रुपये से अधिक की राशि वितरित की गई है। योजना के अंतर्गत 2.50 लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले पालकों के बालकों को 600 रुपये और बालिकाओं को 1,200 रुपये 10 माह के लिए प्रदान किए जाते हैं। वहीं 2.50 लाख रुपये तक की वार्षिक आय सीमा वाले परिवारों के छात्रावासी विद्यार्थियों को 7 हजार रुपये तथा गैर-छात्रावासी विद्यार्थियों को 3 हजार 500 रुपये वार्षिक अकादमिक भत्ता दिया जाता है। कक्षा 11वीं-12वीं के विद्यार्थियों को 620 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता उच्चतर माध्यमिक शिक्षा तथा पॉलिटेक्निक डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की शैक्षणिक निरंतरता बनाए रखने के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति समूह-4 संचालित की जा रही है। इसके अंतर्गत अब तक 21 लाख 11 हजार 249 छात्र-छात्राओं को 620 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित की जा चुकी है। केंद्र एवं राज्य शासन के 60:40 अनुपात में संचालित इस योजना के अंतर्गत कक्षा 11वीं-12वीं के गैर-छात्रावासी विद्यार्थियों को 2 हजार 500 रुपये और छात्रावासी विद्यार्थियों को 4 हजार रुपये वार्षिक अकादमिक भत्ता दिया जा रहा है। उच्च, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा के लिए 5 हजार 708 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों की उच्च, तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा में भागीदारी बढ़ाने के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत महाविद्यालयीन एवं विश्वविद्यालयीन स्तर के 27 लाख 33 हजार 485 छात्र-छात्राओं को 5 हजार 708 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति एवं शिक्षण शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ दिया गया है। समूह-1 में एमबीबीएस, इंजीनियरिंग, एमडी, एमएस, एमबीए, एमसीए, एमफिल, पीएचडी आदि पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को शिक्षण शुल्क के साथ गैर-छात्रावासी विद्यार्थियों को 7 हजार रुपये तथा छात्रावासी विद्यार्थियों को 13 हजार 500 रुपये वार्षिक अकादमिक भत्ता दिया जाता है। समूह-2 में बी.फार्मा, नर्सिंग, होटल मैनेजमेंट, एमएससी, एमकॉम, एमएड आदि पाठ्यक्रमों के लिए गैर-छात्रावासी विद्यार्थियों को 6 हजार 500 रुपये एवं छात्रावासी विद्यार्थियों को 9 हजार 500 रुपये तथा समूह-3 में बीए, बीएससी, बीकॉम, बीएड आदि पाठ्यक्रमों के लिए गैर-छात्रावासी विद्यार्थियों को 3 हजार रुपये एवं छात्रावासी विद्यार्थियों को 6 हजार रुपये वार्षिक अकादमिक भत्ता दिया जाता है। शासकीय शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए शुल्क भुगतान के संबंध में आय सीमा का बंधन समाप्त कर दिया गया है। विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति से विद्यार्थियों को मिल रहे उच्च शिक्षा के वैश्विक अवसर अनुसूचित जाति वर्ग के मेधावी विद्यार्थियों को विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए ‘विदेश में उच्च शिक्षा ग्रहण करने हेतु छात्रवृत्ति योजना’ संचालित की जा रही है। योजना के अंतर्गत प्रतिवर्ष 50 प्रतिभावान विद्यार्थियों का चयन किया जाता है। पात्र विद्यार्थियों के पालकों की वार्षिक आय सीमा 8 लाख रुपये तक निर्धारित है। योजना के माध्यम से अब तक 150 से अधिक शोधार्थी एवं विद्यार्थी अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, रूस, स्विट्जरलैंड, पोलैंड, चीन, मलेशिया और सिंगापुर सहित विभिन्न देशों में अध्ययन कर चुके हैं। योजना के अंतर्गत इंजीनियरिंग, प्योर एवं एप्लाइड साइंस, एग्रीकल्चर, मेडिकल, मैनेजमेंट, इंटरनेशनल कॉमर्स, लॉ, फॉरेस्ट्री एवं मानविकी विषयों में अध्ययन के लिए शिक्षण शुल्क, मेडिकल इंश्योरेंस, वीजा शुल्क, निर्वाह भत्ता एवं हवाई यात्रा का किराया राज्य शासन द्वारा वहन किया जाता है।  

पैरासिटामोल 500mg और टेल्मिसार्टन 40mg क्वालिटी टेस्ट में फेल, अस्पतालों ने रोका इस्तेमाल

नागपुर नागपुर में महाराष्ट्र फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की क्वालिटी टेस्ट में दो आम इस्तेमाल होने वाली दवाएं पैरासिटामोल और ब्लड प्रेशर की एक दवा फेल हो गई हैं. इसके बाद सरकारी अस्पतालों ने इनको मरीजों को देने पर रोक लगा दी है औरस्टॉक को वापस मंगा लिया है. ये दवाएं गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) और इंदिरा गांधी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल को सप्लाई की गई थीं. इस घटना ने दवाओं की क्वालिटी और उन्हें लेने से पहले टैबलेट की जांच करने की अहमियत को लेकर चिंता बढ़ा दी है।  रिपोर्ट्स के मुताबिक, FDA ने रूटीन टेस्टिंग के दौरान सैंपल लिए थे. टेस्ट के नतीजों के बाद प्रभावित स्टॉक का डिस्ट्रीब्यूशन रोकने और उसे वापस मंगाने के निर्देश दिए गए. इन दवाओं में पैरासिटामोल 500 mg और टेल्मिसार्टन 40 mg शामिल थीं, जिसका इस्तेमाल हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है. रिपोर्ट्स में बताया गया है कि दवाएं इंदौर की एक दवा कंपनी ने बनाई थी।  1.25 लाख पैरासिटामोल टैबलेट वापस मंगवा ली गईं TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल को FDA से सूचना मिलने के बाद लगभग 1.25 लाख पैरासिटामोल टैबलेट वापस मंगवा ली गईं. ये टैबलेट जुलाई में सप्लाई की गई थीं और टेस्ट के नतीजे मिलने के बाद अस्पताल ने इनका मरीजों को देने पर रोक लगा दी है. जिन पैरासिटामोल टैबलेट की बात हो रही है, उन्हें 'Parasev 500' के नाम से बेचा गया था और वे बैच नंबर PTTC-108 की थीं. सैंपल के ज़रूरी क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर खरा न उतरने के बाद, एहतियात के तौर पर बाकी स्टॉक वापस मंगा लिया गया. दोनों अस्पतालों ने कुल मिलाकर एक लाख से ज्यादा टैबलेट खरीदी थीं, जबकि अकेले GMCH के पास वापस मंगाए जाने के समय प्रभावित स्टॉक में से लगभग 25,000 टैबलेट मौजूद थीं।  दूसरी दवा टेल्मिसार्टन 40 mg थी, जो आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए दी जाती है. प्रभावित बैच की पहचान CHPLT 416 के तौर पर की गई. टैबलेट पर दिखने वाले दागों के अलावा, यह दवा डिसोल्यूशन टेस्ट में भी फेल हो गई. यह जरूरी है क्योंकि दवा के सही ढंग से काम करने के लिए टैबलेट का अपना एक्टिव इंग्रीडिएंट ठीक से रिलीज करना ज़रूरी होता है. अस्पतालों को निर्देश दिया गया कि वे इसका वितरण रोक दें और वार्ड व फार्मेसी से उपलब्ध स्टॉक वापस मंगा लें.इन दवाओं को खराब क्लालिटी का बताया गया है, हालांकि ये नकली नहीं है।  घटिया और नकली दवा में होता है अंतर घटिया दवा एक असली दवा होती है जो जरूरी क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर खरी नहीं उतरती. इसमें दवा के रूप-रंग, असर, शुद्धता, घुलने की क्षमता, स्टेबिलिटी या क्वालिटी से जुड़े दूसरे पैरामीटर्स में कमी हो सकती है,  वहीं, नकली दवा में गलत इंग्रीडिएंट हो सकता है, एक्टिव इंग्रीडिएंट बहुत कम या बिल्कुल नहीं हो सकता है, या फिर उसकी पहचान या बनाने वाली कंपनी के बारे में गलत जानकारी हो सकती है। 

भारत-पाक हॉकी मैच के लिए पाकिस्तान ने मांगा न्यूट्रल वेन्यू, भारत ने दिया साफ जवाब

चंडीगढ़  पंजाब में होने वाली एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी को लेकर भारत-पाकिस्तान मुकाबले पर संकट के बादल मंडरा गए हैं। पाकिस्तान हॉकी महासंघ (पीएचएफ) ने सुरक्षा और दोनों देशों के बीच मौजूदा संवेदनशील परिस्थितियों का हवाला देते हुए टूर्नामेंट को तटस्थ स्थान पर कराने की मांग की है। पाकिस्तान की ओर से एशियाई हॉकी महासंघ (एएचएफ) के समक्ष यह मांग रखी गई है कि या तो पूरा टूर्नामेंट भारत से बाहर कराया जाए अथवा पाकिस्तान के मुकाबले किसी न्यूट्रल वेन्यू पर करवाए जाएं। पाकिस्तान हॉकी महासंघ के अंतरिम अध्यक्ष मोहिउद्दीन अहमद वानी ने कहा है कि यह कदम खिलाड़ियों और अधिकारियों की सुरक्षा, सम्मान और अनुकूल माहौल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। हालांकि पाकिस्तान ने टूर्नामेंट से हटने की बात नहीं कही है और भारत समेत अन्य टीमों के खिलाफ खेलने की प्रतिबद्धता जताई है। हॉकी इंडिया ने ठुकराई न्यूट्रल वेन्यू की मांग पाकिस्तान की मांग के बाद हॉकी इंडिया ने फिलहाल साफ कर दिया है कि टूर्नामेंट के आयोजन स्थल में कोई बदलाव नहीं होगा। हॉकी इंडिया के महासचिव और एएचएफ के उपाध्यक्ष भोला नाथ सिंह ने कहा कि यदि पाकिस्तान को एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में खेलना है तो उसे भारत आना होगा। जानकारी अनुसार पाकिस्तान के नहीं आने की स्थिति में ओमान या बांग्लादेश को विकल्प के तौर पर शामिल किया जा सकता है। 1 नवंबर को होना है मुकाबला एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन पंजाब में 27 अक्टूबर से 5 नवंबर तक होना है। जालंधर में 27 अक्टूबर से 2 नवंबर तक उद्घाटन समारोह और लीग चरण के मुकाबले होंगे, जबकि सेमीफाइनल और फाइनल मोहाली में खेले जाएंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भारत और पाकिस्तान के बीच बहुप्रतीक्षित मुकाबला 1 नवंबर को जालंधर में होना है। पंजाब में लंबे समय बाद भारत-पाकिस्तान हॉकी मुकाबला देखने को लेकर हॉकी प्रेमियों में खासा उत्साह था। ऐसे में पाकिस्तान की ओर से न्यूट्रल वेन्यू की मांग आने के बाद इस मुकाबले के आयोजन को लेकर स्थिति फिर असमंजस में पहुंच गई है। चार और देश भी उतरेंगे मैदान में टूर्नामेंट में भारत, पाकिस्तान के अलावा चीन, जापान, मलेशिया और दक्षिण कोरिया की टीमें प्रस्तावित हैं। पाकिस्तान के नहीं खेलने की स्थिति में ओमान और बांग्लादेश को विकल्प के तौर पर रखा गया है। भारत-पाकिस्तान के बीच पिछले कुछ समय से द्विपक्षीय खेल संबंधों को लेकर अलग स्थिति रही है, हालांकि दोनों देशों की टीमें बहुदेशीय प्रतियोगिताओं में आमने-सामने आती रही हैं। अब सबकी नजर एशियाई हॉकी महासंघ के अगले फैसले पर है कि पाकिस्तान की न्यूट्रल वेन्यू की मांग पर क्या निर्णय होता है और क्या 1 नवंबर को जालंधर में भारत-पाकिस्तान हॉकी मुकाबला देखने को मिलेगा।