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पैरासिटामोल 500mg और टेल्मिसार्टन 40mg क्वालिटी टेस्ट में फेल, अस्पतालों ने रोका इस्तेमाल

नागपुर नागपुर में महाराष्ट्र फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की क्वालिटी टेस्ट में दो आम इस्तेमाल होने वाली दवाएं पैरासिटामोल और ब्लड प्रेशर की एक दवा फेल हो गई हैं. इसके बाद सरकारी अस्पतालों ने इनको मरीजों को देने पर रोक लगा दी है औरस्टॉक को वापस मंगा लिया है. ये दवाएं गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GMCH) और इंदिरा गांधी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल को सप्लाई की गई थीं. इस घटना ने दवाओं की क्वालिटी और उन्हें लेने से पहले टैबलेट की जांच करने की अहमियत को लेकर चिंता बढ़ा दी है।  रिपोर्ट्स के मुताबिक, FDA ने रूटीन टेस्टिंग के दौरान सैंपल लिए थे. टेस्ट के नतीजों के बाद प्रभावित स्टॉक का डिस्ट्रीब्यूशन रोकने और उसे वापस मंगाने के निर्देश दिए गए. इन दवाओं में पैरासिटामोल 500 mg और टेल्मिसार्टन 40 mg शामिल थीं, जिसका इस्तेमाल हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है. रिपोर्ट्स में बताया गया है कि दवाएं इंदौर की एक दवा कंपनी ने बनाई थी।  1.25 लाख पैरासिटामोल टैबलेट वापस मंगवा ली गईं TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल को FDA से सूचना मिलने के बाद लगभग 1.25 लाख पैरासिटामोल टैबलेट वापस मंगवा ली गईं. ये टैबलेट जुलाई में सप्लाई की गई थीं और टेस्ट के नतीजे मिलने के बाद अस्पताल ने इनका मरीजों को देने पर रोक लगा दी है. जिन पैरासिटामोल टैबलेट की बात हो रही है, उन्हें 'Parasev 500' के नाम से बेचा गया था और वे बैच नंबर PTTC-108 की थीं. सैंपल के ज़रूरी क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर खरा न उतरने के बाद, एहतियात के तौर पर बाकी स्टॉक वापस मंगा लिया गया. दोनों अस्पतालों ने कुल मिलाकर एक लाख से ज्यादा टैबलेट खरीदी थीं, जबकि अकेले GMCH के पास वापस मंगाए जाने के समय प्रभावित स्टॉक में से लगभग 25,000 टैबलेट मौजूद थीं।  दूसरी दवा टेल्मिसार्टन 40 mg थी, जो आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए दी जाती है. प्रभावित बैच की पहचान CHPLT 416 के तौर पर की गई. टैबलेट पर दिखने वाले दागों के अलावा, यह दवा डिसोल्यूशन टेस्ट में भी फेल हो गई. यह जरूरी है क्योंकि दवा के सही ढंग से काम करने के लिए टैबलेट का अपना एक्टिव इंग्रीडिएंट ठीक से रिलीज करना ज़रूरी होता है. अस्पतालों को निर्देश दिया गया कि वे इसका वितरण रोक दें और वार्ड व फार्मेसी से उपलब्ध स्टॉक वापस मंगा लें.इन दवाओं को खराब क्लालिटी का बताया गया है, हालांकि ये नकली नहीं है।  घटिया और नकली दवा में होता है अंतर घटिया दवा एक असली दवा होती है जो जरूरी क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर खरी नहीं उतरती. इसमें दवा के रूप-रंग, असर, शुद्धता, घुलने की क्षमता, स्टेबिलिटी या क्वालिटी से जुड़े दूसरे पैरामीटर्स में कमी हो सकती है,  वहीं, नकली दवा में गलत इंग्रीडिएंट हो सकता है, एक्टिव इंग्रीडिएंट बहुत कम या बिल्कुल नहीं हो सकता है, या फिर उसकी पहचान या बनाने वाली कंपनी के बारे में गलत जानकारी हो सकती है। 

भारत-पाक हॉकी मैच के लिए पाकिस्तान ने मांगा न्यूट्रल वेन्यू, भारत ने दिया साफ जवाब

चंडीगढ़  पंजाब में होने वाली एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी को लेकर भारत-पाकिस्तान मुकाबले पर संकट के बादल मंडरा गए हैं। पाकिस्तान हॉकी महासंघ (पीएचएफ) ने सुरक्षा और दोनों देशों के बीच मौजूदा संवेदनशील परिस्थितियों का हवाला देते हुए टूर्नामेंट को तटस्थ स्थान पर कराने की मांग की है। पाकिस्तान की ओर से एशियाई हॉकी महासंघ (एएचएफ) के समक्ष यह मांग रखी गई है कि या तो पूरा टूर्नामेंट भारत से बाहर कराया जाए अथवा पाकिस्तान के मुकाबले किसी न्यूट्रल वेन्यू पर करवाए जाएं। पाकिस्तान हॉकी महासंघ के अंतरिम अध्यक्ष मोहिउद्दीन अहमद वानी ने कहा है कि यह कदम खिलाड़ियों और अधिकारियों की सुरक्षा, सम्मान और अनुकूल माहौल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। हालांकि पाकिस्तान ने टूर्नामेंट से हटने की बात नहीं कही है और भारत समेत अन्य टीमों के खिलाफ खेलने की प्रतिबद्धता जताई है। हॉकी इंडिया ने ठुकराई न्यूट्रल वेन्यू की मांग पाकिस्तान की मांग के बाद हॉकी इंडिया ने फिलहाल साफ कर दिया है कि टूर्नामेंट के आयोजन स्थल में कोई बदलाव नहीं होगा। हॉकी इंडिया के महासचिव और एएचएफ के उपाध्यक्ष भोला नाथ सिंह ने कहा कि यदि पाकिस्तान को एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में खेलना है तो उसे भारत आना होगा। जानकारी अनुसार पाकिस्तान के नहीं आने की स्थिति में ओमान या बांग्लादेश को विकल्प के तौर पर शामिल किया जा सकता है। 1 नवंबर को होना है मुकाबला एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन पंजाब में 27 अक्टूबर से 5 नवंबर तक होना है। जालंधर में 27 अक्टूबर से 2 नवंबर तक उद्घाटन समारोह और लीग चरण के मुकाबले होंगे, जबकि सेमीफाइनल और फाइनल मोहाली में खेले जाएंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भारत और पाकिस्तान के बीच बहुप्रतीक्षित मुकाबला 1 नवंबर को जालंधर में होना है। पंजाब में लंबे समय बाद भारत-पाकिस्तान हॉकी मुकाबला देखने को लेकर हॉकी प्रेमियों में खासा उत्साह था। ऐसे में पाकिस्तान की ओर से न्यूट्रल वेन्यू की मांग आने के बाद इस मुकाबले के आयोजन को लेकर स्थिति फिर असमंजस में पहुंच गई है। चार और देश भी उतरेंगे मैदान में टूर्नामेंट में भारत, पाकिस्तान के अलावा चीन, जापान, मलेशिया और दक्षिण कोरिया की टीमें प्रस्तावित हैं। पाकिस्तान के नहीं खेलने की स्थिति में ओमान और बांग्लादेश को विकल्प के तौर पर रखा गया है। भारत-पाकिस्तान के बीच पिछले कुछ समय से द्विपक्षीय खेल संबंधों को लेकर अलग स्थिति रही है, हालांकि दोनों देशों की टीमें बहुदेशीय प्रतियोगिताओं में आमने-सामने आती रही हैं। अब सबकी नजर एशियाई हॉकी महासंघ के अगले फैसले पर है कि पाकिस्तान की न्यूट्रल वेन्यू की मांग पर क्या निर्णय होता है और क्या 1 नवंबर को जालंधर में भारत-पाकिस्तान हॉकी मुकाबला देखने को मिलेगा।

शिक्षा में पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को मिला बड़ा सहारा, ₹13 हजार करोड़ से ज्यादा राशि स्वीकृत

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व और निर्णयों के फलस्वरूप प्रदेश में पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षा के हर स्तर पर अभूतपूर्व प्रोत्साहन और वित्तीय सहयोग मिल रहा है। पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को राज्य सरकार द्वारा प्राथमिक शिक्षा से विदेश अध्ययन के लिये छात्रवृत्ति, नि:शुल्क कोचिंग और प्रशिक्षण जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में पिछले 15 वर्षों में 13 हजार 156 करोड़ 51 लाख से अधिक की वित्तीय सहायता दी गई है। योजनाओं से लगभग 5 करोड़ 34 लाख 39 हजार 54 से अधिक विद्यार्थी लाभांवित हुए। प्री एवं पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति से शिक्षा का सशक्तिकरण स्कूली स्तर पर ड्रॉप-आउट दर को समाप्त करने और बच्चों की पढ़ाई निरंतर बनाए रखने के लिए संचालित प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत वर्ष 2012-13 से 2026-27 तक पिछड़ा वर्ग के 4 करोड़ 50 लाख से अधिक विद्यार्थियों को ₹ 2,535 करोड़ से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित की जा चुकी है। इसके साथ ही स्कूली शिक्षा में उत्कृष्ट अंक लाने वाले होनहारों को 'प्रावीण्य (मेधावी) छात्रवृत्ति योजना' के तहत पिछड़ा वर्ग के 2,185 विद्यार्थियों को 1 करोड़ 69 लाख रूपये की राशि दी गई है। उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा में कॉलेज स्तर के छात्रों को राहत देते हुए 'पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना' के तहत वर्ष 2012-13 से 2026-27 के दौरान इसी वर्ग के 84.22 लाख विद्यार्थियों को ₹10,467 करोड़ की राशि से संबल प्रदान किया गया है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नि:शुल्क कोचिंग, प्रोत्साहन और कौशल विकास पिछड़ा वर्ग के युवाओं को प्रशासनिक और प्रतियोगी सेवाओं में सफलता दिलाने के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। वर्ष 2021-22 में प्रारंभ की गई 'सरदार पटेल कोचिंग प्रशिक्षण योजना' के तहत 11,174 शिक्षित युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 23 करोड़ 9 लाख रूपये के व्यय से निशुल्क कोचिंग दी गई है। इसी प्रकार संघ एवं राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने वाले 3,354 पिछड़ा वर्ग अभ्यर्थियों को 'सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना' के तहत 7 करोड़ 64 लाख रूपये की राशि प्रदान की गई। इसके अलावा वर्ष 2026-27 से युवाओं के सर्वांगीण प्रशिक्षण के लिए शुरू की गई 'शौर्य संकल्प प्रशिक्षण योजना' के अंतर्गत रू 4 करोड़ 83 लाख राशि का व्यय कर 3,827 युवाओं को सफलता पूर्वक प्रशिक्षित किया गया है। विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना' से वैश्विक पटल पर साकार होते सपने 'पिछड़ा वर्ग विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना' में प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए वर्ष 2008-09 से लेकर अब तक पिछड़ा वर्ग के कुल 341 विद्यार्थियों को 122 करोड़ 9 लाख रूपये का वित्तीय अनुदान देकर विदेशों में पढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया गया है।  

भरतपुर और डीग के 25 निकायों में BJP का निर्विरोध कब्जा, प्रमुख पदों पर प्रत्याशी निर्वाचित

जयपुर  राजस्थान के निकाय चुनाव में पार्षदों के नतीजे आने के बाद अब मेयर, सभापति और अध्यक्ष की कुर्सियों पर तस्वीर तेजी से साफ हो रही है. कई जगह बहुमत का गणित काम कर रहा है तो कई निकायों में निर्दलीय पार्षदों के रुख ने पूरा खेल बदल दिया है. इसी बीच बीजेपी ने 25 निकायों में अपने चेयरमैन, सभापति और अध्यक्ष निर्विरोध बनवाने में सफलता हासिल की है. इनमें भरतपुर और भीलवाड़ा के नगर निगम भी शामिल हैं।  इन दोनों जगहों का सियासी महत्व इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि भरतपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह जिला है, जबकि भीलवाड़ा में बीजेपी ने निकाय चुनाव में साफ बहुमत हासिल किया था. भरतपुर में हालांकि कहानी थोड़ी अलग रही. यहां नगर निगम के चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस से ज्यादा सीटें निर्दलीयों ने जीती थीं. इसके बावजूद मेयर चुनाव के लिए खड़ी निर्दलीय प्रत्याशी ने अपना नाम वापस ले लिया और बीजेपी प्रत्याशी अनुराधा सिंह के लिए निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया।  भरतपुर में निर्दलीयों का दबदबा, फिर भी बीजेपी का मेयर भरतपुर नगर निगम में कुल 65 वार्ड हैं. हालिया निकाय चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों ने सबसे ज्यादा 36 वार्डों में जीत दर्ज की. बीजेपी के 20, कांग्रेस के 7, बीएसपी के एक और आरएलपी के एक पार्षद चुनाव जीते थे. यानी संख्या के हिसाब से निर्दलीय सबसे बड़ा समूह बनकर सामने आए थे।  शुरुआत में मेयर पद के लिए निर्दलीय पार्षदों की तरफ थी निगाहें मेयर पद के लिए शुरुआत में मुकाबला बनने की स्थिति थी. बीजेपी ने अनुराधा सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया था, जबकि वार्ड नंबर 17 से निर्दलीय पार्षद विचित्रा सिंह ने भी नामांकन दाखिल किया था. उस समय यह सवाल था कि सबसे ज्यादा निर्दलीय पार्षदों वाले भरतपुर में आखिर मेयर की कुर्सी किसके पास जाएगी. लेकिन 18 सितंबर को तस्वीर बदल गई. निर्दलीय विचित्रा सिंह ने अपना नामांकन वापस ले लिया. इसके बाद बीजेपी की अनुराधा सिंह के निर्विरोध महापौर चुने जाने का रास्ता साफ हो गया।  सीएम के गृह जिले में बीजेपी के लिए अहम तस्वीर भरतपुर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह जिला माना जाता है. ऐसे में यहां नगर निगम की सत्ता का समीकरण बीजेपी के लिए खास महत्व रखता है. चुनाव परिणाम के बाद हालांकि यहां बीजेपी के सामने सीधा बहुमत नहीं था. निर्दलीयों की संख्या सबसे ज्यादा होने के कारण मेयर चुनाव में उनका समर्थन जरूरी हो गया था. अब निर्दलीय प्रत्याशी के नामांकन वापस लेने के बाद मुकाबला ही खत्म हो गया. बीजेपी प्रत्याशी अनुराधा सिंह का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया।  भीलवाड़ा में भी बीजेपी की जसवंत कंवर निर्विरोध भीलवाड़ा में स्थिति भरतपुर से अलग थी. यहां बीजेपी के पास पहले से ही मजबूत संख्याबल था. 70 वार्ड वाले नगर निगम में बीजेपी ने 45 सीटें जीतीं और स्पष्ट बहुमत हासिल किया. कांग्रेस के खाते में 10 और निर्दलीयों के खाते में 15 सीटें गईं. बीजेपी ने वार्ड नंबर 9 से जीतीं जसवंत कंवर को मेयर पद का उम्मीदवार बनाया. उन्होंने नामांकन दाखिल किया. शुरुआत में निर्दलीय संतोष कंवर भी मैदान में थीं, लेकिन उन्होंने 17 सितंबर को अपना नाम वापस ले लिया. कांग्रेस ने भी मेयर पद के लिए उम्मीदवार नहीं उतारा. इसके बाद जसवंत कंवर निर्विरोध महापौर चुन ली गईं।  25 निकायों में निर्विरोध अध्यक्ष बनाने का दावा बीजेपी की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक पार्टी ने राजस्थान के 25 निकायों में अपने चेयरमैन, सभापति और अध्यक्ष निर्विरोध बनवाने में सफलता हासिल की है. इसका मतलब यह है कि इन निकायों में मतदान से पहले ही अध्यक्ष पद की तस्वीर साफ हो गई. राजस्थान के 309 शहरी निकायों के चुनाव में बीजेपी 148 निकायों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई थी, जबकि कांग्रेस 104 निकायों में आगे रही थी।  भरतपुर में बहुमत का गणित नहीं, समर्थन का खेल चला भरतपुर का मामला इस पूरे चुनाव की अलग तस्वीर दिखाता है. यहां बीजेपी के पास 20 पार्षद थे, जबकि निर्दलीयों की संख्या 36 थी. कांग्रेस सिर्फ 7 सीटों पर थी. ऐसे में किसी एक पार्टी के पास अपने दम पर मेयर बनाने की स्थिति नहीं थी. लेकिन मेयर पद पर मुकाबला आखिर मतदान तक पहुंचा ही नहीं. निर्दलीय उम्मीदवार के नामांकन वापस लेने के बाद बीजेपी उम्मीदवार के सामने कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं बचा. इस तरह यहां संख्या का खेल समर्थन के खेल में बदल गया।  21 सितंबर को बाकी निकायों की तस्वीर होगी साफ भरतपुर और भीलवाड़ा जैसे नगर निगमों में मतदान से पहले ही तस्वीर साफ होने से पार्टी को राहत मिली है. लेकिन राजस्थान के बाकी निकायों में कहानी अभी खत्म नहीं हुई है. कहीं बहुमत है, कहीं बागी उम्मीदवार हैं और कहीं निर्दलीय पार्षद पूरे समीकरण की चाबी बने हुए हैं. ऐसे में 21 सितंबर का दिन कई नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पालिकाओं के लिए सबसे अहम रहने वाला है। 

भोपाल से इंदौर तक हजारों लोग बनाएंगे ह्यूमन रंगोली, ड्रोन से दर्ज होगा भव्य दृश्य

मध्यप्रदेश में बनेगी ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ की विराट तस्वीर  भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, झाबुआ और आलीराजपुर में हजारों नागरिक बनाएंगे ह्यूमन रंगोली ड्रोन कैमरे से दर्ज होगा जनभागीदारी का भव्य दृश्य भोपाल सेवा, सहभागिता और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश में सेवा संकल्प अभियान के अवसर पर 9 और 10 अक्टूबर को विशेष आयोजन किया जाएगा। ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ थीम पर प्रदेश के छह जिलों में बड़े मैदानों पर विशाल ह्यूमन रंगोली बनाई जाएगी। इस अनूठे आयोजन में बड़ी संख्या में नागरिकों की सहभागिता होगी और मानव रंगोली के माध्यम से सेवा, राष्ट्रभावना, स्थानीय संस्कृति तथा विकसित भारत के संकल्प को साकार किया जाएगा। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, झाबुआ और आलीराजपुर में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में जनभागीदारी को प्रमुख आधार बनाया गया है। हजारों नागरिक एक निर्धारित स्वरूप में एक साथ खड़े होकर ऐसी जीवंत मानव रंगोली का निर्माण करेंगे, जिसे ऊपर से देखने पर एक विशाल चित्र और संदेश के रूप में देखा जा सकेगा। आयोजन के दौरान ड्रोन कैमरों के माध्यम से इस पूरे दृश्य को रिकॉर्ड किया जाएगा। सेवा से राष्ट्र निर्माण तक पहुंचेगा संदेश ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ कार्यक्रम का उद्देश्य सेवा को केवल एक गतिविधि के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण की भावना से जोड़ना है। आयोजन में स्थानीय कला और लोक-संस्कृति को भी स्थान दिया जाएगा। इसके साथ विकसित भारत के संकल्प और देश की प्रगति का संदेश भी मानव रंगोली के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। स्थानीय संस्कृति और आधुनिक तकनीक का संगम आयोजन में मध्यप्रदेश की स्थानीय कला एवं लोक-संस्कृति को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने की योजना है। विशाल मानव रंगोली के निर्माण के दौरान ड्रोन शूटिंग के जरिए ऊपर से पूरे आयोजन की तस्वीर सामने आएगी। इससे अलग-अलग जिलों में होने वाली जनभागीदारी का व्यापक दृश्य तैयार होगा और सेवा संकल्प का संदेश व्यापक स्तर तक पहुंचाया जा सकेगा। ‘सेवा के रंग—राष्ट्र के संग’ कार्यक्रम के लिए राज्य स्तर पर नोडल अनुसूचित जाति मंत्री श्री नागर सिंह चौहान रहेंगे। राज्य प्रभारी अधिकारी की जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती जी.वी. रश्मि को दी गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है, जबकि जनसंपर्क विभाग और संबंधित छह जिलों का जिला प्रशासन आयोजन में सहयोगी भूमिका निभाएगा।

मेधावी विद्यार्थियों के लिए बड़ी सौगात, आज CM यादव 7400 से अधिक छात्रों को देंगे स्कूटी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों को आज शनिवार को देंगे स्कूटी की सौगात 7400 से अधिक मेधावी विद्यार्थी होंगे लाभांवित भोपाल के शासकीय सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय में होगा राज्य स्तरीय कार्यक्रम भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों को शनिवार को बड़ी सौगात देंगे। शासकीय हायर सेकंडरी स्कूलों में कक्षा 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को 19 सितंबर को ई-स्कूटी का वितरण करेंगे। यह स्कूटी  "मुख्यमंत्री स्कूटी योजना ’ अंतर्गत दी जाएगी। इससे विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा की राह आसान होगी। साथ ही, कॉलेज आने-जाने में भी सहूलियत होगी। राज्य स्तरीय स्कूटी वितरण का कार्यक्रम शासकीय सुभाष उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शिवाजी नगर में भोपाल में सुबह 9 बजे से होगा। प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही मुख्यमंत्री स्कूटी योजना का उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों को शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में ही 70% अंक के साथ स्कूल में प्रथम स्थान आना जरूरी है। प्रदेश सरकार द्वारा इस योजना का लाभ स्कूल शिक्षा एवं जनजातीय कार्य विभाग के शासकीय हायर सेकंडरी स्कूलों में नियमित विद्यार्थी के रूप में अध्ययनरत विद्यार्थी को दिया जाता है। योजना में सभी संकायों के विद्यार्थियों को शामिल किया गया है। मोटराइज्ड स्कूटी के लिए अधिकतम 90 हजार रुपये और ई-स्कूटी के लिए अधिकतम 1.20 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाती है। अब तक प्रदेश के 23,000 से अधिक पात्र विद्यार्थी हो चुके हैं लाभान्वित प्रदेश सरकार द्वारा योजना अंतर्गत शिक्षण सत्र 2025-26 के लिए प्रदेश के 7,400 से अधिक पात्र विद्यार्थियों को ई-स्कूटी का वितरण किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही इस योजना से अब तक प्रदेश के 23,000 से अधिक पात्र विद्यार्थी लाभान्वित हो चुके हैं। योजना के संचालन पर अब तक लगभग 246 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। मुख्यमंत्री स्कूटी योजना मेधावी विद्यार्थियों की मेहनत और उपलब्धि को प्रोत्साहित करने के साथ ही आगे की पढ़ाई के लिए सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण पहल है। शासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करने से शिक्षा के प्रति उनका उत्साह बढ़ रहा है और उच्च शिक्षा की ओर उनकी भागीदारी को मजबूत करने में भी मदद मिल रही है।  

₹2,000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर लगेगा 0.4% MDR, लेकिन ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा पैसा

नई दिल्ली यूपीआई चार्ज को लेकर सियासी घमासान है. सरकार साफ कर चुकी है कि यूपीआई फीस का बोझ आम लोगों पर नहीं पड़ेगा. बावजूद इसके गफलत की स्थिति है. लोगों को डर सता रहा है कि आखिरकार इसका असर आम आदमी पर ही पड़ेगा. यूपीआई फीस भले ही मर्चेंट पर लागू हो, मगर यूजर्स से ही इसकी वसूली होगी. यही कारण है कि यूपीआई चार्ज को लेकर सरकार के इस फैसले पर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है. बहरहाल, 2000 रुपए से अधिक के कमर्शियल यूपीआई पेमेंट पर चार्ज का असर आम जनता पर न पड़े, इसके लिए सरकार पूरी कोशिश में लगी है. सूत्रों की मानें तो सरकार पेमेंट एग्रीगेटर्स के साथ बातचीत कर रही है ताकि यूपीआई फीस का बोझ आम ग्राहकों पर न पड़े।  दरअसल, नया नियम यह है कि अब ₹2000 से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर 0.4% MDR लागू होगा. यह नियम 15 अक्टूबर से लागू होगा. सरकार यह साफ कर चुकी है कि यह शुल्क ग्राहकों से नहीं, कारोबारियों से लिया जाएगा. यानी आम यूजर्स के लिए पेमेंट सिस्टम पहले की तरह ही होगा. उसके ऊपर फीस का कोई बोझ नहीं पड़ने वाला है. मगर अब क्योंकि लोगों में डर है कि कंपनियां इस चार्ज की वसूली आम यूजर्स से कर सकती है. इसलिए सरकार अब यह सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व्यवस्था बना रही है कि दुकानदार या कारोबारी यूपीआई फीस का यह बोझ ग्राहकों पर न डालें।  केंद्र सरकार ने क्या कदम उठाया सरकारी सूत्रों ने  बताया कि केंद्र सरकार ने यूपीआई इकोसिस्टम में पेमेंट एग्रीगेटर्स और दूसरे स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत शुरू कर दी है. इसका मकसद यह पक्का करना है कि हाल ही में लागू किए गए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का बोझ ग्राहकों पर न डाला जाए।  मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार कर रही सरकार समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त मंत्रालय एक मॉनिटरिंग सिस्टम भी तैयार कर रहा है ताकि यह देखा जा सके कि मर्चेंट इस फीस का बोझ ग्राहकों पर न डालें. ऐसी चिंताएं हैं कि नए चार्ज से बड़े पेमेंट के लिए यूपीआई इस्तेमाल करने वाले लोगों की लागत बढ़ सकती है।  15 अक्टूबर से बदल रहा यूपीआई पेमेंट नियम दरअसल, नए नियमों के तहत 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई ट्रांजेक्शन पर 0.4% एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा. यह फीस मर्चेंट यानी कारोबारी देंगे, ग्राहक नहीं. 75,000 रुपये या उससे अधिक के ट्रांजेक्शन के लिए यह चार्ज ज़्यादा से ज़्यादा 300 रुपये होगा।  वित्त मंत्रालय का क्या अनुमान इस बीच वित्त मंत्रालय का अनुमान है कि 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर 15 अक्टूबर से 0.4 प्रतिशत ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) लागू होने से नकदी लेनदेन नहीं बढ़ेगा. सूत्रों ने कहा कि इस फैसले से यूपीआई लेनदेन की कुल मात्रा का सिर्फ चार प्रतिशत प्रभावित होगा और इससे यूपीआई के इस्तेमाल में कमी आने की संभावना नहीं है. उन्होंने कहा कि रुपे डेबिट कार्ड से होने वाले लेनदेन किसी भी राशि के लिए पूरी तरह निशुल्क हैं। 

दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का ऐलान, प्रयागराज समेत इन स्टेशनों पर रुकेगी; जानें रूट-टाइमिंग

नई दिल्ली भारतीय रेलवे दूसरी स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू करने की योजना बना रही है। यह हाई स्पीड ट्रेन दिल्ली और वाराणसी के बीच चलेगी जो कि प्रयागराज और कानपुर से होकर गुजरेगी। इस बात की संभावना है कि दीवाली से पहले इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई जा सकती है। इसका ट्रायल इसी महीने शुरू होने की संभावना है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेन वाराणसी कैंट से रात 9:20 बजे चलेगी और रात 10:45 बजे प्रयागराज पहुंचेगी। यह कानपुर सेंट्रल से रात 12:35 बजे पहुंचेगी और सुबह 5 बजे नई दिल्ली। वापसी की यात्रा में यह नई दिल्ली से रात 9:20 बजे चलेगी और सुबह 5 बजे वाराणसी पहुंचेगी। इस ट्रेन की स्पीड 130 किमी/घंटा से 160 किमी/घंटा के बीच होने की उम्मीद है। इसकी वजह से दिल्ली, प्रयागराज और वाराणसी के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। इस नई चमचमाती ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे। वहीं, इसमें 823 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। इसमें 11 AC थ्री-टियर कोच, चार AC टू-टियर कोच और एक फर्स्ट AC कोच शामिल होंगे। ट्रेन में वंदे भारत सर्विस वाली आधुनिक सुविधाएं होंगी। आपको बता दें कि हावड़ा-कामाख्या रूट के बाद भारतीय रेलवे की योजना के अनुसार यह दूसरी स्लीपर वंदे भारत सर्विस होगी। रेलवे बोर्ड ने अभी तक ट्रेन नंबर, किराया और सर्विस शुरू होने की तारीख की घोषणा नहीं की है। पुतिन ने वंदे भारत के स्लीपर ट्रेनसेट का मॉडल देखा आपको बता दें कि वंदे भारत एक्सप्रेस भारतीय रेल का एक सफल मॉडल है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत मंडपम में आयोजित 'इन्नोप्रोम' प्रदर्शनी में रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के स्टॉल का दौरा किया और वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट का मॉडल देखा। आरवीएनएल और रूसी कंपनी ट्रांसमैशहोल्डिंग (टीएमएच) ने मिलकर 'किनेट रेलवे सॉल्यूशंस लिमिटेड' नाम का एक भारत-रूस संयुक्त उपक्रम बनाया है। यह कंपनी महाराष्ट्र में अपनी मराठवाड़ा फैक्टरी में 120 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट बनाएगी, जिनमें से हर एक में 16 डिब्बे होंगे। भविष्य में 160 किमी की रफ्तार से चलेगी ट्रेन शुरुआती चरण में इस हाई तकनीक ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 130 किमी प्रति घंटा तय की गई है। अमर उजाला की खबर के अनुसार, मिशन रफ्तार प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद भविष्य में इसकी रफ्तार 160 किमी प्रति घंटा की जाएगी। इस आधुनिक ट्रेन का ठहराव सफर के दौरान प्रयागराज के अलावा कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर भी होगा। ट्रेन की प्राइमरी मेंटेनेंस की जिम्मेदारी उत्तर रेलवे संभालेगा। वाराणसी और नई दिल्ली से रात 9.20 बजे चले ट्रेन वाराणसी और नई दिल्ली से इसे रात 9:20 बजे चलाया जा सकता है। दोनों ही स्टेशनों पर पहुंचने का समय भी सुबह पांच बजे प्रस्तावित है। 16 कोच की ट्रेन में 823 यात्री करेंगे सफर यह ट्रेन 16 कोच की होगी, जिसमें में 823 यात्री कर सफर सकेंगे। इसमें एसी थर्ड टियर के 11, एसी सेकंड टियर के चार और फर्स्ट एसी का एक कोच रहेगा। क्षेत्रीय रेल उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति (जेडआरयूसीसी) एनसीआर के सदस्य सांसद प्रवीण पटेल का कहना है इससे यात्रियों का सफर और ज्यादा आरामदायक हो जाएगा।

EPFO का बड़ा बदलाव, ₹25,000 हुई EPF वेज लिमिट; 51 लाख कर्मचारियों को फायदा, जानें 5 फायदे

 नई दिल्ली हर महीने सैलरी से होने वाला PF डिडक्शन कई कर्मचारियों को हाथ में आने वाले वेतन से अनचाही कटौती जैसा लगता है. लेकिन यही रकम समय के साथ रिटायरमेंट की बड़ी बचत बन सकती है. अब ऐसे कर्मचारियों की संख्या बढ़ने वाली है, जिन्हें नौकरी के साथ PF, पेंशन और इंश्योरेंस जैसी सामाजिक सुरक्षा का फायदा मिल सकेगा।  सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) के दायरे को बढ़ाने के लिए वेज लिमिट में बड़ा बदलाव किया है. इसका असर खास तौर पर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिनकी मंथली सैलरी अब तक तय सीमा से ज्यादा होने की वजह से अनिवार्य EPF कवरेज से बाहर रह जाती थी।  ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हुई वेज लिमिट कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत एम्प्लॉयी प्रोविडेंट फंड (EPF) की वेज लिमिट (Wage Limit) को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 मंथली कर दिया गया है. यानी अब ₹15,000 से ₹25,000 तक की मंथली सैलरी वाले सभी कर्मचारियों को EPF के दायरे में लाया जा सकेगा. सरकार को उम्मीद है कि इस बदलाव से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी EPFO के दायरे में आएंगे. इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में नौकरीपेशा लोगों को औपचारिक सोशल सिक्योरिटी सिस्टम से जुड़ने का मौका मिलेगा. अब सवाल है कि एक कर्मचारी के लिए इसका सीधा असर क्या होगा? कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के इस फैसले से कर्मचारियों को होने वाले 5 बड़े फायदे समझिए… 1. रिटायरमेंट के लिए सेविंग्स फंड एम्प्लॉयी प्रोविडेंट फंड का सबसे बड़ा फायदा लंबी अवधि की बचत है. कर्मचारी की नौकरी के दौरान हर महीने PF में योगदान जमा होता रहता है. इस रकम पर सरकार की तरफ से 8.25% सालाना की दर से ब्याज भी मिलता है. हालांकि, ब्याज की दर फिक्स नहीं है और सरकार समय-समय पर इसे बढ़ा या घटा सकती है. इसके बावजूद EPF पर मिलने वाली ब्याज बैंकों की एफडी से अच्छी ही रहती है. आपकी सैलरी से हर महीने कटने वाली पीएफ की रकम लंबे समय तक जमा रहने पर एक बड़ा रिटायरमेंट कॉर्पस तैयार होता है. वेज लिमिट बढ़ने से अब ज्यादा कर्मचारी इस सिस्टम में शामिल हो सकेंगे. खास तौर पर वे कर्मचारी जो पहले ₹15,000 की सीमा से ऊपर वेतन होने के कारण अनिवार्य EPF कवरेज से बाहर रह जाते थे, उन्हें नियमित रिटायरमेंट सेविंग का रास्ता मिल सकता है।  2. EPS के जरिए पेंशन का फायदा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़ने का दूसरा बड़ा फायदा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) से जुड़ा है. पात्र कर्मचारियों को नियमों के मुताबिक रिटायरमेंट के बाद पेंशन का लाभ मिल सकता है. EPS सिर्फ रिटायरमेंट तक सीमित नहीं है. तय नियमों और पात्रता के तहत इसमें दिव्यांगता पेंशन और परिवार के लिए पेंशन जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं. यानी EPFO की सदस्यता नौकरी खत्म होने के बाद भी वित्तीय सुरक्षा का एक आधार दे सकती है।  3. नौकरी के साथ इंश्योरेंस कवर भी EPFO की सदस्यता के साथ एम्प्लॉई डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (EDLI) का कवर भी जुड़ा होता है. यह कर्मचारी को जीवन बीमा से जुड़ी वित्तीय सुरक्षा देता है. इसका मतलब है कि EPF में शामिल होने वाला कर्मचारी सिर्फ अपनी रिटायरमेंट सेविंग नहीं बनाता, बल्कि कुछ परिस्थितियों में उसके परिवार के लिए भी आर्थिक सुरक्षा का इंतजाम होता है. वेज लिमिट बढ़ने से यह सुरक्षा ज्यादा कर्मचारियों तक पहुंच सकती है।  4. सोशल सिक्योरिटी सिस्टम का दायरा बढ़ेगा वेज लिमिट बढ़ने का एक बड़ा असर यह है कि ज्यादा कर्मचारी औपचारिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन सकेंगे. पहले ₹15,000 से ज्यादा वेतन के साथ नई नौकरी शुरू करने वाले कई कर्मचारी अनिवार्य EPF कवरेज से बाहर रह जाते थे. अब ₹15,000 से ₹25,000 की वेज सीमा के बीच आने वाले कर्मचारियों के लिए कवरेज का दायरा बढ़ेगा. इससे नौकरीपेशा लोगों को बचत, पेंशन और इंश्योरेंस जैसी सुविधाओं के एक ही सिस्टम से जुड़ने का मौका मिलेगा।  5. भविष्य की वित्तीय सुरक्षा और मजबूत होगी इस बदलाव का फायदा सिर्फ आज की सैलरी या PF कटौती तक सीमित नहीं है. EPF, EPS और EDLI मिलकर कर्मचारी को लंबी अवधि में कई तरह की वित्तीय सुरक्षा देते हैं. नियमित PF योगदान से रिटायरमेंट के लिए फंड बनता है, EPS के जरिए पात्रता के अनुसार पेंशन का रास्ता खुलता है और EDLI के जरिए इंश्योरेंस कवर मिलता है. यानी एक कर्मचारी के लिए यह व्यवस्था नौकरी के दौरान बचत और भविष्य की सुरक्षा, दोनों का आधार बन सकती है।  किन कर्मचारियों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर? अगर आपकी मंथली सैलरी ₹15,000 से ₹25,000 के बीच है और आप अब तक वेज लिमिट की वजह से अनिवार्य EPF कवरेज से बाहर थे, तो यह बदलाव आपके लिए खास मायने रखता है. नई व्यवस्था के तहत ऐसे सभी कर्मचारी अब EPFO के दायरे में आ जाएंगे. सरकार को उम्मीद है कि वेज लिमिट बढ़ने से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी सोशल सिक्योरिटी सिस्टम से जुड़ेंगे. EPFO ने भी कहा है कि बदलती सैलरी और कर्मचारी ढांचे को देखते हुए कवरेज का दायरा बढ़ाना जरूरी है. सीधी बात यह है कि वेज लिमिट बढ़ने से सिर्फ EPF में शामिल होने वाले कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ेगी, बल्कि ज्यादा नौकरीपेशा लोगों को रिटायरमेंट बचत, पेंशन और इंश्योरेंस जैसी सुरक्षा का फायदा मिल सकता है। 

लुधियाना में AAP का बड़ा चुनावी अभियान, 20 सितंबर से घर-घर पहुंचेंगे कार्यकर्ता; 2.68 लाख वर्कर मैदान में

चंडीगढ़ आम आदमी पार्टी पंजाब में 20 सितंबर से एक बड़ा डोर-टू-डोर अभियान शुरू करेगी। यह घोषणा मनीष सिसोदिया ने की है। इस अभियान में पार्टी के 2.68 लाख बूथ कमेटी सदस्य घर-घर जाकर भगवंत मान सरकार के कार्यों को जनता तक पहुंचाएंगे। मुख्यमंत्री भगवंत मान स्वयं धुरी में इस अभियान का हिस्सा बनेंगे। सिसोदिया ने बताया कि यह अभियान पूरे राज्य में चलाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य सरकार की उपलब्धियों और जनहितैषी नीतियों से लोगों को अवगत कराना है। अभियान के दौरान आप का सदस्यता अभियान भी शुरू होगा। इससे पार्टी अपने जनाधार को और मजबूत करने का प्रयास करेगी।   सिसोदिया ने बताया कि अभियान की शुरुआत से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान 19 सितंबर को लुधियाना में चुनावी अभियान का पैंफलेट जारी करेंगे। यह पैंफलेट अभियान की रूपरेखा और संदेशों को स्पष्ट करेगा। पार्टी का लक्ष्य हर घर तक पहुंचकर सरकार के सकारात्मक कार्यों को बताना है। इस मेगा कैंपेन के दौरान AAP के 2.68 लाख बूथ कमेटी सदस्य घर-घर जाकर मान सरकार के कामों और उपलब्धियों की जानकारी लोगों को देंगे। AAP के पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि इसी दौरान पार्टी के मेंबरशिप अभियान की भी शुरूआत करेगी। AAP प्रभारी मनीष सिसोदिया की अहम बातें     एक महीने तक चलेगा अभियान: मनीष सिसोदिया ने कहा- हमने पंजाब में इतने काम किए, जो 75 साल में नहीं हुए। इन्हीं कामों के आधार पर पार्टी चुनाव में उतरेगी। परसों से शुरू हो रहे डोर टू डोर कैंपेन के जरिए सरकार के कामकाज घर-घर पहुंचाएंगे। पंजाब में 25,332 बूथ हैं। करीब 2.68 लाख कार्यकर्ता और बूथ लीडर इस अभियान में शामिल होंगे। यह अभियान एक महीने तक चलेगा।     हर परिवार को 1.82 लाख का फायदा हो रहा: सिसोदिया ने कहा कि AAP ने अपनी एक-एक गारंटी पूरी की है। इससे हर परिवार को सालाना करीब 1.82 लाख रुपए का फायदा हुआ है, जबकि हर महीने करीब 15 हजार रुपए का लाभ मिल रहा है। पार्टी के कार्यकर्ता अब इन कामों और योजनाओं की जानकारी देने के लिए घर-घर जाएंगे।     बीजेपी अकाली दल व कांग्रेस को घेरेंगे: सिसोदिया कहा कि कार्यकर्ता लोगों को यह भी याद दिलाएंगे कि 2007 से 2017 तक अकाली-भाजपा सरकार के दौरान पंजाब किस तरह नशे की समस्या से जूझता रहा। उन्होंने कैप्टन अमरिंदर सिंह पर भी वादे पूरे न करने का आरोप लगाया। सिसोदिया ने कहा कि सरकार बनने के बाद वह कई वादों से पीछे हट गए और नशा भी खत्म नहीं कर पाए।     BJP ने चलाई नशे की सप्लाई चेन: सिसोदिया ने कहा कि पंजाब में नशे के खिलाफ युद्ध छेड़ा गया। तस्करों के घर तोड़े गए, उन्हें जेल भेजा गया और सप्लाई चेन तोड़ी गई। इसके बावजूद पंजाब में नशा कहां से आ रहा, इसका जवाब ये है कि पंजाब में बिकने वाला 80 फीसदी नशा भाजपा शासित राज्यों से आ रहा है। अरोड़ा ने कहा- भाजपा अपने राज्यों में नशा खत्म करे AAP के प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने कहा कि अगर भाजपा वास्तव में पंजाब से नशा खत्म करना चाहती है तो पहले अपने-अपने राज्यों में नशे के कारोबार को खत्म करे। हरियाणा और गुजरात से नशा आ रहा है। अरोड़ा के मुताबिक, पंजाब की लोकल सप्लाई चेन तोड़ी जा चुकी है, अब बाहर से नशा पंजाब में आ रहा है। यात्रा निकालने वाले पंजाब का अपमान कर रहे है। अरोड़ा ने पिछली अकाली दल+भाजपा और कांग्रेस सरकारों पर पंजाब को कंगाली की ओर ले जाने का आरोप लगाया।