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सबालेंका ने नोस्कोवा को दी मात, US Open 2026 के सेमीफाइनल में बनाई जगह; मुकाबला रहा बेहद रोमांचक

न्यूयॉर्क  अमेरिकी ओपन में एरिना सबालेंका ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल में जगह बना ली है। मंगलवार को खेले गए रोमांचक मुकाबले में उन्होंने विंबलडन चैंपियन लिंडा नोस्कोवा को 7-6 (1), 3-6, 7-6 (10-7) से मात दी। मुकाबला काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा और दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। सबालेंका ने निर्णायक सेट का टाईब्रेकर जीतकर मुकाबला अपने नाम किया और लगातार तीसरे अमेरिकी ओपन खिताब की अपनी उम्मीदों को बरकरार रखा। “एक समय लगा सब कुछ खत्म हो गया” जीत के बाद सबालेंका ने नोस्कोवा के प्रदर्शन की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “क्या जबरदस्त मुकाबला था। वह क्या शानदार खिलाड़ी है। एक समय तो मुझे लगा कि सब कुछ खत्म हो गया। इससे मुझे थोड़ा सहज होने और ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली।” सबालेंका के लिए यह जीत इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण थी क्योंकि अमेरिकी ओपन में आगे बढ़ने के साथ-साथ उनकी महिला सिंगल्स की नंबर-1 रैंकिंग भी दांव पर लगी थी। जीत के साथ उन्होंने अपनी रैंकिंग बचाने की दिशा में अहम कदम उठाया। अब पेगुला से होगी सबालेंका की टक्कर सेमीफाइनल में सबालेंका के सामने अब तीसरी वरीयता प्राप्त जेसिका पेगुला की चुनौती होगी। पेगुला ने क्वार्टरफाइनल में 26वीं वरीयता प्राप्त एम्मा नवारो को 3-6, 6-4, 6-3 से हराकर अंतिम चार में जगह बनाई। सबालेंका और पेगुला के बीच अमेरिकी ओपन में पहले भी कड़ी टक्कर देखने को मिली है। सबालेंका ने 2024 के फाइनल और पिछले साल के सेमीफाइनल में पेगुला को हराया था। ऐसे में इस बार पेगुला के पास पिछली हार का हिसाब बराबर करने का मौका होगा। पुरुष क्वार्टरफाइनल में टियाफो की रोमांचक जीत अमेरिकी ओपन के पुरुष वर्ग में भी मंगलवार को रोमांचक मुकाबला देखने को मिला। 11वीं वरीयता प्राप्त फ्रांसिस टियाफो ने एलेक्स मिशेलसेन को पांच सेट तक चले मुकाबले में हराया। टियाफो ने यह मुकाबला 5-7, 3-6, 7-5, 6-3, 7-6 (10-6) से अपने नाम किया। मुकाबले का फैसला भी निर्णायक सेट के टाईब्रेकर में हुआ, जहां टियाफो ने धैर्य बनाए रखते हुए जीत दर्ज की। खिताब की ओर सबालेंका का एक और कदम सबालेंका अब अमेरिकी ओपन में लगातार तीसरा खिताब जीतने की कोशिश में हैं। हालांकि सेमीफाइनल में पेगुला उनके सामने बड़ी चुनौती होंगी। दोनों खिलाड़ियों के पिछले मुकाबलों को देखते हुए यह मैच बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है। सबालेंका की नजर जहां फाइनल में पहुंचने पर होगी, वहीं पेगुला घरेलू दर्शकों के सामने बड़ा उलटफेर करना चाहेंगी।

अल्कारेज का US Open सफर खत्म, बेन शेल्टन ने डिफेंडिंग चैंपियन को हराकर रचा बड़ा उलटफेर

 न्यूयॉर्क अमेर‍िकी ओपन (US Open) 2026 में उस वक्त बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब डिफेंडिंग चैम्प‍ियन और दुनिया के नंबर-2 खिलाड़ी कार्लोस अल्कारेज (Carlos Alcaraz) को क्वार्टर फाइनल में हार का सामना करना पड़ा. घरेलू फेवरेट बेन शेल्टन (Ben Shelton) ने स्पेनिश स्टार को पांच सेट तक चले रोमांचक मुकाबले में शिकस्त देकर सेमीफाइनल का टिकट कटा लिया।  आर्थर ऐश स्टेडियम में खेला गया यह मुकाबला करीब साढ़े चार घंटे तक चला. शेल्टन ने अल्कारेज को 6-7(5), 6-1, 6-3, 1-6, 7-6(10-7) से हराया. मुकाबला स्थानीय समयानुसार बुधवार सुबह 3:33 बजे खत्म हुआ।  पहले सेट में अल्कारेज पर भारी पड़े शेल्टन मुकाबले की शुरुआत बेहद कांटे की रही. दोनों खिलाड़ियों के बीच पहले सेट में जबरदस्त टक्कर देखने को मिली और मामला टाईब्रेक तक पहुंच गया।  पहला सेट गंवाने के बाद अमेरिकी खिलाड़ी ने अपना अंदाज ही बदल दिया. उन्होंने कोर्ट पर अपनी रिटर्न पोजिशन को और आगे किया और अल्कारेज के खिलाफ जोरदार फोरहैंड विनर्स लगाए. इसका असर दूसरे सेट में साफ दिखा. शेल्टन ने स्पेनिश खिलाड़ी को कोई मौका नहीं दिया और सेट 6-1 से जीतकर मुकाबले में वापसी कर ली।  तीसरे सेट में भी अल्कारेज पर बढ़ा दबाव दूसरे सेट की लय को शेल्टन ने तीसरे सेट में भी बरकरार रखा. उन्हें शुरुआती दौर में ब्रेक मिला और उन्होंने इस बढ़त को हाथ से नहीं जाने दिया. शेल्टन ने तीसरा सेट 6-3 से अपने नाम कर लिया. एक समय ऐसा लग रहा था कि डिफेंडिंग चैम्प‍ियन अल्कारेज अब यूएस ओपन से बाहर होने की कगार पर पहुंच चुके हैं. लेकिन यहां से स्पेनिश स्टार ने जबरदस्त वापसी की।  अल्कारेज ने चौथे सेट में पलटा मैच चौथे सेट में अल्कारेज ने बेसलाइन से अपनी रफ्तार और आक्रामकता दोनों बढ़ा दीं. शेल्टन के पास उनके खेल का जवाब नहीं था. अल्कारेज ने चौथा सेट 6-1 से जीत लिया और मुकाबले को निर्णायक पांचवें सेट में पहुंचा दिया।  आखिरी सेट में नहीं टूटी किसी की सर्विस पांचवें सेट में दोनों खिलाड़ियों ने एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दी. सबसे खास बात यह रही कि निर्णायक सेट में किसी भी खिलाड़ी की सर्विस ब्रेक नहीं हुई. इसके बाद मुकाबला टाईब्रेक में पहुंच गया. यहां दोनों के पास इतिहास रचने का मौका था, लेकिन शेल्टन ने बड़े पलों में गजब का धैर्य दिखाया.0-पॉइंट सुपर टाईब्रेक में अमेरिकी खिलाड़ी ने 10-7 से बाजी मार ली. इसके साथ ही उन्होंने अल्कारेज को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया और अपने करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज की।  19 ग्रैंड स्लैम मैच बाद अल्कारेज की हार अल्कारेज की यह हार इसलिए भी बड़ी है क्योंकि वह पिछले कुछ समय से ग्रैंड स्लैम में शानदार फॉर्म में थे. कलाई की चोट के कारण चार महीने कोर्ट से दूर रहने के बाद उन्होंने 2026 में जोरदार वापसी की थी. इसी साल उन्होंने कर‍ियर ग्रैंड स्लैम भी पूरा  US Open में मिली इस हार के साथ उनका 19 ग्रैंड स्लैम मैचों का विजयी सिलसिला भी टूट गया. उनकी पिछली ग्रैंड स्लैम हार 2025 विंबलडन फाइनल में जैनिक सिनर के खिलाफ आई थी।  अल्कारेज को बाहर करने के बाद बेन शेल्टन अब सेमीफाइनल में अपने हमवतन फ्रांसेस टियाफो (Frances Tiafoe) से भिड़ेंगे. शेल्टन के लिए यह US Open में दूसरा सेमीफाइनल होगा. इससे पहले वह 2023 में भी फ्लशिंग मीडोज के अंतिम चार में पहुंचे थे. अल्कारेज के बाहर होने के बाद पुरुषों के ड्रॉ में अब सिर्फ दो टॉप-10 सीड्स बचे हैं।  टॉप सीड अलेक्जेंडर ज्वेरेव (Alexander Zverev) अभी खिताब की रेस में बने हुए हैं. उन्हें क्वार्टर फाइनल में बोटिक वान डे जैंडशल्प (Botic van de Zandschulp) का सामना करना है। 

दलीप ट्रॉफी फाइनल में ईशान किशन का ऐतिहासिक धमाका, पहली पारी में दोहरा शतक के बाद दूसरी पारी में जड़ा अर्धशतक

चेन्नई  ईशान किशन ने दलीप ट्रॉफी के फाइनल में पहली पारी के बाद दूसरी पारी में भी अपने तूफानी अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 66 गेंदों में अर्धशतक पूरा कर लिया और इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया है. ईशान ने पहली पारी में दोहरा शतक लगाने के बाद दूसरी पारी में अर्धशतक लगाने के साथ दलीप ट्रॉफी के इतिहास में फाइनल मुकाबले की दोनों पारियों में एक शतक और एक अर्धशतक लगाने का दुर्लभ रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है. इससे पहले ये रिकॉर्ड अशोक मनकड़ के नाम दर्ज था. उन्होंने 1969-70 के दलीप ट्रॉफी फाइनल में वेस्ट जोन का प्रतिनिधित्व करते हुए साउथ जोन के खिलाफ शानदार बल्लेबाजी की थी. मनकड़ ने पहली पारी में 97 रन बनाकर शतक से मामूली दूरी पर रुक गए थे, लेकिन दूसरी पारी में उन्होंने 111 रन की बेहतरीन शतकीय पारी खेलकर अपनी छाप छोड़ी. फाइनल की दोनों पारियों में अर्धशतक और शतक लगाने का यह अनोखा कारनामा आज भी दलीप ट्रॉफी के इतिहास में बेहद खास माना जाता है और ईशान किशान ने ये कारनामा कर इतिहास को दोहराने का काम किया है.  

टेनिस स्टार डार्डेरी के US Open से बाहर होते ही सुर्खियों में आईं गर्लफ्रेंड ब्रियाना, डांस स्टूडियो की तस्वीरें वायरल

नई दिल्ली US Open में टेनिस स्टार लुसियानो डार्डेरी का सफर भले ही रुक गया, लेकिन उनकी गर्लफ्रेंड ब्रियाना गुआग्लियार्डो ने सोशल मीडिया पर ऐसा ग्लैमर बिखेरा कि फैन्स की नजरें तस्वीरों पर थम गईं. बैले स्टूडियो में ब्रियाना का बोल्ड अंदाज सामने आया तो कमेंट बॉक्स तारीफों से भर गया।  24 साल के डार्डेरी ने US Open में शानदार खेल दिखाते हुए राउंड ऑफ 16 तक का सफर तय किया, लेकिन वर्ल्ड नंबर-2 अलेक्जेंडर ज्वेरेव के सामने उनका बल्ला… यानी रैकेट, ज्यादा देर नहीं चल सका. ज्वेरेव ने उन्हें सीधे सेटों में 6-2, 6-2, 7-6(3) से हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। कोर्ट पर इटली के डार्डेरी का सफर खत्म हुआ, तो दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर उनकी गर्लफ्रेंड का ग्लैमरस अंदाज चर्चा में आ गया।  बैले स्टूडियो में ब्रियाना का बोल्ड अवतार ब्रियाना सिर्फ मॉडल नहीं हैं, बल्कि प्रशिक्षित बैले डांसर भी हैं. अर्जेंटीना में वह अपनी डांस अकादमी चलाती हैं. आमतौर पर वह डार्डेरी के मुकाबलों में उन्हें चीयर करती नजर आती हैं, लेकिन इस बार US Open में उनकी मौजूदगी नहीं दिखी।  इसकी वजह चाहे जो रही हो, ब्रियाना ने सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी का एहसास जरूर करा दिया। डांस स्टूडियो से शेयर की गई तस्वीरों में वह बेहद ग्लैमरस और आकर्षक अंदाज में पोज देती नजर आईं. पेल येलो क्रॉप टॉप और ब्राउन पोल्का-डॉट आउटफिट ने उनके बैले लुक को बोल्ड टच दिया. तस्वीरों में उनका कॉन्फिडेंस और अदाएं फैंस का ध्यान खींचने के लिए काफी थीं।  तस्वीरें आईं तो फैन्स बोले- 'गॉडेस!' ब्रियाना की तस्वीरें सामने आते ही सोशल मीडिया पर कमेंट्स की झड़ी लग गई. किसी ने उन्हें 'गॉडेस' यानी देवी कहा, तो किसी ने 'टोटल ब्यूटी' लिखकर तारीफ की. एक फैन ने स्पैनिश में उन्हें 'Hermosísima' कहा, जिसका अर्थ है बेहद खूबसूरत।  और यही वजह है कि डार्डेरी की US Open हार के बाद भी उनके नाम से जुड़ी ग्लैमर स्टोरी सुर्खियों में बनी हुई है।  अगर ब्रियाना आर्थर ऐश स्टेडियम में ज्वेरेव के खिलाफ डार्डेरी का मुकाबला देखने पहुंचतीं, तो टेनिस के साथ-साथ स्टैंड्स में भी ग्लैमर का मुकाबला देखने को मिलता. फिलहाल डार्डेरी कोर्ट से बाहर हैं और ब्रियाना अपनी अदाओं से सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं।     

इंग्लैंड दौरे पर पाकिस्तान की हार से वसीम अकरम निराश, बोले- ‘पहले से पता था 0-3 होगा’

करांची  पाकिस्तान क्रिकेट टीम इंग्लैंड दौरे पर लगातार मुश्किलों में घिरी हुई है. दो टेस्ट मैच गंवाने के बाद टीम तीन मैचों की सीरीज में 0-2 से पीछे है और अब तीसरे टेस्ट में उसके सामने क्लीन स्वीप से बचने की चुनौती है. आज (9 स‍ितंबर) से तीसरा टेस्ट एजबेस्टन (बर्म‍िंघम) में होना है, जहां पाकिस्तान टीम अपनी बची-खुची इज्जत बचाने के लिए उतरेगा. ऐसे में सवाल है कि कहीं वसीम अकरम का यह दावा सही ना हो जाए।  द एथलेट‍िक से बात करते हुए वसीम अकरम ने दावा किया कि इस सीरीज के नतीजे का अंदाजा पहले ही हो गया था. अकरम ने दावा किया है कि सीरीज शुरू होने से पहले ही उन्हें पता था कि पाकिस्तान इंग्लैंड के खिलाफ 3-0 से सीरीज गंवा देगा. अकरम ने 'द एथलेट‍िक' के हवाले से कहा- मुझे सीरीज शुरू होने से पहले ही पता था कि हम इंग्लैंड से 3-0 हारने वाले हैं।  वसीम अकरम को आखिर क्यों इतनी निराशा थी ? अकरम ने पाकिस्तान टीम की तीनों प्रमुख यूनिट पर सवाल उठाए. उनके मुताबिक टीम की बल्लेबाजी संघर्ष कर रही है, गेंदबाजी एवरेज लेवल से भी नीचे है और फील्डिंग उससे भी खराब स्थिति में है. ये कोई रॉकेट साइंस नहीं है।  पाकिस्तान अब इंग्लैंड के खिलाफ दो टेस्ट हार चुका है और तीसरा व आखिरी टेस्ट बुधवार से शुरू होना है. ऐसे में अकरम की 3-0 वाली भविष्यवाणी अब टीम के सामने खड़ी दिखाई दे रही है।  दूसरे टेस्ट के बाद PCB ने किया बड़ा सफाया पाकिस्तान के खराब प्रदर्शन की चर्चा सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रही. दूसरे टेस्ट के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने ऐसा फैसला लिया, जिसने दुनियाभर के क्रिकेट फैन्स और एक्सपर्ट्स को हैरान कर दिया।  PCB ने टीम में बड़ा फेरबदल करते हुए 7 खिलाड़ियों को इंग्लैंड से वापस पाकिस्तान भेज दिया. इसके साथ ही हेड कोच सरफराज अहमद और उनके सपोर्ट स्टाफ को भी पद से हटा दिया गया।  टीम के प्रदर्शन के बाद PCB की इस कार्रवाई पर क्रिकेट जगत में काफी सवाल उठे. वसीम अकरम भी इस पूरे मामले को लेकर खिलाड़ियों के प्रति सहानुभूति रखते हैं, लेकिन उनका मानना है कि खिलाड़ियों का रवैया भी हालात सुधारने में मदद नहीं कर रहा।  दो हाथों से ही ताली बजती है… ऐसा क्यों बोले अकरम  अकरम ने पाकिस्तान की स्थिति समझाने के लिए एक मशहूर कहावत का इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा- पाकिस्तान में एक कहावत है- आप सिर्फ दो हाथों से ही ताली बजा सकते हैं।  अकरम के मुताबिक उनसे अक्सर पूछा जाता है कि क्या वह पाकिस्तान क्रिकेट की मदद के लिए कुछ कर सकते हैं. लेकिन उनका मानना है कि समस्या इतनी गहरी है कि सिर्फ किसी एक व्यक्ति के प्रयास से इसे ठीक नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान क्रिकेट में समस्याएं बहुत गहरी हैं।  वसीम अकरम ने पाकिस्तान के मौजूदा खिलाड़ियों की स्थिति पर भी बात की. उनका कहना है कि ये देश के टॉप खिलाड़ी हैं और इनके नीचे ऐसा कोई मजबूत सिस्टम मौजूद नहीं है, जहां से लगातार बेहतर खिलाड़ी तैयार होते रहें।  अकरम ने कहा कि घरेलू स्तर पर फर्स्ट क्लास क्रिकेट सिस्टम पिछले कुछ वर्षों में पूरी तरह अस्त-व्यस्त रहा है. इसमें निरंतरता की कमी है और खिलाड़ियों को पर्याप्त धैर्य भी नहीं दिया जाता. उनके मुताबिक पाकिस्तान क्रिकेट में समस्या सिर्फ नेशनल टीम के प्रदर्शन की नहीं है. इसके पीछे घरेलू क्रिकेट का कमजोर ढांचा भी बड़ी वजह है।  इंग्लैंड में पाकिस्तान की हालत खराब वसीम अकरम खुद उस पाकिस्तान टीम का अहम हिस्सा रहे हैं, जिसने इंग्लैंड में शानदार प्रदर्शन किया था. वह 1987 और 1996 में इंग्लैंड में पाकिस्तान की लगातार तीन टेस्ट सीरीज जीत का हिस्सा रहे थे।  1996 में इंग्लैंड में सीरीज जीतने वाली पाकिस्तान टीम की कप्तानी भी अकरम ने की थी. यही वजह है कि इंग्लैंड की परिस्थितियों और पाकिस्तान क्रिकेट की मौजूदा स्थिति पर उनकी टिप्पणी को खास महत्व दिया जा रहा है।  फिलहाल पाकिस्तान 0-2 से पीछे है और तीसरा टेस्ट उसके लिए सीरीज बचाने से ज्यादा क्लीन स्वीप से बचने की लड़ाई बन गया है. अकरम ने जो 3-0 का अनुमान सीरीज शुरू होने से पहले लगाया था, अब वही पाकिस्तान टीम के सामने सबसे बड़ा खतरा बनकर खड़ा है। 

Asia Cup सेमीफाइनल में भारत का बांग्लादेश से मुकाबला, पाकिस्तान के सामने श्रीलंका; जानें पूरा शेड्यूल

 नई दिल्ली Women's Asia Cup 2026 के सेमीफाइनल्स का शेड्यूल कन्फर्म हो चुका है। इस टूर्नामेंट का आखिरी लीग मैच मेजबान यूएई और बांग्लादेश के बीच खेला गया। उस मैच में बांग्लादेश की टीम ने बाजी मारी और सेमीफाइनल का टिकट कटाया। इस तरह टॉप 4 की सभी टीमें फाइनल हो गईं। टीम इंडिया ने सबसे पहले सेमीफाइनल का टिकट कटाया था, जबकि इसके बाद श्रीलंका ने दूसरे ग्रुप से टॉप 4 में जगह सुनिश्चित की थी। वहीं, पाकिस्तान की टीम ने टीम इंडिया के ग्रुप से सेमीफाइनल में एंट्री मारी और अब बांग्लादेश की टीम ने भी इन तीनों को जॉइन कर लिया है। वुमेंस एशिया कप 2026 के ग्रुप ए से टीम इंडिया और पाकिस्तान की टीम सेमीफाइनल में पहुंची है, जबकि ग्रुप बी से श्रीलंका और बांग्लादेश ने टॉप 4 में एंट्री की है। ऐसे में दोनों सेमीफाइनल दो अलग-अलग ग्रुप वाली टीमों के बीच होंगे। ग्रुप ए की टॉपर टीम ग्रुप बी की दूसरे नंबर वाली टीम से भिड़ेगी और ग्रुप बी की टॉपर टीम ग्रुप ए की दूसरे नंबर वाली टीम से भिड़ेगी। इस तरह टीम इंडिया के सामने पहले सेमीफाइनल मैच में बांग्लादेश की टीम होगी, जबकि दूसरे सेमीफाइनल में श्रीलंका के सामने बांग्लादेश की टीम होगी। टीम इंडिया ग्रुप ए की नंबर वन टीम है, जबकि श्रीलंका ग्रुप बी की नंबर वन टीम है। टीम इंडिया और बांग्लादेश के बीच मुकाबला गुरुवार 10 सितंबर को दुबई में शाम को साढ़े 6 बजे से खेला जाएगा। उस समय भारत में रात के 8 बजे होंगे। वहीं, दूसरा सेमीफाइनल श्रीलंका और पाकिस्तान के बीच आयोजित होगा, जो शुक्रवार 11 सितंबर को दुबई के ही दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा। ये मैच भी शाम को साढ़े 6 बजे से आयोजित होगा। उस समय भारत में रात के 8 बज रहे होंगे। फिर हो सकती है भारत-पाकिस्तान की टक्कर सेमीफाइनल मैचों के बाद फाइनल मुकाबला खेला जाएगा। ये मुकाबला रविवार 13 सितंबर को दुबई में ही आयोजित होना है। दोनों सेमीफाइनल मैचों की विजेता टीमें खिताब के लिए लड़ेंगी। ऐसे में संभावना इस बात की भी है कि भारत के सामने एक बार फिर से पाकिस्तान की टीम हो सकती है और इस बार मुकाबला फाइनल में होने के आसार हैं। हालांकि, इसके लिए भारत को बांग्लादेश को हराना होगा और पाकिस्तान की टीम को श्रीलंका के खिलाफ जीत दर्ज करनी होगी। Women's Asia Cup 2026 के सेमीफाइनल्स का शेड्यूल पहला सेमीफाइनल – भारत बनाम बांग्लादेश – 10 सितंबर को दुबई में रात 8 बजे से (IST) दूसरा सेमीफाइनल – श्रीलंका बनाम पाकिस्तान – 11 सितंबर को दुबई में रात 8 बजे से (IST) फाइनल – सेमीफाइनल 1 वर्सेस सेमीफाइनल 2 की विजेता – 13 सितंबर को दुबई में रात 8 बजे से (IST)

अभिषेक शर्मा की T20 फॉर्म पर उठे सवाल, पूर्व दिग्गज बोले- टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहिए; अफगान सीरीज पर नजर

मुंबई  इसमें दो राय नहीं कि टीम इंडिया के मिस्टर सुनामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने भारत के लिए बहुत ही सुनामी पारियां खेली हैं. वह इस फॉर्मेट में दुनिया के नंबर-1 बल्लेबाज थे, लेकिन  प्रदर्शन में निरंतरता गायब रही, तो अब वह नंबर-3 पर जा पहुंचे हैं. और शुरू होने जा रही अफगानिस्तान सीरीज को लेकर उन्हें लेकर बड़ा सवाल है, लेकिन उधर पूर्व दिग्गज सुरेश रैना ने सुझाव दिया है कि उन्हें टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहिए. मतलब व्हाइट-बॉल में तो हालात खराब हो चले हैं, शैली टेस्ट को सुहाती नहीं, ऐसे में फिर यह सुझाव बड़ा अजीब सा लगता है।  फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी दमदार नहीं अभिषेक शर्मा ने अभी तक समग्र रूप से खेले 206 टी20 मैचों में 32.40 के औसत से 5995 रन बनाए हैं, लेकिन उन्होंनेअपना आखिरी प्रथम श्रेणी (फर्स्ट क्लास) मैच 2024 में खेला था. और वह अभी तक खेले सिर्फ 24 प्रथम श्रेणी मैचों में एक शतक और पांच अर्धशतक और 30.60 के औसत से 1071 रन ही बना सके हैं. अमृतसर का यह लड़का पिछले 18 महीनों से लाल गेंद (रेड बॉल) के क्रिकेट से दूर रहा है। भारत के पूर्व क्रिकेटर सुरेश रैना का मानना है कि शर्मा को टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहिए और टेस्ट क्रिकेट के लिए भी ऐसी प्रतिभाओं को निखारने में कोच कैसे बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।  रैना की यह कैसी सलाह? यू-ट्यूब चैनल पर आकाश चोपड़ा के शो में रैना ने एक सवाल के जवाब में कहा, 'मांग बदल गई है. मुझे लगता है कि अब यह उतना प्रासंगिक नहीं रह गया है. यह अब बीत चुका है क्योंकि अब अलग-अलग टीमें बनाई जा रही हैं. वनडे को ही देखिए. टीम इंडिया के पास इतने प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं. वे दो टीमें बना सकते हैं, वे हर प्रारूप में अलग हो सकते हैं. लेकिन यही भविष्य है.' उन्होंने कहा, 'मुझे ऐसा इसलिए लगता है, क्योंकि खिलाड़ियों को भी उसी तरह ट्रेनिंग करनी चाहिए. अगर आप एक प्रारूप में हैं तो आप कितना त्याग करते हैं? क्या यह पीढ़ी टेस्ट क्रिकेट खेलने के लिए तैयार है? अगर आप उनसे सवाल पूछेंगे, तो वे कहेंगे 'हां, हम खेलेंगे', लेकिन दिल के गहराई में कोई संभावना नहीं है. क्योंकि इसके लिए कड़ी मेहनत की जरूरत होती है.' रैना बोले, 'मुझे लगता है कि अभिषेक को टेस्ट खेलना चाहिए. वैभव सूर्यवंशी युवा हैं. क्या वे खेलना चाहते हैं? यह एक बड़ा सवाल है. सवाल यह है कि कोच किस तरह की मेंटरशिप (मार्गदर्शन) दे रहे हैं? मानव सुथार अच्छा कर रहे हैं. क्या वह अगले रवींद्र जडेजा बन सकते हैं? क्या वह तीनों प्रारूपों में खेलने के लिए तैयार हैं? अभिषेक के सामने बड़ा सवाल? इस साल अभिषेक का बल्ला बोला कम है, खामोश ज्यादा रहा है. और आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं. अभिषेक ने इस साल से लेकर अभी तक 23 मैचों की इतनी ही पारियों में सिर्फ 23.36 के औसक से 514 रन बनाए हैं. इनमें 5 अर्द्धशतक शामिल हैं, लेकिन अब एक जगह के लिए उनकी रेस वैभव सूर्यवंशी से हो चली है. और यह भी देखने की बात होगी कि भारतीय प्रबंधन अफगानिस्तान के खिलाफ कौन सी जोड़ी चुनता है? यह जोड़ी वैभव-अभिषेक होगी ? या फिर सैमसन और वैभव? और सवाल यहीं ही खत्म नहीं होता. सवाल यह भी बड़ा है कि अगर वह पारी शुरू करते भी हैं, तो वह अपने प्रदर्शन के सूखे को खत्म कर पाएंगे?

न्यूजीलैंड में फिर चलेगा रोहित-विराट का बल्ला? सैंटनर बोले- दोनों को रोकना होगी बड़ी चुनौती

मुंबई  टीम इंडिया के लिए न्यूजीलैंड में इस साल न्यूजीलैंड के खिलाफ उसकी जमीं पर पांच वनडे मैचों की सीरीज एक तरह अगले साल मिशन 2027 यानी फिफ्टी-फिफ्टी वर्ल्ड की तैयारियों का काउंट डाउन (उल्टी गिनती) शुरू होने जैसा है. इस सीरीज में निश्चित तौर पर रोहित और विराट सबसे बड़े स्टार होंगे. हाल ही में BCCI ने रोहित को लेकर स्थिति साप कर दी है. करोड़ों भारतीयों को भरोसा है कि  इस बार रोहित और विराट दोनों ही कीवयों के लिए खासा सिरदर्द साबित होंगे. लेकिन न्यूजीलैंड कप्तान मिचेल सेंटर ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है।   सेंटनर ने कहा, 'यह एक बड़ी चुनौती होने जा रही है. वे अभी भी बहुत शानदार खिलाड़ी हैं, जैसा कि हम लंबे समय से देखते आ रहे हैं. वे वनडे खेल के उस्ताद खिलाड़ी हैं उन्होंने अतीत में न्यूजीलैंड की कुछ पिचों को काफी पसंद किया है. उम्मीद है, इस बार ऐसा नहीं होगा.' सेंटर ने कहा कि उनका पहला लक्ष्य भारत के खिलाफ सीरीज जीतना है.  सेंटनर बोले 'पहले चीजें पहले आती हैं. आप अपने घर में भारत के खिलाफ सीरीज जीतना चाहते हैं, जो एक शानदार बात होगी. इसके बाद यह देखना होगा कि अगले साल अक्टूबर तक टीम का संयोजन कैसा दिखता है।  'भारतीय युवाओं के लिए यह बड़ा चैलेंज होगा' साल 2024 में जब भारत को उसकी जमीं पर 3-0 से हराया था, तो यह भारतीय क्रिकेट पर एक बड़ा प्रहार था  इस नतीजे ने भारत के अपने घर में 12 साल और 18 सीरीजों से चले आ रहे अजेय टेस्ट रिकॉर्ड को खत्म कर दिया था.  भारतीय टेस्ट टीम में हो रहे बदलावों के बीच, सेंटनर का मानना है कि न्यूजीलैंड में दो टेस्ट मैचों की यह सीरीज कुछ नए खिलाड़ियों के लिए कठिन साबित हो सकती है.  पुणे में दूसरे टेस्ट में 7/53 और 6/104 विकेट लेकर सीरीज में जीत पक्की करने वाले सेंटनर ने उस दौरे को याद करते हुए कहा, 'मुझे लगता है कि हमने पहले भी इस बारे में बात की है कि परिस्थितियों के साथ जल्दी तालमेल बिठाना जरूरी है. एक नए कलेवर वाली भारतीय टीम के लिए,शायद यह पहली बार होगा जब कुछ खिलाड़ी न्यूजीलैंड में लाल गेंद (क्रिकेट) खेल रहे होंगे. यहां जहां की पिचें उनके लिए थोड़ी अलग होंगी.वे गेंद को उनके घर की तुलना में थोड़ा ज्यादा हरकत (मूवमेंट) कराएंगे।  भारत की 'बेहद संतुलित' टीम हालांकि, सेंटनर को लगता है कि भारत की मौजूदा टेस्ट टीम मजबूत और संतुलित है. उन्होंने टीम को "हर तरह से संतुलित" बताया और कहा कि यह "अच्छी तरह से तैयार हो रही है."  सेंटनर ने कहा, 'यदि आप उनकी टीम को देखें, तो यह एक बहुत ही संतुलित टीम है।  आप जसप्रीत बुमराह को गेंदबाजी आक्रमण में वापस लाते हैं, आपके पास मोहम्मद सिराज हैं, उछाल के साथ प्रसिद्ध कृष्णा हैं. आपके पास स्पिन गेंदबाजी के लिए रवींद्र जडेजा और मानव सुथार हैं. आपके पास संभवतः एक चौथा तेज गेंदबाज भी है. यह बहुत अच्छी तरह से आकार ले रही है. मुझे लगता है कि यह एक शानदार सीरीज होने जा रही है. पारंपरिक रूप से, वर्ष के उस समय न्यूजीलैंड में पिचें थोड़ी बहुत मदद कर सकती हैं।  केवल दो टेस्ट ही क्यों? जब सेंटनर से पूछा गया कि भारत-न्यूजीलैंड सीरीज में केवल दो टेस्ट मैच ही क्यों हैं, तो उन्होंने न्यूजीलैंड के छोटे टेस्ट सीरीज खेलने के इतिहास और वित्तीय कारकों की ओर इशारा किया. न्यूजीलैंड कप्तान ने कहा,  'लंबे समय से न्यूजीलैंड दो मैचों की सीरीज खेलता आया है. इसमें जाहिर तौर पर पैसों का पहलू भी शामिल है. मुझे पता है कि टेस्ट क्रिकेट खेलने में काफी खर्चा आता है. समय का भी मामला है. सफेद गेंद का क्रिकेट न्यूजीलैंड में भीड़ लाता है. इससे पैसा आता है. इसीलिए मुझे लगता है कि यह 10 (सीमित ओवर) और 2 (टेस्ट) का बंटवारा है.' हालांकि, सेंटनर ने कहा कि भारत के खिलाफ खेलना, भले ही वह केवल दो टेस्ट मैचों की सीरीज ही क्यों न हो, न्यूजीलैंड के लिए हमेशा एक बड़ा अवसर होता है। 

सुबेदार से कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडलिस्ट तक, सोमन राणा बोले- अब पैरालिंपिक में सोना जीतना है

नई दिल्‍ली  'मैं बहुत खुश हूं कि गोल्‍ड मेडल जीत पाया। पहले मुझे कोई जानता नहीं था। प्रैक्टिस करके सीधे घर आ जाता था। ग्‍लास्‍गो कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स में गोल्‍ड मेडल जीतने के बाद देशवासियों के दिल में जगह बन गई है।' यह कहना है भारतीय पैरा शॉट पुटर सोमन राणा का, जिन्‍होंने शॉट पुट के एफ57 वर्ग में सोना जीता था। 43 साल के सोमन ने बताया कि भारतीय पैरालिंपिक समिति (PCI), साईं (SAI) और सरकार की तरफ से काफी सहयोग मिला, जिसका नतीजा रहा कि भारतीय पैरा एथलीट्स ने ग्‍लास्‍गो कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स में अपना सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन किया। बता दें कि कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स 2026 में भारतीय पैरा एथलीट्स ने कुल सात मेडल जीते, जिसमें 3 गोल्‍ड, 2 सिल्‍वर और दो ब्रॉन्‍ज शामिल हैं। शॉट पुट की दिलचस्‍प कहानी एसबीआई लाइफ इंश्‍योरेंस द्वारा सम्‍मान प्राप्‍त करने के बाद सोमन राणा ने जागरण डॉट कॉम से बातचीत करते हुए बताया, 'मैं इंडियन आर्मी की 11 गोरखा राइफल्‍स में सुबेदार था। 2006 में जम्‍मू-कश्‍मीर के पुंछ में लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के पास माइन-क्लियरिंग और पेट्रोलिंग ऑपरेशन के दौरान मेरा पैर एक एंटी-पर्सनल लैंडमाइन पर पड़ गया था। इसकी वजह से दाएं पैर में घुटने के नीचे का हिस्‍सा कट गया।' बिहार के निवासी सोमन राणा ने आगे बताया, 'कृत्रिम पैर लगने के बाद मैं पुणे में आर्मी स्‍पोर्ट्स इंस्‍टीट्यूट (ASI) से जुड़ा। वजन ज्‍यादा होने के कारण मैं अपने ऊपरी शरीर का बेहतर उपयोग कर सकता था और इसलिए शॉट पुट से जुड़ा। बॉक्सिंग के अनुभव से भी मदद मिली। इस तरह मेरी शॉट पुट की यात्रा शुरू हुई।' गर्व का पल सोमन राणा ने बताया कि 13.40 मीटर का थ्रो करके जब गोल्‍ड मेडल जीता तो सीना गर्व से भर गया। फिर जब भारत का राष्‍ट्रगान बजा तो उस भावना को शब्‍दों में बयां कर पाना बेहद मुश्किल है। राणा ने कहा, 'गोल्‍ड मेडल जीतने की भावना एकदम अलग है। जब राष्‍ट्रगान बजा तो मैं शब्‍दों में बयां नहीं कर सकता कि क्‍या महसूस हुआ। मैं बहुत खुश हुआ।' नीरज चोपड़ा से मुलाकात खास सोमन राणा ने बताया कि ग्‍लास्‍गो कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स की सबसे खास बात रही कि पैरा एथलीट्स को भारत के अन्‍य एथलीट्स के साथ मुलाकात करने का अवसर मिला और सभी को एक-दूसरे की शानदार कहानी जानने को मिली। राणा के लिए कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स 2026 के दौरान नीरज चोपड़ा से हुई मुलाकात यादगार बनी। उन्‍होंने कहा, 'हमारे लिए बहुत अच्‍छा रहा कि सभी एथलीट्स एक-दूसरे से मिल सके। नीरज चोपड़ा से मिलना सबसे खास रहा। उनके साथ बहुत बातें हुईं। बाकी अन्‍य एथलीट्स से बातचीत भी खास रही। ऐसा आगे भी होता रहे तो देश को खेल हब बनने में देरी नहीं लगेगी।' क्‍या है सोमन का लक्ष्‍य सुबेदार सोमन राणा ने बताया कि उनका एकमात्र लक्ष्‍य पैरा-ओलिंपिक में गोल्‍ड मेडल जीतना है। सीडब्‍ल्‍यूजी 2026 के गोल्‍ड मेडलिस्‍ट ने कहा, 'एशियन गेम्‍स 2026 में कितने पैरा एथलीट्स जाएंगे, इस पर अभी स्‍पष्‍टता नहीं मिली है। मेरा लक्ष्‍य निरंतर बेहतर प्रदर्शन करना है और सबसे अहम पैरालिंपिक में गोल्‍ड मेडल जीतना है। इस मेडल से देश में पहचान मिली और ओलिंपिक मेडल जीतकर दुनिया में भारत का नाम रोशन करना है।'  

अहमदाबाद में भारत का तीरंदाजी जलवा, टोमन-श्याम और हरविंदर-विजय ने जीता गोल्ड

अहमदाबाद अहमदाबाद में जारी वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज़ (स्टेज III) में मंगलवार को भारत ने दो गोल्ड, दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज़ मेडल जीता. पुरुषों की कंपाउंड और रिकर्व टीमों ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया जबकि स्वाति चौधरी ने दो मेडल जीते. मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन टोमन कुमार और श्याम सुंदर स्वामी ने इराक को 152-139 से हराकर पुरुषों की कंपाउंड टीम का गोल्ड मेडल जीता. जबकि हरविंदर सिंह और विजय सुंडी ने स्लोवाकिया को 6-2 से हराकर पुरुषों की रिकर्व टीम का खिताब अपने नाम किया. भावना और पूजा की महिला रिकर्व टीम ने चीन से 0-6 से हारने के बाद सिल्वर मेडल जीता, जबकि स्वाति और आदिल मोहम्मद नज़ीर अंसारी मिक्स्ड टीम W1 (रिकर्व/कंपाउंड) इवेंट में रनर-अप रहे और उन्हें सिल्वर से संतोष करना पड़ा. इसके बाद स्वाति दोपहर के सेशन में लौटीं और इंडिविजुअल W1 कैटेगरी में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता. उन्होंने इंडिविजुअल न्यूट्रल एथलीट (AIN) झंडे के तहत खेलते हुए रूस की एलेना क्रुटोवा को 6-2 से हराया. शीतल देवी और पायल नाग की जोड़ी महिला कंपाउंड टीम इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीतने से भी क्योंकि उन्हें तीसरे स्थान के लिए हुए प्लेऑफ़ में चीन से हार का सामना करना पड़ा.   स्वामी – टोमन के गोल्ड से हुई दिन की शुरुआत मंगलवार को दिन की शुरुआत में स्वामी और टोमन ने इराक के अब्बास काधिम और अनवर अलदावोड पर शानदार जीत के साथ पुरुषों की कंपाउंड टीम इवेंट में गोल्ड मेडल जीता. भारतीयों ने धीमी शुरुआत की और पहले राउंड में 8 स्कोर किया, लेकिन जल्द ही अपनी लय पा ली. उन्होंने अगले 12 तीरों में केवल पांच अंक गंवाए और मजबूत बढ़त बना ली. इसके बाद स्वामी और टोमन ने लगातार अच्छा स्कोर किया और उनके सटीक तीरों ने इराक के लिए वापसी की बहुत कम गुंजाइश छोड़ी. हरविंदर – सुंडी ने भी जीता गोल्ड हरविंदर और सुंडी ने शुरुआती सेट में पिछड़ने के बाद वापसी की और स्लोवाकिया के डेविड इवान और डेनिस इवान को 6-2 से हराया. उन्होंने मैच 34-37, 36-31, 38-34, 35-31 से जीता.  भारत को शुरुआत में संघर्ष करना पड़ा था. पहले सेट में 7 स्कोर किया और कोई एरो 10 पर नहीं लगा, जिससे स्लोवाकिया को शुरुआती बढ़त मिल गई. लेकिन भारतीय टीम जल्द ही अपनी शूटिंग की लय में आ गई और दो बार के पैरालंपिक मेडलिस्ट हरविंदर ने इसकी अगुवाई की. मुकाबले में अहम मोड़ तब आया जब तीसरे सेट में भारत ने तीन बार 10 का स्कोर करके 4-2 की बढ़त बना ली. चौथे सेट में उन्होंने अपना संयम बनाए रखा और वापसी करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया. भावना- पूजा को करना पड़ा सिल्वर से संतोष एकतरफा फाइनल में चीन से 0-6 (23-34, 33-35, 30-31) से हारने के बाद भावना और पूजा को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा. भारतीय टीम को पहले सेट से ही स्कोरिंग लय पाने में संघर्ष करना पड़ा, जिसमें उन्होंने 4, 5 और 6 का स्कोर किया. दूसरे सेट में उन्होंने तीन बार 8 और एक बार 9 का स्कोर करके सुधार किया, लेकिन अंकों के अंतर को पाट नहीं पाए. तीसरे सेट में भी भारत को संघर्ष करना पड़ा, जिसमें उन्होंने 5 और 7 का स्कोर किया. पूरे फाइनल के दौरान वे एक बार भी 10 का स्कोर नहीं कर पाए और चीन ने आसानी से गोल्ड मेडल जीत लिया. स्वाति ने एक दिन में जीते दो मेडल स्वाति और आदिल मोहम्मद नज़ीर अंसारी ने मिक्स्ड टीम W1 (रिकर्व/कंपाउंड) इवेंट में सिल्वर मेडल जीता. वे चेक गणराज्य की सारका पुल्तार मुसिलोवा और डेविड ड्राहोनिनस्की से 1-5 (31-38, 33-37, 33-33) से हार गए. चेक टीम ने शुरुआती दो राउंड जीतकर 4-0 की बढ़त बना ली. भारत ने वापसी करते हुए तीसरा राउंड ड्रॉ कराया, लेकिन वे मुकाबले को निर्णायक दौर तक नहीं ले जा पाए और चेक गणराज्य ने गोल्ड मेडल जीत लिया. बता दें, W1 (रिकर्व/कंपाउंड) कैटेगरी गंभीर शारीरिक अक्षमता वाले एथलीटों के लिए पैरा-आर्चरी की एक खास क्लास है.  W1 आर्चर व्हीलचेयर से मुकाबला करते हैं और एक ही इवेंट में रिकर्व या कंपाउंड बो (धनुष) का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके बाद स्वाति दोपहर के सेशन में लौटीं और W1 ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में एलेना को 6-2 से हराकर दिन का अपना दूसरा मेडल जीता. स्वाति ने पहला राउंड 28-25 से जीता, जबकि अगले दो राउंड 27-27 और 26-26 से टाई रहे. फिर उन्होंने निर्णायक आखिरी राउंड में 26-24 से जीत हासिल की और ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया. इस तरह स्वाति ने एक ही दिन में सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीते. इस बीच, महिलाओं के कंपाउंड टीम इवेंट में चीन की वांग हुइटिंग और गाओ फांगक्सिया से ब्रॉन्ज़ मेडल का प्लेऑफ़ हारने के बाद शीतल और पायल मेडल जीतने से बाल-बाल चूक गईं. भारतीय जोड़ी अपने 16 तीरों में लगातार अच्छा स्कोर बनाए रखने के लिए संघर्ष करती रही और मुकाबले में बने रहने के लिए ज़रूरी हाई-स्कोरिंग एंड नहीं खेल पाई. उनका सबसे अच्छा प्रदर्शन दूसरे एंड में रहा, जब वे 73-74 के स्कोर के साथ सिर्फ़ एक पॉइंट पीछे थीं. हालांकि, तीसरे एंड में खराब प्रदर्शन के कारण चीन ने ब्रॉन्ज़ मेडल जीत लिया.