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भारत को लेकर फिर उगला जहर, PAK क्रिकेटर का बड़बोलापन हुआ वायरल

इस्लामाबाद पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज मोहम्मद आमिर अपने बयानों के चलते सुर्खियों में रहते हैं. आमिर ने दोहराया है कि भारतीय टीम आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल में नहीं पहुंच पाएगी. सूर्यकुमार यादव की अगुवाई वाली भारतीय टीम ने जिम्बाब्वे के खिलाफ 72 रनों से जीत दर्ज की, लेकिन अब उसका अगला मुकाबला वेस्टइंडीज के खिलाफ 'करो या मरो' वाला है. इस मैच में जीतने वाली टीम सेमीफाइनल में प्रवेश करेगी. सुपर-8 शुरू होने से पहले ही मोहम्मद आमिर ने भविष्यवाणी की थी कि भारत सेमीफाइनल तक नहीं पहुंचेगा क्योंकि साउथ अफ्रीका और वेस्टइंडीज बेहतर क्रिकेट खेल रहे हैं. भारतीय टीम की साउथ अफ्रीका के खिलाफ अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में 76 रनों से मिली हार ने मोहम्मद आमिर की इस भविष्यवाणी को एकदम पास ला दिया था. पाकिस्तानी एंकर ने तो उन्हें 'ज्योतिषी' कह दिया, जिस पर आमिर हंसी नहीं रोक पाए थे. हालांकि भारतीय टीम ने चेन्नई के एमए चिदम्बरम स्टेडियम में जिम्बाब्वे को 72 रनों से हराकर शानदार वापसी की. 'हारना मना है' शो के दौरान जब मोहम्मद आमिर से सेमीफाइनल क भविष्यवाणी फिर से पूछी गई, तो उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान क्वालिफाई करेगा. देखें, पाकिस्तान क्वालिफाई करे ना करे, इंडिया ना करेगा.' इस बयान ने एंकर को भी हैरान कर दिया. टी20 वर्ल्ड कप के बीच ही आमिर कई विवादित बयान दे चुके हैं. उन्होंने भारतीय सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा को 'स्लॉगर' कहा था. आमिर ने कहा था कि अभिषेक के साथ डिफेंसिव गियर नहीं है. सलमान अली आगा की अगुवाई वाली पाकिस्तानी टीम को शुक्रवार को फायदा मिला, जब इंग्लैंड ने कोलंबो में न्यूजीलैंड को चार विकेट से हराया. अब पाकिस्तान को श्रीलंका के खिलाफ मैच में पहले बैटिंग करने पर कम से कम 64 रनों से जीत दर्ज करनी होगी. या रनचेज में लक्ष्य को 13.1 ओवर में हासिल करना होगा, ताकि नेट रनरेट में न्यूजीलैंड को पीछे छोड़कर सेमीफाइनल में जगह बना सके. बता दें कि इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई कर चुके हैं. ग्रुप-2 में पहले स्थान पर रहने वाली इंग्लिश टीम 5 मार्च को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत या वेस्टइंडीज का सामना कर सकती है. दूसरी ओर, साउथ अफ्रीका को कोलकाता या कोलंबो में न्यूजीलैंड/पाकिस्तान का सामना करना पड़ सकता है.  प्रोटियाज इस टूर्नामेंट में अब तक अपराजित हैं और उन्होंने अभी तक कोई मैच नहीं गंवाया है. यह देखना रोचक होगा कि मोहम्मद आमिर की भविष्यवाणी सच साबित होती है या भारत वेस्टइंडीज को हराकर सेमीफाइनल में पहुंचता है.

रवि शास्त्री को सम्मान, वानखेड़े स्टेडियम में बनेगा उनके नाम का स्टैंड

मुंबई मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में लेवल-1 स्टैंड का नाम रवि शास्त्री के नाम पर रखा गया। तीन गेट भी दिलीप सरदेसाई, एकनाथ सोलकर और डायना एडुल्जी के नाम समर्पित होंगे। मुंबई के ऐतिहासिक वानखेड़े स्टेडियम में क्रिकेट फैंस के लिए बड़ी खबर आई है। मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) ने 27 फरवरी को हुई एपेक्स काउंसिल की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए स्टेडियम के प्रेस बॉक्स के नीचे स्थित लेवल-1 स्टैंड का नाम पूर्व भारतीय ऑलराउंडर और कोच रवि शास्त्री के नाम पर रखने का फैसला किया। यह कदम उनके खिलाड़ी, लीडर और कोच के रूप में योगदान को सम्मानित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। MCA के अध्यक्ष अजिंक्य नाइक ने कहा कि मुंबई क्रिकेट उन दिग्गजों की मजबूत नींव पर खड़ा है। उन्होंने बताया कि यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उन खिलाड़ियों का सम्मान करें जिन्होंने शहर और देश का नाम रोशन किया। उन्होंने कहा कि प्रेस बॉक्स के नीचे लेवल-1 स्टैंड का नाम रवि शास्त्री के नाम पर रखने का प्रस्ताव उनके अतुलनीय योगदान को मान्यता देने के लिए है। मुंबई क्रिकेट में शास्त्री बड़ा नाम रवि शास्त्री ने मुंबई के लिए घरेलू क्रिकेट खेलने के बाद भारत के लिए 80 टेस्ट और 150 वनडे मैच खेले। उन्होंने टीम इंडिया को 2017 से 2021 तक कोचिंग दी। उनके मार्गदर्शन में भारत ने 2019 के ODI वर्ल्ड कप में सेमीफाइनल तक का सफर तय किया। इसके अलावा, उनकी कोचिंग में भारत ने 2018-19 में ऑस्ट्रेलिया में अपनी पहली टेस्ट सीरीज जीती और 2020-21 में उसी ऐतिहासिक जीत को दोहराया। पहले तीन खिलाड़ियों को मिल चुका है सम्मान MCA ने रवि शास्त्री के सम्मान के अलावा स्टेडियम के तीन गेटों को भी महान खिलाड़ियों के नाम समर्पित करने का निर्णय लिया। अब ये गेट दिलीप सरदेसाई, एकनाथ सोलकर और डायना एडुल्जी के नाम से जाने जाएंगे। दिलीप सरदेसाई ने 1971 के वेस्टइंडीज दौरे में 642 रन बनाकर भारत की ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत में अहम योगदान दिया। एकनाथ सोलकर शॉर्ट लेग पर बेहतरीन कैचिंग के लिए प्रसिद्ध थे। वहीं, डायना एडुल्जी भारतीय महिला क्रिकेट की अग्रणी हस्तियों में से एक हैं और उन्होंने 22 इंटरनेशनल मैचों में भारतीय महिला टीम की कप्तानी की। MCA अध्यक्ष ने किया ऐलान अजिंक्य नाइक ने कहा कि वानखेड़े स्टेडियम के इन गेट्स और स्टैंड का नामकरण महान खिलाड़ियों को उनके गौरवशाली योगदान की याद दिलाने और उनके सम्मान में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह निर्णय मुंबई क्रिकेट के इतिहास और विरासत को जीवंत बनाए रखने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल है। इस प्रकार, वानखेड़े अब न केवल क्रिकेट का मैदान, बल्कि भारतीय क्रिकेट के दिग्गजों की उपलब्धियों और यादों का भी प्रतीक बन गया है।  

अब नहीं होगा फोटो से ब्लैकमेल: सरकारी एजेंसी की एडवाइजरी में जानें सुरक्षा के टिप्स

नई दिल्ली ब्लैकमेलिंग की आपने कई खबरें पढ़ीं होंगी, जिसमें विक्टिम को परेशान किया जाता है. यहां तक की रुपये तक की डिमांड करते हैं. कुछ मामले में विक्टिम आत्महत्या तक कर लेते हैं. आम लोगों की सेफ्टी के लिए गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली एजेंसी साइबर दोस्त I4C ने एक पोस्ट किया है. X प्लेटफॉर्म पर साइबर दोस्त I4C ने पोस्ट किया है. पोस्ट में बताया है  कि अगर आपको कोई प्राइवेट फोटो के नाम पर ब्लैक मेल कर रहा है तो उसको कैसे रोका जा सकता है. इसके लिए बड़ा ही सिंपल प्रोसेस फॉलो करना होगा. साइबर दोस्त ने बताया है कि अगर आपको भी धमकी दे रहा है और प्राइवेट फोटो को इंटरनेट पर शेयर करने को कहता है. तो उसको रोका जा सकता है. इसके लिए एक खास प्रोसेस को फॉलो करना होगा.   साइबर दोस्त का पोस्ट साइबर दोस्त ने बताया है कि StopNCCI.org पर विजिट करें. वहां अपनी इमेज या वीडियो से जुड़ा एक डिजिटल फिंगरप्रिंट (HASH) बनाएं.HASH या कोड प्राइवेट फोटो या वीडियो को रिप्रजेंट करता है. ये पूरा प्रोसेस आपके डिवाइस पर होता है. इसकी वजह से फोटो और वीडियो सेफ रहती हैं और वे कहीं अपलोड नहीं होती हैं. StopNCII.org क्या है? StopNCII.org, एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहां आप बिना सहमति के शेयर की गई प्राइवेट या वीडियो के मिसयूज को रोक सकेंगे. इसको एक इंटरनेशनल एजेंसी ऑपरेट करती है. StopNCII Dot org असल में प्राइवेट फोटो या वीडियो कोड में कन्वर्ट करता है. यह कोड पार्टनर सोशल मीडिया कंपनियों को शेयर किया जाता है और उससे संबंधित फोटो को पहचानकर उनको रिमूव किया जाता है. गलत इरादे से अगर कोई फोटो या वीडियो अपलोड भी करने की कोशिश करता है तो उसको तुरंत ब्लॉक किया जाता है.  StopNCII Dot org के साथ कई बड़े-बड़े प्लेटफॉर्म मिलकर काम करते हैं. इसमें Meta (फेसबुक और इंस्टाग्राम), टिकटॉक, रेडिट, स्नैपचैट आदि के नाम शामिल हैं.

मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव: ट्रंप के बयान के बाद सवाल—क्या रूस बचाएगा ईरान को?

नई दिल्ली अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य हमले के बाद वैश्विक राजनीति में उबाल आ गया है. राजधानी तेहरान में कई धमाकों और पूरे ईरान में हमलों की खबरों के बीच रूस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. रूसी सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि ट्रंप ने एक बार फिर अपना "असली रंग" दिखा दिया है. रूस के मेदवेदेव ने तंज कसते हुए कहा कि खुद को "शांति निर्माता" बताने वाले ट्रंप ने फिर सैन्य रास्ता चुना है. उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और इजरायल ने शनिवार को ईरान के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया. शुरुआती हमले की खबर तेहरान से आई, जहां सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के कार्यालय के पास धमाके होने की सूचना मिली. ईरानी मीडिया के मुताबिक देश के कई हिस्सों में हवाई हमले हुए और राजधानी के ऊपर धुएं के गुबार देखे गए.   US- Israel हमले से दहला Tehran? ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान में "बड़े सैन्य अभियान" शुरू कर दिए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान लगातार अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है और ऐसी मिसाइलें विकसित कर रहा है जो अमेरिका तक पहुंच सकती हैं. ट्रंप का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिकी जनता की सुरक्षा के लिए जरूरी थी. रूस ने हालांकि, इस पूरे अभियान को खतरनाक और अस्थिर करने वाला कदम बताया है. मेदवेदेव के बयान को मॉस्को की कड़ी चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है. विश्लेषकों का मानना है कि रूस का यह रुख संकेत देता है कि वह ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का खुलकर समर्थन नहीं करेगा और कूटनीतिक मोर्चे पर अमेरिका को घेरने की कोशिश कर सकता है. हमले से पहले अमेरिका ने मध्य पूर्व में बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती की थी और कई बार ईरान को समझौते के लिए चेतावनी दी थी. अब रूस के तीखे बयान के बाद यह संकट और जटिल होता दिख रहा है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर है कि क्या यह टकराव सीमित रहेगा या फिर बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकता है. ईरान पर अमेरिकी दबाव के बीच रूस की तरफ से लगातार ट्रंप को चेतावनी दी जा रही थी.

ईरान पर इजरायल की स्ट्राइक पर बोले नेतन्याहू—खतरे को दूर करने के लिए उठाया कदम

तेल अवीव इजरायल ने शनिवार को ईरान की राजधानी तेहरान पर कई बड़े हमले किए, जिससे मिडिल ईस्ट एक बार फिर से युद्ध की गिरफ्त में आ गया। इन हमलों में अमेरिका ने भी इजरायल का साथ दिया। ईरान पर हुए हमलों पर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका के साथ मिलकर किया गया हमला ईरान से पैदा हुए अस्तित्व के खतरे को दूर करने के लिए था। नेतन्याहू ने एक वीडियो बयान में कहा, "मेरे भाइयो और बहनो, इजरायल के नागरिको, कुछ समय पहले इजरायल और यूनाइटेड स्टेट्स ने ईरान में आतंकवादी शासन से पैदा हुए अस्तित्व के खतरे को दूर करने के लिए एक ऑपरेशन शुरू किया है।" नेतन्याहू ने आगे कहा, "हमारी मिली-जुली कार्रवाई बहादुर ईरानी लोगों के लिए अपनी किस्मत अपने हाथों में लेने के हालात बनाएगी। ईरान के सभी लोगों के लिए… ज़ुल्म का बोझ उतार फेंकने और एक आजाद और शांति चाहने वाला ईरान लाने का समय आ गया है।" नेतन्याहू ने आगे कहा कि ईरान को न्यूक्लियर हथियार हासिल करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए और शनिवार को इजरायल और अमेरिका के इस्लामिक रिपब्लिक पर हमले शुरू करने के बाद इजरायलियों से एक साथ खड़े होने की अपील की। नेतन्याहू ने एक वीडियो बयान में कहा, "इस खूनी आतंकवादी सरकार को न्यूक्लियर हथियार हासिल करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए, जिससे वह पूरी इंसानियत को खतरे में डाल सके।" उन्होंने आगे कहा, “हम साथ खड़े रहेंगे, साथ लड़ेंगे और साथ मिलकर इजरायल की हमेशा-हमेशा के लिए रक्षा करेंगे।” ईरान पर अमेरिकी हमले का खतरा कई दिनों से मंडरा रहा था। इजरायल ने अमेरिका का साथ देते हुए पहले ईरान पर मिसाइलों से हमला किया और फिर अमेरिका ने भी अटैक शुरू कर दिए। पहला हमला सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के ऑफिस के पास हुआ। ईरानी मीडिया ने पूरे देश में हमलों की खबर दी, और राजधानी से धुआं उठता देखा जा सकता था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा कि अमेरिका ने ईरान में बड़े लड़ाकू ऑपरेशन शुरू कर दिए हैं। उन्होंने दावा किया कि ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम डेवलप करना जारी रखे हुए है और अमेरिका तक पहुंचने के लिए मिसाइलें डेवलप करने की योजना बना रहा है और ईरानी लोगों से अपील की कि अपनी सरकार संभालो- यह तुम्हारी होगी।  

मिडिल ईस्ट में महायुद्ध की आशंका, ट्रंप की चेतावनी के बाद देशों ने दूतावास किए खाली, भारत सतर्क

नई दिल्ली मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और संभावित क्षेत्रीय संघर्ष की आशंकाओं के बीच अमेरिका, ब्रिटेन, चीन और भारत सहित कई देशों ने अपने नागरिकों और दूतावास के कर्मचारियों के लिए एडवाइजरी जारी की है। यह स्थिति तब और गंभीर हो गई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हवाई हमलों को टालने के लिए चल रही कूटनीतिक बातचीत पर निराशा व्यक्त की है। ट्रंप का कड़ा रुख और बातचीत की स्थिति बातचीत से निराशा: टेक्सास में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा- मैं बातचीत से खुश नहीं हूं। हम अभी बातचीत कर रहे हैं, लेकिन वे सही नतीजे पर नहीं पहुंच रहे हैं। यह पूछे जाने पर कि वह सैन्य हमलों का फैसला करने के कितने करीब हैं, ट्रंप ने स्पष्ट जवाब देने से इनकार करते हुए कहा- मैं आपको यह बताना पसंद नहीं करूंगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। जिनेवा में हाल ही में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता के बाद, ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर के नेतृत्व वाले अमेरिकी वार्ताकार निराश होकर लौटे हैं। अगली तकनीकी बातचीत सोमवार को वियना में होने की संभावना है। दूसरी ओर, ईरान और मध्यस्थ देश ओमान ने प्रगति को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी ने वाइट हाउस में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात के बाद कहा- शांति हमारी पहुंच में है। दूतावासों को खाली करने के निर्देश और यात्रा परामर्श लगातार मंडरा रहे युद्ध के खतरे को देखते हुए कई देशों ने एहतियाती कदम उठाए हैं। अमेरिका: अमेरिका ने यरूशलेम (इजरायल) में अपने गैर-आपातकालीन कर्मचारियों को देश छोड़ने की अनुमति दे दी है। अमेरिका को आशंका है कि यदि वह ईरान पर हमला करता है और इजरायल उसमें साथ देता है, तो ईरान इजरायल पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है। इससे पहले वाशिंगटन ने बेरूत (लेबनान) के लिए भी इसी तरह का आदेश जारी किया था। भारत और अन्य देश: भारत, ब्रिटेन, चीन, ऑस्ट्रेलिया, पोलैंड, फिनलैंड, स्वीडन और सिंगापुर जैसे देशों ने भी अपने नागरिकों और राजनयिकों को मध्य पूर्व के कुछ हिस्से छोड़ने की सलाह दी है। ब्रिटेन का कदम: ब्रिटेन ने घोषणा की है कि वह ईरान से अपने राजनयिक कर्मचारियों को अस्थायी रूप से वापस बुला रहा है। सैन्य तैनाती और इजरायल पर प्रभाव अमेरिकी सेना का जमावड़ा: कूटनीतिक रास्ते खुले होने के दावों के बावजूद, अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सैन्य ताकत लगातार बढ़ा रहा है। एक दूसरा अमेरिकी विमानवाहक पोत (USS जेराल्ड आर. फोर्ड) क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है और वर्तमान में इजरायली जलक्षेत्र में तैनात है। उड़ानें रद्द: कई एयरलाइंस ने इजरायल की वाणिज्यिक राजधानी तेल अवीव के लिए अपनी उड़ानें निलंबित कर दी हैं। अमेरिकी दूतावास ने अपने कर्मचारियों के लिए यरूशलेम के ओल्ड सिटी और वेस्ट बैंक जैसे क्षेत्रों में यात्रा करने पर रोक लगाने की चेतावनी दी है। इजरायली अर्थव्यवस्था पर मार: संभावित संघर्ष के डर से इजरायल के वित्तीय बाजारों पर भारी दबाव है। वहां की मुद्रा 'शेकेल' (Shekel) में पिछले साल जून के 12-दिवसीय युद्ध के बाद से दो दिनों की सबसे भारी गिरावट देखी गई है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर तेल की कीमतों में उछाल: ऊर्जा-समृद्ध मध्य पूर्व में अमेरिकी हमलों की संभावना के बीच कच्चे तेल की कीमतें 3.2% बढ़कर 73 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो जुलाई के बाद सबसे अधिक है। हालांकि, ट्रंप ने तेल की कीमतों की चिंता को दरकिनार करते हुए कहा- मुझे लोगों की जान और इस देश के दीर्घकालिक स्वास्थ्य की अधिक परवाह है। व्यापारिक जहाजों का मार्ग बदला: लाल सागर क्षेत्र में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की सक्रियता और सुरक्षा खतरों के कारण, दुनिया की प्रमुख शिपिंग कंपनियों (A.P. Moller-Maersk और Hapag-Lloyd) ने अपने जहाजों का मार्ग बदल दिया है। अब ये जहाज स्वेज नहर से गुजरने के बजाय अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से का लंबा चक्कर लगाकर जा रहे हैं।

ईरान का बड़ा एक्शन: बहरीन-कतर में US बेस पर मिसाइल स्ट्राइक, बढ़ा तनाव

तेल अवीव इजरायली और अमेरिकी हमलों का ईरान ने बड़ा बदला लिया है। उसने शनिवार दोपहर कम से कम सात देशों में मौजूद अमेरिकी बेस पर हमला किया है। इसमें बहरीन के नेवल बेस, कतर, यूएई, सऊदी अरब, इजरायल, कुवैत आदि शामिल हैं। हमलों के बाद ने कहा है कि अमेरिकी नेवी के पांचवें फ्लीट के हेडक्वार्टर को मिसाइल हमलों से निशाना बनाया गया है। इससे पहले, अमेरिका और इजरायल ने शनिवार को पूरे ईरान में टारगेट करते हुए एक बड़ा हमला किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी लोगों से अपनी सरकार पर कब्जा करने की अपील की। पहला हमला तेहरान के डाउनटाउन में ईरान के 86 साल के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के घर के कंपाउंड को टारगेट करता हुआ लगा। यह तुरंत साफ नहीं था कि वह उस समय वहां थे या नहीं। ईरानी राजधानी से धुआं उठता देखा जा सकता था। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा, “47 सालों से, ईरानी शासन अमेरिका को मौत का नारा लगा रहा है और खून-खराबे और बड़े पैमाने पर हत्या का एक कभी न खत्म होने वाला कैंपेन चलाया है, जिसमें यूनाइटेड स्टेट्स, हमारे सैनिकों और कई, कई देशों के बेगुनाह लोगों को टारगेट किया गया है।” उन्होंने ईरानियों से हमलों के दौरान कवर लेने की अपील की, लेकिन फिर कहा कि जब हम खत्म कर लें, तो अपनी सरकार पर कब्जा कर लें। यह आपकी होगी।” वहीं, इजरायली और अमेरिकी हमलों का ईरान ने जवाब देना शुरू कर दिया है। ईरान के पैरामिलिट्री रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि उसने इजरायल को निशाना बनाकर ड्रोन और मिसाइलों की पहली लहर लॉन्च करके जवाब दिया। इस बीच, यमन में ईरान के सपोर्ट वाले हूतियों ने रेड सी शिपिंग रूट और इजरायल पर हमले फिर से शुरू करने की कसम खाई है। ऐसा दो सीनियर हूती अधिकारियों ने कहा। उन्होंने नाम न बताने की शर्त पर यह बात कही क्योंकि हूती लीडरशिप की तरफ से कोई ऑफिशियल अनाउंसमेंट नहीं हुई थी। इसके अलावा, ट्रंप ने वीडियो में कहा कि अमेरिका ने ईरान पर उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर डील के लिए दबाव बनाने की कोशिश में इस इलाके में फाइटर जेट और वॉरशिप का एक बड़ा बेड़ा इकट्ठा करने के बाद ईरान में बड़े कॉम्बैट ऑपरेशन शुरू कर दिए हैं।

मिडिल ईस्ट तनाव का असर, ईरान संकट के चलते भारतीय फ्लाइट्स की दिशा बदली

नई दिल्ली इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर भारतीय एयरलाइंस पर भी पड़ा है। इंडिगो और एयर इंडिया की फ्लाइट्स को बीच रास्ते से ही भारत वापस लौटना पड़ा है। एयरलाइन ने पुष्टि की कि 28 फरवरी को दिल्ली से तेल अवीव के लिए रवाना हुई AI139 इजरायल के हवाई क्षेत्र के बंद होने के कारण भारत वापस लौट रही है। दोनों तरफ से किए जा रहे हवाई हमलों की वजह से दोनों देशों ने अपने-अपने एयरस्पेस को बंद कर दिया है। इसके कारण दिल्ली और तेल अवीव के बीच चलने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट को डायवर्ट कर दिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली-तेल अवीव की फ्लाइट संख्या AI139 और तेल अवीव से वापस आने वाली फ्लाइट संख्या AI140 इस संघर्ष की वजह से प्रभावित हुई हैं।

ईरान पर ट्रंप का बड़ा बयान: सरेंडर नहीं किया तो विनाश तय, क्या खत्म होने वाला है खामेनेई का दौर?

तेहरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिका ने ईरान में प्रमुख सैन्य अभियान शुरू कर दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी नागरिकों को आगाह किया है कि इस संघर्ष में अमेरिकी सैनिकों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है और कुछ जानें भी जा सकती हैं। ट्रंप ने कहा, 'कुछ ही समय पहले, अमेरिकी सेना ने ईरान में प्रमुख सैन्य अभियान शुरू कर दिए हैं। हमारा उद्देश्य ईरानी शासन से उत्पन्न होने वाले खतरों को समाप्त करके अमेरिकी लोगों की रक्षा करना है। यह बहुत ही क्रूर और भयानक लोगों का एक दुष्ट समूह है। उनकी खतरनाक गतिविधियां सीधे तौर पर अमेरिका, हमारे सैनिकों, विदेशों में हमारे ठिकानों और दुनिया भर में हमारे सहयोगियों को खतरे में डाल रही हैं।' ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इन सैन्य हमलों का मुख्य लक्ष्य ईरान की मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करना और उसकी नौसेना को पूरी तरह से खत्म करना है। यह कड़ा कदम अमेरिका और इजराइल द्वारा दी गई उन लगातार चेतावनियों के बाद उठाया गया है, जिनमें साफ कहा गया था कि अगर ईरान अपने परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को आगे बढ़ाना जारी रखता है, तो उस पर सैन्य कार्रवाई की जाएगी। ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का संदेश अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर जारी एक वीडियो संदेश में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा- मैं यह बयान हल्के में नहीं दे रहा हूं। ईरानी शासन लोगों की जान लेना चाहता है। इस युद्ध में हमारे साहसी और वीर अमेरिकी नायकों की जान जा सकती है और हमें नुकसान उठाना पड़ सकता है, जैसा कि अक्सर युद्धों में होता है। लेकिन हम यह सब सिर्फ आज के लिए नहीं कर रहे हैं। हम यह भविष्य के लिए कर रहे हैं, और यह एक नेक काम है। ईरानी सेना (IRGC) को सीधी चेतावनी ट्रंप ने ईरान के सशस्त्र बलों, विशेष रूप से 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) के सदस्यों को सीधे संबोधित करते हुए हथियार डालने की अपील की। उन्होंने वादा किया कि जो सैनिक आत्मसमर्पण कर देंगे, उन्हें माफी दी जाएगी। ट्रंप ने सख्त लहजे में कहा कि हथियार न डालने वालों के लिए दूसरा विकल्प केवल निश्चित मौत है। वार्ता की विफलता के बाद उठाया गया कदम इस सैन्य कार्रवाई की पृष्ठभूमि में हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुई कूटनीतिक वार्ताओं की विफलता है। पिछले कुछ हफ्तों में ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को लेकर वाशिंगटन और तेहरान के बीच कई दौर की बातचीत हुई थी। सबसे ताजा वार्ता गुरुवार को ही हुई थी, जो बिना किसी समझौते के बेनतीजा समाप्त हो गई। इस विफलता पर नाराजगी जताते हुए ट्रंप ने कहा- ईरान ने इनकार कर दिया, ठीक वैसे ही जैसे वह दशकों से करता आ रहा है। उन्होंने अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को छोड़ने के हर अवसर को ठुकरा दिया, और अब हम इसे और बर्दाश्त नहीं कर सकते। परमाणु हथियार या सत्ता परिवर्तन? सच्चाई जान लीजिए अमेरिका और ईरान के बीच दशकों पुरानी दुश्मनी अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। क्या अमेरिका का असली लक्ष्य सिर्फ ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है, या फिर इसके पीछे एक बहुत बड़ी योजना काम कर रही है- ईरान में सत्ता परिवर्तन और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को पद से हटाना। परमाणु हथियार: मुख्य कारण या सिर्फ एक आवरण? आधिकारिक तौर पर, अमेरिका और उसके सहयोगी (विशेषकर इजरायल) हमेशा यह दावा करते रहे हैं कि उनकी कार्रवाइयों का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकना है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने उच्च स्तर तक यूरेनियम संवर्धन किया है। अमेरिका का तर्क है कि यह वैश्विक सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है। हालांकि, कई रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि परमाणु मुद्दा अमेरिका के लिए एक ढाल की तरह काम करता है। असली चिंता ईरान का 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' है, जिसके तहत वह पूरे मध्य पूर्व में हिजबुल्लाह, हमास और हूतियों जैसे गुटों का समर्थन करता है। अमेरिका का मानना है कि जब तक मौजूदा सरकार सत्ता में है, यह समर्थन कभी खत्म नहीं होगा। असली मकसद: खामेनेई और सत्ता परिवर्तन विशेषज्ञों और कूटनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि अमेरिका अब इस नतीजे पर पहुंच चुका है कि ईरान के साथ कोई भी कूटनीतिक समझौता (जैसे 2015 का परमाणु समझौता) स्थायी नहीं हो सकता। अयातुल्ला अली खामेनेई ईरान में सर्वोच्च शक्ति हैं। उनकी विचारधारा पूरी तरह से 'अमेरिका विरोध' पर आधारित है। वाशिंगटन का मानना है कि खामेनेई के रहते अमेरिका और इजरायल के हित कभी सुरक्षित नहीं रह सकते। यह वजह है कि ईरान के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे देश के निर्वासित शहजादे रजा पहलवी को अमेरिका कुर्सी पर बैठाना चाहता है।

8वें वेतन आयोग में बदलाव, केंद्रीय कर्मचारियों के लिए यह स्कीम हो सकती है नई

नई दिल्ली  केंद्रीय कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार है। वेतन आयोग की सिफारिशें 18 से 20 महीने में लागू होने की उम्मीद है। इससे पहले, वेतन आयोग के सामने डिमांड लिस्ट सौंपने का सिलसिला जारी है। ऐसी ही एक डिमांड केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) से जुड़ी है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का सबसे बड़ा सहारा मानी जाने वाली इस योजना में बड़े बदलाव की उम्मीद है। क्या हो सकता है बदलाव? दरअसल, केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना में स्वास्थ्य सुविधाओं के तहत CGHS से वंचित शहरों में कर्मचारियों को वर्तमान में 1,000 रुपये मासिक भत्ता मिलता है। हालांकि, नेशनल काउंसिल(स्टाफ साइड), NC-JCM की 25 फरवरी 2026 को हुई बैठक में इसमें बदलाव की मांग की गई है। कर्मचारी संगठनों ने इसे बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति माह करने की मांग की है। क्यों अहम है CGHS का मुद्दा? CGHS के तहत सरकारी कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके आश्रितों को पैनल अस्पतालों में कैशलेस इलाज, ओपीडी परामर्श, दवाइयां और डायग्नोस्टिक सेवाएं मिलती हैं। पिछले कुछ वर्षों में निजी अस्पतालों के पैकेज रेट, महंगी दवाइयों और सुपर-स्पेशलिटी उपचार की लागत तेजी से बढ़ी है। ऐसे में आठवां वेतन आयोग महंगाई और वास्तविक खर्च के अनुरूप वेतन संरचना तय करता है, तो स्वास्थ्य कवर की सीमा और योगदान राशि में बदलाव स्वाभाविक माना जा रहा है। संभावित बदलाव क्या हो सकते हैं? वर्तमान में CGHS योगदान वेतन स्तर के अनुसार तय होता है। कर्मचारियों के संगठनों की मांग है कि पैनल अस्पतालों की संख्या बढ़े और पैकेज रेट समय-समय पर संशोधित हों। वहीं, स्वास्थ्य लाभों का दायरा बढ़ाने पर भी विचार हो सकता है। CGHS कार्ड, ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और ई-रिफरल सिस्टम को और सरल बनाने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। नई वेतन आयोग की सिफारिशों में प्रशासनिक सुधार और टेक्नोलॉजी अपग्रेड का रोडमैप भी शामिल किया जा सकता है। बुजुर्ग पेंशनरों के लिए क्रॉनिक बीमारियों, होम-केयर और टेलीमेडिसिन सुविधाओं का विस्तार भी एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। इसको लेकर भी कोई मॉडल बनाया जा सकता है। पिछले साल हुआ गठन बता दें कि बीते साल सरकार ने आठवें वेतन आयोग गठन का ऐलान किया था। इसके लिए नवंबर महीने में समिति को गठित किया था। वहीं, फरवरी 2026 में वेतन आयोग ने एक वेबसाइट लॉन्च किया है। वेतन आयोग ने हितधारकों से अपनी वेबसाइट पर पोस्ट किए गए 18 प्रश्नों पर प्रतिक्रिया देने का अनुरोध किया है।