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कतर हेलीकॉप्टर क्रैश: छह लोगों की गई जान, एक की तलाश जारी

दोहा पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच कतर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। कतर के क्षेत्रीय जल में रविवार तड़के हेलीकॉप्टर दुर्घटना हुई, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई। इस बात की पुष्टि कतर के आंतरिक मंत्रालय की। मंत्रालय ने बताया कि हादसे में एक व्यक्ति अभी भी लापता है और उसकी तलाश जारी है। दुर्घटना के बाद बचाव और खोज अभियान तेज कर दिया गया है। आंतरिक मंत्रालय ने बताया कि बचाव और खोज अभियान जारी है और अधिकारी अभी एक लापता व्यक्ति को ढूंढने में जुटे हैं। हादसे के बाद तटीय सुरक्षा और रेस्क्यू टीमों ने तेजी से काम शुरू किया, लेकिन समुद्री हालात बचाव कार्य को चुनौती दे रहे हैं। अधिकारी हर संभव संसाधन लगा कर इस मिशन को सफल बनाने की कोशिश में हैं। बता दें कि इस हादसे की जानकारी पहले कतर के रक्षा मंत्रालय ने दी थी। बचाव कार्य में लगे कई यूनिट्स कतर सरकार की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि इस हादसे के बाद लापता व्यक्ति की खोज और हालात का आकलन करने के लिए कई यूनिट्स को लगाया गया है। रेस्क्यू जहाज, निगरानी उपकरण और प्रशिक्षित कर्मी खोज क्षेत्र में तैनात हैं ताकि बचाव के मौके बढ़ सकें। मौसम और समुद्री हालात पर भी नजर जहां एक ओर समुद्री हालात बचाव कार्य में बाधा डार रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कतर सरकार मौसम और समुद्री हालात पर भी नजर रखी जा रही है, क्योंकि ये बचाव कार्य की सुरक्षा और गति को प्रभावित कर सकते हैं। कतर सरकार ने कहा है कि सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर खोज और बचाव कार्य को सुरक्षित और प्रभावी तरीके से जारी रखा जाएगा।  

अमेरिका में उठी आवाज: ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ को लेकर नरसंहार घोषित करने की मांग तेज

वाशिंगटन. अमेरिकी सांसद ग्रेग लैंड्समैन ने प्रतिनिधि सभा में एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें मांग की गई है कि पाकिस्तानी सेना और उसके सहयोगी संगठन जमात-ए-इस्लामी द्वारा 25 मार्च 1971 को बंगाली हिंदुओं के खिलाफ किए गए अत्याचारों को 'युद्ध अपराध और नरसंहार' माना जाए। ओहायो से डेमोक्रेट सांसद लैंड्समैन ने शुक्रवार को यह प्रस्ताव पेश किया, जिसे अब विदेश मामलों की समिति को भेज दिया गया है। क्या था ऑपरेशन सर्चलाइट प्रस्ताव में कहा गया है कि 25 मार्च 1971 की रात पाकिस्तान सरकार ने शेख मुजीबुर रहमान को गिरफ्तार कर लिया और उसकी सेना ने जमात-ए-इस्लामी की विचारधारा से प्रेरित उग्र इस्लामी समूहों के साथ मिलकर पूर्वी पाकिस्तान में 'ऑपरेशन सर्चलाइट' नाम से एक व्यापक दमन अभियान शुरू किया, जिसमें नागरिकों का बड़े पैमाने पर नरसंहार किया गया। इसमें यह भी कहा गया है कि 28 मार्च 1971 को ढाका में अमेरिका के महावाणिज्य दूत आर्चर ब्लड ने वाशिंगटन को ''चुनिंदा नरसंहार'' शीर्षक से एक टेलीग्राम भेजा था, जिसमें उन्होंने लिखा था, ''पाकिस्तानी सेना के समर्थन से गैर-बंगाली मुसलमान गरीब बस्तियों पर संगठित हमले कर रहे हैं और बंगालियों तथा हिंदुओं की हत्या कर रहे हैं।'' जब बांग्लादेश पाकिस्तान का ही हिस्सा था तब 1970 में पहली बार पूर्वी पाकिस्तान में चुनाव हुए। इसमें शेख मुजीबुर्रहमान की जीत हुई। याह्या खान और जुल्फिकार अली भुट्टो इसके खिलाफ थे। 25 मार्च 1971 को पाकिस्तानी फौज लोगों पर टूट पड़ी। आवामी लीग के लोगों को ढूंढ ढूंढकर मारा जाने लगा। जल्द ही यह हिंसा अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढने लगी। आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तानी सेना के इस ऑपरेशन सर्चलाइट में 30 लाख लोग मारे गए थे और 4 लाख महिलाओं के साथ रेप हुआ था। ब्लड टेलिग्राम लैंड्समैन ने बताया कि छह अप्रैल 1971 को आर्चर ब्लड ने अमेरिकी सरकार की चुप्पी पर आपत्ति जताते हुए एक संदेश भेजा था, जिस पर ढाका वाणिज्य दूतावास के 20 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे। इसे बाद में ''ब्लड टेलीग्राम'' के नाम से जाना गया। उस टेलीग्राम में कहा गया था, ''लेकिन हमने इस आधार पर हस्तक्षेप न करने का फैसला किया है कि अवामी संघर्ष, जिसमें दुर्भाग्यवश नरसंहार शब्द लागू होता है, एक संप्रभु देश का आंतरिक मामला है।'' लैंड्समैन द्वारा लाए गए प्रस्ताव में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से आग्रह किया गया है कि वह 25 मार्च 1971 को बांग्लादेश के लोगों के खिलाफ पाकिस्तानी सशस्त्र बलों द्वारा किए गए अत्याचारों की निंदा करे। प्रस्ताव में कहा गया है कि ''पाकिस्तानी सेना और उसके इस्लामी सहयोगियों ने धर्म और लिंग की परवाह किए बिना जातीय बंगालियों की हत्या की, उनके नेताओं, बुद्धिजीवियों, पेशेवरों और छात्रों को मार डाला और हजारों महिलाओं को यौन दासता के लिए मजबूर किया।'' इसमें यह भी कहा गया है कि ''उन्होंने विशेष रूप से धार्मिक अल्पसंख्यक हिंदुओं को निशाना बनाया, जिनके खिलाफ सामूहिक हत्याएं, सामूहिक बलात्कार, जबरन धर्मांतरण और जबरन निष्कासन जैसी घटनाओं को अंजाम दिया गया।' प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि किसी भी जातीय या धार्मिक समुदाय को उसके सदस्यों द्वारा किए गए अपराधों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति से आग्रह किया गया है कि वह 1971 में पाकिस्तानी सशस्त्र बलों और उसके सहयोगी जमात-ए-इस्लामी द्वारा बंगाली हिंदुओं के खिलाफ किए गए अत्याचारों को मानवता के खिलाफ अपराध, युद्ध अपराध और नरसंहार के रूप में मान्यता दें।

भारत-चीन रिश्तों में नई पहल: तिब्बत में पहली बार खुला व्यापार, जून से कारोबार शुरू

पिथौरागढ़. चीन ने भारतीय व्यापारियों को बड़ा सरप्राइज दिया है। उसने अपनी अधीन तिब्बती क्षेत्र तकलाकोट में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए भारतीय व्यापारियों के लिए पक्की दुकानें तैयार की हैं। पहली बार भारतीय व्यापारी पक्की दुकानों में बैठकर कारोबार कर सकेंगे। सीमावर्ती इलाकों में स्थानीय व्यापारी चीन के इस कदम से काफी उत्साहित हैं। पिथौरागढ़ जिला प्रशासन का कहना है कि संभव है कि जून से भारतीय व्यापारियों को आवंटित हो सकती हैं। पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से 300 किमी दूर स्थित इस बॉर्डर पॉइंट पर वर्षों से व्यापार होता रहा है, लेकिन अब सुविधाएं अपग्रेड हो रही हैं। भारत-चीन व्यापार समिति के महासचिव दौलत रायपा के अनुसार, वर्ष 2019 तक जब व्यापार जारी रहा, तब तक भारतीय व्यापारियों के लिए यहां पक्की दुकानों की व्यवस्था नहीं थी। वे अस्थायी दुकानों के माध्यम से नेपाली व्यापारियों के साथ मिलकर कारोबार करते थे। अब तकलाकोट में सभी व्यापारियों के लिए अलग-अलग पक्की दुकानें बनाई जा रही हैं। जिला प्रशासन भी रेडी पिथौरागढ़ डीएम आशीष भटगांई ने विभागों को विस्तृत प्लान तैयार करने के आदेश दिए। बीएसएनएल को सीमा क्षेत्र में नेटवर्क-संचार सुदृढ़ करने को कहा। गुंजी में शौचालय, पर्यटन सुविधाएँ विकसित करने के लिए जिला पंचायत और पर्यटन विभाग सक्रिय। पूर्व की तरह ट्रेड सुचारू बनाने पर फोकस। क्या है तकलाकोट का महत्व? लिपुलेख दर्रे के पास स्थित तकलाकोट उत्तराखंड का प्रमुख ट्रेड हब है। ऊनी कपड़े, नमक, घी जैसे सामान का आदान-प्रदान होता है। यह कदम सीमा व्यापार को बूस्ट देगा, स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत करेगा। तकलाकोट में भारत और चीन के बीच कोरोना काल से व्यापार बंद है। आखिरी बार वर्ष 2019 में दोनों देशों के व्यापारियों के बीच कारोबार हुआ था। छह साल के लंबे अंतराल के बाद अब व्यापार शुरू करने की तैयारियां तेज हो गई हैं, जिससे स्थानीय व्यापारी उत्साहित हैं।

ऊर्जा संकट के बीच खुशखबरी: अमेरिका से LPG लेकर मंगलुरु पहुंचा जहाज

न्यू मंगलौर. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के चौथे सप्ताह में प्रवेश करने के बीच भारत के लिए राहत भरी खबरें सामने आई हैं। अमेरिका के टेक्सास से एलपीजी (LPG) लेकर चला एक बड़ा कार्गो जहाज कर्नाटक के न्यू मंगलौर पोर्ट पर सफलतापूर्वक पहुंच गया है। इसके साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया है कि खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय जहाज और नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं। न्यू मंगलौर पोर्ट पर अमेरिका से आए इस एलपीजी जहाज का आगमन ऐसे समय में हुआ है जब रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' में तनाव के कारण वैश्विक व्यापार मार्ग बाधित हैं। शिपिंग मंत्रालय ने इस संकट के दौरान ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 14 से 31 मार्च तक कच्चे तेल और एलपीजी के लिए कार्गो शुल्क माफ करने का भी एलान किया है। शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव, राजेश कुमार सिन्हा ने एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में देश को आश्वस्त करते हुए कहा, "पिछले 24 घंटों में किसी भी समुद्री अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है। फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हमारे सभी 22 जहाज और 611 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। हम लगातार उनकी स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और वर्तमान में किसी भी बंदरगाह पर जाम की स्थिति नहीं है।" कम हुई रसोई गैस की पैनिक बुकिंग पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि देश में एलपीजी संकट अब नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के बीच मची 'पैनिक बुकिंग' में भारी गिरावट आई है। गुरुवार को केवल 55 लाख बुकिंग दर्ज की गई, जो संकट के शुरुआती दिनों की तुलना में काफी कम है। उन्होंने साफ किया कि देश में एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और कोई भी वितरण केंद्र खाली नहीं है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार जोखिम भरे रास्तों से भी सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है। बुधवार को यह भारतीय कच्चा तेल टैंकर गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर सुरक्षित पहुंचा। लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर ये दो भारतीय जहाज 16 और 17 मार्च को होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत पहुंचे थे।

मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव: सऊदी अरब ने ईरानी अफसरों को निकाला बाहर

नई दिल्ली. अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद ईरान ने खाड़ी देशों में जिस तरह से हमले किए हैं उससे अरब के समीकरण ही बिगड़ गए हैं। सऊदी अरब ने ईरानी दूतावास के अधिकारियों को तत्काल देश छोड़ने का फरमान सुना दिया है। सऊदी अरब ने कहा है कि ईरान के सभी अधिकारी 24 घंटे के अंदर देश छोड़ दें। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने रविवार सुबह यह आदेश जारी किया है। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ईरान ने सभी अंतरराष्ट्रीय समझौतों को उल्लंघन किया है। एक अच्छे पड़ोसी को अपने पड़ोसी की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए। ईरान ने बीजिंग समझौते और यूएन सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2817 का उल्लंघन किया है। सऊदी अरब ने कहा कि तेहरान ने जो कुछ भी किया है उससे इस्लामिक एकता खतरे में पड़ गई है। सऊदी अरब ने कहा कि बार-बार समझाने के बाद भी ईरान अपने पड़ोसी देशों को निशाना बना रहा है। आने वाले समय में उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। सऊदी अरब ने साफ कहा है कि अपनी सुरक्षा के लिए कोई भी कदम उठाने से परहेज नहीं किया जाएगा। इस आदेश के कुछ देर बाद ही सऊदी अरब प्रशासन ने ईरानी ड्रोन को मार गिराने की भी पुष्टि की है। इसके अलावा यह भी कहा गया कि रियाद की तरफ तीन बैलिस्टिक मिसाइल छोड़ी गई थीं जिन्हें असामान में ही ध्वस्त कर दिया गया।

पेट्रोलियम मंत्रालय का नया आदेश: 50% ज्यादा LPG मिलेगा, पर इन नियमों का रखना होगा ध्यान

नई दिल्ली सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वाणिज्यिक एलपीजी का अतिरिक्त 20 फीसदी आवंटन मंजूर किया है। इससे कुल आवंटन बढ़कर 50 फीसदी हो गया है। घरेलू उत्पादन में सुधार के कारण स्थिति सामान्य हो रही है। पश्चिम एशिया में तीन सप्ताह के युद्ध से भारत की ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई थी। वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को युद्ध के कारण पहले एलपीजी आपूर्ति में कटौती की गई थी। घरेलू रसोई को प्राथमिकता देने के लिए यह कदम उठाया गया था। बाद में उनकी आपूर्ति का एक पांचवां हिस्सा बहाल किया गया। सरकार ने राज्यों द्वारा पाइप गैस परियोजनाओं में तेजी लाने पर 10 फीसदी अतिरिक्त आपूर्ति की पेशकश की थी। सरकार ने शनिवार को रेस्तरां, होटल, औद्योगिक कैंटीन, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, सामुदायिक रसोई और रियायती खाद्य आउटलेट्स के लिए 20 फीसदी बढ़ी हुई आपूर्ति की घोषणा की। सरकार की ओर से एलपीजी के मामले में प्रवासी श्रमिकों को मदद पहुंचाने का भी भरोसा दिया गया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि कमर्शियल सिलिंडर का अतिरिक्त आवंटन वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के तेल कंपनियों के साथ पंजीकरण और पाइप्ड प्राकृतिक गैस कनेक्शन के लिए आवेदन करने पर निर्भर करेगा। एक आधिकारिक बयान में यह भी बताया गया कि घरेलू एलपीजी आपूर्ति स्थिर है और फिलहाल कोई कमी नहीं है। पश्चिम एशिया संकट के बाद क्या बदलाव किया गया था, अब क्या बदला? पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव (ईरान-इस्राइल संघर्ष) के कारण पैदा हुई एलपीजी की किल्लत को कम करने के लिए, भारत सरकार ने कमर्शियल (19 किलो) एलपीजी सिलिंडर का कोटा बढ़ाकर 50% कर दिया है। यह कदम होटल, रेस्तरां, और छोटे व्यापारियों को राहत देने के लिए उठाया गया है, क्योंकि पश्चिम एशिया में जंग शुरू होने के बाद दिल्ली सहित कई राज्यों में कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई सामान्य खपत का केवल 20% (लगभग 1,800 सिलेंडर/दिन) ही सीमित कर दी गई थी, ताकि घरेलू रसोई गैस की प्राथमिकता सुनिश्चित की जा सके। अब केंद्र सरकार ने अतिरिक्त कोटा जारी करते हुए इसे बढ़ाकर 50% कर दिया है। आपूर्ति दबाव कम करने के उपाय सरकार आपूर्ति दबाव कम करने के लिए पाइप प्राकृतिक गैस (पीएनजी) की ओर बदलाव को बढ़ावा दे रही है। विशेष रूप से वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए पीएनजी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्यों से शहर गैस वितरण नेटवर्क के लिए अनुमोदन में तेजी लाने का आग्रह किया गया है। सभी रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं। पर्याप्त कच्चे तेल का भंडार पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित कर रहा है। खुदरा दुकानों पर कोई ईंधन की कमी नहीं बताई गई है। प्राकृतिक गैस आपूर्ति और अन्य कदम घरेलू पीएनजी और संपीड़ित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) परिवहन सहित प्राथमिकता वाले खंडों को प्राकृतिक गैस की पूरी आपूर्ति मिल रही है। औद्योगिक उपभोक्ताओं को उनकी सामान्य आपूर्ति का करीब 80 फीसदी प्राप्त हो रहा है। अतिरिक्त कदमों में घरेलू एलपीजी उत्पादन में वृद्धि शामिल है। बुकिंग अंतराल भी बढ़ाया गया है ताकि उपभोक्ताओं को सुविधा हो। राज्यों को वैकल्पिक ईंधन विकल्प प्रदान करने के लिए अतिरिक्त केरोसिन आपूर्ति भी की गई है। निगरानी और समुद्री क्षेत्र की स्थिति राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है। देशभर में 3,500 से अधिक छापे मारे गए हैं। इन छापों के परिणामस्वरूप करीब 1,400 एलपीजी सिलिंडर जब्त किए गए हैं। अधिकांश राज्यों ने आपूर्ति और वितरण की निगरानी के लिए नियंत्रण कक्ष और जिला स्तरीय निगरानी समितियां स्थापित की हैं। समुद्री क्षेत्र में, सरकार ने बताया कि 22 भारतीय-ध्वज वाले जहाज और 611 नाविक पश्चिमी फारस की खाड़ी क्षेत्र में बने हुए हैं। पिछले 24 घंटों में कोई अप्रिय घटना रिपोर्ट नहीं हुई है।

अखाड़ा परिषद का बड़ा फैसला, अर्धकुंभ 2027 और महाकुंभ 2028 में बिना पहचान पत्र के नहीं होंगे साधु संतों का प्रवेश

हरिद्वार साल 2027 में हरिद्वार में अर्ध कुंभ और 2028 में उज्जैन में महाकुंभ का आयोजन होने वाला है। यह दोनों ही आयोजन सुव्यवस्थित तथा पारदर्शी तरीके से हो सकें इसके लिए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की ओर से एक बड़ा निर्णय लिया गया है। दरअसल भारतीय खड़ा परिषद एवं श्रीमनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री महेंद्र रवींद्र पुरी नहीं निर्णय लिया है कि हरिद्वार अर्धकुंभ और सिंहस्थ महाकुंभ में किसी भी साधु संत को बिना आधिकारिक पहचान के प्रवेश नहीं दिया जाएगा। सभी को अपना आधार कार्ड अनिवार्य रूप से अपने साथ रखना होगा। अखाड़ा परिषद का बड़ा निर्णय श्री महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि यह निर्णय अखाड़ा परिषद की ओर से इसलिए लिया गया है ताकि फर्जी साधुओं पर अंकुश लगाया जा सके। जो भी भगवाधारी बिना पहचान पत्र के मिलेंगे उनकी विशेष जांच की जाएगी और अगर आवश्यकता पड़ी तो उन्हें मेले में प्रवेश से रोका भी जाएगा। अखाड़ा अध्यक्ष के मुताबिक यह दोनों ही मिले सनातन धर्म की आस्था, परंपरा और संस्कृति का प्रतीक है। फर्जी साधुओं की मौजूदगी से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो सकती है। उन्होंने सभी अखाड़ों से इस अभियान में सहयोग करने की अपील की है। श्रद्धालुओं से भी अपील की गई है कि वह सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति के झांसे में ना आएं।

वॉट्सऐप करेगा डिजिटल अरेस्ट में इस्तेमाल हो रहे डिवाइस ID को ब्लॉक, केंद्र सरकार का कड़ा कदम

  नई दिल्ली डिजिटल अरेस्ट स्कैम को लेकर सरकार ने बड़ा एक्शन का ऐलान किया है. सरकार ने वॉट्सऐप को डिजिटल अरेस्ट इस्तेमाल हो रहे डिवाइस IDs ब्लॉक करने का आदेश दिया है. बहुत से स्कैम में इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप WhatsApp का यूज किया जाता है, जिसमें विक्टिम के पास वॉट्सऐप कॉल, वीडियो कॉल और मैसेज तक भेजे जाते हैं।  गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाली साइबर विंग इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर (I4C) की रिपोर्ट के आधार पर एक्शन लेने को कहा है. असल में साइबर स्कैमर्स बार-बार नए अकाउंट बनाते हैं, इसलिए डिवाइस लेवल पर रोक लगाने की तैयारी।  WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म पर Skype जैसी सेफ्टी फीचर्स लागू करने पर विचार हो रहा है. IT Rules 2021 के तहत डिलीट अकाउंट का डेटा 180 दिन तक सुरक्षित रखने पर जोर दिया जा सकता, जिससे जांच एजेंसियों को जांच में मदद मिल सके. मैलिशियस APK और फर्जी ऐप्स को पहचानकर ब्लॉक उनको भी ब्लॉक करने की योजना है।  WhatsApp एक पॉपुलर मैसेजिंग ऐप है, जिसका बारत में करोड़ों लोग यूज करते हैं. इसी पॉपुलैरिटी का फायदा उठाते हुए साइबर स्कैमर्स वॉट्सऐप पर आईडी बनाकर भोले-भाले लोगों को शिकार बनाते हैं. ऐसे में सरकार साइबर ठगों द्वारा यूज होने वाली ID को ब्लॉक करना चाहती है।   डिवाइस IDs क्या होता है?  डिवाइस IDs, असल में किसी भी गैजेट की पहचान होती है, जो एक यूनिक नंबर होता है. यह ठीक वैसा नंबर होता है जैसा कि भारत में हर एक भारतीय का आधार नंबर होता है।  डिवाइस आईडी कई तरह की हो सकती है, जिसमें IMEI नंबर, मैक एड्रेस , डिवाइस सीरियल नंहर और एडवर्टाइजिंग नंबर भी होता है।      IMEI नंबरः मोबाइल नेटवर्क में फोन की पहचान के लिए (सिम आधारित) यूज होती है.      MAC एड्रेस: Wi-Fi या नेटवर्क पहचान के लिए यूज होती है.      डिवाइस सीरीज नंबर: यह कंपनी प्रोवाइड कराती है और यह यूनिक नंबर होता है.     Advertising ID: ऐप्स और Ads के लिए यूज होता है.  डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या होता है?   डिजिटल अरेस्ट स्कैम में आरोपी खुद को पुलिस/एजेंसी बताकर विक्टिम को डराते हैं और पैसे ठगते हैं. WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म का यूज करके वे विक्टिम को अलग-अलग बहाने बनाकर पहले विक्टिम को डराते हैं, फिक गिरफ्तारी की धमकी देते हैं।  इसके बाद उनको किसी दूसरे शहर में जांच के लिए बुलाते हैं और जब विक्टिम दूसरे शहर पहुंचने में असर्मथता दिखाता है तो उसे डिजिटली जांच में सहयोग करने को कहते हैं. इसी को डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है. इन केस में विक्टिम को कैमरे के सामने रहने का फेक ऑर्डर दिया जाता है. बीते करीब दो साल से बहुत से लोगों को डिजिटल अरेस्ट करके उनकी मेहनत की कमाई को ठगा जा रहा है।  डिजिटल अरेस्ट स्कैम से ऐसे सेफ रहें साइबर ठग डिजिटल अरेस्ट स्कैम का शिकार बनाने के लिए अलग-अलग ट्रिक का यूज करते हैं. इसमें वे फेक सिम कार्ड का मिसयूज, पार्सल स्कैम और यहां तक फर्जी नोटिस भेजकर भी डरा सकते हैं।  डिजिटल अरेस्ट स्कैम से बचाव के लिए जरूरी है कि अनजान नंबर से आने वाले कॉल पर भरोसा नहीं करना और घबराना नहीं है. फर्जी आरोप सुनकर डरना नहीं है. बचाव के लिए करीबी पुलिस स्टेशन या संचार साथी की हेल्प लाइन नंबर पर कॉल करें और पूरे मामले के बारे में बताएं।   ऑनलाइन गिरफ्तारी जैसा कुछ नहीं होता  अनजान नंबर से आने वाला कॉल या वीडियो कॉल करने वाला शख्स फोन पर या वीडियो कॉल पर गवाही देने को कहता है. सबसे पहले जान लें कि ऑनलाइन जांच जैसा कोई प्रावधान नहीं है. इसके लिए करीबी पुलिस थाने भी जा सकते हैं।  ओटीपी और बैंक डिटेल्स शेयर ना करें  डिजिटल अरेस्ट करके जांच के नाम पर लोगों की बैंक डिटेल्स और फैमिली के अन्य मेंबर्स की डिटेल्स मांगी जाती है. यहां तक कि बैंक अकाउंट में मौजूद रकम भी पूछते हैं फिर OTP या फिर जांच के नाम पर रुपयों को दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर करने को कहेंगे. ऐसे लोगों से सावधान रहना है और उनकी कंप्लेंट संचार साथी पर जाकर करें। 

जयगांव के पश्चिम बंगाल निवासी: बिना वीजा और भारी फीस के भूटान की यात्रा, जिंदगी है शानदार

जयगांव Gateway Of Bhutan Jaigaon: भारत से सिर्फ नेपाल ही नहीं बल्कि भूटान जाना भी बेहद आसान है, यह जगह अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है. हजारों पर्यटक भूटान घूमने जाते हैं और भारत का पड़ोसी देश होने के नाते भारत से भी लोग यहां घूमने जाते रहते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पश्चिम बंगाल के एक छोटे से शहर से तो आप पैदल ही भूटान जा सकते हैं।  सीमाएं सिर्फ नक्शे पर दिखाई देती हैं, जमीन पर नहीं. ऐसा आपने सुना होगा. लेकिन भारत में ऐसी कई जगहें हैं, जहां यह बात सच साबित होती है. ऐसी ही एक खास जगह है पश्चिम बंगाल का छोटा-सा शहर जयगांव, जहां रहने वाले लोगों की जिंदगी सच में मजेदार है. क्योंकि यहां के लोग जब मन चाहे भूटान में बड़ी आसानी से एंट्री कर सकते हैं।  अच्छी बात यह है कि भूटान जाने के लिए आपको पासपोर्ट या वीजा की जरूरत नहीं है, आपको सिर्फ परमिट लेना होता है. यह परमिट भूटान सरकार का इमिग्रेशन डिपार्टमेंट देता है. हालांकि भूटान में आधार कार्ड नहीं चलता है इसलिए आप अपना पैनकार्ड और वोटर आईडी लेकर ही भूटान की यात्रा शुरू करें।  जयगांव के लोग भूटान में प्रति रात स्टे पर लगने वाली सस्टेनेबल डेवलेपमेंट फीस देने से बचने के लिए शाम होते ही भारत लौट आते हैं. बॉर्डर टाउन जयगांव के लोगों को भूटान में हर एंट्री के लिए 50-100 रुपये तक की फीस देनी पड़ती है. हालांकि, ये लोग केवल भूटान के शहर फुंशोलिंग तक ही जा सकते हैं. उसके आगे जाने के लिए भी परमिट लगता है।  भारत से पैदल जा सकते हैं भूटान जयगांव भारत-भूटान सीमा पर स्थित है और इसके ठीक सामने है फुंशोलिंग (फुएंत्शोलिंग). इन दोनों शहरों को जोड़ता है मशहूर भूटान गेट, जिसे पार करते ही आप एक अलग देश में पहुंच जाते हैं. भारतीयों के लिए भूटान जाना इतना आसान है कि वो अपने रोजाना के कामों के लिए आसानी से इधर-उधर जाते रहते हैं. पश्चिम बंगाल से सड़क मार्ग से भूटान जाने के लिए पर्यटकों को जयगांव वाले रास्ते से ही होकर गुजरना होता है।  जयगांव की गलियों में भारतीय बाजारों की चहल-पहल से भरा एक अलग ही माहौल देखने को मिलता है, जबकि गेट के उस पार फुंशोलिंग में साफ-सुथरी सड़कें, शांत माहौल और अलग संस्कृति नजर आती है. इस तरीके से एक ही दिन में टूरिस्ट दोनों ही देशों का मजा भी ले लेते हैं और यहां आकर उनको एक अलग ही अनुभव भी होता है।  जयगांव के पास फुंशोलिंग क्रॉस करके आप भूटान में एंट्री कर सकते हैं और खास बात यह है कि यहां पर भारत और भूटान दोनों ही देशों के पैसे चलते हैं. ऐसे में वहां लोगों को ज्यादा परेशानी भी नहीं होती है।  कई भूटानी तो जब जयगांव आते हैं तो इधर के गोलगप्पे, समोसे और रसुगुल्ले खाना नहीं भूलते हैं. वैसे ही भारतीय भी फुंशोलिंग जाकर वहां से शॉपिंग करके आ जाते हैं।  फुंशोलिंग में ही भूटान के परमिट का दफ्तर बना हुआ है, जो हर सुबह 9 बजे खुल जाता है. यहां से आप 15 दिनों का एंट्री परमिट ले सकते हैं, हालांकि यह सोमवार से शुक्रवार ही मिलता है. इसका कारण यह है कि भूटान में शनिवार और रविवार पूरे देश में छुट्टी घोषित की गई है, जिसकी वजह से परमिट ऑफिस बंद रहता है।  जयगांव घूमने की खास जगहें  जयगांव से सिर्फ भूटान नहीं लोग देखने नहीं जाते हैं, बल्कि जयगांव में भी कई ऐसी जगहें जिन्हें देखकर किसी भी मन खुश हो जाए।  बुक्सा टाइगर रिजर्व जयगांव में पहाड़ी इलाके में बसा बेहद सुंदर इलाका है, जहां कई घूमने की जगहें मौजूद हैं. अगर आप जयगांव जाते हैं तो आप वहां से 35 किलो दूर टाइगर रिजर्व जा सकते हैं. जो भूटान के दक्षिणी पहाड़ी क्षेत्र की बक्सा पहाड़ियों में स्थित है और करीब 760 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।  सिकियाझोरा जयगांव में घूमने के लिए सिकियाझोरा भी काफी मशहूर पहाड़ इलाका है, जहां पर तोर्षा नदी बहती है. इस नदी में रोजाना तमाम लोग बोटिंग करने के लिए आते हैं और आसपास के पहाड़ी नजारों का मजा लेते हैं।  हासिमारा तोर्षा नदी के किनारे बसे हासिमारा में आपको दिल को जीतने वाली खूबसूरती देखने को मिलेगी. इस पहाड़ी इलाके में टी-गार्डन देखने को मिलेंगे, इसके अलावा हासिमारा में आपको बंगाली और भूटानी परंपरा देखने को मिलेगी. इस जगह से भूटान की सीमा महज 17 किमी ही दूर है।  भूटान के लिए बेस्ट एंट्री पॉइंट जयगांव से भूटान की यात्रा शुरू करना इसलिए भी आसान है क्योंकि यहां से आगे जाने के लिए परमिट प्रोसेस भी काफी आसान होता है. अगर आप पहली बार भूटान जाने का प्लान बना रहे हैं, तो जयगांव आपके लिए सबसे आसान एंट्री पॉइंट साबित हो सकता है।      यहां पहुंचकर आप बिना ज्यादा भागदौड़ के फुंशोलिंग घूम सकते हैं और फिर आगे थिम्पू या पारो जैसी खूबसूरत जगहों का रुख कर सकते हैं।      एक परमिट पर 15 दिनों तक भूटान आप घूम सकते हैं, जो लोग काम के सिलसिले में भूटान जाते हैं उनको 6 महीने या 1 साल तक का परमिट दिया जाता है.     हालांकि जो लोग थिम्पू और पारो से आगे यात्रा करना चाहते हैं उन भारतीय पर्यटकों को थिम्पू में रूट परमिट लेना होता है।      अपनी कार से सफर करने वाले लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस और गाड़ी के सारे पेपर्स रखना भी जरूरी है. बच्चों को जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल आईडी के आधार पर ही परमिट दिया जाता है।      इसके अलावा किसी भी भारतीय नागरिक को पानबांग में रात भर रुकने की इजाजत नहीं है, उन्हें सूर्यास्त से पहले भारतीय इलाके में लौटना होगा।   

नतांज परमाणु केंद्र पर हमले के बाद अमेरिका-इजरायल की विनाशकारी कार्रवाई

 तेहरान मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर है. ईरान के सबसे सुरक्षित और संवेदनशील माने जाने वाले नतांज परमाणु केंद्र (Natanz Nuclear Facility) पर एक भीषण हमला हुआ है. खबर है कि अमेरिका-इजरायल ने मिलकर इस साइट पर जबरदस्त बमबारी की है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. हालांकि, इस भारी हमले के बीच राहत की एक बड़ी खबर भी सामने आई है।  ईरानी मीडिया के मुताबिक, इस ताजा हमले में नतांज संवर्धन केंद्र को निशाना बनाया गया है. हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसकी गूंज दूर-दराज के इलाकों तक सुनी गई. लेकिन शुरुआती जांच के बाद ईरानी अधिकारियों ने राहत की सांस ली है, क्योंकि अब तक किसी भी तरह के रेडियोधर्मी पदार्थ (रेडिएशन) के रिसाव की पुष्टि नहीं हुई है. यानी, परमाणु कचरा फैलने जैसा जो सबसे बड़ा डर था, वह फिलहाल टल गया है।  ईरानी मीडिया का दावा है कि धमाके के बावजूद आसपास के रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं. सरकार ने इस सैन्य कार्रवाई को अमेरिका-इजरायल के उस निरंतर अभियान का हिस्सा बताया है, जिसका मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना है।  बार-बार निशाने पर नतांज, पर हर बार बचा पर्यावरण दरअसल, नतांज परमाणु केंद्र दुश्मनों के लिए हमेशा से टारगेट रहा है. साल 2025 से अब तक इस साइट को कई बार निशाना बनाया जा चुका है. हर बार यहां के ढांचे और मशीनों को नुकसान पहुंचता है, लेकिन गनीमत यह रही है कि अब तक पर्यावरण को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा है।  आपको बता दें कि पिछले साल जून में इजरायल और ईरान के बीच जो 12 दिनों का भीषण युद्ध चला था, उसमें भी नतांज ही मुख्य टारगेट था. उस समय अमेरिका भी सीधे तौर पर इस संघर्ष का हिस्सा बन गया था. अब एक बार फिर इसी जगह पर बमबारी होना यह संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट के हालात और भी ज्यादा विस्फोटक हो सकते हैं।