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भारत में राफेल बनाने के बाद सरकार बेचेगी, समझें डील की शर्तें

बेंगलुरु  भारत में राफेल बनाने की तैयारी तेज हो गई है. फ्रांस के राष्ट्रपति के दौरे के बाद डील को आगे बढ़ाने की कवायद शुरू हो चुकी है. सवाल अब यह उठ रहा है कि अगर राफेल भारत में बनेंगे, तो क्या सरकार इन्हें दूसरे देशों को बेच भी सकेगी? या ये विमान सिर्फ भारतीय वायुसेना के लिए ही होंगे? डील की शर्तें क्या कहती हैं चलिए समझते हैं. राफेल डील में आई तेजी इमैनुएल मैक्रों के भारत दौरे के बाद राफेल डील को लेकर हलचल तेज हुई है. रक्षा मंत्रालय जल्द ही प्रस्ताव को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी के पास भेजने की तैयारी में है. ऐसे में उम्मीद है कि अगले 4 से 6 महीने में समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक, रक्षा खरीद प्रक्रिया की टाइमलाइन छोटी करने की कोशिश की जा रही है ताकि लड़ाकू विमान और अन्य हथियार जल्द मिल सकें. अभी विदेशी हथियार खरीदने की प्रक्रिया लंबी और जटिल मानी जाती है.  114 राफेल को भारत में बनाने की मंजूरी मैक्रों के दौरे से पहले रक्षा मंत्रालय की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल विमान देश में बनाने की मंजूरी दी थी. राफेल विमान फ्रांस की कंपनी दासो एविएशन बनाती है. प्रस्ताव है कि दासो किसी भारतीय कंपनी के साथ साझेदारी कर भारत में उत्पादन प्लांट स्थापित करे. इससे तकनीक हस्तांतरण, स्थानीय रोजगार और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा.  क्या भारत इन राफेल को बेच सकेगा? यहीं सबसे अहम सवाल आता है. साफ तौर पर कहा गया है कि ये 114 राफेल भारतीय वायुसेना की जरूरतों के लिए बनाए जा रहे हैं. यानी इनका उद्देश्य निर्यात नहीं, बल्कि देश की रक्षा क्षमता बढ़ाना है. डील की शर्तों के मुताबिक, विमान का उत्पादन लाइसेंस और तकनीकी समझौते के तहत होगा. ऐसे में बिना फ्रांसीसी कंपनी और सरकार की अनुमति के भारत इन विमानों को तीसरे देश को नहीं बेच सकता है.  रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भविष्य में निर्यात का विकल्प खुलता भी है, तो वह अलग समझौते और संयुक्त अनुमति के तहत ही संभव होगा. 

सावंत vs बोरकर: जमीन उपयोग नियमों पर नहीं थम रहा विवाद, आंदोलन जारी

गोवा गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा है कि रिवॉल्यूशनरी गोअंस पार्टी (आरजीपी) विधायक वीरेश बोरकर ने भूमि-उपयोग नियमों के कथित दुरुपयोग के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखने का निर्णय लिया है जबकि उन्होंने (मुख्यमंत्री के) आंदोलन वापस लेने का अनुरोध किया था। आरजीपी विधायक का विरोध प्रदर्शन बुधवार को पांचवें दिन में प्रवेश कर गया। वे नगर एवं ग्रामीण नियोजन (टीसीपी) अधिनियम की धारा 39ए को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। आरोप है कि इस धारा का दुरुपयोग कुछ जमीनों को "बस्ती क्षेत्रों" में बदलने के लिए किया जा रहा है, जहां निर्माण गतिविधियों की अनुमति है। मुख्यमंत्री ने मंगलवार देर रात बोरकर के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों द्वारा विवादित धारा को रद्द करने की मांग को लेकर टीसीपी मंत्री विश्वजीत राणे से मुलाकात की। बैठक के बाद सावंत ने पत्रकारों को बताया कि बोरकर के विधानसभा क्षेत्र सेंट आंद्रे में धारा 39ए के तहत परियोजनाओं को दी गई अनुमतियों को फिलहाल स्थगित रखने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस धारा के तहत दी गई सभी अनुमतियों को तुरंत रद्द करना संभव नहीं है, क्योंकि इसके लिए एक प्रक्रिया का पालन करना होगा। सावंत ने कहा, "धारा 39ए के तहत दी गई अनुमतियों को वापस लेने की एक प्रक्रिया है। इस पर निर्णय लेने से पहले नगर एवं ग्राम नियोजन बोर्ड से परामर्श करना आवश्यक है।" मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने बोरकर को फोन पर विरोध प्रदर्शन वापस लेने के लिए मनाने की कोशिश की। विधायक यहां आज़ाद मैदान में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। सावंत ने पत्रकारों से कहा, "मैंने उनसे कई बार फोन पर बात की, लेकिन वे विरोध प्रदर्शन वापस लेने के लिए राजी नहीं हुए।" इससे पहले मुख्यमंत्री ने मंगलवार को बोरकर से आज़ाद मैदान में मुलाकात की थी और इसी तरह की अपील की थी। बोरकर ने बुधवार तड़के अपने विरोध स्थल पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जब तक धारा 39ए पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाती, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे।   उन्होंने दावा किया, "पहले सरकार ने अनुमतियों को लंबित रखा था, लेकिन परियोजनाओं पर काम जारी रहा।" बोरकर ने कहा कि वह इस धारा को पूरे राज्य में रद्द करवाना चाहते हैं, न कि केवल अपने निर्वाचन क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए। विधायक के अनुसार, टीसीपी अधिनियम की धारा 39ए का दुरुपयोग करके ग्रामीण भूमि को "बस्ती क्षेत्रों" में परिवर्तित किया जा रहा है।  

SIR मुद्दे पर सियासत तेज: बंगाल में BJP का हमला, पूर्व मुख्य सचिव पर कार्रवाई की मांग

कोलकाता पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पहले से ही हंगामा कर रही है, वहीं अब इस विवाद में विपक्षी भाजपा भी कूद पड़ी है। भारतीय जनता पार्टी ने SIR पर एक उच्चस्तरीय बैठक में पूर्व मुख्य सचिव मनोज पंत की मौजूदगी को लेकर सवाल खड़े किए हैं और इसे पूरी तरह अवैध करार देते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। पश्चिम बंगाल BJP के पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने उत्तर 24 परगना के बारासात में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार पर न्यायपालिका को प्रभावित करने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि बैठक केवल निर्धारित अधिकारियों के साथ होनी चाहिए, जिसमें राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, एडवोकेट जनरल और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल शामिल हों। मजूमदार ने कहा कि मनोज पंत अब मुख्य सचिव नहीं हैं, ऐसे में उनकी बैठक में मौजूदगी पूरी तरह गैरकानूनी है। ऐसे में उनके खिलाफ FIR दर्ज हो और उनकी गिरफ्तारी की जानी चाहिए। बैठक में और कौन-कौन थे? हालांकि, राज्य सरकार के अधिकारियों ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि पंत को कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पाल की अनुमति से बैठक में शामिल किया गया था। उनके साथ वर्तमान मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती भी मौजूद थीं। अधिकारियों ने यह भी बताया कि राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल भी बैठक में उपस्थित थे। पंत पर पहले भी हो चुका है विवाद हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब मनोज पंत की मौजूदगी को लेकर विवाद हुआ हो। इससे पहले भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के दौरान उनकी मौजूदगी पर सवाल उठे थे। इसी बीच, कोलकाता में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के बाहर मंगलवार को उस समय तनाव फैल गया जब नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी वहां पहुंचे। आरोप है कि कुछ टीएमसी समर्थक बूथ लेवल अधिकारियों ने गो बैक के नारे लगाए और कथित तौर पर जूता भी फेंका, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच झड़प हो गई। TMC की प्रतिक्रिया पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा और इस दौरान एक व्यक्ति के घायल होने की खबर है। वहीं, TMC प्रवक्ता कुणाल घोष ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी इस तरह की घटनाओं का समर्थन नहीं करती, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि सुवेंदु अधिकारी लगातार लोगों को उकसा रहे हैं, जिसके चलते ऐसी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने SIR प्रक्रिया और प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर राज्य की राजनीति को और गर्मा दिया है।  

शिवराज सिंह चौहान बोले—किसानों के हित सर्वोपरि, समझौता किसी कीमत पर नहीं

नई दिल्ली केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि क्षेत्र में केंद्र सरकार की ओर से किए गए कार्यों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि आज की तारीख में कृषि क्षेत्र में हालात सुधरे हैं। वहीं शेष विसंगतियों को दूर करने की दिशा में काम किया जा रहा है। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि इस दिशा में किसी भी प्रकार की कोताही ना बरती जाए। उन्होंने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली का ही नतीजा है कि आज हम चावल के उत्पादन में शीर्ष स्थान पर आ चुके हैं। गेहूं के उत्पादन की मात्रा में भी इजाफा देखने को मिला है। खाद्यान्न का 33 फीसद हिस्सा बढ़ा है और हमें पूरा विश्वास है कि आगामी दिनों में हम इसी दिशा में काम करते रहेंगे। हमने इस संबंध में पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है। हम उसी के अनुरूप अभी काम कर रहे हैं।  केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हम इस चीज को लेकर भी चिंतित हैं कि भारत पूरी दुनिया का फूड बास्केट बन जाए। हम इस पर भी काम कर रहे हैं कि उच्च गुणवत्ता वाले फल और सब्जियों का उत्पादन कैसे कर सकते हैं। हम इस पूरी प्रक्रिया के सरलीकरण की दिशा में भी काम कर रहे हैं। हमारी सरकार की यही कोशिश है कि किसानों को किसी भी प्रकार की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़े। हमारी सरकार की हमेशा से यही कोशिश रही है कि किसानों के हितों पर किसी भी प्रकार का कुठाराघात न हो। किसान हमारे देश की धुरी हैं। ऐसे में हम उनके हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं कर सकते हैं। इसके अलावा, उन्होंने भारत विस्तार प्लेटफॉर्म के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत विस्तार एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जिसका संबंध किसानों के लिए सरकार द्वारा दी गईं सुविधाओं से है। अब किसानों को कहीं पर भी जाना नहीं होगा। इस प्लेटफॉर्म पर किसानों की समस्याओं से संबंधित हर प्रकार का समाधान मौजूद है। इस प्लेटफॉर्म के जरिए हम यही कोशिश कर रहे हैं कि किसानों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाए। केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि भारत विस्तार प्लेटफॉर्म का यूज करने के लिए आपके पास किसी भी प्रकार का आईटी जैसा ज्ञान होने की आवश्यकता नहीं है। आप इस प्लेटफॉर्म पर कृषि से संबंधित किसी भी प्रकार का सवाल करेंगे, तो आपको उसका जवाब मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में हम भारत विस्तार प्लेटफॉर्म को विभिन्न भाषाओं में लॉन्च करेंगे। इस प्लेटफॉर्म के जरिए किसानों को उन्हें हर प्रकार की समस्याओं का समाधान विभिन्न प्रकार की भाषाओं में प्राप्त हो जाएगा। इस दिशा में उन्हें किसी भी प्रकार की समस्याओं का सामना नहीं करना होगा। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विज्ञान मेले को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस मेले के जरिए हम किसानों को विभिन्न प्रकार की जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। इस मेले में कई लोग शामिल होंगे। ऐसे में यह मेला हमारे लिए काफी अहम हो जाता है। हमारी कोशिश है कि इस मेले के आयोजन में किसी भी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़े। उन्होंने कहा कि इस मेले के जरिए हम कृषि क्षेत्र में होने वाले परिवर्तनों के बारे में किसानों को विस्तार से बता रहे हैं। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि जब किसानों को इस बारे में पूरी जानकारी दी जाए, तो उन्हें कल को खेतीबाड़ी करते समय किसी भी प्रकार की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़े।

इस्राइल के साथ खड़ा भारत: संसद में पीएम मोदी ने कहा—हमास हमले के बाद आपका दर्द हमारा भी है

तेल अवीव पीएम मोदी ने इजरायल को फादर लैंड और  इंडिया को मदरलैंड बताया और कहा कि हमें इस पर गर्व है. उन्होंने कहा कि विश्व युद्ध के दौरान हजारों भारतीयों ने इस इलाके में अपनी जान कुर्बान की थी. उन्होंने मेजर ठाकुर दलपत सिंह को हीरो ऑफ हाइफा बताया. भारत इजरायल के साथ मजबूती से खड़ा हैः पीएम मोदी पीएम मोदी ने कहा कि भारत इजरायल के साथ मजबूती से खड़ा है.  उन्होंने कहा कि कोई भी चीज आतंकवाद को जस्टिफाई नहीं कर सकती. भारत भी आतंकवाद का लंबे समय से पीड़ित रहा है. मुंबई हमलों को याद करते हुए कहा कि इस हमले में इजरायली नागरिक समेत बहुत से लोग मारे गए थे.  इसी के बाद हमने आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है. इजरायल की मान्यता और मेरे जन्मदिन का अनोखा नाताः पीएम मोदी पीएम मोदी ने कहा कि इजरायली संसद नेसेट को भारतीय रंगों में रंगा गया है, ये हमारे बीच गहरे संबंधों का प्रतीक है. पिछली बार जब मैं आया था, तब ऐसा करने वाला भारत का पहला प्रधानमंत्री बना था. अब मैं दूसरी बार आया हूं. उन्होंने बताया कि मेरा जन्म उसी दिन हुआ, जिस दिन भारत ने इजरायल को मान्यता दी थी.   इजरायली संसद में आना मेरे लिए सम्मान की बातः पीएम मोदी पीएम मोदी ने नमस्ते से शुरूआत करते हुए कहा कि यह मेरे लिए सम्मान की बात है कि मैं इस प्रतिष्ठित सदन में खड़ा हूं. भारत के प्रधानमंत्री के रूप में, दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यता के प्रतिनिधि के रूप में, मैं 1.4 अरब लोगों की शुभकामनाएं और संदेश लेकर यहां आया हूं. मोदी-मोदी के नारों के बीच पीएम मोदी का संबोधन शुरू इजरायली संसद को मोदी-मोदी के नारों के बीच पीएम मोदी ने अपना संबोधन शुरू किया. पीएम मोदी और मैंने कई चमत्कार किए हैं, बोले नेतन्याहू इजरायली पीएम नेतन्याहू ने भूमध्यसागर के तट पर पीएम मोदी के साथ पिछली यात्रा को याद करते हुए कहा कि भारत और इजरायल ने मिलकर कई चमत्कार जरूर किए हैं. 'भारतीय सैनिकों ने इजरायल के लिए अपनी जान दी, नहीं भूलेंगे ' इजरायली पीएम नेतन्याहू ने कहा कि भारतीय सैनिकों ने इजरायल के लिए अपनी जान दी है. इसे हम कभी नहीं भूलेंगे.   नेतन्याहू ने कहा, मोदी का गले लगाना दुनिया में मशहूर नेतन्याहू ने कहा कि पीएम मोदी के गले लगाने की परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि 'मोदी हग' की वजह ने भारत और इजरायल के बीच संबंधों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है. नेतन्याहू ने कहा कि हम दोनों के बीच व्यक्तिगत दोस्ती है. दोनों देशों और हमारे लोगों के बीच भी शानदार दोस्ती रही है. आज सुबह मेरी पत्नी सारा और मैंने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया. जैसे ही आप सीढ़ियों से नीचे आए, हमने एक-दूसरे को गले लगा लिया. प्रधानमंत्री मोदी का गले लगना कुछ खास है. इसे मोदी हग कहा जाता है. यह दुनिया भर में मशहूर है, और जब आप किसी को करीब से सच में गले लगाते हैं, तो आप जानते हैं कि यह कोई दिखावा नहीं है, यह असल है. नेतन्याहू ने पीएम मोदी को बताया अपना भाई नेतन्याहू ने पीएम मोदी के लिए कहा कि वह मेरे लिए मित्र से बढ़कर हैं, मेरे भाई की तरह हैं. नेतन्याहू ने पीएम मोदी को कहा- माई डियर फ्रेंड इजरायली पीएम नेतन्याहू ने अपने संबोधन में पीएम मोदी को माई डियर फ्रेंड कहकर संबोधित किया.  उन्होंने पीएम को ग्रेट लीडर कहकर संबोधित किया. पीएम मोदी को इजरायली संसद में मिला स्टैंडिंग ओवेशन इजरायली संसद में पीएम मोदी का सभी ने खड़े होकर स्वागत किया. मोदी-मोदी के नारों के बीच जय हिंद भी गूंजा. मोदी-मोदी के नारों के बीच इजरायली संसद में गूंजा- जय हिंद इजरायल की संसद में मोदी-मोदी के नारों के बीच प्रधानमंत्री का स्वागत किया गया. इजरायली स्पीकर ने कहा कि पीएम मोदी लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं. उन्होंने कहा कि उन्होंने डिजिटल इनोवेशन की नींव रखी और लाखों लोगों की जिंदगी की नई दिशा. जय हिंद और भारत जिंदाबाद के नारों के बीच कहा कि पीएम मोदी भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं, जो इजरायली संसद नेसेट को संबोधन करने वाले हैं. तेल अवीव के होटल में प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत पीएम मोदी का तेल अवीव के होटल पहुंचने पर रंगारंग स्वागत किया गया. इजरायली और भारतवंशी कलाकारों ने देसी अंदाज में नृत्य-संगीत से समां बांध दिया. भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों ने उनका जोरदार स्वागत किया.

मेगा बजट का खाका तैयार, पोषाहार राशि बढ़ी; कैबिनेट ने लिए कई बड़े निर्णय

देहरादून  वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश सरकार के बजट का आकार 1.10 लाख करोड़ रहने का अनुमान है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार वार्षिक बजट में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी की संभावना है। कैबिनेट में चर्चा के बाद बजट के आकार में संशोधन के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत कर आगामी विधानसभा सत्र में पेश करने की मंजूरी दी गई। इसके अलावा गर्भवती, धात्री महिलाओं व आंगनबाड़ी केंद्रों में तीन से छह वर्ष के बच्चों की सेहत में सुधार के लिए पोषाहार में नई सामग्री शामिल करने का निर्णय लिया गया।  सचिवालय में बुधवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 28 प्रस्तावों पर निर्णय लिए गए। प्रदेश में सेब उत्पादन को बढ़ावा देने और बागवानों को उन्नत प्रजाति के पौध देने के लिए सेब नर्सरी विकास योजना को मंजूरी दी गई। इस योजना में 10 एकड़ तक नर्सरी लगाने पर 50 प्रतिशत और 10 एकड़ से ऊपर पर 40 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। इसके अलावा शहद उत्पादन के लिए मौन पालन नीति को मंजूरी दी गई। इस नीति के किसानों को मौनपालन बॉक्स पर 80 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी। हल्द्वानी में स्थापित होगी जीएसटी अपीलीय अधिकरण की राज्य पीठ जीएसटी में टैक्स वादों का शीघ्र निपटारा करने के लिए देहरादून में जीएसटी अपीलीय अधिकरण संचालित है। इसी तर्ज पर हल्द्वानी में एक अतिरिक्त राज्य पीठ स्थापित होगी। इसके अलावा कैबिनेट ने प्रदेश में दुष्कर्म और पोक्सो अधिनियम के लंबित अपराधों के शीघ्र निपटारे और सुनवाई के लिए देहरादून जिले के विकासनगर, ऊधमसिंहनगर के काशीपुर और नैनीताल जिला मुख्यालय में फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना व पद सृजित करने की मंजूरी दी है। शहरों को मिलेगा भरपूर पानी राज्य में नवीन पेयजल योजनाओं के नियोजन, क्रियान्वयन, निर्माण, संचालन, रखरखाव, अनुश्रवण तथा पूर्व निर्मित योजनाओं की संचालन दक्षता में वृद्धि के लिए वाह्य सहायतित परियोजना के तहत विश्व बैंक की सहायता से 1600 करोड़ की लागत से 10 शहरों में भरपूर पानी मिलेगा। इस योजना राज्य सरकार का अंशदान 320 करोड़ रहेगा। इस महत्वाकांक्षी योजना को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। ये महत्वपूर्ण फैसले – उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड (यूआईआईडीबी) के ढांचे में 14 नए पद सृजित करने को मंजूरी। – राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में संचालित मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना में 21 अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों को शामिल करने का निर्णय। – उच्च शिक्षण संस्थानों में स्वामी विवेकानंद उत्तराखंड ई-पुस्तकालय योजना संचालित होगी। योजना में बीए, बीएससी, बीकॉम के लिए 100 रुपये, बीएड व लॉ के लिए 250, इंजीनियरिंग, मेडिकल, एग्रीकल्चर छात्रों के लिए 500 रुपये शुल्क देय होगा। – उत्तराखंड वन विभाग सर्वेक्षक सेवा नियमावली को मंजूरी। – शहरी विकास विभाग के तहत 11 नगर निगमों में पर्यावरण अभियंताओं को संविदा के आधार पर नियुक्त किया जाएगा। – विद्यालयी शिक्षा विभाग में तदर्थ, अनुबंध,संविदा, आउटसोर्स के आधार पर कार्यरत चार विशेष शिक्षकों को माध्यमिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक विशेष शिक्षा के पदों के सापेक्ष नियमित नियुक्ति देने का निर्णय। – उत्तराखंड लोक सेवा आयोग का चौबीसवां वार्षिक प्रतिवेदन विधानसभा सदन के पटल पर रखने की मंजूरी। – उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक विधानसभा सदन में रखने की मंजूरी। – सार्वजनिक उद्यम ब्यूरो को औद्योगिक विकास से स्थानांरित कर वित्त विभाग के तहत गठित किया जाएगा। – उत्तराखंड राज्य में उपचारित जल के सुरक्षित पुनः उपयोग नीति को मंजूरी। – उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समूह क व ख कार्मिकों की सेवा विनियमावली को मंजूरी। – उत्तराखंड चकबंदी अधिष्ठान में बंदोबस्त अधिकारी के निःसंवर्गीय पद के सृजित करने का निर्णय। – उत्तराखंड दुकान और स्थापन (रोजगार विनियमन और सेवा-शर्त) (संशोधन) विधेयक, 2026 को पटल पर रखने की मंजूरी। – समान नागरिक संहिता उत्तराखंड (संशोधन) विधेयक, 2026 को विधानसभा सत्र में पटल रखा जाएगा। – उत्तराखंड स्टोन क्रशर, स्क्रीनिंग प्लांट, मोबाइल स्टोन क्रशर, मोबाइल स्क्रीनिंग प्लांट, पल्वराइजर प्लांट, हॉट मिक्स प्लांट, रेडिमिक्स प्लांट अनुज्ञा (तृतीय संशोधन) नीति 2024 में हॉट मिक्स प्लांट लगाने के लिए दूरी के मानकों में संशोधन को मंजूरी। – उत्तराखंड राज्य की वित्तीय स्थिति के दृष्टिगत किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम के तहत राज्य स्तरीय चयन समिति के अध्यक्ष को पांच हजार रुपये प्रति बैठक एवं गैर सरकारी संगठनों से नामित दो सदस्यों को तीन हजार रुपये प्रति बैठक मानदेय दिया जाएगा। – कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग में लिपिक व मिनिस्ट्रीयल संवर्ग ढांचे के पुर्नगठन को मंजूरी। – उच्च न्यायालय उत्तराखंड में एक व जिला न्यायालयों के लिए 13 न्यायालय प्रबंधकों के नए पद सृजित किए जाएंगे। – विश्व बैंक के सहयोग से सेवा वितरण में सुधार के लिए सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन के क्रियान्वयन के लिए स्टीयरिंग कमेटी व प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट का गठन व पदों के सृजन को मंजूरी। – उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक- 2026 विधानसभा सदन में पटल रखने को मंजूरी। 

ज्यूडिशियरी में करप्शन पढ़ाने पर बवाल, NCERT कंटेंट में नेताओं के आपराधिक बैकग्राउंड का जिक्र

नई दिल्ली एनसीईआरटी की आठवीं क्लास की किताब में ज्यूडिशियरी में भ्रष्टाचार वाले चैप्टर पर विवाद छिड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस मामले में काफी नाराजगी दिखाई, जिसके बाद सरकारी सूत्रों ने कहा है कि यह किताब से यह पोर्शन हटा दिया जाएगा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के वकील भी काफी नाराज हैं। सीनियर एडवोकेट और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने नेताओं पर हमला बोल दिया है। उन्होंने दावा किया कि 40 फीसदी नेता क्रिमिनल बैकग्राउंड के हैं, तो ऐसे में इस बारे में सिखाना चाहिए। न्यूज एजेंसी से बात करते हुए, सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने कहा, "ठीक है, जहां तक आर्टिकल की बात है, मुझे लगता है कि यह चौंकाने वाला है कि एनसीईआरटी ने टेक्स्टबुक में ऐसा कुछ शामिल किया है। टेक्स्टबुक बच्चों को हमारे समाज के बारे में सिखाने के लिए होती हैं। अगर वे सच में सिखाना चाहते हैं, तो उन्हें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि लगभग 40 फीसदी नेताओं का क्रिमिनल बैकग्राउंड है। यह कुछ ऐसा है जिसकी हमने आजादी मिलने पर बिल्कुल उम्मीद नहीं की थी, कि जो लोग इस देश पर राज करेंगे, वे कानून तोड़ने वाले हो सकते हैं, जो आखिर में कानून बनाने वाले बनेंगे। लेकिन ज्यूडिशियरी में करप्शन के बारे में बात करना, मुझे लगता है, सच में इंस्टीट्यूशन को कमजोर करता है।'' 'जिम्मेदार पर कंटेम्प्ट नोटिस जारी करना चाहिए' उन्होंने आगे कहा कि करप्शन हर जगह है, लेकिन मैं आपको यकीन दिला सकता हूं कि ज्यूडिशियरी में करप्शन एग्जीक्यूटिव या पॉलिटिक्स से कहीं, कहीं कम है। इसलिए मुझे यह बिल्कुल साफ नहीं है कि इस चैप्टर को शामिल करने का मकसद क्या था। लेकिन मुझे यकीन है कि जस्टिस सूर्यकांत को एनसीईआरटी के उन अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, जिन्होंने इसे शामिल करने का फैसला किया, और उन्हें कंटेम्प्ट नोटिस जारी करना चाहिए, जिसमें पूछा जाए कि उन्हें क्रिमिनल कंटेम्प्ट के लिए जिम्मेदार क्यों न ठहराया जाए।" 'बच्चों को ज्यूडिशियरी में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा' सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की आठवीं कक्षा की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार विषय से संबंधित सामग्री का स्वतः संज्ञान लिया और इसे गंभीर चिंता का विषय बताया। भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने यह दलील दी कि कक्षा आठ के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जाता है। यह एक गंभीर चिंता का विषय है। 'संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा' सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ''मैं किसी को भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा। कानून अपना काम करेगा।'' उन्होंने कहा, ''संस्था के प्रमुख के रूप में मैंने अपना कर्तव्य निभाया है और संज्ञान लिया है… यह एक सोचा-समझा कदम प्रतीत होता है। मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा।'' न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि यह पुस्तक संविधान की मूल संरचना के विरुद्ध प्रतीत होती है। सीजेआई ने कहा, ''कृपया कुछ दिनों तक प्रतीक्षा करें। अधिवक्ता और न्यायाधीश सभी परेशान हैं। सभी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश परेशान हैं। मैं इस मामले को स्वतः संज्ञान के तहत लूंगा। मैं किसी को भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा। कानून अपना काम करेगा।'' बाद में न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि शीर्ष अदालत ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है।  

डोनाल्ड ट्रंप के दावों की खुली पोल: भाषण में बोले 5 झूठ, मीडिया ने किया फैक्ट चेक

वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में सबसे लंबा भाषण देकर इतिहास रच दिया। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से 8 जंगें रुकवाने का दावा किया तो वहीं अर्थव्यवस्था, टैरिफ वॉर समेत कई मसलों पर बढ़-चढ़कर दावे किए। डोनाल्ड ट्रंप दावे करने में आगे रहे हैं, लेकिन अकसर गलत तथ्य दे देते हैं। ऐसा ही मंगलवार की रात को भी हुआ, जब उन्होंने जनता के सामने कई गलत तथ्य रख दिए। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के बोले गए झूठ ज्यादातर देर तक टिक नहीं सके। न्यूयॉर्क टाइम्स समेत अमेरिका के ही कई अखबारों ने उनका फैक्ट चेक कर दिया है। आइए जानते हैं, डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण में बोले कौन-कौन से झूठ… अर्थव्यवस्था, नौकरी और निवेश पर क्या गलत दावा डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि हमारी इकॉनमी तेजी से बढ़ रही है। अमेरिकी दुनिया में हॉटेस्ट है। उनका दावा था कि हमारे पास काफी नौकरियां हैं। पहले के मुकाबले अमेरिका में सबसे ज्यादा लोगों के पास जॉब्स हैं। यह इतिहास में सबसे अधिक है। लेकिन डेटा कुछ और कहता है। अमेरिकी आंकड़ों के अनुसार 2025 में अमेरिका में नौकरी पाने वालों की संख्या में बड़ी गिरावट आई है। यह आंकड़ा कोरोना काल के किसी भी साल के मुकाबले कम रहा है। अमेरिकी लेबर ब्यूरो के अनुसार 2025 में अमेरिका में सिर्फ 1 लाख 81 हजार ही नई नौकरियां जुड़ीं। एरिना के कत्ल में प्रवासी शख्स के शामिल होने का दावा, क्या सच अमेरिकी लीडर ने यह दावा भी किया कि एरिना जारुस्का का कत्ल एक प्रवासी ने किया था। उनका कहना कि एक खूंखार अपराधी ने इस कांड को अंजाम दिया, जो खुली सीमाओं से आ गया था। वह यहां मुक्त होकर घूम रहा था। लेकिन उनका यह फैक्ट भी गलत निकला। एरिना के कत्ल में गिरफ्तार डिकार्लोस ब्राउन जूनियर कोई प्रवासी नहीं है। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि अमेरिका में बाहर से आने वाले लोग ही ज्यादातर हिंसा के जिम्मेदार रहे हैं। बिजली की कीमत कम होने की बात निकली गलत अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका में की कीमतें घट रही हैं। इतनी कमी आई है कि यकीन नहीं होता। लेकिन सच्चाई कुछ और है। अमेरिका में प्रति परिवार ऊर्जा का बिल बीते एक साल में 6.7 पर्सेंट तक बढ़ गया है। वह लगातार कहते रहे हैं कि देश में बिजली की कीमत कम हो जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है। सच्चाई यह है कि डोनाल्ड ट्रंप के आने के बाद से कई यूटिलिटी कंपनियों ने मांग की है कि रेट बढ़ाए जाएं। यह इजाफा हुआ भी है। कहा जा रहा है कि 2035 तक 18 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाएगी। गैस वाला बयान भी ट्रंप का झूठा ही साबित हुआ ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका में गैस की कीमत अब 1.99 डॉलर प्रति गैलन तक हो गई है। लेकिन बीते कुछ दिन पहले पर्यावरण को लेकर लगी पाबंदियों के चलते इसमें इजाफा होने की चर्चा है। इससे स्पष्ट है कि आने वाला समय रेट बढ़ने का रहेगा। यही नहीं कुछ राज्यों में अब भी कीमत 4.60 डॉलर प्रति गैलन है। इस तरह ट्रंप का दावा यहां भी गलत निकला है। 8 जंगें रुकने का दावा भी झूठा, गाजा में अब भी हो रहीं मौतें अब बात करते हैं, डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध वाले दावों की। उन्होंने एक बार फिर से कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के शुरुआती 10 महीनों में 8 जंगें रुकवा दीं। अब इस मामले में भी सच्चाई यह है कि अमेरिका का दखल 6 जंगों में ही रहा है। अन्य दो युद्ध ऐसे रहे हैं, जिसमें उसका कोई रोल नहीं रहा। इसके अलावा कई लोगों ने तो इन 6 में भी उसे कोई क्रेडिट नहीं दिया है। ट्रंप ने गाजा में सीजफायर का दावा किया है, लेकिन वहां अब भी इजरायल के हमले जारी हैं और हर दिन ही कुछ मारे जा रहे हैं।  

‘अब नहीं होंगे हिडन चार्जेज…’ RBI ने बैकों को दिए आदेश, ऐप से हटाएं धोखाधड़ी वाली ट्रिक्स

नई दिल्ली आपके साथ भी ऐसा होता होगा कि आप अपने बैंक का ऐप खोलते हैं और उसमें अतिरिक्त सेवाओं को खरीदने के लिए बार-बार मैसेज या नोटिफिकेशन आने लगते हैं. इनमें से कई मिडलीडिंग भी होते हैं. या फिर चेकआउट के समय आपको हिडन शुल्क दिखाई दिए हों, तो आप अकेले ऐसे यूजर नहीं हैं. अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ऐसे मामलों में सख्त नजर आ रहा है और डिजिटल बैंकिंग को अधिक पारदर्शी बनाने के क्रम में बैंकों को कड़ा आदेश दिया है.  आरबीआई ने कहा- 'हटा लें ये सब…' केंद्रीय बैंक ने अब 'Responsible Business Conduct Amendment Directions, 2026', के ड्राफ्ट में बैंकों को सख्त निर्देश दिया है. आरबीआई ने कहा है कि बैंक जुलाई 2026 तक अपनी वेबसाइटों और मोबाइल ऐप से सभी डार्क पैटर्न (Dark Patterns) हटा दें, जो कि ग्राहकों को गुमराह करने या उन पर दबाव डालने के लिए डिजाइन की गई ट्रिक्स हैं. इसमें बैंकों द्वारा वित्तीय उत्पादों और किसी भी सेवा की पेशकश से पहले ग्राहक की स्पष्ट सहमति अनिवार्य रूप से लें. RBI के इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहकों को उचित जानकारी के बिना उत्पाद खरीदने या शुल्क चुकाने के लिए गुमराह कतई न किया जाए. बैंकों को ग्राहक की स्पष्ट अनुमति के बिना वित्तीय उत्पादों को एक साथ बेचने पर भी रोक लगा दी जाएगी. RBI क्यों डार्क पैटर्न पर सख्त?  डार्क पैटर्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल की जाने वाली ऐसी डिजाइन तकनीकें हैं, जिनका उद्देश्य यूजर के व्यवहार को प्रभावित करना होता है, जिसे वे आसानी से पूरी तरह समझ न सकें. इनमें हिडन चार्ज, भ्रमित करने या प्रलोभन देने वाले विकल्प या फिर ग्राहकों को अतिरिक्त सेवाएं स्वीकार करने के लिए बार-बार प्रेरित करने वाले संकेत शामिल हो सकते हैं. बैंकों को इन ट्रिक्स पर रोक के संबंध में आरबीआई द्वारा दिए गए निर्देश, ये सुनिश्चित करने के लिए हैं, कि ग्राहकों को ठीक से पता हो कि वे किस चीज के लिए साइन-अप कर रहे हैं. यानी वे गुमराह न हों.  सर्वे में हुआ ये बड़ा खुलासा  इंडिया टुडे पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक, लोकलसर्कल्स द्वारा किए गए एक सर्वे से पता चलता है कि इस तरह की ट्रिक्स का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है. RBI का यह कदम इस सर्वे के परिणामों के बाद आया है. इसमें 388 जिलों के 1,61,000 से अधिक लोगों से प्रतिक्रियाओं को शामिल किया गया. निष्कर्षों से पता चला है कि इस तरह की गुमराह करने वालीं डार्क पैटर्न ट्रिक्स कई ऑनलाइन बैंकिंग प्लेटफार्मों पर आम बात हैं. सर्वे में शामिल यूजर्स ने बताया कि हिडन चार्ज के बारे में खुलासा शुरुआत में स्पष्ट रूप से नहीं किया जाता है और किसी भी प्रक्रिया के अंत में इन छिपे हुए शुल्कों का सामना ग्राहक को करना पड़ता है. इसके अलावा ग्राहकों को अतिरिक्त सेवाओं को एक्टिव करने के लिए बार-बार नोटिफिकेशन परेशान करने वाले होते हैं.  जुलाई तक हटाने होंगे डार्क पैटर्न बैंकों को जुलाई 2026 तक डार्क पैटर्न को पूरी तरह से हटाने और नए नियमों का पालन करने का समय दिया गया है. RBI द्वारा मोबाइल बैंकिंग (Mobile Banking) पर लोगों की बढ़ती निर्भरता को देखते हुए ये कदम उठाया गया है, जो डिजिटल वित्तीय सेवाओं को आसान, निष्पक्ष और अधिक भरोसेमंद बनाने के लिए है. 

मौसम अपडेट: दो नए वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से बदलेगा मौसम, इन इलाकों में बारिश का अलर्ट जारी

नई दिल्ली उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में दो नए वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की दस्तक हो रही है। इन कमजोर वेस्टर्न डिस्टर्बेंस की वजह से पहाड़ी राज्यों में 26-28 फरवरी और दो व तीन मार्च को बारिश व बर्फबारी की चेतावनी जारी की गई है। इसके अलावा, इस हफ्ते उत्तर पश्चिम भारत के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से तीन से पांच डिग्री अधिक रहने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार, 25 व 26 फरवरी को अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में छिटपुट से लेकर काफी व्यापक बारिश, बिजली और 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभवाना है। इसके अलावा, 25 फरवरी को अरुणाचल प्रदेश, उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, केरल, माहे, लक्षद्वीप में छिटपुट से मध्यम बारिश होने का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, 25 व 26 फरवरी को उत्तर आंतरिक कर्नाटक में और 26 फरवरी को तेलंगाना में भी यही संभावना है। 26 और 27 फरवरी को जम्मू कश्मीर में, 27 व 28 फरवरी को हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में छिटपुट बारिश होगी। पंजाब और हिमाचल प्रदेश में 26 फरवरी तक कुछ इलाकों में सुबह से शाम तक घना कोहरा रहने की संभावना है। अगले सात दिनों के दौरान उत्तर पश्चिम अज्ञैर मध्य भारत के मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान में दो से तीन डिग्री की बढ़ोतरी होगी। अगले 24 घंटे में महाराष्ट्र में अधिकतम तापमान में कोई अहम बदलाव होने की संभावना नहीं है और उसके बाद छह दिनों में इसमें दो से तीन डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होगी। अगले दो दिनों के दौरान पूर्वी भारत में अधिकतम तापमान में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन होने वाला नहीं है।