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कवि कुमार विश्वास ने भी यूजीसी रूल्स पर जताया आक्रोश

नई दिल्ली. देश भर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में यूजीसी रूल्स 2026 लागू किए गए हैं। इसका एक वर्ग विरोध कर रहा है। यह मामला सोशल मीडिया पर भी खूब ट्रेंड हो रहा है और यूपी के बरेली शहर के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने तो इसके विरोध में पद से इस्तीफा देने का ही ऐलान कर दिया है। इस बीच कवि कुमार विश्वास ने भी इस मसले पर अपनी राय रखी है। उन्होंने दिवंगत रमेश रंजन मिश्र की कविता शेयर करते हुए अपनी राय जाहिर की है। कवि कुमार विश्वास ने जो पंक्तियां शेयर की हैं, वह इस प्रकार हैं- ''चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूँ मेरा, रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा ..।'' इन पंक्तियों के साथ ही कुमार विश्वास ने #UGC_RollBack भी पोस्ट के साथ साझा किया है। इस तरह उन्होंने उन आवाजों के साथ स्वर मिलाया है, जो यूजीसी रूल्स को वापस लेने या फिर उनमें संशोधन की मांग कर रहे हैं। कुमार विश्वास की इस पोस्ट पर भी लोगों ने कई तरह के कॉमेंट्स किए हैं। कुछ लोगों ने कुमार विश्वास को लेकर कहा है कि आपके प्रति हमारा सम्मान और बढ़ गया है। वहीं कुछ लोगों ने उनके बयान पर सवाल भी उठाए हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि हमें उम्मीद थी कि आप जरूर इस मसले पर अपनी राय रखेंगे। यूपी में यह मसला और पकड़ रहा तूल, PCS अधिकारी का इस्तीफा बता दें कि यह मामला बीते कुछ दिनों से लगातार तूल पकड़ रहा है। खासतौर पर सत्ताधारी भाजपा के लिए इससे मुश्किल खड़ी हो रही है। एक तरफ सवर्णों में नाराजगी की बात कही जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ यदि इसमें कुछ बदलाव किया गया तो ओबीसी, एससी-एसटी वर्ग में भी गुस्सा भड़क सकता है। इस बीच यूपी में मामला और तूल पकड़ रहा है, जहां पीसीएस अधिकारी और फिलहाल सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात रहे अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दे दिया है। सबसे ज्यादा विरोध इस बात को लेकर हो रहा है कि आखिर इन नियमों में यह प्रावधान क्यों नहीं जोड़ा गया है कि यदि कोई शिकायत झूठी पाई जाएगी तो फिर उस पर क्या ऐक्शन होगा। इसे एक वर्ग सवर्णों के खिलाफ प्रतिशोध बता रहा है।

‘बॉयकॉट भाजपा’ पोस्ट कर इस्तीफा देने वाले सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री निलंबित

बरेली. बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे से प्रशासनिक अमले में हड़कंप की स्थिति है। देर रात तक उन्हें जिले के आला अधिकारी समझाते और मान मनौव्वल करते रहे लेकिन वह अपने फैसले पर अडिग रहे। इसके बाद आधी रात उनके निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया। प्रशासनिक हलकों में अब यह सवाल तैर रहा है कि 10 साल तक आईटी सेक्टर में कॉर्पोरेट अनुभव रखने वाले और पहली बार में ही पीसीएस क्लियर करने वाले अलंकार अग्निहोत्री आखिर इस्तीफा देते समय कहां चूक गए? उनके इस्तीफे के बाद शासन ने न केवल उन्हें निलंबित किया, बल्कि शामली अटैच कर विभागीय जांच (Departmental Inquiry) के आदेश भी दे दिए हैं। सर्विस कंडक्ट रूल्स की अनदेखी बताया जा रहा है कि अलंकार अग्निहोत्री की सबसे बड़ी चूक 'उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली' की अनदेखी मानी जा रही है। किसी भी सरकारी पद पर रहते हुए कोई अधिकारी सीधे तौर पर किसी राजनीतिक दल के विरुद्ध मोर्चा नहीं खोल सकता। अलंकार ने अपनी पोस्ट में बॉयकॉट भाजपा लिखकर सीधे अनुशासन की लक्ष्मण रेखा लांघ दी। इसने शासन को सख्त कार्रवाई का ठोस आधार दे दिया। इस्तीफे की प्रक्रिया और माध्यम इसके साथ ही सरकारी सेवा में इस्तीफा देने का एक तय प्रोटोकॉल होता है, जिसे नियुक्ति प्राधिकारी (Appointing Authority) के पास भेजा जाता है। अलंकार ने इस्तीफे को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किया और सरकार की नीतियों को 'काला कानून' बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वे केवल व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा देते तो शायद मामला इतना तूल न पकड़ता, लेकिन राजनीतिक नारेबाजी ने इसे 'विद्रोह' का रूप दे दिया। 'गणतंत्र' दिवस का चुनाव जिस दिन मुख्यमंत्री और राज्यपाल संविधान और कानून के शासन की दुहाई दे रहे थे, उसी दिन एक अधिकारी द्वारा व्यवस्था को 'गनतंत्र' बताना शासन की छवि को वैश्विक स्तर पर प्रभावित करने वाला कदम लगा। गणतंत्र दिवस के मौके पर इस तरह का प्रदर्शन 'अति-उत्साह' और 'अनुशासनहीनता' की श्रेणी में आ गया है। पद की गरिमा बनाम व्यक्तिगत विचारधारा अलंकार अग्निहोत्री काफी सुलझे हुए और लक्ष्य के प्रति समर्पित व्यक्ति रहे माने जाते हैं। लेकिन, प्रयागराज की घटना (शंकराचार्य के शिष्यों से व्यवहार) और यूजीसी के मुद्दे पर उन्होंने अपनी व्यक्तिगत विचारधारा और धार्मिक संवेदनशीलता को अपने प्रशासनिक दायित्वों के ऊपर रखा। प्रशासन में 'तटस्थता' (Neutrality) सबसे अनिवार्य गुण है, जिसकी कमी यहां साफ नजर आई। जांच का शिकंजा: अब आगे क्या? बरेली कमिश्नर को सौंपी गई जांच में अब अलंकार के पिछले रिकॉर्ड और उनके सोशल मीडिया व्यवहार की बारीकी से जांच होगी। निलंबन के दौरान वे शामली डीएम कार्यालय में उपस्थिति देंगे और उन्हें केवल आधा वेतन (गुजारा भत्ता) मिलेगा। यदि जांच में यह सिद्ध हो गया कि उन्होंने जानबूझकर सरकार की छवि खराब करने के लिए ऐसा किया तो उनकी सेवा स्थायी रूप से समाप्त भी की जा सकती है। अलंकार अग्निहोत्री का मामला बताता है कि व्यवस्था के भीतर रहकर सुधार की गुंजाइश तो होती है, लेकिन व्यवस्था के विरुद्ध 'सत्याग्रह' का रास्ता एक सरकारी अधिकारी के लिए करियर के अंत की शुरुआत हो सकता है।

नए ट्रैफिक नियम: साल में 5 बार उल्लंघन पर ड्राइविंग लाइसेंस होगा रद्द, केंद्र का आदेश

नईदिल्ली  सड़क पर बार-बार लापरवाही करने वाले चालकों पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। सड़क परिवहन मंत्रालय ने मोटर वाहन नियमों (Motor Vehicles Rules) में एक नया संशोधन किया है। अब यदि कोई चालक एक साल के भीतर 5 या उससे अधिक बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता है तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस (DL) 3 महीने के लिए निलंबित या रद्द किया जा सकता है। नया नियम 1 जनवरी से लागू हुआ है। मंत्रालय द्वारा  जारी अधिसूचना के अनुसार, यह नया नियम 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जाएगा। इसके मुताबिक, लाइसेंस निलंबित करने का अधिकार क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) या जिला परिवहन अधिकारी के पास होगा। लाइसेंस रद्द करने से पहले संबंधित अधिकारी को लाइसेंस धारक का पक्ष सुनना अनिवार्य होगा। पिछले साल के अपराधों को अगले साल की गिनती में नहीं जोड़ा जाएगा। यानी हर साल की गिनती नए सिरे से होगी। मामूली गलतियां भी पड़ेंगी भारी अब तक केवल 24 गंभीर मामलों (जैसे गाड़ी की चोरी, अपहरण, तेज रफ्तार या ओवरलोडिंग) में ही लाइसेंस रद्द करने का प्रावधान था। लेकिन नए नियम के बाद अब हेलमेट न पहनना, सीट बेल्ट न लगाना और रेड लाइट जंप करना जैसे नियमों को 5 बार तोड़ने पर भी आपका लाइसेंस छीना जा सकता है। ई-चालान और भुगतान के नए नियम अधिसूचना में चालान की प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया गया है। वर्दीधारी पुलिस अधिकारी या अधिकृत अधिकारी चालान जारी कर सकेंगे। CCTV के जरिए ऑटो-जेनरेटेड ई-चालान भी भेजे जाएंगे। चालक को 45 दिनों के भीतर चालान भरना होगा या उसे अदालत में चुनौती देनी होगी। यदि 45 दिनों तक कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो माना जाएगा कि चालक ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है। इस कानून को लेकर विशेषज्ञों के बीच बहस छिड़ गई है। कुछ का मानना है कि इससे सड़क सुरक्षा बढ़ेगी, वहीं कुछ इसे दमनकारी बता रहे हैं। पूर्व डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर अनिल छिकारा ने इसे सही दिशा में उठाया कदम बताया, लेकिन यह भी कहा कि सीसीटीवी कैमरों से होने वाले चालान अक्सर विवादों में रहते हैं और इसके लिए एक ठोस मानक प्रक्रिया (SOP) की जरूरत है।

गुजरात के अनोखे NRI गांव की हैरान कर देने वाली कहानी, जहां 10 हजार लोग और अरबों का कारोबार, फिर भी पुलिस नहीं

 आणंद देश के गांवों की जो तस्वीर आमतौर पर हमारे जहन में होती है, यह रिपोर्ट उसे पूरी तरह बदल देने वाली है. कच्ची सड़कें, सीमित सुविधाएं और सरकारी मदद पर निर्भर गांव… लेकिन गुजरात के आनंद जिले का धर्मज गांव इन सब धारणाओं को तोड़ता है. यह एक ऐसा गांव है, जहां खेतों से ज्यादा बैंकों की चर्चा होती है, जहां गलियों में धूल नहीं, बल्कि तरक्की की चमक दिखाई देती है.  सबसे हैरान करने वाली बात… करीब 10 हजार की आबादी वाले इस गांव में एक भी पुलिस थाना नहीं है. इसके बावजूद यहां अपराध नहीं, बल्कि अनुशासन और भाईचारा कायम है. यही वजह है कि धर्मज को आज देश ही नहीं, दुनिया भर में NRI गांव के नाम से जाना जाता है. आनंद जिले के चरोतर क्षेत्र में स्थित धर्मज गांव में कदम रखते ही ऐसा महसूस होता है मानो आप किसी विकसित यूरोपीय कस्बे में आ गए हों. चौड़ी और साफ सड़कें, शानदार ड्रेनेज सिस्टम, दूधिया स्ट्रीट लाइट्स और हर कोने में आधुनिक सुविधाएं. इस गांव की आर्थिक ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां मौजूद बैंकों में 8,000 करोड़ रुपये से अधिक की फिक्स्ड डिपॉजिट जमा है. यही कारण है कि धर्मज जैसे गांव में 13 से अधिक नेशनल और प्राइवेट बैंकों की शाखाएं हैं. यहां का किसान भी करोड़पति है और गांव की अर्थव्यवस्था किसी शहर से कम नहीं. 19वीं सदी में पड़ी तरक्की की नींव धर्मज की इस बेमिसाल तरक्की की नींव 19वीं सदी में ही पड़ गई थी. समय के साथ यहां के लोग रोजगार और व्यापार के लिए विदेश गए, लेकिन अपनी मिट्टी से नाता कभी नहीं तोड़ा. आज इस गांव का शायद ही कोई ऐसा घर होगा, जिसका कोई सदस्य विदेश में न रहता हो. ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा और अफ्रीका जैसे देशों में करीब 3,000 परिवार बसे हुए हैं. लेकिन ये प्रवासी भारतीय सिर्फ पैसा कमाने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अपने गांव के विकास को ही अपना असली मिशन बना लिया. हर साल धर्मज डे मनाया जाता है, जहां दुनियाभर से NRI अपने गांव लौटते हैं और गांव के विकास के लिए खुलकर योगदान देते हैं. स्कूल, अस्पताल, सड़क, पानी, शिक्षा… हर क्षेत्र में यह सहयोग साफ दिखाई देता है. बिना पुलिस, फिर भी पूरी शांति धर्मज की सबसे बड़ी और अनोखी पहचान है यहां की शांति. 10 हजार से ज्यादा की आबादी, लेकिन गांव में न तो कोई पुलिस थाना है और न ही अपराध का डर. यहां न एफआईआर होती है, न मुकदमेबाजी. अगर कभी कोई विवाद उत्पन्न भी हो जाए, तो गांव के बुजुर्ग, पंचायत और युवा आपसी सहमति से उसे सुलझा लेते हैं. यहां पुलिस की लाठी से ज्यादा असर आपसी विश्वास और भाईचारे का है. स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके पूर्वजों ने उन्हें सिखाया कि चाहे आप दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न चले जाएं, अपनी जड़ों को कभी मत भूलिए. यही संस्कार आज धर्मज की पहचान बन चुके हैं. सुविधाएं जो शहरों को भी मात दें धर्मज में मौजूद सुविधाएं कई मेट्रो शहरों को भी शर्मिंदा कर दें. गांव में हाई-स्पीड वाई-फाई, आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम, और 24 घंटे साफ पानी की व्यवस्था है. स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो यहां आई हॉस्पिटल, गायनेक सेंटर, फिजियोथेरेपी क्लिनिक और अन्य चिकित्सा सुविधाएं बेहद कम खर्च में उपलब्ध हैं. आस्था और सेवा का केंद्र है जलाराम मंदिर, जहां की रसोई से कोई भी भूखा नहीं लौटता. यहां सेवा को धर्म माना जाता है और यह भावना गांव के हर व्यक्ति में दिखाई देती है. 100 साल पुरानी विरासत आज भी जीवित धर्मज सिर्फ आधुनिकता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी 100 साल पुरानी हेरिटेज के लिए भी जाना जाता है. गांव में आज भी ऐसे पुराने घर मौजूद हैं, जिन्हें देखकर लगता है मानो वे अभी-अभी बनाए गए हों. इन घरों की दीवारों पर मोर, कृष्ण, हाथी और पौराणिक कथाओं की अद्भुत कलाकृतियां उकेरी गई हैं. यह गांव इस बात का प्रमाण है कि आधुनिकता और परंपरा साथ-साथ चल सकती हैं. यही वजह है कि यहां काम करने वाले बैंक कर्मचारी, शिक्षक और डॉक्टर भी धर्मज में रहना पसंद करते हैं. साफ वातावरण, सुरक्षित माहौल और बेहतर सुविधाएं इसे रहने के लिए आदर्श बनाती हैं. गांव के लोगों ने क्या कहा? गांव में रहने वाले घनश्याम पटेल ने कहा कि मैं अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी से आया हूं. मुझे तीन दिन हुए हैं. आज धर्मज डे सेलिब्रेशन है. उसके लिए हमारे मन में स्पेशल प्लेस है. हम चाहते हैं कि हमारी जेनरेशन यहां आए और देखे कि हमारी धरोहर क्या है, हमारी संस्कृति क्या है. आज करीब 650 एनआरआई यहां आने वाले हैं. मुंबई, बेंगलुरु आदि शहरों से भी लोग आ रहे हैं. हमारा उद्देश्य है कि हम सब एक जगह मिलें. धर्मज में दस हजार की आबादी के बीच मेट्रो सिटी जैसी सुविधाएं हैं. वहीं मीना पटेल ने कहा कि हमारा गांव पहले से ही काफी एडवांस है. हर साल जनवरी में हम धर्मज डे सेलिब्रेट करते हैं. इस मौके पर एनआरआई इकट्ठे हो जाते हैं. यहां सभी एजुकेशन, मेडिकल जैसी सभी सुविधाएं हैं. घर-घर में फिल्टर वॉटर सप्लाई होता है. धर्मज का मैसेज… एक गांव, एक सोच धर्मज ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि अगर प्रवासी भारतीय और स्थानीय समुदाय एकजुट हो जाएं, तो बिना सरकारी इमदाद के भी विकास का स्वर्ग रचा जा सकता है. धर्मज सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि एक सोच है- ऐसी सोच जो बताती है कि पैसा कमाना बड़ी बात नहीं, लेकिन उस पैसे से अपनी जड़ों को सींचना ही असली कामयाबी है. आज धर्मज की चकाचौंध के पीछे सिर्फ डॉलर नहीं, बल्कि हर धर्मजवासी का समर्पण, एकता और अपने गांव के प्रति अटूट प्रेम है. यही वजह है कि बिना पुलिस थाने के भी यह गांव शांति, समृद्धि और विकास की मिसाल बना हुआ है.

PM Kisan Yojna में किसानों को मिलेगी 4,000 रुपये की किस्त, जानें क्या है नई अपडेट

नई दिल्ली देश के करोड़ों किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan) की 22वीं किस्त का इंतजार अब खत्म होने वाला है। इस बार कई किसानों के बैंक खातों में खुशियां दोगुनी होकर आने वाली हैं, क्योंकि उन्हें 2,000 रुपये के बजाय सीधे 4,000 रुपये मिलने की संभावना है। आइए समझते हैं कि इस बार किस्त का गणित क्या है और किन किसानों को इसका विशेष लाभ मिलेगा। किसे मिलेंगे 4,000 रुपये? योजना के नियमानुसार, सरकार हर साल किसानों को 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता देती है, जो 2,000-2,000 रुपये की तीन किस्तों में आती है। 22वीं किस्त में 4,000 रुपये केवल उन चुनिंदा किसानों को मिलेंगे जिनकी 21वीं किस्त किसी तकनीकी कारण या वेरिफिकेशन की वजह से रुक गई थी। सरकार ऐसे मामलों में पिछली बकाया राशि को अगली किस्त के साथ जोड़कर भेजती है। बजट 2026 पर टिकी हैं निगाहें 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से भी अन्नदाताओं को काफी उम्मीदें हैं। चर्चा है कि सरकार पीएम किसान योजना के बजट में बढ़ोतरी कर सकती है। यदि बजट में राशि बढ़ाई जाती है, तो भविष्य में सभी किसानों की किस्त राशि में इजाफा देखने को मिल सकता है। इन गलतियों के कारण अटक सकती है आपकी किस्त सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि आपकी प्रोफाइल में नीचे दी गई जानकारियां अधूरी हैं, तो 22वीं किस्त आपके खाते में नहीं आएगी:     ई-केवाईसी (e-KYC): जिन किसानों ने अपना ई-केवाईसी अपडेट नहीं कराया है, उनका पैसा अटक जाएगा।     आधार सीडिंग: आपका बैंक खाता आधार से लिंक होना अनिवार्य है। चूंकि पैसा DBT (Direct Benefit Transfer) के जरिए भेजा जाता है, इसलिए आधार लिंक न होने पर ट्रांजैक्शन फेल हो सकता है।     बैंक विवरण: गलत अकाउंट नंबर या गलत IFSC कोड होने पर भी राशि क्रेडिट नहीं हो पाएगी। कब आएगी 22वीं किस्त? आमतौर पर पीएम किसान की किस्तें चार महीने के अंतराल पर जारी की जाती हैं। पैटर्न को देखते हुए, फरवरी 2026 में बजट सत्र के आसपास 22वीं किस्त जारी होने की प्रबल संभावना है। हालांकि, आधिकारिक तारीख की घोषणा होना अभी बाकी है। कैसे चेक करें अपना स्टेटस? किसान भाई पीएम किसान पोर्टल (pmkisan.gov.in) पर जाकर अपना 'Beneficiary Status' चेक कर सकते हैं। वहां आपको पता चल जाएगा कि आपका ई-केवाईसी पूरा है या नहीं और पिछली किस्त का क्या स्टेटस है।  

अटल पेंशन योजना में बदलाव, मोदी सरकार ने किया बड़ा फैसला, ज्यादा लोग होंगे लाभान्वित

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने अटल पेंशन योजना को वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है. बुधवार को लिए गए इस फैसले के बाद सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि इस योजना के प्रचार, विकास और जरूरत पड़ने पर आर्थिक सहायता देने का सिलसिला भी आगे जारी रहेगा. इस फैसले का मकसद असंगठित क्षेत्र के कामगारों को बुढ़ापे में नियमित आमदनी की सुरक्षा देना और देश में वित्तीय समावेशन को और मजबूत करना है. मंजूरी के तहत सरकार जागरूकता अभियान चलाने, कर्मचारियों और संस्थाओं की क्षमता बढ़ाने और दूसरी विकास से जुड़ी गतिविधियों पर खर्च करती रहेगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा गरीब और कम आय वाले लोग इस योजना से जुड़ सकें. इसके अलावा, जहां योजना को चलाने में आर्थिक कमी महसूस होगी, वहां गैप फंडिंग के जरिए उसे पूरा किया जाएगा, ताकि योजना लंबे समय तक टिकाऊ बनी रहे. केंद्र सरकार का कहना है कि इस कदम से उन लाखों लोगों को बुढ़ापे में स्थायी आमदनी मिलेगी, जो औपचारिक सेक्टर से बाहर काम करते हैं. साथ ही यह देश के उस बड़े लक्ष्य को भी आगे बढ़ाएगा, जिसे ‘विकसित भारत @2047’ का विजन कहा गया है, यानी ऐसा भारत जहां ज्यादा से ज्यादा नागरिक पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में हों. कब शुरू हुई थी ये पेंशन योजना अटल पेंशन योजना की शुरुआत 9 मई 2015 को हुई थी. इसका उद्देश्य था असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को पक्की पेंशन का लाभ देना, ताकि 60 साल की उम्र के बाद उन्हें किसी पर निर्भर न रहना पड़े. इस योजना में जुड़ने वाले व्यक्ति अपनी उम्र और जमा राशि के हिसाब से हर महीने एक तय पेंशन पाने के हकदार होते हैं. योजना के नियमों के अनुसार, 60 साल की उम्र पूरी होने के बाद लाभार्थी को कम से कम 1,000 रुपये और अधिकतम 5,000 रुपये तक की मासिक पेंशन मिल सकती है. कितनी पेंशन मिलेगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति ने कितनी उम्र में योजना जॉइन की और कितना योगदान किया. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अटल पेंशन योजना आज देश की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था की एक मजबूत नींव बन चुकी है. 19 जनवरी 2026 तक इस योजना से 8.66 करोड़ से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं. यह संख्या दिखाती है कि आम लोगों के बीच इस योजना को लेकर भरोसा लगातार बढ़ रहा है. सरकार का मानना है कि नामांकन की रफ्तार बनाए रखने, पात्र लोगों में जागरूकता बढ़ाने और आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए नीति और वित्तीय सहयोग लगातार जरूरी है. वित्त वर्ष 2031 तक योजना और उससे जुड़ी फंडिंग बढ़ाने से असंगठित क्षेत्र तक इसकी पहुंच और मजबूत होगी और कमजोर वर्गों को लंबे समय तक पेंशन की सुरक्षा मिलती रहेगी. अटल पेंशन योजना की पात्रता     भारतीय नागरिक होना चाहिए.     उम्र 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए (40 वर्ष से अधिक उम्र वाले नहीं जुड़ सकते).     आपके पास बैंक या पोस्ट ऑफिस में सेविंग्स बैंक अकाउंट होना चाहिए (आधार और मोबाइल नंबर लिंक होना बेहतर).     1 अक्टूबर 2022 से: यदि आप इनकम टैक्सपेयर हैं या रहे हैं, तो इस योजना में शामिल नहीं हो सकते.     कोई भी व्यक्ति जो पहले से NPS या अन्य पेंशन स्कीम में नहीं है, वह जुड़ सकता है. कितना निवेश करना पड़ता है? पेंशन की राशि आप चुन सकते हैं, जैसे ₹1,000, ₹2,000, ₹3,000, ₹4,000 या ₹5,000 प्रति माह. योगदान की राशि आपकी उम्र और चुनी गई पेंशन पर निर्भर करती है. जितनी कम उम्र में शुरू करेंगे, उतना कम मासिक योगदान देना पड़ेगा (क्योंकि निवेश की अवधि लंबी हो जाएगी). यहां कुछ उम्र के अनुसार, मासिक योगदान का इंडिकेटिव चार्ट है. 2025-26 के अनुसार, सरकारी दस्तावेजों और कैलकुलेटर से आधारित:   एंट्री की आयु (वर्ष) ₹1,000 पेंशन के लिए मासिक योगदान ₹2,000 पेंशन ₹3,000 पेंशन ₹4,000 पेंशन ₹5,000 पेंशन 18 ₹42 ₹84 ₹126 ₹168 ₹210 20 ₹50 ₹100 ₹150 ₹198 ₹248 25 ₹76 ₹151 ₹226 ₹301 ₹376 30 ₹126 (लगभग) ₹252 ₹378 ₹504 ₹630 (लगभग) 35 ₹231 (लगभग) ₹462 ₹693 ₹924 ₹1,154 40 ₹471 (लगभग) ₹942 ₹1,413 ₹1,884 ₹2,354 नोट: ये राशि इंडिकेटिव है और थोड़ी बदल सकती हैं. सटीक राशि के लिए बैंक में जाएं या आधिकारिक APY कैलकुलेटर इस्तेमाल करें (npstrust.org.in या PFRDA वेबसाइट पर उपलब्ध) है. अटल पेंशन योजना में निवेश कैसे करें? नजदीकी बैंक या पोस्ट ऑफिस जाएं, जहां आपका सेविंग्स अकाउंट है (SBI, PNB, Bank of India, Union Bank, India Post आदि सभी भागीदार बैंक). APY आवेदन फॉर्म भरें (बैंक में उपलब्ध या ऑनलाइन डाउनलोड कर सकते हैं). व्यक्तिगत विवरण, आधार नंबर, मोबाइल नंबर, नॉमिनी विवरण भरें. पेंशन राशि चुनें. आधार कार्ड की कॉपी और बैंक अकाउंट डिटेल्स जमा करें. बैंक आपके अकाउंट से ऑटो-डेबिट सेट करेगा और PRAN (Permanent Retirement Account Number) जारी करेगा. ऑनलाइन विकल्प: कुछ बैंक ऐप्स (जैसे SBI YONO, HDFC, आदि) या NSDL/NPS पोर्टल से भी चेक कर सकते हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में बैंक ब्रांच से ही शुरू होता है.        

निवेशकों की नजर Budget 2026 पर: ट्रांजेक्शन टैक्स और STCG में कमी की उम्मीद

नई दिल्ली अगले महीने पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 से पहले शेयर बाजार के निवेशकों और एक्सपर्ट्स ने सरकार के सामने अपनी मांगों की लिस्ट रख दी है। बाजार के जानकारों का कहना है कि रिटेल इनवेस्टर्स को प्रोत्साहित करने के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) पर मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए। फिलहाल साल भर में 1.25 लाख रुपए तक के मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं लगता, जिसे बढ़ाकर 2 लाख रुपए करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा, निवेशक सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) की ऊंची दरों को लेकर भी चिंतित हैं। बाजार का मानना है कि ट्रांजैक्शन पर लगने वाले टैक्स को कम करने से लिक्विडिटी बढ़ेगी और ज्यादा से ज्यादा लोग शेयर बाजार से जुड़ सकेंगे। टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने पर जोर मार्केट पार्टिसिपेंट्स का कहना है कि पिछले कुछ सालों में शेयर बाजार में रिटेल निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। ऐसे में मौजूदा 1.25 लाख रुपए की LTCG छूट सीमा काफी कम है। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि इसे बढ़ाकर कम से कम 2 लाख रुपए किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि इससे मिडिल क्लास निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो पर बेहतर रिटर्न मिलेगा और वे लंबी अवधि के लिए निवेश करने को प्रेरित होंगे। STT कम करने की मांग पिछले बजट में फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) पर STT की दरें बढ़ा दी गई थीं। ब्रोकरेज हाउस और ट्रेडर्स का कहना है कि ट्रांजैक्शन टैक्स ज्यादा होने की वजह से ट्रेडिंग की लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा असर बाजार के वॉल्यूम पर पड़ रहा है। निवेशकों की मांग है कि कैश मार्केट में होने वाली खरीदारी पर STT की दरें कम रखी जाएं ताकि सट्टेबाजी के बजाय निवेश को बढ़ावा मिले। होल्डिंग पीरियड में बदलाव की उम्मीद फिलहाल अलग-अलग एसेट क्लास जैसे इक्विटी, डेट, गोल्ड और रियल एस्टेट के लिए 'लॉन्ग टर्म' की परिभाषा अलग-अलग है। बजट 2026 में उम्मीद की जा रही है कि सरकार इसे सरल बनाने के लिए सभी एसेट्स के लिए 12 महीने का एक समान होल्डिंग पीरियड तय कर सकती है। इससे टैक्स कैलकुलेशन आसान हो जाएगा और निवेशकों के बीच किसी तरह का कन्फ्यूजन नहीं रहेगा। इंडेक्सेशन का लाभ फिर से मिले रियल एस्टेट और गोल्ड जैसे एसेट्स पर से इंडेक्सेशन बेनिफिट हटने के बाद से निवेशकों में नाराजगी है। मार्केट एक्सपर्ट्स चाहते हैं कि सरकार कम से कम गैर-वित्तीय एसेट्स (नॉन-फाइनेंशियल एसेट्स) पर इंडेक्सेशन का लाभ फिर से शुरू करे या फिर टैक्स की दर को 12.5% से घटाकर 10% कर दे। इससे लंबी अवधि के निवेशकों को महंगाई के अनुपात में राहत मिल सकेगी। निवेश बढ़ेगा तो इकोनॉमी को फायदा होगा टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार कैपिटल गेन टैक्स के ढांचे को उदार बनाती है, तो इससे घरेलू बचत का फ्लो शेयर बाजार की तरफ बढ़ेगा। विदेशी निवेशकों (FPIs) की बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों का पैसा बाजार को मजबूती दे सकता है। सरकार के लिए चुनौती रेवेन्यू और निवेशकों की उम्मीदों के बीच बैलेंस बनाने की होगी।

घर की ये 8 जगहें टॉयलेट से भी ज्यादा गंदी होती हैं, सफाई ना करने से बढ़ सकते हैं बीमारियों के खतरे

 नई दिल्ली सभी लोग अपने घरों की खूब साफ-सफाई करते हैं. लेकिन सफाई सिर्फ सुंदरता के लिए नहीं होती, बल्कि घर साफ होने या ना होने आपकी सेहत से भी सीधा जुड़ा होता है. आपके घरों में रोज झाड़ू-पोछा किया जाता है, फर्श चमकाया जाता है, फिर भी कई बार घर में बदबू महसूस होती है. कई बार घर के लोगों में इंफेक्शन फैल जाता है और वो बीमारी पड़ जाते हैं. इसकी बड़ी वजह है घर की कुछ ऐसी जगहें जो रोज इस्तेमाल होती हैं, जिन्हें साफ करना आप लोग अक्सर भूल जाते हैं. ये जगहें गंदी इसलिए नहीं होतीं क्योंकि आप सफाई नहीं करते, बल्कि इसलिए क्योंकि यहां सबसे ज्यादा हाथ लगते हैं. ऐसे में इन्हें हर रोज साफ करने की जरूरत होती है. आइए जानते हैं घर की उन 8 सबसे गंदी जगहों के बारे में, जिन्हें रोज साफ करना बेहद जरूरी है. 1. किचन सिंक और नल के हैंडल किचन सिंक में लगातार बर्तन धुलते हैं, जिसकी वजह से अक्सर लोग सोचते हैं कि ये तो पानी से धुलता रहता है इसलिए ये साफ ही होगा. लेकिन सच्चाई ये है कि किचन सिंक घर की सबसे गंदी जगहों में से एक होता है. कई रिसर्च के मुताबिक, इसमें टॉयलेट सीट से भी ज्यादा बैक्टीरिया होते हैं. क्यों जरूरी है सफाई: कच्ची सब्जी हो, मीट हो या फिर नमी..ये सभी बैक्टीरिया को बढ़ने का मौका देते हैं. रोज सफाई से बदबू और इंफेक्शन से बचा जा सकता है. ऐसे में गर्म पानी और डिसइंफेक्टेंट से सिंक और नल जरूर साफ करें. 2. चॉपिंग बोर्ड चॉपिंग बोर्ड, बाजारों में लकड़ी और प्लास्टिक दोनों तरह के मौजूद होते हैं. इन पर रोज सब्जी, फल से लेकर नॉन-वेज भी काटा जाता है. इसमें छोटे-छोटे कट्स बन जाते हैं, जिनमें खाना फंस जाता है और बैक्टीरिया पनपने लगते हैं. क्यों जरूरी है सफाई: रोज सफाई से फूड पॉइजनिंग का खतरा कम होता है और बदबू नहीं आती. हर बार इस्तेमाल के बाद गर्म पानी और साबुन से धोएं. अगर आप इस पर कुछ नॉन-वेज चॉप कर रहे हैं तो इसे नींबू या सिरके के पानी से साफ करें. 3. मोबाइल फोन और रिमोट  मोबाइल फोन, टीवी या एसी के रिमोट दिनभर आपके हाथ में रहते हैं. आप इन्हें खाते समय, बाहर से आकर और कभी-कभी बिना हाथ धोए भी छूते हैं. रिसर्च के अनुसार मोबाइल फोन पर टॉयलेट सीट से ज्यादा कीटाणु हो सकते हैं. क्यों जरूरी है सफाई: अगर आप इन्हें रोज पोंछते हैं तो हाथों से चेहरे तक पहुंचने वाले कीटाणु कम होते हैं. ऐसे में इन्हें माइक्रोफाइबर कपड़े और 70% अल्कोहल से हल्के हाथों से रोज साफ करना चाहिए. 4. किचन स्पॉन्ज और डिशक्लॉथ बर्तन धोने वाला स्पॉन्ज और कपड़ा बहुत ज्यादा गंदे होते हैं. ये हमेशा गीले रहते हैं और इनमें खाने के कण फंस जाते हैं. क्यों जरूरी है सफाई: इन्हें जब आप रोज साफ करते हैं तो इनमें बदबू नहीं आती और बैक्टीरिया भी नहीं बढ़ते हैं. इन्हें गर्म पानी और डिटर्जेंट में उबालें. स्पॉन्ज हफ्ते में बदलें और डिशक्लॉथ रोज धोएं. 5. बाथरूम के नल और हैंडल जब बाथरूम की बात आती है तो सबसे पहले दिमाग में पानी का नाम आता है. बाथरूम में नमी ज्यादा होती है, जिससे बैक्टीरिया और फंगस जल्दी बढ़ते हैं. नल, हैंडल और साबुन डिस्पेंसर बार-बार छुए जाते हैं, जिससे इंफेक्शन फैलने का खतरा रहता है. क्यों जरूरी है सफाई: अगर आप उन्हें रोज पोंछते हैं तो उससे कीटाणु फैलने से रुकते हैं और फंगस नहीं जमता. दिन के आखिर में डिसइंफेक्टेंट वाइप से साफ करें. 6. टॉयलेट फ्लश हैंडल टॉयलेट फ्लश हैंडल भी कीटोणुओं का घर होता है. वो बहुत ज्यादा गंदा होता है, क्योंकि इसे हाथ धोने से पहले छुआ जाता है. क्यों जरूरी है सफाई: रोज सैनिटाइज करने से खतरनाक बैक्टीरिया खत्म होते हैं. इसे डिसइंफेक्टेंट स्प्रे या वाइप से रोज साफ करें. बाथरूम के दरवाजों के हैंडल भी जरूर साफ करें. 7. पालतू जानवरों के खाने के बर्तन अगर आपके घर में पेट डॉग या और कोई पेट है तो उनके खाने के बर्तन भी जरूर होंगे. जानवरों के खाने और पानी के बर्तनों में लार और खाना जमा हो जाता है, जिससे बैक्टीरिया पनपते हैं. ऐसे में वो बीमारी की वजह बन सकते हैं. क्यों जरूरी है सफाई: रोज पालतू जानवरों के बर्तन धोने से ना केवल उनकी सेहत अच्छी रहती है, बल्कि आपकी भी. उनमें बदबू भी नहीं आती है. हर बार खाने के बाद गर्म पानी और साबुन से बर्तन धोएं और आसपास की जगह भी साफ रखें. 8. लाइट स्विच लाइट स्विच ऐसी चीज है जिसे हर कोई छूता है, लेकिन साफ करने का ध्यान कम ही आता है. क्यों जरूरी है सफाई: जब आप इन्हें रोज साफ करते हैं, पोंछते हैं तो उससे वायरस और बैक्टीरिया फैलने से रुकते हैं. डिसइंफेक्टेंट वाइप से लाइट स्विच और दरवाजों के हैंडल साफ करें.

एक किडनी से जीने वाले लोग: इस गांव की चौंकाने वाली सच्चाई जानें

नई दिल्ली क्या आपने कभी किसी ऐसे गांव के बारे में सुना है, जहां अधिकांश लोग सिर्फ एक ही किडनी के सहारे अपनी जिंदगी बसर कर रहे हों? सुनने में यह बात अजीब लग सकती है, लेकिन भारत के पड़ोस में एक ऐसा ही गांव मौजूद है। आइए जानते हैं इस अनोखे गांव के बारे में। एक किडनी वाला गांव कहां है? हम बात कर रहे हैं होक्से (Hokse Village) की, जिसे लोग किडनी वैली (Kidney Valley) के नाम से भी जानते हैं। यह गांव नेपाल में स्थित है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस गांव में रहने वाले अधिकांश लोगों के पास केवल एक किडनी है और उसी के सहारे वे अपना जीवन चला रहे हैं। इस वजह से उन्हें कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन मजबूरी और गरीबी ने इस स्थिति को जन्म दिया है।   आखिर एक ही किडनी क्यों? शुरुआत में ऐसा लग सकता है कि लोग जन्म से ही एक किडनी के साथ पैदा होते हैं, लेकिन सच कुछ और है। इस गांव में गरीबी बहुत ज्यादा है। लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए मजबूर होकर अपनी किडनी बेच देते हैं। किडनी बेचने से जो पैसा मिलता है, उससे परिवार का भरण-पोषण किया जाता है।   इलाके में अंगों की तस्करी मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस गांव और आसपास के इलाकों में अंगों की तस्करी करने वाले गिरोह सक्रिय हैं। गरीब और भोले-भाले लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर, उन्हें झूठे वादों और लालच में फंसाया जाता है। कई लोगों को यह भरोसा दिलाया जाता है कि एक किडनी निकलवाने के बाद दूसरी खुद बनने लगेगी, जो पूरी तरह गलत और जानलेवा होता है। इस तरह, यह गांव एक दर्दनाक लेकिन सचेत करने वाली कहानी का प्रतीक बन गया है, जहां गरीबी और अवैध अंग व्यापार ने लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया है।  

केंद्रीय बजट को लेकर किरेन रिजिजू का बयान, कहा– भविष्य की जरूरतों का रखा जाएगा ध्यान

मुंबई बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) समेत महाराष्ट्र के दूसरे नगर निगमों में भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति ने शानदार कामयाबी हासिल की है। इस जीत पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन मजबूती के साथ काम कर रही है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना की जीत प्रधानमंत्री मोदी और राज्य में देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुई है। अब अजित पवार के भी शामिल होने से इस गठबंधन को लोगों ने खूब पसंद किया है।” बता दें कि महाराष्ट्र में बीएमसी समेत 29 नगर निगमों के चुनाव परिणामों में भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने जीत हासिल की है। अगर सिर्फ बीएमसी चुनाव की बात करें तो यहां कुल 227 सीटें हैं। महायुति (भाजपा और शिंदे गुट) ने कुल 118 सीटें जीती हैं, जो बीएमसी में बहुमत के आंकड़े से चार सीटें ज्यादा हैं। शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट और एमएनएस का गठबंधन बुरी तरह पिछड़ गया। उन्होंने केंद्रीय बजट 2026 पर कहा, "संसद सत्र 28 जनवरी से शुरू होगा और बजट 1 फरवरी को पेश किया जाएगा। पीएम मोदी के नेतृत्व में हर बजट खास होता है, जो समाज, देश और उसके भविष्य का ख्याल रखता है। किसी भी तरह के सरकारी काम में कोई कमी नहीं है। हर फैसला सोच-समझकर लिया जाता है और लागू किया जाता है।” किरेन रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब से प्रधानमंत्री बने हैं तब से सरकार हर फैसला सोच समझकर लेती है। इसमें कोई दो राय नहीं है। चाहे आप बजट देखें या कोई योजना देखें, हर चीज पर सरकार सोच समझकर फैसला लेती है। हालांकि, उन्होंने पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया पर कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि अभी हम इस पर कुछ नहीं बोलना चाहते हैं। समय आने दीजिए, तब इसका जवाब दिया जाएगा।