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हाईटेक वॉरफेयर पर फोकस: नसीराबाद दौरे में ले. जनरल चौहान ने तकनीकी सशक्त सेना पर दिया जोर

अजमेर लेफ्टिनेंट जनरल अरविंद चौहान ने रविवार को नसीराबाद मिलिट्री स्टेशन का दौरा कर वहां तैनात लॉजिस्टिक यूनिट्स की तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने ड्रोन तकनीक के उपयोग, प्रशिक्षण व्यवस्था और जवानों के कल्याण से जुड़े पहलुओं पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों और सैनिकों से भविष्य की चुनौतियों के लिए स्वयं को तैयार रखने और आधुनिक तकनीक को तेजी से अपनाने का आह्वान किया। दरअसल, दक्षिणी कमान भारतीय सेना ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्ट कर जानकारी दी कि लेफ्टिनेंट जनरल अरविंद चौहान, वाईएसएम, एसएम, जनरल ऑफिसर कमांडिंग सुदर्शन चक्र कोर, ने रविवार को नसीराबाद मिलिट्री स्टेशन का दौरा किया। यहां उन्होंने 'सबसे बेहतर ब्रिगेड' की तैयारी का जायजा लिया, जो फर्स्ट टू स्ट्राइक ब्रिगेड का हिस्सा है। इसके साथ ही लेफ्टिनेंट जनरल अरविंद चौहान ने कुछ अहम लॉजिस्टिक यूनिट्स का भी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें ऑपरेशनल जिम्मेदारियों, ट्रेनिंग के खास पहलुओं, आधारभूत संरचना के सुधार और जवानों की भलाई से जुड़ी योजनाओं की पूरी जानकारी दी गई। इसके बाद जनरल चौहान ने एक कैपेबिलिटी डेवलपमेंट कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता की, जिसमें सुदर्शन चक्र कोर के सभी फॉर्मेशन कमांडर मौजूद थे। उन्होंने इस मौके पर ड्रोन जैसी अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स (यूएएस) और इनके काउंटर-यूएएस सिस्टम्स की अहमियत पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि रिपेयर और रीजेनरेशन की व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए, ताकि तकनीक का सही इस्तेमाल हो सके। उन्होंने ट्रेनिंग के लिए भी बेहतर सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया। जनरल ने यह भी बताया कि अलग-अलग हथियारों और टुकड़ियों के बीच तालमेल, यानी कम्बाइंड आर्म्स इंटीग्रेशन, बहुत जरूरी है ताकि ऑपरेशन्स ज्यादा असरदार बन सकें। उनका कहना था कि बदलती लड़ाई की परिस्थितियों में ऑपरेशनल एफेक्टिवनेस बढ़ाना बहुत जरूरी है। उन्होंने जवानों को भविष्य के लिए तैयार रहने और हर तरह की नई चुनौतियों के लिए एडाप्ट होने की हिदायत दी। इस दौरे के दौरान, जीओसी ने जवानों के मनोबल, उनकी ट्रेनिंग और वेलफेयर पर भी बात की। उन्होंने कहा कि नई तकनीक और बेहतर ट्रेनिंग से ही फौज की ताकत बढ़ती है और मिशन में सफलता मिलती है। उन्होंने सभी कमांडरों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्र में नई टेक्नोलॉजी और आधुनिक रणनीतियों को लागू करें।

एयरपोर्ट बना तस्करी का अड्डा! अहमदाबाद में 12.50 करोड़ की ड्रग्स पकड़ी, चार लोग दबोचे गए

अहमदाबाद अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रविवार को सीमा शुल्क और पुलिस अधिकारियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 12.50 करोड़ रुपए मूल्य की हाइब्रिड मारिजुआना जब्त की है। इस दौरान चार यात्रियों को गिरफ्तार किया गया है, जिससे एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ होने का दावा किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह हवाई मार्ग का इस्तेमाल कर प्रतिबंधित नशीले पदार्थों को भारत में ला रहा था। अधिकारियों को दक्षिण-पूर्व एशिया से भारत में नशीले पदार्थों की संभावित तस्करी को लेकर विशेष खुफिया जानकारी मिली थी। इसी इनपुट के आधार पर बैंकॉक से अहमदाबाद आने वाली एक उड़ान के यात्रियों की गहन जांच की गई। जांच के दौरान चार यात्रियों के सामान में संदिग्ध वस्तुएं पाई गईं, जिसके बाद विस्तृत तलाशी ली गई। वरिष्ठ सीमा शुल्क अधिकारी ने बताया कि तलाशी के दौरान उच्च गुणवत्ता वाली प्रतिबंधित हाइब्रिड मारिजुआना की बड़ी खेप बरामद की गई। यह मादक पदार्थ प्लास्टिक के पैकेटों में छिपाकर रखा गया था और इसका अनुमानित अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य लगभग 12.50 करोड़ रुपए आंका गया है। अधिकारियों ने बताया कि हाइब्रिड मारिजुआना सामान्य गांजे की तुलना में कहीं अधिक प्रभावशाली और महंगा होता है तथा भारतीय कानून के तहत इस पर पूरी तरह प्रतिबंध है। चारों आरोपियों को मौके पर ही हिरासत में लेकर बाद में औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक वडोदरा का निवासी है, जबकि अन्य तीन पंजाब से ताल्लुक रखते हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह खेप गुजरात किस उद्देश्य से लाई गई थी और इसके पीछे सक्रिय आपूर्ति श्रृंखला में कौन-कौन लोग शामिल हैं। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि शुरुआती जांच से संकेत मिले हैं कि इन नशीले पदार्थों को देश के प्रमुख शहरों में सप्लाई करने की योजना थी, जहां इनकी मांग लगातार बढ़ रही है। अधिकारी आरोपियों के यात्रा रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और संभावित अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की भी जांच कर रहे हैं, ताकि इस तस्करी से जुड़े बड़े नेटवर्क तक पहुंचा जा सके। मामले में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। जब्त किए गए मादक पदार्थों को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है और आगे की जांच जारी है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि आरोपियों के अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट से संभावित संबंधों की जांच के लिए केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय शुरू किया गया है। यह बरामदगी अहमदाबाद हवाई अड्डे पर हाल के दिनों में हुई नशीली दवाओं की कई बड़ी जब्तियों की कड़ी में एक और मामला है। इसी महीने की शुरुआत में सीमा शुल्क अधिकारियों ने बैंकॉक से आए एक यात्री के सामान से करीब 8 करोड़ रुपए मूल्य की हाइड्रोपोनिक भांग बरामद की थी। इसके अलावा एक अन्य मामले में बैंकॉक से लाई गई 3.9 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक मारिजुआना की जब्ती के बाद एक आरोपी को एनडीपीएस अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी के लगातार प्रयासों को देखते हुए हवाई अड्डे पर निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर अभियान और सख्त किए जा रहे हैं, ताकि इस तरह की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

Republic Day से पहले किले में तब्दील जम्मू-कश्मीर, जगह-जगह पुलिस और सुरक्षाबलों की तैनाती

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर में गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात कर दिए गए हैं। हर वाहन की चेकिंग के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है। जम्मू के एमए स्टेडियम में सोमवार को गणतंत्र दिवस समारोह मनाया जाएगा, जहां उपराज्यपाल मनोज सिन्हा राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और परेड की सलामी लेंगे। वहीं श्रीनगर में उप मुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी बख्शी स्टेडियम में गणतंत्र दिवस समारोह की अध्यक्षता करेंगे। जम्मू-श्रीनगर दोनों जगहों पर जम्मू-कश्मीर पुलिस, बीएसएफ, सीआरपीएफ, फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज, आपदा प्रबंधन, होम गार्ड और स्कूली बच्चों की टुकड़ियाँ पोडियम के सामने मार्च करेंगी। झंडा फहराने और मार्च पास्ट के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम और केंद्रशासित प्रदेश में विकास और प्रगति को दर्शाने वाले कार्यक्रम होंगे। जम्मू और कश्मीर के सभी अन्य जिला मुख्यालयों में भी इसी तरह के समारोह आयोजित किए जाएंगे। केंद्र शासित प्रदेश के 20 जिलों में गणतंत्र दिवस समारोह के सभी स्थानों पर शनिवार को फुल ड्रेस रिहर्सल हुई। श्रीनगर और जम्मू में कई जगहों पर ह्यूमन इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, ड्रोन से हवाई निगरानी, ​​अस्थायी ड्रॉप गेट, चेकपोस्ट और लोगों की तलाशी और गाड़ियों की चेकिंग की जा रही है। पुलिस अधिकारी ने बताया, "सुरक्षा को अधिकतम अलर्ट पर रखा गया है और हम गणतंत्र दिवस के मद्देनजर सुरक्षा को लेकर कोई चांस नहीं ले रहे हैं।" देश के 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रीय उत्सवों का संदेश फैलाने के लिए सभी सरकारी इमारतों, फ्लाईओवर और मुख्य पुलों को रोशन किया गया है। वहीं, दिल्ली में 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए आतंकी हमले के बाद गणतंत्र दिवस समारोह मनाया जा रहा है, जिसमें 12 बेगुनाह नागरिक मारे गए थे और 32 अन्य घायल हो गए थे। जिसे देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी से मिले इनपुट के आधार पर भी कार्रवाई की जा रही है। सेना पूरे इलाकों को अपने कब्जे में लेकर चेकिंग अभियान भी चला रही है। साथ ही कोई भी इनपुट मिलने पर कार्रवाई के लिए भी टीम तैनात की गई है।

बहन से किया वचन, देर रात चाय पीकर लौटे आचार्य धीरेंद्र शास्त्री

कोटा रामगंज मंडी में श्री राम कथा कर रहे बागेश्वर धाम सरकार के आचार्य धीरेंद्र शास्त्री आज अपने दिए हुए वचन की पालना में वार्ड नंबर 3 रामगंज मंडी निवासी दो बहनों भावना राठौड़ और खुशबू राठौर के घर देर रात चाय पीने पहुंचे! एक दिन पहले शनिवार को इन दोनों बहनों ने कथा के दौरान आचार्य धीरेंद्र शास्त्री को अपना भाई बनाने की इच्छा प्रकट करते हुए राखी बांधी थी! और राखी बांधने के बाद अपने भाई आचार्य धीरेंद्र शास्त्री से निवेदन किया था कि वह उसके घर चाय पीने आए! आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने भी अपनी बहन को वचन दिया था कि वह तीन दिन यहां रामगंज मंडी में है तो उसके घर चाय पीने जरूर आएंगे! और आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी बहनों से किया हुआ वायदा निभाया भी सही! रविवार की रात को कोटा मैं शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर के घर पहुंचकर पहले तो उनके परिवार जनों से भेट की और आशीर्वाद दिया! उसके बाद रामगंज मंडी लौटकर आचार्य धीरेंद्र शास्त्री देर रात 12:00 बजे अचानक वार्ड नंबर 3 रामगंज मंडी में अपनी बहन खुशबू और भावना राठौड़ के घर पहुंचे!   विश्व विख्यात भारत के चोटी के संत जिन्हें सुनने के लिए रामगंज मंडी में कथा स्थल पर लाखों की संख्या में भीड़ उमड़ रही है! उस महान और पूजनीय संत को अपनी कुटिया में प्रकार भावना और खुशबू राठौर की खुशी का ठिकाना नहीं रहा! दोनों बहनों की आंखों से खुशियों के मोती छलक पड़े!   भावना बोली मुझे विश्वास था मेरे भाई मेरे घर चाय पीने जरूर आएंगे! अपना किया हुआ वादा पूरा करेंगे! भावना ने आचार्य धीरेंद्र शास्त्री को बताया कि वह दोनों बहने हैं उनके कोई भाई नहीं है इसलिए वह आचार्य धीरेंद्र शास्त्री को राखी बांधकर अपना भाई बनना चाहती थी! उन्होंने कई बार प्रयास किया लेकिन ऐसा हो नहीं पाया! रामगंज मंडी में जब कथा करने आचार्य शास्त्री पहुंचे तो दोनों बहनों ने ठान ली कि वह अब अपनी इच्छा पूरी कर के रहेगी! और हुआ भी ऐसा ही आखिरकार वह आचार्य धीरेंद्र शास्त्री को अपना भाई बनाने और घर पर बुलाकर चाय पिलाने में सफल रही! दोनों बहनों के पिता लालचंद राठौर और माता हेमलता राठौर ने आचार्य जी को बताया कि यह अक्सर उनसे ऐसी बातें किया करती थी, परंतु उनको विश्वास नहीं होता था!  कई बार बेटी को समझाया भी की यह संभव नहीं है! आचार्य धीरेंद्र शास्त्री कभी भी उसके घर चाय पीने नहीं आएंगे! लेकिन बागेश्वर धाम सरकार का आशीर्वाद है कि बेटियों का सपना पूरा हुआ और आज स्वयं आप भगवान के रूप में हमारे घर पधारे हैं! आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने खुशबू के सर पर हाथ फेरते हुए कहा कि आज से हम तुम्हारे भाई हैं! भाई की कमी कभी महसूस मत करना! आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी बहन के घर लगभग आधा घंटा बैठकर चाय पी और उसके माता-पिता व उपस्थित अन्य परिजनों से हाल-चाल पूछे! और घर से विदा होने से पहले अपनी दोनों बहनों को बागेश्वर धाम आने का निमंत्रण दिया! आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने बच्चियों के पिता लाल चंद्र राठौर को बागेश्वर धाम की तरफ से एक कूपन भी दिया! आचार्य धीरेंद्र शास्त्री के साथ शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर भी उपस्थित थे!  

WHO ने अमेरिका के फैसले पर जताई चिंता, टेड्रोस बोले- वैश्विक सुरक्षा प्रभावित

वाशिंगटन अमेरिका के विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से हटने के फैसले पर WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम गेब्रेयेसस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा बताए गए कारण तथ्यों से परे और गलत हैं। डॉ. टेड्रोस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अमेरिका WHO का संस्थापक सदस्य रहा है और संगठन की कई ऐतिहासिक उपलब्धियों में उसकी अहम भूमिका रही है। इनमें चेचक का उन्मूलन, पोलियो, HIV, इबोला, इन्फ्लुएंजा, टीबी, मलेरिया और अन्य गंभीर बीमारियों के खिलाफ लड़ाई शामिल है।   अमेरिका के फैसले पर WHO की आपत्ति WHO प्रमुख ने कहा, “अमेरिका के WHO से हटने से न सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया कम सुरक्षित हो जाती है।” उन्होंने साफ किया कि WHO हमेशा सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करता आया है और अमेरिका के साथ भी यही रवैया रहा है। WHO को उम्मीद है कि भविष्य में अमेरिका फिर से संगठन में सक्रिय भूमिका निभाएगा।  COVID-19 पर लगाए गए आरोप अमेरिका ने WHO पर COVID-19 महामारी के दौरान विफलता, जानकारी छिपाने और गलत मार्गदर्शन देने का आरोप लगाया था। इस पर WHO ने कहा कि WHO ने महामारी के दौरान तेज़ी और पारदर्शिता से जानकारी साझा की। मास्क, वैक्सीन और सामाजिक दूरी की सलाह दी गई  लेकिन लॉकडाउन या वैक्सीन अनिवार्यता की सिफारिश कभी नहीं की अंतिम फैसले सरकारों पर छोड़े गए। WHO ने माना कि किसी भी संगठन से कुछ गलतियां हो सकती हैं, लेकिन उसने महामारी से निपटने में अपनी भूमिका पूरी ईमानदारी से निभाई।  अमेरिका का आधिकारिक रुख 22 जनवरी को अमेरिका ने औपचारिक रूप से WHO से बाहर निकलने की घोषणा की।अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और स्वास्थ्य मंत्री केनेडी ने कहा कि आगे WHO से अमेरिका का संपर्क सिर्फ निकासी प्रक्रिया और अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा तक सीमित रहेगा। WHO ने दोहराया कि वह सभी देशों के साथ मिलकर काम करता रहेगा और उसका लक्ष्य है हर इंसान को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना, जो एक मौलिक मानव अधिकार है।  

देवभूमि का भविष्य उज्ज्वल हो — हिमाचल दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी बधाई

शिमला हिमाचल प्रदेश में रविवार को गर्व और उत्साह के साथ प्रदेश का स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए स्वर्णिम भविष्य की कामना की। राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक एक्स हैंडल ने एक पोस्ट में राष्ट्रपति मुर्मू के हवाले से लिखा, "हिमाचल प्रदेश के 'पूर्ण राज्यत्व दिवस' पर राज्य के सभी निवासियों को मैं हार्दिक बधाई देती हूं। आध्यात्मिक परंपराओं के कारण देवभूमि और शौर्य परंपरा के कारण वीरभूमि कही जाने वाली हिमाचल की धरती पर प्रकृति का असीम वरदान है जो इस राज्य के प्रति अद्भुत आकर्षण उत्पन्न करता है। मुझे विश्वास है कि हिमाचल प्रदेश के कर्मठ निवासी राष्ट्र निर्माण तथा देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे। मैं राज्य के सभी लोगों के स्वर्णिम भविष्य की मंगलकामना करती हूं।" इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर अपने एक्स पोस्ट में लिखा, "प्रकृति और संस्कृति की संगमस्थली हिमाचल प्रदेश के अपने सभी परिवारजनों को पूर्ण राज्यत्व दिवस की अनेकानेक शुभकामनाएं। अपनी अद्भुत प्रतिभा और पराक्रम से वे सदैव मां भारती की सेवा करते आए हैं। मैं उनके सुनहरे भविष्य के साथ-साथ इस देवभूमि की समृद्धि की कामना करता हूं।" लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने लिखा, "देव-भूमि’ हिमाचल प्रदेश के स्थापना दिवस पर राज्य के समस्त वासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। हिमालय की गोद में बसा यह प्रदेश समृद्ध प्राकृतिक सौंदर्य, शांत वातावरण, सांस्कृतिक विविधता, अतिथि-भाव से परिपूर्ण जनमानस और गौरवशाली धार्मिक परंपराओं के लिए विश्वभर में विख्यात है। कामना है कि देवभूमि निरंतर प्रगति, समृद्धि और संतुलित विकास के मार्ग पर आगे बढ़े तथा प्रदेशवासी सुख, स्वास्थ्य और खुशहाली के साथ हिमाचल की गौरवशाली पहचान को और सुदृढ़ करें।" भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने लिखा, "अतुल्य प्राकृतिक सौंदर्य और गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध देवभूमि हिमाचल प्रदेश के स्थापना दिवस पर समस्त हिमाचलवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। ईश्वर से प्रार्थना है कि हिमाचल प्रदेश निरंतर विकास, समृद्धि और उन्नति की दिशा में आगे बढ़ता रहे।"

घुसपैठ पर सख्ती: असम से 15 बांग्लादेशी नागरिकों की वापसी, CM सरमा का बड़ा बयान

असम मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि बांग्लादेश से आए 15 अवैध प्रवासियों को असम से वापस भेज दिया गया है। शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखेगी। शनिवार रात ‘एक्स' पर एक पोस्ट में शर्मा ने कहा, “हमारे सतर्क सुरक्षाबलों ने 15 अवैध बांग्लादेशियों को उनके देश वापस भेज दिया।” उन्होंने कहा, “याद रखें, आप अपनी शर्तों पर आते हैं और हमारी शर्तों पर जाते हैं।   सीमाओं पर सब सतर्क हैं। कानून अपना काम कर रहा है। बहुत बढ़िया काम।” हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इन घुसपैठियों को राज्य के किस जिले से वापस भेजा गया। राज्य सरकार बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों के खिलाफ लगातार सख्ती बरत रही है और पड़ोसी देश से लगी सीमाओं के जरिए घुसपैठियों को वापस भेजा जा रहा है। 

India–US Defence Bond मजबूत: आर्मी चीफ और अमेरिकी सेना सचिव के बीच रणनीतिक चर्चा

नई दिल्ली यूएस सेक्रेटरी ऑफ द आर्मी (अमेरिकी सेना सचिव) डैनियल पी. ड्रिस्कॉल व भारतीय थल सेना के प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी की एक महत्वपूर्ण मुलाकात हुई है। इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और मजबूत करने, मिलिट्री-टू-मिलिट्री सहभागिता को और गहन करने तथा वैश्विक शांति और सुरक्षा के प्रति दोनों सेनाओं की साझा प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करने पर व्यापक चर्चा की गई। बैठक में दोनों पक्षों ने भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी से संबंधित कई विषयों पर बातचीत की। भविष्य में सहयोग के नए अवसरों पर विचार-विमर्श किया। गौरतलब है कि दोनों देश संयुक्त सैन्य अभ्यासों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, पेशेवर आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण तथा आपसी समन्वय को और प्रभावी बनाने जैसे विषयों पर विशेष जोर देते रहे हैं। अब सेना प्रमुख व अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ द आर्मी की यह मुलाकात दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक एवं रक्षा संबंधों को मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुलाकात साझा मूल्यों, आपसी विश्वास और वैश्विक शांति एवं सुरक्षा के प्रति समान दृष्टिकोण पर आधारित है। गौरतलब है कि भारत और अमेरिका रक्षा साझेदारी पर एक ऐतिहासिक समझौता भी कर चुके हैं। कुछ महीने पहले भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीटर हेगसेथ से मुलाकात के दौरान 10 वर्षीय ‘फ्रेमवर्क फॉर द यूएस-इंडिया मेजर डिफेंस पार्टनरशिप’ पर हस्ताक्षर किए थे। रक्षा मंत्री ने कुआलालंपुर में अपने अमेरिकी समकक्ष पीटर हेगसेथ के साथ यह महत्वपूर्ण बैठक व समझौता किया था। इसके तहत दोनों देशों ने 10 वर्षों के लिए ‘यूएस-इंडिया मेजर डिफेंस पार्टनरशिप फ्रेमवर्क’ पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद भारत व अमेरिका के बीच 22वीं मिलिट्री कोऑपरेशन ग्रुप की बैठक भी हुई थी। इस बैठक में इस समझौते से जुड़े विषयों पर आगे की चर्चा हुई। इसमें रक्षा सहयोग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और संयुक्त प्रशिक्षण जैसे विषय शामिल थे। भारत व अमेरिका के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत करने के लिए दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक 3 व 4 नवम्बर को अमेरिका के हवाई में हुई थी। यह भारत–अमेरिका सैन्य सहयोग समूह की 22वीं बैठक थी। यह भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। उस बैठक में सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास, उभरती प्रौद्योगिकियों का साझा उपयोग, रक्षा उद्योग सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा के प्रति साझा प्रतिबद्धता जैसे विषय शामिल थे। वहीं, बीते दिनों भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी अमेरिका यात्रा पर गए थे। यहां उन्होंने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में क्षमता निर्माण के नए अवसरों पर भी विचार किया था। एडमिरल त्रिपाठी की इस यात्रा का उद्देश्य भारतीय नौसेना और संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसेना के बीच पहले से प्रगाढ़ और सुदृढ़ समुद्री साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाना था। वहीं, बीते नवंबर महीने में ही भारतीय वायुसेना और संयुक्त राज्य अमेरिका की वायुसेना के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वायु अभ्यास को अंजाम दिया गया था। दोनों देशों के इस संयुक्त अभ्यास का उद्देश्य वायु सेनाओं के बीच आपसी समझ, सामरिक सहयोग और अंतरसंचालन क्षमता को बढ़ाना था।

राष्ट्रपति भवन के अमृत उद्यान का उद्घाटन: प्रवेश, टिकट रियायत और समय से जुड़ी सब बातें

नई दिल्ली राष्ट्रपति भवन का प्रसिद्ध अमृत उद्यान इस बार 3 फरवरी से आम जनता के लिए खुलने जा रहा है, जो 31 मार्च 2026 तक खुला रहेगा। अमृत उद्यान को पहले मुगल गार्डन के नाम से जाना जाता था, जो राष्ट्रपति भवन परिसर में 15 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। मूल रूप से इसमें ईस्ट लॉन, सेंट्रल लॉन, लॉन्ग गार्डन और सर्कुलर गार्डन शामिल थे।   क्या टाइमिंग, किस दिन बंद पिकनिक और सैर-सपाटे के शौकीन लोग हफ्ते में 6 दिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक अमृत उद्यान घूमने जा सकते हैं। विजिटर्स के लिए यहां लास्ट एंट्री 5.15 बजे तक ही होगी। उद्यान सोमवार को बंद रहेगा, जो रखरखाव का दिन है और 4 मार्च को होली के दिन भी यह बंद रहेगा। यहां कर सकेंगे बुकिंग राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सभी विजिटर्स के लिए गार्डन में एंट्री और इसकी बुकिंग पूरी तरह से फ्री है। बुकिंग राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक वेबसाइट https://visit.rashtrapatibhavan.gov.in/ पर की जा सकती है। वहीं, बिना प्री-बुकिंग के आने वाले वॉक-इन विजिटर्स के लिए एंट्री पॉइंट के पास सेल्फ-सर्विस विजिटर्स रजिस्ट्रेशन कियोस्क उपलब्ध होंगे। कौन सा होगा नजदीकी मेट्रो स्टेशन सभी विजिटर्स के लिए एंट्री और एग्जिट राष्ट्रपति एस्टेट के गेट नंबर 35 से होगा, जो नॉर्थ एवेन्यू और राष्ट्रपति भवन के पास है। विजिटर्स की सुविधा के लिए, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशन से गेट नंबर 35 तक हर 30 मिनट में सुबह 9.30 बजे से शाम 6.00 बजे तक शटल बस सेवा उपलब्ध होगी। शटल बसों को 'अमृत उद्यान के लिए शटल सेवा' बैनर से पहचाना जा सकता है। विजिटर्स के लिए कई तरह की सेवाएं उपलब्ध यहां विजिटर्स के लिए कई तरह की सर्विसेज उपबब्ध हैं, जिनमें यादगार चीजों की दुकानें, एक फूड कोर्ट, सुविधा के लिए व्हीलचेयर, पार्किंग और भी बहुत कुछ शामिल है, जिससे की यात्रा को और भी रोमांचक और यादगार बनाया जा सके। इस बार अमृत उद्यान में आने वाले लोग बैबलिंग ब्रूक देख सकेंगे, जिसमें एक घुमावदार धारा, मूर्तियों वाले फव्वारे, पत्थर के रास्ते और एक रिफ्लेक्टिंग पूल शामिल है। विजिटर यहां कई आकर्षणों में समय बिता सकते हैं, जैसे बच्चों के लिए खास तौर पर बनाया गया बाल वाटिका गार्डन जिसमें 225 साल पुराने शीशम के पेड़ की कहानी है, एक ट्रीहाउस, नेचर क्लासरूम वगैरह शामिल हैं। इसके साथ ही बोनसाई, सर्कुलर गार्डन हैं जिनमें तरह-तरह के पेड़-पौधे और जीव-जंतु हैं।  

जब पाकिस्तान बना गणतंत्र दिवस परेड का मुख्य अतिथि: दो बार की अनोखी घटना

नई दिल्ली भारत के गणतंत्र दिवस परेड में पाकिस्तान के मुख्य अतिथि बनने की घटना इतिहास में 2 बार दर्ज है, जो दोनों देशों के बीच उस समय के कूटनीतिक प्रयासों को दर्शाती है। पहली बार जनवरी 1955 में पाकिस्तान के गवर्नर जनरल सर मलिक गुलाम मुहम्मद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। यह वह साल था जब परेड राजपथ (अब कर्तव्य पथ) पर आयोजित की गई थी। जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें आमंत्रित किया था, ताकि 1947 के विभाजन और कश्मीर युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच तनाव कम हो सके और सुलह की कोशिश की जा सके।   गुलाम मुहम्मद पूर्व भारतीय सिविल सेवा अधिकारी थे, जिन्हें ब्रिटिश सरकार ने 1946 में नाइट की उपाधि दी थी। पाकिस्तान में उन्होंने प्रधानमंत्री ख्वाजा नाजिमुद्दीन की सरकार बर्खास्त की और संविधान सभा को भंग कर दिया था, जिससे वहां संवैधानिक व्यवस्था कमजोर हुई। फिर भी भारत ने इस निमंत्रण को प्रतीकात्मक कदम माना। इसके 10 साल बाद, जनवरी 1965 में पाकिस्तान के खाद्य एवं कृषि मंत्री राणा अब्दुल हमीद मुख्य अतिथि बने। यह निमंत्रण लाल बहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्री काल में दिया गया था। राना अब्दुल हमीद सिंध के प्रभावशाली राणा परिवार से थे, जिनकी जड़ें हिंदू सोडा राजपूतों से जुड़ी थीं। उस समय दोनों देश सैन्य क्षमता का आकलन कर रहे थे और संबंध सुधारने की कोशिशें हो रही थीं। निमंत्रण के बावजूद कराई घुसपैठ, छिड़ी बहस भारत ने इसे विश्वास बहाली का माध्यम माना, लेकिन कुछ महीनों बाद अप्रैल 1965 में पाकिस्तान ने रण ऑफ कच्छ में ऑपरेशन डेजर्ट हॉक शुरू कर सीमा पर घुसपैठ की। ब्रिटेन की मध्यस्थता से जून में युद्धविराम हुआ, लेकिन अगस्त में ऑपरेशन जिब्राल्टर के तहत पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में घुसपैठिए भेजे, जिससे सितंबर 1965 में युद्ध छिड़ गया। ऐसे में इन निमंत्रणों पर भारत में बहस हुई। कांग्रेस नेता बी.जी. खेर ने इसे बातचीत का सॉफ्ट ब्रिज बताया, जबकि सी. राजगोपालाचारी जैसे लोगों ने सावधानी बरतने की सलाह दी। कुछ का मानना था कि इससे भारत की संप्रभुता पर असर पड़ सकता है। समाचार पत्रों ने इसे शिष्टाचार का कदम माना, लेकिन जनता में सीमा विवादों को लेकर चिंता थी। ये घटनाएं उस दौर की हैं जब दोनों देशों के बीच प्रतीकात्मक कदम संघर्ष रोकने की कोशिश थे।