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कुछ बड़ा होने की आशंका: भारत ने बांग्लादेश से अपने राजनयिकों के परिवारों को सुरक्षित वापस लाया

नई दिल्ली भारत और बांग्लादेश के बीच मौजूदा संबंधों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। यही वजह है कि भारत लगातार सतर्कता के साथ तेज निर्णय ले रहा है। माना जा रहा है कि बांग्लादेश में बड़े राजनीतिक बदलाव की आशंका को देखते हुए भारत ने अग्रिम तैयारी शुरू कर दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। दरअसल, बांग्लादेश में अब चुनाव महज कुछ दिनों की दूरी पर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने चुनाव टालने की कोशिश की और कट्टरपंथी ताकतों को भारत-विरोधी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास किया, ताकि चीन और पाकिस्तान के साथ संबंधों को और मजबूत किया जा सके। लेकिन ये कोशिशें नाकाम रहीं। इसी बीच भारत ने एक अहम और चौंकाने वाला फैसला लिया है। भारत ने बांग्लादेश को नॉन-फैमिली स्टेशन घोषित कर दिया है। इसका मतलब है कि बांग्लादेश में तैनात भारतीय राजनयिकों और अधिकारियों को अब अपने परिवार (पति-पत्नी या बच्चे) को साथ रखने की अनुमति नहीं होगी। पहले यह कैटेगरी सिर्फ इराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दक्षिण सूडान जैसे देशों के लिए थी। अब बांग्लादेश भी इस सूची में शामिल हो गया है। बताया जा रहा है कि भारतीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए कि उनके परिवारजन 8 जनवरी तक भारत लौट आएं। स्कूल जाने वाले बच्चों वाले परिवारों को 7 दिन की अतिरिक्त छूट दी गई। इस फैसले के अनुसार, 15 जनवरी तक ढाका समेत अन्य जगहों पर पोस्टेड राजनयिकों के अधिकांश परिवार भारत वापस लौट चुके हैं। हालांकि अभी तक विदेश मंत्रालय ने इस फैसले की कोई आधिकारिक सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह कदम खुफिया रिपोर्ट्स और सुरक्षा आकलन के आधार पर उठाया गया है। यही कारण है कि देश दुनिया में इस फैसले की चर्चा हो रही है।

साधु पर हमला हिमाचल में: जटाएं और दाढ़ी काटने के आरोप में 3 के खिलाफ FIR

हिमाचल हिमाचल के संगड़ाह क्षेत्र में धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर प्रहार का एक गंभीर मामला सामने आया है। गांव लगनू में रहने वाले नागा साधु प्रवेश गिरी ने आरोप लगाया है कि स्थानीय पंचायत उप-प्रधान और अन्य ग्रामीणों ने उनके साथ मारपीट की और उनकी धार्मिक पहचान (जटाएं और दाढ़ी) को जबरन काट दिया। घटना का मुख्य विवरणतारीख: यह घटना 15 जनवरी की बताई जा रही है, जिसका वीडियो अब वायरल हुआ है।आरोपी: पंचायत उप-प्रधान सत्तपाल तोमर, स्थानीय निवासी लेखराम और सुरेश के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज की गई है।आरोपियों का तर्क: ग्रामीणों का आरोप है कि साधु शराब पीकर गांव में हंगामा करता था, हालांकि कानूनन किसी की धार्मिक पहचान को नुकसान पहुंचाना अपराध है। पुलिस की कार्रवाई और धाराएं पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है:धारा 299: धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करना।धारा 122(2): आपराधिक धमकी और बल प्रयोग।धारा 392(2): शारीरिक हिंसा और गंभीर आपराधिक कृत्य।धारा 3(5): सामूहिक रूप से अपराध को अंजाम देना। साधु का नया बयान: "धमकियां मिल रही हैं" पीड़ित नागा साधु ने एक नया वीडियो जारी कर आरोप लगाया है कि उन पर FIR वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उप-प्रधान ने उन पर झूठा केस दर्ज करवाया है और उन्हें जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने इसे 'सनातन धर्म का अपमान' करार दिया है। मामले के प्रमुख बिंदुपक्षविवरणपीड़ितनागा साधु प्रवेश गिरी (पिछले 4-5 साल से गांव में रह रहे थे) मुख्य आरोपीसत्तपाल तोमर (पंचायत उप-प्रधान)विवाद का कारणग्रामीणों द्वारा साधु के व्यवहार पर आपत्ति, साधु द्वारा धार्मिक प्रताड़ना का आरोप कानूनी स्थितिसंगड़ाह थाना में FIR दर्ज, पुलिस साक्ष्य (वीडियो) की जांच कर रही है। धार्मिक महत्व: नागा साधुओं के लिए उनकी जटाएं और दाढ़ी केवल बाल नहीं, बल्कि उनके संन्यास और साधना का प्रतीक होती हैं। इस कृत्य को कानून और समाज दोनों में धार्मिक असहिष्णुता के रूप में देखा जा रहा है।

याचिकाकर्ता पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी प्रतिक्रिया, असामान्य तर्क पर उठाए सवाल

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को लावारिस कुत्तों के मामले पर सुनवाई हुई। इस दौरान एक याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उनके इलाके में बहुत सारे लावारिस कुत्ते हैं, जो पूरी रात एक-दूसरे का पीछा करते रहते हैं, भौंकते हैं, जिससे उन्हें नींद नहीं आती और उनके बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते। याचिकाकर्ता ने इस मामले में अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन उनका कहना कि वे केवल वैक्सीनेशन और स्टरलाइजेशन कर सकते हैं। एनएचआरसी को भी भी पत्र लिखा, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स (एबीसी नियम) केवल एक खास दायरे में काम करते हैं। कुत्तों को स्टरलाइजेशन या वैक्सीनेशन के बाद फिर से छोड़ दिया जाता है। एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कहा कि दुनियाभर में यह स्वीकार किया जाता है कि लावारिस कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए प्रभावी नसबंदी व्यवस्था जरूरी है। जयपुर और गोवा जैसी जगहों में यह सिस्टम सफल रहा है, लेकिन ज्यादातर शहरों में स्टरलाइजेशन प्रभावी नहीं हो पा रहा। स्टरलाइजेशन से कुत्तों की आक्रामकता कम होती है, लेकिन समस्या यह है कि कई शहरों में सही ढंग से यह नहीं हो रहा। इसे बेहतर बनाने के लिए पारदर्शिता लानी होगी और लोगों को जवाबदेह बनाना होगा। एक ऐसा सिस्टम होना चाहिए जहां लोग उन लावारिस कुत्तों की रिपोर्ट कर सकें जिनका स्टरलाइजेशन नहीं हुआ है। इसे किसी वेबसाइट पर दर्ज किया जाए और कोई विशेष अथॉरिटी हो जो ऐसी शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करे। प्रशांत भूषण के इस सुझाव पर जस्टिस संदीप मेहता ने टिप्पणी की कि हम कुत्तों से खुद सर्टिफिकेट लेकर चलने को क्यों नहीं कह सकते। प्रशांत भूषण ने कहा कि कोर्ट की कुछ टिप्पणियां गलत संदेश दे सकती हैं। उदाहरण के लिए इसी कोर्ट ने कहा था कि कुत्तों के काटने के लिए फीडर्स को जिम्मेदार ठहराया जाए, जो शायद व्यंग्य था। जस्टिस विक्रम नाथ ने स्पष्ट किया कि यह व्यंग्य में नहीं कहा गया था, बल्कि बहुत गंभीरता से कहा गया था। इसके अलावा, एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट और पूर्व केंद्रीय मंत्री द्वारा इस मामले पर किए गए पॉडकास्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने पूर्व मंत्री की तरफ से पेश हुए वकील राजू रामचंद्रन से कहा कि थोड़ी देर पहले आप कोर्ट से टिप्पणियों को लेकर सावधान रहने की बात कर रहे थे। क्या आपको पता है कि आपके क्लाइंट किस तरह की बातें कर रही हैं? आपके क्लाइंट ने कोर्ट की अवमानना की है। हम उस पर ध्यान नहीं दे रहे, यह हमारी दरियादिली है। क्या आपने उनका पॉडकास्ट सुना है? उनकी बॉडी लैंग्वेज कैसी है? वह क्या कहती हैं और कैसे कहती हैं। आपने टिप्पणी की कि कोर्ट को सावधान रहना चाहिए, लेकिन दूसरी ओर आपकी क्लाइंट जिसे चाहे और जिसके बारे में चाहे, हर तरह की टिप्पणियां कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में मानव सुरक्षा, एबीसी नियमों के क्रियान्वयन और जानवरों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाने पर विचार कर रहा है। सुनवाई आगे जारी रहेगी।

रूस की कड़ी टिप्पणी: ग्रीनलैंड पर डेनमार्क का दावा सही नहीं

मास्को रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ग्रीनलैंड को डेनमार्क का प्राकृतिक हिस्सा मानने से इनकार किया है। इसके साथ ही एक प्रेस वार्ता में लावरोव ने दावा किया कि रूस किसी के अधिकार को चुनौती नहीं देता लेकिन खुद को भी नजरअंदाज करने की अनुमति नहीं दे सकता। रूसी डिप्लोमेसी के 2025 के परिणामों पर आयोजित कॉन्फ्रेंस में लावरोव ने पश्चिम के भीतर "संकट की प्रवृत्तियों" के बारे में बात की, जिसमें ग्रीनलैंड इसका नवीनतम उदाहरण है, क्योंकि यह नाटो के भीतर भी बहुत ज्यादा तनाव पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा, “पिछले एक दशक से पश्चिमी देश अंतरराष्ट्रीय कानून के मूल स्वरूप का सक्रिय रूप से विरोध कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि रूस ग्रीनलैंड के आसपास की "गंभीर भू-राजनीतिक स्थिति" पर नजर रख रहा है। लावरोव ने आगे कहा कि रूस, ग्रीनलैंड के मामलों में दखल देने में दिलचस्पी नहीं रखता है और वाशिंगटन जानता है कि रूस की ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके विचार से ग्रीनलैंड डेनमार्क का प्राकृतिक हिस्सा नहीं है। लावरोव के अनुसार, "यह न तो नॉर्वे का प्राकृतिक हिस्सा था और न ही डेनमार्क का। यह एक औपनिवेशिक जीत का हिस्सा है। यह दूसरी बात है कि अब वहां के लोग इसके आदी हो गए हैं और सहज महसूस करते हैं।" इसके साथ ही उन्होंने रूस की ताकत पर बात की और चुनौती भरे अंदाज में कहा कि रूस किसी को भी अपने कानूनी अधिकारों की अनदेखी नहीं करने देगा। उन्होंने कहा, "रूस हमेशा अपने हितों की रक्षा करेगा, किसी के भी कानूनी अधिकारों को चुनौती नहीं देगा, लेकिन वह अपने कानूनी अधिकारों को भी हल्के में नहीं लेने देगा।" यूरोपीय देशों ने कहा है कि ट्रंप की 'ग्रीनलैंड टैरिफ' घोषणा पिछले साल उनके प्रशासन के साथ हुए ट्रेड डील का उल्लंघन होगी। ईयू नेता गुरुवार को ब्रसेल्स में एक आपातकालीन सम्मेलन में संभावित जवाबी कार्रवाई पर चर्चा करेंगे।

ईरान में तनाव बढ़ा, प्रदर्शनकारियों पर शुरू हुई सख्त कार्रवाई

ईरान ईरान में दिसंबर के अंत से शुरू हुए व्यापक जनप्रदर्शन  के बीच सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। ईरान के पुलिस प्रमुख अहमद-रेजा रादान ने ‘दंगाइयों’ को तीन दिन के भीतर आत्मसमर्पण करने का अल्टीमेटम जारी किया है। पुलिस प्रमुख ने सरकारी टीवी पर कहा कि जो युवा “भ्रमित होकर” प्रदर्शनों में शामिल हुए, वे यदि सरेंडर कर दें तो उनके साथ नरमी बरती जाएगी। लेकिन चेतावनी दी गई है कि तय समय में आत्मसमर्पण न करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।   बीते साल के अंत में शुरू हुए ये प्रदर्शन बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी और ईरानी मुद्रा के तेज़ अवमूल्यन के खिलाफ थे। लेकिन जल्द ही ये आंदोलन सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की सत्ता को चुनौती देने वाली मांगों में बदल गए। इसे हाल के वर्षों में ईरानी शासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि शुरुआत में शांतिपूर्ण रहे प्रदर्शन बाद में हिंसक हो गए और इसके पीछे अमेरिका व इजरायल जैसे ईरान-विरोधी देशों की साजिश थी। इसी बीच, ईरान ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर दीं और अंतरराष्ट्रीय कॉल्स पर भी रोक लगा दी, जिससे वास्तविक हालात की जानकारी बाहर नहीं आ सकी।   अधिकारियों का कहना है कि इंटरनेट धीरे-धीरे बहाल किया जाएगा। सोमवार को कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के प्रमुखों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि वे “जीविका और आर्थिक समस्याओं के समाधान के लिए दिन-रात काम करेंगे।” राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ और न्यायपालिका प्रमुख घोलामहुसैन मोहसिनी एजई ने हिंसा भड़काने वालों को कड़ी सजा देने की बात दोहराई। इस बीच, मानवाधिकार संगठनों ने हालात पर गंभीर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि ईरान मौत की सजा को डराने के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। UN के मुताबिक, चीन के बाद ईरान दुनिया में सबसे ज्यादा फांसी देने वाला देश है और पिछले साल करीब 1,500 लोगों को फांसी दी गई। ईरान ह्यूमन राइट्स नामक एनजीओ का दावा है कि सुरक्षाबलों की कार्रवाई में अब तक 3,428 प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है, जबकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। वहीं, सरकार ने करीब 3,000 गिरफ्तारियों की बात कही है, लेकिन मानवाधिकार समूहों के अनुसार यह आंकड़ा 20,000 तक पहुंच सकता है।

भारत दौरे से बौखलाया पाकिस्तान, UAE और सऊदी में चालें तेज

इस्लामाबाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (MBZ) के दिल्ली दौरे के बाद पाकिस्तान में हलचल तेज हो गई है। भारत–यूएई के संयुक्त बयान में सीमा-पार आतंकवाद की आलोचना को इस्लामाबाद के लिए कूटनीतिक झटका माना जा रहा है। पाकिस्तान में इस पर व्यापक चर्चा हो रही है। MBZ का यह संक्षिप्त, लगभग तीन घंटे का दिल्ली दौरा रणनीतिक रूप से अहम बताया जा रहा है। इसी दौरान भारत और यूएई ने रक्षा सहयोग, डिफेंस टेक्नोलॉजी और रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के संकेत दिए। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पश्चिम एशिया में बदलते समीकरणों के बीच भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। इसी पृष्ठभूमि में, यूएई राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के तुरंत बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान को फोन किया। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बातचीत की पुष्टि करते हुए ‘ताजा घटनाक्रम और आपसी हितों’ पर चर्चा की बात कही, हालांकि विवरण साझा नहीं किया। भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि भारत–यूएई की बढ़ती नजदीकी पाकिस्तान को असहज कर रही है।   अमेरिका स्थित विश्लेषक डेरेक जे. ग्रॉसमैन के मुताबिक, इस फोन कॉल को भारत–यूएई रिश्तों से उपजी पाकिस्तान की चिंता के संकेत के रूप में देखा जा सकता है। विशेषज्ञ यह भी इंगित करते हैं कि क्षेत्र में सऊदी अरब और यूएई के बीच संबंधों में उतार-चढ़ाव के बीच यूएई भरोसेमंद साझेदारों की तलाश में है, जहां भारत एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरता दिख रहा है। इसी कारण दिल्ली–आबूधाबी रक्षा सहयोग को पाकिस्तान अपनी रणनीति के लिए चुनौती के रूप में देख रहा है।

पहली बार इस्लामिक स्टेट के रडार पर चीन, जानिए आतंकियों की खुली चेतावनी का कारण

नई दिल्ली अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में आतंकी हमले की इस्लामिक स्टेट ने जिम्मेदारी ली है। आतंकी संगठन के इस हमले में एक चीनी नागरिक समेत 7 लोगों की मौत हुई है। इस घटना की फिलहाल जांच हो रही है, लेकिन इस्लामिक स्टेट ने चीनी रेस्तरां को ही टारगेट करने की वजह बताई है। आतंकी संगठन ने अपनी ऑनलाइन दावा किया है कि उसने चीन में उइगुर मुसलमानों पर होने वाले अत्याचारों के चलते यह हमला किया है। इसी कारण उसने चीनी रेस्तरां को ही टारगेट किया ताकि किसी चीनी को भी नुकसान हो। यही नहीं इस्लामिक स्टेट ने दावा किया है कि इस हमले में कम से कम 25 लोग मारे गए हैं या घायल हुए हैं।   इस्लामिक स्टेट का कहना है कि इस हमले में तालिबान के कई कमांडर भी मारे गए हैं। हालांकि उसके इस दावे की स्वतंत्र तौर पर पुष्टि नहीं की जा सकती। अफगानिस्तान के प्रशासन ने अब तक इस धमाके की वजह नहीं बताई और अब तक इसे आतंकी हमला भी नहीं कहा है। तालिबान के होम मिनिस्टर मुफ्ती अब्दुल मतीन कानी ने कहा कि अभी इस धमाके की जांच की जा रही है। वहीं इस्लामिक स्टेट का जो दावा है, उसे चीनी नागरिकों के लिए भविष्य में भी एक खतरे के तौर पर देखा जा रहा है। अफगानिस्तान में चीन के भी कुछ लोगों की मौजूदगी है। ऐसे में उइगुर मुसलमानों के नाम पर इस्लामिक स्टेट का यह बयान उसे धमकाने वाला लग रहा है। बता दें कि उइगुर मुसलमानों पर अत्याचार के नाम पर पाकिस्तान समेत ज्यादातर मुसलमान देशों की चुप्पी रहती है। वहीं इस्लामिक स्टेट ने इसे चीनी नागरिकों पर हमले की वजह बताया है। उसका यह कबूलनामा निश्चित तौर पर चीन के लिए चिंता की बात है। 2021 में अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान की वापसी हुई थी। तभी दुनिया के तमाम देशों ने अफगानिस्तान से एग्जिट कर लिया था। लेकिन चीन के अब भी कई आर्थिक प्रोजेक्ट अफगानिस्तान में चल रहे हैं। यह हमला काबुल के शहर-ए-नाव जिले के एक चीनी रेस्तरां में हुआ। पुलिस के प्रवक्ता खालिद जदरान ने कहा कि यह रेस्तरां एक अफगानी नागरिक द्वारा ही चल रहा था, जिसमें चीन का एक शख्स और उसकी पत्नी पार्टनर हैं। किसने कही 20 लोगों के मारे जाने की बात आमतौर पर इस रेस्तरां में चीनी लोगों की मौजूदगी रहती है। इसी को देखते हुए इस्लामिक स्टेट ने रेस्तरां को टारगेट कर दिया। जदरान का कहना है कि इस धमाके में कुल 7 लोग मारे गए हैं, जिनमें एक चीनी नागरिक भी है। यह धमाका रेस्तरां के किचन में हुआ। हमले वाली जगह के पास ही एक सर्जिकल सेंटर चलाने वाली इटालियन चैरिटी का कहना है कि उसके पास 20 लोगों के मरने की जानकारी है। इनमें से 7 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं चीनी सरकारी मीडिया CCTV की रिपोर्ट के अनुसार हमले में दो चीनी नागरिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके अलावा एक सिक्योरिटी गार्ड मारा गया है। वहीं टोलो न्यूज की एक फुटेज में दिखाया गया है कि धमाके के बाद लोग यहां-वहां भाग रहे हैं।  

उत्तराखंड: लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले 68 जोड़े हुए रजिस्टर्ड, सामने आए नवीनतम आंकड़े

उत्तराखंड उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू हुए एक साल पूरे होने को हैं. 27 जनवरी को यूसीसी लागू हुए एक साल पूरे हो जाएंगे. उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया काफी आसान हो गई है. यूसीसी लागू होने के बाद से सूबे में 4 लाख 74 हजार 447 शादियों का पंजीकरण हो चुका है. उत्तराखंड सरकार ने यह जानकारी दी है. यूसीसी लागू होने के बाद अब दंपति कहीं से भी ऑनलाइन विवाह का पंजीकरण करा सकते हैं. पुराने कानून के तहत शादी का पंजीकरण कराने के लिए दंपति को तय तारीख पर दो गवाहों के साथ उप निबंधक कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ता था. यूसीसी लागू होने से पहले सूबे में शादियों का पंजीकरण ‘उत्तराखंड अनिवार्य विवाह पंजीकरण अधिनियम, 2010’ के तहत किया जाता था. पुराने कानून के तहत शादियों के रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया ऑफलाइन थी. उत्तराखंड सरकार से मिली जानकारी के मुताबिक सूबे में हर रोज औसतन 1400 शादियों का रजिस्ट्रेशन हो रहा है. पुराने कानून से रजिस्ट्रेशन का औसत प्रतिदिन 67 शादियों का था. यूसीसी लागू होने के बाद से सूबे में 316 लोगों ने ऑनलाइन तलाक प्रमाणपत्र भी प्राप्त किए हैं.   लिव इन रिलेशनशिप में रहने के लिए भी 68 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराए हैं. दो लोगों ने लिव इन रिलेशनशिप समाप्त करने का प्रमाण पत्र भी लिया है. उत्तराखंड सरकार का दावा है कि विवाह पंजीकरण के आवेदन औसतन पांच दिन के भीतर जारी कर दिए जा रहे हैं. हालांकि, इसके लिए समय सीमा 15 दिन की निर्धारित की गई है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि उत्तराखंड ने यूसीसी लागू कर अन्य राज्यों को रास्ता दिखाया है. उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में जिस पारदर्शिता और सरलता के साथ यूसीसी के प्रावधानों को लागू किया गया है, उससे पूरी प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा बढ़ा है. सीएम धामी ने कहा कि इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग अब यूसीसी के तहत पंजीकरण करा रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि उत्तराखंड की यूसीसी हर दृष्टि से एक आदर्श कानून साबित हुआ है.

किश्तवाड़ में आतंकी ठिकाना उजागर, मैगी से लेकर बासमती चावल तक का बड़ा जखीरा बरामद

किश्तवाड़ जम्मू कश्मीर में किश्तवाड़ जिले के ऊपरी इलाकों में आतंकवादियों का पता लगाने के लिए तलाशी अभियान जारी है। तीसरे दिन मंगलवार को सुरक्षा बलों ने कई लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। चतरू क्षेत्र के मन्द्राल-सिंहपुरा के पास सोनार गांव में रविवार को अभियान शुरू किया गया था। इस बीच, मुठभेड़ में एक पैराट्रूपर शहीद हो गया और छिपे हुए आतंकवादियों की ओर से अचानक किए गए ग्रेनेड हमले से 7 अन्य घायल हो गए। आतंकवादी घने जंगल में भाग गए, लेकिन खाने-पीने की चीजें, कंबल और बर्तनों सहित बड़ी मात्रा में सर्दियों के सामान से भरे उनके ठिकाने का भंडाफोड़ किया गया है।   ध्वस्त ठिकाने से बरामद सामग्रियों से आतंकवादियों की सर्दियों में जीवित रहने की प्लानिंग का पता चलता है। यहां से मैगी के 50 पैकेट, टमाटर व आलू जैसी ताजी सब्जियां, 15 प्रकार के मसाले, 20 किलो बासमती चावल, अनाज, खाना पकाने की गैस और सूखी लकड़ी मिली है। अधिकारियों ने बताया कि 12,000 फुट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित गुप्त ठिकाने का भंडाफोड़ करने के संबंध में सोमवार दोपहर कई व्यक्तियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। सुरक्षा बल आतंकवादियों के उन मददगारों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं जिन्होंने उनकी बड़ी मात्रा में राशन, दाल, बर्तन और अन्य आवश्यक सामग्री जुटाने में मदद की। ये सामग्री सर्दियों के महीनों में कम से कम 4 लोगों के लिए पर्याप्त थी। 2-3 आतंकियों के छिपे होने की आशंका सेना की व्हाइट नाइट कोर ने एक्स पर पोस्ट करके बताया कि चतरू में ऑपरेशन त्राशी-1 जारी है। सेना ने कहा, ‘घेराबंदी और कड़ी कर दी गई है और तलाशी अभियान का दायरा बढ़ा दिया गया है।’ माना जा रहा है कि पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद से कथित तौर पर जुड़े दो से तीन आतंकवादियों का समूह इलाके में है। जम्मू जोन के पुलिस महानिरीक्षक भीम सेन तुती और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जम्मू महानिरीक्षक आर. गोपाल कृष्ण राव सहित वरिष्ठ अधिकारी भी मुठभेड़ स्थल पर पहुंच गए। वे अभियान की निगरानी के लिए वर्तमान में कई सेना अधिकारियों के साथ वहीं डेरा डाले हुए हैं। इसी बीच, शहीद हुए विशेष बल कमांडो हवलदार गजेंद्र सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए जम्मू में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। अधिकारियों ने बताया कि शहीद कमांडो को श्रद्धांजलि देने के लिए सतवारी में कार्यक्रम का नेतृत्व व्हाइट नाइट कोर के कार्यवाहक चीफ ऑफ स्टाफ ब्रिगेडियर युद्धवीर सिंह सेखों ने किया। बाद में, शहीद कमांडो के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए उनके गृह क्षेत्र उत्तराखंड ले जाया गया।  

मोबाइल बना राज़ों का पिटारा: रूसी सीरियल किलर के फोन में 100+ महिलाओं की फोटोज

गोवा गोवा से सनसनीखेज और खौफनाक मामला सामने आया है। यहां रूसी फायर परफॉर्मर एलेक्सी लियोनोव (37 वर्ष) पर दो रूसी महिलाओं की बेरहमी से हत्या का आरोप लगा है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है, और जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। दरअसल, यह मामला जनवरी 2026 की शुरुआत में सामने आया, जब नॉर्थ गोवा के अरंबोल और मोरजिम इलाकों में दो अलग-अलग कमरों से दो रूसी महिलाओं ( एलेना कास्थानोवा (37, गो-गो डांसर) और एलेना वेनीवा (37, बबल आर्टिस्ट)) के शव मिले। दोनों का गला रेता गया था, हाथ रस्सी से बंधे थे, और मौत का तरीका एक जैसा था। पुलिस के अनुसार, एलेक्सी के फोन से 100 से अधिक महिलाओं और दो पुरुषों की तस्वीरें बरामद हुई हैं। फिलहाल मामले की जांच चल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी नागरिक एलेक्सी लियोनोव ने उधार लिए गए पैसों और उधार लिए गए 'रबर के मुकुट' (फायर परफॉर्मेंस के लिए इस्तेमाल होने वाला रबर का क्राउन) को लेकर गोवा में अपनी दो महिला मित्रों की हत्या कर दी। पुलिस के अनुसार, दोनों महिलाएं रूसी नागरिक थीं और आरोपी की दोस्त थीं। इनमें से एक एलेना कास्थानोवा ने आरोपी से कुछ पैसे और एक मुकुट उधार लिया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, दूसरी महिला ने भी पैसे उधार लिए थे। हालांकि, दोनों पीड़ित महिलाएं एलेक्सी को पैसे और मुकुट वापस नहीं कर पाईं। इससे गुस्साए आरोपी ने 14 और 15 जनवरी को दो अलग-अलग दिनों में उनके कमरों में जाकर उनका गला काट दिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, ये हत्याएं पूर्व नियोजित नहीं थीं, बल्कि उत्तेजना में की गई हत्याएं थीं। उन्होंने यह भी कहा कि एलेक्सी अत्यधिक जुनूनी था और तुरंत भड़क जाता था। फिलहाल पुलिस जांच कर रही है कि घटना के समय आरोपी नशे की हालत में था या नहीं। सीरियल किलर? गोवा पुलिस सूत्रों ने बताया कि आरोपी ने दावा किया है कि उसने पांच और लोगों की हत्या की है, जिनसे उसका विवाद था, और उसने उनके नाम भी बताए। लेकिन पुलिस जांच में पता चला कि उसके द्वारा बताए गए सभी पांच लोग जीवित हैं। सूत्रों के अनुसार, एलेक्सी मानसिक रूप से बीमार है और हमेशा नशे में रहता है। इतना ही नहीं, जांच में गोवा पुलिस को आरोपी के फोन में 100 से अधिक महिलाओं और दो पुरुषों की तस्वीरें मिली हैं। पुलिस के अनुसार, वह लोगों से जल्दी चिढ़ जाता था, लेकिन उनसे तुरंत दोस्ती भी कर लेता था। पहले भी गोवा में कुछ पुरुषों के साथ मारपीट के मामलों में वह शामिल रहा है, लेकिन उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं हुआ था। असम की महिला की हत्या से क्या संबंध है? पुलिस गोवा में तीसरी महिला, असम निवासी मृदुस्मिता सैंकिया ( 40 ) की हत्या से एलेक्सी के संबंध की जांच कर रही है। उनका शव 12 जनवरी को उनके घर में मिला था। बताया जा रहा है कि महिला और एलेक्सी एक-दूसरे को लंबे समय से जानते थे और अक्सर साथ गोवा आते थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों 11 जनवरी को साथ थे, यानी मौत से एक दिन पहले। शुरुआती जांच के अनुसार, महिला की मौत ड्रग ओवरडोज के कारण हुई थी, लेकिन आरोपी ने दावा किया है कि उसने उसे ड्रग्स देकर मारा। फिलहाल पुलिस इसकी पुष्टि पोस्टमॉर्टम और अन्य सबूतों से कर रही है।