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UGC Equity नियमों की सिफारिश किस समिति ने की? दिग्विजय सिंह की कमेटी और उसके 29 सांसद सदस्य

नई दिल्ली विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी की है, जिसके मुताबिक सभी यूनिवर्सिटीज, कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों को अपने संस्थानों के अंदर एक इक्विटी कमेटी बनानी होगी। ये कमेटी उस संस्थान के अंदर SC/ST या OBC कैटगरी के छात्रों, शिक्षकों या गैर शिक्षण कर्मियों के साथ होने वाले भेदभाव से जुड़ी शिकायतें सुनेंगी और तय समय-सीमा में उसका निपटारा करेगी। देश भर का सवर्ण समाज UGC के इस नियम का विरोध कर रहा है। बड़ी बात यह है कि जिस संसदीय समिति की सिफारिश पर UGC ने यह कानून बनाया है, उसके अध्यक्ष कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह है। उनके साथ इस समिति में कुल 30 सदस्य हैं जो संसद के दोनों सदनों के सदस्य हैं। इनमें कई भाजपा के सांसद हैं और सवर्ण समाज से आते हैं।   दरअसल, यह सिफारिश शिक्षा, महि्ला, बच्चों, युवा और खेल पर संसद की स्थाई समिति ने की है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह इस समिति के अध्यक्ष हैं। इस समिति में 21 लोकसभा और 9 राज्यसभा के सांसद हैं। कुछ नाम तो चौंकाने वाले हैं। दलगत संख्या और प्रतिनिधित्व की बात करें तो इस समिति में भाजपा के 16, कांग्रेस के 4, समाजवादी पार्टी के 3, तृणमूल के 2, सीपीएम के 1, डीएमके के 1, एनसीपी (अजीत गुट) के 1, एनसीपी (शरद गुट) के 1 और आम आदमी पार्टी की 1 पूर्व सदस्य हैं। इसे यूं कहें तो इस समिति में सत्ताधारी भाजपा के सदस्यों की संख्या 50 फीसदी से अधिक है। समिति के सदस्यों में कौन-कौन? संसद की वेबसाइट पर उपलब्ध नामों के मुताबिक इस समिति में राज्यसभा से दिग्विजय सिंह के अलावा भीम सिंह (भाजपा नेता, बिहार से राज्यसभा के सांसद) बिकास रंजन भट्टाचार्य (CPM नेता और पश्चिम बंगाल से राज्यसभा सांसद), घनश्याम तिवाड़ी(भाजपा नेता, राजस्थान कोटे से राज्यसभा सांसद), रेखा शर्मा (भाजपा नेता और हरियाणा से राज्यसभा सांसद और महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष), सी. सदानंदन मास्टर (केरल भाजपा के उपाध्यक्ष और केरल से राज्यसभा सांसद), सिकंदर कुमार (भाजपा नेता, हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा सांसद), सुनेत्रा पवार (एनसीपी नेता और अजीत पवार की पत्नी, महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद) और स्वाती मालीवाल (AAP की पूर्व नेता और दिल्ली से राज्यसभा सांसद) हैं। लोकसभा से 21 चेहरे कौन-कौन? इस समिति में लोकसभा सांसदों में कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व जज अभिजित गंगोपाध्याय (भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल से सांसद), पूर्व केंद्रीय मंत्री और पटना साहिब से सांसद और भाजपा के कद्दावर नेता रविशंकर प्रसाद, भाजपा नेता, प्रवक्ता और ओडिशा की पुरी सीट से सांसद संबित पात्रा भी हैं। इनके अलावा बांसुरी स्वराज (भाजपा नेता और नई दिल्ली सीट से सांसदष, अमर शरदराव काले (एनसीपी (शरद पवार गुट) नेता), अंगोमचा बिमोल अकोईजाम (कांग्रेस पार्टी के नेता और मणिपुर से सांसद), बृजमोहन अग्रवाल (छत्तीसगढ़ से भाजपा के नेता और रायपुर लोकसभा सीट से सांसद), दग्गुबाती पूरनदेश्वरी(आंध्र प्रदेश में भाजपा की कद्दावर नेता और राजमुंद्र सीट से सांसद) दर्शन सिंह चौधरी (भाजपा नेता और मध्य प्रदेश की होशंगाबाद सीट से सांसद) के नाम भी शामिल हैं।   अन्य चेहरों का हाल इनके अलावा अन्य सांसदों में डीएन कुरियाकोसे(कांग्रेस नेता और केरल की इडुक्की सीट से सांसद) वर्षा एकनाथ गायकवाड़ (कांग्रेस नेता और मुंबई की उत्तर-मध्य सीट से सांसद), हेमांग जोशी (भाजपा नेता और गुजरात की वडोदरा सीट से सांसद), जितेंद्र कुमार दोहरे (समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश की इटावा सीट से सांसद), जियाउर्रहमान बर्क (समाजवादी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश की संभल सीट से सांसद), राजीव राय( समाजवादी पार्टी के नेता, यूपी की घोसी सीट से सांसद), कालिपाड़ा सरेन खेरवाल (तृणमूल कांग्रेस नेता और पश्चिम बंगाल की झारग्राम सीट से सांसद), कामाख्या प्रसाद तासा (भाजपा नेता और असम की काजीरंगा सीट से सांसद), करण भूषण सिंह (भाजपा नेता और उत्तर प्रदेश की कैसरगंज सीट से सांसद), रचना बनर्जी (TMC नेता और पूर्व अभिनेत्री, पश्चिम बंगाल की हुगली सीट से सांसद), शोभनाबेन महेंद्रसिंह बरैया (भाजपा नेता, गुजरात की साबरकांठा सीट से सांसद) और थमिझाची थंगापांडियन उर्फ टी. सुमथि. (तमिलनाडु में डीएमके नेता और चेन्नई दक्षिण सीट से सांसद) के नाम शामिल हैं।  

प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ़: एंटोनियो कोस्टा हैं पुर्तगाल में गांधी, बोले- मुझे गर्व है प्रवासी भारतीय होने पर

नई दिल्ली भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की घोषणा के साथ ही द्विपक्षीय संबंधों में एक नए ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत हो गई है। इस मौके पर यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच न केवल कूटनीतिक बल्कि व्यक्तिगत और भावनात्मक रिश्ते भी देखने को मिले। इस मौके पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी मौजूद थीं।   'भारत से मेरा रिश्ता व्यक्तिगत है': एंटोनियो कोस्टा समझौते की घोषणा के दौरान, यूरोपीय नेता एंटोनियो कोस्टा ने अपनी भारतीय जड़ों को याद करते हुए एक भावुक बयान दिया। उन्होंने गर्व से कहा- 'मैं यूरोपियन काउंसिल का प्रेसिडेंट हूं, लेकिन मैं एक प्रवासी भारतीय नागरिक भी हूं। तो, जैसा कि आप सोच सकते हैं, मेरे लिए इसका एक खास मतलब है।' कोस्टा ने अपने गोवा कनेक्शन का जिक्र करते हुए कहा- 'मुझे अपनी जड़ों पर गर्व है, जहां से मेरे पिता का परिवार आता है। इसलिए, यूरोप और भारत के बीच का कनेक्शन मेरे लिए बहुत पर्सनल है।' उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे भारत के गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनने को अपना सौभाग्य मानते हैं। कोस्टा ने कहा, 'इस खास मौके पर हमारा स्वागत करने के लिए प्यारे प्रधानमंत्री मोदी, आपका धन्यवाद। कल गणतंत्र दिवस समारोह में आपके मुख्य अतिथि बनकर हम सम्मानित महसूस कर रहे थे। भारत की क्षमताओं और विविधता का यह बहुत प्रभावशाली प्रदर्शन था। आज एक ऐतिहासिक क्षण है। हम व्यापार, सुरक्षा और लोगों के बीच संबंधों में अपने रिश्तों में एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं।' पीएम मोदी ने बताया 'पुर्तगाल का गांधी' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एंटोनियो कोस्टा का गर्मजोशी से स्वागत किया। उनके विचारों और सादगी की सराहना करते हुए पीएम मोदी ने उन्हें 'पुर्तगाल का गांधी' कहकर संबोधित किया। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा- मुझे अपने दो करीबी दोस्तों, प्रेसिडेंट कोस्टा और प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन का इस अभूतपूर्व भारत की यात्रा में स्वागत करते हुए बहुत खुशी हो रही है। कोस्टा जी अपनी सलर जीवनशैली और समाज के प्रति प्यार के आधार पर 'लिस्बन के गांधी' के नाम से जाने जाते हैं। प्रेसिडेंट उर्सुला जर्मनी की पहली रक्षा मंत्री ही नहीं, यूरोपीय यूनियन कमीशन की भी पहली महिला अध्यक्ष बनकर पूरी दुनिया के लिए एक प्रेरणा हैं।' कौन हैं एंटोनियो कोस्टा? एंटोनियो कोस्टा पुर्तगाल के पूर्व प्रधानमंत्री (2015-2023) और एक वरिष्ठ यूरोपीय नेता हैं। वर्तमान में वे यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष के रूप में एक महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। कोस्टा का जन्म 1961 में लिस्बन में हुआ था, लेकिन उनका खून भारतीय है। उनके पिता, ओरलैंडो द कोस्टा गोवा के एक प्रसिद्ध लेखक और कवि थे। गोवा में उनके पिता के परिवार के लोग उन्हें प्यार से 'बाबुश' बुलाते हैं, जिसका कोंकणी में अर्थ होता है- छोटा बच्चा या प्यारा लड़का। वे उन गिने-चुने पश्चिमी नेताओं में से हैं जिनके पास OCI कार्ड है। उन्हें 'लिस्बन का गांधी' क्यों कहा जाता है? उन्हें यह उपाधि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2017 में उनकी भारत यात्रा के दौरान दी थी, लेकिन इसके पीछे की वजह उनके लिस्बन के मेयर रहने के दौरान किए गए काम और उनकी जीवनशैली है। गांधीजी की तरह ही कोस्टा को अपनी सादगी के लिए जाना जाता है। जब पुर्तगाल आर्थिक संकट से जूझ रहा था, तब मेयर रहते हुए उन्होंने फिजूलखर्ची कम करने और बहुत ही साधारण जीवन जीने की मिसाल पेश की थी। उन्होंने सरकारी तामझाम से दूर रहकर जनता के बीच काम करना पसंद किया। 'इतेंदेंते' का कायाकल्प – यह सबसे बड़ा कारण है। लिस्बन में 'इतेंदेंते' नाम का एक इलाका था, जो ड्रग्स, वेश्यावृत्ति और अपराध के लिए बदनाम था। लोग वहां जाने से डरते थे। कोस्टा ने वहां पुलिस भेजने के बजाय एक गांधीवादी कदम उठाया। उन्होंने अपना मेयर कार्यालय ही उस बदनाम इलाके में शिफ्ट कर दिया। उनका मानना था कि अगर प्रशासन वहां बैठेगा, तो सुधार अपने आप होगा। यह कदम सफल रहा और वह इलाका लिस्बन का एक सुरक्षित और जीवंत पर्यटन केंद्र बन गया। इस 'हृदय परिवर्तन' वाली नीति ने उन्हें 'गांधी' की छवि दी। उनकी राजनीति को आक्रामक नहीं, बल्कि धैर्यवान और सबको साथ लेकर चलने वाला माना जाता है। यूक्रेन संकट पर पीएम मोदी से मांगी मदद यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा ने कहा- हमारी समिट में, हमने यूक्रेन में एक व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के लिए प्रयासों का समर्थन करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की, जो यूक्रेन की स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का पूरी तरह से सम्मान करती है। यह एक महत्वपूर्ण क्षण है। हम न्यायपूर्ण और स्थायी शांति तक पहुंचने के सभी प्रयासों का समर्थन कर रहे हैं। यूक्रेन ने मुश्किल समझौते की कीमत पर भी अपनी तत्परता दिखाई है। मुझे पता है, प्रिय प्रधानमंत्री कि हम बातचीत और कूटनीति के माध्यम से शांति के लिए स्थितियां बनाने में आपकी मदद पर भरोसा कर सकते हैं…  

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को चेताया: एसिड अटैक पीड़िताओं का रिपोर्ट तुरंत प्रस्तुत करें

नई दिल्ली देश में एसिड अटैक की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी करते हुए इस तरह की घटनाओं का वर्ष वार ब्योरा मांगा है। तेजाब हमले की घटनाओं पर न्यायालय ने राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों से उन मामलों की संख्या बताने को कहा जिनमें आरोपपत्र दायर किए जा चुके हैं। इसके अलावा यह जानकारी भी मांगी है कि कितने मामलों में फैसला हो चुका है और कितने लंबित हैं।   सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों से कहा है कि इसका पूरा विवरण दिया जाए कि एसिड अटैक से जुडडी कितनी अपील दायर की गई हैं। पीड़ियों के ब्यौरे में शैक्षणिक योग्यता, वैवाहिक स्थिति, उपचार, पुनर्वास और मुआवजे की भी पूरी जानकारी मांगी गई है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ऐसे मामलों की भी लिस्ट दी जाए जिसमें किसी पीड़िता को जबरन एसिड पिला दिया गया हो। एक बार सारे आंकड़े सामने आ जाएंगे तो आगे कदम उठाने में आसानी होगी और जल्द से जल्द पीड़ितों को न्याय दिलाने का प्रयास होगा। बता दें कि अदालत में एक एसिड अटैक पीड़िता की अपील पर सुनवाई हो रही थी।  

सियासी संकट गहरा, CM सिद्धारमैया ने राज्यपाल को केंद्र के खिलाफ सुनाई आपत्ति

बेंगलुरु कर्नाटक की राजनीति में ग्रामीण रोजगार को लेकर हंगामा जारी है। मनरेगा (MGNREGA) को हटाने के आरोप में कांग्रेस सरकार और केंद्र सरकार आमने-सामने हैं। बेंगलुरु में राजभवन चलो आंदोलन के दौरान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार मनरेगा को खत्म करके वीबी-जी राम जी (विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण) योजना लागू करना चाहती है, जिससे ग्रामीण गरीबों का रोजगार छिन जाएगा। बाद में कांग्रेस नेताओं ने एक सरकारी बस में सवार होकर लोक भवन (पूर्व में राजभवन) पहुंचे, जहां उन्होंने राज्यपाल थावरचंद गहलोत को ज्ञापन सौंपा।   विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ग्रामीण रोजगार गारंटी की व्यवस्था को खत्म कर रही है और पंचायतों के अधिकारों को कमजोर कर रही है। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि वीबी-जी राम जी में 'राम' शब्द का मतलब दशरथ राम या सीता राम नहीं है। इसका अर्थ है 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)'। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के समय लागू महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, जिसे मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने शुरू किया था, आजीविका और रोजगार का अधिकार देता था। उन्होंने मौजूदा सरकार पर इसे नष्ट करने का आरोप लगाया। सिद्धारमैया ने आगे आरोप लगाया कि एमजीएनआरईजीए जनता का अधिकार था, लेकिन अब नहीं रहा। इसमें दिव्यांगजनों सहित लगभग पांच करोड़ लोगों को ग्रामीण इलाकों में रोजगार मिल रहा था। अब केंद्र सरकार तय करेगी कि कौन सा काम किया जाएगा, जबकि पहले यह पंचायतें तय करती थीं। उन्होंने कहा कि पंचायतों की भूमिका बुरी तरह सीमित कर दी गई है। पहले हर पंचायत को करीब एक करोड़ रुपये मिलते थे, अब उन्हें इससे वंचित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम तब तक लड़ेंगे जब तक वीबी-जी राम जी योजना रद्द नहीं हो जाती और एमजीएनआरईजीए दोबारा लागू नहीं हो जाता। वीबी-जी राम जी रोजगार की गारंटी नहीं देता, जैसा कि एमजीएनआरईजीए देता था। भाजपा पर ग्रामीण भारत पर हमला करने का आरोप लगाते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि महात्मा गांधी ने कहा था कि जब तक गांवों का विकास नहीं होगा, राष्ट्र का विकास नहीं हो सकता। एमजीएनआरईजीए को खत्म करके भाजपा ने महात्मा गांधी की हत्या दूसरी बार कर दी है। उन्होंने राज्य के हर गांव में लोगों से आंदोलन करने का आह्वान किया। वहीं, कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को खत्म करने पर आमादा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार एमजीएनआरईजीए को समाप्त करना चाहती है। मैं कर्नाटक सरकार से आग्रह करता हूं कि पंचायत केंद्रों का नाम बदलकर महात्मा गांधी केंद्र कर दिया जाए। उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि एमजीएनआरईजीए को रद्द करके भाजपा ने अपने लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर ली है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग वीबी-जी राम जी को स्वीकार नहीं करेंगे और रोजगार गारंटी कानून खत्म करने के लिए भाजपा को कभी माफ नहीं करेंगे।  

धन्यवाद से विवाद तक: Grok ने बदल दिया PM मोदी के संदेश का मतलब

नई दिल्ली एआई पर पूरी तरह से भरोसा करना किस तरह से परेशान करने वाला हो सकता है। इसकी बानगी सोमवार को देखने को मिली। गणतंत्र दिवस के मौके पर मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर पीएम मोदी को गर्मजोशी भरा बधाई संदेश दिया था। इसके जवाब में पीएम मोदी ने मालदीव की भाषा में ही उनका धन्यवाद किया। विवाद तब खड़ा हो गया, जब ग्रोक एआई ने इसका गलत अनुवाद पेश किया और एक मित्रवत पोस्ट को राजनीतिक रूप से संवेदनशील पोस्ट में बदल दिया।   मूल रूप से मालदीव की स्थानीय धिवेही भाषा में लिखे गए पीएम मोदी के इस पोस्ट का ऐसा अनुवाद किया कि सोशल मीडिया यूजर्स भी हक्के-बक्के रह गए। दरअसल, यह पूरा मामला मुइज्जू के बधाई संदेश पर पीएम मोदी की धन्यवाद टिप्पणी पर हुआ। पीएम मोदी के बधाई संदेश का अनुवाद खोलने पर ग्रोक ने इसे बताया, "सुकुरिया, रायथुन मजलिस। भारत के 77वें स्वतंत्रता दिवस के समारोह मालदीव में आयोजित किए गए और मालदीव सरकार ने इसमें भाग लिया। यह सुकुरिया सरकार जनता के भारत-विरोधी अभियानों में भी शामिल रही है। यहां तक कि दो भारत-विरोधी अभियानों में भी वह विरोध प्रदर्शनों में सबसे आगे रही है।” लाइव हिन्दुस्तान ने भी इस गलत अनुवाद को देखा था। हालांकि बाद में ग्रोक ने इसे बदल दिया। वर्तमान में गोर्क द्वारा इसका अनुवाद अलग दिखाया जा रहा है, जो कि इस प्रकार है, "धन्यवाद, राष्ट्रपति मुइज्जू। भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर आपने जो हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएँ सम्मान और आदर के साथ दी हैं, उन्हें मैं कृतज्ञतापूर्वक स्वीकार करता हूँ। हम दोनों देशों के नागरिकों के हित में साथ मिलकर किए जा रहे कार्यों को आगे भी जारी रखेंगे। मैं सभी मालदीव नागरिकों के लिए खुशहाल और समृद्ध भविष्य की कामना करता हूँ।” ग्रोक द्वारा इस तरह से गलत अनुवाद दिखाने को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स के बीच में काफी तेज प्रतिक्रिया देखने को मिली। एक यूजर ने ग्रोक को प्रोपेगेंडा से भरा हुआ बताया। वहीं, दूसरे ने बाकी एआई चैटबोट से इसकी तुलना करते हुए कहा कि ग्रोक केवल एक चैटबोट नहीं बल्कि हेरफेर और प्रोपेगेंडा से भरा हुआ है। आपको बता दें, यह प्रतिक्रिया इसलिए और भी ज्यादा ध्यान आकर्षित कर रही है, क्योंकि कुछ समय पहले तक भारत और मालदीव के रिश्ते सही नहीं थे। वर्तमान राष्ट्र्पति मुइज्जू ने चुनाव में जीत के पहले इंडिया आउट का कैंपेन भी चलाया था। वह लगातार भारत विरोधी बयान भी देते आए हैं। हालांकि, कुछ समय से दोनों देशों के रिश्ते फिर से सामान्य होते नजर आए हैं।  

सिर्फ कानून नहीं, नए भारत की सोच है UCC — सामाजिक समरसता पर बोले धामी

देहरादून उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कानून को एक साल पूरा होने पर इसे 'समान नागरिक संहिता दिवस' के रूप में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर मंगलवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से शुरू हुई यह ऐतिहासिक पहल सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि समानता, पारदर्शिता और सामाजिक समरसता की एक सशक्त नींव है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "समान नागरिक संहिता का मूल उद्देश्य महिलाओं को उनके वैधानिक अधिकारों में पूर्ण समानता दिलाना है। यह व्यवस्था विवाह, तलाक, संपत्ति और उत्तराधिकार जैसे महत्वपूर्ण विषयों में महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करते हुए उन्हें समान और न्यायसंगत अधिकार सुनिश्चित करती है।" उन्होंने लिखा, "पिछले एक साल में यूसीसी के अंतर्गत विवाह पंजीकरण और नागरिक सेवाओं में उल्लेखनीय तेजी आई है। राज्य सरकार की ओर से 23 भाषाओं में सहायता और एआई-आधारित सपोर्ट की सुविधा के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि हर नागरिक इस सकारात्मक परिवर्तन का लाभ उठा सके।" इससे पहले, सोमवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कानून में एक अहम संशोधन किया गया। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश-2026 को मंजूरी दी। इसमें, आपराधिक प्रक्रिया संहिता-1973 के स्थान पर अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 और दंडात्मक प्रावधानों के लिए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 को लागू किया गया है। धारा 12 के अंतर्गत सचिव के स्थान पर अपर सचिव को सक्षम प्राधिकारी नामित किया गया है। संसोधन के जरिए विवाह के समय पहचान से संबंधित गलत जानकारी को विवाह निरस्तीकरण का आधार बनाया गया है। विवाह और लिव-इन संबंधों में बल, दबाव, धोखाधड़ी व विधि-विरुद्ध कृत्यों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं। लिव-इन संबंध की समाप्ति पर पंजीयक की ओर से समाप्ति प्रमाण पत्र जारी किए जाने का प्रावधान किया गया है। अनुसूची-2 में 'विधवा' शब्द के स्थान पर 'जीवनसाथी' शब्द का प्रतिस्थापन किया गया है। विवाह, तलाक, लिव-इन संबंध और उत्तराधिकार से संबंधित पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति पंजीयक जनरल को प्रदान की गई है।

तालिबान सरकार के फैसले से विवाद, मौलाना–मौलवी को कानूनी छूट पर सवाल

 विदेश.  तालिबान का नया नियम: मौलाना–मौलवी पर नहीं चलेगा मुकदमा, फैसले पर मचा बवाल अफगानिस्तान में तालिबानी प्रशासन ने अपनी अदालतों के लिए एक निर्देश जारी कर दिया है जिसको लेकर बवाल शुरू हो गया है। अफगानिस्तान की सरकार ने 'क्रिमिनल प्रोसीजर कोड फॉर कोर्ट' के तहत निर्देश जारी करते हुए कहा है कि देश में मुल्ला और मौलवियों पर केस नहीं चलाए जाएंगे।इसके अलावा इस कोड के आर्टिकल 9 के तहत अफगान सोसाइटी को चार वर्गों में बांट दिया गया है। इसमें सबसे ऊपर मुल्ला और मौलवी होंगे। इस निर्देश में कहा गया है कि मुस्लिम धर्म गुरु अगर कोई भी अपराध करते हैं तो उनपर मुकदमा नहीं दर्ज किया जाएगा। वहीं अगर अन्य कैटिगरी के लोगों के खिलाफ अपराध साबित होता है तो उन्हें कड़ा दंड मिलेगा। ऐसे में एक ही अपराध के लिए अलग-अलग वर्गों के लोगों को अलग-अलग दंड भी दिया जाएगा। सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर देवबंदी इस्लामिक नाम के अकाउंट से कहा गया कि तालिबान प्रशासन ने चतुर्वर्ण व्यवस्था लागू कर दी है। नशनल रजिस्टेंस फ्रंट की मीडिया सेल ने कहा कि तालिबान ने गुलमी को कानूनी बना दिया है। अब कोर्ट अलग-अलग लोगों को स्टेटस के हिसाब से सजा सुनाएगी। ऐसे में उच्च वर्ग वालों की सुरक्षा की जाएगी और गरीबों को सजा दी जाएगी। बता दें कि तालिबान प्रशासन पहले ही भेदभाव और महिलाओं पर अत्याचार के लिए बदनाम था। पहली बार जब अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हुआ था तब भी इस तरह के नियम लगाए गए थे। 2021 में तालिबान की वापसी के बाद एक बार फिर से इसपर चर्चा होने लगी। बता दें कि लगभग एक महीने पहले एक 13 साल के किशोर को परिवार के 13 सदस्यों की हत्या के आरोप में मौत की सजा दी गई थी। उसकी मौत की सजा के लगभग 80 हजार लोग गवाह बने थे। तालिबान के सुप्रीम लीडर अखुंदजादा की मंजूरी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसे मौत की सजा सुनाई थी।  

भारी बर्फबारी से हिमाचल में जनजीवन अस्त-व्यस्त, लाहौल-स्पीति में स्कूलों पर ताला

देश. हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर बर्फबारी ने जनजीवन को मुश्किल में डाल दिया है। लाहौल-स्पीति, किन्नौर, कुल्लू और शिमला जिले के ऊंचाई वाले इलाकों में हिमपात के चलते सड़क, बिजली और आवाजाही पर असर पड़ा है। बर्फबारी से जहां लाहौल-स्पीति में शिक्षण संस्थान बंद कर दिए गए हैं, वहीं अप्पर शिमला क्षेत्र में सड़कें बंद होने से आवाजाही बाधित हुई है। शिमला से सटे पर्यटन स्थलों कुफरी और नारकण्डा में भी बर्फ गिरी है। एनएच-5 बंद इससे शिमला-रामपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-05) भी बाद दोपहर कुफरी में दोबारा बंद करना पड़ा है। पिछले कुछ दिनों में मौसम खुलने पर इस राष्ट्रीय राजमार्ग को बहाल किया गया था, लेकिन दोबारा बर्फबारी ने प्रशासन की कोशिशों पर पानी फेर दिया है। सड़क बंद होने से सेब उत्पादक क्षेत्रों और दूरदराज के इलाकों में आवाजाही प्रभावित हो रही है। प्रशासन द्वारा सड़क को बहाल करने का कार्य जारी है। चौपाल-देहा-शिमला मुख्य मार्ग भी बंद शिमला जिले के चौपाल क्षेत्र में भी लगातार बर्फबारी जारी है। इसके चलते चौपाल-देहा-शिमला मुख्य मार्ग को एक बार फिर वाहनों की आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया है। सड़क पर बर्फ जमने और फिसलन बढ़ने के कारण प्रशासन ने एहतियातन यातायात रोक दिया है। चौपाल और आसपास के गांवों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है और लोगों को जरूरी कामों के लिए भी आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लाहौल-स्पीति में बिगड़े हालात, कई सड़कें बंद लाहौल-स्पीति में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। लाहौल-स्पीति जिले में लगातार हो रही भारी बर्फबारी के कारण जनजीवन लगभग ठहर सा गया है। घाटी के भीतर कई संपर्क सड़कें बंद हैं और गांवों का आपसी संपर्क प्रभावित हुआ है। लाहौल-स्पीति में स्कूल कॉलेज बंद मौसम की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए लाहौल-स्पीति जिले के सभी शिक्षण संस्थानों को बंद रखने का फैसला किया है। स्कूलों के साथ कॉलेज, आईटीआई, पॉलिटेक्निक और आंगनबाड़ी केंद्र 28 जनवरी तक बंद कर दिए गए हैं, ताकि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। बिजली और संचार सेवाएं भी प्रभावित लाहौल-स्पीति के कई हिस्सों में भारी हिमपात दर्ज किया गया है। ताजा बर्फबारी से तापमान में तेज गिरावट आई है, जिससे कड़ाके की ठंड पड़ रही है। घाटी में बिजली और संचार सेवाएं भी कई जगह प्रभावित हुई हैं। सीमा सड़क संगठन और लोक निर्माण विभाग की टीमें बर्फ हटाने के काम में जुटी हैं, लेकिन लगातार हो रहे हिमपात के कारण बहाली कार्य में मुश्किलें आ रही हैं। इन जिलों में भी ट्रैफिक पर असर किन्नौर और कुल्लू जिले के ऊंचे इलाकों में भी बर्फबारी का असर देखने को मिल रहा है। किन्नौर के कल्पा, सांगला और आसपास के क्षेत्रों में हल्का से मध्यम हिमपात हुआ है। कुल्लू जिले के मनाली और आसपास के ऊंचाई वाले इलाकों में भी मौसम खराब बना हुआ है। खराब मौसम के चलते कई ग्रामीण सड़कों पर यातायात बाधित है। 60 की स्पीड से चलेंगी जमा देने वाली हवाएं मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी, बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने राज्य में कुछ स्थानों पर 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी है। साथ ही शीतलहर और घने कोहरे का असर भी आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है। इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम खराब बना रह सकता है और लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के दौरान राज्य के चंबा, कुल्लू, किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों के अलग-अलग हिस्सों में गरज चमक के साथ भारी बारिश या बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से हवाएं चलने का अनुमान जताया है। इन जिलों में येलो अलर्ट मौसम विभाग का कहना है कि कभी कभी हवा की स्पीड 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। उना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर जिलों के अलग-अलग हिस्सों में कोल्ड डे रहने का येलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान अलग-अलग हिस्सों में बिजली कड़कने के साथ आंधी-तूफान और बारिश की चेतावनी दी गई है। हवा की स्पीड 40 से 50 किलोमीटी प्रति घंटे रह सकती है। कल कैसा रहेगा मौसम? 28 जनवरी को ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम खराब रहने का अनुमान है। कल कुछ जिलों में घने कोहरे का भी येलो अलर्ट जारी किया गया है। 29 जनवरी को मौसम के साफ रहने की संभावना है, लेकिन 30 जनवरी से 2 फरवरी के बीच एक और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से फिर मौसम बिगड़ सकता है। इसके अलावा 27 से 30 जनवरी के बीच कुछ स्थानों पर घने कोहरे और शीतलहर की चेतावनी भी दी गई है। Himachal Pradesh Weather पर्यटकों के लिए एडवाइजरी प्रशासन ने पर्यटकों को एडवाइजरी जारी की है कि वे गैरजरूरी यात्रा से बचें। पर्यटकों से ऊंचाई वाले और बर्फबारी प्रभावित इलाकों की ओर नहीं जाने को कहा गया है। पिछले हफ्ते हुई भारी बर्फबारी के बाद प्रशासन ने बड़ी मशक्कत से सड़कों को बहाल किया था लेकिन ताजा हिमपात से हालात फिर बिगड़ने लगे हैं। हिमाचल प्रदेश में कई सड़कें एक बार फिर बंद हो गई हैं, जिससे राहत कार्यों और रोजमर्रा की गतिविधियों पर असर पड़ा है।

मोदी सरकार की सफाई: यूजीसी रूल्स पर उठे बवाल के बीच धर्मेंद्र प्रधान का भरोसेमंद बयान

नई दिल्ली यूजीसी रूल्स 2026 का देश भर में विरोध हो रहा है। सवर्ण बिरादरियों से जुड़े संगठन ने इन नियमों पर सख्त आपत्ति जताई है और प्रदर्शन भी हो रहे हैं। इस बीच केंद्र सरकार की पहली प्रतिक्रिया आ गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि इन नियमों का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा और किसी को इसका बेजा इस्तेमाल भी नहीं करने दिया जाएगा। उनका यह बयान अहम है क्योंकि इस समय यूजीसी नियमों को लेकर देश भर में डिबेट तेज चल रही है। इसके चलते भाजपा की मुश्किलें बढ़ने की बात कही जा रही है, जिसका एक मजबूत वोट बैंक सवर्ण समाज के लोग रहे हैं। मैं एक बात बहुत विनम्रता से कहना चाहता हूं कि किसी का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। कोई भेदभाव नहीं होगा। यूजीसी, भारत सरकार और राज्य सरकारों की यह जिम्मेदारी होगी। यह मसला तो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में ही है। मैं स्पष्ट कह रहा हूं कि किसी के भी साथ अत्याचार या भेदभाव नहीं होगा। इसके अलावा भेदभाव के नाम पर किसी को भी यह अधिकार नहीं होगा कि वह कानून का बेजा इस्तेमाल करे। उन्होंने कहा कि हर चीज संविधान के दायरे में होगी। बता दें कि यह मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। सत्ताधारी दल भाजपा के ही कई नेताओं ने रायबरेली और लखनऊ जैसे जिलों में अपने पदों से इस्तीफा दिया है। लखनऊ औऱ दिल्ली में इसके खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। इसके अलावा बरेली जिले के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दिया है। इसके पीछे उन्होंने शंकराचार्य के अपमान और यूजीसी रूल्स को वजह बताया है। प्रियंका चतुर्वेदी बोलीं- वापस लिए जाएं यूजीसी रूल्स, रामगोपाल क्या बोले इस बीच राजनीति भी तेज हो गई है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी का कहना है कि इस नियम को वापस लिया जाए या फिर संशोधन किया जाए। वहीं समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने यूजीसी रूल्स का समर्थन किया है। बता दें कि कांग्रेस पार्टी ने अब तक इस मसले पर खुलकर कुछ भी नहीं कहा है।  

उत्तराखंड सरकार की बड़ी पहल: 46 मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक का प्रस्ताव

उत्तराखंड. चार धाम यात्रा से पहले बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन की तैयारी की जा रही है। यही नहीं प्रदेश के कुछ और प्रमुख मंदिरों में भी गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन लगाया जा सकता है।  बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। हेमंत द्विवेदी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा है कि ‘राज्य के सभी प्रमुख मंदिरों के स्टेक होल्डर और पुजारियों का मानना ​​है कि मंदिरों की पवित्रता को बनाए रखने के लिए गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन लगाना बेहद जरूरी है। हम आगामी बीकेटीसी की बैठक में बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी 46 मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन लगाने का प्रस्ताव लाने जा रहे हैं।’ बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। आदि शंकराचार्य ये व्यवस्था बनाकर गए थे उन्होंने आगे कहा कि 'हमने कोई नया फरमान जारी नहीं किया है ये तो आदि शंकराचार्य के कालखंड से होता चला आ रहा है। यहां की धार्मिक परंपराएं और प्राचीन मान्याताओं और आस्थाओं के अनुरूप आदि शंकराचार्य ये व्यवस्था बनाकर गए थे। समय की मांग के हिसाब से राज्य के अंदर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा अवैध मजार, थूक जिहाद और लैंड जिहाद के जरिए यहां पर धीरे-धीरे माहौल खराब किया गया है। ऐसे में मंदिरों के स्टेक होल्डर और पुजारियों की लंबे समय से मांग थी कि पूरी तरह से गैर हिंदुओं को बैन किया जाए।' वहीं लंबे समय से केदारनाथ और बद्रीनाथ धामों में आते रहे सिख और जैन श्रद्धालुओं के बारे में उन्होंने कहा कि संविधान के अनुसार, सिख, जैन और बौद्ध हिंदू धर्म का हिस्सा हैं। गंगा सभा की भी तैयारी मालूम हो कि हाल में हरिद्वार में हर की पौड़ी और आसपास के घाटों का प्रबंधन करने वाली संस्था गंगा सभा ने भी अगले साल आयोजित होने वाले अर्धकुंभ से पहले कुंभ क्षेत्र में आने वाले सभी गंगा घाटों और धार्मिक स्थानों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को बैन करने की मांग की है। यही नहीं हाल में हर की पौड़ी क्षेत्र में ‘अहिंदुओं का प्रवेश निषेध' लिखे पोस्टर लगाए गए हैं। गंगोत्री धाम में गैर हिंदुओं पर रोक का इस इमाम ने किया समर्थन, दी तगड़ी दलील उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थस्थलों बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री में अब गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित करने की तैयारी है। बद्रीनाथ, केदारनाथ मंदिर समिति ने सभी हितधारकों के साथ इस पर सहमति बना ली है। जल्द ही बोर्ड की बैठक में इसे औपचारिक रूप दिया जाएगा। गंगोत्री मंदिर समिति ने निर्णय कर लिया है। हालांकि सनातन धर्म में आस्था रखने वालों का स्वागत जारी रहेगा। इस घटनाक्रम पर मुस्लिम उलेमा की अलग-अलग राय सामने आई है। मुस्लिमों का वहां कोई काम नहीं ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के चीफ इमाम डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने कहा कि यह धर्म और आस्था का विषय है। यदि मंदिर कमेटी यह तय करती है कि गैर-हिंदू अंदर नहीं आ सकते हैं तो इस फैसले पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। हर जगह के अपने नियम होते हैं। वैसे भी मुस्लिमों का गंगोत्री में कोई काम नहीं है। ऐसे में यदि कोई मुस्लिम वहां जाता है तो इससे टकराव होगा।