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दिल्ली-ढाका तनाव चरम पर, बांग्लादेश ने अचानक उठाया उच्चायुक्त को वापस बुलाने का कदम

ढाका  भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय रिश्तों में बढ़ते तनाव के बीच बांग्लादेश ने अपने भारत में तैनात उच्चायुक्त एम. रियाज हमीदुल्लाह को आपात आधार पर ढाका बुला लिया है। उन्हें मंगलवार रात ही ढाका पहुंचते देखा गया। इसका कारण दोनों देशों की हालिया खटास और तनावपूर्ण स्थिति है। विश्लेषकों की राय में इस कदम से साफ़ संकेत मिलता है कि दोनों देशों की राजनयिक बातचीत फिलहाल संतुलित स्थिति में नहीं है। हालांकि उच्चायुक्त को बुलाना हमेशा नकारात्मक ही नहीं होता  यह दोनों पक्षों के बीच मामले पर गहन चर्चा और समाधान निकालने की कोशिश भी हो सकती है।  क्यों बुलाया गया उच्चायुक्त?  बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने ‘आपात बुलावा’ जारी कर रियाज हमीदुल्लाह को ढाका बुलाया, ताकि भारत-बांग्लादेश रिश्तों की वर्तमान स्थिति और दोनों देशों के बीच बढ़ते मतभेदों पर चर्चा की जा सके। 2025 के अंत में भारत-बांग्लादेश संबंधों में खटास बढ़ी है। भारत ने सुरक्षा और कंसुलर कारणों से बांग्लादेश में स्थित भारतीय वीजा आवेदन केंद्र को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था। उस निर्णय से बरामद वित्तीय वीजा सेवाओं पर असर पड़ा, जिससे ढाका की नाराज़गी बढ़ी।    शरीफ उस्मान हादी की हत्या और विवाद  बांग्लादेश में शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद यहाँ राजनीतिक और सामाजिक तनाव फैल गया। इस मामले को लेकर दोनों देशों में संवेदनशील कूटनीतिक वातावरण उत्पन्न हुआ है, जिसे सुलझाने के लिए उच्चायुक्त को बुलाया गया माना जा रहा है।    राजनीतिक माहौल और असर  इस वर्ष के अंत तक बांग्लादेश के आंतरिक राजनीतिक उथल-पुथल और भारत के साथ विधिवत बातचीत में आंशिक असहमति भी तनाव को बढ़ाने वाली स्थितियों में एक प्रमुख वजह रही है। यह कूटनीतिक कदम इसी संदर्भ में उठाया गया है।   

हिंदी-उर्दू की गूंज संयुक्त राष्ट्र में: UN चीफ गुतारेस ने रचा नया इतिहास

वाशिंगटन  संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने पहली बार वर्ष 2026 के लिए अपना नववर्ष संदेश हिंदी और उर्दू सहित कुल 11 भाषाओं में जारी किया है। यह संदेश संयुक्त राष्ट्र की छह आधिकारिक भाषाओं अरबी, चीनी, अंग्रेजी, फ्रेंच, रूसी और स्पेनिश के अलावा हिंदी और उर्दू में भी उपलब्ध कराया गया है। उनके वीडियो संदेश में हिंदी सबटाइटल भी शामिल किए गए हैं।  नववर्ष के अवसर पर गुतारेस ने विश्व नेताओं से युद्ध और विनाश के बजाय विकास में निवेश करने का सशक्त आह्वान किया। उन्होंने कहा, “दुनिया एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। हर ओर अराजकता और अनिश्चितता है। लोग पूछ रहे हैं क्या नेता सच में सुन रहे हैं और क्या वे कार्रवाई के लिए तैयार हैं?” संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने बताया कि दुनिया की एक-चौथाई से अधिक आबादी संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में रह रही है, जबकि 20 करोड़ से ज्यादा लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि युद्ध, आपदाओं और उत्पीड़न के कारण करीब 12 करोड़ लोग विस्थापित हो चुके हैं। गुतारेस ने बढ़ते सैन्य खर्च पर चिंता जताते हुए कहा कि वैश्विक सैन्य खर्च 2.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जो लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। यदि यही रुझान जारी रहा तो यह खर्च 2035 तक 6.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। उन्होंने रेखांकित किया कि यह राशि वैश्विक विकास सहायता से 13 गुना अधिक है और पूरे अफ्रीका महाद्वीप की GDP के बराबर है। उन्होंने कहा, “इस नए साल पर हमें संकल्प लेना होगा कि हमारी प्राथमिकताएं सही हों। एक सुरक्षित दुनिया की शुरुआत गरीबी के खिलाफ अधिक निवेश और युद्धों के खिलाफ कम निवेश से होती है। शांति का शासन होना चाहिए।” गौरतलब है कि 2018 में भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच हिंदी परियोजना को लेकर एक समझौता ज्ञापन हुआ था, जिसके तहत संयुक्त राष्ट्र की खबरों और संदेशों का हिंदी में प्रसारण किया जा रहा है।

पीड़िता को लेकर बयान पर केसी त्यागी की दो टूक, बोले— कुलदीप सेंगर की बेटी को चुप रहना चाहिए

नई दिल्ली उन्नाव रेप केस मामले में दोषी पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर की बेटी द्वारा अपने पिता का बचाव करने पर जदयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने कहा कि उन्हें पीड़िता को लेकर दिए बयान से पहले थोड़ा सोचना चाहिए। नई दिल्ली में केसी त्यागी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि कुलदीप सेंगर की बेटी भी एक लड़की है, एक महिला है, लेकिन उन्हें एक महिला के साथ हुए यौन उत्पीड़न के बारे में ऐसे बयान देने से बचना चाहिए। यह सिर्फ एक लड़की का मामला नहीं है; यह पूरे पीड़ित समुदाय के दर्द को दर्शाता है। कुलदीप सेंगर की बेटी ने अपने पिता को निर्दोष बताते हुए कहा कि बीते 8 साल में भी उन्हें भी बहुत कुछ झेलना पड़ा है। लोग एक तरफ से सिर्फ पीड़िता का पक्ष मान रहे हैं, जबकि उनका पक्ष कोई नहीं ले रहा है। पश्चिम बंगाल में एसआईआर के पर्यवेक्षक की कार पर हुए हमले को लेकर केसी त्यागी ने कहा कि चुनाव से पहले एसआईआर को लेकर टीएमसी पहले ही हल्ला कर चुकी है। अधिकारियों पर हमले अब अराजकता की सीमा पार कर चुके हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल में मंदिर-मस्जिद की राजनीति पर कहा कि धर्मनिरपेक्ष राज्य में सभी को अपने धर्म को मानने की इजाजत है। चुनाव के लिए इसका दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन पर केसी त्यागी ने कहा कि उनका निधन दुर्भाग्यपूर्ण है। वह लंबे समय तक पड़ोसी देश की प्रधानमंत्री रहीं। मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी के नए साल के जश्न के खिलाफ फतवा जारी करने पर केसी त्यागी ने कहा कि तमाम मुस्लिम देशों में नया साल मंगलमय तरीके से मनाया जाता है। दुनिया के नॉन-मुस्लिम कंट्रीज में ईद के समारोह होते हैं। नए साल पर ऐसे बयान देकर भारतीय मौलाना अपनी हदें पार कर रहे हैं। वहीं, कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने पर जदयू नेता राजीव रंजन ने कहा कि पूरे देश में खुशी है। रेप पीड़िता को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से न्याय मिला है। अंतिम फैसला अभी आना बाकी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा सेंगर को दी गई जमानत पर रोक लगा दी है और उसकी रिहाई रोक दी है। यह न्याय की जीत है और पूरा देश रेप पीड़िता के साथ खड़ा है।

2026 की शुरुआत में भारत-पाकिस्तान टकराव का खतरा? अमेरिकी थिंक टैंक की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता

वॉशिंगटन  भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद को लेकर जारी तनाव साल 2026 में सशस्त्र संघर्ष में बदल सकता है। इस बात की चेतावनी एक अमेरिकी थिंक टैंक ने दी है। इसके अलावा पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच भी संघर्ष की आशंका जताई गई है। इस थिंक टैंक ने अमेरिकी फॉरेन पॉलिसी एक्सपर्ट्स का सर्वे किया है। यह थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (सीएफआर) है। सीएफएआर का कहना है कि दोनों देशों के बीच सशस्त्र संघर्ष की संभावना अमेरिकी हितों पर भी असर डाल सकती है। सीएफआर ने 2026 में होने वाले संघर्षों को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में पाकिस्तान द्वारा सीमा पर आतंकवाद को लेकर चिंता जाहिर की गई है।   मई में हुआ था ऑपरेशन सिंदूर गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच मई में चार दिन तक लड़ाई चली थी। पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों द्वारा किए गए हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। भारत ने सात मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ढांचे को निशाना बनाया गया। यह कार्रवाई 22 अप्रैल को पहलगाम हमले के जवाब में की गई थी। पहलगाम में आतंकवादी हमले में 26 नागरिक मारे गए थे। भारत और पाकिस्तान 10 मई को सैन्य टकराव समाप्त करने पर राजी हुए थे। जम्मू-कश्मीर से आई हैं रिपोर्ट्स भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीमा पर स्थित पाकिस्तान समर्थित आतंकियों के कई ठिकानों को नष्ट किया था। इसके बाद पाकिस्तान के तेवर थोड़े ठंडे पड़े हैं, लेकिन यदा-कदा उसके नेता गीदड़-भभकियां देते रहते हैं। इसके अलावा ऑपरेशन सिंदूर के बाद से जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में भी कमी देखने को मिली है। हालांकि हाल ही में कुछ इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स आई हैं, जिनमें कहा गया है कि सर्दियों के मौसम में 30 पाकिस्तानी आतंकी जम्मू क्षेत्र में सक्रिय हैं। अफगानिस्तान पर क्या कहा इसके अलावा सीएफआर रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान को एक और मोर्चे पर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसके मुताबिक इस बात की आशंका है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान 2026 में आपस में भिड़ सकते हैं। हालांकि इस लड़ाई का अमेरिकी हितों पर उतना ज्यादा असर पड़ने की आशंका नहीं है। बता दें कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच हालिया समय काफी तनावपूर्ण रहा है। दोनों देशों के बीच अभी भी तलवार खिंची हुई है। गौरतलब है कि 25 नवंबर को अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने मंगलवार को पाकिस्तान पर तीन पूर्वी प्रांतों में देर रात हवाई हमले करने का आरोप लगाया, जिसमें नौ बच्चों सहित 10 नागरिक मारे गए।  

बलूचिस्तान में खूनी वार: BLF ने कहा— पाक सेना के 10 सैनिक मार गिराए

इस्लामाबाद  पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान से बड़ी खबर सामने आई है। बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने दावा किया है कि कई हमलों में पाकिस्तानी सेना के 10 जवानों को मौत की नींद सुला दी है। बीएलएफ ने सोमवार को कहा कि उसके लड़ाकों ने झाओ, बरखान, तुम्प और तुरबत में कई हमले किए, जिसमें पाकिस्तानी सेना के दस सदस्यों की मौत हो गई। ये हमले बलूच सशस्त्र गुटों द्वारा उन कार्रवाइयों की जिम्मेदारी लेने के एक दिन से भी कम समय के भीतर हुए हैं, जिनमें कथित तौर पर कम से कम पंद्रह सैनिकों की मौत हो गई थी।   बीएलएफ के प्रवक्ता मेजर गोहरम बलोच ने बताया कि समूह के लड़ाकों ने 28 दिसंबर को दोपहर लगभग 1 बजे अवारान जिले के झाओ क्षेत्र में एक पाकिस्तानी सैन्य काफिले पर घात लगाकर हमला किया। उन्होंने बताया कि घात लगाकर किए गए हमले में सेना की पैदल गश्ती दल, बम निरोधक इकाई और एक पिकअप वाहन को निशाना बनाया गया था, जो सभी एक ही स्थान पर मौजूद थे। बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, बयान में कहा गया है कि आठ शत्रु सैनिक मौके पर ही मारे गए और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। समूह ने आगे बताया कि काफिले की सुरक्षा के लिए तैनात एक बख्तरबंद वाहन घात लगाकर किए गए हमले के दौरान पीछे हट गया, जिससे शव और घायल सैनिक वहीं छूट गए। उन्होंने दावा किया कि उसी रात दूसरा हमला हुआ, जिसमें उन्होंने बरखान जिले के राखनी के पास स्राती-टिक इलाके में स्थित एक सैन्य शिविर को निशाना बनाया। बयान के अनुसार, लड़ाकों ने रॉकेट-चालित ग्रेनेड सहित भारी हथियारों का इस्तेमाल किया, जिसके परिणामस्वरूप शिविर के अंदर आरपीजी के गोले गिरने से दो कर्मियों की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया। बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, बीएलएफ ने बताया कि 28 दिसंबर को तुंप के गोमाजी इलाके में तीसरा हमला किया गया था, जहां लड़ाकों ने सुरक्षा बलों की एक चौकी पर कई गोले दागे, जिससे वहां तैनात पाकिस्तानी सैनिकों को 'हताहत और भौतिक नुकसान' हुआ। इसके अलावा, समूह ने कहा कि उसके लड़ाकों ने 27 दिसंबर को रात 8:20 बजे मध्य तुरबत में एक नौसेना शिविर के मुख्य प्रवेश द्वार पर पाकिस्तानी नौसेना कर्मियों को निशाना बनाते हुए हथगोले से हमला किया। बयान में दावा किया गया कि गेट पर तैनात कर्मियों को नुकसान पहुंचा है, जिसके चलते विस्फोट के बाद पाकिस्तानी सेना ने इलाके में गश्त तेज कर दी है। बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, बीएलएफ ने 'स्वतंत्र बलूचिस्तान की प्राप्ति तक' सशस्त्र हमले जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

कट्टरपंथियों को तेमजेन की चेतावनी: ‘घटोत्कच-हिडिंबा का असली रूप अभी दिखना बाकी है’

ढाका  बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर बढ़ते अत्याचार और कट्टरपंथी नेताओं की ओर से भारत को तोड़ने की धमकियों के बीच नागालैंड में बीजेपी विधायक तेमजेन इमना अलोंग ने उन्हें करारा जवाब दिया है। इम्ना ने कहा कि जो पागल लोग चिकन नेक को काटने और पूर्वोत्तर को भारत से अलग करने की बात करते हैं उन लोगों ने हमारे घटोत्कच और हिडिंबा को नहीं देखा है। गला-वला काटना हम अच्छी तरह जानते हैं। आपको बता दें कि बांग्लेदेश में कट्टरपंथियों के हौसले बुलंद हैं और वे चिकन नेक का जिक्र करके पूर्वोत्तर को भारत से काटने का दंभ भर रहे हैं। इम्ना ने महाभारत काल के दो पात्रों का उदाहरण देकर उन्हें जवाब दिया है। दरअसल पांडवों के वनवास के दौरान हिडिंबा नाम की राक्षसी का विवाह भीम से हुआ था। भीम ने हिडिंबा के भाई हिडिंब का वध किया था। हिडिंबा बेहद ताकतवर और मायावी थी। वहीं हिडिंबा और भीम से एक पुत्र का जन्म हुआ जिसका नाम घटोत्कच था। घटोत्कच भीमकाय और बहुत बलिशाली था। महाभारत के युद्ध में कर्ण अमोघ वाण से घटोत्कच की मौत हुई थी। वहीं घटोत्कच ने अपनी जान देकर अर्जुन के प्राण बचा लिए थे। इमना ने कहा, बांग्लादेश वाले जो कुछ भी कह रहे हैं, हम तो इतना निंदा नहीं करते हैं। हम चाहते हैं कि वे लोग पूर्वोत्तर में आकर तो देखें। हम जान गए हैं कि उनका इरादा क्या है। वे चिकन नेक की बात करते हैं लेकिन हम लोगों का कोई नेक नहीं है। ये केवल मीडिया केशब्द हैं। हम बहुत मजबूत कड़ी से भारत के साथ जुड़े हैं और हम भारतीय हैं। हम यह भी नहीं कहते कि सब बांग्लादेशी गलत हैं। कुछ पागल लोग हैं जो ऐसी बात करते हैं, उन लोगों ने हमारा घटोत्कच और हिडिंबा नहीं देखा है। अगर आ सकते हैं तो एक बार भारत आ जाएं। हम लोग उन्हें दिखाएंगे। अलोंग इमना ने कहा, वे लोग राजनीति में जो कुछ बोल रहे हैं उन्हें बोलना नहीं चाहिए। 1971 में भारत ने ही उनको आजाद किया और वे इतनी जल्दी भूल गए। और गले काटने का जो चक्कर है वे हमसे अच्छा नहीं जानते हैं। वे लोग अभी बहुत नए हैं। किसे कहा जाता है भारत का चिकन नेक? सिलिगुड़ी कॉरिडोर को चिकन नेक के नाम से जाना जाता है। यह पश्चिमी बंगाल के उत्तरी हिस्से में दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी शहर के पास एक संकरा कॉरिडोर है। एक जगह इसकी चौड़ाई 20 से 22 किलोमीटर है। इससे ही अरुणाचल, असम, मणिपुर, मेघालट, मिजोरम, नगालैंड, त्रिपूरा औऱ सिक्किम भारत के बाकी हिस्सों से जुड़ता है। मैप में देखने पर यह मुर्गी के गले की तरह दिखता है इसलिए इसका नाम चिकन नेक पड़ गया। इस की सीमाएं नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से लगती हैं। इसके पास हीचीन की चुंबी घाटी भी है।

ममता बनर्जी के किले में अमित शाह का शंखनाद, बोले— बंगाल को चाहिए बॉर्डर सील करने वाली सरकार

कोलकाता  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए भारतीय जनता पार्टी ने बिगुल फूंक दिया है। मंगलवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस सरकार को डर और घुसपैठ वाला शासन करार दिया है। उन्होंने कहा है कि राज्य को ऐसी सरकार की जरूरत है, जो बॉर्डर सील कर सके। शाह सोमवार रात कोलकाता पहुंचे थे, जहां उन्हें पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक की है। शाह ने कहा, 'अप्रैल में बंगाल में विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं।' उन्होंने कहा, 'भय, भ्रष्टाचार, कुशासन और घुसपैठ की जगह विकास, विरासत और गरीब कल्याण की एक मजबूत सरकार बनाने का बंगाल की जनता का संकल्प दिखाई पड़ता है।' उन्होंने कहा, 'टीएमसी के 15 साल के शासन में भय, भ्रष्टाचार, कुशासन और विशेषकर घुसपैठ से बंगाल की जनता भयभीत भी है, आशंकित भी है।' उन्होंने कहा, 'हम बंगाल की जनता को आश्वासन भी देना चाहते हैं और वादा भी करते हैं कि मोदी जी के नेतृत्व में बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के साथ ही यहां की विरासत को पुनर्जीवित करेंगे, विकास की गंगा फिर से तेज गति से बहेगी और गरीब कल्याण को प्राथमिकता देंगे।' उन्होंने कहा, 'बंगाल की सीमा से हो रही घुसपैठ सिर्फ बंगाल का मामला नहीं है, यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। देश की संस्कृति को बचाना है, देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है, तो बंगाल की सीमाओं को सील करने वाली सरकार लानी पड़ेगी। यह टीएमसी नहीं कर सकती, यह सिर्फ भाजपा कर सकती है।' भाजपा सरकार बनने का दावा शाह ने कहा, '14 वर्षों से भय और भ्रष्टाचार, बंगाल की पहचान बना हुआ है। 15 अप्रैल, 2026 के बाद जब बंगाल में भाजपा की सरकार बनेगी, तब बंग गौरव, बंग संस्कृति और उसके पुनर्जागरण की हम शुरुआत करेंगे। विवेकानंद जी, बंकिम बाबू, गुरुदेव टैगोर, श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों का बंगाल बनाने का प्रयास करेंगे।' उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने 39 प्रतिशत वोट प्राप्त किए और 12 सीटें प्राप्त कीं। 2026 में हम निश्चित रूप से प्रचंड बहुमत के साथ बंगाल में भाजपा की सरकार बनाने वाले है। कांग्रेस पर निशाना गृहमंत्री ने कहा, '2014 के लोकसभा चुनाव में हमें बंगाल में 17 प्रतिशत वोट और दो सीटें मिली थीं। 2016 के विधानसभा चुनाव में हमें 10 प्रतिशत वोट मिले और तीन सीटें मिलीं। 2019 के लोकसभा चुनाव में हमें 41 प्रतिशत वोट मिले और 18 सीटें मिलीं। 2021 के विधानसभा चुनाव में हमें 38 प्रतिशत वोट मिले और 77 सीटें मिलीं। जिस पार्टी को सिर्फ 3 सीटें मिली थीं, उसे पांच साल के अंतराल में 77 सीटें प्राप्त हुईं। कांग्रेस, जिसकी स्थापना ही बंगाल से शुरू हुई, वह कांग्रेस पार्टी शून्य पर पहुंच गई, और 34 वर्षों तक राज करने वाला कम्युनिस्ट गठबंधन भी एक भी सीट प्राप्त नहीं कर पाया, और हम प्रमुख विपक्ष बने।'

खालिदा जिया के निधन पर तसलीमा नसरीन का बड़ा आरोप: जिहादियों को संरक्षण मिला

नई दिल्ली  बांग्लादेशी मूल की मशहूर लेखिका नसलीमा नसरीन ने पूर्व पीएम खालिदा जिया के निधन पर टिप्पणी की है। उन्होंने मंगलवार को एक्स पर लिखा कि 80 साल की खालिदा जिया ने 10 साल तक पीएम के तौर पर शासन किया था। उनके दौर में ही मेरी कई किताबें प्रतिबंधित की गई थीं। अब मैं उम्मीद करती हूं कि उन पर से पाबंदी हटा दी जाएगी। यही नहीं खालिदा जिया की मौत के बाद उनके उठाए कदमों पर भी तसलीमा ने अपने ही अंदाज में तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने लिखा कि 1994 में मेरे खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ और उन्होंने जिहादियों का साथ दिया। तसलीमा लिखती हैं कि एक महिला, सेकुलर, मानवतावादी और फ्री थिंकर लेखिका के खिलाफ केस दर्ज हुए और वह जिहादियों के पक्ष में रहीं। यही नहीं उन्होंने मेरे खिलाफ अरेस्ट वॉरंट भी जारी करवाया। इसके बाद मुझे मेरे ही देश से निर्वासित कर दिया गया। उनके शासनकाल में कभी मैं वापस बांग्लादेश नहीं जा सकी। इसके आगे वह सवाल करती हैं कि क्या उनकी मौत के साथ मेरा 31 सालों का वनवास खत्म हो जाएगा। या फिर यह अन्याय जारी रहेगा। सवाल है कि आखिर यह पीढ़ी दर पीढ़ी जारी रहने वाला है या फिर कभी खत्म होगा। यही नहीं वह लिखती हैं कि उन्होंने जीते जी मेरी कई किताबों पर पाबंदी लगाई थी। अब सवाल है कि क्या मेरी अभिव्यक्ति की आजादी बहाल होगी। यदि उनकी मौत के साथ ही ऐसा हो जाए तो भी सही है। उन्होंने लिखा कि मैं सोचती हूं कि क्या अब मेरी किताबों से पाबंदियां हट जाएंगी। यही नहीं उन्होंने क्रमवार यह भी बताया कि उनकी किस किताब पर कब पाबंदी लगी थी। तसलीमा लिखती हैं कि मेरी चर्चित पुस्तक लज्जा पर 1993 में बैन लगा था। इसके बाद उत्तल हवा पर 2002 में पाबंदी लगी। 2003 में का और 2004 में वे काले दिन नामक पुस्तक पर पाबंदी लगी थी। तसलीमा लिखती हैं कि अपने जीते जी कभी भी खालिदा जिया ने अभिव्यक्ति की आजादी को बहाल करने का समर्थन नहीं किया। शायद अब उनकी मौत के बाद ही ऐसा हो जाए। बता दें कि तसलीमा नसरीन लंबे अरसे से भारत में ही बसी हुई हैं। उनके उपन्यास लज्जा पर तो भारत में फिल्म भी बन चुकी है, जो काफी चर्चित हुई थी।  

बीजेपी नेता का सख्त संदेश: अरुणाचल भारत का अभिन्न अंग, चीन को तिब्बत से हटना पड़ेगा

नई दिल्ली  बीजेपी नेता तापिर गाओ ने अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन के दावे को खारिज करते हुए कहा है कि यह भारत का अभिन्न हिस्सा है और हमेशा रहेगा। बता दें कि चीन कई बार अरुणाचल को दक्षिण तिब्बत बता चुका है। गाओ ने कहा, चीन अरुणाचल को दक्षिणी तिब्बत कहता है लेकिन भारत हर बार बता चुका है कि यह भारत का ही अभिन्न हिस्सा है। अरुणाचल कभी तिब्बत का हिससा नहीं था। यब बात 14वें दलाई लामा भी कई बार कह चुके हैं। उनका कहना है कि एक दिन चीन को तिब्बत जरूर मुक्त करना पड़ेगा। बांग्लादेश छोड़ दे अपने नापाक इरादे गाओ ने कहा कि बांग्लादेश को भी अपने नापाक इरादे छोड़ देने चाहिए। वह पूर्वोतर भारत तक विस्तार करना चाहता है। लेकिन भारत में इस समय नरेंद्र मोदी की सरकार है। उनका पूरा ध्यान बांग्लादेश और म्यांमार से आने वाले घुसपैठियों पर है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश पूर्वोत्तर में घुसने का सपना देख रहा है। उसे नहीं भूलना चाहिए कि हमने चिकन नेक का विस्तार 22 किलोमीटर कर दिया हैऔर अब यह चटगांव हिल तक हो गया है। आज का भारत कुछ भी कर सकता है। हमें भारत में घुसे अवैध बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को वापस भेजना है। पूर्व राजनयिक केपी फिबायन ने भी कहा था कि चीन किसी तरह अरुणचल प्रदेश तक कब्जा करना चाहता हैऔर इसीलिए इसको दक्षिणी तिब्बत बताता रहता है। पेंटागन ने भी कहा था कि चीन अरुणाचल को तिब्बत का हिस्सा मानता है। चियांग काइ शेक की सरकार की बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह सोच आज नहीं आई है बल्कि काफी पुरानी है। उन्होंने कहा कि भारत को हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि चीन विस्तारवादी रहा है और आज भी है। वह भारत की संप्रभुता का भी सम्मान नहीं करता है। ऐसे में उससे सावधान रहने की जरूरत है।

सऊदी अरब और UAE के बीच दोस्ती में दरार, 24 घंटे के अल्टीमेटम के बाद क्यों हुए दुश्मन?

दुबई     अरब के नक्शे में दो घनिष्ठ मित्र रहे सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की दोस्ती में दरार आ गया है. दरार भी ऐसी-वैसी नहीं. सऊदी अरब ने कहा है कि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा एक "रेड लाइन" है, जिसकी वह रक्षा करेगा. इससे पहले सऊदी अरब ने यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर हमला किया था. सऊदी का दावा है कि मुकल्ला पोर्ट पर उसने अटैक तब किया जब वहां UAE के जहाज वहां हथियारों की अनलोडिंग कर रहे थे. सऊदी अरब ने वीडियो फुटेज जारी कर बताया है उसने हमला तब किया जब UAE के शिप हथियार और बख्तरबंद गाड़ियां मुकल्ला पोर्ट पर उतार रहे थे. सऊदी नैरेटिव के मुताबिक ये हथियार यमन में उन गुटों को दिए जा रहे थे जो सऊदी अरब के दुश्मन हैं. सऊदी का दावा है कि ये जहाज फुजैराह बंदरगाह से रवाना हुए थे, जिनके ट्रैकिंग सिस्टम बंद थे और जिनमें भारी मात्रा में हथियार व लड़ाकू वाहन लादे गए थे. ये हथियार यमन के अलगाववादी समूह सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) के लिए थे. इस समूह को UAE का समर्थन प्राप्त करता है. सऊदी अरब ने UAE जैसे भाईचारे वाले देश द्वारा सदर्न ट्रांज़िशनल काउंसिल की सेनाओं पर सऊदी दक्षिणी सीमा के पास मिलिट्री ऑपरेशन करने का दबाव डालने का आरोप लगाया है और इसकी निंदा की है. रॉयटर्स के अनुसार सऊदी अरब ने यूएई के सैनिकों यमन छोड़ने के लिए 24 घंटे का समय दिया है.  सऊदी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, "यह सीमित कार्रवाई क्षेत्रीय शांति के लिए खतरे को रोकने के लिए की गई. हमने संपत्ति क्षति न्यूनतम रखी." हमले में कोई हताहत नहीं होने की खबर है, लेकिन मुकल्ला पोर्ट पर भारी क्षति हुई. समूह सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल ने इसे "आक्रामकता" करार देते हुए UAE से सैन्य सहायता मांगी है.  इसके जवाब में यमन की सऊदी समर्थित राष्ट्रपति परिषद ने UAE के साथ रक्षा समझौता रद्द कर दिया और 72 घंटे के लिए सीमाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है. यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के प्रमुख रशाद अल-अलीमी ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ संयुक्त रक्षा समझौते को रद्द करने का फैसला किया है.  गृह युद्ध में फंसे यमन में 3 गुट  गृह युद्ध में फंसे यमन में अभी गुट काम कर रहे हैं. इनमें हूती विद्रोही, सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल और प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल हैं. हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन हासिल है, सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल को कथित रूप से UAE का समर्थन प्राप्त है. जबकि प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल को सऊदी अरब का समर्थन प्राप्त है. ये तीनों ही गुट यमन के अलग अलग हिस्सों में कब्जा किए हुए हैं.  कैसे यमन की वजह से बिगड़ते गए सऊदी अरब और UAE के संबंध अल जजीरा ने हमद बिन खलीफा यूनिवर्सिटी में पब्लिक पॉलिसी के प्रोफेसर सुल्तान बराकत के हवाले से लिखा है कि UAE 2014 में सना में हूती विद्रोहियों के कब्जे को पलटने की कोशिश करने के लिए सऊदी अरब के नेतृत्व वाले मिलिट्री गठबंधन में शामिल हुआ था, लेकिन तब से दोनों देशों के बीच रिश्ते और ज़्यादा जटिल हो गए हैं. बराकत ने कहा, "धीरे-धीरे, UAE ने सऊदी अरब से पूछे बिना यमन में विदेश नीति और स्वतंत्र फैसले लेने की आदत डाल ली." "इसका नतीजा यह हुआ कि यमन में दक्षिणी अलगाववादियों की स्थिति कुछ हद तक मज़बूत हुई." 1990 से पहले यमन दो देशों में बंटा हुआ था,जब यमन अरब रिपब्लिक और पीपल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ यमन ने मिलकर एक संप्रभु राज्य बनाया.  एक्सपर्ट कहते हैं कि राजधानी पर हूती विद्रोहियों के कब्जे के बाद दक्षिण में अलगाववादी आंदोलन को जोर मिला, जब "कुछ लोगों को लगा कि क्योंकि दुनिया – खासकर सऊदी अरब – सना में सरकार को बहाल करने में नाकाम रही, इसलिए उनके लिए खुद ही आगे बढ़ना बेहतर होगा." सऊदी अरब और UAE 2015 से यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक्शन में सहयोगी रहे हैं. लेकिन उनके हित अलग हो गए हैं. सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमनी सरकार का समर्थन करता है और यमन को एकजुट रखना चाहता है. लेकिन UAE STC का समर्थन करता है, जो दक्षिण यमन को अलग राज्य बनाना चाहता है.