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बीजेपी संगठन में बिहार का कद बढ़ा, नितिन नबीन राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त

नई दिल्ली  भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा फैसला लेते हुए बिहार सरकार में मंत्री नितिन नबीन (45) को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है. इस नियुक्ति को बिहार के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में बीजेपी की रणनीतिक मजबूती के तौर पर देखा जा रहा है. पार्टी नेतृत्व ने उनके संगठनात्मक अनुभव, जमीनी पकड़ और प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए यह अहम जिम्मेदारी सौंपी है. नितिन नबीन बीजेपी के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष बने हैं. यह नियुक्ति 14 दिसंबर 2025 से तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है. इस संबंध में पार्टी की ओर से औपचारिक संगठनात्मक आदेश जारी किया गया है. बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव एवं मुख्यालय प्रभारी अरुण सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह नियुक्ति भारतीय जनता पार्टी के संसदीय बोर्ड द्वारा की गई है. आदेश में स्पष्ट किया गया है कि नितिन नबीन, जो वर्तमान में बिहार सरकार में मंत्री हैं, अब राष्ट्रीय स्तर पर संगठन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालेंगे. बिहार की नीतीश सरकार में सड़क निर्माण मंत्री नितिन नबीन वर्तमान में पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं. नबीन छात्र राजनीति से लेकर संगठन के विभिन्न पदों तक का सफर तय कर चुके हैं. उनकी पहचान एक अनुशासित संगठनकर्ता और तेज फैसले लेने वाले नेता के रूप में रही है. बिहार बीजेपी में वे कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं, जिनमें प्रदेश स्तर पर संगठन को मजबूत करने की भूमिका शामिल है.   पूर्व विधायक नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के बेटे हैं नितिन नितिन नबीन का जन्म पटना में हुआ. उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक रहे हैं. पिता के निधन के बाद नितिन नबीन ने सक्रिय रूप से चुनावी राजनीति में कदम रखा और जल्द ही अपनी अलग पहचान बनाई. राजनीति में आने से पहले वे भारतीय जनता युवा मोर्चा में भी सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं, जहां से उनके संगठनात्मक कौशल को पहचान मिली. पहली बार 2006 में उपचुनाव में जीते थे नितिन नबीन नितिन नबीन पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं और लगातार पांचवीं बार जनता का भरोसा जीत चुके हैं. उन्होंने पहली बार 2006 के उपचुनाव में जीत दर्ज की थी. इसके बाद वे 2010, 2015, 2020 और 2025 के विधानसभा चुनावों में लगातार विजयी रहे. 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने 98,299 वोट हासिल कर आरजेडी उम्मीदवार रेखा कुमारी को 51,936 वोटों के बड़े अंतर से हराया, जो उनकी अब तक की सबसे बड़ी जीत मानी जा रही है.

दिल्ली की जहरीली हवा पर रामदेव का तंज: ‘एयर प्यूरीफायर नहीं, घर में पर्दे काफी’

नई दिल्ली  दिल्ली एनसीआर में खतरनाक स्तर के प्रदूषण को लेकर योगगुरु रामदेव ने बड़ा बयान दिया है। प्रदूषण की वजह से बढ़ती एयर प्यूरिफायर की डिमांड को लेकर रामदेव ने कहा कि यह सब अमीरों के चोचले हैं। उन्होंने प्रदूषण से खुद को बचाने के व्यायाम भी बताया। एक टीवी चैनल से बातचीत के दौरान एंकर ने जब उनसे पूछा कि इस स्तर के प्रदूषण में लोग बाहर निकलकर कैसे व्यायाम कर सकते हैं?   इसपर रामदेव ने कहा, देखिए, जब देश विकास रहा है तो कुछ धूल तो उड़ेगी ही। उन्होंने कहा, कभी-कभी दिल्ली गैस चैंबर बन जाती है। ऐसे में आप लोगों को अपने घरों में पर्दा डालकर रखना चाहिए। 15-20 दिन में एक बार उन्हें साफ कर लीजिए और मास्क पहनकर रखिए। उन्होंने कहा, घर के अंदर बैठिए और अनुलोम-विमोम करिए, कपालभाति करिए। एयर प्यूरिफायर के बारे में सवाल करने पर उन्होंने कहा, यह सब केवल अमीरों के चोचले हैं। बता दें कि राजधानी दिल्ली में गंभीर श्रेणी के वायु प्रदूषण के बीच एक बार फिर GRAP 3 लागू कर दिया गया है। ऐसे में 50 फीसदी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम के मोड से काम करने और स्कूलों को हाइब्रिड मोड पर चलाने का आदेश दिया गया है। दिल्ली के प्रदूषण को देखते हुए कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आलोक ने लोगों को कई सुझाव दिए थे। उनमें से एक एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल करना भी था। उन्होंने कहा था कि बाहर निकलने पर लोग एन-95 मास्क का उपयोग करें। इसके अलावा घरों के अंदर इंडोर प्लांट्स लगाएं और एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें। इसके अलावा बच्चों और बुजुर्गों को घऱ में रखने की सलाह दी गई थी। 13 दिसंबर के परिपत्र के अनुसार, शिक्षा निदेशालय, एनडीएमसी, एमसीडी और दिल्ली छावनी बोर्ड के अंतर्गत आने वाले सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और गैर-सरकारी मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों को अगले आदेश तक जहां भी संभव हो, ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों प्रकार की कक्षाएं संचालित करने का निर्देश दिया गया है। आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि शनिवार को इस वर्ष की अब तक की सबसे खराब वायु गुणवत्ता दर्ज की गई जो 11 नवंबर को दर्ज किए गए पिछले उच्चतम स्तर 428 को भी पार कर गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 431 रहा, जबकि वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली ने अनुमान जताया है कि रविवार को भी एक्यूआई ‘गंभीर’ श्रेणी में रहेगा।  

रिटायर्ड डीजीपी से मेयर तक का सफर! कौन हैं आर श्रीलेखा, जिन पर BJP ने जताया भरोसा

केरल  केरल के निकाय चुनाव में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिला है। इस बार तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बीजेपी ने वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) को करारी शिकस्त देते हुए नगर निगम की सत्ता हथिया ली है। एलडीएफ यहां पिछले चार दशकों से काबिज था। माना जा रहा है कि केरल की राजधानी में वाम मोर्चे को बड़ा झटका मिला है और यह केरल में परिवर्तन की शुरुआत है। इस चुनाव में केरल की पहली महिला आईपीएस अधिकारी ने बड़ी जीत दर्ज की है। रिटायर्ड डीजीपी आर श्रीलेखा ने सस्थामंगलम डिवीजन में बड़े अंतर से जीत दर्ज की है। अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 64 साल की रिटायर्ड डीजीपी को बीजेपी मेयर भी बना सकती है। अगर ऐसा होता है तो वह तिरुवनंतपुरम में बीजेपी की पहली मेयर होंगी। बता दें कि इसी साल वह बीजेपी में शामिल हुई थीं। उन्होंने निकाय चुनाव में वॉर्ड सदस्य के तौर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया। मेयर बनाने को लोकर जब श्रीलेखा से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि पार्टी का जो भी फैसला होगा, उन्हें स्वीकार होगा। उन्होने कहा, हमें पता चला है कि संस्थामंगलम वॉर्ड में आज तक किसी ने इतने ज्यादा अंतर से चुनाव नहीं जीता। मैं इस फैसले के लिए जनता को धन्यवाद देती हूं। उन्होंने कहा, मेरी उम्मीदवारी के ऐलान के बाद से ही एलडीएफ और कांग्रेस मेरी आलोचना कर रही थी। दोनों ने मेरे बारे में बुरा भला कहने में हदें पार कर दीं। मुझे खुशी है कि जनता ने उनको जवाब दे दिया है। बता दें कि शनिवार को निकाय चुनाव के परिणाम आए हैं। 101 सदस्यों वाले तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बीजेपी सबसे बड़ी पर्टी बनकर उभरी है। बीजेपी ने 50 वॉर्ड में जीत हासिल की है। वहीं सीपीआईएम- की अगुआई वाले एलडीएफ को 29 सीटें ही मिली हैं। कांग्रेस की अगुआई वाले यूडीएफ को 19 सीटों पर जीत हासिल हुई है। कौन हैं आर श्रीलेखा? जनवरी 1987 में आर श्रीलेखा केरल की पहली महिला आईपीएस बनी थीं। तीन दशक के करियर में उन्होंने कई एजेंसियों और जिलों में अपनी सेवाएं दीं। वह सीबीआई, केरल क्राइम ब्रांच, विजिलेंस, फायर फोर्स और मोटर वीइकल डिपार्टमेंट में भी सेवाएं दे चुकी हैं। 2017 में उन्हें केरल की डीजीपी बनाया गया था। सीबीआई में कार्यकाल के दौरान उन्हें निकनेम 'रेड श्रीलेखा' दे दिया गयाथा। वह भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार करते हुए बिना किसी डर के छापा डालती थीं। रिटायरमेंट के बाद वह राजनीति में ऐक्टिव होने लगीं। उन्होंने कई बार ऐक्टर दिलीप पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को खारिज किया। इसके अलावा कांग्रेस नेता राहुल मामकूटाथिल पर केस दर्ज करने में हुई देरी पर भी वह सवाल उठाती रहीं। अक्टूबर 2024 में वह औपचारिक रूप से बीजेपी में शामिल हो गईं। अब चर्चा है कि बीजेपी उन्हें तिरुवनंतपुरम का मेयर बना सकती है।  

संघर्ष से सलाम तक: डाक विभाग की नौकरी छोड़ भारतीय सेना में अफसर बने उत्तराखंड के लेफ्टिनेंट

देहरादून  सपनों का पीछा कैसे किया जाता है, यह कोई उत्तराखंड के अल्मोड़ा निवासी स्पर्श सिंह देवड़ी से सीखे। शनिवार को आईएमए की पासिंग आउट परेड में जब स्पर्श अंतिम पग पार कर रहे थे, तो यह कदम सिर्फ एक कैडेट का अफसर बनना नहीं था, बल्कि एक 'डाक बाबू' का सेना में लेफ्टिनेंट बनने तक का अविश्वसनीय सफर था। भारतीय सेना को 491 युवा सैन्य अफसर मिल गए। आईएमए देहरादून से पासआउट इन अफसरों में देश की आन, बान और शान की रक्षा के लिए मर मिटने का जज्बा दिखा। पासिंग आउट परेड की सलामी सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ली। इस दौरान 14 मित्र देशों के 34 अफसर भी पासआउट हुए, जो अपने-अपने देश की सेनाओं में सेवाएं देंगे।   मूल रूप से अल्मोड़ा के नैनी गांव के रहने वाले स्पर्श सिंह देवड़ी की कहानी युवाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है। स्पर्श अब सात-जाट रेजिमेंट में बतौर लेफ्टिनेंट अधिकारी देश की सेवा की शुरुआत करेंगे। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने करीब तीन साल तक अल्मोड़ा के जैंती गांव में शाखा डाकपाल के पद पर नौकरी की। दिन में वे ग्रामीणों की चिट्ठियां और डाक का काम संभालते थे। पिता की तरह सरहद की निगहबानी करेंगे रजत हल्द्वानी ब्लॉक कार्यालय के पास भगवानपुर निवासी रजत जोशी ने शनिवार को देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री अकैडमी (आईएमए) की पासिंग आउट परेड में हिस्सा लेकर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्राप्त किया। वह मूलरूप से बागेश्वर के कांडा कमश्यार के रहने वाले हैं। सीडीएस परीक्षा में सफलता के बाद रजत ने आईएमए में प्रशिक्षण पूरा किया। इससे पहले वह इंडियन कोस्ट गार्ड में छह माह असिस्टेंट कमांडेंट के रूप में सेवा दे चुके हैं। उनके पिता सब-इंस्पेक्टर नवीन चंद्र जोशी वर्तमान में इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस में लद्दाख में सेवारत हैं। मां चंद्रा जोशी उनके जीवन की प्रेरणा स्रोत रही हैं। अफसर बेटे ने चौड़ा कर दिया शिक्षक पिता का सीना गरमपानी खैरना बाजार के पास सूरी फार्म निवासी अखिलेश सिंह भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं। उनके पिता भवर सिंह राजकीय इंटर कॉलेज शेर में प्रवक्ता व माता पिंकी सिंह गृहिणी हैं। परिवार में उनकी बहन और भाई भी हैं। अखिलेश की इस सफलता से गांव और क्षेत्र में खुशी की लहर है। परिजनों, रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर खुशी मनाई। अखिलेश सिंह ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, गुरुजनों, भाई-बहन और मित्रों को दिया है।

न्यायपालिका में पारदर्शिता की जरूरत: चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कॉलेजियम सुधार की वकालत की

नई दिल्ली  भारत के नए मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने 24 नवंबर से अपना 15 महीने का कार्यकाल शुरू किया है। उन्होंने कॉलेजियम प्रक्रिया को और खोलने तथा लंबित मामलों से निपटने के लिए अपने रोडमैप पर चर्चा की है। उन्होंने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में अपने 14 वर्षों के कार्यकाल के दौरान ड्रग्स की समस्या से निपटने के लिए दिए गए कई आदेशों के बारे में बात की। इसके साथ ही उन्होंने कॉलेजियम प्रणाली में सुधार की वकालत की। इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि जब 2015 के आसपास यह मामला उन्हें सौंपा गया था, तब पंजाब में ड्रग्स का खतरा अत्यधिक अनियंत्रित स्तर पर था। उन्होंने इसे धैर्य की वास्तविक परीक्षा बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक आदेश से हल होने वाला मामला नहीं था। CJI को मास्टर ऑफ रोस्टर क्यों होना चाहिए? जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि CJI को मास्टर ऑफ रोस्टर कहा जाना सही है, लेकिन इस भूमिका को अक्सर गलत समझा जाता है। CJI सर्वोच्च न्यायालय का सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश होता है और यह वरिष्ठता न्यायिक भूमिका के साथ-साथ अतिरिक्त प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी लाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि मामले एकतरफा तरीके से सौंपे जाते हैं। व्यवहार में ये निर्णय अन्य न्यायाधीशों के साथ उनकी उपलब्धता, अनुभव के क्षेत्रों और न्यायालय के समग्र कामकाज को ध्यान में रखते हुए विचार-विमर्श के बाद लिए जाते हैं। न्यायिक स्वतंत्रता पर जस्टिस कांत ने पूर्ण सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि यह हमारे देश में प्रभावी न्याय वितरण प्रणाली की आधारशिला है, और यह संविधान में निहित शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के साथ चलती है। उन्होंने कहा कि हमारी जिम्मेदारी पूरी तरह से संविधान और उन लोगों के प्रति है जिनकी यह रक्षा करता है। सोशल मीडिया पर जजों की हो री आलोचना पर चीफ जस्टिस ने कहा कि सोशल मीडिया को नियंत्रित करने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह स्वतंत्रता को बाधित करने वाला एक कठोर उपाय होगा। उन्होंने माना कि जब अदालत की कार्यवाही के संक्षिप्त अंश या 'स्निपेट्स' संदर्भ के बिना ऑनलाइन साझा किए जाते हैं, तो गलतफहमी लगभग अपरिहार्य होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आलोचना अक्सर अज्ञानता से उत्पन्न होती है और इसे नजरअंदाज किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि कर्तव्यों से ध्यान हटाकर सोशल मीडिया पर ध्यान केंद्रित करने से न्याय की गुणवत्ता प्रभावित होगी। कॉलेजियम प्रणाली में सुधार चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कॉलेजियम प्रणाली का बचाव किया लेकिन स्वीकार किया कि किसी भी प्रणाली में सुधार की गुंजाइश हमेशा होती है। उम्मीदवारों के साथ व्यक्तिगत बातचीत एक स्वागत योग्य कदम है, जो कॉलेजियम के सदस्यों को उम्मीदवार का सीधे आकलन करने में मदद करता है। उन्होंने योग्यता, सत्यनिष्ठा और अनुभव पर और भी अधिक जोर देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अब नियुक्तियों में अनुमोदन और अस्वीकृति के लिए कारण बताने का प्रयास किया जाता है, जो अधिक खुलेपन की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि प्रक्रिया अंतर्निहित रूप से जटिल है और प्रणाली की अखंडता बनाए रखने के लिए कुछ आंतरिक प्रक्रियाओं को सार्वजनिक डोमेन में पूरी तरह से नहीं रखा जा सकता है।  

वंदे भारत ट्रेनों में मिलेगा स्थानीय खान-पान, सभी ट्रेनों में चरणबद्ध लागू होगा मॉडल

नई दिल्ली  फर्जी खातों पर कार्रवाई के परिणाम: 3.03 करोड़ फर्जी खातों को निष्क्रिय करने और 2.70 करोड़ से अधिक खातों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया या बंद करने के लिए चिह्नित किए जाने के बाद नई यूजर आईडी बनाने की संख्या पहले के एक लाख प्रतिदिन से घटकर 5000 तक आ गई है केंद्रीय रेल मंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री और इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज रेल भवन में अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री श्री रवनीत सिंह बिट्टू भी उपस्थित थे। केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों को वंदे भारत ट्रेनों में संबंधित क्षेत्र के स्थानीय व्यंजन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। स्थानीय व्यंजन शुरू करने से यात्रियों का अनुभव काफी बेहतर होगा क्योंकि इससे यात्रा के दौरान मिलने वाले भोजन में उस क्षेत्र की संस्कृति और स्वाद की झलक मिलेगी। यह सुविधा भविष्य में धीरे-धीरे सभी ट्रेनों में लागू की जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि फर्जी पहचान के जरिए ट्रेन टिकट बुकिंग पर भारतीय रेलवे की कार्रवाई से सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। उपयोगकर्ता की पहचान स्थापित करने और फर्जी आईडी का पता लगाने के लिए एक सख्त प्रणाली लागू होने के बाद, आईआरसीटीसी  वेबसाइट पर प्रतिदिन लगभग 5,000 नई यूजर आईडी बनाई जा रही हैं। नवीनतम सुधारों से पहले, यह संख्या प्रतिदिन लगभग एक लाख नई यूजर आईडी तक पहुंच गई थी। इन प्रयासों से भारतीय रेलवे को 3.03 करोड़ फर्जी खातों को निष्क्रिय करने में मदद मिली है। इसके अलावा, 2.7 करोड़ यूजर आईडी को या तो अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है या उनकी संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर बंद करने के लिए चिह्नित किया गया है। केंद्रीय मंत्री और राज्य मंत्री ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि टिकट प्रणाली में इस स्तर तक सुधार किया जाए जहां सभी यात्री एक वास्तविक और प्रामाणिक यूजर आईडी के माध्यम से आसानी से टिकट बुक कर सकें।

यूनुस पर संकट गहरा, सूडान में बांग्लादेशी सैनिकों की मौत, देश में बवाल और दक्षिण अफ्रीका से ताज़ा बुरी खबर

ढाका  बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस चौतरफा संकट में घिरे हैं. बांग्लादेश में चुनाव आयोग के दफ्तर को आग के हवाले कर दिया गया. वहीं अब अफ्रीका से दो बेहद चिंताजनक खबरें सामने आई हैं. एक तरफ सूडान में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन पर आतंकी हमले में बांग्लादेशी सैनिकों की जान गई है, तो दूसरी तरफ साउथ अफ्रीका में अवैध तरीके से पहुंचे बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लेकर देश से बाहर निकालने की तैयारी की जा रही है. इन दोनों घटनाओं ने एक साथ बांग्लादेश की सरकार और सुरक्षा तंत्र की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. सूडान के अशांत अबेई (Abyei) इलाके में संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन UNISFA पर हुए आतंकी हमले में बांग्लादेश के छह सैनिकों की मौत हो गई, बल्कि छह घायल हो गए. हमले के बाद अब कैसे हैं हालात? संयुक्त राष्ट्र के कैंप पर यह हमला एक ड्रोन के जरिए किया गया था. बांग्लादेश सेना के मुताबिक यह हमला इतना भीषण था कि इलाके में अब भी हालात पूरी तरह काबू में नहीं आए हैं और आतंकियों के साथ झड़प जारी है. सेना ने बताया कि घायल जवानों को निकालने और इलाज के लिए हरसंभव कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन क्षेत्र में न तो मजबूत प्रशासन है, न पुलिस व्यवस्था और न ही कोई प्रभावी न्यायिक ढांचा. संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, यह हमला पिछले तीन सालों में अबेई क्षेत्र में हुआ सबसे घातक हमला है, जिसमें अब तक 50 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. बांग्लादेश के कितने सैनिक UN में शामिल? स्थानीय प्रशासन का आरोप है कि विद्रोही गुटों ने हथियारबंद युवाओं के साथ मिलकर सुनियोजित और बर्बर हमले किए. बांग्लादेश लंबे समय से यूएन पीसकीपिंग मिशनों में बड़ा योगदान देने वाला देश रहा है और इस वक्त भी अफ्रीका के कई संघर्षग्रस्त इलाकों में उसके 6,000 से ज्यादा सैनिक और सुरक्षाकर्मी तैनात हैं. ऐसे में सैनिकों की मौत ने सरकार के सामने सुरक्षा, विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय दबाव से जुड़े कई सवाल खड़े कर दिए हैं. मोहम्मद यूनुस ने भी इस हमले पर अफसोस जताया है. बांग्लादेश के लिए दूसरी बुरी खबर क्या है? इसी बीच साउथ अफ्रीका से आई दूसरी खबर ने बांग्लादेश की चिंता और बढ़ा दी है. जोहान्सबर्ग के ओआर टैम्बो इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 16 बांग्लादेशी नागरिकों को फर्जी वीजा के साथ पकड़ा गया है. ये सभी इथियोपियन एयरलाइंस की फ्लाइट से पहुंचे थे और जांच में सामने आया कि वे मानव तस्करी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं. साउथ अफ्रीका की बॉर्डर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने बताया कि ये लोग संदिग्ध तरीके से स्थानीय यात्रियों के बीच घुलने-मिलने की कोशिश कर रहे थे, जिसके बाद उन्हें अलग कर जांच की गई. 16 बांग्लादेशियों को किया जाएगा डिपोर्ट अधिकारियों के अनुसार, इनके पास मौजूद दस्तावेज पूरी तरह फर्जी थे और यात्रा का उद्देश्य भी स्पष्ट नहीं था. अब सभी 16 बांग्लादेशी नागरिकों को देश से डिपोर्ट किया जाएगा. इसके साथ ही जिस एयरलाइन ने इन्हें यात्रा की अनुमति दी, उस पर भी जुर्माना लगाया जाएगा और डिपोर्टेशन का खर्च भी उसी से वसूला जाएगा. साउथ अफ्रीका लंबे समय से बांग्लादेश, भारत और पाकिस्तान समेत कई देशों के नागरिकों की अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के जरिए प्रवेश को लेकर चिंता जताता रहा है.

बंगाल की खाड़ी में भारत का नो फ्लाई जोन, पाकिस्तान और बांग्लादेश में बढ़ी हलचल

नई दिल्ली भातर एक बार फिर से कुछ बड़ा करने जा रहा है. यही वजह है कि रणनीतिक रूप से महत्‍वपूर्ण बंगाल की खाड़ी में 2520 किलोमीटर तक के लिए NOTAM (Notice to Airmen/Air Mission) जारी किया है. इसका मतलब यह हुआ कि तय तिथि और समय पर बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) में संबंधित रूट से न तो कोई एयरक्राफ्ट गुजरेगा और न कोई शिप इस मार्ग से ट्रैवल करेगा. इसका उद्देश्‍य किसी भी तरह की दुर्घटना को रोकना है. भारत ने बे ऑफ बंगाल में ढाई हजार किलोमीटर के नो फ्लाई जोन की घोषणा ऐसे वक्‍त में की है जब पड़ोसी देश पाकिस्‍तान और बांग्‍लादेश में किसी ने किसी वजह से हाहाकार और खलबली की स्थिति है. बांग्‍लादेश में चुनाव आयोग के दफ्तर को आमलोगों ने आग के हवाले कर दिया तो पाक‍िस्‍तान में देश के लिए वफादार मानी जाने वाली खुफिया एजेंसी ISI के पूर्व चीफ फैज हमीद का ही कोर्ट मार्शल कर दिया गया है. डीआरडीओ (DRDO) ने 17 से 20 दिसंबर 2025 के बीच बंगाल की खाड़ी में एक मिसाइल परीक्षण तय किया है. इसके कारण 2520 किलोमीटर तक का बहुत बड़ा नो फ्लाई और नो शिप जोन घोषित किया गया है. यह NOTAM रोजाना सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे (भारतीय समय के अनुसार) तक लागू रहेगा. यह अक्टूबर में हुए परीक्षण के 1480 किलोमीटर क्षेत्र से कहीं बड़ा है, जिससे संकेत मिलता है कि इस बार लंबी दूरी की मिसाइल का परीक्षण हो सकता है. सुरक्षा कारणों से नागरिक विमान और जहाजों को अपना रास्ता बदलना होगा. भारतीय वायुसेना और नौसेना इस क्षेत्र की निगरानी करेंगी, क्योंकि परीक्षण के दौरान मलबा गिरने की आशंका रहती है. DRDO की क्‍या है प्‍लानिंग? अब सवाल उठता है कि DRDO की आखिर प्‍लानिंग क्‍या है जो ढाई हजार किलोमीटर से भी ज्‍यादा के क्षेत्र के लिए NOTAM जारी किया गया है. ‘इंडियन डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस ट्रायल का स्वरूप K-4 पनडुब्बी से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) से मेल खाता है. यह भारत की आधुनिक ठोस ईंधन (Solid Fuel) वाली मिसाइल है, जो अग्नि मिसाइल सीरीज पर आधारित है. K-4 कार्यक्रम का उद्देश्य परमाणु क्षमता वाली पनडुब्बी से दागी जाने वाली मिसाइल विकसित करना है, ताकि भारत के परमाणु त्रिकोण (थल-जल-वायु) के समुद्री हिस्से को मजबूत किया जा सके. यह छोटी दूरी की K-15 सागरिका की सीमाओं को दूर करती है. डीआरडीओ की डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैबोरेटरी (DRDL) के नेतृत्व में बनी यह मिसाइल अग्नि-III तकनीक पर आधारित है, जिससे इसकी सुरक्षा और दूसरी बार जवाबी हमले की क्षमता बढ़ती है. इसका विकास 2009 में आईएनएस अरिहंत के लॉन्च के बाद शुरू हुआ. NOTAM क्या होता है? NOTAM का मतलब है Notice to Airmen. यह एक आधिकारिक सूचना होती है, जिससे पायलटों और एयरलाइंस को उड़ान से जुड़ी ज़रूरी जानकारी दी जाती है. NOTAM क्यों जारी किया जाता है? जब किसी इलाके में उड़ान के लिए खतरा हो या कोई विशेष गतिविधि हो (जैसे मिसाइल परीक्षण, सैन्य अभ्यास, रनवे बंद होना) तो NOTAM जारी किया जाता है. NOTAM से आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा? आम लोगों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के रूट बदले जा सकते हैं या उड़ानों में देरी हो सकती है. NOTAM क्यों ज़रूरी होता है? यह उड़ान और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी होता है, ताकि किसी तरह की दुर्घटना न हो. क्‍यों है इतना खास? INS अरिहंत (2016 में कमीशन) और INS अरिघात (2024) में प्रत्येक में 4-4 K-4 मिसाइलें तैनात हैं. S4 कैटेगरी की पनडुब्बियों (2025 के बाद) में यह संख्या 8 तक हो जाएगी. साल 2025 के मध्य तक K-4 ने अरिहंत श्रेणी की परमाणु पनडुब्बियों पर पूरी तरह ऑपरेशनल कैपेबिलिटी हासिल कर ली थी. 17-20 दिसंबर 2025 के बीच बंगाल की खाड़ी में जारी NOTAM (2520–3550 किमी क्षेत्र) संभवतः K-4 की आगे की पुष्टि या यूजर ट्रायल के लिए है. K-4 मिसाइल सुरक्षित समुद्री गहराइयों से चीन और पाकिस्तान तक निशाना साध सकती है. इसकी मारक क्षमता K-15 की 750 किमी सीमा से कहीं अधिक है, जिससे भारत का परमाणु त्रिकोण (Nuclear Tirade) पूरा होता है. इसके बाद K-5 (5000+ किलोमीटर परीक्षण में) और K-6 (8000 किमी MIRV क्षमता वाली) मिसाइलें 2030 के दशक तक S5 श्रेणी की पनडुब्बियों के लिए विकसित की जा रही हैं. स्वदेशी तकनीक से उत्पादन बढ़ाया जा रहा है, जो विशाखापत्तनम में पूर्वी नौसेना बेड़े के विस्तार से जुड़ा है. क्‍या हैं तकनीकी खासियत? K-4 मिसाइल की लंबाई 10–12 मीटर, व्यास 1.3 मीटर और वजन 17–20 टन है. यह 1–2 टन तक का पेलोड ले जा सकती है, जिसमें MIRV वारहेड भी शामिल हो सकते हैं. इसकी रेंज 3000–3500 किमी है (कम भार पर 4000 किमी तक). इसमें इनर्शियल (जड़त्वीय) नेविगेशन सिस्‍टम है, जिसे GPS/NavIC से जोड़ा गया है, जिससे इसकी सटीकता 10 मीटर से कम (CEP) रहती है. यह 20–50 मीटर गहराई से पनडुब्बी से लॉन्च की जा सकती है और अरिहंत श्रेणी की वर्टिकल लॉन्च प्रणाली से जुड़ी है.

2025 में गूगल पर क्या रहा नंबर-1 सर्च? पूरी लिस्ट देखकर आप भी रह जाएंगे हैरान

नई दिल्ली  साल 2025 खत्म होने के करीब है और इस बीच गूगल ने अपनी सालाना 'ईयर इन सर्च' रिपोर्ट जारी कर दी है। इस रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि इस साल भारत में लोग किन चीज़ों को सबसे ज्यादा सर्च करते रहे। फिल्में, क्रिकेट, ताज़ा खबरें और ट्रेंडिंग इवेंट्स के अलावा इस साल एक चीनी नंबर ने सभी को हैरान कर दिया। यह नंबर है 5201314, जिसे 'Meaning' कैटेगरी में टॉप सर्च में शामिल किया गया और लोगों की जिज्ञासा का बड़ा कारण बना। रिपोर्ट के अनुसार, गूगल सर्च की मीनिंग कैटेगरी में 5201314 को पाँचवां स्थान मिला। पहली नजर में यह केवल अंकों का सामान्य क्रम लगता है, लेकिन इसके पीछे एक खास और रोमांटिक अर्थ छिपा हुआ है। 5201314 का मतलब यह कोई आम नंबर नहीं है। चीनी भाषा में कुछ नंबरों का उच्चारण शब्दों जैसा सुनाई देता है और इसी वजह से नंबरों के माध्यम से भावनाएं व्यक्त करने का चलन वहाँ काफी पॉपुलर है। चीनी भाषा में 5201314 का मतलब होता है: "मैं तुमसे जिंदगी भर प्यार करूंगा"। 520 को चीनी में 'वू अर लिंग' बोला जाता है, जो उच्चारण में 'वो आई नी' जैसा सुनाई देता है, अर्थात 'आई लव यू'।   इसलिए 5201314 का पूरा अर्थ होता है – मैं तुमसे हमेशा-हमेशा प्यार करूंगा। सोशल मीडिया पर लोग इसे प्यार जताने के लिए इस्तेमाल करते हैं। कुछ लोग तो अपनी वेबसाइट या सोशल प्रोफाइल का नाम भी 5201314 रखते हैं। अन्य सबसे ज्यादा सर्च किए गए शब्द और उमके मतलब गूगल रिपोर्ट के अनुसार, इस साल भारत में मीनिंग कैटेगरी में सबसे ज्यादा सर्च किए गए शब्दों में शामिल हैं: Ceasefire meaning, Mock Drill meaning, Pookie meaning, Mayday meaning, 5201314 meaning, Stampede meaning, Ee Sala Cup Namde meaning, Nonce meaning, Latent meaning और Incel meaning। गूगल ने अपनी सर्च प्रणाली में एआई फीचर को इंबेड किया है। इसके तहत यूजर्स जब भी कोई शब्द सर्च करते हैं, उन्हें उस शब्द का संक्षिप्त एआई ओवरव्यू मिलता है। इसके साथ ही यदि कोई चाहें तो शब्द की डिटेल्ड जानकारी भी देख सकते हैं। इस तरह, 2025 में भारत में गूगल पर लोगों की दिलचस्पी न केवल फिल्मों और खेलों में थी, बल्कि खास और रोमांटिक नंबर 5201314 ने भी सर्च ट्रेंड में अपनी जगह बनाई।  

ब्रिटेन ट्रेड डील से भारत को नुकसान नहीं, कंपल्सरी लाइसेंसिंग जारी रहेगी — केंद्र

नई दिल्ली  भारत और ब्रिटेन के बीच हुए व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (सीईटीए) से भारत के कंपल्सरी लाइसेंसिंग के अधिकारों पर किसी भी तरह की पाबंदी नहीं लगेगी। यह जानकारी सरकार की ओर से दी गई। यह समझौता भारत को जनहित और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में पूरी स्वतंत्रता देता है। खासतौर पर किसी स्वास्थ्य आपात स्थिति में भारत अपने कानून के अनुसार दवाओं के लिए कंपल्सरी लाइसेंस जारी कर सकता है। सरकार के मुताबिक, इस समझौते में ऐसे मजबूत प्रावधान शामिल किए गए हैं, जो भारत की नीतिगत स्वतंत्रता को पूरी तरह सुरक्षित रखते हैं। सीईटीए में यह स्पष्ट किया गया है कि भारत और ब्रिटेन दोनों को बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापार संबंधी पहलू (टीआरआईपीएस) समझौते के तहत मिलने वाली सभी छूटों का उपयोग करने का अधिकार रहेगा। इसमें अनुच्छेद 31 और 31बीआईएस के तहत कंपल्सरी लाइसेंस जारी करने का अधिकार भी शामिल है। इससे भारत बिना किसी अतिरिक्त शर्त के जनहित में फैसले ले सकता है। राज्यसभा में वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि भारत के पेटेंट एक्ट 1970 की धारा 84 (सामान्य कंपल्सरी लाइसेंस) और धारा 92 (जन स्वास्थ्य आपात स्थिति में कंपल्सरी लाइसेंस) पूरी तरह लागू रहेंगी। इस समझौते के चलते इन कानूनों में किसी तरह के बदलाव या कमजोरी की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समझौते में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो कंपल्सरी लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को धीमा करे या उस पर अतिरिक्त शर्तें लगाए। इस ट्रेड समझौते के तहत भारत को ब्रिटेन के सरकारी खरीद बाजार में बिना भेदभाव के पहुंच मिलेगी, जिसकी सालाना कीमत करीब 90 अरब पाउंड (करीब 122 अरब डॉलर) है। इसमें ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) जैसी बड़ी संस्थाएं भी शामिल हैं। इससे मुख्य रूप से आईटी, फार्मा और सेवा क्षेत्र की भारतीय कंपनियों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि सीमित और नियंत्रित दायरे में विदेशी कंपनियों को सरकारी परियोजनाओं में भाग लेने की अनुमति देने से कंपटीशन बढ़ेगा। इससे लागत कम होगी, गुणवत्ता बेहतर होगी और नई तकनीकों को अपनाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, यह पहली बार है जब ब्रिटेन ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सरकारी खरीद समझौते और अपने अन्य मुक्त व्यापार समझौतों के कुछ सख्त प्रावधानों में ढील देने पर सहमति जताई है। इससे भारत को इस समझौते के तहत अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना है।