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मौसम का कहर शुरू: 16 दिसंबर तक भयंकर बारिश का अनुमान, IMD ने इन राज्यों को किया सतर्क

नई दिल्ली  इस साल मानसून का सीजन देश के लिए काफी अच्छा रहा। लगभग सभी राज्यों में जमकर बारिश हुई और कई जगहों पर पिछले सालों के रिकॉर्ड भी टूटे। अच्छी बारिश के चलते नदियां, तालाब और बांध लबालब भर गए। मानसून खत्म होने के बाद भी कुछ राज्यों में बारिश का सिलसिला जारी है। अब एक नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से एक बार फिर मौसम बदलने वाला है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज से 16 दिसंबर के बीच देश के कई हिस्सों में भारी बारिश, बर्फबारी और ठंड को लेकर अलर्ट जारी किया है। हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और बर्फबारी की संभावना हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान भारी बारिश हुई थी, लेकिन बाद में मौसम साफ हो गया था। अब पश्चिमी विक्षोभ के असर से एक बार फिर बारिश शुरू हो गई है। मौसम विभाग के मुताबिक आज से 16 दिसंबर तक राज्य में तेज बारिश हो सकती है और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की भी आशंका है। जम्मू-कश्मीर में बदलेगा मौसम जम्मू-कश्मीर में भी मानसून के बाद मौसम शांत था, लेकिन अब पश्चिमी विक्षोभ के कारण यहां फिर से बारिश और बर्फबारी हो सकती है। IMD ने अगले तीन दिनों तक कई इलाकों में बादल बरसने का अनुमान जताया है। इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने उत्तराखंड, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भारी बारिश की चेतावनी दी है। कुछ जगहों पर तेज हवाएं, बिजली गिरने और धूल भरी आंधी चलने की भी संभावना है।   इन इलाकों में जमकर बरसेंगे बादल केरल, कर्नाटक और अंडमान-निकोबार में आज से 16 दिसंबर के बीच लगातार बारिश हो सकती है। लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। राजस्थान और दिल्ली में बढ़ेगी ठंड राजस्थान और दिल्ली में मानसून के दौरान अच्छी बारिश हुई थी, लेकिन अब ठंड का असर तेज होता जा रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के कारण इन दोनों राज्यों में अगले कुछ दिनों में कड़ाके की ठंड पड़ सकती है।

लातविया में बढ़ी मर्दों की कमी, महिलाएं अब ले रही हैं ‘हज़बैंड फॉर एन ऑवर’ – क्या है इसका असर?

रीगा दुनिया में ज्यादातर देशों में पुरुषों की संख्या महिलाओं से अधिक होती है, लेकिन यूरोप का छोटा-सा देश लातविया बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करता है.यहां महिलाओं की आबादी पुरुषों से इतनी ज्यादा है कि कई महिलाएं घर का काम संभालने के लिए 'भाड़े के पति' तक रखने लगी हैं.ये पुरुष अस्थायी तौर पर बुलाए जाते हैं और घरेलू काम जैसे पाइपलाइन ठीक करना, पर्दे लगाना, बढ़ईगिरी या टीवी माउंट करना सब कुछ कर देते हैं. द सन की रिपोर्ट कहती है कि लातविया में कई कंपनियां ऐसे पुरुष उपलब्ध कराती हैं, जो तकनीकी और घरेलू मरम्मत से जुड़े काम संभालते हैं. महिलाएं फोन या ऑनलाइन बुकिंग करके 'हस्बैंड फॉर एन ऑवर' को अपने घर बुला सकती हैं और विशेषज्ञ सिर्फ 60 मिनट में पहुंचकर पाइपलाइन, पेंटिंग, बढ़ईगिरी या अन्य काम निपटा देते हैं. लातविया की एक फेस्टिवल वर्कर दनिया ने द सन से कहा कि इसमें कुछ गलत नहीं… लेकिन थोड़ा बैलेंस बनाए रखने के लिए देश में कुछ और पुरुष होने चाहिए. बात करने, फ्लर्ट करने सब में मजा आता है.उनकी दोस्त जाने ने भी कहा-इसी कमी के चलते मेरी ज्यादातर सहेलियां विदेश जाकर बॉयफ्रेंड बना रही हैं. किराए पर पतियों को क्यों बुलाती हैं महिलाएं द न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, लातविया में पुरुषों की कमी इतनी बढ़ गई है कि महिलाओं को घर के मुश्किल कामों के लिए किराए पर “घंटे भर के पति” बुलाने पड़ रहे हैं। यहां महिलाओं की संख्या पुरुषों से करीब 15% अधिक है, जिसके कारण जेंडर इम्बैलेंस पैदा हो गया है। इसी वजह से घर के वे काम, जिनमें पुरुषों की जरूरत होती है, उन्हें पूरा कराने के लिए महिलाएं कुछ समय के लिए पुरुष हेल्पर्स की सेवाएं लेती हैं। क्यों है ये चिंता करने वाली बात दुनिया के कई देशों में युवाओं की तुलना में बुजुर्गों की संख्या अधिक होती है, और यह स्थिति सामान्य मानी जाती है क्योंकि इसमें जेंडर असंतुलन जैसी समस्या कम होती है। लेकिन वर्ल्ड एटलस की एक रिपोर्ट के अनुसार, लातविया में 65 साल से अधिक उम्र के लोगों में महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में लगभग दोगुनी है। इस गंभीर जेंडर इम्बैलेंस का असर ये है कि महिलाओं के लिए सही जीवनसाथी ढूंढना मुश्किल होता जा रहा है, जिससे रिश्तों को लेकर चुनौतियां बढ़ रही हैं। पुरुषों की कमी से क्या असर पड़ता है द पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, लातविया में महिलाएं मानती हैं कि जेंडर असमानता के कारण रोजमर्रा की जिंदगी और काम वाली जगहों पर पुरुषों की कमी साफ दिखाई देती है। एक महिला ने बताया कि उसके ऑफिस में सभी सहकर्मी महिलाएं ही हैं। हालांकि माहौल अच्छा रहता है, लेकिन पुरुषों के होने से काम और भी रोचक बन जाता। इसी कमी के चलते कई महिलाएं सही पार्टनर की तलाश में विदेशों का रुख करती हैं, ताकि उन्हें बैलेंस और परफेक्ट जीवनसाथी मिल सके। कैसे सामने आया ये ट्रेंड? लातविया में पुरुषों की कमी बढ़ने के साथ ही घर के कामकाज संभालने की जिम्मेदारी अकेली महिलाओं पर आ गई. जैसे-जैसे विवाह दर गिरती गई और पुरुषों की संख्या कम होती गई, महिलाओं ने घरेलू जरूरतों के लिए पेशेवर मदद लेना शुरू किया. इसी से जन्म हुआ 'हस्बैंड फॉर एन ऑवर' जैसे सेवाओं का, जहाँ प्रशिक्षित पुरुष पैसे लेकर वही काम करते हैं जो आमतौर पर परिवार का पुरुष सदस्य करता है. जैसे मरम्मत, फिक्सिंग, इंस्टॉलेशन और रोज़मर्रा के छोटे-मोटे काम. कैसे बदली जनसंख्या की तस्वीर? लातविया के केंद्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के  जारी ताज़ा आंकड़े चौंकाते हैं. रिपोर्ट के अनुसार 18 साल से ऊपर की आबादी में सिर्फ 44.6 फीसदी लोग विवाहित हैं.15.6 फीसदी लोग तलाकशुदा हैं और 29.6 फीसदी लोग अविवाहित हैं. इसका मायने ये है कि देश में बड़ी संख्या में महिलाएं अकेली रह रही हैं और घर के दैनिक कामों में सहायता के लिए अस्थायी पति रखना, यानी पेड पार्टनर, एक उभरता ट्रेंड बन गया है. रिपोर्ट कहती है कि 100 आत्महत्याओं में 80 फीसदी से ज्यादा पुरुष होते हैं. यहां की महिलाएं पुरुषों की तुलना में औसतन 11 साल अधिक जीती हैं. देश की औसत आयु भी करीब 44.1 वर्ष है. यहां की महिलाएं इस एप्स से बुलाती हैं इस देश की महिलाओं का मानना है कि पुरुषों की कमी उन्हें हर जगह महसूस होती है। चाहे रोजमर्रा के घरेलू काम हों या इमोशनल सपोर्ट की जरूरत, हर स्थिति में पुरुषों की अनुपस्थिति खटकती है। इसी वजह से यहां Komaanda 24 जैसे प्लेटफॉर्म “Men with Golden Hands” के नाम से सेवाएं उपलब्ध कराते हैं, जिनमें प्लंबिंग, कारपेंट्री, रिपेयर या टीवी इंस्टॉलेशन जैसे कामों के लिए पुरुषों को बुलाया जाता है। इसके अलावा Remontdarbi.lv नाम की वेबसाइट पर महिलाएं फोन पर बात करने या घर के कामों के लिए “घंटे भर के पति” हायर करती हैं, जो पेंटिंग, घरेलू मरम्मत और मेंटेनेंस जैसे काम संभालते हैं। ये ट्रेंड लातविया तक सीमित नहीं है पहले भी देखा गया यह कॉन्सेप्ट सिर्फ लातविया तक सीमित नहीं है। 2022 में यूके की लौरा यंग तब वायरल हो गईं जब उन्होंने अपने पति जेम्स को घर-घर जाकर छोटे-मोटे काम करने के लिए किराए पर भेजना शुरू किया, ताकि घर में थोड़ी इनकम आ सके। उनके बिजनेस का नाम है “Rent My Handy Husband”, जिसमें घर के आम काम जैसे पेंटिंग, डेकोरेशन, टाइल लगाना, कारपेट बिछाना और दूसरे DIY काम शामिल हैं। 42 साल के जेम्स एक घंटे का लगभग 44 डॉलर और पूरे दिन का 280 डॉलर चार्ज करते हैं। यह सर्विस इतनी मशहूर हो गई कि कई कामों को मना भी करना पड़ा।

120 किमी रेंज की पिनाका से और मजबूत होगी भारतीय सेना, ऑपरेशन सिंदूर में मचा चुकी है तबाही

 नई दिल्ली भारतीय सेना ने अपनी तोपखाना ताकत को और बढ़ाने के लिए 120 किलोमीटर तक मार करने वाली गाइडेड पिनाका रॉकेट्स को शामिल करने का प्रस्ताव पेश किया है. इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 2500 करोड़ रुपये है. यह कदम ऑपरेशन सिंदूर के बाद लंबी दूरी की आर्टिलरी क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है. प्रस्ताव का विवरण और विकास प्रक्रिया रक्षा अधिकारियों के अनुसार, ये नई गाइडेड रॉकेट्स रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित की जाएंगी. DRDO पहले से ही इस 120 किमी रेंज वाले संस्करण का विकास उन्नत चरण में कर रहा है. जल्द ही पहले परीक्षण किए जाने की उम्मीद है, शायद अगले वित्तीय वर्ष में. परीक्षण सफल होने के बाद बोली प्रक्रिया से विकास-सह-उत्पादन पार्टनर्स (DcPPs) चुने जाएंगे, जो इनका बड़े पैमाने पर निर्माण करेंगे. यह प्रस्ताव बहुत जल्द रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व वाला रक्षा मंत्रालय स्वदेशी हथियारों के विकास को विशेष प्राथमिकता दे रहा है. मौजूदा लॉन्चर से लाभ सबसे बड़ी खासियत यह है कि नई 120 किमी रेंज वाली रॉकेट्स को मौजूदा पिनाका लॉन्चरों से ही दागा जा सकेगा. फिलहाल ये लॉन्चर 40 किमी और 75 किमी से ज्यादा दूरी वाली रॉकेट्स चला सकते हैं. इससे सेना को नए लॉन्चर खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे लागत बचत होगी और तेजी से अपग्रेड संभव होगा. पिनाका सिस्टम एक मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर (एमबीआरएल) है, जो 44 सेकंड में 12 रॉकेट्स दाग सकता है. यह तेज प्रतिक्रिया, सटीकता और क्षेत्र पर भारी नुकसान पहुंचाने की क्षमता के लिए जाना जाता है. हाल के अनुबंध और मौजूदा रेजिमेंट्स की मजबूती इस साल की शुरुआत में रक्षा मंत्रालय ने पिनाका सिस्टम को और मजबूत करने के लिए बड़े अनुबंध किए थे. इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड (EEL) और म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड (MIL) के साथ एरिया डिनायल म्यूनिशन (ADM) टाइप-1 और हाई एक्सप्लोसिव प्री-फ्रैगमेंटेड (HEPF) एमके-1 रॉकेट्स की खरीद के लिए कुल 10,147 करोड़ रुपये के करार हुए. इसके अलावा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ शक्ति सॉफ्टवेयर के अपग्रेड का अनुबंध भी हुआ. ये सभी करार रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में हुए थे. सेना मौजूदा पिनाका रेजिमेंट्स को मजबूत कर रही है. हाल में एरिया डिनायल गोला-बारूद के ऑर्डर भी दिए गए हैं. पिनाका की सफलता कहानी और सेना का समर्थन पिनाका स्वदेशी हथियारों की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक है. सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्पष्ट कहा है कि जैसे ही लंबी रेंज वाली पिनाका तैयार होगी, सेना अन्य वैकल्पिक हथियारों की योजनाओं को छोड़ सकती है. यह सेना की इस सिस्टम पर पूरी तरह भरोसे को दिखाता है. ऑपरेशन सिंदूर में इसने पाकिस्तान की हालत खराब कर दी थी.      

महिला अपराधियों की संख्या में वृद्धि, जानिए दुनिया भर के जेलों में कितनी महिलाएं बंद हैं

 नई दिल्ली  पुरुषों की तुलना में कम संख्या में महिलाओं को जेल भेजा जाता है. इसके बावजूद दुनियाभर के जेलों में महिला कैदियों की संख्या बढ़ रही है. ऐसे में जानते हैं कि मौजूदा समय में दुनिया भर के जेलों में बंद महिला कैदियों की कुल संख्या कितनी है और इस मामले में सबसे आगे कौन सा देश है. साथ ही ऐसा होने के पीछे क्या वजहें हैं, इसे जानने की कोशिश करेंगे.  गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में महिला कैदियोंकी संख्या बढ़ रही है.  महिलाओं को  ज्यादातर मामलों में गैर-हिंसक अपराधों के लिए जेल भेजा जाता है. महिलाओं द्वारा किए गए अपराध अक्सर गरीबी से  जुड़े होते हैं. महिलाएं अक्सर अपने परिवार और बच्चों का भरण-पोषण और जीवित रहने के लिए गैर हिंसक अपराधों में संलग्न हो जाती हैं. इनमें तस्करी से लेकर देह व्यापार तक शामिल होता है.  विश्वभर में कितनी महिलाएं जेल में बंद हैं? अपराध और न्याय नीति अनुसंधान संस्थान (Institute for Crime and Justice Policy Research)के अनुसार, विश्व स्तर पर 733,000 से अधिक महिलाएं और लड़कियां जेलों में बंद हैं. इनमें से कईयों या तो मुकदमे से पहले हिरासत में लिया गया है, कई विचाराधीन कैदी हैं, कुछ दोषी ठहराई गई हैं और कईयों को सजा सुनाया जा चुका है.  माना जाता है कि जेलों में बंद महिलाओं की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि पांच देशों के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं और चीन के आंकड़े अपुष्ट हैं.राष्ट्रीय जेलों में बंद कैदियों की कुल संख्या में महिलाएं हमेशा अल्पसंख्यक रही हैं.   जेल में तेजी से बढ़ रही है महिलाओं की संख्या जेलों में बंद महिला और पुरुषों की संख्या में  महिलाओं का औसत केवल 2-9% रहा है. यह आंकड़ा 2024 में वैश्विक रूप से बढ़ा. क्योंकि पिछले साल जेल में बंद लोगों में महिलाओं और लड़कियों की हिस्सेदारी मात्र 6.8% पहुंच गई है. जेल जाने के मामले में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या अधिक तेजी से बढ़ रही है. वर्ष 2000 से लेकर अब तक, जेल में बंद महिलाओं और लड़कियों की संख्या में लगभग 60% की वृद्धि हुई है – जो पुरुषों की जेल आबादी में लगभग 22% की वृद्धि की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है. 2020 के अंत तक पिछले 10 वर्षों में विश्वस्तर पर जेल में बंद महिलाओं की संख्या में 100,000 से अधिक की वृद्धि हुई है. किन देशों में सबसे अधिक महिलाएं जेल में हैं? अगर देश की बात करें तोअमेरिका में महिला कैदियों की संख्या सबसे अधिक है, जो 174,607 है. इसके बाद चीन में 145,000 महिलाएं और लड़कियां जेल में बंद हैं. साथ ही मुकदमे से पहले की हिरासत और प्रशासनिक हिरासत (जब किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के हिरासत में रखा जाता है) में अज्ञात संख्या में महिलाएं और लड़कियां हैं. अमेरिका और चीन के बाद बाद ब्राजील में 50,441, रूस में 39,153, थाईलैंड में 33,057, भारत में 23,772, फिलीपींस में 17,121, तुर्की में 16,581, वियतनाम 15,152, मैक्सिको में 13,841 और इंडोनेशिया में 13,044 महिला कैदी हैं.  इंग्लैंड और वेल्स में 3,566 महिलाएं जेल में हैं – जो कुल कैदियों की संख्या का 4% है , लेकिन अनुमान है कि 2027 तक यह संख्या बढ़कर 4,200 हो जाएगी. यूरोप में 94,472 महिलाएं हिरासत में हैं , जबकि ऑस्ट्रेलिया में 3,473 महिलाएं जेल में हैं, जो कुल कैदियों की संख्या का लगभग 8% है. महिलाओं के जेल जाने के पीछे गरीबी है बड़ी वजह पेनल रिफॉर्म इंटरनेशनल, वीमेन बियॉन्ड वॉल्स और ग्लोबल कैंपेन टू डिक्रिमिनलाइज़ पॉवर्टी एंड स्टेटस द्वारा किए गए शोध में पाया गया कि कानून जीवनयापन के लिए किए जाने वाले कुछ कृत्यों को अपराध मानते हैं और महिलाएं इससे असमान रूप से प्रभावित होती हैं.  कुछ देशों में, गर्भपात, व्यभिचार, यौन दुराचार और वेश्यावृत्ति को अपराध मानने वाले कानून  महिलाओं को ही प्रभावित करते हैं. इसके अलावा महिलाओं को  कारावास की सजा मिलने की एक वजह आर्थिक रूप से असमर्थता भी है. क्योंकि छोटे-मोटे अपराधों के लिए जुर्माना भरने या जमानत राशि का भुगतान करने में गरीबी की वजह से महिलाएं असमर्थ होती हैं. इस वजह से उन्हें जेल में डाल दिया जाता है.

कानूनी सिस्टम के कमजोर होते ही पाकिस्तान में हवाला–क्रिप्टो का खतरनाक गठजोड़

नई दिल्ली   पाकिस्तान इस समय एक खतरनाक मोड़ पर खड़ा है, जहां एक ओर उसकी औपचारिक अर्थव्यवस्था दम तोड़ रही है, वहीं दूसरी ओर अंडरग्राउंड या अनौपचारिक अर्थव्यवस्था तेजी से फल-फूल रही है। यह खुलासा पाकिस्तान के अखबार डेली टाइम्स में छपी एक नई रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया कि अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में दुबई में चल रहे हवाला नेटवर्क, कराची और पेशावर से संचालित टेलीग्राम क्रिप्टो ग्रुप, एक-कमरे वाले फर्जी “एक्सपोर्ट हाउस” से जारी आईटी इनवॉइस और अरबों रुपयों का रियल एस्टेट, गोल्ड, ऑफशोर वॉलेट और डबल बिलिंग वाले व्यापार मार्गों में छिपाया जाना शामिल हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था (अनडॉक्यूमेंटेड इकोनॉमी) इतनी तेजी से बढ़ रही है कि कोई भी औपचारिक सुधार उसे पकड़ नहीं पा रहा है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट जवाद सलीम लिखते हैं कि लोग कानून तोड़ने की इच्छा से नहीं, बल्कि इसलिए औपचारिक सिस्टम छोड़ रहे हैं क्योंकि सरकारी सिस्टम धीमा, सख्त और अनिश्चित हो चुका है, जबकि गैर-कानूनी रास्ते तेज और आसान हैं। सच्चाई यह है कि लोग अवैध तरीकों की ओर जा रहे हैं, क्योंकि सरकार ने वैध तरीके से काम करना आर्थिक रूप से घाटे का सौदा बना दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर किसी पाकिस्तानी निर्यातक को बैंक के जरिए पैसा मंगवाने में 3 से 5 दिन का इंतजार करना पड़े, बार-बार टैक्स देना पड़े और हर डॉलर पर एफबीआर की जांच झेलना पड़े, तो वह स्वाभाविक ही हवाला एजेंट को चुनेगा, जो बिना कागजी कार्रवाई के मिनटों में भुगतान कर देता है। इसी तरह, एक सॉफ्टवेयर फ्रीलांसर, जिसे आधिकारिक भुगतान पाने से पहले कॉन्ट्रैक्ट, एनडीए और क्लाइंट की पूरी जानकारी देनी पड़ती है, क्रिप्टो वॉलेट को प्राथमिकता देगा जहां पैसा तुरंत और बिना जांच के मिल जाता है। ग्लोबल फाइनेंशियल इंटीग्रिटी की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान को हर साल इन तरीकों से अरबों डॉलर का नुकसान होता है और इन सबका सीधा असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुसार, पाकिस्तान को टैक्स में होने वाला नुकसान जीडीपी के 6 प्रतिशत से ज्यादा है, जो देश के सालाना रक्षा बजट से भी अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जब पैसा बैंकों से बाहर रहता है तो जमा राशि कम होती है, निजी क्षेत्र को कर्ज मिलना घटता है और सरकार को मजबूरी में बैंकों से ज्यादा उधार लेना पड़ता है। रिपोर्ट के अनुसार, अब यह शैडो इकोनॉमी सिर्फ छिपी हुई व्यवस्था नहीं रही, बल्कि यही असली सिस्टम बन चुकी है।

आतंक समर्थकों पर शिकंजा: जम्मू-कश्मीर में 150+ ओवर ग्राउंड वर्कर्स गिरफ्तार/हिरासत में

श्रीनगर  जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बलों ने शनिवार को आतंकवादी संगठनों के ओवर ग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की और पूछताछ के लिए 150 से ज्यादा संदिग्धों को हिरासत में लिया। पुलिस ने बताया कि श्रीनगर में अब तक 150 से ज्यादा संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है, जबकि घाटी के कई हिस्सों में ओवर ग्राउंड वर्कर्स के खिलाफ कार्रवाई जारी है। एक अधिकारी ने बताया कि बैन संगठन जैश-ए-मोहम्मद और घाटी के दूसरे आतंकी संगठनों के टेरर नेटवर्क को खत्म करने के लिए ओजीडब्ल्यू के खिलाफ यह कार्रवाई शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि ओजीडब्ल्यू नेटवर्क के खिलाफ बड़े पैमाने पर चल रही कार्रवाई के तहत कश्मीर घाटी के कई हिस्सों में कई जगहों पर छापे मारे जा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बल आतंकवाद के पूरे सपोर्ट सिस्टम को खत्म करने की नई रणनीति के तहत आतंकवादियों, उनके ओजीडब्ल्यू और हमदर्दों के खिलाफ आक्रामक ऑपरेशन चला रहे हैं। ड्रग तस्कर, ड्रग पेडलर और हवाला मनी रैकेट और दूसरी गैर-कानूनी फाइनेंशियल एक्टिविटी में शामिल लोग भी सुरक्षा बलों की नजर में हैं। माना जाता है कि ड्रग तस्करी और गैर-कानूनी फाइनेंशियल एक्टिविटी से मिले फंड का इस्तेमाल आखिर में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को सपोर्ट करने के लिए किया जाता है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल नियमित रूप से सुरक्षा समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। उन्होंने सुरक्षा बलों को आतंकवाद के खिलाफ 360-डिग्री अप्रोच अपनाने का निर्देश दिया है ताकि सिर्फ़ बंदूक चलाने वाले आतंकवादियों पर ध्यान देने के बजाय, आतंकवाद के पूरे सपोर्ट सिस्टम को खत्म किया जा सके और जम्मू-कश्मीर में स्थायी शांति लाई जा सके। जबकि, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बल अंदरूनी इलाकों में आतंकवाद विरोधी ड्यूटी पर तैनात हैं, सेना और बीएसएफ नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ, बाहर निकलने, ड्रग तस्करी और सीमा पार से ड्रोन गतिविधियों को रोकने के लिए तैनात हैं।

मेसी को न देख पाने का मलाल खत्म! निराश दर्शकों का पैसा लौटेगा, बोले बंगाल डीजीपी

कोलकाता  अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉलर लियोनल मेसी के कोलकाता दौरे के दौरान साल्ट लेक स्टेडियम से निकलने के बाद फैंस द्वारा किए गए तोड़-फोड़ के बाद पश्चिम बंगाल के डीजीपी राजीव कुमार ने कहा है कि फैंस का पैसा वापस किया जाएगा। राजीव कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "फैंस चाहते थे कि लियोनल मेसी मैदान में आएं और खेलें। यह पूर्व निर्धारित योजना का हिस्सा नहीं था। योजना थी कि वह सिर्फ मैदान में आएंगे, भीड़ को हाथ हिलाएंगे और चले जाएंगे। मेसी के मैच नहीं खेलने की वजह से फैंस आक्रोशित हुए। आयोजकों ने हमें लिखकर दिया है कि फैंस का पैसा रिफंड किया जाएगा।" उन्होंने कहा कि सरकार ने सभी पहलुओं को देखने के लिए पहले ही एक कमेटी बना दी है, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या ऑर्गनाइजर की तरफ से कोई मिसमैनेजमेंट हुआ था या कोई और दिक्कत थी। इसकी जांच की जाएगी। लियोनल मेसी के स्टेडियम से जाने के बाद फैंस द्वारा मचाए गए बवाल को लेकर ममता बनर्जी भी काफी निराश नजर आईं और कुव्यवस्था को इसके लिए दोषी करार दिया। ममता बनर्जी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए फैंस से माफी मांगी है। उन्होंने लिखा, "आज साल्ट लेक स्टेडियम में जो कुप्रबंधन हुआ, उससे मैं बहुत परेशान और हैरान हूं। मैं हजारों खेल प्रेमियों और फैंस के साथ इवेंट में शामिल होने के लिए स्टेडियम जा रही थी। फैंस अपने पसंदीदा फुटबॉलर लियोनेल मेसी की एक झलक पाने के लिए इकट्ठा हुए थे। मैं इस खराब घटना के लिए लियोनेल मेसी के साथ-साथ उनके फैंस और सभी खेल प्रेमियों से दिल से माफी मांगती हूं।" मुख्यमंत्री ने आगे लिखा, "मैं सेवानिवृत्त जज आशिम कुमार रे की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी बना रही हूं, जिसमें मुख्य सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह विभाग के सदस्य होंगे। कमेटी इस घटना की डिटेल में जांच करेगी, जिम्मेदारी तय करेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उपाय बताएगी। एक बार फिर, मैं सभी खेल प्रेमियों से दिल से माफी मांगती हूं।" दिग्गज फुटबॉलर लियोनल मेसी अपने तीन दिवसीय भारत दौरे के पहले चरण में शनिवार को कोलकाता पहुंचे। साल्ट लेक स्टेडियम में उनका कार्यक्रम था। मेसी की झलक पाने के लिए स्टेडियम में हजारों फैंस ने घंटों इंतजार किया। मेसी 10 मिनट के लिए स्टेडियम में पहुंचे थे। स्टेडियम में मौजूद फैंस उन्हें देख नहीं पाए और उनके जाने के बाद भारी बवाल किया और स्टेडियम में तोड़फोड़ की। 

‘यह जानलेवा लापरवाही है’ — मेस्सी इवेंट कराने वालों पर सख्त हुए राज्यपाल आनंदबोस

कोलकाता  कोलकाता के स्टेडियम में मशहूर फुटबॉलर लियोनेल मेस्सी के कार्यक्रम में उत्पात को लेकर राज्यपाल सीवी आनंदबोस ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि इस इवेंट के आयोजकों को तत्काल गिरफ्तार करके उनपर हत्या की कोशिश का मुकदमा ठोक देना चाहिए। वहीं पश्चिम बंगाल के राज्यपाल राजीव कुमार ने कहा कि उन्होंने मुख्य आयोजक को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। जिन लोगों ने भी इस तरह का कुप्रबंधन किया है, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। बता दें कि इस कार्यक्रम की महंगी टिकटों को लेकर भी राज्यपाल ने आपत्ति जताई थी। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए टिकटें 10-10 हजार रुपये में बेची गईं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी इस कार्यक्रम में शामिल होने वाली थीं लेकिन उनके पहुचंने से पहले ही उपद्रव शुरू हो गया। इसके बाद लियोनेल मेस्सी वहां से निकल गए। इससे भीड़ में नाराजगी और बढ़ गई और लोग कुर्सियां तोड़ने लगे। लोकभवन के एक अधकारी ने कहा, राज्यपाल इस घटना से बहुत हैरान हैं। मेस्सी से मिलने जा रहीं मुख्यमंत्री को भी रास्ते से ही लौटना पड़ गया। टिकट का रिफंड दें और स्टेडियम का मुआवजा भरें आयोजक उन्होंने कहा, अगर मुख्यमंत्री को ही रास्ते से लौटना पड़ता है तो यह मामला बेहद गंभीर है। राज्यपाल ने कहा कि जिन लोगों ने भी टिकट खरीदा था उनको रिफंड मिलना चाहिए। इसके अलावा स्टेडियम को हुए नुकसान की भरपाई भी आयोजकों से ही करना चाहिए। जिन पुलिस अधिकारियों ने भी लापरवाही की है उन्हें भी सस्पेंड कर दिया जाना चाहिए। बोस ने कहा कि सरकार को पता लगाना चाहिए कि आखिर मेस्सी का इस्तेमाल कमोडिटी के तौर पर कैसे होने लगा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घटना के बाद मेसी के साथ-साथ फुटबॉल प्रशंसकों से सार्वजनिक माफी मांगी। उन्होंने एक्स पर एक बयान में कहा कि स्टेडियम में जो कुछ हुआ, उससे "बहुत परेशान और हैरान" है। यहां हजारों दर्शक अपने पसंदीदा फुटबॉलर को देखने की उम्मीद में इकट्ठा हुए थे। उन्होंने कहा कि वह उस समय वह खुद कार्यक्रम स्थल पर जा रही थीं। बनर्जी ने कहा, "मैं इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिये लियोनेल मेसी के साथ-साथ सभी खेल प्रेमियों और उनके प्रशंसकों से ईमानदारी से माफी मांगती हूं। मैं न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) असीम कुमार राय की अध्यक्षता में एक जांच समिति बना रही हूं। गृह और पर्वतीय मामलों के विभाग के मुख्य सचिव और अपर मुख्य सचिव इसके सदस्य होंगे।" मुख्यमंत्री ने कहा कि समिति को स्टेडियम में व्यवस्था बिगड़ने वाली घटनाओं की जांच करने, कुप्रबंधन के लिये जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और यह सुनिश्चित करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाने की सिफारिश करने का काम सौंपा गया है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। खासकर तब, जब अंतरराष्ट्रीय हस्तियों से जुड़े बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। बनर्जी ने कहा, "जांच समिति जिम्मेदारी तय करेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाएगी। एक बार फिर, मैं सभी खेल प्रेमियों से दिल से माफी मांगती हूं।"

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! 8वां वेतन आयोग कब लागू होगा, सरकार ने किया साफ

नई दिल्ली  केंद्र सरकार के कर्मचारी 8वें वेतन आयोग के लागू होने का इंतजार कर रहे हैं। सरकार ने इस नए वेतन आयोग का गठन तो कर दिया है लेकिन अब तक इसे लागू किए जाने की तिथि नहीं बताई गई है। दरअसल, 7वें वेतन आयोग का 10 साल का कार्यकाल इस महीने खत्म हो रहा है। ऐसे में नए वेतन आयोग की सिफारिशें एक जनवरी 2026 से लागू किए जाने की उम्मीद है। हालांकि, अब सरकार की ओर से इस पर प्रतिक्रिया दी गई है। हाल ही में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया कि 8वें वेतन आयोग के समय और फंडिंग पर बाद में फैसला लिया जाएगा। इसका मतलब है कि 1 जनवरी 2026 से वेतन आयोग लागू होगा या नहीं, इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। लोकसभा में शीतकालीन सत्र के दौरान एक सवाल के जवाब में पंकज चौधरी ने यह भी स्पष्ट किया कि 8वें वेतन आयोग का गठन हो चुका है और इसके टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) भी अधिसूचित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि आयोग अपनी रिपोर्ट गठन की तारीख से 18 महीनों के भीतर सरकार को सौंपेगा। मंत्री ने सदन को बताया कि वर्तमान में केंद्र सरकार के लगभग 50.14 लाख कर्मचारी और करीब 69 लाख पेंशनभोगी हैं, जिन पर 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का सीधा असर पड़ेगा। 8वां वेतन आयोग बता दें कि 8वें वेतन आयोग की घोषणा केंद्र सरकार ने इस साल जनवरी में की थी। उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई को आयोग की कमान सौंपी गई है। आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट 18 महीनों में देगा, जबकि समय-समय पर अंतरिम रिपोर्टें भी देता रहेगा। मंत्रिमंडल ने न्यायमूर्ति देसाई को आयोग का प्रमुख बनाने के साथ भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम), बेंगलूर के प्रोफेसर पुलक घोष को अंशकालिक सदस्य और पेट्रोलियम सचिव पंकज जैन को सदस्य-सचिव बनाने का भी फैसला किया। आमतौर पर हर 10 वर्ष के अंतराल पर केंद्रीय कर्मचारियों के लिए वेतन आयोग की सिफारिशें लागू की जाती हैं। इस परिपाटी को देखते हुए आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों के भी जनवरी, 2026 से लागू किए जाने की संभावना है।  

CAA के तहत असम में पहली नागरिकता मंजूर, बांग्लादेशी मूल की महिला बनी भारत की नागरिक

दिसपुर  असम के श्रीभूमि जिले में रहने वाली 40 वर्षीय एक महिला को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत भारतीय नागरिकता प्रदान की गई है। यह असम में CAA के अंतर्गत नागरिकता पाने वाली पहली महिला हैं और राज्य में रजिस्ट्रेशन रूट से नागरिकता हासिल करने वाली भी पहली व्यक्ति मानी जा रही हैं। यह महिला 2007 में बांग्लादेश से भारत आई थीं और श्रीभूमि जिले में रह रही थीं। बता दें कि श्रीभूमि जिले का नाम पहले करीमगंज था। वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व विदेशी न्यायाधिकरण (FT) सदस्य धर्मानंद देब ने इस मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महिला अब बनर्जी उपनाम का उपयोग करती हैं, वर्ष 2007 में बांग्लादेश से भारत आई थीं। वह सिलचर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इलाज के लिए अपने एक रिश्तेदार के साथ सिलचर पहुंची थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात श्रीभूमि जिले के एक स्थानीय युवक से हुई, दोनों ने विवाह किया और महिला भारत में ही रहने लगीं। बाद में दंपति का एक बेटा भी हुआ। हालांकि महिला का परिवार अब भी बांग्लादेश के चटगांव में रहता है, लेकिन वह लंबे समय से भारतीय नागरिकता प्राप्त करने की इच्छा रखती थीं। नागरिकता संशोधन अधिनियम के नियम अधिसूचित होने के बाद उन्होंने पिछले साल जुलाई में नागरिकता के लिए आवेदन किया। पहला आवेदन हुआ था खारिज रिपोर्ट के मुताबिक, धर्मानंद देब ने बताया कि महिला का पहला आवेदन लोकसभा चुनाव से पहले हुए परिसीमन (डिलिमिटेशन) अभ्यास के कारण उत्पन्न भ्रम की वजह से खारिज हो गया था। महिला जिस बदरपुर क्षेत्र में रहती हैं, उसका एक हिस्सा श्रीभूमि जिले से हटाकर कछार जिले में शामिल कर दिया गया था। इससे जिला अधिकार क्षेत्र को लेकर असमंजस पैदा हो गया। इसके बाद अधिवक्ता ने दोबारा आवेदन किया और सभी दस्तावेजों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया गया। अंततः महिला का मामला स्वीकृत कर लिया गया। कानूनी प्रावधानों के तहत मिली नागरिकता धर्मानंद देब ने बताया कि महिला को नागरिकता- नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 5(1)(c) को धारा 6B के तहत दी गई है। इस प्रावधान के तहत किसी भारतीय नागरिक से विवाह करने वाला व्यक्ति, यदि वह भारत में कम से कम सात वर्ष तक निवास कर चुका हो, तो पंजीकरण के माध्यम से भारतीय नागरिकता प्राप्त कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि असम में यह पहला मामला है जिसमें CAA के तहत रजिस्ट्रेशन रूट से नागरिकता दी गई है। एक अन्य व्यक्ति को भी मिली नागरिकता इस महिला के अलावा कछार जिले के 61 वर्षीय एक पुरुष को भी CAA के तहत भारतीय नागरिकता प्रदान की गई है। गृह मंत्रालय (MHA) ने शुक्रवार को दोनों को नागरिकता प्रमाणपत्र जारी किए। नागरिकता को उनके भारत में प्रवेश की तिथि से प्रभावी माना गया है। भावित सामाजिक उत्पीड़न को देखते हुए दोनों नए नागरिकों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। CAA को लेकर असम में विरोध गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम 11 दिसंबर 2019 को पारित किया गया था, जिसके बाद असम सहित पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। नियम अधिसूचित होने के बाद अब तक असम में लगभग 40 लोगों ने CAA के तहत नागरिकता के लिए आवेदन किया है। CAA के तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदू, ईसाई, बौद्ध, सिख, जैन और पारसी समुदाय के वे प्रवासी, जो 25 मार्च 1971 से 31 दिसंबर 2014 के बीच भारत आए थे, वे नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। असम में लगभग दो लाख लोग अब भी ‘संदिग्ध नागरिक’ के रूप में चिन्हित हैं, लेकिन अब तक बहुत कम लोगों ने CAA के तहत आवेदन किया है। मुख्यमंत्री हिमंत शर्मा कई बार कह चुके हैं कि असम में अधिकांश हिंदू प्रवासी 1971 की कट-ऑफ तारीख से पहले ही आ चुके थे। CAA के तहत पहली महिला को नागरिकता मिलने को असम में इस कानून के क्रियान्वयन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।