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नेतन्याहू का बड़ा बयान: हमास को हथियारबंद रहने नहीं देंगे, कार्रवाई जारी

यरूशलेम इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फिलिस्तीन और गाजा को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना के खिलाफ हमारा विरोध जारी रहेगा और हमास को निरस्त्र किया जाएगा। इजरायल सरकार की बैठक में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि मैं दो प्रमुख मुद्दों पर बात करना चाहता हूं। पहला मुद्दा गाजा के उस हिस्से के कथित 'गैर-सैन्यीकरण' का है, जो हमास के कब्जे में है। इस क्षेत्र का विसैन्यीकरण किया जाएगा और हमास को निरस्त्र किया जाएगा। इसके लिए चाहे आसान तरीका अपनाना पड़े या कठिन। यही राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप भी चाहते हैं। उन्होंने फिलिस्तीनी राज्य के संबंध में कहा कि जॉर्डन नदी के पश्चिम में किसी भी क्षेत्र में फिलिस्तीनी राज्य के प्रति हमारा विरोध जारी रहेगा। इसमें रत्ती भर भी परिवर्तन नहीं होगा। नेतन्याहू ने इस बैठक में 20 सूत्रीय प्लान रखा है। उन्होंने कहा कि हाल ही में हम दो तरह के उपद्रव देख रहे हैं, जिन्हें हम पूरी तरह से अस्वीकार करते हैं। एक है निर्वाचित अधिकारियों के विरुद्ध उपद्रव, चाहे वे कोई भी हों, और कल ही हमारे मित्र एमके बेन-त्जूर के विरुद्ध ऐसी ही हिंसा हुई। उपद्रवी माइनॉरिटी में हैं। यह अति-रूढ़िवादी जनता का प्रतिनिधित्व नहीं करता, लेकिन हमें कानून के इन उल्लंघनों से पूरी ताकत से लड़ना होगा और हम ऐसा करेंगे। नेतन्याहू ने आगे कहा कि दूसरी गड़बड़ी भी माइनॉरिटी द्वारा की जा रही है। ये माइनॉरिटी लोग यहूदिया और सामरिया में प्रवेश करते हैं। उनके खिलाफ भी ये उपद्रव, आईडीएफ सैनिकों और फिलिस्तीनियों दोनों के खिलाफ हम बहुत सख्त कार्रवाई करेंगे, क्योंकि हम कानून का पालन करने वाला देश हैं, और कानून का पालन करने वाला देश कानून के अनुसार काम करता है।

US Immigration Update: कई देशों के लोगों की ग्रीन कार्ड तक पहुंच अब और मुश्किल

नई दिल्ली अमेरिका इमिग्रेशन नीति में बदलाव करने की पूरी तैयारी में है। इसे लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर सख्त होते नजर आ रहे हैं। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, यहां की नई आव्रजन नीति तैयार की जा रही है। इसमें ट्रंप प्रशासन के यात्रा प्रतिबंध के तहत ग्रीन कार्ड और अन्य दर्ज लाभों को लेकर कुछ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। अमेरिकी मीडिया आउटलेट न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, होमलैंड सुरक्षा विभाग (डीएचएस) के आंतरिक मसौदों में अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) अधिकारियों को निर्देश दिया जाएगा कि वे ग्रीन कार्ड, शेल्टर, पैरोल और अन्य आव्रजन लाभों के लिए आवेदनों का मूल्यांकन करते समय यात्रा-प्रतिबंधित देशों से आने वाले किसी व्यक्ति की राष्ट्रीयता को नकारात्मक फैक्टर मानेंगे। इसका मतलब यह हुआ कि अमेरिका ने जिन देशों के खिलाफ यात्रा प्रतिबंध लगा रखा है, वहां के लोगों के लिए ग्रीन कार्ड के लाभ को सीमित कर दिया जाएगा। हालांकि, यह परिवर्तन अमेरिकी नागरिकता के आवेदनों पर लागू नहीं होगा। फिलहाल, यूएससीआईएस सामुदायिक संबंधों, आपराधिक इतिहास और मानवीय आवश्यकताओं जैसी बातों पर विचार करता है। इसी साल जून में अमेरिका ने 12 देशों पर ट्रैवल बैन लगाया था। इसमें अफगानिस्तान, चाड, रिपब्लिक ऑफ कांगो, इक्वेटोरियल गिनी, इरीट्रिया, हैती, ईरान, लीबिया, म्यांमार, सोमालिया, सूडान और यमन शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिका ने सात देशों बुरुंडी, क्यूबा, लाओस, सिएरा लियोन, टोगो, तुर्कमेनिस्तान और वेनेजुएला पर आंशिक प्रतिबंध लगा रखा है। इसके तहत यहां के नागरिक अमेरिका में स्थायी रूप से प्रवेश नहीं कर सकते या कुछ विशेष वीजा प्राप्त नहीं कर सकते। हालांकि, नई इमिग्रेशन नीति की फिलहाल आधिकारिक तौर पर घोषणा नहीं की गई है, लेकिन अगर ऐसा होता है, तो प्रतिबंधित देशों के लिए ग्रीन कार्ड पाना मुश्किल हो जाएगा। यह नीति कानूनी आव्रजन पर ट्रंप की कार्रवाई में एक बड़ी तेजी लाएगी। इसकी वजह से नागरिक अधिकार समूहों की ओर से नई कानूनी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।

युवाओं का फूटा गुस्सा: जेन-जी के हिंसक प्रदर्शन, सुरक्षा बलों पर ताबड़तोड़ पत्थरबाज़ी

मेक्सिको सिटी  जेन-जी का गुस्सा मेक्सिको में भी फूट पड़ा है। मेक्सिको सिटी की गलियों में हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी उमड़ पड़े। उन्होंने अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। जेन जी के इस विरोध प्रदर्शन को अन्य उम्र के लोगों का भी खूब समर्थन मिला। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि यह विरोध प्रदर्शन चीन समर्थक राष्ट्रपति के खिलाफ हुआ। युवा प्रदर्शनकारी पुलिसवालों से भी उलझ पड़े, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए। पुलिस पर हमला प्रदर्शनकारियों ने पत्थरों, डंडे और चेन से पुलिस पर हमला बोला। मेक्सिको सिटी के सुरक्षा सचिव पाब्लो वैजेक ने बताया कि करीब 120 लोग घायल हुए हैं, जिसमें 100 पुलिस वाले हैं। इस मामले में 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। प्रदर्शन कर रहे एक 29 वर्षीय बिजनेसमैन ने कहा कि हमें और ज्यादा सुरक्षा चाहिए। एक 43 साल की महिला फिजिशियन भी इस प्रदर्शन में शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि वह पब्लिक हेल्थ सिस्टम के लिए अधिक फंड की मांग के साथ मार्च में शामिल हुई है। इसके अलावा उन्होंने डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए। महिला डॉक्टर का कहना था कि आज हत्या हो जाती है और कुछ नहीं होता। कई हाई-प्रोफाइल हत्याएं मेक्सिको में हाल के दिनों में कई हाई प्रोफाइल हत्याएं हुई हैं। इनमें पश्चिमी राज्य मिचोआकैन के मशहूर मेयर की हत्या भी शामिल है। खास बात यह है शनिवार को हुए विरोध प्रदर्शन में विभिन्न उम्र के लोग शामिल हुए। इसमें मेयर कार्लोस मान्जो के समर्थक भी शामिल थे। इनमें से ही एक रोजा मारिया एविला ने कहा कि यह राज्य अब मर रहा है। उन्होंने मेयर को याद करते हुए कहा कि उसे सिर्फ इसलिए मारा गया क्योंकि वह पहाड़ी में भी अफसरों को भेज देता था जो युवा अपराधियों को मारते थे। उसके पास अपराधियों का मुकाबला करने की हिम्मत थी।  

ठंड का प्रकोप तेज़: कई राज्यों में अगले 48 घंटे शीतलहर की चेतावनी

नई दिल्ली देश में मौसम का तेजी से बदलता मिजाज परेशानी बढ़ा रहा है। उत्तर और मध्य भारत शीतलहर, कोहरे और गिरते पारे की चपेट में हैं, जबकि दक्षिण भारत में पूर्वोत्तर मानसून के असर से भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इससे स्वास्थ्य, खेती, यातायात और बिजली आपूर्ति पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार उत्तर और मध्य भारत में ठंड का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। 16 और 17 नवंबर को शीतलहर की स्थिति सबसे अधिक दिखने की संभावना है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में न्यूनतम तापमान में तेज गिरावट दर्ज की जाएगी, जिससे सुबह और रात के समय सर्दी का असर बेहद तीखा रहेगा। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में पाला पड़ने से ठिठुरन काफी बढ़ गई है। तड़के कड़क सर्दी, दोपहर में हल्की धूप और शाम ढलते ही फिर से बढ़ती ठंड के साथ मौसम तेजी से अपना रंग बदल रहा है। अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे लुढ़क गया है। तापमान में उतार-चढ़ाव की वजह से लोगों में सर्दी-जुकाम और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़नी शुरू हो गई हैं। हिमाचल प्रदेश-जम्मू-कश्मीर में तापमान शून्य से नीचे हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी ठंड ने रिकॉर्ड स्तर छू लिए हैं। ताबो का तापमान माइनस 5.3, कुकुमसेरी माइनस 4.1, केलांग माइनस 3.6 और कल्पा 0.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में मौसम साफ रहेगा, हालांकि रात के समय ठंड और तेजी पकड़ सकती है। इसके विपरीत ऊना में कल 28.2 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे अधिक तापमान दर्ज किया गया। कोहरा और दृश्यता में कमी का खतरा अगले 5 दिनों तक उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, पश्चिम मध्य प्रदेश और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में हल्के से मध्यम कोहरा छाने की संभावना है। कई इलाकों में सुबह के समय दृश्यता 500 मीटर तक सीमित हो गई है। विशेषज्ञों ने सड़क और रेल यातायात के दौरान गति नियंत्रित रखने, हेडलाइट-फॉग लाइट का उपयोग करने और अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है ताकि दुर्घटनाओं के जोखिम कम हों। दक्षिण भारत: भारी बारिश का अलर्ट जारी दक्षिण भारत में पूर्वोत्तर मानसून सक्रिय है और बारिश का दौर जारी है। श्रीलंका के दक्षिणी क्षेत्र और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी पर बना ऊपरी हवाओं का चक्रवाती प्रसार तथा बांग्लादेश के आसपास मौजूद दूसरा चक्रवात नमी के परिवहन को बढ़ा रहे हैं, जिसके कारण भारी बारिश की परिस्थितियां बन रही हैं। आगामी दिनों में तमिलनाडु, केरल और द्वीप समूहों में भारी बारिश की आशंका है, जबकि तटीय आंध्र प्रदेश, तटीय कर्नाटक और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में हल्की से मध्यम बारिश देखी जा सकती है।

स्कूल में अमानवीय दंड: बैग टांगकर कराई उठक-बैठक, मासूम ने तोड़ा दम

मुंबई महाराष्ट्र के वसई में एक दुखी करने वाला मामला सामने आया है। दरअसल यहां एक स्कूल में 10 मिनट देरी से आने पर अध्यापक ने 13 साल की बच्ची को बैग कंधे पर टांगकर 100 उठक-बैठक करने की सजा दी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे बच्ची की तबीयत खराब हो गई और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अस्पताल में इलाज के दौरान बच्ची की मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। क्या है पूरा मामला मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना 8 नवंबर की है, जब वसई के श्री हनुमंत विद्या मंदिर में कक्षा 6 में पढ़ने वाली कक्षा छह की छात्रा काजल गौड़ को देरी से स्कूल आने पर अध्यापक ने सौ उठक-बैठक लगाने की सजा दी। उठक-बैठक लगाने के बाद काजल के कमर में दर्द होने लगा। बच्ची की मां ने बताया कि स्कूल से आने के बाद उसने तबीयत खराब होने की शिकायत की। इसके बाद उसे वसई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से उसे एक अन्य अस्पताल में और फिर जेजे अस्पताल में भर्ती कराया गया। शुक्रवार को इलाज के दौरान बच्ची की जेजे अस्पताल में मौत हो गई। बच्ची की मां की शिकायत पर मामला दर्ज बच्ची की मां ने अध्यापक और स्कूल प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए पुलिस में मामला दर्ज कराया है। पुलिस ने फिलहाल दुर्घटनावश मौत का मामला दर्ज कर लिया है और अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद धाराएं बदली जा सकती हैं। इस मामले में मनसे की भी एंट्री हो गई है। मनसे कार्यकर्ताओं ने घटना की जानकारी मिलते ही स्कूल पहुंचकर स्कूल में ताला लगा दिया। वहीं एनसीपी एसपी के नेताओं ने भी स्कूल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

भाजपा संगठन में बदलाव की आहट: नए अध्यक्ष और मोदी कैबिनेट विस्तार की संभावना

नई दिल्ली बिहार में बीजेपी को बंपर जीत मिली है। पहली बार प्रदेश में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। यही नहीं राज्य में एनडीए ने 2010 के बाद वहां सबसे बड़ी सफलता हासिल की है। ऐसे में अब पार्टी के संगठन से लेकर सरकार तक में बड़े बदलाव की चर्चा शुरू हो चुकी है। बीजेपी को नए राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने का पिछले साल लोकसभा चुनावों से पहले से ही इंतजार है। बिहार के शानदार चुनाव परिणाम के बाद लगता है कि अब इसके दिन ज्यादा दूर नहीं रह गए हैं। साथ ही मोदी सरकार भी नए रंग-रूप में नजर आ सकती है। इसी महीने बीजेपी को मिल सकता है नया अध्यक्ष बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी और एनडीए को अप्रत्याशित जीत मिली है। 243 सीटों में से गठबंधन 202 सीटें जीता है और 89 सीटें जीतकर बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी है। इसी साल की शुरुआत में पार्टी दिल्ली में सरकार बना चुकी है। लोकसभा चुनावों के बाद पार्टी ने जो जीत का सिलसिला शुरू किया है, वह अब परवान पर है। अगले साल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव होने हैं, जो पार्टी के लिए मौजूदा दौर में सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में जानकारी है कि पार्टी अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में और ज्यादा देर नहीं करेगी और यह इसी महीने हो सकता है। 'शीतकालीन सत्र से पहले नया अध्यक्ष मिल सकता है' बीजेपी के एक भरोसेमंद सूत्र ने एनबीटी ऑनलाइन से कहा है "राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम इसी महीने तय हो सकता है। 1 दिसंबर से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है। उसके बाद बहुत देर हो जाएगी। अगले साल की शुरुआत में बंगाल में चुनाव भी होने हैं।" उन्होंने आगे कहा कि "अगले साल मई तक लगातार चुनाव होने से पार्टी को समय नहीं मिलेगा। इसलिए इसी महीने यह हो जाना चाहिए।" 'धर्मेंद्र प्रधान के अध्यक्ष बनने की 99% संभावना' बीजेपी सूत्र ने बताया है कि "बिहार चुनाव की सफलता के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नाम लगभग तय माना जा रहा है। उनके नाम की चर्चा पहले से होती रही है, लेकिन अब 99% वही लग रहे हैं। उन्होंने संगठन में बहुत काम किया है। अगले साल बंगाल सहित अन्य प्रदेशों के चुनाव भी हैं, जिसे पार्टी अपने लिए बहुत महत्वपूर्ण मानती है।" मोदी सरकार में भी बड़े फेरबदल की संभावना यही नहीं लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मंत्रिपरिषद को भी नया रूप दे सकते हैं। बीजेपी सूत्र के अनुसार कई नेता जो आज सरकार में हैं, उन्हें संगठन की जिम्मेदारी दी जा सकती है और जो संगठन में हैं, उन्हें सरकार में लाया जा सकता है। उनके अनुसार धर्मेंद्र प्रधान के नाम की चर्चा भी इसी बदलाव की अटकलों की एक बड़ी कड़ी है। जेपी नड्डा भी सरकार से आ सकते हैं बाहर पार्टी सूत्र ने जो कुछ कहा है उसके हिसाब से अभी सिर्फ राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान के ही निश्चित तौर पर मौजूदा कैबिनेट में बने रहने की संभावना है। यहां तक कि मौजूदा पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी सरकार से निकल सकते हैं। उनके अनुसार बीजेपी में एक व्यक्ति एक पद की व्यवस्था है। लेकिन, परिस्थितियों के कारण नड्डा के पास अभी तीन-तीन पद है। वे राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, स्वास्थ्य मंत्री भी हैं और राज्यसभा में नेता सदन भी हैं। ऐसे में उन्हें सिर्फ तीसरे पद का ही उत्तरदायित्व दिए जाने की संभावना है। रूडी को फिर से मिल सकता है मौका जहां तक मोदी सरकार में पार्टी से नए लोगों को जगह दिए जाने की संभावना है तो पार्टी सूत्र की मानें तो एक बार फिर से राजीव प्रताप रूडी को जगह मिल सकती है। इनके अलावा प्रधानमंत्री कुछ ताजे नए चेहरे को सरकार का हिस्सा बना सकते हैं। पूरी संभावना है कि सरकार से संगठन तक में यह बदलाव संसद का सत्र शुरू होने से पहले हो जाए।

आदिवासी वीरों के बलिदान को नमन: पीएम मोदी ने याद दिलाया उनका गौरवशाली योगदान

अहमदाबाद  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के नर्मदा में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित 'जनजातीय गौरव दिवस' कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय गौरव हजारों वर्षों से हमारे भारत की चेतना का अभिन्न हिस्सा रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन में ट्राइबल समाज के योगदान को हम भुला नहीं सकते हैं। नर्मदा में भगवान बिरसा मुंडा को नमन करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मां नर्मदा की ये पावन धरती आज एक और ऐतिहासिक आयोजन की साक्षी बन रही है।  अभी 31 अक्टूबर को हमने यहां सरदार पटेल की 150वीं जयंती मनाई। हमारी एकता और विविधता को सेलिब्रेट करने के लिए भारत पर्व शुरू हुआ है। आज भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के इस भव्य आयोजन के साथ हम भारत पर्व की पूर्णता के साक्षी बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2021 में हमने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की थी। जनजातीय गौरव हजारों वर्षों से हमारे भारत की चेतना का अभिन्न हिस्सा रहा है।  पीएम मोदी ने कहा, "जब-जब देश के सम्मान, स्वाभिमान और स्वराज की बात आई, तो हमारा आदिवासी समाज सबसे आगे खड़ा हुआ। हमारा स्वतंत्रता संग्राम इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। स्वतंत्रता आंदोलन में ट्राइबल समाज के योगदान को हम भुला नहीं सकते।" विकास और जनजातीय कल्याण से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और शिलान्यास करने के बाद पीएम मोदी ने कहा कि स्वास्थ्य, सड़क और यातायात से जुड़े कई और प्रोजेक्ट्स शुरू हुए हैं। मैं इन सभी विकास कार्यों के लिए, सेवा कार्यों के लिए, कल्याण योजनाओं के लिए आप सभी को विशेषकर के गुजरात और देश के जनजातीय परिवारों को बधाई देता हूं। पीएम मोदी ने कहा कि 2014 के पहले भगवान बिरसा मुंडा को कोई याद करने वाला नहीं था। सिर्फ उनके अगल-बगल के गांव तक ही पूछा जाता था। आज देशभर में कई ट्राइबल म्यूजियम बनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि श्री गोविंद गुरु चेयर जनजातीय भाषा संवर्धन केंद्र की स्थापना भी हुई है। यहां भील, गामित, वसावा, गरासिया, कोकणी, संथाल, राठवा, नायक, डबला, चौधरी, कोकना, कुंभी, वर्ली, डोडिया… ऐसी सभी जनजातियों की बोलियों पर अध्ययन होगा। उनसे जुड़ी कहानियों और गीतों को संरक्षित किया जाएगा। इससे पहले, जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नर्मदा में भगवान बिरसा मुंडा को पुष्पांजलि अर्पित की। डेडियापाडा में 'जनजातीय गौरव दिवस' कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भव्य स्वागत किया गया।

‘घोड़े की तरह काम करो’ टिप्पणी पर आलोचना तेज़—नई PM की वर्क-कल्चर नीति पर जापान में बहस

टोकियो जापान की नई प्रधानमंत्री साने ताकाइची पहले दिन से ही अपने कठोर कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने हाल ही में सुबह 3 बजे मीटिंग बुलाई, जिसके बाद फिर से जापान के ओवरवर्क कल्चर पर बहस तेज हो गई है। ताकाइची का कहना है, “मैं 18 घंटे काम करती हूं, और चाहती हूं लोग भी ऐसे ही काम करें। वर्क-लाइफ बैलेंस कोई मायने नहीं रखता।” उन्होंने यहां तक कहा कि लोग "घोड़े की तरह काम करें"।  वर्क कल्चर को लेकर उठे सवाल जापान में लंबे समय से “करोशी” यानी काम के बोझ से मौत का कल्चर रहा है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद जापान ने अपनी अर्थव्यवस्था खड़ी करने के लिए कर्मचारियों से ज्यादा काम की उम्मीद की थी। इस दौरान कई लोग दिल के दौरे और स्ट्रोक से अचानक मरने लगे। इन मौतों को "करोशी" कहा गया। सरकार को बाद में मजबूर होकर ओवरटाइम सीमा तय करनी पड़ी थी, महज 45 घंटे प्रति माह। हालांकि ताकाइची ने ओवरटाइम सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसकी वजह से चिंता बढ़ गई है कि पुराना अत्यधिक काम वाला कल्चर फिर लौट सकता है। रात 3 बजे मीटिंग पर विवाद 7 नवंबर को संसद में बजट पर चर्चा के लिए ताकाइची ने सुबह 3 बजे अपने सलाहकारों की मीटिंग बुलाई। इसे जापानी मीडिया ने ‘3AM स्टडी सेशन’ का नाम दिया।पूर्व प्रधानमंत्री और विपक्षी नेता योशिहिको नोदा ने इस फैसले को “पागलपन” बताया। उनका कहना था, “जब मैं प्रधानमंत्री था, तब सुबह 6 या 7 बजे काम शुरू करता था। दूसरों को रात के सन्नाटे में शामिल होने के लिए मजबूर करना गलत है।” विवाद बढ़ने पर ताकाइची ने सफाई देते हुए कहा कि उनके घर की फैक्स मशीन खराब थी, इसलिए उन्हें प्रधानमंत्री आवास जाकर तैयारी करनी पड़ी। ओवरवर्क कल्चर की काली सच्चाई जापान में काम का दबाव इतना अधिक है कि लोग भीड़भाड़ वाली ट्रेनों में खड़े-खड़े या फुटपाथों पर सो जाते हैं। इतिहास में 1969 का एक भीषण उदाहरण है एक 29 वर्षीय कर्मचारी की ब्रेन स्ट्रोक से मौत हो गई थी, जिसने 100 से अधिक घंटे काम किया था। ताकाइची के बयान और कार्यशैली से विशेषज्ञ चिंतित हैं कि जापान में फिर से वह दौर लौट सकता है जब लोग मानसिक और शारीरिक थकान से मौत के मुहाने पर पहुंच जाएं। ताकाइची पर आरोप है कि वह कर्मचारियों पर अनुचित दबाव डाल रही हैं और अपनी कार्यशैली को “आदर्श” बताकर गलत मिसाल पेश कर रही हैं।  

पीएम मोदी का नर्मदा दौरा: देवमोगरा मंदिर में पूजा-अर्चना, बिरसा मुंडा को दी श्रद्धांजलि

सूरत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज गुजरात के दौरे पर हैं, जहां वे कई परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। अपने गुजरात दौरे के दौरान पीएम मोदी सबसे पहले सूरत पहुंचे हैं, जहां उन्होंने अंत्रोली इलाके में बन रहे बुलेट ट्रेन स्टेशन का जायजा भी लिया है। बता दें कि, पीएम मोदी मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (एमएएचएसआर) की प्रगति की समीक्षा करेंगे। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर लगभग 508 किलोमीटर लंबा है, जिसमें 352 किलोमीटर हिस्सा गुजरात और दादरा व नगर हवेली में और 156 किलोमीटर महाराष्ट्र में है। यह कॉरिडोर साबरमती, अहमदाबाद, आणंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा, वापी, बोईसर, विरार, ठाणे और मुंबई समेत प्रमुख शहरों को जोड़ेगा। गुजरात को देंगे 9700 करोड़ रुपये की सौगात पीएम मोदी अपने गुजरात दौरे के दौरान जनजातीय गौरव दिवस के मौके पर और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती समारोह में भी शिरकत करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री नर्मदा जिले में 9700 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे। इन परियोजनाओं में आदिवासी कल्याण, बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और विरासत पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पीएम मोदी के दौरे का पूरा कार्यक्रम पीएम मोदी दोपहर में डेडियापाड़ा पहुंचेंगे और एक सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होंगे। यहां वह कई परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे। इन परियोजनाओं में प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीए-जगुआ) के तहत बने एक लाख घरों का गृह प्रवेश शामिल है। इसके अलावा पीएम मोदी लगभग 1900 करोड़ रुपये की लागत वाले 42 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों,  डिब्रूगढ़ में असम मेडिकल कॉलेज में एक सक्षमता केंद्र और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण के लिए इंफाल में एक जनजातीय अनुसंधान संस्थान भवन का भी उद्घाटन करेंगे। 250 बस, 50 नए एकलव्य विद्यालयों की सौगात प्रधानमंत्री गुजरात के 14 आदिवासी जिलों में कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए 250 बसों को हरी झंडी दिखाएंगे। वह आदिवासी क्षेत्रों में 748 किलोमीटर नई सड़कों और डीए-जगुआ के तहत 14 आदिवासी बहु-विपणन केंद्रों की आधारशिला रखेंगे। पीएम मोदी 2,320 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले 50 नए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की भी आधारशिला रखेंगे।

ट्रंप के लिए मुश्किलें बढ़ीं: पूर्व राष्ट्रपति को एक और कानूनी परेशानी

वॉशिंगटन  अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक और बड़ा कानूनी झटका लगा है। फेडरल कोर्ट ने उस निर्णय पर रोक लगा दी है, जिसके तहत ट्रंप प्रशासन कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के लिए जारी फंड को तुरंत रोकना चाहता था। यह फैसला उस समय आया है जब ट्रंप सरकार कई विश्वविद्यालयों पर यह आरोप लगाकर कार्रवाई कर रही है कि वे नस्लीय भेदभाव और यहूदी-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं। सैन फ्रांसिस्को की जिला अदालत की जज रीटा लिन ने साफ कहा कि प्रशासन विश्वविद्यालय को न तो फंड में कटौती कर सकता है और न ही उस पर कोई त्वरित जुर्माना लागू कर सकता है। इतना ही नहीं, कोर्ट ने उन यूनियनों और संगठनों की याचिका पर भी सहमति जताई है, जो छात्रों, कर्मचारियों और फैकल्टी के हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका दावा है कि ट्रंप प्रशासन विरोधी आवाज़ों को दबाने के इरादे से कार्रवाई कर रहा है, जो अमेरिकी संविधान का उल्लंघन है। क्या था ट्रंप प्रशासन का दावा? ट्रंप ने कई प्रतिष्ठित कॉलेजों को “उदारवादी और यहूदी-विरोधी विचारधारा से प्रभावित” बताते हुए दर्जनों विश्वविद्यालयों की जांच शुरू करवाई थी। उनका कहना है कि विविधता और समावेशन के नाम पर श्वेत और एशियाई छात्रों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, जो नागरिक अधिकार कानून के खिलाफ है। 1.2 अरब डॉलर का जुर्माना और फंड पर रोक ट्रंप प्रशासन ने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय पर 1.2 अरब डॉलर का भारी भरकम जुर्माना भी लगाया था और रिसर्च फंड पर रोक लगा दी थी। यही नहीं, कोलंबिया सहित कुछ निजी विश्वविद्यालयों के फेडरल फंड भी इसी तरह की कार्रवाई के तहत रोक दिए गए। यूसी अध्यक्ष जेम्स बी. मिलिकेन ने इस जुर्माने पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि इतना बड़ा दंड संस्था की बुनियाद को हिला देगा और उसके संचालन को गंभीर नुकसान पहुंचेगा। कोर्ट का यह फैसला फिलहाल विश्वविद्यालयों को बड़ी राहत देता है और ट्रंप प्रशासन की उस नीति पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है, जिसके तहत वह विश्वविद्यालयों पर राजनीतिक और वैचारिक दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा था।