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हिंदी मनोरंजन पर लगेगा प्रतिबंध? इस राज्य में चर्चा में नया कानून

तमिलनाडु दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु में भाषा विवाद गहराने के आसार हैं। खबर है कि मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की अगुवाई वाली सरकार विधानसभा में हिंदी भाषा के खिलाफ विधेयक पेश करने वाली है। फिलहाल, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। इससे पहले भी DMK यानी सत्तारूढ़ दल द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम केंद्र सरकार पर राज्य पर हिंदी भाषा थोपने के आरोप लगाती रही है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि तमिलनाडु सरकार राज्य में हिंदी भाषा लागू करने के खिलाफ बिल पेश करने वाली है। इस संबंध में कानून के जानकारों की बैठक बुलाई गई थी। सूत्र बताते हैं कि इस बिल में तमिलनाडु में हिंदी भाषा में होर्डिंग, बोर्ड, फिल्में और गानों पर रोक लगाने की बात कही गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह संविधान के नियमों के तहत किया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, डीएमके के वरिष्ठ नेता टीकेएस एलनगोवन ने कहा, 'हम संविधान के खिलाफ कुछ भी नहीं करना चाहते हैं। हम इसका पालन करेंगे। हम हिंदी को थोपने के खिलाफ हैं।' इधर, भारतीय जनता पार्टी नेता विनोज सेल्वम ने इस फैसले को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि भाषा को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तिरुपरणकुंदरम, करूर जांच और आर्मस्ट्रॉन्ग मुद्दों पर कोर्ट में झटका झेलने के बाद डीएमके विवादित फॉक्सकॉन निवेश मुद्दे पर पर ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। मार्च में भी एमके स्टालिन सरकार ने राज्य के बजट में रुपये के चिह्न को बदलने का फैसला किया था। सरकार के इस फैसले को लेकर जमकर विवाद हुआ था। तब डीएमके ने कहा था कि यह तमिल भाषा के प्रचार के लिए किया गया था।  

16KM की दूरी अब झट से तय! केदारनाथ रोपवे ने बदली तीर्थयात्रा की तस्वीर

हिमाचल प्रदेश  केदारनाथ धाम की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं की समस्या को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. इस मार्ग पर पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं को जल्द राहत मिलने वाली है. दरअसल इस पर मार्ग पर यात्रा आसान होने जा रही है. 9 घंटे की पैदल यात्रा आने वाले समय में महज 40 मिनट में पूरी हो जाएगी. यात्रा के दौरान श्रद्धालु कठिन चढ़ाई चढ़ने से बच सकेंगे. केदारनाथ रोपवे प्रोजेक्ट को लेकर टेंडर प्रक्रिया और सर्वे का काम लगभग पूरा हो गया है. रोपवे शुरू होने के बाद श्रद्धालुओं को बाबा के धाम तक पहुंचाने के लिए कोई दिक्कत नहीं होगी. उत्तराखंड के चारों धामों में से एक केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं को जल्द ही रोपवे की सुविधा मिलने वाली है. केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए 4000 करोड़ से अधिक लागत वाली इस परियोजना को लेकर टेंडर प्रक्रिया को पूरा कर लिया है. सरकार ने इस परियोजना का निर्माण कार्य अदानी ग्रुप को सौंपा है. कंपनी द्वारा अगले 5 सालों में इस रोपवे का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके साथ ही कंपनी के द्वारा 29 वर्षों तक इस परियोजना का संचालन और रख-रखाव किया जाएगा. राष्ट्रीय राजमार्ग रसद प्रबंधन लिमिटेड के देखरेख में इस रोपवे प्रोजेक्ट का काम किया जाएगा. 16 किलोमीटर की चढ़ाई सिर्फ 40 मिनट में केदारनाथ धाम में बनने जा रहे इस रोपवे की लंबाई 12.9 किलोमीटर होगी. यह परियोजना के अंतर्गत सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम तक रोपवे बनाई जाएगी. दरअसल, केदारनाथ धाम की पैदल चढ़ाई लगभग 16 किलोमीटर की है जिसे चढ़ने में 8 से 9 घंटे का समय लगता है. लेकिन रोपवे तैयार होने के बाद यह दूरी को पूरा करने के लिए केवल 35 से 40 मिनट का समय लगेगा. रोपवे परियोजना को अधिक सुविधा जनक और आरामदायक बनाने के लिए इसमें आधुनिक मोनोकेबिल डीटेचेबल गोंडोला तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. जो तारों के सहारे रोपवे को संचालित करने में मदद करेगा. चार धाम यात्रा के दौरान केदारनाथ केदारनाथ में सबसे ज्यादा श्रद्धालु आते हैं. श्रद्धालुओं को मिलेगी सुविधा पिछले कुछ समय से केदारनाथ धाम में तीर्थ यात्रियों की संख्या 15 से 20 लाख तक पहुंच जाती है. हालांकि मानसून सीजन में बारिश और भूस्खलन के कारण यात्रा अक्सर बाधित रहती है. इस दौरान बेहद कम संख्या में श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शनों के लिए पहुंच पाते हैं. मानसून सीजन के दौरान इस पवित्र यात्रा को बंद कर दिया जाता है. केवल पैदल या खच्चरों से ही श्रद्धालु धाम तक पहुंच सकते हैं. ऐसे में केदारनाथ धाम के लिए रोपवे बन जाने से यात्रा आरामदायक और सुरक्षित होने की उम्मीद वहीं यात्रियों की संख्या में भी इजाफा होगा. उसके साथ ही धाम में दर्शन करने के लिए जाने वाले लोगों को सुविधा मिलने के साथ ही उनका समय भी बचेगा.  

अब वंदे भारत में सफर होगा इंटरनेशनल लेवल का — नई टेक्नोलॉजी से लैस होगी ट्रेन

नई दिल्ली स्वदेशी तकनीक के माध्यम से भारत रेलवे के क्षेत्र में निर्माता से निर्यातक बन चुका है। अब वैश्विक स्तर पर भारत में निर्मित रेल इंजन और कोच की मांग अब अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और कई अन्य देशों से आ रही है। रेलवे अब वंदे भारत का अगला संस्करण लाने की तैयारी में है। रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को भारत मंडपम में आयोजित 16वें अंतरराष्ट्रीय रेल उपकरण प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। यह विश्व की दूसरी सबसे बड़ा रेलवे प्रदर्शनी है। 'फ्यूचर-रेडी रेलवे' थीम पर आधारित यह प्रदर्शनी 17 अक्टूबर तक भारत मंडपम में चलेगी, जिसमें 15 से भी अधिक देशों के 450 से अधिक कंपनियां आधुनिक रेल, मेट्रो उत्पाद, नवाचार एवं समाधान प्रदर्शित कर रही हैं। 7 हजार KM लंबा यात्री कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी रेलमंत्री ने कहा कि विकसित भारत विजन के तहत वर्ष 2047 तक लगभग सात हजार किमी लंबे समर्पित यात्री कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। ये कॉरिडोर अधिकतम 350 किमी प्रतिघंटा और परिचालन गति 320 किमी प्रतिघंटा तक के लिए डिजाइन किए जाएंगे। ये पूरी तरह स्वदेशी सिग्नलिंग सिस्टम और आधुनिक आपरेशन कंट्रोल सेंटर से सुसज्जित होंगे।   जल्द ही आएगा वंदे भारत ट्रेनों का चौथा संस्करण वैष्णव ने वंदे भारत ट्रेन को देश की बड़ी सफलता करार दिया और कहा कि यह तकनीकी मानकों पर विश्व की सर्वश्रेष्ठ ट्रेनों की बराबरी करती है। भारत में अभी वंदे भारत-3 ट्रेनें चल रही हैं, जो अपने पिछले संस्करणों से काफी उन्नत है। यह जीरो से सौ किमी प्रतिघंटा की रफ्तार सिर्फ 52 सेकंड में पकड़ लेती है, जो जापान और यूरोप की कई ट्रेनों से अधिक है। उन्होंने कहा कि अगले 18 महीनों में वंदे भारत-4 लाने का लक्ष्य है, जो प्रदर्शन और यात्री सुविधा के हर पहलू में वैश्विक मानक स्थापित करेगी। नए संस्करण में बेहतर टॉयलेट्स, आरामदायक सीटें और उच्च गुणवत्ता वाले कोच होंगे, ताकि यह ट्रेन दुनिया की सर्वश्रेष्ठ यात्री ट्रेन के रूप में पहचानी जाए। अमृत भारत ट्रेनों पर क्या बोलें अश्विनी वैष्णव? इसी तरह अभी अमृत भारत-2 का परिचालन हो रहा, जबकि संस्करण-3 पुश-पुल तकनीक पर आधारित है, जो लंबी दूरी की यात्रा के लिए उपयुक्त होगी। उन्होंने कहा कि अमृत भारत-4 में अगली पीढ़ी के ट्रेनसेट और लोकोमोटिव शामिल होंगे, जिनका डिजाइन और निर्माण अगले 36 महीनों में पूरा कर लिया जाएगा। वैष्णव ने बताया कि पिछले 11 वर्षों में 35,000 किमी नई लाइनें बिछाई गईं और 46,000 किमी रेलमार्गों का विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। देश में अभी 156 वंदे भारत, 30 अमृत भारत और चार नमो भारत चल रही हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में रिकार्ड सात हजार से अधिक कोच, लगभग 42,000 वैगन और 1,681 लोकोमोटिव का निर्माण किया गया। देश का पहला 9,000 हार्सपावर का इलेक्टि्रक लोकोमोटिव शुरू किया गया। इसी तरह 12 हजार एचपी इंजन पहले से ही चल रहे हैं। भारतीय रेल अमेरिका को पीछे छोड़कर अब दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी माल ढुलाई नेटवर्क बन चुकी है। बुलेट ट्रेन परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का 99 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। नवाचार पर विशेष ध्यान है। इसके लिए चालू वर्ष में एक लाख 16 हजार करोड़ का बजट आवंटित किया गया है, जिसमें स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली 'कवच' भी शामिल है।  

48 घंटे का विराम! पाकिस्तान-अफगानिस्तान बॉर्डर पर थमी गोलियां, क्या अब शांति लौटेगी?

नई दिल्ली पिछले कई दिनों से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चालू संघर्ष अब समाप्त हो गया है। दोनों देश 48 घंटों के लिए सीजफायर करने के लिए राजी हो गए हैं। दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई झड़पों में दर्जनों लोगों की मौत हुई है। इन झड़पों के दौरान दोनों देशों ने एक-दूसरे पर गोलीबारी करने का आरोप लगाया था। झड़पें पाकिस्तान के चमन जिले और अफगनिस्तान से स्पिन बोल्डक जिले के बीच हुईं। अफगानिस्तान ने दावा किया कि उसके ऑपरेशन में 58 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, जबकि पाकिस्तान का कहना है कि उसने 200 से अधिक अफगान सैनिकों को मार गिराया है और उसके 23 सैनिक मारे गए हैं।   अफगानिस्तान का पाकिस्तान पर आरोप अफगान तालिबान ने कहा कि पाकिस्तान ने बुधवार सुबह कंधार प्रांत के स्पिन बोल्डक जिले में हमला किया, जिसमें 12 नागरिक मारे गए और 100 से अधिक घायल हुए। तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने सोशल मीडिया पर लिखा, "पाकिस्तानी बलों ने हल्के और भारी हथियारों से हमला किया, जिसके बाद अफगान सेना को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी।" मुजाहिद ने दावा किया कि अफगान बलों ने कई 'पाकिस्तानी सैनिकों' को मार गिराया, उनकी चौकियां और टैंक कब्जें में ले लिए। साथ ही, तालिबान ने एक वीडियो भी जारी किया जिसमें कथित तौर पर मारे गए पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों के शव दिखाए गए।  

डोनाल्ड ट्रंप की ब्रिक्स टेंशन: टैरिफ पीछे की सच्चाई जानकर दंग रह जाएंगे!

वॉशिंगटन  भारत, रूस, चीन और ब्राजील जैसी दुनिया की मजबूत अर्थव्यवस्थाओं का मंच ब्रिक्स हमेशा से अमेरिका के लिए टेंशन की वजह रहा है। इससे डोनाल्ड ट्रंप अब भी उबर नहीं पाए हैं और उन्होंने खुद इस बात की पुष्टि की है। उनका कहना है कि ब्रिक्स ब्लॉक डॉलर पर सीधा हमला है। इसीलिए उन्होंने ब्रिक्स देशों के खिलाफ टैरिफ ऐक्शन लिया है। वाइट हाउस में मीडिया से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि अब ऐक्शन के बाद से ब्रिक्स के मेंबर देश ग्रुप ही छोड़कर भाग रहे हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देश एक नई व्यवस्था लाना चाहते थे ताकि अमेरिकी डॉलर को रिप्लेस किया जा सके। ट्रंप ने कहा, 'मैं साफ कहा कि जो भी ब्रिक्स जॉइन करना चाहता है कर ले, लेकिन हम उन पर टैरिफ लगाते रहेंगे। इसके डर से सारे निकल गए। अब वे लोग ब्रिक्स से बाहर निकल रहे हैं।' डोनाल्ड ट्रंप ने जब यह टिप्पणी की, उस दौरान अर्जेंटीना के प्राइम मिनिस्टर जैवियर मिलेई भी बैठे थे। उन्होंने कहा कि हम डॉलर के प्रति समर्पित हैं। जो भी डॉलर में डील करेगा, उसे वे फायदे मिलेंगे, जो दूसरे लोगों के पास नहीं होंगे। ब्रिक्स तो डॉलर पर सीधा हमला था। मैंने साफ किया कि यदि आप गेम खेलेंगे तो मैं टैरिफ लगाऊंगा। उन सभी उत्पादों पर यह लगेगा, जो अमेरिका आते हैं। इस पर उन्होंने कहा कि हम इससे निकल रहे हैं। अब वे ब्रिक्स के बारे में बात भी नहीं करते।' दरअसल यह चर्चाएं रही हैं कि ब्रिक्स देशों की ओर से डॉलर का एक विकल्प तैयार करने की कोशिशें हो रही हैं। इसी संदर्भ में डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान था और उनका कहना था कि ऐसी कोई भी कोशिश सीधे तौर पर डॉलर पर अटैक है। ऐसा करना अमेरिका की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास है, जो हम नहीं होने देंगे। ब्रिक्स में भारत, रूस, ब्राजील, चीन और साउथ अफ्रीका रहे हैं। इन 5 देशों की ही इसमें सहभागिता रही है, लेकिन अब इसका विस्तार हुआ है। बीते कुछ सालों में मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात भी इसका हिस्सा बने हैं। डोनाल्ड ट्रंप फिलहाल विदेश नीति में टैरिफ का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी के तहत उन्होंने चीन, भारत समेत दुनिया के तमाम देशों पर टैरिफ लादे हैं। यही नहीं उनकी धमकी है कि यदि कोई ब्रिक्स का हिस्सा बनता है तो उस पर 10 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ लगेगा। बता दें कि भारत ने स्पष्ट किया है कि डॉलर को कमजोर करने की कोई रणनीति नहीं है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर का कहना है कि हमें डॉलर से कोई परेशानी नहीं है और हम उसके साथ हैं। ऐसी चर्चाएं बेबुनियाद हैं और ऐसा कोई प्रयास भी नहीं हुआ है।  

US का बड़ा कदम: क्यों चीन की एयरलाइंस पर लग सकता है उड़ान बैन?

वाशिंगटन  चीन और अमेरिका के बीच टैरिफ विवाद जारी है। टैरिफ युद्ध के बीच एक नया मुद्दा सामने आ गया है। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एक प्रस्ताव रखा, जिसमें चीन की एयरलाइंस कंपनियों को रूस के ऊपर से होकर अमेरिका आने-जाने वाली फ्लाइट्स पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई। इस पर चीन की प्रमुख सरकारी एयरलाइंस ने कड़ी आपत्ति जताई है। अमेरिका का कहना है कि ऐसी उड़ानें चीनी एयरलाइंस को अमेरिकी कंपनियों से अधिक लाभ देती हैं, क्योंकि अमेरिकी फ्लाइट्स रूसी एयरस्पेस का उपयोग नहीं कर सकतीं। अमेरिका ने स्पष्ट किया कि रूस के हवाई क्षेत्र से गुजरने पर चीनी विमानों को समय के साथ-साथ ईंधन की भी बचत होती हैं। बता दें कि 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद, पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के जवाब में मॉस्को ने अमेरिकी और अधिकांश यूरोपीय एयरलाइंस के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। लेकिन चीनी एयरलाइंस पर कोई ऐसी पाबंदी नहीं लगी। दूसरी ओर एयर चाइना, चाइना ईस्टर्न और चाइना सदर्न समेत छह प्रमुख चीनी एयरलाइंस ने पिछले हफ्ते इस अमेरिकी प्रस्ताव के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। चाइना ईस्टर्न ने इस सप्ताह अमेरिकी परिवहन विभाग को सौंपी रिपोर्ट में कहा कि यह प्रस्ताव सार्वजनिक हित को नुकसान पहुंचाएगा और अमेरिका-चीन के यात्रियों को परेशानी देगा। इससे यात्रा समय बढ़ेगा, जिससे खर्च और टिकट की कीमतें महंगी होंगी, जो सभी यात्रियों पर बोझ बनेगा। चाइना सदर्न ने चेतावनी दी कि रूसी एयरस्पेस पर रोक से हजारों यात्री प्रभावित होंगे। एयर चाइना का अनुमान है कि अगर यह प्रतिबंध थैंक्सगिविंग और क्रिसमस के दौरान लागू हुआ तो कम से कम 4400 यात्री प्रभावित होंगे। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने भी इस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की और कहा कि यह कदम वैश्विक यात्रियों के लिए 'सजा' जैसा साबित होगा।  

आज से लागू! CJI गवई ने ग्रीन पटाखों पर रिपोर्ट के साथ दो महत्वपूर्ण काम दिए

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार के संयुक्त अनुरोध को स्वीकार करते दिल्ली और NCR में ग्रीन पटाखे फोड़ने की इजाजत दे दी है। देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने इस इजाजत के साथ ही कुछ शर्तें भी रखी है। पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि हरित पटाखों का उपयोग दिवाली और उससे एक दिन पहले कुछ घंटों तक ही किया जा सकेगा। कोर्ट ने 18 से 21 अक्टूबर तक हरित पटाखों की बिक्री की अनुमति दी है। दिवाली से पहले यह अहम छूट देते हुए CJI गवई ने कहा, ‘‘हमें एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा, पर्यावरण के साथ समझौता न करते हुए इसे संयमित करना होगा।’’ जस्टिस गवई ने आदेश पढ़ते हुए कहा, ‘‘18 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक हरित पटाखों की बिक्री की अनुमति होगी। पुलिस प्राधिकरण इस बात पर नजर रखने के लिए गश्ती टीमों का गठन करेगा कि केवल क्यूआर कोड वाले पटाखे ही बेचे जाएं। नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के लिए उल्लंघन नोटिस संलग्न किया जाएगा। पटाखों का उपयोग दिवाली से एक दिन पहले और दिवाली के दिन सुबह छह बजे से सुबह सात बजे तक और रात आठ बजे से रात 10 बजे तक सीमित रहेगा।’’ पटाखा तस्करी से पर्यावरण को हुआ बड़ा नुकसान पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि ई-कॉमर्स मंचों के माध्यम से पटाखों की बिक्री की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही पीठ ने कहा कि अतीत में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के कारण उच्च उत्सर्जन वाले पटाखों की तस्करी हुई और इससे पर्यावरण को और भी अधिक नुकसान हुआ। इसके साथ ही पीठ ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और एनसीआर के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) को दिवाली के दौरान प्रदूषण स्तर की निगरानी करने और उसके समक्ष रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। 18 अक्टूबर से NCR में AQI की निगरानी CJI गवई ने आदेश में कहा कि CPCB और राज्य PCB 18 अक्टूबर से NCR में AQI की निगरानी करेंगे और इस अदालत को रिपोर्ट दाखिल करेंगे। कोर्ट ने कहा कि वायु गुणवत्ता के साथ-साथ पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए उसका नमूना भी लिया जाएगा। CJI गवई ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को इस काम पर आज से ही लगा दिया और कहा कि 14 तारीख के आंकड़ों के साथ ही इस पर काम शुरू कर दीजिए और दिवाली तक के डेटा अदालत में पेश कीजिए। हालांकि राज्यों को 18 अक्टूबर से AQI की निगरानी और उसकी रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।

भारी संकट! भारत-अमेरिका परमाणु डील के सलाहकार पर गिरफ्तारी, अमेरिकी अटॉर्नी ने जताया गंभीर चिंता

वाशिंगटन  प्रमुख भारत-अमेरिकी सामरिक विशेषज्ञ एशले जे. टेलिस को राष्ट्रीय रक्षा जानकारी को अवैध रूप से रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। टेलिस वर्तमान में ‘कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस’ में वरिष्ठ फेलो हैं और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा और एशियाई सामरिक मुद्दों में विशेषज्ञता रखते हैं। वर्जीनिया के पूर्वी जिले के अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय ने मंगलवार को बताया कि 64 वर्षीय टेलिस को वियना, वर्जीनिया में गिरफ्तार किया गया। अमेरिकी अटॉर्नी लिंडसे हॉलिगन ने कहा कि आरोप नागरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। यदि टेलिस दोषी ठहरते हैं, तो उन्हें 10 साल तक की जेल, ढाई लाख अमेरिकी डॉलर तक का जुर्माना, 100 डॉलर का विशेष मूल्यांकन और जब्ती का सामना करना पड़ सकता है। किसी भी सजा का निर्धारण संघीय जिला न्यायाधीश द्वारा अमेरिका के सजा दिशानिर्देशों और अन्य वैधानिक कारकों के आधार पर किया जाएगा। जॉर्ज डब्ल्यू. बुश प्रशासन के दौरान ऐतिहासिक भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते में अहम भूमिका निभाई, जिसने 2000 के दशक में द्विपक्षीय संबंधों को बदल दिया।  

हाईवे पर जाम की मार: मुंबई-अहमदाबाद मार्ग पर 500 छात्र फंसे 12 घंटे तक

मुंबई महाराष्ट्र के पालघर में मुंबई-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर मंगलवार को भीषण जाम लगा रहा। इस जाम के चलते करीब 500 स्कूली छात्र-छात्राएं करीब 12 घंटे तक जाम में फंसे रहे। बुधवार को अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न स्कूलों की 12 बसें, जिनमें कक्षा पांच से लेकर दसवीं तक के छात्र सवार थे, करीब 12 घंटे तक जाम में फंसी रहीं। इससे बच्चे बिना भोजन-पानी के घंटों तक परेशान रहे। मंगलवार शाम लगा जाम बुधवार सुबह तक भी नहीं खुल पाया वसई के करीब मंगलवार शाम करीब 5.30 बजे मुंबई-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारी भीड़ के चलते जाम लग गया। हालात इस कदर खराब हो गए कि जाम में फंसे कई छात्र बुधवार सुबह करीब छह बजे अपने-अपने घर पहुंच पाए। इससे न सिर्फ छात्र बल्कि उनके परिजन भी खासे परेशान रहे। पुलिस ने बताया कि ठाणे और मुंबई के कई स्कूलों के छात्र मंगलवार को विरार के नजदीक पिकनिक मनाने गए थे। पिकनिक से लौटते हुए उनकी बसें जाम में फंस गईं। रात का समय होने के चलते छात्र कई घंटे तक बिना खाना-पानी के रहे। बच्चों को हुई भारी परेशानी स्थिति ये रही कि कई बच्चे रोने लगे। जाम में फंसे बच्चों के बारे में सूचना पाकर कुछ सामाजिक संगठनों ने मौके पर पहुंचकर बच्चों को पानी और बिस्किट आदि दिए। साथ ही स्थानीय लोगों की मदद से गलियों आदि से निकालकर कुछ बसों को निकाला गया। पुलिस ने बताया कि अभी भी जाम पूरी तरह से नहीं खुला है। बच्चों के परिजनों ने पुलिस प्रशासन से घटना को लेकर नाराजगी जाहिर की और मांग की कि भविष्य में इस तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। 

नक्सलियों की बड़ी हार: गढ़चिरौली में 60 सदस्यीय दल ने किया सरेंडर, कमांडर सोनू भी शामिल

गढ़चिरौली देश में नक्सलवाद अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। इस बीच महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में पहली बार सबसे बड़ा नक्सली आत्मसमर्पण हुआ है। वरिष्ठ नक्सली नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ भूपति ने अपने 60 अन्य नक्सली साथियों के साथ महाराष्ट्र मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने हथियार डाले हैं।  बुधवार (15 अक्तूबर) गढ़चिरौली शहीद पांडु आलम हॉल, पुलिस मुख्यालय में आत्मसमर्पण समारोह आयोजित किया। जिसमें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सभी नक्सलियों का मुख्यधारा में लौटने के लिए स्वागत किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक नक्सली कमांडर मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति ने शर्त रखी कि वह मुख्यमंत्री की मौजूदगी में आत्मसमर्पण करेंगे। जिसके बाद गढ़चिरौली पुलिस मुख्यालय में सीएम फडणवीस की मौजूदगी में नक्सली लीडर और भाकपा-माओवादी के पोलित ब्यूरो सदस्य मल्लौजुला वेणुगोपाल राव ने हथियार डाले। एक अधिकारी ने बताया कि भूपति पर 6 करोड़ रुपए का इनाम था। जानकारी के मुताबिक नक्सलियों ने अपने 54 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया, जिनमें सात एके-47 और नौ इंसास राइफलें शामिल हैं। गढ़चिरौली पुलिस को 1 करोड़ रुपए के इनाम देने की घोषणा कार्यक्रम के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "आज नक्सल कमांडर मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति ने 60 नक्सलियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। भूपति नक्सलियों की भर्ती, रणनीति और हमले का काम करते थे। पिछले एक महीने से हमारी पुलिस उससे मुख्यधारा में लौटने के लिए बात कर रही थी। उसे यह भी बताया गया था कि हमारे नक्सल विरोधी अभियान नहीं रुकेंगे और उसे आत्मसमर्पण करने का विकल्प दिया गया था। आज महाराष्ट्र में नक्सलवाद की कमर टूट गई है। इसके बाद छत्तीसगढ़ के नक्सली आत्मसमर्पण करने की कोशिश करेंगे। इस उपलब्धि पर हमने गढ़चिरौली पुलिस को 1 करोड़ रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।" उन्होंने आगे कहा कि हम सभी, चाहे वह महाराष्ट्र हो, छत्तीसगढ़ हो या तेलंगाना नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में एकजुट हैं। हम एक-दूसरे के साथ समन्वय में काम करते हैं।" टॉप कमांडर के सरेंडर से टूटी नक्सलियों की कमर नक्सली टॉप कमांडर मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ भूपति पर करोड़ों का ईनाम घोषित था। जिनको माओवादी संगठन के सबसे प्रभावशाली रणनीतिकारों में से एक माना जाता था और वह लंबे समय से महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर प्लाटून अभियानों की निगरानी करते थे। उनके सरेंडर के बाद अबूझमाड़ में नक्सलियों की कमर टूट गई है। बता दें कि सोमवार देर रात (13 अक्तूबर) भाकपा-माओवादी के पोलित ब्यूरो सदस्य मल्लौजुला वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था। जो कि यह भाकपा-माओवादी के लिए एक बड़ा झटका था। आत्मसमर्पण करने वालों में भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय समिति का एक सदस्य और एक संभागीय समिति के 10 सदस्य शामिल थे।