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सीमा पर दुखद हादसा! LoC पर गोली चलने से भारतीय सैनिक ने गंवाई जान

पुंछ  जिले में ड्यूटी दौरान एक जवान के शहीद होने की खबर मिली है। जानकारी के मुताबिक, जिले में नियंत्रण रेखा पर दुर्घटनावश चली गोली से जवान शहीद हो गया। जानकारी के मुताबिकि, जिले में भारत पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर स्थित जलास क्षेत्र में सोमवार को दुर्घटनावश गोली चलने से भारतीय सेना का एक जवान नायक अमरजीत सिंह पुत्र रमेश कुमार निवासी गांव जंजनवाला तहसील नरवाना जिला जिंद हरियाणा शहीद हो गया।  शव को पुलिस एवं सेना द्वारा पुंछ के राजा सुखदेव सिंह जिला अस्पताल लाया गया जहां मैडिकल सुप्रिडेंट डॉ. मोहम्मद शफीक की देखरेख में शव का पोस्टमार्टम करवाया गया और उसके उपरांत कानूनी कार्रवाई करने के साथ ही शव को सैना को सोंप दिया। जहां से उसे आज अंतिम संस्कार के लिए उसके घर भेजा जाएगा।  

रेलवे का करिश्मा! इस जगह पर चार दिशाओं से गुजरती ट्रेनें, लेकिन हादसा ज़ीरो

नई दिल्ली   सोचिए, एक ऐसी जगह जहां उत्तर से दौड़ती ट्रेन दक्षिण की ओर जा रही ट्रेन को काटे, पश्चिम की रेल पूरब की ओर बढ़े — और फिर भी सब कुछ सुचारू रूप से चलता रहे! कोई रुकावट नहीं, कोई हादसा नहीं। सुनने में असंभव लगता है न? लेकिन यह अजूबा बिल्कुल हकीकत है — और यह जगह है महाराष्ट्र का नागपुर, जहां मौजूद है भारत का अनोखा “डायमंड क्रॉसिंग”। एक स्टेशन, चार दिशाएं, एक ही बिंदु नागपुर जंक्शन भारत के सबसे प्रमुख रेलवे नेटवर्कों में से एक है। यहां देश के चार बड़े रेल मार्ग — मुंबई-हावड़ा, दिल्ली-चेन्नई, काजीपेट-नागपुर, और नागपुर-इटारसी — एक दूसरे को इस तरह काटते हैं कि ऊपर से देखने पर पटरियों का आकार बिल्कुल हीरे (डायमंड) जैसा दिखता है। इसी कारण इस स्थान को ‘डायमंड क्रॉसिंग’ नाम मिला। यह संरचना केवल देखने में ही आकर्षक नहीं, बल्कि रेलवे इंजीनियरिंग की बारीकी और तकनीकी कौशल का अद्भुत उदाहरण भी है। यहां रोज़ाना सैकड़ों एक्सप्रेस, सुपरफास्ट और मालगाड़ियां गुजरती हैं — फिर भी किसी तरह का व्यवधान नहीं होता।  कैसे बचती हैं ट्रेनें टकराने से? यह सवाल अक्सर लोगों के मन में उठता है कि जब इतनी ट्रेनें एक साथ यहां से गुजरती हैं, तो फिर दुर्घटना कैसे नहीं होती। इसका जवाब है — अत्याधुनिक नियंत्रण प्रणाली और मानवीय सतर्कता का अद्भुत संगम।   इंटरलॉकिंग सिस्टम यहां इंटरलॉकिंग सिस्टम लागू है, जो एक समय में केवल एक ट्रेन को ही क्रॉसिंग पॉइंट पार करने की अनुमति देता है। इस प्रणाली से यह सुनिश्चित होता है कि किसी भी ट्रेन को गलत ट्रैक पर सिग्नल न मिले। स्वचालित सिग्नलिंग तकनीक नागपुर का डायमंड क्रॉसिंग ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम से जुड़ा है। जैसे ही एक ट्रेन क्रॉसिंग पार करती है, सिस्टम तुरंत अगले ट्रैक के सिग्नल को सक्रिय कर देता है। यह व्यवस्था ट्रेन की दिशा, गति और समय को ध्यान में रखकर सिग्नल बदलती है — जिससे हर सफर सुचारू और सुरक्षित बनता है। मानवीय सतर्कता तकनीक के साथ-साथ यहां रेलवे कर्मचारियों की निगरानी भी बराबर जारी रहती है। सिग्नल ऑपरेटर और स्टेशन मास्टर लगातार ट्रेनों की स्थिति पर नज़र रखते हैं। यह तालमेल तकनीक और मानव दक्षता के बीच संतुलन का उत्कृष्ट उदाहरण है। रेलवे इंजीनियरिंग का गौरव नागपुर का यह क्रॉसिंग केवल एक रेल संरचना नहीं, बल्कि यह दर्शाता है कि भारतीय रेलवे ने सुरक्षा, योजना और तकनीकी प्रबंधन में कितना शानदार विकास किया है। चार दिशाओं से आने वाली गाड़ियों को बिना किसी बाधा के पार करवाना, एक सटीक गणित और मशीनरी की बेहतरीन समझ का परिणाम है।

इजरायल-हमास सौदेबाजी पर सहमति: अमेरिका की पहल से 45 फिलीस्तीनियों के शवों की हुई वापसी

गाजा  गाजा में स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि इजराइल ने 45 फिलीस्तीनियों के शव सौंप दिए, इससे एक दिन पहले हमास ने तीन बंधकों के शव लौटाए थे। इजराइली अधिकारियों ने तीनों की पहचान उन सैनिकों के रूप में की है जो सात अक्टूबर, 2023 को हमास के नेतृत्व वाले हमले में मारे गए थे, जिसके कारण युद्ध शुरू हुआ था। यह आदान-प्रदान दो साल से चल रहे युद्ध में अमेरिकी मध्यस्थता से हुए अस्थिर युद्ध विराम की दिशा में एक और कदम है – यह इजराइल और उग्रवादी समूह हमास के बीच लड़ा गया अब तक का सबसे घातक और विनाशकारी युद्ध है।   युद्ध विराम के 10 अक्टूबर को लागू होने के बाद से फिलीस्तीनी उग्रवादियों ने 20 बंधकों के शव भेजे हैं, आठ (शव) अब भी गाजा में हैं। प्रत्येक बंधक की वापसी के बदले, इजराइल 15 फिलीस्तीनियों के शव लौटा रहा है। सोमवार की वापसी के साथ, युद्धविराम शुरू होने के बाद से वापस सौंपे गए फलस्तीनियों के शवों की संख्या 270 हो गई है। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता जहीर अल-वाहिदी ने बताया कि गाजा के नासेर अस्पताल में सोमवार सुबह फलस्तीनियों के 45 शव लाए गए।   मंत्रालय ने बताया कि अब तक वापस लाए गए सभी शवों में से केवल 75 की ही पहचान हो पाई है। मंत्रालय ने आगे कहा कि गाजा में डीएनए परीक्षण किट की कमी के कारण फोरेंसिक कार्य जटिल हो गया है। मंत्रालय ने शवों की तस्वीरें इस उम्मीद में ऑनलाइन पोस्ट की हैं कि परिवार के लोग उन्हें पहचान लेंगे। इस बीच, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने रविवार रात इजराइल को लौटाए गए तीन बंधकों की पहचान कैप्टन ओमर न्यूट्रा (अमेरिकी-इजरायली), स्टाफ सार्जेंट ओज डैनियल और कर्नल असफ हमामी के रूप में की है।    

यात्रियों को राहत: अब 48 घंटे में करें टिकट रद्द, मिलेगा पूरा रिफंड — DGCA का नया नियम

नई दिल्ली हवाई यात्रियों के लिए जल्द ही सफर और आसान बनने जा रहा है। अब अगर आपकी फ्लाइट की योजना अचानक बदल जाए तो भारी कैंसिलेशन चार्ज देने की चिंता नहीं रहेगी। नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) यात्रियों को राहत देने के लिए ऐसे नियम लागू करने की तैयारी में है, जिसके तहत टिकट बुक करने के 48 घंटे के भीतर बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के टिकट को रद्द या संशोधित किया जा सकेगा। फिलहाल स्थिति यह है कि किसी कारणवश यात्रा रद्द करनी पड़े तो यात्रियों को टिकट कैंसिल कराने पर बड़ी रकम गंवानी पड़ती है। ऊपर से, अगर टिकट किसी एजेंट या ऑनलाइन पोर्टल के जरिए बुक किया गया हो तो रिफंड आने में हफ्तों लग जाते हैं। इन परेशानियों को खत्म करने के लिए डीजीसीए अब पूरा ढांचा बदलने की योजना बना रहा है। प्रस्ताव के अनुसार, टिकट कैंसिल या बदलाव के लिए 48 घंटे की छूट दी जाएगी, यानी इस अवधि के भीतर किए गए रद्दीकरण पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। सबसे अहम बदलाव यह है कि रिफंड की पूरी जिम्मेदारी अब एयरलाइंस कंपनियों पर होगी — भले ही टिकट किसी एजेंट या थर्ड पार्टी वेबसाइट जैसे मेक माई ट्रिप या यात्रा डॉट कॉम के माध्यम से खरीदा गया हो। नियामक ने स्पष्ट किया है कि ये एजेंसियां एयरलाइंस की प्रतिनिधि होती हैं, इसलिए यात्री को रिफंड देने की अंतिम जिम्मेदारी एयरलाइन की होगी। इस कदम से यात्रियों को न केवल आर्थिक राहत मिलेगी बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी। अब एयरलाइंस को सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी माध्यम से टिकट खरीदा जाए, यात्री को रिफंड में कोई देरी या कटौती न झेलनी पड़े। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह भारतीय विमानन क्षेत्र में उपभोक्ता हितों की दिशा में एक ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है।

गाजा के लिए अमेरिका का बड़ा दांव: दो साल तक सीधा कंट्रोल करने की तैयारी, UNSC में हलचल

गाजा फिलिस्तीन और इज़राइल के बीच संघर्ष विराम के बाद अब गाजा में प्रशासन चलाने की नई योजना बनी है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जल्द एक प्रस्ताव पेश किया जाएगा, जिसके तहत अमेरिका और उसके सहयोगी देश दो साल के लिए गाजा की अस्थायी सरकार संभालेंगे। इस दौरान "इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स" नाम की एक विशेष अंतरराष्ट्रीय टुकड़ी बनाई जाएगी जो गाजा की सुरक्षा, मानवीय सहायता और इंफ्रास्ट्रक्चर बहाली का काम करेगी। यह फोर्स हमास से हथियार छीनने और सीमा की निगरानी की जिम्मेदारी भी उठाएगी।Axios रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरी योजना पर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने काम किया है, जबकि इज़राइल और मिस्र दोनों ने इस पर सहमति जताई है। हालांकि, हमास के हथियार न छोड़ने की स्थिति में भविष्य में फिर तनाव बढ़ सकता है। इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स (ISF) सीजफायर के बाद गाजा के प्रशासन और सुरक्षा को लेकर अमेरिका की ओर से तैयार एक मसौदा प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पेश किए जाने की तैयारी में है इसमें अगले दो साल के लिए गाजा में अस्थायी बहुराष्ट्रीय व्यवस्था (interim governance) बनाने और एक बहु-राष्ट्रीय सुरक्षा बल (International Stabilization Force/ISF) तैनात करने का प्रावधान है। यह बल सुरक्षा, हथियार बरामदगी, मानवीय सहायता और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण का काम संभालेगा।दो वर्षों के लिए एक अंतरिम व्यवस्था-प्रणाली लागू की जाएगी जो गाजा के नागरिक प्रशासन और पुनर्निर्माण को संयोजित करेगी; यह व्यवस्था संयुक्त राष्ट्र के साथ तालमेल में चलेगी। यूएस प्रशासन के मसौदे के अनुसार कई देशों के कर्मियों का एक गठित बल गाजा में सुरक्षा व्यवस्था, सीमाओं की निगरानी (विशेषकर इजराइल-मिस्र सीमाओं के नज़दीकी इलाकों), और स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय करेगा। इस बल में अरब और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों की भागीदारी पर काम चल रहा है।    हथियार वापसी और डिमिलिटरीकरण ISF का एक प्रमुख काम स्थानीय उग्र समूहों-विशेषकर हमास के पास मौजूद हथियारों की वापसी/निशस्त्रीकरण सुनिश्चित करना बताया जा रहा है लेकिन यह सबसे विवादस्पद और कठिन प्रावधान भी माना जा रहा है।  अस्थायी प्रशासन और ISF को गाजा में मानवीय राहत के वितरण, बुनियादी ढांचे की बहाली और माइंस/अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस (UXO) हटाने का व्यापक दायित्व सौंपने का प्रावधान है।  कौन-कौन से देश होंगे शामिल  ड्राफ्ट के अनुसार अमेरिका नेतृत्वकारी भूमिका निभाने का प्रस्ताव रख रहा है, पर बल में शामिल देशों को लेकर मतभेद हैं। कुछ अरब और मुस्लिम-बहुल देशों का समर्थन जरूरी माना जा रहा है, जबकि इजराइल ने स्पष्ट किया है कि कुछ देशों (जैसे तुर्की) को इस फोर्स में शामिल नहीं होने दिया जाएगा। साथ ही यूरोपीय देशों और मिस्र-जॉर्डन जैसे पड़ोसी देशों की भूमिका और वापसी-समयरेखा पर मतभेद चल रहे हैं।  ISF-स्टाइल व्यवस्था लागू करना चुनौतीपूर्ण विशेषज्ञों का कहना है कि ISF-स्टाइल व्यवस्था लागू करना न केवल सैन्य और राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण होगा, बल्कि इसे वैधता, स्थानीय स्वीकार्यता और दीर्घकालिक राजनीतिक समाधान के साथ जोड़ना और भी कठिन है। कई देशों की शर्तें हैं  स्पष्ट निकासी समयसीमा, फिलिस्तीनी स्वशासन की स्थिति की गारंटी और स्थानीय पुलिस व नागरिक प्रशासन के साथ समन्वय। इसके अलावा हमास का हथियार छोड़ने से इनकार या आंशिक असहयोग अगला बड़ा टकराव बन सकता है।  UNSC में पाले में गेंद कई पश्चिमी राजधानियों और कुछ अरब साझेदारों ने UN के माध्यम से मान्यता और विनियमन की बात कही है  UNSC में प्रस्ताव पर सहमति बनना इस योजना की सफलता के लिए निर्णायक होगा। सूत्र कहते हैं कि प्रस्ताव पर अभी भी कई तकनीकी और राजनीतिक वाक्यों पर काम चल रहा है और अंतिम मसौदा जल्द ही सुरक्षा परिषद में पहुंचाया जा सकता है।  ड्राफ्ट-प्रस्ताव में गाजा के लिए एक दो-साल की अंतरिम व्यवस्था की दिशा में कदम स्पष्ट है पर इसकी सफलता इस पर निर्भर करेगी कि (1) क्या हमास और स्थानीय समूह हथियार डालने के लिए राजी होंगे, (2) क्या क्षेत्रीय शक्तियाँ (इजराइल, मिस्र, जॉर्डन आदि) और वैश्विक साझेदार इस योजना के शर्त-शर्त की सहमति दे पाएँगे और (3) क्या UN-मैंडेट और वैधता के साथ यह बल गाजा में ठोस मानवीय और राजनीतिक भरोसा पैदा कर सकेगा। नीतिगत असमंजस और हितों के टकराव के कारण यह कोई सहज प्रक्रिया नहीं होगी।   

डबल मर्डर और रेप से फैली सनसनी! बिहार के 16 वर्षीय आरोपी की हैवानियत उजागर

अहमदाबाद गुजरात के विसावदर में बड़े भाई की हत्या और रेप के बाद भाभी की भी जान लेने वाला 16 साल का लड़का इतनी कम उम्र में ही 'राक्षसी प्रवृत्ति' का हो चुका था। जिस खौफनाक ढंग से पहले उसने बड़े भाई की जान ली, गर्भवती भाभी को संबंध बनाने पर मजबूर किया, उसके पेट पर प्रहार करके अजन्मे बच्चे को मार डाला, गला दबाकर भाभी की भी हत्या कर दी और फिर शराब पीकर अपनी करतूतों का जश्न मनाया…यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या कोई उतना क्रूर भी हो सकता है, वह भी इतनी कम उम्र में? जूनागढ़ के विसावदर में रहने वाले बिहार के 16 साल के लड़के ने जिस तरह घटना को अंजाम दिया उससे जांच करने वाले पुलिसकर्मी भी हैरान हैं। जांच में पता चला कि 16 अक्तूबर को ना सिर्फ बेहद क्रूर तरीके से उसने वारदात को अंजाम दिया, बल्कि लाशों को ठिकाने लगाने के बाद देशी शराब पीकर जश्न मनाया। पता चला है कि बड़ा भाई उसे गुटखा खाने से रोकता था। बेहद कम उम्र से ही वह शराबी भी बन चुका था। भाई के रोक-टोक की वजह से वह बहुत गुस्से में रहता था। शनिवार को गिरफ्तार किए गए आरोपी ने पुलिस पूछताछ में हत्या और उसके बाद के घटनाक्रम को विस्तार से बताया। उसने बताया कि लाशों दफ्न करने के बाद वह 400 रुपये में चार पाउच देसी शराब खरीदकर लाया और गड्ढे के नजदीक बैठकर पैग बनाकर जश्न मनाता रहा। वह शराब पीते हुए वहां इस्टांग्राम पर रील्स का लुत्फ ले रहा था और इस बात को लेकर बेहद खुश था कि हत्या के बाद उसने सफलतापूर्वक लाशों को ठिकाने लगा दिया है। हत्या के समय घर में मौजूद रही उसकी मां को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने बड़े बेटे और बहू की लाश को ठिकाने लगाने में भी छोटे बेटे का साथ दिया। आरोपी ने पुलिस पूछताछ में यह भी खुलासा किया कि उसने हत्या से पहले भाभी संग रेप किया। हत्या के बाद और लाश दफनाने से पहले उसने भाभी के शरीर से गहने निकाल लिए और बाद में उन्हें 30 हजार रुपये में बेच आया था। जांच के दौरान यह भी पता चला कि उसने लाशों को जल्द गलाने के लिए इंटरनेट पर तरीके खोजे। इसके बाद वह 52 किलो चीनी खरीदकर लाया और गड्ढे में डाल दिया।

भारत को UNSC में जगह दो वरना गिर जाएगी संयुक्त राष्ट्र की साख — इस देश ने दी दो टूक चेतावनी

फिनलैंड फिनलैंड के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर स्टब ने UNSC यानी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को शामिल किए जाने की वकालत की है। साथ ही उन्होंने चेताया है कि अगर भारत को शामिल नहीं किया गया, तो यूएन कमजोर होता रहेगा। उन्होंने कहा है कि वैश्विक स्थिरता और विकास में भारत की भूमिका बहुत अहम है। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर का भी जिक्र किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्टब ने कहा, 'मैं भारत का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं और मुझे लगता है कि और अमेरिका और चीन के साथ भारत हमारा अगला सुपरपॉवर होगा। प्रधानमंत्री मोदी हों या विदेश मंत्री जयशंकर, भारत जो अभी कर रहा है उससे रणनीतिक सोच झलकती है, जिससे दुनियाभर में सम्मान मिलता है।' उन्होंने कहा, 'मैंने महासभा में दो बार यह बात कही है। मैं संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में विस्तार चाहता हूं। इसकी सदस्यता कम से कम दोगुनी होनी चाहिए। यह गलत है कि भारत जैसे देश सुरक्षा परिषद में नहीं हैं।' उन्होंने सुझाव दिया है कि लैटिन अमेरिका से एक, अफ्रीका से दो और एशिया से दो सदस्यों को शामिल करना चाहिए। यूएन को दे दी चेतावनी स्टब ने कहा, 'अगर भारत जैसे खिलाड़ियों को लगेगा कि वह खेल में नहीं हैं, तो संस्थान ऐसे ही कमजोर होता रहेगा।' उन्होंने भारत को वैश्विक विकास में जरूरी बताया है। उन्होंने कहा, 'भारत जो करता है, वह दुनिया के लिए जरूरी है।' उन्होंने आगे कहा कि अंतराष्ट्रीय व्यवस्था को आकार देने में फिनलैंड भारत को एक अहम साझेदार के रूप में देखता है। उन्होंने यह भी कहा कि वह मल्टीलेटरलिज्म में भरोसा करते हैं और इसे काम करने के लिए भारत का सिस्टम में बाहर से नहीं, बल्कि अंदर शामिल होना जरूरी है। मल्टीलेटरलिज्म का मतलब उस सिद्धांत से है, जहां तीन से ज्यादा देश एक साझा मकसद को हासिल करने के लिए आपसी सहयोग से काम करते हैं।

धार्मिक स्थल पर बुलडोजर कार्रवाई से हरिद्वार में हड़कंप, पुलिस ने संभाली कमान

हरिद्वार  उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में अवैध धार्मिक संरचनाओं पर प्रशासन का शिकंजा कसता जा रहा है। हरिद्वार जिला प्रशासन का बुलडोजर अक्सर अतिक्रमण के खिलाफ गरजता नजर आ रहा है। मंगलवार को रानीपुर कोतवाली क्षेत्र के पथरी रोह पुल के पास करीब 2 बीघा सरकारी जमीन पर बनी अवैध मजार को प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। बताया जाता है कि यह मजार सिंचाई विभाग की जमीन पर बना था। इस अतिक्रमण के खिलाफ सिंचाई विभाग की ओर से नोटिस जारी किए गए थे। पहले मजार से संबंधित लोगों को नोटिस जारी किया गया था लेकिन निर्धारित समय सीमा में अतिक्रमण नहीं हटाया। इसके बाद प्रशासन ऐक्शन लिया और बुलडोजर चलाकर करीब 2 बीघा सरकारी जमीन पर बनी अवैध मजार को जमींदोज कर दिया। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के बाद पूरे उत्तराखंड में सरकारी जमीन पर बने अवैध धार्मिक ढांचों के खिलाफ तेजी से अभियान चलाया जा रहा है। इस कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के साथ भारी पुलिस फोर्स तैनात रही ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दावा किया था कि उत्तराखंड में अब तक 9000 एकड़ से अधिक जमीन इसी तरह के अवैध कब्जों से खाली कराई गई है। सीएम ने कहा था कि सूबे में कोई भी हरे रंग की चादर डालकर सरकारी जमीन पर कब्जा नहीं कर पाएगा। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा था कि उत्तराखंड के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ नहीं किया जाना चाहिए। इसी संकल्प को लेकर सूबे में सख्त धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानून लागू किया गया है। साथ ही प्रशासन की ओर लैंड जिहाद, लव जिहाद और थूक जिहाद जैसी विकृत मानसिकताओं के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई शुरू की गई है।

केंद्र क्यों बचना चाहती है इस पीठ से? रिटायरमेंट से 3 हफ्ते पहले CJI गवई ने जताई नाराज़गी

नई दिल्ली  उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार की उस अर्जी पर कड़ा रुख अपनाया, जिसमें अधिकरण सुधार (सुव्यवस्थीकरण एवं सेवा शर्तें) अधिनियम, 2021 के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी पीठ के पास भेजने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि अंतिम सुनवाई के आखिरी चरण में सरकार से ऐसी उम्मीद नहीं थी। साथ ही अदालत ने कहा है कि ऐसा लगता है कि सरकार मौजूदा बेंच से बचने की कोशिश कर रही है। यह अधिनियम फिल्म प्रमाणन अपीलीय अधिकरण समेत कुछ अपीलीय अधिकरण को खत्म करता है और विभिन्न अधिकरणों के न्यायिक एवं अन्य सदस्यों की नियुक्ति एवं कार्यकाल से जुड़े कई नियमों में बदलाव करता है। हो चुकी थीं अंतिम दलीलें प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने इस बात को लेकर नाराजगी जताई कि केंद्र अब इस मामले को पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के पास भेजना चाहता है। पीठ ने इस मामले में मुख्य याचिकाकर्ता मद्रास बार एसोसिएशन सहित विभिन्न याचिकाकर्ताओं की ओर से अंतिम दलीलें पहले ही सुन ली हैं। सुप्रीम कोर्ट बोला- हमें सरकार से ऐसी उम्मीद नहीं थी पीठ ने कहा, 'पिछली तारीख (सुनवाई की) पर, आपने (अटॉर्नी जनरल) ये आपत्तियां नहीं उठाईं और आपने निजी कारणों से सुनवाई टालने का अनुरोध किया। आप पूरी सुनवाई के बाद ये आपत्तियां नहीं उठा सकते… हम केंद्र सरकार से ऐसी तरकीब अपनाने की उम्मीद नहीं करते हैं।' नाराज नजर आ रहे प्रधान न्यायाधीश ने कहा, 'यह ऐसे समय हुआ है जब हमने एक पक्ष की पूरी बात सुन ली है और अटॉर्नी जनरल को निजी कारणों से छूट दी है।' CJI ने कहा कि ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार मौजूदा पीठ से बचना चाहती है। सीजेआई गवई 23 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने पीठ से अपील की कि वे बड़ी पीठ द्वारा सुनवाई किए जाने के अनुरोध संबंधी केंद्र की अर्जी को गलत न समझें। उन्होंने कहा कि इस पहलू पर शुरुआती आपत्तियां पहले ही केंद्र सरकार द्वारा दाखिल जवाब का हिस्सा हैं। सीजेआई ने कहा, 'अगर हम आपकी यह अर्जी खारिज कर देते हैं, तो हम यह मानेंगे कि केंद्र इस पीठ से बचने की कोशिश कर रहा है। एक पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अब हम यह सब नहीं सुनेंगे।' कोर्ट ने उठाए सरकार की टाइमिंग पर सवाल अटॉर्नी जनरल ने कहा, 'नहीं, कृपया ऐसा न समझें। यह अधिनियम काफी सोच-विचार के बाद लाया गया था… हम बस इतना कह रहे हैं कि क्या इन मुद्दों की वजह से इस अधिनियम को सीधे रद्द कर देना चाहिए। उसे लागू होने और प्रभाव दिखाने के लिए थोड़ा समय दिया जाए।' न्यायमूर्ति चंद्रन ने कहा कि इस मामले को बड़ी पीठ के पास भेजने का मुद्दा पहले नहीं उठाया गया था और इतने देरी से ऐसा नहीं किया जा सकता। पीठ ने कहा, 'कम से कम किसी मंच पर तो आपको यह मुद्दा उठाना चाहिए था… और वह भी इसके लिए एक अर्जी? आपने सुनवाई टालने का अनुरोध इसलिए किया कि आप आकर बहस करना चाहते थे।' अटॉर्नी जनरल ने जब यह गलतफहमी दूर करने की पूरी कोशिश की कि केंद्र सुनवाई टालना चाहता है, तो सीजेआई ने कहा, 'हमारे मन में आपके लिए बहुत इज्जत और सम्मान है।' अटॉर्नी जनरल को लगाई फटकार सीजेआई ने कहा, 'आप (अटार्नी जनरल) कृपया (अरविंद) दातार (वरिष्ठ अधिवक्ता, जिन्होंने अधिनियम के खिलाफ दलील पेश की) द्वारा दी गई दलीलों का जवाब देने तक ही सीमित रहें।' पीठ ने कहा, 'जो भी दस्तावेज सामने आए हैं, उनके आधार पर बहस करें। अगर बहस के दौरान हमें लगता है कि बड़ी पीठ के पास मामला भेजने की जरूरत है, तो हम ऐसा करेंगे… लेकिन हम आपकी उस अर्जी के कहने पर ऐसा नहीं करेंगे जो आधी रात को आई है।' शुक्रवार को सुनवाई फिर से होगी। न्यायालय ने 16 अक्टूबर को इस अधिनियम के अलग-अलग प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई शुरू की थी।  

भारतीयों के लिए मुश्किलें बढ़ीं: कनाडा रद्द कर सकता है हज़ारों अस्थायी वीजा

बेंगलुरु  कनाडा जाने की चाह रखने वाले भारतीयों को तगड़ा झटका लग सकता है। कनाडाई सरकार संसद में लंबित विधेयक के जरिए अस्थायी वीजा को बड़े पैमाने पर रद्द करने की शक्ति चाहती है, जिसका इस्तेमाल भारत से आने वाले फर्जी आवेदनों को रोकने के लिए किया जा सकता है।  रिपोर्ट में आईआरसीसी, सीबीएसए और अमेरिकी विभागों के हवाले यह बताया गया है। इस प्रावधान को भारत से अस्थायी वीजा आवेदकों की धोखाधड़ी को रोकने वाला कदम बताया गया है।   विधेयक में कहा गया कि महामारी या युद्ध के समय ढेर सारे वीजा एक साथ रद्द किए जा सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडाई अधिकारी इनमें से कुछ खास देशों के वीजा धारकों को निशाना बनाना चाहते हैं। अस्थायी निवासियों में काम करने वाले, विदेशी छात्र और घूमने आने वाले लोग शामिल होते हैं। यह नियम कनाडा की सीमाओं को मजबूत करने वाले कानून का हिस्सा बताया जा रहा है। नए लोगों का आना कम करने का दबाव इमिग्रेशन वकील सुमित सेन ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया था कि अगर लिबरल सरकार का स्ट्रॉन्ग बॉर्डर्स बिल पास हो गया, तो हजारों आवेदन एक झटके में रद्द हो सकते हैं, क्योंकि इससे मंत्री को बहुत बड़ी ताकत मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि 2007 में फाइलें इसलिए बंद की गईं ताकि पुरानी लंबित अर्जियों का बोझ हटाया जा सके। ये बात उन्होंने तब कही जब अर्जियों को मंजूरी देने में बहुत देरी हो रही है – जैसे स्टार्टअप वीजा के तहत उद्यमियों को 35 साल (420 महीने) तक इंतजार करना पड़ जाता है। अभी कनाडा सरकार नए लोगों का आना कम करना चाहती है, चाहे वो स्थायी रहने वाले हों या अस्थायी। इससे भारतीयों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। 74% भारतीय छात्रों के स्टडी परमिट रिजेक्ट रविवार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2025 में 74% भारतीय छात्रों के स्टडी परमिट रिजेक्ट हो गए जबकि 2023 के अगस्त में सिर्फ 32% ही रिजेक्ट हुए थे। यानी अब भारत से पढ़ाई के लिए कनाडा जाना बहुत मुश्किल हो गया है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की सरकार इस महीने अपनी आप्रवासन स्तर योजना पेश करने वाली है। देश में बढ़ते आप्रवासन-विरोधी भावना के कारण सरकार पर नए लोगों की संख्या कम करने का दबाव है।