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जानें कैसे कुछ हथियारों से ही पाकिस्तान हार मान बैठा, ऑपरेशन सिंदूर का खुलासा

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में मई महीने में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी। वहां और पीओके में रहने वाले 100 से ज्यादा आतंकियों को हवाई हमलों में ढेर कर दिया गया। साथ ही, कई एयरबेस भी तबाह किए गए। वायुसेना उप प्रमुख नर्मदेश्वर तिवारी ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा नया खुलासा किया है। उन्होंने कहा है कि इस ऑपरेशन के दौरान भरत को सिर्फ 50 से भी कम हथियार दागने पड़े थे। महज इतने हथियारों से ही पाकिस्तान ने घुटने टेक दिए और सीजफायर की गुहार लगाने लगा। एनडीटीवी से बात करते हुए एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी ने कहा कि पाकिस्तान को सीजफायर की टेबल तक लाने के लिए भारतीय वायुसेना को 50 से भी कम हथियार दागने पड़े। उन्होंने कहा, ''प्रस्तुत विकल्पों की सूची में से हमारे पास बड़ी संख्या में टारगेट सेट्स थे और 9 ठिकानों को टारगेट किया। हमारे लिए मुख्य बात यह थी कि 50 से भी कम हथियारों के साथ सीजफायर हुआ। इसलिए यही वह महत्वपूर्ण बात है, जिसे मैं आपको समझाना चाहता हूं।'' उन्होंने आगे कहा, ''किसी भी युद्ध को शुरू करना काफी आसान होता है, लेकिन उसे खत्म करना आसान नहीं होता। यह बात ध्यान में रखने योग्य है, ताकि हमारी सेना सक्रिय रहे, तैनात रहे और वे किसी भी संभावित स्थिति के लिए तैयार रहें।" उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का क्रेडिट भारत की एकीकृत वायुकमान और नियंत्रण प्रणाली (IACCS) को दिया जो आक्रामक और रक्षात्मक दोनों ही अभियानों की रीढ़ रही। इसी सिस्टम ने भारत को कड़ा जवाब देने में सक्षम बनाया और इसके चलते पाकिस्तान ने सीजफायर की मांग की। क्यों और कब हुआ था ऑपरेशन सिंदूर 22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान के आतंकियों ने भारतीय पर्यटकों को करीब से गोली मारी थी, जिसमें 26 की जान चली गई थी। इससे पूरे देशभर में गुस्सा था। भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पहले सिंधु जल संधि को रद्द करने समेत कई फैसले लिए और फिर सात मई को ऑपरेशन सिंदूर चलाते हुए पाकिस्तान और पीओके के 9 ठिकानों पर हवाई हमले कर दिए। इसमें 100 से ज्यादा आतंकी मार गिराए गए, जिसमें लश्कर और जैश के अहम आतंकी भी शामिल थे। इसके बाद भारत-पाक के बीच तनाव बढ़ गया। पाक ने भी तुर्किए के ड्रोन की मदद से भारत पर जवाबी हमले की कोशिश की, लेकिन भारत ने सभी को नाकाम कर दिया। इसके बाद फिर से भारत ने पाकिस्तान पर हवाई हमले करके वहां के कई एयरबेस को ध्वस्त कर दिया। चार दिनों तक चरम पर तनाव रहने के बाद आखिरकार पाकिस्तान ने भारत से सीजफायर की मांग की और दोनों देशों में इसके लिए सहमति बन सकी।

मोदी सरकार का तोहफा: प्रधानमंत्री जनधन योजना में अब मिलेगी ₹10,000 तक ओवरड्राफ्ट सुविधा

नई दिल्ली  नरेंद्र मोदी सरकार की चर्चित योजना- प्रधानमंत्री जनधन के 11 साल पूरे हो गए हैं। योजना के तहत खोले गए खातों की संख्या 11 वर्ष में बढ़कर 56.16 करोड़ हो गई है। वहीं, खातों में 2.68 लाख करोड़ रुपये जमा किए गए। योजना के तहत खाताधारकों को कई बड़ी सुविधाएं मिलती हैं। इनमें से एक सुविधा ओवरड्राफ्ट की है। आइए इस सुविधा के बारे में विस्तार से जान लेते हैं। क्या है ओवरड्राफ्ट लिमिट प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत लाभार्थी 10000 रुपये तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। बता दें कि ओवरड्राफ्ट के तहत अगर आपके खाते में पर्याप्त पैसा नहीं है, फिर भी आप एक निश्चित सीमा तक पैसे निकाल सकते हैं या लेनदेन कर सकते हैं। योजना के तहत सभी लाभार्थियों को 2 लाख रुपये के दुर्घटना बीमा कवर के साथ एक निःशुल्क रुपे डेबिट कार्ड प्राप्त होता है। क्या कहते हैं आंकड़े बीते दिनों वित्त मंत्रालय ने बताया कि जनधान के तहत खातों की संख्या मार्च 2015 के 14.72 करोड़ से बढ़कर 13 अगस्त 2025 तक 56.16 करोड़ हो गई है। खाताधारकों में 56 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। वहीं 67 प्रतिशत खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में खोले गए हैं। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से लाभार्थियों के खातों में सीधे 45 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए। भारत की 94 प्रतिशत वयस्क आबादी का अब बैंक खाता है। 38.68 करोड़ रुपे डेबिट कार्ड जारी प्रधानमंत्री जनधन योजना के खाताधारकों को कुल 38.68 करोड़ रुपे डेबिट कार्ड जारी किए गए हैं। इससे उन्हें नकदी रहित लेनदेन की सुविधा मिली है और अंतर्निहित दुर्घटना बीमा कवर तक पहुंच प्राप्त हुई है। ये खाते प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी), प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई), अटल पेंशन योजना (एपीवाई), और माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी बैंक (मुद्रा) योजना के लिए पात्र हैं।

सरकार ने बढ़ाई PM SVANidhi स्कीम की डेडलाइन, बिना गारंटी मिलेगा लोन

नई दिल्ली कोरोना महामारी के दौर में, जब लोगों के छोटे रोजगार ठप हो गए थे और खासतौर पर रेहड़ी-पटरी वालों का बिजनेस पूरी तरह से खत्म हो गया था, तो ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने इनकी मदद के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि या पीएम स्वनिधि योजना की शुरुआत की थी, जिसके तहत उन्हें अपना बिजनेस खड़ा करने में मदद के लिए सरकार 80,000 रुपये तक का लोन मुहैया करा रही थी और वो भी बिना गांरटी के, अब मोदी सरकार ने इस स्कीम के तहत मिलने वाले लोन की लिमिट में इजाफा कर दिया है और अब लाभार्थियों को 80 हजार नहीं, बल्कि 90,000 रुपये तक का गारंटी-फ्री लोन मिलेगा. यही नहीं स्वनिधि योजना की डेडलाइन भी 2030 तक बढ़ाई गई है.  31 मार्च 2030 तक मिलेगा फायदा केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के विस्तार और पुनर्गठन को मंजूरी दे दी है, जो करोड़ों रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे विक्रेताओं के लिए बड़ी राहत भरा कदम है. रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के इस फैसले से 1.15 करोड़ रेहड़ी-पटरी वालों को लाभ मिलेगा, जिनमें 50 लाख नए लाभार्थी भी शामिल हैं. आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के साथ वित्त सेवा विभाग द्वारा इसका संचालन 31 मार्च 2030 तक जारी रहेगा. इस फैसले से सरकारी खजाने पर 7,332 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय आएगा.  80 नहीं, अब 90 हजार तक लोन   सरकार ने पीएम स्वनिधि योजना की डेडलाइन को बढ़ाने के साथ ही इसके तहत लाभार्थियों को मिलने वाले लोन की लिमिट में भी बढ़ोतरी की है. बता दें कि इसमें जरूरतमंदों को सरकार तीन किस्तों में 80,000 रुपये का लोन देती है और 10, 20 और 50 हजार रुपये तीन चरणों में दिए जाते थे. लेकिन अब इसकी लिमिट को बढ़ाते हुए स्मॉल बिजनेस की शुरुआत के लिए पहले चरण में 15,000 रुपये, दूसरे चरण में 25,000 रुपये और तीसरे चरण में 50,000 रुपये का लोन मिलेगा. इस सरकारी योजना का पूरा लाभ लेने के लिए क्रेडिबिलिटी जरूरी है. मतलब कोई व्यक्ति अपना व्यापार शुरू करने के लिए अप्लाई करता है, तो पहले उसे 15,000 रुपये का लोन मिलेगा और फिर उसके द्वारा ये लोन की रकम निर्धारित समय में चुकाने ही वो स्कीम के तहत अगला 25,000 रुपये का लोन पा सकेगा. इसी तरह जब वो इस लोन को चुका देगा, तो उसे एकमुश्त 50,000 रुपये का लोन पाने का योग्य माना जाएगा. सरकारी डेटा पर नजर डालें, तो 30 जुलाई 2025 तक 68 लाख से ज्यादा लाभार्थियों को 13,797 करोड़ रुपये के 96 लाख से ज्यादा लोन वितरित किए गए हैं. करीब 47 लाख लाभार्थी डिजिटली सक्रिय हैं, जिन्होंने 6.09 लाख करोड़ रुपये वैल्यू के 557 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन किए हैं. सिर्फ आधार लाएं और लोन ले जाएं जैसा कि बताया कि ये सरकार की बिना गारंटी वाली लोन स्कीम है, यानी इसे लेने के लिए आपको किसी भी तरह की कोई चीज गारंटी के तौर पर गिरवी नहीं रखनी होगी. सिर्फ आधार कार्ड के जरिए आपको ये लोन आसानी से चरणबद्ध तरीके से मिल जाता है. आपको करना ये है कि पैसा तय समय में वापस करना है. नियमों को देखें, तो पीएम स्वनिधि योजना के तहत जितनी लोन की राशि ली जाती है, उसे सालभर में चुकाया जा सकता है. यही नहीं इसमें EMI Payment की सुविधा भी मिलती है.  रुपे क्रेडिट कार्ड समेत ये सुविधाएं भी सरकार द्वारा साफ किया गया है कि पीएम स्वनिधि योजना के जो लाभार्थी समय पर दूसरा लोन चुकाएंगे, उन्हें यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड भी मिलेगा, जिससे उनकी व्यावसायिक और व्यक्तिगत आर्थिक जरूरतें पूरा करने में उन्हें मदद मिलेगी. इसके अलावा स्मॉल बिजनेस शुरू करने वाले लाभार्थियों को डिजिटल पेमेंट के लिए प्रोत्साहित करने के लिए रिटेल और थोक लेन-देन के लिए 1,600 रुपये तक का डिजिटल कैशबैक भी मिलेगा. योजना के विस्तार के साथ सरकार का लक्ष्य इसकी पहुंच को और व्यापक बनाने के साथ छोटे व्यापारियों के लिए वित्तीय सहायता को मजबूत करना है.

पेंशन के लिए बड़ा बदलाव, EPFO ने तय किया—1 महीने के योगदान से मिलेगा लाभ

नई दिल्ली कर्मचारियों की पेंशन को लेकर ईपीएफओ ने एक बड़ा बदलाव किया है. अब छह महीने से कम तक भी नौकरी करके छोड़ने वाले व्‍यक्तियों को EPS का लाभ दिया जाएगा. इन लोगों को अब अपनी पेंशन में कंट्रीब्‍यूशन खोना नहीं पड़ेगा.  रिटायरमेंट फंड जुटाने वाली संस्‍थान ने EPS नियम के तहत पहले कोई भी सर्विस, जो 6 महीने के अंदर खत्म होती थी उसे 'जिरो कम्‍प्‍लीट ईयर' के परिणाम में पेंशन मिलने के उपयोग नहीं मानती थी और 5 महीने तक नौकरी करके छोड़ने वालों को पेंशन का अधिकार नहीं दिया जाता था. हालांकि अब नए नियमों के तहत अप्रैल- मई 2024 के दौरान जारी किए गए एक सर्कुलर में ये अधिकार दे दिया गया है.  ईपीएफओ ने स्पष्‍ट कर दिया है कि अगर कोई व्‍यक्ति 1 महीने की भी सेवा पूरी करता है और ईपीएस के तहत योगदान देता है तो उसे भी ईपीएस के तहत पेंशन का अधिकार होगा.  क्या है EPFO का नया नियम? कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के नए नियम के मुताबिक, कोई व्यक्ति चाहे 1 महीने नौकरी करे, लेकिन यदि उसने EPS में योगदान किया है तो वह EPS पेंशन के लिए पात्र होगा। यानी पेंशन पाने का हक अब सेवा के पूरे साल की बजाय, योगदान के आधार पर तय किया जाएगा। EPFO ने क्यों बदले नियम? ईपीएफओ का यह फैसला उन सेक्टर्स के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जहां कम समय के लिए जॉब ऑफर की जाती है। मसलन, BPO, लॉजिस्टिक्स, अनुबंध (Contract) स्टाफिंग और शॉर्ट-टर्म प्रोजेक्ट्स में हर साल हजारों लोगों को चंद महीने बाद ही फायर कर दिया जाता है। फाइनेंस और सेल्स से जुड़ी जॉब भी ऐसे ही होती हैं।  ये बदलाव क्‍यों था जरूरी?  इस बदलाव से बहुत लोगों को राहत मिलने वाली है. खासकर बीपीओ, लॉजिस्टिक्स और अनुबंध स्टाफिंग को, जहां जल्दी निकासी सामान्य है. यह युवा कर्मचारियों को नौकरी के हितों की रक्षा करेगा. ये उन सभी के लिए काफी लाभदायक साबित होगा, जो काफी कम समय के लिए किसी कंपनी को ज्‍वाइन करते हैं. मान लीजिए अगर किसी ने एक महीने तक ही नौकरी की और फिर नौकरी नहीं कर पाए, फिर उसे पीएफ का पैसा तो मिल सकता है, लेकिन ईपीएस में कंट्रीब्‍यूशन समाप्‍त हो जाएगा. ऐसे में यह नियम उन कर्मचारियों के लिए लाभदायक होगा.  इन सेक्टरर्स में छह माह से कम नौकरी करने वाले हजारों कर्मचारी EPS कंट्रीब्यूशन के बावजूद पेंशन से वंचित हो जाते थे। उनका EPS कंट्रीब्यूशन भी बेकार हो जाता था। नया नियम युवाओं और अनियमित कार्यबल के लिए एक बड़ी राहत होगी। PF खाताधारक क्या करें? आपने यदि किसी कंपनी में 6 महीने से कम नौकरी की है और EPS कंट्रीब्यूशन किया है। तो अपने PF पासबुक की जांच करें कि EPS कंट्रीब्यूशन दर्ज है या नहीं। अगर EPS हिस्सा नहीं दिख रहा तो 2024 के सर्कुलर का हवाला देते हुए EPFO को शिकायत करें। शिकायत करते समय पासबुक का स्क्रीनशॉट या PDF फॉर्मेट सेव कर लें। पुराने नियमों में क्या था? 6 महीने से कम सेवा को शून्य पूर्ण सेवा वर्ष (Zero completed year) माना जाता था। ऐसे कर्मचारियों को EPS राशि निकालने की अनुमति नहीं होती थी, जिससे उनका योगदान वहीं अटक जाता था। यह प्रक्रिया न्यायसंगत नहीं मानी जा रही थी, क्योंकि योगदान देने के बावजूद अधिकार नहीं मिल रहा था। एक्सपर्ट्स की राय रिटायरमेंट प्लानिंग विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला पेंशन फंड की समावेशिता बढ़ाने वाला है और उन कर्मचारियों के हित में है, जिनका करियर शुरुआती दौर में अस्थिर होता है। आप भी पीएफ खाताधारक हैं तो ये जान लीजिए  अगर आपने 6 महीने के अंदर इस्‍तीफा दिया है तो EPS योगदान के लिए अपने PF पासबुक की जांच करें और अगर आपको पेंशन का हिस्सा नहीं दिया गया है, तो 2024 के स्पष्टीकरण का उल्लेख करते हुए EPFO को शिकायत करें.  आवेदन करते वक्‍त अपने पासबुक का स्‍क्रीनशॉट या पीडीएफ सेव कर लें. अक्‍सर देखा गया है कि कम उम्र के सेवा वाले कर्मचारियों को ईपीएस फंड निकालने की अनुमति नहीं दी जाती थी, जिससे उनका कंट्रीब्‍यूशन वहीं फंसा रह जाता था, लेकिन ईपीएफओ के इस बदलाव ने इन लोगों को भी ये अधिकार दिया है. 

भारत ने बचाया दुनिया को तेल संकट से, रिपोर्ट में सामने आया बड़ा खुलासा

नई दिल्ली अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत पर टैरिफ को बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक कर दिया है और बार-बार भारत पर हमला बोल रहा है. ट्रंप के सहयोगी पीटर नवारो ने यहां तक दावा किया है कि यूक्रेन संघर्ष असल में 'मोदी का युद्ध' है, और आरोप लगाया कि भारत रियायती तेल खरीद के जरिए रूस का समर्थन कर रहा है.  इस बीच, उद्योग सूत्रों ने कई तथ्‍यों के हवाले से सभी झूठ को खारिज कर दिया है और यह बताया है कि अगर भारत रूसी तेल नहीं खरीदता तो वैश्विक स्‍तर पर परिणाम कितने भयानक हो सकते थे. सूत्रों का कहना है कि भारत ने रूसी तेल खरीदकर एक ग्‍लोबल संकट को रोका. अगर भारत खरीदना बंद कर देता, तो आज कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती थी.   रिपोर्ट में सोर्स के हवाले कहा गया है कि भारत के आयात ने वैश्‍विक बाजारों को स्थिर किया है और रूस को आर्थिक मदद देने के बजाय, दुनियाभर के कंज्‍यूमर्स के लिए ईंधन की कीमतों को स्थिर बनाए रखने में मदद की है. इस कदम की अमेरिकी वित्त मंत्री जेनेट येलेन समेत कई इंटरनेशनल हस्तियों ने भी सराहना की है.  जब 137 डॉलर प्रति बैरल हुआ था कच्‍चा तेल ग्‍लोबल मार्केट से रूसी तेल के बाहर हो जाने की पिछली आशंकाओं ने ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ा दी थीं. मार्च 2022 में इसकी कीमत 137 डॉलर प्रति बैरल उच्‍च स्‍तर पर पहुंच चुका था. जिसके बाद भारत ने रूसी तेल की खरीदारी करते हुए ग्‍लोबल स्थिति को संभाला है. ANI के सूत्रों के अनुसार, भारत ने नियमों के तहत ही रूसी तेल की खरीदारी की है और किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया है.  नवारो का क्‍या है दावा  ट्रंप के सहयोगी पीटर नवारो ने इस सप्‍ताह के शुरुआत में ही ब्‍लूमबर्ग को एक इंटरव्‍यू दिया, जिसमें उन्‍होंने दावा किया कि भारत रियायती दर पर तेल खरीदकर रूस की मदद कर रहा है. अगर भारत रूसी तेल को खरीदना अभी बंद कर दे तो उसे अमेरिकी टैरिफ में तुरंत 25 फीसदी की छूट मिल सकती है. नवारो ने कहा कि यूक्रेन में शांति का रास्‍ता, भारत से होकर जाता है. उद्योग के सूत्रों ने बताया कि प्रचलित दावों के विपरीत, भारतीय रिफाइनर रूसी तेल के लिए अमेरिकी डॉलर का उपयोग नहीं करते हैं. सूत्रों ने कहा कि खरीद तीसरे देशों के व्यापारियों के माध्यम से की जाती है और AED जैसी मुद्राओं में निपटाई जाती है. अमेरिकी सरकार ने कभी भी भारत से खरीद बंद करने के लिए नहीं कहा. भारत का व्यापार पूरी तरह से वैध है और G7 और यूरोपीय संघ के तय प्राइस नियमों के अंतर्गत है.  कालाबाजारी तेल पर क्‍या कहा?  भारत द्वारा तेल की कालाबाजारी की अटकलों का भी खंडन किया गया. सूत्रों ने आगे कहा, 'रूसी तेल पर ईरानी या वेनेज़ुएला के तेल की तरह प्रतिबंध नहीं है. इसे पश्चिमी देशों द्वारा मुनाफाखोरी रोकने के लिए बनाई गई तय लिमिट सिस्‍टम के तहत बेचा जाता है. अगर अमेरिका रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाना चाहता, तो उसने प्रतिबंध लगा दिया होता, उसने ऐसा नहीं किया क्योंकि उसे बाजार में रूसी तेल की जरूरत है.'  भारत रूसी तेल पर फोकस  भारत के रूसी तेल शोधन का केंद्र बनने के आरोपों को भी खारिज कर दिया है. उद्योग के सूत्रों ने कहा कि भारत दशकों से दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर रहा है. कच्‍चे तेल का शोधन और ईंधन का निर्यात, ग्‍लोबल व्‍यवस्‍था इसी तरह काम करती है. रूसी कच्‍चे तेल पर प्रतिबंध लगाने के बाद यूरोप खुद भारतीय डीजल और जेट ईंधन पर निर्भर हो गया है.  क्या रिफाइनरियां अपना मुनाफ़ा विदेश भेज रही हैं, इस पर सूत्रों ने स्पष्ट किया कि करीब 70% रिफाइंड ईंधन घरेलू मांग को पूरा करने के लिए भारत में ही रहता है. रिलायंस की एक रिफाइनरी इस युद्ध से बहुत पहले, 2006 से ही निर्यात पर फोकस है. घरेलू उपयोग बढ़ने के साथ ही रिफाइंड ईंधन का निर्यात वास्तव में कम हुआ है.

दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय घेरने पहुंची भाजपा, पीएम मोदी को अपशब्द कहने पर बवाल

नई दिल्ली  बिहार के दरभंगा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वोटर अधिकार यात्रा के मंच से अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया। इसे लेकर सियासी सरगर्मियां सुर्खियों में है। शनिवार को दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय के बाहर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए तत्काल माफी की मांग की है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करती रही है, लेकिन इस बार हद पार हो गई है। उन्होंने कहा, "कांग्रेस को अपने नेताओं की इस शर्मनाक हरकत के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए। यह अपमान न केवल प्रधानमंत्री का, बल्कि देश की 140 करोड़ जनता का भी है।" भाजपा की राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल अब देश विरोधी रवैये को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "ये लोग अपनी हताशा में अब देश की भावनाओं को ठेस पहुंचा रहे हैं।" दिल्ली के भाजपा विधायक रविंदर सिंह नेगी ने इस घटना को बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल पूरे देश का अपमान है। जब तक कांग्रेस माफी नहीं मांगती, हमारा विरोध जारी रहेगा।" वहीं, विधायक कैलाश गहलोत ने कहा कि लोगों में भारी आक्रोश है, क्योंकि यह भाषा भारतीय संस्कृति और मूल्यों के खिलाफ है। भाजपा विधायक अनिल गोयल ने प्रदर्शन के दौरान कहा, "आज पूरा देश इस अपमान से आहत है। कांग्रेस मुख्यालय के बाहर हमारा यह प्रदर्शन उसी आक्रोश का प्रतीक है।" इसी तरह विधायक सतीश उपाध्याय ने बिहार को मां सीता की धरती बताते हुए कहा, "प्रधानमंत्री के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल भारतीय संस्कृति और भगवान राम के सम्मान के खिलाफ है। यह पूरे देश के लिए असहनीय है।" भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने कांग्रेस के आधिकारिक मंच से बोले गए अपशब्दों को शर्मनाक करार दिया। उन्होंने मांग की कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और तेजस्वी यादव इस मामले में सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। सहरावत ने कहा, "यह सिर्फ एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि देश की अस्मिता पर हमला है।"  

गृह मंत्री अमित शाह ने गणेशोत्सव में लगाई हाजिरी, देखा लालबाग का राजा

मुंबई केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुंबई दौरे पर पहुंचे हैं। उन्होंने परिवार के साथ अलग-अलग जगहों पर गणेशोत्सव में हिस्सा लिया। वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के घर गए, जहां श्री गणेश जी का दर्शन-पूजन किया। इसके बाद अमित शाह ने परिवार के साथ प्रसिद्ध लालबागचा राजा के दर्शन किए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सरकारी आवास 'वर्षा' पर गृह मंत्री अमित शाह के आगमन पर स्वागत किया। उनके साथ परिवार के अन्य सदस्य भी थे। इसके बाद अमित शाह ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आवास पर स्थापित गणपति बप्पा की पूजा अर्चना की। मुख्यमंत्री फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "हमारे नेता केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह व इनके परिवारजनों ने गणेशोत्सव के अवसर पर मुंबई स्थित मेरे सरकारी आवास 'वर्षा' पर भेंट दी, इस दौरान उनका हार्दिक स्वागत किया।" इसके बाद, अमित शाह लालबागचा राजा गणेशोत्सव मंडल गए, जहां श्री गणेश के दर्शन किए। मंडल की ओर से उनका स्वागत शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट करके किया गया। अमित शाह ने अपने बेटे जय शाह और परिवार के बाकी सदस्यों के साथ लालबागचा राजा मंडल में भगवान गणेश का दर्शन-पूजन किया। इस मौके पर सीएम देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे समेत महाराष्ट्र सरकार के अन्य मंत्री मौजूद रहे। सीएम देवेंद्र फडणवीस ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, "हर साल की तहत इस साल भी हमारे नेता गृह अमित शाह व इनके परिवारजनों के साथ लालबाग के राजा के भक्तिमय दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर लालबाग के बाप्पा के चरणों में जनसेवा के लिए प्रार्थना की।" उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने लिखा, "शनिवार को गणेश उत्सव के लिए मुंबई प्रवास पर आए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लालबागचा राजा गणेशोत्सव मंडल के श्री गणेश के भावपूर्ण दर्शन किए। मंडल की ओर से उनका स्वागत शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट करके किया गया।"

‘गर्व से स्वदेशी’ बने भारत, मनसुख मांडविया का बड़ा संदेश

नई दिल्ली केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित पहले खेल सामग्री निर्माण सम्मेलन की अध्यक्षता की। इसमें भारत ने खेल क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में नीति आयोग, वाणिज्य मंत्रालय, डीपीआईआईटी, फिक्की, सीआईआई, एमएसएमई और खेल उद्योग से जुड़े प्रमुख हितधारकों ने हिस्सा लिया। इस बैठक का उद्देश्य भारत की खेल सामग्री निर्माण क्षमता के लिए एक नया रोडमैप तैयार करना था। अपने 'एक्स' हैंडल पर इस कार्यक्रम की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने लिखा, "युवा मामले एवं खेल मंत्रालय की ओर से नई दिल्ली में आयोजित पहले खेल सामग्री निर्माण सम्मेलन की अध्यक्षता की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत न केवल एक वैश्विक खेल शक्ति बनने की ओर अग्रसर है, बल्कि विश्वस्तरीय भारत निर्मित खेल सामग्री का हब बनने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।" उन्होंने लिखा, "मंत्रालय, राष्ट्रीय खेल महासंघों और उद्योग से जुड़े हितधारकों के साथ मिलकर एक टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की गई, जो एक दूरदर्शी नीति तैयार करेगी और इस क्षेत्र की अपार संभावनाओं को साकार करने का मार्ग खोलेगी। खेल के मैदानों से लेकर पोडियम तक, अब गर्व से स्वदेशी की ओर बढ़ने और आत्मनिर्भर भारत बनाने का समय आ गया है।" भारत का खेल सामग्री क्षेत्र 2024 में करीब 42,877 करोड़ रुपये का है। साल 2027 तक इसके 57,800 करोड़ रुपये और 2034 तक 87,300 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। यह क्षेत्र देश में पांच लाख से अधिक लोगों को रोजगार देता है, जिनमें अधिकतर मेरठ, जालंधर, लुधियाना और दिल्ली-एनसीआर के एमएसएमई क्लस्टर्स में कार्यरत हैं। भारत एशिया में तीसरा सबसे बड़ा खेल सामग्री निर्माता है। दुनिया में भारत 21वां सबसे बड़ा निर्यातक है। भारत ने 2023–24 में खेल सामग्री 90 से अधिक देशों को निर्यात की। सबसे ज्यादा निर्यात अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और फ्रांस में किया जा रहा है, जबकि दक्षिण अफ्रीका, यूएई, कनाडा और स्वीडन में नए अवसर बढ़ रहे हैं।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का कांग्रेस पर वार, कहा- यह बेहद आपत्तिजनक

गुवाहाटी  असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने गांधी परिवार के अहंकार को चूर-चूर किया, इसलिए वे अभद्र भाषा बोल रहे हैं। इस दौरान, हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि कांग्रेस ने माफी मांगने की बजाय मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा शनिवार को गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे। सरमा ने कहा, "राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और अन्य ने प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। यह बेहद निंदनीय है।" हिमंता ने कहा, "गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को असम की धरती से इसकी निंदा की और उनसे (कांग्रेस) माफी मांगने को कहा। लेकिन, माफी मांगना तो दूर, कांग्रेस ने मध्य प्रदेश से किसी को आगे लाकर इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश की। बिहार सरकार ने इसमें शामिल व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है। उम्मीदवार नौशाद की भी तलाश की जा रही है। यह निश्चित है कि यह कांग्रेस की मानसिकता है।" असम के मुख्यमंत्री ने कहा, "वे (गांधी परिवार) कभी सोच भी नहीं सकते थे कि गांधी परिवार से बाहर का कोई प्रधानमंत्री बन सकता है। राहुल गांधी, उनकी मां सोनिया गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा सोचते हैं कि भारत के प्रधानमंत्री पद पर उनके अलावा कोई और आसीन नहीं हो सकता। यह उनकी सामंती मानसिकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने उनके इस अहंकार को चूर-चूर किया और साबित कर दिया कि प्रधानमंत्री का पद सिर्फ गांधी परिवार के लिए रिजर्व नहीं है।" हिमंता बिस्वा सरमा ने पीएम मोदी की 11 साल की सरकार और उनके वैश्विक नेतृत्व की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस के घमंड को तोड़ा और पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया। गांधी परिवार ने कभी कल्पना नहीं की थी कि पीएम मोदी को जापान और चीन जैसे देशों में इतनी सराहना मिलेगी। इसलिए, वे अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं।"

संसदीय समितियों की भूमिका व्यापक, बजट के साथ परिणामों पर भी नजर: ओम बिरला

भुवनेश्वर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राज्य एवम् केंद्र शासित प्रदेशों के विधानमंडलों की अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण समितियों के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए बिरला ने समावेशी विकास और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने में संसदीय समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। बिरला ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि संसदीय समितियां न केवल बजट आवंटन की निगरानी करती हैं, बल्कि उनके परिणामों का मूल्यांकन भी करती हैं। बैंकिंग और अन्य क्षेत्रों में आरक्षण और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन सहित कई ऐतिहासिक निर्णय इन समितियों की सिफारिशों से सामने आए हैं। हालांकि सरकारें इन सिफारिशों को मानने के लिए बाध्य नहीं हैं, ज्‍यादातर सुझावों को आमतौर पर व्यापक विचार-विमर्श के बाद लागू किया जाता है। उन्होंने कहा कि राज्य विधानसभाओं में समितियों को सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि वे प्रभावी ढंग से काम कर सकें, सर्वोत्तम प्रथाओं को अपना सकें और नई तकनीकों को एकीकृत कर सकें। इसका उद्देश्य दक्षता बढ़ाना और लोगों के लिए अधिकतम कल्याण सुनिश्चित करना है। बिरला ने समितियों की मुख्य जिम्मेदारी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका प्राथमिक उद्देश्य अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के संवैधानिक और विधायी अधिकारों की रक्षा करना, उनकी चुनौतियों का समाधान करना और उनका कल्याण है। इस मिशन को आगे बढ़ाने के लिए एक विजन 2025 रोडमैप भी तैयार किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि समितियां नियमित रूप से हितधारकों के साथ बातचीत करती हैं और यह सुनिश्चित करने के लिए कि सामाजिक कल्याण के लिए आवंटित धन का उचित उपयोग हो, क्षेत्रीय दौरे करती हैं। वे मौजूदा योजनाओं में संशोधन का सुझाव भी देती हैं या नई पहल की सिफारिश करती हैं। उन्होंने कहा कि परंपरागत रूप से, सरकारों ने इनमें से अधिकांश सिफारिशों को स्वीकार किया है। बिरला ने कहा कि सरकार के अलावा, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग जैसी संस्थाएं भी मुद्दों की निगरानी और इन समुदायों के अधिकारों और कल्याण की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। लोकसभा अध्यक्ष ने विभिन्न संसदीय मुद्दों पर मीडिया के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि संसदीय समितियों के माध्यम से अच्छे विचारों और प्रथाओं को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। समितियों के लिए सभी राजनीतिक दलों से नाम मांगे गए हैं, जिनका गठन जल्द ही किया जाएगा। बिरला ने संसद और राज्य विधानसभाओं में सार्थक और गरिमापूर्ण चर्चा की आवश्यकता पर बल दिया ताकि जनहित के मुद्दों पर बहस हो सके और समाज के गरीब और हाशिए पर पड़े वर्गों का कल्याण सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि देश की जनता भी यही अपेक्षा रखती है। उन्‍हाेंने लोकतंत्र में स्वस्थ बहस और रचनात्मक आलोचना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि असहमति लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन इसे हमेशा गरिमापूर्ण तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए, चाहे वह नीतियों की आलोचना हो या सरकारी कामकाज की। चर्चाओं और बहसों को और बेहतर बनाने के लिए, 1947 से अब तक की सभी संसदीय बहसों का डिजिटलीकरण और उन्हें मेटाडेटा के साथ 'डिजिटल संसद' प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने सहित कई कदम उठाए गए हैं। सदस्यों की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक 'लाइव लाइब्रेरी' भी 24 घंटे उपलब्ध कराई गई है।