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छात्रा की सोशल मीडिया पोस्ट पर HC ने कहा नहीं रद्द करेंगे केस, पढ़ाई और ऑपरेशन सिंदूर पर बहस

मुंबई  ऑपरेशन सिंदूर पर विवादित पोस्ट के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि छात्रा पढ़ने में अच्छी है, केवल इस आधार पर केस रद्द नहीं किया जा सकता। चीफ जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अखंड की बेंच ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि आरोपी एक मेधावी छात्रा है और उसने अपनी परीक्षाएं अच्छे अंकों से उत्तीर्ण की है, इसका मतलब यह नहीं है कि उसके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द की जा सकती है। 19 वर्षीय छात्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के खिलाफ पोस्ट की थी। हाई कोर्ट ने आगे कहा कि केवल पोस्ट हटा लेना और माफी मांग लेना ही काफी नहीं है। अदालत पुणे की एक छात्रा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही जिसमें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान शत्रुता पर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए मई में उसके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध किया गया था। उसे गिरफ्तार किया गया था लेकिन बाद में उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद उसे रिहा कर दिया गया था। शुक्रवार को छात्रा के वकील ने अदालत को बताया कि जमानत मिलने के बाद, वह परीक्षा में शामिल हुई और उसे अच्छे अंक मिले। हालांकि, बेंच ने कहा कि इसलिए कि वह एक मेधावी छात्रा है, प्राथमिकी रद्द करने का आधार नहीं हो सकता। छात्रा के वकील ने दलील दी कि पोस्ट के पीछे उसकी कोई बुरी मंशा नहीं थी और उसने तुरंत इसे हटा दिया और माफी मांग ली। हालांकि, अदालत ने कहा कि (पोस्ट को) हटाने से मामला और भी गंभीर और जटिल हो गया है। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद निर्धारित की और सरकारी वकील मनखुवर देशमुख को ‘केस डायरी’ पेश करने का निर्देश दिया। छात्रा ने 7 मई को, इंस्टाग्राम पर 'रिफॉर्मिस्तान' नाम के एक अकाउंट से एक पोस्ट को रीपोस्ट किया था, जिसमें भारत सरकार की आलोचना की गई थी। दो घंटे के भीतर, छात्रा को अपनी गलती का एहसास हुआ और कई धमकियां मिलने के बाद उसने पोस्ट हटा दिया।  

MMRDA का कड़ा कदम: अटल सेतु की खामियों पर ठेकेदार को 1 करोड़ का दंड, कांग्रेस ने उठाया सवाल

मुंबई  मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने नए खुले अटल सेतु पर सतही क्षति दिखाने वाला एक वीडियो वायरल होने के बाद ठेकेदार पर एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है. मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक, जिसका आधिकारिक नाम अटल बिहारी वाजपेयी सेवरी-न्हावा शेवा अटल सेतु है, का उद्घाटन पीएम नरेंद्र मोदी ने 12 जनवरी, 2024 को किया था. 17,840 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित, 21.8 किलोमीटर लंबा यह पुल भारत का सबसे लंबा समुद्री पुल और दुनिया का 12वां सबसे लंबा पुल है. नए खुले अटल सेतु पर सतही क्षति दिखाने वाला एक वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद एमएमआरडीए ने कार्रवाई की. कांग्रेस ने बीजेपी पर साधा निशाना महाराष्ट्र कांग्रेस ने भी अपने एक्स पर अटल सेतु के गड्ढों का वायरल वीडियो पोस्ट करके बीजेपी पर निशाना साधा है. इसमें एक तस्वीर और वीडियो शेयर किया गया हैं. पहली जब पीएम मोदी ने इस अटल सेतु का उद्घाटन किया था और दूसरा अटल सेतु पर गड्ढों और टेम्पररी पैचिंग का वायरल वीडियो सामने आया जो किसी नागरिक ने निकाला था.   MMRDA का बयान मेट्रोपॉलिटन आयुक्त डॉ. संजय मुखर्जी के निर्देश पर शुक्रवार को 22 किलोमीटर लंबे अटल सेतु (दोनों अप और डाउन कैरिजवे) का व्यापक निरीक्षण अतिरिक्त मेट्रोपॉलिटन आयुक्त एवं परियोजना प्रभारी विक्रम कुमार ने किया. निरीक्षण के दौरान एमएमआरडीए टीम ने पुष्टि की कि नवी मुंबई की ओर जाने वाले कैरिजवे के केवल सीमित 2 किलोमीटर हिस्से (किमी 14 से किमी 16 के बीच) पर कुछ पैचों में हल्की सतही क्षति देखी गई. इसका कारण मानसून के दौरान मौसम की चरम स्थिति और लगातार ट्रैफिक बताया गया. ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई एमएमआरडीए टीम ने इस प्रोजेक्ट के ठेकेदार को निर्देश दिया है कि प्रभावित हिस्से की री-सर्फेसिंग पांच दिनों के भीतर पूरी की जाए. यह स्पष्ट कर दिया गया कि अगर कार्य निर्धारित समय में पूरा नहीं हुआ तो ठेकेदार के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी. पहले से उठाए गए प्रवर्तन कदमों के तहत ठेकेदार पर ₹1 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है. उनकी डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड (DLP), जो जनवरी 2026 में खत्म होनी थी, उसे एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया है. कड़ी निगरानी के लिए प्रतिबद्ध मानसून के बाद पूरी सड़क को घने बिटुमिनस मैकाडम (DBM) और डामर कंक्रीट (AC) का उपयोग कर, ठेकेदार के अपने खर्च पर स्थायी रूप से पुनर्निर्मित और फिर तैयार किया जाएगा. एमएमआरडीए टीम ने दोहराया कि अटल सेतु संरचनात्मक रूप से मजबूत और सुरक्षित है तथा नागरिकों को आश्वस्त किया कि एमएमआरडीए इस महत्वपूर्ण परियोजना की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए त्वरित कार्रवाई और कड़ी निगरानी के लिए प्रतिबद्ध है.  

साइबर अटैक से यूरोप की हवाई सेवा ठप: चेक-इन सिस्टम फेल, यात्रियों को भारी परेशानी

लंदन  लंदन, ब्रसेल्स और कई बड़े यूरोपीय एयरपोर्ट्स पर साइबर अटैक के चलते फ्लाइट्स में देरी का मामला सामने आया है. दुनियाभर के हवाई अड्डों और एयरलाइनों के लिए सिस्टम संचालित करने वाली कंपनी कॉलिन्स एयरोस्पेस ने साइबर हमले से जुड़ी तकनीकी गड़बड़ी की पुष्टि की.  हीथ्रो एयरपोर्ट ने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि तकनीकी समस्या को जल्द से जल्द हल करने का प्रयास किया जा रहा है. यात्रियों से अनुरोध किया गया है कि वे यात्रा से पहले अपनी फ्लाइट स्थिति एयरलाइन से जांच लें और लंबी उड़ानों के लिए तीन घंटे पहले, घरेलू उड़ानों के लिए दो घंटे पहले एयरपोर्ट पर पहुंचें.  हीथ्रो एयरपोर्ट ने बताया कि चेक-इन क्षेत्रों में अतिरिक्त स्टाफ तैनात किया गया है, ताकि यात्रियों की मदद की जा सके और व्यवधान को कम किया जा सके. एयरपोर्ट ने हुई असुविधा के लिए माफी भी मांगी है. बर्लिन और हीथ्रो एयरपोर्ट भी प्रभावित जर्मनी के ब्रांडेनबर्ग एयरपोर्ट ने भी पुष्टि की है कि उनके सेवा प्रदाता के सिस्टम पर साइबर हमला हुआ है। इसके बाद सुरक्षा के मद्देनजर हवाई अड्डा प्रशासन ने अपने नेटवर्क कनेक्शन को अस्थायी रूप से काट दिया। वहीं लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे ने भी तकनीकी समस्या की बात कही है। हीथ्रो एयरपोर्ट के अनुसार, कॉलीन्स एयरोस्पेस कंपनी जो कई एयरलाइनों को चेक-इन और बोर्डिंग सिस्टम मुहैया कराती है। तकनीकी दिक्कतों का सामना कर रही है। इसके कारण उड़ानों में देरी हो रही है। यात्रियों को सावधानी बरतने की सलाह सभी हवाई अड्डों ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे अपनी उड़ानों का स्टेटस समय-समय पर ऑनलाइन जांचते रहें और आवश्यकतानुसार फ्लाइट के समय को ध्यान में रखकर यात्रा की योजना बनाएं। साथ ही हवाई अड्डा प्रबंधन ने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद जताया है और समस्या के समाधान के लिए काम जारी रखने का आश्वासन दिया। सुरक्षा और समाधान के प्रयास जारी साइबर हमलों के कारण प्रभावित हवाई अड्डों ने अपने सुरक्षा प्रोटोकॉल को सख्त कर दिया है। कई जगह पर सिस्टम को अस्थायी रूप से ऑफलाइन कर दिया गया है। ताकि आगे के हमलों को रोका जा सके। विशेषज्ञ इस मामले की गंभीरता को लेकर अलर्ट मोड में हैं और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त कदम उठा रहे हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक ब्रसेल्स एय़रपोर्ट ने बताया कि साइबर हमले के कारण स्वचालित चेक-इन और बोर्डिंग सेवाएं बंद हो गईं, जिसके चलते कर्मचारियों को मैन्युअल प्रक्रिया अपनानी पड़ी. एयरपोर्ट अथॉरिटी ने कहा कि इससे फ्लाइट्स पर गंभीर असर पड़ा है. इसके चलते कई फ्लाइट्स में देरी हुई और फ्लाइट्स को कैंसल करना पड़ा, जबकि सेवा प्रदाता समस्या को जल्द हल करने में जुटा है. शनिवार को एयरपोर्ट अधिकारियों ने यात्रियों को सलाह दी कि वे यात्रा से पहले अपनी एयरलाइन से फ्लाइट्स की पुष्टि कर लें. इस साइबर हमले से कई जगह यात्री प्रभावित हुए.  वहीं, बर्लिन एयरपोर्ट ने अपनी वेबसाइट पर सूचना दी कि यूरोपभर में काम करने वाले एक सिस्टम प्रदाता में तकनीकी दिक़्क़त के कारण चेक-इन में लंबा इंतज़ार हो रहा है. एयरपोर्ट ने कहा कि समस्या के समाधान पर काम किया जा रहा है.

508KM का एक्सप्रेस सफर: मुंबई से अहमदाबाद तक बुलेट ट्रेन का नया ट्रैक

मुंबई  मुंबई और अहमदाबाद के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन का सपना अब हकीकत बनने की ओर है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को जानकारी दी कि हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के स्टेशन का काम अब आखिरी चरण में है और इसे साल 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह बुलेट ट्रेन का पहला फेज है, जो यात्रियों के लिए खोला जाएगा. रेलमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक वीडियो भी शेयर की है. इसके साथ उन्होंने लिखा कि इसमें संस्कृति, पर्यावरण और कनेक्टिविटी का शानदार मेल होगा. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर मुंबई और अहमदाबाद के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन के लिए दोनों शहरों के बीच नदी में 25 पुल बनाए गए हैं. इसमें से 21 गुजरात में और 4 महाराष्ट्र में हैं. इसके साथ ही मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के स्टेशन को भी अलग तरीके से तैयार किया जा रहा है. इन स्टेशनों का डिजाइन बेहद आधुनिक है और इनमें वहां की स्थानीय संस्कृति को भी दर्शाया जाएगा. पर्यावरण को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे ये स्टेशन बिजली तो बचाएंगे ही साथ ही यात्रियों को बेहतरीन सुविधाएं भी उपलब्ध कराएंगे. बात चाहे स्टेशनों पर लगने वाली सीटों की हो या फिर वेटिंग एरिया की. ये स्टेशन पूरी तरह से यात्रियों की सहूलियत को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे हैं. रेलवे की ओर से दावा किया जा रहा है कि ये स्टेशन भारत में रेल यात्रा के नए मानक स्थापित करेंगे.   12 स्टेशन मुंबई-अहमदाबाद रूट पर होंगे मुंबई और अहमदाबाद के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन 12 स्टेशनों पर रुकेगी. इसमें साबरमती, अहमदाबाद, आनंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलीमोरा, वापी, बोइसर, विरार, ठाणे और मुंबई शामिल हैं. 508 किलोमीटर लंबे सफर को पूरा करने में 02 घंटे 7 मिनट का समय लगेगा. ऐसा कहा जा रहा है कि ट्रेन की ऑपरेशनल स्पीड 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी. इसके साथ ही बुलेट ट्रेन 348 किलोमीटर का सफर गुजरात में तय करेगी, जबकि 156 किलोमीटर का सफर महाराष्ट्र में तय करेगी. विश्वामित्री नदी पर बना पुल अहम पड़ाव गुजरात के वडोदरा में विश्वामित्री नदी पर बना पुल इंजीनियरिंग का बेमिसाल उदाहरण है. 80 मीटर लंबे इस पुल को परियोजना का एक अहम पड़ाव माना जा रहा है. यह गुजरात के 21 पुल में से 17वां पुल है, जो अब बनकर तैयार हो चुका है. इस पुल में तीन खंभे लगाए गए हैं, जिसमें एक नदी के बीच में और बाकी दो किनारों पर लगाए गए हैं. वडोदरा जैसे व्यस्त शहर में इस पुल को बनाना आसान नहीं था. इस पुल को तैयार करने के लिए वडोदरा म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और अन्य स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर सटीक योजना तैयार की गई.   क्या है इस प्रोजेक्ट की खासियत? मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना है. भारत की बुलेट ट्रेन जापान की शिनकानसेन तकनीक पर आधारित है. इस पूरे कॉरिडोर में 12 स्टेशन होंगे, जिनमें साबरमती, अहमदाबाद, आनंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलीमोरा, वापी, बोइसर, विरार, ठाणे और मुंबई शामिल हैं. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि जापान से कई इंजीनियर्स इस प्रोजेक्ट को देखने आते हैं और यहां की तकनीक को देखकर हैरान रह जाते हैं. उनका कहना है कि वो अगले प्रोजेक्ट में यहां विकसित की गई कई तकनीकों को अपनाएंगे. रेलमंत्री ने कहा कि हम सही ट्रैक पर आगे बढ़ रहे हैं. हमारा पहला कॉरिडोर अगस्त 2027 तक शुरू हो जाएगा. बुलेट ट्रेन क्यों है खास?     E-5 शिंकानसेन हायाबूसा बुलेट ट्रेन को साल 2011 में जापानी तकनीक से तैयार किया गया था.     हवा को चीरने के लिए ट्रेन के अगले हिस्से में 15 मीटर लंबी एयरोडायनामिक नोट दी गई है.     इस ट्रेन को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसमें बाइब्रेशन और शोर नहीं होता है.     इस ट्रेन को इस तकनीक के साथ तैयार किया गया है क इमरजेंसी में बिना जर्क रुक जाती है.     इस ट्रेन का कोच 253 मीटर लंबी एल्यूमीनियम मिक्स धातु से बनी है, इसमें 10 कोच लगे हैं.  

PhonePe यूजर्स के लिए खुशखबरी! RBI ने दी हरी झंडी, अब पेमेंट का अनुभव होगा और आसान

नई दिल्ली भारत की अग्रणी डिजिटल भुगतान सेवा प्रदाता कंपनी phone-pe को रिजर्व बैंक से एक बड़ी अनुमति मिल गई है, जो न सिर्फ कंपनी के कारोबार के लिए बल्कि करोड़ों छोटे कारोबारियों और दुकानदारों के लिए भी बेहद अहम है। अब तक सिर्फ ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की सुविधा देने वाली Phone-Pe को आरबीआई ने online payment aggregator के रूप में कार्य करने की औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस नए दर्जे के साथ अब phone-pe सीधे मर्चेंट्स (दुकानदारों व व्यापारियों) को जोड़ पाएगी और उनके ग्राहकों से ऑनलाइन पेमेंट लेकर उन्हें सीधे उनके खाते में ट्रांसफर कर सकेगी। यानी अब फोनपे न केवल ग्राहकों को भुगतान सेवा देगी, बल्कि खुदरा व्यापारी भी इसके माध्यम से तेज़, सुरक्षित और सुविधाजनक पेमेंट कलेक्शन सिस्टम का लाभ ले पाएंगे। phone-pe के मर्चेंट बिज़नेस के प्रमुख युवराज सिंह शेखावत ने कहा कि यह बदलाव खासतौर पर उन छोटे और मध्यम कारोबारियों (SMEs) के लिए फायदेमंद होगा जो अभी तक डिजिटल पेमेंट की दुनिया में पीछे रह गए थे। अब वे भी आधुनिक पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग कर पाएंगे, जिससे उनका व्यवसाय और तेज़ी से डिजिटल हो सकेगा। इस अनुमति के साथ phone-pe अब अपने पेमेंट गेटवे प्लेटफॉर्म को और बेहतर बना सकेगा – ऐसा सिस्टम जो मर्चेंट्स को कुछ ही मिनटों में ऑनबोर्ड करता है, आसान इंटीग्रेशन की सुविधा देता है, और ग्राहक को स्मूद चेकआउट एक्सपीरियंस प्रदान करता है। भारत की सबसे बड़ी फिनटेक कंपनियों में शामिल phone-pe phone-pe 2016 में लॉन्च हुई थी और आज यह भारत की सबसे बड़ी फिनटेक कंपनियों में शामिल है। इसके पास 65 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड यूज़र्स, 4.5 करोड़ से अधिक मर्चेंट्स का नेटवर्क और प्रतिदिन 36 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन्स हैं। कंपनी का विस्तार अब पेमेंट्स से आगे बढ़कर लोन, बीमा, वेल्थ मैनेजमेंट, हाइपरलोकल ई-कॉमर्स और यहां तक कि स्वदेशी app Store तक हो चुका है। क्या है online payment aggregator? online payment aggregator दरअसल एक ऐसा डिजिटल माध्यम होता है जो व्यापारियों को उनके ग्राहकों से विभिन्न डिजिटल तरीकों से पेमेंट स्वीकार करने में मदद करता है – चाहे वो UPI हो, कार्ड्स हों या वॉलेट्स। इस प्रक्रिया में मर्चेंट को ऑनबोर्ड किया जाता है, फिर उनकी वेबसाइट या ऐप में पेमेंट गेटवे को जोड़ा जाता है। इसके बाद ग्राहक अपना मनचाहा पेमेंट विकल्प चुनकर भुगतान करता है और सिस्टम उस पेमेंट को प्रोसेस कर मर्चेंट को ट्रांसफर कर देता है। RBI की यह मंजूरी फोनपे के लिए महज एक लाइसेंस नहीं, बल्कि नए युग का प्रवेशद्वार है – जहां यह कंपनी देश के कोने-कोने में बैठे छोटे दुकानदारों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने में एक मजबूत कड़ी बन सकती है।  

कीमत चुकानी पड़ती है – वायुसेना प्रमुख ने समझाया ऑपरेशन सिंदूर रोकने का कारण

नई दिल्ली  भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि आखिर क्यों महज चार दिनों में ही ऑपरेशन सिंदूर रोकना पड़ा। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया ऑपरेशन सिंदूर केवल चार दिनों में समाप्त कर दिया गया, क्योंकि भारत ने अपने उद्देश्यों को हासिल कर लिया था। इस ऑपरेशन में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकवादी संगठनों के नौ प्रमुख ठिकानों को नष्ट कर दिया गया। एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा, "हमारा उद्देश्य आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करना था। हमने आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए और अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर लिया। जब उद्देश्य पूरे हो गए, तो हमें युद्ध को समाप्त करने में देरी क्यों करनी चाहिए? प्रत्येक संघर्ष की एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है जो हमारी अगली तैयारियों, अर्थव्यवस्था और देश की प्रगति को प्रभावित करती है।" वायु सेना प्रमुख ने कहा कि दुनिया को भारत से यह सबक सीखना चाहिए कि किसी संघर्ष को कैसे शुरू किया जाए और उसे यथाशीघ्र कैसे समाप्त किया जाए। उन्होंने विश्व के चल रहे संघर्षों, जैसे रूस-यूक्रेन और इजरायल के युद्धों का जिक्र करते हुए कहा कि ये युद्ध वर्षों से चल रहे हैं, क्योंकि कोई भी संघर्ष को समाप्त करने की रणनीति पर ध्यान नहीं दे रहा। उन्होंने कहा कि लक्ष्य बदलने या अहंकार के कारण युद्ध को लंबा खींचना गलत है। पहलगाम हमले का जवाब: ऑपरेशन सिंदूर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की जान चली गई थी। इसके जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पीओके में नौ प्रमुख आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें जैश-ए-मोहम्मद का बहावलपुर मुख्यालय और लश्कर-ए-तैयबा का मुरिदके मुख्यालय शामिल थे। इन केंद्रों पर भारत विरोधी आतंकवादी गतिविधियों की योजना बनाई जाती थी। भारतीय वायुसेना द्वारा जारी किए गए वीडियो में इन ठिकानों पर हुए हमलों की तीव्रता और विनाश का स्तर स्पष्ट दिखाई देता है। हमलों में आतंकी संगठनों के वरिष्ठ नेताओं के आवासीय क्षेत्रों और कार्यालयों को नष्ट कर दिया गया, जहां कमांडर अपनी योजनाएं बनाते थे। ऑपरेशन की पूरी स्वतंत्रता दी गई थी एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में वायु सेना प्रमुख ने कहा कि सेना को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के लिए पूरी स्वतंत्रता दी गई थी और राजनीतिक नेतृत्व ने उस पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई थी। एयर चीफ मार्शल ने कहा कि 7-10 मई को पाकिस्तान के साथ हुए संघर्ष के दौरान वायु शक्ति की उत्कृष्टता प्रदर्शित हुई थी। उन्होंने कहा कि एस-400 मिसाइल प्रणाली बाजी पलटने वाली साबित हुई, क्योंकि इस हथियार का दायरा और ताकत को देखते हुए दुश्मन घबरा गया था। एयर चीफ मार्शल ने कहा कि पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा, “उसकी (पाकिस्तान) कई सैन्य सुविधाएं, रडार, नियंत्रण एवं समन्वय केंद्र, हैंगर, विमान, सभी को भारी नुकसान हुआ।” वायु सेना प्रमुख ने 2019 के बालाकोट हवाई हमलों की प्रभावशीलता का सबूत मांगने वालों पर निशाना साधते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान को हुए नुकसान का कुछ ग्राफिक विवरण दिखाया। "वे (पाकिस्तान) पीछे हट गए थे, इसमें कोई संदेह नहीं है" एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि दुनियाभर में लंबे समय से चल रहे अनेक युद्धों की पृष्ठभूमि में संघर्ष समाप्ति इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू था। उन्होंने इस विचार को भी खारिज कर दिया कि भारत को पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखना चाहिए था। वायु सेना प्रमुख ने कहा, “हमने लोगों को यह कहते हुए सुना कि हमें थोड़ा और प्रयास करना चाहिए था। हमने युद्ध बहुत जल्दी रोक दिया। हां, वे (पाकिस्तान) पीछे हट गए थे, इसमें कोई संदेह नहीं है, लेकिन हमारा उद्देश्य क्या था? हमारा उद्देश्य आतंकवाद विरोधी था।” उन्होंने कहा, “हमें उन पर हमला करना ही था। हमने ऐसा किया भी। इसलिए अगर हमारे उद्देश्य पूरे हो गए, तो फिर हमें संघर्ष क्यों नहीं समाप्त करना चाहिए? हमें संघर्ष क्यों जारी रखना चाहिए? क्योंकि किसी भी संघर्ष की बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है।” एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि इस अभियान के जारी रहने से “अगले अभियान के लिए हमारी तैयारियों” पर असर पड़ सकता था। उन्होंने कहा, “इससे हमारी अर्थव्यवस्था प्रभावित होती। इसका असर देश की सामान्य प्रगति पर भी पड़ता।” रूस-यूक्रेन युद्ध सहित विभिन्न मौजूदा संघर्षों का हवाला देते हुए वायु सेना प्रमुख ने कहा कि जब युद्ध शुरू होता है, तो दुनिया अपने उद्देश्यों को भूल जाती है। उन्होंने कहा, “अब उनका उद्देश्य बदल रहा है। अहंकार बीच में आ रहा है। और यहीं पर मुझे लगता है कि दुनिया को भारत से यह सबक सीखना चाहिए कि किसी संघर्ष को कैसे शुरू किया जाए और उसे यथाशीघ्र कैसे समाप्त किया जाए।”  

मोदी का आत्मनिर्भर मंत्र: ‘अब हर चिप और शिप भारत में’, साथ ही खोला सबसे बड़े दुश्मन का राज

भावनगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज गुजरात के दौरे पर हैं. इस दौरान भावनगर में उन्होंने 34,200 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया. प्रधानमंत्री ने 'समुद्र से समृद्धि' कार्यक्रम में हिस्सा लिया और जनसभा को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि 'भारत का सबसे बड़ा दुश्मन दूसरे देशों पर निर्भरता है'. प्रधानमंत्री के गुजरात दौरे से जुड़े सभी अपडेट्स आप यहां देख सकते हैं: -प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अब भारत जो भी लक्ष्य तय करता है, उसे समय से पहले पूरा करता है. सोलर क्षेत्र हो या पोर्ट सेक्टर, दोनों में तय लक्ष्य समय से पहले हासिल किए गए हैं. पोर्ट कनेक्टिविटी दोगुनी हो गई है और शिप अराउंड टाइम घटकर सिर्फ एक दिन रह गया है. नए पोर्ट भी तेजी से विकसित किए जा रहे हैं और 2047 तक दुनिया के समुद्री व्यापार में भारत की हिस्सेदारी तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है. दुनिया को भारत का सामर्थ्य दिखाना है. इसी दिशा में लोथल में दुनिया का सबसे बड़ा नेशनल मेरीटाइम म्यूजियम बनाया जा रहा है, जिसका मैं स्वयं निरीक्षण करने भी जा रहा हूं. वर्तमान में देश में समुद्र के रास्ते जितना भी कार्गो आता है, उसमें से 40 प्रतिशत गुजरात से होकर आता है. साथ ही, शिप ब्रेकिंग का एक बड़ा इको सिस्टम बन रहा है, जिससे युवाओं को रोजगार मिल रहा है. विकसित भारत का रास्ता आत्मनिर्भर भारत से होकर ही गुजरता है. उन्होंने सभी देशवासियों से आग्रह किया कि हम जो भी खरीदें वह स्वदेशी हो और जो भी बेचें वह भी स्वदेशी हो. यही भारत की शक्ति है और यही भारत को आत्मनिर्भर बनाएगा. -पीएम मोदी ने कहा, 'देशवासी यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि 75 बिलियन अमेरिकी डॉलर यानी करीब 6 लाख करोड़ रुपये हर साल विदेशी शिपिंग कंपनियों को किराए में दिए जाते हैं. यह रकम भारत के रक्षा क्षेत्र के बजट के बराबर है. हमारे पैसों से विदेशों में लाखों नौकरियां बनी हैं. अगर पूर्व सरकारों ने हमारे शिपिंग इंडस्ट्री पर ध्यान दिया होता तो आज दुनिया भारत में बने जहाजों से व्यापार कर रही होती और उसका सीधा लाभ हमारे देश को मिलता. 2047 तक विकसित भारत बनने के लिए आत्मनिर्भर होना ही होगा, इसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है. सभी देशवासियों का एक ही संकल्प होना चाहिए कि चाहे चिप हो या शिप, वह भारत में ही बने. इसी सोच के साथ वन नेशन, वन डॉक्यूमेंट और वन नेशन, वन पोर्ट प्रोसेस लागू किया जाना है. भारत को सबसे बड़ी समुद्री शक्ति बनाने के लिए तीन बड़ी योजनाओं पर काम चल रहा है और आने वाले वर्षों में इस पर 70 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए जाएंगे.' -पीएम ने कहा, 'भारत में सामर्थ्य की कोई कमी नहीं है, लेकिन आजादी के बाद कांग्रेस ने हर सामर्थ्य को नकारा. लंबे समय तक कांग्रेस सरकार ने देश को लाइसेंस-कोटा राज में उलझाए रखा. जब ग्लोबलाइजेशन का समय आया तो देश को आयात तक सीमित कर दिया, जिससे भारी नुकसान हुआ. शिपिंग इंडस्ट्री इसका बड़ा उदाहरण है. कभी भारत का 40% इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट देश में बने जहाजों से होता था. लेकिन कांग्रेस की कुनीतियों का शिकार होकर शिपिंग सेक्टर बर्बाद हो गया. विदेशी जहाजों पर निर्भरता बढ़ाई गई और शिप बिल्डिंग बंद हो गया. नतीजा यह हुआ कि 50 साल पहले जहां 40% व्यापार भारत में बने जहाजों से होता था, वह घटकर केवल 5% रह गया. हमारे व्यापार के लिए हम विदेशी जहाजों पर निर्भर हो गए और उसका देश को बहुत बड़ा नुकसान हुआ.' -प्रधानमंत्री ने कहा, 'आज हजारों करोड़ रुपये के विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण किया गया. मुंबई के अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल का लोकार्पण भी यहीं से हुआ. भारत आज विश्वबंधु की भावना से आगे बढ़ रहा है. दुनिया में हमारा कोई बड़ा दुश्मन नहीं है. अगर कोई दुश्मन है तो वह है हमारी दूसरे देशों पर निर्भरता. हमें मिलकर इस दुश्मन को हराना है, क्योंकि जितनी ज्यादा विदेशी निर्भरता होगी, उतनी ज्यादा देश की विफलता होगी. दुनिया की शांति के लिए, दुनिया की सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देश को आत्मनिर्भर बनना ही होगा. 140 करोड़ देशवासियों के भविष्य को हम दूसरों पर या उनकी निर्भरता पर नहीं छोड़ सकते. भावी पीढ़ी के भविष्य को दांव पर नहीं लगाया जा सकता. 100 दुखों की एक ही दवा है और वह है आत्मनिर्भर भारत. इसलिए हमें चुनौतियों से टकराना होगा और भारत को आत्मनिर्भर बनकर दुनिया के सामने खड़ा होना होगा.' -पीएम मोदी ने कहा, 'विश्वकर्मा जयंती से गांधी जयंती तक पूरे देश में लाखों लोग सेवा पखवाड़ा मना रहे हैं. गुजरात में सैकड़ों जगह ब्लड डोनेशन कैंप लगे, जिसमें 1 लाख लोग ब्लड डोनेट कर चुके हैं. अनेक शहरों में सफाई अभियान चला और हेल्थ कैंप लगे, जिनमें महिलाओं के स्वास्थ्य को केंद्र में रखा गया. इन सेवा कार्यों से जुड़े सभी का मैं धन्यवाद करता हूं. आज मैं भावनगर के राजा कृष्णकुमारसिंह जी को याद करता हूं, जिन्होंने सरदार पटेल के एक भारत के संकल्प में सबसे पहले योगदान दिया. नवरात्र का पावन पर्व शुरू होने वाला है और जीएसटी में कमी से बाजार में रौनक बढ़ने वाली है. भावनगर के लोगों से माफी चाहता हूं कि मुझे हिंदी में बोलना पड़ रहा है, क्योंकि देशभर के लोग इस कार्यक्रम से जुड़े हैं.' -पीएम मोदी ने कहा, 'हमारे भावनगर ने आज रंग जमा दिया. सभी जगह सिर्फ मानव समुद्र ही दिख रहा है. इतनी बड़ी संख्या में आप सब आए, इसके लिए मैं आपका आभारी हूं. ये कार्यक्रम भावनगर में हो रहा है लेकिन यह पूरे देश का कार्यक्रम है. 'समुद्र से समृद्धि' की हमारी दिशा क्या है, इसे समझाने के लिए भावनगर को चुना गया है. 17 सितंबर को आपने अपने नरेंद्र भाई को जो शुभकामनाएं भेजी हैं, और देश-दुनिया से जो प्यार और आशीर्वाद मिला है, वह मेरी असली संपत्ति और ताकत है. इसलिए आज मैं सार्वजनिक रूप से इन शुभेच्छाओं के लिए आपका हृदय से धन्यवाद करता हूं.' –पीएम मोदी ने 'समुद्र से समृद्धि' थीम पर आयोजित प्रदर्शनी का निरीक्षण किया, जिसका उद्घाटन वे स्वयं करेंगे. साथ ही वह कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे, जिनकी कुल लागत 34,200 करोड़ रुपये से अधिक … Read more

कर्नाटक में 22 सितंबर से जाति जनगणना प्रारंभ, सरकार ने लिया महत्वपूर्ण निर्णय

बेंगलुरु  कर्नाटक सरकार ने 22 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच सभी नागरिकों का जाति जनगणना कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। सरकार ने अपने आदेश में कहा, ‘प्रस्ताव में दिए गए विवरणों को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया गया है। इसके तहत कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को 22 सितंबर से सात अक्टूबर 2025 तक राज्य के सभी नागरिकों की सामाजिक और शैक्षिक स्थिति पर सर्वेक्षण करने की मंजूरी दी जाती है।’ आदेश में कहा गया कि कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष ने पहले सरकार को पत्र लिखकर उक्त अवधि के दौरान सर्वे कराने की मंशा जताई थी। सरकार ने स्पष्ट किया कि उसने सर्वे की तिथियां तय करने और औपचारिक आदेश जारी करने से पहले प्रस्ताव की सावधानीपूर्वक जांच की थी। इस बीच, शुक्रवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 22 सितंबर से शुरू होने वाले आगामी सामाजिक और शैक्षिक सर्वेक्षण की वैधता पर सवाल उठाने वाली जनहित याचिकाओं पर राज्य सरकार से जवाब मांगा। न्यायमूर्ति अनु शिवरमण और न्यायमूर्ति राजेश राय की खंडपीठ ने आदेश दिया कि याचिकाओं को सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के साथ-साथ भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त को भी नोटिस जारी हुआ। भाजपा ने क्यों जताई आपत्ति इस बीच, भाजपा की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार जातिगत जनगणना के माध्यम से हिंदू धर्म को बांटने का प्रयास कर रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे जातिगत जनगणना के दौरान धर्म कॉलम में खुद को हिंदू के रूप में दर्ज करें। हाल ही में वीरशैव-लिंगायत महासभा ने अपने समुदाय के लोगों से अपील की थी कि वे धर्म कॉलम में खुद के लिए वीरशैव-लिंगायत लिखें। यह सर्वे 22 सितंबर से सात अक्टूबर के बीच प्रस्तावित है, जिसकी अनुमानित लागत 420 करोड़ रुपये है। शिकारीपुरा से विधायक विजयेंद्र ने कहा, 'भाजपा के राजनीतिक चिंतन शिविर में हमने संकल्प लिया है कि जातिगत जनगणना के दौरान किसी भी जाति या समुदाय के लोग धर्म कॉलम में केवल हिंदू ही लिखें।'

H-1B वीजा के नए नियमों के तहत भारी बढ़ोतरी, US में आवेदन पर 88 लाख रुपये तक शुल्क

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा के नियम बदल दिए हैं. अब कुछ H-1B वीजा धारक अमेरिका में गैर-इमिग्रेंट वर्कर के रूप में सीधे एंट्री नहीं ले पाएंगे. नए आवेदन के साथ 100,000 डॉलर यानी 88 लाख रुपये से ज्यादा की फीस देना जरूरी होगा. 100,000 डॉलर की नई फीस कंपनियों के लिए खर्च काफी बढ़ा सकती है. हालांकि बड़ी टेक कंपनियों के लिए यह कोई बड़ी समस्या नहीं होगी क्योंकि वे टॉप प्रोफेशनल्स के लिए भारी खर्च करती रहती हैं, लेकिन इससे छोटे टेक फर्म और स्टार्टअप दबाव में आ सकते हैं. व्हाइट हाउस के स्टाफ सेक्रेटरी विल शार्फ ने कहा, "H-1B नॉन-इमिग्रेंट वीजा प्रोग्राम उन वीजा सिस्टम्स में से एक है जिसका सबसे ज्यादा दुरुपयोग हुआ है. इस वीजा का मकसद यही है कि ऐसे हाईली स्किल्ड लोग अमेरिका में काम कर सकें, जिनके काम अमेरिकी कर्मचारी नहीं करते. यह प्रोक्लेमेशन कंपनियों द्वारा H-1B आवेदकों को स्पॉन्सर करने की फीस को 100,000 डॉलर कर देगा. इससे यह सुनिश्चित होगा कि जो लोग अमेरिका आ रहे हैं, वे वास्तव में बहुत ही उच्च योग्य हैं और उन्हें अमेरिकी कर्मचारियों से बदला नहीं जा सकता." अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लूटनिक ने कहा, "अब बड़ी टेक कंपनियां या अन्य बड़ी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को ट्रेन नहीं करेंगी. उन्हें सरकार को 100,000 डॉलर देना होगा और उसके बाद कर्मचारी को भी भुगतान करना होगा. यह आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं है. अगर आप किसी को ट्रेन करने जा रहे हैं, तो इसे हमारे देश की महान यूनिवर्सिटी से हाल ही में ग्रैजुएट हुए अमेरिकी छात्रों में से किसी एक को ट्रेन करें, अमेरिकियों को काम के लिए तैयार करें, और हमारे जॉब्स लेने के लिए लोगों को लाना बंद करें. यही नीति है और सभी बड़ी कंपनियां इसके साथ हैं." टेक्नोलॉजी और स्टाफिंग कंपनियां H-1B वीजा पर बहुत निर्भर हैं. अमेजन ने 2025 की पहली छमाही में 10,000 से ज्यादा H-1B वीजा हासिल किए हैं. वहीं माइक्रोसॉफ्ट और मेटा जैसी कंपनियों को 5,000 से ज्यादा वीजा अप्रूवल मिला है. H-1B वीजा हासिल करने वालों में 71% भारत H-1B वीजा के लगभग दो-तिहाई पद कंप्यूटिंग या आईटी क्षेत्र में हैं. लेकिन इंजीनियर, शिक्षक और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स भी इस वीजा का इस्तेमाल करते हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल H-1B वीजा पाने वालों में भारत सबसे बड़ा लाभार्थी था भारतीय प्रोफेशनल्स की हिस्सेदारी 71 फीसदी रही थी, जबकि चीन दूसरे नंबर पर था और उसे केवल 11.7% वीजा मिला. H-1B वीजा के नियम बदलना ट्रंप का हाई-प्रोफाइल कदम जनवरी से सत्ता में आने के बाद, ट्रंप ने वाइड-रेंज इमिग्रेशन क्रैकडाउन शुरू किया है, जिसमें कुछ कानूनी इमिग्रेशन को सीमित करने के कदम शामिल हैं. H-1B वीजा प्रोग्राम को बदलना उनके प्रशासन का अब तक का सबसे हाई-प्रोफाइल कदम है. H-1B प्रोग्राम के तहत हर साल 65,000 वीजा दिए जाते हैं, जो विशेष क्षेत्रों में अस्थायी विदेशी कर्मचारियों को लाने के लिए होते हैं. इनके अलावा, एडवांस डिग्री वाले कर्मचारियों के लिए 20,000 और वीजा जारी किए जाते हैं. मौजूदा सिस्टम के मुताबिक, H-1B वीजा के लिए अप्लाई करने के लिए पहले एक छोटे शुल्क का भुगतान करके लॉटरी में शामिल होते हैं और अगर चुने जाते हैं, तो बाद में कुछ हजार डॉलर तक के शुल्क देने पड़ते हैं. इन शुल्कों का लगभग पूरा भुगतान कंपनियों को करना होता है. H-1B वीजा तीन से छह साल की अवधि के लिए स्वीकृत होते हैं. H-1B वीजा के मौजूदा नियम क्या हैं? पहले H-1B वीजा दाखिल करने की फीस 215 डॉलर से शुरू होती थी और परिस्थितियों के हिसाब से कई हजार डॉलर तक जा सकती थी. अब 100,000 डॉलर की फीस से यह कई कंपनियों और उम्मीदवारों के लिए बहुत महंगा और मुश्किल हो जाएगा. H-1B सिस्टम के कुछ विरोधी, खासकर अमेरिका की टेक कंपनी में काम करने वाले लोग, कहते हैं कि कंपनियां वीजा लेने वाले लोगों को इसलिए काम पर रखती हैं ताकि कर्मचारियों की सैलरी कम रहे. इसके कारण अमेरिका के योग्य नौकरी चाहने वाले लोग काम नहीं पा पाते. इस बात पर टेक सेक्टर और मजदूरी बाजार में लोग दो हिस्सों में बंटे हुए हैं.

मुस्लिम देशों के बीच पाक के साथ रक्षा समझौते की संभावना, भारत का कड़ा रुख

नई दिल्ली पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए “स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट” को लेकर भारत ने शुक्रवार को एक बार फिर प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और सऊदी अरब के बीच गहरी और व्यापक रणनीतिक साझेदारी है और भारत अपेक्षा करता है कि इस रिश्ते में दोनों देशों के आपसी हितों और संवेदनशीलताओं का ध्यान रखा जाएगा। इसके अलावा, पाक मंत्री ने दावा किया है कि अन्य मुस्लिम देश भी पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौता कर सकते हैं। इस पर भी भारत की प्रतिक्रिया सामने आई है। यह रक्षा समझौता पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने बुधवार को साइन किया। समझौते में स्पष्ट किया गया है कि “किसी भी देश पर आक्रामक कार्रवाई दोनों देशों पर हमला मानी जाएगी”। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब इजरायल ने हाल ही में कतर में हमास नेताओं पर सैन्य हमले किए हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, “भारत और सऊदी अरब की साझेदारी हाल के वर्षों में काफी मजबूत हुई है। हम उम्मीद करते हैं कि यह साझेदारी आपसी हितों और संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ेगी।” उन्होंने यह भी बताया कि भारत को इस बात की जानकारी थी कि पाकिस्तान और सऊदी अरब लंबे समय से इस तरह के समझौते पर विचार कर रहे थे, और अब इसे औपचारिक रूप दिया गया है। भारतीय अधिकारियों ने कहा कि वे इस समझौते के राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, समझौते में और क्या-क्या लिखा है इसको लेकर अभी तक कुछ भी सार्वजनिक नहीं किया गया है और सामूहिक रक्षा का उल्लेख केवल एक संयुक्त बयान में किया गया है। इसलिए, सामूहिक रक्षा से संबंधित कानूनी बाध्यताओं का आकलन करना आवश्यक होगा। पाकिस्तान-सऊदी संबंध और भारत की स्थिति सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से रक्षा और सुरक्षा संबंध रहे हैं। हाल के वर्षों में, सऊदी अरब ने पाकिस्तान की आर्थिक समस्याओं से निपटने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दूसरी ओर, भारत और सऊदी अरब के बीच पिछले एक दशक में रणनीतिक सहयोग गहरा हुआ है, जिसमें संयुक्त सेना और नौसेना अभ्यास शामिल हैं। हालांकि, यह समझौता पश्चिम एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच हुआ है। अरब देशों ने हाल के महीनों में इजरायल की आक्रामक कार्रवाइयों, विशेष रूप से ईरान और कतर पर सैन्य हमलों के बाद, अमेरिका की सुरक्षा साझेदार के रूप में विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। इस पृष्ठभूमि में, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच यह समझौता क्षेत्रीय सुरक्षा गतिशीलता को और जटिल बना सकता है। भारत की सुरक्षा चिंताएं भारत पश्चिम एशिया को अपने “विस्तारित पड़ोस” का हिस्सा मानता है और उसने साफ कहा है कि राष्ट्रीय हितों और व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, पाकिस्तान-सऊदी समझौते के प्रभावों का अध्ययन किया जा रहा है, खासकर इस संभावना के मद्देनजर कि अगर पाकिस्तान-भारत के बीच तनाव बढ़ा तो इस समझौते का हवाला दिया जा सकता है। अन्य अरब देशों के जुड़ने की संभावना पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने गुरुवार को एक टेलीविजन इंटरव्यू में कहा कि इस समझौते में अन्य अरब देशों, जैसे संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कतर, के शामिल होने की संभावना से इंकार नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, "इस समझौते में कोई ऐसी धारा नहीं है जो किसी अन्य देश के प्रवेश को रोके।" आसिफ ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान की परमाणु क्षमताएं इस समझौते के तहत उपलब्ध होंगी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, जायसवाल ने कहा कि भारत के यूएई और कतर के साथ व्यापक संबंध हैं। उन्होंने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी के बीच हुई बातचीत और यूएई की विदेश मामलों की राज्य मंत्री रीम अल हाशिमी की नई दिल्ली यात्रा का उल्लेख किया। जायसवाल ने इन संबंधों को "विस्तृत" बताते हुए कहा कि ये वार्ताएं निरंतर जारी हैं। इस बीच, भारत ने सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के साथ अपने मजबूत संबंधों का लाभ उठाने की योजना बनाई है ताकि क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखा जा सके। यह समझौता भारत के लिए एक चुनौती हो सकता है, लेकिन भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत और क्षेत्र में उसकी सक्रिय भूमिका इसे प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम बनाती है।