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रूस में भूकंप का कहर: 7.4 तीव्रता वाला झटका, जारी हुआ सुनामी अलर्ट

रूस रूस के सुदूर पूर्वी इलाके कामचाटका में रविवार को महज़ एक घंटे के अंदर धरती पांच बार कांपी। इन भूकंपों की तीव्रता 6.6 से 7.4 के बीच रही। सबसे बड़ा झटका 7.4 तीव्रता का था, जिसके बाद अमेरिका और रूस के तटीय इलाकों के लिए सुनामी का अलर्ट जारी किया गया है। लोगों को ऊंचाई वाले इलाकों में जाने की सलाह दी गई है। सभी भूकंपों का केंद्र पेत्रोपावलोव्स्क-कामचात्स्की शहर के पूर्व में था और इनकी गहराई केवल 10 किलोमीटर रही, जिससे झटकों का असर ज़मीन पर काफी ज्यादा महसूस हुआ। भूकंप से किसी प्रकार के जाल-माल के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। सुनामी की चेतावनी अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण विभाग (USGS) ने बताया कि 7.4 तीव्रता वाले भूकंप के बाद समुद्र में खतरनाक लहरें उठने की आशंका है। अलर्ट के मुताबिक, भूकंप के केंद्र से 300 किलोमीटर के दायरे में सुनामी लहरें आ सकती हैं। हवाई और रूस के तटीय इलाकों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है। कब, कहां और कितनी थी भूकंप की तीव्रता पांचों बड़े भूकंप झटके पेत्रोपावलोव्स्क-कामचात्स्की शहर के पूर्वी हिस्से में महसूस किए गए। पहला झटका 6.6 तीव्रता का था, जो शहर से 147 किलोमीटर पूर्व में आया। इसके तुरंत बाद 151 किलोमीटर पूर्व में 6.7 तीव्रता का दूसरा झटका दर्ज किया गया। तीसरा और सबसे शक्तिशाली भूकंप 7.4 तीव्रता का था, जिसका केंद्र 144 किलोमीटर पूर्व में था। चौथा झटका 130 किलोमीटर पूर्व में 6.7 तीव्रता का रहा, जबकि अंतिम यानी पांचवां झटका 142 किलोमीटर पूर्व में 7.0 तीव्रता का रिकॉर्ड किया गया। सभी भूकंपों की गहराई करीब 10 किलोमीटर रही। बता दें कि भूकंप की बताती है कि क्षेत्र में टेक्टॉनिक प्लेटों की हलचल काफी तेज़ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ घंटों तक आफ्टरशॉक्स भी आ सकते हैं।  

धरती पर लौटे अंतरिक्ष यात्री शुभांशु: ‘स्थिर रहना भी एक कला है

नई दिल्ली भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से लौटने के बाद एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वे माइक्रोग्रैविटी में तैरते हुए नजर आ रहे हैं। इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए इस वीडियो में शुक्ला बिना हिले पूरी तरह स्थिर रहने की कोशिश में लगे हैं। उन्होंने लिखा कि आईएसएस पहुंचने के बाद वे टाइमलाइन का पालन करने और अपने टास्क व प्रयोगों को पूरा करने में व्यस्त थे। शुरू में माइक्रोग्रैविटी में हिलना-डुलना और स्टेशन को समझना थोड़ा मुश्किल था, लेकिन कुछ दिनों बाद उन्होंने अपने शरीर पर नियंत्रण पाना सीख लिया। हालांकि, पूरी तरह स्थिर रहना उनके लिए चुनौती बना रहा। शुभांशु शुक्ला ने कहा कि अंतरिक्ष में छोटी सी भी हलचल आपके शरीर को हिला सकती है। ऐसे में बिल्कुल स्थिर रहने के लिए खास कौशल की जरूरत होती है। उन्होंने इसे तेज रफ्तार दुनिया में मन की शांति से जोड़ते हुए कहा कि हमें कभी-कभी रुकना और शांत रहना जरूरी है। शुक्ला ने सुझाव दिया कि तेजी से आगे बढ़ने के लिए कभी-कभी धीमा होना जरूरी होता है। चाहे गुरुत्वाकर्षण हो या न हो, स्थिर रहना एक बड़ी चुनौती है। शुभांशु शुक्ला की कैसी है सेहत शुभांशु शुक्ला स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल ग्रेस में सवार होकर धरती पर लौटे, जो सैन डिएगो के तट पर प्रशांत महासागर में उतरा। लगभग तीन सप्ताह के एक्सियॉम-4 मिशन के दौरान शुक्ला और उनकी टीम ने 31 देशों के 60 से अधिक प्रयोग किए, जिनमें भारत के इसरो के 7 प्रयोग शामिल थे। शुक्ला की वापसी भारत के कॉमर्शियल अंतरिक्ष उड़ान में बढ़ते योगदान का अहम पड़ाव है। इस बीच, इसरो ने बताया कि शुभांशु शुक्ला के मेडिकल टेस्ट से संकेत मिला कि उनकी हालत स्थिर है और तत्काल चिंता की कोई बात नहीं है। अंतरिक्ष यान से बाहर निकलते ही रिकवरी शिप पर अंतरिक्ष यात्रियों की शुरुआती स्वास्थ्य जांच की गई। बाद में, अंतरिक्ष यात्रियों को आगे की मेडिकल जांच के लिए हेलीकॉप्टर से रिकवरी शिप पर ले जाया गया।  

विधानसभा की गरिमा पर सवाल: मंत्री गेम में मस्त, विपक्ष ने घेरा

मुंबई महाराष्ट्र में शरद पवार गुट के विधायक ने मंत्री माणिकराव कोकाटे का एक वीडियो एक्स पर पोस्ट किया है। इस वीडियो में मंत्री कोकाटे विधानसभा में मोबाइल पर गेम खेलते नजर आ रहे हैं। राकांपा-शरद पवार के विधायक रोहित पवार ने अजीत पवार की राकांपा की आलोचना की है। उन्होंने रविवार को कहा कि यह पार्टी भाजपा से सलाह-मशविरा किए बिना कोई काम नहीं कर सकती। मंत्री के इस वीडियो पर कांग्रेस ने भी उनके ऊपर निशाना साधा है। कृषि मंत्री के पास काम नहीं राकांपा (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने पोस्ट में लिखा कि सत्तारूढ़ राकांपा गुट भाजपा से सलाह-मशविरा किए बिना काम नहीं कर सकता। यही वजह है कि राज्य में कृषि से जुड़े कई मुद्दे लंबित होने और रोजाना आठ किसानों द्वारा आत्महत्या किए जाने के बावजूद कृषि मंत्री के पास कोई काम नहीं है। वह रमी खेलने में व्यस्त दिखते हैं। बार-बार प्रयास किये जाने के बावजूद राकांपा और मंत्री कोकाटे से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। कांग्रेस ने लगाया धोखेबाजी का आरोप इस बीच, कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने महायुति सरकार पर किसानों के साथ ‘धोखेबाजी’ और ‘विश्वासघात’ करने का आरोप लगाया। वडेट्टीवार ने पत्रकारों से कहा कि राज्य में किसान मर रहे हैं और कृषि मंत्री अपने मोबाइल फोन पर गेम खेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस धोखेबाज और विश्वासघाती सरकार को किसानों की कोई चिंता नहीं है। मैं किसानों से अपील करता हूं कि वे उन्हें सबक सिखाएं। फडणवीस ठाकरे मुलाकात पर क्या बोले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता आदित्य ठाकरे की मुंबई के एक होटल में मुलाकात की खबरों के बारे में पूछे जाने पर वडेट्टीवार ने कहा कि दोनों अलग-अलग कार्यक्रमों के लिए होटल में थे और उनकी मुलाकात नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मुलाकात भी हुई, तो जरूरी नहीं कि सभी मुलाकातें राजनीतिक हों।  

किशमिश खाने वालों के लिए अलर्ट! इस ब्रांड को तुरंत करें वापिस

नई दिल्ली अगर आप स्वास्थ्य के प्रति सजग हैं और अमेरिकी गोल्डन किशमिश का सेवन करते हैं तो सावधान हो जाइए। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने हाल ही में इसके बारे में एक नोटिस जारी किया है, जिसके तहत बाजार से गोल्डन किशमिश के पैक को वापस करने का आदेश दिया गया है। FDA ने अपने नोटिस में कहा है कि गोल्डन किशमिश के पैक में एक एक ऐसा केमिकल पाया गया है, जिससे किशमिश का सेवन करने वालों को जान का खतरा है। इस आदेश के बाद न्यू जर्सी के निरवाना फुड्स ने अपने 28 औंस के गोल्डन किशमिश के पैकेट्स को बाजार से वापस मंगवा लिया है। FDA के मुताबिक इस किशमिश के पैकेट्स में सल्फाइट्स पाए गए हैं, जो इंसानों में गंभीर एलर्जी पैदा करते हैं। नोटिस में कहा गया है कि इस केमिकल के सेवन से जान को भी खतरा पहुंच सकता है और मरीजों को जानलेवा एनाफिलेक्टिक का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, किशमिश की रिफाइनिंग के दौरान उसके कालेपन और गंदगी को दूर करने के लिए सल्फाइट का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन अमेरिकी सरकार के नियमों के अनुसार गोल्डन किशमिश के पैकेट्स पर इसका स्पष्ट उल्लेख करना अनिवार्य है। अस्थमा के मरीजों के लिए काल अमेरिकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (CDC) के अनुसार, यह केमिकल इसलिए भी चिंता का विषय बना हुआ है क्योंकि अमेरिका में लगभग 6 फीसदी वयस्क और 8 फीसदी बच्चे एलर्जी रोगों से प्रभावित हैं। निरवाना फुड्स के जिस लॉट्स को बाजार से वापस बुलाया गया है, वह न्यूयॉर्क के महाराजा सुपर मार्केट और न्यू जर्सी एवं न्यूयॉर्क के विलेजर फार्मर्स मार्केट स्टोर्स में बेचे गए थे। CDC के मुताबिक, सल्फाइट के सेवन से किसी बीमार या संवेदनशील व्यक्ति की जान जा सकती है। इसके अलावा आम जन को इससे गले में सूजन, सांस लेने में परेशानी, ब्लड प्रेशर में अचानक गिरावट या बेहोशी जैसी परेशानियां हो सकती हैं, जिसमें तुरंत इलाज की जरूरत है। अस्थमा और दमा के मरीजों के लिए यह काल है। देर करने पर जान जाने का जोखिम होता है। क्यों होता है इस केमिकल का इस्तेमाल? बता दें कि गोल्डन किशमिश के सप्लायर्स किशमिश को सुनहरा रंग देने और उसकी सफाई करने के लिए सल्फरडाइऑक्साइड और सल्फाइट का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, गहरे रंग की गोल्डन किशमिश को इस तरह के केमिकल से सफाई की जरूरत नहीं होती। बड़ी बात यह भी है कि सल्फाइट प्राकृतिक रूप से टमाटर, प्याज और वाइन जैसे पदार्थों में भी पाया जाता है।गोल्डन किशमिश को भारत में सुल्ताना किशमिश भी कहा जाता है। यह बीज रहित किस्म के सूखे सफेद अंगूर होते हैं। ये सुनहरे रंग के होते हैं और अन्य किशमिशों की तुलना में ज़्यादा गाढ़े, मीठे और रसीले होते हैं। यह पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जिसमें प्रोटीन, आयरन और आवश्यक विटामिन भी होते हैं।  

रिजिजू का दो टूक: ऑपरेशन सिंदूर पर खुली है सरकार, ट्रंप का दावा अलग नजरिए से देखें

नई दिल्ली  केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने रविवार को कहा कि मॉनसून सत्र के दौरान सरकार ऑपरेशन सिंदूर, पहलगाम आतंकी हमला जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। सत्र 21 जुलाई सोमवार से शुरू होगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार किसी भी मुद्दे से पीछे नहीं हटेगी और संसद को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रतिबद्ध है। रिजिजू ने ये बातें ऑल पार्टी मीटिंग के बाद कहीं। सर्वदलीय बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में रिजिजू से जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीज़फायर दावे को लेकर विपक्ष के रुख पर सवाल किया गया, तो रिजिजू ने कहा कि सरकार संसद में ही इस पर जवाब देगी, बाहर नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में हमेशा मौजूद रहते हैं जब भी कोई बड़ा मुद्दा उठता है। रिजिजू के मुताबिक, सरकार मॉनसून सत्र में 17 विधेयक (बिल) पेश करने की योजना बना रही है और बहस के दौरान सभी सवालों के जवाब दिए जाएंगे। सर्वदलीय बैठक में 51 दल हुए शामिल उन्होंने कहा, "हम खुले दिल से चर्चा के लिए तैयार हैं। हम संसदीय नियमों और परंपराओं का सम्मान करते हैं।” ऑल पार्टी बैठक में 51 दलों के 54 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिसमें सभी दलों – एनडीए, यूपीए (इंडिया ब्लॉक) और निर्दलीय सांसदों – ने अपने मुद्दे रखे और बहस की मांग की। रिजिजू ने कहा, "हम अलग-अलग विचारधाराओं से हो सकते हैं, लेकिन संसद को ठीक से चलाना सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है।" न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा पर महाभियोग प्रस्ताव किरण रिजिजू ने बताया कि सांसदों द्वारा न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग लाने की मांग की गई है। 100 से अधिक सांसदों ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं। सरकार इस मानसून सत्र में ही प्रस्ताव लाएगी, लेकिन इसके पेश किए जाने की तारीख अभी तय नहीं की गई है। उन्होंने कहा, "महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा। टाइमलाइन बाद में बताई जाएगी।" छोटे दलों को कम बोलने के समय मिलने पर भी बोले रिजिजू रिजिजू ने यह भी माना कि जिन दलों के सांसद कम संख्या में हैं, उन्हें अक्सर संसद में बोलने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय को लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति के समक्ष उठाएगी और इसे बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में शामिल किया जाएगा ताकि सभी को समान अवसर मिल सके।  

ड्रैगन का जल-जाल: भारत के लिए क्यों खतरनाक है चीन का नया मेगा डैम?

नई दिल्ली चीन ने भारतीय सीमा पर नया बांध बनाना शुरू कर दिया है। यह बांध तिब्बत में ब्रह्मपुत्र पर बनाया जा रहा है। चीनी परिषद ने अपनी वेबसाइट पर इस बांध को लेकर जानकारी दी है।बनकर तैयार होने के बाद यह दुनिया का सबसे बड़ा बांध होगा। चीन की इस हरकत ने भारत ने माथे पर चिंता की लकीरें गहरी कर दी हैं। इसके पीछे कई वजहें हैं। असल में यह बांध नहीं, बल्कि चीन का एक वॉटर बम है, जिसे वह भारत के खिलाफ इस्तेमाल कर सकता है। इसके अलावा इस बांध की लोकेशन ऐसी है जो भारत के लिए रणनीतिक लिहाज से काफी अहम है। इसके अलावा इस लोकेशन पर टैक्टोनिक प्लेट्स के टकराने से भूकंप का खतरा भी बना रहता है। भारतीय सीमा के करीब चीन भारतीय सीमा के नजदीक यह बांध बना रहा है। चीन के प्रधानमंत्री ली क्विंग ने इस बांध के निर्माण का ऐलान कर दिया है। यह बांध चीन के न्यिंगची शहर में ब्रह्मपुत्र नदी के निचले क्षेत्र में बनाया जा रहा है। यह बांध हिमालय पर्वतमाला में एक विशाल घाटी पर बनाया जाएगा। इसी जगह पर ब्रह्मपुत्र नदी एक विशाल ‘यू-टर्न’ लेकर अरुणाचल प्रदेश और फिर बांग्लादेश में प्रवेश करती है। ब्रह्मपुत्र नदी चीन में सांगपो के नाम से जानी जाती है। यह नदी दक्षिण-पश्चिमी तिब्बत में कैलाश पर्वत के पास जिमा यांगजोंग ग्लेशियर से निकलती है। इसकी लंबाई 1,700 किलोमीटर है। यह भारत में अरुणाचल प्रदेश की सियांग नदी में, फिर असम में ब्रह्मपुत्र और बाद में बांग्लादेश पहुंचती है। भारत के लिए क्यों चिंता भारत में इस बात को लेकर चिंताएं उत्पन्न हो गईं कि बांध के आकार और पैमाने के कारण चीन को जल प्रवाह को नियंत्रित करने का अधिकार तो मिलेगा ही, साथ ही इससे बीजिंग को युद्ध के समय सीमावर्ती क्षेत्रों में बाढ़ लाने के लिए बड़ी मात्रा में पानी छोड़ने में भी मदद मिलेगी। साल 2020 में एक ऑस्ट्रेलियाई थिंक टैंक ने रिपोर्ट पब्लिश की थी। इसके मुताबिक चीन तिब्बत के पठार की नदियों को कंट्रोल करके भारत को परेशानी में डाल सकता है। इतनी है लागत यह बांध 167.8 अरब डॉलर की लागत से बनाया जा रहा है। यहां पर पांच हाइड्रोपॉवर स्टेशंस बनेंगे। यहां बने जल विद्युत स्टेशन से हर साल 300 अरब किलोवाट घंटे से अधिक बिजली पैदा होने की उम्मीद है। इससे चीन में करीब 30 करोड़ लोगों को फायदा मिलेगा। अभी तक चीन में यांग्ज्ती नदी पर बना था, जहां सबसे ज्यादा बिजली पैदा होती है। भारत की क्या तैयारी भारत भी अरुणाचल प्रदेश में ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बना रहा है। भारत और चीन ने सीमा पार नदियों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए 2006 में विशेषज्ञ स्तरीय तंत्र (ईएलएम) बनाया थ्ज्ञा। जिसके तहत चीन बाढ़ के मौसम के दौरान भारत को ब्रह्मपुत्र नदी और सतलुज नदी पर जल विज्ञान संबंधी जानकारी प्रदान करता है। लेकिन यह बांध बन जाने के बाद यह सिस्टम कितना काम करेगा यह देखने वाली बात होगी।  

राहुल बनाम लेफ्ट: RSS तुलना पर INDIA गठबंधन में तनाव चरम पर

नई दिल्ली बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। एनडीए और महागठबंधन, दोनों में ही घटक दलों के बीच सीट शेयरिंग पर बातचीत जारी है। इस बीच कांग्रेस ने लेफ्ट पार्टी को लेकर एक बयान देकर खलबली मचा दी है। राहुल ने कहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की विचारधारा एक जैसी है। उनके इस बयान के बाद इंडिया गठबंधन में दरार की अटकलें लगाई जाने लगी हैं। सूत्रों के अनुसार शनिवार को इंडिया गठबंधन की वर्चुअल बैठक में इस मुद्दे को वामपंथी नेताओं द्वारा जोरदार ढंग से उठाया गया। राहुल गांधी ने केरल के कोट्टायम में पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी की पुण्यतिथि पर आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा, "मैं RSS और CPI(M) दोनों से विचारधारा को लेकर समान रूप से लड़ता हूं। मेरी सबसे बड़ी शिकायत यह है कि इन दोनों में लोगों के प्रति संवेदना नहीं है। राजनीति में होना मतलब लोगों को महसूस करना, उन्हें सुनना और छूना भी जरूरी है।" वामदलों ने जताई आपत्ति बैठक में सीपीआई नेता डी राजा ने इस मुद्दे को बिना नाम लिए उठाते हुए कहा कि ऐसी टिप्पणियां कैडरों में भ्रम फैलाती हैं और गठबंधन की एकता को नुकसान पहुंचा सकती हैं। एक अन्य नेता ने याद दिलाया कि INDIA गठबंधन का नारा था, "देश बचाओ, बीजेपी हटाओ", न कि आपसी मतभेद को बढ़ावा देना। राहुल गांधी की टिप्पणी पर सीपीआई(एम) महासचिव एम.ए. बेबी ने एक तीखा वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा, "राहुल गांधी द्वारा CPI(M) और RSS की तुलना करना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे यह जाहिर होता है कि उन्हें केरल और भारत की राजनीतिक हकीकत की सही समझ नहीं है।" उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2004 में कांग्रेस सरकार वामपंथी दलों के समर्थन से ही बनी थी। उन्होंने कहा, "डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार CPI(M) के समर्थन के बिना नहीं बन सकती थी।" बेबी ने राहुल गांधी के वायनाड से चुनाव लड़ने को लेकर भी चुटकी ली। उन्होंने कहा, "वह जिस सीट से लड़े, वहां उन्हें BJP या RSS से नहीं, बल्कि CPI उम्मीदवार से मुकाबला करना पड़ा।" गौरतलब है कि राहुल गांधी ने वायनाड से CPI उम्मीदवार एनी राजा के खिलाफ चुनाव जीतने के बाद सीट छोड़ दी थी और अब वह रायबरेली से सांसद हैं। बाद में वायनाड सीट से प्रियंका गांधी उपचुनाव जीत चुकी हैं। आलोचना होगी, लेकिन तुलना नहीं: सीपीआईएम एम.ए. बेबी ने कहा कि वामपंथी दल कांग्रेस की आर्थिक नीतियों की आलोचना करते हैं, लेकिन कभी कांग्रेस की तुलना बीजेपी या RSS से नहीं करते। उन्होंने कहा, "हम कांग्रेस की आलोचना स्वतंत्र रूप से करते हैं, लेकिन कभी उन्हें RSS या BJP जैसा नहीं कहते।" कांग्रेस और CPI(M) राष्ट्रीय स्तर पर INDIA गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन केरल में दोनों दल प्रतिद्वंद्वी मोर्चों का नेतृत्व करते हैं। कांग्रेस के नेतृत्व में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) और वाम दलों के नेतृत्व में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF)। बीजेपी यहां अपनी उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश कर रही है। बिहार की बात करें तो 2020 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में लेफ्ट की पार्टियां भी शामिल हैं।  

अहमदाबाद में जहर खाकर एक ही परिवार के 5 लोगों ने दी जान, शहर में सनसनी

अहमदाबाद गुजरात के अहमदाबाद में शनिवार को एक ही परिवार के पांच लोगों ने कथित रूप से जहर खाकर जान दे दी। मृतकों में पति-पत्नी उनकी दो बेटियां और एक बेटा शामिल है। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिए हैं। सामूहिक खुदकुशी की वजह अभी पता नहीं चल सकी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। अहमदाबाद ग्रामीण के एसपी ने बताया कि बावला स्थित किराए के मकान में एक ही परिवार के पांच सदस्यों ने जहरीला तरल पदार्थ पीकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या का कारण अभी पता नहीं चल सका है। सभी मूल रूप से ढोलका के रहने वाले थे। मृतकों की पहचान विपुल वाघेला (32), उसकी पत्नी सोनल (26) और उनके बच्चों करीना (11), मयूर (8) और राजकुमारी (5) के रूप में हुई है। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए स्थानीय अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस को सामूहिक आत्महत्या का शक भाषा के मुताबिक, अहमदाबाद जिले में शनिवार देर रात एक दंपती और उनके तीन बच्चों के शव उनके घर से बरामद किए गए। पुलिस को शक है कि यह सामूहिक आत्महत्या का मामला है। पुलिस अधीक्षक अहमदाबाद (ग्रामीण) ओम प्रकाश जाट ने बताया कि यह घटना बगोदरा गांव में हुई और पुलिस को इसकी सूचना देर रात करीब 2 बजे मिली। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लग रहा है कि उन्होंने जहर खाकर आत्महत्या की है। उन्होंने कहा कि इस कदम के पीछे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है। अधिकारी ने कहा, ‘‘ एक व्यक्ति, उसकी पत्नी और उसके तीन बच्चों ने बगोदरा स्थित अपने किराए के मकान में जहर खाकर जान दे दी। व्यक्ति ऑटो-रिक्शा चलाकर अपना गुजारा करता था और परिवार द्वारा उठाए गए इस कदम के पीछे का कारण अभी स्पष्ट नहीं है।’’ पुलिस और फॉरेंसिक टीम घर की तलाशी लेने के साथ ही सबूत इकट्ठे कर रही हैं। इसके साथ ही आसपास के लोगों से भी पूछताछ कर रही है। पहले भी हो चुकीं ऐसी घटनाएं 8 जून 2025 : इससे पहले गुजरात के मेहसाणा जिले में आर्थिक तंगी के चलते एक दंपती ने अपने 9 साल के बेटे के साथ कडी कस्बे के पास नर्मदा नहर में कूदकर आत्महत्या कर ली थी। मृतकों में 38 साल के धर्मेश पंचाल, 36 साल की उनकी पत्नी उर्मिला और 9 साल के बेटे प्रकाश शामिल था। पुलिस ने धर्मेश की कार से एक सुसाइड नोट भी बरामद किया था। पुलिस के अनुसार, परिवार आर्थिक संकट के कारण तनाव में था। 13 अप्रैल 2025 : गुजरात के साबरकांठा जिले के वडाली कस्बे में एक किसान ने अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ रात में जहर खा लिया था। पति-पत्नी की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। वडाली थाना पुलिस ने बताया था कि दंपती, उनके दो बेटों और एक बेटी को शनिवार सुबह उल्टियां होने लगी, जिसके बाद पड़ोसियों ने एम्बुलेंस बुलाई और परिवार के पांचों सदस्यों को इलाज के लिए एक निजी अस्पताल ले जाया गया। वहां से उन्हें हिम्मतनगर के सिविल अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां किसान की शाम के वक्त और उनकी पत्नी की रविवार सुबह मौत हो गई। मृतकों की पहचान विनू सागर (42) और उनकी पत्नी कोकिलाबेन (40) के रूप में हुई थी।  

पुतिन की भारत यात्रा से पहले अंतरराष्ट्रीय हलचल, क्या बदलेगा भू-राजनीतिक समीकरण?

नई दिल्ली रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते बढ़ते वैश्विक तनाव और अमेरिका-नाटो के तीखे ऐतराज के बावजूद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस साल के अंत में भारत दौरे पर आने वाले हैं। उनका यह दौरा भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के सिलसिले में होगा, जो 2021 के बाद पहली बार नई दिल्ली में आयोजित होगा। यह यात्रा ऐसे समय पर हो रही है जब अमेरिका और नाटो (NATO) में शामिल देश रूस पर लगातार प्रतिबंध बढ़ा रहे हैं और भारत से रूसी रक्षा और ऊर्जा सहयोग पर पुनर्विचार करने का दबाव बना रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, इस सम्मेलन के दौरान रक्षा उद्योग में सहयोग, ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी, परमाणु ऊर्जा सहयोग, आर्कटिक क्षेत्र में भारत की भूमिका का विस्तार और हाई-टेक सेक्टर में संयुक्त रोडमैप पर काम जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। हाल ही में पुतिन ने खुलासा किया कि प्रधानमंत्री मोदी के अनुरोध पर रूस ने भारत को उर्वरक निर्यात बढ़ाया है, जिससे भारतीय खाद्य सुरक्षा को बल मिला। वहीं, भारत और रूस के बीच नए परमाणु संयंत्र के दूसरे स्थान को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया भी इस शिखर सम्मेलन के दौरान पूरी हो सकती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने गुरुवार को कहा था कि भारत-रूस शिखर सम्मेलन महत्वपूर्ण है। पिछली बार यह मॉस्को में हुआ था, अब बारी भारत की है। तारीखें आपसी सहमति से तय की जाएंगी। अमेरिका और NATO को क्यों है आपत्ति? रूस के खिलाफ पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने रूस से तेल खरीद और रक्षा साझेदारी जारी रखी है। अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से दूरी बनाए, खासकर उच्च तकनीक और सैन्य मामलों में कोई व्यापार नहीं करे। वहीं, NATO देश इस बात चिंतित हैं कि भारत का यह रुख G7 और पश्चिमी दुनिया की रणनीति को कमजोर कर सकता है। हालांकि, भारत ने स्पष्ट किया है कि भारत अपनी विदेश नीति स्वतंत्र रूप से तय करता है। रूस एक पुराना और भरोसेमंद सहयोगी है। ऑपरेशन सिंदूर से पहले पुतिन ने दिया था भारत को समर्थन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच आखिरी बातचीत ऑपरेशन सिंदूर से ठीक पहले हुई थी। रूस ने भारत की आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई का समर्थन किया था। इस सैन्य अभियान में रूसी रक्षा प्रणालियों की अहम भूमिका रही। रूसी S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली और भारत-रूस संयुक्त ब्रह्मोस प्रोजेक्ट ने पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी। इन प्रणालियों ने पाकिस्तान की चीन निर्मित सैन्य क्षमताओं को काफी हद तक निष्क्रिय किया। SCO समिट में भी हो सकती है मोदी-पुतिन मुलाकात अगर प्रधानमंत्री मोदी चीन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेते हैं, तो वहां भी उनकी पुतिन से अलग से मुलाकात संभव है।  

कंगना का विवादित बयान बना चर्चा का विषय, मंडी में आई आपदा को बताया ‘भारी-भरकम’ भूकंप

मंडी अभिनेत्री एवं मंडी की सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने बयान से चर्चाओं में हैं। दिल्ली में एक एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कंगना ने मंडी संसदीय क्षेत्र में आई आपदा को भारी-भरकम भूकंप बता दिया। इससे एक बार फिर वह सोशल मीडिया यूजर्स और कांग्रेस के निशाने पर हैं। इंटरव्यू में कंगना ने संसद के सत्र को लेकर उत्साहित होने की बात कही। पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ भी की। मंडी संसदीय क्षेत्र में आई आपदा को भारी भरकम भूकंप बताते हुए कहा कि इस संबंध में अलग-अलग मंत्रालय से मिलने को लेकर काम किया जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर और विश्वभर में भारत की स्थिति को लेकर भी खुशी जताई। बता दें कि पहले कंगना आपदा के बीच मंडी में न होने को लेकर सोशल मीडिया से लेकर कांग्रेस नेताओं के निशाने पर रहीं। बाद में स्थिति संभालने आपदा प्रभावित क्षेत्र सराज में दौरा करते हुए उनके मीडिया को दिए बयान काफी चर्चा में रहे। अपने बयान में उन्होंने आपदा को लेकर कोई फंड न होने की बात कही थी। अब बादल फटने के बाद हुई तबाही को कंगना ने भारी भरकम भूकंप बता दिया है। यूजर्स वीडियो पर टिप्पणी करते हुए सांसद की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठा रहे है और ज्ञान रखने की सलाह दे रहे हैं।