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फूलों की सजावट से भड़का विवाद: RSS झंडा-‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर पुलिस ने की कार्रवाई

केरल  केरल में मंदिर में फूलों की सजावट पर RSS का झंडा और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) लिखने से बवाल मच गया। कोल्लम जिले में पार्थसारथी मंदिर के बाहर बने पूक्कलम में आरएसएस का झंडा और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लिखे जाने पर सस्तमकोट्टा पुलिस ने केस दर्ज किया है। केरल पुलिस ने आरएसएस और बीजेपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ केस दर्ज किया है। घटना पर केरल बीजेपी प्रमुख राजीव चंद्रशेखर (Rajeev Chandrasekhar) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कि कार्यकर्ताओं पर एफआईआर दर्ज करना ‘शर्मनाक’ और ‘देशद्रोह’ है। चंद्रशेखर ने एक्स पर पोस्ट करते हुए इस मामले को तुरंत वापस लेने की मांग की और कहा कि यह सशस्त्र बलों और आतंकवाद के पीड़ितों का अपमान है। वहीं पुलिस का कहना है कि पहले ही सभी दलों से राजनीतिक प्रतीकों के इस्तेमाल से बचने को कहा गया था, लेकिन नियम तोड़ा गया जिससे तनाव की आशंका बनी।   बीजेपी प्रमुख राजीव चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा-ऑपरेशन सिंदूर हमारी शान है. यह भारत की सेना के साहस और वीरता का प्रतीक है। यह वही ऑपरेशन है, जिसने 26 निर्दोष सैलानियों की हत्या का बदला लिया था, जिन्हें धर्म पूछकर मारा गया था। केरल पुलिस की यह एफआईआर उन 26 आतंकवाद पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ-साथ हर उस सैनिक का अपमान है, जो भारत की रक्षा अपने खून और बलिदान से करता है। चंद्रशेखर ने आगे लिखा- केरल कभी भी जमात-ए-इस्लामी या पाकिस्तान के इशारों पर चलने वाली जमीन नहीं बन सकती। केरल पुलिस को याद रखना चाहिए कि यह भारत है। मैं उनसे और मुख्यमंत्री/गृह मंत्री पिनराई विजयन जी से कहता हूं कि इस शर्मनाक और देशद्रोही एफआईआर को तुरंत वापस लिया जाए। पहले ही दी गई थी हिदायत जानकारी के मुताबिक, आरएसएस का झंडा फूलों की सजावट में लगाए जाने के बाद सस्तमकोट्टा पुलिस ने केस दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि पहले ही सीपीआई (एम) और बीजेपी दोनों पक्षों से कहा गया था कि पूक्कलम में किसी भी तरह का राजनीतिक झंडा या प्रतीक इस्तेमाल न करें, क्योंकि क्षेत्र में पहले से तनाव की स्थिति है। दोनों दल इस शर्त पर सहमत भी हो गए थे। हालांकि फेस्टिवल के दौरान फूलों की सजावट में आरएसएस का झंडा लगाया। पुलिस के अनुसार, इस वजह से समझौते का उल्लंघन हुआ और तनाव फैलने की आशंका थी, इसलिए मामला दर्ज किया गया। 

वेस्ट बैंक पर इजराइल का बड़ा कदम: नया नक्शा जारी, फिलीस्तीनियों के लिए चेतावनी

इजराइल मध्यपूर्व में तनाव और बढ़ने वाला है। इज़राइल के वित्त मंत्री बेज़ालेले स्मोट्रिच  ने एक ऐसा नक्शा पेश किया है जिसमें इज़राइल ने वेस्ट बैंक के 82% हिस्से को अपने कब्ज़े में लेने की योजना  दिखाई है। यह कदम न केवल फिलिस्तीनियों के लिए झटका है, बल्कि पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय बन गया है। वेस्ट बैंक क्यों अहम  वेस्ट बैंक लाखों फिलीस्तीनियों का घर है। यह वही इलाका है जो लंबे समय से इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष का केंद्र रहा है। अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक वेस्ट बैंक को  कब्ज़ा किया हुआ इलाका (Occupied Territory)  माना जाता है। यही कारण है कि यहां इज़राइल का नियंत्रण बढ़ाना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादास्पद माना जाता है।   नक्शे में क्या दिखाया  स्मोट्रिच द्वारा जारी नक्शा इज़राइली रक्षा मंत्रालय (Defense Ministry)  के लोगो के साथ पेश किया गया। इस नक्शे में लगभग पूरा वेस्ट बैंक इज़राइल के हिस्से में शामिल कर लिया गया है। फिलिस्तीनियों के लिए केवल कुछ  छोटे-छोटे इलाके छोड़े गए हैं, जिन्हें चारों ओर से इज़राइल के कब्ज़े वाले क्षेत्रों ने घेर रखा है। इसका मतलब यह होगा कि फिलिस्तीनी इलाकों का आपस में कोई सीधा संबंध नहीं रहेगा और वे अलग-थलग पड़ जाएंगे।    वैश्विक प्रतिक्रिया   यह फैसला फिलिस्तीनियों के लिए बेहद मुश्किल हालात पैदा कर सकता है। इससे उनकी जमीन, संसाधन और आवाजाही पर सीधा नियंत्रण इज़राइल का हो जाएगा। इस कदम को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ संघर्ष को और भड़काने वाला  मान रहे हैं।संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय देश पहले ही साफ कर चुके हैं कि वेस्ट बैंक पर इज़राइल का कब्ज़ा अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। अब इज़राइल की इस नई योजना पर  दुनियाभर से कड़ी प्रतिक्रिया  आने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम न केवल शांति प्रक्रिया को खत्म करेगा, बल्कि पूरे मध्यपूर्व को नए संकट की ओर धकेल सकता है। 

रूस ने यूक्रेन ड्रोन हमलों का किया सामना, अब मोबाइल ऐप्स ऑफलाइन भी करेंगे काम

मास्को रूस और यूक्रेन को जंग में उलझे कई साल हो गए हैं। तमाम कोशिशाें के बावजूद शांत‍ि नहीं हो पाई है। दोनों देश एक-दूसरे पर हमला करते रहते हैं। यूक्रेन के ड्रोन हमलों के दौरान रूस को उसके तमाम इलाकों में ब्लैकआउट करना पड़ता है, जिसकी वजह से इंटरनेट कनेक्ट‍िविटी प्रभावित होती है और लोग सोशल मीडिया समेत तमाम जरूरी ऐप्स को एक्सेस नहीं कर पाते। इसका तोड़ अब रूस की तरफ से न‍िकाला गया है। उसने ऐसा डिजिटल तरीका तैयार क‍िया है, जिससे लोकल ऐप्स बिना इंटरनेट भी काम करते हैं। रूस की तरफ से इन ऐप्स की लिस्ट जारी करके लोगों को अवेयर क‍िया गया है। जरूरी सेवाओं से जुड़े हैं ऐप रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, हाल में रूसी सरकार ने ऐसे ऐप्स की लिस्ट जारी की है जो बिना इंटरनेट काम करेंगे। ये ऐप्स सोशल मीडिया से संबंधित है। ओला-उबर जैसी सेवाओं से जुड़े हैं। इसके अलावा सरकारी सेवाओं से जुड़े ऐप्स, पेमेंट ऐप्स भी लिस्ट में हैं, जो बिना इंटरनेट काम करेंगे। खास बात है कि रूसी लिस्ट में अमेरिकी ऐप्स जैसे- वॉट्सऐप आदि को जगह नहीं दी गई है। टेलिग्राम भी लिस्ट में शामिल नहीं है। इंटरनेट बंद होने पर नहीं होगी परेशानी रिपोर्ट के अनुसार, रूस की डिजिटल डेवलपमेंट मिनिस्ट्री ने कहा है कि उसके पास एक ऐसा डिजिटल तरीका (special technical solution) है, जिससे लोकल ऐप बिना इंटरनेट के भी काम करेंगे। मिनिस्ट्री के अनुसार, इंटरनेट बंद रहने के दौरान लोगों को परेशानी होती है, उसे कम करने के लिए यह उपाय क‍िया गया है। हालांकि रूस की तरफ से इस मामलों को यूक्रेन के ड्रोन हमलों से नहीं जोड़ा गया है। हालांकि रिपोर्ट में रूस के बॉर्डर एरिया वाले कुछ गवर्नरों के हवाले से बताया गया है कि यूक्रेनी हमलों के दौरान ही ज्यादातर बार इंटरनेट बंद क‍िया जा रहा है। लोकल ऐप्स को बढ़ावा देना चाहता है रूस रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस अपने देश में ऐसे ऐप्स को बढ़ावा देने में जुटा है जो स्थानीय स्तर पर डेवलप क‍िए गए हैं। उसने कई बाहरी ऐप्स पर बंद‍िशें भी लगाई हैं। खास बात यह है कि रूस में वॉट्सऐप और टेलिग्राम पॉपुलर ऐप्स में शामिल हैं। दोनों ऐप्स को 18 करोड़ से ज्यादा लोग इस्तेमाल करते हैं। लेकिन रूस ने दोनों ऐप्स की बजाए वीके मैसेंजर और मैक्स मैसेंजर जैसे ऐप्स को प्राथमिकता दी है। 1 सितंबर से रूस में बिकने वाले सभी स्मार्टफोन्स में मैक्स मैसेंजर का पहले से इंस्टॉल होना जरूरी है। इसके यूजर्स भी तेजी से बढ़ रहे हैं।  

ऐसी सड़कें जो खुद बताएंगी खराब होने से पहले, भारत में आने वाली है नई AI तकनीक

नई दिल्ली भारत में बरसात के मौसम में सड़कों में गड्ढे होने या इनके टूटने की खबरें आती हैं। लेकिन क्या हो अगर सड़कों के टूटने या इनमें गड्ढे होने से पहले ही अलर्ट मिल जाए। इससे ना सिर्फ लोग दूसरा रूट ले सकते हैं, बल्कि लोगों की लाइफ पर भी रिस्क नहीं होगा। सुनने में भले ये नामुमकिन-सा लगे, लेकिन ऐसी तकनीक पर तेजी से काम चल रहा है, जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI भारत की 63 लाख किलोमीटर लंबी सड़कों को बनाने, देखभाल करने और इनको मैनेज करने के काम को पूरी तरह से बदल देगी। चलिए, जान लेते हैं कि यह AI तकनीक कैसे काम करेगी और आमजन को इससे क्या फायदा होगा? वर्चुअल मॉडल में पता लग जाएगी कमजोरी ईटी इंफ्रा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल ट्विन्स नाम की एक तकनीक है जिससे इंजीनियर पूरी सड़क का वर्चुअल मॉडल बना सकते हैं। यह मॉडल ट्रैफिक और सड़क की कमजोरी का पहले से एनालिसिस कर लेता है।सॉफ्टवेयर सड़क की खराबी को पहले ही पकड़ लेंगे। इतना ही नहीं, बल्कि उसे ठीक करने के तरीके भी सुझाएंगे। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने अपने प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम में पहले ही AI का इस्तेमाल शुरू कर दिया है, जिससे सड़क निर्माण की क्वालिटी की जांच होती है। तकनीक का इस्तेमाल यहां हो रहा है भारत के शहरी क्षेत्र में AI पहले से ही काम पर लगा हुआ है। पुणे में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम और बेंगलुरु का ऐडेप्टिव ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम इसका उदाहरण हैं। ये सिस्टम ट्रैफिक को समझकर सिग्नल को अपने आप कंट्रोल करते हैं, जिससे जाम की समस्या से मुक्ति मिल सकती है। यही नहीं, रोड प्रोजेक्ट्स में ड्रोन और GPS का इस्तेमाल भी हो रहा है। सड़क मंत्रालय ने AI-MC नाम का एक सिस्टम शुरू किया है, जो ड्रोन और सेंसर की मदद से सड़क निर्माण को बेहतर बनाता है। बिहार में AI का इस्तेमाल कर 12000 से ज्यादा पुलों और 743 ब्रिजों की जांच की गई है। यह तकनीक खराब ढांचे को ढूंढकर उसकी मरम्मत का सुझाव देती है। ग्रामीण इलाकों में AI आया तो सुधर जाएंगी सड़कें केपीएमजी की एक रिपोर्ट बताती है कि AI से सड़कों की देखभाल करने से खर्च 30% तक कम हो सकता है और सड़कों की लाइफ भी बढ़ सकती है। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में अभी भी 70% सड़कों की जांच पुराने तरीकों से होती है, जैसे कि कागजी रिकॉर्ड और Manual Inspection से। यदि ग्रामीण इलाकों में भी AI का इस्तेमाल बढ़े, तो सड़कों की हालत पहले के मुकाबले काफी सुधर सकती है। AI से सड़क हादसों की संख्या घट सकती है रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत में हर साल सड़क हादसों में 1.5 लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गंवाते हैं। AI इस समस्या को कम करने में मदद कर सकता है। इंटेलिजेंट सिस्टम से इमरजेंसी रिस्पांस टाइम 60% तक कम हो सकता है और Traffic Efficiency 30% तक बढ़ सकती है। AI कार्बन उत्सर्जन को मापने, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए कॉरिडोर बनाने और टिकाऊ डिजाइन में भी मदद करता है।  

हाईस्पीड इंटरनेट में बड़ा कदम: भारत ने 6G पर शुरू की तैयारी

नई दिल्ली 5G के बाद अब भारत 6G के लिए तैयार है। पिछले काफी समय से देश में 6G टेक्नोलॉजी पर काम चल रहा है। अब इसे बढ़ावा देने के लिए एक अहम कदम लिया गया है। बता दें कि हाल ही में Telecommunications Standards Development Society, India ( TSDSI ) और भारत 6G एलायंस ने 6G कनेक्टिविटी के डेवलपमेंट को आगे बढ़ाने के लिए हाथ मिलाया है। दोनों संगठन के बीच समझौता हुआ है। 6G विजन को कामयाब बनाने के लक्ष्य से यह पार्टनरशिप की गई है। ये दोनों मिलकर अब 6G के लिए स्टैंडर्ड डेवलप करेंगी। ये संगठन ग्लोबल लेवल पर जानकारियों का आदान-प्रदान करेंगे। यह पार्टरनशिप भारत को 2030 तक 6G टेक्नोलॉजी में ग्लोबल लेवल पर टॉप पर पहुंचाने में अहम रोल मिभाएगी। आइये, डिटेल में जानते हैं। दोनों संगठन मिलकर करेंगे ये काम भारत में 6G को सपने को साकार बनाने के लिए अब TSDSI और भारत 6G एलायंस मिलकर काम करेंगे। इससे 6G टेक्नोलॉजी के डेवलपमेंट में तेजी आएगी। दोनों संगठन मिलकर एक दूसरे का हाथ बताएंगे। इससे देश की प्राथमिकताएं 6G और भविष्य की टेक्नोलॉजी के क्षेत्र की तरफ जाएगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि TSDSI के डायरेक्टर-जनरल, ए.के. मित्तल का कहना है कि TSDSI को B6GA के साथ साझेदारी करके खुशी हो रही है। TSDSI और B6GA की एक्टिविटीज में आपसी तालमेल और सामंजस्य स्थापित करने के लिए उत्सुक है। इससे रिसर्च और डेवलपमेंट के परिणामों पर कई गुना प्रभाव पड़ेगा। साथ ही, ग्लोबल स्टैंडर्ड के डेवलपमेंट में भी योगदान मिलेगा। इसका मतलब है कि TSDSI और B6GA मिलकर काम करके 6G तकनीक को बेहतर बनाने में मदद करेंगे। भारत 6G एलायंस के डायरेक्टर-जनरल, राजेश कुमार पाठक का कहना है कि यह साझेदारी ग्लोबल स्टैंडर्ड के डेवलपमेंट की प्रोसेस में भारत की भागीदारी को मजबूत करेगी। इसका मतलब है कि इस साझेदारी से 6G विजन को आगे बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी। 2023 में देखा गया था 6G विजन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च, 2023 में भारत 6G विजन डॉक्यूमेंट जारी किया था। इसका उद्देश्य 6G नेटवर्क को डिजाइन, विकसित और तैनात करना है। भारत का लक्ष्य 2030 तक 6G तकनीक में ग्लोबल लेवल पर उभरकर आना है। इसमें देश का साथ देने के लिए भारत 6G एलायंस आगे आ गया है। यह घरेलू उद्योग, शिक्षा, राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों और मानक संगठनों का एक गठबंधन है। यह भारत 6G विजन को ध्यान में रखते हुए एक योजना बनाएगा। इस समझौता से भारत को 6G तकनीक के क्षेत्र में बड़ा खिलाड़ी बनने में काफी मदद मिलेगी। इससे 6G के डेवलपमेंट में भी तेजी आएगी। साथ ही, लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।  

गुजरात में आज भारी बारिश का अलर्ट, मछुआरों को समुद्र में जाने से किया गया मना

अहमदाबाद, गुजरात में अगले सात दिनों तक मानसून की तेज सक्रियता का नया दौर देखने को मिल सकता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने राज्य में भारी से बहुत भारी बारिश के लिए अलर्ट जारी किए हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने गुजरात में अगले सात दिनों तक लगातार बारिश की संभावना जताई है। विभाग ने बताया कि अगले 48 घंटों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। मौसम वैज्ञानिकों ने शनिवार को पूरे गुजरात में वर्षा का अनुमान जताया है। मौसम को देखते हुए कई जिलों के लिए अलर्ट जारी किए गए हैं। आईएमडी ने शनिवार को बताया कि गुजरात में आज और कल अत्यधिक भारी बारिश की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों ने शनिवार को 30 सेमी या इससे अधिक बारिश की संभावना जताई है। बनासकांठा, साबरकांठा, मेहसाणा, अरावली, सुरेंद्रनगर, राजकोट, वलसाड, दमन और दादरा नगर हवेली में रेड अलर्ट घोषित किया गया है। वहीं द्वारका, जामनगर, पोरबंदर, जूनागढ़, बोटाद, अहमदाबाद, गांधीनगर, खेड़ा, महिसागर, पाटन, नवसारी और डांग में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। अन्य जिलों को येलो अलर्ट पर रखा गया है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। इससे पहले, मौसम विभाग ने बताया था कि शनिवार को भी बारिश का दौर जारी रहेगा। भरूच, सूरत, नवसारी, वलसाड, दमन, दादरा और नगर हवेली, भावनगर और बोटाद के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। उत्तर, मध्य और सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्रों के कई अन्य जिलों में येलो अलर्ट के तहत भारी बारिश होगी। वहीं, रविवार को लेकर विभाग ने बताया कि बनासकांठा, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, नर्मदा, भरूच, नवसारी, वलसाड, तापी, डांग और सौराष्ट्र-कच्छ के कुछ हिस्सों जैसे राजकोट, जामनगर, जूनागढ़, भावनगर, कच्छ और द्वारका सहित लगभग पूरे राज्य में व्यापक बारिश होने की संभावना है। आईएमडी ने बताया कि मानसून की कम दबाव रेखा वर्तमान में गंगानगर से उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी तक बनी हुई है। बंगाल की खाड़ी और उससे सटे म्यांमार तट पर एक ऊपरी हवा की चक्रवाती गतिविधि बनी हुई है।  

CIBIL Score एक क्लिक में, Paytm-PhonePe-Google Pay से तुरंत जानें

  नई दिल्ली लोन लेने से पहले आपको यह जान लेना चाहिए कि आपका सिबिल स्कोर कैसे है। कई ऐसे ऐप्स हैं, जो सिबिल स्कोर देखने की सुविधा देते हैं। हालांकि, आज के समय में कोई भी अपने स्मार्टफोन में ज्यादा ऐप डाउनलोड नहीं करना चाहता है। इससे स्टोरेज फुल होने जैसी समस्या आने लगती है। क्या आप जानते हैं कि आपके फोन में ऐसी कई ऐप्स पहले से ही मौजूद हैं, जो सिबिल स्कोर बताते हैं। जी हां, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करने वाले ऐप जैसे Phone Pe, Google Pay और Paytm से भी आप सिबिल स्कोर देख सकते हैं। आज हम इस आर्टिकल में आपको इन तीनों ऐप्स से सिबिल स्कोर जानने का तरीका बताने वाले हैं। आइये, जानते हैं। क्या होता है सिबिल स्कोर? सबसे पहले तो आपके लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि सिबिल स्कोर क्या होता है। सिबिल स्कोर कुछ और नहीं बल्कि आपके क्रेडिट का लेखा-जोखा है। यानी सिबिल स्कोर क्रेडिट हिस्ट्री के आधार पर होता है। क्रेडिट हिस्ट्री इस पर निर्भर करती है कि आपने अभी तक लिए गए लोन को समय पर चुकाया है या नहीं। उसका ब्याज समय पर दिया है या नहीं। सिबिल स्कोर कई चीजों पर आधारित होता है। इसमें पेमेंट हिस्ट्री का वेटेज 30% होता है। क्रेडिट एक्सपोजर का वेटेज 25% और क्रेडिट का प्रकार और अवधि का वेटेज 25% होगा। इसके अलावा, 20 प्रतिशत और भी कई चीजों पर निर्भर करता है। बता दें कि सिबिल स्कोर की रेंज 300-900 के बीच होती है। सिबिल स्कोर को बुरा, अच्छा और एक्सीलेंट के आधार पर मापा जाता है। आपका स्कोर जितना अच्छा होगा, आपको उसके आधार पर रेटिंग मिलेगी। बैंक उसके आधार पर आपको लोन देंगे। Paytm के लिए अपनाएं यह तरीका     PhonePe की तरह ही Paytm से भी सिबिल स्कोर देख सकते हैं। इसके लिए आपको ऐप ओपन करना होगा।     होम पेज पर आपको फ्री टूल्स का सेक्शन मिलेगा। इसमें Check your latest credit score के ऑप्शन पर क्लिक करें।     फिर अपना नाम डालें और स्कोर चेक कर लें। Google Pay पर मिलता है ऑप्शन     अपने फोन में गूगल पे ऐप ओपन करने के बाद स्क्रॉल डाउन करने सबसे नीचे आना होगा।     इसके बाद आपको Check your cibil score for free का ऑप्शन दिखेगा। इस पर क्लिक कर दें।     अब Check Score पर क्लिक करके अपना सिबिल स्कोर देख लें। PhonePe से ऐसे करें चेक     PhonePe से सिबिल स्कोर जांचने के लिए सबसे पहले ऐप ओपन करें।     उसके बाद आपको होम पेज पर Loans का ऑप्शन दिखेगा। यह ऑप्शन Recharge & Bills के नीचे होगा। इसके बाद आपको check Credit Score के ऑप्शन पर क्लिक करना है।     यह आपसे कुछ डिटेल जोड़ने के लिए परमिशन मांगेगा। इसके बाद आपको आपको आपका सिबिल स्कोर दिखा देगा।  

बैरबी-सायरंग रेल परियोजना से म्यांमार बॉर्डर तक बढ़ेगा रेल मार्ग, आइजोल जुड़ा राष्ट्रीय नेटवर्क से, PM करेंगे उद्घाटन

मिजोरम   मिजोरम के एयरपोर्ट से पहली बार रेलवे स्टेशनों की कनेक्टिविटी होने जा रही है. इससे यात्रियों को काफी सहूलियत मिलेगी. ट्रेन 48 सुरंगों और 150 से ज्यादा पुलों से होकर गुजरेगी. इससे यात्री रोमांचक सफर का आनंद ले सकेंगे. देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचने वाले पर्यटकों के पास मिजोरम घूमने के बाद असम जाने के लिए सीमित विकल्प थे. अब 13 सितंबर से पर्यटकों को कई तरह की सहूलियत मिलनी शुरू हो जाएगी.मिजोरम की राजधानी आइजोल पहली बार भारतीय रेलवे के नेटवर्क से जुड़ गई है। अब यह रेल लाइन आगे बढ़कर म्यांमार बॉर्डर तक जाएगी। जिसका सर्वे किया जा रहा है।  अभी तक जो पर्यटक मिजोरम घूमने के लिए आते हैं, वे राजधानी के आइजोल के लेंगपुई एयरपोर्ट पर उतरते हैं. मिजोरम घूमने के बाद अगर यहीं से वे असम घूमने जाना चाहें तो उनके पास केवल 2 ही विकल्प होते थे. या तो वे सड़क मार्ग से सीधे असम के सिलचर तक पहुंच सकते हैं या फिर मिजोरम के एक मात्र रेलवे स्टेशन बइरबी तक सड़क मार्ग से जाकर वहां से फिर ट्रेन पकड़कर असम में कदम रख सकते हैं. अब 13 सितंबर के बाद पर्यटकों की इन समस्याओं का समाधान होने जा रहा है. 13 सितंबर को पीएम करेंगे उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 सितंबर को इस परियोजना का उद्घाटन करेंगे और पहली ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। खासबात है कि लगभग 8071 करोड़ रुपए की लागत से तैयार यह रेल लाइन न केवल कनेक्टिविटी बढ़ाएगी बल्कि मिजोरम के आर्थिक और पर्यटन विकास को भी नई दिशा देगी। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह लाइन राज्य के लिए लाइफलाइन साबित होगी। खास बात यह है कि इस रेल लाइन के शुरू होने से आइजोल से सिलचर तक का सफर सड़क मार्ग से 7 घंटे के बजाय ट्रेन से सिर्फ 3 घंटे में तय होगा। दावा किया जा रहा है कि, यह रेल लाइन न केवल कनेक्टिविटी बढ़ाएगी बल्कि मिजोरम के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल देगी। कुतुबमीनार से भी ऊंचा ब्रिज इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना इस बैराबी-सैरांग रेल लाइन को देश की सबसे कठिन परियोजनाओं में गिना जा रहा है। इस ट्रैक पर 48 सुरंगें बनाई गई हैं, जिनकी कुल लंबाई 12.8 किलोमीटर है। इसके अलावा बड़े और छोटे 142 ब्रिज तैयार किए गए हैं। इनमें से सबसे ऊंचा ब्रिज 104 मीटर का है, जो कुतुबमीनार से भी ऊंचा है और भारतीय रेलवे का दूसरा सबसे ऊंचा ब्रिज माना जा रहा है। इस लाइन पर पांच रोड ओवरब्रिज और छह अंडरपास भी बनाए गए हैं। पूरी परियोजना को आधुनिक तकनीक से डिजाइन किया गया है, जिससे ट्रेन 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकेगी। खुलेगा आर्थिक विकास का नया रास्ता, मिलेगी मजबूती रेलवे से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यह रेल लाइन मिजोरम के आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाएगी। इसकी वजह से राज्य की जीडीपी में हर साल 2-3 फीसदी की बढ़ोतरी संभव है। वर्तमान में 25 हजार करोड़ की अर्थव्यवस्था वाले इस राज्य को इस परियोजना से करीब 500 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सालाना आमदनी होगी। बताया जा रहा है कि इस नई लाइन से कोलकाता, अगरतला और दिल्ली तक सीधी ट्रेनों का रास्ता खुल जाएगा, जिससे व्यापार, पर्यटन और रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे। 26 साल में पूरा हुआ सपना, चुनौतियां -रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना का काम 1999 में शुरू हुआ था। लेकिन मिजोरम की दुर्गम भौगोलिक स्थिति, घने जंगलों और भारी बारिश के कारण निर्माण बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। कई बार सर्वे रिपोर्ट बदली गई। इस पर सालभर में केवल 4-5 महीने ही काम हो पाता था। भारी मशीनों को छोटे हिस्सों में बांटकर पहाड़ियों तक पहुंचाना पड़ा और निर्माण सामग्री असम व पश्चिम बंगाल से लाई गई। वर्ष 2008-09 में इसे नेशनल प्रोजेक्ट का दर्जा मिला और वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री मोदी ने इसका शिलान्यास किया। इसके बाद तेजी आई और अब यह परियोजना पूरी हो गई है। परियोजना की खासबात-लागत: 8071 करोड़ रुपए -लंबाई: 51.38 किमी -गति: 100 किमी/घंटा -सुरंगें: 48 (12.8 किमी) -ब्रिज: 142 (55 बड़े, 87 छोटे) -सबसे ऊंचा ब्रिज: 104 मीटर -स्टेशन: हार्तुकी, कौनपुई, मुलखांग, सैरांग 51 किलोमीटर की नई रेल लाइन पर बने 4 स्टेशन : पर्यटकों को असम जाने के लिए सड़क मार्ग के अलावा एयरपोर्ट से कुछ ही दूरी पर बनाए गए रेलवे स्टेशन से ट्रेन मिलनी शुरू हो जाएगी. आइजोल के लेंगपुई एयरपोर्ट से पहले रेलवे स्टेशन की दूरी सिर्फ 25 किलोमीटर होगी, जो कुछ ही देर में आसानी से तय की जा सकती है. एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन का रूट भी एक ही है. इससे पर्यटकों को ट्रेन पकड़ने के लिए इधर उधर भटकने की आवश्यकता भी नहीं होगी. 51 किलोमीटर की नई रेल लाइन पर 4 नए रेलवे स्टेशन बनाए गए हैं. ईटीवी भारत ने इन चारों रेलवे स्टेशनों का विस्टाडोम कोच से दौरा किया. जानने का प्रयास किया कि इस रूट पर बने चारों स्टेशनों की वर्तमान स्थिति क्या है… विस्टाडोम कोच से दिखे मनमोहक नजारे : राजधानी आइजोल से तकरीबन 28 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है पहला रेलवे स्टेशन. इसका नाम सायरंग रेलवे स्टेशन है. आइजोल से ईटीवी रिपोर्टर सड़क मार्ग से होते हुए पहले सायरंग रेलवे स्टेशन पहुंचे. यहां से 196 नंबर के कुतुबमीनार से भी 42 मीटर ऊंचे ब्रिज के पास से विस्टाडोम कोच से बइरबी रेलवे स्टेशन तक की 51.38 किलोमीटर की दूरी तय की. इस रूट पर अद्भुत नजारे विस्टाडोम से देखने को मिले. ट्रैक की ऊंचाई इतनी है कि रास्ते भर पर्वत, पहाड़ और बादल आपस में गले मिलते हुए नजर आते हैं. हर पहाड़ पर बांस, केले और सुपारी के हरे भरे पेड़ आंखों को खूब सुहाते हैं. नया ट्रैक और रेलवे स्टेशन बनाने में इंजीनियरों की कारीगरी को सैल्यूट करते बनता है. मुआलखांग स्टेशन के पास बन रहे 2 हेलीपैड, आएंगे पीएम मोदी : पहाड़ों को काटकर ट्रैक तैयार किया गया है. जहां ये संभव नहीं था वहां पर सुरंगें बनाकर ट्रेन के लिए मार्ग तैयार किया गया है. सायरंग रेलवे स्टेशन अभी बनाकर तैयार हो रहा है. यहां पर तेजी से काम चल रहा है. यहां से चलने पर पहला रेलवे स्टेशन आता है मुआलखांग रेलवे स्टेशन. ये स्टेशन बनकर तैयार … Read more

क्या असीम मुनीर के परिवार को मिली अमेरिका की नागरिकता? पढ़ें पूरा मामला

न्यूयॉर्क पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों और नेताओं का लगाव अपने ही मुल्क से कम और विदेशों से ज्यादा दिखाई देता है. रिटायरमेंट के बाद ये अक्सर दूसरे देशों में जाकर बस जाते हैं. इनके बच्चे भी ज्यादातर बाहर ही पढ़ते हैं. अब सोशल मीडिया पर एक ऐसा दावा सामने आया है जिसने सबको चौंका दिया है. चर्चा यह है कि पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की पत्नी सईदा इरम ने जून के पहले हफ्ते में अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन किया था. कहा जा रहा है कि 22 अगस्त को सईदा इरम और उनके तीनों बच्चों को अमेरिकी पासपोर्ट मिल गया. यह दावा मेजर जनरल राजू चौहान से जुड़े एक एक्स अकाउंट पर किया गया. अकाउंट पर उन्होंने लिखा- ‘मैं काफी समय से कह रहा हूं कि अपने सभी पूर्ववर्तियों की तरह, वह (मुनीर) भी पाकिस्तान में सब कुछ बेचकर भाग जाएंगा.’ हालांकि न्यूज18 इंडिया इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है. याद दिला दें कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी यह रिपोर्ट सामने आई थी कि मुनीर ने अपनी पत्नी और बच्चों को विदेश भेज दिया था. वैसे, पाकिस्तान में नेताओं, अफसरों और सैन्य अधिकारियों द्वारा पश्चिमी देशों की नागरिकता लेना कोई नई बात नहीं है. दोहरी नागरिकता का खेल पाकिस्तान में दोहरी नागरिकता कानूनी तौर पर मान्य है लेकिन इसकी इजाजत सिर्फ 22 देशों तक सीमित है. इसमें अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और यूरोप के 14 देश शामिल हैं. संविधान मूल रूप से इसकी इजाजत नहीं देता था, लेकिन 1972 में संशोधन के बाद यह रास्ता खुला. दिलचस्प यह है कि दोहरी नागरिकता वाले लोगों को सरकारी नौकरी की अनुमति नहीं है, लेकिन पाकिस्तान में यह नियम अक्सर मजाक बनकर रह जाता है. पेंडोरा पेपर्स ने खोली थी पोल साल 2021 में लीक हुए पेंडोरा पेपर्स ने खुलासा किया था कि पाकिस्तानी सेना के कई वरिष्ठ अफसर और इमरान खान सरकार के मंत्री विदेशों में अरबों की संपत्ति के मालिक हैं. इसी साल जनवरी में आई एक रिपोर्ट में बताया गया कि 22,000 से ज्यादा पाकिस्तानी नौकरशाह दोहरी नागरिकता रखते हैं. कानून के मुताबिक सेना के अफसर दोहरी नागरिकता नहीं ले सकते और सेवा में रहते हुए किसी विदेशी नागरिक से शादी भी नहीं कर सकते. लेकिन असलियत कुछ और ही है. यही वजह है कि 2018 में पाक सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर सरकार को नोटिस भी भेजा था. दिल तो परदेसी है     पाक सेना के पूर्व जनरल रहील शरीफ रिटायर होते ही सऊदी अरब चले गए. पूर्व ISI प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल शुजा पाशा ने रिटायरमेंट के बाद UAE की एक मल्टीनेशनल कंपनी जॉइन कर ली. दोनों मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से जवाब तक मांगा था. कई छोटे रैंक के अफसर भी विदेश जाकर बस जाते हैं.     राजनीति की बात करें तो पूर्व पीएम नवाज शरीफ के बेटे हसन और हुसैन ब्रिटिश नागरिक हैं. खुद नवाज और उनकी बेटी मरियम नवाज के पास ब्रिटेन का ILR (Indefinite Leave to Remain) है, जो स्थायी निवास की तरह है. भुट्टो परिवार की बात करें तो बिलावल भुट्टो के पास दोहरी नागरिकता नहीं है, लेकिन उनकी मां बेनजीर भुट्टो और पिता आसिफ अली जरदारी ने पढ़ाई विदेश में की.     पाकिस्तान के पूर्व सैन्य तानाशाह परवेज मुशर्रफ की नागरिकता रद्द कर दी गई थी, लेकिन वे 2023 में अपनी मौत तक दुबई में ही रहे. वहीं इमरान खान की कैबिनेट में कई मंत्री अमेरिका, यूके और कनाडा की नागरिकता रखते थे. सांसद हारून अख्तर और सादिया अब्बासी को तो विदेशी पासपोर्ट की वजह से अपनी सदस्यता तक गंवानी पड़ी थी.  

2040 तक भारत की युद्ध शक्ति में जबरदस्त इजाफा, दुश्मन देशों में खलबली

नई दिल्ली दुनिया इस समय खतरनाक दौर से गुजर रही है. रूस-यूक्रेन युद्ध जारी है, गाजा में इजरायल और हमास के बीच खूनखराबा थमने का नाम नहीं ले रहा और कुछ ही महीने पहले भारत-पाकिस्तान भी पहलगाम आतंकी हमले और उसके जवाब में ऑपरेशन सिंदूर के बाद जंग के मुहाने पर आ गए थे. ऐसे हालात में भारत के पास दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं जैसी क्षमता होना सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि मजबूरी भी है. इसी को ध्यान में रखते हुए रक्षा मंत्रालय ने आने वाले 15 सालों के लिए अपनी ‘टेक्नोलॉजी विजन एंड कैपेबिलिटी रोडमैप’ पेश की है. यह रोडमैप साफ बताता है कि 2040 तक भारत की थल सेना, नौसेना और वायुसेना कैसी दिखेगी और किन हथियारों से लैस होगी. यही नहीं सेना 50,000 टैंक-माउंटेड एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें, 700 से ज्यादा रोबोटिक IED-रोधी सिस्टम और 6 लाख तोप के गोले खरीदने जा रही है. ड्रोन और अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स (UAS) भी बड़ी संख्या में शामिल होंगे, जिससे जमीनी ऑपरेशन और भी तेज और सटीक बन सकेंगे. नौसेना को न्यूक्लियर वॉरशिप और नया एयरक्राफ्ट कैरियर भारतीय नौसेना (Navy) आने वाले 15 सालों में एक और एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात करेगी. 2022 में INS विक्रांत के शामिल होने के बाद यह दूसरी बड़ी छलांग होगी. नौसेना 10 नेक्स्ट-जनरेशन फ्रिगेट, 7 एडवांस्ड कॉर्वेट्स और 4 लैंडिंग डॉक्स खरीदेगी. सबसे अहम बात न्यूक्लियर पावर से चलने वाले वॉरशिप को मंजूरी मिल गई है. यानी आने वाले वक्त में भारत के जहाज न सिर्फ ताकतवर होंगे, बल्कि लंबे वक्त तक समुद्र में तैनात रह पाएंगे. नौसेना को 100 नए फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट और 150 टॉरपीडो भी मिलेंगे, जिनकी मारक क्षमता 25 किमी से ज्यादा होगी. आसमान में अब होंगे स्टेल्थ ड्रोन और हाई-एल्टीट्यूड सैटेलाइट वायुसेना (Air Force) की ताकत अगले 15 सालों में और भी विस्फोटक होने वाली है. योजना के तहत 75 हाई-एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट, 150 स्टेल्थ बॉम्बर ड्रोन और सैकड़ों प्रिसिजन-गाइडेड हथियार शामिल किए जाएंगे. साथ ही 100 से ज्यादा रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट तैनात होंगे. इससे भारत की स्काई-डिफेंस मल्टी-लेयर हो जाएगी… जमीन से हवा और हवा से हवा तक हर मोर्चे पर दुश्मन को कड़ी टक्कर मिलेगी. लेजर और डायरेक्टेड एनर्जी वेपन- भविष्य के युद्ध का असली हथियार रक्षा मंत्रालय की योजना में सबसे खास बात है… लेजर वेपन और डायरेक्टेड एनर्जी सिस्टम. ये ऐसे हथियार हैं जो पारंपरिक गोलियों या मिसाइलों की बजाय ऊर्जा किरणों से दुश्मन को ध्वस्त करते हैं. चीन पहले ही इन्हें अपनी परेड में दिखा चुका है, और अब भारत भी इन्हें तेजी से विकसित करेगा. इसके अलावा सेना को 500 हाइपरसोनिक मिसाइलें भी मिलेंगी, जिनकी स्पीड इतनी तेज होगी कि दुश्मन का कोई भी डिफेंस सिस्टम उन्हें रोक नहीं पाएगा. साथ ही भारत दुश्मन के हाइपरसोनिक हथियारों को पहचानने और नष्ट करने की तकनीक भी खरीदेगा. साइबर डिफेंस और स्पेस सिक्योरिटी नई योजना में साइबर डिफेंस और सैटेलाइट सिक्योरिटी को भी प्राथमिकता दी गई है. आने वाले समय में सैटेलाइट कम्युनिकेशन को ‘साइबर-हार्डनिंग’ से लैस किया जाएगा और स्पेस-बेस्ड लेजर रेंज फाइंडर लगाए जाएंगे. यानी दुश्मन अगर सैटेलाइट्स को निशाना बनाने की कोशिश करेगा तो भारत के पास उसका तोड़ पहले से होगा. ऑपरेशन सिंदूर के बाद आई चेतावनी यह विजन डॉक्यूमेंट ऐसे समय आया है जब कुछ ही महीने पहले अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था. इसमें 26 नागरिकों की जान गई थी और भारत ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर सटीक वार किए थे. जवाब में पाकिस्तान ने हजारों ड्रोन और रॉकेट भारत की ओर दागे, लेकिन ज्यादातर भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिए. यानी भविष्य की जंग अब सिर्फ जमीन पर नहीं, बल्कि हवा, समुद्र, साइबर और स्पेस में भी लड़ी जाएगी. क्यों अहम है यह रोडमैप? रक्षा मंत्रालय का साफ कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और नई टेक्नोलॉजी के बिना आने वाले वक्त में कोई भी युद्ध नहीं जीता जा सकता. यही वजह है कि यह 15 साल की योजना सिर्फ हथियारों की लिस्ट नहीं है, बल्कि भारतीय प्राइवेट इंडस्ट्री और R&D सेक्टर को भी संकेत है कि उन्हें किस दिशा में काम करना होगा. मंत्रालय के मुताबिक, यह रोडमैप देश की निजी कंपनियों और उद्योग जगत को इस काबिल बनाएगा कि वे भविष्य के युद्ध के लिए जरूरी हथियार और तकनीक भारत में ही बना सकें. संक्षेप में कहें तो आने वाले 15 सालों में भारत की सेना टैंक से लेकर लेजर वेपन और हाइपरसोनिक मिसाइलों तक से लैस होगी. दुश्मन चाहे जमीन से हमला करे, आसमान से आए, समुद्र से घुसे या साइबर-स्पेस से चोट करे. भारत की तीनों सेनाएं हर मोर्चे पर तैयार खड़ी होंगी.