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भारत की रणनीतिक तैयारी: दौलत बेग ओल्डी तक पहुंचने वाला गुप्त मार्ग लगभग तैयार

दौलत बेग ओल्डी 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हुए तनाव के बाद से भारत अपनी सीमा पर बुनियादी ढांचे को तेजी से मजबूत कर रहा है. खासकर लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी (DBO) जैसे रणनीतिक इलाकों तक पहुंच को और सुरक्षित करने के लिए भारत एक नई 130 किलोमीटर लंबी सड़क बना रहा है. ये सड़क ससोमा–सासेर ला–सासेर ब्रांग्सा–गपशान–डीबीओ के रास्ते से होकर गुजरती है. इसे बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) बना रहा है. ये नई सड़क न सिर्फ तेज और सुरक्षित है, बल्कि ये चीनी सेना की नजरों से भी बची रहेगी. आइए, समझते हैं कि ये सड़क क्यों इतनी खास है?   क्या है दौलत बेग ओल्डी (DBO) और क्यों है ये इतना जरूरी? दौलत बेग ओल्डी (DBO) भारत का सबसे उत्तरी सैन्य ठिकाना है, जो लद्दाख में कराकोरम पास के पास और लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) से सिर्फ 8 किलोमीटर दूर है. ये इलाका सब-सेक्टर नॉर्थ (SSN) का हिस्सा है, जिसमें डेपसांग मैदान और सियाचिन ग्लेशियर जैसे रणनीतिक क्षेत्र आते हैं. DBO में दुनिया का सबसे ऊंचा हवाई पट्टी (एयरस्ट्रिप) है, जो 16614 फीट की ऊंचाई पर है. इसकी मदद से भारतीय सेना को हथियार, रसद और सैनिकों को हवाई रास्ते से पहुंचाने में आसानी होती है.  लेकिन DBO तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता अभी तक दरबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी (DSDBO) सड़क था, जो 255 किलोमीटर लंबी है. ये सड़क LAC के बहुत करीब से गुजरती है, जिसकी वजह से ये चीनी सेना (PLA) की निगरानी में रहती है. गलवान घाटी में 2020 के तनाव का एक बड़ा कारण यही DSDBO सड़क थी, क्योंकि चीन को भारत की इस सड़क से अपनी स्थिति पर खतरा महसूस हुआ. इसीलिए भारत ने एक नई वैकल्पिक सड़क बनाने का फैसला किया, जो न सिर्फ सुरक्षित हो, बल्कि तेज भी हो. नई सड़क: ससोमा से DBO तक का रास्ता ये नई 130 किलोमीटर लंबी सड़क ससोमा से शुरू होती है, जो नुब्रा घाटी में सियाचिन बेस कैंप के पास है. ये सड़क सासेर ला (17,660 फीट), सासेर ब्रांग्सा, गपशान और फिर DBO तक जाती है. इसकी खास बातें हैं…     दूरी और समय में कमी: अभी DBO तक पहुंचने में लेह से 322 KM का रास्ता तय करना पड़ता है, जिसमें लगभग 2 दिन लगते हैं. नई सड़क दूरी को 79 KM कम करके 243 KM कर देगी और यात्रा का समय 11-12 घंटे तक सिमट जाएगा.     चीन की नजरों से बचाव: DSDBO सड़क LAC के बहुत करीब है. चीनी सेना इसे आसानी से देख सकती है. नई सड़क का रास्ता ऐसा है कि ये ज्यादातर हिस्सों में चीनी निगरानी से बचा रहेगा, जिससे सैनिकों और हथियारों की आवाजाही सुरक्षित होगी.     भारी हथियारों की ढुलाई: BRO ने इस सड़क पर 9 पुल बनाए हैं, जिन्हें पहले 40 टन वजन सहने के लिए बनाया गया था. अब इन्हें 70 टन की क्षमता तक अपग्रेड किया जा रहा है. इसका मतलब है कि भारी तोपें, जैसे बोफोर्स और टैंक आसानी से DBO तक पहुंच सकेंगे. बोफोर्स तोपों का इस सड़क पर सफल परीक्षण भी हो चुका है.     सियाचिन से सीधी पहुंच: ये सड़क ससोमा से शुरू होती है, जो सियाचिन बेस कैंप के पास है. इससे सियाचिन से DBO तक सीधे सैनिक और हथियार भेजे जा सकेंगे, बिना लेह जाए. कैसे बन रही है ये सड़क? इस सड़क को बनाना कोई आसान काम नहीं है. 17,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर, जहां ऑक्सीजन की कमी और भारी बर्फबारी आम बात है. BRO के 2000 मजदूर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं. इस प्रोजेक्ट को दो हिस्सों में बांटा गया है…     प्रोजेक्ट विजयक: ससोमा से सासेर ब्रांग्सा तक का हिस्सा, जिसका बजट 300 करोड़ रुपये है. ये हिस्सा पूरी तरह बन चुका है.     प्रोजेक्ट हिमांक: सासेर ब्रांग्सा से DBO तक का हिस्सा, जिसका बजट 200 करोड़ रुपये है. इस हिस्से का 70% काम पूरा हो चुका है. बाकी नवंबर 2026 तक खत्म हो जाएगा. सबसे मुश्किल हिस्सा है सासेर ला पास और श्योक नदी के पास का इलाका. यहां ग्लेशियरों और खड़ी चट्टानों के बीच सड़क बनाना एक बड़ा चैलेंज है. इसके लिए BRO जियोसेल जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है, जो सड़क को मौसम और भारी वजन के लिए मजबूत बनाती हैं. श्योक नदी पर 345 मीटर लंबा एक पुल भी बन रहा है, जिसमें सात खंभों का इस्तेमाल हो रहा है. ऑक्सीजन कैफे और अन्य चुनौतियां इतनी ऊंचाई पर काम करना आसान नहीं. सासेर ला जैसे इलाकों में ऑक्सीजन की कमी से मजदूरों को सांस लेने में दिक्कत होती है. बर्फबारी की वजह से साल में सिर्फ 5-6 महीने ही काम हो सकता है. BRO ने मजदूरों की सुरक्षा और काम की रफ्तार बढ़ाने के लिए ऑक्सीजन कैफे बनाए हैं. ये छोटे-छोटे स्टेशन हैं, जहां मजदूरों को ऑक्सीजन दी जाती है ताकि वो एल्टीट्यूड सिकनेस से बच सकें. इसके अलावा, सासेर ला में एक 8 किलोमीटर लंबा टनल बनाने की योजना भी है. इसका डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार हो चुका है. इस साल काम शुरू हो सकता है. ये टनल 2028 तक बनकर तैयार हो सकता है, जिससे सर्दियों में भी DBO तक पहुंच आसान हो जाएगी. क्यों जरूरी है ये सड़क? 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें दोनों तरफ के सैनिक मारे गए थे. इस तनाव का एक बड़ा कारण था DSDBO सड़क, जो LAC के इतने करीब है कि चीनी सेना इसे आसानी से निशाना बना सकती है. गलवान घाटी और डेपसांग जैसे इलाकों में चीन की PLA ने सड़कें और ठिकाने बनाए हैं, जो भारत के लिए खतरा हैं. नई सड़क के बनने से कई फायदे होंगे…     सुरक्षा: ये सड़क चीनी सेना की नजरों से दूर है, जिससे सैनिकों और हथियारों की आवाजाही गुप्त रहेगी.     तेजी: लेह से DBO तक का समय आधा हो जाएगा, जिससे सैनिक और रसद तेजी से पहुंच सकेंगे.     भारी हथियार: 70 टन की क्षमता वाले पुलों की वजह से टैंक और बोफोर्स जैसे भारी हथियार आसानी से DBO तक पहुंच सकेंगे.     सियाचिन और डेपसांग की सुरक्षा: … Read more

ओबामा की ‘गिरफ्तारी’ का एआई वीडियो वायरल, ट्रंप की पोस्ट से मचा बवाल

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. ट्रंप ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक AI-जनरेटेड वीडियो शेयर किया, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को FBI एजेंट्स द्वारा ओवल ऑफिस में गिरफ्तार करते हुए दिखाया गया है. वीडियो में ओबामा के हाथ को बांधकर उन्हें ट्रंप के कदमों में झुका हुआ दिखाया गया है. AI-जेनरेटेड वीडियो में देखा गया कि ओवल ऑफिस में एक सीट पर राष्ट्रपति ट्रंप बैठे हैं, और दूसरी सीट पर पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा हैं. वीडियो में ट्रंप को मुस्कुराते दिखाया गया है, और इतने में ही कुछ एफबीआई एजेंट्स आते हैं और ओबामा का हाथ पीछे करके बांध देते हैं. उन्हें ट्रंप के कदमों में झुका दिया जाता है, और इसके बाद उन्हें जेल में डाल दिया जाता है. ट्रंप ने इस वीडियो को "कोई भी कानून के ऊपर नहीं है" कैप्शन के साथ शेयर किया है. जेल में ऑरेंज यूनिफॉर्म में ओबामा, सोशल मीडिया पर विरोध वीडियो के आखिर में ओबामा को जेल की ऑरेंज यूनिफॉर्म में दिखाया गया है, जैसे वे किसी कैदी की तरह जेल में खड़े हों. इस वीडियो को देखने के बाद सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिली. कुछ लोगों ने इसे "उकसाने वाला" बताया, जबकि कुछ ने आरोप लगाया कि यह वीडियो लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश है, खासकर Epstein फाइल्स से, जिसमें ट्रंप पर Jeffrey Epstein के साथ संबंधों के आरोप हैं. 2016 के चुनाव में ओबामा पर धोखाधड़ी के आरोप कुछ दिन पहले ही ट्रंप प्रशासन ने 2016 के चुनाव में ओबामा पर चुनावी धोखाधड़ी का आरोप लगाया था. अब इस वीडियो के जरिए ट्रंप ने एक बार फिर ओबामा पर सीधा हमला बोला है. ट्रंप ने इनके अलावा एक क्रिएटिव इमेज शेयर किया है जिसमें पूर्व ओबामा एडमिनिस्ट्रेशन के नेताओं को दिखाया गया है, जिसमें उन्हों पूछा, "सामन्था पावर ने इतना सारा पैसा कैसे कमाया???" अमेरिकी इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गैबार्ड ने आरोप लगाया था कि, "राष्ट्रपति ओबामा और उनकी लीडरशिप टीम में ऐसे लोग थे, जो 2016 में अमेरिकी जनता के फैसले को स्वीकार नहीं कर पाए जब उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप को चुना – और इसलिए उन्होंने देशद्रोही साजिश को रची… ताकि एक लंबे समय तक चलने वाला तख्तापलट उस बैठे राष्ट्रपति के खिलाफ शुरू किया जा सके."

जस्टिस वर्मा पर संकट गहराया, लोकसभा में 152 सांसदों ने महाभियोग प्रस्ताव को दी मंजूरी

नई दिल्ली कैश कांड में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा को पद से हटाने के लिए उनके खिलाफ संसद में महाभियोग चलाने की कार्यवाही शुरू हो गई है. हाई कोर्ट के जज वर्मा अपने आवास पर बेहिसाब नकदी मिलने के बाद कदाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं. संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को लोकसभा के 145 सांसदों ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए. वहीं, राज्यसभा में 54 सांसदों ने हाई कोर्ट जज वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का समर्थन किया.  सरकारी आवास में अधजला कैश मिलने के मामले में मुश्किलों का सामना कर रहे जस्टिस यशवंत वर्मा की मुश्किलें और बढ़ती जा रही हैं, आज मानसून सत्र के पहले ही दिन सांसदों ने इस पर हंगामा किया और जस्टिस वर्मा पर कार्यवाही की मांग की, सांसदों ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए एक ज्ञापन लोकसभा स्पीकर को सौंप दिया, बताया जा रहा है कि इस ज्ञापन पर भाजपा और विपक्षी दलों के करीब 150 सांसदों ने हस्ताक्षर किये हैं । संसद के पहले दिन की कार्यवाही आज हंगामेदार रही , विपक्ष ने अपनी बात रखनी चाही उधर लोकसभा स्पीकर ने नियमों का हवाला देते हुए तय बिन्दुओं पर ही चर्चा की समझाइश दी जिसपर विपक्ष ने हंगामा किया, इस दौरान सदन की कार्यवाही को स्थगित भी करना पड़ा। ज्ञापन पर सभी दलों के करीब 150 सांसदों के हस्ताक्षर!    उधर जस्टिस वर्मा को हटाने के मामले में सभी सांसद एकमत दिखाई दिए, उनके खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए एक प्रस्ताव तैयार किया गया जिसपर भाजपा, कांग्रेस सहित कई कई दलों के सांसदों ने हस्ताक्षर किये, दस्तखत करने वाले सांसदों की संख्या 150 के करीब बताई जा रही है। कैश कांड में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ चलेगा महाभियोग, 207 सांसदों ने प्रस्ताव का किया समर्थन लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्य सभा के सभापति जगदीप धनखड़ को सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन सौंपे जाने के बाद जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए आगे की कार्यवाही शुरू हो गई है. संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 218 के तहत दायर इस महाभियोग प्रस्ताव को भाजपा, कांग्रेस, टीडीपी, जेडीयू, सीपीएम सहित विभिन्न दलों के सांसदों का समर्थन प्राप्त हुआ. प्रस्ताव पर अनुराग ठाकुर, रविशंकर प्रसाद, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, राजीव प्रताप रूडी, सुप्रिया सुले, केसी वेणुगोपाल और पीपी चौधरी जैसे सांसदों में हस्ताक्षर किए. उच्च सदन में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि उन्हें न्यायमूर्ति वर्मा को हटाने की मांग वाला एक प्रस्ताव मिला है, जिस पर 50 से अधिक राज्यसभा सांसदों के हस्ताक्षर हैं. राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि हाई कोर्ट जज को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए जरूरी संख्या से ज्यादा सांसदों का नोटिस मिला है. उन्होंने कहा कि अगर एक सदन में प्रस्ताव आए तो प्रीसाइडिंग ऑफिसर के पास यह अधिकार होता है कि वह उसे स्वीकार करे या खारिज कर दे. लेकिन अगर दोनों सदनों में एक ही दिन मोशन आता है, तो यह सदन की प्रॉपर्टी हो जाता है.  संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव को पर्याप्त समर्थन राज्य सभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश, हाई कोर्ट के एक चीफ जस्टिस और एक सदस्य को लेकर तीन सदस्यीय कमेटी बनाई जाती है. इस कमेटी की रिपोर्ट के बाद स्पीकर या चेयरमैन मोशन पर फैसला ले सकते हैं. सभापति जगदीप धनखड़ ने राज्य सभा के सेक्रेटरी जनरल से इस बात की पुष्टि करने के लिए कहा कि क्या यह मोशन लोकसभा में भी आया है. इस पर कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि लोक सभा में भी सदस्यों ने स्पीकर को मोशन सौंपा है. इसकी पुष्टि होने के बाद राज्य सभा के सभापति ने सेक्रेटरी जनरल को महाभियोग प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया. धनखड़ ने यह भी कहा कि उन्हें मिले मोशन पर 55 हस्ताक्षर हैं, लेकिन हस्ताक्षर करने वाले सदस्यों की संख्या 54 ही है. हम इस बात की पुष्टि करेंगे कि किस सदस्य ने दो बार हस्ताक्षर किए हैं. उस सदस्य का दूसरा हस्ताक्षर अमान्य कर दिया जाएगा. संविधान के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश को हटाने के लिए राष्ट्रपति के आदेश के बाद, कम से कम 100 लोकसभा या 50 राज्यसभा सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित प्रस्ताव पारित होना आवश्यक है. प्रस्ताव को स्वीकार किया जाए या नहीं, इसका निर्णय अध्यक्ष या सभापति करते हैं. जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास से मिले थे जले नोट जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ कदाचार के आरोप तब लगे जब 15 मार्च को उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास में लगी आग के बाद बड़ी संख्या में जले हुए नोट बरामद हुए. तब वह दिल्ली हाई कोर्ट में जज थे. कैश कांड में घिरने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर इलाहाबाद हाई कोर्ट में कर दिया था. उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश होने के साथ ही अब संसद इस मामले की जांच करेगी. जज वर्मा ने किसी भी तरह के कदाचार में संलिप्त होने से इनकार किया है. सुप्रीम कोर्ट के जांच पैनल ने मामले को गंभीर माना हालांकि, सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त तीन सदस्यीय जांच पैनल ने पाया कि जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के जिस स्टोर रूम में जले हुए नोट मिले थे, उस पर उनका और उनके परिवार का सक्रिय नियंत्रण था. पैनल ने निष्कर्ष निकाला कि यह कदाचार इतना गंभीर था कि उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए. जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. उनका तर्क है कि जांच समिति महत्वपूर्ण तथ्यों की जांच करने में विफल रही और एक व्यक्ति और एक संवैधानिक पदाधिकारी के रूप में उनके अधिकारों का उल्लंघन किया. इस प्रकरण ने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को लेकर व्यापक चिंताएं पैदा कर दी हैं. महाभियोग चलाने लोकसभा स्पीकर को सौंपा ज्ञापन  महाभियोग चलाने के प्रस्ताव वाला एक ज्ञापन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंपा। यह प्रस्ताव भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124, 217 और 218 के तहत दायर किया गया है। प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले सांसदों में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के अलावा भाजपा सांसद अनुराग सिंह … Read more

इस्कॉन मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी से हड़कंप, पुलिस जांच में जुटी

मुंबई, मुंबई के गिरगांव इलाके में स्थित इस्कॉन मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। इस्कॉन मंदिर को ये धमकी ईमेल के माध्यम से मिली है। मंदिर प्रशासन ने धमकी मिलने की जानकारी गावदेवी पुलिस स्टेशन को दी। जानकारी के अनुसार, गिरगांव इलाके में स्थित इस्कॉन मंदिर को सोमवार को बम से उड़ाने की धमकी मिली। इस घटना की जानकारी तुरंत पुलिस और बम निरोधक दस्ते (बम स्क्वायड) को दी गई, जिसके बाद वे तत्काल मौके पर पहुंचे और उन्होंने मंदिर परिसर की तलाशी ली, लेकिन कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। बताया जा रहा है कि इस्कॉन मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी ‘इम्मानुएल सेकरन’ नाम की ईमेल आईडी से मिली है। मंदिर प्रशासन की शिकायत पर गावदेवी पुलिस स्टेशन में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ईमेल के सोर्स की पहचान के लिए जांच कर रही है। साथ ही पुलिस ने शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। मंदिर प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को सख्त कर दिया है। ये पहली बार नहीं है जब मुंबई में किसी इमारत को बम से उड़ाने की धमकी मिली हो। इससे पहले, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) को एक अज्ञात आईडी से ईमेल के माध्यम से बम की धमकी मिली थी। इसके बाद बॉम्बे एक्सचेंज ने अपने परिसर में सतर्कता और निगरानी बढ़ा दी थी। आधिकारिक बयान में कहा गया कि इस मामले में एफआईआर दर्ज करा दी गई है और सभी संबंधित अधिकारियों को धमकी वाले मेल के बारे में सूचित कर दिया गया है। इससे पहले, 15 जून को मुंबई में अमेरिकी महावाणिज्य दूतावास कार्यालय को भी बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। इसके बाद बीकेसी पुलिस स्टेशन को अलर्ट कर दिया गया था, जिसके बाद पुलिस और बम स्क्वायड की टीम मौके पर पहुंची और पूरे इलाके की जांच की। हालांकि, जांच के दौरान पुलिस को कुछ संदिग्ध सामान नहीं मिला था।  

उदित प्रधान दुष्कर्म मामले में गिरफ़्तार, NSUI ने तत्काल प्रभाव से किया निलंबित

नई दिल्ली,  एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष उदित प्रधान को अध्यक्ष पद से निलंबित कर दिया गया है। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधुरी ने प्रेस वार्ता के जरिए यह जानकारी दी है। चौधरी ने कहा है कि प्रधान के खिलाफ दुष्कर्म की शिकायत मिलने के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से अध्यक्ष पद से निलंबित कर दिया गया है। यहां उल्लेखनीय है कि पीड़िता की शिकायत के बाद भुवनेश्वर में मंचेश्वर थाना पुलिस ने उदित प्रधान को गिरफ्तार कर लिया है। पीड़िता की शिकायत के अनुसार, इस साल 18 मार्च की दोपहर वह अपने एक दोस्त और एक सहपाठी के साथ घुमने के लिए मास्टर कैंटीन स्क्वायर गई थी। वहां सहपाठी ने उदित प्रधान को उनसे मिलवाया। इसके बाद वे उदित की गाड़ी से नयापल्ली के एक होटल में गए। इस दौरान उन्होंने होटल में शराब का सेवन किया। लेकिन पीड़िता ने शराब पीने से मना कर दिया। इसके बाद उदित ने उन्हें सॉफ्ट ड्रिंक पीने के लिए कहा। उसने चतुराई से उसमें कुछ नशा मिलाया और उसे पीने के लिए दे दिया। शीतल पेय पीने के कुछ ही देर बाद उसका सिर घूम गया। इसलिए उसने तुरंत घर छोड़ने के लिए कहा। लेकिन उदित और बाकी लोगों ने उसे जाने नहीं दिया। इसके बाद वह बेहोश हो गई। जब तक उसे होश आया तब तक उसने देखा कि उदित ने उसके साथ कुछ बुरा किया है। बाद में उसे पता चला कि उदित ने उसके साथ दुष्कर्म किया है। जब उसने इस बारे में पूछा तो उदित ने उसे धमकी दी। उन्होंने कहा कि अगर उन्होंने शिकायत की तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। प्राथमिकी में कहा गया है कि पीड़ित डरी हुई थी और चुप रहने के लिए मजबूर थी, क्योंकि उदित एक छात्र नेता था। मंचेश्वर पुलिस ने दुष्कर्म की शिकायत के बाद उदित को रात में गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपित छात्र नेता के खिलाफ न्याय संहिता 2023 के आधार पर 5 संगीन दफा लगायी है। इसमें दफा 64(1)- जबरन संपत्ति लेना, दफा 123- दुष्कर्म, दफा 296-नशा द्रव्य प्रयोग कर दुष्कर्म करना, दफा 74- अपराध छिपाने या प्रमाण नष्ट करने का प्रयास करने, दफा 351(2) – महिला हिंसा एवं अमानवीय अपराध जैसी संगीन दफा शामिल है, जिसके तहत पुलिस ने मामला दर्ज किया है। वहीं, दूसरी तरफ उदित का परिवार और छात्र कांग्रेस के लगभग 50 सदस्य खबर मिलने के बाद मंचेश्वर पुलिस स्टेशन के सामने एकत्र हुए और विरोध प्रदर्शन किए हैं। वे थाना में घुसने का प्रयास किए मगर पुलिस उन्हें प्रवेश नहीं करने दी।  

ऑनलाइन सट्टेबाजी केस में नया मोड़:Meta और Google को ED ने भेजा समन, हाजिर होने को कहा

नई दिल्ली भारत में टेक्नोलॉजी कंपनियों और कानून विभाग दोनों के बीच टकराव की स्थिति बनती दिख रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दुनिया की दो सबसे बड़ी टेक कंपनियों Google और Facebook की पेरेंट कंपनी Meta को समन भेजा है। यह समन भारत में तेजी से फैल रहे अवैध ऑनलाइन सट्टा ऐप्स को प्रमोट और एडवर्टाइज करने के मामले में भेजा गया है। ED की मानें तो Google और Meta ने ऐसे कई ऑनलाइन सट्टा प्लेटफॉर्म्स के विज्ञापन पब्लिश किए और एल्गोरिदम के जरिए उन्हें प्रमोट किया, जिससे उनका एडवर्टाइजमेंट और यूजेस दोनों तेजी से बढ़े। इस तरह के ऐप्स को बढ़ावा देना Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के अंतर्गत एक गंभीर अपराध माना जा रहा है। जांच एजेंसी का मानना है कि इन कंपनियों ने सट्टा ऐप्स से एडवर्टाइजमेंट रेवन्यू भी जेनरेट किया है, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिला। कब और कहां होनी है पूछताछ? Google और Meta के सीनियर अधिकारियों को 21 जुलाई, 2025 को दिल्ली स्थित ED के मुख्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है। उनसे पूछताछ के दौरान यह जानने की कोशिश की जाएगी कि क्या इन कंपनियों को अवैध सट्टा ऐप्स की गतिविधियों की जानकारी थी और क्या उन्होंने जानबूझकर उनके साथ व्यावसायिक संबंध बनाए। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब ED ने सट्टा या ड्रग रैकेट्स से जुड़ी टेक्नोलॉजी या मीडिया फिगर्स पर शिकंजा कसा हो। इससे पहले प्रकाश राज, राणा दग्गुबाती और विजय देवरकोंडा जैसे फिल्म स्टार्स को भी इसी तरह की जांच के लिए बुलाया गया था। अब जांच का दायरा बढ़कर टेक कंपनियों तक पहुंच गया है। सरकार की गाइडलाइंस की अनदेखी? भारत सरकार की ओर से 2022 में सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सभी मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश जारी किया था कि वे सट्टा और जुए से जुड़े ऐप्स के विज्ञापन ना दिखाएं। इसके बावजूद इन प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे कई विज्ञापन लगातार देखने को मिले, जिनमें स्किल बेस्ड गेमिंग के नाम पर सट्टे से गतिविधियों को प्रमोट किया गया। इस मामले में अब आगे क्या होगा? ED इन कंपनियों के विज्ञापन डाटा, पेमेंट ट्रांजैक्शन्स और एल्गोरिदमिक प्रिफरेंसेज की गहराई से जांच करेगी। अगर यह पाया गया कि इन कंपनियों ने सट्टा प्लेटफॉर्म्स से पैसा लेकर उन्हें प्रमोट किया, तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है। यह मामला ना सिर्फ भारत में बल्कि ग्लोबल मार्केट में भी टेक कंपनियों की जवाबदेही और जिम्मेदारियों को लेकर बहस शुरू कर सकता है।

FBI की बड़ी कार्रवाई: अमेरिका में इंसानियत के दुश्मन 8 भारतीय गैंगस्टर गिरफ्तार

कैलिफोर्निया अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के सैन जोआक्विन काउंटी में पुलिस और FBI ने 8 भारतीय मूल के लोगों को गिरफ्तार किया है। इन पर एक स्थानीय व्यक्ति का अपहरण कर उसे नग्न करके घंटों तक टॉर्चर करने और फिर पैसे ऐंठने का आरोप है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह   सिर्फ अमेरिका में ही नहीं, बल्कि भारत में भी हत्या और हथियारों के मामलों में शामिल है। गिरफ्तार लोगों के इस गिरोह का सरगना पवित्तर सिंह बताया जा रहा है, जो पंजाब के बटाला में हत्या समेत कई मामलों में भारत में भी वांछित है। FBI ने कहा कि इस गिरोह का नेटवर्क अमेरिका, भारत और कनाडा तक फैला हुआ है। शेरिफ पैट्रिक विथ्रो ने बताया कि उन्हें 21 जून को इस मामले की सूचना मिली थी। जांच के बाद 11 जुलाई को FBI, स्टॉकटन पुलिस, मांटेका पुलिस और काउंटी शेरिफ ऑफिस की संयुक्त SWAT टीम ने छापेमारी कर पांच जगहों पर एक साथ कार्रवाई की। इस दौरान मशीन गन, असॉल्ट राइफल और छत के वेंट में छुपाकर रखा गया 15,000 डॉलर नकद बरामद किया गया। पुलिस ने बताया कि इस गैंग पर अपहरण, फिरौती वसूलने, टॉर्चर, अवैध हथियार रखने, गवाहों को धमकाने, ट्रक हाईजैकिंग, हथियार और ड्रग्स की तस्करी और भारत में राजनीतिक हिंसा जैसे गंभीर आरोप हैं।इस गैंग के अन्य सदस्यों के नाम हैं दिलप्रीत सिंह, सरबजीत सिंह, गुरताज सिंह, अमृतपाल सिंह, विशाल सिंह, अर्शप्रीत सिंह और मनप्रीत रंधावा। FBI ने कहा कि छह आरोपियों को इमीग्रेशन विभाग ने अलग से हिरासत में लिया है। अब FBI भारत और कनाडा के साथ मिलकर आगे की कानूनी कार्रवाई और संभावित प्रत्यर्पण (एक्स्ट्राडिशन) की तैयारी कर रही है। काउंटी डिस्ट्रीक्ट अटॉर्नी रॉन फ्रेटस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सभी आठ आरोपियों पर गैंग से जुड़े गंभीर आरोप लगे हैं और इन्हें उम्रकैद हो सकती है, बिना जमानत के। शेरिफ ने कहा “ये लोग जानवर हैं, इन्हें इंसानी जिंदगी की कोई कद्र नहीं है।” पुलिस और FBI ने अमेरिका में रहने वाले भारतीय-अमेरिकी समुदाय से अपील की है कि अगर कोई उनसे उगाही या धमकी मांगता है तो तुरंत गुप्त हेल्पलाइन पर जानकारी

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: भाजपा सांसद सूर्या को नहीं मिलेगी तत्काल गिरफ्तारी

नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने किसान आत्महत्या मामले में कर्नाटक सरकार की याचिका को रद्द कर दिया। इससे पहले कर्नाटक हाईकोर्ट ने सांसद सूर्या के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली कर्नाटक सरकार की याचिका खारिज कर दी थी। सूर्या पर हावेरी जिले में एक किसान की आत्महत्या के मामले में फर्जी खबर फैलाने का आरोप था।  मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि यह क्या है? मामले का राजनीतिकरण मत कीजिए। अपनी लड़ाई मतदाताओं के सामने लड़िए। पीठ ने राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी और कानूनी कार्यवाही के राजनीतिकरण के खिलाफ चेतावनी दी। सूर्या ने किया था ये पोस्ट आठ नवंबर 2024 को तेजस्वी सूर्या ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में दावा किया था कि हावेरी जिले के किसान रुद्रप्पा बालिकाई ने अपनी जमीन पर वक्फ बोर्ड के कब्जे के बाद आत्महत्या कर ली। उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और मंत्री बीजेड जमीर अहमद खान पर कर्नाटक में विनाशकारी प्रभाव डालने का आरोप लगाया था। बाद में आया सच सामने सूर्या ने अपनी पोस्ट में एक स्थानीय पोर्टल की खबर का लिंक भी साझा किया था। हालांकि, पुलिस जांच में सामने आया कि किसान ने कर्ज के बढ़ते बोझ के कारण आत्महत्या की थी। इसके बाद उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 353 (2) के तहत दर्ज प्राथमिकी की गई थी। अदालत ने दी राहत सूर्या ने एफआईआर को चुनौती देते हुए इसे खारिज करने की मांग की थी। दिसंबर 2024 में कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने गुरुवार को उनकी याचिका पर फैसला सुनाते हुए एफआईआर रद्द कर दी थी। इसके बाद कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सूर्या के वकील ने यह कहा था सूर्या की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरुणा श्याम ने अदालत को बताया कि मृतक किसान के पिता ने कर्नाटक वक्फ बोर्ड की संलिप्तता वाले भूमि विवाद से संबंधित शिकायतें उठाई थीं, जिसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सांसद ने यह पोस्ट किया। हालांकि, हावेरी के पुलिस अधीक्षक अंशु कुमार ने बाद में स्पष्ट किया कि किसान रुद्रप्पा कर्ज के चलते आत्महत्या की। इस स्पष्टीकरण के बाद सूर्या ने पोस्ट डिलीट कर दिया था।  

अग्निवीरों को सम्मान: उत्तराखंड में सरकारी भर्तियों में 10% आरक्षण की योजना

देहरादून  सैनिक के रूप में देश की आन-बान-शान की रक्षा की जिम्मेदारी निभाने के बाद नागरिक जीवन में लौटने वाले पूर्व अग्निवीरों को उत्तराखंड में सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत का क्षैतिज आरक्षण मिल सकता है। अग्निवीरों के कल्याण और पुनर्वास के लिए उत्तराखंड सरकार विभिन्न विभागों की भर्तियों में क्षैतिज आरक्षण की सुविधा देने की तैयारी कर रही है। कार्मिक विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर विधायी विभाग को परामर्श के लिए भेज दिया है। रविवार को कार्मिक विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने 'हिन्दुस्तान' को बताया कि आरक्षण प्रस्ताव पर पिछले कुछ समय से मंथन चल रहा था। विधायी परामर्श के बाद आरक्षण प्रस्ताव को कैबिनेट में मंजूरी के लिए जाया जाएगा। सूत्रों के अनुसार अग्निवीरों को वर्दीधारी सेवाओं में आरक्षण देने की सिफारिश की गई है। उत्तराखंड में पुलिस के साथ ही परिवहन, आबकारी, वन विभाग समेत कई विभाग हैं। अग्निवीर सेना से प्रशिक्षित होने की वजह से प्रवर्तन सेवाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले साल घोषणा की थी कि अग्निवीरों के सेवा पूरी करने के बाद उनके समायोजन, पुनर्वास के लिए ठोस व्यवस्था की जाएगी। इससे देश की सेवा के लिए समर्पित होने वाले नौजवानों को सेवा अवधि पूरी करने के बाद रोजगार, पुनर्वास के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। कमेटी दे चुकी है रिपोर्ट मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद सरकार ने सैनिक कल्याण सचिव दीपेंद्र चौधरी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया था। यह कमेटी भी अपनी रिपेार्ट सरकार को सौंप चुकी है। इसमें अग्निवीरों को सेना में सेवा की अवधि के वर्षों की संख्या के अनुसार सरकारी सेवाओं में अधिकतम आयु सीमा में छूट, सेवा से लौटने के बाद शैक्षिक योग्यता बढ़ाने के इच्छुक पूर्व अग्निवीरों को राज्य के शिक्षण संस्थानों की सीटों पर एक तय सीमा तक आरक्षण तथा राज्य की स्वरोजगार और ऋण योजनाओं में भी प्राथमिकता देने की सिफारिश की गई है। वर्ष 2022 में शुरू हुई थी योजना वर्ष 2022 में केंद्र सरकार ने सेना में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत भर्ती होने युवाओं को अग्निवीर नाम से जाना जाता है। यह सेवा चार साल की है। इसमें 25 प्रतिशत अग्निवीरों को सेना में स्थायी होने का अवसर भी मिलता है। वर्ष 2022 में यह योजना शुरू हुई थी। चार साल पूरे होने पर अग्निवीर वर्ष 2026 से नागरिक जीवन में लौटना शुरू करेंगे। यूपी में भी है 20 पर्सेंट आरक्षण इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार भी राज्य पुलिस बल में अग्निवीरों को 20 फीसदी क्षैतिज आरक्षण दे चुकी है। उन्हें आयु में 3 वर्ष की छूट भी प्रदान की गई है। इसके अलावा राजस्थान और हरियाणा में भी अग्निवीरों को आरक्षण देने की घोषणा की गई है। इसके अलावा कई केंद्रीय बलों में भी उन्हें आरक्षण का लाभ दिया जाएगा।

काडियाना हादसा: यात्रियों से भरी बस मलबे में फंसी, बचाव कार्य जारी

हिमाचल हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश ने कहर बरपा रखा है, खासकर जिला सिरमौर में स्थिति गंभीर बनी हुई है। रात भर से जारी मूसलाधार बारिश के कारण कई जगहों पर भूस्खलन हुआ है, जिससे सड़कें बंद हो गई हैं और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बाल-बाल बची निजी बस में फंसी 15 सवारियां सोमवार सुबह श्रीरेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र के संगड़ाह-चढ़ाना सड़क पर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। काडियाना नाले में भारी मात्रा में मलबा आने से एक निजी बस फंस गई। बस में करीब 15 सवारियां मौजूद थीं। गनीमत रही कि चालक और परिचालक ने सूझबूझ से काम लिया और सावधानीपूर्वक यात्रियों को इमरजेंसी व चालक के दरवाजे से बाहर निकाला। मलबे की मात्रा इतनी ज़्यादा थी कि बस अपनी जगह से हिल भी नहीं पाई और सवारियों वाली तरफ के दरवाज़े मलबे में बुरी तरह फंस गए थे, जिससे उन्हें खोलना नामुमकिन हो गया था। इस दौरान बस में सवार यात्री काफी दहशत में आ गए थे। बारिश के कारण नेशनल हाईवे 707 और 907-ए पर भी भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। जिला सिरमौर के पांवटा साहिब-शिलाई-गुम्मा नेशनल हाईवे 707 सोमवार सुबह शिलाई के पास उत्तरी में भारी भूस्खलन के कारण एक बार फिर बंद हो गया। बड़ी-बड़ी चट्टानें सड़क पर आ गिरने से दोनों तरफ वाहनों का लंबा जाम लग गया है। इसी तरह, नाहन-कुमारहट्टी नेशनल हाईवे 907-ए भी सादना घाट में भारी भूस्खलन के कारण बाधित हो गया है। इन महत्वपूर्ण सड़कों के बंद होने से यातायात बुरी तरह चरमरा गया है। जिला सिरमौर में देर रात से हो रही लगातार बारिश के चलते लोक निर्माण विभाग के अनुसार 20 से अधिक सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं। श्रीरेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाली संगड़ाह-पालर-राजगढ़ सड़क भी भूस्खलन के कारण बंद पड़ी है। सड़कों के बंद होने से न केवल आम लोगों को परेशानी हो रही है, बल्कि स्कूल, कॉलेज और कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों को भी भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार हो रही बारिश का असर किसानों की फसलों पर भी पड़ा है। पिछले कई दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण शिमला मिर्च और टमाटर जैसी महत्वपूर्ण फसलें काफी हद तक बर्बाद हो चुकी हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन द्वारा जल्द से जल्द सड़कों को खोलने और राहत कार्यों को तेज़ करने के प्रयास किए जा रहे हैं।