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अमेरिकी चेतावनी: भारत का चीन-रूस के करीब जाना हथियार देने में जोखिम

वाशिंगटन  रूसी तेल की खरीद को लेकर अमेरिका ने एक बार फिर भारत पर निशाना साधा है। अब वाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा है कि भारत ने रूस और चीन से करीबी बढ़ा ली है, जिसके कारण उसे हथियार बेचना जोखिम भरा हो गया है। वहीं, भारत ने साफ किया है कि तेल खरीदने को लेकर उसे अनुचित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने बताया था कि अमेरिका और यूरोपीय संघ भी रूसी सामान के खरीदार हैं। लेख में वाइट हाउस के व्यापारिक मामलों के सलाहकार पीटर नवारो ने लिखा है नई दिल्ली अब 'रूस और चीन दोनों के करीब जा रहा है।' उन्होंने लिखा, 'अगर भारत एक रणनीतिक साझेदार की तरह हमसे व्यवहार चाहता हैं, तो उसे वैसे काम भी करने चाहिए।' इससे पहले कई मौकों पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी रूसी तेल की खरीदी को लेकर भारत पर निशाना साध चुके हैं। नवारो ने लिखा, 'भारत रूसी तेल के सबसे बड़े उपयोगकर्ता के रूप में काम कर रहा है। वह कच्चे तेल को महंगे निर्यात में बदल रहा है और मॉस्को को डॉलर थमा रहा है, जिसे उसकी जरूरत है।' उन्होंने कहा कि रूस और चीन के साथ भारत के करीबी रिश्तों के चलते अमेरिकी सैन्य क्षमताओं को भारत को सौंपना जोखिम भरा है। ट्रंप पहले ही भारत के खिलाफ 25+25 फीसदी टैरिफ लगा चुके हैं। शुरुआती ऐलान में उन्होंने भारत पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया था और इसकी वजह BRICS देश और अमेरिका को होने वाला घाटा बताया था। साथ ही उस दौरान रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर जुर्माना भी लगाया गया था। इसके बाद उन्होंने 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क का ऐलान किया और भारत को रूसी तेल खरीदने पर घेरा था। भारत की तरफ से साफ किया जा चुका है कि उसे देश के आर्थिक हित में जो भी जरूरी होगा, वह फैसला लिया जाएगा। साथ ही अमेरिका को दिए एक जवाब में भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया था कि यूरोपीय संघ के सदस्य कई देश रूस से सामान खरीद रहे हैं। वहीं, ट्रंप से भी जब एक पत्रकार ने रूसी तेल की खरीद के संबंध में सवाल किया, तो वह जवाब देने से बचते नजर आए थे।  

जयशंकर से मुलाकात के बाद चीन का संदेश, सहयोग से बढ़ सकती दोनों देशों की प्रगति

नई दिल्ली  अमेरिका के साथ टैरिफ को लेकर चल रहे विवाद के बीच चीन और भारत के बीच की नजदीकियां बढ़ रही हैं। दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर करने की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इस कड़ी में चीन के विदेश मंत्री वांग यी सोमवार को अपने दो दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे हैं। वांग यी और भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर के बीच अहम बैठक शुरू हो गई है, जहां जयशंकर ने चीनी अधिकारियों का स्वागत किया है। जयशंकर के साथ बैठक में वांग यी ने कहा, "हमने बॉर्डर पर शांति बनाए रखने की कोशिश की है। …हमने सहयोग बढ़ाने और चीन-भारत संबंधों में सुधार और विकास की गति को और मजबूत करने का विश्वास साझा किया है ताकि हम दोनों देशों के विकास के साथ-साथ एक-दूसरे की सफलता में भी योगदान दे सकें। साथ ही एशिया और विश्व में वह स्थिरता लाई जा सके, जिसकी जरूरत है।” मतभेद विवाद का रूप ना ले- एस जयशंकर इससे पहले एस जयशंकर ने कहा है कि चीन और भारत के संबंध कठिन दौर से गुजरे हैं और अब दोनों देशों की साझेदारी से इसे बेहतर बनाने का प्रयास जारी है। जयशंकर ने कहा, “संबंधों में एक कठिन दौर देखने के बाद, दोनों देश अब आगे बढ़ना चाहते हैं। इसके लिए दोनों पक्षों की ओर से एक स्पष्ट और रचनात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। इस प्रयास में, हमें तीन मूल्यों, एक दूसरे का सम्मान, संवेदनशीलता और पारस्परिक हितों को ध्यान में रखना चाहिए।” जयशंकर ने कहा है कि यह ध्यान रखने की जरूरत है कि मतभेद विवाद का रूप ना ले, ना ही प्रतिस्पर्धा संघर्ष में बदले। सीमा पर शांति पर जोर वहीं जयशंकर ने इस दौरान यह भी कहा है कि दोनों देशों के बीच संबंधों में सकारात्मक गति तभी आ सकती है जब सीमा पर शांति स्थापित हो। जयशंकर ने अपनी ओपनिंग स्पीच में कहा, “आप कल हमारे विशेष प्रतिनिधि एनएसए अजीत डोभाल के साथ सीमा संबंधी मुद्दों पर चर्चा करेंगे। यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारे संबंधों में किसी भी सकारात्मक गति का आधार बॉर्डर पर संयुक्त रूप से शांति और सौहार्द बनाए रखने की क्षमता है। यह भी जरूरी है कि तनाव कम करने की प्रक्रिया आगे बढ़े।" टैरिफ पर बातचीत की उम्मीद जयशंकर ने इस दौरान टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के भी संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि जब दुनिया के दो सबसे बड़े देश मिलते हैं, तो कि अंतर्राष्ट्रीय स्थिति पर चर्चा स्वाभाविक है। जयशंकर ने कहा, “हम एक मल्टीपोलर एशिया सहित एक निष्पक्ष, संतुलित और मल्टीपोलर वैश्विक व्यवस्था चाहते हैं। वर्तमान परिवेश में, वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखना और उसे बनाए रखना स्पष्ट रूप से जरूरी है।” उन्होंने चीनी विदेश मंत्री संग और भी कई अहम मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद जताई है। PM मोदी जा सकते हैं चीन गौरतलब है कि चीनी विदेश मंत्री दो दिवसीय यात्रा के दौरान मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी मुलाकात करेंगे। इस बीच इस महीने के अंत में पीएम मोदी भी चीन की यात्रा कर सकते हैं। वह 31 अगस्त और 1 सितंबर मे चीन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले सकते हैं। 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसा के बाद यह पीएम मोदी का पहला चीन दौरा होगा।  

टोल वसूली पर सुप्रीम कोर्ट का फटकारा, खराब रोड पर पैसे लेने पर आपत्ति

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को NHAI यानी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से पूछा कि अगर केरल के त्रिशूर में 65 किलोमीटर लंबे राजमार्ग को तय करने में 12 घंटे लगते हैं, तो किसी यात्री को 150 रुपये के टोल (शुल्क) का भुगतान करने के लिए क्यों कहा जाए। प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने यह टिप्पणी एनएचएआई और टोल वसूलने का अधिकार रखने वाली कंपनी ‘गुरुवायूर इंफ्रास्ट्रक्चर’ द्वारा दायर याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए की। याचिका में त्रिशूर के पलियेक्कारा टोल प्लाजा पर टोल संग्रह पर रोक लगाने के केरल उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई है। सीजेआई ने कहा, 'अगर किसी व्यक्ति को सड़क के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने में 12 घंटे लगते हैं, तो उसे 150 रुपये क्यों देने चाहिए? जिस सड़क पर एक घंटे का समय लगने की उम्मीद है, उसमें 11 घंटे और लगते हैं और उन्हें टोल भी देना पड़ता है।' सुनवाई के दौरान पीठ को सप्ताहांत में इस मार्ग पर लगभग 12 घंटे तक यातायात जाम रहने की जानकारी दी गई। उच्च न्यायालय ने छह अगस्त को राष्ट्रीय राजमार्ग 544 के एडापल्ली-मन्नुथी खंड की खराब स्थिति और निर्माण कार्यों के कारण उत्पन्न गंभीर यातायात जाम के आधार पर टोल निलंबन का आदेश दिया था। एनएचएआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और टोल वसूल करने का अधिकार रखने वाली कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने कहा, 'हम हर पहलू पर विचार करेंगे, आदेश सुरक्षित रखेंगे।' न्यायमूर्ति चंद्रन ने कहा कि जिस दुर्घटना के कारण यह सड़क अवरुद्ध हुई, वह महज 'दैवीय कृत्य' नहीं था, जैसा कि मेहता ने तर्क दिया, बल्कि एक ट्रक के गड्ढे में गिर जाने के कारण हुई थी। मेहता ने कहा कि जहां अंडरपास का निर्माण कार्य चल रहा था, वहां एनएचएआई ने सर्विस रोड उपलब्ध कराई थी, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि मॉनसून की बारिश ने निर्माण कार्य की गति धीमी कर दी है। उन्होंने एक उदाहरण भी दिया जिसमें टोल को निलंबित करने के बजाय आनुपातिक रूप से कम करने का सुझाव दिया गया था। वहीं, गुरुवायूर इंफ्रास्ट्रक्चर ने कहा कि उसने 60 किलोमीटर का क्षेत्र अपने नियंत्रण में रखा है और उसने सर्विस रोड की रुकावटों के लिए ‘पीएसजी इंजीनियरिंग’ सहित तीसरे पक्ष के ठेकेदारों को दोषी ठहराया। दीवान ने उच्च न्यायालय के फैसले को 'बेहद अनुचित' बताते हुए कहा, 'जब मैं दूसरों को सौंपे गए काम के लिए जिम्मेदार नहीं हूं, तो मेरी आय का स्रोत नहीं रोका जा सकता। मुझे सिर्फ 10 दिनों में ही 5-6 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।' पीठ ने कहा कि टोल वसूली का अधिकार रखने वाली कंपनी को उच्च न्यायालय ने एनएचएआई के खिलाफ नुकसान का दावा करने की अनुमति दे दी है। दीवान ने कहा कि यह अपर्याप्त है, क्योंकि दैनिक रखरखाव लागत जारी है और राजस्व वसूली रुक गई है। शीर्ष अदालत ने 14 अगस्त को टोल वसूली पर रोक लगाने संबंधी उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने के प्रति अनिच्छा जताई थी। उच्च न्यायालय ने छह अगस्त को टोल वसूली को चार सप्ताह के लिए स्थगित करने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि जब राजमार्ग का रखरखाव ठीक से नहीं हो रहा है और यातायात जाम बहुत अधिक है, तो वाहन चालकों से टोल नहीं वसूला जा सकता। उच्च न्यायालय ने फैसले में कहा था कि जनता और एनएचएआई के बीच संबंध 'जन विश्वास' का है और सुचारू यातायात प्रवाह बनाए रखने में विफलता ने उस विश्वास को भंग किया है।  

AMU कुलपति नियुक्ति मामले में जज ने लिया अलग रुख, सुनवाई से हटे

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने सोमवार को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) की कुलपति के रूप में प्रोफेसर नईमा खातून की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। चीफ जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ मुजफ्फर उरुज रब्बानी द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें नईमा की नियुक्ति को बरकरार रखा गया था। वह संस्थान के इतिहास में इस पद पर आसीन होने वाली पहली महिला हैं। कोर्ट को बताया गया कि नईमा अपने पति का महत्वपूर्ण वोट पाकर कुलपति (वीसी) बनीं। उस समय उनके पति एएमयू के कुलपति थे। याचिकाकर्ता ने पति द्वारा अपनी पत्नी के पक्ष में दिए गए वोट को ''हितों का टकराव'' बताया। चीफ जस्टिस ने कहा कि आदर्श रूप से कुलपति को नियुक्ति प्रक्रिया में भाग नहीं लेना चाहिए था, बल्कि संस्थान के सबसे वरिष्ठ सदस्य को इसमें भाग लेने देना चाहिए था। जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने सुनवाई से खुद को किया अलग बहरहाल, जस्टिस चंद्रन ने इसी तरह की चयन प्रक्रिया में एक विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में अपनी पिछली भूमिका का हवाला देते हुए मामले से खुद को अलग करने की पेशकश की। उन्होंने कहा, ''जब मैंने फैजान मुस्तफा का चयन किया था, तब मैं सीएनएलयू (कंसोर्टियम आफ नेशनल ला यूनिवर्सिटी) का कुलाधिपति था..इसलिए मैं खुद को सुनवाई से अलग कर सकता हूं।'' जस्टिस चंद्रन को फैसला करने दें- चीफ जस्टिस इस पर सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ''हमें (जस्टिस चंद्रन पर) पूरा भरोसा है। सुनवाई से अलग होने की कोई जरूरत नहीं है। आप पूरी तरह से फैसला कर सकते हैं।'' बहरहाल, चीफ जस्टिस ने कहा, ''मेरे भाई (जस्टिस चंद्रन) को फैसला करने दें। इस मामले को उस पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करें जिसका हिस्सा जस्टिस चंद्रन नहीं हैं।'' यह याचिका अब एक अलग पीठ के समक्ष जाएगी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने चयन प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाया।  

उत्तराखंड सरकार का ऐलान: मदरसा बोर्ड होगा भंग, लागू होगा नया अल्पसंख्यक शिक्षा कानून

देहरादून उत्तराखंड सचिवालय में  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कुल पांच प्रस्तावों पर मुहर लगी है. इनमें एक फैसला उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान अधिनियम, 2025 से जुड़ा है. कैबिनेट ने इस विधेयक को मंजूरी दे दी है और इसे आज से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा. राज्य सरकार के मुताबिक, अब तक राज्य में अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान का दर्जा केवल मुस्लिम समुदाय को दिया जाता था, लेकिन प्रस्तावित अधिनियम के लागू होने के बाद सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध और पारसी समुदायों को भी यह सुविधा मिलेगी. सरकार का दावा है कि इस कदम के साथ उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन जाएगा जिसने सभी अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षिक संस्थानों को मान्यता देने के लिए एकाकीकृत और पारदर्शी प्रक्रिया तैयार की है. अधिनियम लागू होने के बाद 1 जुलाई 2026 से उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड और उससे जुड़े अरबी-फारसी मदरसा मान्यता नियम, 2019 को भंग कर दिया जाएगा. बोर्ड की जगह अब उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया जाएगा. यह नया प्राधिकरण राज्य के सभी अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों की मान्यता और निगरानी करेगा. मदरसा बोर्ड के अंतर्गत 452 मदरसे पंजीकृत वर्तमान में राज्य में मदरसा बोर्ड के अंतर्गत 452 मदरसे पंजीकृत हैं. अधिनियम लागू होने के बाद इन्हें भी नए प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी. सरकार का कहना है कि यह नया ढांचा शिक्षा में क्वालिटी और ट्रांसपेरेंसी सुनिश्चित करेगा और संस्थागत अधिकारों की रक्षा करेगा. मान्यता के लिए संस्थानों का सोसाइटी एक्ट, ट्रस्ट एक्ट या कंपनी एक्ट में पंजीकरण अनिवार्य होगा. साथ ही, संबंधित भूमि और संपत्तियाँ संस्थान के नाम पर दर्ज होना जरूरी होगा. कांग्रेस ने धामी कैबिनेट के फैसले पर उठाए सवाल कांग्रेस ने इस विधेयक पर सवाल उठाए हैं. पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुजाता पॉल ने इसे लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है. उनका कहना है कि विधानसभा सत्र शुरू होने वाला है और सरकार के पास जनता से जुड़े कोई ठोस मुद्दे नहीं हैं. कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ रही है, लेकिन सरकार केवल एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने में जुटी है. सुजाता पॉल ने यह भी कहा कि हमारे संविधान में अनुच्छेद 29 और 30 अल्पसंख्यकों के शैक्षिक अधिकारों की गारंटी देते हैं. इसके अलावा, 1992 और 2004 में केंद्र सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षा से जुड़े कानून बनाए थे. ऐसे में यह कहना गलत है कि केवल मुसलमानों को ही अल्पसंख्यक होने का लाभ मिल रहा है. उन्होंने राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए. सुजाता पॉल के अनुसार, उत्तराखंड में आम शिक्षा व्यवस्था चरमराई हुई है. कई जगह स्कूल और शिक्षक नहीं हैं, लेकिन सरकार को इस विधेयक को लाने की इतनी जल्दी है मानो यही सबसे बड़ी प्राथमिकता हो. मदरसा बोर्ड भंग करने के प्लान पर क्या बोले एक्सपर्ट? पुष्कर सिंह धामी कैबिनेट के फैसले पर इस्लामिक मामलों के जानकार खुर्शीद अहमद का कहना है, "जो कानून बनाने की बात सरकार कर रही है वो आर्टिकल 30A का घोर उल्लंघन है. इसके साथ 2004 में लाए गए एक्ट के मुताबिक पहले से ही देश में अल्पसंख्यक आयोग मौजूद है, जो शैक्षिक संस्थानों को मान्यता देता है."

राधाकृष्णन ने पीएम मोदी से मुलाकात की, NDA का उपराष्ट्रपति पद उम्मीदवार बनाए गए

नई दिल्ली  महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. यह मुलाकात सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन द्वारा उन्हें उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने के एक दिन बाद हुई. वह एनडीए की विभिन्न बैठकों में भाग लेने के लिए यहां पहुंचे और कई नेताओं से मुलाकात की. मुलाकात के तुरंत बाद मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘सी. पी. राधाकृष्णन जी से मुलाकात की. एनडीए की तरफ से उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने पर उन्हें शुभकामनाएं दीं. जनसेवा के लंबे अनुभव और विभिन्न क्षेत्रों में उनकी विशेषज्ञता हमारे देश को समृद्ध बनाएगी. वह पहले की तरह ही समर्पण और दृढ़ निश्चय के साथ देश की सेवा करते रहें.’’ राधाकृष्णन 20 अगस्त को अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं. मंगलवार को एनडीए संसदीय दल की बैठक में उन्हें सम्मानित किए जाने की उम्मीद है. इससे पहले सोमवार को नई दिल्ली पहुंचने पर महाराष्ट्र के राज्यपाल और एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन का केंद्रीय मंत्री किरेन रीजिजू, राम मोहन नायडू. प्रह्लाद जोशी के अलावा दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता व अन्य ने स्वागत किया. चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन वर्तमान में 31 जुलाई, 2024 से महाराष्ट्र के 24वें राज्यपाल के रूप में कार्यरत हैं. इससे पहले उन्होंने फरवरी 2023 से जुलाई 2024 तक झारखंड के राज्यपाल के रूप में कार्य किया था. उन्होंने मार्च और जुलाई 2024 के बीच तेलंगाना के राज्यपाल और पुडुचेरी के उपराज्यपाल के रूप में अतिरिक्त प्रभार भी संभाला था. वरिष्ठ भाजपा नेता राधाकृष्णन कोयम्बटूर से दो बार लोकसभा के लिए चुने गए तथा इससे पहले तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं. कांग्रेस ने एनडीए द्वारा सीपी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाये जाने की आलोचना की है और उन्हें "एक और आरएसएस का आदमी" कहा है. बता दें कि उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है, हालांकि, स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए 21 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन जगदीप धनखड़ के इस्तीफा देने के बाद यह पद रिक्त हो गया था. उपराष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों के सांसद शामिल होते हैं. उपराष्ट्रपति के चुनाव संविधान के अनुच्छेद 64 और 68 के प्रावधानों द्वारा शासित होते हैं. चुनाव आयोग राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव अधिनियम, 1952 द्वारा उपराष्ट्रपति चुनावों को अधिसूचित करता है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 66(1) के अनुसार, उपराष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली द्वारा एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से होगा तथा ऐसे चुनाव में मतदान गुप्त मतदान द्वारा होगा.

भारतीय मिसाइलों से बचने के लिए ईरान बॉर्डर पर छिपे पाकिस्तानी युद्धपोत, ऑपरेशन सिंदूर का खुलासा

नई दिल्ली 6 और 7 मई की रात को भारतीय हमलों ने पाकिस्तान और पीओजेके में नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया. इसके बाद नई दिल्ली ने इस्लामाबाद के डीजीएमओ को सूचित किया कि उसका मिशन पूरा हो गया. हालांकि, पाकिस्तान के नेतृत्व ने कड़ी जवाबी कार्रवाई की बात कही. ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) टीम द्वारा विश्लेषित कराची और ग्वादर बंदरगाहों की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की नौसेना का रुख रक्षात्मक था. संघर्ष के चरम पर, पाक नौसेना (PN) के युद्धपोतों को कराची के नौसैनिक गोदाम से हटाकर व्यावसायिक टर्मिनलों पर लाया गया, जैसा कि सैटेलाइट तस्वीरों में दिखाई देता है. इस बीच, अन्य युद्धपोत ग्वादर के पश्चिमी बंदरगाह पर शरण लेते नजर आए, जो ईरान की सीमा से महज 100 किमी दूर है, बजाय इसके कि वे भारत की ओर पूर्व की ओर बढ़ें. 8 मई की कराची बंदरगाह की सैटेलाइट तस्वीर बताती है कि पाक नौसेना के युद्धपोत व्यावसायिक बंदरगाह और कंटेनर टर्मिनल पर खड़े थे. शीर्ष सैन्य विशेषज्ञों ने तनाव के दौरान पाकिस्तान नौसेना की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं. सेवानिवृत्त वाइस एडमिरल एस.सी. सुरेश बंगारा, जो दक्षिणी नौसेना कमान के पूर्व कमांडर-इन-चीफ रहे और 1971 में कराची बंदरगाह पर हुए साहसिक हमले में शामिल थे. उन्होंने कहा किचूंकि हमारा आतंकी ढांचे पर 7 मई को हमला हुआ था और पाकिस्तान की तीनों सेनाओं को पूरी तरह सतर्क रहना चाहिए था, फिर भी उनके अग्रिम युद्धपोत बंदरगाह पर दिखना उनकी कम ऑपरेशनल तैयारियों को दर्शाता है.  उन्होंने आगे एक पैटर्न की ओर इशारा किया, जिसमें पाक नौसेना के जहाज व्यावसायिक टर्मिनलों पर खड़े होते हैं और ऑपरेशन के दौरान व्यावसायिक विमानों की आड़ लेते हैं. उन्हें व्यावसायिक बंदरगाह क्षेत्र में लाना मिसाइल हमलों से बचने की कोशिश है.  उन्होंने इंडिया टुडे से कहा कि उनके सैन्य विमानों को व्यावसायिक उड़ानों के पास उड़ाना उनके नागरिक संसाधनों को बलि चढ़ाने की प्रवृत्ति दिखाता है. पाकिस्तानी युद्धपोत ईरान सीमा के पास शरण लेते हैं ऑपरेशन सिंदूर से ठीक छह महीने पहले, पाकिस्तान की नौसेना ने दावा किया था कि उसने एक नया हथियार-'स्वदेशी रूप से विकसित' P282 शिप-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल जोड़ लिया है. इसकी रेंज 350 किलोमीटर बताई गई थी. इसे 'उच्च सटीकता' वाले हमलों का वादा था. इस परीक्षण को एक सैन्य प्रचार वीडियो में दिखाया गया, जिसमें चीनी निर्मित जुल्फिकार-क्लास (F-22P) फ्रिगेट ने मिसाइल दागी थी. लेकिन जब मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ, तो स्थिति अलग दिखी. अंतरिक्ष कंपनी मैक्सर टेक्नोलॉजीज से मिली उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली व्यावसायिक तस्वीरों से पता चलता है कि इसके आधे जुल्फिकार-क्लास फ्रिगेट और अन्य युद्धपोत पश्चिम में ग्वादर में खड़े थे, जो ईरान की सीमा से महज 100 किलोमीटर दूर है. चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का गहना कहे जाने वाले ग्वादर बंदरगाह को हाल ही में अस्थायी नौसैनिक शरण स्थल में बदल दिया गया. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि 10 मई तक इसके कंटेनर भंडारण क्षेत्र खाली थे, लेकिन डॉक पर सैन्य जहाजों की भीड़ थी. इसमें दो जुल्फिकार-क्लास फ्रिगेट, दो बड़े तुगरिल-क्लास फ्रिगेट, नौसेना का एकमात्र अमेरिकी निर्मित ओलिवर हेजर्ड पेरी-क्लास फ्रिगेट, और दो समुद्री गश्ती जहाज शामिल थे. सेवानिवृत्त वाइस एडमिरल बंगारा ने कहा, "ग्वादर, जहां व्यावसायिक गतिविधियां नहीं थीं, वहां अग्रिम पंक्ति के जहाजों को रखना गलत था, क्योंकि वे आसानी से नजर आते थे. ऐसा लगता है कि समुद्र में उनकी एकमात्र ताकत उनकी पनडुब्बियां थीं. भारत की ताकत और पाकिस्तान का दबाव इंटेल लैब के भू-खुफिया शोधकर्ता डेमियन साइमन ने बताया, "ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत ने अपनी पहली जंगी तैनाती की, जिसकी अरब सागर में गति को पाक नौसेना ने उजागर किया. इससे नई दिल्ली के दबाव का अंदाजा हुआ. भारत के कराची पर संभावित हमले की तैयारी से पाकिस्तान ने अपनी नौसेना को तितर-बितर कर दिया और जहाजों को नागरिक डॉक पर ले गया.  कराची के व्यावसायिक टर्मिनलों पर युद्धपोत पूर्व में, कराची के नौसैनिक गोदाम असामान्य रूप से खाली थे, जबकि 8 मई की सैटेलाइट तस्वीरों में युद्धपोत व्यावसायिक कार्गो टर्मिनलों पर खड़े दिखे. बादलों से आंशिक रूप से ढके चित्रों में कम से कम चार पाकिस्तानी नौसेना (PN) जहाज व्यावसायिक बंदरगाहों और कंटेनर टर्मिनल के पास दिखाई दिए. इसमें PNS अलमगीर, एक बाबर-क्लास कोरवेट, और एक डेमन ऑफशोर पेट्रोल वेसल (OPV) शामिल थे, जो कार्गो जहाज के पास खड़े थे, जहां कंटेनर लोड-अनलोड हो रहे थे. एक और नौसेना फ्रिगेट कंटेनर टर्मिनल पर था, न कि नौसैनिक गोदाम पर. बंगारा ने कहा, "पाक नौसेना का सेना-प्रधान ढांचे में कोई खास रोल नहीं है. भारत ने संयुक्त ऑपरेशन की शानदार योजना बनाई और ऑपरेशन सिंदूर के सभी लक्ष्य हासिल किए. हमने साफ किया कि हम दंडात्मक जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार हैं, जिससे बिना समुद्र से एक भी मिसाइल दागे ऑपरेशन खत्म हुआ. हमारे नौसेना का शक्तिशाली हमला उनके समुद्री संसाधनों को तबाह कर सकता था, जैसे 10 अगस्त को PAF के हवाई ठिकानों को नुकसान हुआ. संयुक्त ऑपरेशन युद्ध को लंबा खींचने के लिए गोला-बारूद बचाते हैं. याद रखें, ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ रुका है. ग्वादर का नया इस्तेमाल साइमन ने ग्वादर के उपयोग में बदलाव पर ध्यान दिया. "यह दबाव उस समय आया जब पाकिस्तान की पनडुब्बी शाखा की कई नौकाएं मरम्मत के लिए बाहर थीं, जिससे समुद्री डर कम हो गया. इस बढ़ते दबाव में ग्वादर—एक लंबे समय से संघर्षशील व्यावसायिक बंदरगाह नौसैनिक पीछे हटने का आधार बना. इसके 600 मीटर के डॉक में युद्धपोत और ऑफशोर टैंकरों ने इस्लामाबाद को कराची से दूर मजबूत आधार दिया. भारत की तैयारियां भारतीय नौसेना ने पहले कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो कराची पर हमला करने को तैयार है. मई 2025 में संयुक्त मीडिया ब्रीफिंग में वाइस एडमिरल ए.एन. प्रमोद ने कहा था कि हमारी सेनाएं अरब सागर में मजबूत स्थिति में थीं और समुद्र व जमीन पर, कराची, पर अपने चुने समय पर हमला करने की पूरी तैयारी थी.

नेतन्याहू का हमास पर हमला: गाजा में बच्चों की हड्डियों की तस्वीरें हैं भ्रामक प्रचार

तेल अवीव हमास के झूठ पर आंखें खोलें… इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू रविवार को जब मीडिया से मुखातिब हुए. तब उन्होंने प्रेस के सामने हमास के झूठ की पोल खोलने का दावा किया. इधर गाजा भूख से बिलख रहा है और उधर नेतन्याहू ने इसी गाजापट्टी को लेकर अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं. वह बार-बार कह रहे हैं कि उनका इरादा गाजा पर पूर्ण नियंत्रण का नहीं है तो ऐसे में सवाल उठता है कि फिर आखिर उनका इरादा क्या है? नेतन्याहू ने रविवार को इंटरनेशनल मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि जितनी जल्दी हो सके, वह उतनी जल्दी गाजा में युद्ध को खत्म करना चाहते हैं. गाजा सिटी को कैप्चर करना सभी 50 इजरायली बंधकों की रिहाई सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीका है.  इस दौरान नेतन्याहू ने कहा कि उनका लक्ष्य गाजापट्टी से हमास को पूरी तरह खत्म करना है. उनका कहना है कि हमास का पूरी तरह से खात्मा किए बिना गाजा में स्थायी शांति संभव नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि गाजा पर इजरायल का नियंत्रण स्थायी कब्जे के लिए नहीं है, बल्कि हमास के सैन्य ढांचे को नष्ट करने और क्षेत्र को सैन्यीकरण से मुक्त कराने के लिए है.  नेतन्याहू ने दावा किया कि इजरायल का इरादा गाजा पर शासन करने या उसे अपने देश में मिलाने का नहीं है. इसके बजाय गाजा में एक नागरिक प्रशासन स्थापित किया जाएगा जो ना तो इजरायल के लिए खतरा और क्षेत्र में शांति बनाए रखे. नेतन्याहू ने कहा कि गाजा को किसी ऐसी अस्थायी सरकार को सौंपा जाएगा. जो ना तो हमास हो और न ही इजरायल के लिए खतरा पैदा करने वाला कोई संगठन हो. उन्होंने गाजा में बंधकों की रिहाई को अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा कि हमास के साथ युद्ध और बंधकों की रिहाई के लक्ष्य आपस में जुड़े हुए हैं. हालांकि, बंधकों के परिवारों और कुछ आलोचकों का कहना है कि गाजा पर पूर्ण सैन्य नियंत्रण की उनकी योजना बंधकों की जान को खतरे में डाल सकती है. इससे पहले इजरायल की सुरक्षा कैबिनेट ने नेतन्याहू की योजना को मंजूरी दी, जिसमें गाजा और अन्य प्रमुख क्षेत्रों पर पूर्ण सैन्य नियंत्रण स्थापित करना शामिल है. इसका उद्देश्य हमास के बचे हुए ठिकानों को खत्म करना और क्षेत्र में इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. गाजा युद्ध खत्म करने के 5 तरीके – हमास अपने हथियार डाल दे – सभी इजरायली बंधकों को रिहा किया जाए – गाजा का विसैन्यीकरण हो – गाजा में इजरायल का सैन्य प्रभुत्व – गाजा में ऐसी व्यवस्था तैयार करना, जो ना तो हमास के नियंत्रण में हो और ना हो फिलीस्तीनी प्राधिकरण के इजरायली पीएम नेतन्याहू ने बताया कि गाजापट्टी में हमास के अभी भी दो गढ़ बचे हुए हैं, जो गाजा सिटी और सेंट्रल कैंप्स ऑफ मोआसी हैं. नेतन्याहू ने कहा कि हमास को पूरी तरह खत्म करना इजरायल की सुरक्षा के लिए आवश्यक है और इसके बिना कोई समाधान टिकाऊ नहीं होगा. गाजा में भुखमरी और मानवीय संकट के सवालों पर नेतन्याहू ने इन आरोपों को खारिज करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि मीडिया में भूख से बिलखते बच्चों की जो तस्वीरें गाजा की बताकर शेयर की जा रही है. दरअसल वो प्रोपेगैंडा है. ये तस्वीरें गाजा की नहीं हैं. उन्होंने बकायदा प्रेजेंटेशन के साथ इंटरनेशनल मीडिया में छप रही इन बच्चों की तस्वीरों का ब्योरा दिया और दावा किया कि इन्हें गाजा का बताकर इजरायल को बदनाम किया जा रहा है.  बता दें कि नेतन्याहू ने यूरोपीय देशों और संयुक्त राष्ट्र की आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा कि इजरायल एक लोकतांत्रिक देश है जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करता है और उनकी कार्रवाइयां आतंकवाद के खिलाफ हैं.जर्मनी, फ्रांस, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देशों ने गाजा पर पूर्ण सैन्य नियंत्रण की योजना की आलोचना की है. संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने इस मुद्दे पर सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने की मांग की है.

पीएम मोदी ने सांसदों को दिए नए आवास, नई दिल्ली में किया लोकार्पण

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज नई दिल्ली में बाबा खड़क सिंह मार्ग पर बने 184 नए टाइप-7 बहुमंजिला फ्लैट्स का उद्घाटन किया। उद्घाटन कार्यक्रम सुबह 10 बजे हुआ। इस दौरान पीएम मोदी ने सिंदूर का पौधा भी लगाया। यह परिसर सांसदों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। प्रत्येक फ्लैट में 5,000 वर्ग फुट क्षेत्रफल है, जिसमें कार्यालय और स्टाफ के लिए जगह भी है। यह परियोजना गृह 3-स्टार रेटिंग और राष्ट्रीय भवन संहिता के अनुरूप है। इमारतें भूकंपरोधी हैं और दिव्यांगों के लिए अनुकूलित हैं।   जानकारी के अनुसार इस परिसर को आत्मनिर्भर बनाने के लिए डिजाइन किया गया है और यह संसद सदस्यों की कार्यात्मक जरूरतों को पूरा करने के लिए आधुनिक सुविधाओं की पूरी श्रृंखला से सुसज्जित है। हरित प्रौद्योगिकी को सम्मिलित करते हुए, यह परियोजना जीआरआईएचए 3-स्टार रेटिंग के मानकों का पालन करती है और राष्ट्रीय भवन संहिता (एनबीसी) 2016 का अनुपालन करती है। इन पर्यावरणीय रूप से स्थायी विशेषताओं से ऊर्जा संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन और प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन में योगदान मिलने की आशा है। उन्नत निर्माण तकनीक (विशेष रूप से, एल्युमीनियम शटरिंग के साथ मोनोलिथिक कंक्रीट) के उपयोग ने संरचनात्मक स्थायित्व सुनिश्चित करते हुए परियोजना को समय पर पूरा करना संभव बनाया। यह परिसर दिव्यांगजनों के अनुकूल भी है, जो समावेशी डिज़ाइन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। संसद सदस्यों के लिए अनुकूल आवास की कमी के कारण इस परियोजना का विकास आवश्यक हो गया था। भूमि की सीमित उपलब्धता के कारण, भूमि उपयोग को अनुकूलित करने और रखरखाव लागत को न्यूनतम करने के ध्येय से ऊर्ध्वाधर आवास विकास पर लगातार बल दिया गया है। प्रत्येक आवासीय इकाई में लगभग 5,000 वर्ग फुट का कार्पेट क्षेत्र है, जो आवासीय और आधिकारिक दोनों कार्यों के लिए पर्याप्त जगह प्रदान करता है। कार्यालयों, कर्मचारियों के आवास और एक सामुदायिक केंद्र के लिए समर्पित क्षेत्रों को शामिल करने से संसद सदस्यों को जन प्रतिनिधि के रूप में अपनी उत्तरदायित्वों को पूरा करने में मदद मिलेगी। परिसर के सभी भवनों का निर्माण आधुनिक संरचनात्मक डिज़ाइन मानदंडों के अनुरूप भूकंपरोधी बनाया गया है। सभी निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक और सुदृढ़ सुरक्षा तंत्र कार्यान्वित किया गया है।

रनवे पर विमान मौजूद था फिर भी इमरजेंसी लैंडिंग, एयर इंडिया ने कांग्रेस सांसदों के आरोपों को किया खारिज

नई दिल्ली कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल समेत कई सांसदों को तिरुवनंतपुरम से नई दिल्ली लेकर आ रही एयर इंडिया की एक उड़ान तब हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गई, जब रविवार रात अचानक उसे चेन्नई डायवर्ट कर दिया गया। दरअसल, जब चालक दल को रास्ते में खराब मौसम के कारण एक संदिग्ध तकनीकी खराबी का पता चला, तब उसे चेन्नई डायवर्ट कर दिया गया लेकिन वहां कथित तौर पर एक ही रनवे पर दो विमान आ गए। इसके बाद इस उड़ान को फिर से ऊपर हवा में उठा लिया गया। एयरलाइन ने पुष्टि की है कि उड़ान संख्या AI2455 चेन्नई में सुरक्षित उतर गई और विमान की जरूरी जांच की जाएगी। विमान ने जैसे ही तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे से उड़ान भरी, उसके कुछ देर बाद ही वह टर्बुलेंस की चपेट में आ गया। इसके बाद उसे चेन्नई की ओर डायवर्ट कर दिया गया।  इस विमान ने रात 8 बजे तिरुवनंतपुरम से उड़ान भरी थी लेकिन रात 10.35 पर चेन्नई में उतार दिया गया। एयर इंडिया के एक प्रवक्ता ने कहा, "10 अगस्त को तिरुवनंतपुरम से दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाली AI2455 के चालक दल ने संदिग्ध तकनीकी समस्या और रास्ते में खराब मौसम के कारण एहतियातन चेन्नई की ओर अपना मार्ग बदल लिया। विमान चेन्नई में सुरक्षित उतर गया, जहाँ विमान की जरूरी जाँच की जाएगी। हमें प्रभावित यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद है। चेन्नई में हमारे सहयोगी यात्रियों की परेशानी कम करने के लिए सहायता प्रदान कर रहे हैं और यात्रियों को जल्द से जल्द उनके गंतव्य तक पहुँचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कर रहे हैं।" वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दावा किया कि यह यात्रा भयावह रूप से त्रासदी के करीब पहुंच गई थी. उन्होंने कहा कि फ्लाइट पहले से ही लेट थी और उड़ान भरने के बाद तेज और अप्रत्याशित टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा. करीब एक घंटे बाद कैप्टन ने फ्लाइट सिग्नल फॉल्ट की जानकारी दी और विमान को चेन्नई डाइवर्ट कर दिया. कांग्रेस सांसद के मुताबिक, लगभग दो घंटे तक फ्लाइट चेन्नई एयरपोर्ट के ऊपर क्लियरेंस का इंतजार करती रही. पहली कोशिश में लैंडिंग के दौरान रनवे पर पहले से ही एक अन्य विमान मौजूद था. उस समय कैप्टन के त्वरित निर्णय से विमान को ऊपर खींच लिया गया और सभी यात्रियों की जान बच गई. फ्लाइट दूसरी कोशिश में सुरक्षित उतरी. वेणुगोपाल ने कहा, "हमें स्किल और किस्मत दोनों ने बचाया, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा किस्मत पर निर्भर नहीं हो सकती." कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने भी किया शेयर कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने भी वेणुगोपाल की पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा कि वह "शॉक्ड और डरे हुए" हैं. उन्होंने कहा कि AI 2455 फ्लाइट में टर्बुलेंस, फ्लाइट सिग्नल फॉल्ट और चेन्नई में रनवे पर लगभग टक्कर जैसी स्थिति बनी. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू को टैग करते हुए कहा कि यात्री सुरक्षा किस्मत पर नहीं छोड़ी जा सकती और तुरंत जवाब और कार्रवाई की मांग की. एअर इंडिया ने दी कांग्रेस सांसदों के दावे पर सफाई इस पूरे मामले पर एअर इंडिया ने बयान जारी कर दोनों सांसदों के दावों को खारिज किया है. एयरलाइन ने कहा, "चेन्नई डाइवर्जन एक प्रीकॉशनरी कदम था, जो संदिग्ध टेक्निकल इश्यू और खराब मौसम की वजह से लिया गया. पहली कोशिश में लैंडिंग के समय चेन्नई ATC ने गो-अराउंड का निर्देश दिया, लेकिन इसका कारण रनवे पर कोई अन्य विमान होना नहीं था." एअर इंडिया ने आगे कहा कि उनके पायलट ऐसे हालात से निपटने के लिए प्रशिक्षित होते हैं और इस फ्लाइट में भी सभी मानक प्रक्रियाओं का पालन किया गया. कंपनी ने इस घटना को यात्रियों के लिए असहज अनुभव बताते हुए खेद जताया और कहा कि सुरक्षा हमेशा उनकी पहली प्राथमिकता है. कांग्रेस महासचिव ने यात्रा को कष्टप्रद बताया विमान में सवार कांग्रेस महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने इस घटना को एक कष्टप्रद यात्रा बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “तिरुवनंतपुरम से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान संख्या AI 2455 – जिसमें मैं, कई सांसद और सैकड़ों यात्री सवार थे -एक भयावह त्रासदी के करीब पहुँच गई। देरी से शुरू हुई उड़ान एक कष्टदायक यात्रा में बदल गई। उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद, हमें अभूतपूर्व गड़बड़ी का सामना करना पड़ा। लगभग एक घंटे बाद, कैप्टन ने उड़ान सिग्नल में खराबी की घोषणा की और विमान को चेन्नई की ओर मोड़ दिया। लगभग दो घंटे तक, हम उतरने की अनुमति का इंतज़ार करते हुए हवाई अड्डे के चक्कर लगाते रहे, जब तक कि हमारे पहले प्रयास के दौरान एक दिल दहला देने वाला क्षण नहीं आ गया – बताया जाता है कि उसी रनवे पर एक और विमान था। उस क्षण, कैप्टन के तुरंत रुकने के फैसले ने विमान में सवार सभी लोगों की जान बचा ली। दूसरे प्रयास में विमान सुरक्षित उतर गया।” भाग्य और पायलट की कुशलता से बचे केसी वेणुगोपाल के मुताबिक, यह विमान सब के भाग्य और पायलट की कुशलता और सूझबूझ से बच सका। उन्होंने मामले में जवाबदेही तय करने के लिए घटना की जाँच की माँग की है। उन्होंने आगे कहा, "हम पायलट की कुशलता और भाग्य से बच गए। यात्रियों की सुरक्षा भाग्य पर निर्भर नहीं हो सकती। मैं @DGCAIndia और @MoCA_GoI से आग्रह करता हूँ कि इस घटना की तत्काल जाँच करें, जवाबदेही तय करें और सुनिश्चित करें कि ऐसी चूक फिर कभी न हो।" रनवे पर दो विमान के आरोप खारिज केसी वेणुगोपाल की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए, एयर इंडिया ने टिप्पणी की, "डियर मिस्टर वेणुगोपाल, हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि चेन्नई की ओर फ्लाइट को मोड़ना एक संदिग्ध तकनीकी समस्या और खराब मौसम की स्थिति के कारण एहतियाती था। चेन्नई हवाई अड्डे पर पहली बार उतरने के प्रयास के दौरान चेन्नई एटीसी द्वारा गो-अराउंड का निर्देश दिया गया था, न कि रनवे पर किसी अन्य विमान की मौजूदगी के कारण ऐसा हुआ।"