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वैज्ञानिकों का दावा: रूस की कैंसर वैक्सीन ने सभी ट्रायल में सफलता दर्ज की

रूस  रूस ने कैंसर के खिलाफ लड़ाई में एक नई सफलता हासिल की है. वहां की फेडरल मेडिकल एंड बायोलॉजिकल एजेंसी (FMBA) FMBA ने कैंसर की वैक्सीन तैयार की है. FMBD प्रमुख वेरोनिका स्क्वोर्त्सोवा ने कहा कि रूसी एंटरोमिक्स कैंसर वैक्सीन अब इस्तेमाल के लिए तैयार है. mRNA-बेस्ड इस वैक्सीन ने सभी प्रीक्लिनिकल टेस्ट को सफलतापूर्वक पार कर लिया है जिससे इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता साबित हो गई है. इस टीके का प्रारंभिक लक्ष्य कोलोरेक्टल कैंसर (कोलन कैंसर) होगा.  वैक्सीन ने पार किए सभी ट्रायल्स रिपोर्ट के अनुसार, रूस के कैंसर वैक्सीन ने शानदार प्रदर्शन किया है और FMBA की प्रमुख वेरोनिका स्क्वोर्त्सोवा ने ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम (EEF) में इसकी घोषणा की है.  वैज्ञानिकों को अब अप्रूवल का इंतजार स्कवोर्त्सोवा ने कहा, 'यह शोध कई वर्षों तक चला जिसमें से पिछले तीन साल सिर्फ मैंडेटरी प्रीक्लिनिकल स्टडीज को ही समर्पित थे. वैक्सीन अब इस्तेमाल के लिए तैयार है. हम आधिकारिक स्वीकृति की प्रतीक्षा कर रहे हैं.' उन्होंने कहा कि प्रीक्लिनिकल ट्रायल्स टीके की सुरक्षा, बार-बार इस्तेमाल के बावजूद इसकी प्रभावशीलता की पुष्टि करते हैं. शोधकर्ताओं ने इस दौरान ट्यूमर के आकार में कमी और ट्यूमर के विकास में कमी देखी. इसके अलावा अध्ययनों ने टीके के कारण मरीज की जीवित रहने की दर में वृद्धि का भी संकेत दिया. कई और प्रकार के कैंसर के टीकों पर भी काम जारी इस टीके का शुरुआती टार्गेट कोलोरेक्टल कैंसर होगा. इसके अलावा ग्लियोब्लास्टोमा (ब्रेन कैंसर) और विशिष्ट प्रकार के मेलेनोमा जिनमें ऑक्यूलर मेलेनोमा (एक प्रकार का आंख का कैंसर) के लिए टीके विकसित करने में उम्मीद बांधने वाली प्रगति हुई है जो वर्तमान में अपनी एंडवांस स्टेज पर हैं.

जापान के PM का बड़ा फैसला: पार्टी टूटने से रोकने के लिए छोड़ा पद

टोक्यो  जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इशिबा ने सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) में फूट से बचने के लिए यह कदम उठाया। जापानी मीडिया NHK ने इसकी पुष्टि की है। दरअसल, इशिबा की गठबंधन सरकार जुलाई में हुए ऊपरी सदन (हाउस ऑफ काउंसलर्स) के चुनाव में हार गई थी। इसके लिए इशिबा ने हाल ही में माफी मांगी थी और कहा था कि वह इस्तीफे पर विचार करेंगे। गौरतलब है कि चुनावी हार के बाद LDP में 'इशिबा को हटाओ' आंदोलन जोर पकड़ गया था। पार्टी के कुछ नेताओं और सांसदों ने उनके नेतृत्व पर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद से पार्टी के भीतर विरोध और तेज हो गया था। बता दें कि ऊपरी सदन के चुनाव परिणामों ने शिगेरू इशिबा की पार्टी पर उनकी पकड़ को कमजोर कर दिया था। इसके बावजूद उन्होंने कहा था कि वह अपने पद पर बने रहेंगे। उस समय जापान और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर बातचीत चल रही थी। वहीं, अमेरिका ने जापान पर टैरिफ को 25 से घटाकर 15 प्रतिशत करने का निर्णय लिया था। गौरतलब है कि पिछले साल इशिबा की पार्टी का निचले सदन में चुनावी प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। यह पार्टी का 15 साल में सबसे खराब प्रदर्शन था। इसके बाद जुलाई में ऊपरी सदन के चुनाव हुए, जहां पार्टी को एक बार फिर खराब प्रदर्शन का सामना करना पड़ा। तब इशिबा ने कहा था कि अभी अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण चर्चा चल रही है। ऐसे में इस चर्चा को बाधित करना बड़ी भूल हो सकती है।  

क्या गाजा युद्ध जल्द खत्म होगा? जानें इजरायल की बंधक रिहाई की मांग

गाजा इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने गाजा युद्ध को लेकर रविवार को यरुशलम में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि गाजा में चल रहा युद्ध तब समाप्त हो सकता है, जब बंधकों को रिहा कर दिया जाए। साथ ही, फिलिस्तीनी उग्रवादी समूह हमास अपने हथियार डाल दे। यह बयान हमास की ओर से अपनी लंबे समय से चली आ रही मांग को दोहराए जाने के एक दिन बाद आया है, जिसमें उसने कहा था कि वह सभी बंधकों को रिहा कर देगा, बशर्ते इजरायल युद्ध समाप्त करने और गाजा शहर से अपनी सेना वापस बुलाने पर सहमत हो। गिदोन सार का यह बयान इजरायल-हमास संघर्ष के बीच शांति स्थापना की दिशा में अहम कदम हो सकता है, क्योंकि यह युद्ध को समाप्त करने की शर्तों को स्पष्ट करता है। हालांकि, यह बयान दोनों पक्षों की परस्पर विरोधी मांगों को भी उजागर करता है, क्योंकि हमास की शर्तें इजरायल की मांगों से पूरी तरह भिन्न हैं। यह बयान क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा को तेज कर सकता है, क्योंकि इससे मध्यस्थता और कूटनीतिक प्रयासों के लिए नई संभावनाएं खुलती हैं। यह दोनों पक्षों के बीच गहरे अविश्वास को भी दर्शाता है, जो शांति वार्ता को और जटिल बना सकता है। शहर को खाली करने का निर्देश इस बीच, इजरायल की सेना ने गाजा शहर के फिलिस्तीनियों को निर्देश दिया कि वे शहर को खाली कर दें और दक्षिण स्थित मानवीय क्षेत्र में चले जाएं। इजरायल ने शनिवार को इसी के साथ शहर की बहुमंजिला इमारतों को निशाना बनाया। सहायता समूहों ने चेतावनी दी कि गाजा से बड़े पैमाने पर लोगों को निकालने से मानवीय संकट की स्थिति और विकराल हो सकती है। खाद्य संकट के मद्देनजर दुनिया के अग्रणी संगठन ने शहर को अकालग्रस्त घोषित कर दिया है। अधिकांश परिवार लगभग 2 वर्ष से चल रहे इजराइल-हमास युद्ध के कारण कई बार विस्थापित हो चुके हैं। उनका कहना है कि उनके पास जाने के लिए कोई स्थान नहीं बचा है, क्योंकि इजरायली सेना ने बार-बार उन शिविरों पर बमबारी की है, जिन्हें उसने मानवीय क्षेत्र घोषित किया था।  

आपातकाल की चेतावनी! नायर अस्पताल के डीन को ईमेल के जरिए धमकी

मुंबई  रविवार को मुंबई शहर के नायर अस्पताल में बम धमाके की नई धमकी मिलने से पुलिस अलर्ट पर रही। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शनिवार देर रात लगभग 11 बजे अस्पताल के डीन को एक ईमेल मिला, जिसमें अस्पताल परिसर को उड़ाने की बात कही गई थी। सूचना मिलते ही पुलिस और बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वाड (BDDS) की टीमों ने मौके पर पहुंचकर कई घंटों तक तलाशी अभियान चलाया। हालांकि जांच में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली और धमकी को झूठा घोषित कर दिया गया। यह घटना ठीक दो दिन बाद सामने आई है, जब एक फोन कॉल में दावा किया गया था कि 34 “ह्यूमन बम” 400 किलो आरडीएक्स के साथ मुंबई में अलग-अलग वाहनों में लगाए गए हैं। कॉल करने वाले ने खुद को लश्कर-ए-जिहादी संगठन का सदस्य बताया था। पुलिस ने उस समय भी व्यापक तलाशी ली थी, लेकिन धमकी झूठी साबित हुई। गणेश विसर्जन के दौरान सुरक्षा को देखते हुए मुंबई और पूरे महाराष्ट्र में पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी थी। सिर्फ मुंबई में ही 21,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। हाल के महीनों में मुंबई को लगातार बम धमाकों की झूठी धमकियां मिल रही हैं। पिछले हफ्ते ठाणे के कलवा रेलवे स्टेशन को उड़ाने की धमकी देने वाले 43 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। अगस्त में गिरगांव स्थित इस्कॉन मंदिर को ईमेल के जरिए धमकी मिली, जो फर्जी निकली। जुलाई में छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-2 को लेकर भी ऐसी धमकी दी गई थी। पुलिस ने बताया कि नायर अस्पताल से जुड़ी धमकी पर भी मामला दर्ज कर जांच जारी है।  

भारी भीड़ और बिजली का खतरा: मुंबई में गणपति विसर्जन के दौरान हादसा, 5 अस्पताल में भर्ती

मुंबई  महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में गणपति विसर्जन जुलूस के दौरान रविवार को एक दुखद घटना घटी। रास्ते में लटक रहा बिजली का तार मूर्ति को टच कर गया, जिससे 6 भक्त घायल हो गए और उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल लाए जाने पर एक व्यक्ति को डॉक्टर्स ने मृत घोषित कर दिया, जिसकी पहचान 36 वर्षीय बिनु सुकुमारन कुमरन के तौर पर हुई है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अनुसार, बाकी पांच घायल भक्तों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह घटना साकीनाका इलाके में खैरानी रोड पर सुबह करीब 10.45 बजे हुई, जब बिजली का एक तारगणपति की मूर्ति को छू गया। अधिकारी ने बताया कि 5 घायलों (सुभांशु कामत, तुषार गुप्ता, धर्मराज गुप्ता, करण कनौजिया और अनुष गुप्ता) को पैरामाउंट अस्पताल में भर्ती कराया गया और उनकी हालत स्थिर बताई गई है। राज्य में बड़े पैमाने पर बप्पा को विदाई देने के दौरान कुछ जगहों से हादसों की भी खबर आई। पालघर में गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान तीन लोग बह गए थे। हालांकि, उन्हें बचा लिया गया। विसर्जन शोभायात्रा के दौरान भारतीय तटरक्षक बल के एक हेलीकॉप्टर और मुंबई पुलिस के ड्रोन ने हवाई निगरानी बनाए रखी। गणेश मंडलों की प्रतिमाओं का विसर्जन लालबागचा राजा सहित प्रमुख सार्वजनिक गणेश मंडलों की प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए ले जाए जाने की शोभायात्राएं अनंत चतुर्दशी के अवसर पर शनिवार को शुरू हुईं और रात भर जारी रहीं। ये प्रतिमाएं रविवार तड़के समुद्र तट पर पहुंची जिसके बाद विसर्जन संबंधी प्रक्रिया प्रारंभ हुई। लालबागचा राजा सहित सार्वजनिक मंडलों की कम से कम आधा दर्जन गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन गिरगांव चौपाटी पर किया जा रहा है। इसके पूरा होने में कुछ समय लगने की संभावना है। लालबागचा राजा की मूर्ति को एक विशेष रूप से निर्मित मंच पर ले जाने के प्रयास जारी हैं और फिर उसे विसर्जन के लिए गहरे समुद्र में ले जाया जाएगा।  

भारतीय एजेंट जेसन मिलर ने ट्रंप से की मुलाकात, मोदी सरकार के हित में कर रहे लॉबिंग

वाशिंगटन भारत और अमेरिका के बीच चल रहे टैरिफ विवाद के बीच जानी-मानी राजनीतिक लॉबिस्ट और डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी जेसन मिलर ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की है। मिलर वही लॉबिस्ट हैं जिन्हें कुछ महीने पहले भारत सरकार ने ट्रंप प्रशासन तक अपनी कूटनीतिक पहुंच मजबूत करने के लिए नियुक्त किया था। जेसन मिलर ने एक्स पर राष्ट्रपति ट्रंप संग अपनी तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “वॉशिंगटन में शानदार सप्ताह बिताया। सबसे खास रहा हमारे राष्ट्रपति को ऐक्शन में देखने का मौका।” सार्वजनिक खुलासों के अनुसार मिलर भारतीय हितों की वकालत करने वाले रजिस्टर्ड विदेशी एजेंट हैं। भारत सरकार ने अप्रैल 2024 में उनकी लॉबिंग फर्म एसएचडब्ल्यू पार्टनर्स एलएलसी को नियुक्त किया था। इस अनुबंध के तहत भारत हर महीने फर्म को 1.5 लाख डॉलर करीब 1.25 करोड़ रुपये फीस देती है। एक साल का यह अनुबंध 1.8 मिलियन डॉलर करीब 15 करोड़ रुपये का है। फर्म को अमेरिकी सरकार, कांग्रेस, थिंक टैंक और अन्य संस्थानों के साथ भारत से जुड़े मुद्दों पर रणनीतिक सलाह और सरकारी संपर्क बढ़ाने का काम सौंपा गया है। ट्रंप के भरोसेमंद सहयोगी जेसन मिलर ट्रंप के पुराने राजनीतिक सहयोगी हैं और 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में उनके मुख्य मीडिया प्रवक्ता के तौर पर सुर्खियों में आए थे। उन्हें वाइट हाउस का कम्युनिकेशंस डायरेक्टर बनना था, लेकिन निजी विवादों के चलते पद संभालने से पहले ही रेस से हटना पड़ा। उन पर ट्रंप कैंपेन की एक अन्य अधिकारी से संबंध और यौन उत्पीड़न के आरोप भी लगे। विवादों के बावजूद वे ट्रंप के करीबी बने रहे और 2020 व 2024 के चुनावों में भी अहम सलाहकार की भूमिका निभाई। मुलाकात का आधिकारिक एजेंडा सामने नहीं आया है, लेकिन यह बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में फिर से खींचतान बढ़ी है। दोनों देशों के बीच टैरिफ व आर्थिक रणनीतियों पर चर्चा हो रही है।  

यूक्रेन की राजधानी पर रूस का भीषण हमला, सरकारी बिल्डिंग्स ध्वस्त

यूक्रेन  युद्धविराम के लिए चल रहे प्रयासों के बीच रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर ताबड़तोड़ हमले कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक रूस ने सैकड़ों ड्रोन अटैक किए हैं। हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और 11 लोग घायल हो गए। यूक्रेनी अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। कीव नगर प्रशासन के प्रमुख तैमूर तकाचेंको ने बताया कि मृतकों में एक साल का बच्चा भी शामिल है। उसका शव बचावकर्मियों ने मलबे से निकाला। वहीं रूस के ड्रोन अटैक में कीव की एक सरकारी इमारत में भी आग लग गई। कीव के मेयर विटालि क्लिट्स्को के अनुसार, रूसी ड्रोन का मलबा स्वियातोशिन्स्की जिले और डार्नित्स्की जिले में एक आवासीय इमारत पर गिरा। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को खत्म करने के लिए कई प्रयास कर चुके हैं। हालांकि अब तक उन्हें कोई कामयाबी हासिल नहीं हुई है। बीते दिनों राष्ट्रपति पुतिन ने अलास्का में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी। इसके बाद ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी बातचीत की। हालांकि रूस और यूक्रेन दोनों ही अपने शर्तों पर समझौता करने को तैयार नहीं हैं। एक दिन पहले ही यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा था कि सितंबर के पहले छह दिनों में ही रूस ने 1300 से ज्यादा ड्रोन अटैक किए हैं। इसके अलावा 900 गाइडेड हवाई बम और 50 से ज्यादा मिसाइलें दागी गई हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं है कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध थमने की बजाय जोर पकड़ रहा है।  

संसद के सामने विरोध का बवंडर: ब्रिटेन में भारी प्रदर्शन, 400 से ज्यादा लोग हिरासत में

ब्रिटेन  ब्रिटेन की संसद के बाहर बड़ी संख्या में लोगों ने फिलिस्तीन एक्शन समूह पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे 400 से ज्यादा लोगों गिरफ्तार कर लिया। ब्रिटेन की सरकार ने फिलिस्तीन एक्शन समूह को आतंकवादी संगठन घोषित किया है और इसी के विरोध में प्रदर्शनकारी संसद के बाद इकठ्ठा हुए थे। इन लोगों ने जमकर नारेबाजी भी की। विरोध प्रदर्शन का आयोजन करने वाले समूह डिफेंड अवर ज्यूरीज ने कहा कि लंदन में प्रदर्शन में 1500 लोग शामिल हुए। उन्होंने ‘मैं नरसंहार का विरोध करता हूं, मैं फिलिस्तीनी कार्रवाई का समर्थन करता हूं’ जैसे नारे लिखे हुए पोस्टर लिए हुए थे। कुछ ही मिनटों में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया, जबकि राहगीर ‘शर्म करो’ और ‘मेट पुलिस, एक पक्ष चुनो, न्याय या नरसंहार’ के नारे लगा रहे थे। किन धाराओं में हुई गिरफ्तारी विरोध प्रदर्शन शुरू होने के 8 घंटे बाद पुलिस ने कहा कि उसने 425 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें से 25 से अधिक को अधिकारियों पर हमला करने या सार्वजनिक व्यवस्था के उल्लंघन के लिए और बाकी को आतंकवाद अधिनियम के तहत अरेस्ट किया गया। इस बीच, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर ने शनिवार को सभी स्तरों के मंत्रिस्तरीय पदों में बड़े फेरबदल किया। इसके तहत महिला सांसदों को मंत्रिमंडल के सबसे सीनियर पदों पर नियुक्त किया है। पाकिस्तानी मूल की शबाना महमूद की गृह मंत्री के पद पर पदोन्नति हुई। गृह कार्यालय की पूर्व अधिकारी यवेट कूपर को विदेश मंत्री नियुक्त किया गया। चांसलर रेचल रीव्स के साथ-साथ शीर्ष तीन सरकारी पदों का नेतृत्व पहली बार महिलाओं के हाथ में होगा।  

सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत! 3% DA बढ़ने वाला है, तारीख सामने आई

नई दिल्ली  त्योहारी सीजन से पहले केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को तोहफा देने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में 3% की बढ़ोतरी का ऐलान करने वाली है। इस फैसले से देशभर में 1.2 करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी लाभान्वित होंगे। जानकारी के अनुसार, इसका औपचारिक ऐलान अक्टूबर के पहले हफ्ते में किया जा सकता है। अभी कितना भत्ता मिल रहा मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने इस बार घोषणा का समय खास तौर पर दिवाली के समय करेगी। ताकि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को त्योहारी मौसम में अतिरिक्त राहत मिल सके। बता दें कि संशोधन के बाद कर्मचारियों का डीए 55% से बढ़कर 58% हो जाएगा। यह बढ़ोतरी जुलाई 2025 से लागू मानी जाएगी यानी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जुलाई से सितंबर तक के तीन महीने का एरियर (बकाया) भी मिलेगा, जो अक्टूबर की सैलरी के साथ दिए जाने की संभावना है। कब-कब होता है डीए रिवीजन? केंद्र सरकार हर साल दो बार डीए में बढ़ोतरी करती है। पहला संशोधन होली से पहले (जनवरी-जून अवधि के लिए)। दूसरा संशोधन दिवाली से पहले (जुलाई-दिसंबर अवधि के लिए)। पिछले साल अक्टूबर 2024 में सरकार ने दिवाली से करीब 2 हफ्ते पहले डीए बढ़ाने का ऐलान किया था। इस साल दिवाली 20-21 अक्टूबर 2025 को है और उसी को देखते हुए इसे कर्मचारियों के लिए त्योहारी तोहफा माना जा रहा है। डीए कैसे तय होता है? डीए की गणना 7वें वेतन आयोग के तहत औद्योगिक श्रमिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के आधार पर की जाती है। इसका फार्मूला 12 महीने के CPI-IW औसत पर आधारित होता है। जुलाई 2024 से जून 2025 तक CPI-IW औसत 143.6 रहा, जिसके आधार पर डीए दर 58% तय हुई है। यानि अब केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का महंगाई भत्ता 3% बढ़कर 58% हो जाएगा, जिससे लाखों परिवारों को आर्थिक राहत और त्योहारी सीजन में अतिरिक्त लाभ मिलेगा। सैलरी और पेंशन पर असर अगर किसी कर्मचारी का बेसिक वेतन ₹50,000 है, तो पहले 55% डीए के हिसाब से उसे ₹27,500 मिल रहा था। अब 58% डीए लागू होने पर यह बढ़कर ₹29,000 हो जाएगा। यानी हर महीने कर्मचारी को ₹1,500 अतिरिक्त मिलेंगे। इसी तरह, यदि किसी पेंशनभोगी की बेसिक पेंशन ₹30,000 है, तो पहले 55% डीआर के तहत उसे ₹16,500 मिल रहा था। अब 58% पर यह राशि बढ़कर ₹17,400 हो जाएगी। यानी पेंशनभोगी को हर महीने ₹900 ज्यादा मिलेंगे। हालांकि, यह बढ़ोतरी व्यक्ति की सैलरी या पेंशन पर निर्भर करेगी, लेकिन सामूहिक रूप से देखें तो करोड़ों परिवारों की आय में अच्छा-खासा इजाफा होगा। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि फिलहाल यह डीए बढ़ोतरी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को अल्पकालिक राहत देती है, लेकिन असली बदलाव 8वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद दिखेगा।  

मदरसा का भयानक सच: ओडिशा में छात्र के साथ शोषण और हत्या का मामला

ओडिशा  ओडिशा के नयागढ़ जिले में एक मदरसा में नाबालिग छात्र की कथित तौर पर हत्या कर दी गई है। पुलिस के अनुसार, उस छात्र का लंबे समय तक यौन उत्पीड़न किया गया और फिर उसके ही सीनियर ने उसे मार डाला। इस भयानक घटना के सिलसिले में पांच नाबालिगों को पकड़ा गया है। पीड़ित छात्र कटक जिले का रहने वाला था और नीलमणि में एक मदरसा में पढ़ता था। उसके पिता की शिकायत के अनुसार, उसकी हत्या मदरसा परिसर में एक सुनसान बाथरूम के अंदर की गई और उसके शव को एक सेप्टिक टैंक में फेंक दिया गया। पुलिस ने बताया कि पीड़ित को एक सीनियर छात्र द्वारा बार-बार प्रताड़ित किया जा रहा था। 31 अगस्त को दोपहर 1 बजे के करीब, दो छात्रों ने उसका यौन शोषण करने के बाद उस पर हमला किया और उसे मृत मानकर एक सेप्टिक टैंक में छोड़ दिया। बच्चा उस रात तो भागने में कामयाब रहा, लेकिन 2 सितंबर को उसे बचाने के बहाने दो छात्रों ने फिर से उसी जगह पर बुलाया। तीन अन्य छात्रों के साथ मिलकर उन्होंने कथित तौर पर उसका यौन शोषण किया। इसके बाद गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी और शव को टैंक में फेंक दिया। एक फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से नमूने एकत्र किए और गवाहों के बयानों ने आरोपियों की संलिप्तता की पुष्टि की। 12 से 15 साल की उम्र के सभी पांचों नाबालिगों पर यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने कहा कि उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। मदरसा ने उनके नाम अपने रिकॉर्ड से हटा दिए हैं और उनके जन्म प्रमाण पत्र जब्त कर लिए हैं। आगे की कार्यवाही के लिए यह मामला किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष रखा गया है।