samacharsecretary.com

भयंकर संकट में गाजा, यूएन ने किया अलर्ट, इजरायल की सुप्रीम कोर्ट भी हुई नाराज

गाजा  गाजा में इजरायली हमलों में अब तक 64 हजार लोगों की जान गई है। वहीं भुखमरी से मरने वालों को कोई आंकड़ा ही सामने नहीं आया है। अंतरराष्ट्रीय संगठन गाजा में अकाल को लेकर बेहद चिंतित हैं। यूएन की एजेंसी का भी कहना है कि अगर इजरायल चाहे तो गाजा अकाल से बच सकता है। ग्लोबल हंगर मॉनीटर के मुताबिक हजारों फिलिस्तीनी अब भी भुखमरी का शिकार हैं। वहीं गाजा सिटी में इजरायली हमला तेज होने के बाद यहां स्थिति काफी खराब हो गई है। इजरायल ने मार्च से मई तक 11 महीने के लिए गाजा में मानवीय सहायता पर भी रोक लगा दी थी। वहीं अब इजरायल का दावा है कि वह आम लोगों तक राशन पहुंचा रहा है। वहीं यूएन की एजेंसी के मुताबिक यह सहायता पर्याप्त नहीं है। यूएन ऐड के चीफ टॉम फ्लेचर ने कहा कि समय तेजी से गुजर रहा है। अगर गाजा को अकाल से बचाना है तो इसके लिए बहुत कम समय बचा है। इजरायल की रक्षा एजेंसी COGAT कहना है कि पिछले सप्ताह गाजा में 1900 ट्रंक भेजे गए हैं। धीरे-धीरे सप्लाई बढ़ाई जा रही है। एजेंसी ने कहा, यह सहायता केवल आम लोगों के लिए है ना कि हमास के लिए। इजरायल का कहना है कि गाजा सिटी की बहुमंजिला इमारतों पर हमास का कब्जा है इसलिए आम लोग इसे खाली कर दें। बीते दिनों इजरायल ने गाजा सिटी की कई हाई राइज को निशाना बनाया है। इन हमलों में कम से कम 14 लोग मारे गए। गाजा के लोगों का कहना है कि गाजा सिटी राफाह बन जाए, इससे पहले हमास को इजरायल के साथ बात करके युद्ध खत्म करना चाहिए। इजरायल में भी आम जनता गाजा के इस युद्ध का समर्थन नहीं करती है। शनिवार को भी हजारों लोगों ने युद्ध खत्म करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। माना जा रहा है कि गाजा में अब भी 48 इजरायली बंधक जिंदा हैं। इजरायली सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार को लताड़ा इजराइल के सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को कहा कि सरकार फलस्तीनी कैदियों को पर्याप्त मात्रा में भोजन उपलब्ध नहीं करा रही। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कैदियों को पर्याप्त भोजन मुहैया कराएं। यह लगभग ढाई साल में ऐसा दुर्लभ मामला है, जिसमें उच्चतम न्यायालय ने सरकार के खिलाफ कोई फैसला सुनाया है। युद्ध शुरू होने के बाद से इजराइल ने गाजा में हमास से जुड़े होने के संदेह में हजारों लोगों को कैद किया है। हजारों लोगों को महीनों हिरासत में रखने के बाद छोड़ा भी गया है। अधिकार समूहों ने जेलों और हिरासत केंद्रों में कैदियों के साथ बड़े पैमाने पर दुर्व्यवहार होने की जानकारी दी है, जिनमें पर्याप्त मात्रा में भोजन व स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध न कराना और अस्वच्छता जैसी समस्याएं शामिल हैं। मार्च में इजराइली जेल में 17 वर्षीय फलस्तीनी लड़के की मौत हो गई थी, जिसके बाद चिकित्सकों ने कहा था कि मौत का मुख्य कारण भूख हो सकती है।

फेसबुक-यूट्यूब बैन के विरोध में नेपाल में हिंसक प्रदर्शन, गोलीबारी में 1 की मौत, 80 घायल

काठमांडू  सोमवार को नेपाल की राजधानी काठमांडू के न्यू बानेश्वर में मौजूद संसद भवन परिसर में उस समय तनाव फैल गया जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए और गेट पार कर संसद के भीतर प्रवेश की कोशिश की. ये प्रदर्शनकारी नई जेनरेशन के वो युवा हैं, जो देश में सोशल मीडिया पर बैन लगने के बाद काफी नाराज हैं. इन युवाओं ने पहले शांतिपूर्ण विरोध की बात कही थी लेकिन प्रदर्शन के उग्र हो गया और वे संसद भवन तक पहुंच गए. नेपाल में हो रहे इन प्रदर्शनों के पीछे वजह मुख्य रूप से सोशल मीडिया पर लगाया गया प्रतिबंध है. इस प्रदर्शन में मौजूद ज्यादातर प्रदर्शनकारी वही युवा हैं, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करते हैं. जब प्रदर्शनकारी बेकाबू होकर संसद परिसर तक पहुंचने लगे तो काठमांडू डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिस की ओर से पूरे न्यू बानेश्वर में कर्फ्यू लगा दिया गया है. मुख्य जिला अधिकारी छाबीलाल रिजाल ने सेक्शन 6 के तहत दोपहर 12 बजकर 30 मिनट से कर्फ्यू लगाया है, जो रात 10 बजे तक लगा रहेगा.  हजारों की संख्या में Gen-Z लड़के और लड़कियां सड़कों पर उतर आए हैं. प्रदर्शनकारी नेपाल के संसद परिसर में घुस गए. इसे देखते हुए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और पानी की बौछार की.  ये प्रदर्शनकारी नेपाल में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. इसके मद्देनजर काठमांडू में कर्फ्यू लगा दिया गया है. सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.  इस घटना से जुड़ी पल-पल की अपडेट यहां पढ़ें:- – काठमांडू में Gen-Z प्रोटेस्ट के उग्र होने के बाद नेपाली सेना की तैनाती के आदेश दिए गए हैं. – नेपाल सरकार ने मौजूदा स्थिति का आकलन करने के लिए इमरजेंसी सुरक्षा बैठक बुलाई है. पुलिस ने रात 10 बजे तक के लिए काठमांडू में कर्फ्यू लगा दिया है.  – काठमांडू में कर्फ्यू का आदेश जारी कर दिया गया है. इसके तहत चार जिलों में किसी के भी प्रवेश या निकास, किसी भी प्रकार की सभा, जुलूस, प्रदर्शन, सभा, बैठक या घेराबंदी करने पर प्रतिबंध है. – इस प्रोटेस्ट में एक शख्स की मौत हो गई जबकि 80 घायल हो गए. – नेपाल में वर्तमान स्थिति को देखते हुए भारत-नेपाल बॉर्डर पर चौकसी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं. सूत्रों के हवाले से खबर है कि SSB ने भारत नेपाल बॉर्डर पर चौकसी बढ़ा दी है. भारत-नेपाल बॉर्डर की सुरक्षा में SSB तैनात है. SSB ने सुरक्षाकर्मियों और सर्विलांस बढ़ा दिया है.  – यह प्रोटेस्ट लगातार उग्र होता जा रहा है. दमाक में पुलिस फायरिंग में कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए हैं. घायलों को अस्पताल ले जाया गया है. – प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हिंसक झड़प हो रही है. प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं. प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार के खिलाफ काठमांडू के विभिन्न शहरों में यह Gen-Z रिवोल्यूशन शुरू हुआ है. इस दौरान प्रदर्शनकारी संसद भवन में घुए गए. पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए आंसू गैस के गोले दागे. देश की नई युवा पीढ़ी के द्वारा सरकार के द्वारा सोशल मीडिया बैन किए जाने से लेकर भ्रष्टाचार तक के खिलाफ प्रदर्शन किया जा रहा है.  इस प्रदर्शन में हजारों युवा सड़क पर यात्रा सरकार के खिलाफ नाराबाजी करते दिखाई दे रहे हैं. प्रदर्शन के दौरान सरकार ने घंटों तक फोन और इंटरनेट सेवाएं बाधित कर दी थी.  काठमांडू के मेयर ने युवाओं के इस प्रोटेस्ट को अपना समर्थन पहले ही दे दिया है. वहीं, प्रधानमंत्री ओली का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि युवाओं को ये पता होगा कि कानून का उल्लंघन करने का क्या खामियाजा भुगतना पड़ता है.  नेपाल सरकार ने सोशल मीडिया पर क्यों लगाया बैन? नेपाल सरकार ने चार सितंबर को फेसबुक, X, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाया है क्योंकि इन प्लेटफॉर्म्स ने नेपाल सरकार के साथ रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था. सरकार ने 2024 में एक नया कानून लागू किया था, जिसके तहत सभी सोशल मीडिया कंपनियों को नेपाल में ऑपरेशन के लिए स्थानीय कार्यालय स्थापित करना जरूरी है और टैक्सपेयर के रूप में पंजीकरण करना अनिवार्य था. इस नियम का पालन नहीं करने पर सरकार ने यह कदम उठाया है. इसके पीछे सरकार का तर्क है कि सोशल मीडिया पर अनियंत्रित कंटेंट जैसे फर्जी खबरें, उकसाने वाले कंटेंट और अवैध गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए यह जरूरी था. हालांकि, इस फैसले की व्यापक आलोचना हुई है क्योंकि इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला माना जा रहा है. कई लोगों का मानना है कि यह प्रतिबंध राजतंत्र समर्थकों के प्रदर्शनों और सरकार विरोधी भावनाओं को दबाने का प्रयास हो सकता है, जो हाल के महीनों में बढ़े हैं. नेपाल सरकार के द्वारा फेसबुक, ट्विटर, वाट्सएप और यूट्यूब जैसे 26 सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रतिबंध लगाने से नाराज युवाओं ने आठ सितंबर से Gen-Z रिवोल्यूशन के नाम से प्रदर्शन शुरू किया है. बता दें कि प्रधानमंत्री केपी ओली की सरकार ने चार सितंबर को फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, वॉट्सऐप, रेडिट और X जैसे 26 सोशल मीडिया ऐप्स पर बैन लगा दिया था. सरकार ने कहा है कि सोशल मीडिया पर लगा ये बैन तभी हटेगा, जब ये कंपनियां नेपाल में अपना ऑफिस खोल लें, सरकार के समक्ष पंजीकरण कराएं और गड़बड़ी रोकने के लिए सिस्टम बनाएं. नेपाल में अब तक सिर्फ टिकटॉक, वाइबर, निम्बज, विटक और पोपो लाइव ने ही कंपनी रजिस्ट्रार ऑफिस में रजिस्ट्रेशन कराया है. 

तूफान Kiko ने बढ़ाया हवाई का संकट, अमेरिकी प्रशासन ने लगाई इमरजेंसी

वाशिंगटन अमेरिका का हवाई राज्य एक शक्तिशाली तूफान का सामना कर सकता है। श्रेणी 4 के तूफान 'किको' (Kiko) के द्वीप समूह के करीब आने के कारण प्रशासन ने आपातकाल की घोषणा कर दी है। 'द हिल' की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय मौसम सेवा (NWS) ने बताया कि  सुबह यह तूफान होनोलूलू से लगभग 1,205 मील पूर्व-दक्षिण-पूर्व में था। इसकी हवाओं की रफ्तार 130 मील प्रति घंटे थी और यह 25 मील प्रति घंटे की गति से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ रहा था। मौसम विभाग का अनुमान है कि यह तूफान तक बिग आइलैंड और माउई तक पहुंच सकता है। इसके सोमवार देर रात और सप्ताह के मध्य तक पूर्वी हवाई द्वीप समूह पर अपने चरम पर पहुंचने की संभावना है। कार्यवाहक गवर्नर सिल्विया ल्यूक ने आपातकाल की स्थिति घोषित करते हुए निवासियों और पर्यटकों से लगातार अपडेट्स पर नजर रखने और आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अधिकारी किसी भी क्षति से निपटने के लिए संसाधनों को जुटाने, मलबा हटाने और बुनियादी ढांचे को सुरक्षित करने के लिए तैयार हैं। कमजोर होकर तट से टकराने की उम्मीद हालांकि, वर्तमान में यह तूफान बहुत शक्तिशाली है, लेकिन हवाई के आस-पास का ठंडा पानी इसके तट के करीब आते-आते इसे कमजोर कर सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि बिग आइलैंड पर लैंडफॉल (तट से टकराने) से पहले यह श्रेणी 2 और 1 में बदल जाएगा और संभवतः एक उष्णकटिबंधीय तूफान में परिवर्तित हो जाएगा। तीन दशकों बाद बड़ा खतरा हवाई इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी (EMA) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि यदि यह तूफान अपनी ताकत बरकरार रखता है, तो हवाई को तीन दशकों में पहली बार किसी बड़े तूफान का सामना करना पड़ सकता है। इससे पहले सितंबर 1992 में आए तूफान 'इनिकी' ने राज्य में काफी तबाही मचाई थी, जो हवाई के इतिहास का सबसे शक्तिशाली और विनाशकारी तूफान था। उस समय इसकी हवाओं की गति 145 मील प्रति घंटे थी।

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़, एक ढेर, तीन जवान घायल

कुलगाम जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के गुड्डार इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई है. जानकारी के अनुसार, सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों पर छिपे आतंकियों ने फायरिंग कर दी, जिसके बाद गोलीबारी तेज हो गई. पहले जानकारी सामने आई थी कि इलाके में 3 से 4 आतंकियों के छिपे होने की आशंका है, लेकिन अब बताया जा रहा है कि मुठभेड़ के दौरान एक आतंकी को मार गिराया गया है. फिलहाल सुरक्षाबलों ने क्षेत्र को घेर लिया है और ऑपरेशन जारी है. आतंकियों की तलाश के दौरान बताया जा रहा है कि सुरक्षाबलों के तीन जवान गोलीबारी के दौरान घायल हो गए हैं, जिसमें एक सेना के अधिकारी हैं. घायल होने के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है. कुलगाम एनकाउंटर के दौरान अब तक ऑपरेशन में एक आतंकी मारा गया है. वह सेब के बागान से भागने की कोशिश कर रहा था, तभी सुरक्षाबलों ने उसे ढेर कर दिया. कहा जा रहा है कि गुड्डार इलाके में घिरे आतंकी लश्कर-ए-तैयबा के हैं. सर्च ऑपरेशन के दौरान आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग की. उनकी तलाश की जा रही है. भारतीय सेना ने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस से मिली विशेष खुफिया सूचना के आधार पर संयुक्त सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। वहीं, सीआरपीएफ ने कहा कि सतर्क जवानों ने संदिग्ध गतिविधि देखी और चुनौती देने पर आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद हुई मुठभेड़ में एक आतंकी ढेर हो गया, जबकि एक जूनियर कमीशंड ऑफिसर घायल हो गए। इंटरनेशनल बॉर्डर से पाकिस्तानी नागरिक गिरफ्तार आतंकियों के साथ मुठभेड़ के बीच, जम्मू के आरएस पुरा सेक्टर में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास एक पाकिस्तानी नागरिक को हिरासत में लिया है. जानकारी के मुताबिक, बीएसएफ जवानों ने कल देर शाम सीमा स्तंभ के पास संदिग्ध हलचल देखी थी. तुरंत सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया और इस दौरान एक पाकिस्तानी नागरिक को पकड़ लिया गया. सुरक्षा बलों ने उसे मौके पर ही हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. फिलहाल उसकी पहचान और सीमा पार से आने के मकसद की जांच की जा रही है. बीएसएफ अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती पूछताछ के बाद ही उसके इरादों और पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी सामने आ सकेगी. सीमा पर सुरक्षा को देखते हुए इलाके में गश्त और सर्चिंग और तेज कर दी गई है.

बच्चों से जवान तक: भारत में ये बीमारियां बना रही 56% मौतों का मुख्य कारण

नई दिल्ली  भारत में दिल की बीमारियां अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई हैं। बीते कुछ सालों में 10 साल के बच्चों से लेकर जिम में वर्कआउट करते नौजवानों तक को हार्ट अटैक पड़ते देखा गया है। सोशल मीडिया पर लगभग हर हफ्ते ऐसे दिल दहला देने वाले वीडियो सामने आते हैं, जो इस खतरे की गंभीरता को उजागर करते हैं। हाल ही में महाराष्ट्र के कोल्हापुर में एक 10 साल के बच्चे की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई, जिससे पूरे देश में चिंता की लहर दौड़ गई है। अब एक सरकारी रिपोर्ट ने इस डर को और गहरा कर दिया है। भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे (SRS) के अनुसार, देश में होने वाली कुल मौतों में से करीब एक-तिहाई मौतें सिर्फ हार्ट अटैक के कारण हो रही हैं। यानी भारत में हर तीसरी मौत दिल से जुड़ी बीमारी की वजह से हो रही है। कौन सी बीमारियां ले रही हैं सबसे ज्यादा जान? इस रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि भारत में अब संक्रामक रोगों से ज्यादा जानलेवा साबित हो रहे हैं गैर-संक्रामक रोग (Non-communicable diseases – NCDs)। आंकड़ों के मुताबिक:- दिल की बीमारियां (Heart Attack/Cardiovascular issues): 31% मौतें सांस के संक्रमण (Respiratory Infections): 9.3% कैंसर व ट्यूमर (Tumors): 6.4% पुरानी सांस की बीमारियां (Chronic Respiratory Diseases): 5.7% पाचन संबंधी समस्याएं: 5.3% बुखार और वायरल इंफेक्शन: 4.9% डायबिटीज (Diabetes Mellitus): 3.5% मूत्र और जननांग तंत्र की बीमारियां: 3% कुल मिलाकर, 56.7% मौतें अब नॉन-कम्युनिकेबल डिजीजेज यानी लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों की वजह से हो रही हैं।   हार्ट अटैक क्यों बन रहा है बड़ा खतरा? एक वक्त था जब हार्ट अटैक सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी मानी जाती थी, लेकिन अब यह तेजी से युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है – बदलती जीवनशैली। देर तक बैठकर काम करना, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, अनियमित खानपान, जंक फूड का अत्यधिक सेवन और नींद की अनदेखी जैसी आदतें दिल पर बुरा असर डाल रही हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कोरोना वैक्सीन को भी हार्ट अटैक से जोड़ने की कोशिश की गई थी, लेकिन स्वास्थ्य एजेंसियों ने इसे खारिज किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों के पीछे सबसे बड़ा हाथ लाइफस्टाइल डिसऑर्डर का है, न कि वैक्सीन का। कैंसर भी कम घातक नहीं दिल की बीमारियों के अलावा कैंसर भी भारत में एक प्रमुख जानलेवा बीमारी बनकर उभरा है। National Cancer Registry Programme की रिपोर्ट के अनुसार, 2015 से 2019 के बीच भारत में कैंसर के 7.08 लाख मामले दर्ज हुए, जिनमें से 2.06 लाख लोगों की जान चली गई। खासकर पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में कैंसर के मामले सबसे अधिक सामने आए हैं। अब क्या किया जा सकता है? इस alarming स्थिति से निपटने के लिए सिर्फ सरकारी योजनाएं काफी नहीं हैं। हर व्यक्ति को अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने की जरूरत है: नियमित व्यायाम करें संतुलित और पौष्टिक आहार लें समय पर सोएं और तनाव को कम करें रेगुलर हेल्थ चेकअप कराएं स्मोकिंग और अल्कोहल से दूरी बनाए रखें दिल की सेहत को लेकर जागरूकता और सतर्कता अब सिर्फ विकल्प नहीं, बल्कि ज़रूरत बन चुकी है।  

1951 मॉडल रोल्स रॉयस कार के विवाद में तलाक, पूर्व प्रधानमंत्री की कार बनी विवाद का कारण

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने अलग रह रहे एक दंपती की शादी को खत्म कर दिया है. दंपती के रिश्ते में 1951 मॉडल की रोल्स रॉयस कार को लेकर खटास आ गई थी, जिसे पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने बड़ौदा की तत्कालीन "महारानी" के लिए मंगवाया था. जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते को दर्ज किया, जिसके अनुसार पुरुष अपनी पूर्व पत्नी को 2.25 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा, जिसके बाद उनके बीच सभी दावों का निपटारा हो जाएगा. पीठ ने 29 अगस्त को कहा, "हम याचिकाकर्ता और प्रतिवादी 1 (पति) के बीच विवाह को भंग करते हैं. अब उनके बीच कोई भी वैवाहिक या अन्य संबंध नहीं रहेगा." समझौते के अनुसार, पति 31 अगस्त तक 1 करोड़ रुपये और शेष 1.25 करोड़ रुपये 30 नवंबर तक चुकाएगा. इस व्यवस्था के तहत, महिला अपने पति द्वारा दिए गए उपहार अपने पास रखेगी और पति उसे और उसके परिवार को मिले सभी उपहार, जैसे सगाई की अंगूठी और अन्य कीमती सामान, एक करोड़ रुपये के डिमांड ड्राफ्ट के साथ लौटा देगा. कोर्ट ने दोनों पक्षों को दी चेतावनी दंपती के बीच सभी मामलों को रद्द करते हुए पीठ ने इसे पूर्ण और अंतिम समझौता माना. विवाह खत्म होने के बाद, शीर्ष अदालत ने पक्षों को सोशल मीडिया सहित किसी भी रूप में एक-दूसरे को बदनाम न करने की चेतावनी दी. ग्वालियर में रहने वाली महिला ने दावा किया कि वह बहुत प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखती है, जिसके पूर्वज छत्रपति शिवाजी महाराज की नौसेना में एडमिरल थे और उन्हें कोंकण क्षेत्र का शासक घोषित किया गया था. दूसरी ओर, महिला का पति सैन्य अधिकारियों के परिवार से ताल्लुक रखता है और मध्य प्रदेश में एक शैक्षणिक संस्थान चलाता है. रोल्स रॉयस कार के कारण विवाद इस विवाद का मुख्य कारण 1951 मॉडल की प्राचीन हस्तनिर्मित क्लासिक रोल्स रॉयस कार थी, जो आज तक एक ही मॉडल है और जिसकी वर्तमान कीमत 2.5 करोड़ रुपये से अधिक है. यह कार पंडित नेहरू ने बड़ौदा की तत्कालीन महारानी के लिए मंगवाई थी. महिला ने दावा किया कि उसके अलग हुए पति और उसके परिवार ने दहेज के तौर पर रोल्स रॉयस कार और मुंबई में एक फ्लैट की मांग करके उसे लगातार परेशान किया था. हालांकि पति ने इस आरोप से इनकार किया है. महिला ने अपनी याचिका में कहा, "उच्च न्यायालय ने इस बात पर विचार नहीं किया कि प्रतिवादी 1 और 2 (पति और उसके पिता) का शुरू से ही दुर्भावनापूर्ण इरादा था कि वे रोल्स रॉयस कार और मुंबई में एक फ्लैट मांगें. जब प्रतिवादियों की मांगें पूरी नहीं हुईं, तो उन्होंने शादी से इनकार करना शुरू कर दिया और याचिकाकर्ता पर झूठे और तुच्छ आरोप लगाने लगे और उसके चरित्र पर कीचड़ उछालने लगे." उच्च न्यायालय के 5 दिसंबर, 2023 के आदेश की आलोचना करते हुए याचिका में कहा गया, "…यह स्पष्ट है कि प्रतिवादी 1 (पति) और 2 (पति के पिता) ने याचिकाकर्ता (महिला) के पिता की रोल्स रॉयस कार के प्रति अपना आकर्षण दिखाया है और उन्हें उक्त कार उपहार में मिलने की उम्मीद थी और मुंबई में फ्लैट के संबंध में, दहेज की इस मांग को पूरा न करना ही इसका मुख्य कारण था. याचिकाकर्ता को उसके ससुराल नहीं ले जा रहे हैं." मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ ने महिला द्वारा अपने पति के खिलाफ दहेज और क्रूरता के मामले को खारिज कर दिया था. इसके बाद अलग हुए दंपती का विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. दूसरी ओर, पति ने अलग हुई पत्नी, उसके माता-पिता और रिश्तेदारों के खिलाफ विवाह प्रमाणपत्र तैयार करने में धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कराया था. सुप्रीम कोर्ट ने पहले वरिष्ठ अधिवक्ता और केरल उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश आर बसंत को इस मामले में मध्यस्थ नियुक्त किया था.

रूस-फ्रांस में खलबली! तेजस Mark-1A के सामने फीके राफेल और सुखोई

नई दिल्ली तेजस Mark-1A फाइटर जेट की डिलीवरी डेट लगातार टल रही है. एचएएल यानी हिन्‍दुस्‍तान एयरोनॉटिक्‍स लिमिटेड ने पहले इसे सितंबर में एयरफोर्स को देने की बात कही थी. अब तेजस Mark-1A की दो यूनिट अक्‍टूबर में उपलब्‍ध होगी. इंजन मिलने में देरी की वजह से डिलीवर डेट की डेडलाइन लगातार आगे खिसकती रही है. अब तो डिटेल सामने आया है, उसके अनुसार तेजस Mark-1A फाइटर जेट में ऐसे वेपन इंटीग्रेट किए जा रहे हैं, जिससे दुश्‍मनों का दम फूलना तय है. साथ ही फ्रांस और रूस जैसे फाइटर जेट सप्‍लायर देश भी भौंचक्‍का हो जाएंगे, क्‍योंकि भारत फाइटर जेट बनाने में आत्‍मनिर्भर होने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है. लंबे इंतजार के बाद हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की ओर से अगले महीने भारतीय वायुसेना (IAF) को पहले दो इंप्रूव्ड और अपग्रेड तेजस मार्क-1ए लड़ाकू विमान सौंपने की उम्मीद है. हालांकि, यह डिलीवरी इस बात पर निर्भर करेगी कि स्वदेशी सिंगल-इंजन जेट अपने तयशुदा हथियार फायरिंग ट्रायल्स को सफलतापूर्वक पूरा कर पाता है या नहीं. मॉडर्न वेपन के साथ सॉफ्टवेयर मॉडिफिकेशन सूत्रों के मुताबिक, इस महीने के अंत तक तेजस Mark-1A पर अस्त्र बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइल, एडवांस्ड शॉर्ट रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल और लेजर-गाइडेड बम की फायरिंग ट्रायल्स निर्धारित हैं. इन ट्रायल्स के जरिए यह भी परखा जाएगा कि इजरायली मूल के एल्टा ELM-2052 रडार और फायर कंट्रोल सिस्टम के साथ हथियारों का इंटीग्रेशन सही ढंग से हुआ है या नहीं. ‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले ट्रायल में असफलता के बाद तेजस Mark-1A में सॉफ्टवेयर मॉडिफिकेशन किए गए हैं. इंजन सप्‍लाई में देरी बनी बड़ी बाधा तेजस Mark-1A परियोजना की धीमी प्रगति की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) की ओर से इंजन की सप्लाई में हुई लगभग दो साल की देरी रही. HAL ने अगस्त 2021 में 99 GE-404 इंजनों की खरीद 5,375 करोड़ रुपये में की थी, लेकिन अब तक सिर्फ दो इंजन ही मिले हैं. कंपनी ने वादा किया है कि अगले साल मार्च तक 10 और इंजन, और उसके बाद हर साल 20 इंजन सप्लाई करेगी. हथियार और रडार इंटीग्रेशन में आई तकनीकी दिक्कतें भी उत्पादन को प्रभावित कर रही हैं. एयरफोर्स का इंतजार लंबा IAF को अब तक तेजस के शुरुआती वर्जन मार्क-1 के 40 में से 38 विमान ही मिल पाए हैं, जिनका सौदा 2006 और 2010 में कुल 8,802 करोड़ रुपये में हुआ था. वहीं, फरवरी 2021 में किए गए 46,898 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट के तहत 83 तेजस मार्क-1ए में से अभी तक एक भी विमान वायुसेना को नहीं मिला है. इनकी आपूर्ति फरवरी 2024 से फरवरी 2028 के बीच पूरी होनी थी. पिछले महीने प्रधानमंत्री की अगुवाई वाली कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने तेजस के और 97 विमानों की खरीद 66,500 करोड़ रुपये में मंजूर की, जिससे कुल संख्या और बढ़ जाएगी. एयरफोर्स की चिंता वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने सार्वजनिक रूप से HAL की देरी पर नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा था कि IAF की संख्या पहले से ही बेहद कम है और लड़ाकू क्षमता बनाए रखने के लिए हर साल कम से कम 40 नए विमान शामिल करने की जरूरत है. फिलहाल IAF के पास 31 स्क्वॉड्रन हैं, लेकिन 26 सितंबर को सेवा में मौजूद 36 पुराने मिग-21 लड़ाकू विमानों के रिटायर होने के बाद यह संख्या घटकर 29 स्क्वॉड्रन रह जाएगी, जो अब तक का सबसे कम स्तर होगा.

ट्रंप दक्षिण कोरिया पहुंचेंगे, जिनपिंग और किम से बातचीत की संभावना

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके शीर्ष सलाहकार एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) व्यापार मंत्रियों की बैठक के लिए अक्टूबर में दक्षिण कोरिया की यात्रा की तैयारी कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात संभव है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी सरकार की टैरिफ नीतियों को लेकर दुनियाभर के देश चिंता में हैं। वहीं, इसका वैश्विक व्यापार पर भी असर देखा जा रहा है। अमेरिकी प्रशासन के अधिकारियों ने शनिवार को कहा कि एपेक के दौरान द्विपक्षीय बैठक के बारे में गंभीर चर्चा हुई है, लेकिन अभी तक कोई ठोस योजना नहीं बनी है। अक्टूबर के अंत और नवंबर की शुरुआत में ग्योंगजू शहर में होने वाले इस शिखर सम्मेलन को ट्रंप के लिए राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने का एक अहम अवसर माना जा रहा है। पिछले महीने एक फोन कॉल में जिनपिंग ने ट्रंप और उनकी पत्नी को चीन आने का निमंत्रण दिया था। इस निमंत्रण का अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी स्वागत किया था, हालांकि अभी तक तारीख तय नहीं हुई है। अधिकारियों ने कहा कि ट्रंप प्रशासन इसे अमेरिका में अधिक आर्थिक निवेश हासिल करने के अवसर के रूप में भी देख रहा है। ट्रंप की सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात की यात्राओं सहित हालिया विदेश यात्राओं का मुख्य केंद्र यही रहा है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने सीएनएन को बताया, "दक्षिण कोरिया की यात्रा पर चर्चा हो रही है। यह यात्रा आर्थिक सहयोग पर केंद्रित होगी।" अधिकारी ने बताया कि अन्य लक्ष्यों में व्यापार, रक्षा और असैन्य परमाणु सहयोग पर चर्चा पर ध्यान केंद्रित करना शामिल है। इस क्षेत्र में ट्रंप की मौजूदगी उन्हें उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ एक बार फिर बातचीत करने की स्थिति में ला सकती है, हालांकि किम इसमें शामिल होंगे या नहीं, यह अभी भी सवाल है। अधिकारियों का कहना है कि शी जिनपिंग के साथ संभावित बैठक के आयोजन पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने पिछले हफ्ते ट्रंप के साथ बैठक के दौरान उन्हें एपेक शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। इस दौरान उन्होंने सुझाव दिया था कि यह आयोजन ट्रंप को किम से मिलने का अवसर प्रदान कर सकता है। शनिवार को पत्रकारों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि वह किम से मिलने के इच्छुक हैं। उत्तर कोरियाई नेता के बारे में ट्रंप ने दावा किया, "मैं ऐसा करूंगा और हम बातचीत करेंगे। वह मुझसे मिलना चाहेंगे। हम उनसे मिलने के लिए उत्सुक हैं और हम संबंधों को बेहतर बनाएंगे।" अमेरिकी राष्ट्रपति की दक्षिण कोरिया की अपेक्षित यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब शी जिनपिंग और किम दोनों के साथ उनके संबंध तनावपूर्ण हैं। शी जिनपिंग ने इस हफ्ते बीजिंग में किम, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी की थी। जिनपिंग के साथ संभावित बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब वाशिंगटन और बीजिंग ट्रंप के टैरिफ को लेकर आमने-सामने हैं। अमेरिका और चीन के अधिकारी एक व्यापार समझौते पर कई वार्ताओं में शामिल रहे हैं, जिसमें यूरोप में दोनों देशों के शीर्ष आर्थिक सलाहकारों के साथ दो आमने-सामने की बैठकें भी शामिल हैं। ट्रंप ने अप्रैल में चीन के आयात पर 145 प्रतिशत टैरिफ लगाया था और चीन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी वस्तुओं पर 125 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था। टैरिफ पिछले महीने लागू होने वाले थे। लेकिन, ट्रंप ने कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करके नवंबर तक बढ़ी हुई टैरिफ पर रोक लगा दी।

सांसदों में टकराव: रूडी ने निशिकांत दुबे पर साधा निशाना, जताई नाराजगी

नई दिल्ली भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी ने साथी सांसद निशिकांत दुबे के ऊपर बड़ा हमला किया है। उन्होंने निशिकांत दुबे को अहंकारी बताया है। इतना ही नहीं, राजीव प्रताप रूडी ने यहां तक कहा कि संसद के अंदर सरकार से इतर निशिकांत दुबे खुद में सरकार हैं। लेकिन मैं उनकी सरकार का हिस्सा नहीं हूं। मैं इंडिपेंडेंट हूं। राजीव प्रताप रूडी ने यह बातें कही हैं। रूडी से दिल्ली कांस्टीट्यूशन क्लब चुनाव को लेकर सवाल पूछे गए थे। सवाल के जवाब में भाजपा सांसद ने कहा कि निशिकांत दुबे अकेले दम पर ही संसद चलाना चाहते हैं। गौरतलब है कि दिल्ली कांस्टीट्यूशन क्लब चुनाव में निशिकांत दुबे रूडी के सामने खड़े भाजपा के ही संजीव बालियान का प्रचार कर रहे थे। राजीव प्रताप रूडी से दिल्ली कांस्टीट्यूशन क्लब के चुनाव को लेकर सवाल पूछा जा रहा था। इसमें उनसे पूछा गया कि इस चुनाव में उनकी पार्टी ही उनके खिलाफ थी। आगे पूछा गया कि क्या ऐसा भी था कि गृहमंत्री अमित शाह ने उनके खिलाफ प्रचार किया? इसके जवाब में राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि यह गलत सूचना एक व्यक्ति द्वारा फैलाई गई, जो सोचते हैं कि वह बतौर सांसद संसद को नियंत्रित करते हैं। वह संसद में ऐसे ही शो चलाते हैं। इन्हीं शख्स से गृहमंत्री का नाम इस मामले में उछाला था। इस पर इंटरव्यू करने वाला रूडी से पूछता है कि क्या आप निशिकांत दुबे की बात कर रहे हैं। इस पर रूडी कहते हैं कि आपको कैसे पता कि मैं दुबे की बात कर रहा हूं? फिर आगे वह कहते हैं कि मुझे लगता है आप सही हैं। राजीव प्रताप रूडी आगे कहते हैं कि कभी-कभी कुछ लोग अहंकारी हो जाते हैं। फिर पूछा जाता है कि वह एक साथी सांसद हैं और आपकी ही पार्टी के हैं। इस पर रूडी कहते हैं कि वह संसद में शो चलाते हैं। वह इस बात का दावा करते हैं। उन्होंने ही तय किया था कि मुझे दिल्ली कांस्टीट्यूशन क्लब का चुनाव नहीं जीतना चाहिए। इसके आगे रूडी से पूछा जाता है कि आखिर निशिकांत दुबे को आपसे प्रॉब्लम क्या है? इसके जवाब में भाजपा सांसद कहते हैं कि उनकी समस्या है कि वह शो चलाना चाहते हैं। सरकार से इतर वह खुद में एक सरकार हैं और मैं उनकी इस सरकार का हिस्सा नहीं हूं। रूडी ने आगे कहा कि दिल्ली कांस्टीट्यूशन क्लब चुनाव में उन्हें अमित शाह से लेकर जेपी नड्डा का पूरा समर्थन हासिल था। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ उम्मीदवार खड़ा करके गलत तरीके से विवाद पैदा करने की कोशिश की। इसके पीछे निशिकांत दुबे ही थे।  

डॉक्टर भी चौंके: गाय की सर्जरी में पेट से 28 किलो प्लास्टिक और 41 कीलें बाहर निकलीं

ऊना हिमाचल प्रदेश में हैरान कर देने वाली एक घटना सामने आई है। डॉक्टरों ने सर्जरी करने के बाद एक गर्भवती गाय के पेट से 28 किलो प्लास्टिक, 41 कीलें, कपड़े और रस्सियां निकालीं। गाय ने पिछले चार-पांच दिनों से खाना-पीना बंद कर दिया था। हिमाचल प्रदेश के ऊना में एक सरकारी पशु चिकित्सालय के डॉक्टरों ने एक गर्भवती गाय के पेट से 28 किलो प्लास्टिक और 41 धातु की कीलें समेत अन्य चीजें निकाली हैं। यह जटिल सर्जरी शनिवार को बरनोह स्थित क्षेत्रीय पशु चिकित्सालय में अस्पताल प्रभारी डॉ. निशांत रनौत के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक टीम द्वारा की गई। गाय के पेट से निकली इतनी सारी चीजें देखकर डॉक्टर भी हैरान रह गए। डॉ. रनौत ने कहा कि सर्जरी के बाद गाय के स्वास्थ्य में सुधार सुनिश्चित करने के लिए वेटनरी डॉक्टर सात दिनों तक उसकी निगरानी करेंगे। गर्भवती गाय को कलरुही निवासी विपिन कुमार और अन्य स्थानीय लोग अस्पताल लाए थे। डॉ. रानौत ने बताया कि गाय ने पिछले चार-पांच दिनों से खाना-पीना बंद कर दिया था। शुरुआती जांच के दौरान डॉक्टरों को उसके पेट में अप्राकृतिक वस्तुएं होने का संदेह हुआ। कई जांचें की गईं और सर्जरी करने का फैसला किया गया। उन्होंने बताया कि गाय के पेट से 28 किलो प्लास्टिक, कपड़े, रस्सियां और 41 कीलों समेत धातु के कई टुकड़े निकाले गए। उन्होंने कहा कि अब तक इस पशु चिकित्सालय में बड़े डायाफ्रामिक हर्निया जैसी 53 जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं। यहां हर प्रकार की पशु सर्जरी, रक्त जांच और अल्ट्रासाउंड जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह अस्पताल बड़े पशुओं के उपचार के लिए क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है। ऊना स्थित पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. वीरेंद्र पटियाल ने इस सफल ऑपरेशन के लिए डॉक्टरों की टीम को बधाई दी। साथ ही लोगों से प्लास्टिक कचरा, धातु की कीलें और अन्य सामग्री खुले में न फेंकने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोगों को कचरे का उचित निपटान करना चाहिए ताकि पशुओं और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।