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चीन की सेना पर बढ़ता शक, जानिए जिनपिंग की सबसे बड़ी चिंता क्या है?

बीजिंग चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने देश की सेना को लेकर काफी परेशान हैं। बाहरी तौर पर देखा जाए तो चीन की सेना कभी इतनी मजबूत नहीं रही। नेवी से लेकर हथियार बनाने तक में सेना काफी आगे है। लेकिन अंदरूनी तौर पर कई चीजें हैं जो हाथ से छूटती नजर आ रही हैं। इनमें से एक है चीनी सेना में लगातार बढ़ता भ्रष्टाचार। इस पर लगाम के लिए जिनपिंग लगातार ऐक्शन में हैं, लेकिन अभी भी चीजें कंट्रोल में आती नजर नहीं आ रही हैं। लगातार कम होते टॉप अधिकारी चीन की सबसे बड़ी चिंता शीर्ष स्तर पर लगातार अधिकारियों का कम होते जाना है। सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में कुल सात सीटें हैं, जिनमें से तीन फिलहाल खाली हैं। इन पदों पर जो अधिकारी थे वह या तो गायब हो गए हैं या फिर गिरफ्तार कर लिए गए हैं। विडंबना यह है कि यह सब तब हो रहा है जब खुद राष्ट्रपति शी जिनपिंग सेना में भ्रष्ट्राचार पर लगाम कसने में लगे हुए हैं। जिनपिंग ने सेना के अत्याधुनिकरण के लिए 2027 का लक्ष्य तय किया है। कुछ अमेरिकी अधिकारी तो यहां तक भी कहते हैं कि चीन खुद को ताइवान पर कब्जा करने में सक्षम बनाना चाहता है। गौरतलब है कि चीन लगातार ताइवान को अपना क्षेत्र बताता है। क्यों गंभीर है समस्या चीन के लिए यह समस्या इसलिए भी गंभीर हो जाती है क्योंकि जो सैन्य अधिकारी भ्रष्टाचार में पकड़े गए हैं, वह जिनपिंग के करीबी रहे हैं। ऐसे में जब यही सैन्य अधिकारी गलतियां करते हुए पकड़े जा रहे हैं तो जिनपिंग का गुस्सा बढ़ना भी लाजिमी है। जो अधिकारी गायब हुए हैं उनमें जनरल वीडांग का नाम प्रमुख है। वह चीन के सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के दूसरे सबसे वरिष्ठ अधिकारी थे। वीडांग काफी अरसे से गायब हैं, जो दिखाता है कि वह जांच के दायरे में हैं। इसी तरह एक अन्य शीर्ष कमांडर एडमिरल मिआवो हुआ भी अनुशासन का उल्लंघन करने के लिए जांच के दायरे में हैं। वफादारी की चाहत शी जिनपिंग साल 2027 में चौथी बार कम्यूनिस्ट पार्टी के लीडर बनेंगे। वह चाहते हैं कि उनके पास फौज में ऐसे अधिकारी हों, जो उनके प्रति पूरी तरह से वफादार रहें। लेकिन चीनी सेना के अधिकारी एक के बाद एक जिस तरह से भ्रष्टाचार के मामलों में पकड़े जा रहे हैं, उसने जिनपिंग की परेशानी बढ़ा दी है। इन सबके बीच अगले महीने शी जिनपिंग बीजिंग में एक मिलिट्री परेड करवाने वाले हैं। इस दौरान वह यह दिखाएंगे कि चीन की सेना पर किस कदर उनका एकाधिकार है।  

मोदी को ‘अच्छा दोस्त’ कहने वाले नेतन्याहू ने ट्रंप से निपटने का दिया संकेत

इजरायल  तेल अवीव में भारतीय पत्रकारों से बातचीत के दौरान इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत-इजरायल संबंधों पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके “अच्छे दोस्त” हैं और दोनों देशों के बीच खासतौर पर रक्षा क्षेत्र में मजबूत साझेदारी है। नेतन्याहू ने खुलासा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को इजरायल से मिले सैन्य उपकरण बेहद कारगर साबित हुए, ठीक वैसे ही जैसे कारगिल युद्ध में हुए थे।  अमेरिका और भारत के बीच जारी तनाव पर नेतन्याहू ने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से निपटने की "सलाह" देंगे, लेकिन यह बातचीत निजी रहेगी क्योंकि मोदी और ट्रंप दोनों उनके “बेहतरीन दोस्त” हैं। उन्होंने अमेरिका-भारत रिश्तों को “बहुत मजबूत” बताया और दोनों देशों से टैरिफ विवाद सुलझाने की अपील की। “रिश्ते की नींव बहुत ठोस है। भारत और अमेरिका के लिए टैरिफ मुद्दे पर आम सहमति बनाना और हल निकालना फायदेमंद होगा। यह इज़राइल के लिए भी अच्छा होगा, क्योंकि दोनों हमारे दोस्त हैं।” नेतन्याहू ने कहा कि भारत और इजरायल के रक्षा संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और इससे दोनों देशों को लाभ हो रहा है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर में इजरायली हथियार भारतीय सेना के लिए “बड़ी ताकत” बने। इजरायली पीएम ने कहा कि वे मोदी के साथ न सिर्फ राजनीतिक रूप से, बल्कि व्यक्तिगत रूप से भी अच्छा बॉन्ड साझा करते हैं। उनकी मुलाकातों में कई मुद्दों पर गहन चर्चा होती है।   इससे पहले, ट्रंप ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया, जिससे यह दर 50% हो गई। यह फैसला रूस से कच्चा तेल आयात जारी रखने पर “सज़ा” के तौर पर लिया गया। यह ट्रंप की अब तक की सबसे बड़ी टैरिफ वृद्धि है, ब्राज़ील को छोड़कर।भारत ने इस कदम को “अनुचित, अन्यायपूर्ण और गैर-जरूरी” बताया है, जो कपड़ा और समुद्री निर्यात जैसे कई क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है। नेतन्याहू ने कहा- “भारत और इजरायल दोनों प्राचीन सभ्यताएं हैं और आतंकवाद की चुनौती का सामना कर रहे हैं। अगर हम मिलकर सीमा पार आतंकवाद से लड़ें तो बेहतर नतीजे हासिल कर सकते हैं।”नेतन्याहू ने बताया कि उनकी सरकार तेल अवीव और बेंगलुरु के बीच सीधी उड़ान  शुरू करने पर विचार कर रही है। पाकिस्तान के साथ अमेरिका के संबंधों पर सवाल पर उन्होंने कहा कि चिंता की जरूरत नहीं है, क्योंकि वॉशिंगटन में यह समझ है कि भारत उसका “मजबूत साझेदार” है।

पायलटों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ी, एयर इंडिया ने दी करियर बढ़ाने की सौगात

नई दिल्ली  भारत की प्रमुख विमानन कंपनी एयर इंडिया ने अपने कर्मचारियों के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। कंपनी ने पायलटों सहित अन्य प्रमुख स्टाफ की सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) की उम्र सीमा में संशोधन कर दिया है। अब एयर इंडिया के पायलट 58 की बजाय 65 साल की उम्र तक अपनी सेवाएं दे सकेंगे। यह कदम कंपनी के अंदर जारी संरचनात्मक बदलावों और विस्तारा के साथ हुए विलय के बाद सामने आया है।  65 साल तक उड़ान भरेंगे एयर इंडिया के पायलट पहले एयर इंडिया में पायलटों की रिटायरमेंट की उम्र 58 वर्ष तय थी, लेकिन विस्तारा के साथ कंपनी के मर्जर के बाद इस अंतर को समाप्त करने के लिए नई नीति लागू की गई है। गौरतलब है कि विस्तारा में पहले से ही पायलटों की सेवा अवधि 65 साल तक थी। अब, पूरे एयर इंडिया ग्रुप में यह नियम लागू कर दिया गया है, जिससे 7 वर्षों की सीधी बढ़ोतरी हो गई है।  केबिन क्रू और अन्य स्टाफ को भी राहत पायलटों के साथ-साथ केबिन क्रू और अन्य कर्मचारियों के लिए भी रिटायरमेंट की उम्र में बदलाव किया गया है। अब इनकी सेवा उम्र 58 साल से बढ़ाकर 60 साल कर दी गई है। यह फैसला उन हजारों कर्मचारियों को प्रभावित करेगा, जो लंबे समय से एयर इंडिया से जुड़े हुए हैं। फिलहाल एयर इंडिया के पास लगभग 24,000 कर्मचारी हैं, जिनमें करीब 3,600 पायलट और 9,500 केबिन क्रू शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, केबिन क्रू की सेवा उम्र को भी पायलटों के समान 65 वर्ष तक बढ़ाने की योजना पर विचार किया जा रहा है।  DGCA से भी मिल गई हरी झंडी एयर इंडिया के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर कैंपबेल विल्सन ने बताया कि यह फैसला नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की स्वीकृति के बाद लिया गया है। DGCA ने 65 वर्ष तक के पायलटों को कमर्शियल उड़ानें संचालित करने की अनुमति दे दी है, जिससे एयर इंडिया को इस नीति पर आगे बढ़ने का अधिकारिक आधार मिल गया।   विस्तारा मर्जर बना बदलाव की वजह जानकारों के अनुसार, एयर इंडिया और विस्तारा के विलय के बाद कर्मचारियों के सेवा नियमों में अंतर सामने आया था। इस टकराव को खत्म करने और एक समान नीति लागू करने के लिए पायलटों की रिटायरमेंट उम्र में यह परिवर्तन जरूरी था। इससे कंपनी को पायलटों के अनुभव का लाभ लंबे समय तक मिलता रहेगा।  हादसे के बाद उठे सवाल हालांकि, यह फैसला ऐसे समय में आया है जब महज दो महीने पहले एयर इंडिया के एक विमान को गंभीर दुर्घटना का सामना करना पड़ा था। अहमदाबाद से लंदन जा रही फ्लाइट टेक-ऑफ के कुछ मिनटों बाद ही हादसे का शिकार हो गई थी, जिसमें 265 यात्रियों की मौत हो गई। शुरुआती जांच में पायलट की गलती को कारण बताया गया था। ऐसे में पायलटों की उम्र सीमा बढ़ाने को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी सामने आई हैं।

तालिबान-पाकिस्तान मुलाकात पर अमेरिकी ब्रेक, विदेश मंत्री को सीमा पर रोका

वाशिंगटन  अमेरिका और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक हलचल बढ़ गई है। अमेरिका ने अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी  को पाकिस्तान जाने की अनुमति नहीं दी। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब तालिबान सरकार, पाकिस्तान और चीन के बीच संभावित गठबंधन की चर्चा तेज है। माना जा रहा है कि वाशिंगटन का यह रुख इसी रणनीतिक चिंता का नतीजा है। पाकिस्तान ने दावा किया है कि मुत्ताकी का 4 अगस्त को इस्लामाबाद दौरा तय  था, ताकि काबुल और इस्लामाबाद के रिश्तों में सुधार लाने पर चर्चा हो सके। इससे पहले, चीन की मध्यस्थता से पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार  काबुल गए थे। उसी क्रम में मुत्ताकी को अगली बैठक के लिए पाकिस्तान आना था। डॉन अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, मुत्ताकी पर अब भी  अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध  लागू हैं और उन्हें विदेश यात्रा के लिए संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति से विशेष छूट लेनी होती है। इस बार अमेरिका ने कथित तौर पर इस छूट को मंजूरी देने से इनकार कर दिया और अंतिम समय तक फैसला टालते रहे। हाल के महीनों में पाकिस्तान और तालिबान सरकार के बीच कई बार सीमा पर गोलीबारी हुई है। पाकिस्तान का आरोप है कि तालिबान,  तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को पनाह देता है, जो खैबर पख्तूनख्वा में आतंकी हमले करता है और फिर अफगानिस्तान भाग जाता है। तालिबान इन आरोपों को खारिज करता रहा है। पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता  शफकत अली खान ने अमेरिका की भूमिका की सीधी पुष्टि नहीं की, बल्कि कहा कि "कुछ प्रक्रियात्मक मुद्दों" पर काम चल रहा है और यात्रा की तारीख तय नहीं हुई है।वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा-"हम अफवाहों पर टिप्पणी नहीं करते।"   

कश्मीर घाटी में पहली बार गूंजी मालगाड़ी की सीटी, रसद और विकास को मिले पंख

नई दिल्ली  जम्मू-कश्मीर के परिवहन नेटवर्क को एक और बढ़ावा देते हुए, भारतीय रेलवे ने शनिवार को पंजाब के रूपनगर से कश्मीर के अनंतनाग तक पहली बार एक मालगाड़ी चलाई। सीमेंट से लदी यह मालगाड़ी शनिवार दोपहर करीब 12 बजे कश्मीर घाटी के अनंतनाग गुड्स शेड पहुँची, जो कश्मीर क्षेत्र को राष्ट्रीय मालगाड़ी नेटवर्क से जोड़ने में एक बड़ी उपलब्धि है। यह मालगाड़ी इस साल जून में 272 किलोमीटर लंबे उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL), या कश्मीर लाइन के पूरे हिस्से पर यात्री परिचालन के सफल शुभारंभ के दो महीने बाद आई है। इस मालगाड़ी संपर्क से देश भर के बाजारों तक पहुँच आसान होने से कश्मीरी फल और हस्तशिल्प उद्योग को नई जान मिलने की उम्मीद है। रेल मंत्रालय ने एक बयान में इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा, "कश्मीर घाटी में मालगाड़ी का आगमन रसद और आर्थिक विकास के एक नए युग की शुरुआत करता है।" मंत्रालय ने कहा, "(यह) केवल एक रसद उपलब्धि नहीं है, बल्कि प्रगति और एकीकरण का एक सशक्त प्रतीक है, जो एक अधिक संबद्ध और समृद्ध कश्मीर घाटी का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।" अधिकारियों ने बताया कि मालगाड़ी में बोगी से ढके वैगनों में 1,380 मीट्रिक टन सीमेंट भरा गया था, जिनका उपयोग बैग में बंद सामान ढोने के लिए किया जाता है। सीमेंट का ऑर्डर कश्मीर घाटी में सड़कों, पुलों, सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे और आवासीय भवनों सहित विभिन्न निर्माण परियोजनाओं में शामिल निजी संस्थाओं द्वारा दिया गया था। उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) हिमांशु शेखर उपाध्याय ने कहा, "उद्घाटन मालगाड़ी में 21 बीसीएन वैगन सीमेंट भरा गया था। लगभग 600 किलोमीटर की यह यात्रा आज 18 घंटे से भी कम समय में नवनिर्मित अनंतनाग गुड्स शेड पर समाप्त हुई। यह आयोजन विशेष रूप से इस सुविधा के लिए पहली बार सीमेंट लदान का प्रतीक है, जो कश्मीर क्षेत्र में रसद और आर्थिक विकास के एक नए युग का समर्थन करने के लिए इसकी तत्परता को दर्शाता है।" हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया, "इस सीमेंट परिवहन के लिए गुरुवार रात करीब 11 बजे उत्तर रेलवे से अनुरोध किया गया था। इसके बाद रेक की व्यवस्था की गई और शुक्रवार शाम 6 बजे तक लोडिंग पूरी हो गई। ट्रेन शाम करीब 7 बजे पंजाब के रूपनगर स्थित जीएसीएल सुविधा केंद्र से रवाना हुई। मालगाड़ी को इलेक्ट्रिक WAG-9 इंजन से ढोया गया और शनिवार दोपहर करीब 12 बजे कश्मीर पहुँच गई।" अनंतनाग में मालगाड़ी का आना जम्मू-कश्मीर के व्यापारियों के लिए अच्छी खबर है। इससे घाटी में आने वाले माल की परिवहन लागत कम होगी, साथ ही यह कश्मीर के फल उद्योग, खासकर चेरी, स्ट्रॉबेरी और सेब की कुछ किस्मों जैसे कम समय तक खराब होने वाले फलों के लिए, एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।   देश की दूसरी सबसे बड़ी फल मंडी, सोपोर फल मंडी के अध्यक्ष फैयाज अहमद मलिक ने कहा, "इससे फल उत्पादकों को फायदा होगा क्योंकि इससे परिवहन में लगने वाला समय और लागत दोनों कम हो जाएगी।" फिलहाल, दिल्ली तक फलों के एक डिब्बे की ढुलाई में 100 रुपये या उससे ज़्यादा का खर्च आता है। इस ट्रेन से हमें उम्मीद है कि यह घटकर 30 रुपये प्रति डिब्बा रह जाएगा। इसी तरह, हमें उम्मीद है कि परिवहन का समय भी 6 दिन से घटकर 30 घंटे रह जाएगा। हालांकि, मलिक ने कहा कि मालगाड़ी का लाभ फल उत्पादकों को तभी मिलेगा जब देश के विभिन्न फल मंडियों जैसे पश्चिम बंगाल, अहमदाबाद और पूर्वोत्तर के लिए सीधी ट्रेनें चलेंगी। यह मालगाड़ी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 6 जून को यूएसबीआरएल के 63 किलोमीटर लंबे कटरा-सांगलदान खंड का उद्घाटन करने और श्रीनगर तथा कटरा के बीच विशेष रूप से डिज़ाइन की गई वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के दो महीने बाद कश्मीर आई है। इस परियोजना के पूरा होने के साथ ही कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली एक परियोजना पूरी हो गई है। 272 किलोमीटर लंबी यूएसबीआरएल तीन भागों में विभाजित है – 25 किलोमीटर उधमपुर-कटरा, 111 किलोमीटर कटरा-बनिहाल और 136 किलोमीटर बनिहाल-बारामूला लाइन। जम्मू में दो खंड उधमपुर-कटरा और कश्मीर में बनिहाल-बारामूला का निर्माण उत्तर रेलवे द्वारा किया गया था, जो भारतीय रेलवे का सबसे बड़ा क्षेत्र है, और इसे तीन चरणों में चालू किया गया था – 2009 में 118 किलोमीटर काजीगुंड-बारामूला, 2013 में 18 किलोमीटर बनिहाल-काजीगुंड और 2014 में 25 किलोमीटर उधमपुर-कटरा।

सिर्फ 12 महीनों में भारत बना डिफेंस पॉवरहाउस, चीन-पाकिस्तान के लिए बनी सिरदर्द कहानी

नई दिल्ली भारत अब सिर्फ सीमाओं की रक्षा करने वाला देश नहीं, बल्कि रक्षा उत्पादन की दुनिया में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। 2024-25 में देश का डिफेंस प्रोडक्शन ₹1.50 लाख करोड़ के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया है – जो न सिर्फ आत्मनिर्भर भारत की बड़ी छलांग है, बल्कि चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है कि भारत अब रणनीति, तकनीक और ताकत में किसी से पीछे नहीं। तेज़ी से बढ़ती सैन्य क्षमता और अत्याधुनिक तकनीकों से लैस भारत अब ‘निर्माण से निर्यात’ की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। बीते 5 वर्षों में लगभग दोगुनी हुई डिफेंस उत्पादन क्षमता राजनाथ सिंह ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर इस प्रगति को साझा करते हुए बताया कि 2019-20 में रक्षा उत्पादन जहां ₹79,071 करोड़ पर था, वहीं अब इसमें 90% की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने इस सफलता के लिए डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन, सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनियों और निजी रक्षा उद्योग के समन्वित प्रयासों को श्रेय दिया। उन्होंने लिखा, “इस शानदार उपलब्धि में भारत की आत्मनिर्भरता की झलक है। सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र और निजी कंपनियों ने मिलकर जिस तरह डिफेंस इकोसिस्टम को खड़ा किया है, वह प्रशंसनीय है।” ‘ऑपरेशन सिंदूर’ – आधुनिक रक्षा टेक्नोलॉजी की झलक जहां एक ओर भारत का रक्षा उत्पादन ग्राफ ऊंचाई छू रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत की सैन्य क्षमताओं का दम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में साफ झलका। 7 मई 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने इस जवाबी ऑपरेशन की शुरुआत की थी, जिसमें पाकिस्तान के भीतर मौजूद आतंकी ठिकानों को सटीकता से निशाना बनाया गया।    DRDO ने दिखाई तकनीकी बढ़त DRDO प्रमुख समीर कामत ने इस ऑपरेशन में इस्तेमाल हुई भारत की रक्षा तकनीकों को विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि इस सैन्य कार्रवाई में जिन अत्याधुनिक प्रणालियों का उपयोग किया गया, उनमें शामिल थीं: -ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, जो उच्च गति और सटीकता के साथ लक्ष्य को ध्वस्त करती है। -AI-आधारित डिसीजन सपोर्ट सिस्टम, जिसने रीयल टाइम में रणनीतिक निर्णय लेने में सेना की मदद की। -एयर-टू-एयर मिसाइल प्रणाली, जिसने हवाई क्षेत्रों में दुश्मन की हरकतों पर सटीक प्रहार किया। समीर कामत ने इसे भारत की रक्षा टेक्नोलॉजी में हुई प्रगति का स्पष्ट संकेत बताया और कहा कि “अब भारत किसी पर निर्भर नहीं, बल्कि दूसरों को तकनीक मुहैया कराने वाला देश बनता जा रहा है।” आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ी छलांग भारत का डिफेंस सेक्टर अब सिर्फ हथियार निर्माण तक सीमित नहीं है। यह रिसर्च, इनोवेशन, एक्सपोर्ट और तकनीकी आत्मनिर्भरता के रास्ते पर तीव्र गति से अग्रसर है। 2024-25 में इस सेक्टर में न केवल रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज किया गया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की क्षमताओं को मान्यता मिली है।    

अमेरिका-भारत में तनाव बढ़ाने की कोशिश! असीम मुनीर के गुप्त नेटवर्क का खुलासा

वाशिंगटन  पाकिस्तान एक बार फिर अपनी चालबाज़ी से न सिर्फ भारत के खिलाफ, बल्कि अमेरिका के भीतर भी राजनीतिक समीकरण बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है। ताज़ा खुलासे में सामने आया है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिकी अरबपति परिवार से रिश्ते मजबूत कर, डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को भारत-विरोधी मोड़ देने की साजिश रची। इस नेटवर्क के केंद्र में है एक शख्स  जैकरी विटकॉफ जो ट्रंप के बेहद करीबी और उनके कारोबारी सर्कल का अहम चेहरा है।   सूत्रों के मुताबिक, जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर था, तभी जैकरी विटकॉफ इस्लामाबाद पहुंचे। वहां उनका स्वागत सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक बड़े आर्थिक-पॉलिटिकल डील का हिस्सा था। दरअसल, पाकिस्तान ने हाल ही में  वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल (WLF) नामक क्रिप्टोकरेंसी वेंचर के साथ करार किया, जिसमें ट्रंप परिवार की 60% हिस्सेदारी बताई जा रही है। यही नहीं, इस सौदे से पहले WLF के शीर्ष प्रतिनिधि के तौर पर जैकरी विटकॉफ ने इस्लामाबाद में असीम मुनीर और शहबाज शरीफ से मुलाकात की। यह डील पाकिस्तानी "क्रिप्टो काउंसिल" के जरिए हुई, जिसे अप्रैल में जल्दबाजी में लॉन्च किया गया और जिसमें Binance के फाउंडर चांगपेंग झाओ (CZ) को सलाहकार बनाया गया। दावा है कि पाकिस्तान इस सौदे के जरिए खुद को "साउथ एशिया की क्रिप्टो कैपिटल" के रूप में स्थापित करना चाहता है, जबकि असली मकसद है अमेरिकी सत्ता के गलियारों में अपनी पकड़ मजबूत करना। खास बात यह है कि WLF में डोनाल्ड ट्रंप के दोनों बेटे  एरिक ट्रंप और डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के साथ उनके दामाद जैरेड कुश्नर भी हिस्सेदार हैं। यानी पाकिस्तान ने जैकरी विटकॉफ को मोहरा बनाकर सीधे ट्रंप परिवार तक पहुंच बनाई और अब इसी नेटवर्क के जरिए अमेरिकी विदेश नीति में भारत-विरोधी झुकाव पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

बेंगलुरु से शुरू हुई तीन वंदे भारत एक्सप्रेस, PM मोदी ने किया शुभारंभ

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को बेंगलुरु से तीन और वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने बहुप्रतीक्षित बेंगलुरु-बेलगावी को स्वयं हरी झंडी दिखाई, जबकि श्री माता वैष्णो देवी कटरा-अमृतसर और अजनी (नागपुर) से पुणे के लिए जाने वाली वंदे भारत सेवाओं की शुरुआत डिजिटल माध्यम से की। इस खास मौके पर पीएम के साथ कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव सहित अन्य लोग उपस्थित थे। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी जब अपने काफिले के साथ रेलवे स्टेशन की ओर बढ़े, तो सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में एकत्र लोगों ने ‘‘मोदी, मोदी’’ के नारे लगाकर उनका स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपनी कार के अंदर ने उनका हाथ हिलाकर अभिवादन किया। इसके बाद पीएम मोदी स्टेशन पहुंचे और ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। बाद में प्रधानमंत्री मोदी ने बेंगलुरू मेट्रो की येलो लाइन का भी उद्घाटन किया। इसमें उन्होंने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री समेत तमाम नेताओं के साथ सफर भी किया। इन तीन वंदे भारत सेवाओं के बारे में बात करते हुए रेलवे अधिकारियों ने कहा कि यह नई वंदे भारत ट्रेनें लोगों के बीच कनेक्टिविटी को और भी ज्यादा मजबूत करेंगी और यात्रियों को विश्वस्तरीय यात्रा का अनुभव प्रदान करेंगी। गौरतलब है कि बेंगलुरु से बेलगावी तक चलने वाली यह वंदे भारत एक्सप्रेस कर्नाटक में संचालित होने वाली 11वी वंदे भारत ट्रेन है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक इसके शुरू होने के बाद 611 किलोमीटर की दूरी मात्र 8.5 घंटे में तय की जा सकेगी। यह इन दोनों शहरों के बीच सबसे तेज गति की ट्रेन है, जिससे मौजूदा ट्रेन सेवाओं की तुलना में केएसआर (क्रांतिवीर संगोल्लि रायाण्ण) बेंगलुरु से बेलगावी तक लगभग एक घंटे 20 मिनट और बेलगावी-केएसआर बेंगलुरु तक एक घंटे 40 मिनट की बचत होगी। उन्होंने कहा कि यह ट्रेन भारत के ‘सिलिकॉन सिटी’ बेंगलुरु को प्रमुख मेडीकल और इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट के केंद्र बेलगावी से जोड़ती है, जिससे क्षेत्र में आर्थिक और शैक्षिक अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। यह मार्ग कर्नाटक के समृद्ध गन्ना क्षेत्र और धारवाड़, हुबली, हावेरी, दावणगेरे एवं तुमकुरु जैसे प्रमुख शहरों से होकर गुजरता है। धारवाड़ अपने प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के लिए प्रसिद्ध है, वहीं हुबली एक बेहतर इंडस्ट्रीयल क्षेत्र है, जबकि हावेरी एक उभरता हुआ कृषि केंद्र है और दावणगेरे कपड़ा एवं कृषि के लिए प्रसिद्ध है तथा तुमकुरु एक बढ़ता हुआ औद्योगिक एवं शैक्षिक केंद्र है।  

‘आपके मुंह से निवाला छीन लिया’… आखिर नेवी चीफ से ऐसा क्यों बोले प्रधानमंत्री मोदी?

नई दिल्ली  7 से 10 मई के बीच चले ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना ने पाकिस्तान को कई मोर्चों पर करारा जवाब दिया। सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी को राजनीतिक नेतृत्व से पूरी तरह “फ्री हैंड” मिला था, जिसके बल पर तीनों सेनाओं ने समन्वित और निर्णायक कार्रवाई की। इस पूरे ऑपरेशन के दौरान तीनों सेनाप्रमुखों के अंदाज तो अलग-अलग थे, लेकिन एक ही लक्ष्य था। एयर चीफ मार्शल सिंह के बारे में कहा जाता है कि वह एक बेबाक टेस्ट फाइटर पायलट हैं, जो जोखिम लेने से नहीं कतराते हैं। आर्मी चीफ जनरल द्विवेदी सैनिकों के बीच सबसे सहज, लेकिन जरूरत पड़ने पर बेहद सख्ती से पेश आते हैं। वहीं, एडमिरल त्रिपाठी 10 मई की सुबह कराची पोर्ट पर हमला करने के लिए तैयार थे, लेकिन पाकिस्तानी DGMO की शांति अपील के बाद वह रुक गए। हमने आपके मुंह से निवाला छीन लिया: PM मोदी 10 मई को राष्ट्रीय सुरक्षा बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, NSA अजीत डोभाल और CDS जनरल अनिल चौहान मौजूद थे। इस बैठक में तीनों सेनाओं के चीफ भी शामिल हुए थे। कराची पर नौसेना हमले के रुकने पर पीएम मोदी ने एडमिरल त्रिपाठी से मुस्कराते हुए कहा, ''हमने आपके मुंह से निवाला छीन लिया, आपको मौका फिर मिलेगा।” PM मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर पाकिस्तान कराची हमले के जवाब में गुजरात पर मिसाइल दागता तो भी वे तैयार थे। ऑपरेशन में वायुसेना का करारा जवाब भारतीय वायुसेना चीफ ने बेंगलुरु में बताया कि 7–10 मई के बीच पाकिस्तान के 5 लड़ाकू विमान, एक बड़ा AEW&C या ELINT विमान को मार गिराया। 10 मई को रावलपिंडी के चकला एयरबेस पर C-130 हरक्यूलिस VVIP ट्रांसपोर्ट विमान वाला हैंगर तबाह हुआ, जैकबाबाद में जमीन पर खड़े 2 F-16 नष्ट हुए और नूर खान (चकला) एयरबेस पर हमले के बाद पाकिस्तानी उत्तरी वायु कमान अंधी हो गई।  315 किमी दूर से S-400 मिसाइल से एक AEW&C विमान को मार गिराया गया, जो आधुनिक युद्ध में अत्यंत दुर्लभ है। भारतीय सेना की M777 एक्सकैलिबर तोपों और युद्धक लूटेरिंग एम्युनिशन से पाकिस्तानी सैनिक LoC पर पोस्ट छोड़कर भाग गए। भारतीय नौसेना के भय से पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज और पनडुब्बियां समुद्र में निकलने की बजाय ग्वादर बंदरगाह की ओर सिमट गईं। 10 मई को दोपहर भोलारी एयरबेस पर आखिरी ब्रह्मोस स्ट्राइक हुई, जिसके बाद सभी मिशन उद्देश्यों की पूर्ति हो गई। आलोचकों का मानना है कि अमेरिकी दबाव के कारण कार्रवाई रोकी गई, लेकिन सेना सूत्र इस मिशन को पूर्ण मानते हैं। सेना विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के कार्यकाल में निकट भविष्य में फिर एक आतंकी हमला संभव है। इस बार संकेत साफ है। अगली बारी भारतीय नौसेना कार्रवाई करेगी।  

UPPL या BPF? बोडोलैंड में BJP की रणनीति पर सवाल

असम  असम के बोडोलैंड छठी अनुसूची क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी ऊहापोह की स्थिति में नजर आ रही है। इस दुविधा की वजह सितंबर में होने वाला संभावित परिषद चुनाव है। इन चुनावों के लिए पार्टी पहले ही घोषणा कर चुकी है कि वह आगामी चुनाव अकेले दम लड़ेगी। भाजपा के साथ दिक्कत यह है कि वह वर्तमान में क्षेत्रीय पार्टी यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL) के साथ परिषद में गठबंधन में है और इस समय पर परिषद में यूपीपीएल ही बढ़त में है। इसके अलावा परिषद में विपक्ष में बैठी बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट(BPF) असम विधानसभा में एनडीए सरकार की सहयोगी है। अब सत्ता का समीकरण इस कदर बदला है कि भाजपा के अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा करने के बाद UPPL और BPF आपस में गठबंधन करने के लिए बातचीत कर रही है। गौरतलब है कि असम में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। उन चुनावों से पहले बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (BTR) की 40 सीटों पर होने वाला यह चुनाव आखिरी है। ऐसे में सभी पार्टियां इसमें अपना दबदबा कायम रखना चाहेंगी। भले ही अभी परिषद चुनावों की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पिछले कुछ हफ्तों से लगातार बोडोलैंड में सभाएं कर रहे हैं। मीडिया से बात करते हुए सरमा ने कहा कि वह इस क्षेत्र की जनता की नब्ज को टटोल रहे हैं। बीटीआर में शांति स्थापित करना भारतीय जनता पार्टी की एनडीए सरकार की सबसे बड़ी कामयाबी है। उन्होंने कहा, "जब से दिल्ली और दिसपुर में भाजपा की सरकार बनी है, तब से गोलियों से एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है।" गौरतलब है कि इससे पहले 2020 में हुए परिषद चुनावों में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। तब बीपीएफ 17 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। लेकिन भाजपा और यूपीपीएल ने गण सुरक्षा पार्टी के साथ गठबंधन बनाकर परिषद में सरकार बनाई थी। यहाँ पर कांग्रेस का भी एक सदस्य जीतकर आया था लेकिन बाद में वह पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गया।