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BRICS सम्मेलन से पहले कूटनीतिक हलचल तेज, शी जिनपिंग के भारत आने की चर्चा ने बढ़ाई उत्सुकता

नई दिल्ली भारत और चीन के रिश्ते में बहुत जल्द नया मोड़ देखने को मिल सकता है. भारत-चीन लगातार अपने संबंध सुधार रहे हैं. पीएम मोदी और शी जिनपिंग की कोशिशें रंग लाती दिख रही हैं. यही कारण है कि बीते कुछ समय में चीन-भारत के रिश्तों पर जमी बर्फ पिघली है. अब भारत-चीन संबंध में नया मोड़ आया है. जी हां, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग बहुत जल्द भारत आने वाले हैं. सूत्रों की मानें तो इसी साल सितंबर में शी जिनपिंग भारत का दौरा कर सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो बीते 7 साल में शी जिनपिंग की यह पहली भारत यात्रा होगी।   रिपोर्ट की मानें तो चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS नेताओं के शिखर सम्मेलन में शामिल हो सकते हैं. माना जा रहा है कि चीन की ओर से नई दिल्ली को सूचित किया गया है कि शी जिनपिंग के इस सम्मेलन में आने की संभावना है. यहां बताना जरूरी है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए दिल्ली में रहेंगे. रूसी साइड ने पुतिन के दिल्ली दौरे को कन्फ्रम बताया है।  पुतिन भी आ रहे भारत रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, रूसी अधिकारियों ने पुतिन की उपस्थिति की पुष्टि की है. वह 31 अगस्त और 1 सितंबर को किर्गिस्तान के बिश्केक में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भी शामिल होंगे. पीएम मोदी के भी एससीओ समिट में शामिल होने की संभावना है।  2019 के बाद पहली यात्रा बहरहाल, ब्रिक्स समिट में अगर शी जिनपिंग आते हैं तो 2019 के बाद उनकी यह पहली यात्रा होगी. शी जिनपिंग की ब्रिक्स समिट में भागीदारी सबसे ज्यादा चर्चा का विषय होगा. आखिरी बार वह 2019 में भारत आए थे. अक्टूबर 2019 में वह चेन्नई के पास मामल्लापुरम में भारत-चीन नेताओं के दूसरे अनौपचारिक सम्मेलन में आए थे. उसके बाद गलवान हिंसा ने भारत-चीन के रिश्तों को बहुत खराब कर दिया।  भारत-चीन के रिश्ते कैसे बिगड़े जी हां, भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंध अप्रैल-मई 2020 में सीमा विवाद के बाद काफी बिगड़ गए थे. तब गलवान हिंसा हुई थी. इस गलवान संघर्ष ने चीन-भारत के संबंधों को बिगाड़ दिया था. इसके बाद तो तनातनी खूब चली. हालांकि, संबंधों को स्थिर करने की प्रक्रिया अक्टूबर 2024 में शुरू हुई. तब रूस के कजान शहर में ब्रिक्स समिट था. वहां मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी. उसी समय दोनों देशों ने एलईएस सैनिकों की वापसी पूरी करने का फैसला किया था. तब से लगातार भारत और चीन के रिश्ते बेहतर हो रहे हैं।  भारत-चीन के रिश्ते में 2019 के बाद क्या-क्या हुआ?     भारत और चीन के रिश्तों में 2019 के बाद कई बड़े उतार-चढ़ाव आए. अक्टूबर 2019 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आए थे. तमिलनाडु के महाबलीपुरम में उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई थी. दोनों देशों ने व्यापार, निवेश और सीमा विवाद को बातचीत से सुलझाने पर जोर दिया था. उस समय रिश्तों में नरमी दिखाई दी थी।      लेकिन जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हो गई. इस संघर्ष में दोनों देशों के सैनिक मारे गए और सीमा पर तनाव बहुत बढ़ गया. इसके बाद भारत ने चीन के कई मोबाइल ऐप बैन किए और सीमा पर सेना की तैनाती बढ़ा दी. दोनों देशों के रिश्ते कई साल तक तनावपूर्ण रहे।      इसके बाद धीरे-धीरे सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत शुरू हुई. अक्टूबर 2024 में रूस के कजान शहर में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान मोदी और जिनपिंग की मुलाकात हुई. इस बैठक में दोनों नेताओं ने सीमा विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने और रिश्तों को सामान्य बनाने पर सहमति जताई. इसके बाद दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ाने की कोशिशें फिर तेज हुईं।   

पश्चिम बंगाल की राजनीति में गरमाए बयान, शुभेंदु अधिकारी ने सरकार गठन को लेकर कही बड़ी बात

कोलकाता मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार राष्ट्रवादियों की सरकार होगी, और यह भारतीय परंपरा और संस्कृति को बनाए रखेगी तथा राज्य की व्यवस्था को बदलने के लिए काम करेगी। उत्तर बंगाल के लोगों द्वारा भगवा पार्टी को लगातार दिए जा रहे समर्थन के लिए भाजपा की ओर से आभार व्यक्त करते हुए, अधिकारी ने मुख्यमंत्री के तौर पर इस क्षेत्र की अपनी पहली यात्रा के दौरान कहा कि नई बनी सरकार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के घोषणापत्र में किए गए सभी वादों को एक तय समय-सीमा के भीतर पूरा करेगी। अधिकारी ने कहा, "यह लोगों की सरकार होगी, राष्ट्रवादियों की सरकार होगी और यह भारतीय परंपरा और संस्कृति को बनाए रखेगी।" मुख्यमंत्री ने कहा, "हमारी एक सपनों की सरकार होगी जो लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करेगी। हम सिर्फ सत्ताधारी पार्टी के झंडे का रंग या सत्ता में बैठे लोगों को बदलना नहीं चाहते। हम तो व्यवस्था में बदलाव चाहते हैं।" हर महीने मिलेंगे तीन हजार रुपये उत्तरी बंगाल के सबसे बड़े शहर सिलीगुड़ी में भाजपा दफ्तर में बोलते हुए, अधिकारी ने कहा कि पार्टी ने अपने 'संकल्प पत्र' (चुनावी घोषणापत्र) में जो घोषणाएं की थीं, उन्हें पूरा किया जा रहा है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार और पार्टी के बीच तालमेल बना रहेगा। नई सरकार ने 'अन्नपूर्णा योजना' शुरू करने का फैसला किया है। इसके तहत, पिछली ममता बनर्जी सरकार की 'लक्ष्मी भंडार' योजना के तहत महिलाओं को मिलने वाली 1,500 रुपये की मासिक आर्थिक मदद को बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दिया जाएगा। बसों में सफर मुफ्त इसके अलावा, सरकार ने महिलाओं के लिए सरकारी बसों में सफर मुफ्त कर दिया है और राज्य में 'आयुष्मान भारत योजना' शुरू करने की भी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि बदली हुई स्थिति में, अब 'सिंडिकेट', 'कट मनी कल्चर' या 'माफिया राज' जैसी कोई चीज नहीं होगी, और पश्चिम बंगाल में किसी भी तरह की राष्ट्र-विरोधी गतिविधि नहीं होगी। 'सभी वादों तय समय-सीमा के भीतर पूरे होंगे' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार कहा था कि TMC शासन के दौरान पश्चिम बंगाल में 'सिंडिकेट राज', 'कट मनी कल्चर' और 'माफिया राज' का बोलबाला था, और उन्होंने राज्य में कानून का राज स्थापित करने का संकल्प लिया था। अधिकारी ने कहा कि नई भाजपा सरकार जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी और भारत सेवाश्रम संघ के संस्थापक स्वामी प्रणबानंद के सपनों को पूरा करना सुनिश्चित करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार भाजपा के चुनावी घोषणापत्र में किए गए सभी वादों को एक तय समय-सीमा के भीतर पूरा करेगी।

ईरान तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव, करीबी नेताओं के विरोधी खेमे में जाने से हलचल तेज

वाशिंगटन  अमेरिका की सीनेट में  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा. ईरान युद्ध को सीमित करने वाले प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान उसके ही चार सांसदों ने अपनी पार्टी के खिलाफ जाकर डेमोक्रेट्स का साथ दे दिया. यह प्रस्ताव वॉर पॉवर्स एक्ट के तहत राष्ट्रपति की सैन्य कार्रवाई की शक्तियों को सीमित करने से जुड़ा है. सीनेट में यह प्रस्ताव 50-47 वोटों से पास हुआ, जिसमें तीन रिपब्लिकन सांसद वोटिंग में शामिल नहीं हुए. रिपब्लिकन सीनेटर रैंड पॉल, सुसान कॉलिन्स, लिसा मर्कोव्स्की और बिल कैसिडी ने ट्रंप के खिलाफ वोट किया, वहीं डेमोक्रेट सांसद जॉन फेटरमैन ने इस प्रस्ताव का विरोध किया।  ये सिर्फ एक राजनीतिक एजेंडा नहीं था, बल्कि डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बुरा संकेत भी है. अब तक सिर्फ बयान आ रहे थे लेकिन इसे ट्रंप के खिलाफ उनकी ही पार्टी की ओर से एक दुर्लभ सार्वजनिक नाराजगी माना जा रहा है. अब तक रिपब्लिकन पार्टी और उसके समर्थक ईरान युद्ध में ट्रंप के साथ खड़े रहे हैं, लेकिन 81 दिन से जारी इस युद्ध का कोई स्पष्ट समाधान नजर नहीं आ रहा है. ऐसे में पार्टी के भीतर भी नाराजगी नजर आने लगी है।  ट्रंप को हटाने के लिए 25वें संशोधन की भी मांग मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच कई बार ऐसे सवाल भी उठे हैं कि क्यों उन्हें संविधान का सहारा लेकर हटा न दिया जाए? डेमोक्रेट्स ने 25वें संशोधन की मांग की और डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस मर्फी कई बार ये कह चुके हैं कि उपराष्ट्रपति और कैबिनेट को तुरंत 25वें संशोधन की धारा 4 लागू करनी चाहिए.अमेरिका के कई सांसद और नेता कह रहे हैं कि ट्रंप का ईरान युद्ध को लेकर बार-बार शब्द बदलना, रणनीति बदलना और यह गाली भरा पोस्ट लिखना, उनके मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल उठाता है. ईरान युद्ध में हजारों मौतें हो चुकी हैं और ट्रंप लगातार पूर्ण हवाई नियंत्रण का दावा करते हैं, लेकिन ईरानी हमले खत्म नहीं हो रहे. ऐसे में लोग चिंतित हैं कि राष्ट्रपति का यह व्यवहार देश और दुनिया के लिए खतरा बन सकता है।  कैसे जा सकती है ट्रंप की कुर्सी? इस सवाल का सीधा जवाब है – 25वां संशोधन और उसकी धारा 4. यह अमेरिकी संविधान का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है, जो 1967 में राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी की हत्या के बाद पास किया गया. इसका मकसद होता है – अगर राष्ट्रपति मर जाए, इस्तीफा दे दे, हटा दिया जाए या अक्षम हो जाए तो उपराष्ट्रपति को सत्ता सौंपने की प्रक्रिया तय करना. इसकी धारा 4 की मांग की जा रही है।  धारा 4: यह सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें उपराष्ट्रपति और कैबिनेट के बहुमत (15 में से 8) को अधिकार है कि वे लिखित रूप से घोषणा करें कि राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों को निभाने में असमर्थ हैं. इसके बाद उपराष्ट्रपति तुरंत एक्टिंग राष्ट्रपति बन जाता है. अगर राष्ट्रपति कहे कि वह ठीक है तो 4 दिन में कैबिनेट और उपराष्ट्रपति को कांग्रेस में दो-तिहाई बहुमत से साबित करना पड़ता है। 

भारत के लिए एक साथ अच्छी और बुरी खबर, GDP घटने के बावजूद विकास की उम्मीद कायम

नईदिल्ली  विदेश से भारत के लिए एक साथ दो खबरें आई हैं, इनमें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक अच्छी और एक बुरी खबर शामिल है. यूनाइटेड नेशंस यानी UN के डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक्स एंड सोशल अफेयर्स (UN DESA) ने एक रिपोर्ट जारी कर भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान में कटौती कर झटका दिया है, तो वहीं कहा है कि कटौती के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा। अब इस रफ्तार से भागेगी इकोनॉमी पीटीआई के मुताबिक, यूएन की रिपोर्ट में मिडिल ईस्ट संकट (Middle East Crisis) का हवाला देते हुए भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान में कटौती की गई है. इसे 20 बेसिस पॉइंट कम करते हुए FY26 के लिए 6.4 फीसदी कर दिया गया है. इससे पहले UN ने भारतीय इकोनॉमी के 6.6 फीसदी की रफ्तार से आगे बढ़ने का अनुमान जताया था।  इसमें एनालिस्ट ने बताया है कि अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध से पैदा हुए पश्चिम एशिया संकट ने ग्लोबल अनिश्चितता पैदा कर दी है, इससे लगने वाले आर्थिक झटकों के मद्देनजर जीडीपी ग्रोथ का अनुमान घटाया गया है।  UN DESA की रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट टेंशन वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित हुई है. इससे जहां आर्थिक वृद्धि धीमी हुई है, तो महंगाई का दबाव लगातार बढ़ा है. प्रमुख अर्थशास्त्री इंगो पिटर्ले ने कहा कि इस ग्लोबल झटके से भारत भी अछूता नहीं है. ऊर्जा आयात पर निर्भरता के चलते ये प्रभावित हो रहा है।  UN ने दी ये बड़ी खुशखबरी भले ही यूएन ने भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान को घटा दिया है, लेकिन इसके साथ ही एक गुड न्यूज भी दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जीडीपी में गिरावट के बाद भी भारत सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुईं दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना रहेगा।  पिटर्ले का कहना है कि हमने भारत में संरचनात्मक रूप से बहुत मजबूत ग्रोथ देखी है, जो कंज्यूमर डिमांड, सार्वजनिक निवेश और सर्विस एक्सपोर्ट में मजबूत प्रदर्शन के चलते है. सबसे तेज इकोनॉमी की लिस्ट में भारत को आगे रखने के में ये प्रमुख कारक होंगे।  चुनौतियां बहुत, फिर भी भारत में दम  यूनाइटेड नेशंस के अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारत में दम है और देश के उत्पादन में अभी भी 6.4 फीसदी की ग्रोथ का अनुमान है. हालांकि, यह आंकड़ा बीते साल 2025 में 7.5 फीसदी की तुलना में कम है, जो स्पष्ट तस्वीर पेश करता है कि एनर्जी इंपोर्ट की लागत में तगड़ा उछाल, कठिन वित्तीय परिस्थितियां पैदा कर रहा है।  रिपोर्ट में ये अनुमान भी जाहिर किया गया है कि अगर वित्त वर्ष 2027 में India's Economic Growth Rate फिर बढ़कर 6.6 फीसदी हो सकती है। 

EPFO की बड़ी तैयारी पूरी, अब UPI से मिनटों में मिल सकेगा PF का भुगतान

नई दिल्ली  अगर आप प्राइवेट नौकरी करते हैं और आपका पीएफ कटता है तो यह खबर आपके काम की हो सकती है। दरअसल, अब आपका पीएफ का पैसा सीधे UPI से निकल सकता है। यूपीआई के जरिए सीधे आपके खाते में पीएफ का पैसा आएगा। इसके लिए EPFO ने पूरी तैयारी कर ली है। जल्द ही इसे रोलआउट किया जा सकता है। UPI और ATM के जरिए PF का पैसा जल्द निकालने की सुविधा मिलना शुरू होगी। PF क्लेम फाइल करने और प्रोसेसिंग के लिए कई दिनों तक इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी। EPFO सब्सक्राइबर अब जल्द ही UPI का इस्तेमाल करके अपने प्रोविडेंट फंड के पैसे सीधे अपने बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर पाएंगे। सरकार का कहना है कि इस नए फीचर की टेस्टिंग (epfo upi withdrawal testing) पूरी हो चुकी है, और अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक रहा, तो लाखों कर्मचारी जल्द ही अपने फोन पर बस कुछ ही स्टेप फॉलो करके अपनी EPF बचत तक पहुंच पाएंगे। आइए जानते हैं कि अगर UPI के जरिए PF का पैसा निकलाने की सुविधा शुरू होती है तो इसका प्रोसेस क्या होगा। इस आर्टिकल में हम आपको स्टेप बॉय स्टेप बताएंगे कि ये प्रोसेस कैसे काम करेगा। अभी नहीं की गई आधिकारिक घोषणा सरकार ने अभी इसके आधिकारिक लॉन्च की घोषणा नहीं की है। टेस्टिंग सफल रही है। ऑपरेशनल मंजूरी और सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन का काम पूरा होते ही, आने वाले महीनों में इसे शुरू किया जा सकता है। EPFO अपने सात करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर्स के लिए इस सिस्टम को शुरू करने से पहले, बैकएंड सॉफ्टवेयर से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने पर काम कर रहा है। UPI के जरिए EPF से पैसे निकालना का प्रोसेस क्या होगा? प्रस्तावित व्यवस्था के तहत, EPF खाते का एक निश्चित हिस्सा फ्रीज रहने की उम्मीद है, जबकि शेष राशि का एक बड़ा हिस्सा UPI-लिंक्ड बैंक खातों के जरिए निकालने के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। अगर EPFO अपने सब्सक्राइर्स का पैसा UPI के जरिए निकालने की सुविधा को रोलआउट करता है तो उसका प्रोसेस नीचे दिए गए स्टेप्स की तरह हो सकता है।     क्लेम करने के लिए आपको UMANG APP या फिर EPFO की वेबसाइट पर जाना होगा।     इसके बाद मांगी गई जरूरी जनकारी फिल करनी होगी।     इसके बाद आपको वहां निकासी के लिए UPI का विक्लप दिखेगा।     UPI निकासी सिलेक्ट करने के बाद आपको आगे बढ़ना होगा।     ट्रांसफर पूरा करने के लिए, सदस्य बस अपने लिंक्ड UPI PIN का इस्तेमाल कर सकते हैं।     आपके पीएफ अमाउंट में जमा कुछ पैसा फ्रिज रहेगा। कुछ पैसा ही निकाला जा सकता है।     अकाउंट में पैसे आ जाने के बाद, सदस्य उनका इस्तेमाल अपनी मर्जी से कर सकते हैं – चाहे डिजिटल पेमेंट के लिए हो, ट्रांसफर के लिए, या फिर ATM से कैश निकालने के लिए। नोट- ध्यान रहे यह एक अनुमानित प्रोसेस है। क्योंक अभी यह सुविधा रोलआउट नहीं हुई है। WhatsApp पर भी आएगा EPFO सिर्फ UPI के जरिए निकासी ही नहीं बल्कि EPFO कई स्तर पर काम कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार आने वाले महीनों में EPFO WhatsApp के जरिए भी सेवाएं शुरू करने की योजना बना रहा है। अगर ईपीएफओ व्हाट्सएप सुविधा रोलआउट करता है तो सब्सक्राइबर्स अपने PF बैलेंस की जांच कर सकेंगे, पिछले पांच ट्रांज़ैक्शन देख सकेंगे, क्लेम का स्टेटस ट्रैक कर सकेंगे और आधार ऑथेंटिकेशन व बैंक अकाउंट लिंकिंग जैसे लंबित मामलों में सहायता प्राप्त कर सकेंगे।  

गिरते रुपये पर सरकार का बड़ा प्लान, विदेशी आयात घटाने की रणनीति पर काम तेज

नई दिल्ली भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 96.5 पर बंद हुआ, जबकि  यह 96.34 पर था. इस गिरते हुए रुपया को संभालने के लिए पिछले महीने ही आरबीआई ने कई अहम कदम उठाए थे. लेकिन इससे भी कुछ खास असर पड़ता हुआ नजर नहीं आया।  अब सरकार देश के बढ़ते इंपोर्ट बिल को कम करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए गैर-जरूरी(non essential) सामानों के इंपोर्ट की समीक्षा कर रही है. अधिकारियों के मुताबिक, जिन सामानों में भारत की विदेशों पर निर्भरता कम है, उनके आयात पर ज्यादा चार्ज या कुछ प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।  पेमेंट बैलेंस पर दबाव इस मुद्दे पर अगले हफ्ते पश्चिम एशिया संकट को लेकर होने वाली मंत्रालय की बैठक में चर्चा हो सकती है. भारत का ट्रेड डेफिसिट अप्रैल में बढ़कर 28.4 अरब डॉलर पहुंच गया, जो मार्च में 20.7 अरब डॉलर था. इससे देश के पेमेंट बैलेंस पर दबाव बढ़ रहा है, क्योंकि विदेशी निवेश में कमी और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के बाहर जाने जैसी चुनौतियां भी सामने हैं।  इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि अगर आयात पर कोई रोक या अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है तो उसे बहुत सोच-समझकर लागू किया जाएगा, ताकि जरूरी सप्लाई चेन और उद्योगों पर कोई बड़ा असर न पड़े।  रुपये की स्थिति सुधारने के लिए सरकार का कदम अगले हफ्ते होने वाली बैठक में सरकार गैर-जरूरी सामानों(non essential items) के आयात को कम करने, रुपये की स्थिति सुधारने और अर्थव्यवस्था को गति देने के उपायों पर चर्चा करेगी. अधिकारियों के मुताबिक, सरकार ऐसे कदमों पर विचार कर रही है जिससे देश का इंपोर्ट बिल कम हो और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिले।  इस बैठक में वित्त मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई अहम मंत्रालयों के अधिकारी शामिल होंगे. साथ ही रेवेन्यू बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने के लिए तुरंत लागू किए जा सकने वाले उपायों पर भी चर्चा की जाएगी।  इंपोर्टेड सामानों नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी सरकार का मानना है कि कई ऐसे सामान विदेशों से इंपोर्ट किए जा रहे हैं, जिन्हें भारत में ही बनाया जा सकता है. इससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है. अधिकारियों ने कहा कि सरकार उद्योगों से बातचीत कर रही है ताकि गैर-जरूरी आयात कम हो सके. जरूरत पड़ने पर कुछ सामानों पर इंपोर्ट बिल बढ़ाया जा सकता है या नए प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।  सोने के आयात पर सरकार का फैसला हाल ही में सरकार ने सोने के आयात को कम करने के लिए कस्टम ड्यूटी बढ़ाई थी और कुछ नियम भी लागू किए थे. सरकार ने गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी 6 से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था, जिसमें 10 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी और 5 प्रतिशत सेस शामिल है. सरकार का मानना है कि इससे गोल्ड इंपोर्ट कम होगा, विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटेगा और देश का बढ़ता इंपोर्ट बिल नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।  अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में उठाए जाने वाले कदम पूरी योजना और संतुलन के साथ होंगे, ताकि जरूरी सामानों और मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन पर असर न पड़े. इसका मकसद रुपये को मजबूती देना और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है।  सरकार ने सभी मंत्रालयों से उन सामानों की लिस्ट मांगी है जिनके आयात को सीमित किया जा सकता है. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी कारोबारियों से कहा है कि जिन चीजों का उत्पादन भारत में हो सकता है, उन्हें विदेशों से मंगाने से बचना चाहिए. उनका कहना है कि कई सस्ते आयातित सामान की क्वालिटी भी अच्छी नहीं होती, इसलिए देश में निर्माण बढ़ाना जरूरी है। 

नॉर्वे के अखबार में छपे कार्टून से मचा हंगामा, PM मोदी के दौरे के बाद उठे सवाल

नई दिल्ली नॉर्वे के एक बड़े अखबार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक कार्टून बनाया है जिस पर अब विवाद शुरू हो गया. इस कार्टून में पीएम मोदी को सपेरे की तरह दिखाया गया था. उनके हाथ में सांप जैसी दिखने वाली एक पेट्रोल पाइप भी दिखाई गई. कार्टून के साथ छपे लेख का शीर्षक था, "A clever and slightly annoying man" यानी "एक चालाक और थोड़ा परेशान करने वाला आदमी।  सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस कार्टून को नस्लवादी बताया. लोगों का कहना है कि पश्चिमी मीडिया अब भी भारत को "सपेरों का देश" वाली पुरानी सोच से देखता है. कई यूजर्स ने लिखा कि यह भारत की गलत और पुरानी छवि दिखाने की कोशिश है।  एक यूजर ने एक्स पर लिखा, "यह कार्टून रेसिस्ट लगता है. पीएम मोदी खुद कई बार कह चुके हैं कि पहले दुनिया भारत को सपेरों का देश मानती थी, लेकिन अब वही सोच फिर दिखाई जा रही है." कुछ लोगों ने इसे "औपनिवेशिक मानसिकता" भी बताया।  विवाद तब और बढ़ गया जब नॉर्वे की पत्रकार हेले लाइंग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल पूछा कि पीएम मोदी मीडिया से सवाल क्यों नहीं लेते. उन्होंने भारत में प्रेस फ्रीडम और मानवाधिकारों का मुद्दा भी उठाया. हालांकि पीएम मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनस गाहर बिना जवाब दिए वहां से चले गए. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।  इसके बाद भारत की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई. भारतीय राजनयिक सिबि जॉर्ज ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और मीडिया को समझे बिना कुछ विदेशी संस्थाएं अधूरी जानकारी के आधार पर राय बना लेती हैं. उन्होंने कहा कि सिर्फ दिल्ली में ही 200 से ज्यादा न्यूज चैनल हैं और भारत जैसे बड़े देश को समझना आसान नहीं है।  इससे पहले भी कई विदेशी मीडिया संस्थानों पर भारत को पुराने "स्नेक चार्मर" वाले स्टीरियोटाइप में दिखाने के आरोप लग चुके हैं. पीएम मोदी ने 2014 में न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में कहा था कि दुनिया कभी भारत को "स्नेक चार्मर्स" यानी "सपेरों का देश" कहती थी, लेकिन आज भारत टेक्नोलॉजी और आईटी की ताकत बन चुका है। 

मोदी- मेलोनी की दोस्ती फिर चर्चा में, डिनर डेट के बाद साथ देखा रोम का ऐतिहासिक कोलोसियम

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पांच देशों के अहम कूटनीतिक दौरे के आखिरी पड़ाव पर मंगलवार को इटली की राजधानी रोम पहुंचे। रोम पहुंचने पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने बेहद खास अंदाज में उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं ने डिनर के बाद रोम के ऐतिहासिक 'कोलोसियम' का एक साथ दौरा किया है। इसके बाद, सोशल मीडिया पर एक बार फिर 'मेलोडी' (Meloni+Modi = Melodi) ट्रेंड कर रहा है। तस्वीरों में 'मेलोडी' का खास अंदाज पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इन तस्वीरों को शेयर किया है। इन खास तस्वीरों में भारत-इटली की मजबूत होती दोस्ती और दोनों नेताओं के बीच की सहजता साफ देखी जा सकती है। पहली दो तस्वीरों में पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी एक बालकनी से रोम शहर के खूबसूरत नजारों को निहारते और गहरी बातचीत करते नजर आ रहे हैं। इस दौरान पीएम मोदी अपने चिर-परिचित नीले रंग के लिबास में हैं, जबकि मेलोनी पीच रंग के खूबसूरत और सौम्य परिधान में हैं। एक तस्वीर में दोनों नेता कार की पिछली सीट पर बैठे हैं और कैमरे की तरफ देखकर मुस्कुरा रहे हैं। यह तस्वीर दोनों के बीच की बेहतरीन व्यक्तिगत बॉन्डिंग को दर्शाती है। कोलोसियम का ऐतिहासिक नजारा: एक अन्य तस्वीर रात के समय की है, जहां दोनों नेता रोम की सबसे भव्य और प्राचीन इमारत 'कोलोसियम' के सामने खड़े होकर पोज दे रहे हैं। पीएम मोदी ने क्या कहा? प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, "रोम में उतरने के बाद, मुझे प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ रात्रिभोज पर मिलने का अवसर मिला, जिसके बाद मैंने मशहूर कोलोसियम का दौरा किया। हमने कई विषयों पर अपने विचार साझा किए। आज होने वाली हमारी बातचीत का मुझे बेसब्री से इंतजार है, जिसमें हम भारत-इटली की दोस्ती को और मजबूत बनाने के विषय पर अपनी चर्चा जारी रखेंगे।" मेलोनी ने क्या कहा? जॉर्जिया मेलोनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रोम पहुंचने पर उनका स्वागत किया। उन्होंने एक्स पर पीएम मोदी के साथ तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “वेलकम टू रोम, माय फ्रेंड!" पहले भी वायरल हुईं मोदी-मेलोनी की तस्वीरें यह पहला मौका नहीं है जब पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरी हों। इससे पहले साल 2023 में दुबई में हुए COP28 शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी की 'Good friends at COP28' वाली सेल्फी काफी वायरल हुई थी। वहीं, साल 2024 में इटली के अपुलिया में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान 'मेलोडी टीम की तरफ से हैलो' वीडियो ने भी दुनियाभर में चर्चा बटोरी थी। दोनों नेताओं की यह आठवीं मुलाकात विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, साल 2023 के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जॉर्जिया मेलोनी के बीच यह आठवीं मुलाकात है। मार्च 2023 में मेलोनी की भारत यात्रा और जी-20 शिखर सम्मेलन में उनकी भागीदारी ने दोनों देशों के रिश्तों को नई मजबूती दी थी।   पीएम मोदी और मेलोनी का संदेश इन पलों को शेयर करते हुए पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "रोम में उतरने के बाद, प्रधानमंत्री मेलोनी के साथ डिनर पर मुलाकात का अवसर मिला, जिसके बाद ऐतिहासिक कोलोसियम का दौरा किया। हमने कई विषयों पर अपने दृष्टिकोण साझा किए। आज होने वाली हमारी वार्ता को लेकर उत्सुक हूं, जहां हम भारत-इटली की दोस्ती को और मजबूत करने के तरीकों पर अपनी चर्चा जारी रखेंगे। वहीं, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भी पीएम मोदी के साथ की तस्वीर साझा करते हुए गर्मजोशी से लिखा- रोम में आपका स्वागत है, मेरे दोस्त! इस मुलाकात का एक वीडियो भी सामने आया है जहां पीएम मेलोनी पीएम मोदी को रोम शहर के बारे में बता रही हैं। आज की द्विपक्षीय वार्ता का मुख्य एजेंडा यह यात्रा केवल इन शानदार तस्वीरों तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नए मुकाम पर ले जाने का एक बड़ा अवसर है। ताज़ा जानकारियों के अनुसार, आज होने वाली आधिकारिक मुलाकातों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं: रणनीतिक साझेदारी (2025-2029): दोनों देश 'जॉइंट स्ट्रैटेजिक एक्शन प्लान 2025-2029' की समीक्षा करेंगे। इसके तहत व्यापार, रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाया जाएगा। (आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 16.77 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है)। IMEC पर जोर: इस द्विपक्षीय वार्ता में 'भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे' (IMEC) को लेकर विशेष चर्चा होने की उम्मीद है। FAO मुख्यालय का दौरा: पीएम मोदी संयुक्त राष्ट्र के 'खाद्य और कृषि संगठन' (FAO) के मुख्यालय का भी दौरा करेंगे, जो वैश्विक खाद्य सुरक्षा और बहुपक्षवाद के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। राष्ट्रपति से मुलाकात: पीएम मोदी इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मटारेला से भी मुलाकात करेंगे। प्रवासी भारतीयों द्वारा भव्य स्वागत रोम पहुंचने पर पीएम मोदी का भारतीय समुदाय ने बेहद शानदार स्वागत किया। इस दौरान इतालवी कलाकारों ने भारतीय शास्त्रीय संगीत (राग हंसध्वनि) और कथक नृत्य प्रस्तुत किया। पीएम मोदी ने बच्चों को ऑटोग्राफ दिए, वाराणसी के घाटों की एक पेंटिंग देखी और भारतीय मूल के लोगों से खास बातचीत की। इसके अलावा, उन्होंने 'सनातन धर्म संघ' की इटली में आधिकारिक मान्यता को लेकर आध्यात्मिक गुरुओं से भी मुलाकात की। यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे के सफल दौरे के बाद, इटली में पीएम मोदी का यह स्वागत भारत की मजबूत होती वैश्विक पकड़ और इटली के साथ गहरी होती साझेदारी का एक स्पष्ट संकेत है। इन तस्वीरों ने कूटनीति के साथ-साथ दो वैश्विक नेताओं की व्यक्तिगत दोस्ती को भी बखूबी बयां किया है।

PM मोदी और मेलोनी ने साथ बिताया खास वक्त, डिनर और कोलोसियम विजिट ने बढ़ाई दोस्ती की चर्चा

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को इटली पहुंचे। रोम पहुंचने के बाद उन्हें PM जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की। PM मोदी ने X पर पोस्ट कर बताया कि दोनों नेताओं ने साथ में डिनर भी किया। इस दौरान कई अहम मुद्दों पर बातचीत की। इसके बाद मोदी और मेलोनी ने रोम के ऐतिहासिक कोलोसियम का दौरा भी किया। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया पर मोदी के साथ तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, ‘वेलकम टु रोम, माय फ्रेंड।’ PM मोदी ने कहा कि आज होने वाली औपचारिक बातचीत में भारत-इटली दोस्ती को और मजबूत करने पर चर्चा जारी रहेगी। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, एडवांस टेक्नोलॉजी और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मोदी इटली में कई अहम कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इस दौरान वे इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मातारेला से भी मुलाकात करेंगे। अपनी पांच देशों की यात्रा के आखिरी पड़ाव पर मंगलवार को वह रोम पहुंचे, जहां इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. मेलोनी ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के साथ तस्वीर साझा करते हुए लिखा, "Welcome my friend ." दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी और इटली पीएम मेलोनी की मुलाकातें औपचारिक कूटनीतिक मुलाकातों से कहीं ज्यादा अहमीयत रखता है. पिछले कुछ वर्षों में दोनों नेताओं ने भारत-इटली संबंधों को एक नई दिशा दी है. कभी सीमित व्यापारिक रिश्तों तक सिमटे दोनों देशों के संबंध अब रक्षा, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, AI और ग्लोबल सप्लाई चेन जैसे बड़े रणनीतिक मुद्दों तक पहुंच चुके हैं।  प्रधानमंत्री मोदी रोम पहुंचते ही अपना एजेंडा भी बताया. उन्होंने एक एक्स पोस्ट में बताया, "इस दौरे में भारत और इटली के बीच सहयोग को कैसे मजबूत किया जाए, इस पर फोकस किया जाएगा, जिसमें इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) पर खास ध्यान दिया जाएगा।  मोदी-मेलोनी की पहली मुलाकात बाली में इस नई साझेदारी की शुरुआत नवंबर 2022 में इंडोनेशिया के बाली में हुए G20 शिखर सम्मेलन से मानी जाती है. उस वक्त मेलोनी हाल ही में इटली की प्रधानमंत्री बनी थीं. दोनों नेताओं की पहली मुलाकात में यह साफ हो गया था कि भारत और इटली नए दौर की शुरुआत करना चाहते हैं. इसी बैठक में ग्रीन एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और इटैलियन मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की भारत में भागीदारी बढ़ाने पर सहमति बनी।  भारत-इटली में स्ट्रेटेजिक पार्टनर्शिप इसके बाद मार्च 2023 में मेलोनी भारत आईं और रायसीना डायलॉग में चीफ गेस्ट बनीं. यही वह मोड़ था जहां दोनों देशों के रिश्तों को आधिकारिक तौर पर "स्ट्रेटेजिक पार्टनर्शिप" का दर्जा मिला. इस दौरान रक्षा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर हुए. इसके तहत दोनों देशों ने संयुक्त सैन्य अभ्यास, सिक्योर इंटेलिजेंस शेयरिंग और आतंकवाद विरोधी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई. इटली की बड़ी रक्षा कंपनियों को भारत में सैन्य उपकरणों के को-प्रोडक्शन का रास्ता भी खुला।  भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर का हिस्सा इटली सितंबर 2023 में नई दिल्ली में हुए G20 सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के रिश्ते एक और स्तर ऊपर पहुंच गए. इटली भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर यानी IMEC का हिस्सा बना. इस कॉरिडोर का मकसद भारत को यूरोप से जोड़ने वाला नया व्यापारिक और समुद्री नेटवर्क तैयार करना है. इसी दौरान माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप एग्रीमेंट भी फाइनल हुआ, जिससे भारतीय छात्रों, रिसर्चर्स और स्किल्ड प्रोफेशनल्स के लिए इटली में अवसर बढ़े।  AI, स्पेस टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स पर करार जून 2024 में इटली में आयोजित G7 सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की फिर मुलाकात हुई. यहां बातचीत का फोकस भविष्य की टेक्नोलॉजी पर रहा. दोनों देशों ने AI, स्पेस टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स, टेलीकॉम और क्लीन एनर्जी सप्लाई चेन को लेकर सहयोग बढ़ाने का फैसला किया. साथ ही इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी राइट्स यानी पेटेंट और डिजाइन से जुड़े समझौतों पर भी हस्ताक्षर हुए।  जी-20 में मेलोनी-मोदी की मुलाकात इसके बाद नवंबर 2024 में ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में हुए G20 सम्मेलन में दोनों देशों ने 2025-2029 के लिए फाइव ईयर जॉइंट स्ट्रैटेजिक एक्शन प्लान लॉन्च किया. यह अब तक का सबसे बड़ा रोडमैप माना गया, जिसमें रक्षा, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, शिक्षा, व्यापार और वैश्विक सहयोग समेत 10 बड़े सेक्टर शामिल किए गए।  नवंबर 2025 में साउथ अफ्रीका के जोहोन्सबर्ग में हुए G20 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी की मुलाकात में आतंकवाद के खिलाफ एक बेहद अहम समझौता हुआ. दोनों देशों ने "इंडिया-इटली जॉइंट इनीशियेटिव टू काउंटर फाइनेंसिंग ऑफ टेररिज्म" लॉन्च किया, जिसका मकसद आतंकवादी संगठनों की फंडिंग पर लगाम लगाना था।  दिल्ली में हुए हाई-प्रोफाइल आतंकी हमले के बाद मेलोनी ने भारत के साथ खुलकर एकजुटता दिखाई थी. इस पहल के तहत दोनों देशों ने आतंकियों को मिलने वाली अवैध फंडिंग और क्रॉस-बॉर्डर वित्तीय नेटवर्क को रोकने, संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर निगरानी बढ़ाने और एफएटीएफ और ग्लोबल काउंटरटेररिज्म फोरम जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आपसी तालमेल मजबूत करने पर सहमति जताई।  "इंडो-मेडिटेरेनियन कॉरिडोर" पर करार अब मई 2026 में प्रधानमंत्री मोदी की यह रोम यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को और गहरा करने वाली मानी जा रही है. इस दौरान "इंडो-मेडिटेरेनियन कॉरिडोर" की अवधारणा को औपचारिक रूप दिया गया है. इसका मकसद हिंद महासागर से लेकर यूरोप तक समुद्री व्यापार और रणनीतिक कनेक्टिविटी को मजबूत करना है. साथ ही AI को लेकर भी बड़ा समझौता हुआ है, जिसमें इटली के "एल्गोर-एथिक्स" मॉडल और भारत की "ह्युमन सेंट्रिक एआई" सोच को साथ लाने की कोशिश की गई है।  विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत और इटली की यह बढ़ती नजदीकी सिर्फ दो देशों के रिश्तों की कहानी नहीं है, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति का संकेत भी है. एक तरफ भारत यूरोप में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहता है, वहीं इटली एशिया में भारत को एक भरोसेमंद और स्थिर साझेदार के रूप में देखता है। 

SC का बड़ा फैसला, रेलवे पर ₹15 हजार करोड़ का सरचार्ज बरकरार; पुरानी दलील नहीं आई काम

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने देश के सबसे बड़े बिजली उपभोक्ताओं में से एक भारतीय रेलवे को बड़ा वित्तीय झटका दिया है. अदालत ने साफ किया है कि रेलवे बिजली कानून के तहत कोई विशेष दर्जा पाने का हकदार नहीं है. उसे अन्य औद्योगिक इकाइयों की तरह ही अपनी बिजली खपत पर सभी तरह के सरचार्ज देने होंगे. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने रेलवे की आठ अपीलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. कोर्ट ने विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण के पुराने फैसले को सही ठहराया है. इस फैसले से राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों को बड़ी राहत मिली है, लेकिन रेलवे के बजट पर इसका बहुत बुरा असर पड़ने की आशंका है।  रेलवे पर क्यों फूटा 15,000 करोड़ रुपये का वित्तीय बम? भारतीय रेलवे हर साल करीब 33 अरब यूनिट से ज्यादा बिजली का इस्तेमाल करती है. इस बड़े फैसले के बाद रेलवे को बैकडेटेड एरियर यानी पुराना बकाया भी चुकाना होगा. राज्यों के हिसाब से यह क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज 50 पैसे से लेकर 2.5 रुपये प्रति यूनिट तक है।  सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों की डिस्कॉम कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे रेलवे के ओपन एक्सेस इस्तेमाल की अवधि और क्षेत्र के हिसाब से बकाया राशि का आकलन करें. रेलवे के आंतरिक अनुमानों के अनुसार यह कुल बकाया राशि कम से कम 15,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है. यह रकम रेलवे के चालू वित्त वर्ष के बजट को पूरी तरह बिगाड़ सकती है।  10 साल पुराने कानूनी दांवपेंच में कहां मात खा गई रेलवे?     रेलवे साल 2015 से अदालत में यह दलील दे रही थी कि वह एक ‘डीम्ड डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी’ है. इस रणनीति के पीछे रेल मंत्रालय और ऊर्जा मंत्रालय का साल 2014 का एक पत्र था।      रेलवे का दावा था कि रेलवे एक्ट 1989 की धारा 11 के तहत उसे खुद का बिजली नेटवर्क और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम बनाने का अधिकार प्राप्त है. इसलिए वह ग्रिड से सीधे बिजली लेते समय किसी भी तरह का सरचार्ज देने के लिए उत्तरदायी नहीं है।      सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि कानूनन डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी होने के लिए दूसरों को बिजली बेचना जरूरी है, जबकि रेलवे पूरी बिजली खुद ही कंज्यूम करती है।  रेलवे डिस्ट्रीब्यूटर है या सिर्फ एक कंज्यूमर? सुप्रीम कोर्ट ने तकनीकी पहलुओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि रेलवे का पूरा ओवरहेड इक्विपमेंट और ट्रैक्शन सबस्टेशन उसका आंतरिक सिस्टम है. यह कोई पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम नहीं है. बिजली कानून के तहत लाइसेंसी कहलाने के लिए दो शर्तें पूरी होनी चाहिए।      पहली शर्त यह कि आपके पास डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम हो.     दूसरी यह कि आप किसी तीसरे पक्ष को बिजली की सप्लाई करते हों. रेलवे जो भी बिजली खरीदती है, उसका इस्तेमाल केवल इंजनों, सिग्नलों और स्टेशनों को चलाने में होता है. वह इसे किसी बाहरी उपभोक्ता को नहीं बेचती है. इसी आधार पर कोर्ट ने रेलवे को बिजली कानून की धारा 2(15) के तहत सिर्फ एक कंज्यूमर माना है।  क्या अब फेल हो जाएगी रेलवे की महा-बचत योजना? रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य मोहम्मद जमशेद के अनुसार, इस अदालती आदेश में रेलवे की पूरी वित्तीय बचत को खत्म करने की क्षमता है. रेलवे ने साल 2015 के आसपास एक बड़ी नीतिगत पहल शुरू की थी. इसके तहत ओपन एक्सेस से सस्ती बिजली खरीदकर एक दशक में 41,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बचाने का लक्ष्य था. यह नया फैसला उस पूरी योजना पर पानी फेर सकता है।  रेलवे ने अपने ब्रॉड-गेज नेटवर्क का लगभग 100% इलेक्ट्रिफिकेशन पूरा कर लिया है. इस मिशन पर करीब 46,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. डीजल पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण को बचाने की यह मुहिम अब ओपन एक्सेस मार्केट के महंगे सरचार्ज के जाल में फंस गई है।