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कठुआ से युवक गिरफ्तार, आर्मेनिया से संचालित हो रहा था नशा तस्करी का बड़ा नेटवर्क

कठुआ  पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय नशा तस्करी के नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। अभी तक की जांच में सामने आया है कि कठुआ के एक छोटे से गांव चक्क दराब खां का रहने वाला तस्कर अर्मेनिया में बैठकर नेटवर्क चला रहा है। यह तस्कर पाकिस्तान और पंजाब में सक्रिय नशा तस्करों के संपर्क में है और सीमा पार से पंजाब के रास्ते हेरोइन मंगाकर आगे सप्लाई कर रहा है। पुलिस ने कठुआ के चक्क दराब खां से एक नशा तस्कर को हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया, जिसने पूछताछ में यह राजफाश किया है। पुलिस आगे की जांच में जुटी है। जानकारी के अनुसार, एक पुख्ता सूचना पर कठुआ के बिलावर पुलिस स्टेशन के एसएचओ मुश्ताक अहमद ने गुरुवार को मुनीश कुमार नामक युवक को गिरफ्तार किया, जिसके कब्जे से करीब 15 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। पूछताछ में आरोपित ने बताया कि उसने अपने घर में भी भारी मात्रा में नशे की खेप छिपा रखी है। आरोपित की निशानदेही पर पुलिस ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में घर पर दबिश दी। तलाशी के दौरान पुलिस ने 420 ग्राम से अधिक हेरोइन बरामद की। पूछताछ में पता चला कि आरोपित ने यह खेप गांव के ही एक नशा तस्कर से ली है, जो छह महीने पहले अर्मेनिया भाग गया था। उसने पंजाब सीमा से खेप को मुनीश तक पहुंचाया। मुनीश अब इसे आगे थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पूरे जिले में सक्रिय नशा तस्करों को बेच रहा था। सूत्रों ने बताया कि हेरोइन की जांच से पता चला है कि ऐसी सप्लाई सीमा पार पाकिस्तान से भेजी जाती है। अब पुलिस कठुआ और पंजाब में सक्रिय नशा तस्करों के नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुट गई है। इसके तहत कई टीमें भी गठित की गई हैं। बता दें कि नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान के तहत पुलिस लगातार नशा तस्करों के खिलाफ विशेष मुहिम चला रही है। जिसमें कई बड़ी सफलताएं मिली हैं।

‘हार के बाद कोर्ट का सहारा’… ममता बनर्जी पर पूर्व जज की तीखी टिप्पणी

कोलकत्ता  पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काला कोट पहनकर कोर्ट जाने को लेकर बवाल छिड़ गया है। अब सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने आरोप लगाए हैं कि बनर्जी ने सुर्खियों में बने रहने के लिए अदालत को चुना है। साथ ही उन्होंने कहा है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद वह ऐसा कर रहीं हैं। इधर, BCI यानी भारतीय विधिज्ञ परिषद ने भी तृणमूल कांग्रेस प्रमुख से जवाब तलब किया है। जस्टिस काटजू ने लिखा, 'ममता बनर्जी हाई कोर्ट क्यों गईं? जाहिर है क्योंकि वह अपना खुद का चुनाव हार गई हैं और इसलिए वह विधानसभा में चिल्ला नहीं सकतीं। लेकिन उनके पास ऐसी जगह होनी चाहिए जहां वह चिल्ला सकें, ताकि उन्हें पब्लिसिटी मिले और वह सुर्खियों में बनी रहें। इसलिए उन्होंने हाई कोर्ट को चुना है।' एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'ममता बनर्जी ने तो हद कर दी थी।' ममता बनर्जी काले कोट में कोर्ट पहुंचीं बनर्जी गुरुवार को वकील का गाउन पहनकर कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंची। बनर्जी ने चुनाव के बाद कथित हिंसा और पार्टी दफ्तरों पर हमलों के मामले में अपनी दलील में कहा कि ‘बंगाल कोई बुल्डोजर राज्य नहीं है। अदालत से बाहर निकलते समय कुछ लोगों ने ममता के खिलाफ नारे भी लगाए। मामला मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थसारथी सेन की खंडपीठ के सामने सुनवाई के लिए आया। बनर्जी के साथ तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य और कल्याण बनर्जी भी थे। यह मामला टीएमसी की ओर से वकील शीर्षन्या बंद्योपाध्याय की दायर एक जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें 2026 के विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा के बाद पार्टी कार्यालयों पर हमलों और उसके कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा का आरोप लगाया गया है। BCI ने मांगा जवाब BCI ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से बनर्जी के पंजीकरण और पेशेवर वकालत की स्थिति के संबंध में 48 घंटों के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट भेजने को कहा। दरअसल, कोई भी व्यक्ति, जो संवैधानिक पद पर है या लाभकारी रूप से नियोजित है, उसे अपना बार लाइसेंस सेवा के दौरान निलंबित करवाना पड़ता है और फिर से वकालत करने के लिए इसे दोबारा चालू कराना होता है। पत्र में कहा गया है, 'ममता बनर्जी ने 2011 से 2026 तक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। उक्त अवधि के दौरान उनके संवैधानिक सार्वजनिक पद को ध्यान में रखते हुए और इस समय पर इस बात पर कोई राय व्यक्त किए बिना कि ऐसी उपस्थिति की अनुमति है या नहीं, बीसीआई को उनके पंजीकरण, वकालत, निलंबन और दोबारा प्रारंभ की तथ्यात्मक स्थिति आपके रिकॉर्ड से सत्यापित करने की आवश्यकता है।' बीसीआई ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से बनर्जी की पंजीकरण संख्या और राज्य बार काउंसिल में उनके नामांकन की तारीख भी बताने को कहा है।

NEET UG बड़ा बदलाव: रि-एग्जाम के बाद परीक्षा होगी ऑनलाइन, NTA का नया सिस्टम लागू

नई दिल्ली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद अब पुनर्परीक्षा की नई तारीख घोषित कर दी है. एजेंसी के अनुसार, परीक्षा अब 21 जून 2026 को आयोजित की जाएगी. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए NTA ने कहा कि भारत सरकार की मंजूरी के बाद दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया है. साथ ही अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों से अपील की गई है कि वे किसी भी जानकारी के लिए केवल NTA की आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें. OMR शीट की जगह ऑनलाइन होगी परीक्षा इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रेस कांफ्रेंस में मीडिया के आगे कई बातें साफ कीं. सबसे पहले उन्होंने बताया कि पेपर लीक के इस प्रकरण को देखते हुए अगले साल से NEET  की परीक्षा पूरी तरह से कंप्यूटर बेस्ड और ऑनलाइन होगी. ओएमआर शीट की जगह छात्रों को कंप्यूटर के सामने बैठाया जाएगा जिससे पारदर्शिता रहे. धर्मेंद्र प्रधान ने कहा-  एनटीए ने NEET UG की नई तारीख की घोषणा कर दी है. 21 जून को पुनर्परीक्षा होगी. हमारी प्राथमिकता छात्रों का भविष्य है. उन्होंने कहा- इससे पहले 3 मई को परीक्षा हुई थी और 7 मई तक एनटीए के  कंपलेंट सिस्टम में कुछ चिंताएं उठाई गईं और आंतरिक जांच भी हुई.  फिर मामला संबंधित एजेंसियों को सौंप दिया गया, जिसमें कई राज्य शामिल थे. इस केस में 12 मई तक स्थिति स्पष्ट हो गई थी.  हमें 12 मई तक पता चला कि शिक्षा माफियाओं के माध्यम से गेस पेपर जारी हुए थे जो परीक्षा में आए पेपर से मेल खा रहे थे. 21 जून को रि-एग्जाम, 14 जून को एडमिट कार्ड उन्होंने आगे कहा- हम छात्रों के भविष्य से समझौता नहीं करना चाहते. इसलिए हमने परीक्षा के लिए नई तारीख 21 जून तय की है . इसके लिए 14 जून को एडमिट कार्ड जारी हो जाएंगे. अनियमितताओं के प्रति हमारी ज़ीरो टॉलरेंस नीति है. सीबीआई की कार्रवाई और परीक्षा माफियाओं के खिलाफ लड़ाई शुरू हो चुकी है 'किसी माफिया को नहीं छीनने देंगे सीट' उन्होंने कहा- राधाकृष्ण समिति की सिफारिशों का पालन करने के बावजूद यह उल्लंघन कैसे हुआ? ऐसे में सरकारी मशीनरी यह सुनिश्चित करेगी कि इस बार कोई अनियमितता न हो. हम किसी भी माफिया को पैसों के बल पर आपकी सीट छीनने नहीं देंगे. मंत्री के रूप में, अभिभावक के रूप में, अधिकारी के रूप में – हमें यह कठिन निर्णय लेना पड़ा. हमें सुधारों के लिए कई सुझाव मिले हैं. 'री-एग्जाम के लिए कोई फीस नहीं, सेंटर भी पसंद का' प्रधान ने कहा-  एनटीए का गठन सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार हुआ था और वह बहुत ही सक्षम नेतृत्व में है. प्रत्येक वर्ष 1 करोड़ उम्मीदवार एनटीए परीक्षाओं में शामिल होते हैं. एनईईटी परीक्षा रद्द होने के दिन एनटीए ने दो निर्णय लिए- सबसे पहले तो एनईटी स्नातक परीक्षा शुल्क वापस किया जाएगा, दूसरा पुनर्परीक्षा के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा. इसको लेकर एनटीए शाम तक एक और सूचना जारी करेगा. उन्होंने बताया कि उम्मीदवारों को री- एग्जाम में शामिल होने के लिए अपनी पसंद का शहर चुनने का अवसर मिलेगा. इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया जाएगा. ओएमआर शीट में छात्रों का विवरण भरने के लिए 15 मिनट एक्सट्रा दिए जाएंगे. 'अफवाहों पर विश्वास न करें छात्र' प्रधान ने कहा कि इसके अलावा मैं उम्मीदवारों के परिवहन को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों से बात करूंगा. चुंकी जून की परीक्षा में मानसून रहेगा, हम खराब मौसम के प्रभाव पर विचार कर रहे हैं. छात्रों से अपील है कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें. आखिर में प्रधान ने कहा- पूरे केस में सीबीआई गहन जांच कर रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा  

वैश्विक मंच पर भारत का दम! प्रधानमंत्री मोदी की 5 देशों की अहम यात्रा आज से शुरू

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 15 मई से अपनी पांच देशों की महत्वपूर्ण विदेश यात्रा शुरू कर रहे हैं। इस 5 दिवसीय दौरे (15-20 मई) के दौरान पीएम मोदी संयुक्त अरब अमीरात (UAE), नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा करेंगे। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस के बीच यह दौरा भारत के लिए रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। जानें क्या है दौरे का मुख्य एजेंडा? होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच पीएम मोदी का प्राथमिक लक्ष्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को पुख्ता करना है। इस यात्रा में पारंपरिक ईंधनों के साथ-साथ ग्रीन हाइड्रोजन और न्यू टेक्नोलॉजी पर विशेष जोर रहेगा। सबसे पहले जायेंगे UAE दौरे के पहले दिन पीएम मोदी सबसे पहले अबू धाबी में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे। जिसके बाद IOC और ADNOC के बीच LPG सप्लाई को लेकर रणनीतिक सहयोग होगा। भारत में Strategic Petroleum Reserve बनाने के लिए ISPRL और ADNOC के बीच अहम डील होने की उम्मीद है। वहीं UAE में रह रहे 45 लाख भारतीयों के हितों पर भी चर्चा होगी। यूरोप दौरा नीदरलैंड (16-17 मई): पीएम मोदी नीदरलैंड्स के पीएम रॉब जेटन के साथ सेमीकंडक्टर और जल प्रबंधन पर बात करेंगे। स्वीडन (17-18 मई): गोथेनबर्ग में स्वीडिश पीएम के साथ सप्लाई चेन और ग्रीन ट्रांजिशन पर चर्चा होगी। यहां पीएम मोदी 'यूरोपियन राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री' को भी संबोधित करेंगे। नॉर्वे: 43 साल बाद ऐतिहासिक यात्रा 43 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री नॉर्वे जा रहा है। 19 मई को ओस्लो में तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन आयोजित होगा। इसमें नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के नेता शामिल होंगे। यहां मुख्य फोकस ब्लू इकोनॉमी (समुद्री अर्थव्यवस्था) और आर्कटिक सहयोग पर रहेगा। इटली: दौरे का समापन 20 मई को यात्रा के अंतिम चरण में पीएम मोदी इटली पहुंचेंगे। वहां प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ रक्षा और व्यापार संबंधों पर द्विपक्षीय बातचीत के बाद वे दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगे। जानें क्यों जरूरी है यह दौरा? जनवरी 2026 में भारत-यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद यह पीएम की पहली बड़ी यूरोप यात्रा है। इसका उद्देश्य भारतीय निर्यात के लिए नए रास्ते खोलना और भारत को दुनिया के लिए एक भरोसेमंद 'सप्लाई चेन पार्टनर' के रूप में स्थापित करना है।

ट्रिपल झटका: पेट्रोल-डीजल के बाद अब CNG ने भी बढ़ाई लोगों की टेंशन

नई दिल्ली एलपीजी सिलेंडर के दामों में इजाफा होने के बाद अब तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में भी इजाफा किया गया है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, देश भर में ईंधन (पेट्रोल, डीजल और सीएनजी) की कीमतें बढ़ गई हैं. एक ओर जहां पेट्रोल की कीमतें 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं, जबकि डीज़ल की कीमतें 87.67 रुपये से बढ़कर 90.67 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं. पेट्रोल के साथ ही सीएनजी से चलने वाली गाड़ियों में चलना भी महंगा होने जा रहा है।  जानकारों का कहना है कि म‍िड‍िल ईस्‍ट में जारी संकट के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेल विपणन कंपनियों ने 3-3 रुपये लीटर का इजाफा कर द‍िया. तेल की कीमत में यह बढ़ोतरी 15 मई यानी शुक्रवार सुबह 6 बजे से देशभर में लागू हो गई है.  देश की राजधानी द‍िल्‍ली की बात करें तो पेट्रोल 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये प्रत‍ि लीटर हो गया. वहीं, डीजल 87.67 रुपये लीटर से बढ़कर 90.67 रुपये लीटर पर पहुंच गया।  किराए में हो सकती है बढ़ोतरी  मुंबई में जब दो रुपये प्रति किलो सीएनजी के दाम में बढ़ने के साथ यूनियनों ने किराए में बढ़ोतरी की मांग की है. ऑटो रिक्शा संगठनों ने न्यूनतम किराए में कम से कम 1 रुपये की बढ़ोतरी की डिमांड रखी है. यूनियन नेताओं के अनुसार, मौजूदा किराए में वाहन चलाना आर्थिक रूप से कठिन हो गया है. अब दिल्ली में भी सीएनजी के दाम बढ़ाए गए हैं. इसका सीधा असर कैब ड्राइवरों पर पड़ेगा. ऑटो-टैक्सी के किराए में बढ़ोतरी संभव है. डिलीवरी और ट्रांसपोर्ट लागत में बढ़ोतरी हो सकती है. इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है।  CNG Price Hike कितनी महंगी गई सीएनजी पेट्रोल और डीजल के साथ ही दिल्ली-एनसीआर में इंद्रप्रस्‍थ गैस ल‍िम‍िटेड (IGL) ने सीएनजी की कीमत में 2 रुपये क‍िलो का इजाफा कर द‍िया है. इससे कुछ देर पहले ही तेल कंपन‍ियों ने पेट्रोल-डीजल दो रुपये महंगा कर द‍िया. नई दरों को शुक्रवार सुबह 6 बजे से लागू कर द‍िया गया है. ऐसे में पिछले एक पखवाड़े के दौरान महंगाई का ट्रिपल अटैक हुआ है।  पेट्रोल, डीजल और CNG महंगा करने पर सरकार का घेराव कांग्रेस ने पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दाम बढ़ने को लेकर सरकार का घेराव किया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कांग्रेस ने लिखा-  'महंगाई मैन मोदी ने आज फिर जनता पर हंटर चलाया. पेट्रोल और डीजल 3-3 रुपए महंगा कर दिया गया. वहीं, CNG के दाम भी 2 रुपए बढ़ा दिए गए. चुनाव खत्म, मोदी की वसूली शुरू।  कांग्रेस नेता कुमारी सेलजा ने आरोप लगाते हुए कहा, 'चुनाव खत्म होते ही बीजेपी सरकार ने जनता को महंगाई का तोहफा दे दिया. अब पेट्रोल और डीजल पर 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर आम आदमी की जेब पर सीधा हमला किया गया है. चुनाव तक राहत का दिखावा. चुनाव के बाद जनता पर बोझ डालना बीजेपी सरकार की पहचान बन चुका है।  TMC नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने भी बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा, 'पहले वो आपका वोट लूटते हैं, फिर आपको वहां लात मारते हैं जहां दर्द होता है. इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है. डीजल और पेट्रोल के दाम बढ़ गए हैं. क्या बंगाल सरकार पेट्रोल और डीजल पर VAT कम करेगी, अब जब दिल्ली के कंट्रोल वाली सरकार है जिसे केंद्र के फंड रोके जाने की चिंता नहीं करनी पड़ती?' वहीं, पेट्रोल-डीजल महंगा होने पर बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने प्रतिक्रया दी. उन्होंने कहा, 'पिछले 3 साल से दुनिया में जंग चल रही है. इसकी वजह से दूसरे देशों में कई तरह के संकट पैदा हुए हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने हमारा कुछ नहीं बिगड़ने दिया. सिर्फ गैस के दाम बढ़े हैं. कम से कम दाम तो कम से कम बढ़ाए हैं। 

नई सरकार का पहला तोहफा: कर्मचारियों और शिक्षकों को मिला बढ़ा हुआ DA

चेन्नई तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसफ विजय ने  सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के महंगाई भत्ते (DA) में दो फीसदी बढ़ोतरी का ऐलान किया। उन्होंने यह तोहफा मुख्यमंत्री बनने के चंद दिनों में ही दे दिया। आधिकारिक बयान के अनुसार, इस संशोधन के साथ महंगाई भत्ता (डीए) 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 फीसदी हो जाएगा। यह वृद्धि एक जनवरी 2026 से प्रभावी होगी। महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी से राज्य सरकार पर सालाना 1,230 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा। बयान में कहा गया है कि सरकार आवश्यक अतिरिक्त धनराशि आवंटित करेगी और सरकारी अधिकारियों, शिक्षकों, पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता साबित करेगी। यह भी कहा गया है कि विजय ने लोगों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं तैयार करने और उन्हें लागू करने के लिए कदम उठाने का संकल्प लिया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसफ विजय ने यह भी कहा कि महिलाओं को 'कलैग्नार मगलीर उरिमाई थोगई' योजना की मई माह की किस्त जल्द ही दी जाएगी। इस योजना के तहत महिलाओं को 1,000 रुपये दिए जाते हैं। इसकी शुरुआत पूर्ववर्ती द्रविड मुनेत्र कषगम सरकार ने की थी और इसका नाम पार्टी के दिग्गज नेता एम. करुणानिधि के नाम पर रखा गया। महिलाओं को जल्द मिलेंगे हजार रुपये विजय के हवाले से जारी एक सरकारी बयान में कहा गया कि राशि लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा की जाएगी। इसमें कहा गया, '' सरकार को 'कलैग्नार मगलीर उरिमाई थोगई' योजना के पुनर्गठन के लिए समय चाहिए, जिसके तहत महिलाओं को 1,000 रुपये दिए जाते हैं। मुख्यमंत्री जोसफ विजय ने निर्देश दिया है कि इस योजना के तहत मई महीने की 1000 रुपये की किस्त जल्द ही लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे जमा कर दी जाएगी।'' राज्य विधानसभा चुनाव से पहले विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) ने 60 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं को 2,500 रुपये प्रति माह की सहायता देने का वादा किया था।

48 घंटे में 3 बड़े फैसले, क्या अब महंगा होने वाला है पेट्रोल? RBI ने दिए संकेत

नई दिल्ली भारत में पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों की आशंकाओं को लेकर चिंता का दौर जारी है। हालांकि, सरकार ने अब तक ऐसा ऐलान नहीं किया है। इसी बीच महज दो दिनों के अंदर ही तीन बड़े फैसले सामने आ चुके हैं। इनमें गोल्ड इम्पोर्ड ड्यूटी से लेकर शक्कर एक्सपोर्ट बैन तक शामिल है। इधर, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर ने भी दाम बढ़ने की आशंका जताई है। खास बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही दफ्तरों से WFH यानी वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन क्लासेज की अपील कर चुके हैं।  पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि एक स्तर पर इस बात का आकलन करना होगा कि पेट्रोलियम कंपनियां लागत से कम कीमत पर पेट्रोल, डीजल और LPG कब तक बेच सकती हैं। हालांकि, उन्होंने कीमतों में बढ़ोतरी की किसी भी संभावना पर कुछ कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने बताया कि भारत के पास इस वक्त लगभग 60 दिन का कच्चे तेल का भंडार, 60 दिन का LNG भंडार और 45 दिन का LPG भंडार है। RBI गवर्नर क्या बोले गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने  स्विट्जरलैंड में कहा है कि अगर पश्चिम एशिया संकट लंबे समय तक जारी रहता है, तो सरकार को पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि भारत ऊर्जा और उर्वरकों के इम्पोर्ट पर खासा निर्भर है और मौजूदा रुकावटों का असर भारत पर पड़ना शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि अगर यह लंबे समय तक जारी रहता है तो 'सरकार वास्तव में इन मूल्य वृद्धि का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डाल सकती है। यह सिर्फ समय की बात है।' सरकार ने 28 फरवरी को शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष के बावजूद पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में वृद्धि नहीं की है। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध में सबसे ज्यादा प्रभावित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज हुआ है, जिसके चलते जहाजों की आवाजाही धीमी या ठप हो गई है। गोल्ड महंगा हुआ विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ रहे दबाव को रोकने और गैर-जरूरी आयात पर रोक लगाने के लिए सोने तथा चांदी पर आयात शुल्क  बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया। खास बात है कि भारत महंगी धातुओं का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। कच्चे तेल के बाद सोने का भारत के आयात में दूसरा बड़ा हिस्सा है और बढ़ती खरीद से विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल बढ़ा है, जिससे रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया है। सोने और चांदी पर आयात शुल्क छह प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है जबकि प्लैटिनम पर इसे 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.4 प्रतिशत किया गया है। यह 13 मई से प्रभावी माना जाएगा। सोने/चांदी के डोरे, सिक्के, अन्य वस्तुएं आदि पर भी टैक्स में बदलाव किए गए हैं। अमूल दूध के दाम बढ़े अमूल ने बढ़ती लागत के कारण पूरे भारत में दूध की कीमतें दो रुपये प्रति लीटर बढ़ाने की घोषणा की। नई दरें आज यानी 14 मई, गुरुवार से लागू हो गईं हैं। इससे पहले अमूल दूध के दाम बीते साल 1 मई को बढ़ाए गए थे। GCMMF यानी गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन का कहना है कि दूध की कीमतें इसलिए बढ़ाई जा रही हैं क्योंकि दूध तैयार करने और उसे बाजार तक पहुंचाने का खर्चा बढ़ गया है। साथ ही कहा, 'इस साल पशु आहार, दूध की पैकेजिंग सामग्री और ईंधन की लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है।' चीनी का निर्यात बंद देश ने चीनी के निर्यात पर 30 सितंबर तक तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 13 मई को जारी अधिसूचना में कहा, 'चीनी की निर्यात नीति को तत्काल प्रभाव से 30 सितंबर, 2026 तक या अगले आदेश तक (जो भी पहले हो) 'प्रतिबंधित' से 'निषिद्ध' कर दिया गया है।'

वैश्विक आर्थिक संकट की आहट! जानिए मंदी की चेतावनी के बीच भारत की स्थिति कैसी

नई दिल्ली  दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय संस्थाओं और जाने-माने अर्थशास्त्रियों ने पिछले एक हफ्ते में वैश्विक आर्थिक मंदी को लेकर गंभीर चेतावनियां जारी की हैं. इसके पीछे मुख्य वजहें हैं अमेरिका की आक्रामक टैरिफ पॉलिसी, ट्रेड वॉर का बढ़ता असर, कमजोर होता उपभोक्ता खर्च और AI निवेश में बने बुलबुले के फटने का डर. मुख्य तौर पर अमेरिका में इसका सबसे ज्यादा रिस्क है, मगर भारत समेत दुनिया के बाकी देश भी इससे अधूते नहीं रहने वाले।  सबसे बड़ी चेतावनी मेरिल लिंच (Merrill Lynch) के दिग्गज फोरकास्टर गैरी शिलिंग (Gary Shilling) की तरफ से आई है. ये वही शख्स हैं, जिन्होंने 1969-70 के दौर की आर्थिक मंदी की सटीक भविष्यवाणी की थी और इनका नाम हर किसी को याद हो गया था. हाल ही में बिजनेस इनसाइड को दिए इंटरव्यू में शिलिंग ने कहा कि 2026 के अंत तक अमेरिकी मंदी ‘लगभग तय’ है. उनके मुताबिक तीन बड़े खतरे हैं. पहला एक फ्रीज हो चुका हाउसिंग मार्केट, जहां खरीदार और विक्रेता दोनों सुस्त पड़े हैं, दूसरा कॉर्पोरेट कैपेक्स में तेज गिरावट, और कमजोर होता उपभोक्ता वर्ग. शिलिंग ने कहा, “शेयर बाजार बहुत महंगा है और जल्द ही बड़ा करेक्शन आने की पूरी आशंका है।  उनके अलावा, बिलेनियर निवेशक लियोन कूपरमैन (Leon Cooperman) भी शिलिंग के सुर में सुर मिला चुके हैं. फॉक्स बिजनेस पर उन्होंने कहा, “बाजार बहुत ऊंचे मूल्यांकन पर है और कई समस्याएं एक साथ मुंह बाए खड़ी हैं।  जेपी मॉर्गन (JP Morgan) ने पहले वैश्विक मंदी की 60 फीसदी संभावना जताई थी, जिसे अब घटाकर 40 फीसदी किया है. लेकिन साथ ही यह भी कहा कि “काफी डाउनसाइड रिस्क अभी भी बना हुआ है।  मैकिंजी (McKinsey) के ताजा ग्लोबल सर्वे का नतीजा और भी चौंकाने वाला है. करीब 70% बिजनेस एग्जीक्युटिव्स ने मंदी के किसी न किसी सीन को सबसे संभावित माना. इनमें से 61 प्रतिशत ने डिमांड से पैदा होने वाली मंदी की बात कही. यानी बढ़ती अनिश्चितता से उपभोक्ताओं का भरोसा टूट सकता है, जो मंदी तक ले जाने के लिए काफी होगा।  मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) के चीफ ग्लोबल इकॉनमिस्ट सेथ कारपेंटर (Seth Carpenter) ने कहा, “आर्थिक नुकसान शुरू हो चुका है. अगर टैरिफ अप्रैल के पीक पर वापस जाते हैं तो अमेरिका और पूरी दुनिया मंदी में चली जाएगी.” IMF ने भी ग्लोबल ग्रोथ 2024 के 3.3% से घटकर 2026 में 3.1% रहने का अनुमान जताया है और कहा है कि जोखिम नीचे की तरफ झुके हुए हैं।  भारत पर क्या होगा असर? भारत की अर्थव्यवस्था मुख्यतः घरेलू मांग पर टिकी है, इसीलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि देश वैश्विक मंदी की सीधी चपेट में नहीं आएगा. डेलॉयट इंडिया (Deloitte India) के अनुसार भारत 2026 में 6.5 से 7 फीसदी की दर से बढ़ता रह सकता है और वह दुनिया की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा. लेकिन बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) के चीफ इकॉनमिस्ट मदन सबनवीस (Madan Sabnavis) की चेतावनी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उनके मुताबिक भारत रुपये की तेज अस्थिरता से जरूर प्रभावित होगा. जब अमेरिका और यूरोप जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में मंदी आती है, तो निवेशक उभरते बाजारों से पूंजी खींच लेते हैं, परिमाणस्वरूप रुपया कमजोर पड़ता है, शेयर बाजार में उठापटक होती है और आयात होने वाले कच्चे माल महंगे हो जाते हैं. भारत कच्चे तेल का बड़ा इम्पोर्टर है, इसलिए वैश्विक ऊर्जा बाजार में कोई भी उथलपुथल सीधे महंगाई को हवा दे सकती है।  IT सेक्टर पर बड़ा खतरा एक बड़ा सेक्टोरल खतरा आईटी इंडस्ट्री के सामने है. नैस्कॉम (NASSCOM) की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय आईटी सेक्टर की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से अमेरिका और यूरोप जैसे पश्चिमी बाजारों पर टिकी हुई है. यदि इन देशों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती है और वहां सेवाओं की मांग घटती है, तो इसका सीधा असर भारत पर पड़ेगा. नए प्रोजेकट्स मिलना कम हो जाएंगे, कंपनियां अपने बजट में कटौती करेंगी और युवाओं के लिए नई नौकरियों के अवसर भी सिमट सकते हैं।  आईटी के अलावा कपड़ा, टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग जैसे वे तमाम उद्योग भी दबाव महसूस करेंगे, जो अपना माल विदेशों में बेचते हैं. हालांकि, भारत के पास इस संभावित संकट से लड़ने के मजबूत साधन भी मौजूद हैं. सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) पर किया जा रहा भारी निवेश और भारतीय रिजर्व बैंक की संभली हुई नीतियां एक सुरक्षा कवच का काम करेंगी. इसके बावजूद, यदि वैश्विक आर्थिक हालात और अधिक बिगड़ते हैं, तो भारत की कुल विकास दर (GDP) में 0.3% से 0.5% तक की गिरावट देखने को मिल सकती है। 

ऊर्जा सुरक्षा पर भारत एक्टिव: रूस से भरोसा मिला तो अमेरिका से की खास अपील

 नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और पर्शियन गल्फ में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अमेरिका से रूस से तेल खरीद पर दी गई छूट को आगे बढ़ाने की अपील की है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई दिल्ली ने वॉशिंगटन से कहा है कि मौजूदा हालात में ऊर्जा सप्लाई बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि तेल बाजार में जारी अस्थिरता का असर सीधे भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर पड़ सकता है।  अमेरिका ने पहली बार मार्च में भारत और अन्य मुल्कों को रूसी तेल खरीदने के लिए विशेष छूट दी थी. इसके बाद इसे बढ़ाकर 16 मई 2026 तक कर दिया गया. इस छूट की वजह से भारत रियायती दरों पर रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद पा रहा है।  हालांकि, यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका लगातार भारत पर दबाव बनाता रहा है कि वह रूस से तेल खरीद कम करे ताकि मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जा सके. लेकिन अब ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे भारत की चिंता बढ़ गई है।  इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अधिकारियों ने अमेरिकी पक्ष से कहा है कि अगर तेल बाजार में उथल-पुथल जारी रहती है तो इसके गंभीर सामाजिक और आर्थिक असर हो सकते हैं. खासतौर पर भारत जैसे देश में, जहां 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतें काफी बड़ी हैं और पहले से ही कुकिंग गैस की कमी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं. भारत के तेल मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने फिलहाल इस मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है. वहीं अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की तरफ से भी कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है।  रूस का एनर्जी सप्लाई पूरा करने का वादा नई दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने से पहले ब्रॉडकास्टर आरटी इंडिया से बातचीत में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि रूस यह सुनिश्चित करेगा कि भारत के ऊर्जा हित पूरी तरह सुरक्षित रहें. उन्होंने कहा, "मैं गारंटी दे सकता हूं कि रूसी ऊर्जा सप्लाई से जुड़े भारत के हित प्रभावित नहीं होंगे. हम हरसंभव कोशिश करेंगे कि यह अनुचित कंपटीशन हमारे समझौतों को नुकसान न पहुंचाए।  रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने जोर देकर कहा कि रूस ने ऊर्जा क्षेत्र में कभी भी भारत या किसी अन्य साझेदार के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में विफलता नहीं दिखाई है. उन्होंने तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम न्यूक्लियर एनर्जी प्लांट को भारत-रूस सहयोग का प्रमुख उदाहरण बताया और कहा कि नए पावर यूनिट्स पर काम जारी है. उन्होंने कहा, "भारत को और ऊर्जा की जरूरत है. हम गैस, तेल और कोयले जैसे हाइड्रोकार्बन की सप्लाई लगातार जारी रखे हुए हैं।  इस बीच भारत ने मई महीने में रिकॉर्ड स्तर पर रूसी तेल आयात किया है. इकोनॉमिक टाइम्स ने डेटा फर्म क्लेपेर के हवाले से बताया कि, मई में भारत रोजाना करीब 23 लाख बैरल रूसी तेल आयात कर रहा है. अनुमान है कि पूरे महीने का औसत करीब 19 लाख बैरल प्रतिदिन रह सकता है, जो अब भी बेहद बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है।  विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में संघर्ष लंबा खिंचने की स्थिति में भारत रूस से सस्ते तेल पर अपनी निर्भरता और बढ़ा सकता है, क्योंकि इससे घरेलू ईंधन कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। 

महंगाई ने तोड़ी 42 महीनों की सीमा, जानिए किन चीजों के दाम सबसे ज्यादा बढ़े

नई दिल्ली महंगाई को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है. अप्रैल 2026 में थोक महंगाई दर यानी WPI (Wholesale Price Index) बढ़कर 8.30 फीसदी पर पहुंच गई, जो पिछले करीब 42 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. मार्च 2026 में यह आंकड़ा 3.88 फीसदी था. बाजार को उम्मीद थी कि महंगाई करीब 5.50 फीसदी रह सकती है, लेकिन असली आंकड़े ने सभी अनुमान पीछे छोड़ दिए. इससे साफ है कि देश में लागत और ईंधन से जुड़ा दबाव तेजी से बढ़ रहा है।  वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले DPIIT द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक इस बार महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र रहा. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का सीधा असर भारत के थोक बाजार पर दिखाई दिया है।  ईंधन और तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता अप्रैल महीने में फ्यूल एंड पावर कैटेगरी की महंगाई मार्च के 1.05 फीसदी से बढ़कर सीधे 24.71 फीसदी पर पहुंच गई. यह उछाल बेहद बड़ा माना जा रहा है। कच्चे तेल की थोक महंगाई 88 फीसदी से ऊपर पहुंच चुकी है. वहीं, पेट्रोल की कीमतों में 32.40 फीसदी और डीजल में 25.19 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. घरेलू LPG गैस भी महंगी हुई है और इसकी महंगाई दर 10.92 फीसदी रही।  विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान संकट और खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है. इससे कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े और इसका असर सीधे भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ा. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, इसलिए ग्लोबल मार्केट में बदलाव का असर घरेलू कीमतों पर जल्दी दिखता है।  खाने-पीने की चीजों से राहत हालांकि राहत की बात यह रही कि खाने-पीने की चीजों की महंगाई अभी ज्यादा नहीं बढ़ी है. अप्रैल में फूड इन्फ्लेशन बढ़कर 2.31 फीसदी रही, जबकि मार्च में यह 1.85 फीसदी थी. प्याज और आलू जैसी जरूरी सब्जियों के दाम अभी भी पिछले साल के मुकाबले कम बने हुए हैं. इससे आम लोगों को थोड़ी राहत मिली है।  लेकिन दूसरी ओर प्राइमरी आर्टिकल्स यानी कच्चे सामान की महंगाई 6.36 फीसदी से बढ़कर 9.17 फीसदी हो गई. वहीं, मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई भी 3.39 फीसदी से बढ़कर 4.62 फीसदी पहुंच गई है. इसका मतलब है कि फैक्ट्रियों में बनने वाले सामान की लागत भी बढ़ रही है।  अन्य सेक्टर्स पर दबाव Core WPI यानी खाने-पीने की चीजों और ईंधन को छोड़कर बाकी वस्तुओं की महंगाई भी बढ़कर 5 फीसदी पर पहुंच गई है, जो 43 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. मार्च में यह 3.7 फीसदी थी. इससे यह संकेत मिल रहा है कि महंगाई का दबाव अब सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है बल्कि बाकी सेक्टरों में भी फैलने लगा है।  अब बाजार और आम लोगों की नजरें मई महीने के आंकड़ों पर टिकी हैं. DPIIT के अनुसार मई 2026 के WPI आंकड़े 15 जून को जारी किए जाएंगे. अगर तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है।