samacharsecretary.com

Diwali 2026 की तारीखें हुईं साफ, 6 नवंबर से शुरू होगा 5 दिवसीय दीपोत्सव; जानें धनतेरस से भाई दूज तक की डेट

हिंदू परंपरा में दिवाली का पर्व केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि खुशियों, प्रकाश और समृद्धि का 5 दिवसीय महापर्व (पंचपर्व) होता है. इस साल 2026 में दिवाली की तिथियों को लेकर बनी उथल-पुथल अब पूरी तरह साफ हो चुकी है. रोशनी का यह पावन पर्व 6 नवंबर 2026 से धनतेरस के साथ शुरू होने जा रहा है, जिसका समापन 11 नवंबर को भाई दूज के साथ होगा. कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी से शुरू होकर शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि तक चलने वाले इस 5 दिवसीय उत्सव के दौरान मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, कुबेर देव, धन्वंतरि जी, भगवान श्री कृष्ण और यमराज की विशेष पूजा की जाती है. आइए जानते हैं कि वर्ष 2026 में धनतेरस, नरक चतुर्दशी, मुख्य दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज किस-किस दिन मनाए जाएंगे: धनतेरस (Dhanteras 2026)- 6 नवंबर 2026 (शुक्रवार) पंचपर्व की शुरुआत कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी धनतेसर की तिथि यानी 6 नवंबर से होगी. इस दिन आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि और धन के कोषाध्यक्ष कुबेर देव की पूजा की जाती है. सोना, चांदी, नए बर्तन, झाड़ू और वाहन खरीदने के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है. इस शाम यमराज के नाम से 'यमदीप' दान किया जाता है. नरक चतुर्दशी व रूप चौदस (Narak Chaturdashi)- 7 नवंबर 2026 (शनिवार) इसे छोटी दिवाली, रूप चौदस या काली चौदस भी कहा जाता है. इस दिन सूर्योदय से पूर्व उबटन और तिल के तेल से स्नान करने की परंपरा है, जिससे सौंदर्य और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है. शाम के समय घर के मुख्य द्वार और नाले/कचरे के स्थान पर दीपक जलाकर नकारात्मक ऊर्जा को दूर भगाया जाता है. दीपावली व लक्ष्मी पूजन (Diwali 2026)- 8 नवंबर 2026 (रविवार) कार्तिक अमावस्या की रात को मुख्य दिवाली यानी लक्ष्मी पूजन का विधान है. 8 नवंबर की शाम प्रदोष काल और स्थिर लग्न में मां लक्ष्मी, सरस्वती जी और भगवान गणेश का महापूजन किया जाएगा. मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्री राम 14 वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या वापस लौटे थे और अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था. गोवर्धन पूजा व अन्नकूट (Govardhan Puja)- 10 नवंबर 2026 (मंगलवार) कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर उनकी पूजा की जाती है और भगवान श्री कृष्ण को 56 भोग या अन्नकूट का भोग लगाया जाता है. यह पर्व प्रकृति और पशुधन के प्रति आभार व्यक्त करने का संदेश देता है. भाई दूज व यम द्वितीया (Bhai Dooj 2026)- 11 नवंबर 2026 (बुधवार) 5 दिवसीय इस महापर्व का समापन भाई दूज (यम द्वितीया) के साथ होता है. इस दिन बहनें अपने भाइयों का तिलक करती हैं, उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं. पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर भोजन करने गए थे, इसलिए इस दिन बहन के घर भोजन करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है.

अक्टूबर में बन रहे कई राजयोग, इन 7 राशियों के शुरू होंगे अच्छे दिन; धन-करियर में लाभ

अक्टूबर का महीना शुरू हो चुका है. वैदिक ज्योतिष में अक्टूबर के महीने को बेहद खास और महत्वपूर्ण माना गया है. इस दौरान कई बड़े ग्रह अपनी चाल बदलेंगे और कई प्रमुख ग्रहों का गोचर भी होने वाला है. ग्रहों की इस स्थिति के कारण कई शुभ योग और राजयोगों का निर्माण हो रहा है, जिसका सीधा असर देश-दुनिया के साथ-साथ सभी 12 राशियों के जीवन पर पड़ेगा. आइए जानते हैं कि यह अक्टूबर का महीना किन राशियों के लिए बेहद लकी रहने वाला है. अक्टूबर में बन रहे हैं खास राजयोग और ग्रहों की स्थिति पंचांग के अनुसार, इस महीने कई बड़े ग्रह अपनी स्थिति में बदलाव करेंगे. तुला राशि में शुक्र और बुध की युति से लक्ष्मी नारायण राजयोग बना हुआ है. इसके अलावा, कर्क राशि में गुरु हंस राजयोग का निर्माण कर रहे हैं. महीने के मध्य में यानी 17 अक्टूबर को सूर्य का गोचर तुला राशि में होगा, जहां बुध के साथ मिलकर यह 'बुधादित्य राजयोग' बनाएंगे. इसके अलावा सूर्य, मंगल, शनि, राहु और केतु जैसे प्रमुख ग्रह भी विभिन्न राशियों में संचरण करेंगे, जिसके प्रभाव से कुछ चुनिंदा राशियों के अच्छे दिन शुरू होने वाले हैं. वृषभ राशि (Taurus) वृषभ राशि के जातकों के लिए अक्टूबर का महीना बेहद सकारात्मक परिणाम लेकर आया है. जीवन में चल रही पुरानी परेशानियां और मानसिक तनाव अब कम होने लगेंगे. कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना होगी और आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा. कर्क राशि (Cancer) कर्क राशि के जातकों को इस महीने भाग्य का पूरा साथ मिलेगा. आपकी वित्तीय स्थिति (Financial Situation) काफी स्टेबल और मजबूत रहने वाली है. अटके हुए कार्य गति पकड़ेंगे. परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का अवसर मिलेगा. सिंह राशि (Leo) सिंह राशि वालों के लिए यह महीना विशेष रूप से फायदेमंद रहने वाला है. जो लोग व्यापार या बिजनेस से जुड़े हैं, उनके लिए समय बेहद शुभ और मुनाफा कमाने वाला रहेगा. समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा. नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं. कन्या राशि (Virgo) कन्या राशि के जातकों को इस अवधि में व्यावसायिक मोर्चे पर लाभ मिलने के प्रबल योग हैं. यदि आप निवेश करने की सोच रहे हैं, तो यह समय अनुकूल साबित हो सकता है. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या कार्यस्थल पर नई पहचान मिल सकती है. तुला राशि (Libra) तुला राशि में कई ग्रहों की युति होने के कारण इस राशि के जातकों को विशेष लाभ मिल सकता है. घर-परिवार में सुख-शांति और सौहार्द का माहौल बना रहेगा. आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और रुके हुए सभी महत्वपूर्ण कार्य पूरे होंगे. मकर राशि (Capricorn) मकर राशि के जातकों के लिए अक्टूबर का महीना उपलब्धियों भरा रहेगा. यदि आप नौकरी बदलने की योजना बना रहे हैं या नई नौकरी की तलाश में हैं, तो इस दौरान आपको बेहतरीन जॉब ऑफर्स मिल सकते हैं. आय के नए स्रोत भी बन सकते हैं. मीन राशि (Pisces) मीन राशि के जातकों के लिए यह पूरा महीना उत्तम फलदायी रहेगा. नौकरी और करियर में सफलता मिलने के साथ-साथ दोस्तों और सहकर्मियों का पूरा सहयोग प्राप्त होगा. जीवनसाथी के साथ संबंध मधुर होंगे और स्वास्थ्य में सुधार दिखेगा.

आज का राशिफल 2 अक्टूबर: शुक्रवार को इन राशियों को मिलेगा भाग्य का साथ

मेष राशि का राशिफल  2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार के दिन मेष राशि वालों के बिगड़े हुए कार्य बनेंगे. संतान सुख मिलेगा और पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा. विद्यार्थियों को परीक्षा-प्रतियोगिता में सफलता मिलेगी. वृषभ राशि का राशिफल शुक्रवार 2 अक्टूबर 2026 को वृषभ राशि वालों को नौकरी में आपके कार्य की प्रशंसा होगी. राज्य पक्ष का समर्थन मिलेगा. मान-सम्मान, उपहार और पुरस्कार की प्राप्ति हो सकती है. मिथुन राशि का  राशिफल 2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार का दिन मिथुन राशि वालों को कार्यों में यश प्राप्त होगा. स्वजनों और मित्रों का सुख-सहयोग मिलेगा. आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी तथा धन लाभ होगा. प्रॉपर्टी अथवा आर्थिक लेन-देन से संबंधित विवाद हो सकता है. कर्क राशि का राशिफल  शुक्रवार 2 अक्टूबर 2026 को कर्क राशि वालों को परिवार में संतान के विवाह आदि शुभ कार्यों की रूपरेखा बन सकती है. आर्थिक योग अच्छे हैं. कर्मक्षेत्र में यशस्वी कार्य करने का अवसर मिलेगा. सिंह राशि का  राशिफल 2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को सिंह राशि वालों के लिए समय कुछ कष्टकारी रह सकता है. मन पर नियंत्रण रखें, अन्यथा व्यर्थ के विवादों में उलझ सकते हैं. व्यापार-व्यवसाय में जोखिम वाले काम करने से बचें. कन्या राशि का राशिफल  शुक्रवार 2 अक्टूबर 2026 को कन्या राशि वालों की आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी और आमदनी बढ़ेगी. रुका हुआ पैसा प्राप्त हो सकता है. कामकाज समय पर पूरे होंगे और व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा. तुला राशि का राशिफल  शुक्रवार 2 अक्टूबर 2026 को तुला राशि वाले मानसिक संतोष बनाए रखें और अनसोचे विवादास्पद मामलों में हाथ डालने से बचें. पारिवारिक वातावरण में काफी सुधार होगा. वृश्चिक राशि का राशिफल  शुक्रवार 2 अक्टूबर 2026 को वृश्चिक राशि वाले लेखन-पठन और पढ़ाई में रुचि बढ़ेगी. घर में बड़े लोगों का समागम होगा. भूमि, भवन और वाहन सुख के लिए समय अनुकूल रहेगा. धनु राशि का  राशिफल शुक्रवार 2 अक्टूबर 2026 को धनु राशि वालों की अब तक जो कोई इच्छा अधूरी रही है, उसकी पूर्ति होने का सिलसिला शुरू हो सकता है. बड़े-बुजुर्गों का प्यार और आशीर्वाद मिलेगा. मकर राशि का राशिफल  शुक्रवार 2 अक्टूबर 2026 को मकर राशि वालों को जोखिम से भरे कामों से दूर रहें. जरूरी कार्यों में आपकी व्यवहार-कुशलता सफलता और प्रसिद्धि दिलाने वाली रहेगी. कुंभ राशि का राशिफल  शुक्रवार 2 अक्टूबर 2026 को कुंभ राशि वालों का आत्मविश्वास बढ़ेगा. आमदनी में बढ़ोतरी हो सकती है और नए लोगों से संपर्क बढ़ेगा. माता-पिता और घर के बुजुर्गों के प्रति सम्मान और बढ़ेगा. मीन राशि का राशिफल  शुक्रवार 2 अक्टूबर 2026 को मीन राशि वालों के सामने आर्थिक समस्या बनी रह सकती है. जिस व्यक्ति पर आपने अब तक भरोसा किया होगा या स्वयं कष्ट उठाकर उसे सुख दिया होगा, वही व्यक्ति आपके विरोध में कार्य कर सकता है.

आज का राशिफल 1 अक्टूबर: 5 राशियों के लिए शुभ दिन, इन लोगों को बरतनी होगी सावधानी

मेष आज सिंगल लोगों की लाइफ में किसी नए शख्स की एंट्री होने की संभावना है। करियर में बैलेंस मेंटेन करके चलें। आपका कैरेक्टर ही आपकी सबसे बड़ी उपलब्धी है। खुद को हाइड्रेटेड जरूर रखें। वृषभ आज गुस्से को काबू में रखना ही बेहतर रहेगा। परिवार के किसी सदस्य की आर्थिक सहायता करनी पड़ सकती है, जिससे फाइनेंशियल सिचुएशन पर असर पड़ेगा। आज का दिन आपका रोमांचक रहेगा। मिथुन काम के सिलसिले में यात्रा करनी पड़ सकती है। काम का प्रेशर ज्यादा फील हो तो कुछ देर के लिए ब्रेक लें। आज का आपका दिन मिले-जुले परिणाम लेकर आया है। लाइफ पार्टनर के साथ थोड़ी बहुत अनबन हो सकती है। कर्क आज अपनी फाइनेंशियल सिचुएशन पर फोकस करें। आज के दिन आपको सेल्फ लव पर फोकस करना चाहिए। स्ट्रेस फ्री रहने के लिए मेडिटेशन ट्राई करें। आर्थिक स्थिति में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। सिंह आज आपका दिन खास रहने वाला है। करियर लाइफ थोड़ी बिजी हो सकती है। शाम में अपने लवर के साथ अच्छा टाइम स्पेंड करेंगे। स्वास्थ्य के मामले में लापरवाही न करें। खर्च करते वक्त आपको सावधानी बरतनी जरूरी है। कन्या आज करियर तौर पर मोटिवेटेड और प्रोडक्टिव फील करेंगे। आज आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने की जरूरत है। बाहर का खाना खाने से बचें। वहीं, लाइफ में रोमांस भी बना रहेगा। तुला आज आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी और धन लाभ भी होगा। वहीं, खर्च की अधिकता भी रहेगी। ज्यादा तनाव न लें और काम का प्रेशर घर पर न लाएं। जंक फूड्स का ज्यादा सेवन न करें। वृश्चिक आपको ट्रैवल या ड्राइव करते समय सावधान रहना चाहिए। ऑफिस में लोग आपकी मेहनत और प्रयासों की तारीफ करेंगे। आपको पैसों के मामले में लाभ हो सकता है। कुछ की जिम्मेदारी बढ़ेगी। धनु कॉन्फिडेंट रहेंगे आज। लव के मामले में पार्टनर को टाइम देना जरूरी है। आज जंक फूड्स को नो कहें। कोई गुड न्यूज भी मिल सकती है। आज का आपका दिन थोड़ा उतार-चढ़ाव भरा रहेगा। मकर आज सेहत अच्छी रहेगी लेकिन बाहर का खाना खाने से बचें। आज का दिन आपके लिए लाभकारी साबित होगा। कोई नया प्रोजेक्ट हाथ लग सकता है, जिससे धन लाभ भी होगा। कुंभ आज का आपका दिन फायदेमंद माना जा रहा है। करियर में आपको अपने बॉस का साथ मिलेगा। कुछ जरूरी जिम्मेदारियां भी मिलेंगी। आज पॉजिटिव रहने की सलाह दी जाती है। धन लाभ के योग बन रहे हैं। मीन आज आपका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा। जल्दबाजी में खर्च करने के बजाय सोच समझकर प्लान करना चाहिए। सेहत का ध्यान रखना आवश्यक है। आज का आपका दिन शानदार रहेगा। पुराने इन्वेस्टमेंट से अच्छा रिटर्न मिल सकता है।

हिंदू धर्म में 33 करोड़ नहीं, कितने देवता? वेद-उपनिषदों में क्या है उल्लेख

हिंदू धर्म को लेकर आपने भी अक्सर एक बात सुनी होगी कि हिंदू धर्म में 33 करोड़ देवी-देवता हैं. यह बात इतनी बार कही और सुनी गई है कि बहुत से लोगों के लिए यह एक स्थापित तथ्य जैसी बन गई है. लेकिन क्या सच में वेदों और उपनिषदों में 33 करोड़ देवी-देवताओं का उल्लेख मिलता है? अगर हिंदू धर्म के सबसे पुराने ग्रंथों की तरफ लौटकर इस सवाल का जवाब तलाशें, तो तस्वीर थोड़ी अलग दिखाई देती है. यहां बात सिर्फ 33 करोड़ या 33 कोटि की नहीं है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि ‘देवता’ शब्द का वैदिक अर्थ क्या था, 33 देवताओं की गणना कैसे हुई और ब्रह्मा, विष्णु और महेश का इस पूरी व्यवस्था में स्थान क्या है. क्या है 33 कोटि का मतलब? इस पूरे विवाद की जड़ एक संस्कृत शब्द कोटि है. आज कोटि का इस्तेमाल अक्सर करोड़ के अर्थ में होता है. लेकिन संस्कृत में इस शब्द के एक से अधिक अर्थ मिलते हैं. संदर्भ के अनुसार इसका अर्थ श्रेणी, वर्ग, प्रकार या उत्कृष्ट व श्रेष्ठ भी हो सकता है. इसलिए 33 कोटि को हर जगह सीधे 33 करोड़ पढ़ना उचित नहीं है. भारतीय परंपरा और वैदिक व्याख्याओं में 33 देवताओं की अवधारणा का उल्लेख मिलता है. यानी 33 कोटि देवता को 33 करोड़ अलग-अलग भगवान मान लेना शास्त्रीय संदर्भ को बहुत सरल बना देना होगा. वेदों में 33 देवताओं का क्या उल्लेख है? वैदिक साहित्य में 33 देवताओं की संख्या का उल्लेख मिलता है. अलग-अलग वैदिक ग्रंथों में इनकी सूची या वर्गीकरण में थोड़ा अंतर दिखाई देता है, लेकिन मुख्य रूप से 8 वसु, 11 रुद्र और 12 आदित्य का समूह 31 का होता है. बृहदारण्यक उपनिषद के एक प्रसिद्ध संवाद में ऋषि याज्ञवल्क्य से देवताओं की संख्या पूछी जाती है. वे पहले 33 बताते हैं. आगे पूछे जाने पर वे संख्या को 6, फिर 3, फिर 2, फिर डेढ़ और अंत में 1 तक ले जाते हैं. इसी संवाद में 33 देवताओं को 8 वसु, 11 रुद्र, 12 आदित्य, इंद्र और प्रजापति के रूप में समझाया गया है. यानी यहां 33 करोड़ देवताओं की सूची नहीं, बल्कि देवताओं की एक विशिष्ट वैदिक गणना सामने आती है. कौन हैं 8 वसु? बृहदारण्यक उपनिषद में वसुओं को उन शक्तियों से जोड़ा गया है जिन पर यह संसार टिका हुआ है. वहां अग्नि, पृथ्वी, वायु, अंतरिक्ष, सूर्य, द्युलोक, चंद्रमा और नक्षत्रों को वसु कहा गया है. वसु शब्द का संबंध उस चीज से समझा जाता है जो संसार के लिए आधार या निवास का कारण बने. इसलिए वसुओं को केवल किसी मानव जैसी आकृति वाले देवताओं के रूप में देखने के बजाय प्रकृति और संसार की मूल शक्तियों से जुड़ी वैदिक अवधारणा के रूप में भी समझा जाता है. 11 रुद्र कौन हैं? रुद्रों को लेकर भी लोकप्रिय धारणा और वैदिक व्याख्या में अंतर दिखाई देता है. आज रुद्र नाम सुनते ही भगवान शिव की याद आती है. वैदिक परंपरा में रुद्र की अवधारणा व्यापक है. बृहदारण्यक उपनिषद में 11 रुद्रों की व्याख्या मनुष्य के दस प्राणों और आत्मा के संदर्भ में की गई है. जब ये शरीर से चले जाते हैं तो मनुष्य के प्रियजन शोक करते हैं, इसलिए उन्हें रुद्र कहा गया. बाद की हिंदू परंपराओं में रुद्र का संबंध भगवान शिव के साथ और अधिक गहराई से जुड़ गया. इसलिए वैदिक रुद्र और बाद की शिव-परंपरा के बीच ऐतिहासिक विकास को समझना जरूरी है. 12 आदित्य किसे कहा गया है? 12 आदित्य का संबंध वैदिक साहित्य में सूर्य और समय की अवधारणाओं से भी जोड़ा गया है. बृहदारण्यक उपनिषद में 12 आदित्यों को वर्ष के 12 महीनों के रूप में समझाया गया है, जो संसार को अपने साथ आगे ले जाते हैं. बाद के ग्रंथों में 12 आदित्यों के नामों की सूचियां भी मिलती हैं और उनमें अलग-अलग परंपराओं के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है. इसलिए हर ग्रंथ की सूची को एक जैसा मानना सही नहीं होगा. फिर 33 की संख्या पूरी कैसे होती है? यही हिस्सा सबसे दिलचस्प है. 8 वसु + 11 रुद्र + 12 आदित्य = 31. इसके बाद बृहदारण्यक उपनिषद की गणना में इंद्र और प्रजापति को जोड़कर संख्या 33 होती है. वहीं दूसरे वैदिक ग्रंथों में 33 की संरचना में कुछ अंतर मिलता है. उदाहरण के लिए, शतपथ ब्राह्मण की एक व्याख्या में 8 वसु, 11 रुद्र, 12 आदित्य और द्यौस-पृथ्वी का उल्लेख मिलता है, जबकि एक अन्य वैदिक पाठ में इंद्र और प्रजापति को शामिल किया गया है. इसलिए, 33 देवताओं की बात तो स्पष्ट है, लेकिन उनकी अंतिम सूची हर वैदिक पाठ में बिल्कुल एक जैसी नहीं है. फिर ब्रह्मा, विष्णु और महेश कहां आते हैं? यह सवाल भी बेहद स्वाभाविक है. हिंदू धर्म की बाद की प्रमुख परंपराओं में ब्रह्मा, विष्णु और शिव को त्रिमूर्ति के रूप में देखा जाता है. इन्हें क्रमशः सृष्टि, पालन और संहार या परिवर्तन से जुड़ी भूमिकाओं के संदर्भ में समझाया जाता है. लेकिन यह कहना कि हर वैदिक ग्रंथ में त्रिमूर्ति की यही अवधारणा उसी रूप में मौजूद थी, सही नहीं होगा. ब्रह्मा, विष्णु और शिव की लोकप्रिय त्रिमूर्ति अवधारणा हिंदू धार्मिक विचार के लंबे विकास के दौरान अधिक स्पष्ट रूप से सामने आती है. इसलिए, इन्हें 33 देवताओं की किसी एक सूची में जबरन फिट करने के बजाय वैदिक देवताओं और बाद की पौराणिक परंपराओं के विकास को अलग-अलग समझना ज्यादा सही है. क्या हिंदू धर्म में भगवान एक हैं या अनेक? यहीं से हिंदू दर्शन का एक महत्वपूर्ण पहलू सामने आता है. उपनिषदों में एक ओर अलग-अलग देवताओं और शक्तियों की चर्चा मिलती है, तो दूसरी ओर परम सत्य की एकता पर भी जोर दिया जाता है. बृहदारण्यक उपनिषद के उसी संवाद में याज्ञवल्क्य से देवताओं की संख्या पूछते-पूछते अंत में संख्या एक तक पहुंचती है. ऋग्वेद का प्रसिद्ध वाक्य ‘एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्ति’ भी इसी विचार से जोड़ा जाता है कि सत्य एक है, लेकिन ज्ञानी उसे अलग-अलग नामों से संबोधित करते हैं. इसका अर्थ यह नहीं कि हिंदू धर्म की हर परंपरा बिल्कुल एक ही दार्शनिक व्याख्या स्वीकार करती है. हिंदू दर्शन में एकेश्वरवादी, बहुरूपी और विभिन्न दार्शनिक दृष्टिकोणों की लंबी परंपरा रही

जेड प्लांट को भूलकर भी इन जगहों पर न रखें, जानें सही दिशा और वास्तु नियम

आज के समय में घरों को हरा-भरा रखने और पॉजिटिविटी बढ़ाने के लिए इंडोर प्लांट्स (Indoor Plants) का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है. इनमें से कुछ पौधे सिर्फ सुंदरता ही नहीं बढ़ाते, बल्कि आपकी किस्मत बदलने की ताकत भी रखते हैं. वास्तु शास्त्र और फेंगशुई में ऐसे ही एक चमत्कारी पौधे का विशेष महत्व बताया गया है, जिसे जेड प्लांट (Jade Plant) कहा जाता है.    इसे मनी ट्री, फ्रेंडशिप ट्री या गुड लक प्लांट के नाम से भी जाना जाता है. इसकी चमकदार, रसीली और सिक्के के आकार जैसी गोल पत्तियां धन और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती हैं. आइए जानते हैं कि घर में जेड प्लांट लगाने के क्या फायदे हैं और इसे किस दिशा में रखने से बरकत होती है. धन और तरक्की के लिए जेड प्लांट रखने की सही दिशा  वास्तु शास्त्र के अनुसार, किसी भी पौधे का पूर्ण लाभ तभी मिलता है जब उसे सही दिशा और उचित स्थान पर रखा जाए:   दक्षिण-पूर्व दिशा (South-East): यह दिशा धन के देवता और शुक्र ग्रह के अधीन मानी जाती है. जेड प्लांट को दक्षिण-पूर्व दिशा या अपने लिविंग रूम के आग्नेय कोण में रखना सबसे उत्तम माना गया है. यह आर्थिक स्थिति को मजबूत करता है.  नए इनकम सोर्स बनाता है.    मुख्य द्वार पर (Main Entrance): घर के मुख्य द्वार पर (विशेषकर दाहिनी ओर) जेड प्लांट रखने से सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य का स्वागत होता है. यह घर में आने वाली नकारात्मक ऊर्जा को रोकता है.   ऑफिस या वर्क डेस्क: अगर आपको बिजनेस में घाटा हो रहा है या नौकरी में प्रमोशन रुक गया है, तो ऑफिस की डेस्क या कैश काउंटर के दक्षिण-पूर्व कोने में छोटा जेड प्लांट रखें. इससे फोकस बढ़ता है.   पश्चिम दिशा (West Direction): यदि आप बच्चों की रचनात्मकता और उनके करियर में तरक्की देखना चाहते हैं, तो इस पौधे को घर की पश्चिम दिशा या स्टडी टेबल के पास रख सकते हैं. इन जगहों पर भूलकर भी न रखें जेड प्लांट   वास्तु नियमों के मुताबिक कुछ ऐसी जगहें हैं जहां जेड प्लांट रखने से इसका विपरीत प्रभाव पड़ सकता है: बेडरूम या बाथरूम: इसे कभी भी बेडरूम या बाथरूम में न रखें. बाथरूम की नकारात्मक ऊर्जा इसके सकारात्मक प्रभावों को नष्ट कर देती है.   अंधेरे कोने: जेड प्लांट को घर के ऐसे कोने में बिल्कुल न रखें जहां बिल्कुल धूप या रोशनी न आती हो.    वास्तु के अनुसार सूखा हुआ या मुरझाया हुआ पौधा घर में कंगाली और नकारात्मकता को आकर्षित करता है. अगर पौधे की पत्तियां पीली पड़ रही हैं या सूख रही हैं, तो उन्हें तुरंत काटकर हटा दें.   पानी की मात्रा: जेड प्लांट एक सकुलेन्ट (Succulent) पौधा है, यानी इसकी पत्तियों में पानी स्टोर रहता है. इसे बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती. गमले में तभी पानी डालें जब ऊपरी मिट्टी सूखी नजर आए.   सही धूप: इसे स्वस्थ और हरा-भरा रखने के लिए दिन में कम से कम 3 से 4 घंटे की हल्की धूप या ब्राइट इनडायरेक्ट लाइट मिलना बहुत जरूरी है  

दशहरा 2026 की तारीख हुई साफ, 20 अक्टूबर को विजयादशमी; जानें शस्त्र पूजन का मुहूर्त

हिंदू धर्म में असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक के रूप में मनाए जाने वाले पर्व दशहरा का विशेष स्थान है. दशहरा को विजयदशमी भी कहा जाता है. आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व बुराई के अंत और नई शुरुआत का संदेश देता है. इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध कर त्रैलोक्य को उसके अत्याचारों से मुक्त किया था. इसके साथ ही, यह दिन मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध की विजय के रूप में भी मनाया किया जाता है. साल 2026 में दशहरा की तारीख को लेकर लोगों के मन में जो संशय है. तो आइए जानते हैं इस साल विजयादशमी की सही तिथि, शस्त्र पूजन के मुहूर्त और रावण दहन का समय क्या रहने वाला है. दशहरा 2026 तिथि (Dussehra 2026 Tithi) द्रिक पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) को पड़ रही है. इसी दिन पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा. पंचांग के मुताबिक, दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 51 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 13 मिनट पर होगा. विजय मुहूर्त और शस्त्र पूजन का समय दशहरे के दिन किसी भी नए कार्य की शुरुआत, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए 'विजय मुहूर्त' को अत्यंत शुभ माना गया है. इसके अलावा इस दिन शस्त्रों और उपकरणों की भी पूजा की जाती है. विजय मुहूर्त 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 01 बजकर 59 मिनट से लेकर दोपहर 02 बजकर 45 मिनट तक रहेगा. इस समयावधि में माता अपराजिता और शमी के पेड़ की पूजा करना बेहद फलदायी माना जाता है. रावण दहन का समय (Ravan Dahan 2026 Timing) दशहरे के दिन शाम के समय बुराई के प्रतीक रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है. रावण दहन का समय 20 अक्टूबर 2026 को सूर्यास्त के बाद किया जाएगा. आमतौर पर स्थानीय रामलीला कमेटियों द्वारा प्रदोष काल और शुभ चौघड़िया देखकर शाम के समय रावण दहन किया जाता है. दशहरा का महत्व विजयादशमी को अबूझ मुहूर्त' माना जाता है, यानी इस दिन बिना किसी पंचांगीय विचार के कोई भी नया व्यापार, गृह प्रवेश या वाहन खरीद जैसे मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं. यह पर्व हमें सिखाता है कि अहंकार, बुराई और अधर्म का नाश निश्चित है, भले ही वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो. जीत हमेशा सत्य, सदाचार और धर्म की ही होती है. दशहरा पर कैसे करें पूजन? दशहरे के दिन घर के ईशान कोण में साफ चौकी पर गाय के गोबर से अष्टदल बनाकर माता अपराजिता और मां जया-विजया की स्थापना करें. फिर उन्हें रोली, अक्षत, फूल और भोग अर्पित कर विजय प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें. इसके बाद शाम के समय प्रदोष काल में शमी के पेड़ के पास जाकर जल अर्पित करें, घी का दीपक जलाएं और उसकी पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना करें. साथ ही, अपने घर के शस्त्रों, औजारों या वाहनों को गंगाजल से पवित्र कर रोली-अक्षत से तिलक करें और कलावा बांधकर उनकी पूजा करें.

Vastu Tips: घर में ड्रेसिंग और डाइनिंग टेबल कहां रखें? जानें सही दिशा और जरूरी नियम

 घर को सजाते समय हम अक्सर फर्नीचर के डिजाइन और उसकी सुविधा पर ध्यान देते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र में सामान की दिशा और जगह को भी महत्वपूर्ण माना गया है. मान्यता है कि घर में रखी चीजों की सही जगह से सकारात्मक माहौल बना रहता है. खासतौर पर ड्रेसिंग टेबल और डाइनिंग टेबल को लेकर वास्तु में कुछ नियम बताए गए हैं. आइए जानते हैं इन दोनों को घर में किस दिशा और जगह पर रखना शुभ माना जाता है. ड्रेसिंग टेबल के लिए कौन सी दिशा शुभ? वास्तु मान्यताओं के अनुसार ड्रेसिंग टेबल को उत्तर या पूर्व दिशा में रखना अच्छा माना जाता है.  ड्रेसिंग टेबल में लगा आईना कमरे में रोशनी को प्रतिबिंबित करता है, इसलिए इसे रखने की जगह पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है. अगर ड्रेसिंग टेबल को बेडरूम में रखा जा रहा है तो कोशिश करें कि वह ऐसी जगह हो जहां कमरे में आने-जाने में परेशानी न हो.  साथ ही आईने की स्थिति भी सही रखें. बेड के सामने आईना क्यों न लगाने की सलाह? वास्तु शास्त्र में बेड के ठीक सामने आईना लगाने से बचने की सलाह दी जाती है.  मान्यता है कि सोते समय आईने में व्यक्ति का प्रतिबिंब दिखाई देने से कमरे की ऊर्जा प्रभावित हो सकती है. अगर कमरे की जगह ऐसी है कि आईने को बेड के सामने से हटाना संभव नहीं है तो रात में इसे कपड़े से ढकने की सलाह दी जाती है.  यह वास्तु से जुड़ी पारंपरिक मान्यता है.   ड्रेसिंग टेबल दरवाजे के सामने न रखें ड्रेसिंग टेबल को कमरे के दरवाजे के बिल्कुल सामने रखने से भी बचने की सलाह दी जाती है.  इसका एक व्यावहारिक कारण भी है, दरवाजा खोलने-बंद करने और कमरे में आने-जाने के दौरान रास्ता बाधित हो सकता है. इसलिए ड्रेसिंग टेबल ऐसी जगह रखना बेहतर है जहां आईने के साथ-साथ कमरे में पर्याप्त खुली जगह भी बनी रहे. डाइनिंग टेबल किस दिशा में रखें? वास्तु के अनुसार डाइनिंग टेबल के लिए पश्चिम दिशा को अनुकूल माना जाता है.  इसके अलावा उत्तर-पश्चिम दिशा में भी डाइनिंग एरिया बनाया जा सकता है. डाइनिंग एरिया का उद्देश्य केवल खाना खाने तक सीमित नहीं होता.  परिवार के लोग यहां साथ बैठकर भोजन करते हैं और बातचीत भी करते हैं.  इसलिए वास्तु मान्यताओं के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि जगह आरामदायक और हवादार हो. डाइनिंग टेबल मुख्य दरवाजे के ठीक सामने न रखें वास्तु मान्यताओं के अनुसार डाइनिंग टेबल को घर के मुख्य प्रवेश द्वार के बिल्कुल सामने रखने से बचना चाहिए.  इसी तरह इसे पूजा स्थान के ठीक सामने रखना भी उचित नहीं माना जाता. व्यावहारिक रूप से भी डाइनिंग टेबल को प्रवेश द्वार से थोड़ा अलग रखना बेहतर होता है, ताकि घर में आने-जाने वालों के लिए पर्याप्त जगह बनी रहे. डाइनिंग टेबल का आकार भी रखें ध्यान डाइनिंग टेबल चुनते समय कमरे के आकार का ध्यान रखना जरूरी है.  बहुत बड़ी टेबल छोटे कमरे में रखने से जगह कम हो सकती है और लोगों के बैठने में परेशानी हो सकती है. वास्तु की मान्यताओं में डाइनिंग टेबल के लिए व्यवस्थित और साफ जगह रखने पर जोर दिया जाता है.  इसलिए टेबल पर अनावश्यक सामान जमा करने से बचें और भोजन के बाद इसे साफ रखें. आईने और डाइनिंग एरिया की साफ-सफाई जरूरी वास्तु से जुड़ी मान्यताओं में साफ-सफाई को विशेष महत्व दिया जाता है.  ड्रेसिंग टेबल का आईना साफ रखें, उसके आसपास सामान बिखरा हुआ न छोड़ें.  इसी तरह डाइनिंग टेबल पर लंबे समय तक गंदे बर्तन या बचा हुआ खाना रखने से बचना चाहिए. इसका फायदा व्यावहारिक रूप से भी है. फर्नीचर रखते समय इन बातों का भी ध्यान दें ड्रेसिंग और डाइनिंग टेबल की दिशा के अलावा घर में फर्नीचर रखते समय कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखा जा सकता है.  फर्नीचर ऐसा न हो कि कमरे की आवाजाही बाधित हो.  खिड़कियों और दरवाजों के सामने अनावश्यक सामान रखने से बचें. घर के किसी हिस्से में बहुत ज्यादा सामान जमा करने के बजाय खुली जगह बनाए रखना भी बेहतर होता है.  इससे कमरे में प्राकृतिक रोशनी और हवा का प्रवाह बना रहता है. वास्तु में दिशा का क्यों है महत्व? वास्तु शास्त्र में घर की अलग-अलग दिशाओं को अलग-अलग तत्वों और ऊर्जाओं से जोड़कर देखा जाता है.  इसी आधार पर फर्नीचर और दूसरी वस्तुओं को रखने की दिशाओं के बारे में मान्यताएं बताई गई हैं. हालांकि, इन नियमों को धार्मिक और पारंपरिक मान्यता के रूप में देखना चाहिए.  ड्रेसिंग या डाइनिंग टेबल की किसी खास दिशा में रखने से सुख-समृद्धि या परेशानी निश्चित रूप से बढ़ती या घटती है.

पितृ पक्ष में खरीदारी से बचें! इन 5 चीजों को घर लाना माना जाता है अशुभ

 हिंदू धर्म में आश्विन माह का कृष्ण पक्ष हमारे पूर्वजों को समर्पित पितृ पक्ष के रूप में मनाया जाता है. इस दौरान पितरों की आत्मा की तृप्ति के लिए तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और दान-पुण्य करने की समृद्ध परंपरा है. ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार, यह 16 दिनों की अवधि पूर्णतः संयम, सादगी और आत्म-स्मरण का समय होती है. मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान नई या भौतिक सुख-सुविधाओं की खरीदारी करना शुभ नहीं माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि इस समय अनजाने में खरीदी गई कुछ विशेष वस्तुएं घर में वास्तु दोष और आर्थिक तंगी का कारण बन सकती हैं. आइए जानते हैं कि पितृ पक्ष के दौरान किन 5 प्रमुख चीजों को घर लाने से बचना चाहिए. नए कपड़े और सोने-चांदी के गहने (New Clothes and Jewellery) पितृ पक्ष का समय किसी प्रकार का जश्न या उत्सव मनाने का नहीं, बल्कि पितरों के प्रति शोक, कृतज्ञता और सम्मान व्यक्त करने का होता है. इस अवधि में स्वयं के उपयोग के लिए नए वस्त्र, सोने-चांदी के आभूषण या फैशनेबल वस्तुएं खरीदने से घर की सुख-समृद्धि प्रभावित हो सकती है. हालांकि, यदि आप पितरों के तर्पण, ब्राह्मणों या गरीबों को दान करने के उद्देश्य से वस्त्र खरीदते हैं, तो वह वर्जित नहीं है. नया वाहन और प्रॉपर्टी (Vehicle and Property) नई कार, बाइक, नया घर, दुकान या जमीन की खरीदारी को जीवन में किसी नए व शुभ कार्य की शुरुआत माना जाता है. श्राद्ध पक्ष में नए काम या अचल संपत्ति का सौदा करने से बचना चाहिए. मान्यता है कि इस समय संपत्ति में निवेश करने से उस स्थान या वाहन से पूर्ण शुभ फल प्राप्त नहीं होते हैं. नई झाड़ू (Broom) वास्तु और शास्त्रों में झाड़ू का सीधा संबंध धन की देवी मां लक्ष्मी से माना गया है. पितृ पक्ष के दौरान नई झाड़ू खरीदकर घर लाने की सख्त मनाही होती है. ऐसा माना जाता है कि श्राद्ध के दिनों में झाड़ू की खरीदारी करने से घर की बरकत रुक जाती है और अनचाहे खर्चे बढ़ने लगते हैं. लोहा और लोहे के सामान (Iron Items) ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पितृ कार्य में लोहे के बर्तनों या धातु का प्रयोग और इसकी खरीदारी दोनों ही शुभ नहीं माने जाते है. श्राद्ध पक्ष में लोहा या लोहे से बनी नई वस्तुएं घर लाने से जीवन में मानसिक तनाव और परेशानियां बढ़ सकती हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स और नया फर्नीचर (Electronics and Furniture) नया टीवी, फ्रिज, सोफा, बेड या घर की सजावट का सामान भौतिक विलासिता (Luxury) को दर्शाता है. चूंकि, यह समय सादगी का है, इसलिए इस दौरान घर के लिए विलासिता से जुड़े उपकरण खरीदना वर्जित माना गया है. कब मनाई सर्वपितृ अमावस्या? इस वर्ष पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा. जिन पूर्वजों की मृत्यु की सटीक तिथि ज्ञात न हो, उनका श्राद्ध अमावस्या के दिन किया जाना अत्यंत फलदायी माना जाता है.  

45 दिन बेहद खास! मंगल गोचर से इन 5 राशियों को करियर-धन में लाभ के योग

द्रिक ज्योतिष में मंगल ग्रह को ऊर्जा, साहस, पराक्रम, भूमि और भाई का कारक माना जाता है. जब भी मंगल अपनी राशि बदलते हैं, तो जातकों के जीवन में उत्साह और कार्यक्षमता पर सीधा प्रभाव पड़ता है. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, ऊर्जा के कारक मंगल देव जल्द ही अपनी नीच राशि कर्क में प्रवेश करने जा रहे हैं, जहां वे अगले 45 दिनों तक विराजमान रहेंगे. मंगल का यह राशि परिवर्तन कई राशियों के लिए विशेष रूप से फलदायी साबित होगा. इन 45 दिनों के दौरान विशेष तौर पर 5 भाग्यशाली राशियों को करियर, व्यापार, संपत्ति और आर्थिक मामलों में बंपर लाभ मिलने के योग बन रहे हैं. आइए जानते हैं कि मंगल के इस गोचर से किन राशियों के दिन बदलने वाले हैं: मेष राशि (Aries) मंगल आपकी राशि के स्वामी हैं, ऐसे में कर्क राशि में उनका गोचर आपके लिए अड़चनों को दूर करने वाला साबित होगा. यदि आप लंबे समय से कोई नया मकान, जमीन या वाहन खरीदने का विचार कर रहे थे, तो इन 45 दिनों में आपकी यह इच्छा पूरी हो सकती है. कार्यक्षेत्र में आपके साहस और नेतृत्व क्षमता की सराहना होगी, जिससे अधिकारी वर्ग आपसे प्रसन्न रहेगा. वृषभ राशि (Taurus) वृषभ राशि के जातकों के लिए मंगल का यह गोचर संवाद और पराक्रम भाव को मजबूत करेगा, जिससे आपके संपर्कों का दायरा बढ़ेगा. व्यापार से जुड़े लोगों को नई साझेदारियों (Partnership) से जबरदस्त मुनाफा मिल सकता है. भाई-बहनों के सहयोग से कोई अटका हुआ पुराना काम पटरी पर आ जाएगा. सामाजिक मान-सम्मान में वृद्धि होगी और आर्थिक पक्ष मजबूत होगा. कर्क राशि (Cancer) मंगल आपकी ही राशि में गोचर कर रहे हैं, इसलिए आपके भीतर गजब की ऊर्जा और मानसिक दृढ़ता देखने को मिलेगी. नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. आपके फैसलों की लोग तारीफ करेंगे. हालांकि इस दौरान स्वभाव में थोड़ा उग्रपन आ सकता है, इसलिए धैर्य से काम लें. वैवाहिक जीवन में प्रेम और समझदारी बढ़ेगी. वृश्चिक राशि (Scorpio) मंगल आपकी राशि के भी स्वामी हैं. कर्क राशि में उनका गोचर आपके भाग्य स्थान को प्रभावित करेगा, जिससे किस्मत हर कदम पर आपका साथ देगी. प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों या उच्च शिक्षा की इच्छा रखने वालों के लिए यह 45 दिन बेहद अनुकूल रहेंगे. धार्मिक कार्यों में मन लगेगा और लंबी दूरी की यात्राएं लाभदायक साबित होंगी. लंबे समय से रुके हुए सरकारी काम भी आसानी से पूरे हो जाएंगे. मीन राशि (Pisces) मीन राशि के जातकों के लिए मंगल का यह गोचर आय के नए स्रोत खोलने के साथ-साथ रचनात्मक क्षेत्रों में बड़ी सफलता दिलाएगा. शेयर बाजार, पैतृक संपत्ति या पुराने निवेश से अचानक बड़ा वित्तीय लाभ मिल सकता है. संतान पक्ष से कोई सुखद समाचार मिलने से घर में उल्लास का माहौल रहेगा. आपके सोचे हुए सभी कार्य समय पर पूरे होंगे.