samacharsecretary.com

बाथरूम वास्तु दोष: सरल और असरदार समाधान

अगर आप अपने घर में वास्तु नियमों की अनदेखी करते हैं, तो इससे आपको वास्तु दोष का सामना करना पड़ सकता है, जिससे धन की बर्बादी और लड़ाई-झगड़े जैसी कई समस्याओं उत्पन्न हो जाती हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं कि बाथरूम से जुड़ी किन गलतियों को करने से बचना चाहिए, वरना इससे आपकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इस तरह लगता है वास्तु दोष वास्तु शास्त्र में माना गया है कि बाथरूम को हमेशा घर की पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में बनवाना चाहिए। इसे दक्षिण, दक्षिण-पूर्व या ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में बनाने से बचें। अगर आपका बाथरूम किचन के ठीक सामने है, तो यह वास्तु दोष की वजह बन सकता है। इसके साथ ही अगर आपके बाथरूम में टपकता हुआ नल है, तो इसे तुरंत ठीक करवा लेना चाहिए। साथ ही बाथरूम का दरवाजा हमेशा बंद रखना चाहिए। इन नियमों की अनदेखी करने पर नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है। रखें इन बातों का ध्यान वास्तु दोष को दूर करने के लिए, बाथरूम को हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहिए। साथ ही आप बाथरूम में एक नीली बाल्टी भी रख सकते हैं, जो वास्तु की दृष्टि से फायदेमंद माना गया है। बाथरूम में हल्के रंग की टाइल्स लगाएं। इसके साथ ही पर्याप्त वेंटिलेशन और प्राकृतिक रोशनी का भी ध्यान रखना चाहिए। इस सभी बातों का ध्यान रखने से आपको वास्तु दोष से राहत देखने को मिल सकती है। जरूर करें ये काम वास्तु दोष से राहत पाने के लिए आप बाथरूम के कोनों में एक कांट की कटोरी में समुद्री नमक या फिटकरी भी रख सकते हैं, जिसे समय-समय पर बदलते रहना चाहिए। ऐसा करने से सकारात्मकता ऊर्जा भी बढ़ती है। वास्तु दोष से छुटकारा पाने के लिए कपूर जलाना भी एक फायदेमंद उपाय है।  

मकर संक्रांति के तुरंत बाद महालक्ष्मी राजयोग 2026, इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत

वैदिक पंचांग के अनुसार जनवरी के मध्य का समय ज्योतिषीय दृष्टि से काफी खास रहने वाला है. इस दौरान कई बड़े ग्रह अपनी राशि बदलेंगे, जिससे शुभ योग और राजयोग बनेंगे. इस दौरान बदली ग्रहों की चाल का असर सिर्फ व्यक्ति के जीवन पर ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया की गतिविधियों पर भी देखने को मिल सकता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, मकर संक्रांति के ठीक अगले दिन यानी 16 जनवरी को साहस और ऊर्जा के कारक मंगल ग्रह मकर राशि में प्रवेश करेंगे. इसके बाद, 18 जनवरी को चंद्रमा भी मकर राशि में पहुंच जाएंगे. जब ये दोनों ग्रह मकर राशि में मिलेंगे, तो महालक्ष्मी राजयोग का निर्माण होगा. ज्योतिष के अनुसार, यह योग कुछ राशियों के लिए खास तौर पर लाभ देने वाला माना जा रहा है. इस दौरान लकी राशियों को नौकरी, आय और करियर से जुड़े मामलों में सकारात्मक बदलाव देखने को भी मिल सकते हैं.  मेष राशि मेष राशि के जातकों के लिए यह राजयोग करियर और बिजनेस के लिहाज से शुभ संकेत दे रहा है.  यह योग आपकी कुंडली में कर्म भाव में बन रहा है, जिससे कार्यक्षेत्र में अच्छे मौके मिल सकते हैं.  जो लोग नौकरी की तलाश में हैं, उन्हें अच्छा ऑफर मिल सकता है. आपकी मेहनत और रचनात्मक सोच आपको आगे बढ़ाएगी. व्यापार से जुड़े लोगों को मुनाफा हो सकता है. नया काम शुरू करने या किसी बड़े फैसले के लिए समय अनुकूल रहेगा. मानसिक रूप से भी आप खुद को मजबूत और संतुलित महसूस करेंगे.  कन्या राशि  कन्या राशि वालों के लिए महालक्ष्मी राजयोग कई तरह से लाभ लेकर आ सकता है. यह योग आपकी कुंडली के पंचम भाव में बन रहा है.  ऐसे में अचानक धन प्राप्ति के योग बन सकते हैं. पारिवारिक जीवन में खुशहाली रहेगी और रिश्तों में बेहतर तालमेल देखने को मिलेगा.  छात्रों के लिए यह समय खास हो सकता है.  पढ़ाई में अच्छे परिणाम मिल सकते हैं और किसी अच्छे संस्थान में दाखिले के योग भी बन रहे हैं.  प्रेम संबंधों में भी सकारात्मक बदलाव आ सकता है और रिश्ते मजबूत हो सकते हैं.  धनु राशि धनु राशि वालों के लिए महालक्ष्मी राजयोग आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है.  यह योग आपकी कुंडली में धन और वाणी से जुड़े क्षेत्र में बन रहा है. ऐसे में अचानक धन मिलने के योग बन सकते हैं. इस समय रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है या कोई नया आय का स्रोत बन सकता है. कामकाज में तेजी आएगी और लंबे समय से अटके किसी काम में सफलता मिलने की संभावना है. परिवार का माहौल भी शांत और सकारात्मक रहेगा.  आपकी बातों में असर बढ़ेगा, जिससे लोग आपकी ओर आकर्षित होंगे.

मकर संक्रांति की तारीख तय क्यों हो गई? अगले 54 वर्षों तक 15 जनवरी का ही संयोग

नई दिल्ली ग्रहों के राजा सूर्य 14 जनवरी की रात्रि 9:39 बजे धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के इस राशि परिवर्तन को ही मकर संक्रांति कहा जाता है। इस वर्ष संक्रांति का पुण्यकाल लगभग 16 घंटे तक रहेगा, जो अगले दिन सूर्योदय के बाद 15 जनवरी की दोपहर तक माना जाएगा। क्यों बदलती है मकर संक्रांति की तिथि? ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य के राशि परिवर्तन में हर वर्ष लगभग 20 मिनट की देरी होती है। इस प्रकार 3 वर्षों में लगभग 1 घंटे का अंतर, 72 वर्षों में 24 घंटे यानी 1 दिन का अंतर हो जाता है। चूंकि सूर्य और चंद्रमा अपने मार्ग में पीछे नहीं चलते, इसलिए हर 72 वर्षों में संक्रांति की तिथि एक दिन आगे बढ़ जाती है।   2080 तक 15 जनवरी को ही संक्रांति ज्योतिषविद् आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार, इस गणना के आधार पर वर्ष 2080 तक मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाएगी। इसके बाद संक्रांति की तिथि बढ़कर 16 जनवरी हो जाएगी। हालांकि 72 वर्षों का यह चक्र वर्ष 2008 में ही पूरा हो गया था, लेकिन कुछ वर्षों तक सूर्य का राशि परिवर्तन प्रातः काल में होने के कारण पूर्वकाल मानकर मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाती रही। पहले कब-कब मनाई जाती थी मकर संक्रांति?     1936 से पहले: 14 जनवरी     1864 से 1936: 13 जनवरी     1792 से 1863: 12 जनवरी विशेष बात यह है कि 12 जनवरी 1863, जब स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ था, उस दिन मकर संक्रांति का पर्व था। इस वर्ष का योग और धार्मिक महत्व इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व वृद्धि योग, शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि, ज्येष्ठा नक्षत्र और गुरुवार के दिन मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन साधारण नदी में स्नान भी गंगा स्नान के समान पुण्यकारी माना गया है। राशि के अनुसार करें दान मकर संक्रांति के दिन स्नान-दान का विशेष महत्व है। जातक अपनी राशि के अनुसार दान कर पुण्य अर्जित कर सकते हैं। इस दिन किसी का अपमान न करें, पेड़ न काटें और तुलसी की पत्तियां न तोड़ें।     मेषः लाल मिर्च, लाल वस्त्र, मसूर दाल     वृषभः सफेद तिल के लड्डू, चावल, चीनी     मिथुनः हरी सब्जियां, मौसमी फल, साबुत मूंग     कर्कः जरूरतमंदों को सफेद वस्त्र, घी     सिंहः गुड़, चिक्की, शहद, मूंगफली का दान     कन्याः मूंग दाल की खिचड़ी बनाकर जरूरतमंदों को खिलाएं     तुलाः सफेद वस्त्र, मखाना, चावल, चीनी     वृश्चिकः मूंगफली, गुड़, लाल रंग के गर्म कपड़े     धनुः पीले वस्त्र, केले, बेसन, चने की दाल     मकरः काले तिल के लड्डू, कंबल     कुंभः ऊनी कपड़े, सरसों तेल, जूता-चप्पल     मीनः पीली सरसों, चने की दाल, मौसमी फल

वास्तु के अनुसार बाथरूम का शीशा: ये 3 गलतियां बन सकती हैं गृह-क्लेश की वजह

आजकल हर घर के बाथरूम में शीशा लगा होता है। अपने होम डेकोर और इंटीयर की खूबसूरती बढ़ाने के लिए लोग घर में किसी भी जगह शीशा लगा देते हैं। उन्हें वास्तु से कोई लेना-देना नहीं होता। लेकिन, वास्तु का लोगों के जीवन पर कितना असर पड़ता है इसका उन्हें अंदाजा भी नहीं होता। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का हर कोना हमारी उन्नति और स्वास्थ्य पर गहरा असर डालता है। बाथरूम एक ऐसी जगह है, जहां सबसे अधिक नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होने की संभावना रहती है। अगर यहां वास्तु के नियमों का पालन न किया जाए, तो यह घर की सुख-शांति को बिगाड़ सकता है। बाथरूम में लगे आईने (शीशे) का इसमें बहुत बड़ा योगदान होता है। आइए जानते हैं बाथरूम में शीशा लगाने के सही वास्तु नियम: सही दिशा का चुनाव वास्तु के अनुसार, बाथरूम में आईना हमेशा पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की दीवार पर लगाना चाहिए। इन दिशाओं को सकारात्मकता का केंद्र माना जाता है। उत्तर दिशा में लगा आईना धन और समृद्धि को आकर्षित करता है। वहीं, पूर्व दिशा स्वास्थ्य और मान-सम्मान में सुधार करती है। भूलकर भी दक्षिण या पश्चिम की दीवार पर आईना न लगाएं। आईने का आकार अपने बाथरूम में हमेशा चौकोर या आयाताकार आईना ही लगाएं। वास्तु में इन आकारों को संतुलन का प्रतीक और बेहद शुभ माना गया है। गोल या अंडाकार आईने बाथरूम में लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि ये ऊर्जा को अनियंत्रित तरीके से परावर्तित कर सकते हैं, जिससे मानसिक तनाव भी पैदा हो सकता है। कितनी ऊंचाई पर लगाएं शीशा? आईना लगाते समय ध्यान रखें कि यह न तो बहुत ऊपर हो और न ही बहुत नीचे। जब आप शीशे में देखें, तो आपका चेहरा पूरी तरह और स्पष्ट दिखना चाहिए। आधा या कटा हुआ चेहरा दिखना अशुभ माना जाता है और यह आत्मविश्वास में कमी ला सकता है। दरवाजे के ठीक सामने न लगा हो शीशा बाथरूम के दरवाजे के ठीक सामने कभी भी आईना नहीं लगाना चाहिए। वास्तु के अनुसार, जब बाथरूम का दरवाजा खुलता है, तो नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। अगर सामने आईना लगा होगा, तो वह उस नकारात्मक ऊर्जा को परावर्तित कर वापस पूरे घर में फैला देगा। शीशे की सफाई और स्थिति आईने पर धुंधलापन, पानी के निशान या गंदगी नहीं होनी चाहिए। गंदा आईना न केवल नकारात्मकता बढ़ाता है, बल्कि आर्थिक तंगी का कारण भी बनता है। साथ ही, यदि आईना कहीं से चटका या टूटा हुआ हो, तो उसे तुरंत हटा दें, क्योंकि टूटा हुआ शीशा गंभीर वास्तु दोष पैदा करता है।  

मकर संक्रांति की तारीख में उलझन: 15 जनवरी, एकादशी और दो बड़े झोल

भारत में त्योहारों की तिथि को लेकर अक्सर असमंजस की स्थिति रहती है, और इस बार मकर संक्रांति 2026 को लेकर भी कुछ ऐसा ही हो रहा है. ज्योतिषविदों के अनुसार, इस साल मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाना अधिक श्रेष्ठ बताया जा रहा है. लेकिन आखिर ऐसा क्यों है? इसके पीछे दो सबसे बड़े ज्योतिषीय कारण हैं और साथ ही एक ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है जो पूरे 23 साल बाद आया है. आइए जानते हैं. सूर्य का गोचर और पुण्य काल का समय ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तभी मकर संक्रांति मनाई जाती है. साल 2026 में सूर्य देव 14 जनवरी की दोपहर 3:13 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे. शास्त्रों का नियम है कि यदि संक्रांति दोपहर के बाद (सूर्यास्त के करीब) लगती है, तो उसका पूर्ण पुण्य काल और दान-स्नान अगले दिन के सूर्योदय पर करना सबसे उत्तम होता है. यही कारण है कि 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाना शास्त्र सम्मत माना जा रहा है. उदया तिथि की मान्यता हिंदू धर्म में उदया तिथि वह तिथि जो सूर्योदय के समय मौजूद हो का विशेष महत्व है. चूंकि 14 जनवरी को सूर्य का राशि परिवर्तन दोपहर में हो रहा है, इसलिए 15 जनवरी की सुबह जब सूर्योदय होगा, तब संक्रांति की तिथि प्रभावी रहेगी. इसी उदया तिथि के कारण देश के अधिकांश हिस्सों में 15 जनवरी को ही पवित्र स्नान, सूर्य अर्घ्य और दान के कार्य किए जाएंगे. 23 साल बाद बना दुर्लभ संयोग: षटतिला एकादशी की बाधा इस बार मकर संक्रांति की तिथि के साथ एक बड़ी दिलचस्प बात जुड़ी है. 14 जनवरी को षटतिला एकादशी भी पड़ रही है. ज्योतिषीय गणना बताती है कि ऐसा संयोग लगभग 23 साल पहले साल 2003 में बना था. खिचड़ी खाने को लेकर क्यों है उलझन? मकर संक्रांति पर मुख्य रूप से चावल और दाल की खिचड़ी खाई जाती है. लेकिन एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है. ऐसे में जो लोग एकादशी का उपवास रखते हैं, उनके लिए 14 जनवरी को संक्रांति मनाना कठिन होगा. इसी वजह से विद्वानों का मत है कि 14 जनवरी को आप तिल, गुड़ और फलाहार का सेवन करें. फिर अगले दिन यानी 15 जनवरी को संक्रांति का पारंपरिक भोजन यानी खिचड़ी खाएं और दान करें. आध्यात्मिक महत्व धार्मिक दृष्टिकोण से देखें तो सूर्य का मकर राशि में आना और भगवान विष्णु की प्रिय एकादशी तिथि का एक ही समय पर होना बेहद शुभ है. इसे विष्णु-भक्ति और सूर्य-तत्व का अद्भुत मिलन कहा जा रहा है. इसलिए इस दिन किया गया दान और पूजा सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होगी.

14 जनवरी का राशिफल: इस दिन के ग्रहों का आपके लिए क्या संदेश है, जानें यहां

मेष 14 जनवरी के दिन आज आप समृद्ध हैं। बातचीत में खुलापन लाने पर विचार करें। निजी और पेशेवर जीवन, दोनों में समझदार और संवेदनशील रहें। आपका दिन प्रोडक्टिव रहेगा। कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या नहीं होगी। आर्थिक स्थिति भी आपके पक्ष में रहेगी। वृषभ 14 जनवरी के दिन ऑफिस की गॉसिप से बचें। ऑफिस के काम पर ध्यान केंद्रित करें। आपका प्रेम जीवन खुशनुमा रहेगा और आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। आज का दिन समझदारी भरे निवेश के लिए भी अच्छा साबित हो सकता है। मिथुन 14 जनवरी के दिन अनुशासन और मेहनत के जरिए करियर जीवन को प्रोडक्टिव बनाए रखें। आज प्रेम जीवन को रोमांटिक बनाएं। सुरक्षित वित्तीय निवेश को प्राथमिकता दें। स्वास्थ्य आपका अच्छा रहेगा। आज रिश्ते में ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। कर्क 14 जनवरी के दिन लव के मामले में अहंकार को दूर रखें। भविष्य के लिए प्लान करें। अपनी क्षमता साबित करने के लिए ऑफिस में नए काम हाथ में लें। पैसों से जुड़ी कोई समस्या नहीं आएगी। आज आप स्वस्थ भी हैं। सिंह 14 जनवरी के दिन प्यार से साथ रहें और पेशेवर जोखिम उठाने की इच्छा भी दिखाएं। धन और स्वास्थ्य दोनों अच्छे रहेंगे, और कुछ महिलाओं को संपत्ति भी विरासत में मिलेगी। आपको अपने हाव-भावों को लेकर सावधान रहने की जरूरत है। कन्या 14 जनवरी के दिन प्यार में खुशी के पलों की तलाश करें और ऑफिस में नई भूमिकाएं निभाना सुनिश्चित करें। आंख मूंदकर निवेश न करें, बल्कि एक उचित निवेश योजना बनाएं। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। तुला 14 जनवरी के दिन लव लाइफ में बेहतरीन पल देखने को मिलेंगे। प्रोफेशनल मुद्दों को सुलझाएं। आर्थिक निवेश पर विचार करें, जो सुरक्षित हों। आपकी हेल्थ अच्छी रहेगी। आप वर्क-लाइफ के बीच जरूरी बैलेंस बनाए रखें। वृश्चिक 14 जनवरी के दिन अपनी लव लाइफ में निष्पक्ष रहें। करियर में जोखिम उठाने पर विचार करें। समृद्धि के बावजूद, आपको खर्चों को लेकर सावधान रहना चाहिए। स्वास्थ्य भी आपके पक्ष में है। धनु 14 जनवरी के दिन रिश्तों की समस्याओं के समाधान के लिए फोकस बनए रखें। बेहतर विकास के लिए पेशेवर अवसरों का लाभ उठाएं। आज समृद्धि बनी रहेगी और स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। बैलेंस पर फोकस रखें। मकर 14 जनवरी के दिन रिश्ते में सुखद पलों की तलाश करें। लव लाइफ को अगले लेवल पर ले जाने पर विचार करें। अहंकार को दफ्तर की जिंदगी से दूर रखें। आज आप हेल्दी महसूस करेंगे। धन मिलने पर सुरक्षित वित्तीय फैसले लें। कुंभ 14 जनवरी के दिन प्रेम जीवन को रोमांटिक बनाए रखें। धन का आगमन होगा। इस बात का ध्यान रखें कि आप प्रोफेशनल एक्सपेक्टेशन पर भी खरे उतरें। आज आर्थिक और स्वास्थ्य दोनों अच्छे रहेंगे। मीन 14 जनवरी के दिन रिश्ते में सुखद पल आएंगे। अपनी लगन और मेहनत का परिचय देने के लिए कार्यस्थल पर नई चुनौतियों का सामना करें। सुरक्षित वित्तीय निर्णय लेने को प्राथमिकता दें। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।

सूर्य का मकर राशि में गोचर आज रात 9:19 बजे, जानें संक्रांति की सही तिथि

इस साल मकर संक्रांति 2026 को लेकर कंफ्यूजन है क्योंकि कहा जा रहा है कि 14 की जगह 15 जनवरी को ये त्योहार मनाना ज्यादा शुभ रहेगा. इसको लेकर सबसे बड़े दो तर्क दिए जा रहे हैं कि 14 जनवरी को षटतिला एकादशी है, जिसके चलते अन्न दान नहीं किया जा सकता है और दूसरा सूर्य देव मकर राशि में रात 9 बजकर 13 मिनट पर प्रवेश कर रहे हैं, ऐसे में उदया तिथि यानी 15 जनवरी को ही स्नान, ध्यान, दान करना उचित माना जा रहा है. इन सब के पीछे ज्योतिषाचार्यों ने तर्क दिए हैं. हालांकि द्रिक पंचांग के मुताबिक, मकर संक्रांति का पुण्य काल 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शुरू हो रहा है, जोकि शाम 5 बजकर 45 मिनट तक रहेगा. ये अवधि 2 घंटे 32 मिनट तक की है. इसके अलावा महापुण्य काल दोपहर 3 बजकर 13 मिनट से शुरू हो रहा है, जोकि शाम 4 बजकर 58 मिनट तक रहेगा. इसकी अवधि 1 घंटा 45 मिनट है. पंचांग के अनुसार, ‘मकर संक्राति के शुरू होने के बाद 40 घटी तक का समय मकर संक्रांति से संबंधित शुभ कार्य करने के लिए उत्तम माना गया है. 1 घटी की अवधि 24 मिनट होती है, ऐसे में 40 घटी का समय 16 घंटे होते हैं. 40 घटी का समयपुण्य काल के नाम से भी जाना जाता है. इस दौरान श्रद्धालु व्रत रख पवित्र स्नान कर भगवान सूर्य को नैवेद्य अर्पण करते हैं. साथ ही साथ दान-दक्षिणा, श्राद्ध कर्म और व्रत का पारण करते हैं. ये सभी गतिविधियां पुण्यकाल के समय ही की जानी जरूरी होती हैं.’ कब मनाएं मकर संक्रांति? द्रिक पंचांग के मुताबिक, ‘यदि मकर संक्रांति सूर्यास्त के बात होती है, तो ऐसी स्थिति में पुण्यकाल की सभी गतिविधियां अगले दिन सूर्योदय काल तक स्थगित कर दी जाती हैं, ऐसे में पुण्य काल की सभी गतिविधियां दिन के समय ही संपन्न करनी चाहिए.’ अगर, द्रिक पंचांग की मानें तो मकर संक्रांति मनाने का सही दिन 14 जनवरी है. 15 जनवरी को मनाई जाएगी मकर संक्रांति मकर संक्रांति को लेकर प्रयागराज के ज्योतिषाचार्य पंडित दिवाकर त्रिपाठी ने TV9 डिजिटल से बात करते हुए कहा कि कोई भी ग्रह एक राशि से दूसरी राशि में कूदकर नहीं जाता है. वह संचरण करते हुए जाता है. सूर्य एक दिन में एक डिग्री प्रवेश करता है और उसे दूसरे ग्रह में जाने के लिए 30 दिन लग जाते हैं इसलिए संक्रांति की काल 12 से 16 घंटे माना गया है. हमें मकर की संक्रांति चाहिए न कि धनु की. संक्रांति धनु में भी रहेगी तो भी पुण्यकाल रहेगा क्योंकि इसे 12 घंटे पहले और 16 घंटे बाद तक माना जाता है. उन्होंने कहा कि हमें सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे उस समय मकर की संक्रांति चाहिए. काशी के पंचांगों के मुताबिक, रात में सूर्य 9 बजकर 19 पर मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं. नारद पुराण के 123वें पेज में कहा गया है कि मकर की संक्रांति होने पर 30 घटी पहले और 40 घटी बाद तक पुण्यकाल होता है. इसी तरह धर्म सिंधु में जिक्र किया गया है. ये पुण्यकाल 15 जनवरी के मध्यान तक पड़ेगा इसलिए मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाएगी. मकर संक्रांति पर क्या करें दान? मकर संक्रांति पर दान देना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है. इस दिन कन्याओं और गरीबों को दान दिया जाता है. श्रद्धालु तिल-गुड़, खिचड़ी, गर्म कपड़े, कंबल, अनाज घी और शहद दान देते हैं. दरअसल, तिल का दान करने से पाप का विनाश होता है और गुड़ दान करने से सूर्य भगवान खुश होते हैं. खिचड़ी दान करने से शनि और चंद्रमा के पड़ने वाले अशुभ प्रभाव कम हो जाते हैं. वहीं, गर्म कपड़े दान करने से गरीबों का आशीर्वाद मिलता हैं और काले व नीले कंबल दान करने से शनि देव की कृपा बरसती है. इसके अलावा अनाज और घी-शहद भी जीवन में मधुरता लाते हैं.

करोड़पति बनने का वास्तु मंत्र, बस ये एक बदलाव जरूरी

वास्तु शास्त्र केवल दिशाओं का ज्ञान नहीं है, बल्कि यह हमारे आसपास की ऊर्जा को संतुलित करने का एक प्राचीन विज्ञान है। कई बार हम कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन सफलता और पैसा हमारे हाथ नहीं लगता। वास्तु के अनुसार, इसका कारण घर में मौजूद ऊर्जा का अवरोध हो सकता है। आज हम बात करेंगे वास्तु के उस सबसे बड़े सीक्रेट की, जिसे अपनाकर आप अपने जीवन में धन के प्रवाह को बढ़ा सकते हैं। वास्तु का सबसे बड़ा सीक्रेट वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को धन के देवता कुबेर की दिशा माना गया है। इस दिशा का सीधा संबंध आपके करियर, नए अवसरों और पैसे की आवक से होता है। यदि आपके घर की उत्तर दिशा दोषपूर्ण है, तो पैसा आएगा तो सही लेकिन टिकेगा नहीं। वह एक बदलाव जो बदल सकता है आपकी किस्मत अगर आप करोड़पति बनने का सपना देखते हैं, तो अपने घर की उत्तर दिशा में नीले रंग के पानी का फव्वारा या बहते हुए पानी की तस्वीर लगाएं। यह एक छोटा सा बदलाव धन की ऊर्जा को चुंबक की तरह खींचता है। मुख्य द्वार घर का मुख्य द्वार वह स्थान है जहां से लक्ष्मी का आगमन होता है। मुख्य द्वार हमेशा साफ-सुथरा और चमकदार होना चाहिए। द्वार पर चांदी का स्वास्तिक लगाएं या दहलीज पर तांबे के सिक्के दबाएं। इससे नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पाती। तिजोरी की सही दिशा आप अपना पैसा और गहने जहां रखते हैं, वह स्थान आपकी आर्थिक स्थिति तय करता है। अपनी तिजोरी या अलमारी को हमेशा घर के दक्षिण-पश्चिम  कोने में रखें लेकिन इसका मुंह उत्तर की ओर खुलना चाहिए। उत्तर की ओर खुलती हुई तिजोरी कुबेर के खजाने का स्वागत करती है। रसोई घर और अग्नि का संतुलन रसोई घर में अग्नि का वास होता है, जो समृद्धि का प्रतीक है। यदि आपकी रसोई दक्षिण-पूर्व में नहीं है, तो वहां एक लाल रंग का बल्ब जलाएं। कभी भी रसोई में जूठे बर्तन रात भर न छोड़ें क्योंकि यह लक्ष्मी को रुष्ट करता है। कबाड़ और मकड़ी के जाले वास्तु में राहु का वास गंदगी और कबाड़ में माना गया है। घर की उत्तर-पूर्व दिशा, जिसे ईशान कोण कहते हैं, उसे हमेशा खाली और साफ रखें। यहाँ भारी सामान या कूड़ा रखने से बुद्धि भ्रष्ट होती है और धन का नुकसान होता है। मनी प्लांट और धातु का कछुआ  इसे हमेशा घर के अंदर दक्षिण-पूर्व दिशा में लगाएं। ध्यान रहे कि इसकी बेलें जमीन को न छुएं, उन्हें ऊपर की ओर सहारा दें। उत्तर दिशा में एक पीतल के बर्तन में पानी भरकर उसमें पीतल का कछुआ रखें। यह स्थिरता और निरंतर धन लाभ का प्रतीक है।

मकर संक्रांति और खिचड़ी का गहरा संबंध: परंपरा, आस्था और ज्योतिष का रहस्य

हर साल माघ माह में सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने पर मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. इस साल 14 जनवरी को सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे. ऐसे में इस साल ये पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा. पूरे देश में इस त्योहार को अलग-अलग नामों से मनाया जाता है. इस दिन सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान-दान भी किया जाता है. इस त्योहार को खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है. उत्तर भारत के कई राज्यों में इस दिन खचड़ी बनाई और खाई जाती है. साथ ही इसका दान भी किया जाता है. ये एक पुरानी परंपरा है. यही कारण है कि मकर संक्रांति का नाम आते ही खिचड़ी याद आ जाती है, लेकिन इस परंपरा के पीछे सिर्फ स्वाद भर नहीं है, बल्कि गहरी आस्था और सामाजिक भावना है. इसका ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व भी है. आइए जानते हैं. ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मकर संक्रांति के पर्व पर सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव की मकर राशि में प्रवेश करते हैं. इसे एक शुभ परिवर्तन माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन जो भी दान किया जाता है, उससे शुभ फल प्राप्त होते हैं. खिचड़ी में पड़ने वाला चावल, दाल और घी सात्विक आहार है. ये सूर्य को अर्पित करने के लिए उपयुक्त माना जाता है. इस दिन खिचड़ी का दान करने से ग्रह दोष शांत होते हैं. जीवन में स्थिरता आती है. यही वजह है कि इस दिन स्नान के बाद खिचड़ी का दान कर उसे प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है. ये भी है एक धार्मिक मान्यता धार्मिक कथाओं में मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने की परंपरा बाबा गोरखनाथ से जोड़ी जाती है. बताया जाता है कि एक समय कठिन हालातों और आक्रमणों की वजह से योगी और साधु नियमित रूप से भोजन नहीं बना पाते थे. ऐसे में बाबा गोरखनाथ ने सभी को सलाह दी कि दाल, चावल और मौसमी सब्जियों को एक साथ पकाया जाए. यह भोजन कम समय में बन जाता था और लंबे समय तक उर्जा देता था. धीरे धीरे इस साधारण और पौष्टिक भोजन की चर्चा साधु संतों से समाज तक पहुंची. इसी के बाद इसे मकर संक्रांति के पर्व से जोड़ दिया गया. तभी से इस दिन खिचड़ी बनाना और खाना शुभ कहा जाने लगा.

Pongal Date Confusion: 13 या 14 जनवरी, जानें सही तारीख एक क्लिक में

दक्षिण भारत का सबसे बड़ा और उत्साहपूर्ण त्योहार पोंगल दस्तक देने वाला है. सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व मुख्य रूप से प्रकृति और किसानों को समर्पित है. अक्सर लोगों के मन में तारीख को लेकर उलझन रहती है कि पोंगल 13 जनवरी को है या 14 जनवरी को.आइए, जानते हैं पोंगल की सही तिथि और उसके चार दिनों के महत्व के बारे में. कब मनाया जाएगा पोंगल? पंचांग के अनुसार, साल 2026 में पोंगल पर्व 14 जनवरी से 17 जनवरी 2026 तक मनाया जाएगा. इस दौरान सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का क्षण यानी संक्रांति शाम 5 बजकर 43 मिनट पर रहेगा, जिसे बहुत ही शुभ माना जाता है. आमतौर पर उत्तर भारत में जब मकर संक्रांति मनाई जाती है, उसी समय दक्षिण भारत में पोंगल की धूम रहती है. पोंगल का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पोंगल शब्द का अर्थ होता है उबालना या लहराना. पारंपरिक रूप से, नए कटे हुए चावलों को दूध में उबालकर भगवान सूर्य को अर्पित किया जाता है. कृतज्ञता का पर्व: यह त्योहार प्रकृति, सूर्य देव और मवेशियों (गाय-बैल) के प्रति आभार व्यक्त करने का जरिया है, क्योंकि इनकी मदद से ही किसानों को अच्छी फसल प्राप्त होती है. समृद्धि का प्रतीक: माना जाता है कि पोंगल के दिन घर में सुख-शांति और समृद्धि का आगमन होता है. यह तमिल कैलेंडर के थाई महीने की शुरुआत भी है, जिसके बारे में कहावत है, थाई पिरंधाल वज़ी पिरक्कुम यानी थाई महीने की शुरुआत के साथ ही नए रास्ते खुलेंगे. 4 दिन तक चलने वाला उत्सव: क्या-क्या होता है? पोंगल का त्योहार चार दिनों तक चलता है, और हर दिन की अपनी एक विशेष कहानी और परंपरा है. पहला दिन: भोगी पोंगल (14 जनवरी) यह दिन देवराज इंद्र को समर्पित है. इस दिन लोग अपने घरों की सफाई करते हैं और पुराने, बेकार सामान को घर से बाहर निकाल कर जला देते हैं. यह बुराई के अंत और नई शुरुआत का प्रतीक है. दूसरा दिन: सूर्य पोंगल (15 जनवरी) यह पोंगल का सबसे मुख्य दिन है. इस दिन आंगन में नए मिट्टी के बर्तन में नए चावल, दूध और गुड़ डालकर पोंगल बनाया जाता है. जब बर्तन से उबलकर चावल बाहर गिरने लगता है, तो लोग खुशी से पोंगल-ओ-पोंगल का उद्घोष करते हैं. यह भोग सूर्य देव को लगाया जाता है. तीसरा दिन: मट्टू पोंगल (16 जनवरी) यह दिन खेती में काम आने वाले मवेशियों, खासकर बैलों और गायों के लिए होता है. उन्हें नहलाया जाता है, उनके सींगों को रंगा जाता है और उन्हें माला पहनाकर उनकी पूजा की जाती है. तमिलनाडु का प्रसिद्ध खेल जल्लीकट्टू भी इसी दिन आयोजित होता है. चौथा दिन: कानून पोंगल (17 जनवरी) उत्सव के आखिरी दिन परिवार के सभी लोग एक साथ मिलते हैं. महिलाएं अपने भाइयों और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए पूजा करती हैं. लोग एक-दूसरे के घर जाकर मिठाइयां बांटते हैं और खुशियां मनाते हैं.