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खरमास में जहां उत्तर भारत में रुकते हैं शुभ काम, वहीं दक्षिण में क्यों नहीं? जानिए वजह

पंचांग के अनुसार, 16 दिसंबर 2025 से खरमास का आरंभ होता है और यह पूरे एक महीने यानी 14 जनवरी तक चलता है, तब देश के एक हिस्से में मांगलिक और शुभ कार्य थम जाते हैं, तो वहीं दूसरे हिस्से में भक्ति और आध्यात्म का एक पवित्र महीना शुरू हो जाता है. उत्तर भारत और दक्षिण भारत की परंपराएं इस एक महीने की अवधि को लेकर पूरी तरह से विपरीत रुख रखती हैं. आइए विस्तार से जानते हैं कि जब उत्तर भारत में खरमास के कारण शुभ कार्यों पर विराम लग जाता है, तब दक्षिण का रिवाज क्या कहता है और क्यों यह अवधि वहां ‘सबसे पवित्र’ मानी जाती है. उत्तर भारत: खरमास की परंपरा और शुभ कार्यों पर प्रतिबंध खरमास की परंपरा मुख्य रूप से उत्तर भारत के कुछ हिस्सों, जैसे बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रचलित है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब सूर्य देव धनु राशि (धनु संक्रांति) या मीन राशि (मीन संक्रांति) में प्रवेश करते हैं, तो उस पूरे एक महीने की अवधि को ‘खरमास’ या ‘मलमास’ कहा जाता है. ऐसा माना जाता है कि सूर्य का बृहस्पति (धनु और मीन राशि के स्वामी) की राशियों में प्रवेश करने से उनका प्रभाव कम हो जाता है, जिससे ऊर्जा और शुभता में कमी आती है. इस अवधि में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, नई संपत्ति की खरीद या बड़े व्यापार की शुरुआत जैसे मांगलिक और शुभ कार्यों को वर्जित माना जाता है. दक्षिण भारत: मार्गज़ी का पवित्र महीना उत्तर भारत के विपरीत, दक्षिण भारत की परंपरा खरमास को उस रूप में नहीं मानती है और न ही शुभ कार्यों पर उस तरह का कोई प्रतिबंध लगाती है. दक्षिण भारत (विशेषकर तमिलनाडु) में यह अवधि एक अलग नाम और अत्यंत पवित्र महत्व के साथ जानी जाती है. दक्षिण भारत के कैलेंडर में, 16 दिसंबर से शुरू होने वाली इस अवधि को ‘मार्गज़ी’ महीने के रूप में जाना जाता है. मार्गज़ी महीने को दक्षिण भारत में भगवान की आराधना के लिए और मांगलिक कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ समय माना जाता है. क्या दक्षिण भारत में शुभ कार्यों पर रोक होती है? दक्षिण भारत में खरमास के कारण शादी-विवाह या अन्य शुभ कार्यों पर कोई धार्मिक प्रतिबंध नहीं होता है. हालांकि, कुछ समुदाय अपनी परंपरा के अनुसार मुहूर्त देखते हैं, लेकिन इसे अशुभ काल नहीं माना जाता है. इसलिए भारतीय परंपराओं में, एक ही खगोलीय घटना को लेकर दो भिन्न दृष्टिकोण देखने को मिलते हैं, उत्तर भारत में लोग इस अवधि को ‘अशुभ’ मानकर शुभ कार्यों को टाल देते हैं. वहीं, दक्षिण भारत में इसे शुभ और ईश्वर को समर्पित महीना मानकर भक्ति और आध्यात्म में लीन हो जाते हैं.

तनाव की जड़ कहीं घर का क्लटर तो नहीं? जानें सरल वास्तु टिप्स

हमारा घर हमारी ऊर्जा का दर्पण होता है। जब घर में अनचाही वस्तुओं का ढेर लग जाता है, जिसे हम क्लटर या कबाड़ कहते हैं तो वास्तु शास्त्र के अनुसार, यह घर की सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को रोक देता है। इससे मानसिक शांति भंग होती है, तनाव बढ़ता है और आर्थिक प्रगति में बाधाएं आने लगती हैं। तो आइए जानते हैं घर को क्लटर मुक्त करने के लिए कौन से वास्तु उपाय अपनाने चाहिए। प्रवेश द्वार को रखें स्वच्छ और खाली रखें मुख्य द्वार को घर का 'मुख' माना जाता है, जहां से सुख-समृद्धि और अवसर प्रवेश करते हैं। दरवाज़े के ठीक सामने टूटे गमले, पुराने जूते-चप्पल, या बेकार के फर्नीचर का ढेर नहीं रखना चाहिए। उपाय: प्रवेश द्वार के पास से हर तरह का क्लटर हटाएं। सुनिश्चित करें कि दरवाज़ा बिना किसी रुकावट के पूरी तरह खुल सके। दरवाज़े के पास कभी भी टूटी हुई या बंद पड़ी वस्तुएं न रखें। यह अवसर और धन के प्रवेश में सीधे बाधा डालता है। टूटी और ख़राब वस्तुओं को तुरंत बाहर करें घर में ख़राब पड़ी वस्तुएं जीवन में ठहराव और निष्क्रियता को दर्शाती हैं, जो प्रगति में बाधा डालती हैं। बंद घड़ियां, फूटे कांच के बर्तन, खराब इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स या फटे हुए कपड़े घर में नहीं रखने चाहिए। उपाय: अगर कोई वस्तु एक सप्ताह से अधिक समय से टूटी हुई है और उसे ठीक नहीं किया जा सकता, तो उसे तुरंत फेंक दें या दान कर दें। विशेष रूप से बंद पड़ी घड़ियां प्रगति को रोकती हैं। उन्हें या तो चालू करें या हटा दें। बिस्तर के नीचे और कोनों को खाली रखें घर के कोने और सोने का स्थान ऊर्जा को सबसे अधिक अवशोषित करते हैं। बिस्तर के नीचे जूते, बक्से, या पुरानी किताबें और कमरों के कोनों में जमे धूल भरे सामान रखने से बचें। उपाय: बेडरूम में बिस्तर के नीचे कुछ भी स्टोर करने से बचें। यह नींद की गुणवत्ता और रिश्तों को प्रभावित करता है। कोनों में जमा सामान हटाएँ। कोनों में हल्की रोशनी की व्यवस्था करें, क्योंकि अंधेरे कोने नकारात्मक ऊर्जा का घर बन जाते हैं। पुराने कागजात और रद्दी का प्रबंधन कागजों का ढेर मानसिक बोझ और अनसुलझे मामलों को दर्शाता है। डेस्क पर, डाइनिंग टेबल पर या ड्रॉअर में जमा हुए पुराने बिल, मैगजीन, और उपयोग न किए गए दस्तावेज़ के तुरंत घर से हटा दें। उपाय: सप्ताह में एक बार कागजातों की छंटनी करें। जो बिल या दस्तावेज़ अब आवश्यक नहीं हैं, उन्हें तुरंत नष्ट कर दें महत्वपूर्ण कागजातों के लिए व्यवस्थित फाइलिंग सिस्टम बनाएं ताकि वित्तीय और कानूनी क्लटर दूर हो।

अमावस्या की डेट को लेकर भ्रम खत्म! 18 या 19—कब है अमावस्या?

पौष अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. यह तिथि पितरों को समर्पित होती है और इस दिन स्नान, दान और तर्पण करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. हालांकि, हर साल की तरह इस बार भी अमावस्या की सही तारीख को लेकर भक्तों के मन में कुछ भ्रम है. पंचांग की गणना के अनुसार, आइए जानते हैं साल 2025 में पौष अमावस्या किस दिन मनाई जाएगी. पंचांग के अनुसार, पौष माह की अमावस्या तिथि 19 दिसंबर, शुक्रवार के दिन सुबह 04 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगी. वहीं इस तिथि का समापन 20 दिसंबर सुबह 07 बजकर 12 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में साल की आखिरी अमावस्या 19 दिसंबर, शुक्रवार के दिन मनाई जाएगी. ज्योतिष शास्त्र के नियम के अनुसार, अमावस्या का व्रत और स्नान-दान उस दिन किया जाता है जिस दिन सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि मौजूद हो या पूरे दिन व्याप्त हो. इसी आधार पर 19 दिसंबर 2025 को ही मुख्य रूप से पौष अमावस्या का अनुष्ठान करना शुभ रहेगा. पौष अमावस्या का धार्मिक महत्व पितरों को शांति: यह दिन विशेष रूप से पितरों (पूर्वजों) के तर्पण के लिए समर्पित है. इस दिन श्राद्ध कर्म करने, तर्पण देने और ब्राह्मणों को भोजन कराने से पितृ दोष समाप्त होता है और पितरों को शांति मिलती है. सूर्य और चंद्रमा का मिलन: अमावस्या तिथि को सूर्य (देवता) और चंद्रमा (पितर) एक ही राशि में होते हैं. इसलिए इसे देव और पितृ दोनों को प्रसन्न करने का दिन माना जाता है. पाप मुक्ति: मान्यता है कि इस पवित्र तिथि पर गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है. काल सर्प दोष निवारण: जिन जातकों की कुंडली में काल सर्प दोष होता है, वे इस दिन विशेष पूजा और अनुष्ठान करके इस दोष के नकारात्मक प्रभाव को कम कर सकते हैं. पौष अमावस्या की पूजा विधि सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी या कुंड में स्नान करें. यदि यह संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें. स्नान के बाद सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं. हाथ में जल और पुष्प लेकर मन ही मन ‘अमावस्या के निमित्त पितरों को तर्पण और दान का संकल्प लें. दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें. अपने हाथ की अंगुलियों के बीच से जल, तिल और कुश लेकर तीन बार ‘गोत्र’ और ‘नाम’ का उच्चारण करते हुए पितरों को तर्पण करें. शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और 7 बार परिक्रमा करें. पीपल के पेड़ में सभी देवी-देवताओं और पितरों का वास माना जाता है. सामर्थ्य अनुसार किसी गरीब या ब्राह्मण को भोजन कराएं और उन्हें वस्त्र तथा दक्षिणा भेंट करें. पौष अमावस्या पर दान का महत्व पौष अमावस्या पर दान को बहुत ही शुभ माना जाता है. चावल, आटा, दाल, और मौसमी सब्जियां दान करें. काले तिल का दान करना पितरों की शांति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है. गरीबों को ऊनी वस्त्र या कंबल दान करें, क्योंकि यह पौष मास की ठंड का समय होता है. गौशाला में चारा या धन का दान करना भी अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है.

कम सैलरी में भी बनेगा इमरजेंसी फंड! ₹50 हजार से कम कमाने वालों के लिए जरूरी नियम

हर महीने सैलरी मिलते ही कई तरह के खर्च सामने आ जाते हैं और देखते-देखते ज्यादातर पैसा खत्म भी हो जाता है। ऐसे में बहुत से लोग सोचते हैं कि बचत करने के लिए ज्यादा कमाना जरूरी है। लेकिन सच ये है कि ज्यादातर मामलों में बचत आपकी कमाई पर नहीं, आपकी आदतों पर निर्भर करती है। चाहे आपकी सैलरी 30 हजार हो, 40 हजार हो या फिर 50 हजार, थोड़ी प्लानिंग से आप हर महीने एक अच्छा अमाउंट बचा सकते हैं। अगर खर्चों को सही जगह बाँटा जाए तो कम इनकम में भी मजबूत फाइनेंशियल बेस बनाया जा सकता है। बस जरूरत है एक आसान और समझ में आने वाले नियम को अपनाने की, जिससे आपकी बचत धीरे-धीरे बढ़ती जाए और आने वाले समय में आपको एक सिक्योर फ्यूचर मिल सके। चलिए जानते है कुछ आसान से ट्रिक्स जिनकी मदद से कम सैलरी में भी आप हर महीने आसानी से एक अच्छा अमाउंट सेव कर पाएंगे। 50-30-20 नियम को करें फॉलो कमाई चाहे जितनी भी हो, अगर उसे सही तरह से मैनेज किया जाए तो बचत करना मुश्किल नहीं रहता। इसी के लिए 50-30-20 का नियम बहुत मदद करता है। इस नियम के अनुसार अपनी सैलरी का 50% हिस्सा आपकी बेसिक जरूरतों पर, जैसे- किराया, खाना, बिजली-पानी, दवाइयाँ और रोजमर्रा के खर्च पर इन्वेस्ट करें। इसके बाद 30% हिस्सा आपकी इच्छाओं या शौक पर खर्च करें, जिसमें बाहर खाना, कपड़े, घूमना-फिरना जैसी चीजें शामिल होती हैं। बचा हुआ 20% हिस्सा आपकी सेविंग या इन्वेस्टमेंट के लिए होता है। यह छोटा सा बदलाव लंबे समय में बहुत बड़ा अंतर ला सकता है। कमाई चाहे जितनी भी हो, बचत की शुरुआत जरूरी है बहुत बार लोग सोचते हैं कि सैलरी बढ़ने के बाद बचत शुरू करेंगे, लेकिन असली फर्क तभी दिखाई देगा, जब आप शुरुआत से ही सेविंग को लेकर अलर्ट रहेंगे। अगर आपको अपनी सैलरी में से 20% बचाना मुश्किल लग रहा है, तो आप सीधे 10,000 रुपये की फिक्स बचत से शुरुआत कर सकते हैं। हर महीने 10,000 रुपये बचाना शुरू कर दें और इसे बिना रोके जारी रखें। यह आदत आपकी फाइनेंशियल लाइफ को स्थिर बनाती है और धीरे-धीरे बचत का अमाउंट भी बढ़ता जाता है। अनचाहे खर्च और सब्सक्रिप्शन बंद करना होगा हम में से कई लोग ऐसे सब्सक्रिप्शन और सर्विसेज लेते हैं जिन्हें हम कभी यूज भी नहीं करते। इन्हें बंद करना बचत का सबसे आसान तरीका है। इसके अलावा थोड़े से खर्च कम करना भी जरूरी है, जैसे बेवजह बाहर खाना, जरूरत से ज्यादा शॉपिंग या ब्रांडेड चीजों पर बेवजह खर्च करने से बचें। ये छोटे- छोटे बदलाव आगे चलकर आपको बड़ा फायदा देंगे। छोटी बचत से भी होगा बड़ा फायदा अगर आप हर महीने सिर्फ 10,000 रुपये सेविंग या इन्वेस्टमेंट में लगाते हैं और ये आदत 10 से 12 साल तक लगातार बनाए रखते हैं, तो आपकी कुल बचत अच्छी-खासी हो जाती है। लंबे समय में यह रकम बढ़कर लगभग 20 से 25 लाख तक पहुँच सकती है। यह एक बड़ा अमाउंट है, जो फ्यूचर में आपको मजबूती देगा। चाहे वह बच्चों की पढ़ाई हो, घर लेना हो या किसी इमरजेंसी के लिए पैसे जमा करने हों।  

अगर रसोई में बार-बार गिर रहा है नमक या दूध, तो अनदेखा न करें! जानिए दोष निवारण के आसान उपाय

रसोई, घर का एक जरूरी हिस्सा है, जिसमें देवी अन्नपूर्णा का वास माना जाता है। वास्तु शास्त्र में रसोई से संबंधित कई नियम भी बताए गए हैं। रसोई में खाना बताने समय कुछ चीजों का गिरना आम बात लग सकती है, लेकिन अगर ये चीजें बार-बार गिर रही हैं, तो यह आपके लिए वास्तु दोष का संकेत हो सकता है। बढ़ सकती हैं समस्याएं नमक, हमारे भोजन का एक जरूरी हिस्सा है, जिसके बिना भोजन का स्वाद अधूरा है। अगर किचन में आपसे बार-बार नमक गिर जाता है, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। इसका कारण वास्तु दोष हो सकता है। नमक को शुक्र और चंद्रमा ग्रह से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में बार-बार नमक का गिरना, खासकर हाथ से गिरना आर्थिक तंगी, धन की हानि, नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने का संकेत हो सकता है। उपाय –  इस दोष से बचने के लिए आपको शुक्रवार के दिन सफेद चीजों का दान करना चाहिए। इसके साथ ही इस बात का ध्यान भी ध्यान रखें कि गिरे हुए नमक को पैर से छूने या हटाने से बचें। नमक को साफ करने के बाद नमक के पानी से पोछा लगाना चाहिए। हो सकती हैं ये समस्याएं अगर आपसे बार-बार रसोई में सरसों का तेल गिर जाता है, तो यह भी शुभ नहीं माना जाता। सरसों के तेल को शनि देव से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में इसका बार-बार गिरने का अर्थ है कि आपको कार्यों में बाधाओं, शनि दोष, या धन की हानि का सामना करना पड़ सकता है। उपाय – गिरे हुए तेल पर आटा छिड़कें, थोड़ी देर बाद उस आटे को किसी जानवर को खिला दें। इसके साथ ही दोष से मुक्ति के लिए शनिवार के दिन शनि देव पर तेल चढ़ाएं और एक पात्र में सरसों का तेल का दान करें। बार-बार दूध गिरने का अर्थ कई बार दूध गर्म करने पर वह उबलकर बाहर आ जाता है, जो एक आम बात है, लेकिन अगर आपके साथ यह बार-बार हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज बिल्कुल भी न करें। दूध के बार-बार गिरने का अर्थ माना जाता है कि आपका चंद्रमा कमजोर है। इससे परिवार में सुख-समृद्धि की कमी हो सकती है। साथ ही यह अन्नपूर्णा देवी की नाराजगी का भी संकेत हो सकता है। उपाय – इस दोष से बचने के लिए शिवलिंग पर दूध चढ़ाएं और चंद्र देव को जल अर्पित करें। इसके साथ ही गाय को भोजन कराना भी एक अच्छा उपाय है। इन चीजों का गिरना भी है अशुभ अगर रसोई में काम करते समय आपसे बार-बार चावल गिर जाते हैं, तो यह माना जाता है कि इससे घर में झगड़े और तनाव आदि बढ़ सकता है। वहीं अगर पका हुआ खाना बार-बार गिरना है, तो इसे मां अन्नपूर्णा के अपमान के रूप में देखा जाता है। उपाय – गिरे हुए सामान को तुरंत साफ करना चाहिए और उस स्थान को नमक-नींबू के पानी से पोंछें। साथ ही इस दोष से बचने के लिए आपको किसी मंदिर में जाकर गरीबों को भोजन करवाना चाहिए और प्रसाद बंटवाना चाहिए।  

20 दिसंबर को गुरु-शुक्र की युति से समसप्तक राजयोग, इन राशियों का भाग्य होगा उज्जवल

पंचांग के अनुसार, 20 दिसंबर को सुख-समृद्धि के दाता शुक्र धनु राशि में प्रवेश करने वाले हैं. जिसके कारण शुक्र और गुरु एक दूसरे के सातवें घर में आ जाएंगे. ज्योतिषियों के अनुसार, इस समय अतिचारी देवगुरु बृहस्पति मिथुन राशि में बैठे हुए हैं और इसी स्थिति में गुरु-शुक्र मिथुन राशि के सातवें घर में बैठकर समसप्तक राजयोग का निर्माण कर रहे हैं. यह राजयोग पूरे 100 साल बाद बन रहा है. 20 दिसंबर को इस योग के बनने से कई राशियों का अच्छा टाइम शुरू होने वाला है. लकी राशियों को आर्थिक परेशानियों से छुटकारा, मानसिक तनाव से मुक्ति और करियर में तरक्की प्राप्त हो सकती है. आइए जानते हैं उन राशियों के बारे में. मेष गुरु और शुक्र दोनों की स्थिति मेष राशि वालों के लिए बहुत ज्यादा प्रभावशाली माना जाता है. समसप्तक योग बनने से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है. नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या सैलरी बढ़ने के संकेत हैं. पारिवारिक जीवन में भी सुख-शांति बनी रहेगी. ऑफिस में आप हर कार्य में आगे रहेंगे और कोई आपका बुराई नहीं करेगा.  सिंह समसप्तक योग सिंह राशि वालों के भाग्य चमकाने के संकेत दे रहा है. करियर में नए मौके मिल सकते हैं. व्यापार से जुड़े लोगों को अच्छा लाभ हो सकता है. गुरु की दृष्टि से आत्मविश्वास बढ़ेगा, वहीं शुक्र के प्रभाव से रिश्तों में मधुरता आएगी. क्योंकि दोनों ग्रह धन-दौलत प्रदान करते हैं इसलिए सिंह राशि वालों की आर्थिक स्थिति भी अच्छी रहेगी.  तुला तुला राशि के स्वामी शुक्र हैं, इसलिए यह योग इनके लिए खास फलदायी रहेगा. विवाह और प्रेम जीवन से जुड़ी समस्याएं दूर होंगी. निवेश या किसी नए प्रोजेक्ट की शुरुआत के लिए समय अनुकूल रहेगा. समाज में मान-सम्मान भी बढ़ेगा. देवगुरु बृहस्पति की कृपा से जीवन में मान-सम्मान की प्राप्ति होगी. वृश्चिक वृश्चिक राशि वालों पर गुरु-शुक्र का विशेष प्रभाव रहेगा. जनवरी 2026 तक इस योग से आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ आर्थिक लाभ के योग बनेंगे. नौकरी बदलने या नई जिम्मेदारी मिलने के संकेत हैं. लंबे समय से चल रही उलझनें भी धीरे-धीरे सुलझेंगी.  मीन देवगुरु बृहस्पति और शुक्र के समसप्तक योग से मीन राशि वालों का गोल्डन टाइम शुरू होगा. पेशेवर मामलों में फंसी हुई स्थिति से आपको राहत की सांस लेने को मिलेगी. हर इच्छा पूरी होगी. लोग आपके व्यक्तित्व से बहुत ज्यादा प्रभावित होंगे. पैसा कमाने आपको नए सोर्स प्राप्त होंगे. निजी जीवन भी अच्छा बीतेगा.

2025 में 24 की जगह 26 एकादशी व्रत, देखिए क्यों बढ़ी व्रतों की संख्या

हिंदू पंचांग में एकादशी तिथि भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित मानी जाती है। हर महीने कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की एकादशी पर व्रत रखकर विष्णु भगवान की पूजा की जाती है। सामान्यतः एक साल में 24 एकादशी व्रत पड़ते हैं, लेकिन साल 2026 में कुल 26 एकादशी आएंगी। इसका प्रमुख कारण है अधिकमास (Purushottam Maas) का लगना। साल 2026 में 2 अतिरिक्त एकादशी क्यों? हिंदू कैलेंडर में लगभग हर 32 महीने 16 दिनों में सूर्य और चंद्र वर्ष में अंतर बढ़ने के कारण एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है। इसे पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। साल 2026 में अधिकमास 17 मई से 15 जून 2026 तक रहेगा। इस अवधि में अन्य महीनों की तरह सभी व्रत रखे जाते हैं, जिसमें एकादशी भी शामिल है। इसी कारण इस वर्ष दो अतिरिक्त एकादशी पड़ेंगी पद्मिनी एकादशी 27 मई 2026 और परम एकादशी 11 जून 2026। इसी वजह से साल 2026 में एकादशी की कुल संख्या 26 हो जाती है।  साल 2026 की सभी 26 एकादशी तिथियां क्रम संख्या एकादशी का नाम तिथि 1 षटतिला एकादशी 14 जनवरी 2026 2 जया एकादशी 29 जनवरी 2026 3 विजया एकादशी 13 फरवरी 2026 4 आमलकी एकादशी 27 फरवरी 2026 5 पापमोचिनी एकादशी 15 मार्च 2026 6 कामदा एकादशी 29 मार्च 2026 7 वरुथिनी एकादशी 13 अप्रैल 2026 8 मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल 2026 9 अपरा एकादशी 13 मई 2026 10 पद्मिनी एकादशी (अधिकमास) 27 मई 2026 11 परम एकादशी (अधिकमास) 11 जून 2026 12 निर्जला एकादशी 25 जून 2026 13 योगिनी एकादशी 10 जुलाई 2026 14 देवशयनी एकादशी 25 जुलाई 2026 15 कामिका एकादशी 9 अगस्त 2026 16 श्रावण पुत्रदा एकादशी 23 अगस्त 2026 17 अजा एकादशी 7 सितंबर 2026 18 परिवर्तिनी एकादशी 22 सितंबर 2026 19 इन्दिरा एकादशी 6 अक्टूबर 2026 20 पापांकुशा एकादशी 22 अक्टूबर 2026 21 रमा एकादशी 5 नवंबर 2026 22 देवुत्थान एकादशी 20 नवंबर 2026 23 उत्पन्ना एकादशी 4 दिसंबर 2026 24 मोक्षदा एकादशी 20 दिसंबर 2026 एकादशी व्रत का धार्मिक महत्व एकादशी व्रत को पापों का नाश करने वाला माना गया है। व्रत रखने से मन शुद्ध होता है और विष्णु भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है। धर्मशास्त्रों में इसे सर्वश्रेष्ठ वैष्णव व्रत कहा गया है। पूर्ण श्रद्धा के साथ व्रत करने से समृद्धि, सौभाग्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

नए साल 2026 का आगाज चतुर्ग्रही योग से, इन 3 राशियों का होगा शुभ समय

 नए साल 2026 की शुरुआत एक बड़े ही दुर्लभ संयोग में होने जा रही है. ज्योतिष गणना के अनुसार, साल की पहली तारीख पर ही चतुर्ग्रही योग का निर्माण हो रहा है. यह चतुर्ग्रही योग सूर्य, मंगल, बुध और शुक्र एक साथ मिलकर बनाने वाले हैं. दरअसल, 16 दिसंबर 2025 को सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेंगे. इसके बाद 20 दिसंबर को शुक्र और 29 दिसंबर को बुध भी इसी राशि में आ जाएंगे. जबकि मंगल पहले से ही इस राशि में बैठे हुए हैं. इस तरह नए साल पर धनु राशि में चतुर्ग्रही योग बनने वाला है. इतना ही नहीं, धनु राशि में बुध-सूर्य बुधादित्य योग बनाएंगे. सूर्य-मंगल मंगलादित्य योग बनाएंगे. शुक्र-सूर्य शुक्रादित्य योग का निर्माण करेंगे. ज्योतिषविदों का कहना है कि यह दुर्लभ संयोग तीन राशि के जातकों को बड़ा लाभ दे सकता है. वृषभ राशि वृषभ राशि के जातकों के लिए अचानक आर्थिक लाभ के संकेत हैं. आपके लिए तरक्की के नए रास्ते खुल सकते हैं. नौकरी और व्यापार दोनों में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा. मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. कपल्स के बीच प्यार-प्रेम और तालमेल बढ़ेगा. निवेश और बड़े निर्णय लेने के लिए समय अनुकूल है. लंबे समय से अटके हुए काम तेजी से पूरे होंगे. साझेदारी से लाभ मिलने की संभावना रहेगी. संयम और धैर्य से किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना अधिक रहेगी. तुला राशि नए साल की शुरुआत में आत्मबल और सामाजिक छवि मजबूत होगी. करियर और व्यवसाय में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे. आय में बढ़ोतरी के संकेत हैं. पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा और समाज में आपका प्रभाव बढ़ेगा. रचनात्मक सोच और नेतृत्व क्षमता में निखार आएगा. कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जो आगे चलकर लाभदायक सिद्ध होंगी. मित्रों और सहकर्मियों का सहयोग प्राप्त होगा.   धनु राशि आर्थिक स्थिति में सुधार होगा. लंबे समय से चल रही पैसों की तंगी दूर होने वाली है. शिक्षा, नौकरी और व्यापार में उन्नति के अवसर मिल सकते हैं. प्रेम और दांपत्य जीवन में सामंजस्य बना रहेगा. घर का माहौल प्रसन्नतापूर्ण रहेगा. लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने और नई योजनाओं पर काम शुरू करने के लिए समय अनुकूल है. निवेश से लाभ मिलने की संभावना है. कार्यों में सफलता के संकेत प्रबल हैं. स्वास्थ्य में सुधार रहेगा और दुर्घटनाओं से बचाव बना रहेगा.

राशिफल 16 दिसंबर: मेष से मीन तक सभी राशियों का भविष्यफल, किसकी किस्मत होगी चमकदार

मेष 16 दिसंबर के दिन आपको आय के अन्य स्रोतों के बारे में भी सोचना चाहिए। आपका प्रेम जीवन समृद्ध रहेगा। आपकी प्रतिभा आपके काम आएगी। जल्द ही आपको कोई दिलचस्प प्रोजेक्ट मिल सकता है। अपनी फिटनेस पर फोकस रखें। वृषभ 16 दिसंबर के दिन आपकी वित्तीय स्थिति में सुधार होगा। भविष्य के बारे में सोचना आपके लिए फायदेमंद होगा। आप जो कुछ भी चाहते हैं उसे प्राप्त करना हमेशा संभव नहीं होता है। आपको इस समय बहुत त्याग करने की आवश्यकता है ताकि आप आगे एक अच्छा जीवन जी सकें। मिथुन 16 दिसंबर के दिन कुछ बड़ा हासिल करने के लिए आपको अपने निजी समय का त्याग करना होगा। इसका मतलब यह नहीं है कि आपके पास अपना समय नहीं होगा। आपका परिवार यह सुनिश्चित करेगा कि आप नियमित रूप से अपनी चिंताओं को साझा करके शक्ति और संतुष्टि प्राप्त करें। कर्क 16 दिसंबर के दिन आपको मानसिक शांति पाने और एक-दूसरे पर और भी अधिक भरोसा करने में मदद मिलेगी। आपके परिवार को इस संबंध में सहयोगी होना चाहिए ताकि यह एक टीम वर्क बन जाए। काम पर फोकस करें। सिंह 16 दिसंबर के दिन आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा लेकिन आप बहुत ज्यादा पैसे नहीं बचा पाएंगे। आप एक साथ गहरा कनेक्शन स्थापित करें। नियमित रूप से हल्की-फुल्की बातचीत करना जरूरी है। कन्या 16 दिसंबर के दिन अपने पार्टनर के साथ उन मुद्दों पर बात करें, जो आपके रिश्ते में समस्याएं पैदा कर रहे हैं। आप किसी रिस्की इनवेस्टमेंट की ओर बढ़ सकते हैं, जो आपकी वित्तीय स्थिति को बर्बाद कर सकता है। तुला 16 दिसंबर के दिन अगर आप शादी के बारे में सोच रहे हैं तो आपको आर्थिक और इमोशनल तौर पर सोच-विचार करने की जरूरत है। आपके लिए अपने रिश्ते को अगले लेवल पर ले जाने का अच्छा समय है। अपने साथी के साथ क्वालिटी टाइम स्पेन्ड करें। वृश्चिक 16 दिसंबर का दिन आपके लिए बेहतरीन साबित हो सकता है। बचत करने की कोशिश करें क्योंकि यह आपके वर्तमान कमाई के स्तर को बनाए रखने में मदद करेगा। अपने पार्टनर को बेहतर तरीके से जानने के लिए साथ में कुछ अच्छा समय बिताना अच्छा होगा। धनु 16 दिसंबर के दिन अपने करियर और निजी जीवन को एक साथ संतुलित करने का प्रयास करें। आपको अपने रिश्ते में रोमांस बनाए रखने की जरूरत है ताकि आप दोनों इसे अगले लेवल पर ले जा सकें। आगे की एक नई यात्रा के लिए तैयार हो जाइए। मकर 16 दिसंबर के दिन आपका साथी यह ध्यान रखेगा कि आप जीवन में खुश और संतुष्ट रहें। आपके सभी काम पूरे होंगे। आपका निजी और व्यावसायिक जीवन संतुलित रहेगा और आपको कुछ नया करने का मौका भी मिलेगा। कुंभ 16 दिसंबर के दिन आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी लेकिन बचत जरूर करें। अगर आप अपने रिश्ते को लेकर बहुत गंभीर हैं तो शादी के बारे में सोचने का यह समय शुभ है। अगर आप इन्कम को फालतू खर्चों में बर्बाद करेंगे तो आप इमर्जेंसी परिस्थितियों का सामना नहीं कर पाएंगे। मीन 16 दिसंबर के दिन आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी रहेगी। निवेश के अवसरों के लिए यह अच्छा है। स्टॉक एक्स्पर्ट्स के साथ बात-चीत करते समय आपको सतर्क रहने की जरूरत है।

खरमास 2025: सूर्य के धनु राशि में प्रवेश से शुरू होगा खरमास, अगले 30 दिन इन 6 गलतियों से बचें

इस बार खरमास की शुरुआत 16 दिसंबर यानी कल से होने जा रही है. खरमास को मलमास और धनु संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही खरमास की शुरुआत हो जाती है. खरमास की इस 30 दिन की अवधि में सभी मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं. मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान कोई शुभ कार्य करना बहुत अशुभ होता है, ऐसा करने से व्यक्ति समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. खरमास वो समय होता है जब सूर्य देव की गति कम प्रभावशाली होती है. तो आइए जानते हैं कि 15 जनवरी 2026 तक कौन से कार्य करने की मनाही है.  – खरमास के दौरान शादी-विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन, अन्नप्राशन और वास्तु पूजा जैसे सभी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं. इस समय कुल 16 संस्कार करना वर्जित माना गया है.  – इसके अलावा, खरमास की 30 दिन की अवधि में तुलसी के पत्ते तोड़ना बहुत ही अशुभ माना जाता है क्योंकि खरमास में श्रीहरि की पूजा भी होती है. और तुलसी भगवान विष्णु को बहुत ही प्रिय मानी जाती है.  – खरमास के दौरान सिर्फ सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए. इस समय लहसुन, प्याज, मांस-मछली और अंडे जैसे तामसिक भोजन से दूरी बनाकर रखनी चाहिए वरना सूर्यदेव नाराज हो जाते हैं.  – खरमास में घर बनवाना या जमीन-मकान खरीदना और बेचना भी शुभ नहीं माना जाता है. कहते हैं कि इस दौरान किए गए ऐसे कामों में रुकावटें और परेशानियां आ सकती हैं.  – खरमास के दौरान नया बिजनेस शुरू करना भी ठीक नहीं माना जाता है, क्योंकि इससे पैसों से जुड़ी दिक्कतें आ सकती हैं. इसलिए, इस समय नई नौकरी जॉइन करने या बड़ा निवेश करने से भी बचना चाहिए. – खरमास में नए घर में प्रवेश करना भी अशुभ माना जाता है. दरअसल, ऐसा करने से घर की सुख-समृद्धि प्रभावित हो सकती है.