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तुलसी और शालिग्राम का रहस्य: कैसे श्राप बना भक्तिभाव का प्रतीक?

हिंदू धर्मग्रंथों में तुलसी और भगवान विष्णु की कथा को अत्यंत पवित्र और भावनात्मक माना गया है. यह कथा भक्ति, निष्ठा और प्रेम की पराकाष्ठा को दर्शाती है. तुलसी विवाह का पर्व इसी दिव्य मिलन का प्रतीक है, जब माता तुलसी (लक्ष्मी स्वरूपा) और भगवान विष्णु (शालिग्राम रूप) का पुनर्मिलन होता है. यह कथा यह भी बताती है कि ईश्वर अपने भक्त के प्रेम से इतने बंधे होते हैं कि श्राप को भी आशीर्वाद बना देते हैं. तुलसी और विष्णु का यह संबंध सिखाता है कि सच्ची भक्ति और पवित्र प्रेम सभी विपरीत परिस्थितियों को मंगलमय बना देते हैं. पुराणों के अनुसार, तुलसी का पूर्व जन्म वृंदा नामक एक पवित्र स्त्री के रूप में हुआ था. वह दैत्यराज जलंधर की पत्नी थीं, जो भगवान विष्णु के वरदान के कारण एक अपराजित दैत्य था. जलंधर की भक्ति और पत्नी की पतिव्रता शक्ति के कारण देवता उसे पराजित नहीं कर पा रहे थे. जब देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता मांगी, तो भगवान विष्णु ने जलंधर का रूप धारण कर वृंदा के सामने प्रकट हुए. वृंदा को जब यह ज्ञात हुआ कि उनके साथ छल हुआ है, तो उन्होंने क्रोध में भगवान विष्णु को पत्थर बनने का श्राप दिया. इस श्राप के फलस्वरूप भगवान विष्णु शालिग्राम पत्थर के रूप में सामने आए. वृंदा के श्राप से भगवान विष्णु पत्थर रूप में तो परिवर्तित हुए, किंतु उन्होंने वृंदा की भक्ति और पतिव्रता को प्रणाम करते हुए उन्हें वर दिया कि तुम धरती पर तुलसी के रूप में जन्म लोगी और मेरा शालिग्राम रूप सदा तुम्हारे साथ पूजा जाएगा. वृंदा के शरीर से ही गंडकी नदी का उद्भव हुआ जो कि नेपाल में स्थित है. जहां से आज भी शालिग्राम पत्थर प्राप्त होता हैं. इसलिए आज भी तुलसी-दल से शालिग्राम भगवान की पूजा की जाती है. किसका अवतार माना जाता है तुलसी का पौधा? धर्मग्रंथों में तुलसी को माता लक्ष्मी का अवतार माना गया है. लक्ष्मी जी जिस प्रकार सौभाग्य, समृद्धि और शुद्धता की देवी हैं, उसी प्रकार तुलसी भी सात्त्विकता और पवित्रता का प्रतीक हैं. भगवान विष्णु के प्रति तुलसी की अखंड भक्ति के कारण उन्हें लक्ष्मी स्वरूपा कहा गया. कहा जाता है कि जिस घर में तुलसी का पौधा होता है, वहां स्वयं लक्ष्मी जी का वास होता है. तुलसी-दल के बिना विष्णु या श्रीकृष्ण की पूजा अधूरी मानी जाती है क्योंकि यह ईश्वर के प्रति निष्ठा और प्रेम का प्रतीक है. तुलसी का पूजन न केवल धार्मिक दृष्टि से शुभ है, बल्कि यह घर में शांति, सौभाग्य और दिव्य ऊर्जा के प्रवाह को भी स्थिर करता है.

31 अक्टूबर 2025 का राशिफल: मकर राशि को मिलेगा सौभाग्य, देखें अन्य राशियों का भविष्यफल

मेष राशि- आज के दिन घूमने-फिरने का प्लान बन सकता है। अपने पार्टनर को अधिक समय दें। आप इसे अगले लेवल तक ले जाने पर भी विचार कर सकते हैं। ऑफिस में अनुशासित रहें। धन-संपत्ति का मामला पॉजिटिव है। वृषभ राशि- आज अपनी एक्सपर्टीज बढ़ाने और कुछ नई स्किल्स सीखने में निवेश करने के लिए यह अच्छा दिन होगा। नौकरीपेशा लोगों को तरक्की और लाभ देखने को मिल सकता है। व्यवसायियों को अपने खर्चों के प्रति सावधानी बरतनी चाहिए। मिथुन राशि- आज के दिन सुझावों के प्रति खुले रहें, भले ही वे आपके जूनियर्स से ही क्यों न आए हों। कारोबार फलेगा-फूलेगा, इसलिए अच्छे प्रॉफिट की उम्मीद कर सकते हैं। धन और वित्त के मामले में समय अच्छा रहेगा। कर्क राशि- आज के दिन नया कार्यभार मिलने की बड़ी संभावना है। आपको आज सीनियर्स के साथ सावधानी बरतने की जरूरत है, हो सकता है आप पॉलिटिक्स का शिकार हो जाएं। अहंकारी न होने का प्रयास करें। सिंह राशि- आज के दिन आपको खासतौर पर अपने स्वास्थ्य की देखभाल करनी चाहिए। ऑयली फूड से दूरी बनाएं और मेंटल हेल्थ पर ध्यान दें। आज का दिन संतोषजनक रहेगा। आपकी कड़ी मेहनत आपको प्रमोशन दिला सकती है। कन्या राशि- आज के दिन आपके दिन की शुरुआत अच्छी होगी लेकिन अंत मध्यम रहेगा। पार्टनरशिप में बिजनेस करने वालों में मतभेद हो सकता है, जिससे दरार पड़ सकती है। दोपहर में आपको कुछ राहत मिलने की संभावना है। तुला राशि- आज का दिन आपके लिए भाग्यशाली साबित हो सकता है। यह एक सपने के सच होने जैसा दिन होगा। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी और व्यवसायी अपने काम का विस्तार करेंगे और अच्छा मुनाफा हासिल करेंगे। वृश्चिक राशि- आज के दिन कुछ अप्रत्याशित घटनाएं आपके काम करने की स्पीड को धीमा कर सकती हैं। आप मनमुताबिक परिणाम प्राप्त नहीं कर सकेंगे। आर्थिक स्थिति उम्मीद के मुताबिक रहेगी लेकिन कुछ अप्रत्याशित खर्चे चीजें बिगाड़ सकते हैं। धनु राशि- आज के दिन खुद को और स्किन को हेल्दी रखने के लिए आपको डाइट में हरी सब्जियां शामिल करनी चाहिए। फिटनेस पर ध्यान दें और तनाव से दूर रहें। आपके काम की तारीफ होगी। मकर राशि- आज के दिन करियर और फाइनेंशियल लाइफ नॉर्मल रहेगी। बिजनेस में आर्थिक कमजोरी का अनुभव हो सकता है और कुछ नुकसान होने की भी आशंका है। आज आपको पॉजिटिव एटीट्यूड मेन्टेन करना चाहिए। कुंभ राशि- आज के दिन आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बहुत ज्यादा प्रयास करने पड़ सकते हैं। तनाव से बचने के लिए सेल्फ केयर पर फोकस करें। परिवार के किसी सदस्य से कोई गुड न्यूज मिल सकती है। मीन राशि- आज के दिन करियर में कुछ उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा। हाइड्रेटेड रहें और सेल्फ-केयर पर फोकस करें। आपके खर्चे बढ़ सकते हैं। आपको अपनी फाइनेंशियल कंडीशन के प्रति सावधान रहने की जरूरत है।

वास्तु टिप्स: इस दिशा में लगाएं केले का पेड़, दूर होंगे कष्ट और बढ़ेगी सुख-समृद्धि

हिंदू धर्म में केले के पेड़ की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। कहते हैं गुरुवार के दिन जो भी इंसान केले के पेड़ की पूजा करता है उसके घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। ये ही नहीं ज्योतिषाचार्य भी उपाय के तौर पर केले के पेड़ की पूजा करने की सलाह देते हैं। लेकिन कई लोगों के मन में उलझन होती है कि केले का पेड़ घर में लगाना चाहिए या नहीं। वैसे तो केले का पेड़ घर लगाने को मना किया जाता है लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर हम कुछ नियमों का पालन करें, तो इससे शुभ फल भी मिलते हैं। तो आइए जानते हैं कि केले का पेड़ घर में लगाते समय किन नियमों का पालन करना चाहिए और इसके फायदे के बारे में- वास्तु शास्त्र के अनुसार, उत्तर दिशा में देवी-देवताओं का वास माना गया है। इसलिए अगर आप केले के पेड़ को घर में लगाने की योजना बना रहे हैं तो इसके लिए उत्तर दिशा सबसे उत्तम मानी जाती है। इसके अलावा, वास्तु शास्त्र में पश्चिम दिशा में भी केले का पेड़ लगाना सही नहीं माना गया है। इससे आपको धन हानि होने की संभावना बढ़ जाती है। केले के पेड़ को कभी भी पूर्व या दक्षिण दिशा के आग्नेय कोण में भी नहीं लगाना चाहिए। साथ ही घर के मुख्य द्वार के सामने नहीं लगाना चाहिए क्योंकि इससे घर में आने वाली सकारात्मक ऊर्जा अवरुद्ध हो सकती है। वास्तु के अनुसार केले के पेड़ के आसपास कोई कांटेदार पौधे जैसे गुलाब आदि नहीं लगाना चाहिए। इससे घर में लड़ाई-झगड़े की स्थिति उत्पन्न होती है। केले के पेड़ को कभी सूखने न दें। इसके अलावा, केले के पेड़ में कभी भी गंदा पानी नहीं डालना चाहिए। केले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास माना गया है और तुलसी को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। इसलिए केले के पेड़ के पास तुलसी का पौधा ज़रूर रखना चाहिए। इससे नारायण और माता लक्ष्मी दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही हर गुरुवार को केले के पेड़ पर हल्दी लगाकर पूजा करें और दीपक जलाएं। केले के पेड़ के तने के चारों ओर हमेशा लाल या पीले रंग का धागा बांधना चाहिए। अगर आप घर में केले का पेड़ लगाते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखते हैं यानि कि ज्योतिषीय नियमानुसार लगाते हैं, तो आपके परिवार में सुख, समृद्धि, आरोग्य के साथ खुशियां आती हैं। वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। जिन लोगों के विवाह में बाधा आ रही है, उनकी बाधा दूर होती है। कुंडली में बृहस्पति की स्थिति मजबूत होती है और धन संकट दूर होता है।

देवउठनी एकादशी पर करें ये खास उपाय, किस्मत चमकेगी अगले ही दिन से!

देवउठनी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है क्योंकि यह भगवान विष्णु के जागरण और विवाह, गृहप्रवेश व धार्मिक अनुष्ठानों जैसे शुभ कार्यों की शुरुआत की प्रतीक है, जो चातुर्मास काल के दौरान रुके हुए थे। भक्त इस पवित्र दिन देवउठनी एकादशी की तिथि तिथि प्रारंभ: 1 नवम्बर 2025, रात्रि 11:48 बजे तिथि समाप्त: 2 नवम्बर 2025, रात 9:42 बजे इसलिए व्रत व पूजा 2 नवम्बर 2025 (रविवार) को की जाएगी। देवउठनी एकादशी उपाय देवउठनी एकादशी की रात घर के मुख्य दरवाजे के दोनों तरफ गाय के घी के दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है, सुख-शांति बनी रहती है और परिवार में धन-धान्य की वृद्धि होती है। इस रात पीपल के पेड़ के नीचे एक दीपक अवश्य जलाएं और सात बार उसकी परिक्रमा करें। ऐसा करने से आर्थिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है और धन प्राप्ति के योग बनते हैं। देवउठनी एकादशी की रात रसोईघर में भी एक दीपक जलाना चाहिए, क्योंकि यह माता अन्नपूर्णा का पवित्र स्थान माना जाता है। यहां दीपक जलाने से घर में अन्न का भंडार सदैव भरा रहता है। इस दिन तुलसी पूजा का भी बहुत महत्व है। संध्या समय तुलसी माता के समीप घी के पांच दीपक जलाएं। तुलसी देवी को मां लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है, इसलिए ऐसा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति आती है और लक्ष्मी जी की कृपा भी बनी रहती है। दीपक जलाते समय बोले ये मंत्र दीपज्योति: परब्रह्म: दीपज्योति: जनार्दन:। दीपोहरतिमे पापं संध्यादीपं नामोस्तुते।। शुभं करोतु कल्याणमारोग्यं सुखं सम्पदां। शत्रुवृद्धि विनाशं च दीपज्योति: नमोस्तुति।। दीपक जलाने के नियम दीपक की लौ पूर्व दिशा की ओर रखने से आयु में वृद्धि होती है। दीपक की लौ पश्चिम दिशा की ओर रखने से दुख बढ़ता है। दीपक की लौ उत्तर दिशा की ओर रखने से धन लाभ होता है। दीपक की लौ कभी भी दक्षिण दिशा की ओर न रखें, ऐसा करने से जन या धनहानि होती है।

आंवला नवमी पर पढ़ें मां लक्ष्मी की पौराणिक कथा, दूर होगी दरिद्रता और मिलेगा आशीर्वाद

कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला नवमी भी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु और आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है. शास्त्रों में कहा गया है कि आंवले के नीचे की गई पूजा हजार यज्ञों के समान फल देती है. पौराणिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु आंवले के वृक्ष में निवास करते हैं. जो भक्त श्रद्धापूर्वक इस वृक्ष की पूजा करता है उसे आरोग्य, संतान, सौभाग्य और दीर्घायु का वरदान मिलता है. कहा जाता है कि इस दिन आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन करने से सारे रोग और पाप दूर होते हैं. इस बार आंवला नवमी की पूजा 31 अक्टूबर को की जाएगी. दरअसल, नवमी तिथि की शुरुआत अक्टूबर 30 को 10 बजकर 06 मिनट पर हुई है और इसका समापन 31 अक्तूबर को 10 बजकर 03 मिनट पर होगा. आंवले के पेड़ की पूजा करने का समय 31 अक्टूबर को 06:32 से 10:03 बजे तक है यानी 03 घंटे 31 मिनट्स तक शुभ मुहूर्त है, ऐसे में पूजा करते समय आंवले की कथा जरूर पढ़नी चाहिए. आंवला नवमी को पढ़ें ये कथा एक समय की बात है, माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण के लिए निकलीं. भ्रमण करते हुए उनके मन में विचार आया कि वह एक साथ भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा करें, लेकिन यह समझ नहीं पा रहीं थीं कि दोनों देवताओं की एकसाथ पूजा किस प्रकार संभव है. ध्यान करते हुए लक्ष्मी जी ने पाया कि आंवले का वृक्ष ही ऐसा स्थान है जहां तुलसी की पवित्रता और बेल के पावन गुण दोनों साथ मिलते हैं. उन्होंने निश्चय किया कि वे आंवले के वृक्ष की पूजा करेंगी. माता लक्ष्मी ने शुद्ध मन और विधि-विधान से आंवले के वृक्ष की पूजा की, जल अर्पित किया, दीप जलाया और भगवान विष्णु व शिव का ध्यान किया. पूजा से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु और शिव जी दोनों स्वयं प्रकट हुए और देवी लक्ष्मी को आशीर्वाद दिया कि जो भी श्रद्धा और भक्ति से आंवले के वृक्ष की पूजा करेगा, उसके जीवन में कभी दरिद्रता नहीं आएगी और उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी. इसके बाद माता लक्ष्मी ने आंवले के वृक्ष के नीचे भोजन तैयार किया और उसी स्थान पर भगवान विष्णु और भगवान शिव को भोजन अर्पित किया. दोनों देवताओं ने प्रसन्न होकर वह प्रसाद स्वीकार किया. तत्पश्चात, माता लक्ष्मी ने भी वही भोजन प्रसाद रूप में ग्रहण किया. उसी दिन से कार्तिक शुक्ल नवमी के अवसर पर आंवला नवमी व्रत और पूजा की परंपरा प्रारंभ हुई. आंवला वृक्ष की पूजा विधि     सुबह उठकर स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण करें.     किसी पवित्र स्थल या घर के आंगन में आंवले का वृक्ष सजाएं.     वृक्ष के चारों ओर जल, हल्दी, रोली, चावल और फूल चढ़ाएं.     आंवला वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं और विष्णु जी की आरती करें.     आंवले के वृक्ष की परिक्रमा करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें.     परिवार सहित वृक्ष के नीचे भोजन ग्रहण करें. इसे आंवला भोजन कहा जाता है.  

शाम के इन 5 आसान कामों से बदल जाएगी आपकी पूरी जिंदगी

एक बेहतरीन, खुशहाल और सुकून भरी जिंदगी की चाहत सभी को होती है और इसी चाहत को पूरा करने के लिए हम दिन भर कड़ी मेहनत करते हैं। पर अक्सर शाम का समय टीवी देखने, फोन पर समय बिताने या थक कर कुछ ना करने में ही बेकार चला जाता है। लेकिन अगर आप हर शाम 5 छोटे-छोटे कामों को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लें, तो ये आपकी सोच, स्वास्थ्य और जीवनशैली में मैजिकल बदलाव ला सकती हैं। ये आदतें ना केवल आपको एक अच्छा इंसान बनाएंगी बल्कि आपको जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने में मदद भी करेंगी। तो चलिए जानते हैं उन 5 कामों के बारे में जो आपकी शाम को बना सकती है आपकी सफलता की सीढ़ी। आत्ममंथन से करें दिनभर की समीक्षा हर शाम 10-15 मिनट शांत बैठकर यह जरूर सोचें कि आपका दिन कैसा रहा। आपने पूरे दिन क्या अच्छा किया, आपसे कौन सी गलतियां हुईं और उनसे आपको क्या सीख मिली। जब आप शांत मन से बैठकर आत्ममंथन करेंगे, तो इससे आपको अपनी कमियों और खूबियों के बारे में पता चलेगा। इससे आप आत्म-जागरूक बन पाएंगे और अपनी गलतियों को सुधार कर, जीवन में पॉजिटिविटी के साथ आगे बढ़ेंगे। अगली सुबह की करें तैयारी जीवन में आगे बढ़ाने के लिए हर छोटे बड़े काम की बेहतर प्लानिंग करना बहुत जरूरी है। फिर वो चाहे नए दिन की शुरुआत की ही प्लानिंग क्यों ना हो। इसलिए रात में ही अगले दिन की टू-डू लिस्ट बना लें। इससे सुबह आपका समय बर्बाद नहीं होगा और आप साफ लक्ष्य के साथ दिन की शुरुआत कर पाएंगे। यह आदत आपके काम में फोकस और प्रोडक्टिविटी दोनों बढ़ाएगी। शाम को लें डिजिटल डिटॉक्स आज के समय में मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। ऑफिस के ज्यादातर काम लैपटॉप और मोबाइल में ही होते है। काम ना होने पर भी लोग मोबाइल का भरपूर इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इनसे थोड़ी दूरी बनाना जरूरी है। ऐसे में शाम के वक्त आप डिजिटल वर्ल्ड से दूरी बनाकर रखने का प्रयास करें। सोने से कम से कम 1 घंटे पहले मोबाइल, लैपटॉप या टीवी से दूरी बना लें। इसकी जगह ध्यान करें या परिवार से बात करें। इससे नींद भी अच्छी आएगी और मानसिक शांति भी बढ़ेगी। शरीर के लिए निकालें समय दिन भर के काम के बाद शरीर को भी आराम की जरूरत होती है। ऐसे में शाम के समय थोड़ा वक्त अपने शरीर के लिए निकालें। इस समय आप हल्की स्ट्रेचिंग, योग या वॉक कर सकते हैं। इससे शरीर की थकान दूर होती है और नींद भी अच्छी आती है। और जब नींद अच्छी आती है तो अगला दिन भी ताजगी के साथ शुरू होगा। किताबों को भी दें समय दिमाग को शांत करने के लिए बुक रीडिंग से बढ़िया कोई ऑप्शन नहीं है। इसलिए रोज रात सोने से पहले थोड़ी देर तक अपनी मनपसंद किताब पढ़ें। इससे आपको मानसिक सुकून मिलेगा, जिससे आपका फोकस बढ़ेगा। इसलिए फिक्शन या नॉन फिक्शन जिस भी फील्ड में आपकी रुचि है, सोने से पहले उससे जुड़ी किताबें पढ़ें।  

तुलसी के पास ये एक गलती बना सकती है दरिद्रता का कारण, जानें सही उपाय

धर्म में तुलसी के पौधे को अत्यंत पवित्र, पूजनीय और देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है। इसे घर में लगाने से सकारात्मकता, सुख-समृद्धि और शांति आती है। हालांकि, वास्तु शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी के पौधे के पास कुछ ऐसी चीजें रखना वर्जित माना गया है, जिन्हें रखने से घर की समृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और दरिद्रता आ सकती है। जूते-चप्पल जूते-चप्पल अशुद्ध माने जाते हैं और इनका सीधा संबंध गंदगी से होता है। तुलसी का पौधा पूजनीय है। इसके पास जूते-चप्पल या उनसे संबंधित कोई भी वस्तु रखने से लक्ष्मी का अपमान होता है, जिससे घर में आर्थिक तंगी आ सकती है।  कांटेदार पौधे या सूखे पौधे तुलसी के पास कभी भी कैक्टस या अन्य कांटेदार पौधे नहीं रखने चाहिए। कांटेदार पौधे नकारात्मक ऊर्जा लाते हैं और घर में कलह का कारण बन सकते हैं। इसी तरह, तुलसी के गमले के आस-पास सूखे या मुरझाए हुए पौधे भी नहीं रखने चाहिए। सूखी तुलसी या सूखे पौधे दुर्भाग्य और धन हानि का संकेत देते हैं। टूटी हुई या खंडित वस्तुएं पूजा-पाठ से संबंधित टूटी हुई मूर्तियां, दीपक, या अन्य खंडित सामग्री को तुलसी के पास नहीं रखना चाहिए। खंडित वस्तुएं वास्तु दोष पैदा करती हैं और घर की बरकत में रुकावट डालती हैं। लोहे का सामान तुलसी के गमले के आस-पास लोहे से बनी अनावश्यक वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए। लोहा नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है, जो तुलसी की सकारात्मकता को कम कर सकता है और समृद्धि में कमी ला सकता है।

इस दिन होगा तुलसी विवाह, शुभ समय और विधि का पूर्ण विवरण

कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वादशी पर तुलसी विवाह किया जाता है। इस दिन तुलसी जी और शालिग्राम जी का विवाह कराया जाता है। पंचांग के अनुसार, कार्तिक शुक्ल द्वादशी तिथि की शुरुआत 2 नवंबर 2025 को सुबह 7 बजकर 31 मिनट पर होगी और इसका समापन 3 नवंबर को सुबह 5 बजकर 7 मिनट पर होगा। शुभ मुहूर्त के अनुसार, तुलसी विवाह 2 नवंबर (रविवार) को ही मनाया जाएगा, लेकिन सही विधि और शुभ मुहूर्त में ही पूजा करनी चाहिए। इन मुहूर्तों में तुलसी विवाह करना सबसे शुभ माना जाता है — ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:59 से 5:49 तक प्रातः संध्या: सुबह 5:24 से 6:39 तक अमृत काल: सुबह 9:29 से 11:00 तक अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:59 से 12:45 तक गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:04 से 6:30 तक तुलसी विवाह के दिन गन्ने से ही मंडप बनाना चाहिए। कहा जाता है कि तुलसी जी को गन्ना बहुत प्रिय है, इसलिए विवाह का मंडप गन्ने से सजाया जाता है। तुलसी विवाह पूजा विधि 1. सुबह स्नान कर घर के आंगन या छत पर तुलसी के पौधे के पास स्थान को साफ करें। 2. तुलसी माता को लाल साड़ी, चुनरी, चूड़ी, सिंदूर और श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें। 3. पौधे के दाहिनी ओर शालिग्राम (भगवान विष्णु) को स्थापित करें। 4. तुलसी और शालिग्राम दोनों को गंगाजल से स्नान कराएं और चंदन, रोली से तिलक करें। 5. फल, फूल, मिठाई और तुलसीदल का भोग लगाकर विवाह मंत्रों के साथ तुलसी-शालिग्राम का विवाह कराएं। 6. विवाह के बाद आरती करें और प्रसाद का वितरण करें। तुलसी विवाह का महत्व बता दें कि तुलसी विवाह के दिन माता तुलसी का विवाह भगवान शालिग्राम से किया जाता है। भगवान शालिग्राम को दूल्हे की तरह सजाया जाता है और माता तुलसी को दुल्हन की तरह सजाया जाता है। भगवान शालिग्राम ईश्वर की शक्ति के प्रतीक हैं, जबकि तुलसी माता प्रकृति का प्रतिनिधित्व करती हैं। इस विवाह से प्रकृति और भगवान के बीच के संतुलन का संदेश मिलता है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति पूरे विधि-विधान से तुलसी विवाह करता है, उसके वैवाहिक जीवन में सुख और शांति बनी रहती है। साथ ही घर में समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली का वास होता है। तुलसी विवाह करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक लाभ भी मिलते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु के चार महीने की योग निद्रा के बाद जागरण एकादशी (देवउठनी एकादशी) के अगले दिन तुलसी विवाह संपन्न कराया जाता है। ऐसा माना जाता है कि तुलसी विवाह कराने से —वैवाहिक जीवन में प्रेम, शांति और समृद्धि आती है। अविवाहित कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है और सबसे बड़ा लाभ, यह कन्यादान के समान पुण्यफल प्रदान करता है।  

आज का राशिफल 30 अक्टूबर 2025: मकर वालों के लिए खुशियों का दिन, सभी 12 राशियों की भविष्यवाणी

मेष आज के दिन अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए दफ्तर में अवसरों का लाभ उठाएं। अपने पार्टनर के साथ टाइम बिताते हुए प्रेमी को खुश रखें। समृद्धि के कारण आप समझदारी भरे पैसों से जुड़े डिसीजन ले सकते हैं। आज आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। वृषभ आज के दिन ऐसे बिजनेस पर विचार करना अच्छा है, जिनमें विभिन्न संस्कृति के लोगों को पढ़ाने, लिखने या उनके साथ जुड़ने की आवश्यकता होती है। यह समय दूसरों के साथ अपने संबंधों पर ध्यान केंद्रित करने और अपने व्यक्तिगत और कामकाजी जीवन में संतुलन स्थापित करने का है। मिथुन आज के दिन नई चीजों की खोज करें, जिससे सोचने का नया तरीका विकसित होगा। सीखने और अधिक ज्ञान की खोज करने के लिए जिज्ञासु और उत्सुक रहने का आपका स्वभाव मददगार साबित होगा। कर्क आज के दिन लोगों के साथ काम करने का आपका अनुभव और एक टीम तैयार करने में सक्षम होने से आपको फायदा होगा। उन पदों के बारे में सोचें, जिनमें सामुदायिक भागीदारी, सोशल मीडिया सहभागिता या टीम वर्क की आवश्यकता होती है। सिंह आज के दिन एक छोटा सा बिजनेस शुरू करने या ऐसी एक्टिविटी में शामिल होने का एक अच्छा समय हो सकता है, जो आपकी स्किल्स में सुधार कर सकती है। दिल के मामलों में, आप पा सकते हैं कि आपका ध्यान रिश्ते के दोस्ताना पहलू की ओर अधिक केंद्रित हो रहा है। कन्या आज के दिन आपके टीममेट्स को आपकी परफॉर्मेंस अच्छी लगेगी और आपके बॉस आपके आइडिया की तारीफ भी करेंगे। सिंगल लोगों के लिए, डेटिंग शुरू करने का सबसे अच्छा टाइम है। तुला आज के दिन कुछ लोगों को मोटिवेट करने के लिए आपकी कंपनी आपको रिवर्ड दे सकती है, जो प्रमोशन या जिम्मेदारियों में तब्दील हो सकता है। अपने परिवार के सपोर्ट के लिए ग्रेटफुल रहें। वृश्चिक आज के दिन आपके आइडिया और कम्यूनिकेशन स्किल्स दूसरों का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं। इससे आपको पहचान मिल सकती है। प्रभावी ढंग से काम्पिटिशन करने के लिए या अपनी कम्यूनिकेशन स्किल्स को बढ़ाने के लिए किसी कोर्स में टाइम इन्वेस्ट करने का यह एक अच्छा समय है। धनु आज के दिन आप अपने जीवन के कई पहलुओं पर विचार करेंगे। वर्कप्लेस पर, उन पदों के बारे में सोचें, जो आपको नेम और फेम दोनों दिला सकें। आपके पास किसी प्रोजेक्ट को शुरू करने या मैनेजमेंट के सामने पेश करने के मौके होंगे। मकर आज के दिन सही पार्टनर ढूंढने का यह अच्छा समय रहेगा, खासकर सोशल इवेंट्स में या किसी एक्टिविटी में शामिल होने के दौरान। अपनी इन्श्योरेन्स पॉलिसीज पर फोकस रखें, खासकर जब बात किसी कार, बाइक या गैजेट्स की हो। कुंभ आज के दिन अगर शेयर बाजार में निवेश करने पर विचार कर रहे हैं तो किसी फाइनेंशियल एड्वाइजर से सलह लेने पर जरूर विचार करें। सिंगल लोगों को किसी पार्टी, स्कूल या यहां तक ​​कि सोशल इवेंट्स में कोई स्पेशल साथी मिल सकता है। मीन आज के दिन अपनी क्रीएटिवटी का पता लगाने का दिन है। आप अपनी क्षमता का पता लगाने के लिए अधिक इच्छुक महसूस करेंगे। जॉब इंटरव्यू के दौरान या जरूरी डॉक्युमेंट्स जमा करते समय अपनी स्किल्स दर्शाने की बात आती है तो संकोच न करें।

आकांक्षारहित हो प्रार्थना

  -आचार्य रजनीश ओशो- पहली बात, परिणाम की जब तक आकांक्षा है, तब तक प्रार्थना पूरी न होगी। या यूं कहो-परिणाम की जब तक आकांक्षा है, परिणाम न आएगा। प्रार्थना तो शुद्ध होनी चाहिए, परिणाम से मुक्त होनी चाहिए, फलाकांक्षा से शून्य होनी चाहिए। कम से कम प्रार्थना तो फलाकांक्षा से शून्य करो। कृष्ण तो कहते हैं कि दुकान भी फलाकांक्षा से शून्य होकर करो। युद्ध भी फलाकांक्षा से शून्य होकर लड़ो। तुम कम से कम इतना तो करो कि प्रार्थना फलाकांक्षा से मुक्त कर लो। उस पर तो पत्थर न रखो फलाकांक्षा के। फलाकांक्षा के पत्थर रख दोगे, प्रार्थना का पक्षी न उड़ पाएगा। तुमने शिला बांध दी पक्षी के गले में। अब तुम पूछते हो-प्रार्थनाएं परिणाम न लाएं तो क्या करें? प्रार्थनाएं जरूर परिणाम लाती हैं मगर तभी जब परिणाम की कोई आकांक्षा नहीं होती। यह विरोधाभास तुम्हें समझाना ही होगा। यह धर्म की अंतरंग घटना है। यह उसका राजों का राज है। जिसने मांगा, वह खाली रह गयाय और जिसने नहीं मांगा, वह भर गया। तुम्हारी तकलीफ समझता हूं, क्योंकि प्रार्थना हमें सिखाई ही गई है मांगने के लिए। जब मांगना होता है कुछ, तभी लोग प्रार्थना करते हैं, नहीं तो कौन प्रार्थना करता है? लोग दुख में याद करते हैं परमात्मा को, सुख में कौन याद करता है? मगर सुख में याद करने का मतलब यही होता है कि अब कोई आकांक्षा नहीं होगी। सुख तो है ही, अब मांगना क्या है? जब सुख में कोई प्रार्थना करता है तो प्रार्थना केवल धन्यवाद होती है। जब दुख में कोई प्रार्थना करता है तो प्रार्थना में भिखमंगापन होता है। सम्राट से मिलने चले हो भिखारी होकर, दरवाजों से ही लौटा दिए जाओगे। पहरेदार भीतर प्रवेश न होने देंगे। सम्राट से मिलने चले हो, सम्राट की तरह चलो। सम्राट की चाल क्या है? न कोई वासना है, न आकांक्षा हैय जीवन का आनंद है और आनंद के लिए धन्यवाद है। जो दिया है, वह इतना है। मांगना है क्या और? बिना मांगे इतना दिया है। एक गहन तज्ञता का भाव-वहीं प्रार्थना है। मगर तुम्हारी अड़चन मैं समझा। बहुतों की अड़चन यही है। प्रार्थना पूरी नहीं होती तो शक होने लगता है परमात्मा पर। मजा है कैसा। प्रार्थना पर शक नहीं होता-कि मेरी प्रार्थना में कोई गलती तो नहीं हो रही? परमात्मा पर शक होने लगता है। मेरे पास लोग आकर कहते हैं कि प्रार्थना तो पूरी होती ही नहीं है हमारी, जनम-जनम हो गए! तो परमात्मा है भी या नहीं? परमात्मा पर शक होता है। मजा देखना! अपने पर शक नहीं होता-कि मेरी प्रार्थना में कहीं कोई भूल तो नहीं? नाव ठीक नहीं चलती तो मेरी पतवारें गलत तो नहीं हैं? दूसरा किनारा है या नहीं, इस पर शक होने लगता है।