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शेयर बाजार में जोरदार उछाल, इन 3 कारणों से Sensex-Nifty ने भरी उड़ान, IT शेयरों का जलवा

मुंबई   अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत और कच्चे तेल में गिरावट सेघरेलूशेयर बाजार में आज लगातार दूसरे दिन तेजी आई है। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 500 अंक उछल गया जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 इंडेक्स भी 24,150 के करीब पहुंच गया। सुबह 9.40 बजे सेंसेक्स 493.71 अंक यानी 0.64% तेजी के साथ 77,416.35 अंक पर ट्रेड कर रहा था। निफ्टी भी 143.85 अंक यानी 0.60% ऊपर 24,149.70 अंक पर ट्रेड कर रहा है। रुपया शुरुआती कारोबार में मजबूत होकर 94.95 पर पहुंच गया। सेंसेक्स के 30 में से 19 शेयर तेजी के साथ खुले। देश की दूसरी बड़ी आईटी कंपनी इन्फोसिस के शेयरों में सबसे ज्यादा 3% तेजी रही। इसके अलावा एचसीएल टेक, टीसीएस और टेक महिंद्रा के शेयर भी 2% तक उछल गए। दूसरी ओर, बजाज फाइनेंस के शेयरों में 1% से ज्यादा गिरावट आई और यह बेंचमार्क इंडेक्स में सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाला शेयर रहा। ब्रॉडर बाजार का हाल ब्रॉडर बाजार में भी तेजी रही। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में लगभग 0.3% की तेजी आई। सेक्टर के हिसाब से देखें तो निफ्टी आईटी में सबसे ज्यादा 3% तेजी रही। वहीं, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मेटल में लगभग 1-1% की तेजी आई। एनएसई पर लगभग 1,818 शेयरों में तेजी रही जबकि 586 शेयरों में गिरावट आई और 99 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। शेयर बाजार में तेजी के तीन कारण  अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत को लेकर पॉजिटिव सिग्नल का शेयर बाजार में तेजी के पीछे अहम रोल रहा. कतर ने कहा कि ईरान और अमेरिका ने Hormuz Strait को लेकर बातचीत आगे बढ़ाई है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के करीब 20 फीसदी हिस्से को संभालता है. इसके चलते विदेशी बाजारों में भी तेजी आई, तो गिफ्ट निफ्टी भी रफ्तार में नजर आया. इससे बाजार का सेंटीमेंट सुधरा।  दूसरी ओर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार जारी गिरावट ने बाजार की रफ्तार बढ़ाने में योगदान किया. बता दें कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें गिरकर 70 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं।  इनके अलावा आईटी कंपनियों के शेयर खुलने के साथ ही बाजार की हीरो साबित हुए. बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल Infosys Share (4.60%), HCL Tech Share (3.80%), TCS SHare (3.05%), Tech Mahindra Share (3%) की तेजी लेकर कारोबार कर रहे थे. मिडकैप कैटेगरी में देखें, तो Coforge Share (4.70%), MPhasis Share (4.50%), Presistent Share (3.60%) की तेजी के साथ ट्रेड कर रहे थे।   बैंकिंग शेयर भी चमके मार्केट में तेजी के बीच सिर्फ आईटी शेयर ही नहीं, बल्कि बैंकिंग स्टॉक्स भी चमके. लार्जकैप में शआमिल ICICI Bank Share, HDFC Bank Share, SBI Share करीब 1 फीसदी की तेजी में दिखे. इसके अलावा सनफार्मा, अडानी पोर्ट्स से लेकर ट्रेंट और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे कंपनियों के स्टॉक्स भी ग्रीन जोन में नजर आए।  कच्चे तेल में गिरावट इस बीच ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता में तेजी से कच्चे तेल की कीमत में गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स अभी 1.06 फीसदी नीचे $70.81 प्रति बैरल पर आ ट्रेड कर रहा है। दोनों देशों के प्रतिनिधि पिछले दो दिनों से कतर की राजधानी दोहा में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने और ईरान के फ्रीज किए गए फंड को जारी करने के बारे में चर्चा कर रहे हैं।

Tech Layoffs: Microsoft में एक और जॉब कट की आशंका, 5,000 कर्मचारियों पर लटक रही तलवार

नई दिल्ली Microsoft एक बार फिर बड़े स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी कर रही है. रॉयटर्स ने बिजनेस इंसाइडर की रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि कंपनी अगले कुछ दिनों में हजारों कर्मचारियों की नौकरी खत्म कर सकती है।  हालांकि इस बार छंटनी का असर कंपनी के कुल कर्मचारियों के 2.5 प्रतिशत से कम लोगों पर पड़ने की उम्मीद है. माइक्रोसॉफ्ट के दुनियाभर में करीब 2.2 लाख कर्मचारी हैं. ऐसे में यह संख्या करीब 5 हजार या उससे कम हो सकती है।  रिपोर्ट्स के अनुसार इस बार सबसे ज्यादा असर सेल्स, कंसल्टिंग और Xbox गेमिंग डिविजन पर पड़ सकता है. कंपनी की तरफ से अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन कई क्रेडिबल रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नए फाइनांशियल ईयर की शुरुआत के साथ यह फैसला लिया जा सकता है।  आखिर Microsoft फिर कर्मचारियों की छंटनी क्यों कर रही है? पिछले कुछ सालों में माइक्रोसॉफ्ट ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर रिकॉर्ड निवेश किया है. कंपनी OpenAI के साथ साझेदारी बढ़ा रही है, नए AI डेटा सेंटर बना रही है और Copilot जैसे AI प्रोडक्ट्स पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है. ऐसे में दूसरी तरफ ऑपरेटिंग खर्च कम करने के लिए कंपनी लगातार अपने कर्मचारियों की संख्या घटा रही है।  रिपोर्ट में कहा गया है कि माइक्रोसॉफ्ट लागत कम करने के साथ-साथ अपने बिजनेस को AI के हिसाब से दोबारा तैयार करना चाहती है. यही वजह है कि जिन टीमों में ऑटोमेशन या AI की मदद से काम हो सकता है, वहां कर्मचारियों की संख्या कम की जा रही है।  Xbox टीम पर भी असर पड़ सकता है माइक्रोसॉफ्ट के गेमिंग बिजनेस यानी Xbox में भी बदलाव की तैयारी चल रही है. पिछले कुछ समय से Xbox के अंदर बड़े स्तर पर रीस्ट्रक्चरिंग की चर्चा है. नई लीडरशिप के आने के बाद बिजनेस को रीसेट करने की योजना बनाई जा रही है. इसी वजह से गेमिंग डिविजन में भी कई पद खत्म किए जा सकते हैं और कुछ टीमों का पुनर्गठन हो सकता है।  पहले भी हो चुकी है बड़ी छंटनी यह पहली बार नहीं है जब माइक्रोसॉफ्ट कर्मचारियों की संख्या घटा रही है. पिछले साल भी कंपनी ने अलग-अलग चरणों में हजारों कर्मचारियों की छंटनी की थी. उस समय भी कंपनी ने AI में निवेश बढ़ाने और खर्च कम करने को इसकी बड़ी वजह बताया था।  माइक्रोसॉफ्ट अकेली कंपनी नहीं है. 2026 में मेटा, ऐमेजॉन, ओरैकल, लिंक्डइन, कॉइनबेस, गूपऑन और कई दूसरी बड़ी टेक कंपनियां भी कर्मचारियों की संख्या कम कर चुकी हैं या इसकी घोषणा कर चुकी हैं. कई कंपनियां खुलकर कह चुकी हैं कि AI की वजह से काम करने का तरीका बदल रहा है और फ्यूचर में कम कर्मचारियों के साथ ज्यादा काम किया जाएगा। 

AI शेयरों में निवेश करने वालों के लिए अलर्ट! RBI ने बताया क्यों बढ़ रहा है खतरा

 नई दिल्‍ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ी चेतावनी दी है. यह वॉर्निंग ग्‍लोबल मार्केट में AI की वजह से आई बड़ी गिरावट को लेकर है. केंद्रीय बैंक का कहना है कि ग्‍लोबल मार्केट में कॉरपोरेट अर्निंग में ग्रोथ के रिवैल्‍यूएशन और AI रिलेटेड स्‍टॉक के वैल्‍यूएशन के कारण आई गिरावट भारतीय बाजार को भी प्रभावित कर सकती है।  RBI ने अपनी फाइनेंशियल स्‍टैबिलिटी रिपोर्ट (FSR) में कहा है कि AI से रिलेटेड निवेश अब बॉन्‍ड मार्केट्स समेत बाकी कैपिटल मार्केट के अन्‍य सेक्‍टर्स में भी फैल रहे हैं. साउथ कोरिया, ताइवान और जापान समेत कई मार्केट्स में हाल ही में AI से सबंधित शेयरों में तेजी और उच्‍च अस्थिरता देखी गई थी।  रिपोर्ट में कहा गया है कि AI से संबंधित टेक कंपनियों के एक छोटे ग्रुप के कारण फोकस ज्‍यादा बना हुआ है, जो एआई को अपनाने में टॉप इकोनॉमी देशों या इसकी सप्‍लाई चेन में भाग लेने वाली अर्थव्‍यवस्‍थाओं में शेयर मार्केट के प्रदर्शन को तेजी से प्रभावित कर रहा है।  अमेरिकी बाजार में आ सकती है बड़ी गिरावट हाल ही में कुछ उभरते बाजारों के बेहतर प्रदर्शन की खास वजह व्‍यापक मजबूती के बजाय एआई से जुड़ी कंपनियां रही हैं. केंद्रीय बैंक ने कहा कि ये दोनों ही वित्तीय अस्थिरता के सोर्स बने हुए हैं, क्‍योंकि इन कंपनियों में बिकवाली से अमेरिका में व्‍यापक बाजार में गिरावट आ सकती है और आय संबंधी प्रभावों के माध्‍यम से अन्‍य बाजारों में भी इसका असर फैल सकता है।   लोन देने वाली कंपनियां भी हो सकती हैं प्रभावित आरबीआई के रिपोर्ट में कहा गया है कि जैसे-जैसे हाइपरस्केल कंपनियां घटते फ्री कैश फ्लो के बीच एआई बिल्डआउट पर कैपिटल एक्‍सपेंडेचर बढ़ा रही हैं , उन्होंने इन निवेशों को फंडिंग जारी के लिए पिछले दो वर्षों में बड़ा लोन लिया है. खर्च में और अधिक विस्तार होने के साथ ही लोन फंड में भी बढ़ोतरी होने की उम्‍मीद है. आरबीआई ने कहा कि इसलिए, एआई बेस्‍ड असेट वैल्‍यू में गिरावट इस चैनल के माध्यम से जोखिम पैदा कर सकती है, क्योंकि बैंक पर्सनल लोन फर्मों और एआई बूम को फंडिंग करने वाले अन्य फर्म भी प्रभावित हो सकते हैं।  एआई बबल की फटने की आशंका बढ़ी गौरतलब है कि अमेरिका में कई पैमानों पर इक्विटी वैल्‍यूवेशन के मापदंड ऐतिहासिक सीमा के ऊपरी स्‍तर पर बने रहे. वहीं आरबीआई के अनुसार, अमेरिकी इक्विटी बाजारों में बाकी विश्व का निवेश उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है, और मार्च 2020 में 7.5 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर मार्च 2026 में अमेरिकी इक्विटी में सकल विदेशी हिस्सेदारी 21 ट्रिलियन डॉलर हो गई है।  जबकि दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार एक सप्ताह पहले 10% गिर गया, जिससे लोअर सर्किट लग गया और ट्रेडिंग रुक गई. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि एआई बबल के फटने की आशंकाएं बढ़ गईं. भारतीय बाजार समेत अन्य एशियाई बाजारों में भी गिरावट आई। 

भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बीच चार भारतीय कंपनियां अमेरिकी पाबंदी सूची से बाहर।

नई दिल्ली  भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर जल्दी ही सहमति बन सकती है। बताया जा रहा है कि यह फाइनल स्टेज में है। इससे पहले अमेरिका की ओर से भारतीय उद्योग जगत के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर आई है। अमेरिका ने अपनी उस पाबंदी सूची से चार भारतीय कंपनियों के नाम हटा दिए हैं, जिन पर रूस के सैन्य-औद्योगिक क्षेत्र को उन्नत तकनीक और उपकरण सप्लाई करने के आरोप लगे थे। अमेरिकी वित्त विभाग ने मंगलवार को इस फैसले की घोषणा की। इन कंपनियों को अमेरिकी विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) की विशेष रूप से नामित नागरिकों और अवरुद्ध व्यक्तियों (SDN) की सूची से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है। Navbharat TimesRussian Oil Imports: दुनिया देखती रह गई और भारत ने चल दिया बड़ा दांव, जून में टूटा कच्चे तेल आयात का रिकॉर्ड, रूस ने मारी बाजी कौन सी हैं ये 4 भारतीय कंपनियां? प्रतिबंधों की सूची से हटाए गए नामों में दो कंपनियां हैदराबाद की, एक अहमदाबाद की और एक नई दिल्ली की है। इन चारों के नाम इस प्रकार हैं:     आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (हैदराबाद)     लोकेश मशीन्स लिमिटेड (हैदराबाद)     गैलेक्सी बियरिंग्स लिमिटेड (अहमदाबाद)     शौर्य एयरोनॉटिक्स प्राइवेट लिमिटेड (नई दिल्ली) इन कंपनियों पर क्या थे आरोप? साल 2024 में अमेरिका ने रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को दरकिनार करने के आरोप में इन कंपनियों पर पाबंदियां लगाई थीं। अमेरिकी प्रशासन का दावा था कि ये कंपनियां रूस को दोहरे उपयोग वाले सामान और तकनीक भेज रही थीं, जिनका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। गैलेक्सी बियरिंग्स लिमिटेड: अक्टूबर 2024 में इस कंपनी पर आरोप लगा था कि उसने रूसी संस्थाओं को रोलर बियरिंग्स और रोलर असेंबली जैसे दर्जनों संवेदनशील सामान निर्यात किए थे। शौर्य एयरोनॉटिक्स प्राइवेट लिमिटेड: इस कंपनी पर रूस को रडार उपकरण, रेडियो नेविगेशन सहायता उपकरण, रेडियो रिमोट कंट्रोल सिस्टम और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भेजने का आरोप था। आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज: अमेरिका ने आरोप लगाया था कि इस कंपनी ने ब्लैकलिस्टेड रूसी फर्म आर्टेक्स लिमिटेड को माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक की 100 से अधिक खेप भेजी थीं। लोकेश मशीन्स लिमिटेड: इस कंपनी पर विभिन्न रूसी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को दर्जनों मशीन टूल्स निर्यात करने का आरोप लगाया गया था। क्या हैं इस फैसले के मायने? अमेरिकी सरकार ने फिलहाल इन कंपनियों को सूची से हटाने की कोई आधिकारिक वजह स्पष्ट नहीं की है। हालांकि, माना जा रहा है कि भारत सरकार द्वारा लगातार अमेरिकी प्रशासन के साथ किए गए कूटनीतिक संवाद और भारतीय कंपनियों द्वारा निर्यात नियमों के कड़ाई से पालन के आश्वासनों के बाद यह कदम उठाया गया है। कंपनियों के लिए बड़ी राहत अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में होने के कारण इन कंपनियों के वैश्विक व्यापार, बैंक लेनदेन और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर पूरी तरह रोक लग गई थी। ऐसा इसलिए क्योंकि वैश्विक वित्तीय प्रणालियां काफी हद तक अमेरिकी डॉलर और वहां के नियमों से जुड़ी हैं। अब पाबंदियां हटने के बाद ये कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामान्य रूप से अपना बिजनेस दोबारा शुरू कर सकेंगी।

LPG Cylinder Price: महंगाई के बीच खुशखबरी! महीने की शुरुआत में घटे गैस सिलेंडर के दाम

 नई दिल्ली LPG Price Cut: जुलाई महीने की शुरुआत हो गई है और ये राहत भरी है. दरअसल, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बड़ी कटौती की है. LPG Cylinder Price Cut 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर पर किए गए हैं. ताजा रेट्स की बात करें, तो दिल्ली में 3,113 रुपये का मिलने वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब सस्ता होकर 2,930 रुपये का रह गया है. इस हिसाब से गैस सिलेंडर की कीमत 183 रुपये घटाई गई है. हालांकि, इस बार भी घर की रसोई में इस्तेमाल होने वाले 14 Kg LPG Cylinder Price को स्थिर रखा गया है।  राहत भरी जुलाई की शुरुआत  ऑयल मार्केटिंग कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में संशोधन करती हैं और जुलाई महीने की शुरुआत राहत भरी रही है. बीते कुछ समय में मिडिल ईस्ट टेंशन के चलते कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में ताबड़तोड़ इजाफा किया गया था. अब 1 जुलाई 2026 को दिल्ली समेत अन्य शहरों में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर का रेट कम कर दिया गया है. बता दें कि साल 2026 में ये पहली बार है जबकि तेल कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम घटाए हैं।  19 Kg LPG Cylinder की कीमत पर इस साल लगभग हर महीने महंगाई का बम फूटा था. शुरुआती महीने जनवरी में इसी कीमत 1691 रुपये प्रति सिलेंडर थी, जो कि लगातार बढ़ोतरी के बाद महंगा होता चला गया. बीते दो महीनों में देखें, तो मई ये 993 रुपये महंगा होकर पहली बार 3000 रुपये के पार पहुंचा था और जून की शुरुआत में भी ये 42 रुपये महंगा हुआ था. इसके बाद कमर्शियल सिलेंडर की कीमत दिल्ली में 3113.50 रुपये पहुंच गई थी।  कोलकाता से लखनऊ तक अब ये रेट  राजधानी दिल्ली के अलावा अन्य शहरों में 19 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में किए गए बदलाव की बात करें, तो कोलकाता में अब ये कमर्शियल  सिलेंडर 3255.50 रुपये से घटकर 3,081.50 रुपये का हो गया है. इसके अलावा अन्य शहरों की बात करें, तो उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अब कमर्शियल सिलेंडर का दाम 3,052.50 रुपये रह गया है, जबकि बिहार की राजधानी पटना में नई कीमत 3,227 रुपये पर आ गई है. सिलेंडर की नई कीमतें 1 जुलाई से लागू कर दी गई हैं।  घरेलू गैस सिलेंडर के नहीं बदले दाम  जहां एक ओर तेल कंपनियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में बड़ी कटौती करते हुए राहत दी है. तो वहीं घरेलू एलपीजी सिलेंडर (14 Kg LPG Cylinder) के दाम यथावत बने हुए हैं, यानी इनमें कोई चेंज नहीं किया गया है. दिल्ली में एलपीजी सिलेंडर का दाम 942 रुपये, कोलकाता में 968 रुपये है. तो वहीं मुंबई में 14 किलो वाला सिलेंडर 941.50 रुपये, जबकि चेन्नई में ये 957.50 रुपये का मिल रहा है। 

Gold-Silver Price Today: सोना-चांदी अचानक हुए महंगे, कीमतों में ₹8500 तक की तेज बढ़ोतरी

नई दिल्ली  सोने और चांदी में लगातार तीन हफ्तों से जारी गिरावट के बाद मंगलवार, 30 जून को अचानक उछाल (gold silver price) आया। दोपहर दो बजे के आसपास गोल्ड-सिल्वर में तेजी आई, जो वैश्विक बाजार कॉमेक्स और भारतीय घरेलू बाजार MCX पर भी देखी गई। कॉमेक्स पर सोना 2.60 डॉलर उछलकर 4040 डॉलर प्रति औंस के ऊपर पहुंच गया। जबकि चांदी में 1.52 फीसदी की तेजी आई और कीमत 60 डॉलर के करीब पहुंच गई। MCX पर कहां पहुंचे गोल्ड-सिल्वर के दाम? वहीं एमसीएक्स पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना 1952 रुपए उछलकर 1,42,402 रुपए के दिन के हाई लेवल पर पहुंच गया। इस दौरान सोना 1,42,384 रुपए (gold price today) प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता दिखा। पिछले कारोबारी सत्र में सोना 1,42,402 रुपए (gold rate today) पर क्लोज हुआ था। चांदी की बात करें जुलाई डिलीवरी वाली चांदी में 8500 रुपए का जोरदार उछाल आया। खबर लिखे जाने तक चांदी 2.05 फीसदी यानी 4493 रुपए उछलकर 2,23,899 रुपए प्रति किलोग्राम (silver rate today) पर ट्रेड कर रही थी। इस दौरान इसका हाई लेवल 2,27,980 रुपए और लो लेवल 2,17,333 रुपए (silver price today) रहा। पिछले दिन यह 2,19,406 रुपए पर क्लोज हुई थी। यानी पिछले क्लोज और आज के हाई लेवल की तुलना करें चांदी में 8,574 रुपए महंगी हो गई।

Gold-Silver Crash: सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, खरीदारी का सही मौका? देखें ताजा भाव

 नई दिल्‍ली ग्‍लोबल दबाव के बीच, शेयर बाजार से लेकर कमोडिटी मार्केट तक में भारी गिरावट देखने को मिली है. सोना और चांदी के दाम भी तेजी से नीचे आए हैं. सोमवार को भी सोना और चांदी के दाम टूट गए. मल्‍टी कमोडिटी मार्केट में सोने की कीमतों में 1000 रुपये तक की गिरावट आई है।  MCX पर सोमवार को सोना 1022 रुपये या 0.71% गिरकर 1,43,140 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था. वहीं चांदी की कीमत करीब 1900 रुपये या 1 फीसदी से ज्‍यादा गिरकर 2,19,522 रुपये प्रति किलो पर थी. सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट की वजह, फेडरल रिजर्व बैंक की ओर से ब्‍याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका मानी जा रही है।  फेडरल रिजर्व बैंक द्वारा रेट में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ने के कारण डॉलर इंडेक्‍स में तेजी आई है, जिस कारण कीमती धातुओं पर दबाव दिखाई दे रहा है. वहीं महंगाई बढ़ने का भी खतरा बना हुआ है. अगर रेट में बढ़ोतरी होती है, तो ग्‍लोबल स्‍तर पर महंगाई बढ़ने की उम्‍मीद है।  जून में सोना और चांदी में बड़ी गिरावट  जून का महीना शुरू होने के बाद से ही सोने और चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट हुई है. एमसीएक्‍स पर 29 मई को चांदी की कीमत 2.67 लाख रुपये पहुंच गई थी, लेकिन अब 2.19 लाख रुपये पर कारोबार कर रही है. ऐसे में चांदी के भाव में 48000 रुपये या 18 फीसदी की गिरावट आई है. वहीं गोल्‍ड की बात करें तो 29 मई को एमसीएक्‍स पर सोना 1.61 लाख रुपये पर पहुंच गया था, लेकिन यहां से 18,000 रुपये या 11 फीसदी गिरकर यह 1.43 लाख रुपये पर आ चुका है।  इंटरनेशनल स्‍तर पर सोने-चांदी का भाव  ग्‍लोबल मार्केट में भी सोने-चांदी का भाव गिरकर कारोबार कर रहा है. सोना 26 डॉलर प्रति औंस या 0.67 फीसदी टूटकर 4,062 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है. वहीं चांदी की बात करें तो यह 2 डॉलर प्रति औंस या 2 फीसदी गिरकर 58 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही है।  क्‍या अभी सोना और चांदी खरीदना चाहिए?  एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप सोने और चांदी में निवेश का प्‍लान बना रहे हैं तो अभी इसमें निवेश करने का सही मौका है, लेकिन आपको ग्‍लोबल सेंटिमेंट को लेकर सतर्क भी रहना चाहिए. किसी भी गिरावट पर आप थोड़ा-थोड़ा करके सोने-चांदी की खरीदारी कर सकते हैं और लॉन्‍ग टर्म नजरिए के साथ सोने-चांदी में निवेश जारी रख सकते हैं. हालांकि, आपको अपने पोर्टफोलियो का 20 फीसदी से ज्‍यादा सोने-चांदी में एक्‍सपोजर नहीं रखना चाहिए, वरना किसी भी निगेटिव सेंटिमेंट पर आपके पोर्टफोलियो में दबाव बढ़ सकता है। 

Stock Market Crash: बाजार में बड़ी गिरावट, मिड-स्मॉल कैप धड़ाम, निफ्टी 24,000 के करीब पहुंचा

मुंबई  अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को फिर से जंग शुरू हो गई थी, जिसके बाद तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली. इनका असर एशिया समेत भारतीय बजार में दिखाई दे रहा है. भारतीय बाजार में गिरावट आई है. सेंसेक्‍स 200 अंक से ज्‍यादा टूट चुका है, जबकि निफ्टी भी फ्लैट कारोबार कर रहा है. सबसे ज्‍यादा दर्द मिडकैप और स्‍मॉल कैप में है, जो क्रमश: 0.34 फीसदी और 0.55 फीसदी तक गिर चुके हैं।  बीएसई के टॉप 30 शेयरों की बात करें तो 17 शेयरों में तेजी है और 13 शेयर गिरकर कारोबार कर रहे हैं. सबसे ज्‍यादा गिरावट कोटक महिंद्रा बैंक में 3 फीसदी की रही है, जबकि महिंद्रा एंड महिंद्रा, अडानी पोर्ट और कुछ अन्‍य शेयरों में 1 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली है।  9.30 बजे तक सेंसेक्‍स करीब 200 अंक गिरकर 76,910.61 पर कारोबार कर रहा है, जबकि निफ्टी 40 अंक गिरकर  24,020 पर था. निफ्टी बैंक में 200 अंकों से ज्‍यादा की गिरावट देखने को मिली. ग्‍लोबल तनाव के साथ ही कई अन्‍य वहजों से मार्केट में गिरावट आई है. आइए जानते हैं…  क्‍यों आई शेयर बाजार में गिरावट?      सबसे बडी वजह तेल कीमतों में तेजी देखी जा रही है. ब्रेंट क्रूड वायदा 0.85% बढ़कर 72.6 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 1% से अधिक बढ़कर 70.01 डॉलर प्रति बैरल हो गया।      एशिाई बाजारों में भी दबाव दिखाई दे रहा है. निक्केई 1 फीसदी गिर चुका है और कोस्‍पी में 2 फीसदी से ज्‍यादा की गिरावट आई है. वहीं ग्‍लोबल मार्केट में भी दबाव बना हुआ है।      अमेरिका-ईरान के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है और आशंका है कि कहीं शांति समझौता बीच में ही ना टूट जाए।      फेडरल रिजर्व बैंक की ओर से अगली बैठक में ब्‍याज दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है. इस अनुमान के कारण शेयर बाजारों में दबाव दिखाई दे रहा है।  124 शेयरों में लोअर सर्किट बीएसई पर आज ट्रेड करने वाले 3,768 शेयरों में से 1,543 शेयरों में तेजी है और 2,002 शेयर गिरे हुए हैं. 223 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. वहीं 86 शेयर 52 सप्‍ताह के हाई पर हैं और 46 शेयर 52 सप्‍ताह के निचले स्‍तर पर कारोाबर कर रहे हैं. 96 शेयरों में अपर सर्किट है और 124 शेयरों में लोअर सर्किट लगा है। 

निवेशकों के लिए अहम रहेगा नया सप्ताह, भारत-अमेरिका ट्रेड डील और आर्थिक आंकड़ों पर टिकी बाजार की नजर

 नई दिल्ली  भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला हफ्ता काफी अहम होने वाला है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील, कच्चे तेल की कीमत, एफआईआई का रुझान और घरेलू आर्थिक आंकड़ों से शेयर बाजार की चाल निर्धारित होगी। भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर अगले हफ्ते निवेशकों की निगाहें रहेंगी। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा था कि भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं। उनका यह बयान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर से मुलाकात के बाद आया था। दोनों देशों के व्यापारिक संबंध मजबूत होने की उम्मीद इस प्रस्तावित समझौते से दोनों देशों के व्यापारिक संबंध मजबूत होने की उम्मीद है। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। अमेरिका ने शुक्रवार को ईरान पर स्ट्राइक की थी। इसकी वजह ईरान द्वारा हॉर्मुज स्ट्रेट पर मालवाहक जहाज को निशाना बनाना था। हालांकि, हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमत में बड़ी गिरावट देखने को मिली है और ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर के आसपास बना हुआ है। घरेलू आर्थिक डेटा भी बाजार की चाल को प्रभावित करेगा। इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट का डेटा आएगा 29 जून को इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट का डेटा जारी होगा। 30 जून को मई का राजकोषीय घाटे और व्यापार संतुलन, 1 जुलाई को जीएसटी, ऑटो सेल्स एवं मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई और 2 जुलाई को सर्विसेज और कंपोजिट पीएमआई और विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े आएगा। बीता हफ्ता शेयर बाजार के लिए कैसा रहा? इस हफ्ते सेंसेक्स 0.39 प्रतिशत बढ़कर 77,100.47 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,056 पर बंद हुआ। इसके अतिरिक्त, कच्चे तेल की कम कीमतों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में सुधार के संकेतों के कारण इस हफ्ते भारतीय रुपया मजबूत हुआ। हालांकि, निवेशक यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बदलाव की संभावना को लेकर सतर्क बने रहे, क्योंकि इससे ग्लोबल कैपिटल फ्लो पर असर पड़ सकता है।  

FD भुगतान में 11 साल की देरी पर बैंक को झटका, उपभोक्ता को मिला पूरा मुआवजा

नई दिल्ली अगर आपने भी बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) करा रखा है, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। कई लोग मानते हैं कि FD सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प है, लेकिन अगर बैंक ही मैच्योरिटी के बाद आपकी रकम लौटाने में आनाकानी करे तो क्या होगा? ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें एक व्यक्ति को अपनी 5 लाख रुपये की FD की रकम पाने के लिए लगभग 11 साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। आखिरकार, अदालत ने बैंक को कड़ी फटकार लगाते हुए न केवल पूरी रकम लौटाने, बल्कि 12% ब्याज और 10,000 रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया। यह मामला केरल के त्रिशूर निवासी सेतुमाधवन का है। उन्होंने बैंक में 5 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट कराई थी, जिसकी मैच्योरिटी 2 जून 2015 को पूरी हो गई थी। जब वे अपनी जमा राशि लेने बैंक पहुंचे, तो बैंक ने तकनीकी कारणों का हवाला देकर भुगतान करने से इनकार कर दिया। काफी प्रयासों के बावजूद जब पैसा नहीं मिला, तो उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाया। उपभोक्ता आयोग ने सभी की जांच के बाद 31 दिसंबर 2021 को बैंक को आदेश दिया कि वह सेतुमाधवन को 5 लाख रुपये के साथ 12% सालाना ब्याज और 10,000 रुपये मुआवजा व मुकदमे का खर्च भी अदा करे। लेकिन, बैंक ने इस आदेश का पालन करने के बजाय अदालत में चुनौती देने का फैसला किया। बैंक ने पहले केरल हाईकोर्ट में अपील दायर की, लेकिन वह भी 825 दिन की देरी से। बैंक का तर्क था कि उस दौरान उसका प्रबंधन एक प्रशासक के अधीन था, इसलिए समय पर अपील नहीं की जा सकी। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने इस दलील को खारिज कर दिया और उपभोक्ता आयोग के फैसले को सही ठहराया। इसके बाद भी बैंक पीछे नहीं हटा और मामले को हाईकोर्ट की बड़ी बेंच के सामने ले गया। इस बार बैंक ने दलील दी कि वह एक सहकारी बैंक है और इसलिए इस विवाद का निपटारा उपभोक्ता आयोग नहीं, बल्कि सहकारी समिति कानून के तहत होना चाहिए। हालांकि, 2 जून 2026 को केरल हाईकोर्ट की बड़ी बेंच ने भी बैंक की सभी दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि उपभोक्ता संरक्षण कानून लोगों के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया खास कानून है और यह अन्य कानूनों के अतिरिक्त लागू होता है। इसलिए कोई भी बैंक या संस्था उपभोक्ता आयोग के अधिकार क्षेत्र से बच नहीं सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि जनता का पैसा रखने वाले बैंक की सबसे बड़ी जिम्मेदारी समय पर ग्राहकों को उनका पैसा लौटाना है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में बैंक के रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब बैंक खुद यह नहीं नकार रहा कि जमा राशि लौटानी है, तब केवल तकनीकी बहानों के आधार पर ग्राहक को परेशान करना बेहद निंदनीय है। अदालत ने कहा कि बैंक जैसे संस्थानों को जनता का विश्वास बनाए रखना चाहिए, न कि ग्राहकों को सालों तक न्याय के लिए भटकाना चाहिए। हालांकि, सुनवाई के दौरान बैंक की ओर से 6 महीने का समय मांगा गया, ताकि वह भुगतान कर सके। अदालत ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए बैंक को 6 महीने के भीतर पूरी राशि, 12% ब्याज और 10,000 रुपये मुआवजा देने का अंतिम मौका दिया। यह फैसला देशभर के करोड़ों FD निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। अगर किसी बैंक या वित्तीय संस्था द्वारा मैच्योरिटी के बाद भी आपकी जमा राशि नहीं लौटाई जाती है, तो आप उपभोक्ता आयोग या अदालत का सहारा ले सकते हैं। अदालतों ने कई बार स्पष्ट किया है कि ग्राहकों के साथ लापरवाही करने वाले बैंकों को कानून के तहत जवाबदेह ठहराया जाएगा। एक्सपर्ट का मानना है कि यह फैसला बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत करेगा। साथ ही यह भी साबित करता है कि उपभोक्ता अपने अधिकारों के लिए कानूनी लड़ाई लड़कर न्याय प्राप्त कर सकते हैं, भले ही उसमें थोड़ा समय क्यों न लगे।