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बाजार में जोरदार गिरावट: सेंसेक्स 76,015, निफ्टी 360 अंक नीचे

मुंबई  घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। BSE Sensex 1000 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि Nifty 50 23,900 के नीचे फिसल गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,312.91 अंक गिरकर 76,015.28 पर और निफ्टी 360.30  अंक टूटकर 23,815.85 पर बंद हुआ। बाजार में गिरावट की बड़ी वजहें 1. कच्चे तेल में तेज उछाल अमेरिका और ईरान के बीच शांति प्रस्ताव पर सहमति नहीं बनने से वैश्विक बाजारों में तनाव बढ़ गया। इसके बाद ब्रेंट क्रूड करीब 4% उछलकर 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि इससे महंगाई और चालू खाता घाटा बढ़ सकता है। 2. रुपए पर दबाव तेल महंगा होने और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते भारतीय रुपया भी दबाव में आ गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक RBI को रुपए को संभालने के लिए बाजार में दखल देना पड़ा। 3. गोल्ड और एविएशन शेयरों में भारी गिरावट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सोने की खरीद और विदेश यात्राएं टालने की अपील की। इसके बाद ज्वैलरी और एविएशन कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट आई। Titan Company, Kalyan Jewellers और InterGlobe Aviation जैसे शेयर दबाव में रहे। 4. विदेशी निवेशकों की बिकवाली विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। बढ़ते तेल दाम, कमजोर रुपया और वैश्विक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। 5. इंडिया VIX में उछाल बाजार की घबराहट मापने वाला India VIX करीब 12% बढ़कर 18.82 तक पहुंच गया। इसका मतलब है कि निवेशकों में डर और अनिश्चितता तेजी से बढ़ी है।

मार्केट क्रैश का डर: मोदी की अपील के बाद सोना-पेट्रोल की बढ़ी चिंता, शेयर बाजार में गिरावट

मुंबई  सोमवार का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए किसी बुरे सपने जैसा साबित हुआ। बाजार खुलते ही बिकवाली की ऐसी आंधी आई कि सेंसेक्स और निफ्टी ताश के पत्तों की तरह ढह गए। इस गिरावट ने कुछ ही मिनटों में निवेशकों के करीब 4 लाख करोड़ रुपये स्वाहा कर दिए। बाजार के इस खराब प्रदर्शन के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण बताए जा रहे हैं, जिन्होंने मंदी की गाड़ी में फ्यूल भरने का काम किया है। निवेशकों के लिए चिंता की बात यह है कि अब कहानी सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि घरेलू मोर्चे पर आए पीएम मोदी के बयान ने भी बाजार का मूड बिगाड़ दिया है। सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट कारोबार के दौरान 30 शेयरों वाला सेंसेक्स करीब 1000 पॉइंट यानी 1 पर्सेंट से ज्यादा टूटकर 76,364 के लेवल पर आ गया। वहीं निफ्टी भी 1 पर्सेंट से ज्यादा की गिरावट के साथ 23,896 के निचले स्तर तक पहुंच गया। सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 1 पर्सेंट तक की गिरावट देखी गई। इस गिरावट की वजह से बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 473.5 लाख करोड़ रुपये से गिरकर 469.5 लाख करोड़ रुपये रह गया। बाजार में इस कदर बिकवाली हुई कि छोटे और बड़े हर तरह के निवेशकों को तगड़ा नुकसान उठाना पड़ा। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तल्खी बाजार के गिरने की पहली बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का विफल होना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया है, जिससे युद्ध का खतरा और बढ़ गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस अनिश्चितता की वजह से कच्चे तेल की कीमतें पिछले दो महीनों से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का डर सता रहा है, जिसका सीधा असर देश की इकोनॉमिक ग्रोथ पर पड़ सकता है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के हालिया बयानों ने भी आग में घी डालने का काम किया है। पीएम मोदी की बचत वाली अपील का असर बाजार के जानकारों का मानना है कि इस बार ग्लोबल कारणों से ज्यादा असर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'किफायत' वाली अपील का पड़ा है। पीएम मोदी ने रविवार को भारतीयों से पेट्रोल, डीजल और गैस का इस्तेमाल कम करने और कम से कम एक साल तक सोना न खरीदने का आग्रह किया था। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, पीएम की इस अपील ने बाजार का सेंटीमेंट बिगाड़ दिया है। लोगों से खर्च कम करने की बात कहने का मतलब है कि आने वाले समय में कंपनियों की कमाई और देश की इकोनॉमी पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। इन सेक्टर्स पर पड़ी सबसे ज्यादा मार पीएम मोदी की इस अपील का सबसे बुरा असर ज्वेलरी कंपनियों पर पड़ा है। टाइटन, कल्याण ज्वेलर्स, सेनको गोल्ड और पीसी ज्वेलर जैसे शेयरों में भारी गिरावट देखी गई क्योंकि लोगों को डर है कि सोने की डिमांड कम हो जाएगी। इसके अलावा मुथूट फाइनेंस और मणप्पुरम फाइनेंस जैसी गोल्ड लोन देने वाली कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव दिखा। इतना ही नहीं, पीएम द्वारा विदेशी दौरों से बचने की सलाह देने के बाद थॉमस कुक और ईजी ट्रिप प्लानर्स जैसी ट्रेवल कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली का माहौल बना रहा। बाजार को डर है कि अगर लोग कम खर्च करेंगे, तो कॉर्पोरेट अर्निंग्स यानी कंपनियों के मुनाफे पर इसका सीधा असर होगा। निवेशकों को 4 लाख करोड़ का नुकसान सबसे बड़ा असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर पड़ा। BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप पिछले सत्र के 473.5 लाख करोड़ रुपये से घटकर करीब 469.5 लाख करोड़ रुपये रह गया। यानी बाजार खुलने के कुछ ही समय में निवेशकों के लगभग 4 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए। अब सवाल है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि बाजार में इतनी बड़ी गिरावट आ गई? इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। इसे देखते हुए पीएम मोदी ने भी गोल्ड और पेट्रोल-डीजल को लेकर लोगों से अपील की है। अमेरिका और ईरान के बीच नहीं हो रही सुलह दरअसल, निवेशकों को उम्मीद थी कि दोनों देशों के बीच बातचीत से हालात सुधर सकते हैं। लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके बाद बाजार का मूड पूरी तरह बिगड़ गया। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर बातचीत पूरी तरह विफल होती है तो अमेरिका ईरान के खिलाफ और सख्त कदम उठा सकता है। इसी बीच इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने भी कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम अब भी बड़ा खतरा बना हुआ है। पीएम मोदी की अपील मिडिल ईस्ट संकट से दुनियाभर में एनर्जी की कीमतें आसमान पर हैं। इससे भारत का आयात घाटा लगातार बढ़ रहा है और रुपया गिर रहा है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से सोना न खरीदने और पेट्रोल-डीजल को बचाने की अपील की है। पीएम ने कहा कि हमारे पड़ोस मे जंग जल रही है, जिसका असर पूरी दुनिया समेत भारत पर भी पड़ रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे एक साल तक सोना न खरीदें और ईंधन की बचत पर ध्यान दें।

नया कारोबारी हफ्ता: विदेशी निवेश और महंगाई आंकड़ों पर टिकी नजरें

नई दिल्ली  सोमवार 11 मई से शेयर बाजार का नया कारोबारी हफ्ता शुरू होगा। विश्लेषकों के अनुसार आगामी हफ्ते में शेयर बाजार की दिशा (Stock Market Outlook for Next Week) अमेरिकी-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों से तय होगी। विश्लेषकों का कहना है कि रुपये-डॉलर की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार को प्रभावित करेंगी। ऑनलाइन ट्रेडिंग कंपनी एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि बाजार इस सप्ताह भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रति बेहद संवेदनशील रहेगा और निवेशकों का ध्यान अमेरिका-ईरान से संबंधित घटनाक्रमों पर रहेगा। कच्चे तेल पर रहेगी नजर पोनमुडी ने कहा कि ब्रेंट कच्चे तेल के दाम बाजार की दिशा तय करने वाला एक अहम कारक रहेगा। उन्होंने कहा, ‘‘यदि कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बनी रहती हैं या तनाव कम करने की दिशा में प्रगति होती है तो जोखिम वाले निवेश माध्यमों में राहत भरी तेजी देखी जा सकती है। वहीं तनाव बढ़ने की स्थिति में बाजार पर दबाव बना रह सकता है।’’ एक अन्य विशेषज्ञ के मुताबिक इस सप्ताह महंगाई के आंकड़े भी आने हैं जो बाजार के लिए महत्वपूर्ण होंगे। इस बीच, केनरा बैंक, टाटा पावर, भारती एयरटेल, डीएलएफ, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और जेएसडब्ल्यू स्टील जैसी कंपनियां सप्ताह के दौरान अपने तिमाही नतीजों की घोषणा करेंगी। और कौन-से फैक्टर्स रहेंगे अहम? मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार निकट भविष्य में भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रति बेहद संवेदनशील बने रहेंगे और बाजार व्यापक दायरे में कारोबार कर सकता है। खेमका ने कहा कि भारत के अप्रैल महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति (सीपीआई) के आंकड़े भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ब्याज दर नीति का संकेत देंगे, जबकि अमेरिका के सीपीआई और पीपीआई आंकड़े फेडरल रिजर्व की संभावित ब्याज दर कटौती, बॉन्ड प्रतिफल और वैश्विक जोखिम धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। कैसा रहा पिछला हफ्ता? बीते सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 414.69 अंक यानी 0.53 प्रतिशत मजबूत हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 178.6 अंक यानी 0.74 प्रतिशत के लाभ में रहा। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफआईआई) ने भी भारतीय बाजारों से निकासी जारी रखी है। इस महीने अब तक एफपीआई भारतीय शेयर बाजारों से 14,231 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट लिमिटेड के शोध प्रमुख संतोष मीणा ने कहा कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। साथ ही चौथी तिमाही के नतीजों का अंतिम चरण शेयर और क्षेत्र आधारित गतिविधियों को प्रभावित करेगा।  

ADB ने घटाया भारत का GDP अनुमान, महंगाई बढ़ने की चेतावनी

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान युद्ध का असर दुनिया पर पड़ा है और ये आगे भी बना रहेगा. विदेश से भारतीय इकोनॉमी और कच्चे तेल को लेकर एक बुरी खबर आई है. एशियन डेवलपमेंट बैंक यानी ADB के मुताबिक, Iran War की वजह से पैदा हुई ग्लोबल टेंशन का असर जारी रहेगा और कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती है. इकोनॉमिस्ट ने कहा है कि इसका असर भारत में भी देखने को मिलेगा और यहां पर महंगाई का बम फूट सकता है. इसके साथ ही एडीबी ने भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान में भी बड़ी कटौती की है. इतनी रहेगी कच्चे तेल की कीमत पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, एडीबी के चीफ इकोनॉमिस्ट अल्बर्ट पार्क ने कहा है कि मिडिल ईस्ट संकट के उम्मीद से अधिक लंबे समय तक चला, इसके कारण सप्लाई चेन में पैदा हुआ रुकावट से कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहने की आशंका है. उन्होंने कहा कि,'Crude Oil की ऊंची कीमतों की संभावना के साथ, नए आउटलुक को देखें, तो ये 2026 के लिए औसत कीमत 96 डॉलर प्रति बैरल रहेगी. 2027 में यह 80 डॉलर प्रति बैरल पर बनी रहनी चाहिए.'  अल्बर्ट के मुताबिक, भविष्य के अनुमानों के अनुसार अगले साल के लिए कीमतें पहले की तुलना में अधिक रहने का संकेत दे रही हैं.  भारत की GDP को लगेगा झटका भारत पर वेस्ट एशिया संकट के प्रभाव के बारे में बात करते हुए अल्बर्ट पार्क ने कहा कि इससे देश की जीडीपी वृद्धि (India's GDP Growth) में 0.6 फीसदी की कमी आएगी, जिससे यह 6.3 फीसदी पर आ जाएगी. गौरतलब है कि एशियाई विकास बैंक ने बीते अप्रैल महीने में अनुमान लगाया था कि भारत की जीडीपी ग्रोथ मौजूदा वित्त वर्ष में 6.9 फीसदी पर मजबूती से बनी रहेगी, जबकि मजबूत घरेलू डिमांड के कारण अगले वित्त वर्ष में बढ़कर 7.3 फीसदी हो जाएगी. पार्क ने राहत भरी बात भी कही कि इससे अगले वर्ष देश का विकास फिर से पटरी पर आ जाएगा. क्या फूटने वाला है महंगाई बम? Middle East War और Crude Oil Price के हाई बने रहने के चलते सिर्फ भारत की जीडीपी पर ही असर नहीं पड़ेगा. बल्कि देश में महंगाई का बम भी फूट सकता है. एडीडी अर्थशास्त्री ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष में India Inflation में भी काफी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. पहले अनुमान 4.5 फीसदी का जताया गया था, जिसे बढ़ाते हुए 6.9 फीसदी किया गया है. यानी महंगाई दर में सीधे 2.4 फीसदी का उछाल आ सकता है. देश में महंगाई बढ़ने के पीछे के कारणों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत आयातित तेल और गैस पर अधिक निर्भर है. अगर चीन को हटा दिया जाए, तो इस वर्ष ग्रोथ पर पड़ने वाला यह नकारात्मक 0.6 फीसदी पूरे क्षेत्र के लिए भी लगभग एक समान है. इकोनॉमिस्ट का कहना है कि फर्टिलाइजर की लागत बढ़ने से किसान कम इस्तेमाल को मजबूर होंगे, जिससे पैदावार कम होगी और साल के अंत में इसकी उपलब्धता भी कम हो जाएगी. इसका सीधा असर खाद्य पदार्थों की कीमतों (Food Price) पर पड़ेगा, लेकिन कितना असर पड़ेगा यह गैस आपूर्ति में व्यवधान पर निर्भर करेगा.

निफ्टी के लिए 23,500–25,000 का अहम रेंज, एक्सपर्ट की राय

नई दिल्ली भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी तनाव और वैश्विक राजनीतिक हलचलों के बीच शुक्रवार 8 मई को सेंसेक्स और निफ्टी लगातार दूसरे दिन गिरावट के साथ बंद हुए। बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में कमजोरी के कारण सेंसेक्स 516 अंक गिरकर 77,328 पर और निफ्टी 151 अंक फिसलकर 24,176 के स्तर पर आ गया। बाजार की इस अस्थिरता के बावजूद आनंद राठी (Anand Rathi) के टेक्निकल रिसर्च के सीनियर मैनेजर गणेश डोंगरे का मानना है कि घबराने की जरूरत नहीं है। उनके अनुसार, बाजार अब 'Buy-on-Dips' यानी हर गिरावट पर खरीदारी के मोड में है। सोमवार 11 मई 2026 के लिए उन्होंने तीन ऐसे शेयरों को चुना है जो निवेशकों को अच्छा मुनाफा दे सकते हैं। अगले हफ्ते के लिए बाजार का आउटलुक मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गणेश डोंगरे के मुताबिक, निफ्टी के लिए 23,500–23,800 का स्तर एक मजबूत सपोर्ट (सहारा) का काम करेगा, जबकि 24,800–25,000 की रेंज में बड़ी रुकावट (Resistance) देखी जा सकती है। अगर निफ्टी 24,800 के ऊपर टिकने में कामयाब रहता है, तो यह जल्द ही 25,300 के स्तर की ओर बढ़ सकता है। वहीं, बैंक निफ्टी के लिए 54,500–55,000 का स्तर अहम सपोर्ट है। एक्सपर्ट की टॉप 3 पिक्स (Top Picks for Monday) सोमवार के लिए गणेश डोंगरे ने इन तीन शेयरों में खरीदारी की सलाह दी है। 1- एमक्योर फार्मा (Emcure Pharmaceuticals):- खरीदें:- ₹1640 – ₹1660 की रेंज में टारगेट (लक्ष्य):- ₹1730 स्टॉप लॉस:- ₹1615 2- केफिन टेक (Kfin Technologies):- खरीदें:- ₹910 – ₹920 की रेंज में टारगेट (लक्ष्य):- ₹980 स्टॉप लॉस:- ₹890 3- मझगांव डॉक (Mazagon Dock Shipbuilders):- खरीदें:- ₹2640 – ₹2660 की रेंज में टारगेट (लक्ष्य):- ₹2750 स्टॉप लॉस:- ₹2580 निवेशकों के लिए जरूरी सुझाव एक्सपर्ट का कहना है कि आने वाला हफ्ता काफी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि निवेशक अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत और संस्थागत निवेशकों (FIIs/DIIs) की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखेंगे। बाजार में किसी भी बड़ी खबर से उतार-चढ़ाव (Volatility) बढ़ सकता है, इसलिए चुनिंदा शेयरों में ही निवेश करें और स्टॉप लॉस (Stop Loss) का सख्ती से पालन करें। अनुशासन के साथ निवेश करना ही मौजूदा बाजार में मुनाफे की कुंजी है।

देश की सबसे लोकप्रिय SUV: टाटा पंच ने फ्रॉन्क्स के साथ क्रेटा को पीछे छोड़ा

मुंबई  भारतीय वाहन बाजार में एसयूवी गाड़ियों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है और अप्रैल 2026 के बिक्री आंकड़ों ने यह साफ कर दिया है कि ग्राहकों की पसंद अब तेजी से बदल रही है। इस बार बिक्री के मोर्चे पर सबसे बड़ा धमाका टाटा पंच ने किया है। दमदार सुरक्षा, आकर्षक डिजाइन और किफायती कीमत के दम पर इस गाड़ी ने एक बार फिर देश की सबसे ज्यादा बिकने वाली एसयूवी बनने का गौरव हासिल कर लिया। दूसरी ओर मारुति की फ्रॉन्क्स ने भी ऐसा प्रदर्शन किया कि कई स्थापित मॉडलों की चिंता बढ़ गई। लंबे समय से बाजार में मजबूत पकड़ रखने वाली हुंडई क्रेटा को भी इस बार पीछे रहना पड़ा।  टाटा पंच ने फिर साबित की अपनी ताकत अप्रैल 2026 के दौरान टाटा पंच की बिक्री में शानदार उछाल देखने को मिला। कंपनी ने इस अवधि में 19 हजार से ज्यादा इकाइयों की बिक्री दर्ज की, जो पिछले साल की तुलना में काफी अधिक रही। बिक्री में यह बढ़ोतरी दिखाती है कि छोटे आकार की लेकिन मजबूत और सुरक्षित एसयूवी को ग्राहक तेजी से पसंद कर रहे हैं। टाटा पंच की लोकप्रियता के पीछे इसकी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, ऊंचा बैठने का अनुभव और शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक आसान संचालन को बड़ी वजह माना जा रहा है। कम कीमत में बेहतर सुविधाएं मिलने के कारण यह मध्यम वर्गीय परिवारों की पहली पसंद बनती जा रही है। मारुति फ्रॉन्क्स ने बढ़ाई प्रतिस्पर्धा इस बार बिक्री के आंकड़ों में सबसे ज्यादा चर्चा मारुति फ्रॉन्क्स की रही। कंपनी ने अप्रैल महीने में इसकी रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की और यह सीधे दूसरे स्थान पर पहुंच गई। पिछले वर्ष की तुलना में इसकी बिक्री में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली। फ्रॉन्क्स की सफलता का बड़ा कारण इसका आधुनिक डिजाइन, आकर्षक लुक और बेहतर ईंधन क्षमता मानी जा रही है। युवाओं के बीच यह एसयूवी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। खास बात यह है कि इसने कई पुराने और भरोसेमंद मॉडलों को पीछे छोड़ते हुए बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। टाटा नेक्सन की पकड़ अब भी बरकरार टाटा मोटर्स की एक और लोकप्रिय एसयूवी नेक्सन भी बिक्री के मामले में मजबूत स्थिति में रही। अप्रैल 2026 में इसकी बिक्री में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि यह शीर्ष दो स्थानों में जगह नहीं बना सकी, लेकिन तीसरे स्थान पर रहकर इसने बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी। नेक्सन लंबे समय से अपनी सुरक्षा और दमदार प्रदर्शन के लिए जानी जाती रही है। यही कारण है कि ग्राहकों का भरोसा इस गाड़ी पर लगातार बना हुआ है। पेट्रोल, डीजल और विद्युत विकल्पों में उपलब्ध होने के कारण यह अलग-अलग वर्ग के ग्राहकों को आकर्षित कर रही है। हुंडई क्रेटा की रफ्तार पड़ी धीमी एक समय भारतीय बाजार की सबसे लोकप्रिय एसयूवी मानी जाने वाली हुंडई क्रेटा के लिए अप्रैल का महीना ज्यादा अच्छा साबित नहीं हुआ। बिक्री में गिरावट ने साफ कर दिया कि अब बाजार में मुकाबला पहले से कहीं ज्यादा कड़ा हो चुका है। क्रेटा लंबे समय तक अपने प्रीमियम स्वरूप और आधुनिक सुविधाओं की वजह से ग्राहकों की पसंद बनी रही, लेकिन अब कम कीमत में ज्यादा सुविधाएं देने वाले नए मॉडल इसकी चुनौती बढ़ा रहे हैं। बिक्री में आई गिरावट कंपनी के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है। महिंद्रा स्कॉर्पियो की मांग में भी आई नरमी महिंद्रा की लोकप्रिय एसयूवी स्कॉर्पियो भी इस बार बिक्री के मामले में थोड़ी पीछे नजर आई। हालांकि इसकी मांग पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है, लेकिन पिछले वर्ष की तुलना में बिक्री में हल्की गिरावट दर्ज की गई। ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में अब भी स्कॉर्पियो की मजबूत पहचान बनी हुई है, लेकिन नए मॉडलों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा इसका असर दिखाने लगी है। ब्रेजा और वेन्यू ने भी दिखाया दम मारुति ब्रेजा की बिक्री में इस बार गिरावट जरूर देखने को मिली, लेकिन इसके बावजूद यह शीर्ष गाड़ियों की सूची में अपनी जगह बनाए रखने में सफल रही। दूसरी ओर हुंडई वेन्यू ने शानदार वापसी करते हुए बाजार में मजबूत प्रदर्शन किया। इसकी बिक्री में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे साफ है कि ग्राहकों का भरोसा एक बार फिर इस गाड़ी की ओर बढ़ रहा है। वहीं किआ सेल्टोस और किआ सोनेट ने भी बाजार में अच्छा प्रदर्शन किया। दोनों एसयूवी की बिक्री में मजबूती देखने को मिली, जिससे यह साफ हो गया कि भारतीय वाहन बाजार में अब प्रतिस्पर्धा पहले से कहीं अधिक तेज हो चुकी है। एसयूवी बाजार में लगातार बढ़ रही चुनौती अप्रैल 2026 के बिक्री आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय ग्राहक अब केवल बड़े नामों पर भरोसा नहीं कर रहे, बल्कि सुरक्षा, सुविधाएं, कीमत और ईंधन बचत जैसे पहलुओं को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। आने वाले महीनों में यह प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है। नई तकनीक, बेहतर सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं के साथ कंपनियां लगातार नए मॉडल बाजार में उतार रही हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में कौन सी कंपनी ग्राहकों का सबसे ज्यादा भरोसा जीतने में सफल रहती है।

सोने-चांदी की कीमतों में उछाल, वैश्विक अस्थिरता से बढ़े दाम

मुंबई  वैश्विक स्तर पर अस्थिरता के चलते सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है और कीमतों में शुक्रवार को 0.81 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 जून 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,52,261 रुपए के मुकाबले 411 रुपए बढ़कर 1,52,672 रुपए पर खुला। सुबह 9:43 पर यह 471 रुपए या 0.31 प्रतिशत की मजबूती के साथ 1,52,732 रुपए पर था।अब तक के कारोबार में सोने ने 1,52,672 रुपए का न्यूनतम स्तर और 1,53,103 रुपए का उच्चतम स्तर बनाया है। चांदी का 3 जुलाई 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछ्ली क्लोजिंग 2,58,540 रुपए के मुकाबले 1,445 रुपए की बढ़त के साथ 2,59,999 रुपए पर खुला।खबर लिखे जाते समय यह 2,118 रुपए या 0.82 प्रतिशत की मजबूती के साथ 2,60,658 रुपए पर था। अब तक के कारोबार में चांदी का न्यूनतम स्तर 2,59,999 रुपए और उच्चतम स्तर 2,61,811 रुपए रहा है।अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी में तेजी देखी जा रही है। कॉमेक्स पर सोना 0.28 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,725 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.17 प्रतिशत की मजबूती के साथ 80.30 डॉलर प्रति औंस पर थी। सोने और चांदी की कीमतों में तेजी की वजह वैश्विक स्तर पर अस्थिरता का बढ़ना है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर से बढ़ने के चलते इसमें इजाफा हुआ है। इससे सुरक्षित माने जाने वाले सोने और चांदी की खरीद को बढ़ावा मिल रहा है। हालांकि, शांति के लिए दोनों देशों के बीच बातचीत लगातार जारी है और उम्मीद की जा रही है कि एक अस्थायी समझौता जल्द ही हो सकता है। अमेरिका और ईरान में तनाव बढ़ने के कारण भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला। इस दौरान सेंसेक्स 212.58 अंक या 0.27 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 77,631.94 और निफ्टी 93 अंक या 0.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,233.65 पर था।

शराब और बीयर की कीमत बढ़ने की संभावना, 20% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव

मुंबई  पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब सिर्फ कच्चे तेल या शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत के शराब उद्योग पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ने लगा है। देश की कई बड़ी शराब और बीयर कंपनियों ने राज्य सरकारों से कीमतें बढ़ाने की मांग की है। कंपनियों का कहना है कि वेस्ट एशिया संकट के कारण सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे बोतल, कैन, पैकेजिंग और ट्रांसपोर्टेशन की लागत तेजी से बढ़ गई है। यही वजह है कि अब इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL), बीयर और वाइन की कीमतों में बढ़ोतरी की मांग जोर पकड़ रही है। देश की प्रमुख इंडस्ट्री संस्था (Confederation of Indian Alcoholic Beverage Companies-CIABC) और (Brewers Association of India) ने कई राज्यों को पत्र लिखकर राहत की मांग की है। बीयर कंपनियों के संगठन BAI ने सरकारों से 15% से 20% तक कीमतें बढ़ाने की अनुमति मांगी है ताकि बढ़ती लागत का कुछ बोझ कम किया जा सके। संगठन के डायरेक्टर जनरल विनोद गिरी (Vinod Giri) के मुताबिक, वेस्ट एशिया संकट के बाद ग्लास बोतलों की कीमत करीब 20% तक बढ़ गई है, जबकि पेपर कार्टन लगभग दोगुने महंगे हो चुके हैं। इसके अलावा LDPE, BOPP और चिपकाने वाले मटेरियल्स की कीमतों में भी 20-25% तक की बढ़ोतरी हुई है। सबसे ज्यादा दबाव ग्लास उद्योग पर देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद स्थित ग्लास मैन्युफैक्चरिंग हब में गैस सप्लाई कम होने से कई फैक्ट्रियां संकट में हैं। कंपनियों का कहना है कि उन्हें अब महंगे LNG और LPG का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे उत्पादन लागत और बढ़ गई है। बीयर कंपनियों के सामने एल्यूमीनियम कैन की कमी भी बड़ी चुनौती बन रही है क्योंकि मिडिल ईस्ट से एल्यूमीनियम सप्लाई प्रभावित हुई है। इंडस्ट्री को डर है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले महीनों में कैन और ग्लास की भारी कमी हो सकती है। इस संकट का असर सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं है। ट्रांसपोर्ट और फ्रेट लागत भी करीब 10% बढ़ चुकी है, जबकि डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने आयात को और महंगा बना दिया है। अनंत एस अय्यर (Anant S Iyer) का कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव ने शराब उद्योग पर महंगाई का बड़ा दबाव बना दिया है। कंपनियों ने सरकारों से अंतरिम राहत के तौर पर टैक्स और मैन्युफैक्चरिंग लेवी में कटौती की भी मांग की है। अगर सरकारें कीमत बढ़ाने की अनुमति देती हैं, तो आने वाले समय में बीयर, व्हिस्की और वाइन जैसी शराबों के दाम आम ग्राहकों के लिए और महंगे हो सकते हैं।

Silver Price अपडेट: हाई से ₹2 लाख टूटी चांदी, 3 दिन में बढ़ी ₹13,000; सोने के भाव भी देखें

 नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतें (Gold-Silver Rate) हाई से क्रैश होने के बाद अब एक बार फिर से रफ्तार पकड़े हुए नजर आ रही हैं. इस सप्ताह के पहले कारोबारी दिन जोरदार गिरावट के बाद अचानक दोनों कीमती धातुओं के भाव लगातार बढ़ रहे हैं. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर अपने लाइफ टाइम हाई लेवल से 2 लाख रुपये से अधिक सस्ती हो चुकी चांदी की कीमत सिर्फ 3 दिन में 13000 रुपये से ज्यादा बढ़ चुकी है. सोना भी कुछ कम नहीं है और इसकी चमक में भी तेज इजाफा हो रहा है।  चांदी फिर मारने लगी उछाल  MCX Silver Price पर नजर डालें, तो गुरुवार को खुलने के साथ ही इसकी कीमत में फिर से उछाल आया है. बीते कारोबारी दिन 2,53,265 रुपये पर क्लोज हुआ वायदा चांदी ओपनिंग के साथ ही उछलकर 2,57,055 रुपये पर पहुंच गई. इस सप्ताह पहले दिन सोमवार को जरूर सिल्वर प्राइस टूटा था और 2,43,895 रुपये पर आ गई थी, लेकिन अब सिर्फ 3 दिन में ही इसका भाव 13,160 रुपये उछल चुका है।  इससे पहले एमसीएक्स पर चांदी अपने हाई लेवल से लगातार टूटती हुई नजर आ रही थी. अमेरिका-ईरान में तेज जंग के बावजूद इसका भाव बढ़ने के बजाय कम हो रहा था. बता दें कि जनवरी महीने में 3 जुलाई की एक्सपायरी वाली 1 Kg Silver Price वायदा कारोबार में अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए 4 लाख रुपये का ऐतिहासिक स्तर पार कर गई थी और 4,57,328 रुपये पर जा पहुंची थी. लेकिन इस स्तर पर पहुंचने के बाद से ये लगातार सस्ती हुई और ताजा बढ़ोतरी के बावजूद 2,00,273 रुपये सस्ती मिल रही है।  सोना भी लगातार भाग रहा न सिर्फ चांदी की कीमत में उछाल देखने को मिल रहा है, बल्कि कीमती पीली धातु सोने का भाव भी बढ़ रहा है और ये महंगा होता जा रहा है. बुधवार को 5 जून की एक्सपायरी वाले गोल्ड का रेट एमसीएक्स पर 1,52,132 रुपये पर क्लोज हुआ था और गुरुवार को ओपनिंग के साथ ही 1,52,887 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया. चांदी की तरह ही वायदा सोना भी मंगलवार को 1,49,339 रुपये के भाव से सिर्फ तीन दिनों में अब तक 3548 रुपये महंगा हो गया है।  अपने हाई से अब इतना सस्ता Gold भले ही इस सप्ताह MCX Gold Rate तेज रफ्तार से भागता हुआ नजर आ रहा है और रोज इसका भाव बढ़ रहा है, लेकिन अगर सोने के लाइफ टाइम हाई लेवल से तुलना करें, तो अभी भी ये कीमती धातु काफी सस्ती मिल रही है. जनवरी महीने में ही चांदी के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए गोल्ड रेट भी 2,02,984 रुपये के हाई पर पहुंचा था और इस लेवल से अब भी 10 Gram 24 Karat Gold Rate 50,097 रुपये सस्ता बना हुआ है। 

2026 QJ Motor SRV 300 मोटरसाइकिल भारत में हुई पेश, कीमत और फीचर्स की पूरी जानकारी

मुंबई  दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी QJ Motor India ने भारत में अपडेटेड QJ SRV 300 को लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इस बाइक को 3.29 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) की कीमत पर उतारा है. नई SRV 300 में मैकेनिकल तौर पर कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसमें सब-300cc सेगमेंट में एक अनोखा V-ट्विन इंजन इस्तेमाल किया गया है, जो इसकी सबसे बड़ी खासियत (USP) है।  नई QJ SRV 300 का इंजन साल 2026 के लिए, नई SRV 300 में वही 296cc, V-ट्विन इंजन इस्तेमाल किया गया है, जो 9,000 rpm पर 29.9 bhp की पावर और 5,000 rpm पर 26 Nm का अधिकतम टॉर्क प्रदान करता है. यह इंजन 6-स्पीड ट्रांसमिशन और स्लिपर क्लच के साथ जोड़ा जाता है।  नई QJ SRV 300 के कलर ऑप्शन QJ Motor ने 2026 SRV 300 में कुछ छोटे-मोटे कॉस्मेटिक अपडेट किए हैं, जिनमें एक नया डुअल-एग्जॉस्ट डिज़ाइन, अपडेटेड डेकल्स, नए कलर ऑप्शन और एक बदला हुआ इंस्ट्रूमेंट कंसोल शामिल है. इसके अलावा, नई QJ SRV 300 दो कलर ऑप्शन में पेश किया गया है, जिनमें मैट ब्लैक या ग्लॉसी रेड कलर शामिल हैं।  नई QJ SRV 300 का आकार इसके आकार में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसका वजन 164 kg कर्ब वेट, 160 mm का ग्राउंड क्लीयरेंस, 700 mm सीट हाइट और 14-लीटर का फ्यूल टैंक दिया गया है. यह बाइक 16-इंच के आगे और 15-इंच के रियर व्हील पर चलती है. ब्रेकिंग के लिए बाइक में आगे की ओर 280 mm की सिंगल डिस्क और पीछे की तरफ 240 mm की सिंगल डिस्क लगाई गई है।  इसके साथ ही इसमें डुअल-चैनल ABS का सपोर्ट भी मिलता है. सस्पेंशन में आगे की तरफ अपसाइड-डाउन फोर्क और पीछे की तरफ ट्विन कॉइल स्प्रिंग ऑयल डैम्प्ड शॉक्स शामिल हैं. 2026 के लिए, SRV 300 की कीमत को भी अपडेट किया गया है, जिससे यह उस कीमत के करीब पहुंच गई है, जो नई GST दरों के लागू होने से पहले थी।  नई QJ SRV 300 की कीमत इससे पहले, SRV 300 की कीमत 3.19 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) थी. लेकिन जब आदिश्वर ऑटो राइड इंडिया ने GST का फ़ायदा ग्राहकों तक पहुंचाया, तो इसकी कीमत घटकर 1.97 लाख रुपये हो गई. इस बाइक को अब 3.29 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) की अपडेटेड कीमत पर उतारा गया है, जिसके चलते QJ Motor SRV 300 असल में थोड़ी और महंगी हो गई है।