samacharsecretary.com

भारत में स्टारलिंक की एंट्री पर फिर भिड़े मस्क-अंबानी समर्थक, कीमतों और प्रतिस्पर्धा पर छिड़ी बहस

नई दिल्ली स्पेसएक्स के चीफ एलन मस्क ने भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस स्टारलिंक शुरू करने की मांग एक बार फिर उठाई है। उन्होंने कहा कि भारतीय बाजार में कंपटीशन बढ़ने से आम लोगों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे और इसका फायदा ग्राहकों को होगा। मस्क ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी पर भी निशाना साधा। उन्होंने अंबानी के समर्थकों के तर्कों को विरोधाभासी बताते हुए उन्हें बेतुका दोहरापन और बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई बातें करार दिया। मस्क की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब वह भारत में स्टारलिंक की शुरुआत में हो रही देरी को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। रिलायंस देश के दूरसंचार क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में शामिल है। एलन मस्क ने रविवार को एक्स पर लिखा कि स्टारलिंक के भारत में आने से आम नागरिकों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे। उन्होंने कहा कि इससे अंबानी का मुनाफा कम हो सकता है, लेकिन उनका कारोबार बंद नहीं होने वाला। अगर भारत में स्टारलिंक की सेवाएं महंगी होंगी तो लोग उनका इस्तेमाल नहीं करेंगे। ऐसे में कंपनी को अपनी कीमतें ग्राहकों की पहुंच के मुताबिक रखनी होंगी। उन्होंने अंबानी के इंटरनेट कारोबार का समर्थन करने वालों के तर्कों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ दावा किया जाता है कि स्टारलिंक भारत में अंबानी की बेहद कम कीमत वाली सेवाओं से मुकाबला नहीं कर पाएगी। दूसरी तरफ उसे इतना ताकतवर प्रतिस्पर्धी बताया जाता है कि उससे मौजूदा कारोबार को खतरा हो सकता है। अंबानी से जुड़े कारोबार को लेकर पोस्ट एलन मस्क ने शनिवार को भी अंबानी से जुड़े कारोबार को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने कुछ मीडिया रिपोर्टों के स्क्रीनशॉट शेयर किए। इनमें आरोप लगाया गया कि रिलायंस से वित्तीय मदद पाने वाली कंपनी ने सोशल मीडिया पर भारतीय जनता पार्टी के चुनावी अभियानों को बढ़ावा देने में मदद की थी। मस्क ने साल 2022 की अल जजीरा की एक रिपोर्ट भी शेयर की, जिसका टाइटल था कि रिलायंस से फंड पाने वाली कंपनी फेसबुक पर बीजेपी के अभियानों को कैसे बढ़ावा देती है। इसके अलावा, मस्क ने द इंडियन एक्सप्रेस की 2024 की एक रिपोर्ट को भी शेयर किया। इसमें रिलायंस से जुड़ी कंपनी क्विक सप्लाई पर चुनावी बॉन्ड के जरिए बीजेपी को 385 करोड़ रुपये और शिवसेना को 25 करोड़ रुपये देने की बात कही गई थी। रिलायंस ने इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इससे पहले मस्क ने एक्स पर व्यंग्य करते हुए अंबानी को 'प्रधानमंत्री अंबानी’ कहा था और उन पर एकाधिकार बचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। भारत ने खारिज किया मस्क का दावा दूसरी ओर, भारत सरकार ने गुरुवार को मस्क के उस दावे को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने कहा कि भारत में कुछ बड़े कारोबारी स्टारलिंक की शुरुआत में बाधा डाल रहे हैं। संचार मंत्रालय ने साफ किया कि देश में सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए नियम निष्पक्ष हैं और किसी कंपनी के साथ भेदभाव नहीं किया जाता। मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर प्रसारित उन आरोपों को भी निराधार और गलत बताया, जिनमें नियामक व्यवस्था या उसके लागू करने के तरीके पर सवाल उठाए गए थे।

शेयर बाजार में बड़ी गिरावट का खतरा! रे डेलियो की चेतावनी- अब फूट सकता है AI का बुलबुला

मुंबई  दुनियाभर के शेयर बाजारों में भारी उथल-पुथल जारी है. अमेरिका हो, जापान हो, कोरिया हो या फिर भारत हर ओर तबाही मची हुई है और शेयर मार्केट में पैसे लगाने वालों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. गुरुवार को भी सेंसेक्स-निफ्टी क्रैश हो गए और निवेशकों के करीब 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा स्वाहा हो गए।  शेयर बाजारों में आए इस भूचाल के बीच विदेशी अरबपति रे डेलियो ने एक बड़ी चेतावनी दी है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़ी हुई है. उन्होंने कहा है कि 'एआई का क्लासिक बुलबुला' फूटने की कगार पर पहुंच गया है. इसके पीछे उन्होंने तमाम कारण भी बताए हैं।  US में ब्याज दरें बढ़ने का असर अरबपति रे डेलियो के मुताबिक, एआई का बुलबुला फूटने के पीछे बड़े कारणों में एक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में किया जाने वाला इजाफा है. अब निवेशकों को अपनी संपत्ति को नकदी में बदलने की आवश्यकता महसूस होने लगी है. उन्होंने कहा कि भारतीय निवेशक भी विदेशों में हो रहे घटनाक्रमों पर पैनी नजर रखेंगे, क्योंकि भारतीय शेयर बाजार 2025 के बाद से सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले प्रमुख बाजारों में से एक है।  ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, सिंगापुर में फोर्ब्स ग्लोबल सीईओ कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए डेलियो ने कहा कि AI को वित्त पोषित करने के लिए भारी मात्रा में कर्ज लिया जा रहा है और ब्याज दरों में लगातार बढ़ोतरी के साथ अब यह बुलबुला फूटना शुरू हो सकता है. ब्रिजवॉटर के फाउंडर ने कहा, 'हम चक्र के उस चरण में हैं, जो इससे पहले है लेकिन इस संकट के करीब पहुंच रहा है।  डेलियो ने गिनाए ये आंकड़े अरबपति ने एआई की बुलबुला फूटने की चेतावनी देते हुए कुछ आंकड़े सामने रखे. उन्होंने कहा कि आंकड़ों से पता चला कि 10-वर्षीय यील्ड बढ़कर 5.368 प्रतिशत हो गई, जो 2002 के बाद से नहीं देखी गई थी. इस प्रवृत्ति के पीछे कई कारकों का मजबूत संयोजन है, जिनमें सरकारी कर्ज का बढ़ता बोझ, व्यापार का विखंडन, युद्ध से प्रेरित महंगाई का दबाव और AI के बुनियादी ढांचे से संबंधित पर्याप्त पूंजी जरूरतें. ये सभी कारक मिलकर ग्लोबल सेविंग की उपलब्धता को कम कर रहे हैं और संतुलन वास्तविक ब्याज दरों को बढ़ा रहे हैं।  रिपोर्ट में घरेलू ब्रोकरेज फर्म के हवाले से कहा गया है कि एआई-संचालित प्रोडक्शन लाभों से मुद्रास्फीति तेजी से बेअसर हो जाएगी, यह आशावादी धारणा अनिश्चित बनी हुई है. कई एआई-संबंधित व्यवसायों के बीच सीडीएस स्प्रेड बढ़ रहा है. अगर लाभ तत्काल के बजाय बाद में मिलने वाले साबित होते हैं, तो एआई पूंजीगत व्यय के क्राउडिंग-आउट प्रभाव कम से कम 2028 तक बने रह सकते हैं, जिससे महंगाई और वास्तविक ब्याज दरें वर्तमान अनुमान से अधिक रहेंगी।  भारतीय शेयर का गुरुवार को क्रैश  एआई को लेकर जहां विदेशी अरबपति शेयर बाजारों के लिए अलर्ट जारी कर रहे हैं, तो वहीं भारतीय शेयर बाजार पर नजर डालें, तो गुरुवार को सेंसेक्स-निफ्टी शुरुआत से अंत तक क्रैश होते रहे. बाजार बंद होने पर BSE Sensex 1045 अंक गिरकर 71,593 के लेवल पर बंद हुआ, तो वहीं NSE Nifty 371 अंक की गिरावट लेकर 22,231 पर क्लोज हुआ। 

इस तेल कंपनी का झटका, महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल

नई दिल्ली अगर पेट्रोल या डीजल भरवाने के लिए पंप पर जा रहे हैं तो ये खबर आपके काम की हो सकती है। दरअसल, रिलायंस इंडस्ट्रीज की सपोर्ट वाली जियो-बीपी ने अपने पंप पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की है। इससे पहले, नायरा एनर्जी ने भी अपने पंप पर तेल की कीमतों में इजाफा किया था। कहने का मतलब है कि नायरा एनर्जी या जियो-बीपी के पंप पर बिना जानकारी के जाएंगे तो आपको अपनी जेब ढीली करनी पड़ सकती है। कितनी हुई बढ़ोतरी मिंट की खबर के मुताबिक जियो-बीपी ने पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। फ्यूल रिटेलर्स के मुताबिक रविवार से लागू हुई इस बढ़ोतरी के बाद पंजाब में पेट्रोल लगभग 108.54 रुपये प्रति लीटर और डीजल 99.19 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। हरियाणा में जियो-बीपी पंप पेट्रोल लगभग 109.80 रुपये प्रति लीटर और डीजल 97.75 रुपये प्रति लीटर की दर से बेच रहे हैं। बता दें कि रोजनेफ्ट (Rosneft) की सपोर्ट वाली नायरा एनर्जी ने 3 अक्टूबर को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में क्रमशः 5 रुपये और 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। साल में पहली बार बढ़े दाम ईरान और अमेरिका के बीच फरवरी में जंग छिड़ने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया गया। इसके बाद तेल की सप्लाय चेन पर बड़ा असर पड़ा। इस माहौल में अन्य तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई थीं लेकिन जियो-बीपी ने इस साल पहली बार कीमतें बढ़ाई हैं। जियो-बीपी, मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज और ब्रिटेन की बीपी का ज्वाइंट वेंचर है और देश में इसके 2,227 पेट्रोल पंप हैं। ईंधन की बिक्री पर पाबंदियां जियो-बीपी ने सितंबर में डीजल की बिक्री पर प्रति ट्रांजैक्शन 50 लीटर की सीमा तय की थी। जियो-बीपी ने हाल में कहा था कि उसके सभी पेट्रोल पंप चालू हैं और वहां पर्याप्त ईंधन उपलब्ध है। उसने कहा था कि मौजूदा मांग को देखते हुए वह परिवहन और अन्य जरूरतों के लिए ईंधन की समान उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठा रही है।

UNCTAD की चेतावनी, वैश्विक आर्थिक संकट के बीच भारत की ग्रोथ 7.3% रहने की उम्मीद

नई दिल्ली दुनिया संकट में हैं, ग्लोबल इकोनॉमी की ग्रोथ पर वेस्ट एशिया में तनाव का बेहद बुरा असर देखने को मिल सकता है. ये चेतावनी संयुक्त राष्ट्र के व्यापार और विकास निकाय यूएनसीटीएडी (UNCTAD Warning Global Economy) ने दी है. इसमें अलर्ट किया गया है कि मध्य पूर्व में टेंशन के चलते पैदा हुआ एनर्जी संकट सबसे बड़ा खतरा बना है और इससे विश्व अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ रहा है, जिसके चलते ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोख रेट बीते साल के 2.9% से घटकर 2026 में 2.6% रह सकती है. एनर्जी प्राइस का दुनिया की रफ्तार पर असर UNCTAD के मुताबिक, वेस्ट एशिया संघर्ष के कारण उत्पन्न ऊर्जा संकट का बुरा असर दुनिया की इकोनॉमिक रफ्तार पर पड़ रहा है. अपनी व्यापार और विकास रिपोर्ट में इसने जहां ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ रेट बीते साल के 2.9% से घटकर इस साल 2.6% होने का अनुमान जाहिर किया है. तो वहीं कहा है कि वस्तुओं और सेवाओं के वैश्विक व्यापार में इस वर्ष स्थिर कीमतों पर 4% की वृद्धि होने का अनुमान है. हालांकि, व्यापार में अनुमानित वृद्धि का अधिकांश हिस्सा हाई एनर्जी कॉस्ट के कारण होने की उम्मीद है. संकट में भी नहीं रुकेगा भारत यूएनसीटीएडी का ताजा अनुमान बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों, वैश्विक व्यापार के पैटर्न में बदलाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के उछाल से जुड़े वित्तीय जोखिमों को लेकर चिंताओं के बीच आया है. UNCTAD ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 2026 में वैश्विक आर्थिक विकास में एशिया का योगदान 59% रहने का अनुमान है, जिसमें भारत की ग्रोथ रेट सबसे अधिक 7.3% रहेगी. इसके अलावा चीन की 4.5% और इंडोनेशिया की 5.2% रहने की उम्मीद है. ये अनुमान वेस्ट एशिया संकट और Energy Price Hike से व्यापक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे दबाव के बावजूद ग्लोबल ग्रोथ को समर्थन देने में एशिया की भूमिका को प्रदर्शित करते हैं. US-चीन से बदला व्यापार का गणित रिपोर्ट में अमेरिका-चीन के बीच तनाव जारी रहने से व्यापार में बदलाव का जिक्र किया गया है. यूएनसीटीएडी ने कहा कि 2024 से चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच व्यापार में 20% से अधिक की गिरावट आई है, जबकि पूर्वी एशिया ने चीन और उत्तरी अमेरिका दोनों के साथ व्यापार का विस्तार किया है. एजेंसी की ओर से चेतावनी दी गई है कि व्यापार और निवेश पर लगे प्रतिबंधों के कारण नई कंपनियों के लिए रणनीतिक क्षेत्रों में प्रवेश करना लगातार कठिन होता जा रहा है. UNCTAD के अनुसार, निर्यात नियंत्रण, निवेश की जांच और सप्लाई चेन की स्थितियां नए एंट्री लेने वाले बिजनेस के लिए रणनीतिक क्षेत्रों तक पहुंच जटिल बना रही है. AI को लेकर ये बड़ा अलर्ट एनर्जी प्राइस से लेकर अमेरिका-चीन में तनाव (US-China Tension) के असर का जिक्र करने के साथ ही एजेंसी की एआई के बढ़ते उपयोग से व्यापार के अवसर और वित्तीय जोखिम दोनों के बारे में अनुमान जाहिर किया है. UNCTAD के अनुसार, सेमीकंडक्टर समेत AI से संबंधित उत्पाद, माल व्यापार के मुख्य चालक के रूप में उभरे हैं. हालांकि, एआई से जुड़े व्यापार में ग्रोथ का मतलब यह नहीं है कि व्यापक विकास में भी स्वतः ही लाभ होगा. रिपोर्ट में यह चेतावनी भी दी गई है कि एआई की बढ़ती लोकप्रियता वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिम पैदा कर सकती है, क्योंकि बाजार तेजी से कुछ ही कंपनियों पर निर्भर होते जा रहे हैं. हालांकि, एजेंसी ने इन कंपनियों के नामों का खुलासा नहीं किया है.

यूपी में दिवाली और होली पर मुफ्त गैस सिलेंडर, सरकार खर्च करेगी 2142 करोड़ रुपये

लखनऊ योहारी सीजन के माहौल में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एक बार फिर से फ्री एलपीजी सिलेंडर देने का ऐलान किया है। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके तहत सरकार वित्त वर्ष 2026-27 में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की लाभार्थियों को दो निःशुल्क एलपीजी सिलेंडर भरवाने की सुविधा देगी। इस योजना के तहत करोड़ों लोगों को केंद्र की सरकार 300 रुपये की सब्सिडी भी देती है। आइए डिटेल में योजना के बारे में जान लेते हैं। क्या कहा योगी सरकार ने? राज्य सरकार की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, राज्य सरकार पिछले वित्तीय वर्षों में योजना के लाभार्थियों को होली और दीपावली पर दो चरणों में निःशुल्क सिलेंडर रिफिल उपलब्ध कराती रही है तथा इसी क्रम में चालू वित्त वर्ष में भी दो बार निःशुल्क सिलेंडर भरवाने की सुविधा दी जाएगी। पहले चरण में अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक और दूसरे चरण में जनवरी से मार्च 2027 तक निःशुल्क एलपीजी सिलेंडर भरवाया जा सकता है। इस योजना पर राज्य सरकार का कुल अनुमानित व्यय 2,142.78 करोड़ रुपये होगा। किसे मिलेगा लाभ? योजना का लाभ प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की उन्हीं लाभार्थियों को मिलेगा, जिनके बैंक खाते आधार से जुड़े होंगे और आधार का प्रमाणीकरण पूरा होगा। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना मई 2016 में शुरू की गई। योजना का पूरे देश में विस्तार हुआ और सितंबर 2019 तक इसने 8 करोड़ कनेक्शन का शुरुआती लक्ष्य हासिल कर लिया। बाकी बचे घरों तक पहुंचने के लिए, अगस्त 2021 में उज्ज्वला 2.0 शुरू की गई, जिसका लक्ष्य 1 करोड़ और कनेक्शन देना था। यह लक्ष्य जनवरी 2022 तक पूरा हो गया। सरकार ने 60 लाख और कनेक्शन को मंजूरी दी, जिससे दिसंबर 2022 तक इनकी संख्या 1.60 करोड़ हो गई। जुलाई 2024 में 75 लाख और कनेक्शन पूरे किए गए। इसके बाद वित्त वर्ष 2025–26 में 25 लाख और कनेक्शन को मंजूरी दी गई। बता दें कि वर्तमान में 10.57 करोड़ से अधिक साफ कुकिंग गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं। केंद्र सरकार भी देती है सब्सिडी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के उपभोक्ताओं को केंद्र सरकार भी 300 रुपये की सब्सिडी देती है। मई 2022 में सरकार ने उज्ज्वला योजना के उपभोक्ताओं को 14.2 किलोग्राम सिलेंडर पर 200 रुपये (और 5 किलोग्राम कनेक्शन के लिए आनुपातिक रूप से निर्धारित) सब्सिडी देनी शुरू की, जिसे बाद में बढ़ाकर 14.2 किलोग्राम सिलेंडर पर 300 रुपये (और 5 किलोग्राम कनेक्शन के लिए आनुपातिक रूप से निर्धारित) कर दिया गया। कैसे करें अप्लाई -आधिकारिक वेबसाइट pmuy.gov.in पर जाएं और “Apply for New PMUY Connection” विकल्प चुनें। -इंडियन ऑयल, भारत गैस या एचपी गैस में से अपनी पसंद की कंपनी चुनकर आवेदन की प्रक्रिया पूरी करें। चाहें तो सीधे संबंधित गैस एजेंसी में फॉर्म जमा कर सकती हैं। – आधार कार्ड, राशन कार्ड या परिवार की जानकारी वाला सरकारी दस्तावेज, बैंक पासबुक या कैंसिल चेक और निर्धारित घोषणा-पत्र तैयार रखें। – आवेदन और दस्तावेजों की जांच के बाद पात्रता के अनुसार कनेक्शन जारी किया जाता है। बता दें कि योजना में आवेदक महिला की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए। परिवार के किसी सदस्य के नाम पहले से LPG कनेक्शन नहीं होना चाहिए।

TVS ग्रुप में बंटवारे की लड़ाई, बेटे-बेटी के बीच बिजनेस विभाजन को लेकर वेणु-मल्लिका में विवाद

बेंगलुरु  टीवीएस (TVS) समूह के चेयरमैन एमेरिटस वेणु श्रीनिवासन के परिवार में संपत्ति के बंटवारे और उत्तराधिकार को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं. परिवार की लड़ाई अब सार्वजनिक हो गई है. दरअसल, वेणु श्रीनिवासन और उनकी पत्नी मल्लिका श्रीनिवासन के बीच बच्चों सुदर्शन श्रीनिवासन और लक्ष्मी वेणु के बीच परिवारिक बिजनेस के विभाजन को लेकर गहरा विवाद खड़ा हो गया है।  इस पारिवारिक कलह की मुख्य वजह यह तय करना है कि क्या अगली पीढ़ी को दिए गए व्यवसायों का प्रबंधन ही परिवार की कुल संपत्ति में उनके मालिकाना हक को तय करता है या नहीं।  फिलहाल बेटा सुदर्शन श्रीनिवासन TVS मोटर कंपनी और TVS होल्डिंग्स की कमान संभाल रहे हैं. जबकि बेटी लक्ष्मी वेणु सुंदरम क्लेटन (SCL) का प्रबंधन देख रही हैं, जो कि कंपोनेंट्स और डाई-कास्टिंग व्यवसाय से जुड़ी है।  लड़ाई की असली वजह  विवाद का एक बड़ा कारण दोनों कंपनियों के बाजार मूल्यांकन में आया बड़ा अंतर है. TVS मोटर की मार्केट कैप बढ़कर लगभग ₹1.83 लाख करोड़ तक पहुंच गई है. जिसमें पिछले तीन वर्षों के दौरान लगभग चार गुना बढ़ोतरी हुई है. जबकि सुंदरम क्लेटन (SCL) की मार्केट कैप करीब 24,000  करोड़ रुपये ही है।  वेणु श्रीनिवासन और उनके बेटे सुदर्शन का रुख एक जैसा है, उनका तर्क है कि 21 मार्च 2024 को परिवार के चारों सदस्यों के बीच हस्ताक्षरित एमओयू (MoU) ने परिसंपत्तियों के औपचारिक विभाजन को तय कर दिया था. इसके तहत लक्ष्मी को SCL और सुदर्शन को TVS मोटर सौंपी गई थी. उनका कहना है कि यह व्यवस्था 2020 में TVS परिवार के चार अलग-अलग समूहों के बीच हुए पुनर्गठन और मूल्यांकन पर आधारित थी।  मल्लिका और लक्ष्मी का खेमा मल्लिका श्रीनिवासन और उनकी बेटी लक्ष्मी वेणु इस दावे को खारिज करती हैं, उनके अनुसार मार्च 2024 का MoU केवल ब्रांड के उपयोग और नॉन-कंपीट शर्तों तक ही सीमित था, न कि संपत्ति के स्वामित्व के हस्तांतरण के लिए. उनका मानना है कि केवल किसी कंपनी के प्रबंधन का जिम्मा संभालने से स्वामित्व नहीं मिल जाता और दोनों बच्चों का परिवार की संपत्ति पर समान अधिकार है।  इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह विवाद पिछले 18 महीनों से जारी है. इस दौरान परिवार के भीतर और बाहर कई मध्यस्थता प्रयास किए गए, लेकिन वे विफल रहे।  अप्रैल 2025 में, जब स्टॉक एक्सचेंजों को सूचित किया गया कि सुदर्शन श्रीनिवासन TVS होल्डिंग्स (जो TVS मोटर में 50.26% हिस्सेदारी रखती है) में 'बेनिफिशियल ओनर' बन गए हैं, तो लक्ष्मी के पक्ष ने इस शेयर ट्रांसफर पर स्पष्टीकरण मांगा था. इसके अलावा सुंदरम क्लेटन में भी उस समय तनाव देखा गया जब वेणु श्रीनिवासन ने चेयरमैन का पदभार संभाला और शासन में बड़ी भूमिका ली, हालांकि लक्ष्मी व्यवसाय का संचालन देखती रहीं।  परिवार में सहमति न बन पाने के कारण अब यह मामला कानूनी लड़ाई की ओर बढ़ता दिख रहा है. देश के प्रमुख औद्योगिक घरानों में से एक TVS परिवार का यह उत्तराधिकार विवाद भारतीय कॉर्पोरेट जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। 

VinFast की भारत में बड़ी तैयारी, इलेक्ट्रिक स्कूटर-बाइक सेगमेंट में एंट्री; 30 शहरों में डीलरशिप

मुंबई   वियतनामी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी VinFast ने 2025 में अपनी इलेक्ट्रिक कारों के साथ भारत में एंट्री की थी, जिसके बाद कंपनी अब देश के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में भी अपने कारोबार को बढ़ाने की योजना बना रही है।  इस इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी ने 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 50 से ज़्यादा डीलर पार्टनर्स के साथ 'लेटर ऑफ़ इंटेंट' (LOI) पर साइन किए हैं. इन समझौतों से VinFast के रिटेल नेटवर्क का पहला चरण तैयार होने की उम्मीद है, जिसके कंपनी तहत 34 शहरों में 50 से ज़्यादा शोरूम खोलने की योजना बना रही है।  आसान शब्दों में कहें तो, VinFast द्वारा साइन किए गए LOI असल में कंपनी और उसके संभावित डीलर पार्टनर्स के बीच इरादे को औपचारिक रूप से ज़ाहिर करने वाला एक दस्तावेज़ है. इसका अर्थ यह है कि डीलर VinFast आउटलेट खोलने की दिशा में काम करने के लिए सहमत हो गए हैं।  जानकारी के अनुसार, ये LOI वियतनाम के हाई फोंग में VinFast के मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स में भारतीय डीलर पार्टनर्स की यात्रा के दौरान साइन किए गए थे. कंपनी देश भर के बाज़ारों पर नज़र बनाए हुए है, क्योंकि वह भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेक्टर में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की तैयारी कर रही है।  VinFast के डीलरशिप का यह नेटवर्क भारत के उत्तरी, मध्य, पश्चिमी, दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में फैलाया जाएगा. उत्तर भारत में, VinFast का डीलर नेटवर्क दिल्ली NCR, राजस्थान और पंजाब को कवर करेगा, जबकि मध्य भारत के लिए इसकी योजनाओं में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश शामिल हैं।  इसके अलावा, पश्चिम में महाराष्ट्र और गुजरात शामिल होंगे. दक्षिण में, कंपनी के कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश में डीलर पार्टनर होंगे. डीलर नेटवर्क के पूर्वी हिस्से में शामिल राज्यों में पश्चिम बंगाल और ओडिशा हैं।  कौन से 2-व्हीलर आएंगे भारत कंपनी ने अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की है कि भारतीय बाज़ार में कौन से इलेक्ट्रिक मॉडल लॉन्च किए जाएंगे. हालांकि, VinFast ने इसकी पुष्टि जरूर की है कि शुरुआत में भारत के लिए तीन इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर प्लान किए हैं. इनमें से एक VinFast Viper है, जिसका भारत में पेटेंट भी कराया जा चुका है. वियतनाम में, VinFast Viper में 3 kW की इलेक्ट्रिक मोटर के साथ 4.8 kWh की बैटरी इस्तेमाल की जाती है।  VinFast ने भारत में एक कम ऊंचाई वाली इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल का पेटेंट भी कराया है, जो 'Sulad' कॉन्सेप्ट जैसी दिखती है. इस कॉन्सेप्ट को इस साल की शुरुआत में कंपनी की भविष्य की इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल रणनीति के हिस्से के तौर पर दिखाया गया था।  हालांकि अभी तक इसके आधिकारिक स्पेसिफिकेशन का खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके प्रोडक्शन मॉडल में 67 bhp तक की पावर देने वाली इलेक्ट्रिक मोटर लगाई जा सकती है, और इसकी टॉप स्पीड 130 kmph हो सकती है. VinFast Viper और इस मोटरसाइकिल, दोनों का पेटेंट जुलाई 2026 में भारत में कराया गया था। 

रेलवे कर्मचारियों के बोनस पर बड़ा अपडेट, वायरल लेटर निकला फर्जी; जानें कितनी मिलती है PLB राशि

 नई दिल्ली सरकार रेलवे कर्मचारियों को सालाना 41000 रुपये का बोनस देने जा रही है? सोशल मीडिया पर इस तरह का मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें रेलवे बोर्ड का एक लेटर शेयर किया जा रहा है और कहा गया है कि रेलवे प्रोडक्‍ट लिंक बोनस या सालाना बोनस वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सभी कर्मचारियों को देने जा रहा है. अब रेलवे बोर्ड ने इसपर सफाई दी है और कहा है कि इस तरह कोई भी लेटर उसके द्वारा शेयर नहीं किया गया है. यह पूरी तरह से फर्जी है. 6 अक्‍टूबर की डेट वाले इस लेटर में दावा किया गया है कि केंद्र सरकार ने 78 दिनों के बराबर वाला प्रोडक्‍ट लिंक बोनस को जारी करने का आदेश दे दिया है. यानी कि रेलवे के सभी कर्मचारियों को 41,149 का बोनस दिया जाएगा. रेलवे बोर्ड ने नहीं जारी किया लेटर वहीं 7 अक्‍टूबर को भेजे गए एक लेटर में रेलवे बोर्ड ने सभी रेलवे के जनरल मैनेजरों को कहा है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा ये लेटर पूरी तरह फेक है, जिसमें फर्जी सिग्‍नेचर किया गया है. रेलवे ने अलर्ट करते हुए कहा कि यह लेटर गलत है और उसके द्वारा जारी नहीं किया गया है. इस लेटर के तहत जारी किया गया किसी भी तरह का कंटेंट अधिकारिक तौर पर जारी नहीं हुए हैं. रेलवे बोर्ड ने आगे जानकारी देते हुए कहा कि बोनस को लेकर किसी भी तरह का फैसला नहीं लिया गया है और ना ही किसी भी डॉक्‍यूमेंट के आधार पर भुगतान किया गया है. रेलवे कर्मचारी बोनस का ऐलान कैसे चेक करें? रेलवे बोर्ड की ओर से जानकारी देते हुए कहा गया है कि अगर इस तरह की खबर आपके सामने आती है तो आप सबसे पहले रेलवे की ऑफिशियल वेबसाइट और रेलवे के अथोरिटी अधिकारी से बातचीत करके वेरिफाई कर लें. इसके अलावा, आप रेलवे मंत्रालय की वेबसाइट पर भी फैक्‍ट्स की जांच कर सकते हैं. हर साल रेलवे कर्मचारियों को कितना बोनस मिलता है? नॉन गैजेट्स वाले कर्मचारियों को प्रोडक्‍ट लिंक बोनस 17,951 रुपये दिया जाता है. यह लिमिट 2014-15 से तय की गई है. रेलवे कर्मचारियों के लिए सलाना बोनस की गणना 7000 रुपये के वेज सीलिंग और 78 दिन के लिए, के आधार पर की जाती है. बोनस बढ़ाने की मांग हाल ही में Indian Railways Technical Supervisors’ Association (IRTSA) ने केंद्र सरकार से मांग की है कि उनकी वेज सीलिंग बढ़ाकर 18000 रुपये कर दी जाए और साथ ही लेवल-2 कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता और बढ़ा दिया जाए. IRTSA का  कहना है कि अनस्किल लोगों के लिए 21,000 वेज सीलिंग है. इसलिए 7000 रुपये वेज सीलिंग को बढ़ाकर 18000 रुपये किया जाना चाहिए. बोर्ड ने कहा कि 18000 रुपये के बेसिस पर बोनस को 17,951 रुपये से बढ़ाकर 46,184 रुपये किया जाना चाहिए.

बजाज फाइनेंस FD में निवेश का मौका, वरिष्ठ नागरिकों को मिलेगा 8.15% सालाना तक ब्याज

बजाज फाइनेंस ने फिक्स्ड डिपॉजिट की दरों में 40 बेसिस प्वाइंट तक की बढ़ोतरी की; वरिष्ठ नागरिक 8.15% सालाना तक कमा सकते हैं; रिन्यूअल पर अतिरिक्त 0.10% सालाना • 12 से 60 महीने की सभी अवधियों के लिए FD दरों में 15-40 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी, 7 अक्टूबर 2026 से प्रभावी • सामान्य जमाकर्ता (नए डिपॉजिट) अब 7.75% सालाना तक कमा सकते हैं; वरिष्ठ नागरिक 8.15% सालाना तक कमा सकते हैं मुंबई/पुणे  बजाज फाइनेंस लिमिटेड, भारत का सबसे बड़ा निजी क्षेत्र का गैर-बैंक, ने आज 12 से 60 महीने की सभी अवधियों के लिए अपने फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरों में 15 से 40 बेसिस प्वाइंट तक की बढ़ोतरी की। संशोधित दरें आज से प्रभावी हैं और नए डिपॉजिट तथा रिन्यूअल, दोनों पर लागू होती हैं। सबसे बड़ी बढ़ोतरी लंबी अवधियों पर है। 31 से 60 महीने के लिए दरों में सामान्य जमाकर्ताओं के लिए 35 बेसिस प्वाइंट और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 40 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी हुई है। नया डिपॉजिट बुक करने वाले सामान्य जमाकर्ता अब 31 से 60 महीने के लिए संचयी आधार पर 7.75% सालाना तक कमा सकते हैं, जो पहले 7.40% था। 12 से 17 महीने के लिए दरें 6.60% से बढ़कर 6.80% सालाना और 18 से 30 महीने के लिए 6.85% से बढ़कर 7.00% सालाना हो गई हैं। वरिष्ठ नागरिकों को अब सभी अवधियों में सामान्य दरों के ऊपर अतिरिक्त 0.40% सालाना मिलेगा, जो पहले 0.35% था। नए वरिष्ठ नागरिक डिपॉजिट पर 31 से 60 महीने के लिए दरें 8.15% सालाना तक हैं, जो पहले 7.75% थीं। 12 से 17 महीने के लिए दरें अब 7.20% सालाना और 18 से 30 महीने के लिए 7.40% सालाना हैं। रिन्यूअल पर अतिरिक्त लाभ मैच्योर हो रहे डिपॉजिट को रिन्यू करने वाले जमाकर्ताओं को अतिरिक्त 0.10% सालाना मिलेगा। इससे सामान्य जमाकर्ताओं के लिए दर 7.85% सालाना और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 8.25% सालाना तक हो जाएगी, जो संशोधित संरचना में सबसे अधिक है। जमाकर्ता संचयी विकल्प चुन सकते हैं, जिसमें ब्याज का भुगतान मैच्योरिटी पर किया जाता है, या गैर-संचयी विकल्प, जिसमें मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना भुगतान होता है। गैर-संचयी दरों को भी उसी अनुरूप संशोधित किया गया है। उदाहरण के लिए, 31 से 60 महीने के डिपॉजिट पर मासिक भुगतान का विकल्प चुनने वाले वरिष्ठ नागरिक को अब 7.86% सालाना मिलेगा, जो पहले 7.49% था। सचिन सिक्का, सीनियर एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट – डिपॉजिट्स एंड वेल्थ मैनेजमेंट, बजाज फाइनेंस, ने कहा, “फिक्स्ड डिपॉजिट संतुलित बचत पोर्टफोलियो का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है, विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए जो अनुमानित रिटर्न चाहते हैं। हमने अपनी दर वृद्धि को लंबी अवधियों के लिए अधिक रखा है, ताकि जमाकर्ता पांच साल तक के लिए उच्च रिटर्न लॉक कर सकें, एक ऐसे AAA-रेटेड डिपॉजिट पर जिसे वे कुछ ही मिनटों में ऑनलाइन खोल सकते हैं। रिन्यूअल पर अतिरिक्त लाभ उन ग्राहकों को धन्यवाद देने का हमारा तरीका है जो अपनी बचत के लिए हम पर भरोसा बनाए रखते हैं।” ग्राहक बजाज फाइनेंस की वेबसाइट और ऐप के माध्यम से ऑनलाइन डिपॉजिट बुक या रिन्यू कर सकते हैं, या कंपनी की शाखाओं और पार्टनर चैनलों के माध्यम से कर सकते हैं। बजाज समूह की सदी पुरानी विरासत, लाखों ग्राहकों के भरोसे और AAA-रेटेड फिक्स्ड डिपॉजिट से समर्थित, बजाज फाइनेंस ग्राहकों को स्थिरता, प्रतिस्पर्धी रिटर्न और पूर्वानुमेयता का आकर्षक संयोजन प्रदान करता है। बजाज फाइनेंस फिक्स्ड डिपॉजिट क्यों बजाज फाइनेंस फिक्स्ड डिपॉजिट प्रोग्राम को CRISIL द्वारा AAA/Stable और ICRA द्वारा AAA/Stable रेटिंग प्राप्त है, जो वित्तीय दायित्वों की समय पर सर्विसिंग के लिए उच्चतम स्तर की सुरक्षा को दर्शाती है। निवेशक कम से कम ₹15,000 से शुरुआत कर सकते हैं, संचयी या गैर-संचयी भुगतान (मासिक, तिमाही, छमाही और सालाना) चुन सकते हैं और पूरी तरह डिजिटल, पेपरलेस प्रक्रिया के माध्यम से निवेश कर सकते हैं। लोन-अगेंस्ट-एफडी सुविधा एफडी को समय से पहले तोड़े बिना तरलता उपलब्ध कराती है। दर में बदलाव इस प्रकार हैं: सामान्य जमाकर्ता सामान्य FD: ₹15,000 से ₹3,00,00,000 (7 अक्टूबर 2026 से प्रभावी) — तालिका 1 अवधि    मैच्योरिटी पर संचयी    मासिक    तिमाही    छमाही    सालाना 12 – 17 महीने    6.80    6.60    6.63    6.69    6.80 18 – 30 महीने    7.00    6.79    6.82    6.88    7.00 31 – 60 महीने    7.75    7.49    7.53    7.61    7.75 वरिष्ठ नागरिक सामान्य FD: ₹15,000 से ₹3,00,00,000 (7 अक्टूबर 2026 से प्रभावी) — तालिका 2 अवधि    मैच्योरिटी पर संचयी    मासिक    तिमाही    छमाही    सालाना 12 – 17 महीने    7.20    6.97    7.01    7.08    7.20 18 – 30 महीने    7.40    7.16    7.20    7.27    7.40 31 – 60 महीने    8.15    7.86    7.91    7.99    8.15 रिन्यूअल रिन्यूअल — सामान्य जमाकर्ता सामान्य FD: ₹15,000 से ₹3,00,00,000 (7 अक्टूबर 2026 से प्रभावी) — तालिका 1 अवधि    मैच्योरिटी पर संचयी    मासिक    तिमाही    छमाही    सालाना 12 – 17 महीने    6.90    6.70    6.73    6.79    6.90 18 – 30 महीने    7.10    6.89    6.92    6.98    7.10 31 – 60 महीने    7.85    7.59    7.63    7.71    7.85   रिन्यूअल — वरिष्ठ नागरिक सामान्य FD: ₹15,000 से ₹3,00,00,000 (7 अक्टूबर 2026 से प्रभावी) — तालिका 2 अवधि    मैच्योरिटी पर संचयी    मासिक    तिमाही    छमाही    सालाना 12 – 17 महीने    7.30    7.07    7.11    7.18    7.30 18 – 30 महीने    7.50    7.26    7.30    7.37    7.50 31 – 60 महीने    8.25    7.96    8.01    8.09    8.25   बजाज फाइनेंस लिमिटेड के बारे में बजाज फाइनेंस लिमिटेड (‘BFL’, ‘बजाज फाइनेंस’, या ‘कंपनी’), बजाज फिनसर्व लिमिटेड की एक सहायक कंपनी है, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ पंजीकृत डिपॉजिट लेने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC-D) है और इसे NBFC-Investment and Credit Company (NBFC-ICC) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। BFL ऋण देने और डिपॉजिट स्वीकार करने के कारोबार में है। इसका रिटेल, SME और कमर्शियल ग्राहकों के बीच विविध ऋण पोर्टफोलियो है तथा शहरी … Read more

सोने के दाम लगातार क्यों गिर रहे हैं? ₹1 लाख तक पहुंच सकता है Gold, जानें 4 वजहें

मुंबई  सोने की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी के बाद अब तेज करेक्शन देखने को मिल रहा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में जनवरी के रिकॉर्ड हाई से सोना करीब 27 फीसदी नीचे आ चुका है, जबकि भारतीय बाजार में जनवरी के शिखर से करीब 23 फीसदी की गिरावट आई है. वहीं अगस्त के MCX हाई से देखें तो घरेलू बाजार में सोना 10 फीसदी से ज्यादा नीचे आ चुका है. ऐसे में त्योहारों और वेडिंग सीजन से पहले सोना खरीदने वालों के सामने सवाल है कि क्या कीमतों में अभी और गिरावट बाकी है। अगस्त के हाई से कितना सस्ता हुआ सोना? MCX पर गोल्ड फ्यूचर्स अगस्त के आखिरी हफ्ते में 1,64,773 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंचा था. इसके बाद कीमतों में तेज गिरावट आई और पिछले हफ्ते भाव 1,45,991 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर तक आ गया यानी अगस्त के रिकॉर्ड स्तर से कीमत करीब 11 फीसदी नीचे आ चुकी है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में बड़ी गिरावट आई है. स्पॉट गोल्ड अगस्त के करीब 4,698 डॉलर प्रति औंस के हाई से गिरकर पिछले हफ्ते करीब 4,130 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।  सोने में गिरावट की 4 बड़ी वजहें सोने में हाल की गिरावट के पीछे कई ग्लोबल फैक्टर हैं. रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद निवेशकों की मुनाफावसूली से शुरुआत में कीमतों पर दबाव आया. इसके बाद अमेरिकी महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बढ़ी चिंता ने भी सोने की तेजी को कमजोर किया. अमेरिकी बॉन्ड की रियल यील्ड में तेज बढ़ोतरी से बिना ब्याज देने वाला सोना निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत कम आकर्षक हुआ है. वहीं डॉलर में मजबूती ने भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने पर दबाव बढ़ाया है. इसके अलावा ऊंची महंगाई और अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की आशंका ने भी सोने की कीमतों को प्रभावित किया है।   क्या 1.25 लाख तक गिरेगा सोना? एक्सपर्ट्स के मुताबिक शॉर्ट टर्म में सोने में और करेक्शन संभव है. लेकिन 1.25 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर अभी बेस केस नहीं है. जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्पॉट गोल्ड में 4,025-3,950 डॉलर प्रति औंस तक गिरावट की गुंजाइश है. इसका असर MCX गोल्ड फ्यूचर्स पर पड़ने पर कीमत करीब 1,46,200-1,44,500 रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ सकती है. उनके मुताबिक 1.25 लाख रुपये का स्तर तभी देखने को मिल सकता है, जब अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में और तेजी आए और अक्टूबर में अमेरिकी CPI महंगाई का आंकड़ा अनुमान से काफी ज्यादा रहे. फिलहाल उन्हें ऐसी स्थिति की संभावना कम लगती है। 1.34 लाख रुपये तक गिर सकता है सोना? जानकारों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय सोने के लिए 3,930-4,000 डॉलर प्रति औंस का सपोर्ट जोन अहम है. अगर ये सपोर्ट टूटता है तो अगला सपोर्ट 3,600-3,750 डॉलर प्रति औंस का हो सकता है. उनके मुताबिक इस सपोर्ट जोन तक पहुंचने की संभावना करीब 25 फीसदी है. ऐसी स्थिति में भारतीय बाजार में सोना करीब 1,34,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ सकता है. हालांकि ये कोई बेस केस अनुमान नहीं है, बल्कि उस स्थिति का आकलन है जब अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतें मौजूदा सपोर्ट से और नीचे जाती हैं।       1 लाख रुपये तक गिरने की कितनी संभावना? 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक गिरावट को एक्सपर्ट्स फिलहाल बेहद असंभावित मान रहे हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक घरेलू सोने को इस स्तर तक पहुंचने के लिए अंतरराष्ट्रीय कीमत करीब 2,800 डॉलर प्रति औंस तक गिरनी होगी. उनके मुताबिक सोने को अभी भी कई स्ट्रक्चरल फैक्टर से सपोर्ट मिल रहा है. इनमें डी-डॉलराइजेशन, जियोपॉलिटिकल तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और महंगाई को लेकर लंबी अवधि की चिंताएं शामिल हैं यानी 1 लाख रुपये का स्तर देखने के लिए मौजूदा परिस्थितियों में काफी बड़ा बदलाव जरूरी होगा।         भारत में गिरावट कितनी सीमित रह सकती है? भारत में अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले सोने की गिरावट कुछ हद तक सीमित रह सकती है. इसकी एक बड़ी वजह रुपये की चाल है. डॉलर में कीमत तय होने वाले सोने का घरेलू भाव रुपये की मजबूती या कमजोरी से भी प्रभावित होता है. इसके अलावा भारत में फेस्टिव और वेडिंग सीजन शुरू हो रहा है, जिससे सोने की डिमांड बढ़ने की उम्मीद है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक ये डिमांड कीमतों में गिरावट को कुछ हद तक सीमित कर सकती है. हालांकि ऊंची कीमतों का असर ज्वैलरी खरीदारी पर भी दिख रहा है. ग्राहक ज्यादा हल्की ज्वैलरी खरीदने पर जोर दे रहे हैं। क्या अभी सोना खरीदना चाहिए? मौजूदा संकेत बताते हैं कि शॉर्ट टर्म में सोने में और करेक्शन संभव है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,000 डॉलर के आसपास का सपोर्ट और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड आगे की दिशा के लिए अहम रहेंगे. विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा करेक्शन तत्काल अवधि में जारी रह सकता है, लेकिन इसे लंबी अवधि की तेजी के बीच एक कंसोलिडेशन फेज के तौर पर भी देखा जा सकता है. केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, ETF में निवेश और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता जैसे फैक्टर सोने को लंबे समय में सपोर्ट दे सकते हैं। विदेशी कनेक्शन  वहीं 1.25 लाख रुपये तक की गिरावट संभव जरूर है, लेकिन इसके लिए अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में और तेज बढ़ोतरी और अक्टूबर की महंगाई के अनुमान से काफी ऊपर आने जैसी परिस्थितियां बननी होंगी. फिलहाल एक्सपर्ट्स इसकी संभावना कम मान रहे हैं. इसलिए मौजूदा स्थिति में सोने की कीमतों को लेकर तस्वीर दोतरफा है. शॉर्ट टर्म में और गिरावट का जोखिम बना हुआ है, लेकिन 1 लाख रुपये जैसे बहुत निचले स्तर की संभावना फिलहाल बेहद कम मानी जा रही है।