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लोन फ्रॉड मामले में बड़ा एक्शन, ED ने अनिल अंबानी से जुड़ी कंपनी के MD को दबोचा

मुंबई  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कारोबारी समूहों के लिए 'फर्जी' बैंक गारंटी जारी करने वाले गिरोह के संचालन के आरोप में ओडिशा की एक कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह द्वारा रिलायंस समूह की एक कंपनी के लिए कथित रूप से 68 करोड़ रुपये की गारंटी भी प्रदान की गई थी। आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। संघीय जांच एजेंसी ने शुक्रवार को धन शोधन के इस मामले में भुवनेश्वर स्थित ‘बिस्वाल ट्रेडलिंक’ कंपनी के खिलाफ छापेमारी शुरू की थी। क्या है डिटेल सूत्रों ने बताया कि ‘बिस्वाल ट्रेडलिंक’ के प्रबंध निदेशक पार्थ सारथी बिस्वाल को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत शुक्रवार को भुवनेश्वर से हिरासत में लिया गया। उन्होंने बताया कि अदालत ने उसे छह अगस्त तक प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में भेज दिया है। ईडी द्वारा पीएमएलए के तहत दर्ज किया गया मामला दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा नवंबर 2024 में दर्ज की गई एक प्राथमिकी से जुड़ा है। शुक्रवार को हुई थी तलाशी ईडी ने शुक्रवार को कंपनी के भुवनेश्वर स्थित तीन परिसरों और कोलकाता स्थित एक ‘‘सहयोगी’’ कंपनियों की तलाशी ली थी। एजेंसी के सूत्रों ने आरोप लगाया कि यह कंपनी आठ प्रतिशत कमीशन लेकर ‘‘फर्जी’’ बैंक गारंटी जारी करने का काम कर रही थी। उन्होंने बताया कि ‘रिलायंस पावर’ की सहायक कंपनी ‘रिलायंस एनयू बीईएसएस लिमिटेड’ की ओर से सोलर ‘एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड’ (एसईसीसआई) को जमा की गई 68.2 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी ‘‘फर्जी’’ पाई गई। कंपनी का नाम पहले ‘महाराष्ट्र एनर्जी जनरेशन लिमिटेड’ था। सूत्रों ने बताया कि ईडी ने हाल में मुंबई में अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस समूह की कंपनियों के खिलाफ की गई छापेमारी के दौरान इस लेनदेन से संबंधित कुछ दस्तावेज जब्त किए हैं। रिलायंस समूह के एक प्रवक्ता ने कहा कि रिलायंस पावर इस मामले में ‘‘धोखाधड़ी और जालसाजी की साजिश का शिकार’’ रही है और उसने सात नवंबर 2024 को विभिन्न स्टॉक एक्सचेंज में इस संबंध में उचित सूचनाएं दी थीं। प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने अक्टूबर 2024 में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा में तीसरे पक्ष (आरोपी कंपनी) के खिलाफ एक आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी और कानून की ‘‘उचित प्रक्रिया’’ का पालन किया जाएगा। सूत्रों ने कहा कि कई कंपनियों के साथ इसी तरह के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का पता चला है और इसकी जांच की जा रही है। आरोप है कि कंपनी के कई ऐसे बैंक खाते थे जिन्हें उसने अघोषित रखा और इन खातों से उसकी घोषित आमदनी के मुकाबले कहीं ज्यादा लेनदेन किए जा रहे हैं। एजेंसी को कंपनी के करीब सात ‘‘अघोषित’’ बैंक खातों का पता चला है। पता चला है कि ओडिशा स्थित कंपनी मूल ईमेल डोमेन की जगह दूसरे ईमेल डोमेन का उपयोग कर रही थी ताकि यह दिखावा किया जा सके कि यह संदेश देश के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) द्वारा भेजा जा रहा है।

UPI में बढ़त जारी: जून की गिरावट के बाद जुलाई में फिर उछाल, ₹25.08 लाख करोड़ का लेन-देन

नई दिल्ली  लोकप्रिय एकीकृत भुगतान मंच (यूपीआई) के माध्यम से जुलाई में लेनदेन की संख्या 19.47 अरब के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के आंकड़ों से यह जानकारी मिली। मूल्य के संदर्भ में, यह 25.08 लाख करोड़ रुपए रहा, जो मई में दर्ज 25.14 लाख करोड़ रुपए के बाद दूसरा सबसे अधिक है। मात्रा के लिहाज से, पिछली सबसे बड़ी संख्या मई में 18.67 अरब थी, जो जून में घटकर 18.39 अरब रह गई। मई में लेनदेन राशि 24.03 लाख करोड़ रुपए रही।  एनपीसीआई ने कहा कि जून में लेनदेन का मूल्य 25.08 लाख करोड़ रुपए रहा। एक साल पहले इसी महीने में यह 20.64 लाख करोड़ रुपए था, जो सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की वृद्धि है। मासिक आधार पर, मूल्य के लिहाज से वृद्धि 4.3 प्रतिशत रही। आज, भारत में सभी डिजिटल लेनदेन में यूपीआई का योगदान 85 प्रतिशत है। इसका प्रभाव राष्ट्रीय सीमाओं से परे भी है, और यह वैश्विक रीयल-टाइम डिजिटल भुगतानों के लगभग 50 प्रतिशत को संचालित करता है। यूपीआई पहले से ही संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस और मॉरीशस सहित सात देशों में उपलब्ध है। फ्रांस में इसका प्रवेश मील का पत्थर है क्योंकि यह यूरोप में यूपीआई का पहला कदम है। इससे वहां यात्रा करने या रहने वाले भारतीयों को विदेशी लेनदेन की सामान्य परेशानियों के बिना सहजता से भुगतान करने की सुविधा मिलती है।  एनपीसीआई, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और भारतीय बैंक संघ (आईबीए) की एक पहल है, जो भारत में खुदरा भुगतान और निपटान प्रणालियों के संचालन के लिए एक प्रमुख संगठन है। यह यूपीआई का संचालन करता है, जिसका इस्तेमाल खरीदारी करते समय, साथियों के बीच या व्यापारियों की ओर से रीयल-टाइम भुगतान के लिए किया जाता है। एनपीसीआई ने खासकर व्यस्त समय के दौरान प्रणाली पर बोझ कम करने, असफल लेनदेन में कमी लाने और विश्वसनीयता में सुधार लाने के उद्देश्य से नई सीमाएं लागू की हैं। शुक्रवार से, उपयोगकर्ता यूपीआई ऐप के जरिए दिन में 50 बार तक अपने खातों में शेष राशि की जांच कर सकेंगे। पहले, इसकी कोई सीमा नहीं थी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सीमा नेटवर्क पर बोझ को कम करने और प्रणाली को सुचारू रूप से चलाने के लिए है।    

बैंक का काम टालिए मत! अगस्त में इतने दिन बंद रहेंगे बैंक, देखें पूरी लिस्ट

नई दिल्ली अगर आप अगस्त में बैंक जाकर कोई ज़रूरी काम निपटाने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है. इस बार बैंक केवल एक-दो दिन नहीं, बल्कि पूरे 15 दिन बंद रहने वाले हैं. दरअसल, अगस्त 2025 में छुट्टियों की सूची काफी लंबी है. इसमें न केवल हर हफ्ते के रविवार और दूसरे-चौथे शनिवार की छुट्टियाँ शामिल हैं, बल्कि त्योहारों और क्षेत्रीय आयोजनों के कारण भी कई राज्यों में बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह ठप रहेंगी. अगस्त की बैंक छुट्टियों की पूरी टाइमलाइन     3 अगस्त (रविवार) – सभी राज्यों में वीकेंड अवकाश     8 अगस्त (झूलन पूर्णिमा और तेंगना पूर्णिमा) – ओडिशा और बंगाल में बैंक बंद     9 अगस्त (दूसरा शनिवार + रक्षाबंधन) – देशभर में ब्रांच बंद. यूपी, एमपी, राजस्थान आदि में त्योहार के कारण सेवाएं ठप     10 अगस्त (रविवार) – पूरे भारत में साप्ताहिक अवकाश     13 अगस्त (ओणम) – केरल में बैंक बंद     15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) – राष्ट्रीय अवकाश. महाराष्ट्र-गुजरात में पारसी नववर्ष की छुट्टी भी     16 अगस्त (नवरोज) – महाराष्ट्र और गुजरात में बैंकिंग सेवाएं ठप     17 अगस्त (रविवार) – साप्ताहिक अवकाश     19 अगस्त (रक्षाबंधन – कुछ राज्यों में अलग तारीख) – यूपी, उत्तराखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश में बैंक बंद     23 अगस्त (चौथा शनिवार) – पूरे देश में अवकाश     24 अगस्त (रविवार) – ब्रांच फिर बंद     25 अगस्त (जन्माष्टमी) – यूपी, बिहार, झारखंड, दिल्ली, एमपी आदि में बैंक बंद     27 अगस्त (श्री नारायण गुरु जयंती) – केरल में अवकाश     28 अगस्त (थिरुवोनम) – ओणम के मुख्य दिन पर केरल में फिर बैंक बंद     31 अगस्त (रविवार) – महीने का अंतिम रविवार, ब्रांच बंद अब जरा सोचिए अगर आप लोन अप्रूवल, चेक क्लियरेंस, पासबुक अपडेट, लॉकर एक्सेस, ड्राफ्ट बनवाने या KYC जैसे किसी भी ज़रूरी काम की योजना बना रहे हैं, तो इन तारीखों में बैंक की ओर कदम मत बढ़ाइए, दरवाज़े बंद मिलेंगे! क्या डिजिटल सेवाएं चलती रहेंगी? हां. Net Banking, UPI, ATM और Mobile Banking जैसी सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहेंगी. लेकिन NEFT, RTGS और चेक क्लियरेंस में थोड़ी देरी संभव है. और वे सारे काम जिनके लिए फिज़िकल ब्रांच जाना ज़रूरी है, वे अधूरे ही रहेंगे. तो क्या करें?     अभी से प्लानिंग शुरू करें.     जिन कामों में ब्रांच विज़िट ज़रूरी है, उन्हें छुट्टियों से पहले निपटा लें.     वरना हो सकता है कि आपका ज़रूरी काम, छुट्टियों के बोझ तले दब जाए..  

मस्क की स्टारलिंक को इंटरनेट सेवा शुरू करने की मिली मंजूरी

नई दिल्ली. एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने की मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट और गेटवे सेटअप का ढांचा भी तैयार कर लिया गया है ताकि सेवाओं की लॉन्चिंग में कोई दिक्कत न आए। यह जानकारी केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दी। यह घोषणा ऐसे समय की गई है जब देश में पहली बार मोबाइल कॉल किए जाने के 30 साल पूरे हो रहे हैं।  मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सिंधिया ने कहा कि स्टारलिंक को यूनिफाइड लाइसेंस मिल गया है। स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट और गेटवे की रूपरेखा तैयार है, जिससे सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं का रोलआउट आसानी से हो सके। स्टारलिंक के साथ ही भारती ग्रुप समर्थित यूटेलसैट वनवेब और जियो एसईएस भी अपने सैटकॉम सर्विसेज शुरू करने के लिए स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट का इंतजार कर रही है। सिंधिया ने कहा कि पिछले 11 साल में पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की डिजिटल यात्रा ऐतिहासिक रही है। टेलीफोन कनेक्शन अब 1.2 अरब हो गए हैं, जबकि इंटरनेट सब्सक्रिप्शन करीब 286 फीसदी से बढ़कर 97 करोड़ हो गया है।  ब्रॉडबैंड कनेक्शन 2014 के 6 करोड़ से बढ़कर 94.4 करोड़ हो गए यानी 1,450 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। मोबाइल डेटा की कीमतें 96.6 फीसदी घटीं और अब सिर्फ 8.9 प्रति जीबी में डेटा उपलब्ध है, जिससे भारत दुनिया में सबसे सस्ता डेटा देने वाला देश बन गया है। सिंधिया ने बताया कि बीएसएनएल का रिवाइवल भी बड़ी उपलब्धि है। 18 साल में पहली बार बीएसएनएल ने लगातार दो साल मुनाफा कमाया—वित्त वर्ष 2024-25 में 262 करोड़ और 280 करोड़। 83 हजार से ज्यादा 4जी साइट्स लगाई गईं, जिनमें से 74,000 चालू हैं।  एआई-आधारित मॉनिटरिंग और फाइबर फॉल्ट 12 घंटे में ठीक करने जैसी सुविधाओं ने सेवा को और बेहतर बनाया है। भारत का 5जी रोलआउट भी रिकॉर्ड तोड़ रहा है। 99.6 फीसदी जिलों में 5जी पहुंच गया है, 4.74 लाख 5जी टावर और 30 करोड़ यूजर्स हैं। भारत दुनिया में सबसे ज्यादा प्रति व्यक्ति 5जी डेटा यूज करने वाला देश बन गया है, भारत 6जी पेटेंट फाइलिंग में भी दुनिया के टॉप 6 देशों में शामिल है।  

2030 तक GCC की संख्या भारत में होगी 2,200 से ऊपर: नवीनतम अनुमान

नई दिल्ली.  भारत में वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) की संख्या 2030 तक 1,700 से बढ़कर 2,200 से अधिक होने की उम्मीद है। यह जानकारी शुक्रवार को आई एक रिपोर्ट में दी गई। घरेलू निवेश बैंक एसबीआई कैपिटल मार्केट्स (एसबीआईसीएपीएस) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि परिसंपत्ति वर्गों की विस्तृत श्रृंखला और निवेश योग्य परिसंपत्तियों की निरंतर उपलब्धता के कारण आने वाले वर्षों में रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट एसेट अंडर मैनेजमेंट (आरईआईटी एयूएम) में 25-30 प्रतिशत की वृद्धि होगी। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की निवेश बैंकिंग शाखा की रिपोर्ट के अनुसार, ऑफिस स्पेस के लिए लीजिंग ने किराए में वृद्धि और रिक्तियों में कमी के साथ वर्ष 2024 में पिछले रिकॉर्ड को 20 प्रतिशत तक तोड़ दिया। वर्ष 2025 में भी गति जारी है, विशेष रूप से बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर और पुणे में गतिविधियां मजबूत हैं। जीसीसी मुख्य मांग स्रोत थे, जहां बहुराष्ट्रीय कंपनियां सबसे कम लागत वाले वर्कफोर्स के बजाए बजाय भारत को अपनी मुख्य गतिविधियों के लिए इस्तेमाल कर रही थीं। रिपोर्ट में अगले कुछ वर्षों में इन सुविधाओं के लिए 1.3 गुना वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। फ्लेक्स स्पेस में वर्ष 2025 की पहली छमाही में लीजिंग में सालाना आधार पर 43 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो छह महीने की अवधि में अब तक की सबसे अधिक लीजिंग है। रिपोर्ट के अनुसार, "रेरा और आईबीसी के साथ शुरू हुआ इस क्षेत्र का औपचारिकीकरण अब चरम पर पहुंच गया है। इन कारकों ने फंड रेजिंग की चाहत को बढ़ा दिया है। प्रमोटरों ने इक्विटी जुटाने के लिए वित्त वर्ष 2025 में क्यूआईपी मार्ग का आक्रामक रूप से उपयोग किया है।" अलटरनेट इंवेस्टमेंट फंड (एआईएफ) भूमि खरीद और निर्माण वित्त के उच्च-जोखिम, उच्च-लाभ वाले शुरुआती चरण में तेजी से शामिल हो रहे हैं।रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2025 में रियल एस्टेट उनका सबसे बड़ा निवेश क्षेत्र था, जो अगले क्षेत्र से लगभग दोगुना है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि संस्थागत पूंजी और क्षेत्रीय नकदी प्रवाह के पक्ष में कई नियामकीय कार्रवाइयों के स्थिर होने के साथ, फंड रेजिंग (आईपीओ, एआईएफ, सॉवरेन वेल्थ फंड आदि) का चलन जारी रहेगा। एसबीआईकैप्स ने कहा कि कमर्शियल रियल एस्टेट, विशेष रूप से ऑफिस, एक उच्च-विकासशील क्षेत्र है, जहाँ प्रत्येक निवेशक के जोखिम-लाभ मैट्रिक्स के लिए अवसर मौजूद हैं। नियामकीय इकोसिस्टम निवेशक आधार को व्यापक बनाने के लिए अनुकूल है और भविष्य में आरईआईटी एयूएम के विस्तार के साथ खुदरा भागीदारी बढ़ेगी।  

शेयर मार्केट में बिकवाली का तूफान, सेंसेक्स 585 अंक गिरा, निफ्टी नीचे लुढ़का

मुंबई  शेयर बाजार में आज भारी गिरावट देखने को मिली है। दिन में एक वक्त पर मार्केट हरे निशान के ऊपर ट्रेड करने लगा था। लेकिन बाजार तेजी को बरकरार नहीं रख पाया। जिसकी वजह सेंसेक्स 0.72 प्रतिशत या फिर 585.67 अंक की गिरावट के साथ 80,599.91 अंक पर बंद हुआ है। वहीं, निफ्टी 0.82 प्रतिशत या फिर 203 अंक की गिरावट के साथ 24,565.35 अंक रहा है। बता दें, ट्रंप के टैरिफ वाले फैसले और एफपीआई की निकासी ने घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ाया है। जिसकी वजह से यह गिरावट देखने को मिली है। शुक्रवार को निफ्टी का इंट्रा-डे हाई 24734.90 अंक और इंट्रा-डे लो 24535.05 अंक रहा है। सेंसेक्स का इंट्रा-डे हाई 81,317.51 अंक और इंट्रा-डे लो लेवल 80,495.57 अंक रहा है। ट्रेंट में दिखी तेजी सेंसेक्स की टॉप 30 में से 24 कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए हैं। सनफार्मा के शेयरों का भाव 4.63 प्रतिशत तक लुढ़क गया है। वहीं, टाटा स्टील के शेयर 3 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए हैं। इंफोसिस, मारुति, टाटा मोटर्स, टेक महिंद्रा के शेयरों में भी 2 या फिर 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई है। दूसरी तरफ इस दबाव के माहौल में रिलायंस, कोटक बैंक, आईटीसी, हिन्दुस्तान यूनिलीवर, एशियन पेंट्स और ट्रेंट (3 प्रतिशत) के शेयरों में तेजी दर्ज की गई है। शेयर बाजार में गिरावट और बड़ी हो गई है। सेंसेक्स 424.14 अंक या फिर 0.52 प्रतिशत की गिरावट के साथ 80,761.44 पर ट्रेड कर रहा था। वहीं, निफ्टी, 153.05 अंक या फिर 0.62 प्रतिशत की गिरावट के बाद 24,615.30 अंक पर ट्रेड कर रहा था।  शेयर मार्केट में गिरावट बढ़ गई है। एफएमसीजी और मीडिया को छोड़ सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल हैं। बैंक निफ्टी से लेकर ऑयल एंड गैस तक सेक्टोरल इंडेक्स में भारी गिरावट हैं। फार्मा और हेल्थ केयर स्टॉक्स तो बुरी तरह पिटे हैं। निफ्टी फार्मा इंडेक्स करीब 3 फीसद टूटा है तो हेल्थ केयर इंडेक्स में 2.35 पर्सेंट की भारी गिरावट है। निफ्टी गिरावट का शतक लगाकर 105 अंक नीचे 24662 पर आ गया है। एक समय 24,784 पर पहुंच गया था। जबकि, सेंसेक्स भी अब 275 अंकों के नुकसान के साथ 80910 पर ट्रेड कर रहा है। एक समय यह 81317 पर था। शेयर मार्केट में आज तेज उतार-चढ़ाव है। बाजार एक बार फिर लाल निशान में आ गया है। बैंक निफ्टी से लेकर ऑयल एंड गैस तक सेक्टोरल इंडेक्स लाल हैं। फार्मा और हेल्थ केयर स्टॉक्स तो बुरी तरह पिटे हैं। निफ्टी फार्मा इंडेक्स और हेल्थ केयर इंडेक्स में क्रमश: 2.75 और 2.21 पर्सेंट की भारी गिरावट है। निफ्टी गिरावट का शतक लगाकर 103 अंक नीचे 24665 पर आ गया है। एक समय 24,784 पर पहुंच गया था। जबकि, सेंसेक्स भी अब 240 अंकों के नुकसान के साथ 80944 पर ट्रेड कर रहा है। एक समय यह 81317 पर था। शेयर मार्केट में आज तेज उतार-चढ़ाव है। बाजार एक बार फिर लाल निशान में आ गया है। निफ्टी 59 अंक नीचे 24709 पर आ गया है। एक समय 24,784 पर पहुंच गया था। सेंसेक्स भी अब 136 अंकों के नुकसान के साथ 81,048 पर ट्रेड कर रहा है। एक समय यह 81317 पर था। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी तथा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हस्तक्षेप की आशंका के बीच रुपया शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में 40 पैसे मजबूत होकर 87.25 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। अमेरिका के भारतीय निर्यात पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। अंतरबैंक विदेशी विनिमय मुद्रा बाजार में रुपया 87.60 प्रति डॉलर पर खुला और शुरुआती कारोबार में 87.25 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव से 40 पैसे की बढ़त दर्शाता है।  शेयर मार्केट आज के नुकसान की भरपाई कर हरे निशान पर आ गया है। हरियाली लौट आई है। सेंसेक्स अब 90 अंकों की उछाल के साथ 81275 पर है। जबकि, निफ्टी में 8 अंकों की तेजी है और यह 24776 पर है। निफ्टी टॉप गेनर्स में आयशर मोटर्स, हिन्दुस्तान यूनिलीवर, एशियन पेंट्स, ट्रेंट और नेस्ले के शेयर हैं। शेयर मार्केट अब रिकवरी मोड में है। सेंसेक्स केवल 6 अंक नीचे 81179 पर है। जबकि, निफ्टी में 21 अंकों की गिरावट है और यह 24746 पर है। निफ्टी टॉप गेनर्स में आयशर मोटर्स, हिन्दुस्तान यूनिलीवर, एशियन पेंट्स, ट्रेंट और नेस्ले के शेयर हैं। जबकि, निफ्टी टॉप लूजर में सन फार्मा, सिप्ला, डॉक्टर रेड्डी, टाटा मोटर्स और जेएसडब्ल्यू स्टील।  

ED की बड़ी कार्रवाई: फर्जी बैंक गारंटी केस में अनिल अंबानी के खिलाफ जांच तेज

मुंबई  रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन और एमडी अनिल अंबानी की मुश्किलें बढ़ती हुई दिख रही हैं. बैंक लोन फ्रॉड केस के बाद अब ईडी ने 68 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी मामले में जांच तेज कर दी है. इसी सि​लसिले में शुक्रवार को ईडी ने ओडिशा और कोलकाता में छापेमारी की. ईडी ने इस मामले में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा की ओर से 11 नवंबर, 2024 को दर्ज एक मामले के आधार पर एक ईसीआईआर (प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट) दर्ज की है. ईडी का आरोप है कि अनिल अंबानी की कंपनी को इसी फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर ठेका दिया गया था. भुवनेश्वर में ईडी ने मेसर्स बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशकों से जुड़े 3 परिसरों पर छापा मारा और तलाशी ली. वहीं कोलकाता में इसी फर्म के एक सहयोगी के परिसर में ईडी ने छापेमारी की. मेसर्स बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड (ओडिशा स्थित), इसके निदेशक और सहयोगी 8% कमीशन पर फर्जी बैंक गारंटी जारी करने में संलिप्त पाए गए.' कमीशन देने के लिए फर्जी बिल तैयार किए ईडी ने आरोप लगाया है कि अनिल अंबानी की कंपनी ने फर्म को कमीशन देने के लिए फर्जी बिल भी तैयार किए थे. कई अघोषित बैंक खातों का पता चला है. इन बैंक खातों में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन पाए गए हैं. संघीय एजेंसी ने कहा कि उसने अनिल अंबानी समूह की कंपनियों और भारतीय सौर ऊर्जा निगम (SECI) को सौंपी गई ₹68.2 करोड़ की एक फर्जी बैंक गारंटी के बीच संबंधों का खुलासा किया है. इसी से जुड़े एक मामले में, पहले जब्त किए गए सबूत (अनिल अंबानी समूह की कंपनियों के मामले में 24.07.2025 को की गई तलाशी के दौरान) का वर्तमान जांच से सीधा संबंध है. SBI का फर्जी ईमेल डोमेन इस्तेमाल किया ईडी के अनुसार, यह फर्जी गारंटी मेसर्स रिलायंस एनयू बेस लिमिटेड और मेसर्स महाराष्ट्र एनर्जी जनरेशन लिमिटेड के नाम पर जारी की गई थी, जो दोनों अनिल अंबानी समूह से जुड़ी हैं. फर्जी बैंक गारंटी को असली बताने के प्रयास में, अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप ने कथित तौर पर SECI से संपर्क करने के लिए आधिकारिक "sbi.co.in" के बजाय एक नकली ईमेल डोमेन, "s-bi.co.in" का इस्तेमाल किया. ईडी ने इस नकली डोमेन के सोर्स का पता लगाने के लिए नेशनल इंटरनेट एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NIXI) से डोमेन रजिस्ट्रेश का विवरण मांगा है. कंपनी के पते पर मिला रिश्तेदार का आवास ईडी के अनुसार, कंपनी केवल एक कागजी संस्था है- इसका पंजीकृत कार्यालय एक रिश्तेदार की आवासीय संपत्ति है. पते पर कंपनी का कोई वैधानिक रिकॉर्ड नहीं मिला. कई कंपनियों के साथ संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का पता चला है. कंपनी से जुड़े प्रमुख लोग टेलीग्राम ऐप का इस्तेमाल 'डिसअपीयरिंग मैसेज' फीचर इनेबल करके चैट करते पाए गए हैं, जो बातचीत को छिपाने के प्रयासों का संकेत देता है. इससे पहले अंबानी को ईडी ने शुक्रवार को कथित ₹17,000 करोड़ के लोन फ्रॉड केस की चल रही जांच के सिलसिले में समन जारी किया और पूछताछ के लिए 5 अगस्त को अपने नई दिल्ली में दफ्तर पेश होने को कहा.

25% आयात शुल्क पर फिलहाल रोक, ट्रंप का फैसला एक हफ्ते टला — जानें अगली डेट

नई दिल्ली अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप (Donald Trump) ने भारत पर बुधवार को 25 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया था, जो 1 अगस्‍त यानी आज से प्रभावी होने वाला था. लेकिन अब इसे एक सप्‍ताह के लिए टाल दिया गया है. अमेरिका की ओर से जारी किए गए नए निर्देश में अब ये टैरिफ 7 दिन बाद भारत समेत बांग्‍लादेश, ब्राजील और अन्‍य देशों पर लगाया जाएगा, जो 7 अगस्‍त 2025 से प्रभावी होगा. बुधवार को डोनाल्‍ड ट्रंप ने अचानक से भारत समेत कई देशों पर टैरिफ का ऐलान करते हुए दुनिया में फिर से हलचल मचा दी थी. भारत पर 25 फीसदी टैरिफ का ऐलान करते हुए ट्रंप ने कहा था कि व्‍यापार बाधा को दूर करने के लिए ये टैरिफ लगाया जा रहा है. इसके अलावा, जुर्माने का भी ऐलान किया गया था, जो रूस से तेल और डिफेंस प्रोडक्‍ट्स खरीदने के कारण है. हालांकि अभी अमेरिका ने नए आदेश के तहत सभी देशों पर लगने वाले टैरिफ को 1 सप्‍ताह के लिए टाल दिया है यानी अब टैरिफ लगने की नई डेडलाइन 7 अगस्‍त हो चुकी है. देशहित में हर संभव कदम! जिसपर भारत ने बिना कोई जवाबी कार्रवाई के सीधे शब्‍दों में कहा कि देशहित में हर संभव कार्रवाई की जाएगी. वहीं एक सरकारी अधिकारी ने कहा था कि भारत नेगोशिएशन टेबल पर अमेरिका के टैरिफ का जवाब देगा. लोकसभा में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी कहा था कि बात 10 से 15 फीसदी टैरिफ को लेकर हुई है. उन्‍होंने कहा था कि टैरिफ को लेकर देशहित में हर संभव कार्रवाई की जाएगी.  अमेरिका क्या चाहता है? भारत पर अतिर‍िक्‍त दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका ने टैरिफ लगा रहा है. वह चाहता है कि जल्‍द से जल्‍द भारत अपने एग्रीकल्‍चर और डेयरी सेक्‍टर्स से समझौता करके डील कर ले, लेकिन भारत इसपर राजी नहीं है. भारत का कहना है कि किसी भी सूरत में वह अपने कृषि और डेयरी सेक्‍टर्स को अमेरिका के लिए नहीं खोल सकता.  अमेरिका भारत से अपने कृषि और डेयरी उत्पादों, खासकर (नॉन-वेज मिल्क) और जेनेटिकली मोडिफाइड (जीएम) फसलों के लिए बाजार खोलने और इन पर टैरिफ कम की डिमांड कर रहा है, जिस कारण अभी व्‍यापार डील नहीं हो पा रही है. अमेरिका इसमें 100 फीसदी टैरिफ से छूट चाहता है. भारत क्‍यों नहीं मानना चाहता यूएस की बात? भारत में दूध को धार्मिक और सांस्‍कृतिक तौर पर पवित्र माना जाता है और मांसाहारी चारा खाने वाले मवेशियों से मिले दूध (नॉनवेज मिल्‍क)  को अनुमति देना भारत के लिए स्‍वीकार्य नहीं है. भारत चाहता है कि दोनों देशों के बीच एक संतुलित सौदा हो, जो 140 करोड़ लोगों, खासकर 70 करोड़ किसानों के हितों की रक्षा हो. खाद्य सुरक्षा, किसानों के हित, और रणनीतिक स्वायत्तता को प्रमुखता पर रखना चाहता है. साथ ही अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच की उम्‍मीद कर रहा है. 

डिजिटल इंडिया को मिलेगी नई उड़ान: Google बनाएगा एशिया का सबसे बड़ा डेटा सेंटर

हैदराबाद  सरकारी सूत्रों ने बताया कि गूगल, दक्षिण भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश में 1 गीगावाट का डेटा सेंटर और उसका विद्युत बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए 6 अरब डॉलर का निवेश करेगा। यह अल्फाबेट इकाई का भारत में इस तरह का पहला निवेश होगा। मामले की प्रत्यक्ष जानकारी रखने वाले आंध्र प्रदेश सरकार के दो सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि बंदरगाह शहर विशाखापत्तनम में बनने वाले इस डेटा सेंटर में 2 बिलियन डॉलर का नवीकरणीय ऊर्जा निवेश शामिल है, जिसका उपयोग इस सुविधा को संचालित करने के लिए किया जाएगा। सर्च दिग्गज का डेटा सेंटर क्षमता और निवेश के लिहाज से एशिया में सबसे बड़ा होगा और यह सिंगापुर, मलेशिया और थाईलैंड सहित पूरे क्षेत्र में इसके डेटा सेंटर पोर्टफोलियो के अरबों डॉलर के विस्तार का हिस्सा है। अप्रैल में, अल्फाबेट ने कहा था कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वैश्विक टैरिफ आक्रमण से उत्पन्न आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद, इस साल डेटा सेंटर क्षमता निर्माण पर लगभग 75 अरब डॉलर खर्च करने के लिए प्रतिबद्ध है। अल्फाबेट ने रायटर्स के टिप्पणी के अनुरोध का तुरंत जवाब नहीं दिया। आंध्र प्रदेश के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री नारा लोकेश, जो सरकार और व्यापारिक नेताओं के साथ निवेश पर चर्चा करने के लिए सिंगापुर में हैं, ने गूगल निवेश पर कोई टिप्पणी नहीं की। हैदराबाद में गूगल का सुरक्षा इंजीनियरिंग केंद्र खुला उन्होंने सिफ़ी टेक्नोलॉजीज़ द्वारा राज्य में बनाए जाने वाले 550 मेगावाट के डेटा सेंटर का ज़िक्र करते हुए कहा, "हमने सिफ़ी जैसी कुछ घोषणाएँ की हैं, जो सार्वजनिक हैं।" उन्होंने आगे कहा, "कुछ घोषणाएँ ऐसी हैं जो अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं। अक्टूबर में हम ये घोषणाएँ करेंगे।" राज्य का विभाजनोत्तर निवेश अभियान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख सहयोगी द्वारा संचालित राज्य आंध्र प्रदेश को 2014 में दो भागों में विभाजित कर दिया गया, जिससे इसकी पूर्व राजधानी हैदराबाद और राजस्व का एक प्रमुख स्रोत नव निर्मित तेलंगाना राज्य के हाथों में चला गया। आंध्र प्रदेश तब से उच्च ऋण और सामाजिक व्यय के वित्तीय दबाव को कम करने के लिए निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। लोकेश ने कहा कि आंध्र प्रदेश पहले ही 1.6 गीगावाट की कुल क्षमता वाले डेटा केंद्रों में निवेश को अंतिम रूप देने में सक्षम हो गया है, उन्होंने कहा कि इसका लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 6 गीगावाट के डेटा केंद्र बनाने का है, जो वर्तमान में लगभग शून्य है। उन्हें उम्मीद है कि पहले से तय 1.6 गीगावाट के शुरुआती डेटा सेंटर अगले 24 महीनों में चालू हो जाएँगे। रियल एस्टेट कंसल्टेंसी एनारॉक के अनुसार, यह पूरे देश में वर्तमान में संचालित 1.4 गीगावाट से ज़्यादा होगा। लोकेश ने कहा, "हम विशाखापत्तनम में तीन केबल लैंडिंग स्टेशन लगाने पर भी काम कर रहे हैं। हम पर्याप्त केबल नेटवर्क बनाना चाहते हैं, जो मुंबई की मौजूदा क्षमता से दोगुना होगा।" केबल लैंडिंग स्टेशन – जो आमतौर पर डेटा केंद्रों के नजदीक स्थित होते हैं, जिन्हें वैश्विक नेटवर्कों के लिए तीव्र और विश्वसनीय कनेक्शन की आवश्यकता होती है – का उपयोग उन उपकरणों को संग्रहीत करने के लिए किया जाता है जो समुद्र के नीचे स्थित केबलों से डेटा प्राप्त करते हैं और उन्हें रिले करते हैं। लोकेश ने यह भी कहा कि राज्य डेटा केंद्रों की स्थिरता संबंधी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए ऊर्जा अवसंरचना के निर्माण पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें अगले पाँच वर्षों में बिजली-प्रधान उद्योग से 10 गीगावाट तक की बिजली उत्पादन क्षमता की आवश्यकता होने का अनुमान है। उन्होंने कहा, "अधिकांश ऊर्जा वास्तव में हरित ऊर्जा होगी, और यही वह अद्वितीय मूल्य प्रस्ताव है जिसे हम प्रस्तुत कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि कुछ अतिरिक्त क्षमता कोयले से संचालित होगी, क्योंकि डेटा केंद्रों को पूरे दिन विश्वसनीय, उच्च मात्रा वाली बिजली की आवश्यकता होती है।  

FTA से भारत को मिलेगा फायदा! केसर से लेकर चावल तक UK में जमाएंगे धाक

नई दिल्ली भारत-यूके के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (India-UK Free Trade Agreement) हो चुका है, जिसके तहत भारत, ब्रिटेन में अपने प्रोडक्‍ट्स '0' या कम टैक्‍स बेचेगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत की करीब 99 फीसदी चीजें ब्रिटेन में कम टैक्‍स पर बिकेंगी. वहीं UK की 90 फीसदी चीजें भारत में कम टैरिफ पर बिकेंगी. FTA दस्‍तावेज पर साइन दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मौजूदगी में गुरुवार को हुई थी.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने इस डील को लेकर कहा था कि इससे ग्‍लोबल स्‍तर पर भारत को और मजबूती मिलेगी. साथ ही दोनों देशों के बीच सालाना व्‍यापार 34 अरब डॉलर बढ़ेगा. इस डील के तहत 2030 तक व्‍यापार को  120 अरब डॉलर तक पहुंचाना है. इससे आम लोगों को भी फायदा होगा, जिसमें ब्रिटेन से आने वाले कुछ चीजों के रेट घट जाएंगे.  क्‍या चीजें हो जाएंगी सस्‍ती?  अगर आप वाइन के शौकीन हैं तो स्‍कॉच व्हिस्‍की के रेट में करीब 20 से 50 फीसदी की गिरावट आ सकती है. वहीं इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, कपड़े, चमड़े के प्रोडक्‍ट्स और दवाइंया,  मेटल और ज्‍वेलरी सस्‍ती हो सकती हैं. जबकि एग्रीकल्‍चर प्रोडक्‍ट्स, कार और बाइक जैसे ऑटो और स्‍टील की चीजें महंगी हो सकती हैं.  ब्रिटेन में खूब बिकेंगे ये प्रोडक्‍ट्स FTA से यूनाइटेड किंगडम (UK) में इम्‍पोर्ट होन वाली चीजें भी सस्‍ती हो जाएंगी, जिससे इसका प्रोडक्‍शन तेजी से बढ़ेगा. लोग भारतीय प्रोडक्‍ट को ज्‍यादा खरीदेंगे. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इमेज शेयर किया है, जिसमें बताया गया है कि भारत किस राज्‍य से कौन-कौन से प्रोडक्‍ट्स ब्रिटेन में इम्‍पोर्ट होंगे, जो मेड इन इंडिया की छाप छोड़ेंगी.  दोनों देशों के बीच व्यापार टारगेट बता दें, दोनों देशों के बीच साल 2023-24 में व्यापार 4.74 लाख करोड़ रुपये (लगभग 60 अरब डॉलर) का था, और इस समझौते से भारत का निर्यात 60% तक बढ़ सकता है. अनुमान है कि अगले 5 साल में भारतीय गारमेंट्स, चमड़ा, रत्न-आभूषण, समुद्री उत्पाद और ऑटोमोबाइल पार्ट्स जैसे क्षेत्रों में ब्रिटेन को निर्यात में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.  ब्रिटेन में खूब बिकेंगे ये प्रोडक्ट्स इस समझौते से 95% से अधिक कृषि और इससे जुड़े खाद्य प्रोडक्ट्स पर शून्य शुल्क लगेगा, जिससे कृषि निर्यात बढ़ेगा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ताकत मिलेगी. अगले तीन वर्षों में कृषि निर्यात में 20% से अधिक की बढ़ोतरी का अनुमान है, जो 2030 तक भारत के 100 अरब डालर के कृषि-निर्यात के लक्ष्य को पूरा करने में योगदान देगा. ब्रिटेन के 90% उत्पादों पर भारत में शुल्क हटाया जाएगा या कम किया जाएगा. ब्रिटेन में भारतीय मसाले, फल-सब्जियां, और हस्तशिल्प सस्ते और अधिक उपलब्ध होंगे. स्कॉच व्हिस्की (150% से 75%, फिर 10 वर्षों में 40%), कारें (100% से 10%), कॉस्मेटिक्स, चॉकलेट, बिस्किट, सैल्मन मछली, और मेडिकल डिवाइसेज जैसे उत्पाद भारत में सस्ते होंगे.   किसान के लिए बड़े मौके इससे भारतीय किसानों के लिए प्रीमियम ब्रिटिश बाजार के दरवाजे खुलेंगे, जो जर्मनी, नीदरलैंड और अन्य यूरोपीय संघ के देशों को मिलने वाले फायदे के बराबर या उससे भी अधिक होगा. हल्दी, काली मिर्च, इलायची, अचार और दालों को भी शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी. जबकि ब्रिटेन का भारत को निर्यात (व्हिस्की, कारें, मेडिकल उपकरण) भी 60% तक बढ़ सकता है. लक्ष्य ये भी है कि दोनों देशों के बीच व्यापार प्रक्रियाओं को सरल और डिजिटल बनाए, जिससे व्यापार लागत कम होगी. इस डील एक हिस्सा ये भी है कि भारत में कपड़ा, चमड़ा, और रत्न-आभूषण जैसे उद्योगों नौकरिकों के अवसर बढ़ेंगे. MSME सेक्टर विशेष रूप से क्षेत्रीय हस्तशिल्प जैसे कोल्हापुरी चप्पल और बनारसी साड़ी, को ब्रिटेन के बाजार में बढ़त मिलेगी. ब्रिटेन में भी हजारों नौकरियां पैदा होंगी, खासकर व्हिस्की, ऑटोमोबाइल, और चिकित्सा उपकरण सेक्टर में.  भारत के 99% निर्यात पर ब्रिटेन में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जिसपर फिलहाल 4-16% शुल्क लिए जाते हैं. इससे वस्त्र, चमड़ा, जूते, रत्न-आभूषण, समुद्री उत्पाद, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे क्षेत्रों को बड़ा फायदा होगा. विशेष रूप से कृषि और समुद्री उत्पादों (जैसे झींगा, टूना, मसाले, हल्दी, कटहल, बाजरा) पर 95% से अधिक शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जिससे अगले 5 वर्षों में कृषि निर्यात में 20% की वृद्धि की उम्मीद है.  मेक इन इंडिया की ताकत उम्मीद की जा रही है कि 5 साल के बाद यह समझौता भारत में 'मेक इन इंडिया' और महिला उद्यमिता को मजबूती देगा, क्योंकि समझौते में लैंगिक समानता और श्रम अधिकारों पर जोर दिया गया है. डील के तहत भारतीय प्रोफेशनल (जैसे आईटी, हेल्थ, योग प्रशिक्षक) को ब्रिटेन में अस्थायी वीजा और सामाजिक सुरक्षा अंशदान में तीन साल की छूट से लाभ होगा. जबकि 5 साल के बाद करीब 100 अतिरिक्त वार्षिक वीजा और बढ़ी हुई श्रम गतिशीलता से भारतीय युवाओं को ब्रिटेन में अधिक अवसर मिलेंगे. 60,000 से अधिक आईटी पेशेवरों को ब्रिटेन में अस्थायी वीजा के माध्यम से काम करने में आसानी होगी. आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी का विस्तार यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा. साल 2030 तक यानी 5 साल के बाद भारत और ब्रिटेन 'UK-India Vision 2035' के तहत रक्षा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, जलवायु, और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे. हालांकि फिलहाल ये यह कहना कि किसे ज्यादा फायदा होगा, ये जटिल है, क्योंकि दोनों देशों को अलग-अलग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे.  जम्‍मू-कश्‍मीर: पश्‍मीना शॉल, बासमती चावल, कश्‍मीरी केसर और कश्‍मीरी विलो बैट्स  हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड: बासमती चावल  पंजाब- जलंधर स्‍पोर्ट्स गूड्स, बासमती राइस  दिल्‍ली- बासमती राइस  राजस्‍थान- जयपुर जेमस्‍टोन और ज्‍वेलरी  गुजरात– सूरत टेक्‍सटाइल, मोरबी में बने मिट्टी के वर्तन और सूरत के डायमंड  महाराष्‍ट्र– कोल्‍हापुरी फूटवीयर, आईटी सर्विसेज  कर्नाटक– चन्‍नापाटन के खिलौने केरल– रबर और हल्‍दी उत्तर प्रदेश– खुर्जा में बने मिट्टी के बर्तन, मेरठ के स्‍पोर्ट्स प्रोडक्‍ट, बासमती चावल और आगरा-कानपुर के लेदर  तेलंगाना– आईटी सर्विस आंध्र प्रदेश– कॉफी और हल्‍दी  तमिलनाडु– कांचीपूरम साड़ी, हल्‍दी, गुड़‍िया, स्‍लीपर और आईटी सर्विस  बिहार- सिक्‍की ग्रॉस टॉय, भागलपुर सिल्‍क, मखाना और लिच्ची त्रिपुरा– नेचुरल और प्रोड्यूस्‍ड रबर  वेस्‍ट बंगाल- साड़ी, दाजर्लिंग टी, गुड़‍िया और शांतिनिकेतन लेदर