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राजीव शुक्ला बोले: मौलाना शमाइल नदवी के बयान पर हो कड़ी कार्यवाही, संविधान सर्वोपरि

 नई दिल्ली ईश्वर के अस्तित्व पर डिबेट में हिस्सा लेने वाले मुफ्ती शमाइल नदवी अब अपने विवादित बयान के कारण चर्चा में हैं। यही नहीं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कांग्रेस के सीनियर नेता राजीव शुक्ला ने भी कर दी है। मौलाना नदवी के विवादित बयान वाला वीडियो शुजात अली कादरी ने एक्स पर शेयर किया था। इसी को रीपोस्ट करते हुए राजीव शुक्ला ने कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने लिखा, 'इस मौलाना के ख़िलाफ़ कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए । संविधान के ऊपर कुछ नहीं है।' मौलाना मुफ्ती शमाइल नदवी ने कहा था कि भारत में मुसलमान गलत रास्ते पर चलते रहे हैं। उन्होंने हमेशा यह सोचा कि सेकुलर शासन और पार्टियां उनके हित में होंगी। ऐसा नहीं है। प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ेंउन्होंने कहा कि मुसलमान हमेशा अपने दीन से ऊपर संविधान को रखते आए हैं, लेकिन ऐसा करना गलत था। नदवी ने कहा था, 'हम चाहते हैं कि हमारे मौजूदा हालात ठीक हो जाएं तो उसका हल किसी सियासी पार्टी में नहीं है बल्कि दीन में है। हमारा इस मुल्क में एप्रोच गलत रहा। हम यह कहते फिरते रहे कि हमारा वतन हमारे दीन से ज्यादा मुकद्दस है। हम यह कहते रहे कि सेकुलर निजाम हमारे दीन से ज्यादा बेहतर है। यह तय करते रहे कि फलां दरबार से फैसला हो जाएगा तो हम उसे स्वीकार कर लेंगे। क्या ऐसा किया जा सकता है। यदि किसी मामले में अल्लाह ने कोई फैसला कर लिया है तो यह जायज नहीं है कि उसकी बजाय हम किसी और की बात को मानें।' मुफ्ती शमाइल नदवी की ओर से दिए बयान को लेकर आपत्ति इसलिए है क्योंकि उन्होंने संविधान और देश से ऊपर दीन को रखने की बात कही है। पहले भी ऐसे सवाल उठते रहे हैं कि आखिर कट्टरपंथी मुसलमान देश से पहले मजहब की बात क्यों करते हैं। ऐसे में नदवी के बयान ने उस सवाल को फिर से खड़ा किया है। मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन के चेयरमैन शुजात अली कादरी ने भी सवाल उठाया है। शुजात अली कादरी ने लिखा- हमारा रास्ता वहाबी शरीयत नहीं है उन्होंने लिखा, 'मौलाना नदवी का यह बयान भारत के संविधान की मूल भावना के ख़िलाफ़ है। भारत का मुसलमान न तो हिन्दू राष्ट्र का समर्थक है और न ही वहाबी शरीयत के नाम पर किसी धार्मिक शासन का। हमारा रास्ता संविधान, लोकतंत्र और समान नागरिक अधिकार हैं। ऐसे बयान अनुच्छेद 14, 15, 19 व 25 की भावना के ख़िलाफ़ हैं और BNS धारा 196 व 197 के तहत दंडनीय हैं।'

2023 के बाद पहली बार शरद-पवार और अजित पवार गुट साथ, भाजपा को टक्कर देने के लिए पिंपरी-चिंचवड़ में गठबंधन

मुंबई  महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने रविवार को बड़ा ऐलान कर दिया कि पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम (पीसीएमसी) चुनावों के लिए उनकी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और चाचा शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (शरदचंद्र पवार) गुट एक साथ चुनाव लड़ेंगे. उन्होंने इसे परिवार का फिर से एकजुट होना करार दिया. अजित पवार पिंपरी-चिंचवड़ में 15 जनवरी को होने वाले चुनावों के लिए प्रचार करने पहुंचे थे. पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों के लिए ‘घड़ी’ (एनसीपी का चुनाव चिह्न) और ‘तुतारी’ (एनसीपी-एसपी का चिह्न) एक साथ आए हैं. परिवार फिर से एकजुट हो गया है. अब इस गठबंधन का सीधा मुकाबला भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन है. भाजपा ने कई नगर निगमों में एनसीपी को दरकिनार कर दिया है. बीएमसी में भी भाजपा ने एनसीपी को अपने गठबंधन से बाहर रखा है. यह घोषणा उम्मीदवारों की सूची अंतिम रूप देने के दौरान हुई चर्चा के बाद की गई. अजित पवार ने कार्यकर्ताओं से कड़ी मेहनत करने और रैलियों में विवादास्पद बयानबाजी से बचने की अपील की. उन्होंने कहा कि हम विकास करने वाले लोग हैं. हम उन लोगों को बाहर का रास्ता दिखाएंगे जिन्होंने इस नगर निगम को कर्ज में डुबोने की कोशिश की. पिंपरी-चिंचवड़ को विकास के मामले में उन्होंने एनसीपी का योगदान बताया और हिंजेवाड़ी आईटी पार्क का जिक्र किया. अन्य नगर निगमों में गठबंधन की संभावना इस बीच, दोनों गुटों के बीच पुणे नगर निगम चुनावों के लिए भी गठबंधन की बातचीत चल रही है. इससे संकेत मिलता है कि पिंपरी-चिंचवड़ में हुआ समझौता अन्य प्रमुख नगर निगमों तक विस्तारित हो सकता है. महाराष्ट्र में 29 नगर निगमों के चुनाव 15 जनवरी को होंगे, जबकि मतगणना अगले दिन होगी. नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 30 दिसंबर है. यह गठबंधन 2023 में एनसीपी के विभाजन के बाद पहली बार दोनों गुटों का एक साथ आना है. अजित पवार ने 2023 में शरद पवार से अलग होकर भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ महायुति गठबंधन में शामिल हो गए थे. उस समय उन्होंने चाचा की उम्र का हवाला देकर पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए थे. शरद पवार चार बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं.उसी दिन बारामती में पवार परिवार एक साथ नजर आया, जहां उद्योगपति गौतम अडानी ने शरदचंद्र पवार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उद्घाटन किया. यह स्थानीय गठबंधन महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़ है, जहां राज्य स्तर पर दोनों गुट अलग-अलग गठबंधनों में हैं. पिंपरी-चिंचवड़ एनसीपी का पारंपरिक गढ़ रहा है, जहां 2017 तक अविभाजित एनसीपी का शासन था. जानकारों का मानना है कि यह गठबंधन वोटों के बंटवारे को रोकने और भाजपा के खिलाफ मजबूत चुनौती पेश करने की रणनीति है.

मणिकम टैगोर का बयान: RSS और अल कायदा—दोनों नफरत पर आधारित संगठन, उनसे क्या सीख सकते हैं?

नागपुर  कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने RSS यानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की तुलना अल कायदा से की है। अब संघ ने इस मुद्दे पर कांग्रेस पर निशाना साधा है और कहा है कि लगातार हो रही हार की निराशा साफ नजर आ रही है। साथ ही दावा किया है कि 'कुछ नेताओं' की तरफ से संघ की तारीफ के कारण कांग्रेस बंटी हुई नजर आ रही है। हाल ही में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने संघ की तारीफ की थी। संघ के वरिष्ठ प्रचारक और अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने कहा, 'कांग्रेस के एक प्रमुख सांसद ने आरएसएस की तुलना अल कायदा से कर अपनी मानसिकता दिखाई है…। यह कांग्रेस नेतृत्व और उसके सदस्यों के बौद्धिक और मानसिक दिवालियापन को दिखाता है।' उन्होंने कहा, 'जब व्यक्तियों, संस्थानों और उनके नेताओं को बार-बार हार का सामना करना पड़ रहा है, तो उनकी निराशा साफ नजर आती है। कुछ नेता अनुशासन, देशप्रेम और राष्ट्र निर्माण के कामों के लिए आरएसएस की तारीफ कर रहे हैं। इससे कांग्रेस के अंदर उथल पुथल मच गई है और यह पार्टी विभाजित नजर आ रही है।' कुमार ने कहा कि आरएसएस अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है। संघ के कार्यकर्ता विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से देश को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। संघ छुआछूत, प्रदूषण, धार्मिक कट्टरता और जबरन धर्मांतरण से मुक्त समाज के लिए प्रयास कर रहा है। हम चाहते हैं कि लोग कानून का पालन करें और नियमों का पालन करें। क्या बोले थे कांग्रेस नेता रविवार को टैगोर ने कहा था, 'आरएसएस एक संगठन है, जो नफरत के आधार पर बना है और नफरत फैलाता है। नफरत से सीखने जैसा कुछ नहीं है। क्या आप अल कायदा से कुछ भी सीख सकते हैं। अल कायदा नफरत भरा संगठन है। वो दूसरों से नफरत करता है। उस संगठन से सीखने के लिए क्या है।' दिग्विजय सिंह ने शेयर कर दी थी फोटो सिंह ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी और संघ की तारीफ की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए बताया कि कैसे एक जमीनी कार्यकर्ता अपने नेताओं के चरणों में बैठकर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री पद तक पहुंचा। हालांकि, सिंह ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि वह आरएसएस तथा प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों के धुर विरोधी हैं और उन्होंने सिर्फ संगठन की तारीफ की है। CWC यानी कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक शुरू होने से पहले दिग्विजय सिंह ने एक्' पर एक पुरानी तस्वीर साझा की, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी आगे की तरफ नीचे बैठे हुए हैं और उनके पीछे भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं। सिंह ने पोस्ट किया, कोरा वेबसाइट पर मुझे यह चित्र मिला। बहुत ही प्रभावशाली है। किस प्रकार आरएसएस का जमीनी स्वयंसेवक व जनसंघ भाजपा का कार्यकर्ता नेताओं के चरणों में फर्श पर बैठकर प्रदेश का मुख्यमंत्री व देश का प्रधानमंत्री बना। यह संगठन की शक्ति है। जय सियाराम।

दिल्ली में होगा नितिन नबीन का नया पता, नए साल से बदल जाएगा आशियाना

नई दिल्ली  भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन नए साल में पूरी तरह से दिल्ली शिफ्ट हो जाएंगे. सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में उनके नए आशियाने की तलाश पूरी हो चुकी है और वह सुनेहरी बाग रोड स्थित बंगला नंबर 9 में रहने के लिए शिफ्ट होंगे. बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, मकर संक्रांति के बाद नितिन नबीन अपने नए आवास में प्रवेश करेंगे. उनके दिल्ली शिफ्ट होने को पार्टी के संगठनात्मक स्तर पर एक अहम कदम माना जा रहा है.   मकर संक्रांति के बाद बुलाई जा सकती है प्रदेश अध्यक्षों की बैठक सूत्रों का कहना है कि नितिन नबीन के दिल्ली शिफ्ट होते ही बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया में तेजी आएगी. पार्टी के अंदर इस बात की भी चर्चा है कि मकर संक्रांति के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर प्रदेश अध्यक्षों की एक अहम बैठक बुलाई जा सकती है. बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, जनवरी के तीसरे से चौथे हफ्ते के बीच राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया पूरी कराई जा सकती है. नितिन नबीन को बीजेपी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाना लगभग तय है.

दिग्विजय सिंह के RSS वाले बयान पर थरूर साथ, बोले— संगठन की ताकत को नकारा नहीं जा सकता

नई दिल्ली  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह इन दिनों संघ और भाजपा के संगठन पर दिए बयान के बाद चर्चा में बने हुए हैं। कांग्रेस पार्टी में ही कई लोग उनके इस बयान पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि इसी बीच केरल से कांग्रेस सांसद शशि थरूर अपने साथी के समर्थन में आगे आए हैं। थरूर ने कहा कि किसी भी पार्टी में अनुशासन जरूरी होता है। इस मामले में कांग्रेस का इतिहास 140 साल पीछे जाता है, हम इससे बहुत कुछ सीख सकते हैं।   थरूर ने कहा, "हमारी पार्टी का 140 साल पुराना इतिहास है। हम इससे बहुत कुछ सीख सकते हैं। किसी भी पार्टी में अनुशासन बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। मैं भी चाहता हूं कि हमारा संगठन मजबूत हो, हमारे संगठन में अनुशासन होना चाहिए, दिग्विजय सिंह इस मामले में खुलकर अपनी बात कह सकते हैं।" थरूर ने अपनी बात को आगे रखते हुए कहा कि कांग्रेस में सभी का लक्ष्य अपने संगठन को मजबूत करना ही होना चाहिए। कांग्रेस के भीतर सुधार की जरूरत पर बयान देकर विवादों में आए मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री के तर्क का थरूर ने समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए कांग्रेस को पार्टी को आतंरिक अनुशासन और संगठन की मजबूती पर ध्यान देना चाहिए। मीडिया से बात कर रहे थरूर से जब पूछा गया कि क्या इस मामले में उन्होंने दिग्विजय सिंह से बात की है। इस पर उन्होंने कहा कि उनके बीच बातचीत होना स्वाभाविक है। थरूर ने कहा, "हम दोस्त हैं और बातचीत होती रहती है। संगठन को मजबूत किया जाना चाहिए, इसमें कोई विवाद वाली बात नहीं है और न ही कोई सवाल है।" क्या है विवाद? मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अक्सर अपने बयानों को लेकर चर्चा में बने रहते हैं। आम तौर पर उनके इन बयानों के निशाने पर भाजपा होती है, लेकिन इस बार उन्होंने भाजपा और संघ की तारीफ की। शनिवार को उन्होंने 1995 में प्रधानमंत्री मोदी की एक तस्वीर साझा कि, जिसमें पीएम तत्तकालीन भाजपा नेताओं के आगे जमीन पर बैठे हैं। इसके साथ दिग्विजय सिंह ने लिखा कि यहां से कांग्रेस सीख सकती है कि संघ और भाजपा किस तरह से जमीनी स्तर के कार्यकर्ता को भी शीर्ष पदों पर पहुंचने का अवसर देती है। दिग्विजय सिंह की इस पोस्ट के बाद विवाद बढ़ गया। इसके बाद उन्होंने अपनी सफाई दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह भाजपा और संघ के कट्टर विरोधी बने हुए हैं। हालांकि इसके बाद भी पार्टी की तरफ से लगातार उन पर परोक्ष हमले होते रहे। दरअसल, कांग्रेस पार्टी के भीतर कई बार नेताओं ने दरकिनार किए जाने के आरोप लगाए हैं। कई वरिष्ठ नेताओं ने भी इस तरह की शिकायत की है कि नेतृत्व संगठन की मजबूती पर ध्यान नहीं दे रहा है। इतना ही नहीं इसी तरह के आरोपों के चलते कई बड़े नेता कांग्रेस छोड़कर दूसरे दलों में भी शामिल हो गए हैं।  

RSS पर तारीफ, कांग्रेस पर सवाल—दिग्विजय सिंह अब भी अपने स्टैंड पर कायम

 नई दिल्ली/भोपाल मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) की तारीफ कर सनसनी फैला दी है। कई तरह की अटकलों के बीच वह अब भी अपने बयान पर ना सिर्फ कायम हैं, बल्कि दोहरा भी रहे हैं। दिग्विजय सिंह ने आरएसएस की संगठन शक्ति का खुद को प्रशंसक बताते हुए अब कांग्रेस में सुधार की गुंजाइश भी बताई है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस किसी मुद्दे पर आंदोलन तो अच्छे से खड़ा कर लेती है, लेकिन इसे वोटों में नहीं बदल पा रही है। दिग्विजय सिंह ने दिल्ली में सीडब्ल्यूसी की बैठक के इतर न्यूज एजेंसी एनआई से बातचीत करते हुए कम से कम दो बार खुद को आरएसएस की संगठन क्षमता का प्रशंसक बताया। उन्होंने कहा, ‘मैं तो शुरू से इस बात को कहता रहा हूं कि आरएसएस की विचाराधारा का मैं विरोधी हूं, क्योंकि वे ना तो पूरी तरह से संविधान को मानते हैं, ना कानून को मानते हैं और अपंजीकृत संस्था है जिस पर कोई कानून लागू नहीं होता। लेकिन उनकी संगठन क्षमता का प्रशंसक इसलिए हूं क्योंकि एक ऐसी संस्था जिसका पंजीयन नहीं है वह आज इतनी शक्तिशाली हो गई कि देश के प्रधानमंत्री लाल किले से कहते हैं कि यह विश्व का सबसे बड़ा एनजीओ है, अरे भई एनजीओ है तो आपका नियम और कानून कहां चले गए। लेकिन मैं इनकी संगठन क्षमता का प्रशंसक हूं।’ कांग्रेस की क्या कमी बताई यह पूछे जाने पर कि क्या आपको कांग्रेस की संगठन क्षमता कमजोर दिख रही है? वरिष्ठ नेता ने कहा, 'इतना मैं कह सकता हूं कि इसमें सुधार की गुंजाइश है और हर संगठन में सुधार की गुंजाइश रहनी चाहिए।' एक अन्य सवाल के जवाब में दिग्विजय सिंह ने कहा, 'मैं कई बार कह चुका हूं कि कांग्रेस आंदोलन की पार्टी तो है और होना भी चाहिए कि हर बाद पर माहौल बनाने के लिए कांग्रेस पार्टी इस मामले में होशियार है, अच्छी तरह आंदोलन बनाती है। लेकिन इसको वोटों में परिवर्तित करने में हम कमजोर पड़ते हैं।' उन्होंने कहा कि संगठन को नीचे तक मजबूत करने की आवश्यकता है। मोदी के जमीन पर बैठे हुए तस्वीर दिखा की थी तारीफ दिग्विजय सिंह ने पार्टी कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक से पहले शनिवार को भाजपा और आरएसएस की ‘संगठन शक्ति’ की तारीफ कर अपने दल के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी। कार्य समिति की बैठक शुरू होने से पहले दिग्विजय सिंह ने ‘एक्स’ पर एक पुरानी तस्वीर साझा की जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगे की तरफ नीचे बैठे हुए हैं और उनके पीछे भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं। सिंह ने पोस्ट किया, ‘कोरा वेबसाइट पर मुझे यह चित्र मिला। बहुत ही प्रभावशाली है। किस प्रकार आरएसएस का जमीनी स्वयंसेवक व जनसंघ भाजपा का कार्यकर्ता नेताओं के चरणों में फर्श पर बैठकर प्रदेश का मुख्यमंत्री व देश का प्रधानमंत्री बना। यह संगठन की शक्ति है। जय सियाराम।’  

कांग्रेस सड़क पर उतरेगी, MGNREGA के नाम परिवर्तन के खिलाफ प्रदर्शन

 नई दिल्ली दिल्ली के कोटला मार्ग स्थित नए कांग्रेस मुख्यालय 'इंदिरा भवन' में शनिवार को कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई. बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित किया. कांग्रेस नेतृत्व ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा (MGNREGA) योजना को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए इसके खिलाफ 5 जनवरी 2026 से देशव्यापी 'मनरेगा बचाओ आंदोलन' शुरू करने की घोषणा की है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि पार्टी ने सर्वसम्मति से फैसला लिया है कि MNREGA को कमजोर करने की किसी भी कोशिश का पूरी ताकत से विरोध किया जाएगा. उन्होंने बताया कि CWC बैठक में नेताओं ने शपथ ली है कि इस कानून को बचाने के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष किया जाएगा. खड़गे ने कहा, “MNREGA सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि संविधान द्वारा दिया गया काम का अधिकार है. कोविड काल में इस योजना ने करोड़ों लोगों को रोज़गार और आजीविका दी. अगर MNREGA नहीं होता, तो लाखों लोगों की जान जा सकती थी. यह योजना पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की दूरदर्शिता का परिणाम है और संसद में CAG समेत कई एजेंसियों ने इसकी प्रभावशीलता को स्वीकार किया है." PMO से लिया गया फैसला: राहुल गांधी राहुल गांधी ने MNREGA का नाम बदलने के फैसले को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा, “यह फैसला सीधे PMO से लिया गया है. संबंधित मंत्री से भी कोई चर्चा नहीं की गई. यह संघीय ढांचे पर हमला है.” राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्यों से उनका पैसा और निर्णय लेने का अधिकार छीन रही है, जिससे सत्ता का केंद्रीकरण हो रहा है. उन्होंने कहा, “MNREGA एक अधिकार आधारित विकास मॉडल था, जिसकी दुनिया भर में सराहना हुई. इसे प्रधानमंत्री ने अकेले दम पर खत्म कर दिया, ठीक वैसे ही जैसे नोटबंदी की गई थी.” उन्होंने आरोप लगाया कि MNREGA को कमजोर करने का मकसद गरीबों से पैसा छीनकर बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाना है. उन्होंने कहा, “इस फैसले से आदिवासी, दलित, ओबीसी, अल्पसंख्यक और गरीब सामान्य वर्ग को भारी नुकसान होगा, जबकि इसका पूरा फायदा अरबपतियों को मिलेगा.” विपक्ष को साथ लाने का दावा राहुल गांधी ने भरोसा जताया कि इस मुद्दे पर पूरा विपक्ष एकजुट होगा. उन्होंने कहा, “हम इसका विरोध करेंगे, लड़ेंगे और मुझे पूरा विश्वास है कि पूरा विपक्ष इस कदम के खिलाफ खड़ा होगा.” प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में खड़गे ने दोहराया कि कांग्रेस महात्मा गांधी के नाम और MNREGA के मूल स्वरूप से किसी भी छेड़छाड़ को बर्दाश्त नहीं करेगी और लोकतांत्रिक तरीके से हर साजिश का मुकाबला करेगी.

लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस का मास्टरप्लान तैयार, CWC बैठक में बनी रणनीति

नई दिल्ली  संसद का शीतकालीन सत्र खत्म होने के बाद कांग्रेस पार्टी नए सिरे से मोदी सरकार को घेरने की तैयारी में लग गई है। शनिवार को हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग में अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मनरेगा को खत्म करने, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से लोगों को मताधिकार से वंचित करने तथा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जैसी संस्थाओं के दुरुपयोग को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताते हुए इसके खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से कृषि कानून को वापस लेने के लिए सरकार को बाध्य किया गया था उसी तरह मनरेगा की बहाली की रणनीति पर काम करने की जरूरत है।   कांग्रेस मुख्यालय में शनिवार को हुई वर्किंग कमेटी की बैठक में खरगे ने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कि मोदी सरकार गरीबों का हक मार रही है और उन्हें संविधान प्रदत अधिकारों से वंचित कर तानाशाही कर रही है। ईडी जैसी संस्थाओं का दुरुपयोग कर विपक्ष की छवि खराब की जा रही है और दलित, गरीब, आदिवासी वर्गों के साथ क्रूरता हो रही है और स्थिति से निपटने की रणनीति पर विचार करना आवश्यक हो गया है। मनरेगा समाप्त करना महात्मा गांधी का अपमान: खरगे कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह बैठक पार्टी के भविष्य की रणनीति पर विचार के लिए आयोजित की गई है क्योंकि इस समय लोकतंत्र, संविधान और नागरिकों के अधिकारों पर चारों तरफ गंभीर संकट छाया है। यह संकट सरकार की कार्यशैली ने पैदा किया है। संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार ने ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण मनरेगा को खत्म कर दिया है, जिसने करोड़ों गरीबों और कमजोर तबके के लोगों को बेसहारा कर दिया है। मोदी सरकार का मनरेगा को समाप्त करना, राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का अपमान है और इस पर पार्टी नेता सोनिया गांधी ने भी गहरी चिंता हाल में व्यक्त की है। मनरेगा की विश्वभर में हुई तारीफ: खरगे खरगे ने मनरेगा को कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार का ऐसा दूरदर्शी कदम बताया जिसे पूरे विश्व ने सराहा। देश के श्रम मंत्री के रूप में जब वह जी 20 देशों के श्रमिक सम्मेलनों में जाते थे तो अन्य देशों के प्रधानमंत्री और श्रम मंत्री इस योजना की बहुत तारीफ करते थे। उन्होंने कहा कि दो फरवरी 2006 को आंध्र प्रदेश के बंडलापल्ली में श्रीमती गांधी और डॉ. मनमोहन सिंह ने मनरेगा की शुरुआत की थी। इस योजना ने ग्रामीण भारत का चेहरा बदला और यह विश्व का सबसे बड़ा ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम बना। इससे पलायन रुका, गांवों को अकाल, भूख, और शोषण से मुक्ति मिली। दलितों, आदिवासियों, महिलाओं और भूमिहीन मज़दूरों को भरोसा मिला कि गरीबी की जंग में सरकार उनके साथ खड़ी है। इस कार्यक्रम से लोगों ने गरीबी से मुक्ति पाई, एक पूरी पीढ़ी मनरेगा की बदौलत स्कूल पहुँची, पढ़ी-लिखी और सम्मान से जी रही है। इस योजना का असर देख कर ही इसे राष्ट्रपिता के नाम पर समर्पित किया गया था। पर मोदी सरकार ने बिना किसी अध्ययन या मूल्यांकन के, राज्यों से या राजनीतिक दलों से सलाह-मशविरा के बिना इसे खत्म करके नया कानून थोप दिया। मनरेगा के लिए देशव्यापी आंदोलन की जरूरत: कांग्रेस अध्यक्ष कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, "इस समय देशव्यापी आंदोलन की जरूरत है। इसका पुरजोर विरोध देश के हर कोने में होना चाहिए। क्योंकि इसके पहले जनवरी 2015 में जब मोदी सरकार ने कॉरपोरेट हितों में भूमि अधिग्रहण कानून बदला तो कांग्रेस के लोग सड़कों पर उतरे और सरकार को पीछे हटना पड़ा। फिर जून 2020 में लॉकडाउन के बीच सरकार अध्यादेश से तीन काले कृषि कानून थोप दिए। संसद में विपक्ष के विरोध के बाद भी कानून पास हो गया। इसके विरोध में आंदोलन कर रहे 700 से अधिक किसानों ने शहादत दी। सरकार ने कीलें बिछाईं, पानी की बौछारें चलाईं, उनका दमन किया।हम किसानों के हक में डटे रहे और नवंबर 2021 में प्रधानमंत्री को किसानों से माफ़ी माँगते हुए कानून वापस लेने पड़े।" उन्होंने कहा, "इन काले कानूनों के वापसी की भविष्यवाणी राहुल जी ने बहुत पहले कर दी थी और हाल में उन्होंने ये भी भविष्यवाणी की है कि मोदी सरकार को दोबारा मनरेगा बहाल करना होगा। पिछले 76 सालों में संविधान ने देश के नागरिकों को इतना सिखा दिया है कि कोई तानाशाह उनका अधिकार छीन नहीं सकता। अब हमारी सामूहिक ज़िम्मेदारी है कि हम मनरेगा पर ठोस योजना बनाएं, राष्ट्रव्यापी, जन-आंदोलन खड़ा करें। यह लड़ाई हम जीतेंगे। इस कठिन हालत में देश भर के कमजोर लोग कांग्रेस की ओर देख रहे हैं।"  

मुकेश नायक ने छोड़ा पद, MP कांग्रेस में मीडिया विभाग में उथल-पुथल

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे में उन्होंने लिखा है कि नए लोगों को आगे आने का मौका देने के लिए वे यह कदम उठा रहे हैं। मुकेश नायक ने कहा कि उनका दो साल का कार्यकाल पूरी ईमानदारी और मेहनत से पूरा किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रबंधन समिति की बैठक में उन्होंने पहले ही इस मांग को रखा था। पिछले 24 घंटों में मध्य प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग में गहरा विवाद सामने आया था। यह विवाद टैलेंट हंट को लेकर शुरू हुआ। 23 दिसंबर को मुकेश नायक ने टैलेंट हंट से जुड़ा एक आदेश जारी किया था, जिसे मध्य प्रदेश कांग्रेस कम्युनिकेशन इंचार्ज अभय तिवारी ने निरस्त कर दिया। इसी के बाद मुकेश नायक ने इस्तीफा देने का फैसला लिया। यह घटनाक्रम मध्य प्रदेश कांग्रेस में आंतरिक कलह की ओर इशारा कर रहा है। 

बीमारी और इंतजार के बाद सक्रिय, शशि थरूर ने CWC मीटिंग में दिखाई तेज़ी

नई दिल्ली कांग्रेस की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की शनिवार को बैठक हो रही है. इंदिरा भवन में हो रही इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शरीक हुए हैं. इस बैठक में शामिल होने के लिए शशि थरूर भी पहुंचे. पार्टी की कई अहम बैठकों से नदारद रहने के बाद थरूर का इस बैठक में पहुंचना खासा चर्चा में है. थरूर यहां भागकर कांग्रेस मुख्यालय यानी इंदिरा भवन में दाखिल होते दिखे. सीडब्लूसी की बैठक में कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हो रहे हैं. तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू कांग्रेस मुख्यालय पहुंच चुके हैं. इसके अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा, दिग्विजय सिंह, गौरव गोगोई, कुमारी सैलजा, सचिन पायलट, वीरप्पा मोइली, चरणजीत सिंह चन्नी और अभिषेक मनुसिंघवी भी सीडब्लूसी बैठक में शामिल होने पहुंचे हैं. कांग्रेस की बैठक से कब-कब दूर रहे थरूर? इसी महीने कांग्रेस के लोकसभा सांसदों की अहम बैठक हुई थी, जिसकी अध्यक्षता राहुल गांधी ने की थी. इस बैठक में संसद के शीतकालीन सत्र से पहले पार्टी की रणनीति पर चर्चा की गई थी. हालांकि शशि थरूर इसमें शामिल नहीं हुए थे. बाद में थरूर ने सफाई देते हुए कहा था कि वे निजी कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के चलते कोलकाता में थे, जिस वजह से बैठक में शामिल नहीं हो सके. कभी बीमार, कभी बिजी थे थरूर? इसके बाद 30 नवंबर को कांग्रेस की एक और अहम रणनीतिक बैठक बुलाई गई, जिसकी अध्यक्षता सोनिया गांधी ने की थी. इस बैठक का मकसद पार्टी की समग्र रणनीति और राजनीतिक दिशा पर मंथन करना था. इस बैठक में भी शशि थरूर अनुपस्थित रहे. थरूर की ओर से बताया गया कि वे उस समय केरल से उड़ान पर थे, और इसी कारण समय पर बैठक में नहीं पहुंच पाए. इससे पहले 18 नवंबर SIR वोटर री-वेरिफिकेशन जैसे मुद्दे पर कांग्रेस नेतृत्व की एक अहम बैठक हुई थी. इस बैठक में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे, लेकिन शशि थरूर इसमें भी शामिल नहीं हो सके. इस बार उनकी गैरहाजिरी की वजह स्वास्थ्य कारण बताई गई थी. फिर चर्चा में थरूर का बयान इस बीच शशि थरूर एक बयान खूब चर्चा में है. उन्होंने इंडिया टुडे से बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करते हुए कहा कि विदेश नीति भाजपा या कांग्रेस नहीं, बल्कि भारत की होती है. अगर प्रधानमंत्री हारते हैं, तो यह पूरे देश की हार है और पीएम मोदी की हार का जश्न मनाना भी भारत की हार का जश्न मनाने जैसा ही है. थरूर ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के शब्दों को दोहराते हुए कहा, ‘अगर भारत मर गया, तो फिर कौन जिंदा रहेगा?’ CWC की बैठक में किन-किन मुद्दों पर चर्चा यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को खत्म कर उसकी जगह विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी ‘जी राम जी’ कानून लागू किया है. हाल ही में संसद के शीतकालीन सत्र में यह विधेयक पारित हुआ और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी भी मिल चुकी है. कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस नए कानून पर कड़ा ऐतराज जताया है. पार्टी का आरोप है कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना न सिर्फ गांधी जी का अपमान है, बल्कि ग्रामीण गरीबों के अधिकारों पर भी सीधा हमला है. जी राम जी कानून पर क्या आपत्ति? इस नए कानून के तहत हर ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है, लेकिन इसमें केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 के फंडिंग अनुपात का प्रावधान किया गया है. कांग्रेस का कहना है कि इससे राज्यों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और योजना की मूल भावना कमजोर होगी. CWC बैठक में मनरेगा के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ रणनीति को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है. इसके अलावा मौजूदा राजनीतिक हालात और संगठनात्मक मुद्दों पर भी चर्चा होगी. बिहार में हार के बाद CWC की पहली बैठक यह बिहार चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस वर्किंग कमेटी की पहली बैठक है. ऐसे में आत्ममंथन और आगे की रणनीति पर भी गंभीर चर्चा होने की उम्मीद है. यह बैठक अगले साल होने वाले असम, केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी विधानसभा चुनावों के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है. पार्टी इन राज्यों में अपनी सियासी दिशा और चुनावी रणनीति को लेकर भी मंथन कर सकती है.