samacharsecretary.com

चीन के बयान पर कांग्रेस का हमला, भारत-पाक सीजफायर को लेकर केंद्र से जवाबदेही की मांग

नई दिल्ली  ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर को लेकर अभी तक सिर्फ अमेरिका दावा कर रहा था, लेकिन अब चीन ने भी अपना दावा ठोक दिया है। इस बीच कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता संबंधी चीन का दावा चिंताजनक है और ऐसे में सरकार के स्तर पर इसमें स्पष्टता आनी चाहिए। जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया, "राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने 10 मई, 2025 को ऑपरेशन सिंदूर को रोकने के लिए व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप किया था। वह यह दावा कम से कम सात अलग-अलग देशों में, विभिन्न मंचों पर, 65 बार कर चुके हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने तथाकथित अच्छे मित्र द्वारा किए गए इन दावों पर आज तक अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी है। जयराम रमेश का कहना है, "अब चीन के विदेश मंत्री भी ऐसा ही दावा कर रहे हैं और कह रहे हैं कि चीन ने भी मध्यस्थता की थी। 4 जुलाई 2025 को सेना उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत असल में चीन का सामना कर रहा था और उससे लड़ रहा था।" कांग्रेस नेता के अनुसार, चीन निर्णायक रूप से पाकिस्तान के साथ खड़ा था, ऐसे में भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने के चीन के दावे चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि यह चिंताजनक सिर्फ इसलिए नहीं कि यह देश की जनता को अब तक बताई गई बातों के उलट हैं, बल्कि इसलिए भी कि यह हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा का मजाक बनाता प्रतीत होता है। कांग्रेस नेता ने कहा, "इस दावे को चीन के साथ हमारे संबंधों के संदर्भ में भी समझा जाना चाहिए। हमने चीन के साथ फिर से बातचीत शुरू की है, लेकिन दुर्भाग्यवश यह बातचीत चीन की शर्तों पर हो रही है। 19 जून 2020 को प्रधानमंत्री द्वारा चीन को दी गई क्लीन चिट ने भारत की बातचीत की स्थिति को काफ़ी कमज़ोर कर दिया है। हमारा व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर है और हमारे निर्यात का बड़ा हिस्सा चीन से होने वाले आयात पर निर्भर है। अरुणाचल प्रदेश के संबंध में चीन की उकसाने वाली हरकतें लगातार जारी हैं। " उन्होंने कहा कि ऐसे एकतरफा और शत्रुतापूर्ण संबंधों के बीच, भारत की जनता को यह स्पष्टता चाहिए कि ऑपरेशन सिंदूर को अचानक रोकने में चीन ने क्या भूमिका निभाई। आपको बता दें कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव उन प्रमुख मुद्दों में रहा जिन्हें चीन की मध्यस्थता से हल किया गया। भारत का कहना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच 7-10 मई के संघर्ष को दोनों देशों की सेनाओं के डीजीएमओ (सैन्य संचालन महानिदेशक) के बीच सीधी बातचीत के माध्यम से हल किया गया था। भारत यह भी लगातार कहता रहा है कि भारत और पाकिस्तान से संबंधित मामलों में किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप के लिए कोई जगह नहीं है।  

पश्चिम बंगाल पर अमित शाह की नजर, असंतुष्ट दिलीप घोष से मुलाकात कर साधा सियासी संतुलन

कोलकाता  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अभी कुछ महीनों का वक्त बाकी है, लेकिन भाजपा अभी से ऐक्टिव हो गई है। यहां तक कि ज्यादातर बड़े राज्यों में चुनाव की कमान संभालने वाले होम मिनिस्टर अमित शाह ने खुद यहां संभाल लिया है। 2021 में 2 मई को बंगाल चुनाव के नतीजे आए थे और इस बार भी अप्रैल में ही मतदान कराए जा सकते हैं। इस बीच बुधवार को अमित शाह ने कोलकाता में तमाम भाजपा नेताओं के साथ बैठक की। यह मीटिंग कोलकाता के साल्ट लेक होटल में हुई। इसमें नेता विपक्ष शुभेंदु अधिकारी और प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य मौजूद थे। इसके अलावा तमाम दिग्गज नेताओं की मौजूदगी रही। इस मीटिंग में दिलीप घोष की मौजदूगी ने सभी को चौंकाया। उनसे खुद अमित शाह ने मुलाकात की और कई मुद्दों पर बात की है। उनकी मौजूदगी इसलिए चर्चाएं बटोर रही है क्योंकि कुछ समय पहले तक ऐसी चर्चाएं रही हैं कि वह भाजपा से नाराज चल रहे हैं। वह ममता बनर्जी के साथ एक कार्यक्रम में भी नजर आए थे, जब सीएम भगवान जन्नाथ के एक मंदिर का लोकार्पण करने पहुंची थीं। चर्चा यहां तक थी कि वह टीएमसी में जा सकते हैं। लेकिन अब चीजें बदल गई हैं। भाजपा की कोशिश है कि दिलीप घोष को साध लिया जाए। 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्हें अहम भूमिका देकर फ्रंट पर लाया जा सकता है। इस बैठक में बंगाल के सभी पार्टी सांसदों, विधायकों को बुलाया गया था। यही नहीं कई नगर निगमों के नेता भी मौके पर थे। संगठन के भी कुछ प्रभावशाली लोगों को इसका न्योता दिया गया था। सूत्रों का कहना है कि इस मीटिंग में ज्यादातर उन नेताओं को ही बुलाया गया, जिन्हें विधानसभा इलेक्शन का टिकट मिल सकता है। इसके अलावा कुछ ऐसे सीनियर नेता भी बुलाए गए, जिन्हें चुनाव में प्रचार की जिम्मेदारी मिल सकती है। दरअसल दिलीप घोष का यहां पहुंचना कई नेताओं को हैरान करने वाला रहा। उन्हें बंगाल भाजपा के सबसे कामयाब प्रदेश अध्यक्षों में शुमार किया जाता है। दिलीप घोष क्यों कहे जाते हैं बंगाल भाजपा के सबसे कामयाब अध्यक्ष उनके ही दौर में 2019 में भाजपा को 18 सांसद मिले थे, जबकि 2014 में यह संख्या सिर्फ 3 की ही थी। फिर 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की असेंबली सीटों की संख्या 70 तक पहुंच गई। ऐसे में उनकी मौजूदगी को एक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। अमित शाह ने साफ संकेत दिया कि वह भाजपा में एकजुटता चाहते हैं और ऐसे सभी नेताओं को एक मंच पर लाना चाहते हैं, जो पार्टी में एक बड़ा कद रखते हैं।  

दिग्विजय सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग, सरला मिश्रा केस में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को दिया ज्ञापन

भोपाल  मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के लिए आजकल दिन अच्छे नहीं चल रह हैं। पहले BJP RSS पर लेकर दिए बयान को लेकर उन्हें पार्टी के भीतर ही विरोध सहना पड़ा । अब एक पुराने मामले में उनको कांग्रेस पार्टी से हटाने के लिए मांग उठी है। दिग्विजय सिंह को पार्टी से निष्कासित करने के लिए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को एक ज्ञापन सौंपा गया है। यह ज्ञापन कांग्रेस नेत्री रही स्वर्गीय सरला मिश्रा के भाई अनुराग मिश्रा ने दिया है। अनुराग मिश्रा ने जीतू पटवारी को ज्ञापन सौंपकर दिग्विजय को पार्टी से बाहर करने की मांग कर डाली है। आपको बता दें कि  सरला मिश्रा हत्याकांड में दिग्विजय सिंह पर संगीन आरोप हैं. वहीं कोर्ट ने भी 28 साल पुराने सरला मिश्रा हत्याकांड फिर से जांच के आदेश दिए हैं. इसी साल अप्रैल में कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान सवाल उठाया था कि 90 फीसदी जलने के बाद कोई पीड़ित मौत से पहले बयान कैसे दे सकता है।यही नहीं बयान देने के बाद उस पर साइन कैसे कर सकता है.पुलिस ने सरला मिश्रा केस में वर्ष 2000 में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करके मौत को खुदकुशी बताया गया था. लेकिन सरला के भाई अनुराग मिश्रा ने जांच को फिर से शुरू करने के लिए अदालत में याचिका दाखिल की थी ।  कांग्रेस नेत्री निधि चतुर्वेदी ने दिग्विजय सिंह Digvijay Singh के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की। उनके RSS संबंधी बयान को लेकर फेसबुक पोस्ट में निधि चतुर्वेदी ने कहा कि इससे पार्टी की वैचारिक लड़ाई कमजोर हुई, जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा है। निधि चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर लिखा- वैचारिक दोगलापन या घर वापसी की छटपटाहट! कांग्रेस की जड़ों में मट्ठा डालनेवाले दिग्विजयसिंह पर कब होगी कार्रवाई? दिग्विजय सिंह के हालिया बयान ने राहुल गांधी से लेकर उन तमाम जमीनी कार्यकर्ताओं के मुंह पर तमाचा मार दिया है, जो आरएसएस और बीजेपी की विचारधारा के खिलाफ सड़क पर लड़ रहे हैं। एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता होने के नाते उनकी यह जिम्मेदारी बनती थी कि वे पार्टी के वैचारिक संघर्ष को धार देते, न कि विपक्षी खेमे का गुणगान कर अपने ही कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ते। सुर्खियों में बने रहने की उनकी इस 'ऊल-जलूल' बयानबाजी ने आज हर सच्चे कांग्रेसी के आत्म-सम्मान को गहरी ठेस पहुंचाई है। दो दशक में पार्टी को खोखला किया फेसबुक पोस्ट में निधि चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि दिग्विजयसिंह के हस्तक्षेप के कारण पार्टी के कई समर्पित नेता हाशिए पर चले गए। पिछले दो दशकों से प्रदेश में कांग्रेस की राजनीति में उनका जबर्दस्त हस्तक्षेप रहा है। संगठनात्मक फैसलों से लेकर नेतृत्व चयन तक में दिग्विजय सिंह की निर्णायक भूमिका रही है। उनकी व्यक्ति-केंद्रित राजनीति और अंदरूनी खींचतान के कारण पार्टी को खासा नुकसान हुआ। निधि चतुर्वेदी ने दिग्विजय सिंह की राजनैतिक निष्ठा और विरासत पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा है कि अनेक पुस्तकों, राजनेताओं की जीवनियों और शोध पत्रों में राघोगढ़ राजघराने का हिंदू महासभा से जुड़ाव का उल्लेख किया गया है। निधि चतुर्वेदी के अनुसार RSS व बीजेपी के नेता राम माधव ने दावा किया था कि दिग्विजय सिंह के पिता बलभद्र सिंह हिंदू महासभा के समर्थन से विधायक बने थे। स्वयं दिग्विजय सिंह भी हिंदू महासभा के सदस्य के रूप में नगरपालिका में पदासीन हुए थे। क्या था सरला मिश्रा हत्याकांड? महिला कांग्रेस कार्यकर्ता सरला मिश्रा 14 फरवरी 1997 को भोपाल स्थित अपने घर में जली हुई हालत में मिली थीं. उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां पांच दिन बाद उनकी मौत हो गई. सरला के परिवार ने इसे हत्या बताया था और आरोप लगाया कि इसमें दिग्विजय सिंह और उनके भाई लक्ष्मण सिंह का हाथ था. सरला की मौत के बाद मध्य प्रदेश में सियासी तूफान आ गया था. तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर भी मामले को दबाने के भी आरोप लगे थे. पिछले साल सरला के भाई अनुराग मिश्रा ने मामले को बंद करने के खिलाफ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक विरोध याचिका दायर की थी. हाईकोर्ट ने भोपाल की एक कोर्ट को शिकायतकर्ता समेत केस के गवाहों के बयान दर्ज करने और यह जांच करने के लिए कहा था कि क्या केस को बंद करना कानून के मुताबिक था. साल 2000 में पुलिस ने दाखिल की थी क्लोजर रिपोर्ट इसी साल अप्रैल में कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए यह सवाल उठाया था कि 90 फीसदी जलने के बाद कोई पीड़ित मौत से पहले बयान कैसे दे सकता है. बयान देने के बाद उसपर साइन कैसे कर सकता है. दरअसल पुलिस ने सरला मिश्रा केस में साल 2000 में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसमें इसे खुदकुशी बताया गया था. हालांकि अनुराग इससे संतुष्ट नहीं थे. उन्होंने जांच को फिर से शुरू करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था. अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए कहा था कि केस की जांच अधूरी थी.

पहलगाम आतंकी हमले पर सियासी संग्राम, ममता बनर्जी ने अमित शाह को बताया ‘दुशासन’

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की चीफ ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा पलटवार किया है और पूछा है कि अगर बंगाल में आतंकी नेटवर्क सक्रिय हैं तो कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला केंद्र ने करवाया था क्या? उन्होंने सवाल उठाया कि जब केंद्र सरकार दावा करती है कि देश में आतंकवाद पर काबू पा लिया गया है, तो फिर पहलगाम हमला कैसे हुआ। ममता ने यहां तक कह दिया कि क्या यह हमला केंद्र की ओर से कराया गया था। दरअसल, ममता अमित शाह के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दे रहीं थीं, जिसमें शाह ने आरोप लगाया था कि चुनावी राज्य में आतंकी नेटवर्क सक्रिय है। बांकुड़ा जिले के बीरसिंहपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की तुलना महाभारत के दो पात्रों दुर्योधन और दुशासन से की। उन्होंने कहा, “जैसे ही चुनाव आते हैं, दुर्योधन और दुशासन बंगाल में नजर आने लगते हैं।” ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमित शाह तीन दिन के बंगाल दौरे पर हैं और राज्य में 2026 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी भी 20 दिसंबर को बंगाल आए थे। आतंकवाद को लेकर केंद्र से सवाल अमित शाह द्वारा बंगाल को आतंकियों का अड्डा बताए जाने पर ममता ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, “अगर जम्मू-कश्मीर में कोई आतंकी नहीं है, तो पहलगाम में हमला कैसे हुआ? दिल्ली में जो घटना हुई, उसके पीछे कौन था?” बता दें कि इसी साल 22 अप्रैल को दक्षिणी कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने हमला बोल दिया था, जिसमें 26 पर्यटकों की मौत हुई थी। इसके अलावा पिछले महीने नवंबर में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लाल किले के पास कार बम धमाके में 15 लोगों की जान चली गई थी। मतदाता सूची संशोधन पर भी हमला ममता बनर्जी ने अपने भाषण में राज्य में हो रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के नाम पर राज्यभर में लोगों को परेशान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री का दावा है कि SIR के तहत करीब 1.5 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने की तैयारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें राजबंशी, मतुआ और आदिवासी समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के कारण लगभग 60 लोगों की मौत हो चुकी है। EC का करेंगे घेराव बनर्जी ने कहा कि यदि मतदाता सूची से किसी एक भी वैध मतदाता का नाम हटाया गया तो तृणमूल कांग्रेस दिल्ली में निर्वाचन आयोग के कार्यालय का घेराव करेगी। बनर्जी ने कहा कि एसआईआर के नाम पर राज्य के लोगों को ‘‘प्रताड़ित’’ किया जा रहा है। बुजुर्गों को दस्तावेज सत्यापन की सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है।’’ बनर्जी ने कहा कि राज्य के लोग इस तरह के ‘‘उत्पीड़न’’ को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘लोग भाजपा को पश्चिम बंगाल में सत्ता में नहीं आने देंगे।’’ भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला बोलने वालों की पिटाई की जाती है बनर्जी ने कहा कि भाजपा चुनाव नजदीक आते ही ‘सोनार बांग्ला’ बनाने का वादा करती है, लेकिन हकीकत में जिन राज्यों में वह सत्ता में है वहां बांग्ला बोलने वालों की पिटाई की जाती है। ममता ने कहा कि SIR को AI के जरिए किया जा रहा है, यह एक बड़ा घोटाला है। आखिर में सिर्फ आप (अमित शाह) और आपका बेटा ही बचेंगे। ममता बनर्जी के इस बयान से एक बार फिर केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव तेज हो गया है, और आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल और गरमाने की संभावना है। 

‘बांग्ला बोलने वालों पर हमले चिंता का विषय’, स्थिति बिगड़ने से पहले कार्रवाई जरूरी: पीएम मोदी से बोले अधीर रंजन

नई दिल्ली  कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर देश के विभिन्न हिस्सों, खासकर भाजपा-शासित राज्यों में बंगाली भाषी लोगों पर हो रहे कथित हमलों का मुद्दा उठाया। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं पश्चिम बंगाल में साम्प्रदायिक तनाव और हिंसा को बढ़ावा दे सकती हैं। प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में चौधरी ने कहा कि बंगाली बोलने वाले प्रवासी मजदूरों का एकमात्र अपराध यह है कि वे बंगाली भाषा बोलते हैं, जिसे कई जगहों पर प्रशासन गलत तरीके से उन्हें पड़ोसी देश बांग्लादेश से आया अवैध घुसपैठिया समझ लेता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी गलतफहमी के चलते बंगाली भाषी लोगों को परेशान किया जा रहा है और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। चौधरी ने पत्र में यह भी जिक्र किया कि पश्चिम बंगाल के कई इलाके मुस्लिम बहुल हैं और उनकी सीमा बांग्लादेश से लगती है। देश के अन्य राज्यों में बंगाली भाषी लोगों के खिलाफ हो रही कार्रवाइयों के कारण इन सीमावर्ती इलाकों में भी समुदायों के बीच तनाव बढ़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते स्थिति को नहीं संभाला गया तो इससे राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे सभी राज्य सरकारों को संवेदनशील बनाने के लिए निर्देश दें, ताकि देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रवासी मजदूरों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव, हिंसा या उत्पीड़न न हो। चौधरी ने जोर देकर कहा कि भारत की विविधता उसकी ताकत है और भाषा या क्षेत्र के आधार पर किसी नागरिक के साथ अन्याय स्वीकार्य नहीं है। इस बीच, हालिया घटनाओं ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के जंगीपुर इलाके के रहने वाले 30 वर्षीय प्रवासी मजदूर ज्वेल राणा की ओडिशा के संबलपुर में ‘बीड़ी’ को लेकर हुए विवाद के बाद कथित तौर पर हत्या कर दी गई। इसी तरह, मुंबई में दो प्रवासी मजदूरों को बांग्लादेश के अवैध अप्रवासी होने के संदेह में गिरफ्तार किए जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल प्रवासी कल्याण बोर्ड ने दावा किया है कि पिछले 10 महीनों में उसे देश के विभिन्न हिस्सों से बंगाली भाषी प्रवासी मजदूरों के उत्पीड़न से जुड़ी 1,143 शिकायतें मिली हैं, जिनमें से अधिकांश मामले भाजपा-शासित राज्यों से जुड़े बताए गए हैं। कांग्रेस ने इन घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा है कि प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। पार्टी ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और देश में कहीं भी किसी नागरिक के साथ भाषा या पहचान के आधार पर भेदभाव न किया जाए।

जयवर्धन सिंह ने दिग्विजय सिंह के विचारों का समर्थन किया, आलाकमान पर उठाए सवाल

भोपाल   बीजेपी संगठन और आरएसएस की तारीफ कर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पार्टी में चौतरफा घिरे हुए हैं. अब उनके बचाव में पूर्व मंत्री और बेटा जयवर्धन सिंह आए हैं. जयवर्धन सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा "यदि दिग्विजय सिंह कांग्रेसी नहीं, तो कोई कांग्रेसी नहीं है. थरूर हों या दिग्विजय सिंह हों, बोलने की आजादी बनी रहनी चाहिए. वे विद्वान आदमी हैं, उन्हें बोलते रहना चाहिए. उनका बोला सुना जाना चाहिए." लोकतांत्रिक संगठन में गुटबाजी होती है जयवर्धन सिंह ने लिखा "दिग्विजय सिंह ने कोई बयान दिया, जिस पर कहर बरपा हुआ है. सोशल मीडिया की तमाम फीड में उन पर मूर्खतापूर्ण आरोप लगाती पोस्ट दिख रही हैं. वे कांग्रेस की आम राजनीतिक संस्कृति से लबरेज हैं, जिसमें गुटबाजी एक अहम भाग है. इसका नुकसान कांग्रेस को होता रहा है, पर लोकतांत्रिक संगठनों में भी विचार, गुट, क्यों नहीं होने चाहिए."  वह लिखते हैं "आखिर सारे विचार बुद्धि का ठेका शीर्ष नेतृत्व लेकर रखे और बाकी देशभर में करोड़ों सदस्य, सब उसी मालिक का एम्पलीफायर रिकार्ड बजाने वाले बुद्धिहीन रोबोट हो जाएं. ऐसा संगठन, एक फॉसिस्ट होता है." दिग्विजय सिंह से बड़ा कोई कांग्रेसी नहीं दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह ने लिखा "कांग्रेस में सब कुछ हो सकता है, पर फॉसिस्ट नहीं. थरूर हों या दिग्विजय, उन्हें बोलते रहना चाहिए. कुछ माना जाना चाहिए, कुछ रिजेक्ट करने लायक भी हो सकता है. लेकिन विशेषकर दिग्विजय सिंह के लिए कोई कहे कि वह बीजेपी में चले जाएंगे या कांग्रेस को जमींदोज करने के गुप्त षडयंत्र में शामिल हैं, तो इससे बड़ी मूर्खता कुछ नहीं." "अगर दिग्विजय सिंह कांग्रेस के शुभचिंतक नहीं तो दुनिया में कोई और शुभचिंतक नहीं. उनके विरुद्ध बड़े बोल लिखने-बोलने वाले तो कतई नहीं. आप दिग्विजय सिंह से बड़ा कांग्रेसी हो नहीं सकते." दिग्विजय सिंह के किस ट्वीट पर मचा बवाल दिग्विजय सिंह ने पिछले दिनों एक फोटो टैग कर आरएसएस की तारीफ की थी. उन्होंने 27 दिसंबर को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक से ठीक पहले पुरानी तस्वीर शेयर की. इसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को युवावस्था में लालकृष्ण आडवाणी के पैरों के पास जमीन पर बैठे दिखाया गया. इसके बाद उन्होंने लिखा "कैसे एक साधारण कार्यकर्ता मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री बन सकता है. यह संगठन की शक्ति है." 

पुणे महानगरपालिका चुनाव से पहले NDA में दरार गहरी, BJP और शिवसेना में बढ़ी तल्खी

पुणे  महाराष्ट्र में आगामी पुणे महानगरपालिका (पीएमसी) चुनावों से पहले सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में दरार पड़ती दिख रही है। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर आरोप लगाया है कि उसने चुनाव-पूर्व गठबंधन में शिवसेना को सम्मानजनक सीटों का हिस्सा नहीं दिया। मंगलवार को शिंदे गुट की शिवसेना ने कहा कि वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सहयोगी भाजपा से अलग होने के लिए पूरी तरह तैयार है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने इससे पहले राज्य की सभी 29 नगर निगमों में शिवसेना के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। हालांकि पुणे महानगरपालिका के लिए भाजपा द्वारा प्रस्तावित 165 में से केवल 16 सीटें शिवसेना को देने के फार्मूले को पार्टी की स्थानीय इकाई ने सिरे से खारिज कर दिया। पुणे मनपा के चुनाव 15 जनवरी को होने हैं, जबकि नतीजे 16 जनवरी को घोषित किए जाएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, सीट बंटवारे पर नाराजगी जताते हुए शिवसेना नेता अजय भोसले ने कहा- भाजपा का व्यवहार हमें आहत करने वाला है। इस सीट-शेयरिंग फॉर्मूले को हम स्वीकार नहीं कर सकते। गठबंधन पर अंतिम फैसला पार्टी स्तर पर होना है, लेकिन हमने 60 इच्छुक उम्मीदवारों को आधिकारिक पार्टी दस्तावेज दे दिए हैं। वहीं पार्टी के सुर में सुर मिलाते हुए शिवसेना पुणे शहर इकाई के प्रमुख नाना भांगिरे ने कहा- पुणे में भाजपा के साथ गठबंधन अब लगभग समाप्त हो चुका है। इस बीच भाजपा ने उन सीटों पर भी अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, जिन पर शिवसेना दावा कर रही थी। शिवसेना नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा ने नगरपालिका में जीत की मजबूत संभावना न होने के बावजूद सीटों का बड़ा हिस्सा खुद ले लिया। एक पार्टी नेता ने कहा कि एकनाथ शिंदे की शिवसेना सभी सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने को तैयार है। गौरतलब है कि 2017 के पुणे मनपा चुनावों में शिवसेना ने 10 सीटें जीती थीं। इनमें से सात पूर्व पार्षद बाद में भाजपा में शामिल हो गए, और अब भाजपा ने उन्हें ही अपने उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतार दिया है। राजनीतिक हलचल के बीच सोमवार रात शिवसेना के नेता रविंद्र धांगलेकर ने राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी प्रमुख अजित पवार से मुलाकात कर संभावित गठबंधन पर चर्चा की। धांगलेकर ने बताया- अजित पवार ने आश्वासन दिया है कि वे इस प्रस्ताव पर विचार कर शिवसेना को जल्द जवाब देंगे। वहीं, शिवसेना मंत्री उदय सामंत भी पुणे पहुंचे और उन्होंने स्थानीय नेताओं के साथ बैठक कर चुनावी रणनीति पर मंथन किया। कुल मिलाकर, पुणे मनपा चुनाव से ठीक पहले भाजपा-शिवसेना के रिश्तों में खटास ने राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि शिवसेना अकेले मैदान में उतरती है या फिर किसी नए राजनीतिक गठबंधन का रास्ता चुनती है।  

‘दिग्विजय सिंह BJP में शामिल होने की कोशिश में’, MLA पन्नालाल शाक्य का बड़ा बयान

 गुना दिल्ली में होने वाली कांग्रेस की CWC बैठक से पहले दिग्विजय सिंह के बयान ने सियासत गर्मा दी है. दिग्विजय सिंह ने RSS और BJP में अनुशासन की तारीफ करते हुए तस्वीर शेयर की थी. कांग्रेस नेता की बयानबाजी को लेकर भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने खुलासा किया है. विधायक पन्नालाल शाक्य ने कहा, ''दिग्विजय सिंह BJP में आने का रास्ता ढूंढ रहे हैं, इसलिए RSS और BJP की विचारधारा से प्रभावित हो रहे हैं.'' गुना विधायक ने दिग्विजय सिंह को लेकर खुलासा करते हुए कहा, ''वे किसके संपर्क में हैं ये ऊपरवाले (हाईकमान) ही जानते हैं. दिग्विजय सिंह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री भी हैं, इसलिए उनके विषय में ज्यादा क्या कहा जाए.'' चरनोई' और 'मंदिर माफी' की जमीन पर घेरा BJP विधायक ने दिग्विजय सिंह के मंदिर माफी की जमीन पर रोक लगाने वाले बयान पर भी प्रतिक्रिया दी. कहा कि सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय के शासनकाल में जमीनों की बंदरबांट हुई थी. मंदिर माफी की कितनी जमीन बची है, पहले उसकी तलाश कर ली जाए. मंदिर माफी की जमीन बचाने के लिए दिग्विजय सिंह राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं. वे केवल वोटबैंक को देखते हुए बयानबाजी करते हैं. यदि उन्हें मंदिर माफी की जमीन की इतनी ज्यादा चिंता है तो फिर चरनोई (गौ चर भूमि) की जमीन के बारे में क्यों नहीं बोलते? गुना विधायक पन्नालाल शाक्य ने कहा, ''गायों के लिए आरक्षित चरनोई जमीन पर माफियाओं ने कब्जा जमा लिया. मंदिरों के रखरखाव के लिए अंग्रेजी शासन में जमीनें दी गई थीं और मुगल शासन में मवेशियों के लिए चरनोई भूमि आरक्षित की गई थी. लेकिन दिग्विजय सिंह के शासन में तो सभी सरकारी जमीनें ही बंट गई. अब गाय कहां खड़ी होंगी? गाय अगर वोट दे रही होतीं तो जमीनें बच जातीं? लेकिन गाय तो मूक है यानी बोल नहीं सकती.''   BJP विधायक पन्नालाल शाक्य पन्नालाल शाक्य के बयान अक्सर चर्चाओं में रहते हैं. हाल ही में उन्होंने मंच से गुना कलेक्टर को लेकर भी नसीहत दी थी. पन्नालाल ने कलेक्टर पर आरोप लगाते हुए कहा था कि वे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को बदनाम करना चाहते हैं. वहीं, एक अन्य बयान में पन्नालाल शाक्य ने लोकसभा सीट पर बैठने की भी इच्छा जाहिर की थी.

अमित शाह का मिशन बंगाल, दो दिवसीय दौरे में संगठन और हिंदुत्व के मुद्दे पर होगी जोरदार चर्चा

कलकत्ता दिल्ली और बिहार की चुनावी जंग फतह करने के बाद बीजेपी का पूरा फोकस 2026 में होने वाले चुनावी राज्यों पर है. अगले साल देश के चार राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं, जिसको लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पूरी तरह से जमीन पर उतर गए हैं और सियासी माहौल तैयार करने में जुट गए हैं. गृहमंत्री अमित शाह ने 2026 में होने वाले चार राज्यों, असम, पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनाव का दौरे पर निकल पड़े हैं. अमित शाह असम में दो दिनों तक मंथन करने के बाद सोमवार शाम पश्चिम बंगाल पहुंच गए हैं. इसके बाद जनवरी के पहले हफ्ते में तमिलनाडु और उसके बाद केरल का दौरा करेंगे. पश्चिम बंगाल के दौरे पर पहुंचे अमित शाह मंगलवार और बुधवार दो दिनों तक कोलकाता में रहेंगे. इस दौरान अमित बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करने के साथ-साथ आरएसएस के कोलकाता दफ्तर जाएंगे. इस तरह बंगाल चुनाव को लेकर रूपरेखा तैयार करेंगे. बंगाल को फतह करने उतरे अमित शाह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार शाम पश्चिम बंगाल पहुंचे है. अमित शाह के दौरे को बीजेपी के चुनावी अभियान के लिए अहम कड़ी माना जा रहा है. 29 दिसंबर की रात बंगाल पहुंचते ही अमित शाह ने बीजेपी के कोर ग्रुप के नेताओं के साथ बैठक किया, जिसमें चुनावी रणनीति और संगठनात्मक तैयारियों पर मंथन किया गया. अमित शाह मंगलवार को कोर ग्रुप के अलावा पार्टी के सामान्य नेताओं के साथ भी बैठक करेंगे. इसके बाद शाह कोलकाता में मीडिया से रूबरू होंगे और एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे. मंदिर से संघ दफ्तर तक का शाह करेंगे दौरा अमित शाह मंगलवार की शाम कोलकाता के प्रसिद्ध इस्कॉन मंदिर में दर्शन करने भी जाएंगे और फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कोलकाता स्थित कार्यालय का दौरा करेंगे. यहां वह संघ के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रसारकों के साथ बंगाल से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर लंबी मंत्रणा करेंगे. अमित शाह बुधवार को कोलकाता में बीजेपी कार्यकर्ताओं के एक बड़े सम्मेलन को संबोधित करेंगे. इस के जरिए शाह चुनावी राज्य बंगाल के कार्यकर्ताओं में जोश और उत्साह भरने की कोशिश करेंगे. भाजपा सूत्रों के अनुसार, यह दौरा बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. संगठन को मजबूती तो हिंदुत्व को धार अमित शाह बंगाल में पार्टी की जमीनी हकीकत परखेंगे और रणनीति को धार देने का काम करेंगे. अमित शाह का बंगाल दौरा मुख्य रूप से संगठनात्मक मजबूती पर केंद्रित है. इसीलिए रैलियों के बजाय बंद कमरों की बैठकों (स्ट्रेटेजी मीटिंग्स) को ज्यादा फोकस अमित शाह कर रहे हैं. कोलकाता के साल्ट लेक के सेक्टर पांच में बीजेरी ने एक नई बिल्डिंग किराए पर ली है, जिसे चुनाव का मुख्य मुख्यालय बनाया गया है. अमित शाह ने सोमवार को बीजेपी के इसी नए ठिकाने पर बंगाल के पार्टी दिग्गजों के साथ 2026 में कमल खिलाने का खाका तैयार करने का काम किया है. बीजेपी इस बार बंगाल चुनाव में 'हिंदू अस्मिता' और बांग्लादेश में हिंदुओं की हो रही हत्या और राजनीतिक हालातों को बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है. ऐसे में गृह मंत्री अमित शाह का दौरा बंगाल की राजनीति में बीजेपी के आक्रामक रुख का साफ संकेत दे रहा है. अमित शाह बीजेपी सांसदों और विधायकों के साथ भी अलग बैठक करेंगे. इस दौरे का मकसद केवल चुनाव की तैयारी ही नहीं, बल्कि राज्य के फीडबैक के आधार पर आउटरीच प्रोग्राम को और असरदार बनाना है. इस तरह अमित शाह जमीनी हकीकत को समझते हुए आगे की रणनीति बनाने का काम करेंगे.

दिग्विजय सिंह का कांग्रेस से पलटवार, कहा- RSS नहीं तो शिवसेना से सीखो, कांग्रेस को दी नसीहत

भोपाल  BMC यानी बृह्नमुंबई महानगरपालिका चुनाव से पहले शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस में तनातनी जारी है। अब उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाले दल ने कांग्रेस को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से सीख लेने की सलाह दी है। खास बात है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की तरफ से हाल ही में आरएसएस की तारीफ की गई थी, जिसपर पार्टी के कई नेताओं ने आपत्ति जताई थी। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा, 'आरएसएस पूरे देश में 60-70 लाख स्वयं सेवकों के माध्यम से देश की सेवा कर रहा है। हालांकि, वो राजनीति में सक्रिय नहीं होते, लेकिन पीछे से राजनीतिक दलों की मदद करते हैं। हम तो यही कहेंगे कि आरएसएस का जो संगठन है, जो अनुशासन है, मातृभूमि के प्रति जो समर्पण है, उससे कांग्रेस को सीखना चाहिए। दिग्विजय सिंह वही बात कर रहे हैं, जो सब बात करते हैं।' इस दौरान उन्होंने संघ की जमकर तारीफ की। दुबे ने कहा, 'देखिए आरएसएस देश की परंपरा चलाने वाली, धरोहर चलाने वाली सांस्कृतिक संगठन है। तो उसके जैसा कौन बन पाएगा। जो नरेंद्र मोदी जी को उठाकर प्रधानमंत्री बना सकती है संगठन। जो सारे बड़े बड़े हिन्दुत्व के आंदोलन में आगे रहती है। हमारी शिवसेना के भी साथ आंदोलन में भी आरएसएस साथ रहती है।' उन्होंने कहा, 'ऐसी आरएसएस से कांग्रेस नहीं सीखेगी, तो क्या कांग्रेस से कांग्रेस सीखेगी। जहां खुद ही नहीं पता कि कांग्रेस में क्या अनुशासन है, क्या रणनीति है, क्या उनकी बैठकें हैं, कौन कहां गठबंधन करेगा, कौन क्या बनाएगा। कुछ पता ही नहीं है। सब राम भरोसा चल रहे हो आप।' दिग्विजय ने क्या कहा दिग्विजय सिंह ने शनिवार को आरएसएस-भाजपा की संगठनात्मक शक्ति की सराहना करते एक पुरानी तस्वीर साझा की थी। फोटो में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगे की तरफ नीचे बैठे हुए हैं तथा उनके पीछे भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं। सिंह ने पोस्ट किया, 'कोरा वेबसाइट पर मुझे यह चित्र मिला। बहुत ही प्रभावशाली है। किस प्रकार आरएसएस का जमीनी स्वयंसेवक व जनसंघ भाजपा का कार्यकर्ता नेताओं के चरणों में फर्श पर बैठकर प्रदेश का मुख्यमंत्री व देश का प्रधानमंत्री बना। यह संगठन की शक्ति है। जय सियाराम।' विवाद खड़ा होने पर सिंह ने कहा कि उन्होंने केवल संगठन और इसकी शक्ति की तारीफ की है, अन्यथा वह आरएसएस और मोदी के घोर विरोधी हैं।