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कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट से मचा घमासान, ग्वालियर-चंबल में क्यों पसरी है खामोशी?

ग्वालियर  पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह संघ और भाजपा की प्रशंसा करने से अपने ही दल के राजनीतिक भंवर में फंसे नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर पूर्व मुख्यमंत्री की पोस्ट से कांग्रेस में घमासान मचा हुआ है। इस घमासान में उनके राजनीतिक गढ़ ग्वालियर-चंबल अंचल में खामोशी है। अंचल में दिग्विजय सिंह के कट्टर समर्थक माने जाने वाले नेता भी पक्ष और विपक्ष में बोलने से फिलहाल बच रहे हैं। केवल उनके पुत्र जयवर्धन और डॉ. गोविंद सिंह ही पूर्व मुख्यमंत्री के समर्थन में खड़े नजर आए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि अंचल के कांग्रेसी शीर्ष नेतृत्व के रूख का इंतजार कर रहे हैं। पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी की यात्रा से जुड़े कुछ फोटो पोस्ट कर लिखा है कि उनके पिता के लिए संगठन सर्वोपरि है। पूर्व मुख्यमंत्री की निष्टा पर संदेह करना गलत पूर्व मुख्यमंत्री के नजदीकी माने जाने वाले पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने नईदुनिया के संपर्क करने पर कहा कि दिग्विजय सिंह के संगठन के प्रति समर्पण पर संदेह करना अनुचित है। पूर्व मुख्यमंत्री संघ व भाजपा के घोर विरोधी हैं। उनके द्वारा की गई पोस्ट संघ और भाजपा के संबंध में पोस्ट प्रशंसा नही, व्यंग्य है। यह हैं खामोश ग्वालियर-चंबल अंचल में पूर्व मुख्यमंत्री के समर्थकों की लंबी फौज है। इसके साथ ही उनके विरोधियों की संख्या भी कम नही हैं, लेकिन उनकी पोस्ट पर समर्थकों व विरोधियों की अब तक कोई प्रतिक्रिया सामने नही आई है। पूर्व मंत्री केपी सिंह, राज्यसभा सदस्य अशोक सिंह सरीखे नेता खामोश हैं। संघ व भाजपा के संगठन की प्रशंसा की थी पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर एक ब्लैक एंड व्हाइट फोटो वायरल किया। इसमें पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी कुर्सी पर बैठे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फर्श पर बैठे नजर आ रहे हैं। यह फोटो वायरल करने के साथ उन्होंने संघ और भाजपा के संगठनात्मक शक्ति की प्रशंसा की। इस पोस्ट के बाद दिग्विजय सिंह कांग्रेसियों के टारगेट पर हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें भाजपा में शामिल होने का न्योता दे दिया और नगरीय निकाय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उन्हें सरदार पटेल निरुपित किया। पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि दिग्विजय सिंह की राज्यसभा में दोबारा जाने के लिए शीर्ष नेतृत्व पर दबाव की राजनीति है।

मिथुन चक्रवर्ती का विवादित बयान, ममता सरकार पर साधा निशाना: ‘कश्मीरी पंडितों जैसा बंगाल में…’

कूच बिहार भाजपा नेता और प्रसिद्ध अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने पश्चिम बंगाल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने अपनी फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह कश्मीरी पंडितों को कश्मीर घाटी से बाहर निकाला गया था, उसी तरह की स्थिति पश्चिम बंगाल में पैदा करने की कोशिश की जा रही है। मिथुन चक्रवर्ती ने  आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल को ‘पश्चिमी बांग्लादेश’ में बदलने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन ये प्रयास कभी सफल नहीं होंगे। मिथुन ने कूच बिहार जिले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बारे में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की टिप्पणियों की आलोचना की और कहा कि यह कोई अलग देश नहीं है जैसा कि वह सोच रही होंगी। उन्होंने कहा- बांकुड़ा जिले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने भारत के गृह मंत्री को धमकी दी और कहा कि उन्होंने ही उन्हें कोलकाता के उस होटल से बाहर आने दिया जहां वे ठहरे हुए थे। काश वे स्पष्ट रूप से कह देतीं कि गृह मंत्री को बंगाल में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा… वह दिन विनाशकारी होगा। उन्होंने आगे कहा- यह कोई अलग देश नहीं है जैसा कि वह सोच रही होंगी। मिथुन चक्रवर्ती ने 1990 के दशक में कश्मीर घाटी से कश्मीरी पंडितों के पलायन पर आधारित अपनी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि बंगाल में भी इसी तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया- पश्चिम बंगाल को पश्चिम बांग्लादेश में बदलने के प्रयास किए जा रहे हैं। भाजपा नेता ने दावा किया कि गायिका लग्नाजिता चक्रवर्ती को देवी मां की प्रशंसा में एक गीत गाने के लिए परेशान किया गया है। मिथुन चक्रवर्ती ने कहा- वे भले ही यह सोचते हों कि यह बांग्लादेश बन गया है, लेकिन वह दिन कभी नहीं आएगा। जब तक मिथुन चक्रवर्ती जैसे लोगों के शरीर में खून का एक भी कतरा बचा है, यह राज्य कभी बांग्लादेश नहीं बनेगा। हम संविधान में विश्वास रखते हैं, और इसीलिए हमने खुद को नियंत्रण में रखा है। उन्होंने बांग्लादेश में हुई दीपू चंद्र दास की लिंचिंग की घटना का जिक्र करते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा। मिथुन ने कहा- बांग्लादेश में घटना हुई और पश्चिम बंगाल में हिंदुओं पर हमला किया जा रहा है। दीपू दास घटना के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों पर पुलिस ने बर्बरतापूर्वक हमला किया और 18 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। हमें ऐसे घटनाओं के खिलाफ प्रदर्शन करने की भी इजाजत नहीं है। यह बयान बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर बढ़ते हमलों के संदर्भ में आया है, जहां हाल ही में दीपू चंद्र दास नामक एक हिंदू युवक की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई और उसके शव को आग लगा दिया गया। इस घटना के खिलाफ कोलकाता में प्रदर्शन हुए थे, जिनमें पुलिस कार्रवाई भी हुई। भाजपा नेता ने कहा कि राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने का एकमात्र तरीका यह है कि सभी लोग एक साथ आएं। उन्होंने कांग्रेस, वामपंथी और तृणमूल के ‘विवेकशील’ समर्थकों से आगामी चुनावों में सरकार बदलने के लिए एकजुट होने का आग्रह किया। मिथुन चक्रवर्ती ने दावा किया कि राज्य में कोई उद्यम, उद्योग, रोजगार या उचित स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया- भ्रष्टाचार के अलावा इस राज्य में और कुछ नहीं है। भाजपा नेता ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि ममता बनर्जी सरकार ने केंद्र की आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना को लागू नहीं किया, क्योंकि शायद उसे लगता है कि इससे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता बढ़ेगी। उन्होंने कहा, ‘‘बंगाल में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद हम सबसे पहले आयुष्मान भारत योजना शुरू करेंगे।

BJP के नेतृत्व वाली महायुति ने महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनाव में 68 सीटों पर किया कब्जा, बिना एक भी वोट डाले

मुंबई  महाराष्ट्र में 15 जनवरी को होने वाले महाराष्ट्र नगर निकाय और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनाव से पहले बीजेपी-नेतृत्व वाली महायुति ने बड़ी बढ़त बना ली है. नामांकन वापसी की अंतिम तारीख के बाद विभिन्न नगर निकायों में महायुति के 68 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए. इन 68 सीटों में से बीजेपी को 44 सीटें, एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को 22 सीटें और अजित पवार की एनसीपी को 2 सीटें मिली हैं. सबसे ज्यादा निर्विरोध जीत ठाणे जिले की कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में दर्ज हुई. इसके अलावा पुणे, पिंपरी-चिंचवाड, पनवेल, भिवंडी, धुले, जलगांव और अहिल्यानगर से भी सीटें महायुति के खाते में गईं. पुणे में वार्ड नंबर 35 से बीजेपी उम्मीदवार मंजूषा नागपुरे और श्रीकांत जगताप को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया. केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल ने इसे बीजेपी के कामकाज पर जनता के भरोसे का परिणाम बताया और दावा किया कि पुणे का अगला मेयर बीजेपी का होगा. समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए मोहोल ने कहा, "हमारा लक्ष्य 125 सीटें जीतना है. इनमें से दो सीटें निर्विरोध जीती जा चुकी हैं, अब 123 सीटें शेष हैं." उद्धव गुट का आरोप भाजपा के प्रवक्ता केशव उपाध्याय ने कहा कि इन घटनाक्रमों से राज्य भर के शहरी नगर निकायों में पार्टी की बढ़ती पकड़ का पता चलता है. पार्टी नेताओं ने इस रुझान का श्रेय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की लोकप्रियता और राज्य इकाई के अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण द्वारा निर्देशित चुनावी रणनीति को दिया. हालांकि, उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना ने इस पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी उम्मीदवारों को ईडी-सीबीआई की धमकी या सौदेबाज़ी के जरिए नाम वापस लेने पर मजबूर किया गया. सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने चुनाव आयोग की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए. प्रियंका चतुर्वेदी ने मुंबई में पत्रकारों से कहा, "लोकतंत्र को खत्म करने का यह एक ऐसा तरीका है जिसमें विपक्षी उम्मीदवार ईडी और सीबीआई की धमकियों से डराकर या रिश्वत देकर उनसे समझौता कर लेते हैं. वे अपनी जीत खरीदने की कोशिश कर रहे हैं और यह शर्म की बात है कि चुनाव आयोग इस पर चुप्पी साधे हुए है." महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों, जिनमें मुंबई की बीएमसी भी शामिल है, के चुनाव 15 जनवरी को होंगे और मतगणना अगले दिन होगी.  

बीएमसी चुनाव में किरीट सोमैया के बेटे को मिला वॉकओवर, विपक्ष ने क्यों नहीं उतारे उम्मीदवार?

मुंबई  महाराष्ट्र की सियासत में बीजेपी के दिग्गज नेता किरीट सोमैया एक ऐसा नाम है, जिसे 'भ्रष्टाचार विरोधी योद्धा' के तौर पर जाना जाता है. मुंबई विश्वविद्यालय से बिजनेस पॉलिसी और एडमिनिस्ट्रेशन में पीएचडी कर किरीट सोमैया ने अपने राजनीति विरोधी नेताओं के द्वारा वित्तीय हेराफेरी की जांच करने पर केंद्रित अपनी सियासी शैली को चुना. सोमैया के सियासी खोजबीन से अजीत पवार, हसन मुश्रीफ, सुनील तटकरे, छगन भुजबल, नारायण राणे और कृपाशंकर सिंह जैसे नेता नहीं बच सके. किरीट सोमैया मुंबई उत्तर पूर्व लोकसभा सीट से दो बार बीजेपी के सांसद रह चुके हैं, लेकिन पिछले काफी समय से पार्टी में साइड लाइन चल रहे थे. बीजेपी ने बीएमसी चुनाव में उनके बेटे नील सोमैया को मुंबई के वार्ड नंबर 107 से दूसरी बार उम्मीदवार बनाकर उतारा है. इस बार उनके बेटी की राह पूरी तरह से आसान हो गई है, क्योंकि विपक्ष की तरफ से कोई कैंडिडेट ही नहीं है. बीजेपी से कैंडिडेट होने के चलते नील सोमैया को एकनाथ शिंदे की शिवसेना का समर्थन हासिल है. नील सोमैया को विपक्षी दलों एक तरफ से वॉकओवर दे दिया है. किसी भी विपक्षी दल से कोई भी कैंडिडेट किरीट सोमैया के बेटे खिलाफ चुनाव में नहीं है. यह संयोग है या फिर कोई प्रयोग? नील सोमैया को विपक्ष का वॉकओवर मुंबई के मुलुंड इलाके की वार्ड नंबर 107 से बीजेपी प्रत्याशी नील सोमैया के खिलाफ राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के गठबंधन ने कोई उम्मीदवार नहीं दिया. ठाकरे ब्रदर्स ही नहीं एनसीपी और कांग्रेस पार्टी से भी किरीट सोमैया के बेटे खिलाफ कोई कैंडिडेट मैदान में नहीं है. एक तरह से विपक्ष ने पूरी तरह से किरीट सोमैया के बेटे को एक तरह से वॉकओवर दे दिया है. इसके चलते नील सोमैया के जीत की राह आसान हो गई है. किरीट सोमैया ने कहा- गॉड इज ग्रेट मुंबई के वार्ड 107 में नील सोमैया की सियासी राह को आसान होती देख किरीट सोमैया ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर कहा- गॉड इज ग्रेट. आगे कहा कि नील सोमैया वार्ड नंबर 107 से चुनाव लड़ रहे हैं. इस वार्ड में ठाकरे ग्रुप, MNS, कांग्रेस और शरद पवार की पार्टी कोई भी कैंडिडेट मैदान में नहीं बचा है. किरीट सोमैया ने कहा कि मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा, सिर्फ इतना ही नहीं कहूंगा कि ठाकरे ब्रदर्स और कांग्रेस के साथ एनसीपी प्रत्याशी उतारने में असफल रहे. भगवान की लीला अनोखी है. इस तरह से उन्होंने अपने बेटी के खिलाफ विपक्ष की तरफ से कैंडिडिट ना होने के लिए भगवान को श्रेय दिया है. समझें, विपक्ष ने क्यों दिया वॉकओवर किरीट सोमैया के बेटे नील सोमैया पहली बार 2017 में मुलुंड के वार्ड नंबर 107 से पार्षद चुने गए थे. अब दूसरी बार फिर से उसी वार्ड से बीजेपी के टिकट पर नील सोमैया चुनावी मैदान में है. विपक्ष की तरफ से कोई भी कैंडिडेट मैदान में नहीं है. मुंबई के मुलुंड विधानसभा क्षेत्र के तहत छह बीएमसी सीटें आती हैं, इन सभी के बाकी पांच वार्ड में इन सभी पार्टियों के कैंडिडेट मैदान में हैं, सिर्फ 107 वार्ड छोड़कर. राज ठाकरे-उद्धव ठाकरे ने कोई प्रत्याशी ही 107 वार्ड से नहीं उतारा, क्योंकि यह सीट उन्होंने शरद पवार की पार्टी के लिए छोड़ दी थी. मुंबई में ठाकरे ब्रदर्स के साथ शरद पवार की पार्टी का गठबंधन है. ऐसे में शरद पवार की एनसीपी (एसपी) ने हंसराज दानानी को वार्ड नंबर 107 से प्रत्याशी बनाया था, दानानी ने अपना नामांकन भी दाखिल किया था, लेकिन उनका पर्चा खारिज हो गया. एनसीपी प्रत्याशी का पर्चा इसीलिए निरस्त हो गया, क्योंकि नामांकन पत्र के साथ हलफनामा नहीं लगाया था. ऐसे में किरीट सोमैया के बेटे की जीत अब तय मानी जा रही है. नील सोमैया को फिर करना होगा मुकाबला शिवसेना (यूबीटी), राज ठाकरे की मनसे और शरद पवार की एनसीपी के उम्मीदवार ना होने के बाद भी नील सोमैया को चुनाव में दो-दो हाथ करना होगा. कांग्रेस ने इस इस सीट पर अपना उम्मीदवार इसीलिए नहीं दे सकी, क्योंकि यह सीट वंचित बहुजन अघाड़ी के लिए छोड़ी है. मुंबई में कांग्रेस और वीबीए का गठबंधन है. ऐसे में वंचिक बहुजन अघाड़ी सहित 9 निर्दलीय उम्मीदवार अभी भी वार्ड 107 से चुनावी मैदान में हैं. ऐसे में नील सोमैया की भले ही राह आसान दिख रही हो, लेकिन जीत के लिए उन्हें संघर्ष करना होगा. वार्ड नंबर 107 में नील सोमैया के खिलाफ वंचित बहुजन अघाड़ी के उम्मीदवार को कांग्रेस का समर्थन है. शरद पवार की पार्टी का पर्चा खारिज होने के बाद ठाकरे ब्रदर्स यहां पर किसी निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन कर सकते हैं. हालांकि, यह इलाका बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है, यहां पर गुजराती और मारवाड़ी समाज के अच्छी खासी संख्या है. ऐसे में देखना है कि विपक्ष नील सोमैया की राह में कैसे बाधा बनते हैं?

महिलाओं की गरिमा पर AI का हमला? प्रियंका चतुर्वेदी ने की सख्त कार्रवाई की मांग

नई दिल्ली कांग्रेस सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने महिलाओं को टारगेट करने वाले डीपफेक वीडियो और फोटो के खिलाफ केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने हाल ही में सामने आए मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि ये फर्जी कंटेंट महिलाओं को बदनाम करने के लिए बनाए जा रहे हैं। चतुर्वेदी ने बताया कि AI टूल्स से महिलाओं की फोटो को कम कपड़े में या अश्लील तरीके दिखाया जा रहा है, जिससे उनकी गोपनीयता और सम्मान को गहरा आघात पहुंच रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सिर्फ व्यक्तिगत हमला नहीं, बल्कि समाज में महिलाओं के खिलाफ सुनियोजित साजिश है। सांसद ने मांग की है कि सरकार तत्काल हस्तक्षेप कर ऐसे फर्जी कंटेंट को प्लेटफॉर्म्स से हटवाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे।   पत्र में प्रियंका चतुर्वेदी ने साफ किया कि डीपफेक तकनीक का दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है, खासकर राजनीतिक और सामाजिक दुश्मनी के चलते। उन्होंने लिखा कि महिलाओं को निशाना बनाकर बनाए जा रहे वीडियो न केवल उनकी छवि खराब करते हैं, बल्कि मानसिक उत्पीड़न का कारण भी बनते हैं। चतुर्वेदी ने उदाहरण देते हुए कहा कि हाल के मामलों में AI का इस्तेमाल कर महिलाओं की तस्वीरों से छेड़छाड़ की गई, जो असामान्य रूप से घिनौना है। उन्होंने आईटी मंत्रालय से अपील की कि महिलाओं के खिलाफ एआई आधारित हमलों को रोकने के लिए विशेष कानून बने। साथ ही, सोशल मीडिया कंपनियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वे ऐसी कंटेंट को तुरंत ब्लॉक करें। उनका कहना है कि यह मुद्दा वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय है, लेकिन भारत में त्वरित कार्रवाई जरूरी है। प्रभावित महिलाओं को न्याय दिलाने की मांग कांग्रेस नेता ने पत्र के अंत में केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि वे इस पर तुरंत संज्ञान लें और प्रभावित महिलाओं को न्याय दिलाएं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह महिलाओं के डिजिटल अधिकारों पर सीधा हमला होगा। प्रियंका चतुर्वेदी की यह पहल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और कई महिला संगठनों ने उनका समर्थन किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि डीपफेक के खिलाफ सख्त नीति बनाना अब जरूरी हो गया है, ताकि तकनीक का दुरुपयोग रोका जा सके।

कांग्रेस का सर्वे: राहुल के दावे पर सवाल, EVM पर जनता का विश्वास मजबूत

बेंगलुरु  कर्नाटक की कांग्रेस सरकार द्वारा कराए गए एक आधिकारिक सर्वे के नतीजों ने देश में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की विश्वसनीयता पर चल रही बहस को एक नया मोड़ दे दिया है। सर्वे के अनुसार, कर्नाटक की जनता का एक बड़ा हिस्सा EVM को सुरक्षित और सटीक मानता है। इन नतीजों के सामने आने के बाद भाजपा ने राहुल गांधी के 'वोट चोरी' वाले आरोपों को लेकर कांग्रेस पर हमला तेज कर दिया है। इस सर्वे को कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) वी. अनबुकुमार के माध्यम से कराया गया था। इसमें 102 विधानसभा क्षेत्रों के 5,100 लोगों की राय ली गई। सर्वे में शामिल कुल 83.61% लोगों ने कहा कि वे EVM को भरोसेमंद मानते हैं। 69.39% लोग इस बात से सहमत थे कि EVM सटीक परिणाम देती है, जबकि 14.22% ने इस पर अपनी 'पूर्ण सहमति' जताई। ईवीएम को लेक कलबुर्गी में सबसे ज्यादा भरोसा देखा गया, जहां 94.48 लोग वोटिंग मशीन के पक्ष में थे। मैसूर में 88.59% लोगों ने इसकी विश्वसनीयता पर मुहर लगाई। बेंगलुरु में भी 63.67% लोग इससे सहमत थे। भाजपा का पलटवार सर्वे के नतीजे सार्वजनिक होते ही भाजपा ने इसे कांग्रेस के लिए शर्मिंदगी का विषय बताया। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "सालों से राहुल गांधी देश भर में एक ही कहानी सुना रहे हैं कि भारत का लोकतंत्र खतरे में है और EVM अविश्वसनीय हैं। लेकिन खुद कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार के सर्वे ने एक अलग कहानी बयां की है। यह कांग्रेस के मुंह पर तमाचा है।" भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल हारने पर संस्थाओं पर सवाल उठाती है और जीतने पर उसी सिस्टम का जश्न मनाती है। उन्होंने इसे सुविधा की राजनीति करार दिया। यह सर्वे ऐसे समय में आया है जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को बैलेट पेपर से कराने का प्रस्ताव दिया है। सरकार का तर्क है कि जनता का EVM से भरोसा कम हो रहा है। भाजपा ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि जब उनका अपना सर्वे जनता का भारी भरोसा दिखा रहा है, तो सरकार राज्य को पीछे की ओर क्यों ले जा रही है? भाजपा के अनुसार, बैलेट पेपर की वापसी चुनाव में हेरफेर और देरी की कोशिश है। क्या है राहुल गांधी का रुख? कांग्रेस नेता राहुल गांधी बीते काफी समय से EVM की पारदर्शिता पर सवाल उठाते रहे हैं। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान भी उन्होंने 'ब्लैक बॉक्स' और 'वोट चोरी' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की आलोचना की थी। हालांकि, उनकी अपनी ही राज्य सरकार के इस सर्वे ने अब कांग्रेस को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है।

अभिषेक बनर्जी की खास यात्रा शुरू, एक महीने में फाइनल होगी टिकटों की तस्वीर

कोलकाता पश्चिम बंगाल में अगले कुछ महीनों के अंदर विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। माना जा रहा है कि अप्रैल माह में कई चरणों में मतदान कराए जा सकते हैं। मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं तो वहीं लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी के लिए टीएमसी ने भी कमर कस ली है। ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने इसके लिए बड़ी तैयारी की है और वह एक महीने की यात्रा पर पूरा बंगाल ही मथने के प्लान में हैं। इसकी शुरुआत आज से ही हो रही है। इस यात्रा में वह पूरे बंगाल के हर जिले तक जाएंगे। इस यात्रा के दौरान कहीं रोडशो होंगे तो कहीं जनसभाओं के आयोजन की तैयारी है।   टीएमसी के सूत्रों का कहना है कि इस यात्रा में अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी बताएगी कि बीते तीन कार्यकालों में उसने क्या किया और अब आगे क्या करने की तैयारी है। खासतौर पर बांग्ला कार्ड पर टीएमसी फोकस करना चाहती है कि कैसे हमने बांग्ला संस्कृति, भाषा और पहचान की रक्षा की। पार्टी के आंतरिक सूत्रों का कहना है कि टीएमसी की ओर से चुनाव को बांग्ला अस्मिता से जोड़ने की तैयारी है। खासतौर पर ईडी, चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं तक को टारगेट किया जा सकता है। यात्रा का स्लोगन रखा गया है- जोतोई करो हमला, आबार जितबे बांग्ला। इसका अर्थ हुआ- कितना भी कर लो हमला, एक बार फिर से जीतेगा बंगाल। बांग्ला अस्मिता से चुनाव को जोड़ने की तैयारी में है टीएमसी सूत्रों का कहना है कि यह यात्रा इसलिए अहम है क्योंकि इसी दौरान अभिषेक बनर्जी टीएमसी के विधायकों का फीडबैक भी जनता से लेंगे। ऐसे में यह यात्रा इस चीज को भी तय करेगी कि किसे चुनाव में टिकट मिलेगा और किसे नहीं। इसके अलावा उन सीटों पर भी वह कार्यकर्ताओं और जनता से फीडबैक लेंगे, जहां भाजपा के विधायक हैं। टीएमसी का प्लान यह है कि यदि किसी विधायक के खिलाफ ऐंटी-इनकम्बैंसी लोकल लेवल है तो उसे रिप्लेस कर दिया जाए। पार्टी नहीं चाहती कि किसी एक नेता या विधायक से नाराजगी का असर चुनाव जीत की संभावनाओं पर पड़े। 2024 के बाद तेजी से बढ़ा है अभिषेक बनर्जी का कद इस यात्रा को अभिषेक बनर्जी के कद से भी जोड़कर देखा जा रहा है। वह पार्टी में नंबर दो कहे जाते हैं, लेकिन कई बार उनकी राय ममता बनर्जी भी खारिज नहीं करती हैं। अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा चुनाव से पहले भी एक यात्रा निकाली थी। 2023 में उनकी यात्रा निकली थी, जिसका फायदा पार्टी को पंचायत चुनाव में हुआ और फिर माना जाता है कि लोकसभा इलेक्शन में भी स्थिति सुधरी। अभिषेक बनर्जी का कद तबसे बढ़ गया है। कहा जाता है कि लोकसभा चुनाव के कई कैंडिडेट उन्होंने ही तय किए थे और उनकी जीत से उनका कद बढ़ गया है। अभिषेक बनर्जी ने ही युसूफ पठान और जगदीश चंद्र बर्मा जैसे नेताओं को चुना था।  

2026 के चुनावों में पांच राज्यों की होगी परीक्षा, NDA के मुकाबले इंडिया ब्लॉक का जोरदार सामना

नई दिल्ली साल 2025 अलविदा हो चुका है और नए साल की दस्तक के साथ हम 2026 में दाखिल हो गए हैं. भारत के सियासी परिदृश्य के लिहाज से 2026 को चुनावी साल के तौर पर देखा जा रहा है. साल का आगाज महाराष्ट्र के बीएमसी सहित 29 महानगरों में निगम चुनाव हैं तो दक्षिण भारत से लेकर पूर्वोत्तर तक विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसमें असल इम्तिहान एनडीए का नहीं, बल्कि विपक्षी गठबंधन का होने वाला है. देश के लिए 2026 पूरी तरह चुनावी साल रहने वाला है. पूर्वी भारत के पश्चिम बंगाल, असम के साथ दक्षिण भारत के पुदुचेरी, तमिलनाडु और केरल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इसके अलावा 75 राज्यसभा सीटों पर अप्रैल से लेकर नवंबर 2026 तक होने हैं तो उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव है, जिसे 2027 का सेमीफाइनल माना जा रहा है. माना जा रहा है कि 2026 के चुनावी नतीजे और राजनीतिक गतिविधियों से सिर्फ सूबे की सियासी बिसात ही नहीं बिछेगी बल्कि देश दशा और दिशा भी तय हो जाएगी. ऐसे में राजनेताओं की बयानबाजी और हर रोज हो रही योजनाओं के ऐलान के चलते इनराज्यों में चुनावी माहौल पर सियासी रंग चढ़ चुका है. 2026 में बिछेगी पांच राज्यों चुनावी बिसात साल 2026 में चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने है. असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा के चुनाव होने हैं. असम विधानसभा में 126 सीटें, केरल में 140, तमिलनाडु में 234, पश्चिम बंगाल में 294 और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की विधानसभा की 30 सीटें है. देश के अलग-अलग राज्यों की 75 राज्यसभा सीटें अप्रैल से लेकर जून और नवंबर 2025 खाली हो रही है, जिसमें यूपी की 10, बिहार की 5, महाराष्ट्र की 7, राजस्थान और मध्य प्रदेश की 3-3 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने है. इसके अलावा तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में भी राज्यसभा चुनाव होने है. महाराष्ट्र में मुंबई के बीएमसी सहित 29 महानगर पालिका परिषद में चुनाव हो रहे हैं. उपचुनाव-निकाय चुनाव का होगा इम्तिहान साल 2024 में देश के कुछ राज्यों में विधानसभा के उपचुनाव भी है. मौजूदा विधायक के निधन से सीटें खाली हुई हैं. गोवा की पोंडा क्षेत्र, कर्नाटक का बागलकोट क्षेत्र और यूपी की घोसी सीट, महाराष्ट्र की राहुरी, मणिपुर की ताडुबी सीट और नागालैंड की कोरिडांग सीट पर चुनाव होने हैं. इसके अलावा कई राज्यों में स्थानीय निकाय चुनाव भी होने हैं, जिसमें महाराष्ट्र के लेकर यूपी तक शामिल है. महाराष्ट्र में बीएमसी सहित 29 महानगर निगम के चुनाव हो रहे हैं, लेकिन जिला परिषद और पंचायत समितियों के चुनाव 2026 में होना है. चुनाव आयोग ने 31 जनवरी 2026 तक निकाय चुनाव करने का लक्ष्य रखा है. हिंदी पट्टी के सबसे अहम सूबे यूपी में पंचायत चुनाव 2026 में होने है, जिसे 2027 का सेमीफाइनल माना जा रहा है. ग्राम पंचायत के प्रधान से लेकर क्षेत्र और जिला पंचायत सदस्यों व अध्यक्षों के चुनाव होंगे. बंगाल में ममता बनर्जी की होगी अग्निपरीक्षा पश्चिम बंगाल विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 7 मई, 2026 को खत्म हो रहा है, जिसके चलते यहां पर निर्वाचन आयोग अप्रैल-मई 2026 में चुनाव करा सकता है. बंगाल में कुल 294 विधासनभा सीटें है. 2021 के चुनाव में टीएमसी ने 213 सीटें जीती थी तो बीजेपी को सिर्फ 77 सीटें मिली थी. ममता बनर्जी 2011 से पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज हैं और टीएमसी लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीत चुकी हैं. ऐसे में ममता बनर्जी की कोशिश लगातार चौथी जीत के लिए तो बीजेपी हरहाल में जीत के लिए बेताब है. ऐसे में ममता बनर्जी के लिए अपनी सत्ता को बचाए रखने की परीक्षा है तो लेफ्ट और कांग्रेस को अपने सियासी वजूद को बचाए रखने का चुनाव है. बीजेपी के लिए सबसे ज्यादा चुनौती इसीलिए हो गई है कि कांग्रेस और वाम दलों के एकदम पस्त होने से भी बढ़ी है जिनका वोट उसकी तरफ़ आने के ज़्यादा टीएमसी की तरफ़ गया है. पिछले दो चुनावों में भाजपा का वोट प्रतिशत सिर्फ डेढ़ फीसदी बढ़ा तो तृणमूल ने तीन फीसदी ज्यादा वोट हासिल किया है. तमिलनाडु में एमके स्टालिन का इम्तिहान तमिलनाडु विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 10 मई 2026 को खत्म हो रहा है. इसके चलते केरल में अप्रैल-मई 2026 में चुनाव हो सकते हैं. तमिलनाडु में भी डीएमके के नेता स्टालिन की परीक्षा होनी है तो AIADMK भी अपनी वापसी के लिए बेताब, लेकिन बीजेपी के साथ गठबंधन टूटने के बाद मुकाबला रोचक हो गया है. 2021 के चुनाव में एमके स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके ने राज्य की कुल 234 में से 133 सीटों पर जीत दर्ज कर सरकार बनाई थी, DMK के साथ गठबंधन में कांग्रेस ने 18 सीटे जीती थीं . सूबे की सत्ता पर 10 सालों तक काबिज रही AIADMK महज 66 सीटें जीत पाई थी. AIADMK के साथ गठबंधन करने के बाद बीजेपी चार सीटें पाई थी. इस बार के सियासी हालत बदल गए हैं. इस बार तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सिर्फ एनडीए और इंडिया ब्लॉक में ही नहीं बल्कि तीसरा फ्रंट भी मैदान में है. तमिल एक्टर थलपति विजय ने अपनी पार्टी तमिलागा वेट्ट्री कज़गम बनाकर डीएमके बनाम AIADMK की लड़ाई को त्रिकोणीय बना दिया है. ऐसे में देखना है कि स्टालिन कैसे सत्ता रिपीट करते हैं. केरल में UDF बनाम LDF की चुनावी लड़ाई केरल विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 23 मई 2026 को समाप्त हो रहा है. ऐसे में केरल में अप्रैल-मई 2026 में चुनाव होने की संभावना है. केरल में लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल करने वाले वाम मोर्चा के सामने भी यूडीएफ चुनौती है. केरल में पिनराई विजयन अगर तीसरी बार सफल होते हैं तो रेकॉर्ड बन जाएगा, लेकिन हार जाते हैं तो लेफ्ट का देश से सफाया हो जाएगा. ऐसे में लेफ्ट के लिए अपना आखिरी किला बचाए रखने की चुनौती है. केरल का चुनाव लेफ्ट के अगुवाई एलडीएफ और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन के बीच है. साल 2021 के चुनाव मेंएलडीएफ ने 99 सीटों के साथ सत्ता बरकरार रखी थी. इस बार कांग्रेस की कोशिश सत्ता में वापसी की है. प्रियंका गांधी केरल से सांसद हैं तो राहुल गांधी के राइट हैंड माने जाने वाले केसी वेणुगोपाल भी केरल से … Read more

उद्धव सेना को बड़ा झटका: आदित्य ठाकरे की करीबी शीतल शेठ ने पार्टी छोड़ी, BMC चुनाव पर असर

मुंबई बृहनमुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों से ठीक पहले उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) यानी शिवसेना (UBT) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी की उपनेत्री और आदित्य ठाकरे की करीबी सहयोगी शीतल देवरुखकर-शेठ ने गुरुवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। सूत्रों के अनुसार, वे जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो सकती हैं। शीतल देवरुखकर-शेठ पार्टी की विभिन्न पहलों में आदित्य ठाकरे के साथ मिलकर काम करती रही हैं। वे युवा सेना की सक्रिय सदस्य भी रही हैं और मुंबई विश्वविद्यालय के सीनेट चुनावों में भी जीत हासिल की थी। उनका इस्तीफा BMC चुनावों से ऐन पहले आया है, जो पार्टी के लिए गंभीर झटका माना जा रहा है। BMC चुनाव जनवरी 2026 में होने वाले हैं, और इस चुनाव में शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) का गठबंधन महायुति (भाजपा-शिंदे सेना-अजित पवार एनसीपी) को कड़ी टक्कर देने की तैयारी कर रहा है। इस इस्तीफे से शिवसेना (UBT) में आंतरिक असंतोष की खबरें फिर से सामने आ रही हैं। हाल के दिनों में पार्टी के कई नेता और पदाधिकारी टिकट वितरण को लेकर नाराजगी जता चुके हैं, खासकर वर्ली क्षेत्र में, जो आदित्य ठाकरे का विधानसभा क्षेत्र है। कुछ पदाधिकारियों ने इस्तीफे की धमकी भी दी थी। BMC चुनाव मुंबई की सियासत में बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि यहां पिछले 25 साल से शिवसेना का दबदबा रहा है। हालांकि, 2022 में पार्टी के विभाजन के बाद शिंदे गुट और भाजपा की जोड़ी मजबूत हुई है। इस इस्तीफे से शिवसेना (UBT) की चुनौतियां और बढ़ गई हैं।

2026 के पहले दिन कांग्रेस का महत्वपूर्ण कदम, पूरे प्रदेश में पंचायत कांग्रेस कमेटी गठन की शुरुआत

 भोपाल  नए साल के पहले दिन कांग्रेस का बड़ा कदम सामने आया है। आज से ही पूरे प्रदेश में पंचायत कांग्रेस कमेटी के गठन की शुरुआत हो रही है। जिला, ब्लॉक, के बाद अब वार्ड और पंचायत तक कांग्रेस का विस्तार होगा। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी पंचायत कमेटी गठन कार्यक्रम की शुरूआत करेंगे। 3 महीने में हर गांव में कमेटी बनाने का लक्ष्य आज दोपहर 01:00 बजे भोपाल के कोड़िया देवका गांव से ग्राम पंचायत कमेटी गठन की शुरुआत होगी। दोपहर 02:00 बजे ग्राम टीला खेड़ी हुजूर, भोपाल में किसानों के साथ चर्चा करेंगे। साल के शुरुआती 3 महीने में हर गांव में कांग्रेस कमेटी बनाने का टारगेट तय है। हम बीजेपी की नफरत से लड़ेंगे मामले पर पीसीसी चीफ जीतू पटवारी का बयान सामने आया है। कहा- हमने बहुत महत्वपूर्ण प्रोग्राम बनाया है। गांव स्तर तक, वार्ड स्तर तक कांग्रेस का संगठन गठित हो। उद्देश्य- हम बीजेपी की नफरत से लड़ेंगे। नए वर्ष में हम शुरू कर रहे हैं। 5 जनवरी से पूरे प्रदेश में यह एक साथ चालू होगा। कार्यकर्ताओं को पदाधिकारी को निर्देश दिया है। सबको एक साथ 5 तारीख से ग्राम पंचायत स्तर पर गठन शुरू करें। हम 20 फरवरी से पहले इसे पूरा करेंगे।